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गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी: उत्तराखंड की तर्ज पर हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमिटी का हो सकता है ऐलान

गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले वहाँ की सत्ताधारी भाजपा सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू कर सकती है। इसको लेकर राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाई है, जिसमें कमिटी के गठन को लेकर मंथन होगा।

इस कमिटी की अध्यक्षता हाईकोर्ट के रिटायर जज करेंगे। इसमें कितने सदस्य होंगे, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। आज शनिवार दोपहर 3 बजे राज्य के गृहमंत्री हर्ष सांघवी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसके बारे में विस्तार से जानकारी दे सकते हैं।

माना जा रहा है कि मंगलवार या बुधवार (1 या 2 नवंबर 2022) को चुनाव आयोग गुजरात विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। ऐसे में अगर गुजरात UCC लागू करने की घोषणा करता है तो वह इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य हो जाएगा। बता दें कि उत्तराखंड में भी UCC लागू करने के लिए इस साल मार्च में कमिटी का गठन किया गया था।

बता दें कि भाजपा के घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और देश में समान नागरिक संहिता को लागू करना प्रमुख मुद्दा है। इनमें से दो वादे को भाजपा पूरा कर चुकी है और तीसरा एवं फिलहाल का अंतिम प्रमुख मुद्दा UCC को लागू करना भाजपा के लिए अभी बाकी है।

क्या है समान नागरिक संहिता

समान नागरिक संहिता एक ऐसा कानून है, जो देश के हर समुदाय पर समान रूप से लागू होता है। व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, जाति का हो या पंथ का हो, सबके लिए एक ही कानून होगा। अंग्रेजों ने आपराधिक और राजस्व से जुड़े कानूनों को भारतीय दंड संहिता (IPC) 1860, भारतीय साक्ष्य अधिनियम (IEA) 1872, भारतीय अनुबंध अधिनियम (ICA) 1872, विशिष्ट राहत अधिनियम 1877 आदि के माध्यम से सारे समुदायों पर लागू किया, लेकिन शादी-विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति, गोद लेने आदि से जुड़े मसलों को धार्मिक समूहों के लिए उनकी मान्यताओं के आधार पर छोड़ दिया।

आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने हिंदुओं के पर्सनल लॉ को खत्म कर दिया, लेकिन मुस्लिमों के कानून को ज्यों का त्यों बनाए रखा। हिंदुओं की धार्मिक प्रथाओं के तहत जारी कानूनों को निरस्त कर हिंदू कोड बिल के जरिए हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956, हिंदू नाबालिग एवं अभिभावक अधिनियम 1956, हिंदू दत्तक ग्रहण और रखरखाव अधिनियम 1956 लागू कर दिया गया। ये कानून हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख आदि पर समान रूप से लागू होते हैं।

मुस्लिमों का कानून पर्सनल कानून (शरिया), 1937 के तहत संचालित होता है। इसमें मुस्लिमों के निकाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति का अधिकार, बच्चा गोद लेना आदि आता है, जो इस्लामी शरिया कानून के तहत संचालित होते हैं। अगर समान नागरिक संहिता लागू होता है तो मुस्लिमों के निम्नलिखित कानून बदल जाएँगे।

UCC पर क्या कहता है संविधान

26 जनवरी 1950 को लागू किए गए संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से लेकर 51 तक राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वर्णन किया गया है। ये निदेशक तत्व, मूल अधिकारों की मूल आत्मा कहे जाते हैं। अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता को अनिवार्य बताया गया है। अनुच्छेद 44 में कहा गया है, “भारत पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास करेगा।”

यहाँ बताना आवश्यक है कि संविधान के अनुच्छेद 37 में अनुच्छेद 44 में जैसे नीति निदेशक तत्व कानून की अदालत में अप्रवर्तनीय है, फिर भी देश के शासन में मौलिक है और कानून बनाकर इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य (भारत) का कर्तव्य है।

समान नागरिकता पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर हमेशा बल दिया है। मुस्लिम महिला शाह बानो के तीन तलाक उनका भरण-पोषण के लिए खर्चे के लिए दायर याचिका पर फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, “दुख की बात है कि हमारे संविधान का अनुच्छेद 44 एक मृत पत्र बना हुआ है। एक समान नागरिक संहिता परस्पर विरोधी कानूनों के प्रति असमानता वाली निष्ठा को हटाकर राष्ट्रीय एकीकरण के उद्देश्य को पूरा करने में मदद करेगी।”

द्विविवाह में प्रसिद्ध केस सरला मुद्गल के फैसले में भी सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता नहीं लाने के लिए देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार के रवैये पर निराशा व्यक्त की था। पंडित जवाहरलाल नेहरू ने साल 1954 में संसद में हिंदू कोड बिल लाया था, जिसके तहत हिंदू (बौद्ध, सिख, जैन आदि) के सिविल कानूनों को निर्धारित किया गया था।

जुलाई 2021 मे दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने हिन्दू मैरिज ऐक्ट 1955 से जुड़ी सुनवाई के दौरान देश में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता पर बल देते हुए केंद्र सरकार से इसके विषय में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा था। कोर्ट ने कहा था कि UCC के कारण समाज में झगड़ों और विरोधाभासों में कमी आएगी, जो अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण उत्पन्न होते हैं।

मायरा उर्फ ​​वैष्णवी विलास शिरशिकर और दूसरे धर्म में शादी से जुड़ी 16 अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 19 नवंबर 2021 को सरकार से यूनिफॉर्म सिविल कोड के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 को लागू करने के लिए एक पैनल का गठन करने को कहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था समान नागरिक संहिता काफी समय से लंबित है और इसे स्वैच्छिक नहीं बनाया जा सकता है।

कोर्ट ने कहा था, “इस मामले पर अनावश्यक रियायतें देकर कोई भी समुदाय बिल्ली के गले की घंटी को बजाने की हिम्मत नहीं करेगा। यह देश की जरूरत है और यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वो नागरिकों के लिए यूसीसी को लागू करे और उसके पास इसके लिए विधायी क्षमता है।”

हिन्दू होने के कारण ‘द गार्जियन’ को खटके ऋषि सुनक, गोमांस न खाने और शराब से दूर रहने को बताया ‘सवर्णों वाली सोच’: लिखा – गाँधीवादी नहीं रहा भारत

यूनाइटेड किंगडम (UK) को ऋषि सुनक के रूप में नया प्रधानमंत्री मिला है। वहाँ के मीडिया संस्थान ‘द गार्जियन’ उन्हें सिर्फ इसीलिए निशाना बना रहा है, क्योंकि वो हिन्दू हैं और भारतीय मूल के हैं। यही अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान भारत में अल्पसंख्यकों (मुस्लिमों, जिनकी जनसंख्या ब्रिटेन की कुल जनसंख्या का 3 गुना है) की तथाकथित प्रताड़ना का रोना रोते हैं, अपने ही देश में एक ऐसे अल्पसंख्यक समुदाय के नेता पर निशाना साध रहे हैं जिनकी जनसंख्या 2% से भी कम है।

खास बात यह है कि इस लेख को पंकज मिश्रा नामक उपन्यासकार ने लिखा है। उनका दावा है कि ऋषि सुनक ‘कंजर्वेटिव पार्टी’ की विविधता वाली दृष्टि को ध्वस्त कर रहे हैं। लेखक का ये नहीं मानना है कि यूके को एक अल्पसंख्यक प्रधानमंत्री मिलना ऐतिहासिक क्षण है, बल्कि उनका कहना है कि भारत से लेकर ब्रिटेन तक हुए हो-हंगामे के कारण ऐसा दिखाया जा रहा है। पंकज मिश्रा ने ‘हिन्दू सुप्रेमासिस्ट्स’ (राष्ट्रवादी और भाजपा समर्थकों के लिए वामपंथियों/इस्लामवादियों द्वारा प्रयोग किया जाने वाला शब्द) का जिक्र करते हुए कहा कि उनके लिए ऋषि सुनक ‘देशी ब्रो’ हैं।

‘द गार्जियन’ में प्रकाशित इस लेख में कहा गया है कि ये हिन्दू ऐसा सोचते हैं कि ऋषि सुनक भारत के गुप्त एजेंट हैं, जो दुनिया भर भारत के कब्जे का एक हिस्सा हैं। ऋषि सुनक गोमांस और शराब से दूर रहते हैं, जिसे पंकज मिश्रा ने अपर कास्ट टैबू’ बताया है। ध्यान दीजिए, यहाँ हिन्दू न कह कर सवर्णों को गाली दी गई है। साथ ही ऋषि सुनक भगवान गणेश की मूर्ति अपने साथ रखते हैं, इसे लेकर भी उनकी आलोचना की गई है।

इसमें ऋषि सुनक के पहनावे पर भी निशाना साधा गया है और कहा गया है कि उन्होंने काफी सावधानी से अपनी छवि बनाई है। ‘द गार्जियन’ लिखता है कि ऋषि सुनक सूट-बूट में रहते हैं, इसीलिए वो एक धार्मिक हिन्दू नहीं लगते, जैसा कि महात्मा गाँधी अपने पहनावे से लगते थे। ये भी इशारा किया गया है कि कैसे वो अपने अरबपति ससुर नारायणमूर्ति (इंफोसिस के संस्थापक) की एक निवेश कंपनी में निदेशक रह चुके हैं।

इसमें ये बिलकुल नहीं माना गया है कि ऋषि सुनक का प्रधानमंत्री बनना अल्पसंख्यकों की विजय है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया भारत गाँधीवादी मूल्यों को नीचा दिखाते हुए सत्ता और धन की तरफ भाग रहा है। जानबूझ कर ये लेख लिखवाने के लिए एक भारतीय को चुना गया, ताकि विवाद न हो। द गार्जियन’ लेस्टर और बर्मिंघम में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भी मुस्लिम आरोपितों को बचाते हुए हिन्दुओं को बदनाम कर चुका है। कई देशों में हिन्दू अहम मुकाम हासिल कर सत्ता में हस्तक्षेप करने की ताकत रखते हैं, इससे भी लेखक को दिक्कत है।

26 साल के जावेद के पास ही रहेगी 16 साल की बीवी: हाई कोर्ट का आदेश, कहा- 15 साल की मुस्लिम लड़की का निकाह जायज

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि 15 साल की मुस्लिम लड़की का निकाह जायज है। कोर्ट ने 26 साल के जावेद को 16 साल की बीवी के साथ रहने की इजाजत भी दी है। हाई कोर्ट ने शुक्रवार (28 अक्टूबर 2022) को जावेद की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

जावेद ने याचिका दायर कर 16 वर्षीय बीवी को साथ रखने की अनुमति माँगी थी। उसने याचिका में कहा था कि उसकी पत्नी को हरियाणा के पंचकूला स्थित एक बाल गृह में रखा गया है। शादी के समय उसकी पत्नी की उम्र 16 साल से अधिक थी। यह शादी दोनों की मर्जी और बिना किसी दबाव के हुई थी। वे दोनों मुस्लिम हैं और उन्होंने 27 जुलाई को मनी माजरा की एक मस्जिद में उनका निकाह हुआ था।

लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम होने का हवाला देते हुए उसके परिजनों ने इस निकाह पर आपत्ति जताई थी। परिजनों का कहना था कि लड़की ने अपनी मर्जी से निकाह की है। इसके बाद पंचकूला के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने लड़की को चिल्ड्रेन होम भेजने का आदेश दिया था। जावेद ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी।

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि लड़की ने अपनी मर्जी से निकाह की है। साथ ही कहा कि इस्लामी कानून के हिसाब से यह निकाह वैध है। जस्टिस विकास बहल की एकल बेंच ने आवश्यक दस्तावेजों, कानूनी अधिकारियों और सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दिए गए लड़की के बयान को देखने के बाद लड़की को चिल्ड्रेन होम से रिहा करने और उसकी कस्टडी जावेद को सौंपने का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत लड़की की यौन परिपक्वता अथवा अपनी इच्छा से शादी की आयु 15 साल की तय की गई है। ऐसे में बाल विवाह कानून के तहत ऐसी शादी पर रोक नहीं लगाई जा सकती। 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की ने अपनी इच्छा से शादी की है तो इसे गैरकानूनी नहीं ठहराया जा सकता।

‘बिन शादी के माँ बनोगी तो भी दिक्कत नहीं’: जया बच्चन ने रिलेशनशिप पर नातिन को दिया ज्ञान, कहा- सिर्फ प्यार नहीं, शारीरिक संबंध जरूरी

बॉलीवुड अभिनेत्री जया बच्चन ने अपनी नातिन नव्या के पॉडकॉस्ट ‘द हेल नव्या’ पर बात करते हुए हाल में पहले के समय में रिलेनशिप और अब के टाइम के रिलेशनशिप पर बात की। उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते में शारीरिक आकर्षण बहुत ज्यादा जरूरी होता है। रिश्ता सिर्फ प्यार, साफ हवा और अडजस्टमेंट पर नहीं चलता। उन्होंने इस पॉडकास्ट में 18 मिनट के बाद वाले स्लॉट में अपनी यह बात रखी। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इस बात से कोई दिक्कत नहीं अगर नव्या नवेली नंदा बिना शादी के बच्चा करना चाहें।

जया बच्चन कहती हैं, “लोगों को ये मुझसे सुनना बहुत आपत्तिजनक लगेगा लेकिन फिजिकल अट्रैक्शन और कंपैटिबिलिटी बहुत ज्यादा जरूरी होती है। हमारे समय में हम एक्सपेरिमेंट नहीं कर सकते थे। लेकिन आज की पीढ़ी ये सब करती है और उन्हें क्यों नहीं करना चाहिए? इसी से रिश्ते लंबे चलते हैं। अगर शारीरिक संबंध नहीं है तो रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चलने वाला। आप प्यार, ताजी हवा और अडजस्टमेंट के भरोसे रिश्ता नहीं निभा सकते। मुझे लगता है कि ये बहुत जरूरी है।”

जया बच्चन ने ये भी कहा कि उनकी पीढ़ी ऐसा नहीं कर सकती थी लेकिन अब की युवा पीढ़ी, श्वेता की पीढ़ी, नव्या की पीढ़ी ऐसा कर सकती है। अगर आपके बीच शारीरिक संबंध हैं और उसके बाद भी आपको लग रहा है कि यह रिश्ता आगे नहीं चलेगा तो आप चीजों को बदल सकते हैं

इस बातचीत में उन्होंने शादी और बच्चों पर भी बात की। उन्होंने कहा, “आजकल के रिश्तों में इमोशन्स और रोमांस की कमी होती है। मुझे लगता है कि आपको अपने सबसे अच्छे दोस्त से शादी करनी चाहिए। आपके पास एक अच्छा दोस्त होना चाहिए। आपको डिस्कस करना चाहिए। आपको कहना चाहिए- ‘हो सकता है कि मैं आपके साथ एक बच्चा पैदा करना चाहती हूँ, क्योंकि मैं आपको पसंद करती हूँ। मुझे लगता है कि आप अच्छे हैं तो चलिए शादी करते हैं, क्योंकि यही समाज का कहना है।’ मुझे कोई समस्या नहीं है अगर आपके बिना शादी के भी बच्चा हो। मुझे सच में कोई प्रॉब्लम नहीं है।”

उल्लेखनीय है कि जया बच्चन अक्सर कैमरा देख भड़कने के कारण मीडिया में चर्चा का कारण बनती हैं। कुछ दिन पहले भी पैपराजी को डाँटते हुए उनकी वीडियो वायरल हुई थी। उनका कहना था कि आखिर कैमरा लेकर कैसे किसी की भी जिंदगी में दखलअंदाजी दी जा सकती है। उस दौरान भी वह अपनी नातिन नव्या नवेली के साथ देखी गई थीं।

‘कांतारा’ में अब नहीं बजेगा ‘वराह रूपम’ गाना, केरल कोर्ट का आदेश: ऋषभ शेट्टी ने सुपरस्टार रजनीकांत के चरण छू लिया आशीर्वाद

सुपरहिट कन्नड़ फिल्म ‘कांतारा’ के निर्देशक व मुख्य अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित सुपरस्टार रजनीकांत के आवास पर जाकर उनका आशीर्वाद लिया। उन्होंने इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की। एक तस्वीर में वो वरिष्ठ अभिनेता के पाँव छूटे नज़र आ रहे हैं और सुपरस्टार उन्हें आशीर्वाद दे रहे हैं, जबकि एक अन्य तस्वीर में रजनीकांत उन्हें अंगवस्त्र ओढ़ा कर सम्मानित कर रहे हैं।

एक अन्य तस्वीर में दक्षिण भारत के दोनों कलाकार बैठ कर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। एक तस्वीर में रजनीकांत, ऋषभ शेट्टी का हाथ पकड़े हुए हैं और उन्हें कुछ कह रहे हैं। ऋषभ शेट्टी ने सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को डालते हुए ‘कांतारा’ की तारीफ़ करने के लिए रजनीकांत को धन्यवाद दिया। बता दें कि रजनीकांत खुद कन्नड़ फिल्मों में काम कर चुके हैं और वो बेंगलुरु में ही बस कंडक्टर का काम किया करते थे।

उधर बॉक्स ऑफिस पर लगभग 250 करोड़ रुपए कमा चुकी ‘कांतारा’ को लेकर अब विवाद भी सामने आ रहे हैं। केरल की एक अदालत ने फिल्म को ‘वराह रूपम’ गाने का प्रयोग करने से रोक दिया है। कॉपीराइट के एक केस को लेकर ऐसा आदेश दिया गया। थिएटरों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों पर फिल्म वाले इस गाने का प्रयोग अब नहीं कर सकेंगे। कझिकोड के प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने केरल के रॉक म्यूजिक बैंड ‘थाईक्कुडम ब्रिज’ ने आरोप लगाया है कि उक्त गाना उसके गाने ‘नवरासम’ की कॉपी है।

इस आदेश के बाद ‘कांतारा’ के निर्माताओं को न सिर्फ थिएटर और यूट्यूब, बल्कि ऑडियो गाने के सभी प्लेटफॉर्म से भी ‘वराह रूपम’ को हटाना पड़ेगा। हालाँकि, सुनवाई ख़त्म होने तक ये अस्थायी आदेश है। याचिकाकर्ताओं ने इसे प्लेजेरिज्म बताते हुए कहा है कि दोनों गानों का समान होना सिर्फ संयोग नहीं है। फिल्म में कर्नाटक के वनवासी समाज के एक ‘दैव (देव)’ को भगवान विष्णु का वराह अवतार बताते हुए इस स्तुति वाले गाने को डाला गया था।

‘मौलानाओं को ₹18000, पुजारियों को क्यों नहीं’: अनुराग ठाकुर ने उतारा केजरीवाल का मुखौटा, कहा- राम मंदिर के विरोधी आज हिंदू बन घूम रहे हैं

केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर (Anurag Singh Thakur) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) पर करारा प्रहार किया है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का विरोध और मौलानाओं को 18,000 रुपए सालाना देने वाले केजरीवाल अराजकता के प्रतीक हैं।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि अरविंद केजरीवाल भारतीय करेंसी पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की इसलिए माँग कर रहे हैं, ताकि उनके द्वारा किए गए भ्रष्टाचार पर चर्चा ना हो। बता दें कि केजरीवाल ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर भारतीय नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीर लगाने की माँग की है। केजरीवाल का कहना है कि देश की समृद्धि के लिए देवताओं का आशीर्वाद जरूरी है।

अनुराग ठाकुर ने केजरीवाल पर हमला बोलते हुए आगे कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण का विरोध किया, हिंदू देवताओं का अपमान किया, जिसे अपने मंत्री को बर्खास्त करना पड़ा, वे लक्ष्मी-गणेश के नाम पर नया प्रोपगेंडा फैला रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने आगे कहा, “आप (अरविंद केजरीवाल) दिल्ली में मुस्लिम मौलवियों को सालाना 18,000 रुपए देते हैं। क्या आप पुजारियों, गुरुद्वारा के ग्रंथियों और पादरियों को भी वही 18,000 रुपए देंगे? आपने ऐसा क्यों नहीं किया?”

अनुराग ठाकुर ने अरविंद केजरीवाल को अराजक के साथ-साथ फर्जी करार किया और कहा कि मंदिर का विरोध करने वाले ये लोग आज हिंदू बनने का ढोंग कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भी प्रहार किया और कहा कि किसानों का कर्ज माफ करने का वह झूठे वादे करती है।

कुछ दिन पहले केजरीवाल ने कहा था कि नोट के एक तरफ ‘गाँधी जी’ की तस्वीर और दूसरी तरफ ‘लक्ष्मी-गणेश’ की तस्वीर लगाई जानी चाहिए। इससे उनका आशीर्वाद मिलेगा और देश की तरक्की होगी। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से अपील की और कहा कि वे 130 करोड़ लोगों की ओर से केंद्र सरकार और पीएम मोदी से यह अपील कर रहे हैं। बाद में केजरीवाल ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा।

NCB ने दाखिल की 200 पन्नों की चार्जशीट, क्या पति संग जेल जाएँगी भारती सिंह: 2 साल पहले कॉमेडियन जोड़े के घर से मिला था ड्रग्स

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने ड्रग्स मामले में कॉमेडियन भारती सिंह (Bharti Singh) और उनके पति हर्ष लिंबाचिया (Harsh Limbachiya) के खिलाफ कोर्ट में 200 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। साल 2020 में NCB ने ड्रग्स के मामले में दोनों को गिरफ्तार भी किया था। फिलहाल ये कपल जमानत पर बाहर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो साल बाद ड्रग्स मामले मे एनसीबी द्वारा दाखिल की गई 200 पेजों की चार्जशीट में क्या है अभी तक यह सामने नहीं आया है। कहा जा रहा है कि एक बार फिर से इस मामले में दोनों के सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

बता दें कि NCB ने 21 नवंबर 2020 में कॉमेडियन भारती सिंह के प्रोडक्शन ऑफिस और घर पर छापा मारा था। उनके घर से 86.5 ग्राम गाँजा बरामद किया गया था, जिसके बाद दोनों को एनसीबी ने हिरासत में लिया था। मुंबई के जोनल डायरेक्टर ऑफिसर समीर वानखेड़े ने उस वक्त बताया था, “भारती और उनके पति को नशीले पदार्थ रखने के मामले में सवाल-जवाब के लिए हिरासत में ले लिया गया है।” लंबी पूछताछ के बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

जाँच एजेंसी के सामने भारती और उनके पति हर्ष ने गाँजे का सेवन करने की बात कबूल की थी। लेकिन दो दिन बाद ही यानी 23 नवंबर 2020 को इस केस में जमानत मिल गई थी।

गौरतलब है कि 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद एनसीबी ने ड्रग्स से जुड़े व्हाट्सएप चैट के आधार पर बॉलीवुड में नशीली दवाओं के इस्तेमाल के संबंध में जाँच शुरू की थी। एनसीबी ने सबसे पहले सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चक्रवर्ती, उसके भाई शौविक, दिवंगत फिल्म स्टार के कुछ कर्मचारियों और अन्य लोगों को एनडीपीएस कानून की धाराओं के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद ड्रग्स की जाँच के लपेटे में कई सेलिब्रिटीज जैसे दीपिका पादुकोण, सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह, अर्जुन रामपाल की पार्टनर गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स आए थे।

रवीश कुमार+स्वरा भास्कर की मजबूरी भारी: मन कहे- राहुल गाँधी से न हो पाएगा, जुबान फिर भी करे जी-हुज़ूरी

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी इन दिनों ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाल रहे हैं, लेकिन पार्टी की उम्मीद के मुताबिक मीडिया की फुटेज उन्हें मिल नहीं रही। ऐसे में अब अभिनेत्री स्वरा भास्कर राहुल गाँधी के महिमामंडन के लिए आगे आई हैं। इसके जरिया बना है – रवीश कुमार का वीडियो। दोनों को लगता है कि राहुल गाँधी को वोट नहीं मिलने वाले, लेकिन खुलेआम कैसे स्वीकारें? इसीलिए, अब वो ‘दिल जीतने’ वाला प्रोपेगंडा लेकर आए।

अक्सर ऐसा होता है कि दो तीनों के मैच के बाद हारने वाली टीम को ‘दिल जीतने वाला’ बता दिया जाता है। यहाँ राहुल गाँधी के समर्थकों को पता है उन्हें हार ही मिलनी है चाहे वो कुछ भी कर लें, इसीलिए जो बात बाद मेंबोलनी है, अभी से ही बोल रहे। NDTV पर रवीश कुमार का एक वीडियो शेयर कर के राहुल गाँधी को महान दिखाने की कोशिश की। वैसे स्वरा भास्कर पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधियों को बिन माँगे समर्थन देती रही हैं।

स्वरा भास्कर ने ट्विटर पर लिखा, “इसका श्रेय उन्हें दिया जाना बाकी था। चुनावी विफलताओं, ट्रॉलिंग, व्यक्तिगत हमलों और उन्हें अयोग्य बताते हुए लगातार हो रही आलोचना के बावजूद राहुल गाँधी ने सांप्रदायिक भाषणबाजी के सामने घुटने नहीं टेके। न ही उन्होंने सनसनीबाजी वाली राजनीति के सामने हार मानी। इस देश की जैसी स्थिति है, उसमें ‘भारत जोड़ो यात्रा’ जैसा प्रयास सराहनीय है।” साथ ही उन्होंने 2 मिनट 20 सेकेण्ड का एक क्लिप शेयर किया, जो NDTV के ‘प्राइम टाइम’ शो का है।

इसमें रवीश कुमार कहते दिख रहे हैं कि राजनीति के पास कोई और भाषा नहीं बची है, लेकिन इतने चुनाव हारने के बावजूद राहुल गाँधी ने धर्म का सहारा नहीं लिया और 3000 किलोमीटर की पदयात्रा निकाल ली। इस दौरान वो ये भी कहते दिखे कि कई लोग कह रहे इससे वोट नहीं मिलेगा, लेकिन इसके बावजूद राहुल गाँधी ने भाषा की शालीनता नहीं छोड़ी और अपने पिता-नाना के अपमान का रोना नहीं रोया। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी ने देवी-देवताओं की तस्वीरें नहीं लगाई।

रवीश कुमार इस वीडियो इससे नाराज़ दिखते हैं कि चैनलों में उनकी इस यात्रा को कवर नहीं किया जा रहा और अख़बारों में इसके बारे में नहीं छप रहा। रवीश कुमार ने दावा किया कि राहुल गाँधी धर्म की राजनीति के खिलाफ आवाज़ उठाते हुए मछुआरों की आवाज़ उठा रहे हैं। रवीश कुमार ने हमेशा की तरह उद्योगपतियों को भी आड़े हाथों लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर राजनीति को ‘धर्म के उत्सव’ में बदलने का आरोप लगाया।

इतना ही नहीं, वो करेंसी नोटों पर लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरों की माँग करने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रति भी नाराज़गी दिखाई। वैसे, रवीश कुमार हमेशा की तरह इस बार भी झूठ बोल रहे हैं। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में भी टीका लगाया गया। उन्होंने कर्नाटक के मैसूर में लिंगायत मठ का दौरा किया, आंध्र के अडोनी में गंगा मंदिर गए। चर्च और मस्जिदों में भी गए, ऐसे में क्या इसे धर्म की राजनीति नहीं मानते रवीश कुमार? और हाँ, राहुल गाँधी अपने पिता और दादी के मारे जाने का रोना भी रो चुके हैं।

‘मेरे पिता को मार दिया, मेरी दादी को मार दिया’ – ये किसके शब्द थे? रवीश कुमार ने नया यूट्यूब चैनल बना लिया है, शायद उन्हें डर है कि NDTV अब अडानी को बिक गया है तो उन्हें कभी भी निकाला जा सकता है। इसीलिए, अब वो टीवी और यूट्यूब, दोनों से प्रोपेगंडा चला रहे हैं। असली बात तो ये है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ में सारे तिकड़म आजमाए जा रहे हैं, लेकिन जब नेता ही जनता को पसंद नहीं हो तो भला वोट कैसे मिलेंगे? धर्म नहीं, लेकिन मजहब की राजनीति तो खूब की है कॉन्ग्रेस ने।

‘मैं अपनी टेस्ला की पेमेंट कैसे दूँगा’: खुद को ट्विटर कर्मचारी बता दो युवकों ने CNBC को बनाया बेवकूफ, कहा- लोकतंत्र की चिंता हो रही है

ट्विटर का मालिक बदलने के बाद से लगातार उससे जुड़ी खबरें तेजी से दिखाने के चक्कर में अमेरिकी न्यूज चैनल CNBC एक प्रैंक का शिकार हो गया। न्यूज चैनल ने हड़बड़ी में दो ऐसे अंजान लोगों को ट्विटर के एक्स कर्मचारी बनाकर पेश कर दिया जिनका कंपनी से कोई लेना-देना ही नहीं था। बस वो दोनों उन्हें ट्विटर के बाहर दिखे और चैनल तुरंत अपने सवाल पूछने लगा

अपना नाम डेनियल जॉनसन बताने वाले शख्स ने कहा, “मैं डेटा इंजीनियर हूँ। हमें बहुत परेशानियाँ हो रहीं थीं। फिर एलन आए और टीम को निकाल दिया।” डेनियल ने वीडियो में दावा किया कि वो ट्विटर में 6 साल से काम कर रहा था। उसने कहा, “मैं एलन मस्क की इज्जत करता हूँ, लेकिन हाल में उन्होंने जैसी बातें की वह चिंताजनक हैं। मैंने टेस्ला गाड़ी खरीद रखी है। मैं कार का भुगतान कैसे करूँगा।”

आगे डेनियल ने ट्विटर की फ्री स्पीच पर चिंता दिखाई और सीएनबीसी के साथ खेल करते हुए कहा कि मस्क के आ जाने से नाजी लोग ताकतवर होंगे जिन्हें ट्रांसजेंडर्स से नफरत है। इसके बाद डेनियल अपनी बात कहकर चले गए। वहीं डेनियल के साथ जो उनका दूसरा साथी था वो इस प्रैंक को आगे बढ़ाने लगा। उसने खुद की पहचान एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर बताई। जब पत्रकार ने उससे उसका नाम पूछा तो उसने अपना नाम राहुल लिगमा बताया। उसने कहा कि उसे इस तरह किसी बाहरी का आना ठीक नहीं लग रहा। वह लोकतंत्र को लेकर चिंतिंत हैं।

इन दोनों लोगों की बातों के आधार पर सीएनबीसी की टेक चेक जर्नलिस्ट डिएड्रे बोसा ने दावा किया कि कैसे ट्विटर से इंजीनियर्स का सफाया हो रहा है। ये केवल दो थे। आगे उन्होंने कहा, “देख सकते हैं कि कैसे ये लोग सदमे में हैं। डेनियल ने हमें बताया कि उसने टेस्ला खरीद रखी है और उसे नहीं मालूम कि वो उसका भुगतान कैसे करेगा। साफ कहूँ तो मुझे नहीं लगता उसके दिमाग में टेस्ला थी उसके दिमाग में एलन मस्क होगा।”

अपनी सारी बात कहने के बाद पत्रकार ने यह भी कहा कि उनकी टीम इस बात की पुष्टि नहीं करती कि जिन लोगों से उन्होंने बात की वो ट्विटर कर्मचारी थे भी या नहीं।

सीएनबीसी की इस रिपोर्ट के बाद एलन मस्क ने भी उनसे मजे लिए। वहीं अन्य यूजर्स ने बताया कि कैसे सीएनबीसी ने कुछ अंजान लोगों को ट्विटर कर्मचारी बनाकर पेश कर दिया जबकि वो दोनों केवल हाथ में बॉक्स लेकर जा रहे थे। एलन मस्क ने इसका मजाक उड़ाते हुए कहा- सर्वश्रेष्ठ रिपोर्टिंग।

‘ईसा मसीह को मानो, दीपावली पर घरों में घुस फाड़ी देवी-देवताओं की तस्वीर’: मेरठ में ‘मदद’ के नाम पर 400 लोगों को बनाया ईसाई

उत्तर प्रदेश के मेरठ में 400 से अधिक गरीब लोगों को सहायता के नाम पर ईसाई में धर्मांतरण कराने की साजिश का मामला सामने आया है। इन लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान कुछ लोगों ने उनकी मदद की थी। वही लोग धोखे से उनका मतांतरण कर दिए और अब उनसे घरों में रखी देवी-देवताओं की मूर्तियों को बाहर करने का दबाव डाल रहे हैं। इस साजिश के तार दिल्ली से जुड़ रहे हैं।

मेरठ के मंगरपुरम स्थित ब्रह्मपुरम थाना क्षेत्र के मलिन बस्ती में रहने वाले गरीब लोगों का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन की वजह से उनके काम-धंधे पर असर पड़ा था। इसके कारण उन्हें खाने के लिए मोहताज होना पड़ा था। इस दौरान ईसाई समाज के कुछ लोगों ने उनके लिए खाने-पीने का इंतजाम करके उनकी मदद की थी। इन लोगों ने पैसों से भी इनकी मदद की थी।

इस मदद के कारण ये लोग ईसाई समाज के उन लोगों पर विश्वास करने लगे। इसके बाद ईसाई धर्म से जुड़े लोगों ने इन लोगों पर हिंदू धर्म के अनुसार पूजा-पाठ नहीं करने का दबाव बनाया। इससे तंग आकर इन लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध है।

दी गई शिकायत में कहा गया है, “कोरोना के दौरान हमारी मदद करने के बाद ये लोग (ईसाई) कहने लगे कि ईश्वर एक है और वह ईसा मसीह है। तुम चर्च में आओ और प्रार्थना करो। हमलोग चर्च जाने लगे। कुछ दिन बाद इन लोगों ने कहा कि तुम अपने भगवानों की पूजा छोड़कर ईसा मसीह की पूजा करो। इसके बाद ये लोग आधार कार्ड पर भी नाम बदलवाने का दबाव बनाने लगे।”

अपनी शिकायत में पीड़ितों ने आगे कहा, “हम दीपावली के दिन अपनी घरों में पूजा कर रहे थे तो ये लोग हमारी झुग्गी-झोपड़ियों में घुसकर हमारे भगवानों की तस्वीरें फाड़ दीं और बोले कि तुम लोगों ने अपना धर्म बदल लिया है और ईसाई बन गए हो। अब ईसा मसीह को मानो। ये लोग हमसे दो-दो लाख रुपए माँगने लगे। जब हमने विरोध किया तो ये लोग घरों से चाकू, डंडे लेकर आए और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी दी।”

पीड़ितों का कहना है कि ये सनातन धर्म को मानने वाले लोग हैं और धोखा देकर इनका धर्मांतरण करा दिया गया है। उन्होंने प्रशासन से जाँच करके मामले में अविलंब कार्रवाई करने की माँग की है। एसपी सिटी का कहना है कि आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। यूपी के गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के 9 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।

जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है, उनके नाम हैं छबीली उर्फ शिवा, बिनवा, अनिल, सरदार, निक्कू, बसंत, प्रेमा, तितली और रीना हैं।

कहा जा रहा है कि धर्मांतरण की इस साजिश को दिल्ली में रचा गया था। कहा जा रहा है कि दिल्ली के पास्टर महेश ने पूरी प्लानिंग से इन लोगों का मतांतरण कराया है। बेटियों की शादी और बच्चों की पढ़ाई का भी खर्च महेश उठा रहा था। इस पूरे मामले की निगरानी रेलवे रोड निवासी अनिल कर रहा था।

जाँच के दौरान अस्थायी चर्च से कुछ रजिस्टर मिले हैं, जिनमें मतांतरण कराए गए सभी लोगों के नाम लिखे हैं। उन लोगों को पैसे कैसे दिए जाते थे, इसका भी उल्लेख किया गया है। इस मामले में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि पास्टर महेश और अनिल की तलाश की जा रही है। अब तक जाँच से सामने आया है कि मंगतपुरम में 550 लोग रहते हैं, जिनमें 400 लोगों का धर्मांतरण करा दिया गया है।

पास्टर महेश ने मंगतपुरम के धर्मांतरित लोगों की बेटियों की शादी और उनके बच्चों की पढ़ाई का खर्चा उठाने का जिम्मा लिया था। इनमें से कुछ लोगों की बेटियों की शादी भी ईसाई समुदाय के युवकों से कराई गई है। यहाँ के बच्चों को भी उनकी संस्था द्वारा ही पढ़ाया जा रहा है।