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‘अरविंद केजरीवाल, Snacks चाहिए?’: पैंटी पहन किचन में पहुँची ‘पोर्न लेडी’ का ऑफर, गेस्ट हाउस में युवती के साथ बिस्तर वाला किस्सा भी आया था सामने

सोशल मीडिया पर एक संदिग्ध एडल्ट हैंडल से लगातार दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से बात करने की कोशिश की जा रही है। ट्विटर हैंडल @Esmee4Keeps ने अरविंद केजरीवाल के बारे में ट्वीट किया था, जिसके बाद उसे बड़ी संख्या में लोगों के रिएक्शंस मिले थे। अब उसने पूछा है कि क्या उसे एडल्ट प्लेटफॉर्म Onlyfans पर अरविंद केजरीवाल के बारे में बात करनी चाहिए? उसने अपने OF अकाउंट का लिंक भी शेयर किया।

साथ ही उक्त महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी एक एडल्ट तस्वीर भी शेयर की और अरविंद केजरीवाल से द्विअर्थी सवाल पूछा कि क्या उन्हें नाश्ता (Snacks) चाहिए? इस तस्वीर में वो एक छोटी सी पैंटी में किचन में दिख रही है। बता दें कि लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया था कि AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल इस ट्विटर हैंडल को फॉलो करते हैं, जिसके बाद ‘ठरकी केजरीवाल’ भी ट्रेंड हुआ था। इस अकाउंट के फेक होने की भी खबरें हैं।

फ़िलहाल अरविंद केजरीवाल इस हैंडल को फॉलो नहीं कर रहे हैं। इससे पहले इस ट्विटर हैंडल से लिखा गया था, “अरविंद केजरीवाल, OnlyFans पर आपको देख कर अच्छा लगा। अब बाद में बात करते हैं।” इस ट्विटर हैंडल के 1.30 लाख फॉलोवर्स हैं। बता दें कि अक्टूबर 2016 में अरविंद केजरीवाल के एक साथी कपिल बजाज ने उन्हें लेकर बड़ा खुलासा किया था। उन्होंने एक युवती के साथ केजरीवाल के अफेयर का दावा किया था।

उन्होंने बताया था कि जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री बने थे, तब उक्त युवती को एक संस्था का मुखिया बनाया गया था। बजाज ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि अरविंद केजरीवाल खुद से 16 साल छोटी इस युवती को ‘आलू’ कह कर पुकारते थे। ‘PGURUS’ की रिपोर्ट के अनुसार, बजाज ने लिखा था कि उन्होंने तिरुवनंतपुरम के एक गेस्ट हाउस में बिस्तर पर केजरीवाल को उस युवती के साथ देखा था। हालाँकि, ये ब्लॉग अब उपलब्ध नहीं है।

इसी तरह सत्येंद्र जैन ने भी अरविंद केजरीवाल को एक ट्वीट में ‘आलू’ कह कर सम्बोधित किया था। उनके ‘अवैध सम्बन्ध’ के आरोपों के बाद ये शब्द उनके साथ जुड़ गया था। ये बात 2012 की है, जब सत्येंद्र जैन और अरविंद केजरीवाल करीबी नहीं हुआ करते थे। आज केजरीवाल अपने स्वास्थ्य मंत्री पर लगे हर आरोप का बचाव करते हैं। तब सत्येंद्र जैन ने केजरीवाल को ‘भौंकते रहो, काटो मत’ लिखा था। बाद में सत्येंद्र जैन ने इन ट्वीट्स को डिलीट कर लिया था।

कर्नाटक में PFI के कई ठिकानों पर रेड, कट्टरपंथी इस्लामी संगठन के पूर्व चेयरमैन की जमानत याचिका खारिज

कर्नाटक के मंगलुरु (Mangaluru, Karnataka) में गुरुवार (13 अक्टूबर 2022) को पुलिस द्वारा एक बार फिर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ठिकानों पर छापेमारी की सूचना है। बताया जा रहा है कि इस दौरान अब तक 5 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। छापेमारी मंगलुरु के कई अलग-अलग गाँवों में चल रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 5 साल के लिए प्रतिबंधित PFI से जुड़े लोगों की सूचना पुलिस को मिली थी। इसके लिए टीमों का गठन करके गुरुवार (13 अक्टूबर) पुलिस ने मंगलुरु के अलावा सुरताकल, उल्लाल सहित एक साथ कई जगहों पर छापेमारी करनी शुरू कर दी। दबिश सुबह के समय तब दी गई जब कई लोग सो रहे थे। खबर लिखे जाने तक दबिश जारी थी और हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ की जा रही थी।

PFI के पूर्व चेयरमैन की जमानत याचिका ख़ारिज

एक अन्य मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने PFI के पूर्व चेयरमैन अबू बकर की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। लाइव लॉ के मुताबिक, अबू बकर ने खराब सेहत के आधार पर उच्च न्यायालय से जमानत माँगी थी। 70 साल के अबू बकर ने खुद को कैंसर, पार्किंसन, डायबिटीज आदि बीमारियों से पीड़ित बताया था।

जस्टिस अनूप कुमार मेहंदीरत्ता की अदालत में NIA के वकील अक्षय मलिक ने अबू बकर की याचिका का विरोध किया। आखिरकार अदालत ने मामले को पहले ट्रायल कोर्ट के स्पेशल जज के सामने पेश करने का निर्देश देेते हुए अर्जी ख़ारिज कर दी। अबू बकर 22 सितम्बर 2022 से NIA की हिरासत में है।

एक अन्य मामले में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा PFI से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तार 9 लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका देकर अपनी हिरासत को अवैध बताया है। इन आरोपितों के नाम शेख गुलफाम हुसैन, अब्दुल्लाह, मोहसिन खान, मोहम्मद शोएब, अब्दुल रब, हबीब असगर जामाली, वारिस खान, मोहम्मद जाबिर और सलाहुद्दीन हैं।

जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अमित शर्मा की अदालत की खंडपीठ ने आरोपितों के वकीलों से अपने दावों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 नवम्बर 2022 को तय की गई है।

गौरतलब है कि 28 सितम्बर 2022 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने PFI के साथ इसके 8 अन्य सहयोगी संगठनों पर 5 साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। इस संगठन पर न सिर्फ आतंकियों से साठ-गाँठ करने, बल्कि विदेशों से अवैध फंडिंग जुटाने और देश में अस्थिरता फैलाने की साजिश का आरोप था। कई हिन्दूवादी नेताओं की हत्या में भी इस संगठन से जुड़े लोगों की हाथ है।

नेपाल सीमा से लगे मदरसों से घुसपैठ की फिराक में आतंकी: सुल्तानपुर के पत्थरबाज भी मदरसाछाप, शोभायात्रा पर हुआ था हमला

उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे चल रहा है। इस बीच खबर आई है कि नेपाल सीमा से लगे मदरसों का इस्तेमाल कर आतंकी संगठन जमाअत उल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की फिराक में हैं। साथ ही सुल्तानपुर जिले में शोभायात्रा पर हुए हमले का भी कनेक्शन एक मदरसे से जुड़ा बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ समय पहले ही मुदस्सिर, कामिल और अलीनूर नाम के आतंकियों को UP ATS ने नेपाल बॉर्डर से गिरफ्तार किया था। बांग्लादेशी आतंकी अलीनूर की गिरफ्तारी के बाद अब UP ATS और पश्चिम बंगाल की STF उसके साथी अब्दुल्लाह ताल्हा की खोज कर रही हैं। ख़ुफ़िया एजेंसियों का मानना है कि अल कायदा से जुड़े एक्यूआईएस, जेएमबी के आतंकी नेपाल बॉर्डर से भारत में घुसपैठ का प्रयास कर सकते हैं। इसके लिए सीमा पर मौजूद मदरसों का इस्तेमाल हो सकता है।

पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार हुए आतंकियों से काफी अहम जानकारियाँ मिली हैं। उनके पास से पेन ड्राइव और अन्य दस्तावेज बरमाद हुए हैं, जिनकी जाँच करवाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि आतंकी ताल्हा के अलावा भी कुछ अन्य लोग ATS के रडार पर हैं। गौरतलब है कि पिछले माह ऑपइंडिया ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में भारत नेपाल बॉर्डर पर कई मदरसों की जानकारी दी थी। बाद में सरकार द्वारा करवाई गई जाँच में कई मदरसे बिना मान्यता के चलते पाए गए थे।

सुल्तानपुर हिंसा में मदरसा कनेक्शन

एक अन्य घटनाक्रम में 10 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में माँ दुर्गा के प्रतिमा विसर्जन पर हुए हमले का भी मदरसा कनेक्शन सामने आया है। इंडिया TV के मुताबिक पथराव करने वाले आरोपित उसी मदरसे के छात्र हैं, जहाँ से हिंसा शुरू हुई थी। पुलिस ने अब तक कुल 32 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। विसर्जन जुलूस पर पत्थर फेंकने वाले कुल 35 आरोपित चिन्हित किए गए हैं। इस हिंसक घटना में कुल 51 नामजद आरोपितों पर FIR दर्ज हुई है।

इस घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है, जिस से माना जा रहा है कि हमले की तैयारी पहले ही की गई थी। आरोप है कि पथराव से पहले ईंट और पत्थर जमा किए गए और हमले के दौरान प्लानिंग के तहत बिजली गुल कर दी गई थी। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक मदरसे के मौलाना ने ही भीड़ को शोभायात्रा पर हमले के लिए उकसाया था।

UP के मदरसों का 15 नवम्बर तक सर्वे पूरा

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार पूरे प्रदेश के मदरसों पर हुए सर्वे की रिपोर्ट 15 नवम्बर 2022 तक उत्तर प्रदेश शासन सौंप दी जाएगी। पहले यह समय सीमा 25 अक्टूबर की थी। प्रदेश में अब तक कुल 6436 ऐसे मदरसे चिन्हित किए गए हैं जो बिना मान्यता के चल रहे थे। इसमें से 5170 मदरसों का सर्वे पूरा हो चुका है।

उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह के मुताबिक सर्वे का काम 10 सितम्बर से शुरू हुआ था। उन्होंने बताया कि मदरसों का सर्वे अल्पसंख्यक समाज के बच्चों को गुणवत्तायुक्त व बेहतर शिक्षा उपलब्ध करवाने के मद्देनजर करवाया जा रहा है।

हिजाब पर सुप्रीम कोर्ट बँटी: एक ने कहा- इस्लाम में अनिवार्य नहीं, दूसरे ने बताया चॉइस का मामला; अब CJI लेंगे फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने हिजाब मामले में ‘Split Verdict’, अर्थात बँटा हुआ फैसला दिया है। कर्नाटक के शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब में अनुमति के सम्बन्ध में दो जजों की पीठ सुनवाई कर रही थी, जिनकी राय अलग-अलग रही। जहाँ जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कर्नाटक हाईकोर्ट के जजमेंट को ख़ारिज करते हुए इसके खिलाफ याचिकाओं को अनुमति दे दी, वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब बैन वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराया।

अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया है, जो एक बड़ी बेंच का गठन करेंगे। यही बेंच इस मामले की सुनवाई कर के फैसला देगी। जस्टिस हेमंत गुप्ता ने हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज करने का प्रस्ताव रखा। वहीं सुधांशु धुलिया ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने गलत रास्ता चुना और ये पूरा मामला मजहब में अनिवार्यता का न होकर व्यक्तिगत पसंद का है, अनुच्छेद 14 और 19 का है।

उन्होंने कहा कि उनके मन में सबसे बड़ा सवाल लड़कियों की शिक्षा का था कि क्या हम उनके जीवन को बेहतर बना रहे हैं? उन्होंने कर्नाटक सरकार द्वारा 5 फरवरी,2022 को जारी किए गए आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब में क्लासरूम में आने की अनुमति नहीं दी गई थी। जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा कि वो इन प्रतिबंधों में ढील देने के पक्षधर हैं। 10 दिनों की सुनवाई के बाद 22 सितंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में ऑर्डर रिजर्व कर लिया था।

जस्टिस सुधांशु धुलिया ने कहा कि कई क्षेत्रों में लड़कियाँ स्कूल जाने के अलावा घर के कामकाज भी करती हैं, ऐसे में क्या हिजाब पर प्रतिबंध लगा कर हम उसके जीवन को बेहतर बना रहे हैं? वहीं जस्टिस हेमंत गुप्ता ने माना कि हिजाब पहनना इस्लाम मजहब का अनिवार्य हिस्सा नहीं है और राज्य सरकार का आदेश शिक्षा तक पहुँच की भावना के लिहाज से सही है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को सही ठहराया था, जिसमें स्कूल-कॉलेज के प्रबंधनों को यूनिफॉर्म के रूप में हिजाब को बैन करने का अधिकार मिल गया था। मुस्लिम लड़कियाँ इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँची थीं

अपने ही जाल में उलझी AAP, पुराने हाल में कॉन्ग्रेस: यह मत पूछिए गुजरात कौन जीतेगा, यह जानिए कि BJP को सीटें कितनी

एक पुराना जोक है। एक पुत्र अपने पिता से कहता है कि वह 100 मीटर की रेस में तीसरा आया है। प्रफुल्लित ​पिता पूछते हैं कि कुल कितने लोग दौड़ रहे थे? बेटे ने जवाब दिया- 3। लेकिन गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले केवल एक ही पार्टी दौड़ती दिख रही है। अन्य पार्टियों को देखकर ऐसा लगता है कि उन्होंने रेस से पहले ही सरेंडर कर दिया है या फिर रेस शुरू होने से पहले ही उनका दम उखड़ने लगा है।

हालिया घटनाक्रमों को देखें तो दूर से बैठकर ऐसा लगता है कि गुजरात विधानसभा से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) फोकस में है। लेकिन जमीन पर देखें तो पता चलता है कि आप को जो फोकस मिला है, वह अत्यंत नकारात्मक वजहों और सामान्य गुजरातियों के गुस्से के कारण ही आया है। आप की को​शिश रही है कि वह यह संदेश दे सके कि मुकाबला उसके और बीजेपी के बीच होना है। लेकिन इस फेर में उसने खुद को ही फँसा लिया है।

वहीं कॉन्ग्रेस अभी तक रेस शुरू भी नहीं कर सकी है। गुजरात कॉन्ग्रेस चुनावी मूड में आने का प्रयास शुरू ही कर रही थी कि उसके प्रभारी अशोक गहलोत ने आलाकमान के विरुद्ध बिगुल फूँक दिया और उनका सारा ध्यान अपनी कुर्सी बचाने में लग गया। गुजरात में कॉन्ग्रेस कैसे जीते, उसकी रणनीति तैयार करना उनकी प्राथमिकता में कहीं नहीं है। वैसे गुजरात कॉन्ग्रेस के लिए यह कोई नई बात नहीं है। बीते तीन दशक से वह रेस में होने का सिर्फ़ दिखावा करती है और परिणाम आने के बाद ‘हम मनोमंथन करेंगे’ कहकर प्रदेश प्रमुख और अन्य के इस्तीफे लेकर पार्टी अगली पराजय की तैयारियों में लग जाती है।

गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटें है। चुनाव नवंबर के अंत या दिसंबर की शुरुआत में संभावित है। 2017 में पाटीदार आंदोलन के चलते भाजपा केवल 99 सीटों पर सफल हो सकी थी। यह बहुमत से केवल 7 सीट ज़्यादा थी। लेकिन चुनाव के बाद कई कॉन्ग्रेसी MLA भाजपा में शामिल हो गए। आज विधानसभा में बीजेपी बल 111 का है, जबकि कॉन्ग्रेस सिमटकर 62 पर रह गई है।

यदि इतिहास की बात करें तो गुजरात में कॉन्ग्रेस ने संपूर्ण सत्ता का स्वाद अंतिम बार 1985 में चखा था, जब KHAM थ्योरी के दम पर माधव सिंह सोलंकी मुख्यमंत्री बने थे। कॉन्ग्रेस ने तब 149 सीटों पर जीत हासिल की थी। मजे की बात यह है कि माधव सिंह सोलंकी के इस रिकॉर्ड को उनसे कई गुना लोकप्रिय होने के बावजूद नरेंद्र मोदी कभी भी नहीं तोड़ सके।

1995 में भाजपा गुजरात में पहली बार पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने में कामयाब हुई। लेकिन शंकर सिंह वाघेला के खजुराहो कांड के चलते करीब डेढ़ साल में ही सत्ता हाथ से चली गई। वाघेला ने पहले अपनी पार्टी बनाई और फिर कॉन्ग्रेस में विलीन हो गए। 1998 के मध्यावधि चुनावों में बीजेपी ने फिर से पूर्ण बहुमत हासिल किया। उसके बाद से गुजरात की सत्ता में बीजेपी मजबूती से बनी हुई है।

अब फिर से मौजूदा स्थिति पर लौटते हैं। भले आप खुद को बीजेपी से मुकाबिल दिखाने की भरसक कोशिश कर रही हो, लेकिन जमीन पर इस बार भी मुख्य मुकाबला बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच ही होता दिख दिख रहा है। हाँ, बीजेपी विरोधी जो वोट अब तक एकमुश्त कॉन्ग्रेस को मिलते रहे हैं, उसका कुछ हिस्सा इस बार AAP भी ले जा सकती है। मुस्लिम बहुल सीटों पर ओवैसी की AIMIM भी है। फिलहाल जो स्थिति दिख रही उसमें आप और ओवैसी, दोनों कॉन्ग्रेस को नुकसान करते दिख रहे हैं। इसके कारण इस बार कॉन्ग्रेस के 40 के आसपास सिमटने का अनुमान लगाया जा रहा है।

2017 के चुनावों में स्थिति अलग थी। पाटीदार अनामत आंदोलन की मायावी आड़ लेकर कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ी थी। इसके कारण वह बीजेपी को टक्कर देती दिख रही थी। 2017 में यदि पाटीदार आंदोलन का असर न होता तो बीजेपी की विधानसभा में कमोबेश उतनी ही सीटें होती, जितनी फिलवक्त विधानसभा में उसकी संख्या बल है। लेकिन इस बार बीजेपी की सरकार के विरुद्ध ऐसा कोई अंडर करंट नहीं दिख रहा है जो उसे दो तिहाई बहुमत मिलने से रोक सके।

वहीं आम आदमी पार्टी की बात करें तो ऐसा लगता है कि गोपाल इटालिया को गुजरात प्रदेश प्रमुख बना कर अरविंद केजरीवाल ने बहुत बड़ी गलती कर दी है। इटालिया भले एकाध साल से ही आप के गुजरात प्रदेश अध्यक्ष हैं, किन्तु सोशल मीडिया पर उनका इतिहास काफी लंबा और दागदार है। उनकी भाषा और हिंदू धर्म विरुद्ध उनकी टिप्पणियाँ AAP के लिए आत्मघाती साबित हो रही हैं। एक सामान्य गुजराती जो धार्मिक है, उसके मन में इटालिया के प्रति बहुत रोष दिखता है।

वैसे तो आधिकारिक तौर पर गुजरात के विधानसभा का चुनावी शंखनाद नहीं हुआ है। पर चौसर बिछने शुरू हो चुके हैं। अभी जो माहौल है और जिस तरह से गोटी फेंकी जा रही उससे लगता है कि बीजेपी यदि 120 से लेकर 140 सीटों तक नहीं ला पाती है तो यह एक तरह से उसके लिए असफलता ही होगी। 2017 के उलट इस बार माहौल बीजेपी के पक्ष में उसी तरह है, जैसे नरेंद्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुआ करती थी।

‘बकरीद पर बचेंगे तो मुहर्रम पर नाचेंगे’: राहुल गाँधी की PM उम्मीदवारी पर खड़गे का गोलमोल जवाब, BJP ने बताया मुस्लिमों का अपमान

राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे अब पार्टी का अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है और उन्हें गाँधी परिवार का समर्थन भी हासिल है। 2024 लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी को लेकर जब उनसे सवाल पूछा गया, तब उन्होंने गोलमोल जवाब दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे भोपाल में प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे, तब उनसे ये सवाल पूछा गया था।

उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा, “बकरीद में बचेंगे तो मुहर्रम में नाचेंगे।” इस कहावत को कहने के पीछे उनका अर्थ था कि पहले संगठन के चुनाव हो जाएँ, फिर इस पर सोचा जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी की प्रधानमंत्री उम्मीदवारी पर संशय है? या फिर पार्टी इसके लिए भी अध्यक्ष पद की तरह किसी वफादार नेता को आगे करेगी? राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे नेता प्रतिपक्ष थे, जिससे उन्हें इस्तीफा दे दिया है।

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद के लिए उनका सामना केरल के नेता शशि थरूर से है। मध्य प्रदेश में मल्लिकार्जुन खड़गे ने कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उनसे उनके पक्ष में वोट डालने की अपील की। उन्होंने कहा कि वो सामूहिक नेतृत्व में भरोसा रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि गाँधी परिवार में किसी के अध्यक्ष बनने के लिए तैयार न होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं की सलाह पर उन्होंने ये जिम्मेदारी उठाई है।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी लोगों के अधिकारों के लिए लड़ेगी। शशि थरूर के सम्बन्ध में उन्होंने कहा कि दोनों में कोई अंतर नहीं है और सब मिल कर भाजपा के विरुद्ध लड़ेंगे। खड़गे के बकरीद-मुहर्रम वाले बयान को भाजपा ने मुस्लिमों का अपमान करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि मुहर्रम कोई जश्न नहीं है, बल्कि मातम है। सोमवार (17 अक्टूबर, 2022) को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव है और 19 को परिणाम जारी किए जाएँगे।

रेप, प्राइवेट पार्ट पर चाकू से वार… यौन सुख के लिए हत्या करता था मोहम्मद शफी, वामपंथी कार्यकर्ता के सामने ही उसकी बीवी से करता था सेक्स

केरल के कोच्चि में काले जादू के नाम पर दो महिलाओं की कुर्बानी के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपित 52 साल का मोहम्मद शफी उर्फ रशीद है। इन हत्याओं में उसका साथ देने वाला CPI (M) कार्यकर्ता भगवल सिंह और उसकी बीवी लैला को भी पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। मामले की जाँच के लिए कोच्चि के डीसीपी एस शशिधरन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शफी यौन विकृति का शिकार है। वह यौन सुख के लिए किसी भी हद तक जा सकता था। वह रेप के बाद महिलाओं के प्राइवेट पार्ट पर चाकू से वार करता था। उनकी हत्या तक कर देता था। यह भी कहा जा रहा है कि वह भगवल के सामने ही लैला के साथ सेक्स करता था। दोनों भगवंत की हत्या की भी प्लानिंग कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक शफी उन उम्रदराज महिलाओं को झाँसे में लेता था, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती थी। उन्हें वह मदद का भरोसा देता था। विश्वास में लेने के बाद उनकी हत्या कर देता था। वह अपनी यौन संतुष्टि के लिए महिलाओं को तकलीफ देता था, भले ही इसमें उनकी जान ही क्यों न चली जाए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक शफी ने छठी तक पढ़ाई की है। वह 2 बेटियों का अब्बा है। उसने एक फर्जी फेसबुक एकाउंट बना रखा था। इसके जरिए आर्थिक परेशानी से जूझ रहे लोगों से सम्पर्क करने की अपील की थी। खुलासे के मुताबिक वह चीखों और खून को देखकर काफी उत्तेजित होता था। पुलिस के मुताबिक वह भगवल और उनकी पत्नी लैला के सम्पर्क में पिछले 3 सालों से था। भगवल सिंह 68 जबकि लैला 59 साल की है।

एक अन्य रिपोर्ट में शफी के पड़ोसी ने बताया कि उसका कोई घर नहीं है। वह किराए के मकान में रहता था। लेकिन उसके पास कई गाड़ियाँ है। शफी के दोस्त बिलाल के मुताबिक उसके पास एक प्राइवेट बस और स्कार्पिओ भी है। शफी का एक होटल भी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि शफी का नशे के कारोबार से भी कनेक्शन है। शफी पर कुल 10 केस पेंडिंग हैं। इनमें से एक 75 साल की महिला से रेप और उसके प्राइवेट पार्ट पर चाकुओं से वार करने का भी है।

‘खड़ी हो जाओ और अपना टॉप उठाओ’: ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने याद की साजिद खान की करतूत, कहा – भारत आने में भी लग रहा डर

‘कलर्स टीवी’ पर आ रहे शो ‘बिग बॉस 16’ में फिल्म निर्देशक साजिद खान के आने के बाद से विवाद शुरू हो गए हैं। ‘Me Too’ अभियान के तहत कई महिलाओं ने उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोप लगाए थे। उन्हें इस शो से निकाल बाहर करने की माँग हो रही है। इसी बीच एक अन्य अभिनेत्री कनिष्का सोनी ने साजिद खान को लेकर नया खुलासा किया है। ‘दीया और बाती हम’ की अभिनेत्री ने बताया कि कैसे साजिद खान ने उनसे टॉप उठा कर अपना पेट दिखाने को कहा था।

कनिष्का सोनी ने बताया कि ये घटना 2008 की है, जब साजिद खान ने उन्हें अपने घर बुलाया था। एक फिल्म में रोल देने के बहाने उनसे ऐसा करने को कहा गया था। अभिनेत्री ने कहा कि पिछले महीने इंटरव्यूज में ये खुलासा करने के बाद वो डरी हुई हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री के ऐसे लोग किसी की भी हत्या करा सकते हैं। कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्हें भारतीय कानून में भरोसा नहीं है, लेकिन िश्व में विश्वास है और वही न्याय करेंगे।

उन्होंने ‘बिग बॉस 16’ के होस्ट सलमान खान से पूछा कि क्या वो इस शो में आने वाले प्रतिभागियों के चुनाव नहीं देखते हैं? कनिष्का सोनी ने बताया कि वो हॉलीवुड में नई शुरुआत कर रही हैं और इस खुलासे के बाद भारत नहीं आएँगी। इससे पहले कनिष्का सोनी ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों का नाम न लेने का निर्णय लिया था, जिन्होंने उनसे ‘Give And Take’ की डिमांड रखी, लेकिन उसी में से एक डायरेक्टर-प्रोड्यूसर को अब ‘बिग बॉस 16’ में लाया गया है।

कनिष्का सोनी ने बताया, “2008 के समय मैंने 2 रियलिटी शो किए थे। इसके पेमेंट्स नहीं मिलते थे, इसीलिए घर चलाने के लिए मैंने बतौर रिपोर्टर भी काम किया। उसी दौरान साजिद खान से मेरा संपर्क हुआ। मैं उस समय बड़े लोगों के इंटरव्यूज लेती थीं। साजिद नाडियावाला के बंगले पर उन्होंने मुझे बुलाया था। मैंने उनसे बताया कि मैं अभिनय करने आई हूँ और क्या आप मुझे मौका दे सकते हैं। एकाध बार बात करने के बाद जुहू के फ्लैट में उन्होंने मुझे मिलने बुलाया।”

कनिष्का सोनी ने बताया कि वो शर्मीली किस्म की लड़की थीं, ऐसे में उन्हें किसी से अकेले मिलने में डर लगता था। लेकिन, साजिद खान ने बताया कि वो अपनी माँ के साथ रहते हैं और घर में काम करने वाले लोग भी हैं। कनिष्का ने बताया कि उन्होंने सोचा कि रिस्क लेना पड़ेगा और वो अपनी पोर्टफोलियो की फाइल लेकर उनके घर गईं। साजिद खान ने अपने कमरे में अपना पोर्टफोलियो चेक किया और अचानक से उन्हें खड़े होने को कहा।

बकौल कनिष्का सोनी, साजिद खान ने उनकी फिगर देखी और कहा कि ये अच्छा है। वो उस समय अपने बिस्तर पर आराम से बैठे हुए थे। उन्होंने इसके बाद उनका पेट देखने की डिमांड कर डाली। बकौल कनिष्का, उन्हें इन चीजों की आदत नहीं थी और साड़ी के अंदर से भी उनका पेट दिख जाता था तो वो असहज हो जाती थीं। उन्होंने साजिद खान से मना कर दिया। फिर साजिद खान ने उनकी पोर्टफोलियो बंद कर के कहा कि वो उन्हें फिल्म में नहीं ले सकते।

15000 से अधिक लोग खुलेआम करेंगे सेक्स, ऑनलाइन दर्ज करवा लिया है नाम-नंबर: पुतिन के परमाणु धमकी के विरोध में यूक्रेन के लोगों का जवाब

रूस और यूक्रेन में भीषण युद्ध जारी है। इस साल फरवरी में शुरू हुई इस जंग को आठ महीने होने वाले हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की धमकी के बीच खबर है कि यूक्रेन ने भी स्टीमी सेक्स पार्टी (Steamy Sex Party) की योजना बनाई है।

न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन द्वारा परमाणु हमला शुरू करने की स्थिति में टेलीग्राम ग्रुप पर ऑर्गी ऑन शेकेविस्त्सा: ऑफिशियल (Orgy on Shchekavystsa: Official) के लिए 15000 से अधिक लोगों ने साइन अप किया है। इसका हिंदी में मोटा-मोटी मतलब यह हुआ कि 15000 से अधिक लोग सामूहिक तौर पर सेक्स करेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर एक पहाड़ी पर होने वाले कार्नल एक्ट्रावागांजा (Carnal Extravaganza) में भाग लेने वालों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने हाथों को धारियों से सजाएँ, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे किस तरह की गतिविधियों में रुचि रखते हैं। एनल सेक्स में रुचि रखने वालों को तीन धारियाँ, जबकि ओरल सेक्स पसंद करने वालों को चार धारियाँ बनाने के लिए कहा गया।

फोटो साभार: v_serduchka

एक महिला ने रेडियो चैनल से बात करते हुए कहा, “यह निराशा के विपरीत है। सबसे खराब स्थिति में भी लोग कुछ अच्छा खोजेंगे। लेकिन यह यूक्रेन के लोगों का मेगा-आशावाद है।” वहीं एक अन्य आदमी ने कहा, “यह दिखाने का प्रयास है कि जितना अधिक वे हमें डराने की कोशिश करेंगे, उतना ही हम इसे किसी और चीज में बदल देंगे।”

रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच सामूहिक सेक्स को लेकर अपडेट टेलीग्राम चैनल पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से खेरसॉन में जवाबी कार्रवाई को रूसियों को दिखाने के लिए बीडीएसएम जैसी सेक्स पार्टियाँ हैं। अफवाह है कि पुतिन यूक्रेन की सीमा के पास परमाणु परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं और कीव में अधिकारी एहतियात के तौर पर पहले से ही पोटेशियम आयोडाइड की गोलियाँ दे रहे हैं।

बता दें कि यूक्रेन से जंग के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में धमकी देते हुए कहा था कि वह रूस सीमा की रक्षा करने के लिए हर तरह की ताकत का इस्तेमाल करेंगे। उन्होंने पश्चिमी देशों के चेताते हुए कहा था कि वो इस बात को गीदड़ भभकी नहीं समझें।

पुतिन की इस धमकी को सीधा परमाणु हमले की धमकी से जोड़कर देखा जाने लगा। अमेरिका ने रूसी राष्ट्रपति के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि अगर पुतिन ने इस युद्ध में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया तो उसका विनाशकारी परिणाम होगा।

उत्तराखंड में ₹50000 के ईनामी को पकड़ने गई UP पुलिस को बना लिया बंधक, दोनों तरफ की फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत, 5 पुलिसकर्मी भी घायल

अपराधियों के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका उदाहरण उत्तराखंड में देखने को मिला। एक मामले में 50 हजार के ईनामी के यहाँ छापेमारी करने गई यूपी पुलिस को उत्तराखंड में बंधक बना लिया गया। इस दौरान गोलीबारी में उप-प्रमुख की पत्नी की मौत हो गई।

मामला खनन से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश की पुलिस उत्तराखंड के काशीपुर के एक गाँव में बुधवार (12 अक्टूबर 2022) को छापेमारी करने पहुँची थी। दो गाड़ियों में पहुँची पुलिस टीम सादी वर्दी में थी। गाँव में पहुँची पुलिस टीम पर हमला कर लोगों ने बंधक बना लिया।

पुलिस के अनुसार, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा थाने से पुलिस टीम काशीपुर थाना क्षेत्र के भरतपुर गाँव गई प्रमुख गुरताज भुल्लर के घर पहुँची। इस दौरान स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया। मामला बढ़ा तो दोनों ओर से फायरिंग होने लगी। इस फायरिंग में उप-प्रमुख की पत्नी गुरप्रीत कौर की मौत हो गई।

घटना के बाद ग्रामीणों सड़क पर जाम लगा दिया है। वहीं, स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँचकर लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है। वहीं, मुरादाबाद के एसएसपी हेमंत कुटियाल ने बताया कि डंपर चालक के कुंडा थाने में छिपे होने की सूचना पर टीम ने दबिश दी थी। दबिश के दौरान हुई फायरिंग में पाँच जवान भी घायल हुए हैं।

बताया जा रहा है कि जिस डंपर चालक को पकड़ने पुलिस पहुँची थी, वह 50 हजार रुपए का ईनामी है। बता दें कि लगभग एक महीना पहले ठाकुरद्वारा क्षेत्र में भी खनन माफियाओं ने पुलिस से चार डंपर छुड़वा लिए थे। इसको लेकर 150 लोगों पर मुकदमा दर्ज हुआ था।