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मुख्तार अंसारी की बीवी और MLA बेटा फरार, तलाश में कई जगह छापेमारी: बसपा MP अफजाल की ₹15 करोड़ की संपत्ति कुर्क

उत्तर प्रदेश की बांदा जेल में बंद पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के परिवार पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। रविवार (24 जुलाई 2022) को मुख्तार के सांसद भाई अफजाल अंसारी की 15 करोड़ की संपत्ति कुर्क की गई थी। सोमवार (25 जुलाई 2022) को मुख्तार की बीवी अफशां अंसारी और विधायक बेटे अब्बास अंसारी की तलाश में छापेमारी की गई। दोनों फिलहाल फरार हैं।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) धनंजय मिश्रा ने बताया कि मऊ पुलिस ने गाजीपुर जिले के यूसुफपुर, मोहम्मदाबाद और गाजीपुर शहर में अब्बास और अफशां के आवासों और रिश्तेदारों के यहाँ तलाशी ली, लेकिन दोनों नहीं मिले। उन्होंने बताया कि मऊ स्थित एफसीआई के गोदाम को मुख्तार अंसारी द्वारा अपराध से अर्जित संपत्ति घोषित करते हुए सरकार ने ब्जे में ले लिया है। इस मामले में मुख्तार की पत्नी अफशां, उसके साले और एक अन्य सहयोगी को आरोपित बनाया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हो चुका है, कुर्की की कार्रवाई भी हो चुकी है, लेकिन अफशां अब तक अदालत में हाजिर नहीं हुई हैं।

मिश्रा ने बताया कि मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे और मऊ सदर से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से मौजूदा विधायक अब्बास अंसारी पर इस साल की शुरुआत में हुए प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान अधिकारियों के प्रति आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में स्थानीय एमपी-एमएलए अदालत उन्हें कई बार समन भेज चुकी है। लेकिन वह पेश नहीं हो रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है। 

बता दें कि अब्बास अंसारी ने 2022 के चुनाव के दौरान विवादित बयान दिया था। अब्बास ने कहा था कि चुनाव परिणाम आने के 6 महीने बाद तक अधिकारियों को हटाया नहीं जाए। पहले सपा सरकार बनने के बाद उनसे हिसाब-किताब किया जाएगा उसके बाद ही किसी का ट्रांसफर होगा। उन्होंने यहाँ तक कहा था कि इसको लेकर अखिलेश यादव से भी बातचीत हो चुकी है। वीडियो वायरल होने के बाद अब्बास अंसारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इससे पहले रविवार को गाजीपुर पुलिस ने मुख्तार अंसारी के बड़े भाई और गाजीपुर से बसपा सांसद अफजाल अंसारी पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी करीब 15 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर ली थी। भारी पुलिस बल और राजस्व कर्मियों की मौजूदगी में गाजीपुर के एसपी रोहन पी बोत्रे के नेतृत्व में कुर्की की कार्रवाई की गई थी। मुख्तार अंसारी पर न केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि अन्य राज्यों में भी 50 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

कारगिल का वह युद्ध जिसने बताई ‘अग्निवीर’ की जरूरत: जानिए 2 शैतानों से मुकाबिल सेना को कैसे आधुनिक और हाइटेक बना रही मोदी सरकार

कारगिल युद्ध (Kargil War) नियंत्रण रेखा (LOC) के पार पाकिस्तानी सैन्य बलों द्वारा की गई घुसपैठ के कारण 1998-99 की सर्दियों में शुरू हुआ था। यह षड्यंत्र अति महत्वाकांक्षी तत्कालीन पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल परवेज मुशर्रफ द्वारा ‘जनरलों के गुट’ के साथ मिलकर रचा गया था। इस षड्यंत्र का उद्देश्य श्रीनगर-जोजिला-कारगिल रोड को बाधित करने के लिए कारगिल सेक्टर को कब्जाना था, ताकि लद्दाख पर भारतीय नियंत्रण और सियाचिन ग्लेशियर में भारतीय सेना की तैनाती मुश्किल हो जाए। घुसपैठ से पाकिस्तान का नियंत्रण रेखा के पार सामरिक महत्व के काफी बड़े हिस्से पर नियंत्रण हो जाता। इससे न केवल इस्लामाबाद की स्थिति मज़बूत होती, बल्कि वह भारत पर अपनी शर्तें भी थोप पाता। यह घुसपैठ एलओसी की स्थिति को अपरिवर्तनीय रूप से बदल डालती।

हमारे राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करने वाले दुष्ट पड़ोसी (पाकिस्तान) की निंदनीय साजिश का एक पूर्ण संयुक्त सैन्य कार्रवाई द्वारा मुँहतोड़ जवाब दिया गया था। ‘ऑपरेशन विजय’ के रूप में प्रसिद्ध कारगिल युद्ध लगभग 130 किमी की सीमा पर नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ को बेदखल करने के लिए 16000-18000 फीट की ऊँचाई पर लड़ा गया था। ऊँचाई पर बैठे दुश्मन की सामरिक बढ़त के बावजूद भारतीय सैनिकों ने अद्भुत पराक्रम, साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए उसे अपनी धरती से खदेड़ डाला।

26 जुलाई 1999 (कारगिल विजय दिवस) से अब तक 23 साल बीत चुके हैं। देशवासी एक बार फिर मई-जुलाई 1999 में पाकिस्तान के साथ लगभग तीन महीने के लंबे संघर्ष में कारगिल की ऊँचाई पर बलिदान हुए 527 सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इस दिन भारतीय सेना के जाँबाज सैनिकों ने दुर्गम पहाड़ियों पर चढ़ते हुए और असंख्य बाधाओं से जूझते हुए विजयश्री का वरण किया था।

‘कारगिल विजय दिवस’ के अवसर पर भारत माँ के शहीद बेटों को सही श्रद्धांजलि तभी मिलेगी, जबकि हम भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति को रोक पाने में पूर्ण सक्षम हो जाएँ। इसलिए हमारी सुरक्षा प्रणाली की खामियों को शीघ्रातिशीघ्र दूर करने की आवश्यकता है। भारत को दो-दो शैतान और शातिर पड़ोसियों से लगातार सावधान रहना पड़ता है। ये ईर्ष्यालु पड़ोसी हर पल घात लगाकर हमले की ताक में रहते हैं।

कोई भी युद्ध केवल सशस्त्र बलों द्वारा नहीं लड़ा जाता है, बल्कि पूरे देश- सरकार और उसके सभी अंगों, राजनीतिक नेतृत्व, मीडिया और देशवासियों द्वारा संगठित होकर लड़ा जाता है। कारगिल युद्ध एक ऐसा ही अवसर और अनुभव था। उस विषम परिस्थिति में सम्पूर्ण राष्ट्र को एकजुट था।

हालाँकि, संघर्ष के दौरान प्राप्त राजनीतिक, राजनयिक और सैन्य अंतर्दृष्टि ने हमारे देश के राजनीतिक-सैन्य संबंधों, संरचनाओं और प्रक्रियाओं में बदलावों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया था। पिछले एक दशक में भारतीय सेना ने लगातार ‘दो-मोर्चे पर युद्ध’ लड़ने की आवश्यकता को महसूस किया है। पिछले दिनों भारतीय सेना को 50 वर्षों में चीन के साथ सबसे गंभीर सैन्य टकराव का सामना करना पड़ा है। महामारी के बीच 2020-21 में चीनी सेना की भारतीय क्षेत्र में अवैध घुसपैठ ने भारतीय सेना को चौंका दिया और भारत को चौकन्ना कर दिया है। सीमा पर हुई झड़पों में भारतीय और चीनी सैनिक हताहत हुए। हाल-फिलहाल चीनी रवैये में कुछ नरमी दिख रही है, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।

यूँ भी चीन कभी विश्वसनीय पड़ोसी नहीं रहा। विस्तारवाद और विश्वासघात ही उसकी विदेश नीति है। जिस प्रकार 1999 में हुए कारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपने रक्षा बलों, कमान और नियंत्रण संरचनाओं में सुधार और आधुनिकीकरण के बारे में गंभीरता से सोचना शुरू कर दिया था, उसी प्रकार 2020-21 के गलवान संकट ने भारतीय सेना के लिए नए युग की प्रौद्योगिकियों, मुख्य रूप से ड्रोन और साइबर युद्ध के महत्व को रेखांकित करते हुए आवश्यक बदलावों की अपरिहार्यता स्पष्ट कर दी है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आँकड़ों के अनुसार, भारत पिछले चार दशकों में दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है। यह स्थिति युद्धकाल में हमें बाहरी प्रभाव और दबाव के प्रति बेहद संवेदनशील बनाती है। इसलिए रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना आवश्यक है।

अपनी ग़लतियों से सबक सीखने और हमारे उच्चस्तरीय रक्षा तंत्र को त्वरित, गतिशील और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 1999 के कारगिल युद्ध के बाद कारगिल समीक्षा समिति का गठन किया गया था। चिंताजनक बात यह है कि पिछली सरकारों ने इस समस्या को स्वीकारते हुए भी उल्लेखनीय नीतिगत परिवर्तन नहीं किए। मोदी सरकार ने भारत के घरेलू रक्षा उद्योग की स्थापना पर विशेष जोर दिया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत सरकार ने रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता दी है। श्रमिक संघों के विरोध के बावजूद सरकार आयुध कारखानों के निजीकरण जैसे राजनीतिक रूप से जोखिमपूर्ण निर्णयों पर आगे बढ़ी है। सरकारी नीतियाँ राज्य के साथ-साथ निजी क्षेत्र के स्वामित्व वाले रक्षा उद्यमों/उद्योगों के पक्ष में हैं।

इसके अलावा, इस क्षेत्र में भागीदारी के लिए विदेशी फर्मों को भी प्रोत्साहित करने के लिए सरकार भरसक प्रयास कर रही है। निश्चित रूप से सबसे पहला काम सेना के तीनों अंगों और रक्षा उद्योग का एक साथ काम करने की दिशा में समंजन है। पहले आपसी अविश्वास, अकर्मण्यता, अक्षमता और भ्रष्टाचार का बोलबाला था। अब सभी हितधारकों को एक साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार ने रक्षा उद्योग को निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने के लिए भी प्रेरित किया है। एक अनुमान के अनुसार यह 2016 से 2020 के बीच 700 प्रतिशत से अधिक बढ़ा है।

एल एंड टी कंपनी ने कोरिया की कम्पनी सैमसंग के साथ साझेदारी में 100 आर्टिलरी गन (155/52 मिमी के-9 वज्र ट्रैक एसपी) के निर्माण के लिए 5400 करोड़ रुपये का ऑर्डर प्राप्त किया है, और वह डीआरडीओ के साथ मिलकर लक्ष्य-1 और लक्ष्य-2 पायलटरहित लक्ष्यविमानों का निर्माण भी कर रही है। डीआरडीओ ने एफआईसीवी के निर्माण के लिए भारत फोर्ज और जनरल डायनामिक्स के साथ करार किया है। टाटा सामरिक प्रभाग ने मध्यम परिवहन विमान के निर्माण के लिए एयरबस इंडस्ट्रीज के साथ हाथ मिलाया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स, डायनामिक टेक्नोलॉजीज, टीवीएस लॉजिस्टिक्स, एमकेयू, और अन्य ने भी रक्षा उपकरणों के निर्माण क्षेत्र और निर्यात बाजार में प्रवेश किया है। इस काम को गति देने के लिए दो रक्षा औद्योगिक परिक्षेत्र (कॉरिडोर) भी बनाए जा रहे हैं। यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के लिए शुभ संकेत है। इसके अलावा, वर्षों से लंबित कई प्रमुख रक्षा उपकरणों की खरीद भी गई है। सरकार ने उपकरणों की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया है। थल सेना के लिए अमेरिका से नई SiG 716 राइफलें, वायु सेना के लिए फ्रांस से राफेल जेट, चिनूक हैवी लिफ्ट, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और रूस से S 400 वायु रक्षा प्रणाली खरीदी गई हैं।

कारगिल समीक्षा समिति (केआरसी) ने जिन सुधारों की सिफारिश की थी, उनमें से एक सशस्त्र बलों की भर्ती प्रक्रिया से संबंधित भी था। इसमें कहा गया है कि सेना युवा और हमेशा फिट होनी चाहिए। इसलिए, 17 साल की रक्षा सेवा (जैसी कि 1976 से ही नीति रही है) की वर्तमान व्यवस्था के बजाय सलाह दी गई कि रक्षा सेवा को सात से दस साल की अवधि तक सीमित कर दिया जाए। सिर्फ कारगिल समिति ही नहीं, भारतीय सेना ने भी अग्निपथ जैसी ही भर्ती योजना का प्रस्ताव रखा था। 2020 में सेना ने 3 साल के लिए युवाओं की भर्ती हेतु ‘टुअर ऑफ ड्यूटी’ योजना का प्रस्ताव रखा था। हाल में शुरू की गई अग्निवीर योजना पर उपरोक्त प्रस्तावों का प्रभाव दिखाई देता है।

वर्तमान सरकार द्वारा रक्षा प्रणाली में किए गए प्रमुख सुधार अग्निवीर भर्ती योजना, तीनों सेनाओं की संयुक्तता और तालमेल को बढ़ावा देने के लिए सशस्त्र बलों के थिएटर कमांड का पुनर्गठन, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति, सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) की स्थापना, 40 साल बाद वन रैंक वन पेंशन का कार्यान्वयन, डिफेंस स्पेस और साइबर एजेंसियों की स्थापना, स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन, और सात डीपीएसयू में आयुध कारखानों (ओएफ) का निगमीकरण आदि हैं। ये सुधार सशस्त्र बलों को उपयुक्त आकार, कौशल, तकनीक और उपकरणों से लैस कर उन्हें अधिक सक्षम, पेशेवर और मारक (संहारक) बनाएँगे। इससे उनकी क्षमता और मनोबल दोनों बढेंगे। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अग्निपथ योजना चीन को जवाब देने में मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है। भारत के युवा और तकनीकक्षम उत्साही अग्निवीर सीमा पर अजगर का फन कुचल सकेंगे।

1999 के और आज के समय में बहुत फ़र्क है। भविष्य के युद्धों में सैनिकों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उनकी दक्षता, अत्याधुनिक हथियार और उपकरण, सूचना-तकनीक ढाँचा आदि होंगे। इसलिए भारतीय सेना को नई जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाना आवश्यक है। ये रक्षा सुधार लंबे समय से लंबित थे और नई चुनौतियों और खतरों का सामना करने के लिए अपरिहार्य हैं। ये 21वीं सदी में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्वयं को स्थापित करने की भारत की महत्वाकांक्षा के भी अनुरूप हैं।

(लेखक जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय में अधिष्ठाता, छात्र कल्याण हैं)

‘जाहिद-अरमान ने पोती-बहू को कर लिया अगवा, धर्म परिवर्तन का डाल रहे दबाव’: बिहार के बेगूसराय का बुजुर्ग लाचार, मदद की लगा रहे गुहार

बिहार के बेगूसराय के डुमरी इलाके से एक लाचार हिंदू व्यक्ति की वीडियो सामने आई है। वीडियो में वह व्यक्ति आरोप लगाता है कि इलाके की बहुसंख्यक आबादी उन पर व उनके परिवार पर बहुत समय से इस्लाम कबूलने का दबाव बना रही थी और अब उन लोगों ने उनकी पोती और उनकी बहू का अपहरण कर लिया है।

ये वीडियो विश्व हिंदू परिषद बजरंग दल प्रांत सह संयोजक शुभम भारद्वाज द्वारा ट्विटर पर 25 जुलाई को रिकॉर्ड करके अपलोड की गई थी। इसमें पीड़ित व्यक्ति बताते हैं,

“हम लोग डुमरी के रहने वाले हैं। मेरी पोती राखी(बदला नाम) और बहू प्रीति (बदला नाम) को कुछ लड़कों ने रात से गायब किया हुआ है। इन लड़कों के नाम जाहिद और अरमान है। ये लोग हमें जान से मारने की धमकी देकर कहते हैं धर्म परिवर्तन करके या तो मुसलमान हो जाओ वरना ये-वो (बुरा) कर देंगे।”

बुजुर्ग व्यक्ति वीडियो में दोबारा पूछे जाने पर स्वीकारते हैं कि उन्हें उनके इलाके के मुस्लिम धर्म परिवर्तन के लिए कह रहे हैं। उनके मुताबिक ये समस्या कोई अब की नहीं है। काफी समय से उनके साथ ऐसा हो रहा है। बराबर उन्हें व उनके परिवार को ये धमकियाँ मिलती रहती हैं। वह कहते हैं कि उन्हें बस मदद चाहिए और कुछ नहीं।

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने इस वीडियो को शेयर कर लिखा है, “जिहादियों की जन्नत व हिंदू समाज के लिए नरक बन रहा है बिहार। क्या वाकई लाचार है सुशासन सरकार।”

जानकारी के मुताबिक, इस अपहरण के संबंध में और इससे पहले की घटनाओं पर डुमरी के थाना मुफस्सिल में शिकायत भी हुई थी। ये शिकायत बुजुर्ग व्यक्ति के बेटे ने दी थी। बुजुर्ग के बेटे ने बताया था कि अरमान और जाहिद समेत कुछ लड़कों ने दो सालों से उनकी पत्नी को बहला-फुसला कर अपने कब्जे में किया हुआ था। वह लोग उनकी बेटियों को देह व्यापार में ढकेलना चाहते थे। हालाँकि जब उन्होंने इन चीजों का विरोध किया तो उन लोगों ने घर में आकर पत्नी और बेटी से संबंध बनाने शुरू किए। वहीं जब माता-पिता ने रोक-टोक की कोशिश की तो उन्हें धमकी दी गई कि पत्नी और बेटी को देह व्यापार में ढकेलकर, सबकी हत्या कर देंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपितों के ऊपर महिला और उसकी बच्चियों से जबरन संबंध बनाने के आरोप हैं। साथ ही महिला से कहकर जबरन परिवार के विरुद्ध केस कराने की बात भी सामने आई है।

बेगूसराय में हिंदुओं पर हमला

गौरतलब है कि ये बिहार के बेगूसराय में हिंदुओं पर हुए अत्याचार की कोई पहली कहानी नहीं है। इससे पहले बेगूसराय के मुफ्फसिल थाना अंतर्गत रजौरा गाँव में होली के वक्त मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं को निशाना बनाया था। विवाद बच्चों के झगड़ों से शुरू हुआ था। लेकिन बाद में दूसरे समुदाय ने धारधार हथियार समेत लाठी डंडा लेकर हिंदू समुदाय के लोगों पर हमला बोला था और घटना में 20 से अधिक हिंदू घायल हो गए थे।

MS धोनी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, आम्रपाली ग्रुप के साथ ₹150 करोड़ के लेनदेन का है मामला: ग्राहकों को नहीं मिले फ्लैट्स, ब्रांड एम्बेसडर थे माही

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन्हें आम्रपाली ग्रुप के साथ 150 करोड़ रुपए के लेन-देन के मामले में जारी किया गया है। दरअसल, आम्रपाली ग्रुप के फ्लैट्स की डिलीवरी को लेकर मामले में सोमवार (25 जुलाई, 2022) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ा एक मामला भी कोर्ट के सामने आया। जिसमें महेंद्र सिंह धोनी को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धोनी को आम्रपाली ग्रुप की तरफ से 150 करोड़ रुपए का बकाया लेना है, दूसरी ओर ग्राहकों को उनके फ्लैट्स नहीं मिल रहे हैं, ऐसे में यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप और महेंद्र सिंह धोनी को नोटिस जारी किया है। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली ग्रुप के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से शुरू की गई मध्यस्थता की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी है।

इस मामले में पीड़ितों का कहना है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने जिस कमेटी का गठन किया गया है, उसके सामने महेंद्र सिंह धोनी अपने बकाए 150 करोड़ रुपए का मामला ले गए हैं। बता दें महेंद्र सिंह धोनी आम्रपाली ग्रुप के ब्रांड एंबेसडर थे, जिसके लिए उनके 150 करोड़ रुपए बकाया हैं। उन्होंने उस दौरान ग्रुप के लिए कई विज्ञापन भी शूट किए थे। साल 2016 में जब आम्रपाली ग्रुप के विरोध में कई कैम्पेन चलाए गए थे। तब धोनी ने खुद को इस ग्रुप से अलग कर लिया था।

पीड़ितों ने कहा कि अगर आम्रपाली ग्रुप धोनी के बकाए की इतनी बड़ी रकम देने में पैसे खर्च करेगा तो उनके फ्लैट और अटके रह जाएँगे। यही कारण है कि अब सुप्रीम कोर्ट ने महेंद्र सिंह धोनी और आम्रपाली ग्रुप को नोटिस जारी किया है और अपना पक्ष रखने को कहा है। हालाँकि, सर्वोच्च अदालत ने अभी मध्यस्थता कमेटी की सुनवाई या किसी तरह के एक्शन पर रोक नहीं लगाई है।

वहीं आम्रपाली ग्रुप का भी कहना था कि फंड की कमी की वजह से लोगों को फ्लैट नहीं मिल पा रहे हैं और दूसरी तरफ धोनी 150 करोड़ रुपए की माँग करते हुए मामला मध्यस्थता कमेटी के पास ले गए हैं। अगर मध्यस्थ कमेटी धोनी के पक्ष में फैसला सुनाती है तो आम्रपाली ग्रुप को 150 करोड़ रुपए देने पड़ेंगे। ऐसे में खरीददारों को फ्लैट मिलना मुश्किल हो जाएगा।

गौरतलब है कि आम्रपाली ग्रुप और महेंद्र सिंह धोनी से जुड़ा यह केस पहले दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहा था, जहाँ पर हाईकोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था। वहीं आज सर्वोच्च अदालत में हुई सुनवाई के दौरान पीड़ितों की ओर से यह दलील दी गई थी कि आम्रपाली ग्रुप के पास फंड की कमी है, इसलिए उनके द्वारा बुक करवाए हुए फ्लैट नहीं मिल पा रहे हैं। इसी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने धोनी को नोटिस थमाया है।

निकाह से इनकार करने पर मोहम्मद आदिल ने छात्रा को मार डाला था, अब उसकी फाँसी का होगा LIVE प्रसारण: 19 बार घोंपा था चाकू, फिर काट डाला सिर

मिस्र की एक अदालत ने रविवार (24 जुलाई 2022) को छात्रा नायरा अशरफ के हत्यारे की फाँसी की सजा लाइव (LIVE) दिखाने के आदेश दिए, ताकि बेरहमी से होने हत्याओं को रोका जा सके है। मंसौरा क्रिमिनल कोर्ट (Mansoura Criminal Court) ने संसद से कहा है कि वह हत्यारे की फाँसी के लाइव प्रसारण की अनुमति देने के लिए कानूनी संशोधन करें।

मोहम्मद आदिल (Mohamed Adel) को पिछले महीने (20 जून, 2022) मंसौरा विश्वविद्यालय की छात्रा नायरा अशरफ (Naira Ashraf) की सुनियोजित हत्या का दोषी पाया गया था। आदिल ने 26 जून को अपना गुनाह कुबूल किया था। उसने बताया था कि नायरा अशरफ के निकाह से इनकार करने पर वह आहत था। 20 जून को जब नायरा फाइनल एग्जाम देने के लिए मंसौरा विश्वविद्यालय में प्रवेश करने वाली थी। उसी वक्त आदिल ने दिनदहाड़े उसे 19 बार ताबड़तोड़ चाकू घोंपा और फिर उसका सिर काटकर उसकी हत्या कर दी।

हत्यारे ने अदालत में दावा किया कि वह अपने बचाव में घटना वाले दिन अपने साथ चाकू लेकर लाया था, लेकिन जब छात्रा ने उसे अपमानित किया तो उसने बिना कुछ सोचे-समझे उस पर हमला कर दिया।

अदालत ने 28 जून को मोहम्मद आदिल को फाँसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि लाइव सजा से उन लोगों में खौफ बढ़ेगा, जो इस तरह के अपराधों को अंजाम देते हैं। अदालत ने कहा कि उन्होंने हत्या करने से पहले और उसके बाद दोषी की मानसिक, मनोवैज्ञानिक स्थिति, पसंद और नापसंद का पता लगाया है। इसके साथ ही अदालत ने हत्यारे के अपराध की योजना, हत्या करने के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार और उसके द्वारा तय की गई तारीख और स्थान के माध्यम से यह पता लगाया कि वह किस प्रवृति का है। सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई हत्या ने पूरे मिस्र और मिडल ईस्ट को झकझोर कर रख दिया है।

बता दें कि जून में हत्यारे का एक वीडियो खूब वायरल हुआ था, जिसमें आदिल को मंसौरा में उसके विश्वविद्यालय के बाहर छात्रा को छुरा घोंपते हुए दिखाया गया था। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, मिस्र में हत्या के लिए अधिकतम सजा मौत है। 

‘खुले में नमाज पर आपत्ति क्यों?’ काँवड़ियों पर पुष्प वर्षा से बरखा दत्त को लगी मिर्ची, लोगों ने कहा- भोले के भक्त सड़क नहीं कब्जाते

सावन के महीने में काँवड़िए बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए कोई हरिद्वार तो कोई काशी निकल पड़ा है। उनके लिए जगह-जगह लंगर, आराम करने की जगह से लेकर हरिद्वार में उनपर पुष्प वर्षा भी हो रही है। इस बीच NDTV की पूर्व पत्रकार और मोजो न्यूज़ की संपादक, बरखा दत्त को पुष्प वर्षा से मिर्ची लगी है। जिसके बाद उन्होंने ट्विटर पर आकर इस इसमें प्रशासन की संलिप्तता का विरोध किया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “राज्य के अधिकारियों के लिए काँवड़ियों पर पंखुड़ियों की बौछार करना लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर आपत्ति जताना कैसे ठीक है? मैं साझा सार्वजनिक स्थानों पर फैले धर्म की प्रशंसक नहीं हूँ, लेकिन यह खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण है।”

एक तरह से सार्वजनिक स्थानों पर नमाज के विरोध को देखते हुए उन्होंने काँवड़ियों पर सधा हुआ अटैक किया है। यहाँ उन्हें राज्य की संलिप्तता अखर रही है जबकि कोई त्यौहार सही से उस देश या प्रदेश के लोग मना पाएँ यह भी उसी की जिम्मेदारी होती है। हालाँकि, बरखा दत्त के ट्वीट पर जहाँ लिबरल और वामपंथी गिरोह समर्थन में उतरा तो वहीं बहुत से लोगों ने सोशल मीडिया पर करारा जवाब दिया है।

बरखा दत्त को जवाब देते हुए मृत्युंजय कुमार ने लिखा, “भोलेनाथ के भक्त काँवड़िया साल में एक महीने के लिए आते हैं। ज़मीन पर क़ब्ज़ा करके नहीं बैठ जाते। तुलना तो ठीक से करिए बरखा दत्त जी।”

वहीं स्टोरीटेलर नामक ट्विटर हैंडल ने लिखा, “आपकी बात सराहनीय है लेकिन नमाज़ रोज़ाना 5 बार होती है, जो सुबह अज़ान के साथ शुरू होती है और शाम को समाप्त होती है। नमाज और संबंधित लोगों की संख्या और वार्षिक काँवड़ियों के अनुपात में दूसरे मामले में असुविधा ज़्यादा है। कुरान में सड़कों पर नमाज़ अनिवार्य नहीं है लेकिन वे सड़क… यह एक लंबी बहस है।”

इस मामले में कई लोगों ने बरखादत्त के नमाज से काँवड़ियों की तुलना पर उन्हें यही बात समझाई कि नमाज एक दिन में पाँच बार होती है और जिसके लिए मस्जिद जाने में कोई मनाही नहीं है लेकिन सड़क पर नमाज अनिवार्य नहीं है। और वह रोज की असुविधा है जबकि काँवड़िया साल भर में एक महीने के लिए बाहर निकलते हैं और काँवड़ यात्रा घर में नहीं हो सकती। इसलिए इनकी तुलना ही बेकार है। लोगों ने बरखा दत्त को इस बात पर भी लताड़ भी लगाई है।

आप लोगों के रिएक्शन देख सकते हैं। नीचे कुछ ट्वीट दिए गए हैं।

हालाँकि, देखा जाए तो यही बरखा दत्त खुलकर कभी हज सब्सिडी या सड़कों पर नमाज के विरोध में एक शब्द भी कहने या लिखने नहीं आतीं। कभी सरकारी संस्थानों या यहाँ तक कि पूर्व के मंत्रियों-नेताओं के घरों में दिए गए रोजा इफ्तार पर के खिलाफ कभी सवाल नहीं उठाया होगा। इनके ट्वीट अक्सर होली, दिवाली या सनातन हिन्दू धर्म से जुड़े पर्वों पर ही आते हैं। इसलिए बहुत से लोग अपनी टिप्पणियों में इन्हीं मुद्दों पर बरखा दत्त जैसे वामपंथी-लिबरल गिरोह से जवाब माँग रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मेरठ के आईजी रेंज प्रवीण कुमार और डीएम दीपक मीणा हेलिकॉप्टर से काँवड़ियों पर फूल बरसा रहे हैं।

‘वो न होते तो हम बिहार बन गए होते’: तमिलनाडु के विधानसभा अध्यक्ष ने ईसाई मिशनरियों को दिया राज्य के विकास का श्रेय

तमिलनाडु (Tamil Nadu) विधानसभा के अध्यक्ष एम अप्पावु (M Appavu) विवादित बयान देने के बाद से चर्चा में हैं। उन्होंने सोमवार (25 जुलाई 2022) को कहा कि तमिलनाडु के विकास में ईसाई मिशनरियों का अहम योगदान है। उन्होंने राज्य के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए, इनके बिना ये राज्य बिहार बन गया होता। वहीं, भाजपा ने तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष एम अप्पावु को आड़े हाथों लेते हुए उनसे ‘सांप्रदायिक टिप्पणी’ के लिए माफी माँगने को कहा है।

भाजपा प्रवक्ता मोहन कृष्ण ने टाइम्स नाउ से कहा, “तमिलनाडु के स्पीकर को माफी माँगनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है वह सांप्रदायिक हैं। कैथोलिक ईसाइयों के बिना तमिलनाडु बिहार बन जाएगा। यह पूर्ण तुष्टिकरण है।” भाजपा नेता ने तमिलनाडु में सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी की हिंदू विरोधी मानसिकता है। उन्होंने कहा, “सत्ता में आने के बाद से द्रमुक हमेशा विवादों में रही है। उनका एजेंडा वहाँ के हिंदुओं को नीचा दिखाना और राज्य में हिंदू विरोधी प्रचार को बढ़ावा देना है।”

उधर अप्पावु ने दावा किया कि कैथोलिक मिशनरियों के कारण ही आज वह इस मुकाम तक पहुँचे हैं। सरकार उन लोगों की है, जो उपवास रखते हैं और प्रार्थना करते हैं। स्पीकर अप्पावु ने यह भी कहा, “मुख्यमंत्री (एमके स्टालिन) जानते हैं कि यह सरकार आप सभी ने बनाई है। आप (कैथोलिक मिशन) आगे बढ़कर अपने सीएम से बात कर सकते हैं। मैं आपका समर्थन करूँगा। आपके बिना तमिलनाडु का विकास संभव नहीं होगा। अगर ईसाई मिशनरी नहीं होती, तो तमिलनाडु भी बिहार जैसा होता।” उन्होंने आगे कहा, “कैथोलिक मिशनरी विकास का मुख्य कारण रहे हैं। तमिलनाडु की मजबूत नींव आपने ही रखी है।”

इस पर विवाद गहराने के बाद स्पीकर अप्पावु ने इंडिया टुडे से खास बातचीत में दावा किया, “मैंने केवल इतिहास का उल्लेख किया है।” भाजपा के सवालों का जवाब देने से इनकार करते हुए स्पीकर ने कहा, “केवल ईसाई मिशनरियों ने सभी के लिए शिक्षा उपलब्ध कराई। ईसाई मिशनरियों ने सामाजिक समानता लाई। द्रविड़ आंदोलन उनके काम का विस्तार है।”

काँवड़ियों पर बरस रहे जो फूल, उनसे जल रहे कई घरों के चूल्हे: सावन में व्यापारियों की बल्ले-बल्ले, चाय से लेकर चूड़ी बेचने वालों तक ने कहा – महादेव की कृपा

हिन्दू व्रत और त्योहारों पर बंटने वाले वामपंथी अज्ञान से काँवड़ यात्रा भी अछूती नहीं है। महादेव शिव के भक्तों की इस भक्तिमय यात्रा पर विभिन्न प्रकार की उँगलियाँ उठाने वालों के आरोपों में सच्चाई खोजने हमने 23 जुलाई 2022 (शनिवार) को काँवड़ियों के साथ बाइक पर हरिद्वार की यात्रा की। इस दौरान हमने काँवड़ियों के आम जनता और सरकारी कर्मचारियों के साथ व्यवहार के अलावा इस सावन माह के आर्थिक पहलुओं की भी जाँच की।

काँवड़ियों बरसते फूल और बँटे फल गरीबों से खरीदे

अपनी यात्रा के पहले पड़ाव में हम मुजफ्फरनगर से निकले और अति हाइवे से हरिद्वार की तरफ बढ़े। रास्ते में ‘बोल बम’ के नारे लगाते जा रहे काँवड़ियों पर नई मंडी थाने के SHO इंस्पेक्टर सुशील सैनी अपनी पूरी पुलिस टीम के साथ फूल बरसाते नजर आए। उन्होंने हमसे बात करते हुए बताया, “ये फूल हमने थोक भाव में अपने ही थानाक्षेत्र के एक गरीब फूल विक्रेता से खरीदे हैं। चंदा पूरे थाने की फ़ोर्स ने अपनी मर्जी से दिया। जिसने हमने फूल खरीदे वो काफी खुश है क्योंकि उसको फूलों के लगातार नए ऑर्डर भी मिल रहे हैं। हमें ख़ुशी है कि हमारे द्वारा बरसाए फूल न सिर्फ धर्म कार्य में लग रहे हैं बल्कि उस से किसी गरीब के घर में चूल्हा भी जल रहा है।”

कांवड़ियों पर पूरी टीम के साथ फूल बरसाते इंस्पेक्टर सुशील सैनी

यहाँ ये बात गौर करने लायक जरूर है कि इस पुष्प वर्षा पर वामपंथी व कट्टरपंथी सबसे अधिक सवाल खड़े करते हैं। जिस स्थान पर ये पुष्पवर्षा हो रही थी वहाँ पर कई फल बेचने वालों ने अपनी दुकानें लगा ली हैं। उनका कहना था, “अक्सर अधिकारी और अन्य कई लोग आते हैं और हमसे ही फल खरीद कर काँवड़ियों को दान करते हैं। हमारी अच्छी बिक्री हो रही है इस यात्रा में।”

ठेले वालों से फल खरीद कर काँवड़ियों में बाँटते पुलिसकर्मी

एक झाँकी बनवाने में कई दुकानदारों को फायदा

दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत की झाँकी बनवाने वाले मेरठ के त्रिवेंद्र ने हमें बताया, “एक झाँकी बनवाने और उसे ले जाने में लगभग 5 लाख रुपए का ख़र्च आया है। इसमें लोहे, पेंट, पेंटर, कारीगर सबको पैसे दिए गए। इसे खींचने वाला ट्रैक्टर भी हमने किराए पर लिया है। हमने आपस में चंदा लगाया इसलिए हम पर बोझ भी नहीं पड़ा और इतने अलग-अलग दुकानदारों का भी घर चलेगा।”

ऑपइंडिया से बात करते स्व0 CDS बिपिन रावत की झाँकी बनावाने वाले त्रिवेंद्र

काँवड़ यात्रा में 4 पैसे बढ़ जाते हैं

हरिद्वार के रास्ते में पुरकाजी के पास हाइवे पर गन्ने का जूस बेचने वाले कश्यप जी ने हमें बताया, “हम तो यहाँ साल भर जूस बेचते हैं लेकिन काँवड़ माह में हमें थोड़ा बढ़ कर पैसे मिलते हैं। सब महादेव जी की कृपा है।”

गन्ने का जूस बेचते कश्यप जी

परचून वालों से करते है काफी खरीदारी

उत्तराखंड की सीमा में घुसते ही मंडावली क्षेत्र में निशुल्क शिकंजी और चाय का कैम्प लगा था। उस कैम्प को चलाने वाले राजवीर सिंह ने हमसे कहा, “प्रतिदिन चाय और शिकंजी मिला कर हम कुन्तलों में दूध, चीनी, बिस्किट और नींबू खरीदते हैं। ये सब हम स्थानीय दुकानदारों से नकद पैसे दे कर लेते हैं। उसकी आधे साल की कमाई इसी सावन मास में हो जाती है। हम एक फैक्ट्री के स्टाफ हैं और ये निशुल्क कैम्प हमारी फैक्ट्री के सभी स्टाफ द्वारा आपस में मिल-जुल कर पैसे जमा करने से चलता है। हमारे पैसे से काँवड़ियों के साथ दुकानदारों का भी पेट भर रहा। ये सब शिव शम्भू की कृपा है।”

काँवड़ियों की सेवा करते राजवीर सिंह

नाबालिग आशू रोज कमा रहा 1 हजार से अधिक रुपए

उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास कटे हुए पपीते छोटे पत्तलों में बेच रहे एक लड़के पर हमारी नजर पड़ी। उसने खुद को आशू बताया और कहा, “मेरी उम्र 15 साल है। मैं थोक में मंडी से पापीता खरीद लाता हूँ और एक पत्ता पपीता 10 रुपए में बेचता हूँ। काँवड़ियों की भीड़ में हर दिन 100 से ज्यादा पत्ते बिक जाते हैं और मेरी हर दिन 1 हजार से अधिक कमाई है। मेरे माता-पिता गरीब हैं और हम सब मिल कर कमाते हैं।”

आशु धारीवाल

बेचते हैं 12 महीने पर इस महीने अधिक कमाई

रुड़की से पहले सड़क पर महादेव शिव के कपड़े बेचने वाले मोनू कमर ने कहा, “हम यहाँ 12 महीने कपड़े बेचते हैं लेकिन हमें काँवड महीने में अधिक फायदा मिलता है।”

मोनू कुमार

काँवड़ से सबको फायदा

पतंजलि योगपीठ से थोड़ी ही दूर पर भारत का राष्ट्र ध्वज और भगवा झंडे बेचने वाले सन्नी कुमार ने कहा, “काँवड़ से मेरा ही नहीं बल्कि हर किसी का फायदा है।”

झंडा बेच रहे सन्नी कुमार

काँवड़ में बढ़ जाती है हमारी बिक्री

हरिद्वार के भैरव घाट पर महिलाओं के साज-श्रृंगार के सामान बेचने वाले संजीव कुमार के मुताबिक काँवड़ यात्रा में हमारी बिक्री अन्य दिनों के मुकाबले बढ़ती है।”

चूड़ी-बिंदी बेचने वाले संजीव कुमार

इस त्यौहार के बाद हमारा धंधा मंदा

हर की पौड़ी पर चाय बेचने वाले मोहन लाल राठौर ने कहा, “हम काँवड़ यात्रा में बहुत अच्छी कमाई करते हैं। इस त्यौहार के बाद हमको लम्बे समय तक मंदी झेलनी पड़ेगी। इसमें हमारी हुई कमाई उस मंदी में काम आती है।”

चाय विक्रेता मोहनलाल राठौर

होटल और धर्मशाळा संचालकों ने हमारे द्वारा खाली कमरे की माँग पर हाउस फुल होना बताया। हमारी पूरे 2 दिनों के सफर के दौरान एक भी दुकानदार ऐसा नहीं मिला जिसने काँवड़ यात्रा से खुद को घाटे में बताया हो।

‘हम काहे मानें मुग़ल आक्रांता थे?’: श्रीकृष्ण पर टिप्पणी वाले वीडियो के बाद ओझा सर की सफाई – बस उदाहरण दिया था, कोई भी धर्म बुरा नहीं

भगवान श्रीकृष्ण यादवों की बीवियों के संग नाचते थे, बाद में उन्हें शक्तिशाली मान कर सालियाँ भी दे दी। 9/11 का हमला ओसामा बिन लादेन की बड़ी उपलब्धि थी। जब पूरी दुनिया में अँधेरा था, इस्लाम ने प्रकाश फैलाया। ये तीनों ही बयान अवध प्रताप ओझा, यानी ‘ओझा सर’ के हैं। इस पर बवाल मचा हुआ है। सोशल मीडिया में उनकी आलोचना हो रही है। अब ऑपइंडिया से बात करते हुए UPSC कोचिंग कराने वाले ओझा सर ने इन मुद्दों पर सफाई दी है।

जब हमने उनसे पूछा कि भगवान श्रीकृष्ण को लेकर उन्होंने जो बयान दिया था, क्या वो किसी साहित्य-धर्मग्रंथ में है, तो अवध प्रताप ओझा ने कहा कि उन्होंने तो बस उदाहरण दिए थे। उन्होंने कहा कि जो बड़े लोग होते हैं, उनके मित्र नहीं होते। उदाहरण के रूप में उन्होंने महात्मा गाँधी का नाम गिनाते हुए कहा कि शक्तिशाली लोगों की मित्रता नहीं होती, सब उससे चिढ़ते हैं। इसीलिए, उन्होंने कहा कि बलराम भी श्रीकृष्ण से चिढ़ते थे।

इसके लिए उन्होंने सूरदास की पंक्ति ‘गोरे नंद जसोदा गोरी, तू कत स्यामल गात।’ को गिनाया। अवध प्रताप ओझा ने आगे कहा कि बलराम ये कहते थे कि वृन्दावन के यादव श्रीकृष्ण को मारने की योजना बना रहे हैं, जिस पर श्रीकृष्ण ने पूछा कि क्यों मारेंगे? बलराम ने जवाब दिया कि आप उनकी बीवियों संग नाच रहे हैं तो क्या मारेंगे नहीं? बकौल अवध प्रताप ओझा, उन्होंने उदाहरण दिया था कि जब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठा लिया तो यादवों ने कहा कि आप हमारी पत्नियों के साथ नाच रहे हो, अब सालियों के साथ भी नाचो – ये संदर्भ है।

हालाँकि, वो ये नहीं बता पाए कि इसका जिक्र कहाँ है। उन्होंने दावा किया कि जब आप किसी चीज का उदाहरण देते हैं, बचपन में लोगों ने ‘Reference & Context (सन्दर्भ एवं प्रसंग)’ पढ़ा होगा, जिसके अनुसार कॉन्टेक्सट को ध्यान में रख कर रिफरेन्स दिए जाते हैं और एक ही कॉन्टेक्सट को कई रिफरेन्स में दिए जा सकते हैं। उन्होंने इस कहानी को अपना एक उदाहरण बताया। वहीं इस्लाम रोशनी लेकर आया, इस बयान पर भी उन्होंने सफाई दी।

अवध प्रताप ओझा से हमने पूछा गया कि क्या इस्लाम के आने से पहले सनातन धर्म वगैरह सब अँधेरे में थे, तो उन्होंने कहा कि जब इस्लाम आया तब उससे पहले वहाँ भी बड़े-बड़े पैगंबर आ चुके थे। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक सारे क्लास में नहीं पढ़ा सकता, वैसे ही जैसे हमारे यहाँ राम, कृष्ण, नानक और दादू आए, समय-समय पर पैगंबर आए। उन्होंने 7वीं शताब्दी के भारत की स्थिति की बात करते हुए अलबरूनी की ‘किताबुल हिंद’ पढ़ने की सलाह दी।

साथ ही दावा किया कि उस समय देश सामंतवाद से पीड़ित था। ओझा सर का कहना है कि यूरोप भी सामंतवाद से परेशान था। हालाँकि, जब हमने पूछा कि क्या आप भगवान श्रीराम को भी पैगंबर के रूप में ही देखते हैं, तो उन्होंने कहा कि वो भगवान थे और हमारे देश में भगवानों ने अवतार लिया, जबकि पैगंबर बाहर का कॉन्सेप्ट है। ओझा सर ने याद दिलाया कि भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहा कि मैं हमेशा आता रहता हूँ, जबकि दूसरे देशों में पैगंबर आते रहे।

उन्होंने कहा कि फ़्रांसिसी क्रांति ने कह दिया कि Liberty, Equality & Fraternity (स्वाधीनता, समानता एवं बंधुत्व) हम लेकर आए, फिर सवाल दागा कि समुद्रगुप्त पहले आया तो उसे इतिहास लिखने वालों ने ‘भारत का नेपोलियन’ कह दिया, जबकि नेपोलियन को वहाँ का समुद्रगुप्त कहा जाना चाहिए था। इस्लाम को रौशनी बताने के सवाल पर ओझा सर ने कहा कि लोग कुछ-कुछ सोच रहे हैं और बहस में अपने पक्ष रख रहे हैं, उसमें जो साक्ष्य रखता है उसकी बात मजबूत हो जाती है।

बता दें कि अवध प्रताप ओझा ‘IQRA’ में पढ़ाने के कारण भी आलोचना का सामना करते रहे हैं, क्योंकि इस शब्द का ही अर्थ कुरान, इस्लाम और पैगंबर के अध्ययन से सम्बंधित है। इस सवाल पर उनका कहना है कि वो दिल्ली स्थित ‘Next IAS’ में भी पढ़ाते हैं, लेकिन सब इक़रा का ही नाम लेते हैं और वहाँ का कोई नाम ही नहीं लेता। इस्लाम का झंडा उठाने के आरोपों पर ओझा सर ने दावा किया कि पंडित हरिनारायण शास्त्री उत्तर प्रदेश के अमरोहा में कुरान पढ़ाया करते थे।

उन्होंने कहा कि अभिनेत्री मीना कुमारी के बेटे को पंडित ने कुरान पढ़ाया था। उन्होंने कहा कि किसी के धर्मग्रंथ को पढ़ने का ये अर्थ नहीं है कि आप उसका झंडा उठा लेते हैं। ओझा सर ने कहा कि लोगों को इक़रा का अर्थ गलत नहीं लग रहा है, लगवाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि भगवान श्रीकृष्ण पर उनके वीडियो को एक फेक अकाउंट ने डाला, ऐसे उनकी लीगल टीम ने रिसर्च कर के पाया। उन्होंने कहा कि ये एक साजिश के तहत किया गया है।

अवध प्रताप ओझा का दावा है कि उनके विरुद्ध दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वो देश की तरफ से बाहर भेजे जाते हैं कार्यक्रमों में, जबकि इसी देश की मीडिया उन्हें बदनाम कर रही है। ओझा सर ने यादव को अपना गुरु बताते हुए कहा कि वो पूरी गीता के ऊपर वीडियो बनाने जा रहे हैं, इसके लिए उन्हें मजबूर किया गया है। उन्होंने ऐलान किया कि अड़गड़ानंद ने जिस अर्थ में गीता समझाई है, उसी अर्थ में वो इसे लेकर वीडियो के जरिए लोगों के पास जाएँगे।

उन्होंने दावा किया कि गीता के हर एक श्लोक चित्रण कर-कर के वीडियो बनाएँगे, जो कि भारत में पहली बार होगा। उन्होंने बताया कि आश्रम से उन्हें इसके लिए आदेश मिला है। ओझा सर ने ब्राह्मणों को भला-बुरा कहने के आरोपों पर भी सफाई दी। ‘अंग्रेजों के समय ब्राह्मण जूता खाते थे, आज सीना तान कर घूम रहे’ – अपने इस बयान पर उन्होंने पूछा कि आज हमारी देश में ज़्यादा ज़रूरत क्या है, एक रहने या फिर मिलजुल कर रहने की?

उन्होंने सवाल दाग दिया कि भारत शक्तिशाली कैसे बनेगा? उन्होंने दावा किया कि जूता वाली बात उन्होंने ब्राह्मणों के लिए नहीं, बल्कि सबके लिए कही थी। उनका कहना है कि उन्होंने किसी को नहीं छोड़ा और कहा कि अंग्रेजों ने 200 वर्षों तक सबको मारा और किसी को नहीं छोड़ा, लेकिन अंत में सब एक हो गए तो आज भी सबको एक रहने की ज़रूरत है। हालाँकि, इस्लामी शासन को गुलामी वाला काल बताने पर वो नाराज़ हो गए।

अवध प्रताप ओझा ने कहा “आप बताइए इस्लामी कालखंड गुलामी वाला कैसे था, तो हम भी जाकर वही पढ़ाएँ। गुलामी मुझे समझा दीजिए। कौन कह रहा है उन्हें आक्रांता? आप NCERT में ऐसा लिखवा दीजिए, हम वही पढ़ाएँगे। सरकारी पुस्तकों में तो कहा गया है कि वो तो बड़े महान शासक थे। शिक्षक क्या पढ़ाएगा? जो मॉड्यूल आपको संस्था देगी, वही तो आप पढ़ाओगे। हम क्यों मुगलों को आक्रांता मानें? NCERT माने, तब तो हम मानें।”

फिर हमने उनसे ओसामा बिन लादेन पर उनके बयान की याद दिलाई, इस पर उन्होंने कहा कि 1980 में जब भारत लगातार चिल्ला रहा था कि हम आतंकवाद से पीड़ित हैं, तब किसी ने नहीं माना। ओझा सर का कहना है कि जब लादेन ने ट्विन टॉवर गिराया, तब पूरी दुनिया को लगा कि आतंकवाद का खतरा है। उन्होंने कहा कि जिस आतंकवाद का हम अंतरराष्ट्रीयकरण करवाना चाहते थे, वो इस घटना के बाद हुई और पूरी दुनिया हमारे साथ खड़ी हुई।

अवध प्रताप ओझा ने पूछा कि कोई गलत आदमी भी आपका साथ दे देगा तो क्या आप उसका समर्थन नहीं करेंगे? वहीं एक कहानी ये भी है कि ओझा सर ने UPSC कोचिंग शुरू होने के दौरान पहले साल केवल सद्दाम नाम के एक लड़के को शिक्षा दी थी, इस पर उन्होंने कहा कि जब एक ही लड़का कोचिंग आया तो किसका नाम लें, किसी और का नाम लें? इस्लाम को लेकर झुकाव के सवाल पर उन्होंने पूछा कि क्या आपको ये अच्छा नहीं लगता?

अवध प्रताप ओझा का कहना है कि धर्म कोई भी बुरा नहीं है, बल्कि इसके मानने वाले गलत हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में जो किताबें चलती हैं और जो सरकार-राज्य का दर्शन होता है वो उसके पब्लिकेशन से बाहर आएगा, तो शिक्षक वही पढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत पढ़ाने वाला शिक्षक गलत कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार-राज्य नई किताबें लेकर आ जाए, तो शिक्षकों को भी वही पढ़ाना होगा।

केरल में एक और RSS कार्यकर्ता की मौत, CPM के गुंडों ने किया था जानलेवा हमला: बोली पुलिस – गिरने से गई जान

केरल के कन्नूर में हमले में गंभीर रूप से घायल हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यकर्ता की सोमवार (25 जुलाई, 2022) को मौत हो गई। माकपा के गुंडों ने आरएसएस के स्वयंसेवक जिमनेश पर एक दिन पहले कन्नूर के कुथुपरम्बा के पानुंडा में जानलेवा हमला किया गया था।

जिमनेश की मौत के बाद आरएसएस ने आरोप लगाया है कि वह एक दिन पहले कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई झड़प के दौरान घायल हो गया, जिसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। बताया जा रहा है कि सीपीएम के गुंडों ने जिमनेश और अन्य स्वयंसेवकों पर उस वक्त हमला किया, जब वे सभी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित गुरुदक्षिणा कार्यक्रम में भाग लेने के बाद घर वापस लौट रहे थे। हमले में गंभीर रूप से घायल हुए स्वयंसेवकों में ए आदर्श, पीवी जिष्णु, टी अक्षय और के पी आदर्श शामिल हैं। उन्हें थालास्सेरी के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाने पर जिमनेश गिर गए। डॉक्टरों ने जिमनेश का उपचार शुरू किया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्होंने कुछ देर बाद भी दम तोड़ दिया। जानकारी पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने जिमनेश के शव को कब्जे में ले लिया है। इसके बाद केरल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, मौत की वजह इंटरनल ब्लीडिंग बताई जा रही है।

बता दें कि इससे पहले पिनारयी गाँव में हमले में घायल हुए टी अक्षय के घर पर स्थानीय माकपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। उन्होंने गुरुदक्षिणा उत्सव के लिए तैयार किए गए झंडों और अन्य साज-सज्जा के सामानों को तोड़ दिया था। आरएसएस ने आरोप लगाया है कि सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा हमला किए जाने के बाद उनकी मौत हो गई। वहीं पुलिस ने कहा कि जिमनेश हमले के बाद अस्पताल में इलाज करा रहे कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा था, उसकी गिरने से मौत हो गई।