Home Blog Page 2518

कानपुर हिंसा के मुख्य आरोपित जफर हयात हाशमी पर लगा रासुका, बाबा बिरयानी और बिल्डर वसी सहित चार पर गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur, Uttar Pradesh) में 3 जून 2022 को हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपित जफर हयात हाशमी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून – रासुका (NSA) लगाया है। इसके अलावा, हिंसा के लिए फंडिंग करने वाले बिल्डर वसी, बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार, अकील और शफीक पर गैंगेस्टर एक्ट लगाया गया है।

हाशमी पर रासुका लगाने को लेकर पुलिस कमिश्नर विजय मीणा ने 4 दिन पहले सभी साक्ष्य जुटाकर कानपुर नगर के जिलाधिकारी विशाख को भेज दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी विशाख ने हाशमी पर रासुका के तहत कार्रवाई करने की मंजूरी दे दी।

कमिश्नर मीणा ने कहा कि 3 जून 2022 को हुई हिंसा में जिस तरह सांप्रदायिक माहौल को बिगाड़ने का काम किया गया था, इस मामले में पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए 60 लोगों को गिरफ्तार किया था। इस हिंसा में क्राउड फंडिंग करने वाले 4 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है, जिनमें बाबा बिरयानी का मालिक भी शामिल है।

वहीं, जिलाधिकारी विशाख ने बताया कि कानपुर के पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने जेल में बंद हयात जफर हाशमी के खिलाफ NSA लगाने का प्रस्ताव भेजा था। जिलाधिकारी ने कहा कि उन्होंने प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेज दिया है। 

बता दें कि गौरतलब है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद को लेकर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के कथित अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में 3 जून को बंद का आह्वान किया गया था। इसके बाद नमाज के बाद उन्मादियों ने नई सड़क और दादा मियां का हाता में जमकर उत्पात मचाया था।

इस दौरान 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे, 25 से अधिक लोग घायल हो गए थे। कानपुर हिंसा को लेकर पुलिस ने 3 मुकदमे दर्ज किए गए थे। पुलिस ने अब तक इस मामले में 62 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। मामले की जाँच कर रही SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस उपद्रव के पीछे गहरी साजिश थी और बयान का विरोध सिर्फ एक दिखावा था।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उपद्रव के पीछे नई सड़क क्षेत्र में स्थित चंद्रेश्वर हाता भी एक बड़ा कारण है। चंद्रेश्वर हाता इस क्षेत्र में अकेला हिंदू बहुल बस्ती है। इसके चारों तरफ सिर्फ मुस्लिमों की आबादी है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस हिंदू इलाके पर कुछ मुस्लिम बिल्डरों की नजर लगी हुई है और वे हिंदुओं में दहशत पैदा कर मकान बेचने के लिए विवश करने की कोशिश कर रहे थे। इसलिए पूरा बवाल चंद्रेश्वर हाता के सामने ही हुआ। 

पार्था चटर्जी की करीबी अर्पिता के घर से ED को मिले 2 सेक्स टॉय, किसका है, किसने खरीदा और कौन कर रहा था इस्तेमाल: जाँच में जुटी एजेंसी

पश्चिम बंगाल शिक्षा घोटाले (WBSSC) के मामले में प्रवर्तन निदेशालय लगातार कार्रवाई कर रहा है। इसी क्रम में प्रवर्तन निदेशालय ने एक बार फिर से ममता बनर्जी की पार्टी के नेता पार्था चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान कैश और गहनों के साथ ही ईडी को अर्पिता के फ्लैट से दो सेक्स टॉय भी मिले।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि बुधवार को अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया फ्लैट की तलाशी के दौरान अधिकारियों को दो सेक्स टॉय मिले। वह फ्लैट अर्पिता का था तो क्या वह उन सेक्स टॉयज का इस्तेमाल कर रही थीं? या कोई और उस फ्लैट यूज़ कर रहा था? यह अभी स्पष्ट नहीं है। ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है कि इन्हें कहाँ से लाया गया, किसने खरीदा, कीमत कितनी है ये भी अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। लेकिन केवल सेक्स टॉयज ही नहीं एक सोना और एक हीरे की अंगूठी भी मिली है जिस पर अंग्रेजी अक्षर ‘P’ लिखा हुआ था। ईडी ने कहा है कि फिलहाल इन सभी चीजों की जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि बुधवार (27 जुलाई 2022) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अर्पिता मुखर्जी के दूसरे फ्लैट पर छापा मारा। यहाँ से ईडी को करीब 28.90 करोड़ रुपए कैश और 5 किलो सोना मिला। यह छापेमारी गुरुवार (28 जुलाई 2022) सुबह 4 बजे तक चली थी। अर्पिता मुखर्जी के फ्लैट में यह रकम टॉयलेट में छुपाकर रखी गई थी। इस रकम को गिनने के लिए ईडी के अधिकारियों को नोट गिनने की 3 मशीनें मँगवानी पड़ी। समाचार एजेंसी ANI ने बताया था कि अर्पिता मुखर्जी के बेलघरिया स्थित आवास से लगभग 29 करोड़ रुपए की नकदी मिली थी। इसे 10 ट्रक में भरकर एजेंसी साथ ले गई।

अर्पिता मुखर्जी के आवास से अब तक कुल करीब 50 करोड़ रुपए नकद बरामद हो चुके हैं। इससे पहले 23 जुलाई को अर्पिता के एक अन्य घर से ED ने 21 करोड़ रुपए कैश बरामद किए थे। अर्पिता मुखर्जी का कहना है कि पार्था चटर्जी उनके घर को ‘मिनी बैंक’ की तरह इस्तेमाल करते थे।

बंगाल की CM ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी को मंत्री पद से हटाया, मामले को बताया बड़ी साजिश, अर्पिता के एक और घर पर ED की रेड

पश्चिम बंगाल (West Bengal) की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (CM Mamata Banerjee) ने शिक्षा घोटाले में ED द्वारा गिरफ्तार किए जाने के पाँच दिन अपने मंत्री पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) के खिलाफ एक्शन लिया है। ममता ने पार्थ को मंत्री पद से हटा दिया है।

ममता बनर्जी के इस निर्णय के बाद उनके भतीजे और तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने गुरुवार (28 जुलाई 2022) की शाम को अनुशासन समिति की बैठक बुलाई। इस बैठक के बाद पार्थ को पार्टी के सभी पदों से भी हटा दिया गया।

आजतक के अनुसार, ममता बनर्जी ने पार्थ चटर्जी से जुड़े मामले को साजिश बताया है। उन्होंने कहा, “हमने उनको (पार्थ) हटाया, क्योंकि तृणमूल कॉन्ग्रेस एक सख्त पार्टी है। सारा पैसा एक लड़की (अर्पिता) के पास से बरामद हुआ है, जिसे बार-बार दिखाया जा रहा है। यह एक बड़ा गेम है, जिसके बारे में अभी ज्यादा बात नहीं की जाएगी।”

पार्थ के तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के महासचिव के साथ-साथ उपाध्यक्ष भी थे। इसके अलावा, उनके पास तीन और जिम्मेदारी थीं। अभिषेक बनर्जी का कहा कि जाँच जारी रहने तक पार्थ को पार्टी से निलंबित किया गया है। अगर बेगुनाह साबित होते हैं तो वे पार्टी में फिर से आ सकते हैं।

इधर, शिक्षक भर्ती घोटाले में पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के एक और फ्लैट पर ED ने छापेमारी की है। कोलकाता एयरपोर्ट के पास स्थित चिनार पार्क में यह रेड डाली गई है। यहाँ क्या-क्या मिला है, अभी तक इसकी जानकारी सामने नहीं आ पाई है।

बता दें कि बुधवार (27 जुलाई 2022) से लेकर गुरुवार (28 जुलाई 2022) तक चली ED की छापेमारी में अर्पिता मुखर्जी के दूसरे घर से लगभग 28 करोड़ रुपए नकद और 5 किलोग्राम सोना जब्त किया है। अर्पिता ने ED को बताया कि ये सारे रुपए पार्थ चटर्जी के हैं।

अर्पिता का कहना था कि पार्थ इस घर का इस्तेमाल रुपए रखने के लिए करते थे, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि घर में इतने कैश हैं। कहा जाता है कि पार्थ इन कमरों का इस्तेमाल मिनी बैंक के तौर पर करते थे और इन घरों के कमरों में पार्थ और उनके करीबी लोगों की ही एंट्री थी।

जरूरत पड़ी तो लागू करेंगे ‘योगी मॉडल’, कर्नाटक में भी चलेगा बुलडोजर: सीएम बोम्मई की दो टूक, BJYM नेता की हत्या के बाद एक्शन में सरकार

भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या के बाद योगी ‘मॉडल’ की चर्चा भारत के दक्षिणी राज्य कर्नाटक में भी सुनाई दे रही है। मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को खुद कहा है कि जरूरत पड़ी तो राज्य में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे राष्ट्र विरोधी और सांप्रदायिक तत्वों से निपटने के लिए ‘योगी मॉडल’ को लागू किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार को मुख्यमंत्री के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा किया है। इस मौके पर उन्होंने अपनी सरकार को सौ में से पूरे सौ अंक दिए। मुख्यमंत्री ने बेंगलुरु में अपने बयान में कहा, “उत्तर प्रदेश की स्थिति को देखते हुए, योगी (आदित्यनाथ) सही मुख्यमंत्री हैं। इसी प्रकार कर्नाटक में स्थिति से निपटने के लिए अलग तरीके हैं और उन सभी का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर स्थिति की माँग होगी तो कर्नाटक में भी सरकार के योगी मॉडल को अपनाया जाएगा।”

जानकारी के लिए बता दें कि यहाँ ‘योगी मॉडल’ से मतलब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों से हैं, जिनमें से ऐसे तत्वों और माफिया के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल भी शामिल है। जिससे उनके मकानों को कानूनी तरीके से धराशाही किया जाता है।

दरअसल, दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में बीजेपी कार्यकर्ता प्रवीण नेट्टारू की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या किए जाने के दो दिन बाद यह बयान आया है। क्योंकि भाजपा और संघ परिवार के कुछ घटकों द्वारा कर्नाटक में सरकार से ‘योगी मॉडल’’ लागू करने की माँग की जा रही है। मुख्यमंत्री बोम्मई इसी संबंध में पूछे गए एक सवाल का जवाब दे रहे थे।

बोम्मई ने कहा कि उनकी सरकार ने इस हत्याकांड को गंभीरता से लिया है और जाँच जारी है। उन्होंने कहा, “पाँच टीमें गठित की गई हैं। अधिकारी अपना काम कर रहे हैं। हमें भरोसा है कि दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर दंडित किया जाएगा जैसा इस साल शिवमोगा में हर्षा हत्याकांड में हुआ था।”

वहीं कर्नाटक प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस ने एक्शन लेते हुए गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को दो आरोपितों को गिरफ्तार भी कर लिया है। पकड़े गए आरोपितों की पहचान जाकिर और शफीक के तौर पर हुई है।

गौरतलब है कि BJYM सदस्य की हत्या के बाद से कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हत्या से नाराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राज्य सरकार हिंदू कार्यकर्ताओं की जान बचाने के लिए खड़ी नहीं हो रही है। इसी वजह से सरकार पर दबाव बनाने के लिए बुधवार को बड़ी संख्या में भाजपा की युवा ब्रिगेड ने सामूहिक इस्तीफे दिए थे। इसी बीच कई कार्यकर्ता और विधायक माँग कर रहे हैं कि सरकार सामाजिक अशांति पैदा करने और सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाने जैसी कार्रवाई करे।

बता दें कि प्रवीण नेट्टारू की हत्या के मद्देनजर मुख्यमंत्री बोम्मई ने उनकी सरकार के एक साल और भाजपा शासन के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले कार्यक्रम को रद्द कर दिया है। इसके तहत ‘जनोत्सव’ नाम से दोडबल्लापुर में एक ‘विशाल रैली’ का आयोजन होना था जिसे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा संबोधित करने वाले थे।

मस्जिद के अंदर 6 साल की बच्ची के साथ मौलवी ने किया रेप, दीनी तालीम लेने जाती थी नाबालिग: संभल की घटना, POCSO एक्ट में केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक मस्जिद में 6 साल की बच्ची से रेप किए जाने का मामला सामने आया है। बच्ची से रेप के आरोप में पुलिस ने एक मौलाना को गिरफ्तार किया है। शिकायत के मुताबिक, आरोपित ओवैस मस्जिद में मौलवी है और पीड़त मौलवी के पास दीनी (इस्लामिक शिक्षा) शिक्षा लेने के लिए जाती थी। लेकिन उसकी नीयत खराब हुई और उसने बच्ची को ही हवस का शिकार बना लिया।

रिुपोर्ट के मुताबिक, घटना संभल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक मस्जिद की है। जहाँ 6 साल की नाबालिग की अम्मी ने पुलिस में शिकायत की है कि मस्जिद के मौलवी ने उसके बच्ची को मस्जिद के ही पास बने एक अलग कमरे में ले गया और वहाँ पर उसने बच्ची का रेप किया। शिकायत में बताया गया है कि बच्ची ने घर पहुँचकर अपनी अम्मी से सारी बात बताई। उसने कहा कि इमाम ने उसके साथ गंदा काम किया है।

बच्ची की शिकायत के बाद जब पीड़ित के परिजन मस्जिद के इमाम के पास मामले की शिकायत लेकर गए तो उसने भी पीड़ित को परिवार समेत जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पीड़ित की अम्मी ने थाने में इसकी शिकायत की। मामले में इंडियन पीनल कोड की धारा 376 और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (POCSO) के तहत केस दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। संभल के सीओ जितेंद्र कुमार ने शिकायत की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले में पीड़िता के बयान दर्ज कर उसे मेडिकल के लिए भेज दिया गया है।

6 साल की नाबालिग के साथ दरिंदगी के मामले में पुलिस ने कहा है कि मामले की पूर्ण छानबीन के बाद आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी होती रही हैं ऐसी वारदातें

ये कोई पहली बार नही है जब इस तरह की वारदात हुई है। अभी पिछले महीने 23 जून 2022 को सहारनपुर के नकुड़ क्षेत्र में मदरसा में पढ़ाने वाले एक मौलवी ने 7 साल की बच्ची से रेप किया था। यहीं नहीं बच्ची की आवाज को कुचलने के लिए आरोपित ने पीड़िता को हत्या की धमकी भी दी थी। मामले में पुलिस ने केस भी दर्ज किया था। इसी तरह 2 जून को भी आगरा के एक मौलवी पर नाबालिग छात्रा से रेप का आरोप लगा था।

‘देश से वफादार न रहने वालों की छीनी जा सकती है नागरिकता’: इजरायली सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मचा हड़कंप, भड़के मुस्लिम संगठन

इजरायल का जन्म फिलिस्तीन से हुआ है। दोनों देशों की सीमाएँ लगती हैं। इजरायल और फिलिस्तीन के बीच सीमा विवाद नया नहीं है। आए दिन युद्ध की स्थितियाँ बनी रहती हैं। इस बीच इजरायल के सुप्रीम कोर्ट ने देश की सुरक्षा के मद्देनजर 21 जुलाई 2022 को एक फैसला सुनाया कि देश के प्रति वफादार नहीं रहने वाले फिलिस्तीनी नागरिकों की नागरिकता को छीन लिया जाएगा। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं, जो कि इजरायल के खिलाफ जासूसी और आतंक जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, देश में आतंकवाद, जासूसी या राजद्रोह सहित देश के प्रति ‘वफादारी का उल्लंघन’ करने वाले व्यक्तियों की नागरिकता को रद्द कर सकता है। हालाँकि, मानवाधिकार संगठनों को इस बात की आशंका सता रही है कि कोर्ट के इस फैसले को केवल गैर यहूदी नागरिकों पर थोपा जाएगा।

ये फैसला इजरायल में 2008 के नागरिकता कानून को संबोधित करते हुए दिया गया है। इसमें राज्य को ‘वफादारी का उल्लंघन’ करने वाले कार्यों के आधार पर नागरिकता रद्द करने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला इजरायल के दो फिलिस्तीनी नागरिकों के मामलों में अलग-अलग अपीलों के बाद आया था, जिन्हें इजरायली नागरिकों पर हमलों को अंजाम देने का दोषी ठहराया गया था। दोनों को लंबी सजा सुनाई गई, लेकिन राज्य ने उनकी नागरिकता छीनने की कोशिश की।

मुस्लिमों को सताया डर

इजरायल के सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिमों के लिए काम करने वाले संगठनों में नाराजगी है। इसी क्रम में इजरायल में नागरिक अधिकारों के लिए एसोसिएशन और एक अरब अधिकार समूह अदलाह ने इसकी आलोचना की। संगठन ने कोर्ट के फैसले को भेदभावपूर्ण करार देते हुए आशंका व्यक्ति की कि इसका इस्तेमाल इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों खिलाफ विशेष रूप से इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के लगभग 20% नागरिक फिलिस्तीनी हैं।

दुनिया के कई देशों में ऐसे कानून हैं, जिनके जरिए किसी विशेष मामले में दोषी पाए जाने पर व्यक्ति की नागरिकता को खत्म करने की इजाजत है। बीते दो दशक से आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तौर पर इसका इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि, सरकारों की इस नीति को काफी विवादित माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय कानून किसी देश की सरकार को उसके नागरिकों की नागरिकता की स्थिति को रद्द करने से रोकता है।

‘फिल्म देखे बिना फैलाई गई नफरत, लोगों ने मेहनत का सम्मान नहीं किया’: ‘शमशेरा’ के फ्लॉप होने से भड़के संजय दत्त, दर्शकों पर ही फोड़ा ठीकरा

यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी शमशेरा फिल्म फ्लॉप हो गई है। रणबीर कपूर (Ranbir Kapoor) और वाणी कपूर स्टारर फिल्म शमशेरा (Shamshera)’ के बुरी तरह से पिट जाने पर मेकर्स के साथ-साथ फिल्म के एक्टर्स के लिए भी सोचने वाली बात है। फिल्म रिलीज होने के बाद से रणबीर कपूर दर्शकों के निशाने पर आ गए हैं, जिसके बाद डायरेक्टर करण मल्होत्रा ने रणबीर का बचाव करते हुए, ट्विटर पर एक नोट लिखा और शमशेरा मेरी है का हैशटैग भी दिया। अब फिल्म के विलेन शुद्ध सिंह यानी संजय दत्त (Sanjay Dutt) भी शमशेरा के सपोर्ट में आ गए हैं। साथ ही उन्होंने फिल्म के फ्लॉप होने पर अपनी भड़ास निकाली है।

संजय दत्त ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “फिल्में बनाना जुनून का काम हैं। एक कहानी कहने का जुनून, उन किरदारों को जीवन में लाने का जुनून, जिनसे आप पहले कभी नहीं मिले हैं। शमशेरा प्यार का एक ऐसा श्रम है, जिसे हमने अपना सब कुछ दे दिया। यह खून, पसीने और आँसूओं से बनी फिल्म है। यह एक सपना है जिसे हम पर्दे पर लेकर आए हैं। दर्शकों के मनोरंजन के लिए फिल्में बनाई जाती हैं और हर फिल्म को अपने दर्शक मिल जाते हैं, भले ही देर से मिलें। शमशेरा से बहुत से लोग नफरत करते हैं। कुछ लोग तो फिल्म से इस हद तक नफरत कर रहे हैं कि उन्होंने बिना देखे ही इसे बुरी फिल्म बता दिया है। मुझे यह बहुत अजीब लगता है कि लोग आपकी मेहनत की इज्जत नहीं करते। ये ठीक नहीं है। करण मल्होत्रा उन निर्देशकों में से एक हैं, जिन्होंने मुझे अग्निपथ फिल्म में कांचा चीना जैसा किरदार दिया। मैं उनका साथ हमेशा दूँगा।”

संजय दत्त ने फिल्ममेकर करण मल्होत्रा (Karan Malhotra) को लेकर अपने पोस्ट में आगे कहा कि वह मेरे परिवार की तरह हैं। एक्टर ने कहा, “मैं करण को फिल्ममेकर के तौर पर काफी एडमायर करता हूँ। अपने 4 दशक के करियर में मैंने जितने भी डायरेक्टर्स के साथ काम किया है, वह उन सब में से बेस्ट हैं। करण मेरे लिए परिवार की तरह है। कामयाबी और असफलता को एक तरफ रख दें तो हमेशा करण के साथ काम करना मेरे लिए काफी गर्व की बात होती है। उन्होंने मुझ पर फिर से विश्वास जताया और शमशेरा में शुद्ध सिंह का किरदार दिया। मैं हमेशा उनके साथ खड़ा रहूँगा।”

रणबीर कपूर को लेकर संजय ने लिखा, “मुझे यह देखकर बहुत दुख होता है कि कैसे लोग हमारे समय के सबसे हार्ड वर्किंग और टैलेंटेड एक्टर्स में से एक के काम के बारे में नफरत फैलाने के लिए उत्सुक हैं। हमारे लिए नफरत से ज्यादा आर्ट और कमिटमेंट्स मायने रखते हैं। जो प्यार हम फिल्म और उससे जुड़े लोगों के लिए फील करते हैं वो इन सारी चीजों से परे है।” ‘शमशेरा (Shamshera)’ की कास्ट और क्रू को धन्यवाद देते हुए संजय दत्त ने पोस्ट के आखिर में लिखा, “कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना।”

बता दें कि इससे पहले करण मल्होत्रा ने चुप्पी तोड़ते हुए ट्विटर पर लिखा, “मेरे प्यारे शमशेरा, आप जैसे हैं वैसे ही प्रभावशाली हैं। मेरे लिए इस मंच पर खुद को व्यक्त करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वो जगह है जहाँ आपके लिए प्यार, नफरत, खुशी और अपमान मौजूद है।” करण ने आगे लिखा, “मैं आपसे माफी माँगना चाहता हूँ। पिछले कुछ दिनों से मैं कुछ कह नहीं पा रहा था, क्योंकि मैं नफरत और गुस्सा सहन नहीं कर सकता था। मेरा तुम्हारा साथ न दे पाना मेरी कमजोरी थी और इसके लिए कोई बहाना नहीं है, लेकिन अब मैं आपके साथ खड़े होकर गर्व और सम्मानित महसूस कर रहा हूँ कि आप मेरे हैं।

शमशेरा के निर्देशक ने यह भी कहा, “हर चीज का एक साथ सामना करेंगे, अच्छा बुरा और बदसूरत। शमशेरा परिवार, शमशेरा के कलाकारों और क्रू मेंबर्स के लिए बहुत सम्मान है। जिन्होंने हमें इतना प्यार, आशीर्वाद दिया और हमारे बारे में सोचा। वह सबसे कीमती है और कोई भी इसे हमसे दूर नहीं कर सकता है।”

‘जजों को निशाना बनाने की भी हद होती है, हमें भी थोड़ा ब्रेक दीजिए’: मीडिया से खफा हुए जस्टिस चंद्रचूड़, केस में देरी को लेकर छपी थी खबर

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ ने जजों को मीडिया में निशाना बनाए जाने पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। जस्टिस चंद्रचूड ने उस मीडिया आउट्लेट का उल्लेख किया था कि जिसमें ये लिखा गया था कि एंटी क्रिश्चियन वायलेंस से जुड़ी याचिका पर सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट देरी कर रहा है। दरअसल, गुरुवार (28 जुलाई, 2022) को जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच के सामने एक वकील ने ईसाई समुदाय के खिलाफ हिंसा के संबंध में एक मामले का उल्लेख किया। उसी दौरान जस्टिस चंद्रचूड ने यह टिप्पणी की।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, जजों को निशाना बनाते हुए लिखे गए इस आर्टिकल से जस्टिस चंद्रचूड भड़क गए और कहा, “जजों को भी ब्रेक दें और उन्हें निशाना बनाने की भी एक हद होती है।” न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम पर दबाव बनाना बंद करें।

जस्टिस चंद्रचूड ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा, “मैं कोविड से संक्रमित था, इसलिए इस मामले को नहीं उठाया जा सका। लेकिन मैंने हाल ही में एक न्यूज आर्टिकल पढ़ा जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट मामले की सुनवाई में देरी कर रहा है। हमें भी ब्रेक दो। जजों में से एक कोविड से पीड़ित था, इसलिए सुनवाई नहीं हो पाई। आप जजों को कितना टारगेट करेंगे, इसकी भी एक लिमिट होती है।”

जस्टिस चंद्रचूड़ ने ये भी पूछा कि इस तरह की खबरें पब्लिश पब्लिश करने वाले हैं कौन? फिर उन्होंने आगे कहा कि हम इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेंगे, नहीं तो फिर कोई और खबर आएगी।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील द्वारा मामले पर सुनवाई किए जाने के अनुरोध पर ये टिप्पणियाँ की। बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोन्साल्वेज ने जून, 2022 में अवकाशकालीन पीठ के समक्ष एक मामले का उल्लेख किया था जिसमें कहा गया था कि देशभर में ईसाई संस्थानों और पादरियों के खिलाफ हर महीने औसतन 45 से 50 हिंसक हमले होते हैं।

गौरतलब है कि बेंगलोर डीओसिस के आर्क बिशप पीटर मचाडो (Peter Machado) और नेशनल सॉलिडेरिटी फोरम द्वारा अप्रैल, 2022 में एक याचिका दायर की गई थी। जिसमें दावा किया गया था कि ईसाइयों के खिलाफ टारगेट के तहत वॉयलेंस किया जा रहा है। दरअसल, इस याचिका में FIR दर्ज करने और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम से जाँच कराने की माँग की गई है।

बता दें कि इस याचिका पर सुनवाई चल रही थी लेकिन एक जज के कोरोना से संक्रमित हो जाने के कारण सुनवाई में थोड़ी देरी हुई। वहीं खबर ये भी है कि जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ इस साल नवंबर से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का पद सँभालने वाले हैं।

‘You Don’t Talk To Me’: अचानक अध्यक्ष की तरफ बढ़ने लगीं सोनिया गाँधी, स्मृति ईरानी से भी बहस – जानें संसद में ऑफ कैमरा क्या हुआ

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी द्वारा ‘राष्ट्रपत्नी’ कहने के मामले में सियासत गरमा गई। इसका नजारा संसद भवन और उसके बाहर हर जगह देखने को मिला। इस मामले में सदन के अंदर जब केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी से माफी माँगने की माँग की तो दोनों नेताओं में जमकर तकरार हुई। अपने अहंकार को दिखाते हुए सोनिया गाँधी ने स्मृति ईरानी से इंग्लिश में कहा ‘You don’t talk to me’ यानि कि आप मुझसे बात मत कीजिए। सोनिया गाँधी का यह अहंकार भरा लहजा अब वायरल हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संसद में अधीर रंजन चौधरी के बयान के बाद स्मृति ईरानी ने उन पर और सोनिया गाँधी पर निशाना साधते हुए कॉन्ग्रेस पर भारत की पहली जनजातीय महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का अपमान करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब से राष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर द्रौपदी मुर्मू के नाम का ऐलान किया गया है, तभी विपक्ष लगातार उनका अपमान कर रहा है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस एक जनजातीय समाज की महिला के सम्मान को पचा नहीं सकती। पार्टी इस बात को पचा नहीं पा रही है कि गरीब परिवार से आने वाली महिला देश की राष्ट्रपति बन सकती है।”

यहीं नहीं ईरानी ने संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष से माफी माँगने को कहा। उन्होंने कहा, “सोनिया गाँधी आपने द्रौपदी मुर्मू के अपमान को सहमति दी है। सोनिया जी ने सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन महिला के अपमान के लिए देश से माफी माँगें।”

सोनिया गाँधी के विरोध में बीजेपी सांसदों के हंगामे के बीच सदन को स्थगित कर दिया। सदन स्थगित होने के बाद वो संसद सत्र को चेयर कर रहीं रमा देवी के पास गईं और उनसे कहा, “अधीर रंजन चौधरी पहले ही माफी माँग चुके हैं। मुझे इसमें क्यों घसीटा जा रहा है?” इस पर बीच में आते स्मृति ईरानी ने कहा, ‘Madam, may I help you’ (क्या मैं आपकी मदद कर सकती हूँ?) मैंने आपका नाम लिया।” (ये शब्द उन्होंने अंग्रेजी में कहे)। इस पर फटाक से सोनिया गाँधी ने केंद्रीय मंत्री से दो टूक कहा, “मुझसे बात मत करो।”

पड़ोसियों ने हिन्दू युवती को पीटा, सिर-पेट-छाती सब पर किए वार, जूते-चप्पल से भी मारा: रशीद, शहनाज और सरफराज समेत 5 पर FIR

हरियाणा के फरीदाबाद में रशीद, कपील अहमद, शहनाज़, सरफ़राज़ और तबस्सुम पर रेखा नाम की एक लड़की की पिटाई का आरोप लगा है। 24 वर्षीया पीड़िता ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में अपनी छाती पर भी वार का जिक्र किया है। पुलिस ने FIR दर्ज कर के सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना 26 जुलाई, 2022 (मंगलवार) की है।

पीड़िता द्वारा पुलिस में दी गई शिकायत के मुताबिक, “मैं गाँव बडखल में रहती हूँ। घटना के दिन मैं गाडी से अपने घर आई थी। थोड़ी देर बाद पड़ोस में रहने वाला रशीद अपनी बाइक ले कर उधर से गुजरा। उसने मुझ से पूछा कि गाड़ी क्यों खड़ी की है? इसी बात पर हमारी बहस हो गई। बहस के दौरान ही रशीद की तरफ से कपील अहमद, शहनाज, सरफराज और तबस्सुम में मुझ पर हमला कर दिया। इन सभी ने मुझे लात-घूँसों के साथ चप्पलों से मारा। हमले में मेरे सिर, पेट और छाती को निशाना बनाया गया। मेरे पूरे शरीर में दर्ज हो रहा है।”

शिकायत कॉपी

पीड़िता ने अपनी शिकायत में पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पीड़िता की इस शिकायत पर पुलिस ने लिखा, “घटना के दिन हमें रेखा नाम की लड़की के साथ पड़ोसियों द्वारा मारपीट की सूचना मिली। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर पीड़िता का मेडिकल परीक्षण करवाया। मेडिकल में रेखा को कुल 4 चोटें आना पाया गया। घटना की FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी गई है।

FIR कॉपी और आरोपित

पुलिस ने पाँचों आरोपितों पर IPC की धारा 147, 149, 323, 506 के तहत कार्रवाई की है। जब इस मामले की सूचना हिन्दू संगठनों को मिली तब वो अनखीर चौकी पर पहुँच कर हंगामा करने लगे। हिन्दू संगठन का नेतृत्व कर रहे बिट्टू बजरंगी ने ऑपइंडिया से कहा, “कुछ दिन पहले इसी फरीदाबाद में देवेंद्र नाम के व्यक्ति का कत्ल करने वाला भी पड़ोसी था और अब रेखा नाम की लड़की को पीटने वाला भी पड़ोसी ही है। ऐसी घटनाएँ सहन नहीं की जाएँगी।”

पीड़िता के ममेरे भाई ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया, “हिन्दू संगठनों ने हमारी काफी मदद की है। हमारी बहन अपनी गाड़ी से पानी की बोतल निकाल कर घर में रख रही थी। तभी रशीद आ कर उस से लड़ने लगा था।”