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राजस्थान का कुल्फी वाला खोज रहा था पोर्न, पाकिस्तान के बुने लिंक ने बना दिया जासूसः इंटरनेट- WhatsApp के इस्तेमाल से पहले ये खबर पढ़ लें

पाकिस्तान किस तरह भारत में अपने लिए जासूस पैदा करता है और हमारी सेना की जानकारियाँ देने के लिए उन्हें तैयार करता है, इसका ताज़ा उदाहरण राजस्थान में देखने को मिला है। एक कुल्फी विक्रेता पोर्न साइटों को सर्च करते-करते एक पाकिस्तानी ख़ुफ़िया अधिकारी से जा जुड़ा। फेसबुक और पोर्न साइटों पर मिले एक फोन नंबर के जरिए उसने इस किस्म के वीडियोज देखने के इरादे से एक व्हाट्सएप्प ग्रुप जॉइन तो कर लिया, लेकिन वो ग्रुप पाकिस्तानियों का निकला और जान-पहचान बनने के बाद कुछ पैसे की लालच में उसने उनके लिए काम करना शुरू कर दिया।

राजस्थान के भीलवाड़ा एवं पाली से दो लोगों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से संपर्क होने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इंटेलिजेंस पुलिस महानिदेशक उमेश मिश्रा के अनुसार, इस मामले में भीलवाड़ा से बेमाली निवासी नारायण लाल गाडरी और जयपुर निवासी कुलदीप सिंह शेखावत को पाली के जैतारण से शनिवार (13 अगस्त, 2022) को गिरफ्तार किया गया। दोनों के सोशल मीडिया के माध्यम से आईएसआई से संपर्क में होने की जानकारी मिली थी। दोनों को जासूसी करने और पाकिस्तानी हैंडलरों की मदद करने के एवज में पैसे मिल रहे थे। 

नारायण लाल ने पूछताछ में बताया कि उसने 5वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। अपनी आजीविका चलाने के लिए उसने ड्राइविंग, घर-घर कुल्फी बेचने, बकरी पालन, भजन गायक समेत कई काम किए। इस साल की शुरुआत में नारायण लाल को फेसबुक पर एक लिंक मिला था। इसके जरिए वह ऐसे व्हाट्सएप्प ग्रुप में शामिल हो गया, जिस पर अश्लील सामग्री दिखाई जाती थी। इस व्हाट्सएप्प ग्रुप में पाकिस्तान सहित कई देशों के करीब 250 से ज्यादा सदस्य थे। हालाँकि, आरोपित नारायण लाल ने दावा किया कि वह एक हफ्ते बाद ही इस ग्रुप से एग्जिट हो गया था। 

पूछताछ में आरोपित ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने के बाद एक व्यक्ति ने उससे कॉन्टेक्ट किया। उसने अपना नाम ‘अनिल’ बताया। वह ‘+92’, यानी पाकिस्तानी नंबर का इस्तेमाल कर रहा था। उसने नारायण से ग्रुप एग्जिट करने का कारण पूछा। लाल को शक हुआ कि वह पाकिस्तानी है। इसके बावजूद दोनों के बीच बातचीत जारी रही। कुछ दिनों के बाद अनिल ने नारायण लाल को एक अन्य ‘पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO)’ साहिल से मिलवाया, जो भारत के नंबर से ही व्हाट्सएप्प चला रहा था। उसने दावा किया कि वह दिल्ली में रहता है। पीआईओ साहिल ने नारायण लाल से पाकिस्तान चलने के लिए कहा। उसने कहा कि वह इस ट्रिप का पूरा खर्चा उठाएगा। साथ ही उसके डॉक्यूमेंट्स भी बनवा देगा। इसके बाद अपना पासपोर्ट और वीजा बनवाने के लिए नारायण लाल ने पीआईओ के साथ अपने आधार कार्ड, डाइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड की जानकारी भी शेयर की।

पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव अनिल और साहिल ने नारायण लाल से कहा कि उन्हें कुछ इंडियन सिम कार्ड की जरूरत है। इसके बदले उसे पैसे दिए जाएँगे। नारायण लाल ने उनके नाम पर दो सिम कार्ड खरीदे। नारायण लाल ने पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के बताए पते पर यह सिम भेज दी। इसके बाद नारायण लाल ने पीआईओ को तीन और सिम भेजीं। इसके लिए उसे 5 हजार रुपए मिले।

एक अधिकारी ने व्हाट्सएप्प चैट का हवाला देते हुए बताया कि PIO ने उन्हें कई मौकों पर सैन्य छावनियों में प्रवेश करने, सेना के जवानों से दोस्ती करने, PIO से उनका परिचय कराने और सैन्य स्थानों के लोकेशन, फोटो और वीडियो भेजने के लिए कहा। लाल ने कथित तौर पर उदयपुर में एक सैन्य वाहन और अहमदाबाद में वर्दी में एक सैन्यकर्मी की तस्वीरें भेजीं। इतना ही नहीं, उन्होंने अहमदाबाद रेलवे स्टेशन की भी कुछ तस्वीरें भेजीं। इसके साथ ही पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव ने उससे कट्टरपंथियों द्वारा उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद जारी किए गए वीडियो देखने के लिए कहा। उन्होंने लाल को व्हाट्सएप्प ग्रुप में वीडियो भी भेजा। 

इसके अलावा पीआईओ ने नारायण लाल को उदयपुर छावनी से सटे शॉपिंग स्पेस की रेकी का भी काम सौंपा था, ताकि वे वहाँ एक फोटो कॉपी का स्टॉल लगा सकें। इस काम के लिए उन्होंने नारायण लाल को तीन हजार रुपये भेजे थे और फोटोकॉपी-मशीन की दुकान के सेटअप के लिए 4-5 लाख रुपए देने का भी वादा किया था।

इसके बदले में पीआईओ उन सैन्य डॉक्यूमेंट्स की कॉपियाँ चाहते थे, जो फोटोकॉपी के लिए दुकान पर आएँगी। कथित तौर पर लाल इसके लिए तैयार हो गया। नारायण लाल ने इसके लिए उदयपुर छावनी से सटे क्षेत्र का दौरा किया। एक दुकान को शॉर्टलिस्ट भी किया। इसके बाद दुकान की लोकेशन गूगल मैप के जरिए शेयर की थी।

इसी तरह कुलदीप सिंह शेखावत पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की महिला हैंडलिंग अफसरों के संपर्क में था। कुलदीप ने रुपए के लालच में आकर महिला पाक हैंडलिंग अफसरों के कहने पर महिला के नाम से एक फर्जी सैन्यकर्मी के नाम से सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाया और भारतीय सेना के जवानों से दोस्ती कर उनसे गोपनीय सूचना लेकर पाक महिला हैंडलरो को मुहैया करवाई। इसके बदले में कुलदीप को मोटी धनराशि मिली। दोनों ही आरोपित पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की महिला अफसरों के इशारे पर भारतीय सेना से संबंधित भेजी गई जरूरी सूचनाओं की एवज में अपने-अपने बैंक खातों में यूपीआई के जरिए रुपए ले रहे थे। 

अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल की तकनीकी जाँच में तथ्यों की पुष्टि होने पर आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इनके खिलाफ शासकीय गुप्त अधिनियम 1923, आईटी एक्ट और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है। जाँँच जारी है।

13 इंच का चाकू, झाड़ियों में खून से लथपथ लाश: नादिया मुल्ला की प्रेमी अल्तमश ने कर दी निर्मम हत्या, प्रेगनेंट करके नहीं करना चाहता था निकाह

महाराष्ट्र के ठाणे के मुंब्रा इलाके से एक गर्भवती युवती की हत्या की खबर सामने आई है। हत्या का आरोप युवती के प्रेमी पर लगा है, जिसकी पहचान अल्तमश मुनेवर दलवी के रूप में हुई है। वह छोटी कंपनी में सुपरवाइजर के तौर पर काम करता है। वहीं मृतक युवती की पहचान मुस्कान उर्फ नादिया मुल्ला के तौर पर हुई है।

पुलिस ने बताया कि आरोपित को ठाणे रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के मुताबिक शनिवार (13 अगस्त 2022) की शाम मुंब्रा पुलिस को फोन आया कि मुंब्रा में एक खदान के पास एक युवती का शव मिला है। इसके बाद पुलिस अधिकारियों की एक टीम और एक फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुँची, जहाँ उन्होंने खून से लथपथ युवती का शव बरामद किया। उसके गले पर गहरे कट का निशान था।

मुंब्रा थाने के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक अशोक कदलाग ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शव की शिनाख्त करने में दो घंटे लग गए। शव की पहचान होने के बाद उसके परिवार वालों से संपर्क किया गया। जहाँ उन्होंने युवती के प्रेमी पर शक जताया। उन्होंने बताया कि वह अल्तमश मुनेवर दलवी के साथ तीन साल से रिलेशनशिप में थी। मगर दलवी उससे निकाह नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने धोखे से उसे अपने साथ बाइक पर ले गया और रास्ते में खदान के पास उसकी हत्या कर दी।  

पुलिस अधिकारी ने बताया, “आरोपित ने दो दिन पहले ही 13 इंच का चाकू मँगवाया था। उसने उसी से उसे मारने की योजना बनाई। उसने उसका गला काट दिया और उसके शव को झाड़ियों में फेंक दिया और मौके से फरार हो गया।” दलवी को ठाणे से गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया। उसे 17 अगस्त तक हिरासत में भेज दिया गया है।

मृतक की बहन ने इस बार में जानकारी देते हुए बताया कि उसकी बहुत ही खुशमिजाज किस्म की लड़की थी। उसका एक ही सपना था कि वह अपने राजकुमार से शादी करे। हालाँकि दलवी के साथ रिश्ते में रहने के दौरान उसे कई बार गाली-गलौज भी सुनना पड़ा। इस दौरान जब वह गर्भवती हुई तो दलवी ने उसे गर्भपात कराने के लिए कहा था।

मृतक की बहन ने ये भी कहा कि इस बार भी वह गर्भवती थी, जब उसकी हत्या कर दी गई।  उन्होंने बताया, “तीन दिन पहले, हम दोनों को पता चला कि उसकी शादी दूसरी लड़की से तय हो गई है। हमने उसका पता लिया और दलवी की सच्चाई बताने उसके घर गए। इस बात से वह मेरी बहन से गुस्सा हो गया और इसलिए उसने उसकी हत्या की योजना बनाई होगी।”

वहीं फ्री प्रेस जर्नल ने मुंब्रा पुलिस स्टेशन के एक सूत्र के हवाले से बताया कि दलवी ने कहा कि मुस्कान के पेट में पल रहा बच्चा उसका नहीं था। वह किसी और का था, जिसके साथ वह रिलेशनशिप में थी। इसमें कहा गया, “दलवी ने आरोप लगाया कि नादिया उससे पैसे ऐंठने के लिए उस पर दबाव बना रही थी। इसलिए उसने उसकी हत्या की योजना बनाई।” पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जाँच जारी है। आरोपित से पूछताछ की जा रही है।

वे नहीं रहे… क्योंकि वे हिंदू थे: इस रक्षाबंधन भी चंदन गुप्ता के घर नहीं जला चूल्हा, पिता का दावा- प्रतिमा लगाने का वादा भी आधा-अधूरा

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में 26 जनवरी 2018 को निकली ‘तिरंगा यात्रा’ पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस हमले में चंदन गुप्ता उर्फ़ अभिषेक की मौत हो गई थी। ‘तिरंगा यात्रा’ में शामिल लोगों पर गोलियाँ चलाई गई थी। पथराव हुआ था। ऑपइंडिया ने चंदन गुप्ता के परिवार का हाल जानने के लिए उनके पिता सुशील गुप्ता से बात की।

डर से छुड़वा दी बड़े बेटे की नौकरी

सुशील गुप्ता ने बताया, “चंदन की हत्या के बाद लगभग 1 साल तक मेरे परिवार को पुलिस सुरक्षा मिली थी। बाद में यह हटा ली गई। मेरा बड़ा बेटा विवेक गुप्ता इस केस का गवाह है। पहले वो मेडिकल रिप्रेजेंटिव की नौकरी करता था। लेकिन अब हमने डर से उसकी नौकरी छुड़वा दी है। हमें कई बार धमकियाँ भी मिली है। अब घर के खर्चों की पूरी जिम्मेदारी अकेले मेरे ऊपर है। मैं एक प्राइवेट अस्पताल में कम्पाउंडर हूँ। एक बेटी की शादी की भी जिम्मेदारी है।”

सलीम को छोड़ छूटे सभी आरोपित

सुशील गुप्ता का दावा है कि चंदन की हत्या में आरोपित 29 नामजदों में से 28 जेल से बाहर आ चुके हैं। हाई कोर्ट से इन सबको जमानत मिली हुई है। केवल सलीम जेल में है और उसकी अपील पर इसी महीने हाई कोर्ट में सुनवाई है। गुप्ता के मुताबिक उन्होंने अपनी ओर से भी इस मामले में कैविएट दायर कर रखी है। हाई कोर्ट तक मामले की पैरवी पर खर्च भी हो रहा है। उनका दावा है कि आरोपित आर्थिक तौर पर मजबूत हैं। इसके कारण उन्हें मुकदमा लड़ने में सहूलियत है। गुप्ता कहते हैं, “कासगंज कोर्ट में जब सुनवाई होती थी तो हमारी तरफ से 3-4 लोग होते थे, जबकि आरोपितों की तरफ से 100-200 लोग जमा हो जाते थे। वे दवाब बनाने की कोशिश करते थे। इसलिए हमने अपने पैसे से हाई कोर्ट में मुकदमा लड़ा और केस लखनऊ ट्रांसफर करवाया है। अब हम पैरवी के लिए लखनऊ बिना सुरक्षा के जाते हैं।”

FIR कॉपी में नामजद कुछ आरोपित

डर से पीछे हट रहे गवाह

सुशील गुप्ता के मुताबिक, “चंदन की हत्या के केस में आधे दर्जन से अधिक गवाह थे। लेकिन, अब एकाध को छोड़ अन्य गवाही देने से पीछे हट रहे हैं। अब उनका ही बेटा चश्मदीद गवाह बचा है। इसलिए परिवार उसकी सुरक्षा को लेकर भी चिंतित रहता है।”

हत्यारोपितों में वकील भी शामिल

वादे अभी भी अधूरे

ऑपइंडिया से बात करते हुए सुशील गुप्ता भावुक हो गए। रोते हुए उन्होंने कहा, “चंदन के न रहने के बाद वादों की झड़ी लगा दी गई थी। मेरी बेटी को सरकारी नौकरी और शहर के एक चौराहे का नाम चंदन के नाम पर रखने की बात कही गई थी। मेरी बेटी MSc की पढ़ाई पूरी कर चुकी है। उसको ब्लॉक स्तर पर एक नौकरी दी गई जो 5 महीने बाद खत्म कर दी गई। चौराहे पर चंदन की मूर्ति हमने अपने पैसे से लगाई है। उसका अनावरण नहीं हुआ है।”

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि चौराहे पर चंदन की मूर्ति लगाने से पहले प्रशासन से अनुमति ली गई थी या नहीं। लेकिन सुशील गुप्ता की माने तो जिस स्थान पर चंदन की प्रतिमा लगाई गई है, वह उसकी हत्या के बाद मंत्री सुरेश पासी ने नगरपालिका अधिकारियों से बात कर चिन्हित करवाई थी। नगर पालिका ने अपनी बोर्ड मीटिंग में भी नदरई गेट पर चंदन चौक बनाने की अनुमति दी थी। लेकिन नगरपालिका ने मूर्ति लगाने की जगह पर आधा-अधूरा काम कर ही छोड़ दिया था। इसके बाद चंदन के परिजनों और समाज के अन्य लोगों ने मिलकर चबूतरे का प्लास्टर करवाया और 3 जनवरी 2022 को एक मूर्ति वहाँ लगा दी। साथ ही बेटी की नौकरी से जुड़ा जो दावा सुशील गुप्ता ने किया है, उसके बारे में भी हमारी प्रशासन से बात नहीं हो पाई है। जानकारी मिलते ही हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

चंदन गुप्ता के परिजनों द्वारा चौराहे पर रखवाई गई मूर्ति

रक्षाबंधन के दिन नहीं बना घर में खाना

सुशील गुप्ता ने कहा, “रक्षाबंधन के दिन मेरी बेटी अपने भाई को याद कर लगातार रोती रही। उस दिन दुःख में हमारे घर में खाना नहीं बना। बहन ने अपने भाई की फोटो के आगे राखी और मिठाई रखी हुई है। चंदन की माता अक्सर उस दिन को याद करते हुए बीमार पड़ जाती हैं। सरकार ने तब हमें 20 लाख रुपए की मदद की थी, वो पैसे इस केस की पैरवी और आरोपितों को सजा दिलाने में ही काम आ रहे हैं।”

चंदन की तस्वीर पर रखी हुई राखी

कुछ लोग आ रहे केस खत्म करने का ऑफर ले कर

दिवंगत चंदन गुप्ता के पिता आगे कहते हैं, “अफ़सोस की बात ये है कि मैं तमाम धमकी और दबाव के बाद भी अपने दिवंगत बेटे को न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रहा, लेकिन मुझ पर केस खत्म करने का दबाव बनाने के लिए जो लोग भेजे जा रहे हैं, वे हिन्दू ही हैं। वे मेरे पास तमाम तरह के ऑफर और प्रलोभन लेकर आते हैं। हालाँकि, मेरा बेटा नहीं रहा तो मैं भी मरने को तैयार हूँ। मैं दोषियों को सजा दिलाने के लिए अंतिम साँस तक लड़ूँगा।”

15 अगस्त की तारीख-लाल किले की प्राचीर, 9वीं बार बोले PM मोदीः 9 बिंदुओं में समझिए स्वतंत्रता दिवस का पूरा संबोधन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर पर 9वीं बार तिरंगा फहराया। उन्होंने भारत को आजाद कराने वाले सभी महापुरुषों को नमन किया और 25 साल में देश कैसे विकसित होगा इसके लिए 5 मंत्र दिए। उनके 83 मिनट के भाषण में वीर सावरकर से लेकर सुभाष चंद्र बोस और भगवान बिरसा मुंडे को याद किया गया। देश के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने से लेकर नारी शक्ति पर बात की। भाई-भतीजेवाद को निशाना बनाया गया, भ्रष्टाचार पर चोट की गई और देश को जय अनुसंधान का नारा दिया गया।

उनके इस 83 मिनट के भाषण की खास बातें क्या थीं, आइए जान लेते हैं:

  • सावरकर से लेकर बिरसा मुंडे को याद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मदी ने आज 75वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने गाँधीजी, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल, अश्फाकउल्लाह खान, रानी लक्ष्मी बाई, तात्या तोपे के प्रति आभार जताया। साथ ही बिरसा मुंडे, तिरोट सिंह और अल्लूरी सीताराम राजू जैसे महापुरुषों की भूमिका को भी अतुल्य कहा।
  • हर घर तिरंगा: उन्होंने भारत की विविधताओं को उसकी ताकत बताते हुए आजादी का अमृत महोत्सव के सफल आयोजन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ पूरे देश के एक साथ आने का उदाहरण है। पिछले तीन दिनों में तिरंगे के लिए देश में जो उत्साह दिखा, उसकी कल्पना कई विशेषज्ञों ने नहीं की थी। भारत से प्यार करने वाले इसे कोने-कोने में फहरा रहे हैं।
  • विकसित भारत के लिए 5 प्रण: भारत की आजादी के 100 साल पूरे होने होने पर भारत कैसा होगा, इसके विजन की भी पीएम मोदी ने एक रेखा खींची। उन्होंने देश को 5 प्रण दिलाए। उन्होंने कहा, अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा। इनमें पहला बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए। दूसरा प्रण है- किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना। तीसरी प्रण है- हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण है- एकता और एकजुटता। पाँचवाँ प्रण- नागरिकों का कर्तव्य।”
  • भाई-भतीजावाद, परिवारवाद के कारण युवाओं से छिन रहा उनका हक: पीएम मोदी ने कहा कि जब भी वह भाई-भतीजेवाद की बात उठाते हैं तो लोगों को लगता है कि ये सिर्फ राजनीति की बात है। हकीकत में हिंदुस्तान के हर संस्थान में ये पोषित हो रहा है और इसकी वजह से काबिल युवाओं को अवसर नहीं मिल रहा है। उन्होंने परिवारवाद को पूरे राष्ट्र के लिए घातक कहा और बोले कि इससे शुद्धिकरण जरूरी है।
  • भ्रष्टाचार दीमक की तरह खोखला कर रहा है: पीएम ने लाल किले से भ्रष्टाचार जैसे अहम मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि ये भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खोखला कर रहा है, उससे देश को लड़ना ही होगा। उन्होंने कहा एक तरफ वो लोग हैं जिनके पास रहने के लिए जगह नहीं है और दूसरी तरफ वो लोग हैं जिनके पास चोरी किया माल रखने की जगह नहीं है। वह बोले, “हमें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना है। जो लोग पिछली सरकारों में बैंकों को लूट-लूटकर भाग गए। हम उनकी संपत्ति जब्त कर रहे हैं। कई लोग जेल में हैं, जिन लोगों ने देश को लूटा है और ऐसी स्थिति बनाई है उन्हें लूटा हुआ पैसा लौटाना होगा।”
  • आत्मनिर्भर भारत- एक जनआंदोलन: पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के बाद देश में दिखे बदलाव का उल्लेख किया। उन छोटे बच्चों का आभार जताया जो विदेशी खिलौने छोड़ स्वदेशी से खेलने लगे। पीएम ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत, ये हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर एक इकाई का दायित्व बन जाता है। आत्मनिर्भर भारत, ये सरकारी एजेंडा या सरकारी कार्यक्रम नहीं है। ये समाज का जनआंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है।”
  • कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं: पीएम ने भारतीयों की आस्था पर बात करते हुए कहा, “हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं।”
  • अंतरिक्ष की असीम ऊँचाई से समुद्र की गहराई तक रिसर्च में मदद: प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारा प्रयास है कि देश के युवाओं को असीम अंतरिक्ष से लेकर समंदर की गहराई तक रिसर्च के लिए भरपूर मदद मिले। इसलिए हम स्पेस मिशन का, डीप ओशन मिशन का विस्तार कर रहे हैं। स्पेस और समंदर की गहराई में ही हमारे भविष्य के लिए जरूरी समाधान है।”
  • जय जवान को मिला नया आयाम: अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का मंत्र देश को दिया, जो आज भी देश के लिए प्रेरणा है। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उसमें ‘जय विज्ञान’ को जोड़ा और अब वह इसमें ‘जय अनुसंधान’ को जोड़ रहे हैं। पीएम के भाषण में नारी शक्ति का भी जिक्र आया जब उन्होंने कहा, “हम महिलाओं और बेटियों को जितना अधिक अवसर देंगे, उनके योगदान से हमें उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।”

पटना की कोर्ट में पेशी के बाद जाना था सहरसा जेल, घर पहुँच गए बाहुबली आनंद मोहन: RJD का विधायक है बेटा, फोटो वायरल

बिहार में जब से नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की राजद के साथ मिलकर सरकार बनाई है, कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर लगातार आशंका जताई जा रही है। अब एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिनसे इन आशंकाओं को और बल मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बाहुबली आनंद मोहन कोर्ट में पेशी के लिए सहरसा जेल से पटना लाए गए थे। लेकिन वे पाटलिपुत्र स्थित घर भी चले गए। उनके बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक हैं। डीएम जी कृष्णैया हत्याकांड में आनंद मोहन उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।

आनंद मोहन को पेशी के लिए 12 अगस्त 2022 को पटना लाया गया था। वायरल हो रही तस्वीर इसी दौरान की बताई जा रही है। भाजपा ने इसे जंगलराज की वापसी बताया है। वहीं पुलिस मुख्यालय ने सहरसा की SP से इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर मामले की जाँच के आदेश दिए गए हैं।

आरोप है कि कोर्ट में पेशी के बाद आनंद मोहन सहरसा जेल लौटने की बजाए अपने पाटलिपुत्र स्थित घर चले गए थे। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर में उनके साथ विधायक बेटे चेतन आनंद और पत्नी लवली आनंद भी नजर आ रहीं हैं। हालाँकि ऑपइंडिया इन तस्वीरों की पुष्टि नहीं करता।

भाजपा ने बताया जंगलराज की वापसी

इस फोटो के वायरल होते ही भाजपा ने नीतीश सरकार पर निशाना साधा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा, “आनंद मोहन की जेल अवधि खत्म होने के बाद भी वो जेल में ही हैं। ऐसे में बिना जमानत के उनका अपने परिवार से मिलना सरासर गलत है। यह तो एक ट्रेलर भर है। ये बिहार में जंगलराज की वापसी के संकेत है। अब ऐसी घटनाएँ बिहार में होती रहेंगी।”

साथ गई पुलिस टीम सस्पेंड

इस मामले के राजनैतिक तूल पकड़ते ही बिहार पुलिस मुख्यालय ने सहरसा की SP लिपि सिंह से इस पूरी घटना की रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट जल्द ही अपर पुलिस महानिदेशक जितेंद्र सिंह को गंगवार को सौंपी जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व सांसद को पेशी पर ले जाने वाली पुलिस टीम को सस्पेंड कर दिया गया है।

‘पापा की तबियत खराब थी इसलिए रुक गए’

पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे RJD विधायक चेतन आनंद ने इस वायरल फोटो पर नवभारत टाइम्स से कहा, “कोर्ट से जेल की वापसी का यही रास्ता है। रास्ते में तबियत खराब होने के चलते वे चाँद मेमोरियल अस्पताल गए थे, जिसके सामने ही हमारा घर है। मेरे पिता अस्पताल में इलाज के लिए थोड़ी देर रुके थे। वहीं पर ये फोटो खींच ली गई जिस पर बेवजह का बवाल खड़ा हो रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अभी नई सरकार आई है।”

हालाँकि RJD ने इस तस्वीर पर सवाल उठाने वालों पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। RJD के उपाध्यक्ष तनवीर हसन ने कहा, “जाँच ये होनी चाहिए कि ये फोटो कब की है। क्या पता पुरानी फोटो दिखा कर बवाल खड़ा किया जा रहा हो। भाजपा अपनी बौखलाहट में अनाप-शनाप आरोप लगा रही है।”

चाँदी का चिलम रखते हैं नीतीश कुमार, विधानसभा में गाँजा फूँक कर आते हैं: 5 बार की महिला MLA ने भरी सभा में बताया, JDU बोली- मनगढ़ंत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लेकर भाजपा विधायक भागीरथी देवी ने चौंकाने वाला दावा किया है। एक सभा को संबोधित करते हुए महिला MLA ने कहा कि नीतीश कुमार के पास चाँदी का चिलम है। वे विधानसभा में गाँजा पीकर आते हैं। भागीरथी देवी ने ये बातें रविवार (14 अगस्त 2022) को कही।

भागीरथी देवी पश्चिम चम्पारण जिले की रामनगर सीट से विधायक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने कहा, “नीतीश विधानसभा की कार्रवाई के बीच से भी उठ कर गाँजा फूँकने चले जाते हैं। वे विधानसभा की लॉबी में गाँजा पीते हैं। नीतीश कुमार इधर की बात उधर करने में माहिर हैं। अब उनकी बातों पर कोई भरोसा नहीं करता।”

कभी नरकटियागंज ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस में साफ-सफाई का काम करने वाली 68 वर्षीया विधायक भागीरथी देवी का ये बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वे 5 बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँच चुकी हैं। उन्हें पद्मश्री सम्मान भी मिल चुका है। भाजपा विधायक ने ये बातें रामनगर ब्लॉक में आयोजित पार्टी कार्यक्रम के दौरान कही।

वहीं JDU ने भाजपा विधायक भागीरथी के आरोपों का खंडन करते हुए इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की छवि को धूमिल करने का प्रयास बताया है। JDU प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, “भागीरथी देवी भाजपा के सीनियर नेताओं के दबाव में ये बयान दे रही हैं। वो एक सज्जन महिला हैं। उनकी तमाम बातें मनगढ़ंत हैं, क्योंकि भाजपा के पास ऐसे आरोपों के अलावा कुछ भी नहीं है।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों नीतीश कुमार ने एनडीए का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने राजद, कॉन्ग्रेस और वाम दलों के सहयोग से नई सरकार बनाई है। तेजस्वी यादव उनकी नई सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं।

जरा याद उन्हें भी कर लो… जो नहीं रहे, क्योंकि वे हिंदू थे: उस सूची के 75 नाम, जिसका नहीं दिख रहा कोई पूर्ण विराम

जिस स्वतंत्रता को हमने मजहब के नाम पर भारत के बँटवारे के बाद पाया, उसकी आयु 75 साल हो चुकी है। पर मुहम्मदवाद और ईसायत के खतरे खत्म नहीं हुए हैं। आज भी हिंदू होना, हिंदुओं की बात करना अपराध है। ऐसे लोगों की खुलेआम हत्या हो रही है। वे कभी रात के अँधेरे में आकर वार करते हैं। कभी ग्राहक बन दुकान में घुसते हैं और गला काट जाते हैं। कभी भगवा पहन मिलने के बहाने आते हैं और चाकुओं से गोद कर चले जाते हैं। घात लगाए बैठे रहते हैं और राह चलते काट जाते हैं।

साधु-संत हों या आस्थावान सामान्य हिंदू, सब एक जैसे ही खतरे में हैं। न घर सुरक्षित हैं, न आश्रम। ओडिशा में एक जगह है कंधमाल। कंधमाल के जलेसपट्टा में ही था, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का आश्रम। तारीख थी 23 अगस्त 2008। जन्माष्टमी का कार्यक्रम चल रहा था। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती अराधना में लीन थे। पहले उन्हें गोली मारी गई फिर मृत शरीर को कुल्हाड़ी से काट दिया गया। उस दिन स्वामी लक्ष्माणानंद सरस्वती सहित कुल 5 साधु की इसी तरीके से आश्रम में हत्या हुई। वजह स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती गो रक्षा की बात करते थे। वनवासी इलाकों में बहला-फुसलाकर धर्मांतरित किए गए हिंदुओं की घर वापसी के लिए अभियान चला रहे थे।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती संत थे। जय श्रीराम कहते रहे होंगे, जो अनुराग कश्यप जैसे टुटपुंजिए बॉलीवुडिए के हिसाब से ‘वॉर क्राई’ है। मोहम्मद जुबैर के शब्दों में कहे तो ‘हेट मोंगर्स’ थे।

लेकिन सर्वानंद कौल पूरे सेकुलर थे। सर्व धर्म समभाव वाले। जैसी संस्कृत पर पकड़, वैसी ही फारसी पर। जैसे हिंदी के जानकार, वैसे ही उर्दू के। जैसी अंग्रेजी पर पकड़, वैसी ही कश्मीरी पर। कवि थे। अपने पूजा घर में कुरान रखते थे। एक रात शांतिदूतों ने उनके घर दस्तक दी। बारिश हो रही थी। 66 साल के सर्वानंद कौल और उनके 27 साल के बेटे को साथ ले गए। दो दिन बाद पिता पुत्र की पेड़ से टँगी लाश मिली। जहाँ तिलक लगाते थे, वहाँ की चमड़ी तक छील दी गई थी।

सर्वानंद कौल बुजुर्ग थे। उम्र के अंतिम पड़ाव पर थे। बाल भी बाँका नहीं होने देने का वचन देने वालों ने धोखा दे दिया। लेकिन 27 फरवरी 2002 को साबरमती एक्सप्रेस में जो जिंदा जला दिए गए, उनमें 10 तो बच्चे ही थे। कुल 59 लोग जिंदा जले थे। 27 महिला, 22 पुरुष और 10 बच्चे। अयोध्या से लौट रहे थे।

कासगंज में 26 जनवरी 2018 को चंदन गुप्ता की हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने तिरंगा यात्रा निकाली। प्रशांत पुजारी फूल विक्रेता थे। मन्नूलाल वैष्णव घर-घर अखबार पहुँचाते थे। सारे मारे गए। आज कोई जीवित नहीं है।

हर्षा, किशन भरवाड, उमेश कोल्हे, कन्हैयालाल, प्रवीण नेट्टारू… ये ताजा नाम हैं। स्वतंत्र भारत में उन नामों की फेहरिस्त काफी लंबी है जो केवल इसलिए मार दिए, क्योंकि वे हिंदू थे। वे हिंदू समाज को एकजुट कर रहे थे। वे धर्मांतरित हिंदुओं की घर वापसी में जुटे थे। वे भारत, तिरंगा, गोरक्षा की बात कर रहे थे।

70 साल की काला देवी को इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्होंने वैश्विक कोरोना महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई में एकजुटता दिखाने के लिए घर में दीप जला लिया। 12वीं की छात्रा लावण्या से कहा गया कि पढ़ना है तो धर्म बदलो या टॉयलेट साफ करो। दबाव नहीं झेल पाई। खुद ही अपनी जान ले ली। कुछ लव जिहाद के शिकार हुए तो कुछ को इस्लाम के लिए खतरा बता मार दिया गया।

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर लेकर आए हैं, स्वतंत्र भारत के ऐसे 75 नाम/घटना, जो केवल इसलिए मार दिए गए क्योंकि वे हिंदू थे;

  1. प्रवीण नेट्टारू
  2. कन्हैया लाल साहू
  3. उमेश कोल्हे
  4. हर्षा
  5. किशन भरवाड
  6. रुपेश पांडेय
  7. नीरज राम प्रजापति
  8. मुकेश सोनी
  9. कमलेश तिवारी
  10. स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती
  11. वी रामलिंगम
  12. ध्रुव त्यागी
  13. पालघर: कल्पगिरि महराज, सुशील गिरि महराज, नीलेश तेलगडे
  14. गौरव-सचिन
  15. प्रशांत पुजारी
  16. संजय कुमार
  17. अंकित सक्सेना
  18. रतनलाल
  19. अंकित शर्मा
  20. गंगाराम सिंह चौहान
  21. भरत यादव
  22. विष्णु गोस्वामी
  23. सुबोध सिंह
  24. अविनाश सक्सेना
  25. अमित गौतम
  26. चंदन गुप्ता
  27. रविंदर कुमार
  28. रिया गौतम
  29. योगेश कुमार
  30. पंकज नारंग
  31. काला देवी
  32. मिथुन ठाकुर
  33. रवि निंबारगी
  34. रेवती सिंह
  35. राजेश कुमार
  36. निकिता तोमर
  37. डॉ संजय सिंह
  38. रिंकू शर्मा
  39. सन्नी सिन्हा
  40. राहुल राजपूत
  41. राहुल सोलंकी
  42. शंभूलाल
  43. भरत वैष्णव
  44. रंजीत बच्चन
  45. प्रिया-कशिश
  46. नागराजू
  47. दिलबर नेगी
  48. रितिक आदर्श
  49. बीके गंजू
  50. सर्वानंद कौल
  51. विनोद कुमार
  52. टीकालाल टपलू
  53. साधु सरवनन
  54. अजय पंडिता
  55. सतीश भंडारी
  56. माखन लाल बिंद्रू
  57. गिरिजा टिक्कू
  58. सतिंदर कौर
  59. दीपक चंद
  60. हीरालाल गुजराती
  61. रामेश्वर अंकुश
  62. आलोक तिवारी
  63. प्रेम सिंह
  64. दिनेश
  65. वीरभान
  66. बीना झा
  67. साबरमती एक्सप्रेस में सवार कारसेवक
  68. कृष्ण राजदान
  69. पीएन कौल
  70. नीलकंठ गंजू
  71. रजनी बाला
  72. सतीश कुमार टिकू
  73. एकता देशवाल
  74. कांति प्रसाद
  75. संतोला देवी

ऐसे नाम और घटनाओं को केवल 75 के आँकड़े में समेटा नहीं जा सकता। यह एक ऐसी अंतहीन सूची है जिसका पूर्ण विराम न जाने कब आयेगा। तारीख बदलते ही सूची में नया नाम जुड़ जाता है। अमृत महोत्सव के इस साल में ऑपइंडिया सूची में शामिल नाम में से कई के परिवार तक पहुँचा है। हम एक-एक कर उनका हाल आपके सामने लाएँगे।

हम न इन हिंदुओं को भूले थे, न भूलेंगे। आपको भी बार-बार, तब तक इनकी याद दिलाते रहेंगे, जब तक आप इस खतरे में घिरे हैं। जब तक आप काफिर हैं। ताकि आप मुहम्मदवाद और ईसायत के खतरे से सचेत रहें।

लाल किले से PM मोदी ने ‘जय जवान’ को दिया नया आयाम, बोले- जय अनुसंधान: विकसित भारत के लिए दिलाए 5 प्रण, परिवारवाद-भ्रष्टाचार पर चोट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लाल किले की प्राचीर से देश को स्वतंत्रता दिवस की बधाई देने के दौरान अपने भाषण में आने वाले 25 सालों में भारत कैसे विकसित होगा, इसके लिए भारत 5 प्रण दिलाए। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को जन आंदोलन कहा। साथ ही ‘जय जवान’ को नया आयाम देते हुए ‘जय अनुसंधान’ का नारा दिया। उन्होंने भाई भतीजावाद पर चोट करते हुए परिवारवाद को राष्ट्र के लिए घातक कहा।

भाई-भतीजावाद, परिवारवाद पर निशाना

पीएम मोदी अपने भाषण में भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद पर भी निशाना साधा और इसे देश की दो सबसे बड़ी चुनौती कहा। उन्होंने कहा कि जब वह इन मुद्दों पर बात करतें हैं तो लगता है कि राजनीति पर बोला जा रहा है, पर सच्चाई यह है कि हर संस्थान में परिवारवाद को पोषित कर दिया गया है। जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता होता, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है।

पीएम मे परिवारवाद को राष्ट्र के लिए घातक कहा। वह बोले, “भाई-भतीजावाद के खिलाफ नफरत पैदा करनी होगी। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, देश के लिए नहीं। आइए, हिंदुस्तान की राजनीति व सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए इससे मुक्ति दिलाकर आगे बढ़ें।”

‘जय अनुसंधान’ : PM मोदी

अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का मंत्र देश को दिया, जो आज भी देश के लिए प्रेरणा है। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उसमें ‘जय विज्ञान’ को जोड़ा और अब वह इसमें ‘जय अनुसंधान’ को जोड़ रहे हैं। पीएम के भाषण में नारी शक्ति का भी जिक्र आया जब उन्होंने कहा, “हम महिलाओं और बेटियों को जितना अधिक अवसर देंगे, उनके योगदान से हमें उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।”

रिसर्च में देंगे हर संभव मदद: PM मोदी

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को हर नागरिक, हर सरकार, हर ईकाई का दायित्व बताया। उन्होंने कहा ये सरकारी कार्यक्रम नहीं जनआंदोलन है जिसे आगे बढ़ाते जाना है। इसके अलावा देश को अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। सरकार का प्रयास है कि देश के युवाओं को असीम अंतरिक्ष से लेकर समुंदर की गहराई तक रिसर्च में मदद मिले, इसलिए डीप ओशियन मिशन और स्पेस मिशन का विस्तार हो रहा है।

पंच प्रण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा हम अमृत काल में कदम रख रहे हैं और इस मौके पर ‘पंच प्रण’ का संकल्‍प लेते हैं। उन्होंने कहा, “अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए। दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना। तीसरी प्रण शक्ति- हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण है- एकता और एकजुटता। 5वाँ प्रण- नागरिकों का कर्तव्य।”

विकसित भारत के लिए पंच प्रण: लाल किले की प्राचीर से PM मोदी ने दिया मंत्र, बोले – हम वो, जो कंकड़-कंकड़ में देखते हैं शंकर

स्वतंत्रता दिवस के 75 वर्ष पूरे होने पर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले पर 9वीं बार तिरंगा फहराया। उन्होंने इस दौरान अपने संबोधन से देशवासियों में तो ऊर्जा भरी ही। साथ ही ‘पंच प्रणों’ का जिक्र भी किया जो अगले 25 सालों में भारत को विकसित बनाने के मंत्र होंगे। उन्होंने कहा कि आज विश्व ने भारत को देखने का नजरिया बदल लिया है। विश्व की सोच में यह परिवर्तन 75 वर्ष की यात्रा का परिणाम है। उन्होंने भारत की विभिन्नता को देश की ताकत बताकर आत्मनिर्भर भारत की महत्ता पर बात की।

उन्होंने बताया कि साल 2014 में वह ऐसे पहले पीएम बने थे, जिन्होंने आजाद भारत में जन्म लेकर लाल किले की प्राचीर से झंडे को फहराया था।

अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने पहले देशवासियों को आजादी के अमृत महोत्सव की बधाई दी। फिर बताया कि कैसे न सिर्फ हिंदुस्तान का हर कोना, बल्कि दुनिया के हर कोने में आज किसी न किसी रूप में भारतीयों के द्वारा तिरंगा आन-बान-शान के साथ लहराया जा रहा है।

लाल किले से पीएम मोदी ने महापुरुषों को किया याद

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान का कोई कोना, कोई काल ऐसा नहीं था, जब देशवासियों ने सैंकड़ों सालों तक गुलामी के खिलाफ जंग न की हो, जीवन न खपाया हो, यातनाएँ न झेली हों, आहुति न दी हो। आज हम सब देशवासियों के लिए ऐसे हर महापुरुष को, हर त्यागी और बलिदानी को नमन करने का अवसर है।”

आज के दिन को ऐतिहासिक कहते हुए पीएम मोदी ने मंगल पांडे, तात्या टोपे, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद, असफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांति वीरों को याद किया और अंग्रेजों की हुकूमत की नींव हिलाने के लिए उनके प्रति देश की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की।

वह बोले, “आजादी की जंग लड़ने वाले और आजादी के बाद देश बनाने वाले अनेक महापुरुषों को नमन करने का अवसर है।”

आजादी का अमृत महोत्सव

आजादी के अमृत महोत्सव को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “अमृत महोत्सव के दौरान देशवासियों ने देश के हर कोने में लक्ष्यावधि कार्यक्रम किए। शायद इतिहास में इतना विशाल, व्यापक, लंबा एक ही मकसद का उत्सव मनाया गया हो। इस दौरान हिंदुस्तान के हर कोने में उन सभी महापुरुषों को याद करने का प्रयास किया गया, जिनको किसी न किसी कारणवश इतिहास में जगह न मिली, या उनकों भुला दिया गया था।आज देश ने खोज खोज कर ऐसे वीरों, महापुरुषों, बलिदानियों, सत्याग्रहियों को याद किया, नमन किया।”

पीएम मोदी ने अपने भाषण में ‘आकांक्षी समाज’ को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति बताया और कहा कि देश का हर नागरिक चीजों को बदलना चाहता है और बदलाव देखना चाहता है। वे अपनी आँखों के सामने बदलवा देखना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद पूरे विश्व का भारत की तरफ देखने का नजरिया बदल चुका है। समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर दुनिया खोजने लगी है। विश्व का ये बदलाव, विश्व की सोच में ये परिवर्तन 75 साल की हमारी यात्रा का परिणाम है।

पीएम मोदी ने देश को दिलाए पंच प्रण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा हम अमृत काल में कदम रख रहे हैं और इस मौके पर ‘पंच प्रण’ का संकल्‍प लेते हैं। उन्होंने कहा, “अब देश बड़े संकल्प लेकर चलेगा, और वो बड़ा संकल्प है विकसित भारत और उससे कुछ कम नहीं होना चाहिए। दूसरा प्रण है किसी भी कोने में हमारे मन के भीतर अगर गुलामी का एक भी अंश हो उसे किसी भी हालत में बचने नहीं देना। तीसरी प्रण शक्ति- हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण है- एकता और एकजुटता। 5वाँ प्रण- नागरिकों का कर्तव्य।”

पाँच प्रणों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी बोले इन सबसे न प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नदी को माँ मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं।”

अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना काल में भारत द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि जब विश्व इस संशय में था कि वैक्सीन लें या न लें तब भारत ने 200 वैक्सीन देने का इतिहास रचा।

उन्होंने आत्मनिर्भर भारत को हर नागरिक, हर सरकार, हर ईकाई का दायित्व बताया। उन्होंने कहा ये सरकारी कार्यक्रम नहीं जनआंदोलन है जिसे आगे बढ़ाते जाना है। इसके अलावा देश को अपनी विरासत पर गर्व करना होगा। सरकार का प्रयास है कि देश के युवाओं को असीम अंतरिक्ष से लेकर समुंदर की गहराई तक रिसर्च में मदद मिले, इसलिए डीप ओशियन मिशन और स्पेस मिशन का विस्तार हो रहा है।

पीएम मोदी अपने भाषण में भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद पर भी निशाना साधा और इसे देश की दो सबसे बड़ी चुनौती कहा। उन्होंने कहा कि जब वह इन मुद्दों पर बात करतें हैं तो लगता है कि राजनीति पर बोला जा रहा है, पर सच्चाई यह है कि हर संस्थान में परिवारवाद को पोषित कर दिया गया है। जब तक भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी के प्रति नफरत का भाव पैदा नहीं होता होता, सामाजिक रूप से उसे नीचा देखने के लिए मजबूर नहीं करते, तब तक ये मानसिकता खत्म नहीं होने वाली है।

पीएम मे परिवारवाद को राष्ट्र के लिए घातक कहा। वह बोले, “भाई-भतीजावाद के खिलाफ नफरत पैदा करनी होगी। परिवारवादी राजनीति परिवार की भलाई के लिए होती है, देश के लिए नहीं। आइए, हिंदुस्तान की राजनीति व सभी संस्थाओं के शुद्धिकरण के लिए इससे मुक्ति दिलाकर आगे बढ़ें।”

अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि सबसे पहले लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान-जय किसान’ का मंत्र देश को दिया, जो आज भी देश के लिए प्रेरणा है। इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने उसमें ‘जय विज्ञान’ को जोड़ा और अब वह इसमें ‘जय अनुसंधान’ को जोड़ रहे हैं। पीएम के भाषण में नारी शक्ति का भी जिक्र आया जब उन्होंने कहा, “हम महिलाओं और बेटियों को जितना अधिक अवसर देंगे, उनके योगदान से हमें उतना ही अधिक लाभ मिलेगा।”

स्वतंत्रता के हुए 75 साल, फिर भी बाँटी जा रही मुफ्त की रेवड़ी: स्वावलंबन और स्वदेशी से ही आएगी आर्थिक आत्मनिर्भरता

स्वतंत्र शब्द का सीधा अर्थ है ‘अपना तंत्र’। राजनीतिक संदर्भ में स्वतंत्रता समाज के अपने बनाए हुए तंत्र का अर्थ व्यक्त करती है। तंत्र से आशय किसी लक्ष्य की प्राप्ति हेतु निर्धारित किए गए व्यवस्थापन से है। परतंत्र भारत में शिक्षा, सुरक्षा, न्याय, चिकित्सा उद्योग, व्यवसाय आदि व्यवस्थाएँ इस्लामी आक्रांताओं और अंग्रेजों की अपनी सांस्कृतिक अवधारणाओं, विश्वासों एवं मान्यताओं के अनुरूप निर्धारित की जाती रहीं। परिणामतः भारतवर्ष अपने सामाजिक-राजनीतिक तंत्र से दूर होता चला गया।

वो अपनी परम्पराओं नीतियों-रीतियों को भुलाता चला गया, तथापि निरन्तर संघर्ष करता हुआ ‘स्व-तंत्र’ के पुनर्प्रतिष्ठापन के लिए सजग रहा और अंततः 15 अगस्त, 1947 को उसने स्वतंत्रता प्राप्त कर विश्वमंच पर पुनः अपनी स्वाधीनता, स्वायत्तता एवं अस्मिता प्रमाणित की। किन्तु, ब्रिटिश-दासता से मुक्ति के बाद हमारी विकास यात्रा में ‘स्व-तंत्र’ कितना विकसित हुआ और अरबों तथा अंग्रेजों के बनाए परतंत्र को हमने स्वतंत्रता की छाँह तले कितना पुष्ट किया – यह आजादी के अमृत महोत्सव की पुण्य बेला में निश्चय ही विमर्श का विषय होना चाहिए।

व्यवस्थागत परतंत्रता से विमुक्त ‘स्व-तंत्र’ की पुनर्स्थापना में ही स्वतंत्रता का स्वर्णिम भविष्य सुरक्षित हो सकता है। राजसत्ता का विस्तारवादी स्वभाव अपनी सामरिक शक्ति का आश्रय लेकर न केवल दूसरे देशों की भूमि पर अधिकार करता है प्रत्युत उनकी संस्कृति को नष्ट कर उन पर अपनी भाषा, वेश, जीवन-शैली और व्यवस्था आरोपित करने का भी हर संभव प्रयत्न करता है। विगत 800 वर्षों में इस्लामी और ब्रिटिश शासकों ने भारत में अपने-अपने ढंग से भारत की सनातन परंपराओं को समाप्त करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी।

कठमुल्लाओं ने मंदिर तोड़े, पुस्तकालय जला दिए, अतिरिक्त कर लगाए और अंग्रेजों ने भी सेवा और सुधार के नाम पर ईसाइयत का विस्तार करते हुए भारतीय सांस्कृतिक चेतना को दूर तक आहत किया। शिक्षा की गुरुकुल प्रणाली समाप्त हो गई, चिकित्सा के क्षेत्र में आयुर्वेद हाशिए पर चला गया, संस्कृति की संवाहक संस्कृत भाषा शिक्षा- क्षेत्र से बहिष्कृत हुई, सरल शाकाहारी सात्विक जीवन उपेक्षित हुआ और मांसाहार, मद्यपान तथा व्यभिचार को अपार विस्तार मिला।

पुरानी रूढ़ियाँ और कुरीतियाँ तो कम दूर हुईं, किंतु नई बुराइयों को फलने-फूलने के अवसर बहुत निर्मित हुए। ब्रिटिश शासन से मुक्ति के उपरांत भारत का नव-निर्माण भारतीय समाज की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप भारतीय-दृष्टि से किया जाता तो हम सच्चे अर्थों में स्वतंत्र होते किंतु हमारी स्वातंत्र्योत्तर विकास की रेलगाड़ी तो अंग्रेजों की बिछाई पटरी पर ही पूर्ववत दौड़ाई गई और आज भी दौड़ाई जा रही है।

इस स्थिति में ‘तंत्र’ का ‘स्व’ विलुप्त है और ‘पर’ निरन्तर सशक्त हो रहा है। अपनी भौतिक उपलब्धियों और महानगरों के चकाचौंध भरे परिदृश्य में अपना मिथ्या गौरव गान गाने और अपनी पीठ स्वयं थपथपाने के लिए भले ही हम स्वतंत्र हैं किंतु सामाजिक स्तर पर हमारी एकता और अखंडता पर छाए संकट के बादल जब-तब हमारी कमजोरी उजागर कर देते हैं। हमारे शास्त्रों में कहा गया है-

राज्ञि धर्मिणि धर्मिष्ठाः पापे पापाः समे समाः।
लोकास्तमनुवर्तन्ते यथा राजा तथा प्रजाः॥

अर्थात, यदि राजा धर्मशील हो तो लोग धर्मशील होते हैं, पापी हो तो पापी होते हैं, सम हो तो सम होते हैं। लोग तो राजा का अनुसरण करते हैं। जैसा राजा होता है वैसी प्रजा हो जाती है। व्यावहारिक स्तर पर इतिहास भी इस तथ्य को प्रमाणित करता है। मेवाड़ के महाराणा प्रताप के नेतृत्व में वहाँ की प्रजा ने अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मुगलों के विरुद्ध युद्ध किया, जबकि आमेर नरेश मानसिंह द्वारा अकबर की दासता स्वीकार करने के परिणाम स्वरूप वहाँ की सेना-प्रजा भी अकबर की सहयोगी बनी।

राजतंत्र ही नहीं, लोकतंत्र में भी यह प्रवृत्ति दिखाई देती है। जनता के नेता ही आज के राजा हैं। बीसवीं शताब्दी में देश के संसाधनों पर अंग्रेजो का कब्जा था, किंतु जनता के हृदय पर लोकमान्य तिलक, महात्मा गाँधी और सुभाषचंद्र बोस जैसे भारतीय नेता ही राज कर रहे थे। गाँधीजी ने जब व्यक्तिगत जीवन की समस्त भौतिक सुख सुविधाएँ त्याग कर एक धोती-लंगोटी धारण कर देश-सेवा का व्रत लिया तो सारा देश उनके पीछे निजी सुख त्याग कर आजादी की लड़ाई में निस्वार्थ भाव से उमड़ पड़ा किंतु स्वतंत्रता के उपरांत हमारे नेताओं ने सत्ता के शीर्ष पर बैठकर जब मुफ्त की सुविधाओं के लिए स्वयं को समर्पित किया तो हमारे अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारी आदि समाज के संचालक सभी वर्ग त्यागपूर्ण देशभक्ति का पाठ भूलकर व्यक्तिगत संपत्ति संचय में जुट गए और भ्रष्टाचार की कालिमा ने बलिदान के अमृत-कलश स्वतंत्रता के लोकमंगलकारी स्वरूप को साकार नहीं होने दिया।

भ्रष्टाचार स्वतंत्र भारत की सबसे बड़ी समस्या है। दूसरी सारी समस्याएँ प्रायः इसी से उपजी हैं। हमारी स्वतंत्रता के साथ-साथ पले-बढ़े भ्रष्टाचार के इस कालिया नाग की जकड़ में सारे देश की देह अकड़ रही है। कालिया को नाथने के लिए ईमानदार प्रयत्न करने होंगे। अपने और पराए का भेद भूलकर समर्थन और विरोध का पथ चुनना होगा। अन्यथा स्वतंत्रता का पथ कंटकाकीर्ण हो जाएगा।

भक्ति-भावना प्राचीन काल से ही भारतीय जनमानस की नस-नस में समाई है। देश की समस्त जनता चाहे वह किसी भी धर्म का अनुसरण करती हो, अपने इष्टदेव के प्रति अगाध श्रद्धा रखती है। श्रद्धा का यह प्रसार महापुरुषों संत-महात्माओं, पीर-पैगंबरों और धार्मिक नेताओं के प्रति भी दिखाई देता है। लोकतंत्र के आने से पूर्व अपने राजाओं और जमींदारों, यहाँ तक कि विदेशी शासकों के प्रति भी भारतीय जनता भक्ति प्रकट करती रही है।

मार्क्सवादी विदेशी विचारकों के प्रति भी देश में भक्तों की कमी नहीं है, किंतु यह विडंबना ही है कि सब के प्रति भक्ति से ओतप्रोत इस देश में स्वदेश, स्वभाषा एवं स्वसंस्कृति के प्रति भक्ति का प्रबल आवेग दिखाई नहीं देता। विदेशी आक्रमणकारी गजनबी, गोरी, लोधी, खिलजी और मुगल इस विशाल देश की जनता की तुलना में बहुत कम सेनाएँ लेकर आए और सफल हो गए। बार-बार कत्लेआम हुए। दुश्मनों की तलवारों के सामने हमने पशुओं की भाँति अपनी गर्दनें झुका दीं, कटवा दीं, किंतु तलवार लेकर सामूहिक रूप से उन पर प्रहार को उद्यत नहीं हुए प्रत्युत जान बचाने के लिए उनके सहयोगी भी बने।

मुट्ठी भर अंग्रेज अपने देश-प्रेम और जातीय-एकता के बल पर इस विशाल देश पर शासन करते रहे, इसे लूटते रहे, प्रलोभन देकर धर्मांतरित करते रहे किंतु हमने एक साथ विरोध करने में सैकड़ों वर्ष लगा दिए। हम भारतीयों का स्वभाव व्यक्ति अथवा समूह के प्रति भक्ति का अधिक है, राष्ट्र के प्रति भक्ति का कम। यही कारण है कि हममें से बहुत से लोग हिंदू, मुसलमान, जैन, बौद्ध, सिख, बंगाली, बिहारी, मराठी, सवर्ण-असवर्ण, बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक आदि पहले हैं और भारतवासी बाद में।

हम कॉन्ग्रेसी, भाजपाई, सपाई व बसपाई आदि पहले हैं, भारतीय जनतंत्र की व्यवस्था के जागरूक नागरिक पीछे हैं, इसीलिए देशहित को हाशिए पर धकेलकर अपने समूह के हितों और सुविधाओं के लिए एक-दूसरे के विरुद्ध जब-तब हिंसक आंदोलनों पर उतारू हो जाते हैं। हमारे चुने हुए नेतागण खुलेआम घोषणा करते हैं कि यदि उनके प्रांत का व्यक्ति राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया जाएगा तो वे उसे समर्थन देंगे, अन्यथा नहीं।

इसका अर्थ यह हुआ कि उनकी दृष्टि में महत्व पद के अनुरूप योग्यता का नहीं बल्कि उम्मीदवार की क्षेत्रीयता-सामाजिकता का है। विचारणीय है कि क्या वे राष्ट्रपति अपने प्रदेश या समाज के लिए चुन रहे हैं अथवा सारे भारतवर्ष के लिए? नेताओं की क्षेत्रीय-भक्ति की ऐसी मानसिकता जनतंत्र के लिए शुभ नहीं हो सकती। स्वतंत्रता किसी भी प्रकार की संकीर्णता से ऊपर उठकर समग्रता में घटनाओं और नीतियों को देखने-समझने की अपेक्षा करती है, किंतु दुर्भाग्य से राजनीतिक दलगत समूहों में बँटा देश स्वतंत्रता की इस अपेक्षा को महत्वपूर्ण नहीं समझता।

अनेक तथाकथित धार्मिक नेता जेलों में बंद हैं, फिर भी उनके भक्तों के मन में उनके प्रति श्रद्धा-भक्ति की कमी नहीं। भक्तों के बीच अब भी उनके जन्मदिन मनाए जाते हैं। भक्त उनकी जय-जयकार करते हैं। वे यह मानने को तैयार ही नहीं कि उनके गुरुदेव ने कहीं कुछ गलत किया है और अब वे उसी की सजा भुगत रहे हैं। भक्त समूह यह समझता है कि उसके गुरुजी निर्दोष हैं और उन्हें झूठे मामले में फँसाया गया है। यही अंधभक्ति राजनेताओं के संदर्भ में भी उनके समर्थकों में है।

ED (प्रवर्तन निदेशालय) आदि संस्थाओं की कार्यवाहियों का व्यापक विरोध इस अंधभक्ति का ताजा सबूत है। हमारे संवैधानिक व्यवस्थापन में देश का कोई भी नागरिक कानून के ऊपर नहीं। फिर शक्ति-प्रदर्शन करके अपनी पसंद के नेतृत्व को आरोप मुक्त कराने के लिए इन संस्थाओं पर अनुचित दबाव क्यों? जब हम यह मानते हैं कि सत्य की ही जय होती है तब ईमानदार सत्यवादी देशभक्त नेताओं और उनके समर्थकों को ईडी आदि से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।

क्या सत्ता पक्ष इतना बलवान है कि निर्दोष विपक्ष को भी शूली पर चढ़ा दे? क्या हमारी न्यायपालिका व्यवस्थापिका के हाथों की कठपुतली मात्र है? क्या बिना सशक्त साक्ष्यों के वह किसी निरपराध को दंडित कर सकती है? यदि नहीं तो फिर संसद से सड़क तक भक्तों का विरोध प्रदर्शन क्यों? यदि उनके आराध्य निर्दोष हैं तो बेदाग छूट ही जाएंगे और यदि अपराधी हैं तो उन्हें भी सजा मिलनी ही चाहिए, क्योंकि कानून से ऊपर कोई नहीं।

आज भक्ति देश के प्रति जितनी अपेक्षित है, उतनी किसी दल अथवा व्यक्ति के प्रति नहीं। जो कार्य देश, जनता तथा जनतांत्रिक व्यवस्था के संरक्षण और संवर्धन के लिए हों, उनका समर्थन और जो इनके प्रतिकूल हों उनका विरोध करना हर नेता एवं प्रत्येक जनसमूह का पुनीत कर्तव्य है। यही स्वतंत्रता की सुरक्षा का तकाजा भी है। बड़े-बड़े पूंजीपतियों, कारोबारियों और ठेकेदारों को लाभान्वित करने के लिए बड़े-बड़े निर्माणों में देश के विकास का दंभ हमारे देश के कर्णधारों मिथ्या आडंबर ही अधिक सिद्ध हो रहा है।

विदेशी अंग्रेजों के बनाए भवन, पुल आदि आज उनके जाने के 75 वर्ष बाद भी कामचलाऊ स्थिति में सर उठाए खड़े हैं, जबकि भारी लागत से बने विगत आठ-दस वर्षों के नए निर्माण भी ढहे जा रहे हैं। विदेशी पूँजी के बल पर हम आत्मनिर्भर बनने के सपने देख रहे हैं। हम भूल रहे हैं कि आत्मनिर्भरता केवल स्वावलंवन पर निर्भर करती है। उसे अपने संसाधनों से ही प्राप्त किया जा सकता है। एक ओर करभार बढ़ता जा रहा है, दूसरी और वोट बैंक सशक्त करने के लिए सरकारें मुफ्त में राशन, बिजली, पानी बाँट रही हैं।

निर्धन वर्ग में अकर्मण्यता बढ़ रही है। बेरोजगारी बहुत है, किंतु छोटे-मोटे काम करने वाले कारीगर-मजदूर ढूंढे नहीं मिलते। ऋण देकर प्राण-हरण की शोषक वृत्ति बढ़ी है। अमीर बनने की धुन युवाओं को अपराध की ओर धकेल रही है। सड़कें बदहाल हैं, पेट्रोल महँगा है, फिर भी अनियंत्रित गति से दौड़ती बाइकों और कारों की बढ़ती भीड़ में हम प्रगति का दावा ठोक रहे हैं। आत्ममुग्ध सत्ता-पक्ष और सत्ता में वापस आने के लिए कुछ भी करने को उद्यत आक्रामक विपक्ष – दोनों ही भारतवर्ष के ‘स्व’ से उत्तरोत्तर दूर हो रहे हैं।

यूरोप की खूनी क्रांतियाँ भारत की शांत-भूमि में जड़े तलाश रही हैं। आवश्यकता एक बार फिर भारतीय समाज को भारतीय जीवन शैली के अनुरूप पुनर्गठित करने की है। महात्मा गाँधी के ‘हिन्द स्वराज’ के अनुरूप आधुनिक संदर्भों में विकास का पथ तलाश करने की है। सत्ता-पक्ष और विपक्ष यदि देशहित में एक होकर इस दिशा में प्रयत्नशील हों और भ्रष्टाचार तथा वोट बैंक की दूषित राजनीति के चंगुल से व्यवस्था को मुक्त करा सकें, विभिन्न समूहों के मोतियों को राष्ट्रीय-एकता के सूत्र में पिरो सकें तो हमारी स्वतंत्रता और भी अधिक अमृतफल-दायिनी बन सकेगी। स्वतंत्रता उच्छृंखलता नहीं अनुशासन है। स्वतंत्रता के अमृत-महोत्सव पर हर देशवासी में यह बोध होना चाहिए।

(लेखक डॉ कृष्णगोपाल मिश्र मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित ‘शासकीय नर्मदा स्नातकोत्तर महाविद्यालय’ में बतौर विभागाध्यक्ष-हिन्दी कार्यरत हैं)