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हिन्दुओं के घरों-दुकानों पर जबरन लगा दिए इस्लामी झंडे, BJP ने राज्यपाल से की जाँच की माँग, बंगाल में मुस्लिम भीड़ पर आगजनी का आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासनकाल मे आए दिन हिंसा की खबरें सामने आती रहती हैं। यहाँ, मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार किया है रहा है। रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को मोमिनपुर में मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं के घरों में आगजनी और तोड़फोड़ की गई है। यहाँ हुई हिंसा को लेकर भाजपा ने राज्यपाल व गृह मंत्रालय से केंद्रीय बलों की तैनाती व राष्ट्रीय जाँच एजेंसी से घटना की जाँच कराने का आग्रह किया है।

इस बारे में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने ट्वीट कर बताया, “बंगाल भाजपा के विधायक दल ने माननीय राज्यपाल ला गणेशन को ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उनसे मोमिनपुर हिंसा के मद्देनजर केंद्रीय बलों को तैनात करने, एक उच्च स्तरीय समिति बनाने, एनआईए जाँच आदि जैसे तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया गया है।”

वहीं, सुवेंदु अधिकारी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा था, “इससे पहले कि बंगाल में कानून-व्यवस्था हाथ से बाहर हो जाए, मैंने माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राज्यपाल ला गणेसन जी को पत्र लिखकर मोमिनपुर हिंसा और एकबालपुर पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ के मद्देनजर केंद्रीय बलों को तैनात करने का अनुरोध किया है।”

दरअसल, यह पूरी घटना मोमिनपुर इलाके की है। यहाँ ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिमों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर जबरदस्ती इस्लामी झंडे लगा दिए थे। इसके बाद, जब हिन्दुओं ने इन झंडों को निकालने की कोशिश की तो मुस्लिम भड़क गए। इसके बाद, सैकड़ों की तादाद में इकट्ठा होकर इन लोगों ने हिन्दुओं के घरों और दुकानों पर हमला कर दिया।

इस हमले में सिर्फ पत्थर या डंडे ही नहीं बल्कि पेट्रोल बम तक का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। इस घटना में, कई हिन्दुओं के घरों में आग लगी है। साथ ही, उनके वाहनों और दुकानों में भी आगजनी और तोड़फोड़ की गई है। फिलहाल, इस पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है। साथ ही, बंगाल पुलिस 39 आरोपितों की गिरफ्तारी की बात भी कह रही है।

उद्धव ठाकरे की नई पार्टी को मिला मशाल चुनाव चिह्न, नाम – ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’: एकनाथ शिंदे की पार्टी को भी मिला नया नाम

महाराष्ट्र में जारी सियासी खींचतान के बीच चुनाव आयोग ने सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को उद्धव ठाकरे गुट को अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिए मशाल चुनाव चिह्न दिया है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने यह कहते हुए एकनाथ शिंदे गुट को कोई भी चुनाव चिह्न नहीं दिया कि धार्मिक प्रतीकों को चुनाव चिह्न नहीं बनाया जा सकता।

दरअसल, उद्धव गुट ने अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव के लिए मशाल, त्रिशूल और उगता हुआ सूरज इन तीन चिह्नों के विकल्प चुनाव आयोग के सामने रखे थे। वहीं शिंदे गुट ने गदा, उगता हुआ सूरज और त्रिशूल का विकल्प दिया था।

चूँकि गदा और त्रिशूल ही हिन्दू धर्म की आस्था के प्रतीक हैं, इसलिए ये चिह्न उन्हें नहीं दिए गए। उगते सूरज को इसलिए खारिज किया गया है क्योंकि यह पहले से ही ‘द्रविड़ मुनेत्र कड़गम’ का चुनाव चिह्न है। ऐसे में, चुनाव आयोग ने शिंदे गुट के तीनों विकल्पों को खारिज कर दिया है। चूँकि शिंदे गुट के तीनों विकल्प खारिज कर दिए गए हैं, इसलिए अब चुनाव आयोग ने इस गुट को मंगलवार (11 अक्टूबर, 2022) सुबह 10 बजे तक तीन चिह्नों की एक नई सूची प्रस्तुत करने के लिए कहा है।

उद्धव गुट को चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम ‘शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे’ दिया है। वहीं, शिंदे गुट की पार्टी का नाम ‘बालासाहेबांची शिवसेना’ होगा। चुनाव आयोग ने कहा है कि पार्टी के नाम को लेकर शिंदे गुट की जो पहली प्राथमिकता थी, वही विरोधी गुट ने भी पहली प्राथमिकता में रखी थी। ऐसे में दोनों ही गुटों को वह नाम नहीं दिया गया है।

उपचुनाव के लिए चुनाव चिह्नों और पार्टी का नाम मिलने पर उद्धव ठाकरे गुट के सांसद अरविंद सावंत ने कहा है उनका गुट मशाल चिह्न और पार्टी के नाम के साथ खुश है। उन्होंने शिंदे गुट पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिंदे गुट उनके चिह्नों और नामों की नकल कर रहा है।

ठाकरे गुट के एक अन्य करीबी भास्कर जाधव ने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि उद्धव, बालासाहेब और ठाकरे के लिए जो तीन नाम हमारे लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं, उन्हें नए नाम में रखा गया है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में आगामी 3 नवंबर को अंधेरी पूर्व सीट पर विधानसभा उपचुनाव होना है। यह उपचुनाव एक तरीके से दोनों ही गुटों की शक्ति परीक्षण के जैसा होगा। यह सीट शिवसेना विधायक रिमेश लातके के निधन के बात खाली हो गई थी थी। इस सीट से शिवसेना दिवंगत विधायक रिमेश तालके की पत्नी रितुजा तालके को टिकट दिया है। वहीं शिंदे गुट और भाजपा साल 2019 के चुनाव में इस सीट से हारे हुए प्रत्याशी मुरजी पटेल को उतारने की योजना में है।

जब मुलायम सिंह यादव के भाषण के बाद बिजनौर में भड़के थे दंगे, राम मंदिर के लिए यात्रा निकाल रही हिन्दू महिलाएँ भी बनीं निशाना: 20+ मौतों का सरकारी आँकड़ा

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने आज (10 अक्टूबर 2022) गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम साँस ली। उनके बेटे अखिलेश यादव ने ट्वीट कर उनके निधन के बारे में बताया। मुलायम सिंह के निधन के बाद लोग उनके भाषण और उनसे जुड़ी घटनाओं को याद कर रहे हैं। इस क्रम में उनका 1990 में बिजनौर में दिया गया भाषण भी चर्चा में है। इसके बाद बिजनौर में दंगा भड़क गया था। यहाँ कर्फ्यू लगा दिया गया। दंगे में 20 से अधिक लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। वाहनों को फूँक डाला गया। कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया। एक सप्ताह से ज्यादा का कर्फ्यू लगा रहा।

लेखक दिव्य कुमार सोती ने सपा नेता के निधन पर ट्विटर पर लिखा, “नेताजी चमत्कारी भाषण देते थे। 30 अक्टूबर 1990 को बिजनौर में भाषण दिया। सीएम नेताजी का हेलीकाप्टर उड़ा और रैली से उत्साहित होकर लौटी समुदाय विशेष की भीड़ ने पूरे जिले पर हमला कर दिया। राम मंदिर को लेकर यात्रा निकाल रही महिलाएँ उठा ली गईं। सरकारी आँकड़ा 20 मौतों का है, वैसे 200 प्लस। नमन।” इसके साथ ही उन्होंने ”अमर उजाला में प्रकाशित बिजनौर दंगों की उस रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है। यह रिपोर्ट अगस्त 2020 में प्रकाशित की गई थी।

दरअसल, 32 साल (9 अक्टूबर 1990) पहले बिजनौर के प्रदर्शनी मैदान में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सभा का आयोजन किया गया था। मुलायम सिंह की सभा में ट्रकों के अलावा अन्य वाहनों में लदकर एक संप्रदाय के लोग आए थे। मुख्यमंत्री ने सभा के दौरान भाषण दिया था कि अयोध्या में उनके रहते परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। उन्होंने पूरी अयोध्या की किलेबंदी कर दी थी। उस वक्त राम मंदिर को लेकर पहले से ही माहौल गरम था। ऐसे में मुलायम के हेलीकॉप्टर से उड़ते ही बिजनौर में तनाव व्याप्त हो गया। सभा के बाद दोनों संप्रदाय के लोग कई जगहों पर आमने-सामने आ गए थे। सभा से लौटते हुए वहाँ जमकर पथराव हुआ। यह तनाव कई दिनों तक चलता रहा।

30 अक्टूबर 1990 को बड़ी तादाद में लोग बिजनौर के एक स्कूल में राम मंदिर आंदोलन के मुद्दे को लेकर इकट्ठा हुए थे। उसके बाद कलक्ट्रेट में ज्ञापन देने के लिए निकले थे। जैसे ही लोग बाजार में घुसे उन पर पथराव और गोलीबारी शुरू हो गई। बिजनौर में दंगा भड़क गया। बताया जाता है कि इसमें 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। इस दंगे को याद करके आज भी लोग सिहर उठते हैं।

तेलंगाना के CM ने बदला पार्टी का नाम, भारत के नक़्शे से गायब कर दिया जम्मू कश्मीर और लद्दाख: बोली BJP – ये देश की अखंडता का अपमान

तेलंगाना राष्ट्रीय समिति (TRS) का नाम बदलकर भारत राष्ट्रीय समिति (BRS) करने के कुछ दिनों बाद ही सीएम के चंद्रशेखर राव (KCR) विवादों में हैं। चंद्रशेखर राव पर भारत राष्ट्रीय समिति के बैनर और पोस्टर में भारत का गलत नक्शा दिखाने और देश की अखंडता का अपमान करने का आरोप है। ये बैनर-पोस्टर राजधानी हैदराबाद में कई जगहों पर लगाए गए हैं।

भारत के अधूरे नक्शे में बीआरएस सुप्रीमो केसीआर की फोटो के अलावा खैरताबाद के विधायक दानम नागेंद्र और उनकी पार्टी के अन्य नेताओं की तस्वीरें भी लगी हुई हैं। यह पोस्टर सामने आने के बाद सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही है। तेलगांना के निजामाबाद से बीजेपी सांसद अरविंद धर्मपुरी ने ट्विटर पर KCR की पार्टी का पोस्टर शेयर किया है, जिसमें आधा कश्मीर गायब है। बीजेपी सांसद का आरोप है कि KCR की पार्टी ने भारत के नक्शे को गलत दिखाया है, यह भारत के संविधान और अखंडता का अपमान है।

बीजेपी सांसद ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में देश का क्षेत्र परिभाषित किया गया है। पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है। पीओके को देश के नक्शे से हटाकर केसीआर की पार्टी पाकिस्तान का समर्थन कर रही है।” वहीं, इस मामले पर बीजेपी के ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री डॉ. पार्थसारथी ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “यह देश का नेता नहीं बल्कि देशद्रोही है।” मालूम हो कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर ने दशहरे के मौके पर अपनी पार्टी (तेलंगाना राष्ट्र समिति) का नया नाम भारत राष्ट्र समिति करने का ऐलान किया था।

बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब किसी पार्टी ने भारत के गलत नक्शे को दिखाकर देश का अपमान किया हो। इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने भी यही गलती की थी। सितंबर 2022 में शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने अपनी पार्टी के घोषणा पत्र को लेकर ट्विटर पर भारत का एक नक्शा साझा किया था। इस नक्शे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का कुछ हिस्सा गायब था। हालाँकि, इस पर विवाद गहराने के बाद उन्होंने इसे अपने ट्विटर हैंडल से हटा दिया था।

‘साँस लेने में भी लोगों को हो रही तकलीफ’: सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध हटाने से किया इनकार, बढ़ते प्रदूषण पर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध हटाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह दिल्ली में पटाखों से प्रतिबंध नहीं हटाएँगे, उनका आदेश बिल्कुल स्पष्ट है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस दीवाली भी पटाखों पर बैन लगा रहेगा और दिल्ली वाले यह दीवाली भी बिना पटाखों के ही मनाएँगे।

दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के स्तर पर चिंता जताई है। सुप्रीम कोर्ट में एम आर शाह की बेंच ने कहा है कि दिल्ली में पर्यावरण की स्थिति बेहद ही खराब हो चुकी है। यहाँ लोगों को साँस लेने में भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में पटाखों पर लगे बैन को हटाया नहीं जा सकता है। अगर ऐसा करते हैं, तो प्रदूषण अपने चरम पर पहुँच जाएगा।

इस याचिका में सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता मनोज तिवारी से कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर हमारा आदेश बिल्कुल स्पष्ट है। हम पटाखों की अनुमति कैसे दे सकते हैं, भले ही वे ग्रीन पटाखे हों। क्या आपने दिल्ली का प्रदूषण देखा है? सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान याचिका को अन्य लंबित मामलों के साथ जोड़ते हुए यह भी कहा कि पराली के मौसम भी आ रहा है। ऐसे में ग्रीन पटाखों के उपयोग को भी प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अगले कुछ दिन हम सभी के लिए बेहद कठिन होंगे।

दरअसल, दिल्ली सरकार ने आदेश जारी कर आगामी 1 जनवरी, 2023 तक पटाखों के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई थी। यहाँ तक कि पटाखों की ऑनलाइन बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। दिल्ली सरकार के इस फैसले का पटाखा व्यावसायियों ने विरोध करते हुए इसे निराशाजनक बताया था। इसके बाद ही, मनोज तिवारी ने दिल्ली में पटाखा बैन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने अपनी याचिका में दिल्ली सरकार के उस आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि सरकार के आदेश में हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों और अन्य लोगों के त्यौहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री, खरीद और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

उन्होंने अपनी याचिका में सभी राज्यों को यह निर्देश देने की भी माँग की थी कि आगामी त्यौहारी सीजन के दौरान पटाखों की बिक्री या उपयोग करने वाले आम लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जैसी कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

मनोज तिवारी ने याचिका में कहा था, “दीपावली जैसे त्योहारों के मौसम में इस तरह की गिरफ्तारी और प्राथमिकी से न केवल बड़े पैमाने पर समाज में एक बहुत बुरा संदेश जाता है। बल्कि, अनावश्यक रूप से लोगों में भय और गुस्सा भी पैदा हुआ है।” गौरतलब है, गत वर्ष कोर्ट ने कहा था कि पटाखों के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं है। केवल वे पटाखे जिनमें बेरियम एसिड होता है वह पूरी तरह बैन है। सुप्रीम कोर्ट के रुख से साफ है कि दिवाली, छठ पूजा, गुरु नानक जयंती, क्रिसमस और नए साल पर दिल्ली में पटाखों पर प्रतिबंध जारी रहेगा।

‘काफिर की रूह को नहीं मिलती शांति, जहन्नुम में जाएगा’: जिनके लिए रामभक्तों पर गोली चलवा कर ‘मुल्ला’ बने मुलायम, वही मुस्लिम मना रहे निधन का जश्न

अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) अब इस दुनिया में नहीं रहे। मुलायम के निधन की खबर सुनकर उनके विरोधी नेता भी शोक जता रहे हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम उनके जाने का जश्न मना रहे हैं। फेसबुक पर अली सोहराब नाम के शख्स ने लिखा, “मुलायम सिंह यादव अब इस दुनिया में नहीं रहे।” इसके साथ उसने #FNJ भी लिखा है।

अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

इस पोस्ट को देखते ही फेसबुक पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की मानो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा। ज्यादातर ने इस पोस्ट पर लॉफिंग इमोजी बनाया है। मोहम्मद शाहिद नाम का एक यूजर पूछता है कि ये FNJ क्या है। इस पर सलाफी नाम का यूजर कहता है कि ‘फी नारे जहन्नम’।

फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

इसके अलावा ये लोग उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को ‘काफिर’ बताकर उनके निधन की खबर वाली फेसबुक पोस्ट पर हाहा रिएक्शन दे रहे हैं।

फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट
फोटो साभार: अली सोहराब का फेसबुक पोस्ट

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अखिलेश यादव का बयान ट्वीट करके कहा गया- “मेरे आदरणीय पिता जी और सबके नेता जी नहीं रहे।”

बता दें कि 2 नवंबर, 1990 को अयोध्या में रामधुन में राम भक्तों पर फायरिंग हुई थी। अयोध्या की गलियों में रामभक्तों को दौड़ा-दौड़ा कर निशाना बनाया गया। 3 नवंबर 1990 को जनसत्ता में छपी एक रिपोर्ट में लिखा गया, “राजस्थान के श्रीगंगानगर का एक कारसेवक, जिसका नाम पता नहीं चल पाया है, गोली लगते ही गिर पड़ा और उसने अपने खून से सड़क पर लिखा सीताराम। पता नहीं यह उसका नाम था या भगवान का स्मरण। मगर सड़क पर गिरने के बाद भी सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उसकी खोपड़ी पर सात गोलियाँ मारी।”

कारसेवकों द्वारा जारी की गई सूची में 40 कारसेवकों के मारे जाने की बात कही गई थी। जबकि विश्व हिन्दू परिषद ने 59 लोगों के मारे जाने की बात कही थी। राम भक्तों के इस नरसंहार के बाद मुलायम को ‘मौलाना मुलायम’ का तमगा हासिल हुआ।

5 दिन में मात्र ₹6.56 करोड़! सलमान खान की नई फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर हो गया बुरा हाल, दशहरा की छुट्टियों के बावजूद दर्शकों का अता-पता नहीं

तेलुगु फिल्मों के मेगास्टार चिरंजीवी की फिल्म ‘गॉडफादर’ हिंदी भाषी क्षेत्रों में अच्छा नहीं कर रही है। ये सब इसके बावजूद हो रहा है, जब फिल्म में कैमीरो अपीयरेंस में सलमान खान भी है। 5 दिनों के क्सटेंडेड वीकेंड में ‘गॉडफादर’ का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन मात्र 6.56 करोड़ रुपए रहा है। फिल्म के पहले टीजर में भी चिरंजीवी के साथ सलमान खान को दिखाया गया था। हालाँकि, तेलुगु में फिल्म का प्रदर्शन अच्छा रहा है।

फिल्म समीक्षक एवं विश्लेषक तरण आदर्श के अनुसार, ‘गॉडफादर’ ने बुधवार (5 अक्टूबर, 2022) को 1.61 करोड़ रुपए की ओपनिंग ली। लेकिन, अगले दो दिनों में इसका कलेक्शन गिर कर 87 लाख रुपए और 97 लाख रुपए पहुँच गया। शनिवार को 1.45 करोड़ रुपए और रविवार को 1.67 करोड़ रुपए की कमाई कर के इसने औसत से भी नीचा प्रदर्शन किया। इस तरह साउथ की फिल्म में सलमान खान का अनुभव अच्छा नहीं रहा।

वहीं वर्ल्डवाइड कलेक्शंस की बात करें तो चिरंजीवी के कारण ये अच्छा रहा है। मेगास्टार की पिछले फ़िल्में लगातार फ्लॉप हो रही थीं। उन्होंने 2017 में लगभग 10 वर्षों बाद लीड रोल में ‘खैदी नंबर 786’ से वापसी की थी और ये चली भी। ये विजय की तमिल फिल्म ‘Kaththi’ की रीमेक थी। हालाँकि, इसके बाद चिरंजीवी की ‘सायरा नरसिंहा रेड्डी (2019)’ और ‘आचार्य (2022)’ फ्लॉप रही। ‘गॉडफादर’ से उन्हें कमबैक की उम्मीदें थीं।

‘गॉडफादर’ फिल्म ने अब तक 85 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है और ये दुनिया भर में 100 करोड़ रुपए कमाने की तरफ बढ़ रही है। हालाँकि, इसे हिट की श्रेणी में जाने के लिए और कमाने की ज़रूरत है। उधर तमिल फिल्म PS-1 ने दुनिया भर में 380 करोड़ रुपए की कमाई कर ली है। विक्रम और ऐश्वर्या राय की इस फिल्म में कई बड़े स्टार्स हैं। सैफ अली खान और ऋतिक रोशन की ‘विक्रम वेधा’ उधर फ्लॉप हो गई है।

‘वीडियो में किसी का नाम नहीं लिया, AIMIM के इशारे पर दर्ज हुआ झूठा केस’: MLA राजा सिंह ने निलंबन के बाद भाजपा की नोटिस का दिया जवाब

भाजपा ने तेलंगाना के अपने विधायक राजा सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया था। साथ ही उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करते हुए 10 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया था। राजा सिंह पर पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का आरोप लगने और वीडियो वायरल होने के बाद उन पर ये कार्रवाई की गई थी। उन्हें गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया गया था। अब विधायक राजा सिंह ने भाजपा हाईकमान को अपनी प्रतिक्रिया भेजी है।

भाजपा की केंद्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष ओम पाठक को भेजे गए पत्र में विधायक ने कहा है कि उन्हें 2014 और 2018 में लगातार दो बार हैदराबाद के गोशमहल विधानसभा क्षेत्र से बतौर भाजपा उम्मीदवार जीत मिली है। उन्होंने चुनाव लड़ने का मौका देने के लिए भाजपा का धन्यवाद करते हुए कहा कि वो 2014 में तेलंगाना में चुने गए भाजपा के 5 विधायकों में से एक थे और उन्हें बाकी चारों के साथ मिल कर काम करने का मौका मिला।

राजा सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में भाजपा आलाकमान को लिखा, “2018 में भाजपा की तरफ से जीत दर्ज करने वाला मैं तेलंगाना में एकमात्र विधानसभा उम्मीदवार था। 2020-21 के उपचुनावों में पार्टी के दो अन्य उम्मीदवार जीत कर विधायक बने। उसके बाद से ही हम तीनों लगातार पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे हैं। 8 वर्षों के विधानसभा कार्यकाल में मैंने अब तक पार्टी के अनुशासन को भंग नहीं किया। मैं पार्टी के हर कार्यक्रम में हिस्सा लेता हूँ।”

हैदराबाद के गोशमहल से विधायक राजा सिंह ने निलंबन पर भाजपा को भेजी प्रतिक्रिया

विधायक राजा सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उनका जो वीडियो वायरल हुआ है, उसमें उन्होंने न तो किसी कड़े शब्द का प्रयोग किया है और न ही किसी को गाली दी है। उन्होंने ये भी बताया कि इस वीडियो में उन्होंने किसी का नाम भी नहीं लिया है। विधायक ने बताया कि उन्होंने किसी समाज की भावनाएँ आहत करने वाला कोई कार्य नहीं किया और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के इशारे पर हैदराबाद पुलिस ने उन पर झूठा केस दर्ज कर लिया।

राजा सिंह ने पत्र में लिखा है कि जब अदालत ने भी उनके खिलाफ मामले को ख़ारिज कर दिया तो PD एक्ट लगा कर उन्हें जेल में डाला गया। उन्होंने बताया कि वीडियो में गूगल की सूचनाओं का प्रयोग करते हुए उन्होंने बस कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी की नक़ल की थी। उन्होंने किसी मजहब की आलोचना नहीं की। उन्होंने भारत माता की सेवा के लिए आगे मौका देने की माँग करते हुए कहा कि वो आगे ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे पार्टी का अनुशासन भंग हो और पार्टी की विधारधारा के हिसाब से चलते रहेंगे।

गजवा-ए-हिंद का सपना, पुलिस से बचने के लिए मोबाइल में खास App: UP ATS ने गिरफ्तार किए 8 आतंकी, बरामद हुए 2.5 लाख रुपए और जिहादी सामग्री

उत्तर प्रदेश की एंटी टेररिज्म स्क्वॉड ने 8 आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ये आतंकी जमात-उल-मुजाहिद्दीन और अलकायदा से जुड़े बताए जा रहे हैं। खबरों के अनुसार इन सबने यूपी को दहलाने की साजिश रची हुई थी। लेकिन इससे पहले ये अपने मनसूबों में कामयाब होते ATS ने इन्हें धर दबोचा।

समाचार एजेंसी एएनआई ने बताया, यूपी एटीएस ने बांग्लादेशी आतंकवादी संगठन ‘जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश और अल कायदा इंडियन सबकॉन्टिनेंट या अल कायदा बर्र-ए-सगीर’ से जुड़े 8 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया। संदिग्ध आतंकियों के पास से 2.5 लाख रुपए नकद बरामद किए गए हैं।

8 आरोपितों की पहचान लुकमान, कारी शहजाद, कामिल, मोहम्मद अलीम, शहजाद, अली नूर (बांग्लादेशी), नवाजिश अंसारी और मुदस्सिर के तौर पर हुई है। इनमें ज्यादातर सहारनपुर इलाके से हैं। पुलिस इन सबको हिरासत में लेने के बाद अपनी जाँच कर रही है।

इनके पास से अभी तक पेन ड्राइव, मोबाइल समेत कैश बरामद हुआ है। इनके अलावा कुछ जिहादी सामग्री मिलने की बातें भी सामने आई हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 121ए, 123 व यूएपीए की धारा 18, 18बी, 20, 38, 40 के तहत केस दर्ज किया है।

एटीएस ने बताया कि भारत में गजवा-ए-हिंद का सपना लेकर अपने साथ लोगों को जोड़ने का काम करने वाले ये संदिग्ध अपना नाम बदल-बदल कर भारत में रहते हैं और पुलिस व एजेंसियों से बचने के लिए कुछ खास मोबाइल एप्स को प्रयोग में लाते हैं। इनके अलावा इन एप्स पर बातचीत के लिए कोड भी नए लोगों को दिया जाता है। ये लोग

‘ऐसी याचिकाएँ लेकर ही क्यों आते हो?’: सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग वाली याचिका, सुनवाई से भी किया इनकार

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग लंबे समय से चल रही है। इसी सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का निर्देश देने की अपील की गई थी। हालाँकि, सोमवार (10 अक्टूबर, 2022) को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। जस्टिस एस के कौल और जस्टिस अभय एस ओका की बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि आखिर गाय के राष्ट्रीय पशु न होने से कौन सा मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है जो आपने अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है?

उन्होंने सवाल किया कि आप ऐसी चिढ़ वाली याचिकाओं के साथ कोर्ट में क्यों आते हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “क्या यह अदालत का काम है? आप ऐसी याचिकाएँ दायर ही क्यों करते हैं कि हमें उस पर जुर्माना लगाना पड़े? कौन-से मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ? आप अदालत आए हैं तो क्या हम नकारात्मक नतीजे की परवाह किए बिना इस पर सुनवाई करें?”

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि गौ संरक्षण बहुत जरूरी है। इसके बाद, सुप्रीम कोर्ट की ओर से वकील को आगाह किया कि याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली और मामले को खारिज कर दिया गया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘गोवंश सेवा सदन’ और अन्य की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इसमें केन्द्र सरकार को गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का निर्देश देने का माँग की गई थी।

दरअसल, गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग लंबे समय से की जा रही है। दिसंबर 2021 में राज्यसभा में भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने गौ हत्या पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय कानून बनाए जाने की माँग की थी। किरोड़ी लाल मीणा ने गौहत्या पर रोक के लिए केंद्रीय कानून बनाने के साथ ही गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की माँग की थी।

राज्यसभा के शून्यकाल के दौरान किरोड़ीलाल मीणा ने कहा था जब किसी देश की संस्कृति और उसकी आस्था को ठेस पहुँचती है, तो देश कमजोर होता है। उन्होंने बताया था कि चाणक्य ने अर्थशास्त्र में लिखा है कि किसी देश को नष्ट करना है, तो पहले उसकी संस्कृति नष्ट कर दो, देश अपने आप ही नष्ट हो जाएगा। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर राज्यों में गौ-हत्या पर रोक है।

उन्होंने विशेष उल्लेख के जरिए यह भी कहा था कि सनातन धर्म में गाय को माता मानकर पूजा जाता है। गाय हिंदू संस्कृति का मजबूत प्रतीक और आस्था का केंद्र है। इसलिए जब कोई भी गौ हत्या कर देता है, तो सामाजिक सौहार्द्र बिगड़ जाता है। गाय का मांस खाना किसी का मौलिक अधिकार नहीं हो सकता, बल्कि जो लोग गाय की पूजा करते हैं, गाय की रक्षा करना उनका सबसे बड़ा कर्तव्य है।