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फाँसी देने से रेप के बाद हत्या के मामले बढ़े: राजस्थान CM छिपा रहे कॉन्ग्रेस सरकार की नाकामी, उनके मंत्री बता चुके हैं- ‘मर्दों का प्रदेश’

राजस्थान (Rajasthan) में महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएँ अपने चरम पर पहुँच गई हैं। बलात्कार और हत्या (Rape and Murder) की घटनाएँ राजस्थान के लोगों की जिंदगी जैसे रोजमर्रा की घटनाएँ हो गई हैं। हालाँकि, वहाँ के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस ने इसके लिए भी बहाना खोज लिया है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि साल 2012 में दिल्ली में हुए बर्बर निर्भया कांड के बाद अपराधियों को फाँसी मिलने लगी है। इसलिए बलात्कारी महिलाओं के साथ रेप करने के बाद उनकी हत्या कर दे रहे हैं।

सीएम गहलोत को इस बयान पर गौर करें तो उनका मंतव्य यही निकलता है कि अगर रेपिस्टों को फाँसी नहीं दी जाती तो अपराधी रेप करने के बाद हत्याएँ नहीं करते। यानी घटना सिर्फ रेप तक ही सीमित रह जाती और पीड़ित महिला का जीवन बच जाता है।

यह पहली बार नहीं है, जब अशोक गहलोत ने इस तरह का बयान दिया है। मई 2022 में उन्होंने कहा था कि प्रदेश में बलात्कार और अन्य अपराधों के बढ़ने का कारण ‘नौकरियों की कमी’ के कारण लोगों में फैली हताशा हैं। यहाँ तक कि उन्होंने रेप की अधिकांश घटनाओं को फर्जी बता दिया।

एक मुख्यमंत्री के रूप में इससे घिनौना बयान शायद ही होगा, क्योंकि सीएम के हाथ में प्रदेश की कमान होती है और वहाँ की सुरक्षा-व्यवस्था को संभालने के लिए एक विकसित तंत्र होता है। सीएम गहलोत ने रेप और हत्या की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन को मजबूत करने या तकनीक का सहारा लेने या फिर मामले की त्वरित सुनवाई जैसे कदम उठाने के बजाए उन्होंने बहाने खोज लिए।

सीएम गहलोत का यह बयान एक तरह से अपराधियों का मनोबल बढ़ाने वाला है। यह बयान भी कुछ वैसा ही है, जब समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में रेप की घटनाएँ चरम पर पहुँच गईं तो वर्तमान सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने कह दिया कि बच्चों से गलतियाँ हो ही जाती हैं।

भाजपा ने बोला हमला

सीएम गहलोत के इस बयान के बाद भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद जयहिंद ने उन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इस तरह का बयान देेते रहे हैं, लेकिन राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी चुप हैं।

शहजाद ने कहा, “गहलोत बलात्कारियों के बजाए सख्त दुष्कर्म कानूनों को दोषी ठहरा रहे हैं! उन्होंने कहा कि निर्भया कांड के बाद कानून सख्त होने से रेप से संबंधित हत्याएँ बढ़ीं! ऐसा पहला बयान नहीं! उन्होंने यह भी कहा है कि रेप के ज्यादातर मामले फर्जी हैं! उनके मंत्री ने कहा ‘मर्दों का प्रदेश है, इसलिए रेप होते हैं’, लेकिन प्रियंकाजी चुप हैं?”

मर्दों का प्रदेश, इसलिए होते हैं रेप- कॉन्ग्रेस सरकार के मंत्री

मार्च 2022 में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री शांति धारीवाल ने निर्लज हँसी हँसते हुए कहा था कि राजस्थान मर्दों का प्रदेश है, इसलिए यहाँ रेप की घटनाएँ अधिक होती हैं और प्रदेश इसमें नंबर वन पर है।

​​​​​​धारीवाल ने कहा था, “रेप के मामले में हम नंबर एक पर है, अब ये रेप के मामले क्यों हैं? कहीं न कहीं गलती है…” हँसते हुए उन्होंने कहा था, “वैसे भी यह राजस्थान तो मर्दों का प्रदेश रहा है यार, उसका क्या करें?” यह कहकर धारीवाल फिर हँसने लगे और उनके साथ कई और मंत्री कॉन्ग्रेस विधायक भी हँसने लगे। 

UP में मार्च निकालने वाले राहुल-प्रियंका राजस्थान पर चुप

उत्तर प्रदेश की घटना को सनसनी बनाकर पेश करने वाले और उसका राजनीतिक इस्तेमाल करने वाले कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी और महासचिव प्रियंका गाँधी राजस्थान की घटनाओं पर चुप हो जाते हैं। मार्च तो दूर की बात, इन घटनाओं पर उनके मुँह से एक शब्द भी निकलता है।

प्रदेश के कॉन्ग्रेसी मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी पर रेप के आरोप लग चुके हैं। विधायक मीना पर रेप के आरोप लग चुके हैं। यही नहीं, जोशी के बेटे पर जिस लड़की ने आरोप लगाया था, उस पर हमला किया गया और धमकी दी गई।

प्रदेश में छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर 82 साल की बुजुर्ग तक के साथ रेप को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन दोनों भाई-बहन इन घटनाओं पर चुप हैं। कई मौकों पर देश ने कॉन्ग्रेस और उसकी पार्टी के नेताओं ने इस दोहरेपन को नजदीक से देखा है।

रेप के मामले में राजस्थान देश में नंबर एक

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों को गौर करें तो राजस्थान बलात्कार के मामले में देश में सबसे आगे है। साल 2020 में राजस्थान में रेप के कुल 5,310 मामले दर्ज किए गए। वहीं, साल 2019 में इसी अपराध के 5,997 मामले दर्ज हुए थे।

गृहमंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2020 में इन अपराधियों में से सिर्फ 45.4 प्रतिशत को सजा मिली। वहीं, उसी साल के रिकॉर्ड मामले के 54.6 प्रतिशत मामले में पीड़िता न्याय पाने में असमर्थ रही। यानी साल 2020 में दर्ज कुल रेप के मामलों में आधे से कम मामले में सजा हुई।

ऐसे में सरकार की नाकामी और पुलिस-प्रशासन की लापरवाही का ठिकरा सीएम अशोक गहलोत कड़े कानून पर डालकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे हैं। अपराध की बढ़ती घटनाएँ साबित कर रही हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है।

पाकिस्तान बेच रहा शेर, चिड़ियाघर के पास नहीं है खिलाने के लिए पैसा: कीमत भारत में बिकने वाली बकरियों से भी कम!

पाकिस्तान में तेजी से फ़ैल रही गरीबी का असर अब वहाँ के इंसानों के अलावा जानवरों पर भी साफ देखा जा सकता है। लाहौर के चिड़ियाघर ने वहाँ मौजूद शेरों और बाघों को प्राइवेट लोगों के हाथों नीलाम करने का फैसला किया है। चिड़ियाघर प्रशासन ने इसको न सिर्फ जगह की बल्कि पैसों की भी बचत के लिए उठाया गया कदम बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल लाहौर के चिड़ियाघर में 29 शेर हैं। इनकी उम्र 2 से 5 साल के बीच की है। 11 अगस्त को इनकी नीलामी हो सकती है, जिसमें 12 शेरों को नीलाम किया जा सकता है। इनकी पुष्टि चिड़ियाघर के डिप्टी डायरेक्टर तनवीर अहमद जंजुआ ने की है। लाहौर के इसी चिड़ियाघर में 6 चीते और 2 तेंदुए भी हैं।

पशुओं का संरक्षण करने वाले इस नीलामी के विरोध में हैं। उनका कहना है कि या तो शेरों को किसी और चिड़ियाघर में शिफ्ट किया जाए या मादा जानवरों को गर्भनिरोधक दिया जाए। एक कायर्कर्ता उज्मा खान ने कहा, “अगर एक बार चिड़ियाघर से इस प्रकार की नीलामी हो गई तो यह एक व्यापर बन जाएगा जो वन्य जीवों के संरक्षण पर गलत असर डालेगा।”

नीलामी के लिए चिड़ियाघर के अधिकारियों ने एक शेर के लिए न्यूनतम बोली 700 डॉलर रखी है। लेकिन अधिकारियों को आशा है कि एक शेर लगभग 20 लाख पाकिस्तानी रुपए में बिकेगा। नीलामी हर किसी के लिए खोली गई है। आपको बता दें कि एक शेर के लिए जो कीमत पाकिस्तानियों ने रखी है, उससे महंगी भारत में बकरी बिकती है।

चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मोहम्मद रिज़वान खान के मुताबिक पिछले साल भी शेरों की नीलामी के प्रयास किए गए थे लेकिन नीलामी में आए लोगों के पास जरूरी काजगात न होने के चलते ये प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई थी।

गौरतलब है कि फटेहाल पाकिस्तान में गरीबी के चलते इस तरह के कदम उठाने की ये पहली घटना नहीं है। इस से पहले भी जून 2022 में वहाँ के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने पत्रकारों से कहा था कि पाकिस्तानी अपनी चाय की खपत को प्रति दिन ‘एक या दो कप’ कम कर सकते हैं, क्योंकि इसका आयात सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव डाल रहा है।

मई 2022 में पाकिस्तान के ही खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर 24 घंटों के भीतर 10 किलो गेहूँ के आटे की बोरी की कीमत 400 रुपए से कम नहीं की तो वह अपने कपड़े बेच देंगे और लोगों को खुद सस्ता आटा उपलब्ध कराएँगे।

‘कैसे जाने कि सरस्वती विद्या की देवी हैं’: दलित छात्रों के मन में नफरत का जहर भर रहा था यूट्यूबर, भड़के छात्र ने बुरी तरह लताड़ा

बाबा साहब अंबेडकर हिंदुओं के खिलाफ नहीं रहे, लेकिन उनके नाम पर समाज में वैमनस्यता फैलाने का काम लगातार जारी है। दलित छात्रावासों में जाकर उनकी शिक्षा और उनके संघर्ष के बारे में कम, लेकिन हिंदू देवी-देवताओं के बारे में सवाल पूछकर भ्रमित और हीन बनाने की प्रवृत्ति अक्सर देखी जाती है।

ऐसे ही एक यूट्यूबर ने बिहार के मुंगेर स्थित दलित छात्रावास में जाकर छात्रों को भ्रमित करने की कोशिश की। वेद प्रकाश नाम के इस यूट्यबूर ने दलित छात्रावास में रहने वाले एक छात्र से विद्या की देवी सरस्वती को लेकर सवाल किया, इसके बाद रितेश नाम के उस लड़के ने यूट्यूबर को बुरी तरह लताड़ दिया।

वेद ने रितेश के कमरे में घुसकर चारों तरफ खोजबीन की और कहा कि कमरे दो-दो सरस्वती की तस्वीर लगी हुई है और बाबा साहेब, पेरियार, फुले की एक भी तस्वीर नहीं है, क्यों? इस लड़के ने कहा कि बाबा साहेब की बाहर तस्वीर है और सरस्वती चुँकि विद्या की देवी हैं, इसलिए उनकी तस्वीर कमरे में लगाया है।

इसके बाद यूट्यूबर लड़के से बाबा साहेब को लेकर सवाल करता है और वह उनके बारे में संक्षिप्त रूप से बताता है। इसके बाद वह माँ सरस्वती के बारे में पूछता है, तब लड़का बताता है कि वह विद्या की देवी हैं।

इस यूट्यूबर बार-बार उस लड़के से पूछता कि किसने कहा कि वह विद्या की हैं, कहाँ से जानकारी मिली? लड़का फिर कहा है कि उसका मानना है कि वह विद्या की देवी हैं और यह उसका एनालिसिस है। हालाँकि, यूट्यूबर माँ सरस्वती को लेकर वही सवाल बार-बार करता है।

इस पर रितेश नाम का लड़का चिढ़ जाता है और कहता है कि वह कंट्रोवर्सी क्रिएट ना करे। जब वेद नहीं मानता है तो वह लड़का बुरी तरह उसे डपट देता है। इसके बाद अपनी झेंप मिटाने के लिए वेद अन्य लड़कों से पूछता है कि क्या वे भी मानते हैं कि सरस्वती विद्या की देवी है। इस भी सभी कहते हैं कि हाँ, वे मानते हैं।

बुरी तरह लताड़ खाने और अपनी प्रोपेगेडा का पकड़े जाने के बाद वेद प्रकाश लज्जित होकर आगे बढ़ जाता है। इसी तरह एक अन्य लड़के के कमरे में जाकर भारत माता की लगी तस्वीर पर सवाल उठाता है और कहता है कि अगर भारत माता हैं तो उनके हाथ में तिरंगा होना चाहिए, भगवा झंडा नहीं।

‘मोहम्मद जुबैर ने पहले बदनाम किया… अब सिर तन से जुदा की धमकी’: महंत बजरंग मुनि को ‘मक्का-मदीना कनेक्शन’ से आया फोन

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में बड़ी संगत के महंत बजरंग मुनि को फोन पर ‘सिर तन से जुदा’ की धमकी दी गई है। फोन व्हाट्सएप कॉल के जरिए किया गया था। ट्रू कॉलर पर फोन करने वाले का नाम ‘मौलाना मुश्ताक़ खान’ आ रहा है। धमकी 3 अगस्त 2022 को दी गई है। पुलिस ने अज्ञात के विरुद्ध FIR दर्ज करके आरोपित की तलाश शुरू कर दी है।

महंत बजरंग मुनि द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, “मेरे द्वारा स्थानीय इलाके में मुस्लिमों द्वारा हिन्दुओं को प्रताड़ित करने के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है। एक साल पहले कुछ मुस्लिमों ने मुझ पर चाकुओं से हमला किया था। इस हमले में जैसे-तैसे मेरी जान बच पाई थी। मेरा इलाज चल रहा है और मैं चल-फिर नहीं सकता। कुछ महीने पहले मोहम्मद जुबैर ने मुझे दुनिया भर में बदनाम किया था और मुझे हेट मोंगर्स कहा था।”

शिकायत कॉपी

अपनी शिकायत में महंत बजरंग मुनि ने आगे लिखा, “3 अगस्त 2022 को शाम 4:12 मिनट पर मेरे मोबाइल पर एक व्हाट्सएप कॉल आई। इसमें मुझे धमकी दी गई कि जल्दी ही तुम्हारा सिर तन से जुदा कर दिया जाएगा। उस कॉल में कॉलर का नाम मौलाना मुश्ताक खान आ रहा है। देश में हो रही सर तन से जुदा सम्बंधी घटनाओं को देखते हुए इस धमकी के बाद मेरी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।”

कॉलर डिटेल

महंत बजरंग मुनि द्वारा अपनी शिकायत में कॉलर की डिटेल अटैच की गई है। यह धमकी 7297085216 नंबर से आई है। इसकी प्रोफ़ाइल पिक्चर पर हरे रंग में मक्का मदीना की फोटो बनी हुई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत ने बताया कि धमकी मिलने के बाद उन्होंने उस नंबर पर लगातार फोन मिलाया, तब वो फोन उठाया नहीं गया और कई बार काट दिया गया।

FIR Copy

महंत बजरंग मुनि ने प्रशासन से खुद को कॉल पर धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। महंत बजरंग मुनि की इस शिकायत पर सीतापुर पुलिस ने अज्ञात आरोपित के विरुद्ध IPC की धारा 507 के तहत FIR दर्ज कर ली है।

सीतापुर पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच पुलिस क्षेत्राधिकारी नगर को सौंपी गई है। साथ ही उन्हें जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

श्रीलंका में चीन की ‘हार’: भारत के विरोध पर जासूसी जहाज को अनुमति नहीं, हंबनटोटा बंदरगाह लीज भी नहीं आया काम

चीन के कर्ज के चंगुल में फँसकर आर्थिक संकट में घिरे श्रीलंका को भारत से हर तरह की मदद मिलने के बाद उसका रवैए में बदलाव दिखने लगा है। श्रीलंका सरकार ने चीन के जासूसी जलयान को अपने क्षेत्र में घुसने की अनुमति नहीं दी है। माना जा रहा है कि भारत के विरोध के बाद श्रीलंका सरकार ने यह निर्णय लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने इससे पहले श्रीलंका के अधिकारियों से चीन जासूसी जहाज की यात्रा के उद्देश्य के बारे में जानना चाहा था। यह मुद्दा भारतीय संसद में भी उठाया गया था। बता दें कि 1987 की संधि तहत श्रीलंका अपने किसी भी बंदरगाह को उन देशों की जहाजों के लिए नहीं उपलब्ध करा सकता, जो भारतीय हित के खिलाफ हो।

चीन का जासूसी जहाज युआन वांग-5 पिछले महीने 13 जुलाई को जियानगिन पोर्ट से रवाना हुआ था और वह 11 अगस्त को श्रीलंका के हंबनटोटा पोर्ट पर पहुँचने वाला था। यह जहाज 17 अगस्त तक हंबनटोटा बंदरगाह पर रहने वाला था। हालाँकि, भारत के विरोध के बाद श्रीलंका ने चीन से इस जहाज का आगमन टालने के लिए कहा है।

इस जासूसी शिप को चीन स्पेस और सैटेलाइट ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही इसके जरिए सैटेलाइट, रॉकेट और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की लॉन्चिंग को ट्रैक किया जाता है। यह ऐसी गतिविधियों को 750 किलोमीटर दूर से ट्रैक कर सकता है।

चीन का यह जासूसी जहाज युआन वांग सीरीज की तीसरी पीढ़ी का ट्रैकिंग जहाज है। इसे 29 सितंबर 2007 को सेवा में शामिल किया गया था। इसे चीन के 708 अनुसंधान संस्थान द्वारा डिजाइन किया गया है।  इसमें छिपकर सुनने वाले उपकरण मौजूद हैं।

बता दें कि साल 2017 में चीन का कर्ज नहीं चुका पाने के कारण श्रीलंका ने अपने देश के दक्षिण में स्थित हंबनटोटा बंदरगाह को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था। इसके बाद चीन ने इस बंदरगाह को कई तरह से विकसित किया है।

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने चीन से नजदीकियाँ बढ़ाई थीं और बंदरगाह को सौंप को उसे सौंप दिया था। इसके बाद चीन दो बार अपने सबमरीन को हंबनटोटा बंदरगाह पर भेज चुका है।

वहीं, रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि चीन इस जासूसी विमान के जरिए हिंद महासागर की गहराई की मैपिंग और भारत की जासूसी करना चाह रहा है। इससे वह हिंद महासागर की गहराई मापकर पनडुब्बी के इस्तेमाल को समझना चाहता है।

जिसके संग चलते हैं ‘श्रीकृष्ण’, मैच से पहले जिसके नाखूनों से भी झलकता है ‘तिरंगा’: मिलिए प्रियंका गोस्वामी से, 10000 मीटर की पैदल चाल में भारत की ‘चाँदी’

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत की प्रियंका गोस्वामी ने 10000 मीटर रेस वॉक में शनिवार (6 अगस्त 2022) को सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने ये दूरी 49 मिनट 38 सेकेंड में पूरी की।

उनकी इस जीत के साथ भारत ने ट्रैक एंड फील्ड में तीसरा मेडल हासिल कर लिया। इससे पहले मुरली श्रीशंकर ने लॉन्ग जंप में सिल्वर जीता था जबकि हाई जंप में तेजस्विन शंकर ने देश को ब्रॉन्ज दिलाया था।

बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकीं प्रियंका ने रेस वॉक के पहले चरण में बहुत तेजी से बढ़त बनाई थी। वह 4 किलोमीटर तक पहले स्थान पर रही थीं। लेकिन, इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की जेमिमा मोंटाग और केन्या की एमिली वामुसी एनजी आगे निकल गए।

8 किलोमीटर के बाद प्रियंका तीसरे स्थान पर हो गईं, मगर आखिर के दो मिनट में उन्होंने अपनी स्पीड बढ़ाई और दूसरे स्थान पर आ गईं। इस रेस में सिल्वर जीतने के साथ वह भारत की ऐसी पहली महिला बन गईं जिन्होंने इस इवेंट में सिल्वर पदक जीता।

प्रियंका ने जीत के बाद बताया कि वो जिस मुकाबले में जाती हैं वहाँ अपने नाखूनों को तिरंगे के रंग में रंगती हैं। वह आज की जीत के बाद कहती हैं , “मेरे पास एक भगवान कृष्ण हैं और मैं उन्हें हर प्रतियोगिता में अपने साथ ले जाती हूँ। वही आज मेरे लिए सौभाग्य लेकर आए हैं।”

बता दें कि प्रियंका से पहले रेस वॉक में केवल हरमिंदर सिंह ने 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान ब्रॉन्ज जीता था। इस बार प्रियंका गोस्वामी ने जीतकर इतिहास रच दिया। इस इवेंट में उनसे आगे केवल जेमिमा मोंटाग रहीं। उन्होंने 42 मिनट में रेस वॉक पूरी करके गोल्ड जीता।

स्वतंत्रता के 75वें साल में भी वही मजहबी खतरे, किस ‘अवतार’ की प्रतीक्षा में हैं हिंदू: आखिर कब तक सरकार से सवाल को ही मानते रहेंगे ‘कर्म’

2022। भारत की स्वतंत्रता का 75वाँ साल। अमृत महोत्सव का साल। हर घर तिरंगा अभियान का साल। श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा रैली का साल.. पर जरा थमिए, क्योंकि फिर से मजहबी खतरा उसी तरह आ खड़ा हुआ है, जिसने 1947 में स्वतंत्रता से पहले इस देश के टुकड़े करवाए।

इस्लामी आतंकवाद, इस्लामी कट्टरपंथ, इस्लामी घुसपैठ इन सबसे जूझते जब हम स्वतंत्रता के 75वें साल में हैं तो देश के भीतर मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिशों का असर भी दिखने लगा है। हाल में सामने आए कुछ रिपोर्ट बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के जो 5 जिले नेपाल से लगते हैं, उनके 116 गाँव में मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से ज्यादा हो गई है। 303 गाँव में वे 30 से 50 फीसदी के बीच हैं। इसी तरह असम के जो जिले बांग्लादेश की सीमा से लगे हुए हैं, वहॉं मुस्लिमों की आबादी 32 फीसदी तक बढ़ गई है। बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, राजस्थान के सीमावर्ती जिलों का भी यही हाल है। इसी रफ्तार से इन इलाकों में मस्जिद-मदरसे भी बढ़े हैं। रिपोर्ट बताते हैं कि यूपी के सीमावर्ती जिलों में 4 साल में मस्जिद-मदरसों की संख्या में 25 फीसदी का उछाल देखा गया है। असम में तो 1000 ऐसे मदरसे सामने आए हैं जिनका संचालन निजी स्तर पर हो रहा था।

इसके अलावा भी देश के हर हिस्से में इन्होंने अपने ऐसे इलाके में बना रखे हैं, जहाँ पुलिस भी जाने से डरती है। हाल ही में वे रिपोर्ट सामने आई हैं जो बताती हैं कि किस तरह बिहार और झारखंड के मुस्लिम बहुल इलाकों के सरकारी स्कूलों तक में ‘शरिया शासन’ लागू कर दिया गया। रविवार की जगह स्कूलों की छुट्टी शुक्रवार को होने लगी। स्कूलों के नाम में उर्दू तक जोड़ दिए गए। ऐसे में एक खास पट्टी में इस तरह इनकी आबादी का बढ़ना, मस्जिदों-मदरसों का कुकुरमुत्ते की तरह उग आना एक बड़े खतरे का संकेत है।

यह बात सामने आ चुकी है कि एक मुस्लिम गलियारा बनाने की साजिशें चल रही है। बांग्लादेश से पाकिस्तान तक जाने वाले यह गलियारा बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब होकर गुजरता है। इन राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में बीते 10 साल के भीतर सुनियोजित तरीके से घुसपैठिए बसाए गए हैं। स्थानीय लोगों का पलायन हो रहा है और संसाधनों पर ये कब्जा करते जा रहे हैं। मजहबी शिक्षण संस्थान उन इलाकों में खोले जा रहे हैं जो सामरिक तौर पर ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इतना ही नहीं सीमा से सटे नेपाल के इलाकों में भी इसी तरह डेमोग्राफी बदली जा रही है।

इन सबके साथ भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने के लिए मुस्लिम युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण देने जैसे प्लान पर भी काम चल रहा है। कुल मिलाकर उसी तरह की स्थिति पैदा की जा रही है जो देश की स्वतंत्रता से पहले बनाया गया था। जिसकी वजह से पाकिस्तान की पैदाइश हुई। कन्हैया लाल हो या उमेश कोल्हे, हर्षा हो या प्रवीण नेट्टारू इन सबकी हत्या उन्हीं साजिशों का हिस्सा हैं। ऐसा लगता है जैसे डायरेक्ट एक्शन डे की तैयारियाँ हो।

ऐसे वक्त में इस देश का हिंदू क्या कर रहा है? वह एक ऐसी अंतहीन प्रतीक्षा में बैठा दिख रहा जब कोई ‘अवतार’ आएगा और एक साथ सारी आसुरी प्रवृत्तियों का संहार कर चला जाएगा। अवतार के आगमन तक उसने सरकार से सवाल को ही अपना कर्म मान लिया है। यदि इस देश को इस्लाम के नाम पर टूटने से बचाना है, काफिर कह कर काट डाले जाने से बचना है तो हमें इस तंद्रा को तोड़ना होगा।

यह सही है कि कुछ काम सरकार के होते हैं। उसकी एजेंसियों को ही उन्हें जमीन पर उतारना होगा। यकीनन सरकार और तंत्र का कार्य पूर्ण करने का बोझ भी हम अपने ऊपर नहीं ले सकते। हम उनकी तरह हथियार लेकर किसी का गला काटने भी नहीं निकल सकते। लेकिन इस देश का संविधान और कानून हमें आत्मरक्षा का अधिकार देता है, अफसोस हम ये भी भूल चुके हैं। हमें अपनी ही गलियों में उनकी घुसपैठ से फर्क नहीं पड़ता। अपने ही गाँव में अवैध मस्जिद-मदरसे खुलने से हमे खतरा नहीं लगता। हमारे ही हाथ गरम कर वे दस्तावेज बना ले जाते हैं और हमें वह अपना डेथ वारंट नहीं लगता। हमें तब भी फर्क नहीं पड़ता जब अपनी ही गली में बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक होकर कोई हिंदू अपना ही घर छोड़ने को मजबूर हो जाता है।

यह सही है कि हम व्यक्ति के तौर पर इस इकोसिस्टम से नहीं लड़ सकते। लेकिन यह भी सत्य है कि जब तक हम खुद काफिर कह कर काटे नहीं जाते, तब तक हम ही यह भी कह रहे होते हैं कि ‘मेरा अब्दुल वैसा नहीं है’। यह भी सत्य है कि जब कश्मीर के हिंदू अपने घर से भगाए जा रहे थे तो देश के दूसरे हिस्से के हिंदुओं के लिए यह कोई मसला नहीं था। दूसरी तरफ वे हैं जो फलस्तीन पर इजरायल का हमला हो तो सड़क पर उतर हिंदुओं को डरा जाते हैं। फिर ‘डरा हुआ मुसलमान’ का नैरेटिव भी बना जाते हैं।

ऐसे में इस लड़ाई को किसी सरकार या किसी व्यक्ति विशेष के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। न अवतार के भरोसे टाला जा सकता है। यह लड़ाई हर गली में लड़नी होगी। हर गॉंव में इसका विरोध करना होगा। हर शहर में इसके खिलाफ सड़क पर उतरना होगा। यह केवल तभी संभव है, जब हिंदू समूह में खड़े होंगे। इसके लिए यह आवश्यक नहीं कि हिंदू किसी खास संगठन, दल के साथ खड़े हों। जरूरी है कि हिंदू के साथ हिंदू खड़े हों।

‘अब्बू ऐसा मत करो, हमें याद आएगी’ : बच्चों के सामने दरोगा आरिफ ने बीवी को सड़क पर बकी गालियाँ, तीन तलाक देकर फरार

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक दरोगा ने अपनी बीवी को पुलिस चौकी के बाहर तीन तलाक दे दिया। दरोगा की पहचान आरिफ खान के तौर पर हुई है। आरिफ की बीवी ने आरोप लगाया कि उसके शौहर ने उसे पहले थाने के बाहर आकर गालियाँ बकीं और इसके बाद तीन तलाक देकर हमेशा के लिए छोड़ दिया।

जानकारी के मुताबिक, महिला ने अपने शौहर आरिफ के खिलाफ शहर कोतवाली में शिकायत दी है। पीड़िता ने बताया है कि वह खुद बदायूं में आरपीएफ सिपाही है जबकि उनका शौहर बिजनौर में दरोगा पद के तौर पर तैनात है। साल 2006 में निकाह के समय आरिफ यूपी पुलिस में सिपाही ही था। मगर, बाद में उसका प्रमोशन हो गया और वह बिजनौर जिले के चांदपुर चौकी चला गया। दोनों के एक 12 साल का बेटा और एक 14 साल की बेटी है।

महिला ने अपनी शिकायत करते हुए बताया कि जब उनका शौहर चौकी के बाहर उन्हें तलाक दे रहा था, उस समय बच्चे सामने ही थे और वे रो भी रहे थे। बच्चे बार-बार कह रहे थे- ‘अब्बू ऐसा मत करो, हमें तुम्हारी बहुत याद आएगी।’ लेकिन आरिफ ने एक नहीं सुनीं। वह रुबीना को पहले गाली देते रहा और उसके बाद तलाक-तलाक-तलाक बोलकर चला गया।

रुबीना के अनुसार, आरिफ की आदतें शुरुआत से खराब थीं। उसके एक महिला सिपाही से संबंध थे। इसके अलावा रुबीना को ये भी पता चला था कि आरिफ ने अलीगढ़ में किसी लड़की से निकाह कर लिया है। इन्हीं सब कारणों से पीड़िता ने आरोपित के विरुद्ध शिकायत दी थी। जब पुलिस ने उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चौकी बुलाया तो वहीं आरिफ पहुँच गया और फिर धक्का-मुक्की करके तलाक देकर चला गया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, शहर के एसपी रवींद्र कुमार ने इस केस की जानकारी देते हुए बताया कि एक महिला अपने शौहर के खिलाफ लिखित शिकायत कराने महिला थाने आई थी। मगर, तभी उसका शौहर वहाँ आ गया और दोनों के बीच कहासुनी हो गई। इसके बाद शौहर उसे तीन तलाक देकर चला गया। अब महिला की शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है। फिलहाल आरोपित की तलाश की जा रही है।

देश के नए उपराष्ट्रपति चुने गए जगदीप धनखड़: 725 में से 528 वोट पाकर मिली जीत, मार्गरेट अल्वा को मिले केवल 182

देश के 14वें उप-राष्ट्रपति के तौर पर एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को चुन लिया गया है। उन्होंने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 346 वोटो से हराकर इस पद पर जीत हासिल की। उन्हें 725 में से कुल 528 वोट मिले हैं, जबकि अल्वा के हिस्से केवल 182 वोट ही पड़े।

चुनाव के नतीजे आने से पहले एनडीए प्रत्याशी जगदीप धनखड़ की जीत तय मानी जा रही थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि दोनों सदनों में मौजूद आँकड़ों के अनुसार बहुमत के लिए 388 वोट की जरूरत होती है और इस बार अकेले भाजपा के पास ही दोनों सदनों के सदस्यों को मिलाकर संख्या 390 (लोकसभा में 303 सांसद और राज्यसभा में 93 सांसद) के ऊपर थी।

इसके अलावा उन्हें तेदेपा, बीजद, बसपा, अन्नाद्रमुक व शिवसेना जैसे दलों ने भी समर्थन मिल गया था। इस तरह एनडीए अपने प्रत्याशी के लिए 528 वोट जुटाने में सफल रही। वहीं टीएमसी के चुनाव में वोटिंग न करने से मार्गरेट अल्वा को मिले वोट और कम हो गए।

कौन हैं जगदीप धनखड़?

बता दें कि बीजेपी के जाट नेता जगदीप धनखड़ मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं। उनका जन्म झुंझुनू जिले के किठाना गाँव में 1951 में साधारण से किसान परिवार में हुआ था। राजस्थान यूनिवर्सिटी से लॉ करने के बाद उनका सेलेक्शन आईआईटी, एनडीए और आईएएस के लिए भी हुआ था। हालाँकि, उन्होंने इन सभी को ठोकर मारकर वकालत करना शुरू किया। धनखड़ राजस्थान बार काउंसिल के अध्यक्ष भी रहे।

इसके बाद वे जनता दल से जुड़ गए। वर्ष 1989 में वो झुंझुनू से चुनकर सासंद बने। यहीं नहीं, 1989 से 1991 तक वीपी सिंह और चंद्रशेखर की सरकार में वो केंद्रीय मंत्री के पद पर भी रहे। 1991 में जनता दल ने उनका टिकट काट दिया तो वो कॉन्ग्रेस में चले गए। 1993 में अजमेर के किशनगढ़ से चुनाव लड़कर वो विधायक बने।

हालाँकि, 2003 में अचानक से उन्हें कॉन्ग्रेस से नफरत सी होने लगी और वो फिर से बीजेपी में शामिल हो गए। उन्हें सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों में से एक धनखड़ को राजस्थान में जाट आरक्षण दिलवाने के लिए जाना जाता है। धनखड़ को 30 जुलाई साल 2019 में पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। अब वह देश के नए उप-राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं।

‘तुझे हिंदुत्व का कीड़ा है, तेरा भी उमेश कोल्हे करना पड़ेगा’: नूपुर शर्मा का डीपी लगाने पर मुस्लिम युवकों ने घेरा, तलवार से वार- चेहरे पर थूका; मरा समझ छोड़ गए

नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) का समर्थन करने के कारण महाराष्ट्र में एक युवक पर जानलेवा हमले की खबर सामने आई है। पीड़ित युवक का नाम प्रतीक पवार उर्फ सनी है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ मुस्लिम युवकों ने प्रतीक को घेरकर उस पर जानलेवा हमला किया। उसके चेहरे पर थूका। हमलावर उसे मरा समझ छोड़कर चले गए। फिलहाल प्रतीक का इलाज चल रहा है।

घटना 4 अगस्त 2022 की है। महाराष्ट्र के अहमदनगर के कर्जत में इस घटना को अंजाम दिया गया। यह मामला तब सामने आया, जब शनिवार (6 अगस्त 2008) को महाराष्ट्र के बीजेपी विधायक नीतेश राणे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस हमले के बारे में बताया। राणे के अनुसार प्रतीक को 35 टाँके लगे हैं और जिंदगी की जंग लड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि नूपुर शर्मा का डीपी लगाने के कारण प्रतीक पर हमला हुआ।

एबीपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार 23 साल के प्रतीक और उनके दोस्त अमित माने 4 अगस्त को कर्जत जा रहे थे। अक्कबाई चौक के नजदीक वे अपने दोस्तों का इंतजार कर रहे थे, तभी एक सफेद रंग की स्विफ्ट कार, काले रंग की बुलेट, लाल रंग की पल्सर और एक सफेद रंग की स्कूटी पर सवार होकर 12 से 14 मुस्लिम युवक वहाँ आ गए। इन युवकों ने उन्हें घेर लिया। माने के अनुसार, “मुस्लिम युवकों ने प्रतीक पवार से कहा- तुम्हें हिंदुत्व का बड़ा कीड़ा है। तुम लगातार नूपुर शर्मा और कन्हैयालाल के समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट और स्टेटस लगा रहे हो। इसके कारण कई और लोग इनका समर्थन करने लगे हैं। तेरा भी उमेश कोल्हे करना पड़ेगा।”

उल्लेखनीय है कि नूपुर शर्मा का समर्थन करने के कारण उमेश कोल्हे की महाराष्ट्र के अमरावती में ही 21 जून 2022 को हत्या कर दी गई थी। यह मामला कई दिनों तक मीडिया की सुर्खियों से दूर रहा। लेकिन जब उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैयालाल का मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने गला काट दिया उसके बाद इस मामले की भी परतें खुलने लगी।

काफिर को जिंदा नहीं छोड़ना है

एबीपी की रिपोर्ट बताती है कि प्रतीक प्रवार पर हमले को लेकर दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि तीखी बहस के बाद शाहरुख खान पठान ने प्रतीक पर जानलेवा हमला किया। प्रतीक ने बचाव की कोशिश की तो तलवार उसके हाथ पर लग गई। इसके बाद पीछे से निहाल खान पठान और सोहेल खान पठान ने प्रतीक के सिर पर वार किया। इससे वह नीचे गिर गया और उसके सिर से खून बहने लगा। इस हालत में भी वे प्रतीक पर तब तक हमला करते रहे जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए। इस दौरान हमलावर कह रहे थे कि इस काफिर को जिंदा नहीं छोड़ना है।

इस मामले में अब तक 4 आरोपितों की गिरफ्तारी की खबर है। विधायक नितेश ने इस घटना को लेकर बताया, “हमलावरों ने प्रतीक से कहा कि तू बहुत हिन्दू-हिन्दू करता रहता है। तू सबको नूपुर की DP रखने के लिए कहता है। हमले के दौरान उसका गला काटने की भी धमकी दी गई।”