सलमान खान (Salman Khan) की एक्स गर्लफ्रेंड सोमी अली ने सोशल मीडिया के जरिए बॉलीवुड अभिनेता पर बिना नाम लिए एक बार फिर आरोप लगाए हैं। सोमी अली ने शुक्रवार (19 अगस्त, 2022) को अपने इंस्टाग्राम पर सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ का एक पोस्टर शेयर किया। इस पोस्टर में सलमान खान के साथ भाग्यश्री भी नजर आ रही हैं। उन्होंने लिखा है, “ये शख्स महिलाओं के साथ मारपीट करता है। इसने न सिर्फ मुझे, बल्कि कई महिलाओं को पीटा है। इसे पूजना बंद करो प्लीज। ये मानसिक रूप से बीमार है।”
यह पोस्ट वायरल हो गया है। हालाँकि, जिस इंस्टाग्राम अकाउंट से ये पोस्ट किया गया है, वो वेरिफाइड नहीं है, लेकिन इसे सोमी का रियल इंस्टा अकाउंट कहा जा रहा है।
बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री सोमी ने पोस्ट के कैप्शन में किसी का भी नाम नहीं लिखा है। इसके साथ ही कमेंट्स को भी लिमिटिड रखा है। यानी, हर कोई उनके इस पोस्ट पर कमेंट नहीं कर सकता है। इस पोस्ट के सामने आने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार भी उन्होंने सलमान का नाम लिए बिना उन पर मारपीट का गंभीर आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी सोमी ‘दबंग’ फिल्म के अभिनेता पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उन्होंने इस साल मार्च में सलमान के ऊपर महिलाओं को एब्यूज करने का आरोप लगाया था। सोमी ने अपने सोशल मीडिया पर ‘मैंने प्यार किया’ फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए सलमान पर निशाना साधा और साथ में ऐश्वर्या राय बच्चन को भी टैग किया था।
सोमी ने लिखा था, “बॉलीवुड के हार्वे वेनस्टेन। तुम बेनकाब हो जाओगे। जिन महिलाओं का तुमने शोषण किया है, वे एक दिन जरूर दुनिया के सामने आएँगी और सच्चाई सबके सामने आएगी। जैसे ऐश्वर्या राय के साथ वाली आई थी।” कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया था कि रिलेशनशिप के दौरान सलमान खान ने ऐश्वर्या राय के साथ सेट पर मारपीट की थी। कथित तौर पर सलमान उन पर हावी हो जाते थे। उन्हें प्रताड़ित करते थे।
सलमान खान का गुस्सा उस समय भी देखा गया था, जब विवेक ओबरॉय के साथ उनका विवाद हुआ था। कहते हैं कि सलमान के गुस्सैल रवैये के कारण ही ऐश्वर्या ने उनसे अपना रिश्ता तोड़ा था।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे बांग्लादेश का बताया जा रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नाबालिग बच्चा सिर्फ इसलिए बांग्लादेशी क्रिकेटर सौम्य सरकार से नहीं मिलना चाहता है, क्योंकि वो हिंदू हैं।
” Soumya Sarkar is a Hindu cricketer, I don’t want to meet him ” . When a Bangladeshi madrasa boy is asked which Bangladeshi cricketer he would like to meet. Then the boy answered. pic.twitter.com/NGsHgt5pvS
— Voice Of Bangladeshi Hindus ?? (@VoiceOfHindu71) August 18, 2022
यह वीडियो ‘वॉइस ऑफ बांग्लादेशी हिंदू’ नाम के ट्विटर पेज से शेयर की गई है। इसके मुताबिक, वीडियो में दिख रहा बच्चा बांग्लादेश के एक मदरसे में पढ़ता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि एक रिपोर्टर बच्चे से पूछता है कि वह किस क्रिकेटर से मिलना चहता है? इसका जवाब देते हुए कहता है, “मैं मुश्फिकुर, मुस्तफिजुर रहमान, तासकीन अहमद और सैरिफुल से मिलना चाहता हूँ।” इस पर रिपोर्टर उससे सौम्य सरकार के बार में पूछता है। इस पर बच्चा कहता है, “सौम्य सरकार तो हिंदू क्रिकेटर है। मैं उससे नहीं मिलना चाहता।”
इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग मदरसा और उसमें दी जाने वाली कट्टरपंथी तालीम पर सवाल उठा रहे हैं और उसे शर्मनाक बता रहे हैं।
Bangladesh toh pakistan se bhi battar h lag raha. Bas kabhi utna news me ni aata jitna pakistan.
एक यूजर ने लिखा, “बांग्लादेश तो पाकिस्तान से भी बदतर लग रहा है। बस कभी उतना न्यूज में नहीं आता, जितना पाकिस्तान।”
Even Muslim kids are very clear about their religious affiliations..only the Hindus are a confused lot…brainwashed since centuries to seek goodness in evil..not knowing that Shaintan never changes..and will eventually devour the foolish Hindus.
एक अन्य सूजर ने लिखा, “यहाँ तक कि मुस्लिम बच्चे भी अपने मजहबी जुड़ाव के बारे में काफी स्पष्ट हैं। केवल हिंदू ही भ्रमित हैं। इनका सदियों से ब्रेनवॉश किया जा रहा है। यह नहीं जानते कि शैतान कभी नहीं बदलता और अंततः मूर्ख हिंदुओं को खा जाएगा।”
The usual mu$lim$ thinking. They will never change its inside their DNA very few have recovered from this disease.
एक यूजर ने लिखा, “यह एक तरह का जहर है जो इस्लाम मजहब में बच्चों में भरा जाता है। जितनी जल्दी लोग इसे समझ लें और दूसरे धर्मों में चले जाएँ, उतना ही अच्छा है।”
प्रशांत नाम के यूजर ने लिखा, “यही वह स्तर है जिससे वे बचपन से ही बच्चों में नफरत का इंजेक्शन लगाते हैं। इसलिए इस तरह के ब्रेनवॉश से दंगों और हिंदुओं की हत्या की उम्मीद की जाती है। फिर वे अपनी गरीबी के लिए दूसरों को दोष देते हैं।”
गौरतलब है कि बांग्लादेश में अराजकता तेजी से फैल रही है। कट्टरपंथियों के प्रदर्शन और हिंदुओं एवं हिंदू मंदिरों पर हमला वहाँ आम बात हो गई है। हाल ही में बांग्लादेश के केनमारी मंदिर में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ तोड़-फोड़ की गई। बताया गया कि मंदिर प्रशासन मे मदरसे के कुछ छात्रों को मंदिर से सटे मैदान में फुटबॉल खेलने से रोक दिया। इससे बौखलाए छात्रों ने मंदिर पर हमला कर दिया।
16 जुलाई को बांग्लादेश (Bangladesh) में नरैल के लोहागारा के सहपारा इलाके में एक फेसबुक पोस्ट से गुस्साए कट्टरपंथी मुस्लिमों (Radical Islam) की भीड़ ने हिंदुओं के एक मंदिर, किराने की दुकान और कई घरों को तोड़ दिया था। इतना ही नहीं उसमें आग भी लगा दी थी। इससे पहले मार्च 2022 में, बांग्लादेश के ढाका डिवीजन में वारी में लालमोहन साहा स्ट्रीट पर इस्कॉन मंदिर पर हमला किया गया था।
दिल्ली (Delhi) में अवैध रूप से रह रहे म्यामांर (Myanmar) के रोहिंग्या मुस्लिम (Rohingya Muslims) घुसपैठियों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए बने फ्लैटों में स्थानांतरित करने की खबरों के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जवाब दिया है। मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्याओं को मदनपुर खादर से बकरवाला स्थित EWS फ्लैट में स्थानांतरित करने का निर्णय अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार (AAP Government) का था।
केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा की तरफ से जारी पत्र में कहा गया है कि दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग और गृह विभाग की तरफ से ही यह प्रस्ताव दिया गया। 29 जुलाई 2022 को दिल्ली के मुख्य सचिव की बैठक में बकरवाला क्षेत्र में केवल अवैध रोहिंग्या मुस्लिमों को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया।
पत्र में राज्यमंत्री ने कहा कि है कि उस दौरान बैठक में उपस्थित गृहमंत्रालय के निदेशक और दिल्ली के FRRO ने दिल्ली सरकार को बताया कि भारत शरणार्थियों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन-1951 और 1967 के उसके प्रोटोकॉल का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है। इसलिए UNHCR के शरणार्थी कार्ड का भारत में कोई वैधता नहीं है। इस कार्ड के धारक भारत में अवैध हैं।
केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा द्वारा लिखा गया पत्र (साभार: नवभारत टाइम्स)
पत्र में आगे कहा गया है कि 17 अगस्त 2022 को रोहिंग्याओं को EWS फ्लैट में स्थानांतरित करने के दिल्ली सरकार के फैसले की जानकारी मिलने के बाद गृहमंत्रालय ने दिल्ली को पत्र लिखा और ऐसा नहीं करने के लिए कहा। इसके साथ ही इन घुसपैठियों के खिलाफ विदेशी अधिनियम-1946 एवं संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई करने के लिए कहा गया।
पत्र में यह भी कहा गया है कि गृहमंत्रालय समय-समय पर सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर रोहिंग्या सहित सभी अवैध विदेशियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने के लिए लिखता रहा है। इसलिए इन अवैध घुसपैठियों के खिलाफ भी दिल्ली सरकार नियमानुसार कार्रवाई करे।
दरअसल, यह पूरा विवाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) के ट्वीट के बाद उठा। पुरी ने अपने ट्वीट में कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी (NCR) में रहने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों को EWS फ्लैटों में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी आलोचना करने लगे। इसके बाद बुधवार (17 अगस्त 2022) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने इस तरह का कोई निर्णय नहीं लिया है।
उधर विवाद बढ़ने के बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह (MHA Amit Shah) को पत्र लिख था। इसमें उन्होंने आग्रह किया था कि इस बात की ‘निष्पक्ष जाँच’ की जाए कि किसके निर्देश पर यह निर्णय लिया गया था।
सिसोदिया ने इसे ‘साजिश’ बताया था और आरोप लगाया था कि यह निर्णय केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने लिया था। उन्होने कहा था कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को इस मामले में पूरी तरह ‘अंधेरे’ में रखा गया।
बता दें कि पिछले साल केजरीवाल सरकार ने रोहिंग्याओं को 240 फ्लैट्स दिलाने का प्रस्ताव नई दिल्ली नगर परिषद (New Delhi Municipal Council) के सामने रखा था। इसका खुलासा दिल्ली के भाजपा सांसद गौतम गंभीर (BJP MP Gautam Gambhir) ने किया था। इस पत्र के दाईं ओर ऊपर में ‘URGENT’ लिखकर उसे अंडर लाइन भी किया गया है।
भाजपा सांसद गौतम गंभीर ने इसे शेयर करते हुए लिखा था, “आज दिल्ली के बेशर्म सीएम पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं। उन्होंने रोहिंग्याओं के लिए बक्करवाल में फ्लैट माँगते हुए एक पत्र भेजा और अब वह वही कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें जाना जाता है।” उन्होंने सीएम केजरीवाल को ‘गटर छाप राजनीति’ करने वाला मुख्यमंत्री भी बताया।
देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रहे डेमोग्राफी बदलाव को लेकर अब केंद्रीय गृह मंत्रालय भी सख्त हो गया है। दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (National Security Strategies Conference)’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों को इस पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। अमित शाह ने सीमावर्ती राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को कहा है कि वो बॉर्डर एरियाज में हो रहे डेमोग्राफी बदलाव पर नजर रखें।
इसमें खासकर पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड के पुलिस प्रमुखों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। सम्मेलन के समापन समारोह में बोलते हुए अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर जोर देते हुए कहा कि देश और युवाओं के भविष्य को लेकर लड़ाई मुख्य प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने DGP कॉन्फ्रेंस की रूपरेखा बदल दी है, जिसके बाद आतंरिक सुरक्षा की मजबूती और नई चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया जाता है।
उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया कि सीमावर्ती जिलों में सभी तरह की तकनीकी और रणनीतिक जानकारियाँ हासिल की जाएँ। उन्होंने जम्मू कश्मीर में आतंकियों के सफाई और उत्तर-पूर्व में उग्रवादियों के प्रभाव को ख़त्म किए जाने को अपनी सरकार की सफलताओं में से एक गिनाया। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सभी राज्यों को आतंरिक सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बॉर्डर पर स्थित जिलों की जानकारियों को एक-दूसरे से साझा किए जाने पर भी बल दिया।
The two-day National Security Strategies Conference concluded today. Deliberations were held on challenges like narco-trafficking, demographic changes in border areas and cyber frauds. Urged all the states that the issues related to national security should be our top priority. pic.twitter.com/V7w1CRZbOV
आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश और असम के ऐसे इलाकों में अचानक से साल 2011 के बाद 32% मुस्लिम बढ़ गए जबकि पूरे राज्य में मिलाकर ये दर 10-15 प्रतिशत की है। कथिततौर पर सीमावर्ती इलाकों में मुस्लिम आबादी 20% तेजी से बढ़ी है और साथ ही इनके मजहबी स्थलों की गिनती में भी वृद्धि देखी गई है। नेपाल और बांग्लादेश से लगे इलाकों में ये बदलाव देखा जा रहा है। माँग की गई है कि बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 50 किमी से बढ़ाकर 100 किमी किया जाए ताकि उन्हें जाँच में आसानी हो।
यूपी और असम से पहले राजस्थान में भी अचानक से मुस्लिम आबादी में हुई वृद्धि सुरक्षा एजेंसियों की चिंता का कारण बनी थी। बीएसएफ अध्य्यन में सामने आया था कि राजस्थान के इलाकों में हुआ जनसांख्यिक बदलाव में अजीब सा फर्क था। जहाँ बाकी समुदाय के लोगों में केवल 8-10 फीसद आबादी बढ़ी मिली थी। वहीं मुस्लिमों की जनसंख्या 20-25 फीसद तेजी से बढ़े थे। इसके अलावा अचानक से ज्यादा बच्चों को मदरसों में जाता देखा गया था और ये भी पता चला कि पोखरण, मोहनगढ़ और जैसलमेर जैसे सीमा वाले इलाकों में अचानक देवबंद के मौलवी आने लगे जो समुदाय को कट्टरपंथ की तालीम देते थे।
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री बीसी नागेश (BC Nagesh) मुस्लिम संगठनों के निशाने पर हैं। शैक्षणिक संस्थानों में गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) मनाने की अनुमति दिए जाने को लेकर उनके इस्तीफे की माँग कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड ने इस फैसले पर नाराजगी जताते हुए शैक्षणिक संस्थानों में नमाज पढ़ने के लिए अलग कमरा और मुस्लिम त्योहारों को मनाने की अनुमति देने की माँग की है। वहीं कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI) के प्रदेश अध्यक्ष आठवुल्ला पुंजालकट्टे (Athavulla Punjalkatte) ने मंत्री के इस्तीफे की माँग की।
कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की छात्र शाखा CFI ने मंत्री के फैसले को एकतरफा और पक्षपातपूर्ण बताया है। ट्वीट कर कहा है, “शिक्षा मंत्री को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास पर ध्यान देना चाहिए न कि सांप्रदायिक नीतियों और बयानों पर।”
Campus Front of India Karnataka strongly Condemns the unilateral biased statement of @BCNagesh_bjp, Education Minister should focus on the development of quality education and infrastructure, not on Communal policies & statements.
— Campus Front of India – Karnataka (@CampusFrontKar) August 18, 2022
दरअसल, बेंगलुरु (Bengaluru) में गुरुवार (18 अगस्त 2022) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागेश ने कहा था, “स्कूलों को हर साल की तरह इस साल भी गणेश चतुर्थी मनाने की पूरी आजादी है। यह एक गैर-धार्मिक आयोजन है, जो समाज को एकजुट करता है।” उन्होंने स्कूलों में गणेश चतुर्थी मनाने की अनुमति देते हुए कहा कि देश की आजादी से पहले से भी स्कूलों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। साथ ही उन्होंने स्कूलों में अन्य धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने से इनकार किया।
शिक्षा मंत्री ने कहा था, “गणेशोत्सव इस देश में स्वतंत्रता आंदोलन के हथियार के रूप में शुरू किया गया था। इससे पहले गणपति पूजा घरों के अंदर की जाती थी। बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर स्कूलों, छात्रावासों और सार्वजनिक स्थानों पर गणपति उत्सव शुरू किया गया था। इस तरह की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही हैं और इसे रोकने का कोई सवाल ही नहीं है। हमने धार्मिक प्रथाओं के लिए कोई नई अनुमति नहीं दी है।”
लेकिन मुस्लिम संगठनों को यह रास नहीं आ रहा। वे इसे हिजाब मामले में उच्च न्यायालय के फैसले से जोड़कर देख रहे हैं। हाई कोर्ट ने कक्षाओं के अंदर हिजाब और भगवा शॉल सहित सभी धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। कर्नाटक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शाफी सादी (Shaafi Saadi) ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कई माँगे रखी हैं। उन्होंने मुस्लिम त्योहार मनाने की इजाजत देने और छात्रों को हर रोज नमाज अदा करने के लिए एक अलग कमरा देने की माँग की है। उनका कहना है कि सभी धर्म के छात्रों को समान अवसर दिया जाना चाहिए। बच्चों के लिए धर्मों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। नैतिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए छात्रों को मजहबी पाठ पढ़ाया जाना चाहिए।
वहीं, श्रीराम सेना के प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने वक्फ बोर्ड के माँगों की निंदा करते हुए सरकार से इसे खारिज करने की माँग की है। मुतालिक ने कहा, “आज वे स्कूलों में नमाज की अनुमति माँग रहे हैं, कल शुक्रवार को छुट्टी की माँग करेंगे। स्कूलों के इस इस्लामीकरण की अनुमति सरकार को नहीं देनी चाहिए।”
उत्तर प्रदेश के लखीमपुरी खीरी (Lakhimpur Kheri) में एक माँ ने उस युवक का गुप्तांग काट दिया, जिसने घर में घुसकर उसकी 14 साल की बेटी से रेप की कोशिश की थी। युवक का लखनऊ में इलाज चल रहा है। महिला की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लखीमपुर खीरी जिले के महेवागंज का है। महिला का आरोप है कि युवक ने बुधवार (17 अगस्त 2022) को उसकी बेटी से रेप का प्रयास किया। युवक पर धारदार हथियार से हमला करने के बाद महिला खुद पुलिस के पास पहुँच गई। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार हमला करने वाली 36 वर्षीय महिला और आरोपित युवक लिव इन पाटर्नर हैं। महिला बेटी को लेकर अपने पति से अलग रह रही थी।
आरोप है कि युवक ने जब रेप की कोशिश की उस समय महिला खेत में काम कर रही थी। अचानक ही वह घर पहुँची और आरोपित को रंगे हाथों पकड़ लिया। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बेटी को बचाने के लिए महिला करीब 40 मिनट तक युवक से जूझी। जब उसे लगा कि वह युवक पर काबू नहीं पा सकती है तो उसने किचन से चाकू लाकर उसका गुप्तांग काट दिया। युवक को आठ टाँके लगने की बात कही जा रही है। महिला का कहना है, “मुझे उसका गुप्तांग काटने का अफसोस नहीं है। उस समय मैं उसकी हत्या भी कर सकती थी। दरिंदों को ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए। अब वह किसी को हवस का शिकार नहीं बना सकेगा।”
लखीमपुर पुलिस स्टेशन के एसएचओ का कहना है कि महिला करीब दो साल से पति से अलग रह रही है। उसका पति शराबी है। महिला की शिकायत के आधार पर आरोपित युवक के खिलाफ धारा 376 और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित के ठीक होने के बाद उससे पूछताछ की जाएगी।
दिल्ली में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) 21 ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर पर भी छापा मारा गया है। सीबीआई की ये कार्रवाई दिल्ली सरकार की एक्साइज पॉलिसी को लेकर है। बता दें कि दिल्ली का एक्साइज विभाग मनीष सिसोदिया के अधीन है। सीबीआई के एक अधिकारी ने कहा, “सीबीआई ने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के आवास सहित आबकारी नीति मामले में दिल्ली-एनसीआर में 21 स्थानों पर छापेमारी की है।”
Excise policy case | The 21 locations being raided by CBI also include the premises of the then Delhi Excise Commissioner Arava Gopi Krishna: Sources https://t.co/I8rNgJj3Kk
#WATCH | A CBI team reaches the residence of Deputy CM Manish Sisodia in Delhi. The agency is raiding 21 locations in Delhi-NCR in connection with the excise policy case, including Sisodia’s residence. pic.twitter.com/3txFCtiope
इस रेड को लेकर मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा है, “सीबीआई आई है। उनका स्वागत है। हम कट्टर ईमानदार हैं। लाखों बच्चों का भविष्य बना रहे हैं। बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश में जो अच्छा काम करता है उसे इसी तरह परेशान किया जाता है। इसलिए हमारा देश अभी तक नम्बर-1 नहीं बन पाया।”
“CBI has arrived. We are honest, building a future for lakhs of children. Unfortunate that in this country, whoever does good work is hassled just like this, that is why our country is still not number-1,” tweets Delhi Dy CM Manish Sisodia as a CBI team reaches his residence. pic.twitter.com/q0WTNaWoyV
सिसोदिया ने एक अन्य ट्वीट में लिखा है, “हम सीबीआई का स्वागत करते हैं। जाँच में पूरा सहयोग देंगे ताकि सच जल्द सामने आ सके। अभी तक मुझ पर कई केस किए, लेकिन कुछ नहीं निकला। इसमें भी कुछ नहीं निकलेगा। देश में अच्छी शिक्षा के लिए मेरा काम रोका नहीं जा सकता।”
उन्होंने कहा है, “ये लोग दिल्ली की शिक्षा और स्वास्थ्य के शानदार काम से परेशान हैं। इसलिए दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और शिक्षा मंत्री को पकड़ा है, ताकि शिक्षा स्वास्थ्य के अच्छे काम रोके जा सकें। हम दोनों के ऊपर झूठे आरोप हैं। कोर्ट में सच सामने आ जाएगा।”
छापेमारी से बिफरे अरविंद केजरीवाल
मनीष सिसोदिया पर सीबीआई की छापेमारी को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा है, ”जिस दिन अमेरिका के सबसे बड़े अख़बार NYT के फ़्रंट पेज पर दिल्ली शिक्षा मॉडल की तारीफ और मनीष सिसोदिया की तस्वीर छपी, उसी दिन मनीष के घर केंद्र ने CBI भेजी। CBI का स्वागत है। पूरा सहयोग करेंगे। पहले भी कई जाँच/रेड हुईं, लेकिन कुछ नहीं निकला। अब भी कुछ नहीं निकलेगा।”
दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है।इसे ये रोकना चाहते हैं।इसीलिए दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियो पर रेड और गिरफ़्तारी
75 सालों में जिसने भी अच्छे काम की कोशिश की,उसे रोका गया।इसीलिए भारत पीछे रह गया
उन्होंने आगे लिखा, “दिल्ली के शिक्षा और स्वास्थ्य मॉडल की पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। इसे ये रोकना चाहते हैं, इसलिए दिल्ली के स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों पर रेड और गिरफ़्तारी की कार्रवाई चल रही है। 75 सालों में जिसने भी अच्छे काम की कोशिश की उसे रोका गया। इसलिए भारत पीछे रह गया। लेकिन हम दिल्ली के अच्छे कामों को रुकने नहीं देंगे।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दिल्ली की आबकारी नीति यानी एक्साइज पॉलिसी 2021-22 से जुड़ा है। नीति में गड़बड़ी के आरोपों के बाद पिछले दिनों उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। एलजी ने मुख्य सचिव की रिपोर्ट के बाद यह कदम उठाया था। इस रिपोर्ट में मनीष सिसोदिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में क्या है?
रिपोर्ट में दावा किया गया था कि GNCTD अधिनियम 1991, व्यापार नियमों के लेनदेन (TOBR)-1993, दिल्ली उत्पाद शुल्क अधिनियम-2009 और दिल्ली उत्पाद शुल्क नियम-2010 का प्रथम दृष्टया उल्लंघन किया गया। इसके अलावा एक्साइज पॉलिसी में नियमों को ताक पर रखकर शराब बेचने वालों को टेंडर बाँटे गए। इसी रिपोर्ट के आधार पर एलजी ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। जिसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने इसे वापस लेने का फैसला लिया था।
गौरतलब है कि नई आबकारी नीति 2021-22 को पिछले साल 17 नवंबर से लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत दिल्ली को 32 जोन में बाँटा गया था। इसके तहत शहर भर में 849 दुकानों के लिए निजी बोलीदाताओं को खुदरा लाइसेंस दिए गए थे। आरोप है कि दिल्ली सरकार ने शराब कारोबारियों को टेंडर प्रक्रिया के जरिए 144.36 करोड़ रुपए का लाभ पहुँचाया।
ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) इस समय भारतीय राजनीति के अप्रासंगिक चेहरों का पसंदीदा ठिकाना है। खासकर, वे नेता जो बीजेपी में किनारे किए जा चुके हैं। इस सूची में नया नाम सुब्रमण्यम स्वामी (Subramanyam Swami) का बताया जा रहा है। उन्होंने गुरुवार (18 अगस्त 2022) को कोलकाता सचिवालय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) से मुलाकात की।
ममता को साहसी और करिश्माई नेता बताते हुए स्वामी ने ट्वीट कर इस मुलाकात की जानकारी दी है। उन्होंने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, “आज मैं कोलकाता में था। वहाँ मैं साहसी और करिश्माई नेता ममता बनर्जी से मिला। मैंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के खिलाफ उनकी लड़ाई की प्रशंसा की, जिसने कम्युनिस्टों का सफाया कर दिया था।”
Today I was in Kolkata and met the charismatic Mamata Banerjee. She is a courageous person. I admired her fight against the CPM in which she decimated the Communist pic.twitter.com/Gejytxpl4o
इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में स्वामी के टीएमसी में शामिल की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालाँकि, पूर्व में स्वामी ऐसी खबरों का खंडन कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें टीएमसी में शामिल होने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह पहले से ही ममता बनर्जी के साथ हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर वे ममता बनर्जी की तारीफ कर चुके हैं। 1 जुलाई 2022 को उन्होंने ममता को बुद्धिमान नेता बताते हुए कहा था, “हमें वैचारिक मतभेद होने पर भी प्रतिभा को पहचानना होगा।”
I always knew Mamata Banerjee is an intelligent leader. We have to recognise talent even if we have ideological differences
मालूम हो कि पिछले साल नवंबर में भी सुब्रमण्यम स्वामी टीएमसी चीफ ममता बनर्जी से मिले थे। दोनों नेताओं की यह बैठक दिल्ली में हुई थी। उस समय, उन्होंने जेपी (जयप्रकाश नारायण), मोरारजी देसाई, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिम्हा राव के साथ टीएमसी सुप्रीमो की तुलना करते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट में कहा था कि ममता बनर्जी में बड़े नेताओं वाले गुण हैं।
Of the all the politicians I have met or worked with, Mamata Banerjee ranks with JP, Morarji Desai, Rajiv Gandhi, Chandrashekhar, and P V Narasimha Rao who meant what they said and said what they meant. In Indian politics that is a rare quality
सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा था, ”मैं जितने भी नेताओं से मिला और उनके साथ काम किया, उनमें ममता बनर्जी जयप्रकाश नारायण (जेपी), मोरारजी देसाई, राजीव गाँधी, चंद्रशेखर और पीवी नरसिंह राव से मेल खाती हैं। इन नेताओं की कथनी और करनी समान है। भारतीय राजनीति में यह दुर्लभ ही होता है।”
बीजेपी के पूर्व सांसद स्वामी से पहले यशवंत सिन्हा और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे बीजेपी के नेता भी मोदी सरकार को कोसते-कोसते टीएमसी का दामन थाम चुके हैं। यशवंत सिन्हा ने विपक्ष का राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने पर टीएमसी से इस्तीफा दे दिया था, जबकि शत्रुघ्न सिन्हा आसनसोल उपचुनाव में जीत हासिल कर लोकसभा पहुँचने में सफल हुए हैं। ऐसे में स्वामी पिछले कुछ समय से जिस तरह से ममता बनर्जी की सार्वजनिक प्रशंसा कर रहे हैं, उससे उनके भी टीएमसी में जाने की संभावना जताई जा रही है।
केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) ने बीते कुछ वर्षों में आईटी नियमों के अंतर्गत काफी सख्ती दिखाई है। सरकार ने गुरुवार (18 अगस्त) को आईटी नियम 2021 के तहत सात भारतीय और एक पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को बैन (YouTube Channels Ban) कर दिया। इन चैनलों द्वारा फेक न्यूज और भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाया जाता था।
जिन यूट्यूब चैनलों को प्रतिबंधित किया गया है उनके नाम हैं- लोकतंत्र टीवी, यू एंड वी टीवी, एएम रजवी, गौरवशाली पवन मिथिलांचल, SeeTop5TH, सरकारी अपडेट, सब कुछ देखो। जिस पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल को बैन किया गया है, उसका नाम है ‘न्यूज़ की दुनिया’।
फेक और देश विरोधी कंटेंट से कर रहे थे जमकर कमाई
फेक न्यूज फैलाने वाले ये सारे चैनल यूट्यूब द्वारा मॉनिटाइज किए जा चुके थे। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि फेक न्यूज और भारत विरोधी प्रोपेगैंडा फैलाकर कर ये यूट्यूब चैनल पैसा कमा रहे थे। इन कुल चैनलों कुल व्यूअरशिप 144 करोड़ और सब्सक्राइबर 85.73 लाख थे।
हालाँकि, भारत सरकार ने फेक न्यूज फैलाने वाले इन 8 चैनल्स पर बैन लगा दिया है, लेकिन इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को इन चैनल्स से कंटेंट हटाने में कुछ घण्टों का समय लगता है। ऐसे में हमने बिना देरी किए इन सभी चैनल्स की जानकारी जुटाई है।
सबसे पहले बात करते हैं लोकतंत्र टीवी की। इसके यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज, दोनों को भारत सरकार ने बैन कर दिया गया है। इस चैनल के 12.9 लाख सब्सक्राइबर हैं।
सोर्स: यूट्यूब
इस चैनल के एक वीडियो का टाइटल है, ‘गाय मांस में टॉप करने वाला भारत को बड़ा झटका…’। इस टाइटल ही गलफहमी पैदा करने वाला है, जबकि सच्चाई ये है कि भारत गोमांस का निर्यात करता ही नहीं है। हालाँकि यह सच है कि भारत बीफ के टॉप निर्यातकों में से एक है, लेकिन इसमें भैंस का मांस होता है न कि गाय का।
सोर्स: यूट्यूब
भारत सरकार द्वारा बैन किया गया अगला चैनल यू एंड वी टीवी है, जिसके 10 लाख से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल का सबसे लोकप्रिय वीडियो तीन साल पुराना था, जिसे 14 लाख बार देखा गया था।
सोर्स: यूट्यूब
18 अगस्त को अपलोड किए गए नवीनतम वीडियो का टाइटल था ‘गडकरी और शिवराज भाजपा से किए गए बाहर’। यह फर्जी खबर है। वास्तव में, इस चैनल द्वारा हर दिन इसी तरह की फर्जी और फेक खबरें अपलोड की जा रही थीं।
सोर्स: यूट्यूब
अगला चैनल एएम रज़वी है, जिसके यूट्यूब पर 95,900 सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल को यूट्यूबर AM Razvi चलाता था। चैनल पर सबसे लोकप्रिय वीडियो में स्क्रिप्टेड और फेक खबरें हैं।
सोर्स: यूट्यूब
अपनी प्रेस विज्ञप्ति में भारत सरकार ने इस चैनल का एक स्क्रीनशॉट साझा किया है जिसमें लिखा था, “अजमेर शरीफ दरगाह को बचाना हुआ मुश्किल, भगवाधारियों का दरगाह पर हमला”। यही नहीं इस वीडियो के थंबनेल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तस्वीर है, जिसकी बैकग्राउंड में एक बुलडोजर भी दिखाई गई है। यह पूरी तरह से फेक खबर है और यह दिखाने का प्रयास किया गया था कि सीएम योगी दरगाह को गिराना चाहते थे।
सोर्स: पीआईबी
इस लिस्ट में अगला चैनल गौरवशाली पवन मिथिलांचल है, जिसके सात लाख सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल के सबसे पॉपुलर वीडियो को 57 लाख लोगों ने देखा था। इस चैनल को यूट्यूब द्वारा वेरीफाई किया गया है, जो कि सबसे अधिक आश्चर्यजनक बात है। इस चैनल में अधिकांश वीडियो फेक थे।
सोर्स: यूट्यूब
अगला चैनल SeeTop5TH है, जिसके 33.5 लाख सब्सक्राइबर हैं। इस चैनल ने एक वीडियो में दावा किया है कि बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रेखा ने इस्लाम कबूल कर लिया है। इस वीडियो में यह दावा किया गया कि रेखा ने कहा था, “बाबरी मस्जिद को ध्वस्त करने की साजिश रचने वालों को अल्लाह कभी माफ नहीं करेगा।”
सोर्स: यूट्यूब
अपनी प्रेस विज्ञप्ति में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक स्क्रीनशॉट जोड़ा है। इसमें वीडियो का टाइटल था, ‘मोदी सरकार का अजमेर दरगाह पर ऐलान, हटाई जाएगी ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह’।
सोर्स: पीआईबी
इन चैनल्स के अलावा तीन और चैनल- ‘सब कुछ देखो’, ‘सरकार अपडेट’ और ‘न्यूज की दुनिया’ (पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल) को भारत सरकार द्वारा बैन किया गया है। ये तीनों चैनल भी लाखों व्यूज वाले थे। सीधे तौर पर ये चैनल फेक खबर फैलाकर लाखों लोगों की मानसिकता को बदलने की कोशिश रहे थे।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने दिसंबर 2021 से अब तक 102 से अधिक यूट्यूब चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनके अकाउंट को फेक और भारत विरोधी कंटेंट शेयर करने के कारण बैन किया है। इसके अलावा, भारत सरकार ने भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल सौ से अधिक चीनी ऐप्स पर भी बैन लगाया है।
गूगल को लेनी चाहिए जिम्मेदारी
यदि देखा जाए तो भारत सरकार द्वारा हाल ही में बैन किए गए सभी चैनल्स का मॉनिटाइजेशन हो चुका था। इसका मतलब यह है कि इन सभी चैनल्स के वीडियोज पर विज्ञापन दिखाए जा रहे थे और वीडियो बनाने वाले लोग इससे पैसे कमा रहे थे।
गूगल दावा करता है कि उसके पास किसी भी यूट्यूब चैनल को मॉनिटाइज करने के लिए एक सख्त पॉलिसी है। सीधे शब्दों में कहें तो यदि किसी को यूट्यूब से पैसा कमाना है तो उसके लिए गूगल के पास कड़ा कानून है। इसमें, सबसे बड़ी बात यह है कि फेक खबर को लेकर गूगल या यूट्यूब की नीति स्पष्ट नहीं है। अक्सर यह देखा जाता है कि जब तक बड़े पैमाने पर लोगों द्वारा चैनल या वीडियो को जब तक रिपोर्ट नहीं किया जाता, तब तक उसे नहीं हटाया जाता है।
मॉनिटाइजेशन की बात करें यानी यूट्यूब की कमाई की बात करें तो जब किसी वीडियो पर कोई विज्ञापन दिखाई देता है तो वीडियो बनाने वाले और यूट्यूब दोनों ही पैसा कमाते हैं। यूट्यूब विज्ञापनों से होने वाली आय का औसतन 55% तक वीडियो बनाने वाले को देता है।
बता दें कि ये चैनल सिर्फ भारत में बैन हुए हैं। यदि कोई व्यक्ति VPN के जरिए इन चैनल को देखना चाहे या भारत से बाहर का कोई व्यक्ति देखना चाहे तो उसे देख सकता है। इसे देखने में उसे कोई परेशानी नहीं होगी।
महाराष्ट्र में श्री कृष्ण जन्माष्टमी बड़ी धूम-धाम से मनाई जाती है। इसी उत्साह को शिंदे सरकार ने अब दोगुना कर दिया है। सीएम एकनाथ शिंदे ने दही-हांडी को साहसिक खेल का दर्जा देने का निर्णय लिया है और इस बार गोविंदाओं को भी बड़ी सौगात सरकार देने वाली है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने गुरुवार 18 अगस्त यानि जन्माष्टमी से एक दिन पहले प्रदेश भर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का अनमोल तोहफा दिया है। सीएम ने यह ऐलान किया कि अब दही-हांडी महोत्सव को भी साहसिक खेल का दर्जा मिलेगा। वहीं इसमें भाग लेने वाले तमाम गोविंदाओं को भी सरकार की ओर से विशेष मुआवजा और स्पोर्ट्स कोटा से सरकारी नौकरी का भी अवसर प्रदान किया जाएगा।
‘Dahi-handi’ will be recognised under the sports category in Maharashtra. ‘Pro-Dahi-Handi’ will be introduced. The ‘Govindas’ will get jobs under sports category. We will provide insurance cover of Rs 10 lakhs for all ‘Govindas’: Maharashtra CM Eknath Shinde pic.twitter.com/7LLmgAnZOD
आपको बताते चलें कि इसी मुद्दे पर आज विधानसभा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार ने दही हांडी उत्सव के लिए बनाए जाने वाले ह्यूमन पिरामिड को साहसिक खेल के रूप में मान्यता देने का फैसला किया है। इस मान्यता के साथ पर्व में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ी स्पोर्ट्स कोटा के तहत सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने के योग्य हो जाएँगे।”
सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि ह्यूमन पिरामिड के निर्माण के दौरान किसी प्रतिभागी की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु होने पर उसके परिजनों को राज्य सरकार की ओर से मुआवजे के रूप में 10 लाख रुपए मिलेंगे। साथ ही गंभीर रूप से घायल होने वाले खिलाड़ी को सात लाख रुपए और फ्रैक्चर वाले खिलाड़ी को पाँच लाख रुपए दिए जाएँगे।
उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकार ‘गोविंदा’ (प्रतिभागियों) को चोट लगने की स्थिति में उनके इलाज का खर्च भी वहन करेगी। दो साल की पाबंदियों के बाद इस बार दही हांडी उत्सव को राज्य में बड़े पैमाने पर मनाया जाएगा क्योंकि सरकार ने सभी कोरोना संबंधी प्रतिबंधों को हटा दिया है। त्योहार में गोविंदा के ग्रुप शहरों में घूमते हैं और दही हांडी को तोड़कर इनाम जीतने के लिए एक-दूसरे के साथ होड़ करते हैं।”
उद्धव सरकार ने उत्सव पर लगाया था प्रतिबंध
गौरतलब है कि शिंदे सरकार ने पिछले उद्धव सरकार द्वारा दही-हांडी उत्सव पर लगाए गए प्रतिबंध को हटा लिया था। उद्धव सरकार ने कोरोना महामारी और मानवीय असुरक्षा का हवाला देते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया था। उस समय भाजपा और हिंदू संगठनों ने इसका विरोध भी खूब किया था। मगर इसके बावजूद भी प्रतिबंध नहीं हटाया गया।
लेकिन अब सीएम शिंदे ने उस प्रतिबंध को तो हटाया ही, बल्कि इसमें सुरक्षा का भी पूरा इंतजाम कर दिया है। वहीं सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने दही हांडी के दौरान कथित आंदोलन के संबंध में दायर सभी कानूनी मामलों को वापस लेने का फैसला किया।