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‘बाकी लोगों की गर्दन काटी… योगी को बम से उड़ाएँगे’: UP के मुख्यमंत्री की हत्या करने की धमकी, कहा- 15 दिन में रिजल्ट दिखेगा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हत्या करने की धमकी दी गई है। इस संबंध में हिंदूवादी नेता देवेंद्र तिवारी को धमकी भरा पत्र मिला है। पत्र में तिवारी और योगी आदित्यनाथ को ‘औकात याद दिलाने’ और ‘बम से उड़ाने’ की बात की गई है। देवेंद्र तिवारी के मुताबिक धमकी भेजने वाले ने खुद को सलमान सिद्दीकी बताया है। 12 अगस्त 2022 (शुक्रवार) को यह पत्र उन्हें मिला। अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक धमकी देने वाला अवैध बूचड़खानों के खिलाफ देवेंद्र तिवारी की PIL से नाराज है। उसने धमकी वाले पत्र में लिखा है, “तुझे कितनी बार समझाया पर तू नहीं मान रहा। तेरी जनहित याचिका से मुस्लिमों के पेट पर लात पड़ रही है। तेरे चलते तमाम बूचड़खाने बंद हो गए हैं। अब तू देख कि मैं तेरा क्या हाल करता हूँ। तू चालाकी से देवबंद से तो निकल गया। बाकी लोगों की तो गर्दन काटी है, लेकिन तुझे और योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाएँगे। अगले 15 दिनों में तुझे इसका रिजल्ट दिखेगा।”

भारतीय किसान मंच के अध्यक्ष देवेंद्र तिवारी ने आज तक को बताया, “मेरे घर के नीचे मेरे सुरक्षाकर्मी को एक बैग मिला। इसकी सूचना देने पर पुलिस मौके पर पहुँची। बैग को खोला गया तो एक चिट्ठी मिली। उस चिट्ठी में मुझे जल्द से जल्द गौ संरक्षण और जनहित याचिका का काम बंद कर देने की धमकी दी गई है। ऐसा न करने पर मुझे और योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की बात कही गई है।” तिवारी ने अवैध बूचडखानों के साल 2019 में PIL दायर की थी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस महीने दी गई यह दूसरी धमकी है। इससे पहले 2 अगस्त 2022 को UP 112 मुख्यालय में व्हाट्सएप के जरिए उन्हें 3 दिन में बम से उड़ाने का मैसेज भेजा गया था। मैसेज भेजने वाले का नाम शाहिद खान बताया गया था।

धर्म परिवर्तन किया तो नहीं मिलेगा आरक्षण: हिमाचल प्रदेश विधेयक में कड़ा प्रावधान, निकाह के लिए धर्म छिपाने पर सजा

देश में आए दिन धर्मांतरण के मामले सामने आते रहते हैं। धर्मांतरण के इन मामलों में जबरन धर्मांतरण से लेकर धोखाधड़ी के साथ धर्मांतरण और धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह जैसे मामले आम हैं। पूरे देश में जिस तरह से धर्मांतरण का कुचक्र चलाया जा रहा है, इससे हर कोई चिंतित है। इस पर लगाम लगाने को लेकर विभिन्न राज्यों की सरकारों द्वारा अपने-अपने हिसाब से कड़े कानून बनाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में, हिमाचल प्रदेश की जयराम ठाकुर सरकार ने राज्य में धर्मांतरण के मौजूदा कानून में बदलाव करने के उद्देश्य से ‘हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022’ पेश किया है।

हिमाचल प्रदेश के मौजूदा धर्मांतरण कानून की बात करें तो, यहाँ हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2019 को 21 दिसंबर 2020 को ही अधिसूचित किया गया था। इस विधेयक को 2006 के धर्मांतरण कानून में बदलाव लाने के उद्देश्य से पारित किया गया था।

दरअसल, साल 2006 के हिमाचल प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून पर 2012 में हिमाचल हाईकोर्ट ने यह कहते हुए रोक लगा दी कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है। इसके बाद, साल 2019 में राज्य सरकार ने 2006 के कानून में 10 संसोधन करते हुए पुनः विधेयक प्रस्तुत किया था, जिसे दिसंबर 2020 में कानून की शक्ल में पारित किया गया था।

हिमाचल प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किए गए ‘धार्मिक स्वतंत्रता (संशोधन) विधेयक, 2022’ में पिछले कानून की तुलना में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश नए संशोधन विधेयक में बलपूर्वक धर्मांतरण के लिए जेल की सजा को 7 साल से बढ़ाकर अधिकतम 10 साल तक करने का प्रस्ताव है।

इसके अलावा, विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान के मुताबिक धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत की गई सभी शिकायतों की जाँच उप निरीक्षक (सब इंस्पेक्टर) से निचले दर्जे का कोई पुलिस अधिकारी नहीं कर सकेगा। यही नहीं, इस मामले की पूरी सुनवाई सेशन कोर्ट में होगी।

जयराम ठाकुर सरकार द्वारा पेश किए गए इस संशोधन विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे धर्म के व्यक्ति से विवाह करने के लिए अपने धर्म को छिपाता है तो दोषी व्यक्ति को कम से कम 3 साल की सजा हो सकती है। साथ ही इस सजा को दस साल तक बढ़ाने का भी प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, विधेयक में, न्यूनतम जुर्माना ₹50000 (पचास हजार रुपयए) किया गया है, जिसे ₹100000 (एक लाख रुपए) तक बढ़ाया जा सकता है।

इस विधेयक में सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी सजा को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। वर्तमान कानून के अनुसार, सामूहिक धर्म परिवर्तन के लिए 7 साल की सजा और अधिकतम पचास हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान है। जबकि नवीन विधेयक में कहा गया है कि दो या दो से अधिक व्यक्तियों के धर्म परिवर्तन को सामूहिक धर्मांतरण माना जाएगा और ऐसा करने पर आरोपी को कम से कम 5 साल की सजा हो सकती है। इस सजा को 10 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है। इसके अलावा, सामूहिक धर्मांतरण कराने पर, कम से कम डेढ़ लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जिसे दो लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकता है।

धर्मांतरण के बाद आरक्षण नहीं

यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन के बाद भी अपने मूल धर्म के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाएँ प्राप्त करता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा और ऐसा करने वाले व्यक्ति के लिए 2 साल की सजा का प्रावधान किया गया है, जिसे 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, जुर्माने को 50 हजार से एक लाख रुपए तक किया जा सकता है।

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अनुसूचित जाति या जनजाति या ओबीसी वर्ग के लोग अगर धर्म परिवर्तन करते हैं तो इसके बाद उन्हें किसी तरह का आरक्षण नहीं मिलेगा। साथ ही अगर वे धर्म परिवर्तन की बात छिपाकर आरक्षण लेते रहते हैं तो उन्हें 5 साल तक सजा और 50000 से एक लाख रुपए तक का जुर्माना देना होगा।

यही नहीं, इस विधेयक में धर्म पविर्तन करने से एक माह पूर्व जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष शपथ पत्र प्रस्तुत करने का भी प्रावधान किया गया है। इस शपथ पत्र में यह बताना होगा कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर रहे हैं। हालाँकि, यदि कोई अपने मूल धर्म में वापस आना चाहता है तो उसे किसी प्रकार का शपथ पत्र देने की आवश्यकता नहीं होगी।

मुख्यमंत्री ने विधेयक पेश करते हुए कहा, “अधिनियम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सजा की धाराओं में कुछ मामूली बदलाव किए जा रहे हैं। अधिनियम गलत बयानी, बल, अनुचित प्रभाव, जबरदस्ती, प्रलोभन, शादी या किसी भी कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण को प्रतिबंधित करता है। धर्म परिवर्तन के एकमात्र उद्देश्य के लिए किसी भी विवाह को अधिनियम की धारा 5 के तहत “शून्य और शून्य (मतलब अवैध)” घोषित किया जाता है।”

अन्य राज्यों में धर्मांतरण पर कानून

हिमाचल प्रदेश के अलावा हाल ही में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों में भी धर्मांतरण पर कड़े कानून बनाए गए हैं।

मध्य प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून की बात करें तो यहाँ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2020 के अनुसार कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे को प्रलोभन, धमकी या जबरन शादी के नाम पर या अन्य किसी प्रकार की धोखाधड़ी से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उसका धर्म परिवर्तन नहीं करवा सकता है। इस कानून का उल्लंघन करने पर 1 से 10 साल तक की कैद और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यही नहीं, धर्म छिपाकर शादी के अपराध में 3 वर्ष से 10 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही दूसरे धर्म में विवाह के लिए सूचना 2 महीने पहले देनी होगी, यदि बिना सूचना के विवाह होता है तो उसे शून्य माना जाएगा।

उत्तर प्रदेश के धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020 की बात करें तो यहाँ, जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर न्यूनतम 15000 रुपए के जुर्माने के साथ 1 से 5 साल की कैद का प्रावधान है। इसके अलावा, एससी/एसटी समुदाय के नाबालिगों और महिलाओं के धर्मांतरण पर तीन से 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। जबरन सामूहिक धर्मांतरण के लिए 3 से 10 साल तक की सजा और 50000 रुपए के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि यह पाया जाता है कि विवाह का एकमात्र उद्देश्य धर्म परिवर्तन कराना था तो ऐसी शादियों को अवैध करार दिया जाएगा।

33 साल पहले निकला था सलमान रुश्दी की मौत का फरमान, अब हुआ जानलेवा हमलाः मोहम्मद जुबैर के कारण इसी खतरे में नूपुर शर्मा की जिंदगी

न्यूयॉर्क में ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के लेखक सलमान रुश्दी पर हुए हमले के बाद एक बार फिर से इस्लामी कट्टरपंथ का डर हर जगह व्याप्त है। 33 साल पहले रुश्दी को उनकी किताब की वजह से जान से मारने की धमकी दी गई थी। इसके बाद इतने साल तक वह खुद बचाते रहे। हालाँकि, बीते शुक्रवार (12 अगस्त 2022) ऐसा नहीं हो पाया। उनके पीछे पड़े कट्टरपंथ ने उन्हें मंच पर पहुँच चाकू से गोदा। 

उन्हीं की तरह जान का खतरा भारत की नुपूर शर्मा को भी है। मोहम्मद जुबैर द्वारा वायरल किए गए एक क्रॉप वीडियो के कारण विश्व भर के कट्टरपंथी नुपूर शर्मा को मारने की साजिशें रचने में जुटे हैं। पिछले कुछ महीनों में नुपूर को लाखों धमकियाँ मिल चुकी हैं। उनके साथ उनकी परिवार पर भी जान का खतरा मंडरा रहा है।

इसी बीच 90 के दौर में बांग्लादेश के कट्टरपंथियों से भागीं लेखिका तस्लीमा नसरीन का ट्वीट भी आया है। उन्होंने कहा है, “मुझे अभी पता चला है कि सलमान रुश्दी के ऊपर न्यूयॉर्क में हमला हुआ। मैं सच में हैरान हूँ। कभी नहीं सोचा था ऐसा होगा। वो वेस्ट में रहते थे और 1989 से उन्हें बचाया जा रहा था। अगर उनके ऊपर हमला हो सकता है तो वो कोई भी जो इस्लाम का आलोचक है, उस पर हमला हो सकता है। मैं बहुत चिंता में हूँ।”

तस्लीमा नसरीन की जो घबराहट है वो बेफिजूल नहीं है। बीते कई उदाहरण हैं जो बताते हैं कि कट्टरपंथी अपने मकसद को अंजाम देने के लिए अपने शिकार के पीछे सालों साल पड़े रहते हैं और साजिशें रचते हैं। सलमान रुश्दी के साथ घटित घटना सबसे ताजा उदाहरण है। साल 2019 में कमलेश तिवारी हत्याकांड में भी यही देखा गया था और जो नुपूर शर्मा को लेकर देश की चिंता बनी हुई है वो भी इन्हीं वजहों से है।

आए दिन आतंकी गिरफ्तार

सहारनपुर से कल ही मोहम्मद नदीम नाम का जैश आतंकी गिरफ्तार हुआ है। एटीएस की पूछताछ में उसने खुलासा किया कि जैश-ए-मोहम्मद ने उसे नुपूर शर्मा को मारने का काम सौंपा था। इसके लिए वह फिदायीन हमला करने वाला था।

नदीम से पहले यूपी के आजमगढ़ से ISIS का संदिग्ध आतंकी सबाउद्दीन आजमी गिरफ्तार हुआ था। उसके निशाने पर भी नुपूर शर्मा ही थीं। एटीएस ने जब उसके फोन की तलाशी ली तो एक अल-सक्र मीडिया नाम से बना टेलीग्राम चैनल दिखा, जिसमें उर्दू और अंग्रेजी में पोस्टर शेयर करके नुपूर शर्मा को निशाना बनाने की बात कही जा रही थी। 

कुछ हफ्ते पहले की बात करें तो 24 साल का अशरफ रिजवान 11 इंच का चाकू लेकर नुपूर शर्मा को मारने के लिए पाकिस्तान से भारत में आया था। सीमा सुरक्षाबल के जवानों ने उसको राजस्थान के श्रीगंगाधर जिले में सीमा के पास से पकड़ा था। अशरफ ने बताया था कि वह पहले अजमेर में चादर चढ़ाता और फिर नुपूर शर्मा को मारने वाला था। 

अशरफ का पाकिस्तान से आना और अजमेर में चादर चढ़ाने के बाद प्लॉन बनाना हैरान करने वाला नहीं है क्योंकि दरगाह का खादिम भी नुपूर शर्मा की जान से पीछे हाथ धो कर पड़ा था। खादिम सलमान चिश्ती ने ऐलान किया था कि जो कोई भी नुपूर शर्मा का सिर कलम करेगा उसे वो अपना मकान देगा।

नुपूर शर्मा के पीछे कट्टरपंथी दौड़ाने वाला मोहम्मद जुबैर

बता दें कि सलमान रुश्दी और तस्लीमा नसरीन, दोनों ही लेखक अपनी किताबों की वजह से इस्लामी कट्टरपंथियों के निशाने पर सालों से रहे। लेकिन, नुपूर शर्मा का मामला इनसे अलग है। यहाँ उन्होंने एक टीवी डिबेट शो में अपने ईष्ट के अपमान को सुनने के बाद दूसरे मजहब वालों से सवाल किया था। मगर, मोहम्मद जुबैर ने इस ट्वीट को गलत ढंग से पेश किया और कट्टरपंथियों को भड़काया।

इसके बाद नुपूर के पीछे देखते ही देखते विश्व भर के कट्टरपंथी लग गए। आज नुपूर के पूरे परिवार को जान का खतरा बना है। वहीं मोहम्मद जुबैर खुलेआम सड़कों पर है और मीडिया में इंटरव्यू दे रहा है।

सोचिए! सलमान रुश्दी पर 33 साल बाद भी हमला हुआ तो ऐसे में भारत की नुपूर शर्मा कब तक सुरक्षित हैं? लोग यही प्रश्न सोच-सोचकर नुपूर की फिक्र कर रहे हैं।

खुद की कमाई से स्कॉलरशिप देंगे रंजन गोगोई: राज्यसभा MP के रूप में मिले वाले वेतन-भत्ते से बनाया लॉ छात्रों के लिए कोष, राम मंदिर जजमेंट से चिढ़ गए थे वामपंथी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ex CJI Ranjan Gogoi) ने राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाले पूरे वेतन को कानून के विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद करने के लिए देने की घोषणा की है।

रंजन गोगोई ने कहा कि कानून के पाँच वर्षीय पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने वाला कोई भी विद्यार्थी इस छात्रवृति का लाभ ले सकता है। ये विद्यार्थी असम या देश के किसी भी हिस्से के हो सकते हैं। उन्होंने अपने वेतन से छात्रवृति निधि बनाया है। उनका कहना है कि इन वेतन और भत्तों से कम से कम 10-15 विद्यार्थियों की मदद हो जाएगी।

राज्यसभा सांसद के रूप में मिलने वाले वेतन और भत्तों में से रंजन गोगोई ने अभी तक एक रुपए भी नहीं लिए हैं। बता दें कि उन्हें साल 2020 में राज्यसभा सांसद के रूप में मनोनीत किया गया था।

ANI से बात करते हुए सांसद गोगोई ने कहा कि पिछले दो साल में उन्होंने वेतन-भत्ते के रूप में एक पैसा भी नहीं लिया है और उन्हें उम्मीद है कि इतना फंड इकट्ठा हो जाएगा, जिससे 10-15 छात्रों की पढ़ाई में मदद की जा सके। छात्रवृति के इस पैसे से छात्रों के ट्यूशन फी के साथ-साथ उनके रहने और खाने का खर्च भी उठाया जाएगा।

इस छात्रवृति के बारे में वे अखबारों में विज्ञापन देंगे, ताकि इसके बारे में छात्रों को जानकारी मिल सके और वे आवेदन कर सकेें। उन्होंने कहा कि जो भी विद्यार्थी आवेदन करना चाहते हैं, वे इस माह के अंत तक दिए गए ईमेल आईडी पर संबंधित अधिकारियों आवेदन भेज सकते हैं।

उन्होंने कहा कि 200 शब्दों के आवेदन के साथ छात्रों को अपने उस संस्थान का नाम और कोर्स का विवरण देना होगा, जहाँ वे पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्हें बोर्ड परीक्षा के मार्क्सशीट के साथ-साथ अपने परिवार के पिछले तीन साल का आय प्रमाण पत्र भी देना होगा। आवेदन में विद्यार्थी का नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पढ़ाई वाले स्थान के बारे में भी बताना होगा।

बता दें कि रंजन गोगोई ने गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अपने कानूनी करियर की शुरुआत की थी। उस दौरान भी उन्होंने लोगों को मुफ्त कानूनी सेवाएँ उपलब्ध कराई थीं। जब वे राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले रहे थे, तब विपक्षी दलों ने उनका बहिष्कार किया था। दरअसल, वे राममंदिर के जजमेंट से चिढ़े हुए थे।

जो बिट्टा कराटे कश्मीरी पंडितों के दिल में मारता था गोली, उसकी बीवी सरकारी नौकरी से बर्खास्त; आतंकी सैयद सलाहुद्दीन के बेटे पर भी एक्शन

आतंकी फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे की बीवी सरकारी नौकरी से बर्खास्त कर दी गई है। आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन के बेटे पर भी इसी तरह की कार्रवाई हुई है। इन दोनों के सहित कुल 4 सरकारी बर्खास्त हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने टेरर इकोसिस्टम में संलिप्तता को लेकर यह एक्शन लिया है। बर्खास्त लोगों में वैज्ञानिक और प्रोफेसर भी शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आतंकी बिट्टा कराटे की बर्खास्त होने वाले पत्नी का नाम अर्जुमंद खान है। वह कश्मीर प्रशासनिक सेवा (KAS) में ग्रामीण विकास विभाग में सीनियर अधिकारी के पद पर कार्यरत थी। वह आतंकी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) की मददगार थी।

अर्जुमंद खान के अलावा जम्मू-कश्मीर उद्योग विकास विभाग संस्थान (JKEDI) में मैनेजर के तौर पर कार्यरत सैयद अब्दुल मुईद को भी बर्खास्त कर दिया गया है। अब्दुल मुईद का अब्बा सैयद सलाहुद्दीन आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का सरगना है। इन दोनों के अलावा कश्मीर यूनिवर्सिटी में कार्यरत वैज्ञानिक मुहीद अहमद भट और कश्मीर यूनिवर्सिटी के ही सहायक प्रोफेसर माज़िद हुसैन कादरी को भी बर्खास्त किया गया है। इन सभी पर संविधान की आर्टिकल 311 के तहत कार्रवाई की गई है।

पहले भी हुए हैं बर्खास्त

इससे पहले भी आतंकी संगठनों से साठगाँठ के चलते कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी हुई है। इसी साल मार्च में 5 सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त किया था। इनमें कम्प्यूटर ऑपरेटर, टीचर और पुलिस कांस्टेबल शामिल थे। अप्रैल 2022 में भी कश्मीर लॉ कॉलेज के पाकिस्तान समर्थक प्रोफेसर शेख शौकत को बर्खास्त किया गया था।

कौन है बिट्टा कराटे

जम्मू कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के आतंकी बिट्टा कराटे को ‘कश्मीरी पंडितों का कसाई (Butcher of Kashmiri Pandits)’ भी कहा जाता है। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और मेहबूबा मुफ्ती की बहन रुबिया सईद के अपहरण से भी जुड़ा था। उस समय सईद केंद्र सरकार में गृह मंत्री हुआ करते थे और इस घटना के बाद सरकार ने घुटने टेकते हुए रुबिया की रिहाई के लिए आतंकियों को छोड़ दिया था। कश्मीरी पंडितों की हत्या वह एक बार कैमरे पर भी कबूल चुका है। उसने कहा था, 1990 में कम से कम 20 या शायद 30 से 40 कश्मीरी पंडितों की हत्या की थी।’ उसने दावा किया था कि उसका निशाना कभी नहीं चूकता था। वह अपने टारगेट के सिर या दिल में ही गोली मारता था। बहुचर्चित फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी उसके क्रूरता को दिखाया गया है।

हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना है सैयद सलाहुद्दीन

हिज्बुल मुजाहिदीन का सरगना सैयद सलाहुद्दीन कश्मीर में हुई अनेक आतंकी घटनाओं का जिम्मेदार है। इन घटनाओं में कई सैनिक, पुलिसकर्मी और पैरामिलिट्री जवानों के साथ कश्मीरी हिन्दुओं को भी अपनी जान गँवानी पड़ी है। सलाहुद्दीन 2016 में पंजाब में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का मास्टरमाइंड है। 1946 में पैदा हुआ सलाउद्दीन श्रीनगर के एसपी कॉलेज से ग्रेजुएट और 1971 में कश्मीर विश्वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट है। उसने 1987 में मुस्लिम संयुक्त मोर्चा के टिकट पर अमीराकदल निर्वाचन क्षेत्र से जम्मू-कश्मीर विधानसभा का चुनाव भी लड़ा था। लेकिन हार गया। उसके आतंकी संगठन ISIS से भी लिंक बताए जाते हैं।

अब तिरंगे के साथ आमिर खान: Laal Singh Chaddha हुई सुपर फ्लॉप, रणवीर कह रहे – ‘शानदार फिल्म, सिक्वेल भी देखूँगा’

‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) ‘सुपर फ्लॉप’ हो चुकी है। दूसरी ओर आमिर खान अपने घर की बालकनी पर तिरंगा लहरा चुके हैं। अभिनेता ने शुक्रवार (13 अगस्त 2022) को केंद्र सरकार के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़ते हुए मुंबई स्थित अपने घर पर तिरंगा लहराया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आमिर अपनी बेटी इरा खान के साथ बालकनी में खड़े नजर आए। उनके घर की रेलिंग के पास तिरंगा भी देखा गया।

आमिर खान के घर पर तिरंगा

देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने पर आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत केंद्र सरकार हर घर तिरंगा अभियान चला रही है। इसी अभियान से जुड़ते हुए आमिर खान ने अपने घर की बालकनी में तिरंगा झंडा फहराया है। अपनी फिल्म की रिलीज से पहले भी खान राष्ट्र के प्रति प्यार दिखाते हुए लोगों से अपनी फिल्म देखने की अपील करते रहे।

जनता ने हालाँकि आमिर खान की बात को दिल से नहीं लिया। यही कारण है कि ‘लाल सिंह चड्ढा’ आमिर की अब तक की सबसे बड़ी ‘डिजास्टर’ फिल्म साबित हो रही है। पूर्व में अभिनेता के देशविरोधी बयानों के चलते इस फिल्म का जबरदस्त बॉयकॉट किया गया। IMDb के अनुसार ये फिल्म बॉलीवुड के ‘मिस्टर परफेक्शनिस्ट’ की अब तक की सबसे लोएस्ट रेटेड फिल्म है। इसको खान की सबसे बुरी साबित हुई फिल्में ‘मेला’ और ‘धूम-3’ से भी कम रेटिंग मिली है।

इस बीच आमिर खान और फिल्म से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई है। अभिनेता पर फिल्म के जरिए भारतीय सेना का अपना करने और हिंदू भावनाओं को आहत करने का आरोप लगा है। इस फिल्म में मानसिक रूप से विकलांग व्यक्ति को कारगिल युद्ध में लड़ने की अनुमति दी गई है। वहीं फिल्म में आमिर का एक डायलॉग है ‘पूजा-पाठ से मलेरिया फैलता है, दंगे होते हैं’। जिस पर आपत्ति जताई गई है।

फिल्म के इस हश्र के बाद स्वतंत्रता दिवस के दिन आमिर खान असम जाने वाले थे, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने उनको अपना दौरा स्थगित करने के लिए कहा ताकि स्वतंत्रता दिवस समारोह से लोगों का ध्यान न हटे। जिसके बाद अभिनेता ने अपना दौरा स्थगित कर दिया।

क्या है लाल सिंह चड्ढा (Laal Singh Chaddha)?

लाल सिंह चड्ढा बॉलीवुड फिल्म है। यह टॉम हैंक्स की फिल्म ‘फॉरेस्ट गंप’ की आधिकारिक रीमेक है। दर्शक इस फिल्म में अभिनेता आमिर खान की एक्टिंग को बहुत ही खराब बता रहे हैं। वहीं कई लोगों का कहना है कि इस फिल्म में खान ढंग से पंजाबी नहीं बोल पा रहे हैं।

इस फिल्म के सैकड़ों शो रद्द किए जा रहे हैं। फिल्म का इतना बुरा हाल होने के बाद भी इन दिनों अपनी ‘नंगई’ के लिए सुर्खियाँ बटरोने वाले बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह इस फिल्म की तारीफ कर रहे हैं। वो इस फिल्म को बहुत ही खूबसूरत बता रहे हैं। साथ ही उनका कहना है कि वो इस फिल्म का सीक्वल भी देख सकते हैं। जिस फिल्म को लाखों लोग एक बार भी देखना पसंद नहीं कर रहे, उस फिल्म का सीक्वल देखने की बात करना हैरान करने वाला है।

कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव की तबियत में नहीं हो रहा सुधार, पत्नी अरदास के लिए पहुँची गुरुद्वारा: निधन की खबरों को परिवार ने बताया अफवाह, कहा- हालत स्थिर

गम को छुपाकर दुनिया को पर्दे के जरिए हँसाने वाले प्रसिद्ध कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव (Raju Srivastava) बीमार हैं और मुंबई के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। वहीं, सोशल मीडिया पर उनके निधन के खबरें वायरल हो रही हैं। हालाँकि, उनके सोशल मीडिया से अफवाहों का खंडन किया गया और कहा गया कि उनकी हालत स्थिर है।

खबर ये भी आ रही है कि शुक्रवार को राजू श्रीवास्तव के स्वास्थ्य में थोड़ा सा सुधार देखने को मिला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजू श्रीवास्तव की उँगलियों के बाद अब उनके कंधों में भी मूवमेंट देखने को मिला। डॉक्टरों ने इसे अच्छा संकेत माना। हालाँकि, जिस गति से सुधार होना चाहिए, उसे नहीं देखकर डॉक्टर थोड़े चिंतित भी हैं।

वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि उनका अभी ब्रेन रिस्पॉन्स नहीं कर रहा है। AIIMS दिल्ली में वह वेंटिलेटर्स पर हैं। डॉक्टरों ने ने राजू की हालत को सीरियस माना है और अगले 48 घंटे को महत्वपूर्ण बताया है। वहीं, उनकी पत्नी शिखा परिवार के साथ दिल्ली के एक गुरुद्वारे में अरदास कर कर उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना कर रही हैं।

बता दें कि शनिवार की सुबह राजू श्रीवास्तव के निधन की अफवाह उड़ी। सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म होने के बाद लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने लगे। इसको देखते हुए उनके परिजन और बॉलीवुड के पूर्व अभिनेता एवं महाभारत में भीष्म पितामह का किरदार निभाने वाले मुकेश खन्ना ने इसका खंडन किया।

परिजनों ने राजू श्रीवास्तव के परिजनों ने अपने बयान में कहा, “राजू श्रीवास्तव जी की हालत स्थिर है। हम उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं और अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं। सभी शुभचिंतकों को उनके निरंतर प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद। कृपया किसी भी अफवाह/फर्जी खबर को प्रसारित करने पर ध्यान न दें। कृपया उसके लिए प्रार्थना करें।”

वहीं, मुकेश खन्ना ने कहा, “महान हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव जिंदा हैं। वह वेंटिलेटर पर हैं। अपने जीवन के लिए लड़ रहे हैं। लेकिन उसकी हालत स्थिर है। हर कोई उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ के लिए प्रार्थना करना चाहेगा।” राजू श्रीवास्तव के प्रशंसक भी सोशल मीडिया पर उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

दरअसल, बुधवार (10 अगस्त 2022) की सुबह एक्सरसाइज करते वक्त राजू श्रीवास्तव बेहोश होकर गिर गए थे। इसके बाद उन्हें एम्स लाया गया था। वहाँ डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें हार्ट अटैक आया था। इसके कारण उनका ब्रेन डैमेज हो गया और उन्हें एंजियोप्लास्टी करनी पड़ी। पिछले 10 साल में उनकी 3 बार एंजियोप्लास्टी हो चुकी है।

राजू श्रीवास्तव के बड़े भाई सीपी श्रीवास्तव के अनुसार, PMO और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कार्यालय लगातार उनके स्वास्थ्य का अपडेट ले रहा है। मुख्यमंत्री के ओएसडी भी लगातार अस्पताल में रहकर सभी व्यवस्थाओं को देख रहे हैं। देश के जाने-माने डॉक्टरों का पैनल उनका इलाज कर रहा है।

UP के सलमान ने घर पर लहराया पाकिस्तानी झंडा, Video वायरलः राजस्थान में अरमान खान ने साथियों के साथ भगवा ध्वज तोड़ा

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में सलमान नाम के युवक पर अपने घर की छत पर पाकिस्तानी झंडा फहराने का आरोप है। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की जानकारी होते ही पुलिस ने झंडे को जब्त कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। सलमान की इस हरकत पर स्थानीय लोगों ने नाराजगी जताई है। पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी 12 अगस्त 2022 (शुक्रवार) को दी। वहीं इसी दिन राजस्थान के जालोर में भगवा ध्वज तोड़ने के आरोप में 3 गिरफ्तार किए गए।

पहला मामला UP में कुशीनगर के थाना तरयासुजान के गाँव बेंदूपार मुस्तकिल का है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सलमान ने घर वालों के मना करने पर भी छत पर पाकिस्तानी झंडा लगाया। वीडियो के वायरल होते ही पुलिस मौके पर पहुँची और झंडा उतरवा सलमान को गिरफ्तार कर लिया। जिले के एडिशनल SP रितेश कुमार सिंह ने घटना और कार्रवाई की पुष्टि की है।

इस घटना के वायरल वीडियो में छत पर एक ऊँचे डंडे में पाकिस्तानी झंडा लगा दिखाई दे रहा है। झंडे के पास एक लड़के के साथ एक महिला खड़ी दिखाई दे रही है। वीडियो किसी ने दूर से बनाया है।

भगवा ध्वज फाड़ने वाले होमगार्ड सहित 3 गिरफ्तार

दूसरी घटना राजस्थान के जालोर की है। यहाँ अस्पताल चौराहे पर लगे भगवा ध्वज को 3 आरोपितों ने तोड़ दिया। पुलिस ने इस घटना का संज्ञान लेते हुए अरमान खान, मंसूर अहमद और मोहम्मद असलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस की यह कार्रवाई 12 अगस्त 2012 (शुक्रवार) को हुई है। पुलिस ने तीनों आरोपितों पर धारा 124-A, 153-A, 295- A व 295 IPC के तहत कार्रवाई की है। गिरफ्तार तीनों आरोपित जालोर के ही अलग-अलग हिस्सों के रहने वाले हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अरमान राजस्थान पुलिस में होमगार्ड के पद पर कार्यरत है। हिन्दू संगठनों ने इस घटना का कड़ा विरोध किया। इसके बाद उसी स्थान पर दोबारा भगवा ध्वज लगा दिया गया। आरोप यह भी है कि भगवा ध्वज तोड़ते हुए आरोपितों ने देश विरोधी नारेबाजी भी की थी।

दिल्ली पुलिस से आमिर खान की शिकायत, वकील ने बताया- लाल सिंह चड्ढा में सेना और हिंदू भावनाओं को किया आहत: रणवीर सिंह को नंगई पर मुंबई पुलिस ने बुलाया

‘लाल सिंह चड्ढा’ को लेकर आमिर खान की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही है। एक वकील ने दिल्ली पुलिस से आमिर खान, इस फिल्म के डायरेक्टर और इसे रिलीज करने वाली कंपनी की शिकायत की है। फिल्म की स्क्रीनिंग को भारत में बैन करने की भी माँग की है। वहीं न्यूड फोटोशूट के मामले में मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह को 22 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया है।

वकील विनीत जिंदल ने 12 अगस्त 2022 (शुक्रवार) को ‘लाल सिंह चड्ढा’ को लेकर पुलिस से शिकायत की। उन्होंने फिल्म में भारतीय सेना और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत किए जाने की बात कही है। जिंदल ने एक वीडियो में कहा है, “फिल्म में आमिर खान ने हिंदुओं की आस्था से जुड़े पूजा-पाठ को दंगा भड़काने वाला बताया है। उसकी तुलना मलेरिया जैसी बीमारी से की है। इसके अलावा फिल्म के डायरेक्टर ने सेना में भर्ती होने वाले अफसरों को मानसिक रूप से सही नहीं बताया है जो कारगिल युद्ध तक लड़े हैं। ये सेना के बलिदानियों का अपमान है।”

जिंदल ने आगे कहा है, “मैंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को एक शिकायत भेजी है। इसमें आमिर खान, लाल सिंह चड्ढा के डॉयरेक्टर और इसे रिलीज करने वाली कंपनी के खिलाफ आपराधिक धाराओं में FIR दर्ज करने की माँग की है। साथ ही इस फिल्म की स्क्रीनिंग को पूरे देश में रोकने की माँग की है, क्योंकि फिल्म से धार्मिक भावनाएँ भड़क सकती हैं।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वकील विनीत जिंदल फिल्म अभिनेता आमिर खान, फिल्म डॉयरेक्टर अद्वैत चंदन और फिल्म को रिलीज करने वाली कम्पनी पैरमाऊंट पिक्चर्स प्रॉडक्शन हाउस पर IPC की धारा 153, 153-A, 298 और 505 के तहत कार्रवाई चाहते हैं।

मुश्किल में रणवीर सिंह भी

मुंबई पुलिस ने न्यूड फोटोशूट के मामले में अभिनेता रणवीर सिंह को नोटिस भेजा है। 22 अगस्त को हाजिर होने को कहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चेम्बूर थाने ने यह नोटिस शुक्रवार (12 अगस्त) को रणवीर सिंह के घर पर तामील करवाई। हालाँकि उस समय रणवीर सिंह घर पर नहीं थे। रणवीर सिंह के खिलाफ दर्ज FIR मेंमहिलाओं की भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है।

‘रक्षाबंधन’ से भी बुरा हुआ ‘लाल सिंह चड्ढा’ का हाल, जुमे पर केवल ₹7 करोड़ कमाईः कलेक्शन 40% गिरा, आमिर खान की सबसे खराब रेटिंग वाली फिल्मों से बनी एक

रिलीज के दूसरे दिन शुक्रवार (12 अगस्त 2022) को आमिर खान और करीना कपूर खान (Aamir Khan & Kareena Kapoor Khan) अभिनीत फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ (Laal Singh Chaddha) के व्यवसाय में भारी गिरावट दर्ज की गई है। दूसरे की कमाई में वह रक्षाबंधन से भी पिछड़ गई है।

शुक्रवार को फिल्म का व्यवसाय 6.50-7.00 करोड़ रुपए के बीच सिमट कर रह गया। पहले दिन लाल सिंह चड्ढा का व्यवसाय 12 करोड़ रुपए था। इस तरह पहले दिन की अपेक्षा दूसरे दिन के व्यवसाय में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। वहीं, फिल्म रक्षाबंधन की कमाई में दूसरे दिन 30 प्रतिशत की गिरावट आई

अगर पिछले दो दिनों का कुल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन देखा जाए तो यह 18 करोड़ रुपए के आसपास सिमट कर रह गया है। दूसरी तरह लाल सिंह चड्ढा आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा IMBD पर उनकी सबसे कम रेटिंग वाली फिल्म बन गई है। इसकी रेटिंग फिल्म ‘मेला’ और ‘धूम 3’ से भी नीचे है। लोगों ने इस फिल्म को औसत दर्जे का पाया है।

बता दें कि आमिर खान के पूर्व के बयानों और करीना कपूर की अकड़ को लेकर इस फिल्म का सोशल मीडिया के जरिए बॉयकाट का मुहिम चलाया जा रहा है। संभवत: इसका सीधा असर फिल्म के व्यवसाय और उसकी रेटिंग पर दिख रहा है।

थियेटर में लोगों की अनुपस्थिति को देखते हुए देश भर के कई सिनेमाघर के मालिकों ने शुक्रवार के लिए इसके 1300 शो को रद्द कर दिया था। वहीं, फिल्म रिलीज के दूसरे दिन यानी शुक्रवार को दोपहर से पहले वाले कई शो में दर्शक नहीं जुटे। पहले दिन कुछ ऐसे भी शो रहे जिन में सिर्फ 10-12 दर्शक ही फिल्म देखने पहुँचे।

फिल्म के प्रदर्शन को देखते हुए करीना कपूर ने एक इंटरव्यू में लोगों से इस फिल्म का बॉयकाट नहीं करने की विनती की थी। उन्होंने कहा था, “कृपया इस फिल्म का बहिष्कार न करें, क्योंकि यह वास्तव में अच्छे सिनेमा का बहिष्कार करने जैसा है। और लोगों ने इस पर बहुत मेहनत की है। ढाई साल से इस फिल्म पर 250 लोगों ने काम किया है।”

उन्होंने लाल सिंह चड्ढा को एक खूबसूरत फिल्म बताते हुए कहा, “मैं चाहती हूँ कि लोग मुझे और आमिर (खान) को पर्दे पर देखें। तीन साल हो गए हैं, हमने बहुत लंबा इंतजार किया है। लोगों को इस फिल्म का बहिष्कार नहीं करना चाहिए।”

आमिर और करीना के बयान को लेकर दर्शकों में गुस्सा

फिल्म के प्रमोशन के दौरान करीना कपूर खान ने कहा था कि अगर फिल्म अच्छी होगी तो इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिलेगी और ये सभी उम्मीदों के पार चली जाएगी। उन्होंने कहा था कि बॉयकाट जैसी चीजों का अच्छी फिल्म पर असर नहीं होता और वो इसे गंभीरता से भी नहीं लेतीं। एक अन्य इंटरव्यू में करीना कहा था कि विवादों पर सफाई देना वो जरूरी नहीं समझतीं।

इसके पहले उन्होंने दर्शकों को दोयम दर्जे का समझते हुए उन्होंने कहा था कि जिसे नहीं देखना है मत देखे, कोई जबरदस्ती है क्या। दरअसल, इंडस्ट्री में नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) के सवाल में उन्होंने कहा था, “ऑडियन्स ने ही नेपोटिज्म से जुड़े एक्टर्स को स्टार्स बनाया है। आप नहीं जा रहे हो फिल्में देखने तो मत जाओ। किसी ने आपके साथ जोर-जबरदस्ती नहीं की है।”

दूसरी तरफ, आमिर खान लोगों से अपील कर रहे थे कि वो ‘लाल सिंह चड्ढा’ का बॉयकॉट न करें और इसे थिएटर में जाकर देखें। आमिर खान ने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें देश से प्यार नहीं, लेकिन वो गलत हैं।

बता दें कि आमिर खान ने केंद्र में सरकार बदलते ही साल 2015 में कहा था कि भारत में असहिष्णुता बढ़ रही है। उनकी पूर्व पत्नी किरण राव को देश में डर लगता है। आमिर के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। हालाँकि, आमिर उस बयान को लेकर अब बहाने बना रहे हैं।