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विरोध के बाद गालीबाज कॉमेडियन कुणाल कामरा का गुरुग्राम में शो रद्द: सुप्रीम कोर्ट को ‘ब्राह्मण-बनिया’ मामला बताते हुए कहा था- “ल*ड़ा पकड़ के झूल जा”

कॉमेडियन का ढोंग करने वाले प्रोपेगेंडानिस्ट कुणाल कामरा (Kunal Kamra) के शो को हरियाणा के गुरुग्राम (Gurugram) प्रशासन ने रद्द कर दिया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल (Bajrang Dal) जैसे हिंदू संगठनों के विरोध और चेतावनी के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने शुक्रवार (9 सितंबर 2022) को गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर कामरा के 17-18 सितंबर के शो को रद्द करने की माँग की थी। पत्र में कहा गया है कि कुणाल कामरा अपने शो में हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाते हैं। अगर उनके शो को अनुमति दी गई तो जिले में तनाव पैदा हो सकता है।

कुणाल कामरा को 17 और 18 सितंबर को गुरुग्राम के सेक्टर 29 के स्टूडियो Xo बार में परफॉर्म करना था। बार ने 29 अगस्त को अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इसकी जानकारी साझा की थी। बार ने उसमें शो के समय और टिकट की डिटेल देते हुए ‘कुणाल कामरा लाइव’ नाम से पोस्टर जारी किया था।

ज्ञापन में कहा गया था कि कुणाल कामरा पर अपने शो में हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने के कारण पहले भी एफआईआर हो चुकी है। इस शो के कारण इलाके में तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसलिए कामरा के शो को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल इसका विरोध करेंगे।

बता दें कि कुणाल कामरा (Kunal Kamra) ने अपने नए ‘कॉमेडी’ शो ‘बी लाइक’ में भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर मार्च में अपमानजनक टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट में उनके खिलाफ अवमानना चल रहे केस को लेकर कामरा ने कहा, “प्रिय सुप्रीम कोर्ट! कल की बातें भूल जा, ल*ड़ा पकड़ के झूल जा।”

सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले कामरा ने कहा था कि उनके मन में शीर्ष न्यायालय से अधिक सम्मान शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट के लिए है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ‘ब्राह्मण बनिया’ का मामला है और यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।

कामरा ने कहा था, “देश का सर्वोच्च न्यायालय, जिसे मैं भी नहीं मानता… मैं एक शॉपिंग मॉल के फूड कोर्ट का अधिक सम्मान करता हूँ … कम से कम यह विभिन्न संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करता है। देश का सर्वोच्च न्यायालय ‘ब्राह्मण-बनिया’ का मामला है। मैं इसका सम्मान नहीं करता।”

सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2020 में कुणाल कामरा को एक लिबरल ‘हीरो’ या ‘शहीद’ बनने की कोशिश में न्यायपालिका के खिलाफ अवमानना वाली ​​टिप्पणी करने के बाद कार्रवाई को लेकर एक नोटिस जारी किया था। अपने एक ट्वीट में उन्होंने तत्कालीन सीजेआई अरविंद बोबडे को अपनी मध्यमा उंगली दिखाई थी और दूसरे ट्वीट में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भगवा रंग में रंगते हुए आरोप लगाया था कि यह एनडीए सरकार की कठपुतली बन गई है।

इसके बाद कामरा ने जर्मनी में प्रधानमंत्री नरेंद्र (PM Modi) को देशभक्ति गीत सुनाने वाले बच्चे का मजाक बनाया था। इस पर मई में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए मॉर्फ्ड वीडियो पर संज्ञान लिया था।

एनसीपीसीआर ने ट्विटर इंडिया को पत्र लिखकर कामरा के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की माँग करते हुए फर्जी वीडियो को तत्काल सोशल मीडिया से हटाने के लिए कहा है। इसके अलावा कामरा की शिकायत पुलिस से भी की है। एनसीपीसीआर ने कहा कि कथित कॉमेडियन ने ट्विटर पर अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए ऐसा किया है।

11 साल पहले हुई लव मैरिज का अंत, रैपर सनी सिंह का पत्नी से हुआ तलाक: गुजारे-भत्ते के लिए देने पड़े ₹1 करोड़

पंजाबी सिंगर हनी सिंह और उनकी पत्नी शालिनी तलवार के बीच शादी का रिश्ता अब कागजी तौर पर भी खत्म हो गया है। शालिनी बीते कुछ समय से लगातार हनी सिंह और उनके परिवार पर उत्पीड़न का आरोप लगा रही थीं। धीरे-धीरे दोनों के बीच दूरियाँ बढ़ती गईं और आखिरकार दोनों ने अलग होने का फैसला लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रैपर हनी सिंह (Yo Yo Honey Singh) के ख़िलाफ़ उनकी पत्नी शालिनी तलवार ने घरेलू हिंसा का मुकदमा 3 अगस्त, 2022 को दायर करवाया था। शालिनी ने तब ‘द प्रोटेक्शन ऑफ वुमन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट’ के तहत दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में याचिका दी। इसके बाद कोर्ट ने हनी सिंह के ख़िलाफ़ नोटिस जारी किया था। तलाक के लिए सेटलमेंट के रूप में हनी सिंह द्वारा पूर्व पत्नी को एक करोड़ रुपए दिए जाने की भी खबर है।

बाद में दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और समझौतों का दौर भी चला, लेकिन अब खबर आ रही है कि गुरुवार (8 सितंबर, 2022) को दोनों का औपचारिक तलाक हो गया है। जानकारी यह भी मिली है कि इस केस में अगले प्रस्ताव को लेकर सुनवाई 20 मार्च, 2023 को होगी। हनी और शालिनी की शादी साल 2011 में हुई थी और यह एक लव मैरिज थी। दोनों स्कूल लाइफ से ही एक दूसरे को प्यार करते थे।

गौरतलब है कि पिछले साल शालिनी ने अपनी याचिका में हनी सिंह और उनके परिवार पर बहुत से गंभीर आरोप लगाए थे। इसमें हनी सिंह के माता पिता और उनकी बहन का भी नाम शामिल किया गया था। शालिनी ने कोर्ट में कई घटनाओं का जिक्र किया है जब उनके साथ ज्यादती हुई। उन्होंने बताया कि उन्हें मारा पीटा जाता रहा, उनके बाल खींचे गए, दीवार में सिर मारा गया।

उन्होंने ये भी बताया कि उन्हें हनी सिंह से शादी के बाद कभी घर में आने वाला कोई पैसा नहीं मिला और सब कुछ सिंगर के माता पिता पर जाता था। इसके साथ-साथ शालिनी ने हनी सिंह के पिता पर आरोप लगाया कि एक बार जब शालिनी कपड़े बदल रही तो उनके ससुर कमरे में घुस गए और उनको गलत तरीके से छूने लगे।

शालिनी तलवार के मुताबिक, उनके पति हनी सिंह के शादी के बाद भी कई अन्य महिलाओं के साथ भी शारीरिक संबंध रहे चुके हैं। वहीं शालिनी ने यह भी आरोप लगाया था कि हनी उनके साथ जानवरों जैसा बर्ताव भी करते थे। बता दें सिंगर हनी सिंह ने भी इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि उन्हें बदनाम करने के लिए ये आरोप लगाए जा रहे हैं।

‘मस्जिदों के खिलाफ मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी’: धरी रह गई जमीयत की माँग, वर्शिप एक्ट की वैधता पर सुनवाई को राजी हुआ सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) शुक्रवार (9 सितम्बर, 2022) को पूजा स्थल अधिनियम, 1991 (Worship Act) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। शीर्ष अदालत ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की पीठ 11 अक्टूबर को याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने केंद्र से दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

ये याचिकाएँ अधिनियम के खिलाफ दायर की गई हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की समीक्षा की माँग करने वाली याचिकाओं का विरोध करते हुए याचिकाएँ दायर की थीं। जमीयत ने शीर्ष अदालत से अपील की थी कि वह चुनौती देने वाली याचिकाओं के संबंध में नोटिस भी जारी न करे और उन्हें खारिज कर दे। जमीयत के मुताबिक, नोटिस जारी करने से मुस्लिमों में डर पैदा होगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीठ दिल्ली भाजपा के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय, भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ सुब्रमण्यम स्वामी और कुछ अन्य लोगों द्वारा पूजा स्थल अधिनियम 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विचार कर रही है। आज की सुनवाई में जमीयत उलेमा-ए-हिंद (जो मामले में हस्तक्षेप करने की माँग कर रहा है) की ओर से पेश अधिवक्ता एजाज मकबूल ने कहा कि बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है। वहीं उपाध्याय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि उन टिप्पणियों का ढिंढोरा पीटा गया था।

जमीयत की ओर से तर्क दिया कि अगर अदालत अधिनियम की समीक्षा करने के लिए सहमत होती है, तो देश में मस्जिदों के खिलाफ मुकदमों की बाढ़ आ जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि ऐसे समय में जब श्री कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद और ज्ञानवापी विवादित ढाँचे का मामला सुर्खियों में है, सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अगस्त 2022 में निचली अदालत को कृष्ण जन्मभूमि के विवादित हिस्से के सर्वेक्षण से संबंधित याचिका पर चार महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया था।

क्या है पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991

पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा लाए गए पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम में कहा गया है कि 15 अगस्त, 1947 तक अगर किसी धर्म का कोई पूजा स्थल है तो उसे दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता। कानून में इसके लिए एक से तीन साल तक की जेल और जुर्माना का प्रावधान किया गया है। इस कानून में अयोध्या को अलग रखा गया था, क्योंकि उस समय यह मामला कोर्ट में था।

इस कानून की धारा-2 में कहा गया है कि अगर 15 अगस्त, 1947 में मौजूद किसी धार्मिक स्थल में बदलाव को लेकर अगर किसी अदालत, न्यायाधिकरण या अन्य प्राधिकरण में कोई याचिका लंबित है तो उसे रद्द किया जाएगा। कानून की धारा-3 में कहा गया है कि किसी पूजा स्थल को पूरी तरह या आंशिक रूप से दूसरे धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता है।

वहीं, इस कानून के धारा-4(1) में कहा गया है कि किसी भी पूजा स्थल का चरित्र देश की स्वतंत्रता के दिन का वाला ही रखना होगा। इस कानून का धारा-4(2) उन मुकदमों, अपीलों और कानूनी कार्यवाहियों पर रोक लगाता है, जो पूजा स्थल कानून के लागू होने की तिथि पर लंबित थे।

‘टाइगर मेमन ने फाँसी पाए याकूब मेमन की कब्र को सजाने की धमकी दी थी’: कब्रिस्तान के पूर्व ट्रस्टी का दावा, कहा- पुलिस में की थी शिकायत

साल 1993 के मुंबई ब्लास्ट में फाँसी की सजा पाए याकूब मेमन (Yakub Memon) की कब्र पर मार्बल लगाने के मामले में एक नई बात सामने आ रही है। बड़ा कब्रिस्तान ट्रस्ट से जुड़े एक शख़्स ने कहा है कि अंडरवर्ल्ड माफिया टाइगर मेमन की धमकी के कारण कब्र पर मार्बल लगाकर सजाया गया।

टाइगर मेनन के नाम से बड़ा कब्रिस्तान के ट्रस्ट के पूर्व सदस्य जलील नवरंगे को धमकी दी गई थी। इसी कब्रिस्तान में याकूब मेमन का शव दफन किया गया है। धमकी देने वाले शख्स ने कहा था कि अगर कब्रिस्तान की इस जमीन को उसके नाम पर नहीं किया गया था उसके बुरे परिणाम होंगे। धमकी देने वाले ने खुद को टाइगर मेमन का चचेरा भाई बताया था।

टाइगर मेमन द्वारा दी गई धमकी में कहा गया, “याकूब भाई को तो शहादत नसीब हुई, मगर टाइगर भाई अभी जिंदा हैं। तुम लोग मेरा बड़ा कब्रिस्तान का काम करके दो, वरना टाइगर भाई को बोलकर तुम दोनों को ठिकाने लगवा दूँगा। तु नहीं जानता, टाइगर भाई क्या चीज हैं। वे आज तक किसी के हाथ नहीं आए। तुम दोनों को कब गायब कर देंगे, पता भी नहीं चलेगा। टाइगर भाई से फोन से बात कर अभी।”

धमकी के बाद दो पूर्व ट्रस्टी जलील नवरंगे और परवेज सरकारे ने साल 2020 में मुंबई पुलिस में इसकी शिकायत की थी। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर, महाराष्ट्र एटीएस चीफ और बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भी इस धमकी के बारे में लिखा था।

खुद को टाइगर मेमन का चचेरा भाई बताने एआर मेमन नाम के उस शख्स ने नवरंगे को धमकी देने का काम लगातार जारी रखा। नवरंगे ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होंने धमकी देने वाले व्यक्ति से किसी भी तरह का गैर-कानूनी काम करने से इनकार कर दिया था।

नवरंगे के अनुसार, इसके बाद धमकी देने वाले एआर मेमन ने नवरंगे को जामा मस्जिद ऑफ बॉम्बे ट्रस्ट में बदनाम करने की धमकी दी। इतना ही नहीं, नवरंगे के खिलाफ ट्रस्ट में फर्जी शिकायत भी दर्ज करवाई। इसमें कहा गया था कि काम करने के बदले में ट्रस्ट के लोग पैसों की माँग कर रहे हैं।

उधर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) ने कहा, “याकूब मेमन बॉम्बे ब्लास्ट का आरोपी है, उसे महिमामंडित नहीं किया जा सकता। हम ना इसे स्वीकार करेंगे और ना ऐसा होने देंगे। मैंने इसके बारे में BMC और मुंबई पुलिस को सूचित कर दिया है। गृह मंत्रालय उचित कार्रवाई करेगा।”

बता दें कि आतंकवादी गतिविधियों में फाँसी की सजा पाए याकूब मेमन को महिमामंडित करने की कोशिश की जा रही थी। उसकी कब्र को आसपास लाइट और मार्बल आदि लगाकर उसे मजार बनाने की कोशिश की गई। मामला सामने आने के बाद काफी विवाद हुआ। हालाँकि, बाद में पुलिस ने मार्बल और लाइट को वहाँ से हटवा दिया।

परमाणु बम बनाने वाले ने भी मानी जिसकी ताकत, बॉलीवुड उस ब्रह्मास्त्र के बारे में नहीं बताएगा: यहाँ पढ़ें इस विध्वंसकारी अस्त्र का इतिहास

ब्रह्मास्त्र क्या है? मैं फिल्म की बात नहीं कर रहा हूँ, क्योंकि उसमें न तो ठीक से ब्रह्मास्त्र का इतिहास बताया गया है और न ही हमारे वेद-पुराणों या रामायण-महाभारत की कोई पुष्ट कथा उसमें है। ब्रह्मास्त्र क्या है, ये हमें हमारे सनातन साहित्य में ही मिलेगा। जब हमारे विद्वान ऋषि-मुनि सब लिख गए हैं, उन्हें पढ़े बिना भला कैसे बॉलीवुड वाले ‘ब्रह्मास्त्र’ बना सकते हैं? अगर वो बना रहे हैं, तो जनता को बेवकूफ बना रहे हैं। ब्रह्मास्त्र की असली कहानी हम आपको बताएँगे।

हम में से अधिकतर लोगों ने रामायण और महाभारत में इस विध्वंसकारी अस्त्र का जिक्र सुना है। इसका निर्माण स्वयं भगवान ब्रह्मा ने किया था। रामायण में तब, जब मेघनाद ने इसका प्रयोग रामभक्त हनुमान पर किया। महाभारत में तब, जब युद्ध ख़त्म होने के बाद कौरवों की तरफ से लड़ने वाले गुरु द्रोण के पुत्र अश्वस्थामा ने इसका प्रयोग किया। दोनों ही कथाएँ विस्तृत में वर्णित हैं। तुलसीदास रचित ‘रामचारितमानस’ में सुंदरकांड के इस 19वें दोहे को देखिए:

ब्रह्म अस्त्र तेहि साँधा कपि मन कीन्ह बिचार।
जौं न ब्रह्मसर मानउँ महिमा मिटइ अपार॥

अर्थात, जब रावण के पुत्र मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का संधान किया, तब माँ सीता से मिलने लंका के अशोक वाटिका में राक्षसों का संहार कर रहे हनुमान जी ने सोचा कि अगर वो इसका सम्मान नहीं रखते हैं तो इस महान अस्त्र की महिमा मिट जाएगी। इसीलिए, उनके जैसा शक्तिशाली व्यक्ति भी ब्रह्मास्त्र लगने के बाद मूर्छित हो गया। इसके बाद नागपाश से बाँध कर वो हनुमान को रावण के दरबार में ले गया। ये है ब्रह्मास्त्र की महिमा, जिसके सम्मान का ख्याल रूद्र के रूप हनुमान भी करते हैं।

इसी तरह महाभारत में कथा आती है कि युद्ध में कौरवों की हार के बाद अश्वस्थामा ने बचने के लिए अर्जुन पर ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया। श्रीकृष्ण की सलाह पर अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ा, क्योंकि इसकी काट कुछ और नहीं हो सकती थी। दोनों अस्त्रों के टकराने से प्रलय को रोकने के लिए देवर्षि नारद और वेद-व्यास प्रकट हुए और दोनों योद्धाओं को रोका। अश्वस्थामा को ब्रह्मास्त्र वापस लेना नहीं आता था, अतः उसने इसे उत्तरा (अभिमन्यु की पत्नी) के गर्भ की ओर छोड़ दिया और उसमें पल रहा अर्जुन का वंशज निष्प्राण हो गया।

ब्रह्मास्त्र के बारे में कहा जाता है कि ये संपूर्ण विश्व के विनाश की क्षमता रखता है। इतिहास में कुछ ही ऐसे योद्धा हुए हैं, जिनके पास ये अस्त्र था। इसका जो विवरण है, वो कुछ-कुछ परमाणु बम से भी मिलता है। क्योंकि, वर्णित है कि ब्रह्मास्त्र के प्रयोग के बाद उस क्षेत्र में वर्षों तक अकाल पड़ा रहता है और जीव-जंतुओं का विनाश हो जाता है। ये भी जानने वाली बात है कि परमाणु बम के जनक माने जाने वाले अमेरिकी वैज्ञानिक जे रॉबर्ट ओपनहाइमर का झुकाव हिन्दू धर्म की तरफ था।

जब अमेरिका ने जापान पर परमाणु बम का प्रयोग किया, तब उन्होंने क्षुब्ध होकर महाभारत की पंक्तियाँ इस्तेमाल करते हुए कहा था, “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, पूरे विश्व को तबाह करने वाला।” भगवद्गीता में ये पंक्ति खुद भगवान श्रीकृष्ण ने कही थी। उन्होंने कहा था कि वो लोकों का संहार करने वाले काल हैं और प्रतिपक्षी सेना के लोग अर्जुन के बिना भी मृत्यु को प्राप्त होंगे। असल में ये जो श्लोक (जो गीता के 11वें अध्याय का 32वाँ श्लोक है) है, वो इस प्रकार है:

श्री भगवानुवाच
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिताः प्रत्यनीकेषु योधाः।।

महर्षि विश्वामित्र जब महाराज कौशिक हुआ करते थे और ब्रह्मर्षि वशिष्ठ से उनकी दुश्मनी चलती थी, तब उन्होंने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दिया था, लेकिन ब्रह्माण्डस्र अस्त्र के कारण इसका कोई असर नहीं हुआ। भगवान श्रीराम के पास भी ब्रह्मास्त्र था। राजस्थान में एक बड़े क्षेत्र में रेगिस्तान होने के पीछे भी रामायण में कथा है कि श्रीराम के ब्रह्मास्त्र से ध्रुम्तुल्य नाम का एक जगह ध्वस्त हो गया था, जिसे राजस्थान में चिह्नित किया गया।

ब्रह्मास्त्र का शाब्दिक अर्थ हुआ भगवान ब्रह्मा का बाण। पुराणों में हमें इसी तरह के ब्रह्मशीर अस्त्र का भी जिक्र मिलता है। अर्जुन को उनके गुरु द्रोण ने ही ब्रह्मास्त्र दिया था। ब्रह्मास्त्र से गर्भ की मृत्यु वैसी ही है, जैसे परमाणु बम के प्रभाव से होता है। जापान में कई वर्षों तक प्रभावित इलाकों में दिव्यांग बच्चों का जन्म होता रहा। आपको पढ़ने को मिला होगा कि भारत में कहीं-कहीं रेडिएशन काफी उच्च है, इसका कारण प्राचीन काल में चले किसी विध्वंसकारी हथियार को भी बताया जाता है।

तमिल कम्ब रामायण में वर्णन है कि मेघनाद जब मायावी शक्तियों का प्रयोग कर के बार-बार अदृश्य हो रहा था, तब लक्ष्मण ने ब्रह्मास्त्र के प्रहार की सोची, लेकिन भगवान श्रीराम ने प्रलय होने की आशंका के कारण उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। साइबेरिया में जून 1908 में 12 मेगा टन का एक भयंकर ब्लास्ट हुआ था, जो ‘Tunguska Event’ के नाम से जाना जाता है। इस तबाही के पीछे Asteroid को कारण बताया गया, लेकिन क्या प्राचीन काल में ऐसी क्षमता वाले हथियार हुए करते थे? वर्णनों से तो ऐसा ही लगता है।

ब्रह्मास्त्र का कोई निश्चित आकार नहीं होता था। उसे चलाने के लिए मन की शक्ति चाहिए थी, क्योंकि वो मंत्रों से संचालित होता था। प्राचीन साहित्य में वर्णन है कि इसे चलाने पर आकाश से उल्काएँ गिरने लगती हैं और जल में उफान आ जाता है। वैज्ञानिक भी मानते हैं कि महाभारत में परमाणु बम जैसी किसी शक्ति का इस्तेमाल हुआ तो था, कहीं वो ब्रह्मास्त्र ही तो नहीं? महाभारत का युद्ध ही शायद इसीलिए हुआ था, ताकि दिव्य अस्त्रों को रखने वाले लोग और वो सभी अस्त्र, एक साथ ख़त्म हो जाएँ।

ब्रह्मास्त्र पाँचों तत्वों, अर्थात भूमि, जल, अग्नि, आकाश और वायु – इन सभी में उथल-पुथल मचाने की क्षमता रखता है। भगवान ब्रह्मा ने असुरों से संसार की रक्षा के लिए इसका निर्माण किया था, ताकि धर्म का राज बना रहे। ब्रह्मास्त्र से ही ब्रह्मशीर अस्त्र बना था, जो आज के हाइड्रोजन बम के बराबर हो सकता है। कहीं-कहीं तो लिखा है कि ब्रह्मास्त्र घास की पत्ती जितना पतला होता था, लेकिन अति भयंकर। फिल्म में शायद ही ये जानकारियाँ आपको मिले, खासकर बॉलीवुड की।

छात्राओं के कमर पर फेरता है हाथ, बच्चियों से अंडरगार्मेंट्स के बारे में पूछता है: सरकारी शिक्षक इश्तियाक अहमद पर आरोप, कई लड़कियों ने छोड़ा स्कूल जाना

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में सरकारी स्कूल के एक टीचर पर छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने का आरोप लगा है। आरोपित टीचर का नाम इश्तियाक अहमद है। शिकायत में बताया गया है कि इश्तियाक की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के कारण कई छात्राओं ने स्कूल जाना ही छोड़ दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर के इश्तियाक की तलाश शुरू कर दी है। मामले की शिकायत 7 सितम्बर, 2022 (बुधवार) को की गई है।

घटना ठाकुरद्वारा थानाक्षेत्र के जूनियर हाईस्कूल काला झंडा की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक बच्ची के परिजन ने बताया कि जब बच्ची पढ़ने जाती थी तब वो (इश्तियाक) उनकी कमर में हाथ फेरता था और अकेले में मिलने के लिए बुलाता था। पीड़ित परिजन ने आगे बताया कि उनके बच्चे डरे हुए हैं और बड़े अधिकारियों को फोन करने पर हमारी सुनवाई हुई है। इसी के साथ बच्ची के परिजन ने कहा कि अब वो दुबारा उस स्कूल में बच्चों को पढ़ने के लिए भेजेंगे ही नहीं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़ित छात्राओं के घर वालों का कहना है कि इश्तियाक गुरु कहने लायक नहीं है और उसे फ़ौरन जेल भेजा जाना चाहिए। छात्राओं के परिजनों के मुताबिक, वह 10 से 12 साल की बच्चियों से उनके अंडरगारमेंट्स के बारे में बातें करता है और पूछता है कि उन्होंने इसे कहाँ से खरीदा था। एक अन्य छात्रा की दादी ने कहा कि पढ़ाई के दौरान इश्तियाक अपनी कुर्सी छोड़ कर छात्राओं की बेंच पर बैठ जाता है और उनके साथ गलत हरकतें करता है। बताया जा रहा है कि वो ऐसा स्कूल की कई लड़कियों के साथ करता है।

कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल जाने से मना करने वाली छात्राओं की संख्या 6 से अधिक है। एक अन्य छात्रा के परिजन ने बताया कि आरोपित टीचर बोर्ड पर उल्टा-सीधा लिखवाता था और गंदी-गंदी बातें किया करता था। पीड़ित परिजन ने की गई कार्रवाई को अपनी मजबूरी और अंतिम विकल्प बताया। पुलिस ने परिजनों की शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपित टीचर इश्तियाक के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

मुरादाबाद के एडिशनल SP संदीप मीणा ने बताया कि परिजनों की शिकायत के बाद आरोपित शिक्षक फरार हो गया था। इसी के साथ उन्होंने बताया कि पुलिस फरार इश्तियाक की लगातार तलाश में छापेमारी कर रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ के निधन पर भारत में भी 1 दिन का शोक, आधा झुका रहेगा राष्ट्रध्वज

ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय (Queen Elizabeth II) का गुरुवार (8 सितंबर 2022) को स्कॉटलैंड के बाल्मोरल कैसल में निधन हो गया। उनकी उम्र 96 साल थी। महारानी एलिजाबेथ की मौत पर भारत ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है।

महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का जन्म 21 अप्रैल 1926 को हुआ था। अपने पिता जॉर्ज षष्टम की मौत के बाद वर्ष 1952 में वह ब्रिटेन की महारानी बनी थीं। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 25 साल थी। अब महारानी की मौत के बाद उनके बेटे प्रिंस चार्ल्स को ब्रिटेन का राजा बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में भी महारानी के मौत पर शोक व्यक्त करते हुए देश भर में एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है। गृह मंत्रालय की ओर से जानकारी दी गई है कि भारत में 11 सितंबर को राष्ट्रीय शोक रहेगा। यानि की आने वाले रविवार के दिन महारानी एलिजाबेथ के सम्मान में भारत का राष्ट्रध्वज आधा झुका दिया जाएगा।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी मौत पर दुख जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, “महामहिम महारानी एलिजाबेथ द्वितीय को हमारे समय की एक दिग्गज के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपने राष्ट्र और लोगों को प्रेरक नेतृत्व प्रदान किया। उन्होंने सार्वजनिक जीवन में गरिमा और शालीनता का परिचय दिया। उनके निधन से आहत हूँ। दुखद की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार और ब्रिटेन के लोगों के साथ हैं।”

पीएम मोदी ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “2015 और 2018 में यूके की अपनी यात्राओं के दौरान महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के साथ मेरी यादगार मुलाकातें हुईं। मैं उनकी गर्मजोशी और दयालुता को कभी नहीं भूलूँगा। एक बैठक के दौरान उन्होंने मुझे वह रूमाल दिखाया जो महात्मा गाँधी ने उनकी शादी में उपहार में दिया था। मैं उस भाव को हमेशा संजो कर रखूँगा।”

गौरतलब है कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय न सिर्फ ब्रिटेन की महारानी थीं, बल्कि इसके अलावा वे 14 अन्य देशों की भी महारानी थीं। इस सूची में कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जमैका, बहामास, ग्रेनेडा, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स, तुवालू, सैंट लूसिया, सेंट विंसेट एंड ग्रेनेजियन्स, एंटीगुआ और बारबुडा, बेलिज, सेंट किट्स एंड नेविस शामिल हैं।

एलिजाबेथ द्वितीय इन देशों की सिर्फ सांकेतिक महारानी थीं। यहाँ के शासन या सरकार में उनका कोई हस्तक्षेप नहीं था। इनमें कुछ देश बाद में अलग होकर खुद को गणतंत्र घोषित कर दिया। जब एलिजाबेथ महारानी बनी थीं, तब वह 54 देशों की महारानी थीं। इन देशों में पाकिस्तान भी शामिल था।

‘हमारे बच्चों को इनसे दूर रखो’: बेटे जेह के साथ करीना कपूर ने शेयर की गणेश पूजा की तस्वीर तो भड़के कट्टरपंथी, कहा – इस्लाम में सिर्फ अल्लाह की इबादत

बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर खान (kKareena Kapoor Khan) ने शुक्रवार (10 सितंबर, 2022) को अपने छोटे बेटे जेह के साथ गणपति बप्पा की पूजा करते हुए कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर कीं। इस पोस्ट को लेकर उन्हें मुस्लिम कट्टरपंथियों ट्रॉल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर ट्रॉल्स उन्हें अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत ना करने की सलाह दे रहे हैं।

फोटो साभार: करीना का इन्स्टाग्राम

जारू मलिक नाम के यूजर ने एक्ट्रेस की पोस्ट पर लिखा, “अब भी आप समझ नहीं रही हैं कि अल्लाह एक है और उसके सिवा कोई नहीं। बुरा मत मानिएगा। मैं आपको एक अभिनेत्री के रूप में प्यार करता हूँ, लेकिन तैमूर और आप दोनों को इस्लाम सीखना चाहिए और यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि कोई भी इसके लिए मजबूर नहीं कर रहा है।”

एक और यूजर ने लिखा, “मेरा मानना है कि मुहम्मद ही खुदा के पैगंबर हैं।”

सबा सिकंदर ने लिखा, “इसका बच्चा मुस्लिम होना चाहिए… सैफ अली खान के अनुसार।”

रोहा बैग नाम की यूजर ने लिखा, “हमारे मुस्लिम बच्चों को तो कम से कम इन सबसे दूर रखो। आपकी जो मर्जी हो वो करो।”

गौरतलब है कि इससे पिछले साल भी 10 सितंबर को करीना कपूर खान ने गणेश चतुर्थी के मौके पर अपने शौहर सैफ अली खान व बेटे तैमूर अली खान के साथ पूजा करते हुए कुछ तस्वीरें इंस्टाग्राम पर शेयर की थीं। इस पोस्ट को लेकर उन्हें सोशल मीडिया पर खूब ट्रॉल किया गया था। ट्रॉल्स ने उन्हें काफिर तक कह दिया था। वहीं, कुछ यूजर्स ने उनकी पोस्ट पर ‘लानत है ऐसे मुस्लिमों पर’ लिखा था।

मोहम्मद अफताब आलम नाम के यूजर ने लिखा था, ”लानत है, उस बच्चे का कोई कसूर नहीं है, उसे तो जैसी तालीम देंगे वो वैसा ही करेगा। लेकिन सैफ पर लानत है अल्लाह इन्हें हिदायत अता फरमाए आमीन सुम्मा आमीन।” इस पर रिप्लाई देते हुए एक यूजर ने लिखा था, “उसको अच्छा तालीम देकर तालिबान बना देना चाहिए?”

बंगलोर यूनिवर्सिटी में गणेश मंदिर से कुछ छात्रों-प्रोफेसरों को दिक्कत, नींव को पहुँचाया नुकसान: कहा- संस्थान का हो रहा भगवाकरण

कर्नाटक के बंगलोर यूनिवर्सिटी के परिसर में गणेश मंदिर बनाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। छात्रों का एक समूह मंदिर निर्माण का लगातार विरोध कर रहा है। इनकी माँग है कि मंदिर की जगह कैंपस में पुस्तकालय बनाई जाए।

गुरुवार को छात्रों ने मंदिर बनाने के लिए खोदी गई नींव को भी नुकसान पहुँचाया। प्रदर्शनकारियों में यूनिवर्सिटी के कुछ फैकल्टी भी शामिल बताए जा रहे हैं। छात्रों का यह विरोध बुधवार और गुरुवार (7-8 सितंबर 2022) को और तेज हो गया, जब इनके खिलाफ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामला दर्ज करा दिया।

छात्रों का कहना है कि रजिस्ट्रार और कुलपति के विरोध के बावजूद ‘बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी)’ विश्वविद्यालय परिसर में मंदिर बनाने पर अड़ी है। छात्रों ने विश्वविद्यालय का भगवाकरण करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसकी इजाजत यूजीसी और सुप्रीम कोर्ट भी नहीं देता।

बंगलोर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ जयकारा शेट्टी ने कहा है कि मंदिर निर्माण का निर्णय उनके कार्यकाल के दौरान नहीं लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पहले लिया गया था और निर्माण कार्य अब शुरू हो हुआ है। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के काम को रोकने का उन्होंने आग्रह किया था।

मामला सड़क चौड़ीकरण के बाद मंदिर को यूनिवर्सिटी परिसर में शिफ्ट होने से जुड़ा है। बेंगलुुरु के मैसूर रोड पर स्थित मल्लथहली में विश्वविद्यालय के जनभारती परिसर के पास एक गणेश मंदिर था। जब इस सड़क का चौड़ीकरण किया गया तो इस मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की बात कहकर उसे तोड़ दिया गया था।

अब उस मंदिर को विश्वविद्यालय परिसर के अंदर बनाया जा रहा है। इसी बात को लेकर कुछ संगठन और छात्र समूह उसका विरोध कर रहे हैं। बता दें बंगलोर यूनिवर्सिटी राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालय है और इसकी स्थापना सन 1964 में की गई थी। साल 2001 में इसे NAAC की 5-स्टार रेटिंग दी थी।

बंगलोर विश्वविद्यालय शिक्षक परिषद ने विश्वविद्यालय के उच्च अधिकारियों को लिखा था कि परिसर के अंदर बाहरी लोगों द्वारा गणेश मंदिर चलाया जा रहा है और विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट में मंदिर द्वारा एकत्र किए गए धन का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

यूनिवर्सिटी के एक फैकल्टी तिलक डीएम का कहना है, “जो मंदिर ध्वस्त हुआ था वह अवैध था और बंगलोर यूनिवर्सिटी से उसका कोई संबंध नहीं था। उसे अनधिकृत लोगों द्वारा चलाया जा रहा था। यूनिवर्सिटी मंदिर के पुजारियों के वेतन या हुंडी के पैसे के लिए जिम्मेदार नहीं थे।”

छात्रों का कहना है कि स्थानीय विधायक के लोग इस मंदिर का निर्माण कराने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि अपने बॉस को खुश किया जा सके। उन्होंने कहा कि मंदिर की जगह अगर पुस्तकालय बनेगा तो इससे छात्रों को लाभ होगा।

देवी-देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें शेयर करने वाले नज़र मोहम्मद का आतंकी कनेक्शन! AK-47 लिए Pak युवक के साथ तस्वीर, 6 साल सऊदी में रहा

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ्तार नजर मोहम्मद उर्फ बादशाह का आतंकी कनेक्शन सामने आ सकता है। पुलिस को आरोपित के फेसबुक अकाउंट पर पाकिस्तानी युवक के साथ एक फोटो मिली थी, जिसमें उक्त युवक AK-47 राइफल लिए हुए दिखाई दे रहा है।

दरअसल, मेरठ के भावनगर क्षेत्र से पुलिस ने नजर मोहम्मद को फेसबुक पोस्ट द्वारा हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद, जब आरोपित की अन्य फेसबुक पोस्ट देखी गई तो उसमें पाकिस्तानी युवक इब्राहिम के साथ उसकी कुछ तस्वीरें सामने आईं। इनमें से एक फोटो में इब्राहिम AK-47 राइफल के साथ नजर आ रहा है।

इस फोटो के सामने आने के बाद से पुलिस समेत तमाम जाँच एजेंसियाँ नजर मोहम्मद का आतंकी कनेक्शन तलाशने में जुटी हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है, पुलिस ने दावा किया है कि इब्राहिम का किसी आतंकी संगठन से संबंध हो सकता है।

इस मामले में एटीएस और एनआईए, एसटीएफ समेत कई अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने गुरुवार (8 सितंबर, 2022) की रात को भावनगर पुलिस स्टेशन में आरोपित नजर मोहम्मद उर्फ बादशाह से पूछताछ की है। सुरक्षा एजेंसियाँ नजर मोहम्मद और इब्राहिम का पूरा कनेक्शन जानना चाहती हैं।

बताया जा रहा है, इस पूछताछ में नजर मोहम्मद ने पुलिस को बताया है कि वह 6 साल सऊदी अरब में रहा है। इसी दौरान उसकी मुलाकात पाकिस्तान के पेशावर में रहने वाले इब्राहिम से हुई थी। इब्राहिम किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है या नहीं, इस बारे में उसको कोई जानकारी नहीं है। 

इस पूरे मामले में, एसएसपी रोहित सिंह सजवाण का कहना है कि नजर मोहम्मद के फेसबुक पर देवी-देवताओं की आपत्तिजनक फोटो मिली थी। उसका पाकिस्तानी कनेक्शन भी सामने आया है, जिस पर जाँच एजेंसियाँ काम कर रही हैं। उसके परिवार की गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है।