Home Blog Page 2527

शाहरुख खान ‘दरियादिल’, वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO प्लांट के लिए ‘दान’ किए ₹23 लाखः वायरल दावे की हकीकत क्या

बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को लेकर रविवार (31 जुलाई 2022) को कई ट्वीट वायरल हुए। इनमें दावा किया जा रहा था कि अभिनेता ने गुजरात के वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO (Reverse 0smosis) प्लांट के लिए 23 लाख रुपए ‘दान’ दिए हैं। इस वायरल दावे को कई वेरिफाइड ट्विटर अकाउंट से भी ट्वीट किया गया।

टाइम्स ग्रुप के बॉम्बे टाइम्स ने सबसे पहले ट्वीट किया था कि शाहरुख खान ने वडोदरा रेलवे स्टेशन पर RO प्लांट के लिए 23 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसके बाद देखते ही देखते कई लोगों ने इसे ट्वीट करना शुरू किया और दावा किया कि खान ने पैसे ‘दान’ किए हैं।

एक ट्वीट में दावा किया गया शाहरुख ने RO प्लांट के लिए 23 लाख रुपए ‘दान’ किए

राहुल कुमार पांडे ने अपने वेरिफाइड ट्विटर हैंडल ने ट्वीट करते हुए बताया कि किस तरह से खान वडोदरा में अधिकारियों के संपर्क में आए और जब उन्हें ‘पानी की कमी’ के बारे में पता चला तो उन्होंने रेलवे स्टेशन पर एक RO प्लांट दान करने का फैसला किया। शाहरुख खान के अन्य प्रशंसकों ने भी इसे बढ़-चढ़कर ट्वीट किया।

इसमें उनके पाकिस्तान के फैन्स भी शामिल हो गए।

हालाँकि मामला कुछ और लग रहा है।

दरअसल 23 जनवरी 2017 को शाहरुख खान ट्रेन से फिल्म ‘रईस’ का प्रमोशन करने गुजरात पहुँचे थे। इसी दौरान वडोदरा स्टेशन पर शाहरुख को देखने के लिए हजारों की भीड़ जमा हो गई। जैसे ही ट्रेन रुकी, शाहरुख ने भीड़ में एक टी-शर्ट और एक गेंद फेंक दी। इससे भगदड़ मच गई।

ट्रेन यहाँ पर 10 मिनट रुकी थी। भीड़ उस समय बेकाबू हो गई जब ट्रेन स्टेशन से रवाना होने लगी। शाहरुख को देखने की कोशिश कर रहे लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरने लगे। भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। जैसे-जैसे ट्रेन आगे बढ़ रही थी लोग भी उसके साथ चल रहे थे। भीड़ बेकाबू होने से एक शख्स की मौत हो गई। वहीं भीड़ को नियंत्रित करने में दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।

इसके बाद वडोदरा कोर्ट में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि इस घटना के लिए शाहरुख खान जिम्मेदार हैं। अदालत ने उन्हें रेलवे अधिनियम के तहत जल्दबाजी और लापरवाही बरतने के लिए समन भी जारी किया था। इसके बाद शाहरुख ने अपने खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाई कोर्ट ने इस मामले में एफआईआर और मजिस्ट्रेट कोर्ट से जारी समन रद्द करते हुए शाहरुख खान के वकील से पूछा था कि क्या वह स्टेशन पर एक आरओ प्लांट लगा सकते हैं जिससे आने वाले समय में लोगों की मदद कर सकता है। शाहरुख की तरफ से उनके वकील ने इसके लिए रजामंदी जताई थी।

हालाँकि अभी तक, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने जो RO प्लांट लगाने की बात कही थी, वह वडोदरा रेलवे स्टेशन पर चालू है या नहीं। लेकिन ऐसा तो नहीं लग रहा कि शाहरुख खान ने नेकदिली/दरियादिली का परिचय देते हुए RO प्लांट के लिए ‘दान’ दिया है, क्योंकि कोर्ट ने उनसे ऐसा करने के लिए कहा था।

112 दिन बाद पकड़ा गया खरगोन का मुख्य दंगाई समीर उल्ला, गैंग में हैं 150 अपराधी: मांस का कारोबार, सरकार को चूना लगा कर चलाते हैं अवैध वाहन

मध्य प्रदेश पुलिस ने के खरगोन जिले में 10 अप्रैल 2022 की रामनवमी पर हुए दंगे के मुख्य आरोपित समीर उल्ला और उसके भाई वली उल्ला को 112 दिनों के बाद गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित समीर उल्ला पर रासुका (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है। समीर उल्ला पर प्रशासन की तरफ से 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था। वह पेशेवर अपराधी था जो साल 2016 से अपराध में सक्रिय था। यह गिरफ्तारी रविवार (31 जुलाई 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समीर उल्ला ने रामनवमी पर मुस्लिमों की भीड़ को जमा किया था। इसी के साथ उसी ने पथराव की शुरुआत की भी थी। वह खरगोन के मोहन टाकीज क्षेत्र का रहने वाला है। साल 2016 से वह लगातार अपनी गैंग बना कर साम्प्रदायिक तनाव फैलाने की फिराक में रहता था। आरोपित पर कुल 11 केस पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं। खरगोन थाने की गुंडा लिस्ट में भी उसका नाम है और 13 अक्टूबर, 2021 में उसको प्रशासन द्वारा जिला बदर भी किया गया था।

एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित समीर उल्ला की गिरफ्तारी आगरा मुंबई नेशनल हाईवे पर खलटाका बालसमुद के बीच में हुई है। उसका इलाके में नाम भाई साहब था। उसकी गैंग का नाम ‘मिम’ था जिसमें उसका भाई वसी उल्ला भी शामिल था। उसकी भी गिरफ्तारी रविवार को ही की गई है। वली उल्ला को शरण देने वाले इंदौर निवासी सादिक शेख नाम के व्यक्ति की भी गिरफ्तारी हुई है।

समीर उल्ला की मिम गैंग में लगभग 150 अपराधी शामिल थे। ये सभी मांस के अवैध कारोबार के साथ रोडवेज को चूना लगा कर अवैध रूप से वाहन भी चलवाते थे। पुलिस ने आरोपित को इंदौर जेल भेजा है। पुलिस के मुताबिक उसका रिमांड ले कर उसके बाकी काले धंधों की जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस के मुताबिक रामनवमी हिंसा में नामजद किए गए कुल 450 नामजद आरोपितों में से अब तक 300 की गिरफ्तारी की जा चुकी है। बाकी फरार आरोपितों की तलाश में टीमें काम कर रही हैं।

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 2022 को खरगोन में रामनवमी के दिन हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में न सिर्फ हिन्दुओं की शोभा यात्रा पर पथराव हुआ था बल्कि कई हिन्दुओं के घरों में आगजनी और लूटपाट की गई थी। मामले को नियंत्रित कर रहे जिले के पुलिस अधीक्षक के पैर में भी दंगाइयों ने गोली मार दी थी।

‘काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ’: हाई कोर्ट जज का वायरल Video, जानिए क्या है मामला

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक जस्टिस एक मुस्लिम लड़की के हिन्दू बनने पर काफी नाराजगी जता रहे हैं। इसी वीडियो में जज साहब लड़के के मुस्लिम बनने की सलाह दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने लड़की के हिन्दू बनने को ‘फ्रॉड’ बताया और इसे खुद स्वीकार करने पर ‘समाज का क्या होगा’ जैसी टिप्पणी की है।

लेखिका शेफाली वैद्य ने 30 जुलाई 2022 को इस वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “पहले मुझे लगा कि यह किसी फिल्म का सीन है लेकिन यह असली निकला। मुझे बताया गया कि ये मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस रोहित आर्य है।” शेफाली ने लोगों से अपनी बातों की पुष्टि करने के लिए भी कहा है।

शेफाली वैद्य के अलावा स्वाति गोयल शर्मा, रितु सत्य साधक, योगी योगेश अग्रवाल, रितेश झा आदि ने अपने-अपने ट्विटर हैंडलों से इसे शेयर किया है। इस वीडियो में 2 न्यायाधीश एक साथ बैठे दिखाई दे रहे है। उनमें से एक ने कहा, “ये तमाशा हम स्वीकार नहीं करेंगे। ये अभी जेल जाएगा। तुम काजी के पास जाओ और मुस्लिम बन जाओ। वही ज्यादा अच्छा है। फ्रॉड कर के उसका धर्मांतरण कर दिया, ये कोई तरीका है? किसी मुस्लिम को हिन्दू बना रहे हो, मज़ाक बात है?”

यह सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ में 18 जनवरी 2022 हो हुई थी। इस बहस का मूल आधार मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले की एक मुस्लिम लड़की को आर्य समाज मंदिर में हिन्दू धर्म स्वीकार करवाने को ले कर था। जस्टिस रोहित आर्य ने तब आर्य समाज मंदिरों द्वारा कराए जाने वाले वाले धर्म परिवर्तन पर सवाल खड़े किए थे। मामले की जवाबदेही तय करने के लिए गाजियाबाद स्थित आर्य समाज मंदिर को नोटिस भी जारी हुआ था। वीडियो में दिखाई दे रहे दूसरे न्यायाधीश का नाम जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव है।

ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला

जब ऑपइंडिया ने इस वीडियो की पड़ताल की, तब यह वीडियो 2 हिस्सों में लगभग 27 मिनट का मिला। इसे 19 और 20 जून 2022 को ‘Be a Judge’ नाम के फेसबुक पेज पर शेयर किया है।

पहले वीडियो में जस्टिस रोहित आर्य ने दिल्ली से आए एक वकील को पहले बोलने पर टोका। इस वीडियो में हुई बहस के मुताबिक, केस एक मध्य प्रदेश की मुस्लिम लड़की के अपहरण का था जिसका आरोप एक हिन्दू लड़के पर था। लड़की को पुलिस ने बरामद कर लिया था, जिसने अपने अम्मी-अब्बू के साथ जाने से मना कर दिया था। लड़की लगातार उस लड़के के साथ जाने की जिद पर अड़ी थी, जिस पर उसके अपहरण का आरोप था।

लड़की ने बाद में गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर में धर्म परिवर्तन कर लिया। इसे लड़की के परिजनों ने अवैध धर्मांतरण बता कर लड़की को लड़के के घर जाने से रोकने की माँग की थी। इस बहस में जस्टिस रोहित आर्य को एक बार कहते सुना गया कि ‘बिलकुल सही बात है।’

इसी बहस के बीच में 5:30वें मिनट पर जस्टिस रोहित आर्य ने SSP को कुल पुलिस फ़ोर्स उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मामले में कुछ फ्रॉड की आशंका दिखाई दे रही है। इसी क्रम में उन्होंने लड़की को हिन्दू बनाने वाले गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर को मात्र एक ट्रस्ट डीड बना कर रखने वाला बताया। जज ने आर्य समाज मंदिर के वकील से पहले मंदिर की प्रमाणिकता साबित करने को कहा।

वीडियो के 9वें मिनट में हिन्दू युवक के वकील ने लड़की को सरकारी नारी निकेतन से खुद के हवाले करने की माँग की, तब जज रोहित आर्य ने लड़के को मुस्लिम बनने की सलाह दी। लड़के के वकील ने सवाल भी किया कि लड़की बालिग है और लड़का मुस्लिम बन कर क्या करेगा तब जज ने कहा, “जो तुम समझो। इसमें हम काजी को भी बुलवाएँगे। ये मामूली बात नहीं है।” इसके बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसके बाद की बहस वीडियो के दूसरे पार्ट में है:

वीडियो के शुरुआत में आर्य समाज मंदिर के वकील ने कहा, “लड़की का धर्म हमने नहीं बदलवाया। ऐसा उसने खुद से किया है। लड़की खुद आर्य समाजी बनी है।” इस पर जज रोहित आर्य ने कहा, “ऐसे नहीं होता। कल आप ऐसे ही हिन्दू को मुस्लिम भी बनाने का काम शुरू कर दोगे। ये गोरखधंधा बंद करो।” आर्य समाज मंदिर के वकील ने कहा कि अगर कोर्ट इसे गैर कानूनी कह दे तो हम इसे बंद कर देंगे। इसके जवाब में जज रोहित आर्य ने इसे 100% गैर कानूनी बताया। जज रोहित आर्य ने कहा, “आप कोई भी धर्म पालन करो, उसके अपने भी कुछ नियम होते हैं।”

बहस के चौथे मिनट पर जज रोहित आर्य ने धर्म परिवर्तन के मामले में मुस्लिम कानूनों की नियमावली भी तलब करवाई। उन्होंने आर्य समाज मंदिर के कागजातों की जाँच करने के भी आदेश दिए। जज रोहित आर्य ने बहस के अंत में इस मामले में एक सीनियर वकील फैज़ल को नियुक्त किया। जज के मुताबिक “फैज़ल इस केस की सुनवाई में ‘पवित्र कुरान’ के नजरिए से सहयोग करेंगे।”

‘भाई संजय राउत जेल आ रहे हो तो मेरे लिए 4 कच्छे लेते आना’: शिवसेना MP की गिरफ्तारी पर नवाब मलिक का ट्वीट, जानिए सच

शिवसेना प्रवक्ता और सांसद संजय राउत को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रविवार (31 जुलाई 2022) को पात्रा चॉल घोटाले में गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद नवाब मलिक के नाम से एक ट्वीट वायरल होने लगा। इसमें एनसीपी नेता ने कथित तौर पर संजय राउत से अपने लिए अंडरवियर लेकर जेल आने की गुहार लगाई हैं।

एनसीपी नेता मलिक के नाम से वायरल ट्वीट के स्क्रीनशॉट में लिखा है, “भाई संजय राउत अगर आर्थर रोड जेल आ रहे हो तो, मेरे लिए जॉकी के XXL साइज के चार कच्छे ले आना।” स्क्रीनशॉट में ट्वीट की तारीख 31 जुलाई 2022 और समय शाम के सात बजकर 50 मिनट बताई गई है।

वायरल हो रहे ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सच्चाई का पता लगाने के लिए हमने नवाब मलिक के ट्विटर आईडी के यूजरनेम का इस्तेमाल कर माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर कीवर्ड और ट्विटर हैंडल के यूजरनेम (<कीवर्ड> (From: <ट्विटर हैंडल का यूजरनेम>) से सर्च किया। हालाँकि हमें इस सर्च से कोई रिजल्ट नहीं मिला। 

सर्च करने पर हमें यह रिजल्ट मिला

नवाब मलिक के कथित ट्वीट को राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के किसी अन्य राजनेता ने भी शेयर नहीं किया। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि मलिक कुछ समय से जेल में हैं। इस दौरान शायद उन्हें अपना फोन इस्तेमाल करने की भी इजाजत नहीं होगी। ऐसे में मलिक इस तरह का अनुरोध संजय राउत से करें, यह संभव नहीं दिखता। इसकी भी संभावना नहीं है कि जेल अधिकारी कैदियों को अंडरवियर शेयर करने की अनुमति दें।

नवाब मलिक के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से आखिरी ट्वीट 23 फरवरी 2022 को किया गया था। इसी दिन एनसीपी नेता को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह आर्थर रोड जेल में बंद हैं। उन पर दाऊद इब्राहिम के करीबी से संपत्ति खरीदने का आरोप हैं। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की भी ईडी जाँच कर रही है। ईडी की टीम ने 23 फरवरी की सुबह उनके घर पर छापेमारी की थी और फिर उन्हें अपने साथ ले आई थी। यहाँ पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। ये गिरफ्तारी ‘मनी लॉन्ड्रिंग मामले में और दाऊद से कनेक्शन’ पर चली 8 घंटे की पूछताछ के बाद हुई थी। दूसरी तरफ शिवसेना नेता संजय राउत को पात्रा चाल घोटाला मामले में उनकी कथित संलिप्तता के आरोप में 31 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

निष्कर्ष: स्क्रीनशॉट फर्जी है।

पक्के का सपना दिखा 672 परिवारों के सिर से टीन का भी छत छीना, 9 बिल्डर को 47 एकड़ जमीन बेच ₹1034 करोड़ बनाए: पात्रा चॉल स्कैम में संजय राउत क्यों गिरफ्तार

शिवसेना सांसद संजय राउत के कारण पात्रा चॉल केस लंबे समय से काफी चर्चा में बना हुआ है। 1034 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले मामले में राउत की गिरफ्तारी को देख लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ये स्कैम था क्या और कब इसे अंजाम दिया गया था। इसके अलावा जो सबसे बड़ा सवाल है वो ये कि इस केस में संजय राउत की संलिप्ता कैसे है?

तो, आइए आज इन्हीं प्रश्नों के उत्तर जानते हैं और समझते हैं कि किस तरह निजी संस्था की धोखाधड़ी से इतना बड़ा घोटाला हुआ और उसमें गरीबों के सिर से छत छीन कर उसे अमीरों में दे दी गई।

पात्रा चॉल जमीन घोटाला क्या है?

इस घोटाले की शुरुआत साल 2007 में हुई थी। तब, महाराष्ट्र हाउसिंग एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) की 47 एकड़ जमीन पर 672 किराएदार रहते थे। इन्हीं 672 किराएदारों के पुनर्वास के लिए पात्रा चॉल परियोजना के तहत चॉल के विकास का काम प्रवीण राउत की कंपनी गुरु आशीष कंस्ट्रक्शन और हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को सौंपा गया।

कॉन्ट्रैक्ट में कहा गया था कि 47 एकड़ पर जो बिल्डिंग बनेगी उसके 672 फ्लैट चॉल के किराएदारों को देने होंगे और तीन हजार फ्लैट एमएचडीए को हैंडओवर करने होंगे। बाद में जो जमीन बचेगी उसे बेचने और विकसित करने के लिए भी अनुमति जरूरी होगी। अब चॉल विकास के कॉन्ट्रैक्ट में सब चीजें तय थीं। लेकिन घोटाले की शुरुआत तब हुई जब कंपनी ने न तो इस जगह का विकास किया और न किराएदारों को मकान दिए और न ही MHADA को फ्लैट हैंडओवर किए।

प्राइवेट कंपनी पर आरोप है कि उन्होंने 47 एकड़ जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने की बजाए उसे 9 अलग-अलग बिल्डरों को बेचा और खासा पैसा कमाया। जब म्हाडा को इसकी सूचना हुई तो उन्होंने 2018 में जाकर उनके विरुद्ध एफआईआर करवाई और केस अपराध विंग के पास गया। इसके बाद 2020 में प्रवीण राउत की गिरफ्तारी हुई और यही से शुरु हुआ संजय राउत का इस केस से कनेक्शन।

संजय राउत और पत्नी वर्षा राउत की भूमिका

संजय राउत और प्रवीण राउत एक दूसरे के करीबी हैं। प्रवीण घोटाला करने वाली कंपनी में सारंग वधावन और राकेश वधावन के साथ डायरेक्टर थे। ये लोग पीएमसी बैंक घोटाले के भी आरोपित हैं। इसलिए 2020 में राउत की गिरफ्तारी के बाद जब कोर्ट से उन्हें जमानत मिली तो ईडी ने उन्हें दूसरे केस में पकड़े रखा। पूछताछ चलती रही। धीरे-धीरे सुजीत पाटकर का नाम सामने आया। ईडी ने पाटकर के ठिकाने पर छापा मारा तो कई दस्तावेज मिले।

ईडी की जाँच में सामने आया कि प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी राउत ने संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को 55 लाख रुपए का लोन दिया था जोकि बैंक से पास नहीं हुआ। इन्हीं पैसों से संजय राउत की पत्नी ने दादर का फ्लैट खरीदा था।

अब ये लोन जाँच का कारण इसलिए थी क्योंकि ईडी अधिकारियों ने कुछ समय पहले बताया था कि 2010 में, प्रवीण राउत ने इक्विटी सेल और भूमि सौदों की आड़ में अपने बैंक खाते में 95 करोड़ रुपए प्राप्त किए थे, हालाँकि कंपनी प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर सकी और उनकी कोई कमाई नहीं हुई।

प्रवीण पर एजेंसी ने आरोप मढ़ा कि एचडीआईएल कंपनी से प्रवीण राउत के खाते में 100 करोड़ ट्रांस्फर किए गए। इसके बाद उसने ये पैसा अपने करीबियों व परिजनों के अकॉउंट में डाल दिया।वर्षा के पास जो रकम माधुरी के जरिए आई वो इसी अपराध से जुड़ी रकम थी। ईडी का आरोप ये भी था कि खिम बीच के पास जो 8 प्लॉट थे वो भी वर्षा राउत और स्वप्ना पाटकर के नाम पर थे। इन्हें ईडी अपनी पिछली कार्रवाई में जब्त कर चुकी है।

संजय राउत ने घोटाले की संलिप्ता से किया इनकार

बता दें कि संजय राउत अपने ऊपर लगे हर इल्जाम को झूठा बता रहे हैं। उनका कहना है कि वो किसी घोटाले में शामिल नहीं है। ईडी उनके विरुद्ध गलत जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर रही है। अपने आप को बेगुनाह बताने के लिए राउत ने बालासाहेब की कसम भी खाई। उन्होंने कहा कि वो न तो खुद को सरेंडर करेंगे और न शिवसेना को छोड़ेंगे।

फिलहाल, राउत ईडी की गिरफ्त में हैं। आज उन्हें पीएमएलए कोर्ट में पेश किया जाना है। यहाँ से उनकी हिरासत ईडी को दी जाएगी। कल करीबन 17 घंटे की पड़ताल के बाद राउत गिरफ्तार हुए थे।

पश्चिम बंगाल में 10 काँवड़ियों की मौत, 19 घायल: कूच बिहार में जिस पिकअप वैन पर सवार थे शिवभक्त उसमें दौड़ा करंट

पश्चिम बंगाल के कूच बिहार से दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। रविवार (31 जुलाई 2022) देर रात करंट लगने से 10 काँवड़ियों की मौत हो गई। 19 घायल हैं। घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालत नाजुक होने के चलते उन्हें जलपाईगुड़ी रेफर कर दिया गया है। मृतकों का शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज पुलिस आगे की कार्रवाई कर रही है।

पुलिस ने बताया कि घायलों को पहले चंगरबंधा के अस्पताल लाया गया। वहाँ पर मौजूद चिकित्सा अधिकारी ने 16 व्यक्तियों को बेहतर इलाज के लिए जलपाईगुड़ी जिला अस्पताल रेफर कर दिया। उन्हें मामूली चोटें आई हैं, लेकिन अच्छी तरह से जाँच की जरूरत है।

जानकारी के मुताबिक काँवड़ियों का एक जत्था जलपेश जा रहा था। सभी शिवभक्त पिकअप वैन में सवार थे। पिकअप में डीजे भी लगा था। इसी दौरान वाहन में करंट फैल गया, जिससे 10 काँवड़ियों की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि यह घटना वाहन में डीजे सिस्टम के जनरेटर की वायरिंग के कारण हुई होगी। इसी से पूरे वाहन में करंट फैला होगा।

घटना मेखलीगंज थाना क्षेत्र के धरला ब्रिज पर हुई। माताभंगा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने बताया, “आधी रात के करीब मेखलीगंज थाने के धरला ब्रिज पर एक घटना हुई, जहाँ जलपेश जा रहे काँवड़ियों को ले जा रही एक पिकअप वैन में करंट लग गया। शुरुआती जाँच से पता चलता है कि यह घटना जेनरेटर (DJ सिस्टम) की वायरिंग के कारण हुई होगी, जो वाहन के पिछले हिस्से में लगाया गया था।” उन्होंने बताया कि सभी यात्री सीतलकुची थाना क्षेत्र के रहने वाले थे और उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है।

वर्मा ने बताया कि वाहन को जब्त कर लिया गया है। ड्राइवर फरार है। उसकी तलाश की जा रही है। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। पुलिस राहत और किसी भी आवश्यक सहायता के लिए कोऑर्डिनेट कर रही है। मामले में जाँच जारी है।

11 साल के थे अचिंता जब पिता की हो गई मौत, भाई ने की मजदूरी-माँ ने सिलाईः पहली बार में ही कॉमनवेल्थ में जीता गोल्ड

20 साल के अचिंता शुली पहली बार किसी कॉमनवेल्थ गेम्स का हिस्सा बने हैं। पहले ही प्रयास में उन्होंने स्वर्ण पदक हासिल किया है। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में शुली ने वेटलिफ्टिंग में गोल्ड जीता है। उनसे पहले वेटलिफ्टिंग में ही मीराबाई चानू और जेरेमी लालरिनुंगा ने भी स्वर्ण पदक जीता था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक अचिंता ने 31 जुलाई 2022 कॉमनवेल्थ खेलों का रिकॉर्ड बनाते हुए कुल 313 किलोग्राम वजन उठाया। उन्होंने स्नैच राउंड में 143 और क्लीन एंड जर्क में 170 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। वेटलिफ्टिंग में यह भारत का छठा पदक है। 3 स्वर्ण के अलावा संकेत और बिंदिया रजत व गुरुराज कांस्य पदक जीत चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अचिंता शुली को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। उन्होने लिखा, “इस उपबल्धि के लिए अचिंता ने बहुत मेहनत की है। उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।” कॉमनवेल्थ के लिए भारतीय दल में शामिल खिलाड़ियों से प्रधानमंत्री ने बात भी की थी। उसके अंश भी पीएम मोदी ने शेयर किए हैं। तब अचिंता ने अपनी माँ और भाई से मिले सहयोग का जिक्र किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक अचिंता हावड़ा के धूलागढ़ के निवासी हैं। उनके पिता की मृत्यु 2013 में हो गई थी। इसके बाद घर चलाने के लिए उनके भाई ने मजदूरी और माँ ने सिलाई की ताकि अचिंता अपने लक्ष्य को पूरा कर सकें। अचिंता के मुताबिक, “मैं एक लक्ष्य पर केंद्रित था। मेरे घर की माली हालत ठीक नहीं थी। लेकिन मैं कुछ अलग करना चाहता था।”

अचिंता ने अपने कैरियर की शुरुआत 2013 में गुवाहाटी में हुए राष्ट्रीय आयोजन से की थी। इसके बाद 2018 में वो खेलो इंडिया में यूथ गेम्स में स्वर्ण पदक विजेता बने। साल 2019 में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैम्पियनशिप के जूनियर और सीनियर कैटेगरी में उन्होंने सामोआ में पदक जीते। 2021 में ताशकंद में हुए जूनियर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में उन्होंने 73 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता था। साल 2021 में ही ताशकंद के ही राष्ट्रमंडल चैम्पयनशिप में भी वो विजेता घोषित हुए थे।

₹1034 करोड़ के घोटाला में ED ने संजय राउत को किया गिरफ्तार

मुंबई के पात्रा चॉल घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने रविवार देर रात शिवसेना सांसद संजय राउत को गिरफ्तार कर लिया। जाँच एजेंसी अधिकारियों ने बताया कि राउत से ईडी कार्यालय में लगभग 6 घंटे से अधिक समय तक पूछताछ हुई, इसके बाद उन्हें रात करीब 12:05 पर गिरफ्तार किया गया। आज जाँच एजेंसी उन्हें पीएमएलए अदालत में पेश करेगी और आगे की पूछताछ जारी रखने के लिए उनकी हिरासत माँगेगी।

बता दें कि 1034 करोड़ रुपए के पात्रा चॉल घोटाला मामले में संजय राउत ईडी के दो बार बुलाने के बावजूद पेश नहीं हुए थे। इसी के बाद ईडी ने 31 जुलाई को शिवसेना सांसद के भांडुप स्थित घर पर सुबह 7 बजे छापा मारा और वहाँ से 11.50 लाख रुपए जब्त किए। इतना ही नहीं, लगभग 9 घंटे की पूछताछ के बाद ईडी ने राउत को अपनी हिरासत में ले लिया था और वह अपनी माँ से तिलक लगवाकर, हाथ में भगवा लेकर घर से बाहर निकलते दिखे थे।

हालाँकि, जब उनके वकील से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वो हिरासत में नहीं लिए गए हैं, सिर्फ पूछताछ के लिए उन्हें ले जाया गया है। मगर, चंद घंटों बाद खबर आई कि संजय राउत को ईडी गिरफ्तार कर चुकी है। 

जानकारी के मुताबिक, राउत ने ईडी ऑफिस पहुँचने के बाद एक बार मीडिया से बात की थी। इस बातचीत में उन्होंने कहा था, “महाराष्ट्र कमज़ोर हो रहा है, जाओ पेड़े बाँटो। बेशर्मों, बाँटो पेड़े, वे महाराष्ट्र पर हमले करने आ रहे हैं। शिवसेना को खत्म करने आ रहे हैं।”

वहीं उनके भाई सुनील राउत ने कहा कि ईडी संजय राउत से डरती है, इसलिए गिरफ्तार कर लिया है। सुनील ने कहा कि फर्जी दस्तावेज के सहारे संजय राउत को पात्रा चॉल से जोड़ने की कोशिश हो रही है। यह गिरफ्तारी सिर्फ उनकी आवाज को दबाने के लिए की गई है। जो भी पैसा घर से मिला है, वो शिवसैनिकों के अयोध्या दौरे का था।

ईडी की संजय राउत पर कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि ईडी की कार्रवाई में अब तक संजय राउत की अलीबाग की जमीन और मुंबई में दादर वाला फ्लैट जब्त किया जा चुका है। 5 अप्रैल 2022 को ED ने संजय राऊत और उनकी पत्नी वर्षा राऊत से जुड़ी 11 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पति कुर्क की थी। ED ने उन्हें 28 जून को पेश होकर जवाब देने के लिए कहा गया था, पर वो उपस्थित नहीं हुए। तब उन्होंने खुद को गिरफ्तार करने की चुनौती भी दी थी। राऊत को सबसे हालिया समन 27 जुलाई को भेजा गया था। इसके अलावा उनके ऊपर हाल में वकोला थाने में एफआईआर भी हुई है। आरोप है कि उन्होंने केस की गवाब स्वप्ना पाटकर को धमकाया।

विधायकों को धमकी का पाकिस्तान कनेक्शन! हरियाणा पुलिस ने 6 को दबोचा, 73 ATM जब्त, 50+ बैंक खातों के जरिए रंगदारी वाला फ्रॉड

पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री के बाद हरियाणा के भी विधायकों को वसूली और हत्या की धमकी दिए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस मामले में शिकायत के बाद एसटीएफ ने एक्शन लेते हुए मामले में 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही एसटीएफ ने विधायकों को धमकियाँ दिए जाने के पीछे पाकिस्तान का हाथ होने की बात बताई है।

अपनी कार्रवाई के दौरान जाँच एजेंसी देश के कई हिस्सों में ताबड़तोड़ छापेमारी की। मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि गोल्डी बराड़ गैंग के गैंगस्टरों द्वारा व्हाट्सएप कॉल के जरिए विधायकों से पैसे की माँग की और नहीं देने पर हत्या की धमकियाँ दी गईं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक हरियाणा के 4 विधायकों और एक विधायक के बेटे को 24 से 28 जून के दौरान फोन पर फिरौती के लिए धमकियाँ दी गई थीं। इसी तरह की धमकियाँ के पंजाब के दो विधायकों को भी दी गई हैं। पीड़ित विधायकों से एक लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक की फिरौती माँगी गई थी।

पाकिस्तान से जुड़ रहे तार

इस घटना को लेकर हरियाणा एसटीएफ के एसपी सुमित कुमार ने पाकिस्तानी कनेक्शन की जानकारी दी है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, पाकिस्तान में बैठै शातिर अपराधी वर्चुअल प्राइवेट नंबर (VPN) के जरिए दुबई के नंबरों का इस्तेमाल कर लगातार विधायकों को धमका रहे हैं। इन जालसाजों के कनेक्शन का पर्दाफास करते हुए 6 बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है।

मामले में मुंबई से दुलेश आलम और बदरे आलम को गिरफ्तार किया गया है और वहीं 4 अन्य आरोपित अमित यादव, सनोज, सादिक और कैश आलम को बिहार के मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया गया है। फिलहाल इन सभी को 8 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। खास बात ये है कि हाल के दिनों में चर्चा में आए कुख्यात गैंगस्टरों लॉरेंस बिश्नोई और नीरज बवाना जैसों के नाम का सहारा लेकर ये धमकियाँ दी जा रही हैं। बताया जाता है कि फिरौती के पैसों में से अपना हिस्सा निकालने के बाद ये सभी अमित यादव और दुलेश आलम के बताए खातों में बाकी रकम को भेज दिया जाता था।

इनके पास से एजेंसी को 34 मोबाइल, 57 सिम, 24 फर्जी अकाउंट्स की पासबुक, 73 एटीएम और 50 से भी अधिक ऐसे अकाउंट्स का पता चला है, जिन्हें फ्रॉड के बाद बंद कर दिया गया था। इस बीच 6 आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने पुलिस टीम को बधाई दी है।

पाकिस्तान के सांसदों को संसद भवन में परोसा गया कॉकरोच वाला खाना: शिकायत के बाद 2 कैफेटेरिया बंद, अधिकारियों को रसोई में कीड़े-मकोड़े रेंगते मिले

पाकिस्तान के संसद भवन में सांसदों को परोसे जाने वाले खाने से कॉकरोच मिलने की खबर है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट बताती हैं कि इस्लामाबाद जिला प्रशासन ने शिकायत मिलने के बाद संसद भवन की रसोई वाली बिल्डिंग में छापा मारा और रसोइयों की जर्जर हालात देखते हुए दो कैफेटेरिया को बंद कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गंदे खाने की शिकायत और खाने में कॉकरोच मिलने की बात खुद सांसदों ने कही थी। उन्होंने बताया था कि वह लोग कैफेटेरिया की गंदी हालात देखकर वहाँ से खाना मँगाना बंद कर चुके हैं। वहीं निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने भी ये देखा कि खाने-पीने की जगह कीड़े-मकौड़े रेंग रहे थे। कैफेटेरिया की घटिया हालत देख फौरन इन्हें सील किया गया।

पाकिस्तानी मीडिया अनुसार, कैफेटेरिया में भोजन करते वक्त कुछ सांसदों को अपने खाने में कॉकरोच दिखा था, जिसके बाद उन्होंने इस्लामाबाद जिला प्रशासन को इसकी शिकायत दी। प्रशासन ने कई शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए और रसोई की खामियों को देखने के लिए छापा मारा। यहाँ उन्हें पूरी रसोई की हालत गंदी मिली। साथ ही खाने वाली जगह पर कीड़े-मकौड़े रेंगते दिखे। प्रशासन ने यह देखने के बाद कैफेटेरिया पर ताला लगवाया और ये भी कहा कि ये ताला उनके अगले आदेश तक लगा रहेगा।

बता दें कि पाकिस्तान के संसद भवन में कॉकरोच मिलना कोई अजूबा नहीं है। साल 2014 में संसद भवन के एक कैफेटेरिया में रखी केचप बॉटल से कॉकरोच निकला था। 2019 में भी कई सांसद, कैफेटेरिया में उन्हें परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता के खिलाफ आवाज उठाते दिखे थे।