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आमिर खान को किसी की भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं… भारतीय परंपराओं को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से भावनाएँ आहत: नरोत्तम मिश्रा

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान अपने नए विज्ञापन को लेकर विवादों में हैं। इस विज्ञापन में उनके साथ अभिनेत्री कियारा आडवाणी भी हैं। सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध हो रहा है। इसी बीच मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इस विज्ञापन को लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला बताया है। उन्होंने आमिर खान को भारतीय परंपराओं को ध्यान में रखकर विज्ञापन करने की सलाह दी है।

नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को कहा, “मैंने भी आमिर खान को एक निजी बैंक का विज्ञापन करते हुए देखा। इसके बारे में शिकायत मिलने के बाद ही मैंने इसे देखा। आमिर खान के इस तरह के भारतीय परंपरा, रीति-रिवाजों और देवी-देवताओं को लेकर विज्ञापन लगातार सामने आते रहे हैं। मैं इसे ठीक नहीं मानता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “विज्ञापनों और फिल्मों में भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने से धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। फिल्म अभिनेता आमिर खान जी को भारतीय परंपराओं और रीति-रिवाजों को ध्यान में रखकर विज्ञापन करना चाहिए। उन्हें किसी की भी भावनाएँ आहत करने की इजाजत नहीं हैं।”

जिस विज्ञापन पर बवाल चल रहा है, अब उसकी बात। एक बैंक के विज्ञापन में दिखाया गया है कि एक गाड़ी में दूल्हा (आमिर खान) और दुल्हन (कियारा आडवाणी) बिदाई के बाद घर जा रहे हैं। इस दौरान आमिर खान कहते हैं कि ये पहली बिदाई है, जिसमें लड़की नहीं रोई।

इसके बाद विज्ञापन का अगला सीन गृह प्रवेश का है। यहाँ आमिर पूछते हैं अंदर पहले कौन जाएगा? कियारा जवाब देती हैं कि जो नया है वो। आमिर कहते हैं यानी ‘मैं’। आगे गृह प्रवेश होता है और लड़की की जगह आमिर को घर में प्रवेश करते दिखाया जाता है।

आखिर में संदेश दिया जाता है – “सदियों से जो प्रथा चलती आ रही है, वो चलती है क्यों? तभी तो हम सवाल पूछते हैं बैंकिंग की हर प्रथा से ताकि आपको मिले बेस्ट सर्विस- AU बैंक- बदलाव हमसे है।”

इसको लेकर सोशल मीडिया पर यूजर्स ने पूछा कि आखिर ऐसे विज्ञापन निकाह और हलाला जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं बनाए जाते? हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों को गलत दिखाने की क्या होड़ है? आमिर खान तीन तलाक और हलाल में बदलाव पर कब बात करेंगे?

हनुमान जी को नोटिस, 10 दिन के भीतर मंदिर खाली करने का आदेश… वरना कानूनी कार्रवाई: झारखंड में रेलवे का कारनामा

झारखंड के धनबाद से अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहाँ ईस्ट सेंट्रल रेलवे ने 7 अक्टूबर 2022 को भगवान हनुमान को जमीन खाली करने के लिए नोटिस भेज दिया। उन्होंने कहा कि अगर हनुमान जी ने 10 दिन के भीतर इस जमीन को खाली नहीं किया, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला बेकारबांध इलाके की खटीक बस्ती का है। रेलवे ने खटीक बस्ती में अपनी जमीन खाली कराने के लिए हनुमान भगवान के नाम पर एक नोटिस भेजा है। रेलवे ने नोटिस को मंदिर के बाहर लगाया है। इसमें लिखा गया है:

“आपको सूचित किया जाता है कि आपने रेल की जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, जो कि अपराध है। आपको निर्देश दिया जाता है कि नोटिस मिलने के 10 दिनों के अंदर रेलवे की जमीन से मंदिर हटा लें और इसे हमारे हवाले कर दें। यदि आपने ऐसा नहीं किया तो आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसे अति आवश्यक समझें।”

इसके अलावा रेलवे ने मंदिर के आसपास की अवैध झुग्गी-झोपड़ियों को भी हटाने को कहा है। यह मामला सामने के बाद यहाँ के लोगों में काफी ​आक्रोश है।

यहाँ के स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से रेलवे की जमीन पर रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें परेशान करने के लिए नोटिस भेजा जा रहा है। हनुमान मंदिर पर नोटिस चस्पा करने पर उन्होंने कहा कि रेलवे की जमीन पर अन्य धर्मों के स्थान भी हैं, लेकिन नोटिस सिर्फ इसी मंदिर को ही जारी किया गया है।

उधर, हनुमान भगवान को नोटिस भेजकर अपनी किरकिरी करा चुके रेलवे के अधिकारियों ने कहा, “ये मानवीय भूल है। नोटिस में गलती से हनुमान जी का नाम लिख दिया गया। इसमें सुधार किया जाएगा। आगे से ऐसी गलती ना हो, इसका भी ध्यान रखा जाएगा। किसी की भावनाओं को आहत करना हमारा मकसद नहीं था, हमें बस जमीन से अतिक्रमण हटाना था।”

बता दें कि इस इलाके में 20 सालों से खटीक समुदाय के 300 से ज्यादा परिवार रहते हैं, जो यहाँ फल, सब्जी बेचने जैसे छोटे कारोबार करके अपना जीवनयापन कर रहे हैं। रेलवे उनसे यह जमीन खाली करवाना चाहती है।

मंदिर की ₹500 करोड़ की जमीन पर अवैध कब्जा, आंध्र प्रदेश में 60 साल की कानूनी लड़ाई के बाद 29.71 एकड़ जमीन कराया गया मुक्त: रिपोर्ट

आंध्र प्रदेश के विजग (Vizag, Andhra Pradesh) में लगभग 60 वर्षों की कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद राज्य सरकार की बंदोबस्ती विभाग ने एक मंदिर की जमीन (Temple Land) को बरामद कर लिया गया है। इस जमीन की कीमत 500 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।

विजग के अनकापल्ली में अम्बिका बाग मंदिर स्थित है। इसे फूलबाग मंदिर के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की 29.71 एकड़ जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया था। जब मंदिर प्रशासन ने इस जमीन से लोगों को हटाने की कोशिश की तो वे कोर्ट में चले गए। अब अतिक्रमण हटाकर यहाँ बोर्ड लगा दिया गया है।

यह जमीन अनकापल्ली में माँ नुकलम्मा मंदिर के पास स्थित है। इस जमीन को चेमुदु रियासत की महारानी विरिचेरला चद्रमणि पट्टा महादेवी ने जगदंबा जंक्शन के पास स्थित विजग के अम्बिका बाग रामालयम् मंदिर के रख-रखाव के लिए दान में दिया था। महारानी ने यह दान 20 जुलाई 1957 को पंजीकृत वसीयत द्वारा किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, विजग के रामालयम् मंदिर का जमीन लंबे समय से कानूनी पचड़े में पड़ा था। हालाँकि, साल 2007 में बंदोबस्ती विभाग ने इस कानूनी लड़ाई को जीत लिया और मंदिर का पुनर्निर्माण कराया।

वहीं, कुछ लोगों ने दावा किया कि अनकापल्ली स्थित रामालयम मंदिर की जमीन अपनी संपत्ति है। इसके बाद ईनम की ट्रिब्यूनल ने बंदोबस्ती विभाग के पक्ष में निर्णय दिया, लेकिन लोग बार-बार विभिन्न अदालतों में मुकदमा दायर करते रहे। हालाँकि, यहाँ भी लोगों को निराशा हाथ लगी।

मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एवं सहायक आयुक्त ने राजस्व विभाग और पुलिस के सहयोग से जमीन को अतिक्रमण से मुक्त करा लिया और वहाँ पर बोर्ड लगवा दिया कि यह जमीन मंदिर की है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की दयाबेन को हुआ गले का कैंसर… क्योंकि अलग तरह की आवाज निकालती थीं – फैक्ट चेक

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) की दयाबेन यानी दिशा वकानी (Disha Vakani) को कैंसर हो गया है – ऐसी खबर सोशल मीडिया पर चल रही है। लोग शेयर कर रहे हैं कि उन्हें गले का कैंसर हो गया है।

दयाबेन का किरदार निभाने वाली दिशा वकानी को ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में अलग तरह की आवाज निकालने के चलते गले का कैंसर हो गया है, सोशल मीडिया में ऐसे तर्क दिए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह खबर खूब वायरल हो रही है, जिससे दयाबेन के फैंस परेशान हो गए हैं।

कुछ मीडिया हाउस ने तो इसको लेकर खबर भी चला दी

अभी तक इसको लेकर दिशा वकानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनके भाई मयूर वकानी (Mayur Vakani) ने हालाँकि इस खबर पर रिएक्ट किया है।

‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ (Taarak Mehta Ka Ooltah Chashmah) में सुंदर लाल की भूमिका निभा रहे मयूर ने दिशा वकानी को गले का कैंसर होने की खबर को अफवाह बताते हुए मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी बहन पूरी तरह से स्वस्थ हैं, उन्हें किसी भी तरह का कोई भी कैंसर नहीं हुआ है।

मयूर वकानी ने इसके साथ ही लोगों से अनुरोध किया है कि वह ऐसी अफवाहों पर ध्यान ना दें। इस अफवाह को दूर करने के लिए दिशा वकानी (Disha Vakani) के भाई ने मीडिया से बात भी की। उनके अलावा ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में काम करने वाले अन्य कलाकारों ने भी मीडिया से बात की।

दिशा पूरी तरह से स्वस्थ है: मयूर वकानी

मयूर वकानी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में कहा, “ऐसी बहुत सारी अफवाहें आती रहती हैं। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। दिशा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। वह जब से इस शो को छोड़कर गई हैं, तब से हर दिन उनके बारे में ऐसी खबरें सुनने को मिलती रहती हैं, लेकिन दिशा के फैंस को ऐसी किसी भी खबरों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।”

ऐसी खबरों पर ध्यान न दें: दिलीप जोशी

वहीं इस शो में जेठालाल का किरदार निभाने वाले दिलीप जोशी इस खबर को लेकर कहते हैं, “मुझे सुबह से लगातार कॉल्स आ रहे हैं। मुझे लगता है कि इस तरह की अफवाह को बढ़ावा देने की जरूरत नहीं है। मैं बस इतना कहूँगा कि ये सब अफवाह है। आप सब लोग इस पर ध्यान न दें।”

ये सिर्फ अफवाहें हैं: जेनिफर मिस्त्री

इस शो में रोशन सिंह सोढ़ी की वाइफ की भूमिका निभा रही जेनिफर मिस्त्री बंसीवाल ने कहा, “मैं लगातार दिशा के संपर्क में हूँ। मुझे नहीं लगता कि यह खबर सच है। अगर ऐसा कुछ होता तो पता चलता। मैंने उनसे अगस्त के अंत में ही बात की है। हम दोनों आसपास रहते हैं। मैंने उनसे अपनी बेटी की कथक क्लास के बारे में बात की थी। उस वक्त वह मुझे बिल्कुल ठीक लग रही थीं। मुझे लगता है कि ये सिर्फ अफवाहें हैं।”

‘नेहरू ने महाराजा हरि सिंह के विलय के प्रस्ताव को स्वीकारने में देर की थी’: केंद्रीय मंत्री ने सरकारी रिकॉर्ड दिखाया, दशकों पुराना कॉन्ग्रेसी प्रोपेगेंडा हुआ फुस्स

कॉन्ग्रेस और कॉन्ग्रेसी जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरि सिंह द्वारा भारत में शामिल होने को लेकर अक्सर झूठ बोला जाता है। वे अक्सर तर्क देते हैं कि महाराजा हरि सिंह भारत में तब तक शामिल होना नहीं चाहते थे, जब तक पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण नहीं कर दिया। इस तर्क कॉन्ग्रेसी महाराजा के प्रति पंडित जवाहरलाल नेहरू की घृणा और शेख अब्दुल्ला के प्रति अगाध प्रेम को छुपाने का प्रयास करते हैं। महाराजा हरि सिंह और शेख अब्दुल्ला के बीच अनबन भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्रम है।

कॉन्ग्रेस के इसी तर्क को एक बार फिर कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश (Jairam Ramesh) ने दिया है। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर निशाना साधने के चक्कर में इस पर एक बार फिर बहस छेड़ दी, जिसका जवाब केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने दिया।

जयराम रमेश ने ट्वीट की सीरीज में पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए कहा, “पीएम ने एक बार फिर असली इतिहास को छिपा दिया है। वह केवल जम्मू-कश्मीर पर नेहरू की आलोचना करने के लिए निम्नलिखित तथ्यों की अनदेखी करते हैं। यह सब राजमोहन गाँधी की सरदार पटेल की जीवनी में अच्छी तरह से उल्लेखित है। ये तथ्य जम्मू-कश्मीर में पीएम के नए शख्स को भी पता हैं।”

जयराम रमेश ने पहला तर्क दिया, “महाराजा हरि सिंह ने विलय करने में आनाकानी की। उनके आजादी के सपने थे, लेकिन जब पाकिस्तान ने आक्रमण किया तो हरि सिंह भारत में शामिल हो गए।”

जयराम ने अगले बिंदु में बताया, “शेख अब्दुल्ला ने नेहरू के साथ अपनी मित्रता और गाँधी के प्रति सम्मान के कारण भारत में विलय का समर्थन किया।” उन्होंने आगे लिखा, 13 सितंबर 1947 तक, “जब जूनागढ़ के नवाब पाकिस्तान में शामिल हो गए, तब तक सरदार पटेल जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में शामिल होने को लेकर परेशान नहीं थे।”

जयराम रमेश के इस ट्वीट का केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने खंडन किया और इसके संदर्भ में उन्होंने भी कई ट्वीट कर इसके संदर्भ दिए। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, “यह ‘ऐतिहासिक झूठ’ कि महाराजा हरि सिंह ने कश्मीर के भारत में विलय के प्रस्ताव को टाल दिया था, जवाहरलाल नेहरू की संदिग्ध भूमिका को छिपाने के लिए बहुत लंबे समय तक चला है। जयराम रमेश के झूठ का पर्दाफाश करने के लिए मैं खुद नेहरू को उद्धृत करता हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “24 जुलाई 1952 को (शेख अब्दुल्ला के साथ समझौते के बाद) नेहरू लोकसभा में यह बात बताई है। आजादी से एक महीने पहले पहली बार महाराजा हरि सिंह ने भारत में विलय के लिए नेहरू से संपर्क किया था। यह नेहरू थे, जिन्होंने महाराजा को फटकार लगाई थी।”

जयराम रमेश के प्रोपेगेंडा की हवा निकालते हुए किरन रिजिजू आगे तर्क देते हैं, “यहाँ नेहरू के अपने शब्दों में कहा गया है कि ये महाराजा हरि सिंह नहीं थे, जिन्होंने कश्मीर के भारत में विलय में देरी की, बल्कि ये स्वयं नेहरू थे। महाराजा ने अन्य सभी रियासतों की तरह जुलाई 1947 में ही संपर्क किया था। अन्य राज्यों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया, लेकिन कश्मीर को भारत में शामिल करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया था।”

जयराम रमेश संबोधित करते हुए वे आगे कहते हैं, “नेहरू ने न केवल जुलाई 1947 में महाराजा हरि सिंह के विलय के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया, बल्कि नेहरू ने अक्टूबर 1947 में भी टालमटोल किया। यह तब हुआ, जब पाकिस्तानी आक्रमणकारी श्रीनगर के एक किलोमीटर के दायरे में पहुँच गए थे। ये भी नेहरू के अपने शब्दों में है।”

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आगे, मूल ये है: (1) महाराजा जुलाई 1947 में ही भारत में शामिल होना चाहते थे, (2) यह नेहरू थे जिन्होंने हरि सिंह के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था, (3) नेहरू ने कश्मीर के लिए ‘विशेष’ मामला गढ़ा और वे विलय से ‘बहुत अधिक’ चाहते थे। वह विशेष मामला क्या था? वोट बैंक की राजनीति?”

केंद्रीय मंत्री पंडित नेहरू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए जयराम रमेश से पूछा, “नेहरू द्वारा कश्मीर को ही एकमात्र अपवाद क्यों बनाया गया, जहाँ रियासत के शासक भारत में शामिल होना चाहते थे और फिर भी नेहरू ‘और भी बहुत कुछ’ चाहते थे? इतना अधिक क्या था? सच तो यह है कि भारत अभी भी नेहरू की मूर्खता की कीमत चुका रहा है।”

बता दें कि कॉन्ग्रेस अब तक यही कहते रही है कि कश्मीर समस्या जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह की वजह से उत्पन्न हुआ है। कॉन्ग्रेसियों का तर्क रहा है कि महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करना चाहते थे, बल्कि वे स्वतंत्र रहना चाहते थे।

कॉन्ग्रेसी कहते रहे हैं कि जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर पर आक्रमण किया तो हरि सिंह ने भारत में विलय का प्रस्ताव रखा था। यही बात अब तक कॉन्ग्रेसी कहते रहे हैं। जयराम रमेश भी नेहरू की गलतियों को छिपाने के लिए यही प्रोपेगेंडा का बखान कर रहे थे। हालाँकि, केंद्रीय मंत्री ने उनकी प्रोपेगेंडा को सार्वजनिक रूप से ध्वस्त कर दिया।

मूसा कुरैशी तेलंगाना से धराया: IB अफसर अंकित शर्मा को 400+ बार चाकुओं से गोदने में इसका भी नाम, दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों के बाद था गायब

दिल्ली में हुए हिंदू-विरोधी दंगों में IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के आरोपितों में से एक मुंतजिम उर्फ मूसा कुरैशी (Muntajim or Musa Qureshi) को गिरफ्तार कर लिया गया है। मूसा कुरैशी तेलंगाना में छिपा हुआ था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने इसे तेलंगाना में ही धर दबोचा।

मूसा कुरैशी एक शातिर अपराधी है। यह पहले भी अपहरण और बलात्कार के मामले में जेल जा चुका है। दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों में IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के आरोप में अरविंद केजरीवाल वाली आम आदमी पार्टी के तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को भी गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली दंगा और अंकित शर्मा हत्या

दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के अनुसार अंकित शर्मा की हत्या चाँदबाग में 10 लोगों ने मिल कर की थी। इनमें ताहिर हुसैन के साथ-साथ हलील सलमान और समीर नामक आरोपित भी थे। नाजिम और कासिम नाम के दो कुख्यात अपराधी भी इस जघन्य हत्याकांड में शामिल थे।

पोस्टमॉर्टम के मुताबिक उनके शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं था, जिसमें चाकू के गहरे घाव न हों। डॉक्टर ने लिखा है कि 400 से ज़्यादा बार उन्हें चाकुओं से गोदा गया। उनकी आँत को शरीर से बाहर निकाल दिया था। फोरेंसिक डॉक्टरों ने कहा कि इस तरह से यातना का शिकार और क्षत-विक्षत बॉडी उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं देखा।

अंकित शर्मा हत्या मामले में गिरफ्तारियाँ

दिल्ली हिंदू-विरोधी दंगों के दौरान आइबी कॉन्सटेबल अंकित शर्मा की जघन्य हत्‍या के मामले में मूसा कुरैशी से पहले दिल्‍ली पुलिस ने सलमान नाम के शख्‍स को गिरफ्तार किया था। सलमान नाम के आरोपित को पाँच नामों से जाना जाता है, जो मोमिन उर्फ सलमान उर्फ हसीन उर्फ मुल्ला उर्फ नन्हें है।

सलमान से पहले अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन को भी गिरफ्तार किया था। ताहिर हुसैन का नाम एफआईआर में भी दर्ज है।

‘साल भर से अधिक समय से रहने वाले लोग दे सकेंगे वोट’: जम्मू प्रशासन का निर्देश, घबराए महबूबा-फारूक बोले- डेमोग्राफी में बदलाव किया जा रहा

विशेष दर्जा वाला अनुच्छेद 370 हटने के बाद सामान्य हालात को देखते हुए केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में अगले साल विधानसभा चुनाव होंगे। इसको लेकर जम्मू प्रशासन ने राज्य में एक साल से अधिक समय से रहने वाले लोगों को आवास प्रमाण पत्र जल्दी जारी करने का निर्देश दिया है, ताकि वे वोटर लिस्ट में अपने नाम को जोड़वा सकें। इसको लेकर वहाँ की पार्टियों ने इसका विरोध किया है और कहा कि सरकार राज्य का जनसांख्यिकीय बदलाव कर रही है।

विरोध करने वालों में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के सुप्रीमो फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) प्रमुख हैं। इसके अलावा, भाजपा विरोधी गुप्कार (Gupkar) में शामिल पार्टियों ने इसका विरोध करते हुए इसे साजिश बताया है।

दरअसल, जम्मू के जिला मजिस्ट्रेट अवनी लवासा ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को एक नोटिफिकेशन जारी कर सभी तहसीलदारों को एक वर्ष से अधिक समय से जम्मू में रहने वाले लोगों को निवास का प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह बात सामने आई थी कि आवास प्रमाण सहित दस्तावेजों के अभाव में कुछ लोगों को वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराने में दिक्कत आ रही है।

यदि किसी भारतीय नागरिक के पास घर नहीं है और वह बेघर है तो ऐसे में तहसीलदार एक अधिकारी को नामित करेगा, जो उसकी फिल्म वेरीफिकेशन करने के निवास प्रमाण जारी करने के लिए अनुशंसा करेगा। इसके आधार पर प्रशासन द्वारा निवास प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, ताकि वह मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा सके।

बता दें कि 15 सितंबर से जम्मू-कश्मीर में मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई है। वहीं, विधानसभा सीटों का परिसीमन करने के बाद वहाँ विधानसभा सीटों को 83 से बढ़ाकर 90 कर दिया गया है। इस जम्मू में 6 सीटों और कश्मीर में एक सीट की बढ़ोतरी की गई है। जम्मू प्रशासन की तर्ज पर अन्य जिलों में भी इस तरह के आदेश जल्दी जारी किए जा सकते हैं।

महबूबा-फारूक का विरोध

प्रशासन के इस निर्णय का जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने विरोध किया है। गुप्कार के नाम से भाजपा विरोधी मंच बनाए जम्मू-कश्मीर की पार्टियों ने आरोप लगाया है कि भाजपा अपने वोटरों को जोड़ रही है। इन पार्टियों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर की डेमोग्राफिक बदलाव कर रही है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में पीपुल्स अलायंस फॉर गुप्कार डिक्लेरेशन (PAGD) ने आरोप लगाया है कि भाजपा सरकार बाहरी लोगों के जरिए चुनाव में धांधली करना चाहती है। पिछले हफ्ते जम्मू में अपनी बैठक में, पीएजीडी ने संशोधित मतदाता सूची में गैर-स्थानीय लोगों के “हेरफेर और समावेश” के खिलाफ लड़ने के लिए 14 सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने ट्वीट किया, “सरकार जम्मू-कश्मीर में 25 लाख गैर-स्थानीय मतदाताओं को जोड़ने की अपनी योजना के साथ आगे बढ़ रही है और हम इस कदम का विरोध करना जारी रखेंगे। बीजेपी चुनाव से डरी हुई है और जानती है कि वह बुरी तरह हारेगी। जम्मू-कश्मीर के लोगों को इन साजिशों को बैलेट बॉक्स में हराना चाहिए।”

उधर, PDP की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट कर कहा, “नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए चुनाव आयोग के नवीनतम आदेश से यह स्पष्ट होता है कि जम्मू में भारत सरकार की औपनिवेशिक बसावट वाली परियोजना शुरू की गई है। वे डोगरा संस्कृति, पहचान, रोजगार और व्यवसाय को पहला बर्बाद कर देंगे।”

महबूबा ने आगे कहा, “जम्मू और कश्मीर के बीच धार्मिक और क्षेत्रीय विभाजन पैदा करने के भाजपा के प्रयासों को विफल किया जाना चाहिए, क्योंकि चाहे वह कश्मीरी हो या डोगरा, हमारी पहचान और अधिकारों की रक्षा तभी संभव होगी जब हम सामूहिक लड़ाई लड़ेंगे।

करवा चौथ पर उनसे लगवाएँ मेहंदी जो ये त्योहार मनाते हैं: मुजफ्फरनगर में VHP का ‘जिहाद पर प्रहार’, हिंदू महिलाओं के लिए अलग-अलग जगह खोले 13 सेंटर

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महिलाओं के लिए विश्व हिंदू परिषद ने 13 मेहंदी सेंटर खोले हैं। ये कदम वीएचपी ने हिंदू महिलाओं को लव जिहाद से बचाने के लिए उठाया है। संगठन का मानना है कि करवा चौथ जैसे मौकों पर हिंदू महिलाओं को मुस्लिम युवक आकर्षित करते हैं। ऐसे में अगर अलग सेंटर खुलेगा तो ऐसी स्थित पैदा ही नहीं हो पाएगी।

जानकारी के मुताबिक, मुजफ्फरनगर के 13 अलग-अलग जगहों पर मेहंदी सेंटर्स को बनाया गया। पोस्टरों में करवा चौथ की बधाइयाँ देते हुए कहा गया है कि इस पवित्र अवसर पर मेहंदी उन्हीं से लगवाएँ जो इन त्योहारों को मनाते हैं। अपना त्योहार, अपनों को रोजगार- जिहाद पर प्रहार।

इस संबंध में संगठन के विभाग अध्यक्ष ललित माहेश्वरी ने कहा, “ये हमारा पहला प्रयास है ताकि सेंटर में हमारी बच्चियाँ ही मेहंदी लगाएँ और पैसा भी समाज में रहे। इस कदम से कट्टरपंथी कमजोर होंगी और हिंदू बच्चियाँ को धर्मपरिवर्तन, पलायन से छुट्टी मिलेगी।” 

आगे माहेश्वरी कहते हैं, “हमने बच्चों को कह दिया है कि तुम मेहंदी लगाने आओ। और भी बच्चियाँ आ रही हैं। समाज की महिलाओं से भी बोला गया है कि वो इन सेंटर्स में मेहंदी लगवाने आएँ यहाँ बड़ी संख्या में बच्चियाँ मेहंदी लगाने आएँगी।”

विहिप के विभाग अध्यक्ष इस बात पर चिंता जताते हैं कि आजतक लव जिहाद के मामले बढ़ रहे हैं, जिसको रोकना विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का लक्ष्य है। इस पहल में संगठनों को हिंदू समाज से समर्थन मिला है। 13 सेंटर बनाए गए हैं ताकि महिलाओं को ज्यादा दूर न जाना पड़े।

उन्होंने यह भी बताया कि 8 लोगों की बजरंग दल की टीम मार्केट में घूम रही हैं। ये टीमें देखेंगी कि अगर कोई विधर्मी करवा चौथ के मौके पर मेहंदी लगाकर औरतों को बहला रहा है तो उसका आधार कार्ड देखते हुए उसकी शिकायत पुलिस में की जाएगी।

इससे पहले इस संबंध में अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं ने अपने कार्यालय पर लठ पूजन करने के बाद चेतावनी दी थी। हिंदू महासभा के सदस्यों ने कहा था अगर कोई विधर्मी हिंदू बहू-बेटियों के हाथों में मेहंदी लगाते हुए पाए गए, तो संगठन के कार्यकर्ता उन्हें सबक सिखाएँगे।

भारत की जिस संस्कृति के खिलाफ बोले राहुल गाँधी से लेकर कोर्ट तक… उस पर बनी फिल्म तोड़ रही ‘KGF 2’ के भी रिकॉर्ड

जिस जल्लीकट्टू (Jallikattu) को राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की पार्टी कॉन्ग्रेस (Congress) और न्यायपालिका ने कभी क्रूर बताकर उस पर रोक लगाने की बात कही थी, उस पर आधारित फिल्म सफलता के नित-नए झंडे गाड़ रही है। फिल्म कांतारा (Kantara) ने बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के मामले में KGF-2 को भी पीछे छोड़ दिया है।

कर्नाटक में अपने दूसरे मंगलवार को फिल्म ने 4 करोड़ से अधिक का बिजनेस किया। दूसरे सोमवार की तरह ही दूसरा मंगलवार को कांतारा का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन KGF चैप्टर 2 से अधिक रहा। केजीएफ ने इस दिन 3 करोड़ रुपए का व्यापार किया था। फिल्म की सफलता को देखते हुए इसे हिंदी में भी रिलीज किया जाएगा।

कांतारा ने कमाई के मामले में अपने पहले सप्ताह को पीछे छोड़ते हुए दूसरे हफ्ते के सिर्फ पाँच दिनों में लगभग 26.50 करोड़ रुपए की कमाई की है। पूरा दूसरा हफ्ता रुपये की ओर बढ़ रहा है। इस पूरे सप्ताह में फिल्म के 33.50-34 करोड़ रुपए कमाने की उम्मीद है, क्योंकि दर्शकों के बीच फिल्म का जलवा बरकरार है।

इस फिल्म का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन 52.75 करोड़ रुपए है, जिसमें से अकेले कर्नाटक से 50.50 करोड़ रुपए कमाए हैं। अभी तक की कमाई के आधार पर कांतारा KGF 2 (171.50 करोड़ रुपए), RRR (86 करोड़ रुपए) और 777 चार्ली (51 करोड़ रुपए) के बाद यह फिल्म राज्य में चौथी सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म है।

फिल्म की कहानी

इस फिल्म की कहानी जल्लीकट्टू जैसे दक्षिण भारत के खेल पर आधारित है, जो आधुनिक और सांस्कृतिक विरासत के बीच एक टकराव को दिखाती है। फिल्म की कहानी में राजा ने देवता माने जाने वाले एक पत्थर के बदले अपनी कुछ जमीन गाँव वालों को दे दी थी। राजा को देवता ने पहले ही बता दिया था कि अगर उसने जमीन वापस ली तो अनर्थ हो जाएगा।

दूसरी तरफ एक वन विभाग के अधिकारी को लगता है कि गाँव के लोग अंधविश्वास के कारण जंगल को नुकसान पहुँचा रहे हैं और पशुओं के साथ क्रूरता कर रहे हैं। यही टकराव फिल्म की कहानी है। फिल्म में गाँव वालों के जंगल और जानवरों से जुड़े अपने विश्वास हैं और उनका मानना है कि जब वो जंगल की सेवा करते हैं तो जंगल पर सिर्फ उनका अधिकार है।

कॉन्ग्रेस ने किया था जल्लीकट्टू का विरोध

2011 में कॉन्ग्रसे के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने उत्सव में सांडों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था। साल 2009 के जल्लीकट्टू अधिनियम संख्या 27 के तमिलनाडु विनियमन के तहत त्योहार जारी रहा। वहीं, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के कानून को रद्द कर दिया और जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था।

हालाँकि, तमिलनाडु में जल्लीकट्टू का आयोजन जारी रहा। साल 2017 में तमिलनाडु सरकार ने भारत के प्रधानमंत्री के समर्थन से एक विधेयक पारित किया, जिसमें जल्लीकट्टू को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (1960) से छूट दी। पहला कानूनी जल्लीकट्टू उत्सव 1 फरवरी 2017 को मदुरै जिले में आयोजित किया गया था। हालाँकि, साल 2021 के जलीकट्टू आयोजन में शामिल होने राहुल गाँधी खुद गए।

साल 2014 में तत्कालीन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध का स्वागत किया था और कहा था, “मैं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करता हूँ। यह एक बर्बर प्रथा को समाप्त कर देगा।” मीडिया से बात करते हुए रमेश ने बाद में उत्सव को जारी रखने के भाजपा के प्रयासों की भी आलोचना की थी। उन्होंने इसे एक ‘बर्बर प्रथा’ कहा था और कहा था कि भाजपा चुनाव से पहले कुछ स्थानीय नेताओं को खुश करने के लिए उनका समर्थन कर रही है।

इसके पहले पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से लेकर कॉन्ग्रेस के कई नेताओं तक पार्टी ने हमेशा जल्लीकट्टू का विरोध किया। ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल के एनजी जयसिम्हा को संबोधित एक पत्र में डॉ सिंह ने त्योहार को मनोरंजन का एक क्रूर रूप बताया। उन्होंने कहा, “हमें बुलफाइट्स को हतोत्साहित करना होगा, जो मनोरंजन का एक क्रूर रूप प्रदान करते हैं।”

शरीर के 56 टुकड़े, कुछ पका कर खाया, कुछ को कच्चा: केरल हत्याकांड में मोहम्मद शफी ने दिए थे ‘जवानी बरकरार’ के टिप्स

केरल हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। वामपंथी कार्यकर्ता भगवल सिंह और उसकी बीवी लैला ने काले जादू के चक्कर में पड़कर ना केवल दोनों महिलाओं की हत्या की, बल्कि मोहम्मद शफी के कहने पर उनके शरीर के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसे पकाकर भी खाया।

दोनों मृत महिलाओं के शरीर के अंगों को मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को पथानामथिट्टा गाँव में दंपति के घर से बरामद किया गया। बताया जा रहा है कि आरोपित दंपति को शफी ने कहा था कि मानव शरीर के अंगों को पकाकर खाने से वह हमेशा जवान रहेंगे।

एक स्थानीय अदालत ने बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को केरल के पथानामथिट्टा (Pathanamthitta) जिले में रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना को अंजाम देने वाले तीनों आरोपितों भगवल सिंह, उसकी पत्नी लैला और मोहम्मद शफी को दो सप्ताह की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपित दंपति पथानामथिट्टा जिले के अरनमुला के पास अपने घर में मसाज सेंटर चलाते थे। उनका एजेंट मोहम्मद शफी जून और सितंबर में दोनों महिलाओं को घर ले आया था, जहाँ दंपति ने उनकी बेरहमी से हत्या कर दी थी।

कोच्चि पुलिस आयुक्त सीएच नागराजू ने मीडियाकर्मियों को बताया कि वो इस पूरे मामले की तहकीकात कई चीजों को ध्यान में रख कर कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “जब हमने मुख्य आरोपित मोहम्मद शफी से पहले पूछताछ की, तो हमें उससे कुछ नहीं मिला। इसके बाद हमने जाँच में पाया कि साजिश रचने वाला मुख्य आरोपित मानसिक रूप से विकृत (साइको) है।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले दोनों महिलाओं का अपहरण किया गया, फिर कत्ल और उसके बाद उनके शवों के साथ दरिंदगी की गई। मोहम्मद शफी के कहने पर दंपति ने दोनों महिलाओं के शव के टुकड़े-टुकड़े किए। इसके बाद उसे पकाकर खा गए। ऐसी खबरें हैं कि लैला ने दोनों महिलाओं की हत्या करने के बाद उनके मांस के कुछ हिस्सों को पकाने की बात स्वीकार की है।

कोच्चि के पुलिस आयुक्त नागराजू ने कहा कि इसकी पुष्टि होनी बाकी है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “दोनों महिलाओं के शरीर के सभी हिस्सों को बरामद कर लिया गया है। एक महिला के शरीर के कुछ हिस्सों को तीन गड्ढों से बरामद किया गया, जहाँ उन्हें दफनाया गया था।”

पुलिस आयुक्त ने आगे कहा, “हम इसकी जाँच भी कर रहे हैं कि क्या इस घटना को आरोपितों के साथ मिलकर और लोगों ने भी अंजाम दिया है। क्या ऐसे और भी मामले हुए हैं।”

कोच्चि के डीसीपी एस शशिधरन ने रविवार (10 अक्टूबर 2022) को बताया, “हम इस बात की भी जाँच कर रहे हैं कि क्या मुख्य आरोपित शफी ने इन महिलाओं को मौत के घाट उतारने से पहले उनके साथ दुष्कर्म तो नहीं किया। इस केस के अलावा शफी के खिलाफ 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं।” शफी के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि वह 75 वर्षीय महिला के बलात्कार के मामले में जमानत पर बाहर था।

शफी ने वामपंथी कार्यकर्ता और उसकी पत्नी से करवाया कत्ल

पुलिस ने इस केस का खुलासा मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को किया था। उन्होंने बताया कि दो महिलाओं के अपहरण और हत्या केस में कोच्चि पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है। इनकी पहचान मोहम्मद शफी, भगवल सिंह और उनकी पत्नी लैला के तौर पर हुई।

भगवल सिंह और उसकी पत्नी लैला ने मोहम्मद शफी के कहने पर दोनों महिलाओं को मारने के बाद उनके शरीर के कुछ हिस्सों को कच्चा खाया। इनमें से एक पीड़िता की सामने की पसलियों को काटा गया था। शरीर के कुछ हिस्सों को पका कर खाया गया क्योंकि मोहम्मद शफी ने कहा था कि मानव अंगों को पका कर खाने से जवानी बरकरार रहती है।

पुलिस ने आगे बताया कि मोहम्मद शफी ने महिलाओं की कुर्बानी देने के लिए उकसाया और फिर औरतों को पैसों का लालच देकर घर तक बुलाया। इसके बाद हत्या को अंजाम दिया गया। इन औरतों की पहचान लॉटरी डीलर पद्मा और सेल्सवुमन रोजलिन के तौर पर हुई थी। दोनों की उम्र 50 पार थी।

दोनों औरतें त्रिशूर जिले की वड्डाक्केनचेरी की रहने वाली थीं। इनमें से एक जून 2022 में गायब हुई थीं जबकि दूसरी सितंबर 2022 में। घटना के दौरान वह एर्नाकुलम के कलाड़ी में थीं। दंपती ने शफी के कहने पर इनकी हत्या के बाद इनके शरीर के 56 टुकड़े किए और इन्हें दफना दिया गया।

कैसे हुआ खुलासा?

दोनों हत्याओं का खुलासा तब हुआ, जब पद्मा के बेटे ने अपनी माँ के गायब होने की शिकायत पुलिस में दी। बेटे ने बताया कि उनकी माँ हमेशा उनको कॉल करती थीं लेकिन जब एक दिन उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया तो वो केरल में उन्हें खोजने आए। यहाँ वह नहीं थीं।

पुलिस ने शिकायत पर जाँच शुरू की। पुलिस ने उनका मोबाइल ट्रेस किया और उस जगह पहुँची, जहाँ शरीर के हिस्से दफन थे। उसी जगह पुलिस को रोजलिन के शव के भी टुकड़े मिले।

कथित तौर पर पहले पैसों की लालच में रोजलिन को मारा गया, लेकिन जब घर की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो फिर शफी ने एक और कुर्बानी देने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, दंपती ने औरतों को पहले चारपाई से बाँधा था। फिर लैला ने शफी के बताए अनुसार उन औरतों का सिर तन से अलग किया और फिर पूरी बॉडी को धारदार हथियार से काट डाला। शरीर बाद में दफना दिया गया।

बता दें कि मोहम्मद शफी उर्फ राशिद ने कुछ महीने पहले पथानामथिट्टा जिले के एलंथूर में रहने वाले भगवल सिंह के साथ फेसबुक पर चैट करना शुरू किया था। पुलिस के मुताबिक, राशिद ने खुद को श्रीदेवी नाम की महिला बताया था। कुछ समय के बाद शफी ने सिंह का विश्वास जीत लिया और उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए एर्नाकुलम के पेरुम्बवूर के एक आलिम की मदद लेने की सलाह दी थी।