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‘रजनीकांत सर एक जिम्मेदार नागरिक हैं’: आयकर विभाग ने किया सम्मानित, सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले एक्टर में अक्षय कुमार भी

आयकर दिवस (24 जुलाई 2022) के मौके पर चेन्नई में इनकम टैक्स विभाग ने सुपरस्टार रजनीकांत (Rajinikanth) को सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने के लिए सम्मानित किया। रजनीकांत की बेटी ऐश्वर्या ने इंस्टाग्राम पर इसकी तस्वीरें शेयर की हैं। ऐश्वर्या रजनीकांत (Aishwaryaa Rajinikanth) ने इनकम टैक्स विभाग से मिले इस सम्मान को अपने पिता की अनुपस्थिति में स्वीकार किया।

ऐश्वर्या ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरों के साथ कैप्शन लिखा, “जिम्मेदार और सबसे ज्यादा इनकम टैक्स देने वाले टैक्सपेयर की बेटी होने पर गौरवान्वित महसूस कर रही हूँ। आयकर दिवस 2022 के मौके पर अप्पा को सम्मानित करने के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी के आयकर विभाग को बहुत धन्यवाद।” तेलंगाना की राज्यपाल तमिलिसाई सुंदरराजन ने ऐश्वर्या को उनके पिता की अनुपस्थिति में सम्मान-पत्र सौंपा।

ऐश्वर्या रजनीकांत ने जैसे ही ये तस्वीरें शेयर की रजनीकांत के फैंस की तरफ से बधाई देने की होड़ लग गई। सोशल मीडिया पर एक यूजर ने कमेंट किया, “थलाइवा का फैंस होने पर गर्व है।” एक अन्य ने लिखा, “थलाइवा को बधाई। रजनीकांत सर एक जिम्मेदार नागरिक हैं।”

फोटो साभार: ऐश्वर्या रजनीकांत का इंस्टाग्राम अकाउंट

गौरतलब है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 24 जुलाई 2022 को बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार को सम्मान-पत्र देकर सम्मानित किया। विभाग ने बताया था कि वह बॉलीवुड में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले कलाकार हैं। सोशल मीडिया पर अभिनेता के फैन्स ने उनको दिए गए सर्टिफिकेट को शेयर किया था। अक्षय कुमार ने 2017 में 29.5 करोड़ रुपए इनकम टैक्स दिया था, जिसके बाद फोर्ब्स की सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले सेलिब्रिटी की सूची में वे 10वें स्थान पर थे। इसके बाद जब उनकी आय बढ़ी है, तो उन्होंने सबसे ज्यादा टैक्स का भुगतान किया। फिलहाल ये नहीं पता चल सका है कि कितना टैक्स भरने पर अक्षय को इस पत्र से सम्मानित किया गया है। वहीं वर्क फ्रंट की बात करें तो, 11 अगस्त को अक्षय कुमार की फिल्म रक्षाबंधन सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

CDS बिपिन रावत और कन्हैया लाल को श्रद्धांजलि, नूपुर शर्मा का समर्थन: अनोखी है काँवड़ यात्रा की झाँकियाँ, एम्बुलेंस और सैन्य वाहनों को हट कर देते हैं रास्ता

सावन माह में चल रही काँवड़ यात्रा में सबसे अधिक चहल पहल हरिद्वार जाने वाले मार्गों पर दिखाई देती है। इन सभी में गाजियाबाद से मेरठ और मुजफ्फरनगर जाने वाला राजमार्ग मुख्य है। इस बार काँवड़ यात्रा में कुछ ऐसी झाँकियाँ देखने को मिलीं जो अपने आप में अलग और अनोखी हैं। इसमें भारतीय सेना के सम्मान, दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत की स्मृति, राम मंदिर प्रतीक और नूपुर शर्मा के समर्थन की भी झाँकियाँ शामिल हैं। काँवड़ियों को पुलिसकर्मियों के साथ भी दोस्ताना माहौल में घुला-मिला देखा गया।

काँवड़ यात्रा के खिलाफ बोलने वाले कुछ वामपंथी तत्वों की खबरों की सही जानकारी लेने के लिए हम 23 जुलाई, 2022 (शनिवार) को कावड़ियों के बीच मुजफ्फरनगर से हरिद्वार तक बाइक से गए। मुजफ्फरनगर के थाना मंडी क्षेत्र में सेना के वाहनों का काफिला निकला तो काँवड़ियों ने खुद ही अपने जत्थे को रोक दिया। फ़ौज का अंतिम वाहन निकल जाने तक वो ‘भारत माता की जय’ और ‘वन्दे मातरम’ के नारे लगाते रहे।

दिवंगत CDS बिपिन रावत की झाँकी

थोड़ा आगे चल कर मुजफ्फरनगर के ही छपार थाना क्षेत्र में एक ऐसी झाँकी मिली जिसमें CDS विपिन रावत को श्रद्धांजलि दी गई थी। झाँकी में जनरल रावत की फोटो के साथ एक बलिदानी फौजी का प्रतीकत्मक होर्डिंग बनाया गया था। इसी झाँकी में कोरोना काल में बलिदान हुए डॉक्टरों और पुलिस के जवानों को भी श्रद्धांजलि दी गई थी।

CDS रावत की झाँकी

नूपुर शर्मा का समर्थन और कन्हैयालाल को श्रद्धांजलि

थोड़ा आगे बढ़ने पर मुजफ्फरनगर के पुरकाजी थानाक्षेत्र में एक वाहन पर नूपुर शर्मा का बैनर लगा दिखा। वाहन पर कई युवक खड़े हो कर ‘भारत माता की जय’ का नारा भी लगा रहे थे। इस वाहन में उदयपुर में बलिदान हुए कन्हैया लाल का फोटो लगा कर उन्हें हिन्दू वीर बता कर श्रद्धांजलि दी गई थी।

नूपुर शर्मा सपोर्ट

मुजफ्फरनगर के छपार थानाक्षेत्र में गाजियाबाद शिव मंदिर बालाजी धाम के महंत मछेन्द्र पुरी अपने हाथ में नूपुर शर्मा का पोस्टर ले कर चलते दिखाई दिए।

मछेन्द्र पुरी

काँवड़ियों ने महिलाओं को दिया पूरा सम्मान

हरिद्वार से लगभग 30 किलोमीटर पहले रुड़की बाईपास पर शाम लगभग 5 बजे हमने लगभग आधे दर्जन महिलाओं को काँवड़ यात्रियों को निःशुल्क खाना खिलाते देखा। उन्होंने हमें बताया, “हम यहीं बगल के गाँव के हैं। सुबह से यहाँ काँवड़ियों को खाना खिला रहे। हमारे आगे से अब तक हजारों भोले (काँवड यात्री) जा चुके। कइयों ने यहाँ खाना भी खाया। उन सभी का व्यवहार हमारे लिए हमारे घर के सदस्यों जैसा रहा। सभी काँवड़िए हमसे शालीनता और सभ्यता से पेश आए।”

काँवड़ियों को खाना खिलाती महिलाएँ

काँवड़ियों की भीड़ में हर एम्बुलेंस को मिला रास्ता

हरिद्वार पहुँच कर हमें लाखों काँवड़ियों की भीड़ दिखी। कई सड़कें जाम दिखीं। लेकिन उन्हीं रास्तों से जब भी कोई एम्बुलेंस गुजरी तब हर काँवड़ यात्री ने उसे खुद हट कर राह दी।

हरिद्वार में लोहा पुल के पास गुजरती एम्बुलेंस

‘राष्ट्र धर्म के लिए किसी भी हद तक जाऊँगा’: ऑपइंडिया से बोले कश्मीर फाइल्स के प्रोड्यूसर, आमिर खान के ‘लाल सिंह चड्ढा’ से टकराएगी अगली फिल्म

आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म देखी है और इसे पसंद किया है तो इसमें पैसा लगाने वाले व्यक्ति का नाम भी जान लीजिए उनका नाम है अभिषेक अग्रवाल, जिन्होंने विवेक अग्निहोत्री की इस फिल्म को प्रोड्यूस किया। 41 वर्षीय अभिषेक अग्रवाल निखिल सिद्धार्थ की फिल्म ‘कार्तिकेय 2‘ और रवि तेजा की पैन-इंडिया फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ लेकर भी आ रहे हैं। स्वभाव से विनम्र और जमीन से जुड़े अभिषेक अग्रवाल ने विभिन्न विषयों पर ऑपइंडिया से बातचीत की, जिसे हम आपके समक्ष पेश कर रहे हैं।

‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘कार्तिकेय 2’ के निर्माता अभिषेक अग्रवाल का इंटरव्यू

सवाल: एक फिल्म निर्माता के रूप में ‘द कश्मीर फाइल्स’ की सफलता के बाद आपके जीवन में क्या बदलाव आए? क्या आप अपने अनुभव साझा करेंगे?

जवाब: एक निर्माता से भी अधिक, एक व्यक्ति के रूप में ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने मुझे अत्यधिक संतुष्टि दी। हर रात में इसी ख़ुशी में बिस्तर पर जाता हूँ कि मैंने अपने कश्मीरी भाइयों की सच्चाई और व्यथा को दिखा कर इस देश और समाज के लिए कुछ किया है। अब पूरा भारत ही मेरा परिवार है। मैं हर उस चीज का समर्थन करूँगा, जो हमारे राष्ट्र के लिए अच्छा होगा। मैं अपने देश, धर्म और संस्कृति के लिए किसी भी हद तक जा सकता हूँ।

सवाल: आप विवेक अग्निहोत्री के साथ मिल कर ‘द दिल्ली फाइल्स’ का निर्माण भी कर रहे हैं। ये फिल्म किस बारे में है और ये ‘द कश्मीर फाइल्स’ से किस तरह अलग है?

जवाब: ‘द दिल्ली फाइल्स’ के बारे में अभी कुछ भी बात करना काफी जल्दबाजी होगी।

सवाल: ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बनाने से लेकर अब तक विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी के साथ आपके कैसे सम्बन्ध हैं? उनके बारे में आपको क्या पसंद है?

जवाब: मैंने विवेक अग्निहोत्री से संपर्क किया और उन्होंने जीवन को बदल कर रख देने वाली इस यात्रा में सहभागी बनाते हुए मुझमें अत्यधिक विश्वास दिखाया। ये यात्रा कठिन थी, लेकिन विवेक अग्निहोत्री और पल्लवी जोशी का इस दौरान लगातार सपोर्ट मिला। कश्मीर के दिल दहला देने वाले इतिहास को दिखाने में इन्होंने जो ईमानदारी दिखाई, वो प्रेरक और सराहनीय है। दोनों राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता हैं और उन्हें जानना, उनके साथ मिल कर काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। अब वो मेरे परिवार की तरह हैं।

सवाल: अब आपकी अगली फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ पर आते हैं। इस फिल्म का निर्माण करने के पीछे क्या कारण थे? आपको इस फिल्म के बारे में क्या अच्छा लगा, जिससे आपने इसमें रुपए लगाने का निर्णय लिया?

जवाब: अक्टूबर 2014 में आई ‘कार्तिकेय’ एक सफल फिल्म थी। जब फिल्म के निर्देशक चंदू मोंडेति मेरे पास ‘कार्तिकेय 2’ की स्क्रिप्ट लेकर आए, तो मैं इस फिल्म के स्वरूप के कारण इससे जुड़ना चाहता था। फिल्म ये मेरे ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक बन गया। इस फिल्म में काफी रोमांचक दृश्य हैं, जिसे सभी लोग पसंद करेंगे। ये फिल्म भगवान श्रीकृष्ण और उनकी महानता पर आधारित है। मैं ‘कार्तिकेय 2’ को लेकर हिंदी दर्शकों के पास भी जा रहा हूँ और मुझे विश्वास है कि इसके रोचक विषय के कारण वो इसे पसंद करेंगे।

सवाल: ‘कार्तिकेय 2’ द्वारका और भगवान श्रीकृष्ण के रहस्यों पर आधारित फिल्म है। क्या आपको नहीं लगता कि हमरी संस्कृति और धरोहरों पर कई फ़िल्में बनाई जा सकती थीं। बॉलीवुड ने हमारे वास्तविक इतिहास को नज़रअंदाज़ किया।आप इसके लिए किसे जिम्मेदार मानते हैं?

जवाब: जैसा कि मैंने कहा, ‘कार्तिकेय 2’ मेरे ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। हमने इसका निर्माण एक बड़े स्तर पर किया है। हमारा देश और हमारा सनातन धर्म समृद्ध संस्कृति, धरोहरों, इतिहास और कथाओं का संगम है। ‘कार्तिकेय 2’ भगवान श्रीकृष्ण के रहस्यों और उस द्वारका नगर पर आधारित है, जो आज अरब सागर में डूबा हुआ है। हमारी संस्कृति से कहानियों को कहने के लिए काफी रिसर्च की आवश्यकता होती है और तथ्यों और आस्था के साथ छेड़छाड़ किए बिना इसे कहने की ज़रूरत होती है। ये कठिन है और इसीलिए इस रास्ते पर कोई नहीं चलता। बॉलीवुड ने ऐसी कहानियों को दिखाने से परहेज किया और अब जब परिदृश्य धीरे-धीरे बदल रहा है, हमारी संस्कृति और विरासतों पर आधारित अन्य कहानियाँ भी देखने को मिल सकती हैं।

सवाल: हाल ही में ‘कार्तिकेय 2’ के मुख्य अभिनेता निखिल सिद्धार्थ ने कहा कि हाल की कुछ बॉलीवुड फिल्मों ने हमारी संस्कृति को नीचा दिखाया। क्या आप उनसे सहमत हैं? लोग बॉलीवुड के हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा से गुस्से में हैं। आपका इस विषय में क्या सोचना है?

जवाब: ऐसी कुछ घटनाएँ हुई हैं, जहाँ बॉलीवुड फिल्मों ने हमारी संस्कृति को नीचा दिखाया और जनता की संवेदनाओं को आहत किया। ये सही समय है जब फिल्म निर्माताओं को एहसास होना चाहिए कि लोग अब जागरूक हो गए हैं और उन्हें हमारी संस्कृति और आस्था के प्रति संवेदनशील होना पड़ेगा। हर चीज को बेचने वाला मनोभाव अब नहीं चलेगा।

सवाल: आप ‘मास महाराजा’ के नाम से जाने जाने वाले रवि तेजा की ‘टाइगर नागेश्वर राव’ नाम की एक बहुत बड़ी फिल्म का निर्माण भी कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि उनके पास क्षमता है कि वो प्रभाष और यश जैसे अभिनेताओं की तरह पैन-इंडिया स्टार बनें?

जवाब: रवि तेजा एक ऐसे अभिनेता हैं, जिन्हें तेलुगू का हर दर्शक प्यार करता है। उन्होंने ‘मास महाराजा’ बनने के लिए जो कड़ी मेहनत और जो प्रयास किए हैं, वो प्रशंसनीय है। हालाँकि, किसी अन्य अभिनेताओं के साथ कोई तुलना नहीं है, लेकिन ‘टाइगर नागेश्वर राव’ रवि तेजा को देश के सभी लोगों के करीब लेकर जाएगी।

सवाल: क्या आप इसे लेकर निश्चित हैं कि हिंदी दर्शक TNR को पसंद करेंगे? इस फिल्म के बारे में आप उन्हें क्या कहना चाहेंगे?

जवाब: ‘टाइगर नागेश्वर राव’ एक बायोग्राफिकल फिल्म है, जो 1970 के दशक में स्टुअर्टपुरम के अति-कुख्यात चोरों पर आधारित है। इस कहानी में निश्चित रूप से एक वैश्विक आकर्षण है। निर्देशक वामसी ने जिस तरह से स्क्रिप्ट को तैयार किया है, उसमें हमें इस फिल्म को कई भाषाओं में बनाने का आत्मविश्वास दिया। इस फिल्म का बड़ा स्तर और इसमें जो इमोशंस हैं, वो निश्चित रूप से हिंदी बाजार में भी काम करेंगे।

सवाल: रवि तेजा की हाल की फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर उतनी सफल नहीं रही हैं। वो फ़िलहाल करियर के एक बुरे दौर से गुजर रहे हैं। आपको उनमें और TNR में भरोसा होने के क्या कारण हैं?

जवाब: रवि तेजा एक परिपक्व स्टार हैं और उन्हें कुछ भी साबित करने की ज़रूरत नहीं है। TNR एक ऐसे विषय पर आधारित है, जो रवि तेजा के लिए एकदम नया है और टाइटल रोल को निभाने के लिए वो अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास दे रहे हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि रवि तेजा ‘टाइगर नागेश्वर राव’ और अपनी अगली फिल्मों के साथ अपने सर्वश्रेष्ठ रूप में वापसी करेंगे।

सवाल: आपने ‘द कश्मीर फाइल्स’ की बड़ी सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। ये कैसा अनुभव रहा? उनके बारे में आपको क्या पसंद है?

जवाब: ये मेरे लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मेरी फिल्म की प्रशंसा करना मेरे सबसे बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई वर्षों से हमारे देश की बेहतरी के लिए कड़ी मेहनत और प्रयास कर रहे हैं। उनके प्रयासों का ही प्रतिफल है कि भारत ने वैश्विक पटल के केंद्रबिंदु में जगह बनाई है।

सवाल: आपकी अगली फिल्म ‘कार्तिकेय 2’ आमिर खान की ‘लाल सिंह चड्ढा’ और अक्षय कुमार की ‘रक्षा बंधन’ के साथ बॉक्स ऑफिस पर क्लैश कर रही है। दोनों काफी बड़ी फ़िल्में हैं। आपका इस सम्बन्ध में क्या कहना है? आपको लगता है कि बॉलीवुड के साथ लोगों का गुस्सा आपकी फिल्म के लिए सहायक सिद्ध होगा?

जवाब: चूँकि ये एक फेस्टिवल वीकेंड है, कई फ़िल्में बॉक्स ऑफिस पर क्लैश होने वाली हैं। दर्शक अच्छी सिनेमा और अच्छे कंटेंट को को गले लगाएँगे। सभी फ़िल्में अलग-अलग जॉनर की हैं, इसीलिए ऐसी कोई प्रतियोगिता नहीं है। मैं उस समय रिलीज हो रही सभी फिल्मों को शुभकामनाएँ देना चाहूँगा।

स्मृति ईरानी पर वार के लिए कॉन्ग्रेस ने अपनाए पुराने पैंतरे, बेटी को बनाया निशाना: चुनावी हताशा की लड़ाई लड़ रहे राहुल गाँधी के चुके हुए ‘सिपहसालार’

किसी महिला को नीचा दिखाने का सबसे आसान तरीका क्या है? खासतौर से तब जब उसने किसी विशेष राजनीतिक रूप से ताकतवर व्यक्ति को उसके ही गढ़ में मात दी हो? ऐसे में उसके परिवार, विशेष रूप से उनकी छोटी बेटी को निशाना बनाया जाए और उनके चरित्र पर आक्षेप लगाए जाएँ और यहाँ तक कि ‘संस्कार’ और उसकी परवरिश पर सवाल उठाए जाएँ तो क्या कहा जा सकता है?

दरअसल, स्मृति ईरानी को 2014 से ही जब से उन्होंने राहुल गाँधी को उनके ही गढ़ में चुनौती देने की ‘हिम्मत’ की तब से अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उन पर लगातार स्त्री द्वेषी, सेक्सिस्ट हमले होते रहे हैं, जिनमें से कई यौन उत्पीड़न की श्रेणी में शामिल हैं।

असम राज्य के पूर्व कृषि मंत्री कॉन्ग्रेस नेता नीलामणि सेन डेका आपको याद होंगे। जिन्होंने 2015 में नलबाड़ी में एक जनसभा में कहा था कि कई लोग स्मृति ईरानी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूसरी पत्नी के रूप में संदर्भित करते हैं। एक दूसरे कॉन्ग्रेस नेता ने 2019 में, हुकुमदेव नारायण के साथ ईरानी की एक तस्वीर शेयर करते हुए कहा था कि स्मृति एक “रेप गुरु” के सामने झुक रही है, जबकि राहुल गाँधी को अपनी बलात्कार पर टिप्पणी के लिए माफी माँगने के लिए कहा गया था। तब इंद्राणी मिश्रा ने इशारा किया था कि स्मृति बलात्कार के आरोपित स्वामी चिन्मयानंद को सम्मान दे रही है, जबकि वह वास्तव में अनुभवी सांसद हुकुमदेव नारायण यादव थे।

कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता शशांक भार्गव ने 2020 में एक रैली के दौरान स्मृति ईरानी के खिलाफ यौन शोषण से भरी एक और ऐसी ही टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेना चाहिए। बीते दिनों स्मृति ईरानी हाथों में ढेर सारी चूड़ियाँ लेकर घूमती थीं। वह प्रधानमंत्री की करीबी हैं और उन्हें चूड़ियाँ या और भी बहुत कुछ दे सकती हैं। मैं उनसे अनुरोध करूँगा कि प्रधानमंत्री को उनकी चूड़ियाँ और जो कुछ भी वह चाहते हैं उन्हें उपहार में दें और उनसे कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने के लिए कहें।”

बेशक, अब आम चुनाव में 2 साल से भी कम समय रह गए हैं, ऐसे में कॉन्ग्रेस नेताओं ने भी ‘परिवार’ के प्रति अपने समर्पण को दर्शाने के लिए स्त्री विरोधी हमलों को एक पायदान और ऊपर ले जाने का फैसला किया है। चूँकि वे ईरानी को अपने ठहाकों और तंज से नहीं हिला सकते थे, तो अब उन्होंने एक महिला की कमज़ोरी – उसके बच्चों पर हमला करने की ठानी है।

यह ‘एक महिला को उसकी जगह दिखाने’ का सबसे आसान तरीका, है ना? आखिर उनके प्यारे ‘राजकुमार’ को हराने की एक महिला की हिम्मत कैसे हुई। पवन खेड़ा, जिन्हें राज्यसभा पद के लिए ठुकरा दिया गया था और यहाँ तक कि उनकी अनदेखी की गई थी, वे भी अपनी वफादारी साबित करने के लिए एक बार फिर से मोर्चा सँभालते हुए हमलावर हैं। उन्होंने कहा, “क्या उनकी बेटी, 18 वर्षीय ज़ोइश ईरानी का गोवा में ‘अवैध बार चलाना’ ‘संस्कार’ है?”

इससे पहले कि हम समस्या की तह तक जाएँ। आइए पहले हम कुछ तथ्यों पर सीधे बात करते हैं?

ज़ोइश ईरानी ने 2019 में गोवा में एक सिली सोल रेस्तरां और बार में इंटर्नशिप की, तब वह एक इंटर्न थी। एक इंटर्न बार का मालिक नहीं होती, ठीक उसी तरह जिस तरह पवन खेड़ा के तमाम चाटुकारिता या तपस्याओं के बावजूद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की संभावना नहीं है। इसके अलावा, बार का लाइसेंस रेस्तरां के मालिक एंथनी डी’गामा के नाम पर था। 2021 में उनके निधन पर, उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए लाइसेंस उनके कानूनी उत्तराधिकारी को दिया गया। लेकिन इस साल जब एंथनी डी’गामा के बेटे ने लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया, तो उन्होंने उल्लेख किया कि टाइटल का हस्तांतरण 6 महीने की अवधि में समाप्त हो जाएगा। हालाँकि, गोवा आबकारी आयुक्त ने उन्हें इसके लिए कारण बताओ नोटिस भेजा।

वहीं आरटीआई के जवाब में जिस दस्तावेज के आधार पर कॉग्रेसियों ने ईरानी पर हमला करने का निर्णय लिया है, उसमें जोइश ईरानी या स्मृति ईरानी का बिल्कुल भी जिक्र नहीं है। इसलिए ज़ोइश को विवादों में घसीटा गया क्योंकि अतीत में, जब वह 16 साल की थी, उसने किसी जगह पर इंटर्नशिप की और उस जगह पर, तीन साल बाद, कुछ अनियमितता हो सकती है। लेकिन ज़ोइश की जब वह 16 साल की थी तब की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फ्लैश की गईं। हाँ, वह अभी बेशक 18 साल की हो सकती है, लेकिन तब वह एक नाबालिग लड़की थी।

अब, चीजें यहाँ से अलग मोड़ लेती हैं। सवाल उठाया गया कि ईरानी के ‘संस्कार’ कहाँ थे कि उनकी बेटी ‘अवैध बार’ चला रही है। यहाँ, स्पष्ट इरादा यह बताने का था कि उनकी युवा लड़की ‘एक अवैध बार चला रही थी’, एक ऐसी जगह जो शराब परोसती है। मैं चीजों को पहले ही स्पष्ट कर दूँ कि कोई भी काम, जब तक कि वह अवैध न हो, सम्मान का पात्र है। सिर्फ इसलिए कि एक महिला (जरूरी नहीं कि ज़ोइश) बार में काम करती है या काम करती थी, यह किसी भी तरह से उसके चरित्र का प्रमाण पत्र नहीं है।

देखें कि ‘BAR’ सभी बड़े अक्षरों में कैसा है? इसी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता को कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन संकट के दौर में अपने तथाकथित काम के लिए मानवता के मसीहा के रूप में सम्मानित किया जा रहा था। लेकिन यहाँ वह 18 साल की एक लड़की पर हमला कर रहा है, उसका चरित्र हनन कर रहा है। सोचिए जोइश को किस कदर भावनात्मक आघात का सामना करना पड़ रहा है बस इस बात के लिए कि उसकी माँ ने चुनाव में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी को हराया था।

कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक महिला का अपमान कर राजनीतिक हिसाब चुकता करने से लेकर 18 साल की बेटी के चरित्र हनन तक की डिग्री हासिल कर ली है। यह तब होता है जब पार्टी का नेतृत्व एक महिला (सोनिया गाँधी) सँभाल रही हैं। जिस पार्टी ने भारत को पहला और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री दिया है। वह पार्टी अब इतना नीचे गिर गई है कि एक 18 साल की उम्र की लड़की के बारे में ‘बार’ जोक्स बना रही है। इससे घृणित और कुछ नहीं हो सकता।

कहते हैं राजनीति गंदी जगह है, आखिर वहाँ तो मर्दों की दुनिया है। स्वाभाविक रूप से, एक महिला के लिए न केवल अपने लिए जगह बनाना बल्कि चौथी पीढ़ी के राजनेताओं की तरह वास्तव में शक्तिशाली राजनेताओं को हराना कठिन होता है, जिनके पिता, दादी और परदादा भारत के प्रधान मंत्री रहे हैं। जो यह मानते हुए बड़ा हुआ है कि वह भारत के प्रधानमंत्री की सीट का स्वाभाविक उत्तराधिकारी है।

गौरतलब है कि स्मृति ईरानी ने 2014 के आम चुनावों में अमेठी से तत्कालीन 2 बार के सांसद राहुल गाँधी को टक्कर दी, वो भी एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में जिसने उनके परिवार के कई सदस्यों को लोकसभा भेजा है। राहुल गाँधी चुनाव जीत गए लेकिन ईरानी ने उन्हें कड़ी टक्कर दी। राहुल गाँधी को 46.71% वोट शेयर के साथ 4,08,651 वोट मिले जबकि ईरानी को 34.38% वोट शेयर के साथ 3,00,748 वोट मिले। जबकि पिछले कार्यकाल, 2009 में, राहुल गाँधी को 71.78% वोट शेयर के साथ 4,64,195 वोट मिले थे। इसलिए ईरानी भले ही हार गई हों, लेकिन उन्होंने ‘युवराज’ को कड़ी टक्कर दी थी।

लेकिन स्मृति ईरानी यहीं नहीं रुकी, अगले पाँच वर्षों तक ईरानी ने कड़ी मेहनत की और जब उन्होंने उस वर्ष अमेठी में फिर से राहुल गाँधी को टक्कर दिया, तो उन्होंने न केवल वोटों की संख्या बल्कि वोट शेयर भी बढ़ाया था। ईरानी को 49.71% वोट शेयर के साथ 4,68,514 वोट मिले, जबकि राहुल गाँधी को 4,13,394 वोटों के साथ 43.84% वोट मिले। राहुल गाँधी का वोट शेयर कम हो गया था। राहुल गाँधी ने गहरे में महसूस किया था कि वह अमेठी हार रहे हैं, यही वजह है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए केरल में दूसरी ‘सुरक्षित सीट’ वायनाड को चुना। हाँ, राहुल गाँधी ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था और अपना पारिवारिक गढ़ स्मृति ईरानी से हार गए थे, तब भी उनकी बहन सहित उनकी पार्टी के नेताओं ने उनका मजाक उड़ाया, उपहास किया।

अब जब वे उन पर हमला करके उन्हें नहीं तोड़ पाए हैं, तो वे इसे एक पायदान ऊपर ले गए हैं। उन्होंने एक 18 साल की उम्र की बेटी के प्रति अपमानजनक, घटिया टिप्पणियों, स्त्री द्वेषी हमलों, घृणित और अश्लील ‘बार’ जोक्स को हथियार बनाया है। वे चाहते हैं कि ईरानी टूट जाएँ और इसलिए एक महिला की कमजोरी, उनके बच्चों पर हमला कर रहे हैं। लेकिन ईरानी इतनी आसानी से टूट जाने वालों में नहीं हैं। उन्होंने इस मामले में एक लीगल नोटिस भेजा है और अपना मन बना लिया है कि वह छोड़ेंगी नहीं।

स्मृति ईरानी ने वर्षों से जो धैर्य और दृढ़ संकल्प दिखाया है, उम्मीद है उसकी झलक उनके बच्चों में भी पैदा हुई है और वे बड़े होकर अपनी माँ की तरह उतने ही मजबूत होंगे। और ईरानी खुद इस बार 2024 में न सिर्फ अमेठी बल्कि वायनाड से भी चुनाव लड़ेंगी और दोनों सीटों से विजयी होंगी।

लखनऊ के लुलु मॉल के बाद अब मेरठ के मॉल में पढ़ी गई नमाज, वीडियो आया सामने: DGP ने स्थानीय पुलिस से माँगा जवाब

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लुलु मॉल के बाद मेरठ के एक मॉल में नमाज पढ़ने का मामला सामने आया है। रविवार (24 जुलाई, 2022) से मेरठ के मॉल में नमाज पढ़े जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वीडियो मेरठ के सोहराब गेट स्थित मॉल का बताया जा रहा है। इसमें एक युवक नमाज पढ़ते हुए दिखाई दे रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद डीजीपी ने पूरे मामले पर मेरठ पुलिस से जवाब तलब किया है।

भाजपा के आईटी विभाग के जिला संयोजक दिग्विजय सिंह ने मेरठ पुलिस, डीजीपी, डीएम सहित कुछ अन्य लोगों को टैग करते हुए ट्वीट किया है। उन्होंने लिखा कि लखनऊ के लुलु मॉल की तरह गढ़ रोड स्थित सोहराब गेट बस स्टेशन के पास एस-टू-एस स्क्वायर कांप्लेक्स में भी खुले में नमाज पढ़ी जा रही है।

इस मामले को लेकर नौचंदी थाने के इंस्‍पेक्‍टर ने बताया कि मामले की जाँच की जा रही है। पुलिस मॉल में नमाज पढ़ने वाले की तलाश में जुट गई है। यह वीडियो 35 सेकंड का है, जिस समय व्यक्ति नमाज पढ़ रहा था, उसी समय किसी ने उसका वीडियो बना लिया।

गौरतलब है कि 12 जुलाई को, लुलु मॉल में नमाज पढ़ने का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद से शहर में नया खुला ये शॉपिंग मॉल विवादों आ गया था। हिन्दू संगठनों ने कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए उसी जगह पर हनुमान चालीसा, सुन्दरकाण्ड और गायत्री मंत्र पढ़ने की अनुमति देने की माँग की थी। नमाज के विरोध में हिन्दू महासभा ने मॉल के गेट पर प्रदर्शन भी किया था। वहीं मॉल में नमाज पढ़ने वालों पर मॉल के जन संपर्क अधिकारी सिब्तैन हुसैन की शिकायत पर FIR दर्ज कर की थी।

इसके बाद लुलु मॉल में नमाज पढ़ने और उसका वीडियो बनाने वाले 9 नमाजियों में से 4 को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तब से वामपंथी-लिबरल गिरोह इसे रोज नया मोड़ देते हुए कई मनगढंत दावे कर रहे हैं। यहाँ तक कि नमाजियों को भी हिन्दू साबित करने की न सिर्फ कोशिश हुई बल्कि खूब प्रोपेगेंडा फैलाया गया।

‘सशस्त्र बलों की योजना में राष्ट्रपति से परामर्श नहीं करती सरकार’: TMC नेता साकेत गोखले की RTI खारिज, फिर भी फैला रहे झूठ

तृणमूल कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता साकेत गोखले (Saket Gokhale) ने अग्निपथ योजना को लेकर दाखिल की गई आरटीआई के खारिज होने के बाद अपने भ्रामक दावों से जनता को गुमराह करने की कोशिश की। साकेत गोखले ने सोमवार (25 जुलाई 2022) को सिलसिलेवार कई ट्वीट कर अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के बारे में सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाई। टीएमसी नेता ने दावा किया कि केंद्र सरकार सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों में राष्ट्रपति से परामर्श नहीं करती है।

उन्होंने अपने ट्वीट में राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा भेजे गए एक आरटीआई और उसके जवाब को साझा करते हुए दावा किया, “सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रपति से परामर्श नहीं किया जाता है। यह भारत के राष्ट्रपति का अपमान है।”

टीएमसी के प्रवक्ता साकेत गोखले का ट्वीट

साकेत गोखले के भ्रामक दावे

गोखले ने 21 जून को भारत के राष्ट्रपति कार्यालय में अवर सचिव (RTI) को एक RTI भेजकर अग्निपथ योजना की जानकारी माँगी थी। उन्होंने कार्यालय से पूछा था कि क्या सेना में भर्ती के लिए हाल ही में शुरू की गई अग्निपथ योजना के लिए भारत सरकार या मंत्रिपरिषद द्वारा राष्ट्रपति से परामर्श किया गया था। उन्होंने आगे इस मामले पर भारत के राष्ट्रपति और राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा भारत सरकार से प्राप्त और भेजी गई सभी फाइलों की प्रतियाँ माँगी।

टीएमसी के साकेत गोखले ने आरटीआई दाखिल की। फोटो साभार: साकेत गोखले/ट्विटर

गोखले ने दावा किया कि मोदी सरकार ने आरटीआई का जवाब देने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी जानकारी सार्वजानिक करने से भारत की संप्रभुता और अखंडता प्रभावित होगी। गोखले के अनुसार, यह तर्क बेहद अजीब था। उन्होंने आगे दावा किया कि मोदी सरकार सशस्त्र बलों से संबंधित मामलों पर भारत के राष्ट्रपति से परामर्श नहीं करती है और जानकारी छिपाती है।

साकेत गोखले ने दावा किया कि केंद्र सरकार सशस्त्र बलों के मामलों में राष्ट्रपति से परामर्श नहीं करती है। फोटो साभार: ट्विटर

भारत सरकार ने सूचना को सार्वजनिक करने से किया इनकार

उनके ट्वीट को देखकर ऐसा लगता है कि राष्ट्रपति कार्यालय ने उनके आरटीआई आवेदन को सैन्य मामलों के विभाग को भेज दिया था, जिसने इसे खारिज कर दिया था। आवेदन को आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (ए) के तहत खारिज कर दिया गया था, जिसमें कहा गया है, “इस सूचना को सार्वजनिक किए जाने से भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ सम्बंधों, रणनीति, वैज्ञानिक और आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”

आरटीआई को खारिज करते हुए सैन्य मामलों के विभाग द्वारा भेजा गया जवाब। फोटो साभार: साकेत गोखले/ट्विटर

बता दें कि साकेत गोखले आरटीआई दाखिल कर सशस्त्र बलों में भर्ती के संबंध में गोपनीय दस्तावेज माँग रहे थे। यह स्पष्ट है कि रक्षा विभाग द्वारा ऐसी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती है, क्योंकि यह गलत हाथों में जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि जवाब में कहीं भी सैन्य मामलों के विभाग ने यह नहीं कहा कि नई भर्ती योजना के बारे में भारत के राष्ट्रपति से सलाह नहीं ली गई थी, लेकिन जानकारी साझा नहीं कर के गोखले बिना सोचे समझे इस नतीजे पर पहुँचे कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति से परामर्श नहीं किया था।

‘नए युग के कर्ण किसी भी अन्य नागरिक की तरह गरिमा से जी सकते हैं’: ID में माँ का नाम भी चलेगा, केरल हाई कोर्ट का आदेश

केरल हाई कोर्ट (Kerala High Court) ने एक अहम फैसला सुनाया है। कहा है कि दस्तावेजों में पिता का नाम होना जरूरी नहीं है। कोई व्यक्ति चाहे तो वह केवल अपनी माँ का नाम भी लिख सकता है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति को जन्म प्रमाण-पत्र, पहचान प्रमाण-पत्र और अन्य दस्तावेजों में केवल अपनी माँ का नाम शामिल करने की अनुमति दे दी है।

न्यायमूर्ति पीवी कुन्हीकृष्णन ने कहा कि किसी अविवाहित माँ का बच्चा भी इस देश का नागरिक है। कोई भी संविधान के तहत दिए गए उसके किसी भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता। कोर्ट ने 19 जुलाई को जारी आदेश में कहा है, “अविवाहित माताओं के बच्चे और बलात्कार पीड़िता के बच्चे भी इस देश में निजता, स्वतंत्रता और गरिमा के मौलिक अधिकारों के साथ रह सकते हैं। कोई भी उनके जीवन में दखल नहीं दे सकता। अगर ऐसा होता है तो इस देश का संवैधानिक न्यायालय उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करेगा।”

सुनवाई के दौरान जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने महाभारत के कर्ण का जिक्र करते हुए कहा, “हम एक ऐसा समाज चाहते हैं जिसमें कर्ण की तरह किसी को अपमानित नहीं होना पड़े। हमारा संविधान और संवैधानिक न्यायालय उन सभी की रक्षा करेंगे। नए युग के कर्ण किसी भी अन्य नागरिक की तरह गरिमा और गर्व के साथ जी सकते हैं।’’

याचिकाकर्ता की माँ अविवाहित थीं। याचिकाकर्ता के पिता का नाम उसके तीन दस्तावेजों में अलग-अलग था। अदालत ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रार को कार्यालय में याचिकाकर्ता के संबंध में जन्म रजिस्टर से पिता के नाम को हटाने और केवल माता के नाम के साथ एकल अभिभावक के तौर पर प्रमाण-पत्र जारी करने का आदेश दिया है।

अविवाहित माताओं और बलात्कार पीड़िता के बच्चों की पीड़ा को स्वीकार करते हुए जस्टिस कुन्हीकृष्णन ने कहा, “देश को नागरिकों के सभी प्रकार के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए। वरना उन्हें अकल्पनीय मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा। एक अविवाहित माँ का बच्चा भी हमारे देश का नागरिक है। कोई भी उसके मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता है। वह न केवल अविवाहित माँ का बेटा/बेटी है बल्कि इस महान देश भारत की संतान भी है।”

‘गुस्ताख़-ए-नबी की एक सज़ा, सर तन से जुदा’: पिता को आया मैसेज, फिर रेलवे ट्रैक पर मिला बेटे का शव, पहले बताया जा रहा था सुसाइड

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नजदीक मिडघाट सेक्‍शन में भोपाल-नर्मदापुरम रेलवे ट्रैक पर रविवार (24 जुलाई 2022) को B.Tech के छात्र का शव मिला। युवक की पहचान निशांक राठौर (20) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है घटनास्थल मिडघाट बरखेड़ा के पास उसकी स्कूटी और मोबाइल भी पुलिस को मिला है। अब छात्र की मौत का राज गहराता जा रहा है। 

दरअसल, छात्र के नाम से बनी इंस्टाग्राम ID से उसके पिता और दोस्तों के व्हट्सएप पर घटना वाली रात ही एक स्क्रीनशॉट आया था। इसमें छात्र की फोटो के साथ लिखा था- ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक ही सजा, सिर तन से जुदा।’ इस पोस्ट ने मामले को और पेचीदा कर दिया। पहले तो पुलिस इसे आत्महत्या के रुप में देख रही थी लेकिन अब इस पोस्ट ने मौत के राज को उलझा दिया है। बताया जा रहा है कि यह मैसेज छात्र की मौत के कुछ समय बाद ही मृतक के दोस्तों और पिता को मिला।

उन्होंने तुरंत टीटी नगर थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। ठीक उसी समय रायसेन पुलिस को भी रेलवे ट्रैक पर डेडबॉडी मिलने की सूचना मिली। मीडिया रिपोर्टों में दो वायरल मैसेज को लेकर बात की जा रही है। जिसमें से एक में निशांक राठौर नाम के स्टेटस पर धार्मिक पोस्ट होने की बात बताई जा रही है। हालाँकि इसकी पुष्टि होनी बाकी है।

हालाँकि, टीटी नगर TI चैन सिंह रघुवंशी ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में मामला आत्महत्या का ही लग रहा है। अब तक की जाँच में पता चला है कि छात्र शेयर बाजार में निवेश करता था। आशंका जताई जा रही है कि इसमें उसे घाटा लगा और उसने तनाव में आकर आत्महत्या कर ली। हालाँकि सारी स्थिति पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की जाँच के बाद ही साफ होगी। 

पुलिस ने जाँच की तो मृतक की पहचान सिवनी मालवा निवासी 20 वर्षीय निशांक राठौर के रुप में हुई। निशांक ओरियंटल कॉलेज में B.Tech 5th सेमेस्टर का स्टूडेंट था। वह दो साल तक इंद्रपुरी में हॉस्टल में रहा। हाल ही में हॉस्टल छोड़कर जवाहर चौक शास्त्री नगर में दोस्तों के साथ रह रहा था। निशांक ने अपनी फेसबुक प्रोफाइल में खुद को नोएडा में सॉफ्टवेयर डेवलपर बताया है। छात्र दो बहनों में इकलौता भाई था। पुलिस पूछताछ में पता चला कि छात्र के मोबाइल, इंस्टाग्राम, फेसबुक ID की जानकारी उसके एक दोस्त प्रखर को ही थी। पुलिस प्रखर से पूछताछ कर रही है।

मृतक के चचेरे भाई शशांक ने पुलिस पूछताछ में बताया कि निशांक रविवार को दोपहर तीन बजे साकेत नगर परीक्षा केंद्र में एग्जाम देने आई बड़ी बहन से मिलने निकला था। उसी रात करीब 8 बजे पिता और दोस्तों को निशांक के मोबाइल से उसका फोटो लगा मैसेज आया। मैसेज देखकर वे तुरंत टीटी नगर थाने पहुँचे और उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई। लेकिन इसी बीच रायसेन पुलिस उसका शव बरखेड़ा इलाके के रेलवे ट्रैक से बरामद कर चुकी थी। सीसीटीवी फुटेज की जाँच में पता चला कि निशांक अकेले ही स्कूटी से घटनास्थल तक गया है।

मुस्लिम बढ़ते गए, सरकारी स्कूलों में घुसता गया ‘मदरसा राज’: झारखंड के 5 जिलों में 70 स्कूल ऐसे जहाँ जुमे पर छुट्टी, प्रार्थना का स्टाइल बदला

झारखंड में बीते दिनों सरकारी स्कूलों को उर्दू स्कूलों में तब्दील किए जाने के कई मामलों ने प्रशासन के कान खड़े कर दिए थे। सामने आया था कि प्रदेश में जहाँ मुस्लिम बहुल इलाके हैं वहाँ जनसंख्या के आधार पर स्कूलों के नियम तय हो रहे हैं। अगर किसी स्कूल के बाहर उर्दू लिख दिया गया तो मतलब उसे उर्दू स्कूल मान लिया गया और वहाँ मुस्लिमों के हिसाब से छुट्टी का दिन और प्रार्थना का ढंग बदल दिया गया। 

पिछली रिपोर्ट्स में कई ऐसे स्कूलों और जगहों के नाम और वहाँ किए गए मनमाने बदलाव का खुलासा हुआ था। हालाँकि अब पता चला है कि झारखंड के मात्र 5 जिलों में ही 70 स्कूल ऐसे मिले हैं जो सामान्य से उर्दू स्कूल बनाए गए। इनमें 43 तो अकेले जामताड़ा में हैं जबकि बाकी के गढ़वा, पलामू, गुमला और राँची में हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट बताती है कि खुलासा होने के बाद भी कोई सुधार नहीं देखने को मिला। हालात वही के वही हैं। छुट्टी भी शुक्रवार ही होती है और प्रार्थना भी वही कराई जाती है जो बहुसंख्यक आबादी चाहे।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, अपनी पड़ताल से उन्हें पता चला कि सरकार के पास अधिसूचित उर्दू स्कूलों की संख्या तक नहीं है और न ही सामान्य स्कूलों को उर्दू स्कूल बनने से रोकने के लिए कोई मैकेनिज्म है। यही वजह है कि जहाँ-जहाँ मुस्लिम आबादी बढ़ती गई वहाँ सामान्य स्कूल भी उर्दू स्कूल में परिवर्तित कर दिए गए और किसी ने सवाल तक नहीं खड़ा किया। अब हालात ये है कि सरकार सख्ती करना चाहती है। लेकिन लोग डटे हुए हैं कि अगर उन्होंने स्कूलों के आगे उर्दू लिख दिया तो वो अब नहीं हटेगा।

जामताड़ा का अलगचुआं स्कूल ऐसा ही एक स्कूल जिसे वहाँ की आबादी ने उर्दू स्कूल बनाया है। वहाँ के अलीमुद्दीन अंसारी ने कहा कि उनकी पंचायत में 90 फीसद मुस्लिम हैं और स्कूल में भी सिर्फ मुस्लिम बच्चे ही पढ़ते हैं इसलिए उन्हें व्यवस्था को बदले जाने से आपत्ति है। दुमका जिले के मध्य विद्यालय छालापाथर को भी उर्दू लिखकर उर्दू स्कूल बनाया गया। यहाँ के बच्चे हाथ बाँधकर प्रार्थना करते हैं और हेडमास्टर मो जहाँगीर सफाई देते हैं कि उनके स्कूल में लंबे समय से ऐसे ही प्रार्थना होती आई है।

कुछ स्कूलों के हेडमास्टर ने इस तरह सामान्य स्कूलों के उर्दू स्कूल में परिवर्तित किए जाने पर कहा कि संथाल सहित पूरे झारखंड में कई इलाके हैं जहाँ मुस्लिम आबादी जब-जब बढ़ी तो उन लोगों ने विद्यालय प्रबंधन समिति को विश्वास में लेकर स्कूल के आगे उर्दू जुड़वा दिया और फिर यू-डायस पर भी इसे बदलवा दिया गया। इसके बाद रविवार की जगह शुक्रवार की छुट्टी यहाँ नियम बन गई और प्रार्थना हाथ जोड़कर होने की बजाय हाथ बाँधकर की जाने लगी।

कैटरीना कैफ ‘वाइफ’, शादी की मॉर्फ्ड फोटो… विक्की कौशल और उनकी पत्नी को धमकी देने वाला गिरफ्तार: पीछे पड़ा था स्ट्रगलिंग एक्टर

बॉलीवुड अभिनेता विक्की कौशल (Vicky Kaushal) और उनकी अभिनेत्री पत्नी कैटरीना कैफ (Katrina Kaif) को ऑनलाइन धमकी देने वाले शख्स को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मीडिया रिपोर्टों में आरोपित की पहचान मनविंदर सिंह के तौर पर बताई गई है। कहा गया है कि मनविंदर स्ट्रगलिंग एक्टर है और कैटरीना के लिए एकतरफा प्यार में पागल है।

जान से मारने की धमकी मिलने के बाद विक्की कौशल ने मुंबई के संताक्रूज़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने आरोपित की पकड़ लिया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506(2), 354(D) और आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत मामला दर्ज किया था।

बॉलीवुड कपल को इंस्टाग्राम के जरिए धमकी दी गई थी। विक्की कौशल के अनुसार आरोपित उनकी पत्नी यानी कैटरीना कैफ को काफी समय से स्टॉक कर रहा था। उन्होंने समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं माना। उन्हें धमकियाँ देने लगा।

लखनऊ के रहने वाले मनविंदर ने इंस्टाग्राम पर अपना नाम King Aditya Rajput??VVIP लिख रखा है। कैटरीना को अपनी वाइफ और गर्लफ्रेंड बताया है। कैटरीना के साथ मॉर्फ्ड फोटो लगा रखी है। कैटरीना की शादी की फोटो को एडिट करते हुए विक्की कौशल की जगह अपना चेहरा लगा रखा है। इतना ही नहीं कैप्शन में कैटरीना कैफ की आईडी को टैग कर एक्ट्रेस संग अपनी शादी की बात कही है।

आरोपित का इंस्टाग्राम अकाउंट

गौरतलब है कि विक्की कौशल और कैटरीना कैफ ने पिछले साल 9 दिसंबर को शादी की थी। हाल ही में यह जोड़ा करीबी दोस्तों के साथ मालदीव गया था। यहाँ 16 जुलाई को कैटरीना ने अपना 39वाँ जन्मदिन सेलिब्रेट किया था। दोनों सितारों की वहाँ से कई तस्वीरें भी सामने आई थी।

इससे पहले हाल ही में अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) और उनके अब्बा सलीम खान को एक पत्र के ज़रिए जान से मारने की धमकी मिली थी। इस मामले में सलमान खान की ओर से पुलिस में शिकायत दी गई थी। बीते दिनों सलमान खुद मुंबई के पुलिस कमिश्नर से मिले थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने गन लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया है।

इसी तरह पिछले साल बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को जान से मारने की धमकी मिली थी। उन्होंने उस समय किसानों के प्रदर्शन को लेकर कुछ पोस्ट किए थे। इसके उन्हें धमकी मिली थी जिसकी शिकायत उन्होंने हिमाचल प्रदेश पुलिस से की थी।