‘DNA’ नामक शो होस्ट कर के लोकप्रियता बटोरने वाले पत्रकार सुधीर चौधरी अब ‘आज तक’ चैनल पर दिखाई देंगे। उन्होंने हाल ही में ‘Zee News’ को अलविदा कह दिया था। उन्हें ‘आज तक’ में ‘कंस्लटिंड एडिटर’ का पद दिया गया है। ‘आज तक’, ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ का हिस्सा है। ‘इंडिया टुडे ग्रुप’ की वाईस चेयरपर्सन कली पुरी ने ईमेल के माध्यम से कर्मचारियों को इसकी जानकारी दी। साथ ही चैनल एक नया शो लेकर भी आएगा।
कली पुरी ने अपनी ईमेल में लिखा, “सुधीर चौधरी और ‘आज तक’ हमारे 10 करोड़ दर्शकों के लिए एक नया और रोमांचक शो के लिए एक साथ हो रहे हैं, जिसके एंकर वही होंगे। ये न्यूज़ शो न्यूज़ डायरेक्टर सुप्रिय प्रसाद के मार्गदर्शन में लाया जाएगा। मुझे पता है कि लोग काफी चर्चाएँ कर रहे होंगे, लेकिन इस खबर से उन्हें विराम मिलेगा। ख़बरों के लिए हर घर में स्वाभाविक रूप से एक ही नाम है और वो है – आज तक।”
— Shubhankar Mishra (@shubhankrmishra) July 11, 2022
कली पुरी ने अपने सन्देश में आगे लिखा कि आज सुधीर चौधरी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, उन्होंने कई वर्षों तक रिकॉर्ड TRP और कई अवॉर्ड जीतने वाले शो ‘DNA’ को होस्ट किया, इसे लोगों का भी भरपूर साथ मिला। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया पर भी सुधीर चौधरी सबसे ज्यादा फॉलोवर्स वालों में से हैं और लगभग सभी प्रतिष्ठित संस्थानों से उन्हें सम्मान मिला है। ‘आज तक’ के एंकर शुभंकर मिश्रा ने भी सुधीर चौधरी के लिए ‘स्वागत सर’ लिख कर ट्वीट किया।
याद हो कि हाल ही में ‘Zee News’ के एडिटर-इन-चीफ और CEO सुधीर चौधरी ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया था। उस समय बताया गया था कि उन्होंने अपना खुद का वेंचर शुरू करने के लिए ज़ी मीडिया कॉर्पोरेशन में क्लस्टर 1 के सीईओ के पद से इस्तीफा दिया है। वह शुरुआत में जी न्यूज में शामिल हुए थे, लेकिन फिर 2003 में वह सहारा समय से जुड़ गए। इसके बाद वह कुछ समय के लिए इंडिया टीवी से भी जुड़े थे। हालाँकि 2012 में वह फिर से लौटकर जी न्यूज में शामिल हो गए।
हाल ही में सुधीर चौधरी द्वारा ‘Ratingology’ नामक एजेंसी लॉन्च करने की खबर भी आई थी, जो मीडिया चैनलों के व्यूअरशिप पर स्टैट्स डाल रही थी। इसके बायो में ‘रेटिंग्स का हेतुविज्ञान’ भी अंग्रेजी में लिखा हुआ है। इसके सोशल मीडिया पेज से यूट्यूब पर मीडिया चैनलों के ‘लाइव व्यूअर्स’ के डेटा भी इकट्ठे कर के पोस्ट किए जा रहे हैं। इसमें भी ‘आज तक’ को नम्बर-1 बताया गया था। एजेंसी रोज के डेटा अपने ट्विटर पेज से डालती है। इसके ट्विटर हैंडल से भी सुधीर चौधरी के ‘आज तक’ में शामिल होने की पुष्टि की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सोमवार (11 जुलाई 2022) को नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ का अनावरण किया है। कांस्य से बने इस अशोक स्तंभ की लंबाई 6.5 मीटर है यानी 20 फीट से ज्यादा ऊँचा है। इसका वजन 9500 किलो है। बताया जा रहा है कि इस अशोक स्तंभ का निर्माण 8 चरणों की प्रक्रिया के बाद हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने फेसबुक पर अनावरण की तस्वीरें साझा की हैं।
इस खास मौके पर शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी और लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला समेत इस कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले कर्मचारी भी मौजूद थे। इस स्तंभ को क्रेन की मदद से नए संसद भवन के ऊपर स्थापित किया गया है। अनावरण के बाद पीएम मोदी ने कर्मचारियों से बात भी की।
#WATCH | Delhi: PM Narendra Modi unveiled the 6.5m long bronze National Emblem cast on the roof of the new Parliament Building today morning. He also interacted with the workers involved in the work of the new Parliament. pic.twitter.com/6QfxBI1eMg
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अशोक स्तंभ को कुल 150 हिस्सों में तैयार किया गया था। इसे छत पर ले जाने के बाद असेंबल किया गया और फिर लगाया गया। अप्रैल के अंत में इनकी असेंबलिंग का काम शुरू किया गया था। इसमें करीब दो महीने का वक्त लगा है। सरकार ने भवन के लिए अक्टूबर 2022 की समय सीमा निर्धारित की थी और इस साल नए संसद भवन में शीतकालीन सत्र आयोजित करने का लक्ष्य रखा था।
गौरतलब है कि नए संसद भवन की इमारत पर भी तेजी से काम चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 10 दिसंबर 2020 को हिन्दू रीति-रिवाजों के तहत नए संसद भवन का भूमि पूजन किया था, जिसे लगभग 971 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। यह मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। मौजूदा संसद भवन करीब 93 साल पुराना है और इसमें कई कमियाँ हैं। नया संसद भवन आधुनिक सुविधाओं और सुरक्षा उपकरणों से लैस होगा। भूमिपूजन के बाद से ही कॉन्ग्रेस, टीएमसी सहित कई विपक्षी पार्टियाँ इसका विरोध कर रही हैं।
कॉन्ग्रेस प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा था, “नई इमारत की आधारशिला रखने का निर्णय हृदयहीन, संवेदनहीन और बेशर्मी से भरा है। खास कर ऐसे समय में जब देश आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। बीजेपी लोगों को राहत देने के बजाय फालतू जुलूस निकाल रही है।”
चीन में छोटे बैंकों हालत ख़राब है। सी जिनपिंग के जीरो कोविड पॉलिसी के बुरी तरह फेल होने से बैंकों पर भारी दबाव होने से कई तरह के आरोप लगे हैं। वहीं निकासी पर पूरी तरह प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। जहाँ एक तरफ हजारों की संख्या में बैंकों के ग्राहक अपने अकाउंट से पैसे निकालने के लिए इकट्ठे हो रहे हैं। अपने पैसे के लिए रविवार (10 जुलाई, 2022) से ही प्रदर्शन कर रहे वहीं चीनी अधिकारियों ने करीब 3000 के पास जमाकर्ताओं के शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन को हिंसक रूप से तितर-बितर कर दिया है, जो बैंकों से अपनी जीवन भर की कमाई वापस लेने के लिए हेनान प्रान्त के चीनी केंद्रीय बैंक के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।
A large number of bank depositors in Henan, #China staged their largest protest against the “corruption and violence of #Henan government”. Angry protesters demanded their savings back from the banks that have frozen their deposits since mid-April Details: https://t.co/2JOAvNJDImpic.twitter.com/hJz5zjdb1S
— Prasar Bharati, Beijing (@PBSC_Beijing) July 11, 2022
सीएनएन की रिपोर्टके अनुसार, अप्रैल महीने से ही, चीन के मध्य हेनान प्रांत के चीनी शहर झेंग्झौ (Zhengzhou) में चार ग्रामीण बैंकों ने लाखों डॉलर की जमा राशि को फ्रीज कर दिया है, और 90 दिनों के लिए किसी भी तरह के निकासी पर रोक लगा दिया है। जिससे निकासी न होने से हजारों ग्राहकों को जीवन यापन में संकट पैदा हो गया है। जिसको ध्यान में रखते हुए चीन के हजारों जमाकर्ता देश के केंद्रीय बैंक, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की झेंग्झौ शाखा के बाहर एकत्र होकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसे चीनी पुलिस द्वारा बलपूर्वक कुचलने का प्रयास किया गया।
Updated: Protesters were beaten by Henan Bank's right protection team/police now situation going worst across #Henan, #China. pic.twitter.com/E4Em0IwB03
— Wᵒˡᵛᵉʳᶤᶰᵉ Uᵖᵈᵃᵗᵉˢ? (@W0lverineupdate) July 10, 2022
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह भी बताया जा रहा है कि कोरोना की वजह से चीनी अर्थव्यवस्था इस समय आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही है। वहीं भीड़ स्थानीय अधिकारियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार को भी जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ भी सड़कों पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन कर रही है और अपनी जमा राशि को फ्रीज करने वाले बैंकों से अपनी जीवन भर की बचत वापस करने की माँग कर रही है। वहीं सादे कपड़ों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ दिया और जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल बताये जा रहे हैं।
1. Massive protest out break in Henan province,China. More than 3000 protesters who are victim of bank financial fraud show up in capital City of Henan. None of them can withdraw money from account now.
रिपोर्ट के अनुसार, यह झड़प रविवार सुबह 11 बजे के बाद कई घंटों तक चला, जब सुरक्षा अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की स्थिति बन गई, वीडियो में प्रदर्शनकारी बोतलें और अन्य छोटी वस्तुएँ फेंकते नजर आ रहे हैं। वहीं सुरक्षा अधिकारी प्रदर्शनकारियों को सीढ़ियों से नीचे खींचते और विरोध करने वालों को पीटते नजर आए, जिनमें महिलाएँ और बुजुर्ग भी शामिल थे।
— Wᵒˡᵛᵉʳᶤᶰᵉ Uᵖᵈᵃᵗᵉˢ? (@W0lverineupdate) July 10, 2022
चीनी मीडिया के ही आँकड़ों के अनुसार, हेनान प्रान्त में छोटे बैंकों में बैंकों में कुल जमा की कीमत 1.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। वहीं प्रदर्शनकारी अपनी माँगों पर अड़े हुए हैं। लेकिन केंद्रीय सरकार के दमन से बचने के लिए उसके खिलाफ प्रदर्शन न करके स्थानीय प्रशासन के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
श्रीलंका वर्तमान दौर में सबसे खराब राजनीतिक और आर्थिक संकट से जूझ रहा है। जिसको लेकर उसकी जनता में खलबली मची है। जनता बागी हो गई है और उसके तेवर देख राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री अंडरग्राउंड हो गए हैं। पड़ोसी मुल्क में विद्रोह इस कदर भड़का है कि राजनेता भागे-भागे फिर रहे हैं। राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री निवास पर प्रदर्शनकारी कब्जा जमा कर बैठ गए हैं। सड़कों पर संग्राम छिड़ा है। इस बीच श्रीलंका के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर सनथ जयसूर्या ने देश की मदद करने के लिए भारत का आभार जताया है।
#WATCH| After a stable govt, IMF, India & all friendly countries will… help Sri Lanka. India, being very helpful from the start of crisis, has given aide. We are thankful. India is playing a big role for Sri Lanka: Former Sri Lankan cricketer Sanath Jayasuriya to ANI#SriLankapic.twitter.com/gBuSdSJtAG
सनथ जयसूर्या ने ANI से बात करते हुए कहा, “देश में स्थिर सरकार के गठन के बाद, आईएमएफ, भारत और सभी मित्र देश श्रीलंका की मदद करेंगे। भारत ने संकट की शुरुआत से ही काफी मदद और सहयोग दिया है। इसके लिए हम आभारी हैं। भारत, श्रीलंका के लिए बड़ी भूमिका निभा रहा है।”
India has extended this year itself an unprecedented support of over US$ 3.8 billion for ameliorating the serious economic situation in Sri Lanka. We continue to follow closely the recent developments in Sri Lanka: MEA#SriLankaEconomicCrisispic.twitter.com/boTjbJ2VHq
बता दें कि श्रीलंका के लगातार बिगड़ते हालात के बावजूद भारत ने शुरू से ही मदद की है।। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया कि इस कठिन दौर से उबरने की कोशिश में देश श्रीलंका के लोगों के साथ खड़े हैं। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि भारत ने आर्थिक संकट से जूझ रहे श्रीलंका को 3.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की फौरी मदद की पेशकश की है। इतना ही नहीं, भारत आगे भी श्रीलंका की मदद करता रहेगा।
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि राष्ट्रपति भवन में रखी गोटबाया राजपक्षे की करोड़ों रुपए की नकदी प्रदर्शनकारियों के हाथ लगी है। इसका एक वीडियो भी वायरल हुआ। वीडियो में देखा गया कि राष्ट्रपति भवन पर कब्जा करने वाले प्रदर्शनकारियों में से एक नोटों की गड्डियाँ गिन रहा है। वहीं एक प्रदर्शनकारी नोटों का बंडल दिखा रहा है।
वहीं बीते दिनों श्रीलंका के आम लोगों के साथ प्रदर्शन में श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर्स भी देश के लोगों के साथ खड़े दिखाई दिए। पूर्व श्रीलंकाई कप्तान सनथ जयासूर्या प्रदर्शनकारियों के सपोर्ट में सड़क पर भी नजर आए थे। कोलंबो में राष्ट्रपति भवन के पास जमा प्रदर्शनकारियों की भीड़ में सनथ जयसूर्या भी पहुँच गए थे।
जयसूर्या ने खुद ट्विटर पर प्रदर्शनकारियों के साथ फोटो पोस्ट की थी। उन्होंने इसके साथ कैप्शन में लिखा था, “मैं हमेशा श्रीलंका के लोगों के साथ खड़ा हूँ और जल्द ही जीत का जश्न मनाऊँगा। इसे बिना किसी उल्लंघन के जारी रखा जाना चाहिए।” वहीं पूर्व कप्तान कुमार संगकारा ने प्रदर्शन कर रहे लोगों का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “यह हमारे भविष्य के लिए है।” महेला जयवर्धने ने भी उनके इस ट्वीट को रीट्वीट किया था।
पाकिस्तान के मशहूर स्तंभकार नुसरत मिर्जा (Nusrat Mirza) ने एक इंटरव्यू में कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। पाकिस्तानी पत्रकार और YouTuber शकील चौधरी (Shakil Chaudhary) को रविवार (10 जुलाई, 2022) को दिए इंटरव्यू में नुरसत मिर्जा ने दावा किया है कि उन्होंने 2005 से 2011 के बीच भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कई जानकारियाँ एकत्र की थीं। उन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और ‘मिल्ली गैजेट’ अखबार के मालिक जफरुल इस्लाम खान ने भारत में आमंत्रित किया था। सोशल मीडिया में उनका ये इंटरव्यू खूब वायरल हो रहा है।
EXPLOSIVE!
Nusrat Mirza, a Pakistani columnist who has visited India many times during the Congress rule boasts on camera that he used to pass on information collected during his visits to the ISI, claims he was invited by Hamid Ansari and the Milli Gazette’s Zafarul Islam Khan. pic.twitter.com/6Rrn3xvRJu
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया, “मैंने पाँच बार भारत की यात्रा की। 2005 में चंडीगढ़ का दौरा किया और 2006 में हैदराबाद, बेंगलुरु और चेन्नई का दौरा किया। इसके बाद मैंने कोलकाता, पटना और अन्य स्थानों का दौरा किया।”
‘मुझे हामिद अंसारी ने आमंत्रित किया था’
मिर्जा ने बताया कि जिस समय भारत में कॉन्ग्रेस का शासन था, उस समय वह आतंकवाद पर हुए एक सेमिनार में शामिल होने के लिए भारत आए थे। उनके शब्दों में, “2010 में मुझे पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने आतंकवाद पर हुए एक सेमिनार में आमंत्रित किया था। हालाँकि मैं मानता हूँ कि हम भी बहुत बड़े एक्सपर्ट नहीं हैं, लेकिन हम मुगल हैं। हमने सदियों तक भारत पर राज किया है। मैं उनकी संस्कृति को समझता हूँ। हम वहाँ के हालात से अच्छी तरह वाकिफ हैं। हम उनकी कमजोरियों के बारे में भी जानते हैं, लेकिन मसला ये है कि मैंने भारत के बारे में जो भी जानकारी इकट्ठा की थीं, उसका इस्तेमाल पाकिस्तान में अच्छे नेतृत्व की कमी के कारण नहीं हो रहा है। पाकिस्तान में ऐसा कोई शख्स नहीं है, जो मेरे तर्जुबे से इत्तेफाक रखे।”
2011 में जफरुल इस्लाम खान से मिले
उन्होंने भारत की यात्राओं के दौरान एकत्र की गई जानकारी का ठीक ढंग से उपयोग नहीं करने के लिए पाकिस्तान की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, “क्या आप जानते हैं कि पाकिस्तान में क्या समस्या है? जब कोई नया चीफ आता है, तो वह पिछले चीफ द्वारा किए गए सभी कार्यों को दरकिनार कर नए सिरे से कार्य शुरू करता है।” मिर्जा ने बताया कि साल 2011 में वह ‘मिली गैजे’ट के जफरूल इस्लाम के न्यौते पर भारत पहुँचे थे। वह भारत दौरे से लौटकर जब पाकिस्तान गए तब उन्हें उस समय आईएसआई के रिटायर हो रहे डीजीएसआई ने कहा था कि जो भी जानकारी उन्होंने इकट्ठा की है वो, आईएसआई के नए चीफ जनरल कियानी को दें। मिर्जा ने बताया, “इस पर मैंने कहा कि मैं उन्हें जानकारी नहीं दूँगा, आप खुद कियानी को ये जानकारी दे दें।” मालूम हो कि साल 2011 में केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी।
एफएटीएफ का जिक्र करते हुए उन्होंने आगे कहा, “मेरी तरफ से जो जानकारी मिली उसके बाद पाक आर्मी के ब्रिगेडियर की ओर से मुझे फोन आया। इस फोन कॉल में कहा गया कि ऐसी ही जानकारी अगर और मिल जाए तो बेहतर रहेगा। जब से एफएटीएफ आया है तब से पाकिस्तान ने पर (भारत में) कोई एक्टिविटी नहीं की है, उसके हाथ पैर बंधे हैं।”
जब चौधरी ने कहा कि वह एकेडमिक एक्सपर्ट के बारे में बात कर रहे हैं, तो मिर्जा ने कहा, “देखिए, उनके पास 29 राज्य हैं। मैंने उनमें से 15 का दौरा किया है। उस वक्त लोकसभा और राज्यसभा के 56 मुस्लिम सदस्य थे। मेरी उन सभी के साथ मेरी अच्छी दोस्ती थी। वे बहुत मददगार थे। ऐसा नहीं है कि भारत पर कोई शोध या लिखित कार्य नहीं हुआ है। हमारे पास 60 के दशक की किताबें मौजूद हैं।”
बातचीत के दौरान चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी पत्रकारों को भारत की बुनियादी जानकारी भी नहीं है। उन्होंने कहा कि एक बार एक वरिष्ठ पत्रकार ने कहा था कि भारत के 40 राज्यों में अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं। जब उन्हें सही करने की कोशिश की कि भारत में केवल 29 राज्य हैं, तो वे इस पर नाराज हो गए और कहा कि हमें इसकी बखूबी जानकारी है। मिर्जा ने इसका जवाब दिया, “मुझे पता है कि अलगाववादी आंदोलन कहाँ हो रहे हैं, लेकिन कोई भी इस जानकारी का फायदा नहीं उठाना चाहता है। अलगाववादी आंदोलन भारत के सभी क्षेत्रों में हो रहे हैं। इस बारे में कोई संदेह नहीं है। मैंने कहा था कि भारत में 26 आंदोलन चल रहे थे, लेकिन किसी ने कहा कि अब 67 ऐसे आंदोलन हैं। मुख्य आंदोलन कश्मीर और बंगाल में हो रहे हैं, लेकिन ये भी बहुत प्रभावी नहीं हैं क्योंकि कोई उनकी मदद नहीं कर रहा है।”
‘भारत शांति के खिलाफ है’
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत और पाकिस्तान एक-दूसरे के साथ शांति से रह सकते हैं। इसको लेकर मिर्जा ने भारत पर शांति के खिलाफ और बदला लेने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मुगलों ने भारत पर कई वर्षों तक राज किया है। भारत इसका बदला लेना चाहता है और पाकिस्तान को खत्म करना चाहता है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ दल के एक नेता से मुलाकात की बात कही। उन्होंने कहा, “जब मैं यूपी गया तो पार्टी के एक नेता से मिला। उन्होंने मुझे बताया कि कैसे उनकी सरकार ने मुस्लिमों का समर्थन किया और उन्हें नौकरी दी। वह सही था। अगर वे ऐसे ही जीना चाहते हैं तो यह स्वागत योग्य है, लेकिन अगर वे मुस्लिमों को गुलाम बनाना चाहते हैं, तो यह अस्वीकार्य है।”
‘कश्मीर पर पाकिस्तान का अधिकार’
उनसे पाकिस्तान पर लगे आरोपों के बारे में पूछा गया कि क्या 1947 से भारत के लिए कई समस्याएँ पैदा की गई हैं। इस पर मिर्जा कहते हैं, “भारत जबरदस्ती जूनागढ़ और हैदराबाद ले गया जहाँ के राजा मुस्लिम थे, लेकिन बहुसंख्यक हिंदू थे। अगर कश्मीर पर भी यही बात लागू की जाती है, तो एक तरह से पाकिस्तान का इस पर (कश्मीर) अधिकार है।” वह इस बात से सहमत नजर आए कि पाकिस्तानी नेताओं ने अतीत में कई गलतियाँ की हैं, लेकिन इस तर्क का समर्थन नहीं किया कि पाकिस्तान को केवल कश्मीर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
‘मुस्लिमों का नरसंहार करना चाहता है भारत’
मिर्जा ने दावा किया कि भारत में मुस्लिमों का नरसंहार करने की योजना थी। उन्होंने कहा कि यह उनके शब्द नहीं थे, बल्कि अमेरिका और अन्य देशों के बुद्धिजीवी और विशेषज्ञ ऐसा कह रहे थे। इस पर चौधरी ने मिर्जा को काउंटर करते हुए कहा कि जुल्फिकार भुट्टो ने भी भारत के खिलाफ इसी तरह के आरोप लगाए थे, लेकिन तब से मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ी है। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मिर्जा ने कहा, “मैं 15 राज्यों के हर हिस्से में गया हूँ। मुझे पता है कि वहाँ क्या हो रहा है।”
‘मुंबई हमले के लिए भारत जिम्मेदार’
मिर्जा ने इंटरव्यू के दौरान दावा किया कि 2008 के मुंबई हमले में पाकिस्तान का हाथ नहीं था। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान ने 26/11 में कोई भूमिका नहीं निभाई। यहाँ तक कि भारत के विशेषज्ञ भी कहते हैं कि यह अंदर का काम था।” उन्होंने पत्रकार अमरेश मिश्रा द्वारा लिखे गए लेखों का उल्लेख किया जो 26/11 के हमले में पाकिस्तान को क्लीन चिट देने और उनके अपराध पर पर्दा डालने के लिए जाने जाते हैं। उनकी रिपोर्ट को मिर्जा के मीडिया हाउस ने दोबारा प्रकाशित किया था। मिर्जा ने दावा किया कि पाकिस्तान को दोष देना, उसकी छवि खराब करना भारत की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
जापान के उच्च सदन हाउस ऑफ काउंसलर की जिन सीटों पर चुनाव हुए थे, उनके नतीजे आ गए हैं। सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) और उसके गठबंधन सहयोगी ने इन चुनावों में भारी जीत हासिल की है। पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे की हत्या इन्हीं चुनावों के लिए LDP के पक्ष में प्रचार करते वक्त की गई थी। वर्तमान प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा भी इसी पार्टी के सदस्य हैं।
लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और गठबंधन सहयोगी कोमिटो (Komeito) ने मिलकर 76 सीटों पर जीत दर्ज की। इसमें से अकेले लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ने 63 सीट हासिल की है। जापान की क्योदो समाचार एजेंसी के अनुसार, इसके साथ ही 248 सदस्यों वाले ऊपरी सदन में एलडीपी गठबंधन के पास 166 सीटें हो गई हैं। 2013 के बाद से एलडीपी का ये सबसे अच्छा प्रदर्शन है। वहीं जापान की मुख्य विपक्षी कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेटिक पार्टी के पास 23 सीटें थी, जो अब घटकर 17 पर पहुँच गई है।
संसदीय चुनाव में जीत के बाद भी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी में जीत की जश्न की जगह गमगीन माहौल था। रविवार (10 जुलाई 2022) की देर रात प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा मीडिया के सामने आए। इस दौरान एलडीपी के अधिकारियों ने शोक व्यक्त करने के लिए रिबन के साथ काले रंग की टाई और काले कपड़े पहने थे। उन्होंने शिंजो आबे की हत्या पर मौन रखा। उन्हें चुनाव से दो दिन पहले शुक्रवार (8 जुलाई 2022) को गोली मार दी गई थी।
किशिदा ने आबे को गोली मारने के संदर्भ में कहा, “हिंसा ने चुनावी प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया, जो हमारे लोकतंत्र की नींव है। मैं हर कीमत पर इस चुनाव से गुजरने के लिए दृढ़ था। मैं लोकतंत्र की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत करना जारी रखूँगा।” इसके साथ ही किशिदा ने संविधान में संशोधन की योजनाओं को आगे बढ़ाने की कसम खाई। पीएम किशिदा ने कहा कि अब उन्हें देश की आर्थिक स्थिति, यूक्रेन जंग के कारण बढ़ती महँगाई, नए पूँजीवाद, कूटनीति, सुरक्षा, संविधान संशोधन जैसे मुद्दों से जूझना होगा। उन्होंने कहा है कि वे इस दिशा में काम जारी रखेंगे।
गौरतलब है कि शिंजो आबे 8 जुलाई को जापान के नारा शहर में एक चुनावी कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान एक शख्स ने पीछे से गोली चला दी। आबे को गोली लगी और वह उसी जगह पर गिरकर खून से लथपथ हो गए। उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। आबे जापान के सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री रहे थे। आबे ने अगस्त 2020 में खराब स्वास्थ्य के कारण पद छोड़ दिया था। आबे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के खास दोस्त थे। कई मौकों पर पीएम मोदी और शिंजो एक-दूसरे को याद कर चुके हैं। पिछले साल ही भारत ने शिंजो आबे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
बकरीद के मौके पर उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से एक हैरान करने वाली वीडियो सामने आई है। ये वीडियो एक ऑटो की है जिसमें नमाज पढ़कर लौटते लोग बैठे थे। वीडियो में देख सकते हैं कि पुलिस एक एक करके सबको उतार रही है और ये देखकर हैरान है कि जिस ऑटो में अधिकतम 4 लोगों के बैठने की जगह मुश्किल से होती है उसमें 27 लोग बैठे हैं।
वीडियो में पुलिस को इन सभी लोगों को ऑटो से उतारकर इनकी गिनती करते देखा जा सकता है। धीरे-धीरे यह गिनती 27 पहुँच जाती है। इसमें ज्यादातर बच्चे शामिल होते हैं। पुलिस सबको एक लाइन में खड़ा करती है। फिर एक आदमी सफाई देने आगे आता है। मगर पुलिसकर्मी उसे फटकार के पीछे भेज देता है।
इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यूपी पुलिस ने इस ऑटो को बिंदकी कोतवाली के ललौली चौराहे पर पकड़ा। पूछताछ में सामने आया कि ये सभी लोग महरहा गाँव के हैं जो बकरीद की नमाज पढ़कर लौट रहे थे लेकिन पुलिस ने इन्हें बीच में रोक लिया और इनकी गिनती करते हुए वह हैरान रह गए।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऑटो पर नजर ओवरस्पीडिंग करने के कारण गई। जब रोका और सबको उतरने को कहा तो लोग यकीन नहीं कर पाए कि एक ऑटो में इतने लोग कैसे भरे जा सकते हैं। ड्राइवर मिलाकर 27 लोग इस ऑटो में थे। इनमें ज्यादातर पुरुष थे। किसी ने कुर्ता पहना था तो किसी ने सफेद और हरी टोपी। अंदर छोटी-छोटी लड़कियाँ भी थीं।
पुलिस ने इनकी गिनती के बाद ऑटो को सीज कर लिया है। ड्राइवर पर आरोप है कि उसने पुलिस के रोके जाने के बाद भी अपना ऑटो नहीं रोका था, इसलिए पुलिस को उसे पीछे दौड़ कर पकड़ना पड़ा।
एक ऑटो में एक परिवार 27 सदस्य तो ऑटो में ही हैं इसके अतिरिक्त बहन-बेटियां भी हैं
लोग इस वीडियो को देख अनुमान लगा रहे हैं कि 27 लोगों को आखिर किस हिसाब से अडजस्ट किया गया होगा। कोई इसे देख देश की जनसंख्या पर सवाल खड़े कर रहा है तो कोई कह रहा है कि इस तरह जनसंख्या बढ़ती रही तो ऑटो में ही नहीं ऑटो की छतों पर भी लोग बैठाए जाने लगेंगे।
1-2 या 10 नहीं, ऑटो में बैठे थे 27 लोग…देखकर पुलिस भी रह गई हैरान
उत्तर प्रदेश के फ़तेहपुर का हैरान करने वाला मामला है, जहां 27 लोग लोग 1 auto में घर से बक़रीद की नमाज़ अदा करने जा रहे थे। फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए ऑटो रिक्शा को सीज कर दिया है। #Fatehpurpic.twitter.com/ysZCFvIlxK
— Shubhankar Mishra (@shubhankrmishra) July 11, 2022
मध्य प्रदेश का इंदौर। इंदौर के तेजाजी नगर में नाजिम का वह मकान है, जिसमें आदिवासी युवक पंकज किराए पर रहता था। आरोप है कि नाजिम ने पहले अपने साथियों के साथ मिलकर पंकज को बुरी तरह पीटा। फिर उसके गुप्तांग में पेट्रोल डाल दिया। इस घटना का वीडियो बनाया। कथित तौर धमकाया भी कि यदि उसने शिकायत की तो वे वीडियो वायरल कर देंगे।
पंकज ने अब नाजिम का घर खाली कर दिया है। उसका कहना है कि उसे माँ-बहन की गाली भी दी गई। आरोपितों ने आदिवासियों को चोर बताया। पंकज के साथ ये सब इसलिए हुआ, क्योंकि उसने एक लैपटॉप खरीद लिया। नाजिम को लगा कि उसने यह लैपटॉप उसके बेटे से 50,000 रुपए लेकर खरीदा है। लिहाजा पिटाई कर 50 हजार रुपए लेने की बात जबरन कबूल भी करवाई। पुलिस ने मामला दर्ज कर नाजिम और उसके साथियों आदिल, सद्दाम तथा सलमान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
वायरल हो रहे इस वीडियो में पंकज खुद को लगी चोटों को दिखा और अपने साथ हुई क्रूरता को बता रहे हैं।
पंकज ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा है, “मैं लगभग डेढ़ साल से अपनी 2 बहनों के साथ नाज़िम के मकान में किराए पर रह कर पढ़ाई करता हूँ। 9 जुलाई को मेरा मकान मालिक नाज़िम और उसका पड़ोसी आदिल मुझे एक्टिवा पर बिठा कर बकरा लेने के बहाने नायता मुड़ला इलाके में किसी के घर ले गए। वहाँ पहले से 2 लोग और मौजूद थे। इन सभी ने मुझे एक कमरे में बंद कर दिया। मेरा गला पकड़ कर हाथों-पैरों को बाँध कर उलटा पटक दिया।”
शिकायत की कॉपी
पंकज ने शिकायत में आगे बताया है, “इसके बाद इन सभी ने मेरा मोबाइल और ATM छीन लिया। इस दौरान मेरे मकान मालिक ने मुझ पर अपने बेटे निशान का लैपटॉप धमका कर 50 हजार रुपए में खरीदने का आरोप लगाया, जबकि मैंने उसे अपने पिताजी का चेक दे कर खरीदा था। इसके बाद उन चारों ने मुझे माँ और बहन की गालियाँ देते हुए प्लास्टिक पाइप व लात-घूँसों से मारा और मेरे प्राइवेट पार्ट में एक बोतल से पेट्रोल डाल दिया। मुझे नंगा कर लात-घूँसे मारते हुए मेरा वीडियो बनाया गया। उस वीडियो में मैंने अपनी जान बचाने के लिए निज़ाम के बेटे से लैपटॉप लेने और उसे वापस करने का झूठ बोला।”
FIR कॉपी
शिकायत में पंकज ने आगे लिखा है, “इस मारपीट के दौरान चारों ने सभी आदिवासियों को चोट्टा (चोर) कहा और खुद पर लगी चोट को एक्सीडेंट में आना बताने की धमकी दी। बात न मानने पर मेरी पिटाई की वीडियो वायरल कर देने की बात कही वहाँ से आने के बाद मैंने अपनी बहन और दोस्तों को इस घटना के बारे में बताया।” पंकज की शिकायत पर इंदौर पुलिस ने IPC की धारा 342, 294, 323, 506, 34 के साथ SC/ST एक्ट 3(2)(v) के तहत केस दर्ज कर लिया। चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
इस घटना के बाद पंकज और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने नाज़िम का घर खाली कर दिया है। पंकज के साथियों ने पुलिस की मौजूदगी में एक वाहन में ये पूरा सामान लदवाया। आरोपितों पर धारा 307 IPC और रासुका लगाने की माँग की जा रही है।
महाराष्ट्र में बागी विधायकों की अयोग्यता के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (11 जुलाई, 2022) को सुनवाई हुई। इस दौरान उद्धव ठाकरे खेमे के सुनील प्रभु की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि कल अयोग्यता का मामला विधानसभा में सुना जाएगा। अगर कोर्ट आज सुनवाई नहीं करता तो कल स्पीकर उसे खारिज कर देंगे। जब तक कोर्ट सुनवाई नहीं करता, तब तक उन्हें निर्णय लेने से रोक दिया जाए। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र विधानसभा के नए अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से कहा कि वे विधानसभा के 53 शिवसेना सदस्यों (विधायकों) को जारी किए गए नए अयोग्यता नोटिस पर कोई कार्रवाई न करें।
Supreme Court asks Solicitor General to inform Maharashtra Assembly Speaker to not take any decision unless the plea is decided by SC.
SC says this matter will require the constitution of a bench & will take some time to be listed. The matter will not be listed tomorrow.
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमण ने सॉलिसिटर जनरल से महाराष्ट्र विधानसभा नए अध्यक्ष (स्पीकर) राहुल नार्वेकर को सूचित करने के लिए कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर फैसला नहीं किया जाता है, तब तक कोई निर्णय न लें। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इस मामले में एक बेंच के गठन की आवश्यकता होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समय लेने वाला मामला है। बेंच का गठन तुरंत नहीं हो सकता। और मामला सूचीबद्ध होने में कुछ समय लगेगा, कल सूचीबद्ध नहीं होगा।
बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना विधायकों की अयोग्यता के मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उद्धव गुट की तरफ से जहाँ सुनील प्रभु सुप्रीम कोर्ट पहुँचे और अयोग्यता वाले मामले पर सुनवाई की माँग की। वहीं विधानसभा सचिवालय के प्रधान सचिव ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब देकर कहा था कि राहुल नार्वेकर स्पीकर बने हैं और उन्हें ही अयोग्यता के मामले पर सुनवाई करने दिया जाएगा।
दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले उद्धव ठाकरे ने अपने 15 विधायकों को एक भावुक पत्र लिखा। इसमें चिट्ठी में उन्होंने संकटकाल में भी पार्टी के प्रति निष्ठा और उन पर विश्वास दिखाने के लिए विधायकों को धन्यवाद कहा। पत्र में उद्धव ने लिखा है, “किसी भी धमकी और प्रलोभन के चक्कर में न पड़ते हुए आप सभी एकनिष्ठ रहे और शिवसेना को बल दिया, इसके लिए धन्यवाद। माता जगदंबा आपको हमेशा स्वस्थ रखे, ये प्रार्थना करता हूँ।”
बता दें कि प्रभु शिवसेना के मुख्य सचेतक हैं। वहीं बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत के समक्ष कम से कम चार याचिकाएँ लंबित हैं जिनमें सुनील प्रभु एक पक्ष हैं:
डब्ल्यूपी (सी) 2022 की संख्या 468 (प्रतिवादी संख्या 4)
डब्ल्यूपी (सी) 2022 की संख्या 469 (प्रतिवादी संख्या 5)
डब्ल्यूपी (सी) 2022 की संख्या 470 (याचिकाकर्ता)
डब्ल्यूपी (सी) 2022 की संख्या 479 (याचिकाकर्ता)
इनमें से पहली दो रिट याचिकाएँ शिवसेना के अपराधी विधायकों द्वारा दायर याचिकाओं से संबंधित हैं, जिसमें सुनील प्रभु द्वारा दायर अयोग्यता याचिकाओं पर महाराष्ट्र विधानसभा के उपाध्यक्ष द्वारा शुरू की गई अयोग्यता कार्यवाही को चुनौती दी गई है।
वहीं प्रभु द्वारा दायर तीसरी रिट याचिका में महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट कराने के लिए विधानसभा को अवैध रूप से बुलाए जाने को चुनौती दी गई है। जबकि चौथा प्रभु द्वारा दायर एक याचिका है जिसमें अजय चौधरी को हटाकर नवनियुक्त अध्यक्ष की नियुक्ति के साथ-साथ पदों से हटाने के अवैध आदेश को चुनौती दी गई है।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र में अब नए मुख्यमंत्री के रूप में एकनाथ शिंदे की सरकार है। वहीं एकनाथ शिंदे गट ने किस तरह से उस समय शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस और राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी के साथ शिवसेना के गठबंधन पर नाखुशी जाहिर की थी। जिस पर कुछ बागी विधायकों को राज्य में एमएलसी चुनावों के लिए मतदान करते समय पार्टी व्हिप के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डिप्टी स्पीकर से अयोग्यता नोटिस मिला।
इसके बाद बागी विधायकों ने अयोग्यता नोटिस के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 27 जून को शिंदे और उनके बागी विधायकों के समूह को 12 जुलाई तक डिप्टी स्पीकर द्वारा भेजे गए अयोग्यता नोटिस पर जवाब दाखिल करने के लिए समय देते हुए अंतरिम राहत दी। वहीं इसके बाद, कोर्ट ने 29 जून को राज्यपाल द्वारा बुलाए गए फ्लोर टेस्ट को भी हरी झंडी दे दी।
इसके कारण उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी सरकार गिर गई और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली एक नई सरकार ने शपथ ली। इसके बाद, विधानसभा द्वारा नए अध्यक्ष का चुनाव किया गया और उन्होंने शिवसेना के 55 में से 53 विधायकों को अयोग्यता नोटिस भेजा है।
भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के ऊपर चल रहे कोर्ट की अवमानना केस में सुप्रीम कोर्ट ने उसे 4 महीने की जेल और 2000 रुपए जुर्माना देने की सजा सुनाई है। माल्या पर आरोप है कि उसने साल 2017 में कोर्ट से एक डील की जानकारियाँ छिपाई। अगर अब वह आगे भी कोर्ट के आदेश नहीं सुनता तो उसकी सजा बढ़ाई जा सकती है।
Supreme Court awards 4-month jail sentence and imposes Rs 2000 fine on fugitive businessman Vijay Mallya who was found guilty of contempt of court in 2017 for withholding information from the court pic.twitter.com/Z8zP5P8qdf
सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की पीठ ने माल्या की सजा तय करते हुए कहा कि ये दंड जरूरी है क्योंकि माल्या को अपने किए का कोई पछतावा नहीं है। कोर्ट ने उसे 4 हफ्ते के भीतर 40 मिलियन डॉलर (लगभग 317 करोड़ रुपए) ब्याज सहित वापस करने को कहा है। ये पैसा उसने अपने बच्चों के विदेशी अकॉउंट में डाला था। अगर माल्या दी गई अवधि में आदेशों का पालन नहीं करता है तो फिर उसकी संपत्ति कुर्क होनी शुरू होगी।
#UPDATE | Supreme Court asks Mallya to deposit back USD 40 million with interest within four weeks and if he fails to do so it would lead to attachment of properties.
उल्लेखनीय कि माल्या के खिलाफ केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया था कि कैसे माल्या ने न केवल विदेशी खातों में पैसे ट्रांस्फर को लेकर गलत सूचना दी बल्कि कोर्ट में पेश न होकर अदालत की अवमानना भी की। इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माल्या को 2017 में दोषी माना था और उसके बाद ये फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस मामले में उसे सजा दी गई है।
जानकारी के अनुसार, ये केस डिएगो डील से जुड़ा हुआ था। इसी डील के पैसे यानी 40 मिलियन डॉलर माल्या ने अपनी बच्चों के खातों में भेजे थे। लेकिन जब कोर्ट ने इनका सही ब्यौरा माँगा तो माल्या ने ऐसा नहीं किया और केस में दोषी करार दिए गए।
बता दें कि भारतीय बैंकों से 9000 करोड़ रुपए से अधिक का उधार लेकर विजय माल्या 2016 में यूके भाग गया था। इसके बाद भारत में वह भगौड़ा घोषित किया गया। जिन बैंकों ने उसे उधार दिया। उनमें सबसे ज्यादा यानी 1,600 करोड़ रुपए स्टेट बैंक ने दिए थे। इसके अलावा, जिन अन्य बैंकों ने एयरलाइन को कर्ज दे रखा है, उनमें पंजाब नेशनल बैंक (800 करोड़ रुपए), आईडीबीआई बैंक (800 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ इंडिया (650 करोड़ रुपए), बैंक ऑफ बड़ौदा (550 करोड़ रुपए), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (410 करोड़ रुपए) शामिल हैं।