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आपत्तिजनक अवस्था में थे फादर-नन, देखने वाली सिस्टर पर कुल्हाड़ी से वार; कुएँ में फेंका: 28 साल में सजा, 18 महीने में बेल

बहुचर्चित सिस्टर अभया मर्डर केस (Sister Abhaya Murder Case) के दोषियों को केरल हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। इस मामले में तिरुवनंतपुरम की सीबीआई अदालत ने दिसंबर 2020 में फादर थॉमस कोट्टूर और नन सिस्टर सेफी को हत्या का दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अभया की लाश 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट के कुएँ से मिली थी।

इस फैसले को दोषियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। इस याचिका पर गुरुवार 23 जून 2022 को जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस सी जयचंद्रन की खंडपीठ ने सुनवाई की। सिस्टर सेफी और फादर थॉमस को 5-5 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही जमानत पर रहने के दौरान अदालत की अनुमति के बिना राज्य नहीं छोड़ने के निर्देश दिए। दोनों को 6 महीने तक हर शनिवार जाँच अधिकारी के सामने भी पेश होना होगा।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की जाँच शुरुआत में स्थानीय पुलिस और राज्य अपराध शाखा ने की थी। अभया के आत्महत्या की बात कहते हुए जाँच बंद कर दी गई। लेकिन लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता जोमोन पुथेनपुराकल के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद 29 मार्च, 1993 को इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया। CBI ने वर्ष 2008 में कोट्टूर, पूथरुकायिल और सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया था। लेकिन एक महीने बाद ही इन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट दायर की। हत्या, सबूत नष्ट करने, आपराधिक साजिश और अन्य आरोप लगाए गए। फादर जोस पूथरुकायिल को अदालत ने सबूत न मिलने के कारण छोड़ दिया था। लेकिन फादर कोट्टूर और सिस्टर सेफी को दोषी पाया था।

क्या है पूरा मामला

सीबीआई आरोप-पत्र के अनुसार, घटना के दिन सिस्टर अभया एग्ज़ाम के लिए सुबह के चार बजे उठी और पानी लेने किचन में गईं। अभया ने दो पादरियों और एक नन- थॉमस कुट्टूर, जोस पूथरुकायिल, और सिस्टर सेफी को ‘आपत्तिजनक स्थिति’ में पाया। सिस्टर अभया ये बात किसी को बता न दें, इस डर से तीनों ने मिलकर उस पर हमला किया और सिस्टर अभया बेहोश हो गई। इसके बाद तीनों ने मिलकर उसे कुऍं में डाल दिया।

घटना के समय फादर थॉमस ने कथित तौर पर रसोई में उसका गला घोंट दिया, जबकि तीसरे आरोपित ने उस पर कुल्हाड़ी से वार किया। इसके बाद फादर जोस सहित तीनों लोगों ने फिर उसे एक कुएँ में फेंक दिया, जबकि वह तब भी जिन्दा थी। सिस्टर अभया की डूबने से मौत हो गई। हमले के समय एक पानी की बोतल किचन में गिर गई थी, उनके बाहर निकलते समय दरवाजे के नीचे एक कपड़ा मिला था और रसोई में विभिन्न स्थानों पर पाए गए अभया के चप्पल सभी सबूत का हिस्सा बने।

बसपा के पूर्व MLC हाजी इकबाल, उनके भाई पर नाबालिग से रेप का मामला, खनन माफिया के चारों बेटों पर भी छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस ने कहा- जल्द होगी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में खनन माफिया और बहुजन समाज पार्टी के पूर्व MLC हाजी इकबाल और उसके भाई पर एक नाबालिग लड़की से रेप का केस दर्ज हुआ है। इकबाल के आरोपित भाई का नाम महमूद अली है। महमूद अली भी बसपा के पूर्व MLC हैं। पीड़िता ने हाजी इकबाल के चारों बेटों पर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। युवती ने कुछ दिन पहले पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस घटना में पुलिस ने कुल 6 आरोपितों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इस मामले के बाबत SSP सहारनपुर ने यह जानकारी आज 23 जून 2022 (गुरुवार) को दी है।

एसएसपी सहारनपुर के मुताबिक, “कुछ समय पहले सहारनपुर पुलिस को एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ था। इसमें नाबालिग के साथ रेप और छेड़खानी के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस मामले की DSP स्तर के अधिकारी से जाँच करवाई गई जिसमें आरोप सत्य पाए गए। इसके बाद हमने 6 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है जिसमें से हाजी इकबाल और महमूद अली पर रेप का आरोप है। साथ ही 4 अन्य पर नाबालिग से छेड़छाड़ और मारपीट का आरोप है। इस केस में जाँच की जा रही है। जाँच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएँगे उसके आधार पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक SSP सहारनपुर आकाश तोमर ने आरोपित हाजी इकबाल की जल्द गिरफ्तारी का दावा किया है। हाजी इकबाल की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। अब तक हाजी इकबाल के 3 बेटों को जेल भेजा जा चुका है। साथ ही उसकी व उसके सहयोगियों की मिला कर कुल 130 करोड़ सम्पत्ति को कुर्क भी किया गया है। बता दें कि हाजी इकबाल पर अवैध खनन, आय से अधिक सम्पत्ति, जमीन पर अवैध कब्ज़े के कई मामले दर्ज हैं। सहारनपुर पुलिस के अलावा हाजी इकबाल की सम्पत्तियों की जाँच ED भी कर रही है।

DHFL ने किया देश का सबसे बड़ा बैंक घोटाला: 17 बैंकों के ₹34615 करोड़ डकारे, मनमोहन सिंह के राज से शुरू किया था लोन का नाम पर खेला

देश का अब तक का सबसे बड़ा बैंक घोटाला सामने आया है। इसे दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) और उसके सहयोगियों ने अंजाम दिया है। यह घोटाला 34,615 करोड़ रुपए का है। आरोप है कि बैंकों से जिस काम के नाम पर लोन लिए गए है, पैसा वहाँ लगाने की जगह अन्य कंपनियों को ट्रांसफर कर दिए गए। इसकी शुरुआत 2010 से हुई, जब केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। 2019 तक यह धोखाधड़ी चलती रही।

इस संबंध में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) के पूर्व सीएमडी कपिल वाधवान और डायरेक्टर धीरज वाधवान समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स की माने तो DHFL के वाधवान ब्रदर्स ने 17 बैंकों के साथ धोखाधड़ी की है। सीबीआई ने आरोपितों के मुबंई स्थित 12 ठिकानों की तलाशी ली है। इन जगहों में वाधवान का ऑफिस और घर भी शामिल है। इससे पहले एबीजी शिपयार्ड (ABG Shipyards) का 23,000 करोड़ रुपए का फ्रॉड सामने आया था, जो सबसे बड़ी बैंकिंग धोखाधड़ी थी।

सीबीआई (CBI) ने इस मामले में DHFL, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान, स्काईलार्क बिल्डकॉन प्रा. लिमिटेड, दर्शन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, सिगटिया कंस्ट्रक्शन बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, टाउनशिप डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शिशिर रियलिटी प्राइवेट लिमिटेड, सनब्लिंक रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, सुधाकर शेट्टी और अन्य को आरोपित बनाया है।

सीबीआई के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर और ब्रांच हेड विपिन कुमार शुक्ला की 11 फरवरी, 2022 को मिली शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में सोमवार (20 जून 2022) को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शुक्ला ने अपनी शिकायत में सीबीआई को बताया था कि 2010 में बैंकों के कंसोर्टियम ने डीएचएफएल को क्रेडिट सुविधा दी थी। इस कंसोर्टियम में 17 बैंक थे। इससे पहले 2021 में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने सीबीआई को डीएचएफएल के प्रमोटर्स और तत्कालीन प्रबंधन की जाँच करने के लिए लिखा था। इसमें यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को 40,623.36 करोड़ रुपए (30 जुलाई, 2020 तक) का नुकसान होने की बात कही गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार बैंकों से 42 हजार करोड़ से ज्यादा का लोन लिया गया। इसमें 34615 हजार करोड़ रुपए का लोन कंपनी ने नहीं लौटाया। अकाउंट बुक में फर्जीवाड़ा कर लोन का पैसा 65 से ज्यादा कंपनियों में भेजा दिया गया। मजबूरन बैंकों ने अलग-अलग समय पर खाते को एनपीए घोषित कर दिया। इसके बाद ऑडिट से बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं, फंड की हेराफेरी, दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा आदि का पता चला था।

अग्निपथ विरोधी हिंसा को लेकर UP में अब तक 387 गिरफ्तार, 34 FIR, अलीगढ़ में जाँच के डर से कोचिंग सेंटरों ने गिराए शटर

अग्निपथ योजना के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद UP के अलीगढ़ जिले के टप्पल में तमाम कोचिंग सेंटरों ने बुधवार (22 जून 2022) को अपने शटर बंद रखे। ऐसा कदम हिंसक प्रदर्शनों में उनकी भूमिका की चल रही जाँच के चलते उठाया गया। बताया जा रहा है कि अब तक कोचिंग सेंटरों के 11 संचालकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इनमें अलीगढ़ से सबसे बड़े कोचिंग संस्थान यंग इंडिया के मालिक सुधीर शर्मा भी शामिल हैं।

हिंसा के बाद अब तक अलीगढ़ में 11 कोचिंग संस्थानों के संचालकों सहित कुल 76 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं। अलीगढ़ पुलिस ने 18 जून को उपद्रवियों के पोस्टर जारी किए। ये पोस्टर हिंसा के बाद निकाले गए CCTV फुटेज के आधार पर बनाए गए हैं। इन प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ यमुना एक्सप्रेसवे पर तोड़फोड़ की थी बल्कि जट्टारी पुलिस चौकी को भी जला दिया था। इन्हे सँभालने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े थे। इन पोस्टरों में पुलिस ने आरोपितों को पकड़वाने के लिए इनाम भी घोषित किया है।

प्रदेश में वर्तमान में सेना की तैयारी करवाने वाले तमाम कोचिंग संस्थानों पर पुलिस की नजर है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में इनमे से कईयों की गिरफ्तारी भी की गई है। पुलिस का मानना है कि कई कोचिंग संस्थानों में छात्रों को अग्निपथ योजना के खिलाफ भड़काया गया है। UP में फिलहाल लगभग 2200 कोचिंग संस्थान चल रहे हैं जहाँ सेना भर्ती की तैयारी करवाई जा रही है। इन स्थानों में न सिर्फ सेना बल्कि पैरामिलिट्री, स्टेट पुलिस और रेलवे आदि की भी तैयारी करवाई जा रही है।

उत्तर प्रदेश के जिन अन्य स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण रहे उनमें वाराणसी, फ़िरोज़ाबाद, अमेठी, बलिया, मथुरा, आगरा और सहारनपुर जिले शामिल हैं। बलिया और वाराणसी में ट्रेनों को भी निशाना बनाया गया। यमुना एक्सप्रेसवे से गुजर रहे वाहनों पर पथराव किया गया था। बलिया में पुलिस ने 100 से अधिक उपद्रवियों को हिरासत में लिया है।

अग्निपथ के विरोध में हुई हिंसा में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अब तक 34 FIR दर्ज की हैं। कुल 387 आरोपितों को अब तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गिरफ्तार किया गया है। इसी के साथ CCTV फुटेज और अन्य माध्यमों से उपद्रवियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही फरार आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी भी कर रही है।

रात भर शिवसैनिकों ने मुंबई की सड़कों पर चलाया सर्च ऑपरेशन, पर उद्धव के बागी मंत्री को रोक नहीं पाए: जानिए कैसे एकनाथ शिंदे के कैंप में पहुँचे गुलाबराव पाटिल

महाराष्ट्र में शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से लेकर उद्धव ठाकरे के खास मानें जाने वाले एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे का सारा खेल बिगाड़ दिया है। विधायकों के पाला बदलने से शिवसेना प्रमुख एक तरफ छटपटा रहे हैं और विधायकों की तलाश में मुंबई का चप्पा-चप्पा छान मार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अपने मुख पत्र ‘सामना’ के जरिए विधायकों को चेतावनी भी दे रहे हैं कि तुम्हे कचरे में फेंक दिया जाएगा। यह सब देखने के बाद अगर हम यह कहें कि एंटरटेनमेंट के मामले में महाराष्ट्र का सियासी ड्रामा बॉलीवुड की फिल्मों से भी आगे निकल गया है, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। अपनी कुर्सी बचाने और शिवसैनिकों को बागी खेमे में जाने से रोकने के लिए उद्धव ठाकरे अपनी पूरी ताकत झोंक दे रहे हैं, लेकिन विधायकों के पाला बदलने की खबरें रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।

उद्धव ठाकरे की नाक के नीचे से निकल बागी नेता एकनाथ शिंदे के खेमे में शामिल हो रहे हैं, लेकिन शिवसेना प्रमुख को इसकी भनक भी नहीं लग पा रही है। इस बौखलाहट में शिवसेना को समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें और क्या बोले? शिवसेना ने अपने मुख पत्र ‘सामना’ के संपादकीय में मौजूदा सियासी तूफान को ‘स्वप्न दोष’ की तरह बताया है। पार्टी ने अपने बागियों को चेताया है कि समय रहते सावधान हो जाएँ, वरना उन्हें कचरे में फेंक दिया जाएगा।

खैर, शिवसेना बागियों के लिए सार्वजनिक तौर पर भले ही कड़े तेवर दिखा रही हो, लेकिन जमीनी तौर पर वह मुंबई की गलियों में इन्हें तलाश रही है। मंगलवार (21 जून 2022) की रात को एक ऐसी ही रोमांचक घटना सामने आई। शिवसैनिक पूरी रात शिकारियों की तरह महाराष्ट्र के मंत्री और वरिष्ठ शिवसेना नेता गुलाबराव पाटिल (Gulabrao Patil) को ढ़ूंढते रहे। लेकिन वह उन्हें चकमा देकर एकनाथ शिंदे तक पहुँचने में कामयाब रहे, जो इस वक्त असम के गुवाहाटी में रेडिसन ब्लू होटल में डेरा जमाए हुए हैं। खुद शिंदे 46 विधायकों के समर्थन का दावा कर चुके हैं। इनमें 6-7 निर्दलीय भी हैं।

खबरों के मुताबिक, उद्धव ठाकरे खेमे के एक वरिष्ठ नेता ने दक्षिण मुंबई में अपने कार्यकर्ताओं को किसी भी कीमत पर पाटिल का पता लगाने का आदेश दिया था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, शाखा प्रमुख पांडुरंग सकपाल (Shakha Pramukh Pandurang Sakpal) के नेतृत्व में दक्षिण मुंबई के शिवसैनिक तुरंत हरकत में आए और पाटिल को ट्रैक करने के लिए रात भर बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया।

21 जून को शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने पाटिल को पकड़ने में अपनी पूरी ताकत लगा दी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। शिवसैनिक पहले उस होटल में गए, जहाँ विधायक ठहरे हुए थे, लेकिन उन्हें वहाँ कोई नहीं मिला। फिर भी आलाकमान के दबाव में पार्टी के कार्यकर्ता पूरी रात दक्षिण मुंबई की सड़कों पर घूमते रहे, क्योंकि उद्धव ठाकरे ने उन्हें आदेश दिया था कि वे किसी भी कीमत पर पाटिल को पकड़कर ले आए। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने दक्षिण मुंबई में पाटिल के बंगले के बाहर डेरा डालने का फैसला किया। वहाँ आखिरकार बुधवार (22 जून 2022) की सुबह ही उन्हें पकड़ लिया गया।

पार्टी के कार्यकर्ता ने बताया “हमें रात 11 बजे फोन आया और कहा गया कि पाटिल की तलाश करें। हमने लोअर परेल में सेंट रेजिस होटल सहित हर जगह उनको ढ़ूंढा, लेकिन वह नहीं मिले। इसके बाद हमने सुबह उनके घर के बाहर डेरा डालने का फैसला किया। हम बुधवार सुबह करीब साढ़े आठ बजे उन्हें पकड़ने में सफल रहे।” जैसे ही सकपाल ने पाटिल को देखा, उन्होंने जोर देकर कहा कि आप उद्धव ठाकरे से बात करें।

पाटिल भी डेढ़ शाड़े ठहरे, उन्होंने शिवसैनिकों को गुमराह करते हुए कहा, “पार्टी प्रमुख के साथ मेरी पहले ही बात हो चुकी है। उन्हें मंत्रालय में कुछ काम है। उसके बाद वह मुख्यमंत्री से मिलने वर्षा बंगले जाएँगे।” इसके बाद शिवसैनिकों को भी यकीन हो गया कि वह जल्द ही उद्धव ठाकरे से मिलने उनके सरकारी आवास वर्षा बंगले पर जाएँगे। हालाँकि, पाटिल वर्षा की ओर जाने के बजाय शिवसैनिकों को चकमा दे कर अपनी पर्सनल कार से भाग गए। शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने उनका पीछा किया, लेकिन तब तक वह गायब हो गए। बाद में पाटिल को गुवाहाटी में शिवसेना के अन्य बागी विधायकों के साथ देखा गया।

बता दें कि शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये भी शिवसेना को अलविदा भी कह सकते हैं। हालाँकि, इनमें से कोई भी सांसद अभी खुलकर अपनी बात नहीं कह रहे हैं और वक्त का इंतजार कर रहे हैं।

एकनाथ शिंदे ने 42 MLA वाला Video दिखा बताई ताकत, विधायक ने उद्धव से पूछा- अयोध्या जाने से क्यों रोका: संजय राउत बोले- कॉन्ग्रेस-NCP को छोड़ देंगे

एकनाथ शिंदे असम के गुवाहाटी स्थित जिस रेडिसन ब्लू होटल में डेरा डाले हुए हैं, वहाँ से एक वीडियो आया है। इस वीडियो में कुल 42 विधायक दिख रहे हैं। इनमें शिंदे भी हैं। इसके बाद बागियों को मनाने के मकसद से संजय राउत ने कहा है कि महाविकास अघाड़ी से शिवसेना बाहर आने को तैयार है। इससे पहले शिंदे ने अपने समर्थक शिवसेना विधायक संजय सिरसत का एक पत्र ट्विटर पर साझा किया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को लिखे पत्र में सिरसत ने पार्टी के कुछ नेताओं को अयोध्या जाने से रोके जाने को लेकर सवाल पूछा है।

होटल से आए वीडियो में जो विधायक दिख रहे हैं उनमें 35 शिवसेना के हैं। अन्य 7 निर्दलीय हैं। इस वीडियो में कुछ विधायक शिंदे और बाल ठाकरे के समर्थन में नारे लगाते हुए भी सुने जा रहे हैं।

यह वीडियो एकनाथ शिंदे के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। बागी विधायक उन्हें पहले ही शिवसेना विधायक दल का नेता चुन चुके हैं। ऐसी खबरें भी सामने आई है कि वे शिवसेना पर भी अपना दावा ठोंक सकते हैं। हालाँकि दलबदल कानून के तहत उन्हें शिवसेना के दो तिहाई विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। फिलहाल महाराष्ट्र विधानसभा में शिवसेना के 55 सदस्य है। लिहाजा यह नंबर 37 है।

इस वीडियो के सामने आने के बाद शिवसेना सांसद संजय राउत ने बागियों को मनाने के मकसद से कॉन्ग्रेस और एनसीपी से नाता तोड़ने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि विधायक गुवाहाटी से बातचीत नहीं कर सकते। उन्हें मुंबई लौटकर इन मसलों पर मुख्यमंत्री से चर्चा करनी चाहिए। राउत ने कहा, “यदि सभी विधायकों की इच्छा हुई तो हम ​महाविकास अघाड़ी से बाहर आने को तैयार हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें मुंबई आकर मुख्यमंत्री (उद्धव ठाकरे) से चर्चा करनी होगी।” राउत के इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और एनसीपी के कैंप में भी खलबली मच गई है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास अघाड़ी में दोनों दल साझेदार हैं।

इससे पहले शिंदे ने विधायक सिरसत का जो पत्र साझा किया था उसमें भी अप्रत्यक्ष तौर पर संजय राउत पर निशाना साधा गया है। 22 जून को लिखे इस पत्र में कहा गया कि शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी विधायक वर्षा (मुख्यमंत्री आवास) में नहीं जा सकते थे। सीएम के आसपास के लोग तय करते थे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं।

पत्र में कहा गया है कि अयोध्या, राम मंदिर और हिंदुत्व शिवसेना का एजेंडा रहा है। बावजूद इसके कुछ नेताओं को आदित्य ठाकरे के साथ हालिया अयोध्या दौरे पर जाने से रोका गया। अंतिम क्षणों में नेताओं को रोके जाने की वजह पत्र में पूछी गई है। साथ ही कहा गया है कि पार्टी नेताओं से ज्यादा तवज्जो एनसीपी और कॉन्ग्रेस नेताओं को मिल रहा है।

गौरतलब है कि संकट गहराने के बाद उद्धव ठाकरे ने बुधवार की रात मुख्यमंत्री का आधिकारिक आवास खाली कर दिया था। लेकिन रिपोर्टों के अनुसार शिवसेना में पैदा यह संकट अब केवल विधायकों तक ही सीमित नहीं है। उद्धव की कार्यशैली से पार्टी के कुछ सांसद भी नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी के 19 सांसद हैं। इनमें से 9 नाराज बताए जा रहे हैं।

1000+ मौतें और 1500 से अधिक घायल: अफगानिस्तान में भूकंप से 3000+ घर धराशायी, धीरे-धीरे सामने आ रही तबाही की तस्वीर

अफगानिस्तान (Afghanistan) में बुधवार को (22 जून 2022) को आए 6.1 मैगेनीट्यूड की तीव्रता वाले एक शक्तिशाली भूकंप (Earthquake) में कम से कम 1,000+ लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। हादसे के दूसरे दिन दावा किया जा रहा है कि इस आपदा में कम से कम 1,500 से अधिक लोग घायल हुए हैं। भूकंप के कारण अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम भूकंप के कारण 3000+ घर धराशाई हो गए हैं। बताया जा रहा है कि भूकंप का केंद्र पाकिस्तान से सटे पक्तिका प्रान्त में था। यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा कि 6.1 तीव्रता का भूकंप पाकिस्तानी सीमा के पास खोस्त शहर से लगभग 44 किमी (27 मील) दूर, 51 किमी (31 मील) की गहराई पर आया।

शीर्ष तालिबान सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि कमजोर टेलीफोन नेटवर्क के कारण राहत और बचाव कार्यों में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ये दो दशकों में अफगानिस्तान का सबसे घातक भूकंप था। आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

स्थानीय न्यूज चैनल टोलो न्यूज के मुताबिक, तालिबान सरकार ने भूकंप से प्रभावित लोगों की मदद के लिए 1 अरब अफगानी (87.53 करोड़ रुपये के बराबर) का पैकेज जारी किया है। अफगानिस्तान के प्राकृतिक आपदा प्रबंधन राज्य मंत्रालय के उप मंत्री मवलवी शराफुद्दीन मुस्लिम ने भूकंप में मारे गए लोगों के परिवारों के लिए 100,000 अफगानी और घायलों को 50,000 अफगानी की सहायता देने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के आदेश पर ये निर्णय लिया गया है।

इसके साथ ही तालिबानी नेता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भूकंप के कारण हुए विनाश से उबरने में इस्लामी अमीरात की मदद करने की अपील की है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अफगानिस्तान में भूकंप से हुई तबाही पर संवेदना जाहिर करते हुए मानवीय मदद की पेशकश की है। इसके अलावा पाकिस्तान, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे कई अन्य देशों ने भी सहायता का ऐलान किया है।

जुमे पर नमाज पढ़ने गए अटाला मस्जिद, हिंसा के लिए उकसाया: प्रयागराज हिंसा में गिरफ्तार मोहम्मद सगीर ने बताया, रिपोर्ट में दावा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज़ के बाद हुई हिंसा में फरार आरोपित मोहम्मद सगीर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस पूछताछ में उसने मस्जिद में खुद के भड़काए जाने की जानकारी दी है। बुधवार (22 जून 2022) को सगीर को जेल भेज दिया गया है। वहीं यूपी पुलिस अभी भी फरार चल रहे 31 अन्य उपद्रवियों की तलाश कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरफ्तार आरोपित सगीर का नाम डियर भी है। वह ई रिक्शा चलाता है और साथ में मांस भी सप्लाई करता है। हिंसा के बाद वो करेली में ही छिपा रहा और मौका देख कर अपने एक रिश्तेदार के घर भाग गया था। वो माहौल शांत होने की प्रतीक्षा कर रहा था। हालात सामान्य होते ही वो वापस लौट आया लेकिन खुल्दाबाद थाने की पुलिस ने उसे दबोच लिया।

पुलिस की पूछताछ में सगीर ने बताया कि घटना के दिन वो अटाला की मस्जिद में नमाज़ पढ़ने गया था। तभी वहाँ उसे प्रदर्शन के लिए उकसाया गया। इसी के बाद वो अन्य उपद्रवियों के साथ हिंसा में शामिल हो गया। बाद में पुलिस का दबाव बनते ही वो छिप गया था। पूछताछ में सगीर ने अन्य उपद्रवियों के नाम भी बताए है जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। DSP प्रथम सत्येंन्द्र तिवारी ने जागरण से बताया कि गिरफ्तार सगीर अटाला मोहल्ले का ही रहने वाला है।

पुलिस अटाला मस्जिद के मुतवल्ली हाफिज, पार्षद फ़ज़ल खान और AIMIM के जिलाध्यक्ष शाह आलम की भी तलाश कर रही। इन सभी पर मस्जिद में मौजूद लोगों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रयागराज में हुई हिंसा में कुल 95 नामजद और 5400 अज्ञात उपद्रवियों पर केस दर्ज हुआ है। इन नामजदों में 31 आरोपित अभी भी फरार चल रहे हैं। बता दें कि प्रयागराज हिंसा में शामिल अब तक 103 आरोपित जेल भेजे जा चुके हैं जिसमें कुछ नामजद और कुछ CCTV व अन्य फुटेज से चिन्हित किए गए हैं।

शिवसेना के ‘तलाक’ में ‘दीदी’ के नेता हुए बावले, असम के उस होटल के बाहर TMC का प्रदर्शन जहाँ विधायकों के साथ हैं एकनाथ शिंदे

महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे उथलपुथल के बीच अब ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की भी एंट्री हो गई है। असम के जिस होटल में शिवसेना के बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसके बाहर तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आज (23 जून 2022) सुबह जमकर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध का नेतृत्व तृणमूल कॉन्ग्रेस के असम प्रमुख रिपुन बोरा (Assam chief Ripun bora) ने की। विरोध के बीच बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी प्रदर्शनकारियों को काबू में करने में लगे रहे।

न्यूज एजेंसी ANI की खबर के मुताबिक, गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल के बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने अपनी हिरासत में ले लिया है। प्रदर्शन कर रहे टीएमसी के एक कार्यकर्ता का कहना है, “असम में लगभग 20 लाख लोग बाढ़ के कारण पीड़ित हैं। लेकिन सीएम महाराष्ट्र सरकार को गिराने में व्यस्त हैं।” 

बता दें कि एमएलसी चुनाव के नतीजों के ठीक बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में भारी उथल-पुथल मचा हुआ है। इस उथल-पुथल का सीधा असर उद्धव ठाकरे की सरकार पर पड़ा है। शिवसेना के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे ने अपने बागी तेवर दिखा दिए है, जिसके बाद ऐसा माना जा रहा है कि उद्धव सरकार कभी भी गिर सकती है। महाराष्ट्र से आए शिवसेना के बागी विधायकों के समूह को गुवाहाटी के रैडिसन ब्लू होटल में रखा गया है। 

बताया जा रहा है कि असम के गुवाहाटी में रैडिसन ब्लू होटल में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के कुल 42 विधायक मौजूद हैं। इसमें शिवसेना के 34 विधायक और 8 निर्दलीय विधायक शामिल हैं। वहीं होटल में मौजूद सभी बागी विधायक पूर्व गृह राज्य मंत्री और शिवसेना नेता दीपक केसरकर से भी मिले। होटल के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। इस होटल में आम लोगों के प्रवेश करने पर तकरीबन अब रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, गुवाहाटी पुलिस ने होटल के निजी सुरक्षकर्मियों से सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले ली है।

60 गेंद-6 विकेट, मिस्ट्री फ्री हिट-महिला और पुरुष क्रिकेटर साथ: क्या 6ixty से क्रिकेट बदल देगा वेस्टइंडीज, अगस्त में शुरुआत

क्रिकेट को एक नए फॉर्मेट में लाने की तैयारी है। वेस्टइंडीज क्रिकेट (CWI) और कैरेबियन प्रीमियर लीग (CPL) मिलकर यह फॉर्मेट ला रहा है। इस साल अगस्त से इसकी शुरुआत होगी। नाम रखा गया है- द सिक्सटी (The 6IXTY)।

24 से 28 अगस्त तक सेंट किट्स एंड नेविस में आयोजित इस टूर्नामेंट के ब्रांड एंबेसडर है वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल। इसमें दुनिया भर के क्रिकेटरों के शिरकत करने की उम्मीद है। खास बात यह है कि टूर्नामेंट में पुरुष और महिला दोनों क्रिकेटरों की टीमों की भिड़ंत होगी।

‘The 6ixty’ में पुरुष क्रिकेटरों की छह टीम होगी। नाम रखा गया है- सेंट लूसिया किंग्स, गुयाना अमेज़ॅन वॉरियर्स, बारबाडोस रॉयल्स, ट्रिनबागो नाइट राइडर्स, जमैका तल्लावाह और सेंट किट्स एंड नेविस पैट्रियट्स। महिलाओं की तीन टीम होंगी। नाम हैं- ट्रिनबागो, बारबाडोस और गुयाना।

रिपोर्ट के मुताबिक इस टूर्नामेंट के नियम काफी अलग हैं। 20 ओवर का गेम होगा। हरेक टीम को 10-10 ओवर यानी 60 गेंद खेलने को मिलेंगे। शुरुआती 30 गेंद एक छोर से फेके जाएँगे। इसके बाद अगली 30 गेंद दूसरी छोर से। एक गेंदबाज पारी में अधिकतम 2 ओवर ही कर सकेगा। 6 विकेट गिरने पर टीम ऑल आउट मानी जाएगी। अनिवार्य पावरप्ले केवल 2 ओवर का होगा। लेकिन इन 12 गेंद में यदि कोई टीम दो छक्के लगा देती है तो वह तीसरा पावर प्ले भी ले सकती है। अतिरिक्त पावर प्ले 3 से 9 ओवर के बीच कभी भी लिया जा सकता है।

तय समय के भीतर कोई टीम अपने ओवर पूरी नहीं कर पाई तो आखिर के 6 गेंदों में उसे एक फील्डर भी कम करना होगा। गेम को रोचक बनाने के लिए मिस्ट्री-फ्री हिट रखा गया है। इसके तहत फैंस एक तय समय पर वोट करेंगे। इस दौरान बल्लेबाज आउट नहीं होगा।

वेस्टइंडीज क्रिकेट के अध्यक्ष रिकी स्केरिट ने कहा है, “6IXTY सीपीएल और सीडब्ल्यूआई के घनिष्ठ संबंधों से निकला है। यह आगे का रास्ता है। मैं प्रशंसकों के लिए लाए जा रहे इस इनोवेशन, उत्साह और मनोरंजन को लेकर उत्साहित हूँ।” सीपीएल के सीईओ पीट रसेल का मानना है कि टी10 टूर्नामेंट क्रिकेट प्रेमियों को खेल के और करीब लाएगा।