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भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के घर के बाहर आग लगाने वाले NSUI के 4 सदस्यों को दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार, CCTV फुटेज से हुई पहचान

दिल्ली पुलिस ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के आवास के आगे आगजनी करने के आरोप में कॉन्ग्रेस पार्टी की स्टूडेंट विंग NSUI के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह आगजनी केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना और राहुल गाँधी से नेशनल हेराल्ड केस में ED की हो रही पूछताछ के विरोध में की गई थी। पुलिस इसी घटना में शामिल अन्य आरोपितों की भी तलाश कर रही है। चारों की गिरफ्तारी 22 जून 2022 (बुधवार) को हुई है।

NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन ने गिरफ्तार चारों आरोपितों की वीडियो शेयर करते हुए पुलिस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने लिखा, “BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा के घर के बाहर प्रदर्शन करने पर NSUI के पदाधिकारियों पर गैरजमानती धाराएँ लगा दी गई हैं व तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। पर हम चट्टान से हौंसलों के साथ अब भी योजना के खिलाफ तमाम छात्रों के साथ सीना ताने खड़े है। अगर NSUI के पदाधिकारियों व छात्रों की रिहाई नहीं कि गई तो सरकार छात्र आक्रोश के महाआंदोलन को झेलने के लिए तैयार रहे।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर सागर प्रीत हुडा ने बताया कि चारो आरोपितों की पहचान जगदीप सिंह, सर्वोत्तम राणा, प्रणव पांडेय और विशाल के रूप में हुई है। उन्होंने बताया, “घटना के दौरान आग के पुतले आवास के गेट और सुरक्षाकर्मियों के कमरों में फेंके गए थे। हालाँकि घर के अंदर मौजूद स्टाफ की सक्रियता के चलते कोई बड़ी घटना नहीं हो पाई।”

सागर प्रीत हुडा के मुताबिक, “घटना के CCTV फुटेज के आधार पर जानकारी जुटाई गई। जाँच के दौरान 10 से 12 लोगों के 2 अलग-अलग वाहनों से घटनास्थल पर पहुँचने की पुष्टि हुई। इसमें से एक वाहन हरियाणा के रोहतक के रजिस्ट्रेशन नंबर पर मिला और दूसरा उत्तर प्रदेश के बिजनौर के पते पर। मिले फुटेज के आधार पर छापेमारी की कार्रवाई की गई और आरोपितों के घरों से उन्हें पकड़ा गया।”

पुलिस के मुताबिक घटना के बाद आरोपितों पर IPC की धारा 188/146/147/149/278/285/ 307/436/120-B के तहत केस दर्ज किया गया था। इसमें दंगे भड़काने और हत्या की साजिश के साथ आपराधिक साजिश रचने की धाराएँ भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि 21 जून 2022 को शाम लगभग 4.30 पर लगभग 1 दर्जन लोग दिल्ली के मोती लाल नेहरू मार्ग स्थित जे पी नड्डा के आवास के आगे जमा हुए थे। उन्होंने न सिर्फ भाजपा और सरकार के विरोध में नारेबाजी की बल्कि एक डंडे में बाँध कर 2 जलते पुतलों को जे पी नड्डा के आवास में फेंकने का भी प्रयास किया था। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ था।

पुलिस के मुताबिक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के नाम पर मिली अनुमित का उललंघन किया है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर के मुताबिक, “20 जून को कॉन्ग्रेस के सचिव द्वारा जंतर मंतर पर सत्याग्रह करने की अनुमति माँगी गई थी। यह अनुमति अग्निपथ योजना और राहुल गाँधी से ED की पूछताछ के विरोध में किया जाना बताया गया। प्रदर्शन की अनुमति में सिर्फ 1000 प्रदर्शनकारियों को दी गई। लेकिन इसके बाद भी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता जंतर मंतर पर धरना देने के बजाए 24 अकबर रोड पर बिना अनुमति के पहुँच गए। ऐसा करके उन्होंने लागू धारा 144 के नियमों की अनदेखी की थी।”

क्या एकनाथ शिंदे की मुट्ठी में है 37 का मैजिक फिगर, उद्धव ठाकरे से छिन जाएगा शिवसेना का निशान भी: जानिए क्या कहता है दलबदल कानून

महाराष्ट्र में उठे सियासी बवंडर से न केवल राज्य की महाविकास अघाड़ी की सरकार को खतरा है, बल्कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के हाथों से शिवसेना भी निकल सकती है। रिपोर्टों की माने तो एकनाथ शिंदे पार्टी निशान पर भी दावा कर सकते हैं। इसके संकेत उन्होंने बुधवार (22 जून 2022) को उस वक्त ही दे दिए थे, जब पार्टी के व्हिप पर सवाल उठाया गया था। बागी विधायकों ने शिंदे को विधायक दल का नेता चुना था। साथ ही नया व्हिप भी नियुक्त कर दिया था।

दलबदल कानून के प्रावधानों के अनुसार शिंदे यदि दो तिहाई विधायकों का समर्थन जुटा लेते हैं तो पार्टी पर अपना दावा कर सकते हैं। महाराष्ट्र में फिलहाल शिवसेना के 55 विधायक हैं। ऐसे में एकनाथ शिंदे को 37 पार्टी विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। ऐसा होने पर वे शिवसेना के नाम, निशान, झंडे और रंग को अपने हवाले करने का दावा ठोक सकते हैं।

फिलहाल शिंदे समर्थक विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि उनके साथ असम के गुवाहाटी रेडिसन ब्लू होटल में 42 विधायक हैं। इनमें 8 निर्दलीय, जबकि 34 शिवसेना के हैं। यदि यह जानकारी सही है तो शिंदे फिलहाल मैजिक फिगर जुटाने में असफल दिख रहे हैं। लेकिन खुद शिंदे 46 विधायकों के समर्थन का दावा कर चुके हैं। इनमें 6-7 निर्दलीय हैं। यदि उनका दावा सही है तो फिर उद्धव ठाकरे के हाथों से शिवसेना भी निकल सकती है।

वैसे यह तो स्पष्ट तौर पर दिख रहा है कि शिंदे समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। यहाँ तक कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास भी खाली कर चुके हैं। शिवसेना के बागी विधायकों ने शिंदे को अपना नेता चुनने के बाद राज्‍यपाल और महाराष्‍ट्र विधानसभा के डिप्‍टी स्‍पीकर को पत्र लिखा भी है।

शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये भी शिवसेना को अलविदा भी कह सकते हैं। हालाँकि इनमें से को भी सांसद अभी खुलकर अपनी बात नहीं कह रहे हैं और वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

कानपुर के पत्थरबाजों को मिले थे ₹500-1000, बाबा बिरयानी में रची गई साजिश: रिपोर्ट में दावा पुलिस के सामने मुख्तार अहमद ने उगले कई राज

कानपुर के बेकनगंज इलाके में 3 जून 2022 को हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार किया गया बाबा बिरयानी का मालिक मुख्तार अहमद ने पुलिस की पूछताछ में कई राज उजागर किए हैं। पुलिस को मुख़्तार से क्राउड फंडिंग के बारे में कई अहम जानकारियाँ मिली हैं। इसी के साथ पूछताछ में पत्थरबाजों के रेट का भी खुलासा हुआ है। वहीं बाबा बिरयानी के मालिक को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इन सबके साथ मुख़्तार अहमद पर मंदिर कब्ज़ा कर के बिरयानी की दुकान खोलने का भी आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस की पूछताछ में मुख़्तार ने बताया कि 500 रुपए से 1000 रुपए दे कर बाहर से पत्थरबाज बुलाए गए थे। वहीं पुलिस ने खुलासा किया है कि हिंसा की साजिश बाबा बिरयानी की दुकान में रची गई थी। इस साजिश में 15 से 16 युवकों को हिंसा फैलाने के लिए अलग-अलग टास्क दिए गए थे। पथराव के दौरान आरोपित वीडियो कॉल करके पूरे हंगामे को देख रहा था। पूछताछ में उसने कई अन्य आरोपितों के नाम भी पुलिस को बताए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने मुख़्तार के आर्थिक स्रोतों के बारे में भी जानकारी जुटाई है। मुख़्तार को करोड़पति बनाने में एक बैंक मैनेजर का भी नाम भी सामने आ रहा है। इसके लिए हुई धोखाधड़ी में मैनेजर भी शामिल बताया जा रहा। उस पर नियमों के खिलाफ जाकर मुख़्तार को मनमानी ढंग से लोन देने का आरोप है। हालाँकि, बाद में बैंक मैनेजर को बर्खास्त कर दिया गया था। कहा जा रहा है कि पुलिस द्वारा गठित SIT जल्द ही उस बैंक मैनेजर से भी पूछताछ कर सकती है।

बता दें कि मुख़्तार अहमद को 22 जून 2022 (बुधवार) को कानपुर की एक अदालत में पेश किया गया जहाँ से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस की सारी पूछताछ की वीडियोग्राफ़ी करवाई गई है। हालाँकि, शुरुआत में उसने अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इंकार किया था लेकिन बाद में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। बताया जा रहा है कि आगे की जानकारी के लिए पुलिस मुख़्तार अहमद का कस्टडी रिमांड भी ले सकती है।

गौरतलब है कि कानपुर पुलिस के मीडिया सेल ने ऑपइंडिया को बताया, “हम सभी अपडेट के बारे में प्रेसनोट जारी कर के आधिकारिक घोषणा करते हैं। फिलहाल बाबा बिरयानी के पत्थरबाजी की फंडिंग और बैंक मैनेजर केस में अभी तक हमने कोई आधिकारिक प्रेसनोट जारी नहीं की है। इसलिए हम इस खबर की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं कर सकते।” साथ ही DCP पश्चिम ने फोन नहीं उठाया। पुलिस वर्जन मिलने के बाद हम उसे खबर में अपडेट करेंगे।

‘खेत में चली गई गाय तो घोंप दिया भाला, आँत बाहर निकल लटक गई’: पीलीभीत की घटना, मनप्रीत सिंह गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से खेत में घुसने पर गाय की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने बुधवार (22 जून 2022) को आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया। उसकी पहचान मनप्रीत सिंह उर्फ मन्ना के तौर पर हुई है। उस पर भाला घोंप गाय को मार डालने का आरोप है।

घटना पीलीभीत के गांव चकशिवपुरी की है। शिकायतकर्ता बाबूराम नीय दियोरिया कला पुलिस थाने में चौकीदार हैं। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है, “हमारे गाँव के धर्मपाल का खेत गाँव के ही सरदार जोगिंदर सिंह उर्फ बिट्टू ने बँटाई पर लिया है। इस खेत में गन्ना बोया गया है। 20 जून को काले रंग की एक गाय घास चरते हुए धर्मपाल के खेत में चली गई। तभी जोगिंदर सिंह के बेटे मनप्रीत सिंह ने गाय के पेट में भाला घोंप दिया।”

शिकायत के मुताबिक भाले से गाय की आँत बाहर निकल कर लटक गई। बाद में गाय गाँव के पश्चिम बाग में मरी मिली। चौकीदार बाबूराम की शिकायत पर पुलिस ने मनप्रीत के खिलाफ गौ हत्या निवारण अधिनियम उत्तर प्रदेश की धारा 3/8 के साथ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत FIR दर्ज की है। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

पिछले दिनों इस तरह की पशु क्रूरता राजस्थान से भी सामने आई थी। जयपुर में एक किसान ने कुत्ते पर एयर गन से 22 गोलियाँ दाग दी थी, जिससे उसकी मौत हो गई। वह कुत्ते के बार-बार खेत घुसने से गुस्साया था। किसान के खिलाफ तूंगा थाने में FIR दर्ज कराई गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक किसान ने बेजुबान जानवर पर अपनी एयर गन से ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इससे कुत्ते की बॉडी में 22 छर्रे घुस गए थे। कुत्ता खेत में करीब 2 घंटे तक दर्द से कराहता रहा। लेकिन किसान को दया नहीं आई। तभी वहाँ से जाते हुए एक शख्स की नजर कुत्ते पर पड़ी। वह तपड़ते कुत्ते को हिंगोनिया गौशाला ले गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पाँच बत्ती स्थित एनिमल हॉस्पिटल रेफर कर दिया। इलाज के दौरान करीब 2 घंटे बाद कुत्ते की मौत हो गई।

केजरीवाल की सीट ‘रिक्त’ घोषित करने का NDMC में प्रस्ताव, LG ने दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी को करप्शन में सस्पेंड किया

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें से एक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय में तैनात डिप्टी सेक्रेटरी रैंक के अधिकारी हैं। उनके अलावा दो SDM पर भी भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कार्रवाई हुई है। दूसरी ओर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के सदस्य कुलजीत चहल ने मुख्यमंत्री केजरीवाल की सीट को ‘रिक्त’ घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया है।

NDMC में यह प्रस्ताव केजरीवाल के लगातार चार बार मीटिंग से गैरहाजिर रहने की वजह से लाया गया है। चहल ने बताया कि केजरीवाल दिसंबर 2021 में और इस साल (2022) जनवरी, फरवरी और मार्च में चार बैठकों के दौरान बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहे हैं। इसके चलते बुधवार (22 जून 2022) परिषद की बैठक के दौरान मुख्यमंत्री की सीट को रिक्त घोषित करने का प्रस्ताव पेश किया गया। 

प्रस्ताव के मुताबिक, “नई दिल्ली नगरपालिका परिषद अधिनियम के अनुसार, यदि लगातार तीन महीनों के दौरान, कोई सदस्य बिना पूर्व अनुमति के सभी बैठकों से अनुपस्थित रहता है, तो परिषद केंद्र सरकार को सिफारिश कर सकती है कि ऐसे सदस्य की सीट रिक्त घोषित की जाए।” इसमें कहा गया, “परिषद केंद्र सरकार को सिफारिश कर सकती है कि एनडीएमसी अधिनियम, 1994 में निहित प्रावधानों के अनुसार आगे आवश्यक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश के साथ परिषद के सदस्य के रूप में अरविंद केजरीवाल की सीट को रिक्त घोषित किया जा सकता है।” बता दें कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र से विधायक होने के कारण केजरीवाल NDMC के सदस्य हैं।

वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल ने जिन अधिकारियों को निलंबित किया है, उसमें मुख्यमंत्री कार्यालय में उप सचिव के पद पर तैनात प्रकाश चंद्र ठाकुर, वसंत विहार के एसडीएम हर्षित जैन और विवेक विहार के एसडीएम देवेंद्र शर्मा का नाम शामिल है। इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है। उपराज्यपाल कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार, मामला कथित रूप से प्राइवेट संस्थाओं को बेची गई सरकारी जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार से संबंधित हैं।

इससे पहले उपराज्यपाल ने सोमवार (20 जून 2022) को कालकाजी एक्सटेंशन में ईडब्ल्यूएस फ्लैटों के निर्माण में खामियाँ पाए जाने पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के दो सहायक इंजीनियरों को भी निलंबित कर दिया था। पिछले हफ्ते, उप राज्यपाल ने राष्ट्रीय राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के लिए एक बैठक की थी।

जो ‘डर’ दिखा 30 साल पहले शिवसेना बचा ले गए थे बाल ठाकरे, वह भी उद्धव के काम न आया: 7 और MLA एकनाथ शिंदे के पास पहुँचे

महाराष्ट्र में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। असम में डेरा डाले एकनाथ शिंदे के पास 7 और विधायकों के पहुँचने की खबर है। इनमें से 3 विधायक गुरुवार (23 जून 2022) की सुबह पहुँचे, जबकि चार बुधवार की रात ही गुवाहाटी के रेडिसन ब्लू होटल पहुँच गए थे। शिंदे का दावा है कि उनके साथ 48 विधायक हैं। हालाँकि नंबर को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग तरह की बातें कही जा रही है।

शिंदे समर्थक विधायकों की लगातार बढ़ती संख्या ने उद्धव ठाकरे के सामने दोहरा खतरा पैदा कर दिया है। न केवल उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में है, बल्कि शिवसेना भी हाथ से निकलने की आशंका बढ़ गई है। यह आशंका तब पैदा हुई, जब बुधवार को शिंदे ने शिवसेना के व्हिप पर सवाल उठाते हुए नया व्हिप नियुक्त कर दिया था। इतना ही नहीं बागी विधायकों ने उन्हें शिवसेना विधायक दल का नेता भी चुन लिया था।

एक तरफ शिंदे लगातार शिकंजा कसते जा रहे हैं, दूसरी तरफ उद्धव ठाकरे की हर चाल बेअसर दिख रही है। बुधवार की रात महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर वे अपने निजी घर मातोश्री चले गए थे। उससे पहले एक फेसबुक लाइव में उन्होंने पार्टी संस्थापक और अपने पिता बाल ठाकरे की दुहाई दी। यहाँ तक कहा कि पार्टी नेता कहें तो वे इस्तीफा देने को तैयार हैं। लेकिन, इनका कोई असर अब तक नहीं दिखा है। उल्लेखनीय है कि 1992 में इसी तरह की स्थिति में बाल ठाकरे ने शिवसेना से इस्तीफे की बात कह पार्टी में बगावत शांत कर ली थी। तब उनके पुराने साथी माधव देशपांडे ने पार्टी की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाए थे।

बग्गा ने की उद्धव ठाकरे के खिलाफ शिकायत

दिल्ली के भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बुधवार (22 जून 2022) रात कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कहा गया है कि सीएम ठाकरे ने अपने सरकारी आवास से निजी आवास की ओर जाते समय समर्थकों से मुलाकात कर कोविड-19 संबंधी प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है। बग्गा ने पुलिस को दी शिकायत ट्वीट भी की है।

शिकायत में कहा गया है, “कोविड प्रोटोकॉल  के अनुसार मरीज किसी से भी नहीं मिल सकता। उसे आइसोलेशन में रहना चाहिए। सीएम उद्धव ठाकरे ने कोविड प्रोटोकॉल तोड़ा और अपने समर्थकों से मुलाकात की।” बता दें कि उद्धव ठाकरे की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होने की खबरें कल सामने आई थी। हालाँकि बाद में बताया गया कि उन्होंने आरटीपीसीआर टेस्ट करवाया और उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है। 

महाराष्ट्र में सियासी संकट के बीच मध्य प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष जया ठाकुर ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में दलबदल में शामिल सभी विधायकों पर कार्रवाई की माँग की है। दलबदल करने वाले विधायकों के चुनाव लड़ने पर 5 साल के लिए रोक की माँग की है। 

रिया चकवर्ती और उसका भाई शौविक करते थे ड्रग्स का इस्तेमाल, सुशांत सिंह राजपूत के लिए खरीदे भी: स्पेशल कोर्ट में NCB, 12 जुलाई को सुनवाई

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने स्पेशल कोर्ट में मसौदा आरोप दायर कर दिया है। इसमें सुशांत की गर्लफ्रेंड रहीं रिया चकवर्ती और उनके भाई शौविक पर वे आरोप बरकरार रखे गए हैं जो एजेंसी ने आरोप-पत्र में लगाए थे। हालाँकि कोर्ट ने अभी आरोप तय नहीं किए हैं। अब इस मामले की सुनवाई 12 जुलाई को होगी।

बुधवार (22 जुलाई 2022) को दाखिल की है। हालाँकि इस ड्राफ्ट पर अंतिम फैसला आरोपितों द्वारा दाखिल डिस्चार्ज एप्लिकेशन पर फैसला आने के बाद भी होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश वी जी रघुवंशी कर रहे हैं। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अतुल सरपांडे ने बताया है कि आरोपितों के खिलाफ वे आरोप कायम रखे गए हैं, जिनका जिक्र अदालत में पूर्व में दाखिल आरोप-पत्र में किया गया था। इसके मुताबिक रिया और उसका भाई शौविक ड्रग्स का इस्तेमाल करते थे। साथ ही सुशांत के लिए ड्रग्स की खरीद में भी संलिप्त थे।

मार्च 2021 में NCB ने विशेष एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें 33 लोग आरोपित बनाए गए थे। इनमें रिया चकवर्ती और उसके भाई शौविक का नाम शामिल था। 12000 से अधिक पन्नों के चार्जशीट में 200 चश्मदीदों के बयान का उल्लेख होने की बात सामने आई थी। उस समय की रिपोर्टों में बताया गया था कि करीब 50 हजार पन्ने डिजिटल फॉर्मेट में भी कोर्ट के सामने पेश किए गए हैं।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को ब्रांदा के अपने फ्लैट में फंदे से लटके मिले थे। सीबीआई इस मामले के जाँच कर रही है। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल की जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और ड्रग पैडलर्स के बीच कनेक्शन मिले थे। इसके बाद एनसीबी ने कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारियाँ की थी। सितंबर 2020 में रिया चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया गया था। रिया लगभग 1 महीने जेल में रहीं थी। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की बीवी आफसा अंसारी की ₹3.76 करोड़ की संपत्ति होगी कुर्क, अवैध तरीके से खरीदी गई जमीन पर कार्रवाई के आदेश

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अब मुख्तार अंसारी की पत्नी के खिलाफ एक्शन लेते हुए मऊ के जिला अधिकारी ने गैंगस्टर की बीवी आफसा अंसारी (Afsa Ansari) की 3.76 करोड़ रुपए की संपत्ति को कुर्क करने का आदेश दिया है। ये कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आईएस 191 गैंग के मुखिया मुख्तार अंसारी की दर्जी टोला वार्ड नंबर 9 यूसुफपुर की रहने वाली पत्नी आफसा अंसारी ने गैरकानूनी तरीके से पैसे कमाकर अपने नाम से जमीन की खरीदी की थी। ये जमीन शेखपुर परगना व तहसील सदर जनपद गाजीपुर में स्थित है। जिले के जिलाधिकारी अरुण कुमार के आदेश के मुताबिक, ये जमीन आराजी संख्या 70 में 235 एयर रकबा जमीन खरीदी गई थी।

इतना ही नहीं अंसारी के खिलाफ जनपद गाजीपुर में कई थानों समेत जनपद सराय लखंसी और थाना दक्षिण टोला में कई अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। डीएम अरुण कुमार के मुताबिक, अब सरकार की मंशा के तहत गलत तरीके से कमाए गए धन से बनाई गई संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिले में इस तरह के कई अन्य के भी अवैध कमाइयों को चिन्हित किया जा रहा है। इन सभी के खिलाफ कुर्की का एक्शन लिया जाएगा। इसके अलावा प्रशासन लगातार माफियाओं के अवैध निर्माणों के साथ ही उस शस्त्र लाइसेंसों को भी रद्द करने की कार्रवाई कर रहा है।

गौरतलब है कि कभी पूर्वांचल की राजनीति में बड़ा नाम और अपनी दबंगई के लिए कुख्यात रहे मुख्तार अंसारी के खिलाफ योगी सरकार के ताबड़तोड़ एक्शन ने माफिया की कमर तोड़ कर रख दी है। उसकी पत्नी आफसा अंसारी के खिलाफ भी पिछले महीने ही कोर्ट ने अरेस्ट वारंट जारी किया था। ये अरेस्ट वारंट अवैध तरीके से अर्जित संपत्तियों को लेकर ही जारी किया गया था।

उद्धव ठाकरे ने छोड़ा महाराष्ट्र CM का आवास, एकनाथ शिंदे की दो टूक- महाराष्ट्र में NCP-कॉन्ग्रेस से गठबंधन तोड़ना होगा

महाराष्ट्र में बढ़ते सियासी संकट बीच सीएम उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र की जनता को संबोधित करते हुए कहा कि अगर बागी विधायक उनसे यह कहते हैं कि वह उन्हें (ठाकरे) मुख्यमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहते तो वह अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। उद्धव ठाकरे ने यह भी कहा, “सूरत और अन्य जगहों से वो बयान क्यों दे रहे हैं? मेरे सामने आकर मुझसे कह दें कि मैं मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष के पदों को सँभालने में सक्षम नहीं हूँ। मैं तत्काल इस्तीफा दे दूँगा। मैं अपना इस्तीफा तैयार रखूँगा और आप आकर उसे राजभवन ले जा सकते हैं।”

इस बीच खबर ये भी आ रही है कि मुख्यमंत्री आवास से उद्धव ठाकरे का सामान निकाला जा रहा है।

वहीं उद्धव ठाकरे के बयान के कुछ देर बाद ही गुवाहाटी के एक होटल से एकनाथ शिंदे ने भी महाराष्ट्र में सत्ता को लेकर जारी खींचतान पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि शिवसेना को एनसीपी और कॉन्ग्रेस से गठबंधन तोड़ना होगा।

एक नाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के सामने अपनी मुख्य माँगों को रखते हुए कहा:

  • पिछले ढाई वर्षों में, एमवीए सरकार ने केवल घटक दलों को फायदा पहुँचाया, और शिवसैनिकों को लगातार भारी नुकसान हुआ।
  • घटक दल मजबूत हो रहे हैं, शिवसेना का व्यवस्थित रूप से गबन किया जा रहा है।
  • पार्टी और शिवसैनिकों के अस्तित्व के लिए अप्राकृतिक गठबंधन से बाहर निकलना जरूरी है।
  • महाराष्ट्र के हित में अब निर्णय लेने की जरूरत है।

मीडिया में भले ही इधर सवाल-जवाब चल रहे हों लेकिन उद्धव ठाकरे की सरकार को लेकर सस्पेंस अभी भी बरकरार है। इस बीच जहाँ बागी नेता एकनाथ शिंदे ने दावा किया है कि उनके साथ 46 विधायक हैं। उन्होंने होटल से एक तस्वीर भी जारी की है। वहीं तेज़ी से बदलते घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अगर शिवसैनिक चाहें तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लेते हुए कहा, “मुझे खुशी होगी कि अगर कोई शिवसैनिक राज्य का मुख्यमंत्री बने। शिवसेना कभी भी हिन्दुत्व से नहीं भटकी है। आज भी शिवसेना बाला साहेब के बताए रास्ते पर चल रही है।”

इस सियासी घमासान के बीच गुवाहाटी के होटल से एकनाथ शिंदे का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वे अपने समर्थक विधायकों से बात कर रहे हैं और एक पेपर पर कुछ लिख रहे हैं।

इस बीच शिवसेना सांसद संजय राउत ने यह कहकर सस्पेंस बरक़रार रखने की कोशिश की कि उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बने रहेंगे और मौका आने पर बहुमत साबित करेंगे।

गौरतलब है कि आज शाम को ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बीच मुलाकात हुई है। इस मुलाकात के हवाले से मीडिया में दावा किया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात में बागी नेता एकनाथ शिंदे को राज्य का मुख्यमंत्री पद देने पर विचार हुआ है। वहीं बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह बागी नेता एकनाथ शिंदे को शांत कराया जाए। इसी कड़ी में इस बात पर भी विचार किया गया कि क्या उन्हें सीएम का पद देकर इस संकट को खत्म किया जा सकता है। इसके बाद महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने भी कहा कि उन्हें शिंदे को समर्थन करने में दिक्कत नहीं है बाकि उद्धव ठाकरे जो भी फैसला लेंगे वो मंजूर है।

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन की सरकार है। वहीं इसी बीच दो दिन पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता एकनाथ शिंदे ने बगावत कर दी है। शिंदे शिवसेना के करीब 46 विधायकों के साथ असम के गुवाहाटी में हैं और खुद को असली शिवसेना बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि उन्होंने सीएम उद्धव ठाकरे के सामने बीजेपी के साथ सरकार बनाने की शर्त रखी है।

अपने परिवार को बाढ़ में फँसा छोड़, सेना के अधिकारी ने बचाई 100 लोगों की जान: सेना ने की तारीफ, बताया- ये निस्वार्थ सेवा का असाधारण उदाहरण

देश भर में भारत सरकार के अग्निपथ स्कीम के विरोध के बीच एक बार फिर से सेना ने देश सेवा के जज्बे को दिखाया है। बाढ़ प्रभावित असम में भारतीय सेना के अधिकारी कैप्टन दास ने खुद से पहले दूसरों की सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया है। रूपम दास का खुद का परिवार बाढ़ में फँसा हुआ था, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह किए बिना ही 100 से भी अधिक लोगों की जान बचाई।

असमी आर्मी के सैन्य अधिकारी रूपम दास विनाशकारी बाढ़ का सामना कर रहे अपने गृह राज्य में बाढ़ग्रस्त इलाकों में बचाव अभियान चला रहे हैं। असम के पाठशाला के रहने वाले दास के प्रयासों की सराहना करते हुए सेना ने रविवार को कहा, “सेना द्वारा बाढ़ बचाव अभियान के दौरान, समर्पित अधिकारी ने अपने परिवार के सदस्यों के फँसे होने के बावजूद सौ से अधिक लोगों की जान बचाई।”

बयान में कहा गया, “उनकी कार्रवाई मानवता और राष्ट्र के लिए निस्वार्थ सेवा का एक असाधारण उदाहरण है। इस तरह के प्रेरक कार्य असाधारण मानवीय मूल्यों और मजबूत सैन्य सौंदर्य को प्रकट करते हैं और देश के युवाओं में मूलभूत गुणों को प्रदर्शित करते हैं।”

गौरतलब है कि असम में बाढ़ के हालात को देखते हुए चार दिन पहले बचाव अभियान के लिए सेना की टुकड़ियों को उतारा गया था। सेना की चौदहवीं बटालियन ने प्रदेश के सात जिलों में 4,500 से अधिक लोगों को बचाया है। वहीं रविवार को नौ और लोगों की मौत हो गई थी। इनमें से 6 की बाढ़ और तीन की लैंड स्लाइड की चपेट में आने से मौत हुई थी। इसी के साथ मरने वालों की कुल संख्या 71 हो गई।

बता दें कि असम की बाढ़ में 33 जिलों में 42.28 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। रेलवे ने कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में बनाए गए 223 शिविरों में से 44 में पानी आ गया है।

इससे पहले रविवार को भी डिब्रूगढ़ में ब्रह्मपुत्र नदी में एक नाव के पलट जाने से चार लोगों के लापता होने की खबर सामने आई थी। असम के अलावा मेघालय भी बाढ़ और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।