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‘मानव-ड्रग-हथियार तस्करी करते हैं रोहिंग्या, कोई कब तक रखे?’: बांग्लादेश की PM हसीना ने घुसपैठियों को बताया ‘बोझ’, भारत से माँगी मदद

अत्याचार के नाम पर म्यांमार से आकर पड़ोसी देशों में घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुस्लिम सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि बांग्लादेश के लिए नासूर बनते जा रहे हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रोहिंग्या मुस्लिमों को ‘बड़ा बोझ’ बताते हुए भारत से मदद माँगी है।

हसीना ने कहा कि रोहिंग्याओं को वापस उनके देश में भेजना चाहिए और इसमें भारत बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और भारत को बांग्लादेश का ‘टेस्टेड फ्रेंड’ (परखा हुआ मित्र) बताया।

बता दें कि भारत में रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ खुद में एक बड़ी समस्या बनी हुई है। वहाँ म्यामांर से इन मुस्लिमों के भागने का सिलसिला जारी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में और बांग्लादेश के जरिए असम अवैध घुसपैठ जारी रखे हुए हैं।

शेख हसीना ने ANI को बताया कि बांग्लादेश में लाखों की संख्या में मौजूद रोहिंग्या मुस्लिम उनके शासन के लिए चुनौती बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत बड़ा देश है और वह उनके आमद को बर्दाश्त कर सकता है, लेकिन बांग्लादेश नहीं। फिलहाल बांग्लादेश में 11 लाख से अधिक रोहिंग्या मुस्लिम रह रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन लोगों को वापस उनके देश भेजने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों एवं पड़ोसी देशों से बात कर रही हैं। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री ने कहा कि मानवीय आधार पर उन्होंने घुसपैठियों की मदद की और उन्हें आश्रय सहित सब कुछ दिया। कोविड में सबको वैक्सीन लगवाए।

रोहिंग्या के अपराधों को उजागर करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें कोई कितना दिन तक रख सकता है। वे ड्रग तस्करी, मानव तस्करी और हथियारों की खरीद-फरोख्त में शामिल हैं। और हर बढ़ते दिन के साथ उनकी आपराधिक गतिविधियाँ बढ़ती ही जा रही हैं।

उधर शेख हसीना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि कोविड जैसी वैश्विक महामारी में उन्होंने पड़ोसी देशों का भी ख्याल रखा और उन्हें कोविड के वैक्सीन उपलब्ध कराए। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बांग्लादेश के छात्रों को भारत ने बचाया। उन्होंने कहा कि कुछ मुद्दों पर भारत और बांग्लादेश के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इसके समाधान का रास्ता अपनाया जाता है और बातचीत की जाती है।

बता दें कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई दौर की वार्ता के बाद दशकों से लंबित कई मुद्दों को सुलझा लिया गया है। वहीं, तीस्ता नदी जल बँटवारे सहित अन्य कई नदियों के जल बँटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध बना हुआ है। पीएम मोदी और शेख हसीना के बीच 6 सितंबर को दिल्ली में मुलाकात होने वाली है। इसमें कई मुद्दों पर चर्चा होगी है।

गंगा नदी में नाव पर बैठकर मांस पकाने वाले हस्सान और आसिफ गिरफ्तार: Video वायरल होने के बाद प्रयागराज में कार्रवाई, 8 पर हुआ था केस दर्ज

प्रयागराज के संगम में गंगा किनारे से एक आपत्तिजनक वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने अब 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रयागराज पुलिस के अनुसार, पकड़े गए आरोपितों की पहचान हस्सान अहमद और मोहम्मद आसिफ के तौर पर हुई है।

पुलिस ने बताया कि बीते दिनों गंगा नदी के पास मांस व हुक्का का सेवन कर रहे कुछ लोगों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद प्रयागराज पुलिस ने आईपीसी की धारा 153ए, 295 के तहत थाना दारागंज में केस दर्ज किया था। अब इसी मामले में पड़ताल के बाद हस्सान अहमद (30 वर्ष), मोहम्मद आसिफ (25 वर्ष) की गिरफ्तारी हुई।

इससे पहले खबर आई थी कि गंगा किनारे मांस पकाने और हुक्का फूँकने की वीडियो देख पुलिस ने हस्सान, फैजान समेत 8 लोगों पर एफआईआर दर्ज की थी। इनमें से 3 की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई थी। हालाँकि तब नाम का नहीं पता चला था। पुलिस उनसे अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही थी।

नाव में बैठ गंगा के पास बनाया गया वीडियो

उल्लेखनीय है कि जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और जिसे देख यह कार्रवाई की गई वो प्रयागराज के दारागंज थाना क्षेत्र की थी। वीडियो को हिंदू समाज के आस्था केंद्र नागवासुकी मंदिर के पास बनाया गया था। वीडियो में नजर आ रही नाव में 8 लोग थे। उसके आसपास कई और नौकाएँ भी थीं। सबमें श्रद्धालु सवार थे। इन्हीं के बीच हस्सान वाली नाव पर मांस पकाया गया।

वीडियो देख ऐसा अंदाजा लगाया गया कि आरोपितों ने खुद ही वीडियो को बनाकर इसे वायरल किया है। प्रयागराज के SSP शैलेश पांडेय ने 31 अगस्त 2022 को वीडियो में दिख रहे लोगों की पहचान के निर्देश दिए थे। जाँच के बाद 1 सितंबर को कुल 8 आरोपितों को नामजद किया गया। पुलिस जब तलाश में जुटी तो ये लोग फरार थे। पुलिस ने लगातार छापेमारी करके इनमें से 2 को गिरफ्तार कर लिया। अब इनसे आगे पूछताछ होगी।

निजाम की क्रूरता से आजादी पर भारत सरकार मनाएगी ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’, अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि: ओवैसी ने गाया ‘एकता’ का राग

केंद्र की भाजपा सरकार हैदराबाद को निजाम की रियासत से आजादी के उपलक्ष्य में ‘हैदराबाद मुक्ति दिवस’ का आयोजन करेगी। 17 सितंबर से शुरू होकर अगले एक साल तक चलने वाले इस उत्सव को भारत सरकार ने मंजूरी दी है। बता दें कि 17 सितंबर 1948 को हैदराबाद को निजाम के कब्जे से मुक्त कराया गया था।

इस कार्यक्रम को हैदराबाद के परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा और इसका उद्घाटन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करेंगे। संस्कृति मंत्रालय ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों को भी आमंत्रित किया है।

इस स्मृति उत्सव पर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दिया जाएगा, जिन्होंने इसकी मुक्ति और विलय में अपना बलिदान दिया। अंग्रेजों से भारत की आजादी के बाद हैदराबाद के लोगों ने रियासत का भारत में विलय करने के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन किया था। इसके बाद भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के ऑपरेशन पोलो के तहत इसका भारत में विलय हुआ।

उस दौरान हैदराबाद रियासत में आज का पूरा तेलंगाना, महाराष्ट्र में मराठवाड़ा क्षेत्र शामिल था। मराठवाड़ा में औरंगाबाद, बीड, हिंगोली, जालना, लातूर, नांदेड़, उस्मानाबाद, परभणी शामिल हैं। वहीं, कर्नाटक के कलबुर्गी, बेल्लारी, रायचूर, यादगिर, कोप्पल, विजयनगर और बीदर जिले हैदराबाद रियासत के अधीन थे।

केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने शनिवार (3 सितंबर 2022) को कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से अनुरोध किया है कि वे अपने राज्यों में स्मृति दिवस मनाने के लिए उचित कार्यक्रम आयोजित करें।

तीनों मुख्यमंत्रियों को पत्र लिख कर रेड्डी ने कहा कि भारत जब 1947 में स्वतंत्र हुआ तो 562 रियासतों ने भारतीय संघ में विलय की घोषणा की। तत्कालीन हैदराबाद राज्य ने इसका विरोध किया। 17 सितंबर 1948 को तत्कालीन निजाम मीर उस्मान अली खान के शासन की क्रूरता और अत्याचार से लोगों को आजादी मिली।

उधर AIMIM प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस कार्यक्रम का नाम बदलने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि इसे हैदराबाद मुक्ति दिवस के बजाय राष्ट्रीय एकीकरण दिवस के रूप में मनाया जाए।

ओवैसी ने कहा, “उपनिवेशवाद, सामंतवाद और निरंकुशता के खिलाफ तत्कालीन हैदराबाद रियासत के लोगों का संघर्ष राष्ट्रीय एकीकरण का प्रतीक है, न कि केवल जमीन के एक टुकड़े की ‘मुक्ति’ का मामला है।” 

मुस्लिम लड़की से किया प्यार, हिंदू लड़के को बदले में मिली मौत: बरेली में मार कर लटकाया, मुँह में ठूँसा था कपड़ा

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम लड़की से प्रेम प्रसंग होने पर सुनील कुमार नाम के एक हिंदू युवक की हत्या कर उसके शव को पेड़ से लटका दिया गया है। शव आम के पेड़ से लटका मिला। शव के मुँह में कपड़ा ठूँसा हुआ था और हाथ-पैर को रस्सी से बाँध दिया गया था।

शीशगढ़ थाना क्षेत्र के जियानगला गाँव के रहने वाले 22 वर्षीय मृतक के पिता आशा राम ने मामले में गाँव के ही 6 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट लिखवाई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कुछ आरोपितों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है।

अपनी शिकायत में मृतक के पिता ने कहा कि उनके बेटे सुनील कुमार का गाँव के ही निसार अहमद की बेटी से प्रेम प्रसंग चल रहा था। इसको लेकर झगड़ा भी हो गया था। बाद में ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया था, लेकिन निसार अहमद अपने मन में रंजिश पाले हुए था।

उन्होंने अपनी शिकायत में आगे कहा कि शुक्रवार (2 सितंबर 2022) की रात 1 बजे बेटे के मोबाइल नंबर से ह्वाट्सग्रुप में एक ऑडियो और फोटो डाला गया। पिता का कहना है कि इस ऑडियो फाइल में उनका लड़का कह रहा था, “मुझे छोड़ दो। ग्राम प्रधान ने फैसला करा दिया है तो मुझे क्यों मार रहे हो।”

आशा राम ने कहा कि रात 11 बजे उन्होंने अपने बेेटे को कमरे में सोते हुए देखा था, लेकिन वह पड़ोसी के बाद में कैसे पहुँच गया इसकी उन्हें जानकारी नहीं। उन्होंने कहा कि फजल, यासीन, गुड्‌डू उर्फ अबरार, इसरार अहमद, अबरार अहमद, सरफराज अहमद निवासी कुतुकपुर ने उनके बेटे को मारा-पीटा और फिर उसका हाथ-पैर बाँधकर और मुँह में कपड़ा ठूंसकर फाँसी पर लटका दिया और मार दिया।

पिता ने कहा कि अगले सुबह 6 बजे जब रामधुन अपने खेत में सिंचाई करने गए तो बाग में एक व्यक्ति का शव लटका देख, उन्होंने ग्राम प्रधान को सूचना दी। वहाँ जाकर देखा गया तो वह सुनील का शव लटका था।

‘ये निचली जाति के, इनका छुआ खाना मत खाओ… फेंक दो’ – राजस्थान के स्कूल की घटना, मिड-डे मील पर बवाल, रसोइया गिरफ्तार

राजस्थान के उदयपुर में एक सरकारी स्कूल में दलित छात्राओं द्वारा मिड-डे मील परोसे जाने पर खाना फेंकने का मामला सामने आया है। घटना की जानकारी होने के बाद, दलित छात्राओं के साथ भेदभाव किए जाने के आरोप में रसोइए को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला उदयपुर के गोगुंडा तहसील अंतर्गत भरोड़ी गाँव के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का है। यहाँ दो छात्राओं- डिंपल मेघवाल और नीमा मेघवाल ने शुक्रवार (2 सितंबर) को स्कूल के रसोइए लालाराम गुर्जर पर भेदभाव करते हुए मध्याह्न भोजन फेंकने का आरोप लगाया।

बताया जा रहा है कि दलित छात्राओं द्वारा मिड डे मील परोसे जाने पर रसोइए लालाराम गुर्जर ने आपत्ति जताते हुए अन्य छात्रों से कहा कि इसे फेंक दो क्योंकि इसे दलित ने परोसा है। इसके बाद, छात्रों ने खाने को फेंक दिया। छात्राओं ने इस घटना के बारे में घर जाकर अपने परिजनों को बताया। इसके बाद छात्राओं सहित उनके परिजन स्कूल पहुँचे और कार्रवाई की माँग की। इसके बाद थाने जाकर शिकायत भी दर्ज करवाई।

स्थानीय मीडिया का रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में भेदभाव का शिकार हुई छात्रा डिंपल मेघवाल और नीमा मेघवाल का कहना है, “शुक्रवार को स्कूल के बाद लंच करने वाले बच्चों को बीन्स परोसा गया। लालाराम गुर्जर (रसोइया) दाल परोसे जाने पर क्रोधित हो गया और हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। उसने दूसरी जाति के छात्रों से कहा कि हम लोग निचली जाति के हैं, इसलिए हमारे द्वारा छुआ हुआ खाना मत खाओ, फेंक दो। लालाराम के कहने पर सवर्ण बच्चों ने खाना फेंक दिया। लाल राम ने भीगे हुए आटे और दाल को भी फेंक दिया।”

इस मामले ने स्थानीय पुलिस ने कहा है, “अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गोगुंदा थाने में रसोइए के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच की गई। शुरुआती जाँच में मामला सही पाए जाने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपित की गिरफ्तारी की गई है।”

राजस्थान पुलिस का यह भी कहना है, “रसोइया अपनी पसंद के उच्‍च जाति के छात्रों को खाना परोसने को कहता था। लेकिन, खाना ढंग से नहीं परोसे जाने की श‍िकायत के बाद एक शिक्षक ने शुक्रवार को दलित लड़कियों को खाना परोसने को कहा था।”

भरोड़ी गाँव के शासकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रिंसिपल ने बताया कि उनके स्कूल में दोस्ताना माहौल है। जाति संबंधी ऊँच-नीच नहीं है और सभी बच्चे एक जगह से पानी पीते हैं, एक ही साथ खाते हैं। प्रिंसिपल ने यह भी स्पष्ट किया कि रसोइए की गलत हरकत की वजह से माहौल खराब नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने बातचीत करने और भ्रम दूर करने के लिए संबंधित बच्चों के अभिभावकों को स्कूल भी बुलाया है।

श्रीलंका में चीन को छात्रों की चुनौती: जाफना विश्वविद्यालय छात्र संघ ने कहा – ‘नरसंहार झेल चुके तमिलों का दर्द समझो चीनी राजदूत’

जाफना विश्वविद्यालय छात्र संघ ने युद्ध अपराधों पर श्रीलंका सरकार का समर्थन करने के लिए चीनी राजदूत क्यूई झेंगहोंग की आलोचना की है। दरअसल, इसी महीने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र में तमिलों के खिलाफ युद्ध अपराध और नरसंहार को लेकर श्रीलंका की भूमिका पर चर्चा होना है।

छात्र संघ ने चीनी राजदूत से अपील की है कि वह तमिलों की माँगों और उनकी दुर्दशा को समझे और श्रीलंकाई सरकारों का समर्थन करना बंद करे। हालाँकि, छात्र संघ के नेताओं का यह भी कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि चीन अपना रुख बदलेगा।

छात्र संघ का कहना है कि चीन को पता है कि तमिलों के खिलाफ श्रीलंका के युद्ध के अंतिम छह महीनों में 70,000 से अधिक तमिलों की मौत हुई है। हजारों महिलाओं का श्रीलंकाई सैनिकों द्वारा बलात्कार किया गया। छात्र संघ ने राजदूत से अपने ट्वीट को डिलीट करने और संयुक्त राष्ट्र में श्रीलंका के खिलाफ लाए जा रहे प्रस्ताव का समर्थन करने का आग्रह किया।

छात्र संघ ने ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के आधार पर कहा कि आज 90,000 से अधिक तमिल विधवाएँ अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर हैं। इसके अलावा, तमिल क्षेत्र के एक बड़े भूभाग पर आज भी श्रीलंकाई सेना का कब्जा है और वहाँ सिंहलियों को बसाया जा रहा है।

दरअसल, हाल ही में चीनी राजदूत ने एक बयान में कहा था कि चीन मानवाधिकार के मुद्दे पर उन कुछ देशों के विपरीत श्रीलंका का समर्थन करेगा, जिन्होंने अतीत में श्रीलंका पर शासन या आक्रमण किया था।

चीनी राजदूत ने चीन और श्रीलंका को ऐसे दो देश बताया, जो अभी भी बाहरी ताकतों के खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने इस तरह के खतरों का विरोध करने के लिए चीन-श्रीलंका के बीच एक संयुक्त प्रयास का भी आह्वान किया। चीनी राजदूत का स्पष्ट इशारा पश्चिमी देशों और भारत की ओर था।

झेंगहोंग का इशारा ताइवान को अमेरिका सहयोग और श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी युद्धपोत की डॉकिंग से था। दरअसल, अमेरिका चीन की ‘वन चाइना’ पॉलिसी को स्वीकार करने के बाद भी ताइवान को हर तरह से मदद करता है। वहीं, पिछले दिनों चीनी पोत युआन वांग 5 के हंबनटोटा आने पर भारत ने सुरक्षा चिंता व्यक्त की थी।

श्रीलंका में जारी आर्थिक संकट के पीछे चीनी का ऋण जाल है। श्रीलंका के लोग इस बात को भली-भाँति समझते हैं। वहीं, श्रीलंकाई तमिलों को आशंका है कि उनके देश में चीन के प्रभाव बढ़ने के बाद स्वायत्ता वाली उनकी माँगों को नकारा जा सकता है और चीन इसके लिए श्रीलंका की सरकार को प्रोत्साहित कर सकता है।

चीन का रुख श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहलियों का समर्थक और तमिलों को परेशान करने वाला है। श्रीलंका चीन के सहयोग से तमिलों की माँगों को पहले ही बलपूर्वक कुचल चुका है। ऐसे में मानवाधिकार पर UNHRC में पश्चिमी देशों द्वारा श्रीलंका के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों के खिलाफ वह मतदान कर चुका है। ऐसे में तमिलों को चीनी प्रभाव से शंका बढ़ रही है।

दुमका में अब अरमान अंसारी ने 14 साल की नाबालिग को बनाया हवस का शिकार: बलात्कार के बाद की हत्या, शव को पेड़ पर लटकाया

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिले दुमका में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। क्षेत्र में अभी एक हिंदू लड़की को जलाकर मारने का मामला शांत नहीं हुआ, कि वहीं एक और एसटी समुदाय की नाबालिग को बलात्कार के बाद मार दिया गया। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट कर बताया कि अरमान अंसारी ने 14 वर्षीय जनजातीय लड़की के साथ बलात्कार किया और फिर उसे पेड़ पर लटका दिया।

बाबूलाल मरांडी ने अपने इस ट्वीट में यह भी पूछा कि झारखंड में और कितनी आदिवासी युवतियाँ ऐसे दरिंदों का शिकार बनेंगी।

बाबूलाल मरांडी ने एक अन्य ट्वीट में जानकारी दी कि लड़की सिर्फ 14 साल की थी और अरमान अंसारी की ‘जिहादी’ इच्छाओं का शिकार हो गई। उन्होंने यह भी कहा कि यह लव जिहाद के इंटरनेशनल नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना है, जो उसकी हत्या के पीछे है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीएम हेमंत सोरेन ऐसे अपराधों के अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

गौरतलब है, दुमका हेमंत सोरेन और उनके परिवार का लंबे समय से गढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सोरेन ने ऐसी घटनाएँ होने के बाद जब भी उन्हें लगता है वह धारा 144 लगाकर विरोध प्रदर्शन होने पर रोक लगा देते हैं।

बताया जा रहा है कि इस बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वैसे बता दें कि दुमका में हत्या की यह पहली घटना नहीं है। पिछले महीने के अंत में एक किशोरी को उसके घर में सोते समय शाहरुख हुसैन और उसके दोस्त ने जिंदा जला दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश से प्रतिबंधित जिहादी संगठनों द्वारा प्रेरित किए जाने के कारण दुमका ऐसे मामलों का केंद्र बनता जा रहा है।

‘देवर या नंदोई से कर हलाला वरना घर से निकल’ : मुस्लिम महिला को भरी पंचायत में मिला था तीन तलाक, शिकायत में कहा- ससुर भी गलत नजर रखता है

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में तीन तलाक के बाद हलाला करने के लिए दवाब बनाने का मामला सामने आया है। वहाँ तसीमा खातून नाम की मुस्लिम महिला का आरोप है कि उसके ससुराल वालों ने उसे घर में रखने के लिए उससे कहा कि वो या तो अपने देवर या फिर ननद के शौहर के साथ संबंध बनाए।

बताया जा रहा है कि महिला का शौहर दहेज की माँग कर रहा था। लेकिन, महिला द्वारा दहेज न दे पाने के बाद शौहर ने उसे तीन तलाक दे दिया। अब, ससुराल वालों का कहना है कि यदि उसे फिर से ससुराल में रहना है तो देवर या नंदोई के साथ हलाला करना होगा। महिला ने हलाला के लिए साफ तौर से मना करते हुए मामले की शिकायत पुलिस और मानवाधिकार आयोग से की है।

पीड़िता का कहना है, “हमारी शादी के कुछ महीनों तक रिश्ता ठीक चल रहा था। मेरा एक बेटा भी है। लेकिन, कुछ समय बाद मेरे पति ने मुझसे दहेज की माँग की और फिर वह मुझे दहेज के लिए प्रताड़ित भी करने लगा। पति और उसके परिजन 10 लाख रुपए और सोने की माँग कर रहे थे।”

पीड़ित महिला ने कहा है कि दहेज नहीं मिलने पर अप्रैल 2021 में मारपीट कर ससुराल वालों ने घर से भगा दिया था। इस मामले में जब पंचायत बुलाई गई तो पति ने पंचायत में ही सबके सामने तीन बार तलाक कहकर रिश्ता खत्म कर दिया।

इसके बाद महिला गत 21 अगस्त को फिर से अपने ससुराल पहुँची तो ससुराल वालों ने उसे डाँटकर भगा दिया। अब शौहर के घर वाले कह रहे हैं यदि उसे घर में रहना है तो हलाला करना पड़ेगा। महिला ने यह भी कहा है कि उसके ससुर की नीयत खराब है और वो उसे गलत नजर से देखता है। 

ससुराल वालों द्वारा हलाला करने का दवाब बनाने के बाद महिला ने थाने में शिकायत की है। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने ससुर, सास, ननद और देवर को आरोपित बनाया है और अब इस मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला की शिकायत के आधार पर बयान दर्ज किया जा रहा है। साथ ही, तलाक के समय पंचायत में मौजूद लोगों के भी बयान लिए जाएँगे। इसके अलावा महिला ने मानवाधिकार आयोग में भी इस मामले की शिकायत है।

केंद्र की जिस योजना से लाखों गरीबों का हुआ इलाज, उसे केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में लागू ही नहीं किया: RTI से खुलासा

दिल्ली में केजरीवाल सरकार की कई योजनाओं के फर्जी होने का भंडाफोड़ होने के बाद एक नई आरटीआई से नया खुलासा हुआ है। इस आरटीआई से पता चलता है कि केजरीवाल सरकार ने पहले तो प्रदेश में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना को लागू न करवा कर यहाँ की जनता को उनके अधिकारों से वंचित किया। इसके बाद 2020 में खुद से ऐलान किया कि वो इस योजना को लागू करेंगे, लेकिन बावजूद इसके उन्होंने दिल्ली वालों के लिए ये कल्याणकारी योजना को लागू नहीं किया।

जब इसका पता विवेक पांडे नाम के एक्टिविस्ट को चला तो उन्होंने योजना संबंधी जानकारी लेने के लिए आरटीआई डाली। इसमें उन्होंने 4 सवाल किए। ये सवाल इस प्रकार थे:

  1. दिल्ली राज्य में आयुष्मान भारत मिशन कब शुरू हुआ?
  2. दिल्ली सरकार द्वारा आयुष्मान भारत योजना के तहत जुलाई 2022 तक जारी की गई राशि का विवरण प्रदान करें?
  3. जुलाई 2022 तक आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभान्वित होने वाले लोगों की कुल संख्या का विवरण प्रदान करें?
  4. दिल्ली सरकार द्वारा जुलाई 2022 तक जारी किए गए आयुष्मान कार्ड की कुल संख्या का विवरण प्रदान करें?
आरटीआई में पूछे गए सवाल

इस आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) ने बताया:

  1. दिल्ली में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई है। यह विचाराधीन है।
  2. लागू नहीं है क्योंकि योजना आज तक शुरू नहीं हुई है।
स्वास्थ्य निदेशालय से आया जवाब

क्या है आयुष्मान भारत योजना?

बता दें कि आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, भारत सरकार की एक स्वास्थ्य योजना है। इसे 23 सितंबर 2018 को पूरे भारत मे लागू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लोगों (बीपीएल धारक) को स्वास्थ्य बीमा मुहैया कराना है। इसके अन्तर्गत आने वाले प्रत्येक परिवार को 5 लाख तक का कैश रहित स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराया जाता है। 10 करोड़ बीपीएल धारक परिवार (लगभग 50 करोड़ लोग) इस योजना का प्रत्यक्ष लाभ उठा रहे हैं। इसके अलावा बाकी बची आबादी को भी इस योजना के अन्तर्गत लाने की योजना है।

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में नहीं लागू की सुविधा

ऐसे में केजरीवाल सरकार द्वारा इस योजना को लागू करने में लापरवाही दिखाना दर्शाता है कि कैसे दिल्ली सरकार जनता के साथ सौतेला व्यवाहर कर रही है। विवेक पांडे कहते हैं कि आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं को लागू न करके सरकार ने दिल्ली की गरीब जनता को स्वास्थ लाभ पाने से वंचित रखा है। वर्ष 2020 में  दिल्ली सरकार के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने दिल्ली विधानसभा में बजट पेश करते हुए इसकी घोषणा की थी कि वह अगले वित्त वर्ष 2020-21 से राष्ट्रीय राजधानी में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना लागू करेगी।

गरीब जनता की केजरीवाल को नहीं है चिंता: विवेक पांडे

उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की घोषणा को आधार बना कर ही विवेक पांडे के द्वारा उक्त RTI स्वास्थ्य सेवा निदेशालय (डीएचएस) को दायर की गई थी। लेकिन इसके बदले जो जवाब आया वो चौंकाने वाला था। विवेक के अनुसार,

“इस जवाब से साफ-साफ पता चल रहा है कि अरविंद केजरीवाल एवं उनकी आम आदमी पार्टी वाली सरकार दिल्ली के गरीब लोगों के स्वास्थ्य को लेकर जरा भी चिंतित नहीं है। वरना क्या कारण है जो इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ लेने से दिल्ली की गरीब जनता को वंचित रखा गया? सरकार के इस तानाशाही रवैये का दुष्परिणाम दिल्ली की गरीब जनता को भुगतना पड़ रहा है।”

वह कहते हैं कि कोरोना कल में आयुष्मान भारत योजना गरीबो के लिए वरदान से कम नहीं थी। जहाँ प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएम जेएवाई) के तहत, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में, 9.70 लाख से अधिक लोगों ने 7 मार्च, 2022 तक कोविड के इलाज की माँग की थी। विवेक के अनुसार, ये आँकड़ों का खुलासा उनकी आरटीआई से हुआ था जिसमें बताया गया था कि सरकार ने अबतक इलाज पर ₹3,496 करोड़ खर्च किए हैं।

‘कॉन्ग्रेस हो रही है गायब, वामपंथी पार्टियों से मिल रहा छुटकारा’ : केरल में विपक्षियों पर गरजे अमित शाह, बताया- 1.11 करोड़ SC-ST लोगों को मोदी सरकार ने दिया घर

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में शनिवार (3 अगस्त 2022) को कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों पर निशाना साधा। उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जाति सम्मेलन में शामिल होने के दौरान कहा कि भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी का सफाया होता जा रहा है। वहीं कम्युनिस्ट पार्टी को लेकर वह बोले कि इससे भी लोगों को छुटकारा मिल रहा है।

उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस भारत से गायब होने की कगार पर है और कम्युनिस्ट पार्टियों से भी दुनिया छुटकारा पा रही है। राज्य का भविष्य सिर्फ भाजपा पार्टी है।”

अमित शाह ने सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री ने कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्टों को हमेशा से अनुसूचित जाति के लोगों और गरीब लोगों को अपना वोट बैंक माना है। अगर केरल का कोई भविष्य है तो वो सिर्फ भाजपा है।

केरल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की तारीफ करते हुए गृहमंत्री ने कहा कि पूरे देश में काम करने के लिए भाजपा को राष्ट्रभक्ति चाहिए लेकिन केरल के लिए राष्ट्रभक्ति के साथ साथ बलिदान करने की ताकत और बहादुरी तीनों की ही जरूरत बीजेपी को है।

उन्होंने आगे बताया कि कैसे भारतीय जनता पार्टी देश में सरकार बनाकर पिछड़े वर्ग को आगे लाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, “जब हमारी पूर्ण बहुमत की सरकार बनी तो रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनाया गया और अगले कार्यकाल में श्रीमति द्रौपदी मुर्मू को, वो एसटी समुदाय की है। लेकिन कॉन्ग्रेस या फिर कम्युनिस्टों की ओर से कभी कल्याणकारी काम नहीं किए गए।”

अमित शाह ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस के रहते बीआर अंबेडकर को भारत रत्न नहीं मिला। ये केवल तभी संभव हुआ तब कॉन्ग्रेस सत्ता से हट पाई। बाबा साहेब की याद में पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में पंच तीर्थ का भी निर्माण हुआ।

उन्होंने बताया कि पिछले 8 वर्षों में मोदी सरकार ने एससी-एसटी लोगों के कल्याण में 5 करोड़ गैस कनेक्शन दिए और 1.11 करोड़ लोगों को आवास दिया गया।