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नूपुर शर्मा ने जो कहा वह गलत है, उसे इस्लाम माफ नहीं करेगा: निजामुद्दीन दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी, कहा- मंदिर जाकर करे तौबा

दिल्ली की हजरत निजामुद्दीन दरगाह के दीवान अली मूसा निजामी का कहना है कि बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद को लेकर जो टिप्पणी की थी, वह गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बातें किसी को भी नहीं कहनी चाहिए। इस्लाम में इसके लिए माफी नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में जम्हूरियत है। यदि यह इस्लामी मुल्क होता तो उसने जो कुछ कहा, उसकी एकमात्र सजा मौत होती।

निजामी ने कहा, “नूपुर शर्मा ने जो कहा उसके लिए उसे इस्लाम माफ नहीं करेगा। इसकी सजा मौत है। भारत में जम्हूरियत है, इसलिए वह जिंदा है। उसे अपने बयान के लिए खुलेआम माफी माँगनी चाहिए। मैं तो कहूँगा कि उसे मंदिर में जाकर माफी माँगनी चाहिए। जो कहा उसके लिए तौबा करनी चाहिए। इसका बड़ा असर होगा।” साथ ही उन्होंने कहा कि भारत जम्हूरियत वाला देश है। इसलिए विरोध में ‘सर तन से जुदा’ के जो नारे लग रहे हैं, वह भी गलत है।

यह पूछे जाने पर कि कई इस्लामी विद्वानों का कहना है कि नूपुर शर्मा ने गलत नहीं कहा है। उन्होंने जो कहा वह इस्लामी किताबों में दर्ज है। निजामी ने जवाब में जोर देकर कहा, “उसने जो भी कहा वह गलत है। इस्लाम में इसके लिए माफी की कोई गुंजाइश नहीं है।” हालाँकि नूपुर शर्मा को लेकर इतना सख्त रवैया दिखाने वाले निजामी, कन्हैया लाल का जिक्र आते ही हँस पड़े थे। वैसे अपने जवाब में उन्होंने इस निर्मम हत्या को भी गलत माना था।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों इस्लामिक स्कॉलर अतीकुर रहमान ने कहा था कि नूपुर शर्मा ने पैगंबर मोहम्मद पर जो टिप्पणी की थी, वह गलत नहीं थी। एक टीवी शो में सोशल मीडिया के जरिए फैलाई गई नफरत और धमकियों पर अफसोस जताते हुए उन्होंने कहा था कि यदि किसी को लगता है कि नूपुर शर्मा ने गलत कहा है तो किसी वरिष्ठ मौलवी को बताना चाहिए कि वह कहाँ गलत थीं।

रहमान ने कहा था, “मैं आपको बताना चाहता हूँ कि नूपुर शर्मा गलत नहीं थीं। वो गलत नहीं थी। अगर कोई इस्लामी विद्वान या मुस्लिम सोचता है कि वह गलत थीं, तो इस्लाम का दायरा इतना व्यापक है कि उन्हें माफ किया जा सकता है। कोई वरिष्ठ मौलवी बताए कि वो कहाँ गलत थीं।” लेकिन निजामुद्दीन की दरगाह के दीवान निजामी ने इस संबंध में ऑपइंडिया के सवाल के जवाब में रहमान जैसे इस्लामी विद्वानों के मत को सिरे से खारिज कर दिया।

अपनी 84 साल की उम्र का हवाला देते हुए निजामी ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने कई दौर देखे हैं। माहौल खराब करने के लिए हमेशा से बयानबाजी होती रही है। लेकिन उनके अनुसार नफरत का जो दौर आज दिख रहा है, वैसा पहले कभी नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यह नफरत अभी और बढ़ेगी। जब तक यह सरकार रहेगी, यह खत्म नहीं होगी।

ऑपइंडिया के साथ बातचीत में निजामी ने दावा किया कि हिंदुओं के बीच नफरत का प्रचार किया जा रहा है। इसके कारण साल भर के भीतर निजामुद्दीन की दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या में 60 फीसदी तक कमी आने की भी बात कही। उन्होंने बताया, “पहले यहाँ खूब हिंदू आते थे। हर रोज। दोपहर के 2 बजे से रात के 11 बजे तक दरगाह पर आने वालों में खूब हिंदू होते थे। लेकिन अब इक्का-दुक्का हिंदू ही आते हैं। पहले यहाँ हिंदू भंडारे भी करते थे। करीब-करीब रोज। अन्न-पैसा बाँटते थे। लेकिन अब वैसी स्थिति नहीं रही।”

पृथ्वी की तरफ बढ़ रहा सोलर स्टॉर्म, टक्कर होते ही गुल हो सकती है बिजली-मोबाइल सिग्नल पर भी खतरा: 22 साल बाद आए संकट के बारे में जानें सब कुछ

14 जून को सूर्य से फूटी सौर ज्वाला अब धरती से टकराने की कगार पर आ गई है। अमेरिका की नेशनल ओशिएनिक एंड एटमॉसफेरिक एडमिनिस्ट्रेशन ने इसकी जानकारी देते हुए अलर्ट भी जारी किया है। उन्होंने बताया है कि धरती की ओर बढ़ते हुए ये ज्वाला सौर तूफान बन धरती से टकराएगा जिससे कि ब्लैक आउट होने की संभावना है।

अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञ डॉ. तमिथा स्कोव ने सूर्य से निकलने वाली इस सौर ज्वाला के बारे में ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लंबे साँप जैसी सौर ज्वाला पृथ्वी से टकराने वाली है। नासा ने भविष्यवाणी करते हुए इसके 19 जुलाई को पृथ्वी से टकराने की बात कही। इसकी वजह से सैटेलाइट प्रभावित हो सकते हैं, साथ ही जीपीएस और रेडियो का काम भी प्रभावित हो सकता है।

सोलर स्टॉर्म का कैसे डालेगा धरती पर असर?

बता दें कि सौर तूफान को लेकर अगर वैज्ञानिकों द्वारा दी जा रही चेतावनी सही साबित होती है तो ये धरती पर इलेक्ट्रो मैग्नेटिक रेडिएशन और गर्मी बढ़ाएगी। इससे पृथ्वी की मैग्नेटिक फील्ड पर असर पड़ेगा और हो सकता है कि धरती पर अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में बिजली की समस्या देखने को मिले।

इसके अलावा रेडियो सिग्नल और मोबाइल सिग्नल पकड़ने में भी दिक्कत आने की संभावना है और हो सकता है कि जीपीएस इस्तेमाल करने वालों को भी बाधा का सामना करना पड़े। कुछ जानकार दावा कर रहे हैं कि ये सौर तूफान ऑनलाइन एक्टिविटी पर प्रभाव जरूर डाल सकता है। लेकिन ये इतनी बड़ी परेशानी नहीं होने वाला है।

स्पेसवेदर ने कहा है कि हो सकता है कि ये तूफान अगले हफ्ते आए या 20-21 जुलाई को धरती पर पहुँचे। उनके मुताबिक ये जी-1 क्लास तूफान होगा जोकि छोटा होगा, मगर सैटेलाइट संचालन में इससे परेशानी होगी। जानकारी के अनुसार, ऐसे सौर तूफानों की उत्पत्ति कोरोनल मास इजेक्शन, प्लाजमा और मैग्नेटिक एनर्जी छूटने से होती है। ये विस्फोट पृथ्वी पर एक साल में उत्पन्न होने वाले सभी बिजली संयंत्रों की ऊर्जा की तुलना में 100,000 गुना अधिक ऊर्जा पैदा कर सकता है।

कब-कब आया सौर तूफान?

उल्लेखनीय है कि सौर तूफान की घटनाएँ कम देखने को मिलती हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि ये खतरा पहली दफा धरती पर मंडराया हो। 22 साल पहले धरती ने एक खतरनाख सौर तूफान को झेला था। 14 जुलाई 2000 को बैस्टाइन डे इवेंट के तौर पर याद किया जाता है। इसी दिन सबसे घातक(X5) सौर तूफान धरती पर आया था। उससे पहले साल 1989 में भी दुनिया ने एक ऐसा तूफान देखा था और उसका असर कनाडा के क्यूबेक शहर पर काफी पड़ा था। इसी प्रकार 1859 में आए सौर तूफान से यूरोप और अमेरिका के टेलीग्राफ नेटवर्क को भारी नुकसान हुआ था।

गौहर चिश्ती ने अजमेर-उदयपुर में दंगों का बनाया था प्लान, जानते हुए भी चुप रहे दरगाह के दूसरे खादिम: रिपोर्ट में दावा- सर कलम करने को उकसाया था

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के बाद अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती दरगाह के बाहर भड़काऊ नारेबाजी के वीडियो सामने आए थे। इस मामले में दरगाह का खादिम गौहर चिश्ती भी आरोपित है जो फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है। पूछताछ से पता चला है कि उसने अजमेर और उदयपुर में दंगों का प्लान बनाया था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उसकी इस साजिशों के बारे में दरगाह के दूसरे खादिम भी जानते थे। बावजूद उन्होंने इसके बारे में पुलिस को नहीं बताया। रिपोर्ट के अनुसार गौहर ने 16 जून 2022 की शाम खादिमों के साथ मोहल्ले में बैठक की थी। इसके बाद दंगों की तैयारी को लेकर एक वाॅट्सएप ग्रुप बनाया गया। वह लोगों को ‘सर तन से जुदा’ के लिए भी उकसा रहा था। कथित तौर पर उसकी साजिशों का पता चलने के बाद खादिम दो गुट में बँट गए और 17 जून को हुए मौन जुलूस में शामिल नहीं हुए। इसी जुलूस में भड़काऊ नारे लगे थे। इसके बाद गौहर उदयपुर गया था, जहाँ मोहम्मद रियाज और गौस मोहम्मद ने दुकान में घुसकर 28 जून को कन्हैया लाल का गला काट दिया था।

रिपोर्ट की माने तो अभी तक की पूछताछ में कन्हैया लाल के हत्यारों के साथ उसके कनेक्शन सामने नहीं आए हैं। लिहाजा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने इस मामले से दूरी बना रखी है। उल्लेखनीय है कि जब गौहर फरार था तो कुछ रिपोर्टों में बताया गया था कि उदयपुर में वह कन्हैया लाल के हत्यारे से मिला था। निर्मम हत्या को अंजाम देने के बाद हत्यारे उसके पास ही शरण लेने अजमेर आ रहे थे, लेकिन रास्ते में पकड़े गए।

अजमेर पुलिस ने 25 जून को गौहर चिश्ती के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाने का केस दर्ज किया था। बाद में वह हैदराबाद से पकड़ा गया था। पत्रिका डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार उसके रिश्ते कई इस्लामिक संगठनों से भी मिले हैं। यह भी पता चला है कि गौहर दो मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था। इनमें से एक से वह 15 गूगल अकाउंट चला रहा था। इन गूगल अकाउंट का इस्तेमाल किस काम के लिए हो रहा था यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है।

कन्हैया लाल की हत्या नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट करने को लेकर की गई थी। पिछले दिनों राजस्थान पुलिस ने अजमेर दरगाह के एक और खादिम सलमान चिश्ती को नूपुर की हत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सलमान का जो वीडियो वायरल हुआ था, उसमें वह कह रहा था कि नूपुर की गर्दन लाने वाले को वह अपना मकान देगा। इसके बाद अजमेर की दरगाह शरीफ मैनेजमेंट कमिटी के सचिव सैयद सरवर चिश्ती का भी बयान सामने आया था। उन्होंने नुपूर शर्मा को मिल रहे समर्थन पर एतराज जताया था। कहा था कि मु​सलमान इसे बर्दश्त नहीं करेंगे। 

नूपुर शर्मा का Video देखने पर दौड़ा-दौड़ा कर मारे चाकू, रिपोर्ट में दावा- शिकायत से नूपुर का जिक्र हटाने के बाद बिहार पुलिस ने दर्ज की FIR

बिहार के सीतामढ़ी जिले में एक युवक को बीच बाजार दौड़ा-दौड़ा कर कुछ लोगों ने चाकू मार दिया। पीड़ित युवक की पहचान अंकित झा के तौर पर हुई है। उसकी हालत गंभीर है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा का वीडियो देखने के कारण उस पर हमला किया गया। हालाँकि पुलिस ने इससे इनकार किया है।

घटना 16 जुलाई 2022 की है। अंकित कुमार झा नानपुर थाना क्षेत्र के बहेरा गाँव का रहने वाला है। आरोपित नानपुर के हैं। इस मामले में नानपुर के गौरा उर्फ मोहम्मद निहाल, मोहम्मद बिलाल सहित 5 लोग आरोपित हैं। रिपोर्ट के अनुसार अंकित एक पान की दुकान पर था। तभी बिलाल वहाँ अपने साथियों के साथ आया। कथित तौर पर वे अंकित को नूपुर शर्मा का वीडियो देख गुस्से में आ गए। पहले अंकित के मुँह पर सिगरेट का धुआँ फेंकने लगे। इसका विरोध किए जाने पर उस पर चाकुओं से हमला कर दिया। जान बचाने के लिए अंकित भागा तो आरोपितों ने बाजार में दौड़ा-दौड़ा कर उस पर हमले किए। अंकित को 6 बार चाकुओं से गोदा गया। खून से लथपथ अंकित को स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया। गंभीर हालत देख उसे दरभंगा के डीएसीएच में रेफर कर दिया गया।

इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। साथ ही पुलिस पर मामले को दबाने के आरोप भी लग रहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार अंकित के परिजनों ने जो पहली शिकायत दी थी, उसमें नूपुर शर्मा का जिक्र था। लेकिन पुलिस ने पूर्व बीजेपी नेता का नाम हटाने के बाद ही इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की। पुलिस ने घटना में नूपुर शर्मा के कनेक्शन से साफ इनकार किया है। नशे के कारण आपसी विवाद में हुई घटना बताया है। पुपरी के डीएसपी विनोद कुमार ने बताया है कि दो लोगों की गिरफ्तारी हुई है। शेष फरार आरोपित भी जल्द पकड़े जाएँगे।

गौरतलब है कि इससे पहले बिहार के आरा से भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। आरा के राम गढ़िया मोहल्ले में चाय की दुकान पर नुपूर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट को लेकर दो युवकों के बीच बहस मारपीट में तब्दील हो गई थी। दरअसल, पीड़ित दीपक ने नुपूर शर्मा के समर्थन में पोस्ट शेयर किया था। इस पर रईस ने विवादित टिप्पणी की थी। 5 जुलाई 2022 की शाम रईस और दीपक के बीच चाय दुकान पर इसको लेकर विवाद हो गया। फिर रईस अपने साथ करीब 20-30 लोगों को ले आया। सभी ने दीपक की पिटाई शुरू कर दी। चाय की दुकान में तोड़फोड़ करते हुए दुकानदार सोनू के साथ भी मारपीट की। राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल और महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या भी नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट के कारण ही की गई थी।

हाथ में सर्टिफिकेट, माथे पर ‘पवित्रता का टीका’: अफ्रीका के चर्च में हुआ लड़कियों का वर्जिनिटी टेस्ट, पास होने पर खुशी का ठिकाना नहीं

दक्षिण अफ्रीका के एक चर्च में पिछले दिनों लड़कियों की पवित्रता चेक करने के लिए वर्जिनिटी टेस्ट आयोजित कराए जाने का मामला सामने आया है। खबरों के अनुसार, ये परीक्षण दक्षिण अफ्रीका के दूसरे सबसे बड़े चर्च यानी कि डर्बन के नजरेथ बैप्टिस्ट चर्च (Nazareth Baptist Church) द्वारा आयोजित किया गया। ऐसे आयोजन की जब वजह पूछी गई तो कहा गया कि इसे समाज की महिलाओं के बीच पवित्रता को प्रोत्साहित करने का प्रयास कहा जाता है। 

बता दें कि 1910 में बना यह चर्च डर्बन के उत्तरी भाग एभुलेनी में स्थित है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि चर्च द्वारा आयोजित कराए गए वर्जिनिटी टेस्ट में जिन लोगों ने भाग लिया वो चर्च में आने वाली 18 साल या उसके ऊपर की लड़कियाँ ही थीं।

बताया जा रहा है कि फ्री वर्जिनिटी टेस्ट का आयोजन वार्षिक कार्यक्रम के तौर पर कराया गया और जैसे ही प्रक्रिया खत्म हुई तो टेस्ट में पास हुई लड़कियों को सर्टिफिकेट दिए गए। साथ ही पवित्रता की पहचान के नाम पर माथे पर सफेद टीका भी लगाया गया।

ये टेस्ट 2022/2023 सत्र के लिए था। नीचे देख सकते हैं कि इसी तरह के सर्टिफिकेट टेस्ट में पास लड़कियों को दिए गए हैं। इनपर चर्च के शीर्ष के साथ-साथ उस विशेषज्ञ के भी हस्ताक्षर हैं जिन्होंने ये टेस्ट किया।

सोशल मीडिया पर कई अकॉउंट्स से वर्जिनिटी टेस्ट में सफल हुई लड़कियों की सर्टिफिकेट के साथ की तस्वीरें खूब शेयर हो रही हैं। 

अफ्रीका फैक्ट जोन नाम के ट्विटर हैंडल से भी इस टेस्ट में पास लड़कियों की तस्वीर साझा की गई है। इनमें देख सकते हैं कि जिस तरह लोग अपनी हर उपलब्धि वाले कागज साझा करते हैं वैसे ही इन लड़कियों ने इस सर्टिफिकेट को दिखा रखा है। इसके अलावा तस्वीरों में चर्च में इकट्ठा भीड़ देख अंदाजा लगा सकते हैं कि टेस्ट में भाग लेने के लिए लड़कियाँ कितनी उत्सुक थीं। 

वहीं सोशल मीडिया पर अन्य यूजर्स इस सर्टिफिकेट को देख पूछ रहे हैं कि क्या कोई ये बताएगा कि सर्टिफिकेट किस तरह काम आता है और वर्जिनिटी चेक करने के लिए कैसे टेस्ट किए जाते हैं। 

यूजर्स का कहना है कि ये बेहद अजीब बात है कि धार्मिक संस्थानों में महिलाओं की पवित्रता चेक करने के लिए टेस्ट हो रहे हैं। कई मुद्दों पर मुखर होकर लिखने वाले तारेक फतेह ने कहा, “अविश्वसनीय। साउथ अफ्रीका का चर्च महिलाओं को वर्जिनिटी टेस्ट का सर्टिफिकेट दे रहा है वो भी तब जब वो उसमें पास हो रही हैं।”

फिर चीन पहुँच रही चमगादड़ की दर्जनों प्रजातियाँ, साथ ला रही कई तरह के कोरोना वायरस: जलवायु परिवर्तन है कारण

जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि होने से भविष्य में पूर्वी एशिया में कई बीमारियाँ दस्तक दे सकती हैं। विशेषज्ञों ने अमेरिका की रेडियो फ्री न्यूज एजेंसी को बताया, “जलवायु परिवर्तन और जानवरों से फैलाने वाली बीमारियों और जानलेवा घात​क महामारी के बीच ग्लोबल हीटिंग के कारण चमगादड़ की दर्जनों प्रजातियाँ दक्षिणी चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की ओर पलायन कर रही हैं, जो चिंता का विषय है।”

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के 2021 के एक अध्ययन में पता चला है कि दक्षिण-पश्चिमी युन्नान प्रांत, पड़ोसी देश म्यांमार और लाओस में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक वनस्पति का स्वरूप बदलने के बाद यह पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान में महामारी का संकट पैदा हुआ है। अध्ययन में यह भी कहा गया है, “तापमान में वृद्धि और वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण पेड़-पौधे प्रभावित हुए हैं। इसके कारण वन और झाड़ियाँ अधिक हो गई हैं। इससे कई चमगादड़ प्रजातियों को यहाँ रहने के लिए ​उपयुक्त स्थान मिल गया है, जो मुख्य रूप से जंगलों में रहते हैं।”

इसमें कहा गया है कि किसी दिए गए एक क्षेत्र में कोरोना वायरस की संख्या यहाँ मौजूद विभिन्न चमगादड़ों की प्रजातियों की संख्या से जुड़ी हुई है। पिछले 100 वर्षों के दौरान 40 चमगादड़ों की प्रजातियाँ युन्नान में चली गई हैं, जो अपने साथ लगभग 100 नए कोरोना वायरस लेकर आई हैं।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के एक शोधकर्ता अध्ययन के पहले लेखक रॉबर्ट बेयर के अनुसार, जेनेटिक डेटा से पता चला है कि जिस वायरस SARS-CoV-2 के कारण COVID-19 होता है। वह भी हो सकता है कि इसी क्षेत्र से आया हो। बेयर ने कहा, “पिछली शताब्दी में हुए जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिणी चीनी युन्नान प्रांत में चमगादड़ों की प्रजातियाँ विकसित हुई हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा कि जलवायु परिवर्तन के कारण चमगादड़ों के रहने का स्थान बदल गया है, ऐसे में चमगादड़ों की प्रजातियाँ इस वायरस के साथ कुछ स्थानों को छोड़कर दूसरों स्थान पर चली गई है।”

‘हज पर बोल के दिखाओ’: अब काँवड़ यात्रा के विरोध में उतरी कॉन्ग्रेस, लोगों ने कहा – ‘पत्थर उठाने से अच्छा काँवड़ उठाना’

कॉन्ग्रेस अब ‘काँवर यात्रा’ के विरोध में भी उतर आई है। पार्टी की नेशनल कोऑर्डिनेटर ने ट्वीट कर लिखा, “किताबे उठाइए, काँवड़ उठाने की जरूरत नही पड़ेगी।” बता दें कि महादेव के भक्त सावन महीने में काँवड़ लेकर निकलते हैं और जल भर कर शिवालय तक पैदल यात्रा करते हैं। जैसे, बिहार-झारखंड के अधिकतर लोग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक देवघर में स्थित बाबा वैद्यनाथ को जल चढ़ाते हैं। सोमवार के दिन, भगवान शिव के अन्य त्योहारों या आम दिनों में भी काँवड़ यात्रा होती है।

जहाँ तक रितु चौधरी की बात है, वो कई अन्य बड़े पदों पर रह चुकी हैं और अन्य संस्थाओं में भी महत्वपूर्ण पद सँभाले हैं। फ़िलहाल वो कॉन्ग्रेस पार्टी की ‘नेशनल कोऑर्डिनेटर’ हैं। उनके बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी को भला हिन्दुओं से इतनी घृणा क्यों है? एक ने उन्हें सलाह दी कि तलवे चाटते रहिए, नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक ने लिखा कि पत्थर उठाने से अच्छा है कि हमने धर्म को जाना और काँवड़ उठाया।

एक यूजर ने लिखा, “आप ऐसा भी बोल सकती किताब पढ़िए, हज जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन, हिम्मत नहीं है।” कइयों ने उन्हें अपना DNA टेस्ट करने की सलाह दी, तो कइयों ने काँवड़ यात्रा का महत्व समझाते हुए बताया कि कैसे रास्ते में काँवड़ियों के स्वागत के लिए लोग उन्हें पानी देते हैं, भोजन कराते हैं। इससे आपसी भाईचारा बढ़ता है। हिन्दू होकर हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाने के लिए भी लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया।

अब उद्धव गुट के 12 सांसदों ने किया बगावत, लोकसभा अध्यक्ष से होगी मुलाकात: उधर CM शिंदे ने बनाई नई कार्यकारिणी

महाराष्ट्र में कुर्सी छिनने के बाद भी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला अभी भी बना हुआ है। अब पूर्व नेता प्रतिपक्ष और मंत्री रहे रामदास कदम ने शिवसेना से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने दावा किया है कि 19 में से कम से कम 12 सांसद लोकसभा में एक अलग गुट बनाएँगे और औपचारिक पत्र सौंपने के लिए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात करेंगे। इससे पहले उनके बेटे और विधायक योगेश कदम भी शिंदे खेमे में शामिल हो गए थे।

शिवसेना सांसद ने इस्तीफे के बाद अपने बयान में कहा, “हमने आज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में भाग लिया। हमने राहुल शेवाले (मुंबई से एक सांसद) के नेतृत्व में एक अलग समूह बनाने का फैसला किया है। वह हमारे समूह के नेता होंगे।”

उन्होंने कहा कि शिवसेना सांसद विनायक राउत, अरविंद सावंत, गजानन किरीटकर, संजय जाधव, ओम राजे निंबालकर और राजन विचारे सोमवार को शिंदे द्वारा बुलाई गई ऑनलाइन बैठक में शामिल नहीं हुए, जबकि महाराष्ट्र के बाकी 12 सांसदों ने भाग लिया। बता दें कि लोकसभा में शिवसेना के 19 सांसद हैं, जिनमें 18 महाराष्ट्र से हैं।

यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना में से करीब 40 विधायकों ने बगावत कर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे वाले धड़े को अपना समर्थन दे दिया था।

बता दें कि इससे पहले उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ‘पार्टी-विरोधी गतिविधियों’ के आरोप में पूर्व मंत्री विजय शिवतरे को निष्कासित कर दिया था। वहीं शिवतरे ने पार्टी से निष्कासन के बाद पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला धड़ा ‘असली’ शिवसेना है और वह शिंदे के साथ जाएँगे। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता रामदास कदम और पूर्व सांसद आनंदराव अदसुल को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में आज सोमवार (18 जुलाई, 2022) को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। जिसपर आज कदम ने अपना इस्तीफा पार्टी को सौंप दिया।

एकनाथ शिंदे ने भंग की राष्ट्रीय कार्यकारिणी

महाराष्ट्र के सीएम एकनाथ शिंदे गुट ने शिवसेना की पुरानी राष्ट्रीय कार्यकारिणी को बर्खास्त करते हुए नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है। और शिवसेना के मुख्य नेता के तौर पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को चुना गया है।

हालाँकि, शिवसेना पक्ष प्रमुख पद को यूँ ही अभी खाली छोड़ दिया गया है। विधायक दीपक केसरकर की प्रवक्ता के तौर पर नियुक्ति की गई है। शिवसेना नेता के तौर पर रामदास कदम और आनंदराओ अडसूल को नियुक्त किया गया। शिवसेना के उप नेता के तौर पर यशवंत यादव गुलाबराव पाटिल, उदय सामंत, शरद पोंक्षे, तानाजी सावंत, विनय नाहटा, शिवाजीराव पाटिल को चुना गया है।

पार्टी में बचाने में जुटे उद्धव ठाकरे

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के सामने शिवसेना के अस्तित्व को बचाने का सवाल उठने लगा है। इसी के तहत जहाँ एक तरफ लगातार बगावत जारी है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे शिवसेना को नए सिरे से सँभालने में जुट गए हैं। इसके तहत उद्धव ने सोमवार को कुछ बड़े कदम उठाए। सोमवार को दिन में ही उद्धव ठाकरे ने 100 नई नियुक्तियाँ की हैं। उद्धव ने मुंबई, पालघर, यवतमाल, अमरावती समेत कई अन्य जिलों में 100 से ज्यादा पदाधिकारी नियुक्त किए हैं। शिवसेना के मुखपत्र सामना में इसकी घोषणा की गई है।

फिलहाल, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बीएमसी के चुनाव हैं। इसके बाद 2024 में होने वाले आम चुनावों पर भी उद्धव की नजर होगी।

‘जन्मदिन बेटे का, महफिल मेरे बूब्स ने लूट ली’: 7 साल के बेटे की बर्थडे पार्टी में महिला के ‘अश्लील’ ड्रेस पर उठे सवाल, कहा – तब मैं नीचे झुकी हुई थी

अपने बच्चे की जन्मदिन पार्टी में बोल्ड ड्रेस पहनने वाली 37 वर्षीय महिला की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। माँ का दावा है, “मेरे बेटे के जन्मदिन की पार्टी में मैं अपनी क्लीवेज की वजह से सभी लोगों के आकर्षण का केंद्र रही, लेकिन मैं ऐसा करके अपनी ड्रेस की ब्रांडिंग नहीं कर रही थी। हाँ, यह सच है कि इसमें मेरी BREAST नहीं, थोड़े से बूब्स दिखाई दे रहे थे।”

इंग्लैंड में केंट के टॉनब्रिज शहर की रहने वाली रकील डिकुरु (Raquel Dicuru) 18 जून को अपने बेटे एलेक्स के 7वें जन्मदिन की पार्टी कर रही थी। इस दौरान जब वह जन्मदिन के केक पर मोमबत्तियाँ जला रही थीं। तभी उनकी भाभी ने उनका वीडियो बना लिया। वीडियो में वह केक की ओर देख रही है। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता था कि छोटे बच्चों के सामने उनकी पर्पल फ्लॉवर वाली सनड्रेस ऐसी दिख रही है।

रकील की वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने उनके लो-कट ड्रेस पहनने पर आपत्ति जताई। वह कहती है कि जब तक ये वीडियो वायरल नहीं हुई थी, तब तक किसी ने उसकी ड्रेस को लेकर ऐसा कुछ भी नहीं कहा। रकील ने कहा, “मेरी भाभी ने वीडियो बनाया था, लेकिन उस वक्त उन्होंने भी इस पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब उसने मुझे वीडियो भेजा तब मैंने कहा, “ओह माय गॉड! इसमें मेरे बूब्स दिख रहे हैं।”

यूजर्स ने उन्हें छोटे बच्चों के सामने इस तरह की ड्रेस पहनने के कारण उनकी वीडियो पर आपत्तिजनक कमेंट किए। इस पर रकील ने अपने आलोचकों से पूछा कि किस तरह से उनकी ड्रेस भड़काऊ और अश्लील थी? उन्होंने कहा, “आम तौर पर, मैं हर समय अपने कपड़ों को ठीक करती रहती हूँ, लेकिन इस ड्रेस मैं खुद को काफी कम्फर्टेबल महसूस कर रही थी। इसलिए मैंने इसे ठीक नहीं किया था।”

सात साल के बच्चे की माँ वीडियो पर अपनी सफाई देते हुए कहती है, “मुझे लगता है कि इस वीडियो को ऊपर से बनाया गया है। जब मेरी भाभी इस वीडियो को बना रही थी, तब मैं नीचे की ओर झुकी हुई थी।”

‘सिख कॉन्स्टेबल की हत्या करने वाले को आप क्या कहेंगे?’: पंजाब के सांसद ने भगत सिंह को फिर बताया ‘आतंकवादी’, कहा – सिखों का हो अलग मुल्क

पंजाब के संगरूर से ‘शिरोमणि अकाली दल’ के नए सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि वो भगत सिंह को ‘आतंकवादी’ बताने के अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा खाली किए गए सीट पर हुए उपचुनाव में जीत के बाद सोमवार (18 फरवरी, 2022) को दिल्ली के संसद भवन में सांसद की शपथ ली। उन पर निशाना साधते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि शुरुआत से ही सिमरनजीत सिंह मान का चरित्र इसी प्रकार का रहा है।

उन्होंने याद किया कि कैसे इससे पहले जीतने के बाद उन्होंने शपथ लेने से ही इनकार कर दिया था। 77 वर्षीय सिमरनजीत सिंह मान ने ये भी कहा कि सिखों के लिए अलग मुल्क होना चाहिए। उन्हें लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के कक्ष में 3 अन्य नव-निर्वाचित सांसदों के साथ शपथ दिलाई गई। इसका पंजाब कॉन्ग्रेस ने विरोध किया। सिमरनजीत सिंह मान ने विदेश एवं रक्षा मामलों पर संसद की स्थायी समिति का सदस्य बनाए जाने की माँग भी स्पीकर से की।

वहीं देश के लिए बलिदान देने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी को लेकर उन्होंने कहा, “भगत सिंह ने एक युवा अंग्रेज नौसेना अधिकारी की हत्या कर दी थी। उन्होंने एक अमृतधारी सिख कॉन्स्टेबल की हत्या की थी। आप उस शख्स को क्या कहेंगे जिसने संसद में बम फेंका? मुझे बताइए, उन्हें क्या कहेंगे आप?” SAD के अमृतसर संभाग के प्रमुख ने कहा कि सिखों के लिए अलग मुल्क होना चाहिए और वो खालिस्तान को समर्थन जारी रखेंगे।

उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान जैसी परमाणु संपन्न शक्तियों के बीच खालिस्तान जैसा एक ‘बफर स्टेट’ होना ही चाहिए। उन्होंने पूछा लद्दाख में चीन क्या कर रहा है? अपनी जीत को खालिस्तानी आतंकी जरनैल सिंह भिंडरवाला को समर्पित कर चुके सिमरनजीत सिंह मान के विरोध में AAP और कॉन्ग्रेस, दोनों उतरी हुई है। हालाँकि, वो एक तरफ देश की अखंडता की संसद में शपथ ले रहे हैं, दूसरी तरफ बाहर देश तोड़ने की बात कर रहे।