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अर्पिता मुखर्जी ही नहीं, कई महिलाओं पर मेहरबान थे पार्थ चटर्जी: रिपोर्ट में दावा- मोनालिसा दास से भी रिश्ते, पसीना पोछने के लिए भी लड़कियाँ

पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाले में गिरफ्तार ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री रहे पार्थ चटर्जी (Partha Chatterjee) की केवल अर्पिता मुखर्जी से ही करीबी नहीं है। टीएमसी की एक पूर्व नेत्री की माने तो मोनालिसा दास के साथ भी उनके रिश्ते थे। कथित तौर पर चार-पाँच लड़कियाँ पार्थ चटर्जी के आसपास हमेशा मँडराती रहतीं थी, जो उनका पसीना तक पोछती थीं।

यह दावा तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की नेता रहीं बैसाखी बनर्जी (Baisakhi Banerjee) ने किया है। वे पश्चिम बंगाल कॉलेज-यूनिवर्सिटीज प्रोफेसर एसोसिएशन (WBCUPA) की जनरल सेक्रेटरी भी रह चुकीं हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर को एक इंटरव्यू दिया है। इसमें पार्थ चटर्जी के बारे में विस्तार से बताया है।

कभी पार्थ चटर्जी की बेहद करीबी रहीं बैसाखी का कहना है, “मैं पार्थ चटर्जी को 2016 से जानती हूँ। उनके बार-बार जिद करने पर ही WBCUPA की जनरल सेक्रेटरी बनी थी। उन्होंने मुझे कभी ऐसी निगाहों से नहीं देखा कि शर्मिंदा होना पड़े या मैं असहज महसूस करूँ। पार्थ चटर्जी जब शिक्षा मंत्री थे, तब बहुत बड़ी संख्या में अंडर क्वालीफाइड लड़कियों को रिक्रूट किया गया था। मैं खुद मिली अल-अमीन कॉलेज की प्रिंसिपल थी, इसलिए मुझे सब पता था। उन्होंने मंत्री होते हुए भी ये सब रोकने की कोई कोशिश नहीं की।”

ईडी के छापे के दौरान यह सामने आया है कि पार्थ चटर्जी के पास बड़ी संख्या में फ्लैट हैं, जिनमें से कई उन्होंने अर्पिता मुखर्जी और मोनालिसा दास सहित अपने ‘करीबी सहयोगियों’ को गिफ्ट में दिए हैं। अर्पिता चटर्जी ने ईडी को बताया है कि पार्थ चटर्जी उनके फ्लैट का इस्तेमाल ‘मिनी बैंक’ के तौर पर करते थे। ऐसे में माना जा रहा है कि मोनालिसा दास को गिफ्ट किए गए फ्लैट्स का इस्तेमाल भी इसी मकसद से किया गया था।

मोनालिसा के नाम पर कथित तौर पर 10 फ्लैट का पता चला है। कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि इनमें से 7 घर पार्थ चटर्जी के हैं और ये बीरभूम जिले के शांतिनिकेतन के फुलडांगा इलाके में हैं। मोनालिसा दास बांग्लादेश से भी जुड़ी हुई हैं। वह पहले आसनसोल में एसबी गोराई रोड पर विवेकानंद पल्ली में किराए के एक मकान में रहती थीं। मोनालिसा इस इलाके में लगभग पाँच साल तक किराए पर अकेली रहती थीं। मोनालिसा दास आसनसोल में काजी नजरूल विश्वविद्यालय में बंगाली भाषा की प्रोफेसर भी हैं।

बैसाखी के मुताबिक, “मैंने पार्थ के साथ कई लड़कियों को देखा है। लड़कियाँ उनका पसीना तक पोछा करती थीं। वो महीने में एक-दो बार ही ऑफिस आते थे। बाकी समय कहाँ रहते थे, ये कोई नहीं जानता। अब मीडिया से पता चला रहा है कि वो विदेश घूमने जाया करते थे।” बनर्जी के मुताबिक, “मोनालिसा दास पार्थ की गर्लफ्रेंड रह चुकी हैं। मोनालिसा जिस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थीं, वहाँ के वाइस चांसलर की वाइफ ने मोनालिसा की शिकायत मुझसे की थी। उन्होंने मुझसे कहा था कि पार्थ चटर्जी की गर्लफ्रेंड मोनालिसा का मेरे पति के साथ अफेयर चल रहा है। मेरा घर बर्बाद हो रहा है। आप उन्हें जानती हैं, कुछ कीजिए। इस पर मैंने कहा था कि आप इतना बड़ा आरोप लगा रही हैं, आपके पास क्या प्रूफ है कि मोनालिसा पार्थ की गर्लफ्रेंड हैं।”

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की पूर्व नेता के अनुसार, “उन्होंने सबूत के तौर पर मुझे पार्थ और मोनालिसा के बीच की कुछ चैट भेजी थीं। इनसे यह साफ हो गया था कि दोनों एक-दूसरे के बेहद नजदीक हैं। यह चैट मेरे पास अब भी है। लेकिन यह उनका निजी मामला है, इसलिए मैं किसी से शेयर नहीं करूँगी। हालाँकि मैं उस महिला की शिकायत लेकर पार्थ चटर्जी के पास गई थीं, लेकिन उन्होंने मुझे नजरअंदाज करते हुए कहा कि मैं TMC में नंबर-2 हूँ। मेरा कोई कुछ नहीं कर सकता। इसके बाद उस महिला ने यह पूरा मामला लिखकर CM ममता बनर्जी के पास भेज दिया था।”

उन्होंने बातचीत में कहा, “CM को शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं हुआ, क्योंकि वो लेटर पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को ही भेज दिया गया। पार्थ ने शिकायत करने वाली महिला को बुलाकर उसकी बात सुनी और उससे कहा कि आप घर जाओ, सब ठीक हो जाएगा। लेकिन अगले दिन उन्होंने उसके पति को बुलाकर कहा कि अपनी पत्नी को समझाओ। वो CM तक पहुँच गई है। यदि वो चुप नहीं हो रही तो उसे पागल करार दे दो। जब उस महिला ने ये बातें मुझे बताईं तो मैं सुनकर हैरान रह गई। पार्थ चटर्जी के दो चेहरे हैं। एक जो मेरे सामने था और दूसरा जो बाकी लोगों के जरिए मुझे पता चल रहा था। बाद में उस महिला को नौकरी से हटा दिया गया। उसे CM के पास जाने से भी कुछ मदद नहीं मिल पाई थी।”

गौरतलब है कि बीते कुछ दिनों से बंगाल के पूर्व मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी दोस्त अर्पिता मुखर्जी करोड़ों रुपए के एसएससी भर्ती घोटाले को लेकर चर्चा में हैं। प्रवर्तन निदेशालय अर्पिता मुखर्जी के घरों पर छापेमारी कर अब तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश और 5 किलो सोना बरामद कर चुका है। फिलहाल दोनों ईडी की हिरासत में हैं।

4 अगस्त तक ED की कस्टडी में भेजे गए संजय राउत, घर का खाना खाने की अनुमति: कोर्ट ने कहा – हृदय रोग है, पूछताछ में ध्यान रखे जाँच एजेंसी

अदालत ने पात्रा चॉल घोटाले में शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत को 4 अगस्त तक रिमांड पर भेज दिया है इस दौरान वो ED की कस्टडी में रहेंगे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें एक दिन पहले गिरफ्तार किया था। भांडूप स्थित उनके आवास पर चली 9 घंटे की छापेमारी और पूछताछ के बाद एजेंसी ने ये कार्रवाई की थी। इसके बाद उनकी 8 दिन की कस्टडी के लिए अदालत में पेश किया गया था। हालाँकि, स्पेशल जज एमजी देशपांडे ने कहा कि 8 दिन की कस्टडी की ज़रूरत नहीं है।

जज ने कहा कि सभी विवरणों को दस्तावेज के रूप में संकलित किया जा चुका है और संजय राउत व उनकी पति के वित्तीय लेनदेन को भी आसानी से जुटाया जा सकता है, ऐसे में इतनी लंबी कस्टडी की आवश्यकता नहीं है। साथ ही संजय राउत के स्यास्थ्य को देखते हुए उन्हें घर का खाना खिलाने की अनुमति भी दे दी गई। उन्हें कानूनी सलाह लेने की छूट के साथ-साथ दवाएँ वगैरह लेने की अपील को भी कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

अदालत ने कहा कि चूँकि आरोपित हृदय रोग से पीड़ित है, इसीलिए ज़रूरत पड़ने पर ED को उसे अस्पताल में भर्ती कराने पर विचार करना चाहिए और पूछताछ के समय को इसे ध्यान में रखते हुए ही तय किया जाना चाहिए। मनी लॉन्ड्रिंग कानून (PMLA) के तहत इस मामले की जाँच की जा रही है। ‘गुरु आशीष कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड’ ने पात्रा चॉल के पुनर्विकास का ठेका लिया था, जो ‘हाउसिंग डेवलपमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (HDIL)’ का ही एक हिस्सा है। ये मामला इसी से जुड़ा हुआ है।

इससे पहले ED ने संजय राउत के एक करीबी प्रवीण राउत को गिरफ्तार किया था। संजय राउत की पत्नी की कुछ संपत्तियाँ भी जब्त की गई हैं। उक्त कंपनी ने ‘महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास प्राधिकरण (MHADA)’ के साथ करार के तहत पात्रा चॉल के लोगों के लिए 672 फ्लैट्स बनाने का करार किया था। बाकी बचे क्षेत्र को प्राइवेट डेवेलपर्स को बेचने की सहमति बनी थी। प्रवीण राउत ने 901 करोड़ रुपए में फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSE) को 9 कंपनियों को बेचा।

किसी के लिए फ्लैट नहीं बनाया गया। ED का कहना है कि प्रवीण ने HDIL से मिली 100 करोड़ रुपए की दलाली को कई जगह भेजा, जिसमें संजय राउत का परिवार भी शामिल है। 1 जुलाई, 2022 को संजय राउत से ED ने 10 घंटे पूछताछ की थी। हालाँकि, इसके बाद उन्होंने समन पर एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने की जहमत नहीं उठाई और संसद सत्र का बहाना बनाया। अब हजार करोड़ रुपए के इस घोटाले में वो ED की कस्टडी में रिमांड पर हैं।

जन्मदिन की पार्टी के बहाने ईसाई धर्मांतरण का खेल, भूत प्रेत बाधा दूर करने और पैसों का लालच, आजमगढ़ पुलिस ने 6 महिलाओं को गिरफ्तार कर भेजा जेल

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की दलित बस्ती में भूत-प्रेत बाधा व पैसों का लालच देकर ईसाई धर्मान्तरण का मामला सामने आया है। ताजा मामला आजमगढ़ जिले के महराजगंज कस्बे के विष्णु नगर वार्ड का है, जहाँ जन्मदिन पार्टी के बहाने धर्मांतरण की कोशिश की जा रही थी। हालाँकि, पुलिस की मुस्तैदी ने इस प्रयास को नाकाम कर दिया। यहाँ धर्मांतरण करवाने वालों में लगभग सभी महिलाएँ ही थीं। वहीं बजरंग दल की सूचना पर पुलिस ने मौके से सभी 6 आरोपित महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महराजगंज कस्बे के विष्णु नगर वार्ड की अनुसूचित जाति बस्ती में किराए के मकान में रहने वाली कप्तानगंज के पिपरी गाँव की इंद्रकला ने अपने बेटे के जन्मदिन पर 30 जुलाई को एक पार्टी का आयोजन किया था, जिसमें आसपास के गाँवों के 100 से ज्यादा लोगों को बुलाया गया था। आरोप है कि आयोजक की रजामंदी से पहले यहाँ के लोगों में मिठाई बाँटी गई और फिर खाने से पहले एक किताब पढ़ने को दिया गया। यहाँ भूत-प्रेत बाधा को दूर करने व पैसों का लालच भी दिया गया। इस बीच किसी ने पुलिस को सूचित किया कि इस कार्यक्रम में ईसाई धर्मांतरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

वहीं कहा जा रहा है कि बजरंग दल की सूचना पर मौके पर पहुँची पुलिस ने ईसाई धर्मांतरण के इस खेल का भंडाफोड़ कर दिया। जहाँ पुलिस को देखते ही कुछ लोग वहाँ से भाग खड़े हुए। वहीं तलाशी के दौरान पुलिस ने उन लोगों के पास से कुछ धार्मिक पुस्तकें और रफ कापियाँ बरामद की। जिन पर मज़हबी बातें लिखी हुई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पूरे मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ कुमार ने कहा, “महराजगंज थाने में तैनात उप निरीक्षक कमलेश यादव स्टाफ के साथ क्षेत्र में थे, उसी दौरान उन्हें सूचना मिली कि कुछ महिलाओं द्वारा धर्म परिवर्तन के लिए गरीब लोगों को उकसाया जा रहा है और स्थानीय लोगों के विरोध करने पर उन्हें धमकी दी जा रही है। सूचना पाकर पुलिस महराजगंज नगर पंचायत के वार्ड संख्या-1 की दलित बस्ती में पहुँची, जहाँ जन्मदिन पार्टी के बहाने लोगों को धर्मांतरण के लिए प्रलोभन दिया जा रहा था। फिलहाल मौके से 6 महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। पूरे मामले में अग्रिम विधिक कर्रवाई की जा रही है।”

गौरतलब है कि यहाँ धर्म परिवर्तन का खेल खेल रहे लोगों ने ऐसी साजिश रची कि किसी को शक न हो और उनका मकसद भी पूरा हो जाए। इसके लिए बर्थडे पार्टी को आयोजन का जरिया बनाया गया। और इसकी कमान 6 महिलाओं को सौंपी गई थी। इन आरोपितों में इन्द्रकला, सुभागी देवी, साधना, समता, अनीता, सुनीता को धर्मान्तरण के मामले में संलिप्त पाया, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

संस्कृत श्लोक में कॉन्ग्रेस ने खोजी अश्लीलता, मोदी विरोध के चक्कर में हिन्दू घृणा: वीडियो के जरिए धर्म का अपमान कर रही कॉन्ग्रेस, यहाँ समझिए भावार्थ

कॉन्ग्रेस पार्टी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी घृणा में संस्कृत भाषा और हिन्दू धर्म को लेकर अश्लीलता फैलाने में लग गई है। पीएम मोदी ने दिल्ली में ‘ऑल इंडिया डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज ऑथोरिटीज’ की पहली बैठक को दिल्ली में शनिवार (30 जुलाई, 2022) को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने एक संस्कृत श्लोक पढ़ा। बस फिर क्या था, कॉन्ग्रेस ने इस श्लोक के एक शब्द को पकड़ कर अश्लील बताना शुरू कर दिया।

अब कॉन्ग्रेस के इस कृत्य में वामपंथी और लिबरल गिरोह साथ न दे, ऐसा हो ही नहीं सकता है। हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए सोशल मीडिया पर ‘अश्लील नरेंद्र’ ट्रेंड कराया जाने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस श्लोक के जरिए न्यायपालिका का महत्व को समझा रहे थे, लेकिन विरोधियों को इन सबसे कोई मतलब नहीं। इस दौरान उन्होंने बताया कि इस सम्बन्ध में भारतीय इतिहास में क्या कहा गया है। कॉन्ग्रेस नेता गौरव पांधी ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “सॉरी, क्या कहा?”

आइए, हम आपको बताते हैं कि वो श्लोक कौन सा है। पीएम मोदी ने जिस संस्कृत श्लोक का जिक्र किया, वो है – “अंगेना गात्रम नयनेन वक्रतम न्यानेन राज्यम लवनेन भोज्यम। धर्मेना हीनं खालू जीवितं चा न राजते चंद्रमासा बिना निशा।।” इस श्लोक का अर्थ है कि बिना किसी अंग के मानव शरीर, आँखों के बिना चेहरा, एक प्रभावी और शक्तिशाली न्यायपालिका के बिना एक राष्ट्र, बिना नमक के पका हुआ भोजन, धर्म के बिना मानव जीवन और धर्म का पालन करना, वास्तव में आकाश में चंद्रमा एक अंधेरी रात की तरह अलंकृत या दैदीप्यमान नहीं कहा जाता है।

इस श्लोक में जिक्र है कि न्यायपालिका के बिना देश को प्रकाश विहीन समझा जाए, यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समझाना चाह रहे थे। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना और केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। अब भारत के अलग-अलग हिस्सों के लोगों के उच्चारण अलग-अलग हैं, क्योंकि यहाँ कुछ ही किलोमीटर पर बोली और भाषाएँ बदल जाती हैं। इसी ही मुद्दा बना कर कॉन्ग्रेस हंगामा कर रही है।

हालाँकि, इस दौरान कई लोगों ने जवाहर लाल नेहरू की तस्वीरें शेयर कर के कॉन्ग्रेस को बताया कि असली अश्लील कौन है। कुछ ने दिग्विजय सिंह की तस्वीरें भी डालीं। शशि थरूर के भी जिक्र आए। लोगों का कहना है कि संस्कृत को बदनाम कर के कॉन्ग्रेस पार्टी ने हिन्दू धर्म के प्रति अपनी घृणा दिखाई है, पीएम मोदी के विरोध के चक्कर में। कॉन्ग्रेस का हिन्दू विरोध का इतिहास पुराना रहा है। ये कोई पहली बार पार्टी के नेता इस तरह की हरकत नहीं कर रहे हैं।

ज्ञानवापी केस में मुस्लिम पक्ष की पैरवी करने वाले वकील अभय नाथ यादव का हार्ट अटैक से निधन, 4 अगस्त को है सुनवाई

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे-माँ शृंगार गौरी केस में अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के प्रमुख वकील अभय नाथ यादव (Abhay Nath Yadav) का हार्ट अटैक से रविवार (31 जुलाई 2022) देर रात निधन हो गया। निधन की जानकारी ज्ञानवापी केस में अभय नाथ यादव के साथी वकील नित्यानंद राय ने दी। उन्होंने बताया कि रविवार रात 10:30 बजे के करीब यादव को हार्ट अटैक आया था। उन्हें नजदीक के त्रिमूर्ति अस्पताल में भर्ती किया गया। बाद में उन्हें शिवम अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अभयनाथ यादव के निधन से मुस्लिम पक्ष बड़ा झटका लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 अगस्त को ज्ञानवापी मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से जवाब दिया जाना है, जिसमें वकील अभय नाथ यादव की अहम भूमिका होती। लेकिन अब उनके न रहने पर अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहीं इस मामले में हिंदू पक्ष की ओर से हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन पक्ष रख रहे हैं। हिंदू पक्ष अपनी दलील पर बहस पूरी कर चुके हैं। इससे पहले 25 जुलाई को होने वाली सुनवाई अधिवक्ता कमलाकांत पटेल के निधन के कारण टल गई थी। वाराणसी में जिला जज एके विश्वेश की अदालत में मामले की सुनवाई चल रही है।

बता दें कि ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना को लेकर बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें कोर्ट से सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति माँगी गई थी। हिन्दुओं की ओर से ये याचिका श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी ने दायर की थी। याचिका में त्रिपाठी ने कहा था कि सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और हिन्दुओं को पूजा करने और अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया था, “याचिकाकर्ता को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदान किए गए हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का प्रचार करने का अधिकार है और यह एक तथ्य है कि सावन का महीना शुरू हो रहा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत गारंटी के रूप में सावन के महीने में पूजा करने, ‘अंतरात्मा की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पेशे, धर्म के अभ्यास और प्रचार’ के अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति दी जाए।”

‘भाई तो कार से निपटा देते, बंदूक की क्या जरूरत’: सलमान को ‘गन लाइसेंस’ मिलने पर नेटीजन्स का तंज, बोले- अब जानवरों के अंडरग्राउंड होने का समय आ गया है

मुंबई पुलिस ने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को हथियार रखने का लाइसेंस दे दिया है। बता दें कि कुछ समय पहले कथित तौर पर लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने अभिनेता को ‘मूसेवाला जैसा हाल’ करने देने की धमकी दी थी। जिसके बाद सलमान खान ने 22 जुलाई को मुंबई पुलिस आयुक्त विवेक फणसाळकर से मुलाकात कर आत्मसुरक्षा का हवाला देते हुए हथियार रखने का लाइसेंस माँगा था।

एक आईपीएस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “हमने सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद अभिनेता को हथियारों का लाइसेंस जारी किया।” हथियारों का लाइसेंस मुंबई पुलिस ने सलमान खान के एक प्रतिनिधि को सौंपा था।

सलमान खान को हथियार रखने का लाइसेंस मिलने के बाद  सोशल मीडिया यूजर्स ने उन पर कटाक्ष करने का मौका नहीं छोड़ा। एक यूजर ने 1998 के काले हिरण के शिकार मामले का जिक्र करते हुए लिखा, “मुझे उम्मीद है कि वह काले हिरण पर इसका इस्तेमाल नहीं करेंगे।”

सलमान खान के 2002 के हिट एंड रन मामले का जिक्र करते हुए एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “इसका भी वही परिणाम होगा जो कार लाइसेंस मिलने का हुआ था।”

इसी मामले का जिक्र करते हुए एक और यूजर ने लिखा, “भाई के हाथ में गाड़ी देना कितना खतरनाक था, अब गन भी दे दी।”

अजय शंकर पांडेय ने लिखा, “सलमान खान को हथियार का लाइसेंस मिला। भाई तो कार के लाइसेंस से ही निपटा देता था। अब भाई को बंदूक का लाइसेंस भी मिल गया है।”

एक अन्य यूजर ने इस पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “मतलब अब फुटपाथ पर सो रहे लोगों के अलावा सड़क पर घूम रहे जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “अब यह साबित हो गया कि हिरण को मैंने नहीं मारा था, क्योंकि मेरे पास बंदूक अब आएगी। उस टाइम लाइसेंस नहीं था। हिरण ने आत्महत्या की थी: सलमान खान।”

साहिल डोगरा ने लिखा, “हथियार का क्या काम जब गाड़ी है?”

एक काले हिरण की तस्वीर पोस्ट करते हुए एक ट्विटर यूजर ने लिखा कि अब जानवरों के अंडरग्राउंड होने का समय आ गया है।

5 जून को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से धमकी भरा पत्र मिलने के बाद सलमान खान ने बंदूक लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। 2016 के शस्त्र नियम के अनुसार, उन व्यक्तियों को बंदूक लाइसेंस जारी किया जा सकता है जो अपनी प्रसिद्धि और धन के कारण हमलावरों के निशाने पर हैं।

यह देखते हुए कि अभिनेता इस श्रेणी में आते हैं, उन्हें पुलिस उपायुक्त के कार्यालय द्वारा सत्यापन के बाद बंदूक लाइसेंस जारी किया गया। सलमान खान ने इससे पहले इस मामले पर चर्चा करने के लिए मुंबई के पुलिस कमिश्नर विवेक फणसाळकर से मुलाकात की थी। मुंबई पुलिस ने तब सूचित किया था, “अभिनेता सलमान खान ने हाल ही में एक धमकी पत्र प्राप्त करने के बाद, मुंबई पुलिस में आत्मरक्षा के लिए हथियार लाइसेंस के लिए आवेदन किया था।” धमकी भरे पत्र में चेतावनी दी गई थी कि खान का भी वही हश्र होगा जो गायक सिद्धू मूसेवाला का हुआ, जिसे लॉरेंस बिश्नोई के गिरोह के सदस्यों ने मार दिया था।

यह धमकी भरा पत्र अभिनेता के आवास के बाहर बांद्रा बैंडस्टैंड सैरगाह के पास पाया गया था। कथित तौर पर, अभिनेता के पिता सलीम खान इलाके में सुबह की सैर के लिए जाते हैं। टहलने के दौरान अक्सर जिस बेंच पर वह बैठा करते थे, वहीं पर उन्हें यह लेटर रखा हुआ मिला था। मामला सामने आने के बाद मुंबई पुलिस ने अभिनेता के आवास के बाहर अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई।

1998 के काला हिरण शिकार मामले में शामिल होने के लिए सलमान खान को 2018 में लॉरेंस बिश्नोई से धमकियाँ मिली थीं। काला हिरण (चिंकारा) बिश्नोइयों के लिए पवित्र माना जाता है, जिस समुदाय से खूँखार गैंगस्टर आता है।

अक्टूबर 1998 में दो काले हिरणों की हत्या के लिए अभिनेता को जोधपुर की एक अदालत ने अप्रैल 2018 में पाँच साल जेल की सजा सुनाई थी। खान को पहले मामले के सिलसिले में जोधपुर जेल में हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में भरतपुर जेल में ट्रांसफर कर दिया गया था।

यह ‘डर’ अच्छा है आमिर खान, बॉलीवुड की हिंदू घृणा-राष्ट्र विरोधी एजेंडे की कमाई है ‘लाल सिंह चड्ढा’ की दुर्गति: खुद की लगाई आग में जल रहा ‘उर्दूवुड’

सोशल मीडिया पर आमिर खान और करीना कपूर की फिल्म ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बहिष्कार की अपील की जा रही है। बॉयकॉट के इस अभियान के लिए लोगों के पास वाजिब कारण हैं। इसमें सबसे प्रमुख है बॉलीवुड की हिन्दू घृणा। जिस तरह से बॉलीवुड ने हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने से लेकर ब्राह्मणों को गुंडे और जिक्र के रूप में पेश किया, उससे लोग नाराज हैं। दशकों से चला आ रहा प्रोपेगंडा उनकी समझ में आ गया है।

सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद जिस तरह बॉलीवुड में ड्रग्स के जाल का खुलासा हुआ और जिस तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं, उसने भी लोगों के सामने इसकी सच्चाई रखी। इस्लाम को अच्छा दिखाने से लेकर हिन्दू धर्म को बदनाम करने तक, ऐसे अनगिनत दृश्य लोगों के ध्यान में आए। नसीरुद्दीन शाह जैसों के हिन्दू विरोधी बयान हों या शाहरुख़ खान द्वारा असहिष्णुता बढ़ने की बातें करना, लोगों को बॉलीवुड का एजेंडा समझ आने लगा।

आमिर खान का कहना है कि कुछ लोगों को लगता है कि उन्हें इस देश से प्यार नहीं है। ‘लाल सिंह चड्ढा’ के बहिष्कार के लिए सोशल मीडिया में चल रहे अभियान ने शायद उन्हें डरा दिया है, इसीलिए वो अब फिल्म के साथ कई लोगों के इमोशंस जुड़े होने की दुहाई देते हुए कह रहे हैं कि इसमें बहुत लोगों की मेहनत लगी होती है, सिर्फ एक अभिनेता की नहीं। उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद इसे पसंद या नापसंद करने का अधिकार लोगों को है।

आमिर खान को पता होना चाहिए कि फिर किसी भी फिल्म का ट्रेलर क्यों रिलीज किया जाता है। ट्रेलर देख कर लोग एक अंदाज़ा लगाते हैं कि फिल्म कैसी होगी और हॉलीवुड क्लासिक ‘फॉरेस्ट गम्प’ की रीमेक ‘लाल सिंह चड्ढा’ उन्हें अच्छी नहीं लग रही है तो उन्हें बोलने का पूरा अधिकार है। लोगों को फिल्म बिना देखे भी अंदाज़ा लगाने का अधिकार है कि ये अच्छी होगी या बुरी, इसीलिए तो फिल्म से पहले उसके ट्रेलर और गाने रिलीज किए जाते हैं।

आमिर खान को अब बहिष्कार के अभियान से दुःख हो रहा है। उनका कहना है कि ये चीजें उन्हें हर्ट कर रही हैं। उन्होंने इस सोच को गलत बताया कि उन्हें इस मुल्क से प्यार नहीं है। साथ ही कहा कि उन्हें इस देश और यहाँ के लोगों से प्यार है। वैसे फिल्म की रिलीज से पहले इस तरह के प्यार का उमड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने लोगों से गुजारिश की है कि वो थिएटर में जाकर ‘लाल सिंह चड्ढा’ देखें, इसका बॉयकॉट न करें। उन्होंने कहा कि OTT से अच्छा सिनेमाघरों में जाकर लोग इस फिल्म को देखें।

आमिर खान इससे पहले किस तरह के बयान दे चुके हैं और कैसी हरकतें कर चुके हैं, ये भी बताना आवश्यक है। उन्होंने ही तो कहा था कि उनकी पत्नी किरण राव को इस देश में डर लगने लगा है। अब उनका और किरण राव का तलाक हो चुका है। अब आमिर खान इससे नाराज़ हैं कि लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि उन्हें देश से प्यार नहीं। देश में जिसे डर लगता हो, वो देश से कैसे प्यार कर सकता है? आमिर खान ने अपने उस बयान को बार-बार सही ठहराया।

इसी तरह आप दिसंबर 2014 में आई फिल्म ‘PK’ को ले लीजिए। आमिर खान की इस फिल्म में किस तरह भगवान शिव का मजाक बनाया गया था, ये हम सबने देखा। भगवान शिव बने एक व्यक्ति को बाथरूम में दिखाया गया और आमिर खान उसका पीछा करते हैं। उसे भागते हुए मजाकिया ढंग से पेश किया गया। कहीं वो कुर्सियों के नीचे जाकर छिप रहा होता है तो कहीं त्रिशूल से अजीब हरकतें कर रहा होता है। इस दृश्य का आशय क्या था भला?

‘PK’ में क्या नहीं था भला? एक हिन्दू लड़की का सरफराज नाम के मुस्लिम लड़के से प्यार करना। ‘सरफराज’ कभी धोखा नहीं दे सकता – ये नैरेटिव गढ़ा गया। इसके बाद एक हिन्दू संत का अपमान। हिन्दू संत को मक्कार और समाज विरोधी दिखाया गया। पूजा-पाठ करने वाले हिन्दुओं को बेवकूफ दिखाया गया। भगवान की मूर्ति किसी काम नहीं आती, ये बताया गया। लेकिन कहीं भी इस्लाम या इसमें जो पैगंबर या गॉड हैं, उन्हें लेकर कुछ नहीं कहा गया।

देश में हिन्दुओं के बलबूते सुपरस्टार बने आमिर खान जब बदले में उन्हीं हिन्दुओं को ‘PK’ जैसी फिल्म देते हैं तो क्या उनकी आलोचना न हो? असल में लोगों का गुस्सा आमिर खान या उनकी फिल्म से नहीं है। किसी एक सितारे या मूवी से नहीं, बल्कि पूरी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री से है। किस तरह से इस इंडस्ट्री ने हिन्दू संस्कृति को बदनाम किया, इससे है। लोगों को दिक्कत है कि फिल्मों में आतंकियों के महिमामंडन से लेकर अपराधियों तक को नायक की तरह क्यों पेश किया जाता है?

आमिर खान ने भारत विरोधी तुर्की में जाकर किस तरह वहाँ के राष्ट्रपति से मुलाकात की और वहाँ के पर्यटन को प्रमोट किया, इससे भी उनके अंतरराष्ट्रीय इस्लामी एजेंडे को समझा जा सकता है। पाकिस्तान का यार तुर्की अक्सर कश्मीर राग अलापता है और भारत के मुस्लिमों को भड़काता है। तुर्की की प्रथम महिला एमीन एर्दोगन से आमिर खान 15 अगस्त, 2020 को मिले थे। ‘लाल सिंह चड्ढा’ की शूटिंग वहाँ हुई। आमिर खान की पूर्व पत्नी के संगठन के पाँव वहाँ जमाने को लेकर बातें हुईं।

ऊपर से इनका अहंकार, जो बार-बार सामने आता है। फिल्म की रिलीज से पहले भले ही इनके सुर बदले-बदले लग रहे हों, लेकिन याद कीजिए बरखा दत्त से बात करते हुए करीना कपूर ने क्या कहा था। वही करीना कपूर, जो ‘लाल सिंह चड्ढा’ की मुख्य अभिनेत्री हैं। उन्होंने कहा था, “वही लोग जो हम पर उँगलियाँ उठा रहे हैं, वही नेपोटिज्म वाले स्टार पैदा कर रहे हैं। आप जा रहे हो ना फिल्म देखने? मत जाओ। किसी ने आप पर दबाव नहीं डाला।”

जब दर्शक इनकी फिल्म देखते हैं तो वो उनके लिए सही हैं, लेकिन जब वही दर्शक इनकी आलोचना करे तो वो उसे भला-बुरा कहने लगते हैं। हाल ही में संजय दत्त ने ‘शमशेरा’ के फ्लॉप होने के बाद ऐसा ही किया। ऑडिएंस पर ही ठीकरा फोड़ दिया। फिल्म में उन्हें क्रूर बनाने के लिए त्रिपुण्ड तिलक और शिखा वाला लुक दिया गया था। साथ ही क्रूरता वाले दृश्यों में बैकग्राउंड में संस्कृत श्लोक बजते हैं। ऊपर से जनजातीय समाज बनाम सवर्ण वाली जातिवादी लड़ाई को बढ़ावा दिया गया है। इन सबके बावजूद ये चाहते हैं कि लोग इस फिल्म को देखें?

अगर ये नहीं सुधरेंगे तो जनता इन्हें इनकी औकात बताती रहेगी। दक्षिण भारत की डब फिल्मों का कारोबार कई गुना बढ़ता चला जाएगा और बॉलीवुड का नामोनिशान मिट जाएगा। देश के आम लोगों ने ही उन्हें स्टार बनाया और सब वही उनसे नाराज़ हैं, तो गलत जनता नहीं बल्कि ये स्टार हैं। ये इंडस्ट्री गलत है। तभी उन्हें सफाई देनी पड़ रही है बार-बार। तभी इस इंडस्ट्री को ‘ड्रगीवुड, बुलीवुड और उर्दूवुड’ कहा जा रहा है। कट्टर इस्लामी एजेंडे को हवा देना और नए कलाकारों को किनारे कर स्टार किड्स को आगे बढ़ाने वाली इस इंडस्ट्री को क्या सुधार की ज़रूरत नहीं?

कानपुर में हिंदू बच्चों को पढ़ाया जा रहा कलमा, अभिभावकों के विरोध के बाद FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) में फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल (Florets International School ) में हिंदू छात्रों को कलमा पढ़ाने का मामला सामने आया है। अभिभावकों और हिन्दू संगठनों के हंगामे के बाद मौके पर कमिश्नरेट पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी स्कूल पहुँचे। इस मामले में कानपुर डीएम ने पुलिस की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर जाँच के आदेश दिए हैं। वहीं स्कूल प्रबंधन ने भी अब प्रार्थना नहीं कराने की बात कही है। लेकिन हिंदू संगठन स्कूल के शुद्धिकरण और तालाबंदी के जिद पर अड़ गए हैं।

इस दौरान पार्षद महेंद्र शुक्ला स्कूल के ऊपर गंगाजल का छिड़काव करते नजर आए। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। पार्षद महेंद्र शुक्ला ने कहा, “यहाँ जन गण मन तो होता नहीं है, कलमा पढ़ाया जाता है। इनके PFI से संबंध हैं, यहाँ बच्चों को रोज कलमा पढ़ाया जाता है, हम मामले की जाँच कराएँगे, स्कूल के ऊपर गंगाजल छिड़का है।”

पत्रकार अभिषेक कुमार लिखते हैं, “यूपी में कानपुर के एक प्राइवेट स्कूल में हिंदू बच्चों को कलमा पढ़ाने का वीडियो वायरल हो रहा है। हिंदूवादी संगठनों ने मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ विरोध जताया है। उनका कहना है कि स्कूल प्रबंधन जब तक अपनी इस गलती की माफी नहीं माँगेगा, तब तक स्कूल नहीं चलने दिया जाएगा।”

इसके साथ ही अभिषेक ने वीडियो में स्कूल में पढ़ाई जाने वाली किताब के उस पृष्ठ को भी साझा किया है, जिसमें दुआ के नीचे लिखा है, “ला इलाहा इल्लल्लाह मोहम्मदूर रसूल अल्लाह।” अभिषेक मिश्रा नाम से बने अकाउंट से मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ, यूपी पुलिस और कमिश्नरेट पुलिस को टैग करते हुए यह वीडियो साझा किया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्कूल मैनेजर ने सफाई देते हुए कहा कि उनके स्कूल में हिंदू, मुस्लिम, सिख और इसाई चारों धर्मों की प्रार्थना 12-13 सालों से की जा रही है। कभी किसी ने विरोध नहीं किया। चार दिन पहले एक अभिभावक की ओर से इसे लेकर आपत्ति जताई गई थी। आपत्ति के मद्देनजर उन्होंने पूर्व में ही यह आदेश दे दिया है कि अब कोई धार्मिक प्रार्थना नहीं कराई जाएगी। अब सोमवार से स्कूल में केवल राष्ट्रगान होगा।

वहीं, जिलाधिकारी विशाख का इस मामले पर कहना है कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर मामले में जाँच का आदेश दिया गया है। सोमवार को स्कूल खुलने के बाद स्कूल प्रबंधन, छात्र-छात्राओं, अभिभावकों आदि से बात कर मामले की जाँच की जाएगी।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान से 20 करोड़ घरों में फहरेगा राष्ट्रीय ध्वज, 15 दिन में ₹200 करोड़ का कारोबार संभव: ध्यान रखें चंद बातें

भारतीय झंडा संहिता में मोदी सरकार द्वारा संशोधन किए जाने के बाद अब देश भर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान जोर-शोर से चल रहा है। देश के सर्वोच्च पद पर बैठे लोगों से लेकर सामान्य जन तक इसे लेकर उत्साहित हैं। अभियान का पहला मकसद है कि देश की जनता के दिलों में देशभक्ति की भावना जागे और दूसरा राष्ट्रीय ध्वज की महत्ता पर लोगों को जागरूक किया जाए। हाल में इसी देशभक्ति का प्रमाण देते हुए समुद्र में अंडरवाटर तिरंगा फहराए जाने की तस्वीर सामने आई थी। वहीं दुकानदारों ने भी बताया कि अचानक बाजार में झंडों की बिक्री बहुत बढ़ गई है।

क्या है ‘हर घर तिरंगा’ का उद्देश्य?

जैसा कि ऊपर बताया ‘हर घर तिरंगा’ देश की जनता में राष्ट्रभक्ति को जगाने का एक अभियान है। भारत सरकार द्वारा हाल में भारतीय झंडा संहिता में किए गए संशोधन के बाद इस अभियान को देश भर में चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले दिनों अपील की थी कि देश की जनता 13 अगस्त से 15 अगस्त तक अपने घरों में दिन-रात झंडे को फहराएँ ताकि राष्ट्र ध्वज के साथ हमारा जुड़ाव गहरा हो। साथ ही जनभागीदारी की भावना से आजादी का अमृत महोत्व मनाया जा सके।

सरकार ने लिया हर घर तिरंगा फहरवाने का जिम्मा

अनुमान है कि इस अभियान से आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के दिन 20 करोड़ घरों में तिरंगा लहराता दिखेगा। सरकारी और निजी संस्थान भी इस अभियान का हिस्सा बनेंगे। प्रशासन की ओर से जोर-शोर से इसकी तैयारियाँ हो रही हैं। प्रिंट से लेकर डिजिटल मीडिया तक में इस प्रचार हो रहा है।

तीन आकार के मिलेंगे झंडे

अभियान को कामयाब बनाने के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। केंद्र सरकार ने तीन तरह के झंडों के उत्पादन की व्यवस्था की है। एक आकार 20*30 का होगा। दूसरा 16*24 का और तीसरा 6*9 का होगा। ये तीनों आकार डाकघर में उपलब्ध होंगे। लोग चाहें तो इन्हें ऑनलाइन भी खरीद पाएँगे।

लघु उद्यमियों के लिए अवसर

अभियान को सफल बनाने के लिए 25 करोड़ झंडों की जरूरत पड़ने वाली है। लेकिन फिलहाल देश में केवल 4-5 करोड़ झंडे उपलब्ध हैं। ऐसे में लघु उद्यमियों के बीच भी इस अभियान को लेकर उत्साह है क्योंकि झंडों की जरूरत पूरा करके वह अपने कारोबार का विस्तार भी कर सकते हैं। जानकारी के मुताबिक एक झंडा बनाने में 10-12 रुपए लगते हैं। ऐसे में मात्र दिन में 200 करोड़ का कारोबार संभव है।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भी रखें ध्यान

भारत इस वर्ष आजादी के 75 साल पूरे कर रहा है। ऐसे में ‘हर घर तिरंगा अभियान’ का शुभारंभ जनता के दिलों में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने के लिए है। मोदी सरकार द्वारा किए गए संशोधन के बाद देश का हर नागरिक इस चीज के लिए आजाद है कि वो अपने घर में दिन रात झंडा फहराए। बस उसे तिरंगे को लहराते समय ये ध्यान देना होगा कि उसका प्रयोग व्यावसायिक उद्देश्य के लिए न किया जाए, किसी व्यक्ति या वस्तु को सलामी देने के लिए तिरंगे को न झुकाया जाए, झंडे को वर्दी या पोषाक बनाकर न ओढ़ा जाए, उसे किसी भवन में पर्दे की तरह न लगाया जाए, किसी गाड़ी में उसका प्रयोग चीजों को ढकने में न लाया जाए या किसी अन्य झंडे को उससे ऊपर न फहराया जाए।

कॉमनवेल्थ गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता अचिंता शुली के भाई ने की पश्चिम बंगाल सरकार की आलोचना, जीत की उपेक्षा पर कहा- ‘खेल मंत्री भी सपोर्ट नहीं करते’

कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में वेटलिफ्टर अचिंता शुली ने रविवार (31 जुलाई, 2022) को पुरुषों के 73 किग्रा भारोत्तोलन वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर एक शानदार शुरुआत की। बर्मिंघम में हो रहे राष्ट्रमंडल खेल 2022 में यह भारत का तीसरा स्वर्ण पदक था। अचिंता से पहले मीराबाई चानू और जेरेमी लालरिनुंगा ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ऐसे में जहाँ पूरा देश राष्ट्रमंडल खेलों में अचिंता शुली की सफलता का जश्न मना रहा है, वहीं उनके बड़े भाई आलोक शुली ने पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार द्वारा अचिंता शुली की उपेक्षा किए जाने और किसी तरह की प्रोत्साहन राशि की घोषणा न करने की वजह से आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हावड़ा जिले के पश्चिम बंगाल के देउलपुर गाँव की रहने वाली अचिंता शुली ने अपने बड़े भाई आलोक शुली के अथक समर्थन और प्रयास की बदौलत आज खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर कामयाबी अपने नाम की है। अचिंता ने रविवार को अपने भाई को जीवन के हर दौर में साथ देने और सफलता के इस मुकाम तक पहुँचाने के लिए स्वर्ण पदक समर्पित किया।

इस बीच, उनके भाई आलोक शुली ने अपने छोटे भाई की खेल में स्वर्णिम सफलता की उपेक्षा के लिए पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “2020 में, राज्य सरकार ने एक पुरस्कार दिया, कोई नहीं जानता कि हमारे गॉँव के एक लड़के ने राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया। यहाँ तक ​​कि राज्य के खेल मंत्री भी अज्ञानी लगते हैं, हमें सरकारी समर्थन की आवश्यकता है। जबकि दूसरे राज्यों में एथलीटों को नकद पैसा दिया जाता है, लेकिन हमें अभी तक कुछ नहीं पता कि वो क्या करेंगे। वे इसके लिए कितना पैसा देंगे।”

गौरतलब है कि बेशक बर्मिंघम में राष्ट्रमंडल खेलों में अपने पहले अभियान में एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद बंगाल सरकार अपने खिलाड़ी की सफलता से दूर हो लेकिन रविवार को पश्चिम बंगाल के अचिंता के गाँव में जमकर जश्न मनाया गया।

बता दें कि भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही अचिंता शुली ने राष्ट्रमंडल खेलों के पुराने रिकॉर्ड को भी तोड़ा है। शुली ने कुल 313 किग्रा भार उठाकर स्वर्ण पदक जीता। अचिंता ने स्नैच राउंड में 143 किलो वजन उठाया जबकि क्लीन एंड जर्क में उन्होंने 170 किलो वजन उठाकर गोल्ड मेडल सुनिश्चित कर लिया। अचिंता शुली ने 73 किलो भार वर्ग में कुल 313 किलो का वजन उठाते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स का रिकॉर्ड बनाया।

हालाँकि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी 20 वर्षीय वेटलिफ्टर को उनकी सफलता के लिए ट्वीट कर बधाई दी। लेकिन किसी तरह की प्रोत्साहन राशि की घोषणा नहीं की।

वहीं रविवार को दो स्वर्ण पदकों के बाद, भारत अब राष्ट्रमंडल खेलों 2022 पदक तालिका में पांचवें स्थान पर पहुँच गया है। जेरेमी ने भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीता, उसके बाद अचिंता शुली ने भी रविवार को दूसरा स्वर्ण हासिल किया। मीराबाई चानू के ऐतिहासिक राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक जितने के 24 घंटे से भी कम समय में भारत ने दोहरा स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रच दिया।