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RSS कार्यकर्ता पर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने रात में किया हमला, सिर पर पत्थर मारा: अब तक 20 गिरफ्तार, मुस्लिम संगठन का नेता भी हिरासत में

कर्नाटक के हावेरी में मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) रात कुछ आरएसएस कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने इस संबंध में अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक मुस्लिम संगठन अंजुमन-ए-इस्लाम का अध्यक्ष है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना कर्नाटक के रातिहल्ली गाँव की है। उस समय आरएसएस कार्यकर्ता गुरुराज कुलकर्णी और उनके 3 सहयोगी पथ संचलन का मार्ग तय करने के लिए कार में जा रहे थे। लेकिन तभी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग आए और उनसे बहस करने लगे। इसके बाद आपसी बहस झड़प में बदल गई।

पुलिस ने बताया कि इस दौरान गुरुराज कुलकर्णी के सिर पर पत्थर से हमला हुआ। वहीं बाकी कार्यकर्ता भी पीटे गए जिससे उन्हें भी चोटें आई। घटना की जानकारी होने पर पुलिस भी वहाँ पर पहुँची और उन्होंने घायल आरएसएस कार्यकर्ताओं को इलाज के लिए अस्पताल भेजा।

वीडियो में देख सकते हैं कि एक व्यक्ति अपना माथा पकड़कर खड़ा है। वहीं उसके साथी उसे कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ से बचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा मौके पर पुलिस भी है जो भीड़ को धकेलकर दूर कर रही है।

घटना के बाद गुरुराज की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की है। हावेरी के एसपी ने बताया कि इस घटना में अब तक 20 लोग पकड़े गए हैं। इनमें एक अंजुमन-ए-इस्लाम का नेता भी है। हर अपराधी को अपने किए की सजा भुगतनी होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले से आरएसएस कार्यकर्ता को धमकी देने का मामला सामने आया था। धर्म जागरण के जिला समन्वयक डॉ शशिधर की कार पर लिखा गया था, “किल यू जिहादी।” इसके अलावा याद दिला दें कि बीते दिनों पीएफआई के तमाम नेताओं की गिरफ्तारी के बाद कर्नाटक में आरएसएस कार्यकर्ताओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंकने की घटना सामने आई है। कर्नाटक के साथ ऐसा केरल और तमिलनाडु में भी होता देखा गया था।

मोमिनपुरा हिंसा की जाँच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल के DGP से SIT बनाने को कहा, माँगी रिपोर्ट: पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए ममता सरकार को निर्देश

पश्चिम बंगाल के मोमिनपुरा(Mominpura Violence, West Bengal) में 9 अक्टूबर 2022 को हिंदुओं पर फिर हमला हुआ था। इस दौरान हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने हमला किया और उनके घरों पर पेट्रोल बम फेंके, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई। इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने राज्य के DGP को जरूरी निर्देश दिया है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को मोमिनपुरा हिंसा की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने और इससे संबंधित रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा कि आगे से इस तरह की हिंसा ना हो।

इस घटना को लेकर हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह निर्देश दिया। याचिका में कहा गया है, “तनाव की स्थिति राज्य के अन्य शहरों और हिस्सों में फैल सकती है। पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। स्थिति और खराब होती दिख रही है और प्रशासन के हाथ से निकल गई है।”

जनहित याचिका में राज्य की ममता बनर्जी सरकार (Mamta Banerjee Government) पर आरोप लगाया गया है कि राजधानी कोलकाता (Kolkata) के मोमिनपुर इकबालपुर इलाके में सांप्रदायिक हिंसा भड़कने और दंगों को नियंत्रित करने में विफल रही है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि इस हिंसा के दौरान राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) अधिनियम का अनुपालन किया गया था या नहीं। इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा अब तक लिए गए एक्शन की रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। इसके साथ ही हिंसा के पीड़ितों को मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

बता दें कि कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने इकबालपुर थाने के भीतर भी इस्लामी झंडा लेकर घुसी थी और वहाँ भी काफी उत्पात मचाया था। हिंसा के मद्देनजर प्रदेश के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के गवर्नर व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिख अपील की कि वह मोमिनपुर में सेंट्रोल फोर्स (CAPF) तैनात करें, क्योंकि राज्य सरकार दंगाइयों का मजहब देख उन्हें कुछ भी कहने से बच रही है।

दरअसल, वहाँ पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के मौके पर इस्लामियों ने हिंदुओं के घर व दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें कथित तौर पर हिंदुओं ने खोल दिया। इसी के बाद 700 से अधिक की भीड़ में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। बाद में पता चला कि उपद्रवियों ने इकबालपुर थाने में भी हल्ला मचा रखा था। वह वहाँ इस्लामी झंडों के साथ घुस गए थे और पुलिस उन्हें देख एकदम चुप थी।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ने मोमिनपुर इलाके में भड़की हिंसा के बाद एक वीडियो ट्वीट किया। उन्होंने दावा किया कि हालात देखने के बाद मयूरभंज से हिंदू भाग रहे हैं, उनके घरों पर हमला हो रहा है। पुलिस बिलकुल चुप है। कानून व्यवस्था का कोई नामों निशान नहीं है।

हिंसा भड़कने के बाद की कई वीडियोज सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इनमें दिख रहा है कि कैसे कट्टरपंथी यहाँ-वहाँ देखे बिना हर चीज को तोड़ रहे हैं। साथ ही हिंदुओं के घरों के आस पास जो बड़ी बिल्डिंग हैं उनपर चढ़कर वह पत्थर व पेट्रोल बम फेंक रहे हैं।

इस हिंसा की पीड़ित एक हिंदू महिला ने घटना के दो दिन बताया था, “हम परसों रात से डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने बम फेंककर दहशत का माहौल पैदा कर दिया। हमारे लड़कों को घर से भगा दिया। हमारे घर जला दिए गए। डर से हम लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।”

पीड़िता ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर रहने को विवश होना पड़ा। पुलिस भी 4 घंटे के बाद आई। हिंदू निवासियों ने स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई भी मदद नहीं करने पर दुख व्यक्त किया। जबकि कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस क्षेत्र के बेहद करीब रहते थे। लेकिन इनमें से कोई भी स्थानीय हिंदुओं की मदद के लिए नहीं आया। वहाँ रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस स्टेशन यहाँ से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर है।

एक अन्य हिंदू पीड़ित ने बताया था, “खिड़कियों से हमारे घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए। खिड़की टूट गई थी और काँच पूरे बिस्तर पर बिखरा हुआ था। पथराव की वजह से जगह-जगह ईंटें पड़ी थीं। सुबह हमें गंदगी साफ करनी थी। हमें डर था कि कहीं छत गिर न जाए। हमारा सारा सामान बिस्तर पर था।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को रेप की धमकी: Big Boss से साजिद खान (10 लड़कियों से यौन शोषण का आरोप) को निकालने के लिए लिखी थी चिट्ठी

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल (Swati Maliwal) को इंस्टाग्राम पर रेप की धमकी मिली है। उन्होंने बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत की गई है।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि जब से उन्होंने साजिद खान (Sajid Khan) को बिग बॉस 16 (Big Boss 16) में एंट्री दिए जाने पर सवाल उठाया है, तभी से उन्हें रेप की धमकी दी जा रही है। उन्होंने अपने ट्वीट के साथ धमकी वाले कुछ स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं।

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने अपने ट्वीट में लिखा, “जब से साजिद खान को बिग बॉस से बाहर करने के लिए I&B मंत्री को चिट्ठी लिखी है। तब से मुझे इंस्टाग्राम पर रेप की धमकी दी जा रही है। जाहिर है ये हमारा काम रोकना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस को शिकायत दे रही हूँ। FIR दर्ज करें और जाँच करें। जो भी लोग इनके पीछे है, उनको अरेस्ट करें!”

दरअसल, दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) को रिएलिटी शो बिग बास (Big Boss) से हटाने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि साजिद खान पर 10 से अधिक महिलाओं के यौन उत्पीड़न आरोप है।

स्वाति मालीवाल ने अपने ट्वीट में कहा था, “साजिद खान के खिलाफ 10 महिलाओं ने मीटू (MeToo) मूव्मेंट के दौरान यौन शोषण के आरोप लगाए थे। ये सभी कम्प्लेंट साजिद की घिनौनी मानसिकता दिखाती है। अब ऐसे आदमी को बिग बॉस में जगह दी गई है जो कि पूरी तरह गलत है। मैंने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है कि वह साजिद खान को इस शो से हटवाएँ।”

बता दें कि एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) भी उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने साजिद खान पर MeToo का आरोप लगाया था। शर्लिन ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को स्वाति मालीवाल को धन्यवाद कहा था।

शर्लिन चोपड़ा ने ट्विटर पर लिखा, “धन्यवाद स्वाति जी। अगर सलमान खान सर के किसी करीबी महिला मित्र या रिश्तेदार के साथ साजिद खान कोई घिनौनी हरकत करता, तो क्या सलमान सर साजिद के खिलाफ एक्शन नहीं लेते? सलमान सर हम पीड़ित महिलाओं के भाई-जान क्यों नहीं बन सकते?”

चेहरे से निकली गोली, पाँव पर प्लास्टर चढ़ा: J&K में आतंकियों को दबोचने वाले आर्मी डॉग ‘Zoom’ की हालत में सुधार, 24-48 घंटे अब भी जरूरी

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकियो के साथ मुठभेड़ में घायल हुए आर्मी डॉग ‘जूम’ की हालात में सुधार होने लगा है। आतंकियों पर हमले के समय उसे दो गोलियाँ लगी थीं, जिसके बाद उसको गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया।

अब खबर आई है कि श्रीनगर के वेटरिनरी अस्पताल में सर्जरी के बाद ‘जूम’ की हालत स्थिर है। लेकिन 24-48 घंटे अब भी उसके लिए महत्वपूर्ण हैं। बताया जा रहा है कि जूम के पैर में फ्रैक्चर हुआ था, जिसकी वजह से प्लॉस्टर चढ़ाया गया है। वहीं चेहरे पर गोली लगी थी जिसे निकालकर टांके लगा दिए गए हैं। इन चोटों की वजह से वह अब भी मेडिकल देखरेख में रखा गया है।

बता दें कि लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ 10 अक्टूबर को अनंतनाग के कोकरनाग में हुई मुठभेड़ में 2 आतंकी मारे घए थे। इस मुठभेड़ में जहाँ आतंकियों पर हमले के दौरान जूम घायल हुआ था। वहीं दो सैनिकों को भी चोट आई थी।

ऑपरेशन के दौरान जूम को आतंकियों से घर खाली कराने का काम दिया गया था। लेकिन जैसे ही वो अंदर घुसा आतंकियों ने उस पर गोली चला दी गई। जूम ने फिर भी आतंकियों की पहचान कर सेना की मदद की जिसके बाद सैनिक अपना निशाना साध पाए।

घटना की जानकारी देते हुए चिनार कॉर्प्स ने एक वीडियो शेयर की थी। इस वीडियो में बताया गया था कि जूम प्रशिक्षित डॉग था। जो एक खतरे का एहसास होते ही तुरंत आतंकियों पर हमला करने को तैयार था। वीडियो में दिख रहा है कि एक इशारे पर जूम एक ठिकाने में घुसता है और इसके बाद आतंकी के भेष में दिखे शख्स पर हमला करता है। जूम तब तक लड़ाई करता है जब तक वह दुश्मन को जमीन पर नहीं गिरा देता।

हिंदू महिला सांसद ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन वाली पार्टी छोड़ी, कहा – कायरों से प्रेरित, नस्लवाद को भड़काने वाले

अमेरिका की पहली हिंदू महिला सांसद तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने डेमोक्रेटिक पार्टी (Democratic Party) पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे छोड़ने की घोषणा की है। उन्होंने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को अपने ट्विटर हैंडल पर एक वीडियो में डेमोक्रेटिक पार्टी को छोड़ने की बात कही।

41 वर्षीय गबार्ड ने ट्वीट के साथ लिखा, “मैं अब डेमोक्रेटिक पार्टी में नहीं रह सकती। यह पार्टी कायरता से प्रेरित है, जो देश के हर मुद्दे को नस्लीय बनाकर हमें बाँटते हैं। वर्तमान में डेमोक्रेटिक पार्टी कुछ एलीट लोगों के कंट्रोल में है। ये जंग की बातें करते हैं और श्वेत-विरोधी नस्लवाद को भड़काते हैं। अगर इस पार्टी में कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो मेरे विचारों से इत्तेफाक रखते हैं, तो उन्हें भी तत्काल यह पार्टी छोड़ देनी चाहिए।”

अमेरिका में लोगों की बुनियादी स्वतंत्रता को कमतर आँकने वाली डेमोक्रेटिक पार्टी की आलोचना करते हुए गबार्ड ने आगे कहा, “मैं एक ऐसी सरकार में विश्वास करती हूँ, जो लोगों के लिए हो। लेकिन आज की डेमोक्रेटिक पार्टी इन मूल्यों को दरकिनार कर रही है। यह एक शक्तिशाली अभिजात वर्ग की सरकार बन गई है।”

तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने अभी तक किसी अन्य पार्टी में शामिल होने के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नहीं दी है। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी वो राजनीतिक पार्टी है, जिससे जुड़े हैं अभी के राष्ट्रपति जो बायडेन।

बता दें कि गबार्ड का जन्म 12 अप्रैल 1981 को अमेरिका में हुआ था। पूर्व कॉन्ग्रेस महिला ने 21 साल की उम्र में स्टेटहाउस के लिए चुनाव लड़ा था। वह 2013 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए हवाई से चुनी जाने वाली पहली हिंदू थीं और हवाई से चार बार सांसद रह चुकी हैं।

अमेरिका में कॉन्ग्रेस के लिए निर्वाचित पहली हिंदू तुलसी गबार्ड ने 2013 में पवित्र भगवद गीता पर हाथ रखकर पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। तुलसी को प्रतिनिधि सभा के स्पीकर जॉन बोहनर ने शपथ दिलाई थी।

तुलसी गबार्ड के मुताबिक, उन्हें मुश्किल वक्त में भगवद गीता से ताकत और शांति मिलती है। उन्होंने दो साल पहले हिंदू स्टूडेंट्स काउंसिल की ओर से आयोजित वर्चुअल कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा था कि ऐसे माहौल में कोई भी विश्वास के साथ यह नहीं कह सकता है कि कल क्या होगा? इन हालातों में भक्ति, योग और कर्म योग के अभ्यास से ताकत और शांति प्राप्त कर सकते हैं। यह भगवान कृष्ण ने भगवद गीता में सिखाया है।

हलाला, तीन तलाक में कब दिखाओगे बदलाव: आमिर खान के नए AD में हिंदू रीति-रिवाजों पर उठाया गया सवाल, विवेक अग्निहोत्री बोले- ‘फिर कहते हो हिंदू ट्रोल करते हैं’

आमिर खान और कियारा आडवाणी ने भले ही साथ में कोई फिल्म न की हो, लेकिन एक विज्ञापन में वो दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ नजर आए हैं। ये विज्ञापन AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के लिए शूट किया गया। चूँकि इसकी टैगलाइन थी- बदलाव हमसे है, इसलिए क्रिएटिविटी के नाम पर दिखाया गया कि शादी में अब लड़कों की विदाई उनके घरों से होनी चाहिए। विज्ञापन देखने के बाद सोशल मीडिया पर हिंदू भड़के हुए हैं। उनका कहना है कि बदलाव के नाम पर हिंदू रीति-रिवाज को क्यों चेंज करने पर जोर दिया जा रहा है।

विज्ञापन में देख सकते हैं कि एक गाड़ी में दूल्हा (आमिर खान)-दुल्हन (कियारा आडवाणी) बिदाई के बाद घर जा रहे हैं। आमिर खान कहते हैं कि ये पहली बिदाई है जिसमें लड़की नहीं रोई। इसके बाद अगल सीन गृह प्रवेश का है। यहाँ आमिर पूछते हैं अंदर पहले कौन जाएगा? कियारा जवाब देती हैं कि जो नया है वो। आमिर कहते हैं यानी ‘मैं’। आगे गृह प्रवेश होता है और लड़की की जगह आमिर को घर में प्रवेश करते दिखाया जाता है। आखिर में संदेश दिया जाता है- सदियों से जो प्रथा चलती आ रही है, वो चलती है क्यों? तभी तो हम सवाल पूछते हैं बैंकिंग की हर प्रथा से ताकि आपको मिले बेस्ट सर्विक- AU बैंक- बदलाव हमसे है।

इस एड को देखने के बाद कई लोगों ने इस पर आपत्ति जताई जिनमें से एक विवेक रंजन अग्निहोत्री भी हैं। उन्होंने कहा, “मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आखिर बैंक कबसे सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं में बदलाव लाने की जिम्मेदारी लेने लगे। मुझे लगता है कि AU बैंक को बैंकिंग की जगह एक्टिविज्म करना चाहिए। ऐसी बकवास करते हैं फिर कहते हैं कि हिंदू लोग ट्रोल करते हैं।”

इस एड के बाद आमिर की वो वीडियो शेयर की जा रही है जिसमें उनसे ईद पर जानवरों की कुर्बानी देने पर सवाल पूछा गया था। आमिर ने यहाँ पर कहा था कि उन्हें लगता है कि मजहब बहुत ही पर्सनल मैटर है। सबकी अपनी भावनाएँ हैं। उनकी भी अपनी आस्था है। इसलिए वह दूसरों के बारे में कुछ नहीं कहना चाहते।

इस बयान के साथ ये विज्ञापन दिखाकर कहा जा रहा है कि आमिर का पाखंडी चेहरा देखें। जब वो हिंदू धर्म का विज्ञापन करते हैं तो बदलाव सही है, पर मजहब पर बात आए तो कुछ नहीं कहना है।

यूजर्स का पूछना है कि आखिर ऐसे काम निकाह और हलाला जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं बनाए जाते। हिंदू धर्म के रीति-रिवाजों को गलत दिखाने की क्या होड़ है। लोगों का पूछना है कि आमिर खान तीन तलाक और हलाल में बदलाव पर कब बात करेंगे

दिल्ली के CM केजरीवाल ठरकी हैं? कौन है Esmee, जिसको फॉलो करने के कारण सोशल मीडिया पर #TharkiKejriwal कर रहा ट्रेंड?

अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री हैं। राजनीति में तहलका मचाने आए थे। हमेशा सुर्खियों में रहना भी जानते हैं। फिलहाल सोशल मीडिया की जनता #TharkiKejriwal (ठरकी केजरीवाल) को ट्रेंड करवा रही है। किसी सुंदर महिला के गंदे-गंदे फोटो-वीडियो के साथ अरविंद केजरीवाल का नाम जोड़ा जा रहा है।

ट्विटर पर @Esmee4Keeps नाम का एक अकाउंट है। प्रोफाइल फोटो किसी महिला की है – दिखने में सुंदर और छोटे वस्त्र पहने हुई। अरविंद केजरीवाल ने इस महिला को फॉलो किया, ऐसा ट्विटर पर मौजूद जनता का कहना है। सिर्फ कहना नहीं है, इन लोगों ने सबूत के तौर पर फोटो-वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

TharkiKejriwal (ठरकी केजरीवाल)

किसी महिला को फॉलो कर लेने भर से आखिर कोई ठरकी या हमेशा सेक्स के बारे में सोचने वाला भला कैसे हो सकता है? इसके लिए हमने जाँच पड़ताल की। @Esmee4Keeps नाम के अकाउंट ने कुल चार फोटो ट्वीट किए हैं। सामाजिक दृष्टि से देखें तो चारों फोटो गंदे तो हैं – कहीं सिर्फ पैंटी दिखा रही हैं तो कहीं बिना ब्रा पहने हुए।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शायद यहीं फिसल गए या पिघल गए। वैसे भी किसी बड़े राजनेता ने कभी कहा था कि लड़के हैं, गलतियाँ हो जाती हैं। खैर! सोशल मीडिया की जनता न तो नेता हैं, न ही माफ करने वाली भीड़। केजरीवाल भी रगड़ दिए गए – #TharkiKejriwal (ठरकी केजरीवाल) ट्रेंड करवा के।

भारत की जनता कितनी क्रिएटिव है, नीचे देखिए:

इतना सब हो जाने के बाद हमने अरविंद केजरीवाल के ट्विटर हैंडल की पड़ताल की। रिपोर्ट लिखते समय उनके हैंडल ने @Esmee4Keeps को फॉलो नहीं किया हुआ है। इसका मतलब हुआ कि इस अकाउंट को अनफॉलो कर दिया गया है।

बग्गा के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का हाई कोर्ट का आदेश: उठाने के लिए घर पहुँच गई थी पंजाब पुलिस, केजरीवाल पर ट्वीट को लेकर लिया था एक्शन

भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने का आदेश दिया है। यह FIR पंजाब पुलिस ने 11 मार्च 2022 को दर्ज की थी। बग्गा पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए आपत्तिजनक भाषा प्रयोग करने का आरोप लगाया गया था।

बग्गा की याचिका पर बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को जस्टिस अनूप चिटकारा ने सुनवाई की। उन्होंने कहा कि बग्गा के ट्वीट में ऐसा कुछ नहीं था जो कोई आतंकी गतिविधि जैसा हो। ट्वीट में किसी की धार्मिक भावनाओं को भड़काने जैसा भी कुछ नहीं है।

अदालत ने FIR को निरस्त करने का आदेश दिया। याचिका में मोहाली के SAS नगर स्थित साइबर क्राइम थाने में IPC की धारा 153- A, 505, 505(2)और 506 के तहत दर्ज FIR को निरस्त करने की अपील की गई थी।

गिरफ्तार करने दिल्ली आ गई थी पंजाब पुलिस

‘द कश्मीर फाइल्स’ पर अरविंद केजरीवाल की टिप्पणी के विरोध में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में शामिल बग्गा का एक बयान वायरल हुआ था। उन्होंने कहा था कि केजरीवाल के माफ़ी माँगने तक भाजपा कार्यकर्ता उन्हें चैन से नहीं बैठने देंगे। 25 मार्च को बग्गा ने एक ट्वीट करते हुए लिखा था, “जब 10 लाख ह#मी मरते होंगे तो एक अरविंद केजरीवाल पैदा होता होगा।” बाद में उन्होंने कहा था कि 10 लाख को 10 करोड़ पढ़ा जाए।

इस बयान के आधार पर पटियाला में आप कार्यकर्ता राम कुमार झा ने FIR दर्ज करवाई थी। इस FIR के जवाब में बग्गा ने 27 मार्च 2022 को कहा था, “1 नहीं 100 FIR करना, लेकिन केजरीवाल अगर कश्मीरी हिंदुओ के नरसंहार को झूठा बताएगा तो मैं बोलूँगा। अगर केजरीवाल कश्मीरी हिंदुओ के नरसंहार पर ठहाके लगाएगा तो मैं बोलूँगा। चाहे उसके लिए मुझे जो अंजाम भुगतना पड़े, मैं तैयार हूँ। मैं केजरीवाल को छोड़ने नहीं वाला। नाक में नकेल डाल के रहूँगा उसके।”

बाद में इसी केस में SIT का गठन किया गया। मोहाली साइबर क्राइम थाने पर बग्गा के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें पकड़ने के लिए 6 मई 2022 को पंजाब पुलिस की टीम दिल्ली आई। बग्गा ने उस समय आरोप लगाया था कि लगभग 50 पुलिसकर्मी बिना वर्दी के एक दर्जन प्राइवेट वाहनों में थे। पुलिस वालों पर बग्गा और उनके पिता के साथ मारपीट और पगड़ी खींचने का आरोप लगा था। हालाँकि इस पुलिस टीम को हरियाणा पुलिस ने रास्ते में रोक लिया और बग्गा को वापस दिल्ली ले आया गया। इस दौरान पंजाब पुलिसकर्मियों पर दिल्ली में अवैध रूप से बग्गा की गिरफ्तारी का केस भी दर्ज हुआ था। 8 अप्रैल 2022 को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब पुलिस को बग्गा के खिलाफ प्रयोग किए गए तौर तरीकों पर लताड़ भी लगाई थी।

केरल में 2 औरतों का ‘सिर तन से जुदा’, मोहम्मद शफी ने वामपंथी दंपती के साथ मिल दिया अंजाम: मीडिया ने ‘बलि’ कहकर परोसा, BJP नेता बोले- आतंकी एंगल की हो जाँच

केरल में CPI (M) कार्यकर्ता और उसकी बीवी ने काले जादू के चक्कर में पड़कर दो महिलाओं की हत्या कर डाली। उन्हें फेसबुक पर मिले मोहम्मद शफी उर्फ रशीद नाम के शख्स ने कहा था कि अगर वह इंसान की कुर्बानी देंगे तो उनके घर में पैसा ही पैसा होगा।

इसी लालच के बाद वामपंथी कार्यकर्ता भगवंत सिंह और उसकी बीवी लैला ने दो औरतों को किडनैप किया। फिर उन्हें मार डाला। घटना के बारे में सुन सीएम पिनराई विजयन ने भी हैरानी जताई। वहीं केरल हाईकोर्ट ने भी कहा कि आखिर राज्य किस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शफी ने वामपंथी कार्यकर्ता और उसकी पत्नी से करवाया कत्ल

पुलिस ने इस केस का खुलासा मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को किया था। उन्होंने बताया कि दो महिलाओं के अपहरण और हत्या केस में कोच्चि पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा है। इनकी पहचान मोहम्मद शफी, भगवंत सिंह और उनकी पत्नी लैला के तौर पर हुई है।

पुलिस ने बताया कि मोहम्मद शफी ने महिलाओं की कुर्बानी देने के लिए उकसाया और फिर औरतों को पैसों का लालच देकर घर तक बुलाया। इसके बाद हत्या को अंजाम दिया गया। इन औरतों की पहचान लॉटरी डीलर पद्मा और सेल्सवुमन रोजलिन के तौर पर हुई। 

दोनों की उम्र 50 पार थी। ये त्रिशूर जिले वड्डाक्केनचेरी की रहने वाली थीं। घटना के दौरान वह एर्नाकुलम के कलाड़ी में थीं। दंपती ने शफी के कहने पर इनकी हत्या के बाद इनके शरीर के 50 से ज्यादा टुकड़े किए और इन्हें दफना दिया गया।

कैसे हुआ खुलासा?

दोनों हत्याओं का खुलासा तब हुआ जब पद्मा के बेटे ने अपनी माँ के गायब होने की शिकायत दी। बेटे ने बताया कि उनकी माँ हमेशा उनको कॉल करती थीं लेकिन जब एक दिन उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया तो वो केरल में उन्हें खोजने आए। यहाँ वह नहीं थीं। पुलिस ने शिकायत पर जाँच शुरू की। पुलिस ने उनका मोबाइल ट्रेस किया और उस जगह पहुँची जहाँ शरीर के हिस्से दफन थे। उसी जगह पुलिस को रोजलिन के शव के भी टुकड़े मिले।

कथिततौर पर पहले पैसों की लालच में पहले रोजलिन को मारा गया, लेकिन जब घर की आर्थिक स्थिति नहीं सुधरी तो फिर शफी ने एक और कुर्बानी देने को कहा गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, दंपती ने औरतों को पहले चारपाई से बाँधा था। फिर लैला ने शफी के बताए अनुसार उन औरतों का सिर तन से अलग किया और फिर पूरी बॉडी को धारदार हथियार से काट डाला। शरीर बाद में दफना दिया गया।

मीडिया ने कत्ल को लिखा ‘बलि’

अब ये तो साफ है कि इस घटना में शफी की सबसे मुख्य भूमिका थी। उसने दो अधेड़ उम्र की औरतों का कत्ल करवाया वो भी उनको लालच देकर। लेकिन मीडिया ने हिंदी मीडिया ने इसे ‘बलि’ का नाम देकर परोसा ताकि घटना को एक नया एंगल दिया जा सके। हालाँकि पुलिस के बयान ने ये साफ कर दिया कि हत्या की मंशा क्या थी। वामपंथी कार्यकर्ता और उसकी पत्नी ने लालच में घटना को अंजाम दिया।

मीडिया में कुर्बानी के नाम पर करवाए गए कत्ल को बताया गया ‘बलि’

आतंकी एंगल की हो जाँच

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने बताया कि ये पहली दफा नहीं है जब सीपीआईएम का सक्रिय कार्यकर्ता काला जादू करते पकड़ा गया। पुलिस को इस केस में कट्टरपंथी गतिविधियों की जाँच करनी चाहिए। केस में शपी का नाम है उसके संबंध इस्लामी आतंकी संगठनों से हैं।

हाईकोर्ट ने जताई चिंता

घटना को सुनने के बाद सीएम ने आरोपितों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जबकि हाईकोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि ये मूर्खता से भी परे है। हमें हैरानी की केरल कहाँ जा रहा हैं। आधुनिक होने की राह में हम भटक रहे हैं। लोग अजीब रास्तों पर जा रहे हैं। जस्टिस देवान रामचंद्रन ने कहा, “मैंने अपने 54 सालों में ऐसा कुछ नहीं सुना था।”

कॉन्ग्रेस जमाने के झमेले कैसे-कैसे: ‘बटर चिकन’ नहीं परोसने पर कर्मचारी को झेलनी पड़ी प्रताड़ना, अब हाई कोर्ट ने लगाया मरहम

हरियाणा के एक सरकारी कर्मचारी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने जयचंद नाम के इस कर्मचारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। मामला 2010 का है। कॉन्ग्रेस जमाने में राज्यपाल रहीं मार्गरेट अल्वा के स्वागत समारोह में ‘बटर चिकन’ नहीं परोसे जाने पर इस कर्मचारी को प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी।

कॉन्ग्रेस नेता मार्गरेट अल्वा को विपक्ष ने इस साल उपराष्ट्रपति चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया था। बटर चिकन वाला मामला तब हुआ था, जब वे उत्तराखंड की राज्यपाल हुआ करती थीं। उस समय जगन्नाथ पहाड़िया हरियाणा के राज्यपाल थे। उन्होंने राजभवन में अल्वा के सम्मान में स्वागत समारोह रखा था। मेहमानों के भोजन के लिए दो मेन्यू तय किए गए थे। एक राज्यपाल सहित अन्य VIP लोगों के लिए था। दूसरा मेन्यू राजभवन के कर्मचारियों के लिए था।

जयचंद को इसी दौरान मेहमानों के एक समूह को बटर चिकन नहीं परोसने के लिए चार्जशीट किया गया था। हाई कोर्ट ने अब कहा है कि जयचंद पर लगे आरोप इतने भी गंभीर नहीं हैं कि उसे कड़ी सज़ा दी जाए। टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई जस्टिस अरुण मोगा ने की। जयचंद फिलहाल हरियाणा सरकार के आतिथ्य विभाग में तैनात हैं।

जयचंद को 2010 में अतिथियों को बटर चिकन न परोसने पर राज्य सरकार ने चार्जशीट किया था। उसका यह भी कहना है कि इसी वजह से एक अन्य स्टाफ को गंदी-गंदी गालियाँ भी दी गईं थी। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ पिछले कुछ वर्षों से कोई भी गंभीर शिकायत नहीं दर्ज हुई है। उसका व्यवहार सामान्य रहा है। ऐसे में उसे गंभीर सज़ा दिए जाने का कोई औचित्य नहीं है।

याचिकाकर्ता के अनुसार 2010 में हुए इस समारोह के समय राज्यपाल पहाड़िया के बेटे ओम प्रकाश पहाड़िया ने बचा हुआ बटर चिकन अपने कमरे में मँगवा लिया था। अपने वकील अश्वनी कुमार के माध्यम से जयचंद ने बताया कि राजभवन के तत्कालीन ADC खुद को बटर चिकन न मिलने से काफी नाराज हुए थे। इसके बाद अधिकारियों ने उसे प्रताड़ित किया। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने अधिकारियों को कर्मचारियों के साथ नरमी से पेश आने की नसीहत भी दी है।