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ईशनिंदा पर सिर कलम करने वाले गाने: एप्पल म्यूजिक और Amazon से लेकर Gaana और Spotify तक ने दी जगह, विरोध के बाद शुरू किया हटाना

ईशनिंदा पर सिर कलम करने का आह्वान करना कोई नई बात नहीं है। हाल ही में उदयपुर में कन्हैया लाल और अमरावती में उमेश कोल्हे की बेरहमी से हत्या इसका जीता जागता उदाहरण है। दिसंबर 2021 में, ऑपइंडिया ने बताया कि कैसे हिंदुओं, काफिरों के नरसंहार और सिर काटने का आह्वान करने वाले गाने YouTube पर सुने जा रहे थे। ये गाने सालों से म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर हैं, लेकिन हाल की घटनाओं को देखते हुए प्लेटफॉर्म पर ऐसे गानों को होस्ट करने वाली म्यूजिक स्ट्रीमिंग वेबसाइटों की ओर ध्यान देना जरूरी है।

‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा… सर तन से जुदा’ का शाब्दिक अर्थ है कि पैगंबर के खिलाफ ईशनिंदा करने वाले हर व्यक्ति का सिर कलम कर दिया जाना चाहिए। कई मौलवियों ने ये गाने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपलोड किए हैं। अपनी पिछली रिपोर्ट में, हमने बताया था कि YouTube ऐसे गानों की मेजबानी कैसे कर रहा है और रिपोर्ट प्रकाशित होने के छह महीने बाद भी YouTube द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

11 जुलाई को नेटिजन्स ने बताया कि इस तरह के गाने विभिन्न म्यूजिक स्ट्रीमिंग वेबसाइटों जैसे गाना (Gaana) (टाइम्स ग्रुप के स्वामित्व वाले), यूट्यूब म्यूजिक और अन्य पर उपलब्ध हैं। ट्विटर यूजर गुरुसेवक सौम्या ने लिखा, “धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा सिर काटने का महिमामंडन करने वाले नारे और गाने ‘सर तन से जुदा’ को हटाना है। ये गाना जैसे कई प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध हैं और गैर-मुसलमानों को धमकाने के लिए इन वीडियो की छोटी क्लिप का इस्तेमाल कर रहे हैं। धार्मिक कट्टरता और ‘ईशनिंदा’ पर सिर काटने की वकालत करने वाले गीतों को कुछ सबसे लोकप्रिय म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर जगह दी जाती है।”

ट्विटर यूजर अंशुल सक्सेना ने गाना, हंगामा, स्पॉटिफाई और अमेजन म्यूजिक पर ऐसे गानों के मौजूद होने का प्रमाण दिया है। उन्होंने सिलसिलेवार चार ट्वीट्स करते हुए इन प्लेटफॉर्म पर सवाल किया है कि उन्होंने ऐसे गानों अपनी लिस्ट में क्यों रखा है?

नोट: जब यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई, उसके बाद कुछ प्लेटफॉर्म्स ने अपने यहाँ से विवादित गानों को हटाना शुरू कर दिया था। हमने इसके बाद अपनी रिपोर्ट को अपडेट किया है।

ऑपइंडिया की जाँच

भारत में 8 मुख्य स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म हैं, जिनके बड़ी संख्या में यूजर्स हैं। ये प्लेटफॉर्म हैं गाना, हंगामा, स्पॉटिफाई, अमेजन म्यूजिक, यूट्यूब म्यूजिक, विंक्स म्यूजिक, जियो सावन और एप्पल म्यूजिक। हमने सभी प्लेटफार्मों की जाँच की और यहाँ हमें वे सभी विवादित गाने मिले। एप्पल म्यूजिक में अल्लामा हाफिज बिलाल कादरी (Allama Hafiz Bilal Qadri) का गाना ‘गुस्ताख ए नबी की एक सजा’ है। जब यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई, तब तक गाना इस प्लेटफॉर्म की लिस्ट में था।

साभार: एप्पल म्यूजिक

Wynk Music ने भी अपने प्लेटफॉर्म पर इस गाने को जगह दी थी, लेकिन जब तक यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई, तब तक इसे हटा दिया गया था।

साभार:Wync

रिपोर्ट प्रकाशित होने से पहले हंगामा ने भी गाना हटा दिया।

साभार: हंगामा

अल्लामा हाफिज बिलाल कादरी का गाना ‘गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा’ स्पॉटिफाई पर अभी भी है। हाफिज मुहम्मद कलीम हसनी का एक अन्य गीत गुस्ताख-ए-रसूल को मुँह तोड़ जवाब भी Spotify पर पाया गया है। हसनी का यह गाना है, “अगर कोई ईशनिंदा करता है, तो उसका विद्रोह करने और भारत पर कब्जा करने की बात करता है।”

साभार: Spotify

हमें गाना पर भी ‘गुस्ताख नबी की एक सजा’ टाइटल से एक और गाना मिला था। यह रौशन आरा ग्रिडीह अपलोड किया गया था और बच्चों ने इसे गाया था। यह रिपोर्ट प्रकाशित होने तक गाने को ​हटा दिया गया था। ऐसा लगता है कि गाना ने इस गाने को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन इस प्रक्रिया को पूरा करने में कुछ समय लग सकता है।

साभार: Gaana

YouTube Music में इस तरह के आपको कई गाने मिल जाएँगे। अलहाज हाफिज मुहम्मद ताहिर कादरी का ‘गुस्ताख-ए-मुहम्मद तेरी अब खैर नहीं’ टाइटल वाला एक गाना ‘गुस्ताख-ए-मुहम्मद को दुनिया से मिटा देंगे, गुस्ताखों की लाशों के अंबर लगा देंगे’ से शुरू होता है। इसका अर्थ है हम उन सभी लोगों को जान से मार देंगे, जो मुहम्मद की निन्दा करते हैं। हम ईशनिंदा करने वालों की लाशों का ढेर लगा देंगे।’

साभार: यूट्यूब

सैयद आफताब अली कादरी चिश्ती का एक और गाना ‘गुस्ताख-ए-मुहम्मद तेरी ईशनिंदा करने वालों का सिर कलम’ करने की बात करता है। ऐसे ढेरों गाने इस मंच पर मौजूद हैं। अमेजन प्राइम म्यूजिक पर हमें तीन गाने मिले हैं, जो अल्लामा हाफिज बिलाल कादरी के गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, मुहम्मद अमीर शेर कादरी का गुस्ताख-ए-रसूल को हम नहीं छोड़गे और हाफिज मुहम्मद कलीम हसनी का ‘मेरे नबी सॉ की शान बड़ी’ थे। इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद भी तीनों गाने इस मंच पर मौजूद हैं।

Jio Saavn पर हमें ऐसे पाँच गाने लिस्ट में मिले हैं। यह रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद भी उन्हें अभी तक नहीं हटाया गया है।

साभार: जिओ सावन

पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ ‘ईशनिंदा’ करने वालों का सिर कलम का आह्वान करने वाले खतरनाक गानों को अपने मंच पर जगह देना बेहद चौंकाने वाला है।

गौरतलब है कि प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज (AltNews) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) ने भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ कथित ईशनिंदा को लेकर इस्लामवादियों को भड़काने का काम किया। मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा को लगातार हत्या की धमकी दी जा रही है। उनकी हत्या करने वालों को इनाम देने तक की घोषणा की गई है। जुबैर के भड़काने के बाद कट्टरपंथियों ने देश में कई जगहों पर दंगा और आगजनी की । इसके कारण कट्टरपंथियों द्वारा कन्हैया लाल और उमेश ​कोल्हे की हत्या कर दी गई।

सोनिया गाँधी को ED ने फिर जारी किया समन, नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अब 21 जुलाई को होगी पूछताछ

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को नया समन जारी किया है। अब ईडी ने सोनिया गाँधी को 21 जुलाई, 2022 को पेश होने को कहा है। इससे पहले जब ईडी ने समन जारी किया था तो स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोनिया गाँधी ने इसे पोस्टपोन करने का निवेदन किया था।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड केस में 8 जून को सोनिया गाँधी को पूछताछ के लिए ईडी ने बुलाया था, लेकिन वो कोरोना से संक्रमित हो गईं। इसके बाद 23 जून को ही पूछताछ होनी थीं, उस दौरान वो स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की वजह से दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थीं। हालाँकि, कुछ ही दिनों में वो डिस्चार्ज हो गई थीं। ऐसे में अब 21 जुलाई को उनको पूछताछ के लिए ED के दफ्तर बुलाया गया है।

हालाँकि, पिछले महीने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गाँधी पूछताछ में शामिल हुए थे। इस वजह से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में काफी हंगामा भी किया था। यहाँ तक कि राहुल गाँधी की पेशी के विरोध में कॉन्ग्रेस नेता भी सड़क पर उतर आए थे और उन्होंने इसका विरोध किया था।

गौरतलब है कि नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में हुई थी। ये कई बार शुरू हुआ और फिर बंद हो गया। वहीं 2008 में ये अखबार फिर से पूरी तरह बंद कर दिया गया था और अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया। इस कंपनी ने कॉन्ग्रेस से बिना ब्याज के 90 करोड़ रुपए कर्ज लिया, लेकिन अखबार फिर भी शुरु नहीं हुआ।

वहीं 2012 में इसका मालिकाना हक यंक इंडिया को ट्रांसफर कर दिया गया। इस कंपनी में 76 फीसदी हिस्सेदारी सोनिया और राहुल की थी। आरोप है कि यंग इंडिया ने हेराल्ड की संपत्ति को 50 लाख में हासिल किया, जबकि उसकी कीमत 1600 करोड़ के आसपास थी।

बता दें कि नेशनल हेराल्ड का मामला तब चर्चा में आया था जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में याचिका देकर आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं ने अवैध तरीके से यंग इंडियन लिमिटेड के जरिए असोसिएट जर्नल्स का अधिग्रहण किया था। तब स्वामी ने आरोप लगाया था कॉन्ग्रेस नेताओं ने पैसे का गबन किया है।

वहीं 2015 में इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने सोनिया और राहुल गाँधी को जमानत दे दी थी। इसके बाद 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी समेत आरोपितों को कोर्ट में पेश होने से छूट दे दी थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया था। और अब इसी मामले में ED ने फिर से जाँच शुरू की है।

नंबी नारायणन.. रॉ नेटवर्क को उजागर करना.. तिरंगे को सलामी नहीं.. योग दिवस से नदारद.. ISI कनेक्शन: हामिद अंसारी की राष्ट्रवाद से क्या दुश्मनी?

हामिद अंसारी लगातार 2 बार देश के उप-राष्ट्रपति रहे। अगस्त 2007 से लेकर अगस्त 2017 तक लगातार उन्होंने इस पद पर रहे। उप-राष्ट्रपति को राज्यसभा का सदन भी चलाना होता है, ऐसे में इन 10 वर्षों में वो राज्यसभा के सभापति भी रहे। लेकिन, जैसे ही हामिद अंसारी उप-राष्ट्रपति नहीं रहे और देश में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार आ ही चुकी थी, उन्हें अचानक से सब कुछ अच्छा नहीं लगने लगा। उनके भीतर का कट्टर मुस्लिम अचानक से जाग गया।

1961 में ‘भारतीय विदेश सेवा (IFS)’ का हिस्सा बने हामिद अंसारी ने लगभग अगले 4 दशकों में ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों में भारत के राजदूत के अलावा कई पद सँभाले। 90 के दशक में उन्हें संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि बनाया गया। फिर वो ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ के कुलपति बने और फिर ‘राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NMC)’ के अध्यक्ष। फिर एक दशक तक उप-राष्ट्रपति रहे।

ताकतवर परिवार से हैं हामिद अंसारी, मुख़्तार अंसारी उनका भतीजा

ऐसे किसी व्यक्ति को इस देश से या हिन्दुओं से कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए। लेकिन, हामिद अंसारी ऐसे नहीं हैं। हामिद अंसारी के बारे में बता दें कि वो 1927-28 में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मुख़्तार अहमद अंसारी के परिवार से ताल्लुक रखते हैं, जो ‘ऑल इंडिया मुस्लिम लीग’ के अध्यक्ष और ‘जामिया मिल्लिया इस्लामिया’ यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रहे थे। मऊ का माफिया पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी भी इसी परिवार से सम्बन्ध रखता है।

जब मुख्तार अंसारी पंजाब के जेल में बंद था और पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार उसे बचाते हुए यूपी नहीं भेज रही थी, तब सुप्रीम कोर्ट में उसने अपने बचाव में गिनाया था कि वो हामिद अंसारी का भतीजा है। हामिद अंसारी पर एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसे आरोप हैं जो राष्ट्रवाद से उनकी खुन्नस को दिखाते हैं। वो भारत के ‘डरे हुए’ मुस्लिमों में से एक होने का दावा करते हैं। मोदी सरकार में ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ के अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगंडा का हिस्सा उन्हें भी माना जा सकता है।

नंबी नारायणन का करियर तबाह करने के तार उनसे भी जुड़े, पूर्व रॉ अधिकारी ने किया था दावा

आर माधवन की फिल्म ‘रॉकेट्री’ के सामने आने के बाद लोगों को ISRO के पूर्व वैज्ञानिक नंबी नारायणन के बारे में पता चला। वही प्रतिभावान एयरोस्पेस इंजीनियर, जिनका करियर देश विरोधी साजिश के तहत बर्बाद कर दिया गया और इस दिशा में भारत कितना पीछे चला गया। उन पर और उनके साथी वैज्ञानिकों पर पाकिस्तान के साथ मिलने होने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था। कई यातनाएँ दी गई उन्हें। अब उन्हें दोषमुक्त किया जा चुका है, लेकिन खुद को निर्दोष साबित करने की कीमत उन्होंने अपना करियर और जीवन की एक बड़ी अवधि देकर चुकाई। 24 साल की लड़ाई के बाद उन्हें न्याय मिला।

पूर्व रॉ अधिकारी NK सूद ने बताया था, “रतन सहगल नामक व्यक्ति हामिद अंसारी का सहयोगी रहा है। किसी को नहीं पता है कि नंबी नारायणन के ख़िलाफ़ साज़िश किसने रची? ये सब रतन सहगल ने किया। उसने ही नाम्बी नारायणन को फँसाने के लिए जासूसी के आरोपों का जाल बिछाया। ऐसा उसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि बिगाड़ने के लिए किया। रतन जब IB में था तब उसे अमेरिकन एजेंसी CIA के लिए जासूसी करते हुए धरा जा चुका था। अब वह सुखपूर्वक अमेरिका में जीवन गुजार रहा है। वह पूर्व-राष्ट्रपति हामिद अंसारी का क़रीबी है और हमें डराया करता था। वह हमें निर्देश दिया करता था।”

क्या इस मामले की जाँच नहीं होनी चाहिए? भारतीय जाँच एजेंसियों के साथ इस तरह का खिलवाड़ और उसमें ऐसे व्यक्ति को बिठाना जो यहाँ के वैज्ञानिकों का करियर तबाह कर के दुश्मन मुल्कों को फायदा पहुँचाए – ये किस साजिश का हिस्सा था? इससे हामिद अंसारी के तार कहाँ तक और कितने जुड़े हुए हैं? कई पुस्तकें लिख चुके पूर्व उप-राष्ट्रपति को एक किताब लिख कर इन सवालों के जवाब भी दे देने चाहिए। रतन लाल से उनका क्या रिश्ता था?

ISI के ‘जासूस’ को बनाया मेहमान, अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के खिलाफ उगला ज़हर

सबसे ताज़ा खुलासे को ही ले लीजिए। पाकिस्तान के कॉलमनिस्ट नुसरत मिर्जा ने बताया कि कैसे वो हामिद अंसारी के उप-राष्ट्रपति रहते उनके मेहमान बन कर भारत आए थे और 15 राज्यों का दौरा कर के पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के लिए सूचनाएँ इकट्ठी की, जासूसी की। उन्होंने दावा किया कि उस दौरान 56 मुस्लिम सांसद थे भारत में, जो उनके दोस्त हैं और काफी मददगार रहे। वो 5 बार भारत आए थे। यही लेखक भारत में अलगाववादी आंदोलनों का पाकिस्तान द्वारा फायदा उठाने की बातें भी करता है।

हामिद अंसारी के एक साथ नेता ने ही उनके बारे में खुलासा किया था। ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC)’ के कार्यक्रम में भारत को लेकर जहर उगलने वाले पूर्व उप-राष्ट्रपति के बारे में IFS में उनके जूनियर और प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार दीपक वोहरा ने बताया था कि हामिद अंसारी के विदेशी व इस्लामी लिंक्स की जाँच शुरू हो गई है। उन्होंने बताया था, “ये चेतावनी हमारी कई खुफिया एजेंसियों द्वारा भारत सरकार को दी जा चुकी है कि हामिद अंसारी की प्राथमिकताएँ कभी भी भारत के पक्ष में नहीं थीं। वह हमेशा इस्लाम से जुड़ी थीं। उनकी ईमानदारी पड़ोसी मुल्कों के साथ दिखती थीं।”

सोचिए, जिस व्यक्ति के बारे में देश की ख़ुफ़िया एजेंसियाँ ही कह रही हैं कि उसके लिंक कट्टर इस्लामी समूहों से रहे हैं और देश के हित में रहे ही नहीं, उस व्यक्ति ने इस देश का 10 साल उप-राष्ट्रपति रहते हुए हमारा कितना नुकसान किया होगा। राष्ट्रपति के बाद दूसरा सबसे बड़ा संवैधानिक पद भारत की शासन प्रणाली में यही है। किसी देश में ऐसा नहीं हो सकता कि उस देश के खिलाफ सोचने वाला व्यक्ति वहाँ किसी बड़े पद पर आसीन रहे।

रॉ के नेटवर्क का खुलासा करने के आरोप, ‘डरा हुआ मुस्लिम’ नैरेटिव को आगे बढ़ाया

अगर कॉन्ग्रेस की सरकार 2014 में फिर से आती, तो लगभग तय था कि हामिद अंसारी को राष्ट्रपति बनाया जाता। इसी साल गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर हामिद अंसारी ने देश के लोकतंत्र की आलोचना की और कहा कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और ये अब संवैधानिक मूल्यों से हट गया है। हिंदू राष्ट्रवाद पर उन्होंने चिंता जता दी। इसी तरह जनवरी 2021 में अमन चोपड़ा को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने दावा कर दिया था कि भारत में मुस्लिम असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और ‘धर्म से प्रेरित होकर’ उनकी लिंचिंग की जा रही है।

हामिद अंसारी पर ये भी आरोप लग चुके हैं कि जब वो 1990-92 के दौरान ईरान के राजदूत थे तो उन्होंने गल्फ कंट्री में रॉ के सेटअप को उजागर कर रॉ के अधिकारियों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया था। रॉ के पूर्व अधिकारी एनके सूद ने 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हामिद अंसारी के रोल की जाँच करने की माँग की थी। सूद ने 1991 में भारतीय अधिकारी संदीप कपूर के अपहरण का भी जिक्र किया था। इस मामले में हामिद अंसारी पर लापरवाही का आरोप भी लगा था।

भारत के संवैधिनिक पदों पर रहा कोई व्यक्ति भला दुश्मन मुल्क की ख़ुफ़िया एजेंसी से जुड़े कार्यक्रम में कैसे शामिल हो सकता है? विदेशी मंच पर भारत की छवि धूमिल करने वाला व्यक्ति इस देश का उप-राष्ट्रपति था, कइयों को तो इसी पर यकीन नहीं होता। त्रिपुरा में हुए दंगों में जिस संस्था का हाथ सामने आया, उसके मंच पर हामिद अंसारी ने भारत विरोधी भाषण दिया। पाकिस्तानी आतंकी संगठनों के साथ भी इस संस्था के लिंक्स सामने आए थे।

उपराष्ट्रपति पद से विदा होने के बाद से हामिद अंसारी ‘बेहद डरे हुए’ ,हो गए, उस पहले पद का उपयोग कर एजेंडा फैलाने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आती थी तो सब ठीक था। 2020 में ही वो ‘धार्मिक कट्टरता’ और ‘आक्रामक राष्ट्रवाद’ को महामारी बताते हुए रटने लगे थे कि गणतांत्रिक संस्थाओं पर हमले हो रहे हैं। एक गणतंत्र दिवस पर उन्हें राष्ट्रध्वज को सलामी न देने के भी आरोप लगे। इसकी तस्वीर वायरल भी हुई थी। जून 2015 में पहले ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के कार्यक्रम से भी वो नदारद रहे थे। बालाकोट एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाने वालों का भी उन्होंने समर्थन किया था।

प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल, NCPCR के आदेश के बाद आदित्य ठाकरे पर होगी FIR: ‘मेट्रो मैन’ ने आरे पर उनके झूठ की खोल दी पोल

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग एनसीपीसीआर (NCPCR) ने ‘आरे वन बचाओ’ अभियान में बच्चों का इस्तेमाल करने के कारण शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR दर्ज कराने की माँग की। संज्ञान लेते हुए NCPCR ने मुंबई पुलिस को एक नोटिस भेजा है। नोटिस के अनुसार आयोग को शिकायत मिली है कि आदित्य ठाकरे ने शिवसेना युवा प्रकोष्ठ में आरे बचाओ प्रदर्शनों के दौरान राजनीतिक अभियान में नाबालिग बच्चों का इस्तेमाल किया है।

इस मामले में उन्होंने ट्विटर का एक लिंक भी साझा किया है। इसमें प्रदर्शन के दौरान बच्चे हाथ में तख्तियाँ लिए खड़े हैं। आयोग ने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए आयोग आरोपित के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज करके मामले की जाँच करने का अनुरोध करता है। इसमें कहा गया कि इस पत्र के प्राप्त होने के तीन दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट, प्राथमिकी की प्रति और बच्चों के बयान आयोग को सौंपे जाएँ।

बता दें कि मुंबई के गोरेगाँव में आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए पेड़ काटे जाएँगे। उन पेड़ों को काटे जाने का विरोध शिवसेना कर रही थी। उस विरोध में आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में कई नाबालिग बच्चों को भी तख्ती दे कर प्रदर्शन में शामिल किया गया था। इसी का अब NCPCR ने संज्ञान ले लिया है।

वहीं आदित्य ठाकरे द्वारा रविवार (10 जुलाई, 2022) को कार शेड को लेकर झूठ बोलने का मामला सामने आया है। कल प्रदर्शन के दौरान आरे विरोध स्थल पर मीडिया से बात करते हुए शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे ने कहा, “यह मुंबई की लड़ाई है, जिंदगी की लड़ाई है। हमने जंगल के लिए और अपने आदिवासियों की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ी। जब हम यहाँ थे, तो कोई पेड़ नहीं काटा गया। हर रात नहीं, हर 3-4 महीने में एक बार कार शेड में मेंटेनेंस के लिए जाती है ट्रेनें।”

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कुछ दिन पहले ही आदित्य ठाकरे सरकार में थे और उन्हें पूरी परियोजना के बारे में पता होना चाहिए। फिर भी आदित्य ठाकरे ने कहा कि मेट्रो ट्रेनों को दो से तीन महीने में एक बार कार शेड में भेजा जाना है। इसी सवाल के जवाब के लिए जब आर्गेनाइजर ने मेट्रो मैन ई श्रीधरन को फोन किया तो कुछ और ही सच्चाई सामने आई।

इस सवाल के जवाब में मेट्रो मैन ई श्रीधरन ने कहा, “यदि मेट्रो रेल का नेटवर्क बड़ा है, तो उसे नियमित रूप से कार शेड में मेंटेनेंस के लिए ले जाने की आवश्यकता होती है और यदि छोटा है तो दो दिन में एक बार। यह विजिट सुरक्षा प्रमाणन के लिए है, जिससे गुजरने के बाद ये ट्रेनें चल सकती हैं।”

श्रीधरन के अनुसार, यह बयान कि मेट्रो रेल को कार शेड में दो से तीन महीने में एक बार जाने की जरूरत होती है, सरासर गलत है।

श्रीधरन कहते हैं कि मेट्रो कार रेक को भी स्थिर करने के लिए, उन्हें नियमित रूप से मेट्रो कार शेड में ले जाने की आवश्यकता होती है, मुख्य लाइन पर सभी रेक को स्थिर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दरअसल, कार शेड मेट्रो रेल की सुरक्षा और संचालन के लिए ‘ब्रेन सेंटर’ है।

आर्गेनाइजर की रिपोर्ट के अनुसार, जब पूछा गया कि मेट्रो रेल को दो से तीन महीने में एक बार कार शेड में जाना पड़ता है तो यह क्या है? तब श्रीधरन ने बताया, दो तरह के ओवरहाल होते हैं, जहाँ मेट्रो रेल कारों के हर पहलू की जाँच की जाती है।

पहला एक पीरियाडिक ओवरहाल (पीओएच) है जो दो-तीन वर्षों में एक बार होता है और दूसरा इंटरमीडिएट ओवरहाल (आईओएच) होता है, जो दो-तीन महीनों में एक बार होता है।

उनकी बातों से यहाँ एक बात की पुष्टि हो गई है कि बड़े नेटवर्क के लिए मेट्रो रेल को एक कारशेड की आवश्यकता होती है जहाँ मेट्रो को रोजाना और छोटे नेटवर्क के लिए दो से तीन दिनों में कम से कम एक बार जाँचा जा सके।

श्रीधरन कहते हैं, “मुंबई मेट्रो में लाइन के अंत या बीच में एक कार शेड होना चाहिए। इसके लिए आरे कॉलोनी एक आदर्श स्थान है।” श्रीधरन के अनुसार जब वह मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमआरसीएल) को सलाह दे रहे थे, तो उन्होंने ही कार शेड के लिए आरे स्पॉट का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा, “मुझे तत्कालीन सीएम देवेंद्र फडणवीस को समझाना पड़ा, वह थोड़े अनिच्छुक थे, लेकिन जब मैंने उन्हें समझाया कि आरे क्यों जरुरी है, तो वह मान गए।”

श्रीधरन ने वहीं पर्यावरणविद की दृष्टि से भी एक सलाह देते हुए कहा कि विरोध करने वालों को यह समझना चाहिए कि कार शेड के साथ भी जगह को हरा-भरा रखा जा सकता है और लोगों को अर्थव्यवस्था के बारे में भी सोचने की जरूरत है।

भारत के IIT जैसा ITU खोलना चाहता था पाकिस्तान, लोगों ने कैंपस को बना दिया बकरा मंडी: पूर्व कुलपति ने ट्विटर पर जाहिर किया दुख

पाकिस्तान ने 9 वर्ष पहले साल 2013 में भारत के आईआईटी को टक्कर देने के लिए एक छोटा MIT बनाने का सपना देखा था। ये सपना आज बुरी तरह बर्बाद हो चुका है। पाकिस्तानियों ने उस जगह जहाँ छोटे MIT यानी ITU (इंडियन टेक्नॉलजी इंस्टिट्यूट) का निर्माण होना था, वहाँ बकरा मंडी खोल ली है।

इस बात की जानकारी इनफॉर्मेशन टेक्नॉलजी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति उमर सैफ ने दी। उन्होंने देश के शिक्षा तंत्र पर हताशा जताते हुए उस जगह की तस्वीर दिखाई जहाँ MIT तैयार करने का निर्णय लिया गया था। अब ये जगह बकरा मंडी है और गाड़ी खड़ा करने की पार्किंग भी।

उमर सैफ ने अपने ट्वीट में बताया, “साल 2013 में हम लोग पाकिस्तान के लिए एक छोटा MIT बनाने के लिए बिलकुल तैयार थे। उसमें वो सारी चीज होतीं जो भारत के आईआईटी में हैं लेकिन आज वो जगह जिसे हमने इस यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए चुना था वो बकरा मंडी बन गई है।”

अपने ट्वीट के साथ उन्होंने द ट्रिब्यून का एक लिंक भी शेयर किया है। इसमें उन्होंने बता रखा है कि कितनी शिद्दत से उन्होंने चाहा था कि पाकिस्तान में मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (MIT) जैसा संस्थान बने। इसे उन्होंने ‘MIT फॉर पाकिस्तान’ का नाम भी दिया था। उनका मकसद था कि पाकिस्तान में विज्ञान, तकनीक और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एडवांस इनोवेशन और रिसर्च हों। हालाँकि पाकिस्तानियों की सोच के चलते ये संभव नहीं हो पाया।

बता दें कि सैफ MIT में पूर्व लेक्चरर रह चुके हैं और पाकिस्तान में यूनाइटिड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम में सलाकार के तौर पर भी नियुक्त हैं। उन्होंने बहुत कोशिश की कि वह पाकिस्तान को ऐसी एक यूनिवर्सिटी देकर विकास की ओर ले जाएँ लेकिन उन्हें ये देख बहुत हैरानी हुई कि पाकिस्तान में उच्च शिक्षा प्रणाली को लेकर हर कोई सिर्फ चिंतित होने का दिखावा कर रहा था। उनके मुताबिक देश में 700 विश्व विद्यालय थे लेकिन एक को भी वैश्विक स्तर पर रैंक नहीं मिल पाई।

उन्होंने बताया कि उन्होंने इस काम के लिए राजनेताओ से लेकर यूनिवर्सिटी के प्रशासकों को पत्र लिखा था, मगर कुछ काम नहीं आया। उन्हें बदले में ऐसी टिप्पणियाँ सुनने को मिली जिससे उनका हौसला पस्त हो गया। इन टिप्पणियों में एक थी ‘पाकिस्तान को अब ज्यादा पीएचडी लोग नहीं चाहिए’, दूसरी थी- ‘MIT हमारी जूती-पाकिस्तान महान’। इसके अलावा पाकिस्तान के लिए सुनहरे भविष्य का सपना देखने वाले उमर सैफ से ये तक पूछा गया कि आखिर वो पाकिस्तान के शैक्षणिक व्यवस्था के बारे में जानते ही क्या हैं जिसे सुन वो समझ गए कि पाकिस्तान में लोग शिक्षा को लेकर कितने जागरूक हैं।

‘जुबैर को आज बेल नहीं मिली तो तेरे पूरे परिवार को मार डालेंगे’: जिसने AltNews को-फाउंडर पर कराई FIR, उसे कोर्ट जाते समय 4 ने घेरकर धमकाया

कथित फैक्टचेकर और AltNews के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी स्थित अदालत ने सोमवार (11 जुलाई 2022) को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस बीच उस व्यक्ति को धमकाने का मामला सामने आया है, जिसने जुबैर के खिलाफ शिकायत कर रखी है। शिकायतकर्ता आशीष कटियार ने पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सोमवार को घर से कोर्ट आते वक्त उन्हें सपरिवार जान से मारने की कुछ लोगों ने धमकी दी।

जुबैर की तरफ से इस मामले में मोहम्मदी की अदालत में जमानत याचिका भी दाखिल की गई है। इस पर 13 जुलाई को सुनवाई होगी। शिकायतकर्ता आशीष कटियार के वकील बीके त्रिवेदी ने लंबे समय तक जुबैर के खिलाफ FIR पर लखीमपुर खीरी पुलिस की उदासीनता पर भी असंतोष जताया है। उन्होंने कहा, “पुलिस को जुबैर की कस्टडी मिलनी ही चाहिए क्योंकि उसे विदेश से पैसे मिलने की तमाम रिपोर्ट्स आई हैं। बिना कस्टडी में लिए पुलिस इस केस में चार्जशीट किस आधार पर लगाएगी?”

जुबैर पर खीरी के थाना मोहम्मदी में सुदर्शन न्यूज़ के ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम में चले एक ग्राफिक के आधार पर साम्रदायिक तनाव फैलाने वाला ट्वीट करने की FIR 2021 से दर्ज है। त्रिवेदी ने ऑपइंडिया को बताया, “जुबैर की सुनवाई सीतापुर जेल से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए हुई है। सुनवाई के दौरान उसकी तरफ से एक स्थानीय वकील कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने जुबैर की जमानत की अर्जी डाली, जिस पर सुनवाई के लिए 13 जुलाई 2022 तारीख तय की गई। इधर खीरी पुलिस ने कोर्ट से जुबैर का पुलिस कस्टडी रिमांड माँगा।”

मोहम्मदी में जुबैर के खिलाफ दर्ज FIR के शिकायतकर्ता सुदर्शन न्यूज के संवाददाता आशीष कटियार ने खुद को धमकी मिलने की शिकायत पुलिस से की है। SHO मोहम्मदी को 11 जुलाई को भेजी अपनी शिकायत में उन्होंने कहा है, “आज सुबह लगभग 11 बजे मैं अपने घर से कचहरी जा रहा था। मेरे मुकदमे की सुनवाई होनी थी। मैं जैसे ही रोड पर पहुँचा वैसे ही 4 अज्ञात लोगों ने मुझे रोक लिया और गंदी-गंदी गालियाँ देने लगे। उन्होंने मुझे धमकाते हुए कहा कि अगर आज जुबैर की जमानत मंजूर नहीं हुई तो तुम्हें और तुम्हारे पूरे परिवार को मार डालेंगे। इसके बाद वे चारों भाग गए।”

शिकायत की कॉपी

शिकायत में पीड़ित ने खुद को जुबैर के खिलाफ FIR में वादी बताते हुए अपनी और अपने परिवार के जान-माल की चिंता जताई है। आशीष कटियार ने पुलिस से अपनी शिकायत को गंभीरता से लेने की अपील की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए आशीष कटियार ने कहा, “जुबैर का केस कोई मामूली मुद्दा नहीं है। मैं अपनी व अपने परिवार की सुरक्षा चाहता हूँ।”

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट से 5 दिनों की अंतरिम जमानत मिलने के बाद भी जुबैर खीरी पुलिस द्वारा वारंट बी दाखिल किए जाने के चलते सीतापुर जेल में ही है।

सिंगिंग शो में PM मोदी का गुणगान सुन सन्न रह गई तापसी पन्नू, मिताली राज ने बताया- खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा: देखिए Video

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज (Mitali Raj) ने सोनी टीवी के रिएलिटी शो ‘सुपरस्टार सिंगर 2’ (Superstar Singer 2) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की। इस शो की 56 सेकंड की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

दरअसल, मिताली राज इस शो में बॉलीवुड अभिनेत्री तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) के साथ उनकी अपकमिंग फिल्म ‘शाबाश मिट्ठू’ का प्रमोशन करने के लिए पहुँची थीं। इस दौरान शो में उनसे पूछा गया कि जब आप हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आप पहली बार मिली थीं, तब आपको कैसा लगा था? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “जब हम 2017 के वर्ल्ड कप के बाद वापस आए थे। उस वक्त जिस तरह से एयरपोर्ट पर हमारी रिसेप्शन हुई है और हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें टाइम दिया। हर एक लड़की को उन्होंने नाम से पहचाना। हर लड़की के सवाल का जवाब दिया।”

उन्होंने भावुक होते हुए आगे कहा, “हमें यह बहुत अच्छा लगा कि हमारे देश के प्रधानमंत्री टाइम लेकर नेशनल टीम से मिले। हमारा हौसला बढ़ाया, जबकि हम फाइनल में हार गए थे। उन्होंने हमसे बताया कि आपने हारने के बाद भी देश के कई लोगों का दिल जीता है। हारने के बावजूद प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों को सम्मान दिया, यह हम सभी को प्रेरित करता है।”

यह सब सुनने के बाद शो में सभी उनके लिए तालियाँ बजाने लगे। इस दौरान शाहीन बाग, किसान आंदोलन के अलावा कई मुद्दों को लेकर पीएम मोदी पर हमला करने वाली तापसी पन्नू उन्हें एक टक देखती रहीं और फिर वह भी सबको देखकर तालियाँ बजाने लगी। हालाँकि, इस दौरान उन्होंने कुछ कहा तो नहीं, लेकिन उनके फेस एक्सप्रेशन को लेकर सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने नाराजगी व्यक्त की है। अभिषेक तिवारी लिखते हैं, “सिर्फ विपक्ष नहीं ये जो तापसी पन्नू है, ये भी मोदी जी से नफरत ही करती आई है। आज कल बॉलीवुड में नया नौटंकी आया है, किसी सफल आदमी के जीवन पर फिल्म बनाओ और पैसे कमाओ। मैं मिताली राज का बहुत बड़ा फैन हूँ, लेकिन तापसी से नफरत करता हूँ और बॉलीवुड से उससे भी ज्यादा तो फिल्म का बहिष्कार होगा।”

भाजपा सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने भी इस वीडियो को शेयर किया है। वह लिखते हैं, “भारतीय महिला क्रिकेट की पूर्व कप्तान मिताली राज से सुनें कि कैसे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा हैं।”

बता दें कि तापसी पन्नू इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘शाबाश मिट्ठू’ का जोर शोर से प्रमोशन कर रही हैं। इस फिल्म में वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज (Mitali Raj) का किरदार निभा रही हैं। यह फिल्म 15 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला क्रिकेट की पूर्व भारतीय कप्तान मिताली राज को हाल ही में पत्र लिखकर उनकी उपलब्धियों पर गर्व जताया और आगे के लिए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। वहीं मिताली राज ने इस पत्र को साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद करते हुए लिखा था कि ये विलक्षण सम्मान और गर्व का विषय है कि आप देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इतनी गर्मजोशी से प्रोत्साहन प्राप्त करते हैं। उन्होंने पीएम मोदी को लाखों लोगों के लिए और खुद के लिए भी एक रोल मॉडल करार दिया था।

आगरा में लेडी लव जिहाद: 18 साल की हिंदू लड़की को लेकर 30 साल की मुस्लिम महिला फरार, 43 दिनों से सुराग नहीं

उत्तर प्रदेश के आगरा से ‘लेडी लव जिहाद’ का अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ एक 30 साल की मुस्लिम महिला पर 18 साल की हिन्दू लड़की को भगा ले जाने के आरोप लगे हैं। दोनों पिछले 43 दिनों से लापता हैं, ऐसे में हिन्दू युवती के परिजनों ने इस मामले में FIR भी दर्ज कराई है। दोनों के घर आसपास में ही हैं। आरोपित मुस्लिम महिला के परिजनों का कहना है कि दोनों बालिग़ हैं और अपनी मर्जी से घर से भागे हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस सम्बन्ध में बयान देते हुए कहा है, “पीड़िता को अन्य युवती द्वारा भगा ले जाने के संबंध में प्राप्त तहरीर के आधार पर थाना जगदीशपुरा पुलिस द्वारा अभियोग पंजीकृत किया गया है। दोनों युवतियों की आपस में गहरी दोस्ती थी। युवतियों की बरामदगी हेतु सीसीटीवी, पंपलेट, सर्विलांस आदि माध्यम से निरंतर प्रयास किया जा रहा है।” पीड़िता के परिजनों का कहना है कि जहाँ पहले इस तरह का अपराध लड़के ही करते थे, अब लड़कियाँ भी इनमें शामिल हो रही हैं।

हालाँकि, इस मामले में सवाल तो आगरा पुलिस पर भी उठ रहे हैं कि इस घटना के 6 हफ्ते से भी अधिक बीत जाने के बावजूद उसने अब तक कोई सुराग क्यों नहीं हासिल किया। पीड़िता का परिवार जगदीशपुरा थाना क्षेत्र स्थित आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-8 में रहता है। दोनों युवतियों में गहरी दोस्ती थी और वो कई-कई घंटे फोन कॉल पर बात करती रहती थीं। लेकिन, दोनों के लड़की होने के कारण परिजनों ने कभी शक नहीं किया।

पीड़ित परिजनों ने बताया कि 17 मई, 2022 को पीड़िता ये कह कर दरवाजा खोलने बाहर आई कि वो बड़ी बहन को रिसीव करने जा रही है, लेकिन वापस नहीं लौटी। आसपास के CCTV फुटेज चेक करने पर पता चला कि वो मुस्लिम महिला का हाथ पकड़ कर जाती हुई दिखी। पूछने पर आरोपित महिला के परिजन ना-नुकुर करते रहे, लेकिन बाद में स्वीकार किया कि दोनों साथ भागी हैं। आरोपित महिला का नाम नाजिया है।

पीड़िता के पिता अनिल कुमार ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि पड़ोस की रहने वाली महिला उनकी बेटी को बहला-फुसला कर और अगवा कर ले ले जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें उसके पूरे परिवार का हाथ है और सबने मिलजुल कर इस साजिश को अंजाम दिया है। परिजनों को इस बात का डर है कि उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी न हो जाए। ‘Zee Hindustan’ ने इसे ‘देश का पहला लेडी लव जिहाद’ करार दिया।

‘दिल में उतरो, करीब आओ, फिर दिक्कत नहीं होगी’: हिंदू महिला को प्रताड़ित कर रहा था सरकारी स्कूल का प्रिंसिपल नसीर अहमद

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ हिंदू महिला ने प्रताड़ित करने की शिकायत की है। आरोपित प्रिंसिपल का नाम नसीर अहमद है। पीड़ित महिला इसी स्कूल में खाना बनाती है। महिला का आरोप है कि प्रिंसिपल उस पर गंदी नजर रखता है। अपनी बात नहीं मानने पर नौकरी से निकालने की धमकी देता है।

महिला ने 10 जुलाई 2022 (रविवार) को इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई। घटना सीतापुर के रेऊसा थानाक्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय रेवान की है। OBC समुदाय की पीड़िता यहाँ पर मिड डे मील योजना के तहत बच्चों के लिए खाना बनाती है। पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत के मुताबिक, “प्रिंसिपल नसीर अहमद मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते हैं। वो अक्सर मुझ से अश्लील बातें करते हैं। नसीर अहमद कहते हैं कि तुम हमारे दिल में एक बार उतर जाओ। मेरे करीब आकर देखो मेरा दिल। अगर एक बार को पहचान जाओगी तो तुम्हें उस दिन से कोई दिक्कत नहीं आएगी।”

शिकायत की कॉपी

शिकायत में पीड़िता ने बताया है, “मेरे लिए प्रिंसिपल नसीर की सोच और नियति हमेशा गंदी बनी रहती है। जब मैं उनकी बातों का विरोध करती हूँ तब वो मुझे स्कूल से निकाल देने की धमकी देते हैं। मुझे 1500 रुपए महीने तनख्वाह मिलती है और मैं उसी में अपना गुजारा कर रही हूँ। मैं अपना शारीरिक शोषण करने की इच्छा रखने वाले प्रिंसिपल की वजह से बहुत मानसिक तनाव में हूँ।”

FIR Copy

पीड़िता की उम्र लगभग 40 साल है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने प्रिंसिपल नसीर को ‘भूखा भेड़िया’ कहा है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पीड़िता ने आशा जताई है कि प्रिंसिपल को सजा मिलने के बाद किसी और के द्वारा ऐसी घटनाओं पर लगाम भी लगेगी। इस शिकायत पर सीतापुर की रेउसा थाना पुलिस ने आरोपित प्रिंसिपल के खिलाफ IPC की धारा 354 और 504 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

ऑपइंडिया को पीड़िता ने बताया, “जब स्कूल सुबह 7 बजे का था, तब प्रिंसिपल मुझे आधे घंटे पहले बुलाता था। वो मुझसे कुर्सी आदि साफ़ करवाता और बाद में मेरे काम में कमी निकालता। थोड़ी देर बाद वह मुझसे अश्लील बातें करने लगता था। मैं उसको टोक दिया करती थी। मैं आज भी (11 जुलाई 2022) काम पर गई थी, लेकिन प्रिंसिपल नहीं आया। सुनने में आ रहा है कि उसने छुट्टी ले ली है।”

‘सेकुलर’ बने राजदीप सरदेसाई तो बिरादरों ने ही कर दी ऑनलाइन धुलाई, बकरीद के दिन हिंदुओं को आषाढ़ी एकादशी की दी थी बधाई

आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर संभवतः पहली बार इंडिया टुडे के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने ट्विटर पर 10 जुलाई 2022 को अपने फॉलोवर को शुभकामनाएँ दीं। लेकिन यह उनके लिए उल्टा पड़ता नजर आया। उनके ट्वीट के तुरंत बाद ही स्टीवंस बिजनेस स्कूल के एक प्रोफेसर सहित कुछ लोग मजे लेते हुए तो लिबरल गिरोह ने ट्विटर पर उनके पाला बदलने को देखकर उन पर हमला बोलता नजर आया। बता दें कि राजदीप सरदेसाई एक मराठी परिवार से ताल्लुक रखते हैं और आषाढ़ी एकादशी हिंदू कैलेंडर के सबसे पवित्र अवसरों में से एक है और महाराष्ट्र में तो लोग इसे और भी उत्साह के साथ मनाते हैं।

हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने तक विश्राम करते हैं। वहीं आषाढ़ी एकादशी पर, लाखों तीर्थयात्री महाराष्ट्र के पंढरपुर में भगवान विष्णु के अवतार भगवान विठ्ठल के दर्शन पाने के लिए इकट्ठा होते हैं।

कल इस त्यौहार पर, राजदीप सरदेसाई ने लोगों को एकादशी की बधाई देते हुए लिखा, “सभी को एकादशी की शुभकामनाएँ, अमन और ख़ुशी।”

जानकारी के लिए बता दें कि हिन्दुओं को शुभकामना देने के इस ट्वीट से ठीक पहले राजदीप सरदेसाई ने मुस्लिमों को ईद की शुभकामनाएँ भी दी थीं, क्योंकि 10 जुलाई को बकरीद भी मनाया जा रहा था। इस अवसर पर राजदीप सरदेसाई ने ट्वीट किया था, “ईद मुबारक। सभी को शांति और खुशी।”

स्टीवंस बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर गौरव सबनीस ने राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर कमेंट्स करते हुए ट्वीट किया, “हेहे ‘हैप्पी एकादशी’ ऐसा लगता है कि नहीं जानता एक साल में 24 होते हैं। कभी-कभी 26. मुझे पक्का यकीन है कि यार नहीं जानता कि आषाढ़ी एकादशी का क्या अर्थ है। बस बैलेंस करने की कोशिश कर रहा है।”

एक अन्य ट्विटर यूजर अर्बन श्रिंक ने ट्वीट किया, “प्राण जाए पर बैलेंस ना जाए।” कमेंट में बताया गया कि कैसे ईद की बधाई देने के बाद राजदीप सरदेसाई ने मिनटों में एकादशी की शुभकामनाएँ भी दीं।

एक अन्य ट्विटर यूजर संजय मुखर्जी ने राजदीप सरदेसाई को जवाब देते हुए अपने ट्वीट में लिखा, “एकादशी महीने में कम से कम दो बार आती है। इसका कोई विशेष महत्व नहीं है, सिवाय इसके कि हिंदू विधवाओं के लिए कुछ भोजन पर प्रतिबन्ध हैं। “अंतर-विश्वास” सद्भाव के चक्कर में, कृपया भ्रमित न हों।”

एक और ट्विटर यूजर एम. सादिक अली ने ट्वीट किया, ”आज देश में ईद भी मनाई जा रही है। ईद के मौके पर बधाई देने के आपके डर को आसानी से समझा जा सकता है।” भले ही सरदेसाई ने ट्वीट कर अपनी ईद की बधाई दी थी, लेकिन जाहिर तौर पर एक हिंदू त्योहार के लिए बधाई ट्वीट करने से इस बात में दम नहीं रहा।

वहीं आषाढ़ी एकादशी पर हिंदुओं को बधाई देने के लिए लिबरलों की आलोचनाओं का सामना करने के बाद, राजदीप सरदेसाई ने बात को घुमाते हुए बैलेंस करने की कोशिश की, उन्होंने ट्वीट किया, “रविवार की दोपहर: ईद और एकादशी एक ही दिन। हो सकता है कि देवता हमें अंतरधार्मिक सद्भाव की आवश्यकता की याद दिला रहे हों।”

हालाँकि, इस ट्वीट से डैमेज कंट्रोल करने के बजाय राजदीप सरदेसाई को और अधिक आलोचना झेलनी पड़ी। एक ट्विटर यूजर डोरेमोन ने जवाब दिया, “ईद एक जानवर को मारने और उनका मांस खाने के बारे में है और एकादशी आपके दिमाग को साफ और शुद्ध करने के लिए उपवास के बारे में है। दो पूरी तरह से अलग दर्शन।”

कुलमिलाकर, इस संतुलन के चक्कर में राजदीप सरदेसाई को दोनों तरफ से आलोचना ही झेलनी पड़ी। लेकिन सबसे अधिक लिबरलों को उनके इस कदम से मिर्ची लगी।