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जिस ‘डिप्टी मैनेजर’ दिव्या राणा ने दी मेरी माँ को गाली, उससे टाइम्स ऑफ इंडिया ने बनाई दूरी: पहले कहा- वो हमारी कर्मचारी नहीं, फिर बोले- हमारे स्टाफ का वो फर्जी अकॉउंट

टाइम्स ऑफ इंडिया की कथित 'डिप्टी मैनेजर' दिव्या राणा ने मेरी माँ को 'रं$#' और 'हि&%*' कहकर गालियाँ दीं, नंगा घुमाने की धमकी दी और जज पिता के प्रभाव से जिंदगी बर्बाद करने की कसम खाई।

मुंबई की टाइम्स ऑफ इंडिया में डिप्टी मैनेजर होने का दावा करने वाली दिव्या राणा ने मेरी माँ को अपमानजनक शब्द कहे और उन पर यौन हमला करने की बात लिखी।

इस पूरे विवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया ने दिव्या को अपना कर्मचारी मानने से इनकार कर दिया और संबंधित अकाउंट को ‘फर्ज़ी’ बताकर मामले से खुद को अलग करने की कोशिश की।

वहीं दिव्या ने मुझे शारीरिक नुकसान पहुँचाने की धमकी भी दी और अपने पिता, जो कथित तौर पर जज हैं, उनके प्रभाव का इस्तेमाल करके मेरी जिंदगी बर्बाद करने की कसम खाई। ये सभी धमकियाँ उन्होंने उस फेसबुक पोस्ट के बाद दीं, जिसमें बेंगलुरु में रेबीज़ से चार साल के बच्चे की मौत पर सवाल उठाए गए थे।

दिव्या राणा का फेसबुक प्रोफाइल, जिसमें वह टाइम्स ऑफ इंडिया की उप प्रबंधक होने का दावा करती हैं

यह घटना गुरुवार (21 अगस्त 2025) को हुई, जब मैंने बेंगलुरु में आवारा कुत्तों के कारण चार साल की एक बच्ची की मौत पर फेसबुक पोस्ट शेयर की थी।

बच्ची एक रेहड़ी-पटरी वाले की बेटी थी, जिसे रेबीज हो गया था और रविवार (17 अगस्त 2025) को उसकी मौत हो गई। लोकप्रिय सोशल मीडिया कमेंटेटर ‘द स्किन डॉक्टर’ ने मंगलवर (19 अगस्त 2025) को इस घटना के बारे में फेसबुक पर पोस्ट किया था।

मैंने उनकी पोस्ट इस कैप्शन के साथ शेयर की थी, “हमने तुम्हें निराश किया, बच्ची। आवारा कुत्तों को सड़क पर रखने के लिए अभियान चलाने वाले ‘डॉग एक्टिविस्ट’ इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोलेंगे।”

फेसबुक पोस्ट का स्क्रीनशॉट

दिव्या राणा, जो खुद को ‘पत्रकार’ और उप-प्रबंधक बताती हैं, मेरे फेसबुक पेज पर आईं और अपनी पहचान का इस्तेमाल करके मुझे परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।

उन्होंने कहा कि यह खबर गलत है और असत्यापित जानकारी साझा करने पर मुझे कानूनी सजा मिलेगी। लेकिन जब मैंने दोबारा पूरी जाँच की तो पाया कि खबर बिल्कुल सही थी।

रेबीज से बच्चे की मौत की खबर ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ समेत कई मीडिया संस्थानों में प्रकाशित हुई थी। फिर भी, दिव्या राणा ने फेसबुक पोस्ट के कमेंट सेक्शन में मुझे चैटजीपीटी से तैयार किया गया ‘सीज एंड डिसिस्ट नोटिस’ भेजा।

जब मैंने दिव्या राणा से कहा कि वे कानूनी नोटिस मेरे आधिकारिक ईमेल ([email protected]) पर भेजें, तो उन्होंने समय बर्बाद करना शुरू कर दिया। मैंने टाइम्स ऑफ इंडिया की कथित डिप्टी मैनेजर से अनुरोध किया कि वे जल्दी से नोटिस भेजें।

लेकिन इसके बजाय, उन्होंने मुझे ‘मानहानि’ और ‘गलत जानकारी’ फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार कराने की धमकी दी।

दिव्या राणा ने आगे कहा, इंडियन एक्सप्रेस के लिए वारंट पहले ही जारी हो चुका है। आपको भी कानूनी नोटिस भेजा जा रहा है। आपने स्वीकार किया है कि यह जानकारी आपने दूसरों द्वारा साझा की गई पोस्ट के आधार पर शेयर की है और आपके पास कोई ठोस तथ्य नहीं हैं। इसलिए यह नोटिस जरूरी है।”

राणा ने अपनी धमकी भरी रणनीति जारी रखते हुए कहा, ” आपको सोशल मीडिया पर बदनामी करने और सुनी-सुनाई बातों पर आधारित झूठी जानकारी फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जाएगा।”

गिरफ़्तारी और वारंट की धमकियों के बावजूद, जब मैंने बार-बार अपनी ईमेल आईडी पर ‘कानूनी नोटिस’ भेजने की माँग की, तो टाइम्स ऑफ इंडिया की कथित उप-प्रबंधक गालियाँ देने लगीं।

दिव्या राणा ने मेरी 70 साल की माँ को ‘रं$%’ और ‘हि&$%’ कहने में कोई झिझक नहीं दिखाई। यहाँ तक कि उन्होंने मेरी माँ को सार्वजनिक रूप से नंगा घुमाने की भी धमकी दी।

इसके अलावा, उन्होंने अपने जज पिता के प्रभाव और ताकत का इस्तेमाल करके मेरी जिंदगी बर्बाद करने की चेतावनी दी। मेरी बस इतनी गलती थी कि मैंने एक बच्चे की कुत्ते के काटने और उसके बाद रेबीज से हुई असामयिक मौत का मुद्दा उठाया था।

एक बेटे के तौर पर, माँ को दी गई गालियों का अनुवाद करना मेरे लिए मुश्किल है।

दिव्या राणा: दिबाकर दत्ता, क्या तेरी माँ कोई रं$% है जो तेरी आग बुझाने आती है? चू&$ की गां$ नहीं, तेरी माँ की गां$ है। तेरी माँ का क्या रेट है? हर्ष वर्मा मेरे पापा हैं जो जज हैं। तेरी चड्डी उतरवा दूँगी और तुझे नंगा घुमाऊँगी, हि&$* और रं&* की औलाद।

क्या तेरी गां$ भी है? तेरा चेहरा भद्दा है और तेरी बातें भी। छी, कितना घिनौना चेहरा है तेरा, रं$# की औलाद। देख, तेरी माँ सड़कों पर नं&@ घूम रही है। मा*$@द, अभी भौंकता रह। मैं तुझे कानूनी जवाब दूँगी, नाले के घिनौने कीड़े। भौंकता रह, मैं जवाब भी नहीं दूँगी और मै पढ़ूँगी भी नहीं।

मैं इस बात से आश्चर्यचकित हूँ कि राणा, ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ के साथ अपने कथित संबंध और अपने पिता के न्यायाधीश के कथित पेशे के जरिए बिना किसी कानून के डर के एक आम आदमी को धमकाने और गाली देने के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की प्रतिक्रिया

एक्स पर जब मैंने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ से कार्रवाई की माँग करते हुए यह मामला उठाया, तो अखबार ने करीब 16 घंटे बाद, शुक्रवार (22 अगस्त 2025) को प्रतिक्रिया दी। अखबार ने दावा किया कि मेरे ट्वीट में जिस व्यक्ति का जिक्र है, वह उसका कर्मचारी नहीं है, बल्कि यह किसी वास्तविक कर्मचारी के नाम पर बनाया गया ‘फर्ज़ी अकाउंट’ प्रतीत होता है।

सवाल यह है कि क्या दिव्या राणा वास्तव में टाइम्स ऑफ इंडिया की कर्मचारी हैं या फिर अखबार सिर्फ अपनी छवि बचाने की कोशिश कर रहा है। इस लेख के लिखे जाने तक दिव्या राणा का फेसबुक प्रोफाइल सक्रिय था, जिसकी कवर इमेज पर अब भी ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ लिखा हुआ है।

हालाँकि अखबार ने ‘उचित कार्रवाई’ का आश्वासन दिया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि कार्रवाई किस तरह की होगी और ‘फर्ज़ी अकाउंट’ से उसकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए हैं।

नोट- मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में दिबाकर दत्ता ने लिखी है, इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।

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Dibakar Dutta
Dibakar Duttahttps://dibakardutta.in/
Centre-Right. Political analyst. Assistant Editor @Opindia. Reach me at [email protected]

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