IPL के मीडिया राइट्स बेच कर BCCI को भारी कमाई हुई है। 2023-2027 साइकल के लिए ‘इंडियन प्रीमियर लीग’ के टीवी और मीडिया राइट्स बिक गए हैं। जहाँ टीवी राइट्स ‘स्टार नेटवर्क’ की झोली में गया है, वहीं डिजिटल राइट्स के लिए ‘Viacom 18’ ने बाजी मारी है। कुल 410 मैचों के लिए ये ई-ऑक्शन हुआ, जिसका नतीजा मंगलवार (14 जून, 2022) को आया। ‘भारतीय क्रिकेट कंट्रोल’ बोर्ड को इससे कितनी कमाई हुई, आइए बताते हैं।
हर मैच के वैल्यू की बात करें तो इस हिसाब से अब IPL दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्पोर्ट्स लीग बन गया है। कुल 48,390 करोड़ रुपए में इसके राइट्स बिके हैं। BCCI के सचिव जय शाह ने कहा कि आज के समय में IPL विकास (Growth) का पर्यायवाची बन गया है। ‘स्टार इंडिया’ ने 23,575 करोड़ रुपए में लीग के मीडिया राइट्स खरीदे। इस हिसाब से देखें तो कंपनी ने हर मैच के लिए 57.50 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
वहीं IPL के डिजिटल राइट्स 23,758 करोड़ रुपए में ‘Viacom 18’ ने खरीदे। इस कंपनी का स्वामित्व रिलायंस के पास है। उसने ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम के लिए भी डिजिटल राइट्स अपने नाम किया। वहीं ‘टाइम्स’ को ‘मिडिल ईस्ट नॉर्थ अफ्रीका (MENA)’, अमेरिका और बाक़ी देशों के राइट्स मिले। जय शाह ने कहा कि ‘स्टार इंडिया’ की बोली महामारी के बावजूद BCCI की संगठनात्मक क्षमता को दिखाता है।
I congratulate Viacome18 for winning Aus, SA, UK, Times have got MENA & US, who win the Rest of the World Rights. The IPL is as popular outside India as it is here and the viewers will be able to enjoy top-class cricket.
वहीं ‘Viacom 18’ की बोली की बात करते हुए जय शाह ने कहा कि भारत ने डिजिटल क्रांति देखी है और इस क्षेत्र की क्षमताएँ असीमित हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्षेत्र ने क्रिकेट की दुनिया को भी बदल दिया है। उन्होंने कहा कि ‘डिजिटल इंडिया विजन’ में क्रिकेट के विकास के लिए इसका बड़ा योगदान रहा है। IPL के मीडिया राइट्स की वैल्यू 2017 के मुकाबले ढाई गुना बढ़ गई है। इससे पहले सारे राइट्स स्टार के पास ही थे।
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कारगिल में इस्लामी मौलवियों व कट्टरपंथियों द्वारा बौद्धों का प्राचीन मंदिर गोंपा बनाए जाने से रोकने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। क्षेत्र में अल्पसंख्यक बौद्धों ने इन मौलवियों के विरुद्ध आवाज उठाई है और आज भी इस संबंध में बौद्धों द्वारा रैली की गई है। वह क्षेत्र में अपने मठ के शिलान्यास के लिए लगातार माँग कर रहे हैं।
कारगिल में बौद्ध मंदिर आंदोलन… बौद्ध अल्पसंख्यकों के प्राचीन गोंपा पुनर्निर्माण का बहुसंख्यक मुस्लिमो के विरोध से मामला तूल पकड़ा. बौद्ध समुदाय का मार्च और आंदोलन जारी। pic.twitter.com/x1e1BPC18d
— Madhurendra kumar मधुरेन्द्र कुमार (@Madhurendra13) June 13, 2022
मालूम हो कि कारगिल में इस तरह दो गुटों में बँटवारा प्रत्यक्ष रूप से पहली दफा सामने आया। 31 मई को बौद्ध गुरु चोस्कयोंग पाल्गा रिनपोछे के नेतृत्व में 1 हजार से ज्यादा उनके अनुयायियों ने पदयात्रा शुरू की थी जिसे 14 जून तक कारगिल पहुँचना था। लेकिन इसी बीच मुस्लिमों ने इस पर आपत्ति जता दी। अब बौद्ध अपने अधिकार की माँग कर रहे हैं। उनके मार्च की कई वीडियो सोशल मीडिया के जरिए सामने आई हैं।
इस वीडियो को देख नेशनल सिक्योरिटी अफेयर एनालिस्ट दिव्य कुमार सोती ने सवाल उठया है। उन्होंने पूछा, “बौद्ध धर्म के नाम पर हिंदुओं को गाली देकर जीवन चलाने वाले भंते करूणाकर, वामन मेश्राम और भीम आर्मी कहाँ हैं? असली आतंकियों का सामना करने से डर लगता है क्या?”
बौद्ध धर्म के नाम पर हिंदुओं को गाली देकर जीवन चलाने वाले भंते करूणाकर, वामन मेश्राम और भीम आर्मी कहां हैं? असली आतंकियों का सामना करने से डर लगता है क्या? https://t.co/iTtO8xAVmx
बता दें कि शिया मुस्लिम बहुल कारगिल क्षेत्र में गोंपा को बनाना बौद्ध समुदाय की एक पुरानी माँग रही है। बौधगुरु चोस्कयोंग पालगा रिनपोछे ने अपने अनुयायियों के साथ कारगिल में इस विवादास्पद स्थल पर प्राचीन मठ की नींव रखने के उद्देश्य से यात्रा शुरू की थी, मगर कट्टरपंथियों से यह देखा नहीं गया। उन्होंने 2 कनाल भूमि पर मठ के शिनान्यास का विरोध 1969 में निकाले गए एक सरकारी आदेश पर किया। कथिततौर पर उस आदेश में लिखा था कि भूमि को कमर्शियल और रेंजीडेंशियल लिहाज से इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन मंदिर बनाने के लिए भूमि का प्रयोग नहीं होगा। हालाँकि, हम यदि 1969 से पहले की बात करें तो कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि 15 मार्च 1961 को जम्मू कश्मीर के जनरल डिपार्टमेंटट ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन को बौद्ध मंदिर और सराय बनाने के लिए जमीन दी थी जिसमें उन्हें धार्मिक निर्माण करने की अनुमति थी।
कहा जाता है कि ये जगह दोनों समुदायों के लिए जरूरी है। ऐसे में विवाद सुलझाने के लिए पिछले साल इसे लेकर एक गठबंध बना था। लेकिन, उसके बाद कारगिल डेमोक्रेटिक गठबंधन ने डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिख दिया और कहा कि बौद्धों का ये मार्च राजनीति से प्रेरित है। पत्र में ये भी कहा गया कि ये लद्दाख की सौहार्दता को नुकसान पहुँचा सकता है।
पत्र में बताया गया कि केडीए ने लद्दाख बौद्ध एसोसिएसन के साथ बैठक की थी। दोनों पार्टियों ने मुद्दे को सुलझाने पर सहमति जताई थी। ऐसे में किसी तीसरे शख्स को ये इजाजत नहीं होनी चाहिए कि वो क्षेत्र की शांति को हानि पहुँचाए। वहीं लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन के प्रमुख करमा शारदुल ने इस मुद्दे पर कहा कि वो इलाके में कोई तनाव नहीं पैदा करने चाहते, लेकिन ये बौद्धों का अधिकार है कि वह भी वहाँ पर पूजा करें।
स्थानीयों की बात करें तो कारगिल के मुस्लिमों का कहना कि आसपास के 20 किलोमीटर में कोई बौद्ध नहीं रहता और जो एक बिल्डिंग है उसे बौद्ध गेस्ट हाउस कहा जाता है। ऐसे में उसे वही रहने दिया जाना चाहिए। वहीं बौद्धों ने शिकायत की है कि क्षेत्र की स्थानीय जनता उन्हें बिल्डिंग में निर्माण का कार्य नहीं करने दे रही ।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के करेली और अटाला क्षेत्र में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हुई हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद पंप का आलीशान कोठी ध्वस्त करने के बाद प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) अब अन्य 37 दंगाइयों की भी फाइल खंगाल रहा है। जिनकी लिस्ट प्रशासन ने तीन दिन पहले ही प्राधिकरण को सौंप दी थी।
बताया जा रहा है हिंसा में शामिल इन 37 नामों में से किसी के भी मकान में अनियमितता पाई गई तो प्रशासन सख्त एक्शन लेगा। वहीं एक बार फिर बुलडोजर चलने की भनक लगते ही अटाला इलाके में कई दुकानदार जिन्हें आशंका है कि उनके दुकान का भी कुछ हिस्सा अवैध है वो खाली करते नजर आए। अटाला के मजीदी इंटर कॉलेज से सटे कई दुकान सोमवार को अपने सामान हटाते नजर आए।
लिस्ट-1
बता दें कि जब से जावेद पम्प के मकान पर हुई कार्रवाई के खिलाफ दाखिल याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है तब से हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में शामिल सभी 85 आरोपितों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है और इलाके में बुलडोजर चलने की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है।
लिस्ट-2
वहीं प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने बताया, “PDA को दो-तीन दिन पहले उन 37 लोगों के नामों की सूची मिली है जो कि अटाला और करेली क्षेत्र में पथराव की घटना में शामिल थे। प्राधिकरण के अधिकारी इन 37 आरोपितों के पते ठिकानों की तलाश कर रहे हैं, उनकी फाइल खंगाली जा रही है। हालाँकि, इलाके में ज्यादातर लोग पथराव और हिंसा की घटना के बाद मकान पर ताला लगाकर कहीं चले गए हैं, जिससे इन आरोपितों के मकान आदि का पता ठिकाना तलाशने और पूछताछ करने में मुश्किल आ रही है।”
अजय कुमार ने इस पूरे मामले में जानकारी देते हुए आगे बताया, “मुश्किलों के बावजूद प्राधिकरण के अधिकारी आरोपितों का पता लगाने के लिए रात में भी गली मोहल्लों में घूम रहे हैं। आरोपितों के मकानों की पहचान होने पर यह देखा जाएगा कि क्या उन मकानों का नक्शा पीडीए से पास है या नहीं, यदि नक्शा पास नहीं होगा तो कानून के मुताबिक उनपर कार्रवाई की जाएगी।”
बता दें कि प्रशासन की सकती के बाद PDA ने भी इन सभी 37 आरोपितों की संपत्ति का व्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है। सभी के घरों और दुकानों का सर्वेक्षण किया जा रहा है।
गौरतलब है कि रविवार को जिला प्रशासन और पीडीए ने मिलकर प्रयागराज हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद मोहम्मद उर्फ़ जावेद पम्प का दो मंजिला मकान दो जेसीबी और एक पोकलैंड से ध्वस्त कर दिया था। करीब 5 घंटे चली कार्रवाई के दौरान करेली इलाके में भारी फाॅर्स तैनात रही। वहीं इस मामले में किसी ने भी पुलिस या प्रशासन के खिलाफ कोई नारेबाजी या दोबारा पत्थरबाजी की हिमाकत नहीं की।
बता दें कि प्रयागराज हिंसा और पत्थरबाजी के मामले में कुल 92 लोग अब तक हिरासत में लिए गए हैं। जिनमें से 7 नाबालिग बच्चे हैं। जिन्हें सुधार गृह भेज दिया गया है। वहीं यूपी पुलिस के मुताबिक रविवार को हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शन के मामले में अब तक पूरे राज्य भर में 333 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह (Beant Singh Murder) के हत्यारे दिलावर सिंह की तस्वीर अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के म्यूजियम में लगाई गई है। सिखों की सबसे बड़ी संस्था ‘शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC)’ की ओर मंगलवार (14 जून, 2022) को आयोजित एक कार्यक्रम में मानव बम बनकर पूर्व सीएम की जान लेने वाले की तस्वीर म्यूजियम में लगाई गई। अकाल तख्त ने 23 मार्च 2012 को दिलावर सिंह बब्बर को ‘कौमी शहीद’ यानी अमर शहीद का दर्जा दिया था।
जहाँ सिख रेडिकल ग्रुप्स ने इस तस्वीर लगाने का समर्थन किया है, वहीं हिंदू संगठनों ने इसे गलत बताया है। हिंदू संगठन और ‘एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि बब्बर खालसा के आतंकी दोबारा पंजाब की अमन-शांति भंग करने की साजिश रच रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इस पर संज्ञान लेना चाहिए। आतंकियों की फोटो हरमंदिर साहब परिसर में लगाने से दरबार साहिब की पवित्रता भंग होगी।
उन्होंने कहा कि देश की एकता व अखंडता और सरदार बेअंत सिंह से प्यार करने वाले लोगों की भावनाओं को भी इससे ठेस पहुँचेगी और अगर SGPC ने दिलावर सिंह बब्बर की तस्वीर नहीं हटाई तो उनका संगठन जल्दी ही पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगा।
दिलावर सिंह का तस्वीर लगाने का मामला संगरूर उपचुनाव से पहले आया है। बलवंत सिंह राजोआना की बहन कमलदीप कौर शिरोमणि, जो अकाली दल बादल की तरफ से चुनाव लड़ रही हैं, वह एसजीपीसी को नियंत्रित करती हैं। बेअंत सिंह हत्याकांड में मौत की सजा पाए पंजाब पुलिस के पूर्व कांस्टेबल राजोआना और दिलावर सिंह अच्छे दोस्त थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेंट्रल सिख म्यूजियम में बब्बर खालसा इंटरनेशनल आतंकी दिलावर सिंह की तस्वीर लगाने में देरी का एक कारण यह भी था कि वह अपनी दाढ़ी काटता था। इसके अलावा, शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच गठबंधन भी से इसमें देरी हुई।
बता दें कि पंजाब पुलिस में तैनात दिलावर सिंह बब्बर ने 31 अगस्त 1995 को मानव बम बनकर पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह काे उनकी बुलेटप्रूफ कार के साथ उड़ा दिया था।
भारत सरकार ने ‘अग्निपथ योजना’ के जरिए देश के युवाओं को ‘अग्निवीर’ बन कर नौकरी और देशसेवा, दोनों का अवसर दिया है। इसके सेहत साढ़े 17 साल से लेकर 21 वर्ष तक के युवाओं की तीनों सेनाओं के लिए भर्ती की जाएगी। प्रशिक्षण समेत कुल सेवा अवधि 4 वर्षों की होगी। सम्बंधित सेवा अधिनियम एवं विनियम के तहत ये बहाली होगी। इसके लिए पारदर्शी, स्वचालित और केंद्रीकृत चयन प्रक्रिया को अमल में लाया जाएगा।
ये योजना पूरे देश के लिए होगी, जिसमें सभी वर्गों को मौका मिलेगा। अग्निवीरों के केंद्रीकृत डेटा एवं रिकार्ड्स रखे जाएँगे। हालाँकि, सम्बंधित पद के लिए इन ‘अग्निवीरों’ को मेडिकल शर्तों को पूरा करना होगा। उन्हें ‘रेगुलर कैडर’ में नामांकन का मौका भी मिलेगा। हर एक बैच के 25% ‘अग्निवीरों’ को भारतीय सेना के ‘रेगुलर कैडर’ के लिए चुना जाएगा। उन्हें पहले वर्ष में 4.76 लाख रुपए का सालाना वेतन मिलेगा, जो अंतिम वर्ष में बढ़ कर 6.92 लाख रुपए हो जाएगा।
उन्हें ब्याज सहित 11.71 लाख रुपए का सेवा निशि पैकेज भी सेवा पूरी करने के बाद दिया जाएगा, जिस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। साथ ही उन्हें 48 लाख रुपए के बीमा का लाभ भी दिया जाएगा। सेवा पूरी करने के बाद उन्हें ‘अग्निवीर कौशल प्रमाण पत्र’ मिलेगा। इतना ही नहीं, सेवा पूरी करने के बाद उनकी अगली नौकरी की तलाश में भी मदद की जाएगी। ‘सेवा निधि पैकेज’ में ‘अग्निवीर’ और सरकार दोनों रुपए डालेंगे, जिस पर उठा ब्याज भी उन्हें मिलेगा।
उन्हें बैंक लोन लेने का विकल्प भी दिया जाएगा। इसकी घोषणा करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेनाओ को विश्व की बेहतरीन सेना बनाने की दिशा में आज ‘कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए ‘अग्निपथ’ नामक एक बदलावकारी योजना लाने का निर्णय लाया है, जो सशस्त्र बलों में ट्रांसफॉर्मेशन वाले बदलाव लाकर उन्हें पूरी तरह आधुनिक और अच्छी तरह सुसज्जित बनाएगी।
उन्होंने बताया, “अग्निपथ योजना में भारतीय युवाओं को बतौर ‘अग्निवीर’ सशस्त्र बलों में सेवा का अवसर प्रदान किया जाएगा। यह योजना देश की सुरक्षा को मजबूत करने एवं हमारे युवाओं को सैन्य सेवाओं का अवसर देने के लिए लाई गई है। आप सब इस बात से जरूर सहमत होंगे कि संपूर्ण राष्ट्र, खास तौर पर हमारे युवा, सशस्त्र बलों को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं। अपने जीवन काल में कभी न कभी प्रत्येक बच्चा सेना की वर्दी धारण करने की तमन्ना रखता है।”
उन्होंने कहा कि ‘अग्निपथ योजना’ के अंतर्गत यह प्रयास किया जा रहा है कि भारतीय सशस्त्र बलों की प्रोफ़ाइल उतना ही नवयुवा हो, जितना कि भारतीय जनसंख्या के एक बड़े हिस्से की प्रोफ़ाइल है। उन्होंने कहा कि इसका फायदा ये होगा कि इससे नई तकनीकों के लिए प्रशिक्षण में आसानी होगी और उनकी स्वास्थ्य एवं फिटनेस का स्तर भी बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि ‘अग्निवीर’ सेवा के दौरान अर्जित कौशल और अनुभव से अन्य क्षेत्रों में भी उन्हें रोजगार प्राप्त होंगे।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भी उच्च कौशल वाला एक वर्कफोर्स प्राप्त होगा, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और इससे देश की GDP के विकास में योगदान होगा। ‘सेवा निधि पैकेज’ के अलावा ‘अग्निवीरों’ को ‘डेथ एंड डिसेबिलिटी पैकेज’ भी प्राप्त होगा। भाजपा ने कहा कि ये फैसला भारत का भविष्य और उज्ज्वल करेगा, हमारी सेना को और मजबूत बनाएगा एवं देश के युवाओं को देश की सेवा करने का अवसर प्रदान करेगा।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ऋषिकेश में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के लिए विश्राम सदन का निर्माण कराया जा रहा है। इस विश्राम सदन का निर्माण भाऊराव देवरस सेवा न्यास की ओर से करवाया जा रहा है। इसमें ऋषिकेश एम्स के मरीजों व उनके तीमारदारों को बहुत मामूली दरों पर आवास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
इस न्यास के ट्रस्टी सजंय गर्ग हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ 3.5 एकड़ लीज की भूमि पर बनने वाले माधव सेवा विश्राम सदन (Madhav Seva Vishram Sadan) में 400 लोगों को बेहद कम लागत पर ठहरने और भोजन की सुविधा दी जाएगी। उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड सरकार की ओर से न्यास को 50 लाख रुपए देने की घोषणा की गई है। एम्स के समीप वीरभद्र में विश्राम सेवा सदन का निर्माण कार्य करीब 55 करोड़ की लागत से दिसंबर 2023 तक पूर्ण हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि करीब 135 कमरों वाले भवन में 400 बेड की सुविधा होगी। यह वास्तुशिल्प संरचना, पारंपरिक भारतीय स्थापत्य के अनुसार होगा। इसमें मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए भोजनालय, पुस्तकालय, सत्साहित्य केंद्र सभागार, भजन कीर्तन, सत्संग एवं ध्यान कक्ष निर्माण, फिजियोथेरेपी, नेचुरोपैथी, योग एवं पंचकर्म की सुविधा के साथ ही निशुल्क नेत्र जाँच एवं चश्मे वितरण की सुविधा उपलब्ध होगी।
विश्राम सदन में मरीजों और उनके परिजनों को हर प्रकार की जरूरी सुविधाएँ उपलब्ध होगी। इससे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से गंभीर बीमारी का इलाज कराने के लिए आने वाले रोगियों और परिचारकों को राहत मिलेगी। अभी तक उन्हें महँगे होटलों में रहने और भोजन के लिए काफी पैसा खर्च करना पड़ता था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जूना अखाड़े के प्रमुख स्वामी अवधेशानंद गिरी, योग गुरू बाबा रामदेव, कथावाचक संत विजय कौशल और संघ के सर कार्यवाह गोपाल कृष्ण शर्मा ने 13 जून को माधव सेवा विश्राम सदन का शिलान्यास किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री धामी ने कहा था कि यह एक ईश्वरीय कार्य है, इसमें हम भी पूरी सेवा देंगे।
बता दें कि न्यास की तरफ से बनाया जाने वाला यह छठा भवन होगा। इसी तरह के पाँच सदन देश के कई एम्स के मरीजों व उनके तीमारदारों की सेवा में पहले से चल रहे हैं, जहाँ आवास के साथ ही भोजन की सुविधा भी उपलब्ध है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (14 जून, 2022) को महाराष्ट्र के पुणे में जगद्गुरु श्रीसंत तुकाराम मंदिर का उद्घटान किया। इस दौरान महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री व NCP नेता अजीत पवार और नेता प्रतिपक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी मौजूद रहे। देहु रोड स्थित शिला मंदिर में संत तुकाराम की प्रतिमा का उद्घटान करने वाले पीएम मोदी ने इस दौरान सिल्क की एक विशेष पगड़ी पहन रखी थी, जिसे गिरीश मुरुडकर और उनकी कलाकारों की टीम ने तैयार किया है।
इस पगड़ी पर 17वीं शताब्दी के संत तुकाराम के बोल भी लिखे हुए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग है और उन संतों की कृपा अनुभूति हो गई, तो ईश्वर की अनुभूति अपने आप हो जाती है। पीएम ने बताया कि उन्हें आज देहू की इस पवित्र तीर्थ-भूमि पर आकर मुझे ऐसी ही अनुभूति हो रही है। उन्होंने जानकारी दी कि अभी कुछ महीने पहले ही उन्हें पालकी मार्ग में 2 राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन करने के लिए शिलान्यास का अवसर मिला था।
प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि श्री संत ज्ञानेश्वर महाराज पालकी मार्ग का निर्माण 5 चरणों में होगा और संत तुकाराम पालकी मार्ग का निर्माण 3 चरणों में पूरा किया जाएगा। पीएम मोदी ने कहा कि देहू का शिला मंदिर न केवल भक्ति की शक्ति का एक केंद्र है बल्कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य को भी प्रशस्त करता है। उन्होंने इसे पवित्र स्थान बताते हुए इसके पुनर्निमाण करने के लिए मंदिर न्यास और सभी भक्तों का आभार व्यक्त भी किया।
पीएम मोदी ने कहा, “भारत शाश्वत है, क्योंकि भारत संतों की धरती है। हर युग में हमारे यहाँ देश और समाज को दिशा देने के लिए कोई न कोई महान आत्मा अवतरित होती रही है। आज देश संत कबीरदास की जयंती मना रहा है। संत तुकाराम जी की दया, करुणा और सेवा का वो बोध उनके ‘अभंगों’ के रूप आज भी हमारे पास है। इन अभंगों ने हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता, जो समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वही तो अभंग होता है
पीएम मोदी ने कहा कि संत तुकाराम जी कहते थे कि समाज में ऊँच-नीच का भेदभाव बहुत बड़ा पाप है। बकौल पीएम मोदी, उनका ये उपदेश जितना ज़रूरी भगवतभक्ति के लिए है, उतना ही महत्वपूर्ण राष्ट्रभक्ति और समाजभक्ति के लिए भी है। उन्होंने कहा कि आज देश ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के मंत्र पर चल रहा है और सरकार की हर योजना का लाभ हर किसी को बिना भेदभाव के मिल रहा है।
प्रधानमंत्री ने इतिहास याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायक के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई और आजादी की लड़ाई में वीर सावरकर को जब सज़ा हुई, तब जेल में वो हथकड़ियों को चिपली जैसा बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे। पीएम ने कहा कि हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आज ये हमारा दायित्व है कि हम अपनी प्राचीन पहचान और परम्पराओं को चैतन्य रखें। इसलिए, आज जब आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनफ्रास्ट्रक्चर भारत के विकास का पर्याय बन रहे हैं तो हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास और विरासत दोनों एक साथ आगे बढ़ें।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की मौजूदगी में सोमवार (13 जून 2022) को हवाई जहाज के अंदर प्रदर्शन शुरू करने वाले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं के ऊपर जहाँ राज्य पुलिस ने आईपीसी की धारा 307 के तहत केस दर्ज करने की बात कही है, वहीं अब मंगलवार (14 जून 2022) को खबर आई है कि कोझिकोड के पेरंबरा में कॉन्ग्रेस कार्यालय पर अज्ञात हमलावरों ने देसी बम फेंक कर हमला किया। इस हमले में कार्यालय की खिड़कियाँ और दरवाजे टूट गए। कथिततौर पर ऐसे हमले कोझिकोड के अलावा शहर के अन्य इलाकों में भी देखे गए।
स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने इस हमले के पीछे सीपीएम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया है। कहा जा रहा है कि ये हमला सोमवार को जो कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा नारेबाजी की गई, काले झंडे दिखाए गए, उसी के बदले में किए गए हैं। इन हमलों में पयन्नूर कॉन्ग्रेस कार्यालय में महात्मा गाँधी की मूर्ति से उसका सिर तोड़ कर दिया गया और बाद में केपीसीसी अध्यक्ष के सुधाकरण की बीवी पर भी हमला हुआ। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा सख्त कर दी है। वहीं केरल पुलिस ने टी सिद्दीकी नामक विधायक पर केस दर्ज किया है। आरोप है कि उन्होंने कालेपत्ता में बिन पूर्व अनुमति के प्रदर्शन किया।
बता दें कि सोमवार (जून 13, 2022) शाम, दो कॉन्ग्रेस युवा नेता मत्तान्नूर मंडलम अध्यक्ष फरसीन मजीद और कन्नूर जिला सचिव आर के नवीनतकुमार वे हवाई जहाज में केरल सीएम के विरुद्ध प्रदर्शन किया था। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी थे। वालियाथुरा पुलिस ने इस संबंध में हत्या के प्रयास में केस को दर्ज किया था। इस घटना की वीडियो विधायक सबरीनाथ ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन के लिए एलडीएफ के संयोजक ईपी जयराजन ने कॉन्ग्रेस यूथ कार्यकर्ताओं को उकायाता। उन्होंने इस घटना की निंदा की और पिनराई विजयन पर हुआ आतंकी हमला बताया।
वहीं कॉन्ग्रेस ने अपना ट्वीट करके राज्य में सत्ताधारी पार्टी को लेकर कहा, “सीपीएम माफियाओं ने हर हद्द पार कर दी है। उन्होंने विपक्ष के नेता को डराने धमकाने के लिए गुंडों को घर भेजा। इससे पहले इन्होंने तिरुवनंतपुरम के कार्यालय और कल पूर्व मंत्री व रक्षा मंत्री श्री एके एंटनी को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की थी।”
CPM mafia rule crosses all limits. @cpimspeak sends goons to barge into leader of opposition @vdsatheesan's home to intimidate. A murderous CPM mob had attacked the @INCKerala office in Thiruvananthapuram and tried to harm former CM and defense minister Shri AK Antony yesterday. pic.twitter.com/452Od1CZhd
बता दें कि केरल में पिछले कई दिनों से जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं। उनमें से एक प्रदर्शन सोना तस्करी मामले से भी जुड़ा है। स्वप्ना सुरेश ने पिछले सप्ताह केरल के मुख्यमंत्री के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। इसी के बाद सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन तेज हो गए। अब पुलिस ने सीएम के किसी भी कार्यक्रम में काले चीज पर रोक लगा रखी है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन (Delhi Health Minister Satyendar Jain) की जमानत याचिका पर कोर्ट ने आज (14 जून 2022) फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह जमानत याचिका पिछले सप्ताह ही दायर की गई थी। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट अब 18 जून (शनिवार) को जैन की याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी। तब तक ‘आप’ नेता को जेल में ही रहना होगा। वहीं, सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हैरान कर देने वाला दावा भी किया।
अदालत में ईडी ने कहा कि सवाल पूछे जाने के दौरान सत्येंद्र जैन ने कहा कि उनको कोरोना हुआ था, जिसकी वजह से अब उनकी याददाश्त चली गई है। ईडी ने बताया कि सत्येंद्र जैन से कुछ कागजात के बारे में सवाल किए गए थे। जैसे हवाला से पैसा पाने वाले ट्रस्ट से सत्येंद्र जैन का क्या कनेक्शन है, वे उसके मेंबर क्यों हैं?
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता सत्येंद्र कुमार जैन को सोमवार (13 जून, 2022) को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। प्रवर्तन निदेशालय ने जैन को 30 मई की रात को गिरफ्तार किया था। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering Case) का आरोप है।
उल्लेखनीय है कि 6 जून को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ‘आप’ नेता के घर सहित उनके 7 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस दौरान ईडी ने 2.82 करोड़ रुपए की अघोषित नकदी व 1.80 किग्रा सोना बरामद किया था। इसके बाद ईडी ने 9 जून को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जैन को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। ईडी ने दावा किया था कि केजरीवाल के मंत्री सत्येंद्र जैन ने पत्नी और बेटियों के नाम पर 16 करोड़ की धोखाधड़ी की है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि साल 2017 में आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत सत्येंद्र जैन के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी शिकायत के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने AAP नेता के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। जाँच एजेंसी ने ये आरोप लगाया था कि जैन चार कंपनियों से मिली फंडिंग के स्त्रोत के बारे में नहीं बता सके थे, जबकि वो उसमें शेयर होल्डर थे। इन कंपनियों ने कथित तौर पर 2010 से 2014 तक 16.39 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।
बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नुपुर शर्मा और दिल्ली बीजेपी के पूर्व नेता नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणियों पर चल रहे विवाद के बीच, लोग हिंदू देवताओं पर टिप्पणियों की तुलना में पैगंबर पर की गई टिप्पणी पर एकतरफा चल रही प्रतिक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं। जहाँ हिंदू देवताओं और सनातन परंपराओं पर बहुत खराब टिप्पणियाँ की गई हैं, जिन पर न कोई FIR हुआ और न मृत्युदंड की कोई माँग की गई, जबकि हर शहर में ‘लिबरल्स’ द्वारा समर्थित भीड़ नूपुर शर्मा के सिर पर लगातार ईनाम घोषित कर सिर कलम करने की माँग कर रही थी।
हालाँकि, पिछले कुछ वर्षों में, कई मशहूर हस्तियों, पत्रकारों और राजनेताओं ने बिना किसी प्रतिरोध या प्रतिक्रिया के हिंदू देवी-देवताओं को गाली देना बंद कर दिया है। वास्तव में, उनमें से कई अपनी इस हरकत की वजह से अपने करियर में आगे बढ़े हैं। यहाँ ऐसी टिप्पणियों और सोशल मीडिया रिपोर्टों की एक छोटी सी सूची हम पेश कर रहे हैं। देखिए इन लोगों ने किस तरह से हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं का अपमान किया है।
अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी
शुरुआत करते हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से, जिन्होंने हाल ही में कश्मीरी हिंदुओं के दुख का मजाक उड़ाया था और ‘द कश्मीर फाइल्स’ को एक फर्जी फिल्म कहा था, ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ उन्होंने हिंदू देवताओं, पवित्र प्रतीकों और परंपराओं का मजाक उड़ाया था।
इससे पहले कि राम मंदिर निर्माण की बात थोड़ी दूर की कौड़ी लग रही थी, तब केजरीवाल ने 2014 में कहा था कि उनकी नानी (दादी) इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगी। वह बार-बार राम मंदिर की जगह स्कूल, कॉलेज और अस्पताल बनाने की माँग कर रहे थे।
राम मंदिर पर हिंदुओं का मजाक उड़ाने के अलावा, 2019 में, सीएम केजरीवाल ने एक अपमानजनक तस्वीर साझा की, जहाँ एक व्यक्ति अपने हाथ में झाड़ू (उनकी पार्टी का प्रतीक) के साथ हिंदू पवित्र प्रतीक स्वास्तिक को पीटते हुए दूर भगाने की कोशिश कर रहा था।
एक अन्य ट्वीट में, केजरीवाल ने भारत सरकार के साथ दिल्ली की आप सरकार के टकराव से ध्यान हटाने के लिए भगवान हनुमान द्वारा जेएनयू को जलाने का चित्रण करते हुए एक कार्टून साझा किया
आप में केवल केजरीवाल ही नहीं हैं जो हिंदू विरोधी बयान देते हैं या हिंदुओं के खिलाफ माहौल बनाने में लिप्त हैं। आप नेता संजय सिंह ने भी राजनीति में प्रासंगिकता हासिल करने के प्रयास में जून 2021 में भाजपा और अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा धन की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए एक झूठा अभियान चलाया था। जो बाद में फेक साबित हुआ था।
अगस्त 2020 में, AAP के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने सिक्किम में कंचनजंगा की तस्वीरें साझा की थीं, जिन्हें हिंदुओं और बौद्धों, दोनों द्वारा पवित्र माना जाता है, उत्तराखंड में कामेट पीक और नंदा देवी पहाड़ियों, जहाँ नंदा देवी का एक पवित्र मंदिर है, जो एक अवतार है हिंदू देवी माँ दुर्गा की। इसने इन पवित्र चोटियों और दिल्ली के गाजीपुर में एक विशाल लैंडफिल के बीच समानता दिखाई। विवादित ट्वीट के साथ कैप्शन लिखा था, “भारत के सबसे ऊँचे पहाड़।”
ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ का अपमान
हाल ही में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के वजूखाने में मिले ‘शिवलिंग’ का मजाक उड़ाने का एक सिलसिला शुरू हो गया। तब भी हिन्दुओं की तरफ से कोई तीखी प्रतिक्रिया या FIR की बात नहीं आई।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा करते हुए कटाक्ष करते हुए लिखा था कि उम्मीद है कि यह खुदाई सूची में अगला नहीं होगा।
यहाँ तक कि सबा नकवी ने ज्ञानवापी परिसर के अंदर मिले शिवलिंग का उड़ाने के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा की। हालाँकि इसे आलोचना के बाद अब डिलीट कर दिया है।
वहीं राजद नेता कुमार दिवाशंकर ने भी अपने ट्वीट में भाजपा का मजाक उड़ाते हुए शिवलिंग का अपमानजनक संदर्भ दिया।
पीस पार्टी के शादाब चौहान ने भी वाराणसी की एक अदालत द्वारा ज्ञानवापी विवादित ढाँचे को सील करने के आदेश के बाद एक अपमानजनक ट्वीट किया, जब उसके वुजुखाना के अंदर एक शिवलिंग मिला। चौहान ने छोटे खंभों के साथ लगे एक किनारे की तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें दावा किया गया था कि अगर कोई शिवलिंग पर दावा करता है तो न्यायाधीश उस क्षेत्र को सील कर देंगे।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के नेता दानिश कुरैशी ने भी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर शिवलिंग मिलने पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर शिवलिंग पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वहीं इस टिप्पणी को लेकर गुजरात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
केवल नेता ही अपमानजनक टिप्पणी करने वाले नहीं हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने भी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र को शिवलिंग के रूप में चित्रित करके हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए एक मीम प्रकाशित किया था और बम भोलेनाथ कैप्शन दिया था। तस्वीर को प्रिंट संस्करण के MEME’S THE WORD कॉलम में शामिल किया गया था।
कॉलम में एक और कार्टून ताजमहल के तहखाने में बंद दरवाजों को खोलने की माँग का मजाक उड़ाता है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल ने भी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को लेकर सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट किया था। उन्होंने कहा था कि अगर वह शिवलिंग है, तो ऐसा लगता है कि शायद शिव जी का भी खतना हुआ था।
— RP Singh National Spokesperson BJP (@rpsinghkhalsa) May 17, 2022
प्रोफेसर रविकांत चंदन ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर एक बहस के दौरान टिप्पणी की थी कि पंडितों द्वारा परिसर में हो रही अवैध गतिविधियों को कथित रूप से देखने के बाद इसे औरंगजेब द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था। उन्होंने जिस किताब और कहानी का जिक्र किया, उसका किसी ऐतिहासिक दस्तावेज में कोई जिक्र नहीं है। यहाँ तक कि किताब के लेखक ने खुद किताब को गंभीरता से नहीं लेने का सुझाव दिया था।
स्वतंत्र पत्रकार रकीब हमीद नाइक, एक कुख्यात हिंदू-फोबिक तत्व, ने ज्ञानवापी में शिवलिंग को बदनाम करने के लिए व्हाइट हाउस की एक तस्वीर और उसके सामने का एक फव्वारा लगाया। तथाकथित ‘पत्रकार’ के अनुसार, सर्वेक्षण दल को शिवलिंग नहीं मिला, बल्कि एक फव्वारे का पता चला है, जिसका उपयोग हिंदू पक्ष द्वारा ज्ञानवापी के स्वामित्व के लिए किया जा रहा है।
आस्था का अपमान
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े जेएन मेडिकल कॉलेज में फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ जितेंद्र कुमार अपनी कक्षा में यौन अपराधों के बारे में पढ़ा रहे थे। पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन में वे विषय की व्याख्या करते थे, डॉ कुमार ने हिंदू देवताओं के लिए अपमानजनक संदर्भ दिए। बलात्कार के एक संक्षिप्त इतिहास को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने बलात्कार को हिंदू देवी-देवताओं से जोड़ा। हालाँकि, कुमार को जाँच लंबित रहने तक विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया गया था, लेकिन उनके खिलाफ की गई किसी भी सख्त कार्रवाई पर अभी कोई अपडेट नहीं है।
कथित कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी द्वारा 2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना में मारे गए 59 कारसेवकों और माँ सीता के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणी को कोई कैसे भूल सकता है। हिंदुओं के विरोध के बाद हालाँकि उसके कई शो उस समय रद्द कर दिए गए थे। फिर भी उसे अभी एक बड़े रियलिटी शो लॉक अप में मौका दिया गया था जिसे उन्होंने जीता भी।
विवादास्पद इस्लामिक उपदेशक इलियास शरफुद्दीन ने भी शिवलिंग की तुलना पुरुष शरीर के अंग से की है और कहा है कि हिंदुओं को मूर्ति और पुरुष के निजी अंग की पूजा करने की आदत है। वह ज़ी न्यूज़ द्वारा आयोजित ‘ताल ठोक के’ बहस में भाग लेने वालों में से एक थे। वेदों, गीता और उपनिषदों का हवाला देते हुए, शराफुद्दीन ने पहले तर्क दिया कि हिंदू ग्रंथों में उल्लेख है कि ‘जो लोग मूर्तियों की पूजा करेंगे उन्हें नरक में भेजा जाएगा’। “हिंदुओं को मूर्ति, लिंग और मानव शरीर के गुप्तांगों की पूजा नहीं करनी चाहिए”, उसने ‘ज्ञानवापी सर्वेक्षण वीडियो में शिवलिंग की उपस्थिति का मजाक उड़ाते हुए कई भद्दी टिप्पणियाँ की। यहाँ तक कि अन्य प्रतिभागियों को न सुनकर, वह हँसा और कहा, ” प्राइवेट पार्ट की पूजा नहीं होनी चाहिए (निजी अंगों की पूजा नहीं करनी चाहिए)”।
बंगाली फिल्म अभिनेत्री सायोनी घोष ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर बेहद आपत्तिजनक कार्टून साझा किया था। जब उसे कार्रवाई की धमकी दी गई, तो उसने दावा किया कि उसका अकाउंट हैक कर लिया गया था। बाद में टीएमसी ने उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट भी दिया।
मशहूर हस्तियों, नेताओं और मीडिया घरानों के अलावा, ब्रांडों को भी हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने की आदत होती है और जब उन्हें इस पर फटकार लगती है, तो उन्हें अक्सर वामपंथी और लिबरलों का समर्थन मिलता है। हाल के दिनों में, हिंदुओं को लक्षित करते हुए कई आपत्तिजनक अभियान और ब्रांड शुरू किए गए थे। हालाँकि, ज्यादातर मामलों में विज्ञापनों को हिंदुओं के विरोध के बाद हटा दिया गया था, लेकिन ब्रांड हिंदू विरोधी विज्ञापनों के किसी भी गंभीर परिणाम के बिना आसानी से पीछा छुड़ा लिए।
2019 में, रेड लेबल ने हिंदुओं को घृणित कट्टरपंथियों के रूप में पेश करते हुए गणेश चतुर्थी पर एक विज्ञापन अभियान शुरू किया। विज्ञापन में एक व्यक्ति को घर ले जाने के लिए गणेश की मूर्ति की खरीदारी करते हुए दिखाया गया, जहाँ उसने एक बुजुर्ग मूर्ति निर्माता से बात की कि वह किस प्रकार की मूर्ति खरीदना चाहता है। मूर्ति निर्माता को हिंदू पौराणिक कथाओं का गहरा ज्ञान था, वह जिस पेशे में है, उसके लिए आश्चर्य की बात नहीं है। बातचीत के दौरान मूर्ति निर्माता एक स्कल टोपी निकालता है और उसे पहनता है, जो यह दर्शाता है कि वह मुस्लिम है। यह देखकर, संभावित खरीदार हिचकिचाता है और कहता है कि वह आगे वापस आएगा, जिसका स्पष्ट अर्थ है कि वह किसी मुसलमान से मूर्ति नहीं खरीदना चाहता था। मूर्ति निर्माता ने तब उसे चाय की पेशकश की और कुछ बातचीत की, जिसने हिंदू व्यक्ति का मन बदल दिया, और उसने तुरंत वह मूर्ति खरीद ली। खैर, हिंदुस्तान यूनिलीवर के एक ब्रांड रेड लेबल को ऐसे विज्ञापनों को जारी करने और बैकलैश के बाद उन्हें वापस लेने की आदत है।
ऐसे ही ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क द्वारा 2020 में लव जिहाद का महिमामंडन करने वाला एक विज्ञापन जारी किया गया था। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने उस विज्ञापन के लिए ज्वैलरी ब्रांड तनिष्क के बहिष्कार का आह्वान किया, जिसमें एक मुस्लिम परिवार में विवाहित हिंदू महिला को दिखाया गया था। उसके गोद भराई की तैयारी हो रही थी। हालाँकि, विरोध के बाद उसे YouTube से हटा दिया गया था।
2021 में, लोकप्रिय एथनिक गारमेंट ब्रांड फैबइंडिया ने भी दिवाली पर ‘जश्न-ए-रिवाज़’ नाम का एक विज्ञापन लॉन्च किया। जिस पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने हिंदू त्योहार और भावनाओं के इस तरह से इस्लामीकरण पर आपत्ति जताई। बहुत से लोगों ने दिवाली को ‘जश्न-ए-रियाज़’ कहने का समर्थन नहीं किया। इसे भी विरोध के बाद हटा दिया गया। हालाँकि, बाद में फैबइंडिया ने दावा किया कि यह दिवाली अभियान भी नहीं था जो कि लोगों के विरोध से बचने के लिए एक तरह की बहानेबाजी थी।