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बंगाल में ₹5000 करोड़ के घोटाले को पार्थ चटर्जी ने अकेले नहीं दिया अंजाम, TMC विधायक मणिक भट्टाचार्य भी थे साथ: ED ने गिरफ्तार किया

पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी की गिरफ्तारी के बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के विधायक माणिक भट्टाचार्य (Trinamool Congress MLA Manik Bhattacharya) को गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) की सुबह भट्टाचार्य को गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दायर चार्जशीट में यह खुलासा किया गया था कि पार्थ चटर्जी और माणिक भट्टाचार्य ने मिलकर शिक्षक भर्ती में धांधली की है। पार्थ चटर्जी के फोन से भी जाँच एजेंसी को माणिक भट्टाचार्य के बारे में कई जानकारियाँ मिली थीं।

अधिकारियों ने टीएमसी के विधायक को सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को पूछताछ के लिए बुलाया था। रातभर चली लंबी पूछताछ के बाद उन्हें आज गिरफ्तार कर लिया गया। इस मामले में भट्टाचार्य केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) और ईडी की जाँच के दायरे में थे। जुलाई 2022 में जाँच एजेंसियों ने उनके घर की तलाशी ली थी। वहाँ से उन्होंने एक हार्ड डिस्क ड्राइव भी बरामद किया था, जिसमें भर्ती घोटाले में नौकरी पाने वाले अयोग्य उम्मीदवारों की सूची दिखाई गई थी।

माणिक भट्टाचार्य पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। कलकत्ता हाई कोर्ट के न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ ने सितंबर 2022 में उन्हें प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश दिया था।

बताया गया था कि सुप्रीम और हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद माणिक सीबीआई दफ्तर में नहीं पहुँचे थे। उनका मोबाइल फोन भी बंद था। इसके बाद हाई कोर्ट की तरफ से इस मामले के लिए नियुक्त किए गए एसीपी ने जादवपुर थाने जाकर उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालाँकि, माणिक के घरवालों ने कहा था कि वे सुबह ही निकल गए थे। जबकि उनके कुछ करीबियों के मुताबिक वे दिल्ली में थे।

बता दें कि पश्चिम बंगाल के शिक्षक घोटाले में पार्थ चटर्जी और अर्पिता मुखर्जी को ईडी ने 23 जुलाई 2022 को गिरफ्तार किया था। अपनी करीबी अर्पिता मुखर्जी के अलग-अलग फ्लैटों में मिले करोड़ों रुपए को लेकर पार्थ चटर्जी ने अलग ही कहानी बयाँ की थी। 28 सितंबर, 2022 को पार्थ चटर्जी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई थी। इस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पार्थ को जमानत देने का विरोध किया था। ED ने अपने 14,643 पन्नों के दस्तावेज कोर्ट में जमा किए थे। एजेंसी ने खुलासा किया था कि पार्थ ने अपनी पत्नी की मौत के बाद उसकी कंपनी टेक्स्ट फैब प्राइवेट लिमिटेड के अधिकांश शेयर अर्पिता के नाम कर दिए थे।

ट्विन टॉवर गिराने का दिया आदेश, 30 साल बाद अपने पिता का आदेश पलटा : जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ बनेंगे देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश, CJI यूयू ललित ने भेजा नाम

देश के मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित (CJI UU Lalit) ने मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) के नाम की सिफारिश की है। सीजेआई यूयू ललित आगामी 8 नवंबर को अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। जिसके बाद, 9 नवंबर को जस्टिस चंद्रचूड़ देश के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कानून मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार (7 अक्टूबर 202) को सीजेआई यूयू ललित को पत्र लिखकर उनसे उनके उत्तराधिकारी का नाम बताने के लिए कहा था। इसके बाद सीजेआई ललित ने जस्टिस चंद्रचूड़ को अपना उत्तराधिकारी बताया। नियमानुसार, देश के वर्तमान न्यायाधीश जिसके नाम की भी सिफारिश करते हैं वही व्यक्ति देश का अगला मुख्य न्यायाधीश होता है।

वर्तमान में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उदय उमेश ललित (यूयू ललित) देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश हैं और अब जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (डीवाई चंद्रचूड़) देश के 50वें मुख्य न्यायाधीश होंगे। सीजेआई यूयू ललित का कार्यकाल 8 नवंबर 2022 को खत्म हो रहा है। जबकि, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 9 नवंबर से शुरू होकर 10 नवंबर 2024 तक होगा।

जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता यशवंत विष्णु चंद्रचूड़ (याईवी चंद्रचूड़) देश के 16वें मुख्य न्यायाधीश थे। उनका कार्यकाल 22 फरवरी 1978 से 11 जुलाई 1985 तक लगभग 7 साल का था। भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में यह अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल है। पिता के रिटायर होने के 37 साल बाद अब जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ उसी कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं।

11 नवंबर 1959 को जन्‍मे जस्टिस धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ (डीवाई चंद्रचूड़) वर्तमान समय में सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज हैं। उन्‍होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी (LLB) की है। इसके अलावा उन्होंने, ऑस्‍ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड लॉ स्‍कूल समेत देश-विदेश के कई लॉ स्कूलों में लेक्‍चर्स दिए हैं। साल 1998 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा सीनियर एडवोकेट के रूप में नामित किया गया था।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 13 मई 2016 से सुप्रीम कोर्ट के जज हैं। सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदभार संभालने से पहले वह इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं। इसके अलावा, जज नियुक्त होने से पहले वह देश के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल भी रह चुके हैं। यही नहीं, वह सबरीमाला भीमा कोरेगांव, समलैंगिकता, आधार और अयोध्या केस में भी जज रह चुके हैं।

इसके अलावा नोएडा का जो ट्विन टॉवर गिराया गया उसे लेकर भी डीवाई चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाया था। इसके अलावा वह 2017-18 में अपने पिता द्वारा सुनाए गए फैसलों को पलटने के कारण भी चर्चा में आए थे। ये फैसला एडल्टरी लॉ और शिवकांत शुक्ला वर्सेज एडीएम जबलपुर केस में था। डीवाई चंद्रचूड़ ने इस केस को मौलिक अधिकार से जुड़ा केस माना था जबकि उनके पिता इसे मौलिक अधिकार नहीं माना था।

इसी तरह 1985 में तत्कालीन सीजेआई वाईवी चंद्रचूड़ की बेंच ने सौमित्र विष्णु मामले में आईपीसी की धारा 497 को बरकरार रखा था लेकिन 2018 में डीवाई चंद्रचूड़ वाली बेंच ने इसको बदल दिया था।

‘देखो मेरा पूरा घर जला दिया… सब लूट ले गए’: बंगाल के मोमिनपुर में कट्टरपंथियों का आतंक, सहमी हिंदू महिलाओं ने सुनाई आपबीती; Videos

कोलकाता के मोमिनपुर इलाके में इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं पर हमला करने के दो दिन बाद पीड़ितों ने सामने आकर अपनी आपबीती बताई है। एक हिंदू महिला ने बताया, “हम परसों रात से डर के साए में जी रहे हैं। उन्होंने बम फेंककर दहशत का माहौल पैदा कर दिया। हमारे लड़कों को घर से भगा दिया। हमारे घर जला दिए गए। डर से हम लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।”

पीड़िता ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को अपने घरों को छोड़कर सड़कों पर रहने को विवश होना पड़ा। पुलिस भी 4 घंटे के बाद आई। हिंदू निवासियों ने स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई भी मदद नहीं करने पर दुख व्यक्त किया। जबकि कोलकाता के मेयर और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस क्षेत्र के बेहद करीब रहते थे। लेकिन इनमें से कोई भी स्थानीय हिंदुओं की मदद के लिए नहीं आया। वहाँ रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस स्टेशन यहाँ से सिर्फ 15 मिनट की दूरी पर है।

मोमिनपुर हिंसा में इस्लामवादियों ने हिंदुओं का सारा सामान जलाकर खाक कर दिया है। लेकिन पुलिस अभी भी मुस्लिम बहुसंख्यकों पर नरम दिखाई दे रही है। वीडियो में एक व्यक्ति पीछे से कहता है, “देखो मेरा घर पूरी तरह से जल गया है।” पीड़ितों ने शिकायत की कि उनके घरों को इस्लामवादियों ने लूट भी की। पीली साड़ी पहने हुए एक महिला काफी दुखी नजर आई। उसने बताया, “इस बमबारी में मुझे सबसे अधिक नुकसान हुआ।”

वीडियो में आप देख सकते हैं कि बमबारी में उसका बिस्तर जलकर राख बन गया है। महिला वीडियो में कह रही है, “दादा, देखो वो मेरा सारा सामान लूटकर ले गए। कुछ भी नहीं बचा है। जिस दीवार पर टीवी लगा है, उसे भी बमबारी में उड़ा दिया। पंखे की हालत देखिए। हमें सुरक्षा दी जाए।”

एक अन्य हिंदू पीड़ित ने बताया, “खिड़कियों से हमारे घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए। खिड़की टूट गई थी और काँच पूरे बिस्तर पर बिखरा हुआ था। पथराव की वजह से जगह-जगह ईंटें पड़ी थीं। सुबह हमें गंदगी साफ करनी थी। हमें डर था कि कहीं छत गिर न जाए। हमारा सारा सामान बिस्तर पर था।”

मोमिनपुर हिंदू विरोधी दंगे

इससे पहले ऑपइंडिया ने बताया था कि कैसे इस्लामवादियों ने रविवार (9 अक्टूबर) शाम को मोमिनपुर के मैला डिपो में हिंदुओं पर हमला किया। यहाँ लक्ष्मी पूजा की शाम हिंदुओं की दुकानों और घरों पर दंगाइयों ने तोड़फोड़ की। इस दौरान हिंदुओं के घरों पर पेट्रोल बम फेंके गए, उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई, उनके सामान तोड़ दिए गए। इसके बाद ये कट्टरपंथी भीड़ इकबालपुर थाने के भीतर इस्लामी झंडा लेकर घुसी और वहाँ भी काफी उत्पात मचाया गया।

पश्चिम बंगाल भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार के अनुसार, कोलकाता बंदरगाह क्षेत्र के मयूरभंज में उनके घरों पर हमले के बाद हिंदुओं को पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं, भाजपा नेता प्रीतम सूर ने भी इस भयावह घटना का वीडियो साझा किया, जहाँ बदमाशों को सड़कों पर हाथापाई करते हुए देखा गया।

हिंसा के मद्देनजर प्रदेश के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बंगाल के गवर्नर व गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर अपील की थी कि वह मोमिनपुर में सेंट्रोल फोर्स (CAPF) तैनात करें क्योंकि राज्य सरकार दंगाइयों का मजहब देख उन्हें कुछ भी कहने से बच रही है।

उल्लेखनीय है कि बंगाल में यह हिंसा 9 अक्टूबर 2022 को भड़की। वहाँ पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के मौके पर इस्लामियों ने हिंदुओं के घरों और दुकानों पर इस्लामी झंडे लगा दिए थे, जिन्हें कथिततौर पर हिंदुओं ने खोल दिया था। इसी के बाद 700 से अधिक की भीड़ में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए और हिंदुओं के घर में तोड़फोड़ शुरू कर दी। बार-बार पुलिस को बुलाए जाने के बाद भी सुनवाई नहीं हुई। 

‘पहली बीवी को नहीं खिला पा रहा जो मुस्लिम उसे दूसरे निकाह का अधिकार नहीं’: इलाहाबाद कोर्ट ने कुरान का हवाला देकर सुनाया फैसला, 3 बच्चों के अब्बा की याचिका खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad high Court) ने दो निकाह करने वाले एक व्यक्ति के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने इस मामले में सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को सुनवाई करते हुए कहा, “कुरान के अनुसार एक मुस्लिम व्यक्ति दूसरा निकाह तभी कर सकता है, जब वह अपनी पहली बीवी और बच्चों को पालने में सक्षम हो। यदि वह उन्हें पालने में असमर्थ है, तो उसे दूसरा निकाह करने का कोई अधिकार नहीं है।”

अदालत ने सूरा 4 आयत 3 (कुरान) का हवाला देते हुए कहा, “दूसरा निकाह तभी किया जा सकता है, जब शौहर अपनी पहली बीवी और उससे हुए बच्चों का भरण पोषण करने में सक्षम हो। यह बात सभी मुस्लिम पुरुषों पर लागू होती है।” इसके बाद अदालत ने शौहर अजीजुर्रहमान की याचिका खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति सूर्य प्रकाश केसरवानी और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की पीठ ने कहा, “जिस समाज में महिला का सम्मान नहीं, उसे सभ्य समाज नहीं कहा जा सकता। महिलाओं का सम्मान करने वाले देश को ही सभ्य देश कहा जा सकता है। मुस्लिमों को खुद ही पहली बीवी के रहते दूसरा निकाह करने से बचना चाहिए। कुरान भी एक बीवी के साथ न्याय न कर पाने वाले मुस्लिम व्यक्ति को दूसरे निकाह की इजाजत नहीं देता।”

दो जजों की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों का हवाला देते हुए आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमामय जीवन जीने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार प्राप्त है। अनुच्छेद-14 सभी को समानता का अधिकार देता है और अनुच्छेद-15(2) लिंग आदि के आधार पर भेदभाव करने पर रोक लगाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजीजुर्रहमान और हमीदुन्निशा का निकाह 12 मई 1999 को हुआ था। वादी बीवी अपने अब्बा की इकलौती संतान है, जिसके चलते उसके अब्बा ने अपनी सारी संपत्ति उसे दान कर दी है। महिला अपने तीन बच्चों के साथ 93 वर्षीय अब्बा की देखभाल करती है। उसके शौहर ने उसे बिना बताए दूसरा निकाह कर लिया और उससे भी उसके बच्चे हैं। शौहर ने फैमिली कोर्ट में दूसरी बीवी को अपने साथ रखने के लिए केस दायर किया था। जब यहाँ अजीजुर्रहमान के पक्ष में फैसला नहीं आया, तो उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सिर तन से जुदा’ : UP से लेकर MP तक ईद के जुलूस में लगे ‘कट्टरपंथी नारे’, इस्लामी भीड़ में नाबालिग भी उछलते दिखे

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर रविवार (9 अक्टूबर, 2022) को देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगे हैं। राजस्थान के जोधपुर व उदयपुर, गुजरात के ऊना, उत्तर प्रदेश के अमेठी और आज़मगढ़, मध्यप्रदेश के खंडवा, महाराष्ट्र के अमरावती में इस तरह की नारेबाजी हुई है। हिन्दू संगठनों ने ऐसी नारेबाजी के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज करवाई है। अलग-अलग हिस्सों में पुलिस ने केस दर्ज कर के कार्रवाई शुरू कर दी है।

आज़मगढ़ में 3 गिरफ्तार और जिला बदर की कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ का नारा लगाया गया। यह नारेबाजी शहर के पुरानी कोतवाली क्षेत्र में की गई। नारेबाजी के वायरल वीडियो में ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सज़ा- सिर तन से जुदा, सिर तन से जुदा’ के साथ ‘नारा-ए-तकबीर, अल्लाह-हू-अकबर’ भी कहा जा रहा है।

नारेबाजी के बाद पुलिस ने फ़ौरन ही कार्रवाई करते हुए 3 नाबालिगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस के मुताबिक बाकी आरोपितों की पहचान करवाई जा रही है। पुलिस के अनुसार इन आरोपितों को साम्प्रदयिक गुंडा घोषित करते हुए उन्हें जिला बदर किया जाएगा।

खंडवा में नारेबाजों की गिरफ्तारी के बाद हंगामा

मध्यप्रदेश के खंडवा में भी ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगे। इस नारेबाजी का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में बीच सड़क पर हरे झंडे लहराते हुए यह नारेबाजी की गई।

इस नारेबाजी पर जवाब देते हुए मध्यप्रदेश के गृहमंन्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि केस दर्ज हो चुका है और सबूतों की जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने रात में कार्रवाई करते हुए नारेबाजी के आरोप में 4 युवकों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद थाने के आगे मुस्लिम महिलाओं की भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने कुछ देर बाद धरने का रूप ले लिया जिसमें शहर के क़ाज़ी भी मौजूद थे। पुलिस द्वारा आधी रात के बाद चारों आरोपितों को छोड़ने के बाद धरना खत्म हुआ। इस हंगामे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गुजरात के ऊना में नारेबाजी

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गुजरात के ऊना में भी ‘सिर तन से जुदा’ का नारा ईद मिलादुन्नबी के मौके पर लगाया गया है। इस वीडियो में एक भीड़ बाजार के बीच से यही नारा लगाती गुजरती दिखाई दे रही है। नारेबाजी करने वालों में कुछ नाबालिग लड़के भी दिख रहे हैं। बाद में ‘नारा-ए-हैदरी, या अली या अली’ भी सुनाई दे रहा है।

एक अन्य वीडियो में कुछ ही देर बाद यही भीड़ ऊना पुलिस स्टेशन के आगे से गुजरती हुई दिखाई दे रही है।

अमरावती में DJ पर बजाया सिर तन से जुदा का गाना

ईद मिलादुन्नबी के मौके पर ‘सिर तन से जुदा’ के नारे महाराष्ट्र के अमरावती में भी लगने का आरोप है। यहाँ के वायरल हो रहे वीडियो में बाकायदा गाड़ी पर DJ बाँध कर न सिर्फ ये गाना जोर-जोर से बजाया जा रहा है बल्कि मौजूद भीड़ भी उस नारे के सुर में सुर मिलाती दिख रही है। यहाँ भी भीड़ में हरे झंडों के साथ कई नाबालिग दिखाई दे रहे हैं।

महाराष्ट्र से भाजपा के राज्यसभा सांसद अनिल बोंडे के मुताबिक ‘सिर तन से जुदा’ की नारेबाजी करने वाले लोग PFI से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि नारेबाजी अमरावती के 2 अलग-अलग हिस्सों में की गई। किसी का कत्ल करने की सोच पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस से कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

गौरतलब है कि इस से पहले उत्तर प्रदेश के अमेठी और राजस्थान के जोधपुर में सिर तन से जुदा की नारेबाजी की गई थी। इन दोनों मामलों में पुलिस केस दर्ज कर के जाँच कर रही है।

सुल्तानपुर और गोंडा में कट्टरपंथियों का उपद्रव: मस्जिद के पास शोभा यात्रा पर पथराव, सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर घर पर हमला

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर और गोंडा में इस्लामी कट्टरपंथियों का उपद्रव सामने आया है। सुल्तानपुर में मस्जिद के पास से गुजर रही माँ दुर्गा की शोभा यात्रा पर पथराव हुआ। पत्थरबाजी में पुलिसकर्मियों को भी चोटें आईं। वहीं गोंडा में सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज मुस्लिमों ने एक हिन्दू परिवार पर हमला कर दिया। पुलिस ने दोनों मामलों में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। घटनाएँ सोमवार (10 अक्टूबर 2022) की हैं।

सुल्तानपुर में शोभा यात्रा पर हमला

मामला सुल्तानपुर के बल्दीराय थानाक्षेत्र का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रद्धालु देवी माता की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ले जा रहे थे। वलीपुर बाजार के पास जब शोभा यात्रा मस्जिद के पास से गुजर रही थी तो डीजे को लेकर कुछ लोगों ने विवाद पैदा कर दिया। इसके बाद शोभायात्रा पर पथराव शुरू कर दिया गया। आरोप है कि हथगोले भी फेंके गए। पुलिसकर्मी सहित 10 लोगों के घायल होने की सूचना है।

आरोप है कि पुलिस के वाहनों के साथ देवी प्रतिमा में भी तोड़फोड़ की गई है। अतिरिक्त फ़ोर्स आने पर उपद्रवियों को लगभग डेढ़ घंटे बाद क़ाबू किया जा सका। सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक के मुताबिक घटना के सभी दोषियों को चिन्हित कर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। घटना के फुटेज और घायलों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं हैं।

गोंडा में हिंदू परिवार पर हमला

उत्तर प्रदेश के ही गोंडा जिले में सोशल मीडिया पोस्ट से नाराज मुस्लिम समूह ने एक हिन्दू परिवार पर हमला कर दिया। घटना खरगूपुर थाना क्षेत्र की है। बताया जा रहा है कि भीड़ ने रिक्की नाम के एक युवक की लिखी पोस्ट से नाराज होकर पथराव किया। पुलिस ने फ़ौरन ही मौके पर पहुँच कर हालत को काबू में किया। रिक्की को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

इस हमले में पुलिस के वाहन के साथ कई घरों के शीशे टूटे हैं। गोंडा पुलिस के मुताबिक रिक्की के घर पर पथराव करने वाले आरोपितों को चिन्हित कर उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार अब तक पथराव में शामिल कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

108 स्तंभ, धागे का शिवलिंग, दीवारों पर शिवपुराण… राष्ट्र को ‘महाकाल लोक’ अर्पित करेंगे PM मोदी: 200 संत-60000 आम जन बनेंगे साक्षी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) मंगलवार (11 अक्टूबर 2022) को ‘महाकाल लोक’ राष्ट्र को अर्पित करेंगे। इससे पहले उन्होंने वाराणसी में श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर देश को समर्पित किया था।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर लोक परियोजना का काम दो चरणों में किया जा रहा है। 856 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 200 संतों और 60 हजार आम लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। इसके बाद पीएम कमलकुंड, सप्तऋषि, मंडपम और नवग्रह का भी अवलोकन करेंगे।

महाकाल लोक परियोजना क्या है

महाकाल लोक परियोजना का मकसद तीर्थयात्रियों को विश्व स्तरीय आधुनिक सुविधाएँ प्रदान करना है। इससे मंदिर परिसर का करीब सात गुना विस्तार होगा। इस क्षेत्र में भीड़भाड़ को कम करना और विरासत संरचनाओं के संरक्षण एवं बहाली पर विशेष बल देना परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। इससे मंदिर में तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। मौजूदा वक्त में लगभग 1.5 करोड़ हर साल तीर्थ यात्री यहाँ आते हैं। इस परियोजना के बाद यह संख्या दोगुना होने की उम्मीद है।

महाकाल लोक परियोजना की खासियत

कॉरिडोर की लंबाई 900 मीटर से ज्यादा है। इस परियोजना में महाकाल पथ में बलुआ पत्थर से 108 स्तंभ बनाए गए हैं। ये भगवान शिव के तांडव स्वरूप को दर्शाते हैं। 2.5 हेक्टेयर में फैला प्लाजा क्षेत्र कमल के तालाब से घिरा हुआ है। इसमें फव्वारे के साथ शिव की मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा महाकाल पथ के किनारे भगवान शिव के जीवन को दर्शाने वाली कई मूर्तियाँ भी स्थापित की गई हैं। पथ के साथ भित्ति दीवार चित्र शिव पुराण की कहानियों पर आधारित हैं, जिनमें गणेश का जन्म, सती और दक्ष कहानियाँ आदि शामिल हैं। पूरे परिसर की चौबीसों घंटे निगरानी की जाएगी। यह निगरानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सर्विलांस कैमरों की मदद से इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर द्वारा की जाएगी।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है, जो ड्रोन के जरिए बनाया गया है। उन्होंने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्वीट किया, “जय महाकाल के श्री महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के पहले चरण का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 11 अक्टूबर को करेंगे।”

बता दें कि महाकालेश्वर मंदिर कॉरिडोर के मुख्य गेट पर करीब 20 फीट का शिवलिंग धागे से बनाया गया है। इस पर से पर्दा उठाकर पीएम मोदी कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे। महाकालेश्वर मंदिर विकास परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के उज्जैन में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

‘मुझे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया, कहा- इसकी रेटिंग करो’: साजिद खान को बिग बॉस के घर में घुस जवाब देना चाहती हैं शर्लिन चोपड़ा

बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान (Sajid Khan) पर कई अभिनेत्री यौन उत्पीड़न का आरोप लगा चुकी हैं। साजिद खान के बिग बॉस-16 (Bigg Boss 16) में एंट्री के बाद फिर से ये मामले चर्चे में हैं। इस शो से उसे हटाने को लेकर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र लिखा है। वहीं अभिनेत्री शर्लिन चोपड़ा (Sherlyn Chopra) ने कहा है कि साजिद खान ने उसे अपना लिंग दिखाते हुए नंबर देने को कहा था। वह बिग बॉस के घर में घुसकर उसे जवाब देना चाहती हैं।

शर्लिन ने सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को ट्विटर पर एक आर्टिकल शेयर करते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि सलमान खान स्टैंड लें।” साजिद खान पर ‘मी टू’ (MeeToo) कैंपेन के दौरान 9 महिलाओं ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इनमें शर्लिन चोपड़ा भी शामिल थीं। शर्लिन चोपड़ा ने ट्वीट कर कहा है, “साजिद खान ने मुझे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाकर 0-10 के स्केल पर रेटिंग करने को कहा था। मैं ‘बिग बॉस 16’ के घर में जाकर साजिद खान को रेटिंग देना चाहती हूँ। मैं चाहती हूँ कि पूरी दुनिया इसकी गवाह बने। सलमान खान जी प्लीज स्टैंड लीजिए।”

फिल्मीबीट से बात करते हुए शर्लिन ने साजिद खान की ‘बिग बॉस’ में एंट्री पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “अगर साजिद ने सलमान खान के करीबी या किसी जानने वाली लड़की के साथ छेड़छाड़ की होती, तो क्या वह साजिद को ‘बिग बॉस’ के घर में एंट्री करने देते? उन सभी महिलाओं के दुख-दर्द का क्या, जिनका साजिद ने सेक्सुअल हैरेसमेंट किया।”

MeToo के और भी कई आरोपितों को इंडस्ट्री में काम मिल रहा है। इस पर निराशा व्यक्त करते हुए शर्लिन ने कहा, “यह इंडस्ट्री एक माफिया की तरह काम करती है। मोलेस्टर, नशेड़ी, बलात्कारी, सेक्सिस्ट सभी को दोबारा मौका दिया जाता है। उन्हें पीड़ित के साथ कोई सहानुभूति नहीं होती। जब तक हम माफिया के खिलाफ एक ताकत के रूप में एकजुट नहीं होंगे, तब तक यह ऐसे ही फलता-फूलता रहेगा।” शर्लिन ने दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को धन्यवाद देते हुए एक और ट्वीट किया है।

शर्लिन ने लिखा, “धन्यवाद स्वाति जी। अगर सलमान खान सर के किसी करीबी महिला मित्र या रिश्तेदार के साथ साजिद खान कोई घिनौनी हरकत करता, तो क्या सलमान सर साजिद के खिलाफ एक्शन नहीं लेते? सलमान सर हम पीड़ित महिलाओं के भाई-जान क्यों नहीं बन सकते?” एक्ट्रेस शर्लिन चोपड़ा 4 अक्टूबर 2022 को भी सलमान खान पर बुरी तरह भड़की थीं और पूछा था कि उन्होंने साजिद खान जैसे मोलेस्टर को बिग बॉस में क्यों लिया?

बता दें कि जब से साजिद खान को टेलीविजन के सबसे चर्चित और विवादास्पद रिएलिटी शो ‘बिग बॉस 16’ में एक कंटेस्टेंट के रूप में लिया गया है, तब से सोशल मीडिया पर हंगामा मचा हुआ है। शर्लिन से पहले मंदाना करीमी (Mandana Karimi) ने ‘बिग बॉस 16’ में साजिद खान को एक प्रतिभागी के रूप में लेने पर निर्माताओं के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। करीमी भी उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने साजिद खान पर MeeToo का आरोप लगाया था।

NCPCR ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताई मोहम्मद जुबैर की करतूत: नाबालिग बच्ची की पहचान सार्वजनिक की, मिली रेप की धमकियाँ

ऑल्टन्यूज (Alt News) के सह-संस्थापक और कथित फैक्टचेकर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) की अपने खिलाफ दर्ज FIR निरस्त करने से जुड़ी याचिका का दिल्ली हाईकोर्ट में राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने विरोध किया है। आयोग की तरफ से उच्च न्यायालय को बताया गया कि मोहम्मद जुबैर ने अभी तक नाबालिग लड़की के खिलाफ किया वह ट्वीट डिलीट नहीं किया है। आयोग ने यह भी बताया कि जुबैर ने संबंधित अधिकारियों को नाबालिग लड़की का यौन उत्पीड़न करने वाले यूजर्स के बारे में कोई जानकारी भी नहीं दी है। दिल्ली हाईकोर्ट में यह सुनवाई सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को हुई।

लाइव बीट के मुताबिक राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने हाईकोर्ट में इसे एक गंभीर मुद्दा बताया। आयोग के मुताबिक दिल्ली पुलिस का स्पष्ट तौर पर कहना है कि जुबैर जाँच में सहयोग करने के बजाए मामले को भटकाने का प्रयास कर रहा है। आयोग द्वारा बताया गया है कि जुबैर की मंशा सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की भी है। यह सुनवाई मोहम्मद जुबैर पर दर्ज पॉक्सो एक्ट की FIR के मामले में हो रही थी।

दिल्ली उच्च न्यायालय में बाल संरक्षण आयोग ने जुबैर की करतूत के बारे में बताया। आयोग ने कहा कि जुबैर द्वारा एक नाबालिग लड़की की फोटो को रीट्वीट किया गया जिससे उसकी पहचान उजागर हो गई। इसी जवाब में दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया गया है कि इसके चलते नाबालिग लड़की ऑनलाइन यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थी।

गौरतलब है कि फैक्टचेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए ऑल्टन्यूज कुख्यात है। मोहम्मद जुबैर ने 7 अगस्त 2020 को एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने के लिए नाबालिग बच्ची की तस्वीर सार्वजानिक कर दी थी। यह बच्ची उस यूजर की पोती थी और उसे जुबैर के ट्वीट के बाद रेप की धमकियाँ मिली थी। इस केस में जुबैर पर IPC की धारा 509बी, आईटी धारा 67 के साथ पॉक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज हुई थी। इस FIR में ट्विटर एकाउंट्स @de_real_mak और @syedsarwar के भी नाम हैं, जिन्होंने बच्ची के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया था।

यह FIR राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग की शिकायत पर दर्ज हुई थी। इसी FIR पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2020 को मोहम्मद जुबैर को राहत देते हुए गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी थी।

मुलायम तो अपने घर गए… लेकिन कोठारी बंधु की घर लौटने की वह यात्रा कभी पूरी ही नहीं हुई: ‘धरती पुत्र’ थे जब CM, तब मारी गई थी गोली

समर्थकों के लिए ‘धरती पुत्र’ रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री रहे मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) का सोमवार (10 अक्टूबर 2022) को इंतकाल हो गया। उसके बाद उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके पैतृक गाँव सैफई लाया गया। यही उनका अंतिम संस्कार होना है। लेकिन रामभक्त कोठारी बंधु का पार्थिव शरीर उनके घर लौट नहीं पाया था। गोली मारकर उनकी हत्या तब की गई थी, जब मुलायम सिंह यूपी के सीएम हुआ करते थे।

खत आया, भाई न आए

साल था 1990 और महीना था दिसंबर। पहले हफ्ते के एक दिन डाकिया आज के कोलकाता और तब के कलकत्ता के खेलत घोष लेन स्थित एक घर में पोस्टकार्ड लेकर पहुॅंचता है। बकौल पूर्णिमा कोठारी, “चिट्ठी देख मैं बिलख पड़ी। उसने माँ और बाबा का ध्यान रखने को लिखा था। साथ ही कहा था कि चिंता मत करना हम तुम्हारी शादी में पहुँच जाएँगे।” यह पत्र था पूर्णिमा के भाई शरद कोठारी का जो अपने बड़े भाई रामकुमार के साथ अयोध्या में 2 नवंबर को ही बलिदान हो चुके थे। चिट्ठी बलिदान से कुछ घंटों पहले ही लिखी गई थी।

वादा जो पूरा न हुआ

22 साल के रामकुमार और 20 साल के शरद कोलकाता में अपने घर के करीब बड़ा बाजार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की शाखा में नियमित रूप से जाते थे। दोनों द्वितीय वर्ष प्रशिक्षित थे। कई अन्य स्वयंसेवकों की तरह ही राम और शरद ने भी विहिप की कार सेवा में शामिल होने का फैसला किया। 20 अक्टूबर 1990 को उन्होंने अयोध्या जाने के अपने इरादे के बादे में पिता हीरालाल कोठारी को बताया। उसी साल दिसंबर के दूसरे हफ्ते में बहन पूर्णिमा की शादी होनी तय थी। पिता ने कहा- कम से कम एक भाई तो घर पर रुको ताकि शादी के इंतजाम हो सके। पर दोनों भाई इरादे से पीछे नहीं हटे।

बकौल पूर्णिमा, “आखिर में एक शर्त पर पिता राजी हुए। उनसे हर रोज अयोध्या से खत लिखते रहने को कहा। अयोध्या के लिए निकलने से पहले उन्होंने ढेर सारे पोस्टकार्ड खरीदे ताकि चिट्ठियाँ लिख सके। मुझे जब पता चला कि भाई अयोध्या जा रहे हैं तो मैं दुखी हो गई। उन्होंने वादा किया कि वे मेरी शादी तक जरूर लौट आएँगे।” दिसंबर के पहले हफ्ते में पूर्णिमा को जो चिट्ठी मिली वो इनमें से ही एक पोस्टकार्ड पर लिखा गया था। पूर्णिमा की शादी भी उसी साल दिसंबर में हो गई। लेकिन, बहन से किया वादा पूरा करने दोनों भाई घर लौट नहीं पाए।

घर न लौटने की वह यात्रा

राम और शरद ने 22 अक्टूबर की रात कोलकाता से ट्रेन पकड़ी। हेमंत शर्मा ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं- बनारस आकर दोनों भाई रुक गए। सरकार ने गाड़ियाँ रद्द कर दी थी तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए। यहाँ से सड़क रास्ता भी बंद था। 25 तारीख से कोई 200 किलोमीटर पैदल चल वे 30 अक्टूबर की सुबह अयोध्या पहुँचे। 30 अक्टूबर को विवादित जगह पहुँचने वाले शरद पहले आदमी थे। विवादित इमारत के गुंबद पर चढ़कर उन्होंने पताका फहराई। दोनों भाइयों को सीआरपीएफ के जवानों ने लाठियों से पीटकर खदेड़ दिया। शरद और रामकुमार अब मंदिर आंदोलन की कहानी बन गए थे। अयोध्या में उनकी कथाएँ सुनाई जा रही थी।

दोनों भाइयों के साथ कोलकाता से अयोध्या के लिए निकले राजेश अग्रवाल के मुताबिक वे 30 अक्टूबर को तड़के 4 बजे अयोध्या पहुँचे। वे बताते हैं कि विवादित ढाँचे की गुंबद पर भगवा ध्वज फहरा कोठारी बंधुओं ने उस समय उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव की दावे की हवा निकाल दी थी। मुलायम ने कहा था, “वहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता।”

घर से खींच मारी गोली

फिर आया 2 नवंबर का दिन। ‘युद्ध में अयोध्या’ के अनुसार दोनों भाई विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की ओर बढ़ रहे थे। जब सुरक्षा बलों ने फायरिंग शुरू की तो दोनों पीछे हटकर एक घर में जा छिपे। सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर ने शरद को घर से बाहर निकाल सड़क पर बिठाया और सिर को गोली से उड़ा दिया। छोटे भाई के साथ ऐसा होते देख रामकुमार भी कूद पड़े। इंस्पेक्टर की गोली रामकुमार के गले को भी पार कर गई। दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनकी अंत्येष्टि में सरयू किनारे हुजूम उमड़ पड़ा था। बेटों की मौत से हीरालाल को ऐसा आघात लगा कि शव लेने के लिए अयोध्या आने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके। दोनों का शव लेने हीरालाल के बड़े भाई दाऊलाल फैजाबाद आए थे और उन्होंने ही दोनों का अंतिम संस्कार किया था।