Sunday, July 21, 2024
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‘पिछले 5 वर्षों में यूपी पुलिस में एक भी भर्ती नहीं’: हैशटैग चला कर राम मंदिर पर भी साधा गया निशाना, आँकड़ों के साथ UP पुलिस ने बता दी सच्चाई

इतना ही नहीं, यूपी पुलिस में भर्तियों की बात करते हुए इनमें से कई हैंडल्स ने अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर पर भी निशाना साधा। ज्ञात हो कि ये मंदिर जनता के चंदे से बन रहा है, इसमें सरकारी रुपया नहीं लग रहा।

सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस में भारतियों को लेकर झूठी खबरें शेयर की जा रही हैं। अब खुद उत्तर प्रदेश पुलिस ने सफाई देते हुए आँकड़ों के साथ इसका खंडन किया है। दरअसल, इन ख़बरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा जा रहा है कि पिछले 5 साल से यूपी पुलिस में कोई भर्ती ही नहीं हुई है, कोई वैकेंसी ही नहीं निकली है। सोशल मीडिया पर ये दावे किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन दावों के साथ चलाए जा रहे हैशटैग ‘यूपी पुलिस वैकेंसी’ को लेकर कहा कि सुनियोजित तरीके से ऐसा किया जा रहा है। इन हैंडलों में से कोई पूछ रहा है कि यूपी पुलिस मर भर्ती कब होगी, तो कोई मीम्स शेयर कर के निशाना साध रहा है। साथ ही लिखा जा रहा है कि 2018 में भर्तियाँ हुई थीं, अब 2023 आने जा रहा है। एक ने लिखा, “भाषण नहीं, रोजगार चाहिए”। एक अन्य ने दावा किया कि यूपी पुलिस में नौकरी के इंतजार में युवा ओवरएज हो रहे हैं। देखें कुछ ट्वीट्स:

इतना ही नहीं, यूपी पुलिस में भर्तियों की बात करते हुए इनमें से कई हैंडल्स ने अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर पर भी निशाना साधा। ज्ञात हो कि ये मंदिर जनता के चंदे से बन रहा है, इसमें सरकारी रुपया नहीं लग रहा। यूपी पुलिस ने इन दावों को भ्रामक बताते हुए आँकड़े गिनाए हैं। यूपी पुलिस ने बताया कि पिछले 5 वर्षों में कुल 1,53,728 भर्तियाँ की गई हैं, जिनमें 22,000 से भी अधिक महिलाएँ पुलिसकर्मी बनी हैं।

इसी तरह, यूपी पुलिस ने बताया कि विभिन्न संवर्गों के 18,332 नए पदों का भी सृजन किया गया है। उत्तर प्रदेश की पुलिस ने ये भी जानकारी दी कि फ़िलहाल विभाग में 45,689 रिक्तियाँ हैं, जिन पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। याद दिला दें कि फरवरी 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बताया था कि बीते 5 वर्षों में कानून का राज स्थापित करने के लिए यूपी पुलिस में लगभग 1.5 लाख भर्तियाँ हुई हैं, जबकि इससे पहले के 15 सालों में सवा लाख से भी कम भर्तियाँ हुई थीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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