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‘कु&*% की औलाद, तू जल्द मारा जाएगा’ : नुपूर शर्मा का समर्थन करने वाले डच सांसद को कट्टरपंथियों की धमकी, कहा- गर्दन काट मीनार पर लटकाएँगे

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी करने के मामले पर नुपूर शर्मा के साथ खड़े लोगों में एक सबसे बड़ा नाम डच सांसद रॉबर्ट गीर्ट वाइल्डर्स का है। गीर्ट ने बीते दिनों ट्वीट करके खुलेआम नुपूर शर्मा के बयान पर उन्हें समर्थन दिया। मगर, अब इसी समर्थन के कारण उन्हें धमकियाँ आने लगी हैं। संदेशों में उन्हें कहा गया है कि उनके खिलाफ फौज तैयार कर ली गई है जो जल्द ही उनका सिर तन से जुदा करेगी।

इन धमकियों की जानकारी गीर्ट वाइल्डर्स ने अपने ट्वीट में दी। उन्होंने लिखा, “…तो बहादुर नुपूर शर्मा को समर्थन देने के बदले मुझे ये सब मिल रहा है। सैंकड़ों मौत की धमकियाँ। ये सब मुझे और भी ज्यादा गर्व महसूस कराता है कि मैंने नुपूर को समर्थन दिया। शैतान कभी नहीं जीतेगा। कभी नहीं।” इस ट्वीट में गीर्ट वाइल्डर्स ने एक बार फिर #Isupportnupursharma टैग का प्रयोग किया और साथ में कट्टरपंथियों की धमकियों के कुछ स्क्रीनशॉट भी लगाए।

एक स्क्रीनशॉट में कट्टरपंथी बंदूक के साथ सेल्फी लेता दिखा और कहा, “कु&*% की औलाद तुझे जल्दी मारा जाएगा। हम तुम्हें लोगों में डर बनाने के लिए वो चिह्न बनाएँगे जिसे लोग याद रखेंगे।”

एक धमकी में लिखा है, “इंशाल्लाह, एक दिन आएगा जब मैं अपनी कतार से तुम्हारा सिर काटूँगा और पाकिस्तान की मीनार पर टाँग दूँगा, तब हम नारेबाजी करेंगे। मुमताज कादरी चला गया है लेकिन उसकी बंदूक अब भी यही हैं। तुम्हारे पास ज्यादा दिन नहीं बचे हैं।”

एक कट्टरपंथी ने बंदूक की फोटो शेयर कर लिखा, “मैं आ रहा हूँ मा*&^%”

अगले कट्टरपंथी ने लिखा, “अपनी मौत के लिए तैयार हो जा शैतान, तू जल्द ही हमारे गाजी से मिलेगा और गर्दन अलग होगी तब परिणामों को देखेगा। फौजें तैयार हो गई हैं और तुझे मारने के लिए रास्ते पर हैं।”

बता दें कि पैगंबर मोहम्मद से जुड़े मामलों में अपना पक्ष साफ रखने वाले हॉलैंड सांसद गीर्ट वाइल्डर्स ने भारत में फैलाई गई हिंसा को लेकर भी इससे पहले बयान दिया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “केवल अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा का उपयोग करते हैं। असहिष्णु के प्रति सहिष्णु होना बंद करो। हम जीवन को संजोते हैं, वे मृत्यु को संजोते हैं।” उन्होंने नूपुर शर्मा को समर्थन देने का आह्वान करते हुए कहा था कि अभिव्यक्ति की आजादी की कीमत होनी चाहिए। वह बोले थे, “हम आजादी का समर्थन करते हैं। साहसी नूपुर शर्मा हमारी ताकत की प्रतीक हैं। उसका समर्थन करो!”

शिवलिंग अपमान मामला: सबा नकवी के समर्थन में महिला पत्रकारों के संगठन ने जारी किया बयान, विरोध में उतरीं संस्था की ही मेंबर्स

देश में ईशनिंदा को लेकर चल रहे विवाद के बीच भारतीय महिला प्रेस कोर की सदस्य कई महिला पत्रकारों ने विवादित पत्रकार सबा नकवी का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। इन महिला पत्रकारों का कहना है कि वे भी IWPC की सदस्य हैं, लेकिन कोर ने उनसे सलाह लिए बिना ही ये बयान जारी किया है और वे सबा द्वारा हिंदू धर्म का अपमान करने के कृत्य का समर्थन नहीं करती हैं।

शुक्रवार (10 जून 2022) को भारतीय महिला प्रेस कॉर्प्स ने एक बयान जारी कर दिल्ली पुलिस द्वारा सबा नकवी के खिलाफ अशांति पैदा करने के इरादे से झूठी सूचना को बढ़ावा देने के आरोप में दर्ज किए गए केस की निंदा की थी। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने नूपुर शर्मा, नवीन कुमार जिंदल, मौलाना नदीम, असदुद्दीन ओवैसी, यति नरसिंहानंद सरस्वती और कई अन्य सहित हिंदू धर्म और इस्लाम पर विभिन्न टिप्पणियाँ करने के मामले में केस दर्ज किया है। इन्हीं लोगों में से एक हैं सबा नकवी।

दिल्ली पुलिस द्वारा केस दर्ज करने पर IWPC ने कहा था, “भारतीय महिला प्रेस कॉर्प्स स्तब्ध है। हमारी मेंबर और वरिष्ठ पत्रकार सबा नकवी के खिलाफ उनके पोस्ट के लिए केस दर्ज करने के मनमाने तरीके से चिंतित है। ऐसा लगता है कि सेलेक्टिव तरीके से लोगों को उनके विचारों के लिए टार्गेट किया जा रहा है। ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। समय-समय पर हमने देखा है कि सब्जेक्टिव आधार पर लोगों का अनुचित उत्पीड़न किया जाता है। हम उम्मीद करते हैं कि कानूनी व्यवस्थाएँ और अधिक विवेकपूर्ण होगी। हम दिल्ली पुलिस की एफआईआर को वापस लेने और अदालत में इसे रद्द करने की प्रक्रिया शुरू करने की माँग करते हैं।”

IWPC के बयान को सबा नकवी ने ट्विटर पर पोस्ट किया।

लेकिन अब संगठन के ही कई मेंबरों ने इससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पत्रकार आशा खोसा ने ट्वीट किया कि वह IWPC प्रबंधन समिति की एक निर्वाचित सदस्य हैं और वो सबा नकवी के इस बयान का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने ट्वीट में हैशटैग #NotInMyName जोड़ते हुए कहा, “जबकि सबा एक महत्वपूर्ण सहयोगी हैं मैं भगवान शिव पर उनके घृणित बयानों का समर्थन नहीं करती और अपमानित महसूस करती हूँ।”

इसी तरह से एक अन्य पत्रकार चित्रा नारायणन ने कहा कि सबा के खिलाफ केस दर्ज करने की जरूरत नहीं थी, लेकिन एक सदस्य के रूप में बिनी किसी सलाह या चर्चा के यह बयान जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि एक पत्रकार निकाय के रूप में IWPC को सभी सदस्यों से समान रूप से अरुचिकर/आग लगाने वाले कंटेंट पोस्ट न करने का अनुरोध करना चाहिए।

वहीं टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार भारती जैन ने ट्वीट किया कि वह भी इस बयान का समर्थन नहीं करती हैं। उन्होंने लिखा, “कानून को अपना काम करने दें। #NotInMyName।”

IWPC की ही एक अन्य निर्वाचित सदस्य मोना पार्थसारथी ने भी अपने आपको इस बयान से अलग कर लिया और कहा कि उन्होंने कभी भी इस बयान का समर्थन नहीं किया।

टीओआई की लक्ष्मी अय्यर, एएनआई की पायल मेहता, अदिति कपूर और कई अन्य सहित कई अन्य महिला पत्रकारों ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए। IWPC की सदस्य लेखक और पत्रकार संध्या जैन ने बताया कि ‘एकतरफा बयान’ से कितनी महिला पत्रकार परेशान हैं। उन्होंने कहा कि यह बिना किसी जानकारी या चर्चा के जारी किया गया था। कुछ IWPC मेंबर्स ने सबा नकवी के हिंदूफोबिक ट्वीट की निंदा की और खुद को उनके बयान से अलग कर लिया।

उल्लेखनीय है कि सबा नकवी ने ज्ञानवापी विवाति ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग का मजाक उड़ाते हुए यह साबित करने की कोशिश की कि वो एक फव्वारा है न कि शिवलिंग। इसी को लेकर उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। उन्होंने 18 मई 2022 को भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की एक तस्वीर साझा की थी, जिसके कैप्शन में लिखा था, “भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में खोजा गया विशाल शिवलिंग।” विवाद बढ़ने पर कुतर्क दिया कि ये उन्हें किसी ने व्हाट्सएप पर फॉरवर्ड किया था। बाद में नकवी ने अपनी पोस्ट को डिलीट कर दिया था।

इस मामले में नकवी के खिलाफ एफआईआर पर IWPC के अलावा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने भी आपत्ति जताई है। निकाय ने दावा किया कि सबा ने जो किया वो ईशनिंदा नहीं था।

सेना भर्ती की तैयारी कराते हैं भल्लू गुर्जर, करौली हिंसा में राजस्थान पुलिस ने डाला था जेल में: बताया – कस्टडी में था, फिर भी कर दी आगजनी की FIR

राजस्थान के करौली में 2 अप्रैल 2022 (शनिवार) को हिन्दू नववर्ष पर निकली शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ के हमले के बाद हिंसा भड़क गई थी। इस हमले में कई हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज किया था जिसके बाद दोनों पक्षों के लोगों को गिरफ्तार किया गया था। हमले का मास्टरमाइंड मतलूब अहमद बताया गया था। साथ ही इसके तार PFI से जुड़े बताए गए थे। ऑपइंडिया ने 10 जून 2022 (शनिवार) को इस घटना पर वर्तमान हालातों की जानकारी ली।

पूछताछ के लिए बुलाया फिर कर लिया गिरफ्तार

इस घटना में जेल से 44 दिनों बाद छूट कर आए भल्लू सिंह गुर्जर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया, “मैंने कुछ गलत किया ही नहीं था इसलिए मैं कहीं भागा नहीं था। हम खुद ही पीड़ित थे। मेरे पास पुलिस वाले पूछताछ के नाम पर 3 अप्रैल 2022 को आए और मुझे ले कर कोतवाली गए। 1 पूरा दिन मुझ से कुछ पूछा ही नहीं गया। 5 अप्रैल को पुलिस वालों ने मेरा फोन जमा कर लिया और मुझ से रैली में शामिल लोगों के बारे में पूछताछ की। मैंने सिर्फ रैली में शामिल हिन्दू सेना के प्रदेश अध्यक्ष साहब सिंह गुर्जर का नाम बताया। पर मेरी कोई बात मानी ही नहीं गई।”

SHO के नीचे का प्रशासन काफी अच्छा था पर ऊपर के अधिकारी नहीं

भल्लू सिंह गुर्जर ने आगे बताया, “थाने में हमारे साथ कोई मारपीट नहीं की गई। TI से नीचे का पुलिस स्टाफ काफी अच्छा था। उन्होंने हमारा ध्यान रखा। लेकिन ऊपर के अधिकारी उतने ही बुरे। खास तौर पर वो अधिकारी जो जाँच कमेटी के साथ बाहर से आए थे। असल में उन्हें कॉन्ग्रेस सरकार ने भेजा था।”

3 दिनों तक रखा कस्टडी में

भल्लू गुर्जर के आगे कहा, “हमें 3 अप्रैल को ले जाया गया और 6 अप्रैल को जेल भेजा गया। ऑन रिकार्ड पुलिस ने मेरी गिरफ्तारी 4 अप्रैल को दिखाई है। मेरे CCTV में बस 15 दिनों की फुटेज आती है इसलिए शायद मेरे पास मेरी गिरफ्तारी का वीडियो सबूत न मिल पाए। लेकिन थानों के अंदर लगे कैमरों से सबूत मिल जाएगा। जबकि पुलिस को बिना अदालत को बताए किसी को भी 24 घंटे से ज्यादा कस्टडी में रखने का अधिकार नहीं है।”

इधर मैं कस्टडी में, उधर मुझ पर ही आगजनी की FIR

भल्लू सिंह गुर्जर ने आगे बताया, “3 अप्रैल, 2022 को शाम 5 बजे पुलिस मुझे कटड़ी में ले चुकी थी। जब मैं थाने में था तब उसी दिन रात 10 बजे रिहान नाम के एक व्यापारी की दुकान में आगजनी हुई। इस आगजनी की भी FIR पुलिस ने मुझ पर ही कर दी। जबकि मैं उस समय उसी पुलिस की कस्टडी में था। मैं आज भी उस झूठे मुकदमे को झेल रहा हूँ।”

मेरे साथ कुल 8 हिन्दू भेजे गए थे जेल

भल्लू सिंह ने आगे बताया, “मेरे साथ कुल 8 हिन्दू जेल भेजे गए थे। उनके नाम वीरेंद्र बैंसला, गजेंद्र सिंह गुर्जर, रविंद्र जाट, पुष्पेंद्र मुद्गल, विपिन शर्मा, राजा पराशर, नीरज योगी है। बाद में भी कुछ हिन्दू जेल आए। जेलर और डिप्टी जेलर का व्यवहार हमारे लिए ठीक रहा। इसके अलावा जेल के बाकी स्टाफ में जातिवाद हो रहा था। भाजपा सांसद किरोड़ी लाल मीणा एक बार और मनोज राजौरिया 2 बार जेल में मिलने आए। इस से हम लोगों को काफी सपोर्ट मिला। भाजपा ने हमारी काफी मदद की।”

बेहद घटिया था जेल का खाना

भल्लू सिंह ने आगे बताया, “जेल का खाना काफी बेकार था। मैं लगभग 44 दिनों तक जेल में रहा। मेरी जमानत में भी हिन्दू संगठनों ने काफी सहयोग किया। जिले की अदालत में ख़ारिज होने के बाद मेरी जमानत हाईकोर्ट से हो पाई थी। हमारे साथ मुस्लिम आरोपित भी जेल में बंद थे लेकिन उनकी बैरकें अलग थीं। उनकी संख्या लगभग 19 थी। उनसे मिलने कौन-कौन आया ये हम नहीं जान पाए। हालाँकि सबको मिली सुविधाएँ एक जैसी थीं। जेल में कोई वाद-विवाद नहीं हुआ। मुस्लिम आरोपितों को हमारी तरफ आने नहीं दिया जाता था।”

भल्लू सिंह गुर्जर ने खुद को धार्मिक प्रवृत्ति का बताया। स्थानीय कैला देवी धाम आने वाले देश भर के श्रद्धालुओं का वो अपनी यथाशक्ति रहने आदि का इंतजाम भी करते हैं। हिंसा से ठीक पहले 29 मार्च, 2022 को उन्होंने कई श्रद्धालुओं के रहने की व्यवस्था अपने पते पर करवाई थी।

कैलादेवी के दर्शन करने आए गरीब श्रद्धालु भल्लू सिंह के ऑफिस पर

जेल से छूटने के बाद कोई धमकी या दबाव नहीं

भल्लू सिंह गुर्जर ने बताया, “मैं 19 मई 2022 को जेल से छूट कर आया। तब से अब तक मुझे किसी प्रकार की धमकी या कोई दबाव नहीं आया। तब से आराम से हूँ। थाने में फोन लेने गया था तब पुलिस वालों ने कहा कि कुछ दिन शाँत रहना। हालाँकि मैंने उनसे कहा कि हम पहले से शाँत है। हमें हमारा फोन वापस मिल गया। फोन में कोई छेड़छाड़ नहीं हुई थी। पुलिस वालों का व्यवहार भी संतोषजनक था।”

3 हिन्दू बनाए गए मुख्य आरोपित

भल्लू सिंह ने बताया, “हमारे केस में हिन्दुओं की तरफ से 3 लोग मुख्य आरोपित बनाए गए हैं। इनके नाम साहिब सिंह, राजाराम गुर्जर और नीरज शुक्ला हैं। ये तीनों फिलहाल अभी नहीं पकड़े गए हैं। इसके अलावा हिन्दुओ की तरफ से कई अन्य लड़के फरार चल रहे हैं। मेरे साथ जेल गए सभी 8 लोग जमानत पा चुके हैं। इसी केस में मुस्लिमों की तरफ से जो जेल गए थे वो भी छूट चुके हैं।”

टूट चुका कारोबार फिर से खड़ा करने की कोशिश में हूँ

भल्लू सिंह ने बताया, “मैं पुलिस और सेना में भर्ती के दौरान फिजिकल टेस्ट की तैयारी करवाता हूँ। इसके लिए मैंने 40 हजार रुपए प्रतिमाह पर हॉस्टल ले रखा है। कोचिंग का नाम चेतक डिफेन्स अकादमी है जो 3 साल से चल रही है। साथ ही स्टाफ का खर्च भी अलग। मेरे सेंटर से तैयारी कर के निकले कई लड़के दिल्ली पुलिस, राजस्थान पुलिस, सेना और पैरामिलिट्री में पोस्टेड हैं। मेरी फीस बस 6 हजार रुपए प्रतिमाह है जिसमें कैंडिडेट का रहना, खाना और तैयारी फीस शामिल हैं।”

भल्लू सिंह गुर्जर अपने अकादमी में ‘भारत माता की जय’ के नारों के साथ अभ्यर्थियों के दिन की शुरुआत करवाते हैं।

भल्लू गुर्जर के मुताबिक, “मेरी अकादमी का नाम चेतक डिफेन्स अकादमी है जो 3 साल से चल रही है। इस पूरे विवाद के बाद लगभग 2 माह तक मेरे कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा। कई लड़के मेरे केस की वजह से मेरे हॉस्टल से चले गए। इसके चलते मुझे आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा। पहले मेरे यहाँ सीटें फुल रहा करती थीं। फ़िलहाल मैं कोशिश कर के अपने टूट चुके उसी कारोबार को फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहा हूँ।”

‘हम प्रसाद बाँटने वाले लोग, मजबूर किया तो सड़क पर उतरेंगे’: जुमा हिंसा पर बोले काशी के संत- जिस-जिस मस्जिद से पत्थर चले, सबको सील करो

भाजपा से निलंबित नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के पैगंबर मुहम्मद (Prophet Muhammad) को लेकर दिए गए बयान के विरोध में शुक्रवार (10 जून 2022) को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के खिलाफ शनिवार (11 जून 2022) को वाराणसी में काशी धर्म परिषद (Kashi religious Council) की बैठक हुई। इस दौरान जुमे की हिंसा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। संतों ने माँग की कि जिस भी मस्जिद से पत्थर चले थे, उसे पूरी तरह से सील किया जाए।

संतों की बैठक सुदामा कुटी हरतीरथ में पातालपुरी मठ के महंत बालक दास की अध्यक्षता में हुई। संतों ने इस्लामिक कट्टरपंथियों की हिंसा के खिलाफ 16 प्रस्तावों को पास किया। संतों ने एक सुर में कहा कि भारत में किसी भी तरह से तालिबानी मानसिकता को फैलने नहीं दिया जाएगा। धर्म परिषद में नूपुर शर्मा को रेप और हत्या की धमकी देने वालों को भी जेल भेजने की माँग की गई।

ऑपइंडिया से बात करते हुए महंत बालक दास ने कहा, “काशी में इस तरह की कोई घटना न घटे, इसको लेकर शांति की अपील की गई है। लेकिन, ये सोचने का विषय है कि आखिर जुमे की नमाज में ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है कि वहाँ से निकलते ही लोग उतने उग्र हो जा रहे हैं। 15-16 साल के उन्मादी लड़के पत्थरबाजी कर रहे हैं।”

उन्होंने इसके पीछे के उद्देश्यों पर आशंका जताते हुए कहा, “विरोध के नाम पर हिंसा कोई एक शहर नहीं, ऐसा कई शहरों में हो रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि नूपुर शर्मा के बहाने ये लोग देश में अशांति फैलाने के लिए कुछ और तैयारी कर रहे हों?”

महंत ने आगे कहा, “नूपुर शर्मा ने तो माफी माँग लिया, लेकिन ये लगातार हमारे भगवान को अपमानजनक शब्द कह रहे हैं। नूपुर शर्मा ने वही बोला है, जो जाकिर नाइक ने बोला था। बैठक में हम लोगों ने ये निर्णय लिया है कि अगर दोबारा ऐसा कुछ होता है तो संत समाज कानूनी कार्रवाई करेगा। हम लोग पत्थर तो चला नहीं सकते, हम लोग तो प्रसाद बाँटने वाले लोग हैं। लेकिन, अगर मजबूर किया गया तो हमको सड़क पर उतरना ही पड़ेगा।”

पारित किए गए प्रस्ताव

बैठक में कट्टरपंथी नमाजियों की संपत्ति जब्त करने, उकसाने वाले संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने, पथराव करने या कराने वाली मस्जिदों को सील करने, ज्ञानवापी से जुड़े मुस्लिम अफसर बाबा को सुरक्षा देने, नूपुर शर्मा को धमकी देने वालों पर NSA लगाने, फिल्मों में हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाने वालों को जेल भेजने, नफरत फैलाने वाले मौलानाओं को गिरफ्तार करने, हर मस्जिद में सीसीटीवी कैमरा लगाने की माँग की गई।

इसके अलावा, इस्लामिक देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंधों को तोड़ने, शहर स्तर पर संत समाज की इकाई गठित करने और इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा राँची में हनुमान मंदिर में की गई तोड़फोड़ को लेकर निंदा प्रस्तावों को पारित किया गया।

नूपुर शर्मा की तस्वीर पर मुस्लिम बच्चों ने किया पेशाब, चेहरे पर फाँसी के फंदे का निशान: वीडियो देख लोगों को याद आए ‘ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप’

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मुस्लिम बच्चों को भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे ये मुस्लिम बच्चे हँसते और ठहाके लगाते हुए नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब कर रहे। इन वीडियोज को देख कर लोग ‘शौर्य (2008)’ फिल्म में ‘ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप सिंह’ के डायलॉग को याद कर रहे हैं। इस किरदार को अभिनेता केके मेनन ने निभाया था।

सोशल मीडिया पर ‘द प्लाकार्ड गाय’ नाम से मशहूर मधुर ने इस वीडियो को शेयर किया। इस वीडियो में नूपुर शर्मा की तस्वीर पर उनके चेहरे के सामने फाँसी का फंदा बना हुआ देखा। साथ ही उनकी तस्वीर पर क्रॉस का निशान भी लगाया हुआ है। इस दौरान आसपास मौजूद लोग उन बच्चों को उत्साहित करते हुए सुनाई देते हैं और सब हँसी-ठहाके लगाते रहते हैं। हालाँकि, फ़िलहाल ये स्पष्ट नहीं है कि ये वीडियो किस इलाके का है।

ये वीडियो तब सामने आया है, जब प्रयागराज में मुस्लिम भीड़ द्वारा किए गए दंगों में भी नाबालिगों को आगे रखने की घटनाएँ सामने आईं। हिंसक प्रदर्शनों में बच्चों के इस्तेमाल पर ‘राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR)’ ने भी आपत्ति जताई है। पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी का आरोप लगाते हुए मुस्लिम भीड़ ने देश के कई शहरों में जुमे की नमाज के बाद दंगे किए, जिनमें यूपी के प्रयागराज और झारखंड की राजधानी राँची में स्थिति सबसे ज्यादा बिगड़ गई।

इसी तरह नवीं मुंबई में बुर्का पहनी कई महिलाओं के साथ-साथ बच्चियों को भी नूपुर शर्मा के विरोध में प्रदर्शन में शामिल किया गया। बुजुर्गों से लेकर युवा तक सड़कों पर उतर कर माहौल बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। एक वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे तीन युवक खुलेआम नुपूर शर्मा की हत्या की बात बेखौप कर रहे हैं। इन युवकों की उम्र ज्यादा नहीं है लेकिन रील्स में ये कहते सुनाई पड़ते हैं, “जिसने नबी की शान में गुस्ताखी की है। कानून का काम है उसे फाँसी देना और अगर हम इंसाफ पर उतर आए तो हमें आतंकवादी मत कहना।”

‘CM का नाम क्यों… तुम बलि का बकरा हो’: स्वप्ना सुरेश ने जारी किया पूर्व पत्रकार का ऑडियो, केरल गोल्ड स्मलिंग केस में लिया था विजयन का नाम

डिप्लोमैटिक रूट के जरिए विदेशों से सोना की तस्करी करने की स्वप्ना सुरेश (Swapna Suresh) ने शुक्रवार (10 जून 2022) को एक पूर्व विजुअल जर्नलिस्ट शाज किरण (Shaj Kiran) के साथ हुई अपनी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग जारी की। इसमें शाज स्वप्ना को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Kerala CM Pinarayi Vijayan) और उनके परिवार के सदस्यों का नाम लेने को लेकर धमकी दे रहा है। हालाँकि, इस ऑडियो की सत्यता की पुष्टि होनी बाकी है।

बताते चले कि इससे एक दिन पहले यानी गुरुवार (9 जून 2022) को स्वप्ना ने आरोप लगाया था कि कोर्ट में CrPC की धारा 164 के तहत दिए अपने बयान में केरल के सीएम विजयन और उनके परिवार के सदस्यों का नाम लेने के कारण शाज ने उन्हें धमकी दी थी।

स्वप्ना ने इस ऑडियो को पलक्कड़ में जारी किया है। रिकॉर्डिंग के अनुसार, इस बातचीत में शाज किरण, पीएस सरित और स्वप्ना शामिल थीं। शाज इसमें सीएम विजयन और मुख्य सचिव कोडियेरी बालकृष्णन को पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताता है, लेकिन बयान में सीएम और उनके परिवार के लोगों का नाम लेने से मना करता है।

स्वप्ना का कहना है कि शाज किरण द्वारा धमकी देने के बाद उन्होंने इस बातचीत को रिकॉर्ड किया है। स्वप्ना ने कोर्ट में कहा था कि इस मामले में राज्य के मुख्यमंत्री विजयन, पत्नी कमला और बेटी वीणा भी शामिल हैं। इसके अलावा उनके पूर्व प्रमुख सचिव एम. शिवशंकर, उनके अतिरिक्त निजी सचिव सी.एम. रवींद्रन, पूर्व नौकरशाह नलिनी नेट्टो और पूर्व मंत्री के.टी. जलील की संलिप्तता के बारे में भी बताया था।

रिकॉर्डिंग में शाज स्वप्ना से कहता है कि इसमें सीएम की बेटी वीणा को घसीटने की क्या जरूरत थी। इस पर पीएस सरित कहता है कि वह लड़ाई लड़ेगा। फिर शाज कहता है कि लड़ाई लड़ने से फायदा क्या है, इसमें पहला व्यक्ति सीएम हैं।

बता दें कि स्वप्ना ने आरोप लगाया था कि कोर्ट में सीएम और उनके परिवार का नाम लेने के कारण इस तस्करी कांड के प्रथम आरोपित पीएस हरित का उनके अपार्टमेंट से अपहरण कर लिया गया है। पुलिस के रूप में चार लोग आए उसे उठा ले गए।

ऑडियो जारी करने के दौरान स्वप्ना ने आरोप लगाया कि सीएम पिनाराई विजयन और कोडियेरी बालकृष्णन के फंड को बिलीवर्स चर्च के जरिए भेजा जा रहा है। बिलीवर्स चर्च एक प्रोटेस्टेंट चर्च है, जो FCRA के उल्लंघन के आरोप में सवालों के घेरे में है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि शाज ने पहले कहा था कि उसकी पत्नी इस चर्च में काम करती थी।

द न्यूज मिनट के अनुसार, बातचीत के दौरान शाज स्वप्ना से कहता है कि इसके बाद अब कोई भी खुलासा नहीं करने के लिए कहता है। वह कहता है कि हीरो बनने की क्या जरूरत है। शिवशंकर (स्मगलिंग मामले में जेल में बंद सीएम के प्रमुख सचिव) को सजा मिले या ना मिले, इससे तुम्हें क्या? या तुम्हें कुछ फायदा हो तो बोलो।

इसके बाद स्वप्ना पूछती है किससे पैसे लूँ? इस पर शाज कहता है कि ‘तुम्हारे बयान से जिसको नुकसान हुआ है उससे लो’। तुम्हें उस अपराध के लिए जेल गई, जो तुमने किया ही नहीं। उसका मुआवजा माँगो। शाज कहता है, “कोई तुम्हें इस्तेमाल करके पैसे कमा रहा है। वह जानता है कि गेम कैसे खेला जाता है। तुम सिर्फ बलि का बकरा हो।”

ऑडियो जारी करने के दौरान स्वप्ना ने आरोप लगाया कि 164 बयान देने के बाद शाज ने उससे मिलने के लिए कहा था। इसके बाद वह 7 जून को अपने बेटे के साथ उसके द्वारा बताई गई जगह पर मिली। इस दौरान इब्राहिम नाम का एक अन्य व्यक्ति था, जो शाज ​​का दोस्त बताया गया।

स्वप्ना के अनुसार, शाज ने भी उसे चेतावनी दी थी कि सरित को उठा लिया जाएगा और अगले दिन वही हुआ। स्वप्ना ने यह भी आरोप लगाया कि शाज ने उससे कहा था कि उसे पता होना चाहिए कि उसने किसके साथ खिलवाड़ किया है। उसने चेतावनी दी थी कि बयान में अपनी बेटी का नाम पिनाराई कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

सरित के अपहरण से घबराई स्वप्ना ने शाज को अगले दिन 8 जून को पलक्कड़ के HRDS इंडिया कार्यालय में मिलने के लिए बुलाया और वहीं पर बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग कर ली। स्वप्ना ने कहा, “मैंने उसे मदद लेने के लिए बुलाया था और उसे फंसाने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन शाजी ने मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।”

मुस्लिम मर्द-औरत-नाबालिग हर कोई नुपूर शर्मा पर बना रहा जहरीले Reels, मरने-मारने की बातें: इस जहर का इलाज क्या

ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग के लगातार अपमान के बाद नुपूर शर्मा द्वारा ऑन टीवी पैगंबर मोहम्मद पर किए गए सवाल से कट्टरपंथी हर जगह भड़के हुए हैं। नुपूर शर्मा को मारने के लिए चर्चा सोशल मीडिया पर खुले आम हो रही है। जुमे की नमाज के बाद पिछले दो शुक्रवारों से हिंसा जारी है। बुजुर्गों से लेकर युवा तक सड़कों पर उतर कर माहौल बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जम्मू-कश्मीर में तो एक फैसल खान ने नुपूर शर्मा का सिर काटते हुए वीडियो भी दिखा दी। वहीं समुदाय के अन्य युवक भी हर माध्यम से नुपूर शर्मा को सजा देने की माँग कर रहे हैं। उन्हें मौत की धमकी दे रहे हैं। औरतें भी मरने-मारने की बातें कर रही हैं।

एक वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे तीन युवक खुलेआम नुपूर शर्मा की हत्या की बात बेखौप कर रहे हैं। इन युवकों की उम्र ज्यादा नहीं है लेकिन रील्स में ये कहते सुनाई पड़ते हैं, “जिसने नबी की शान में गुस्ताखी की है। कानून का काम है उसे फाँसी देना और अगर हम इंसाफ पर उतर आए तो हमें आतंकवादी मत कहना।”

एक अन्य वीडियो में महिला चिल्लाते हुए दिखती है और मरने की बात कहती है। युसूफ कलीम के अकॉउंट से शेयर वीडियो में महिला बोलती है, “मैं मरने के लिए तैयार हूँ, मेरी बच्ची मरने के लिए तैयार है। मुझे कोई फर्क नहीं है। ला इलाहा इल इल्लाह। अल्लाह-हू-अकबर।” इसके बाद वो वीडियो में ‘वो नबी हैं। वो नबी हैं।’ कहकर चिल्लाने लगती है।

इसी तरह कई अन्य पोस्ट में नुपूर शर्मा की फोटो पर क्रॉस का चिह्न लगाकर उन्हें मारने की अपील की जा रही है।

हैदर अली नाम के यूजर की वीडियो सामने आई है। वीडियो में वह भीड़ के प्रदर्शन को दिखाकर यह कहता नजर आ रहा है दुनिया देख ले मुस्लिम अपने पैगंबर से कितना प्यार करते हैं। कथिततौर पर यह वीडियो बिहार की है।

पत्रकार उसामा हजारी ने भी एक वीडियो शेयर की है। इसमें वह इस्लामी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं जिसमें कट्टरपंथी खिलाफत की माँग कर रहे हैं।

फैसल खान की गिरफ्तारी

गौरतलब है कि नुपूर शर्मा को मारने की वीएफएक्स वीडियो बनाने वाले फैसल खान को हाल में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। उसने अपनी वीडियो में नुपूर का सिर कलम करके उनका सिर फेंकते हुए दिखाया था। पुलिस ने फैसल के विरुद्ध आईपीसी की धारा 505 और 506 के तहत केस दर्ज किया था। जिसके बाद उसने बयान जारी कर कहा था, “ये सच है कि मैंने एक आपत्तिजनक वीडियो बनाया था। लेकिन मेरा मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं था। अगर किसी को भी मेरी वजह से कोई भी तकलीफ पहुँची हो तो मैं तहेदिल से माफी माँगता हूँ।”

कश्मीर का यूट्यूबर फैसल वानी गिरफ्तार, कुल्हाड़ी से नुपूर शर्मा का सिर काटने वाला Video बनाया था

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यूट्यूबर फैसल वानी को गिरफ्तार कर लिया है। उसने नुपूर शर्मा का सिर कलम करने वाले वीडियो बनाया था। उसे शनिवार (11 जून 2022) को श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया। वीडियो वायरल होने के बाद से उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग हो रही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फैसल पर श्रीनगर के सफा कदल पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 505 और 506 के तहत केस दर्ज किया गया है। इससे पहले फैसल ने अपने पुराने ट्वीट और वीडियो डिलीट कर माफी माँगते हुए कहा था, “ये सच है कि मैंने एक आपत्तिजनक वीडियो बनाया था। लेकिन मेरा मकसद हिंसा को बढ़ावा देना नहीं था। अगर किसी को भी मेरी वजह से कोई भी तकलीफ पहुँची हो तो मैं तहेदिल से माफी माँगता हूँ।”

फैसल वानी यूट्यूबर होने के साथ-साथ जिम भी चलाता है। उसके यूट्यूब चैनल का नाम ‘डीप पेन फिटनेस’ है। नूपुर शर्मा का सर कलम करने वाले वीडियो में उसने हाथों में कुल्हाड़ी ले रखी थी। वीडियो में वह कहता है, “नो ऐक्शन, नो वॉरंट… सिर्फ और सिर्फ गुस्ताख-ए-रसूल की एक सजा… सर कलम।” इसके बाद वीडियो में ग्राफिक्स के जरिए बनाई गई नूपुर शर्मा की तस्वीर में वह कुल्हाड़ी से गर्दन काट देता है। इसके बाद घृणा के साथ उस कटे गर्दन को उठाता है और दूर फेंक देता है।

वीडियो में वानी तुर्की की इस्लामिक प्रोपेगेंडा सीरीज ‘एर्तुगरुल गाजी’ का म्यूजिक बैकग्राउंड में इस्तेमाल करता है। गाजी के बारे में सीरीज में कहा गया है कि उसने ईसाइयों और अन्य काफिरों को हराकर ऑटोमन साम्राज्य (इस्लामी उस्मानिया सल्तनत) की नींव रखी थी। यह सीरीज पाकिस्तान में खूब प्रचलित हुआ था।

अपने माफीनामा वीडियो में फैसल वानी ने कहा था, “कल रात को मैंने एक वीडियो अपलोड किया था, जो नूपुर शर्मा के बारे में था और VFX से बनाया था। वो वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो गया। इसकी वजह से मैं ‘बेगुनाह’ फँस गया। मेरा कोई भी इंटेंशन (इरादा) नहीं होता है कि मुझे किसी दूसरे धर्म को हर्ट (ठेस पहुँचाऊँ) करूँ, क्योंकि हमारा इस्लाम हमें सिखाता है कि दूसरे धर्म की रेस्पेक्ट (आदर) करो।”

‘पुलिस गोली नहीं तो क्या *** मारेगी? गुंडई का एक ही इलाज – ठुकाई’: पूर्व DGP ने दंगाइयों की पिटाई पर प्रलाप करने वालों को लताड़ा

झारखंड के राँची और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में दंगाई मुस्लिम भीड़ ने जम कर उत्पात मचाया, जिसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। कुछ ऐसे वीडियो-तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें पुलिस को भी दंगाइयों पर बल प्रयोग करते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, इस पर कई लोगों ने आपत्ति जताई है। ऐसे लोगों को केरल के पूर्व DGP एनसी अस्थाना ने खरी-खरी सुनाई है। उन्होंने कहा कि हिंसा करने वालों का ऐसा ही इलाज होना चाहिए। जामताड़ा के कॉन्ग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने भी दंगाइयों की मौत की निंदा करते हुए उनके परिवार के लिए मदद का ऐलान किया

उन्होंने प्रयागराज की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि ये किसी नृत्य प्रतोयोगिता की फोटो नहीं है, बल्कि बाकि ये वो डांस है जो पुलिस की लाठी पड़ने पर किया जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें उस दिन पर अफ़सोस है, जब पुलिस को पॉलीकार्बोनेट पाइप्स दिए गए। CRPF और BSF के ADG रहे IPS अधिकारी ने कहा कि तेल में डुबो कर बाँस की लाठी से गुंडों को डांस करवाने का पुराना तरीका ही इससे अच्छा हुआ करता था।

उन्होंने कहा, “कुछ लिब्बू विलाप रहे हैं कि राँची में पुलिस ने दो प्राणियों को गोली मार दी। अरे, भैया, पुलिस गोली नहीं तो क्या *** मारेगी? अब वैसा कर दे तो बेवजह पुलिस के चरित्र पर आक्षेप होगा। इसीलिए गोली से संतुष्ट रहें। इसे स्पष्ट रूप से समझ लीजिए। शांतिपूर्व विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकार है, लेकिन पत्थरबाजी नहीं। ऐसा कोई कानून नहीं है जो कहता हो कि पुलिस ऐसी परिस्थितियों में सिर्फ आँसू गैस और वॉटर केनंस वगैरह का ही इस्तेमाल करने को मजबूर है।”

उन्होंने कहा कि कई जजमेंट पुलिस को गोली चला कर मारने की अनुमति भी देते हैं, अगर उस परिस्थिति में उसे ये ठीक लगता हो। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज पुलिस द्वारा दंगाइयों की पिटाई का वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “अत्यंत ही मनोहारी दृश्य! सुन्दर, अतीव सुन्दर! हेकड़ी ऐसे ही निकलती है!” प्रयागराज में दंगाइयों की पुलिस द्वारा पिटाई के एक अन्य वीडियो को उन्होंने सुंदर दृश्य बताते हुए कहा कि जब पुलिस ने मामले दर्ज किए हैं तो कानून को अपना काम करने देना चाहिए।

उन्होंने कहा, “मामला दर्ज होने के बावजूद विरोध प्रदर्शन पूर्णरूपेण गुंडागर्दी है। ये और कड़ाई से पीटे जाने के लायक हैं। केस हो जाने के बावजूद विरोध प्रदर्शन गुंडई है। पुलिस ने ठीक किया। और ठुकाई करनी थी। गुंडई का एक ही इलाज है – ठुकाई। तब तक ठुकाई, जब तक लोगों को उनकी औक़ात न समझ में आ जाए। जिस विषय पर क़ानूनी प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी हो, उस पर विरोध प्रदर्शन करने का न कोई अधिकार बनता है, न औचित्य.।

उन्होंने कहा कि दबाव डालने की राजनीति का युग चला गया है, इसे लोग जितनी जल्दी समझ लें उतना बेहतर है। 76 वैज्ञानिक रिसर्च पेपर्स और 49 किताबें लिख चुके पूर्व IPS अधिकारी ने कहा कि मोदी-योगी-भाजपा विरोधी दलाल ये साबित करने में लगे हैं कि स्वतः ही देश भर में प्रदर्शन चालू हो गए, लेकिन इसमें विश्वास करने का कोई यकीन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की छवि खराब करने के लिए CAA विरोधी आंदोलन की तर्ज पर ऐसा किया जा रहा है।

जुमे पर हिंसा करने वालों को डच MP ने बताया ‘आतंकवादी’: कहा नूपुर शर्मा ‘साहसी महिला’, असहिष्णु के प्रति सहिष्णु होना बंद करो

भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के नाम पर देश भर में फैलाई गई हिंसा को लेकर हॉलैंड के सांसद रॉबर्ट गीर्ट वाइल्डर्स (Robert Geert Wilders) ने नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा करते हैं।

हॉलैंड की सबसे बड़़ी पार्टी के प्रमुख और वहाँ की संसद में विपक्ष के नेता वाइल्डर्स ने ट्वीट कर कहा, “केवल अपराधी और आतंकवादी अपनी धार्मिक असहिष्णुता और घृणा व्यक्त करने के लिए सड़क पर हिंसा का उपयोग करते हैं। असहिष्णु के प्रति सहिष्णु होना बंद करो। हम जीवन को संजोते हैं, वे मृत्यु को संजोते हैं।”

उन्होंने नूपुर शर्मा को समर्थन देने का आह्वान करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी की कीमत होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “हम आजादी का समर्थन करते हैं। साहसी नूपुर शर्मा हमारी ताकत की प्रतीक हैं। उसका समर्थन करो!”

गीर्ट ने अपने अगले ट्वीट में कट्टरपंथियों द्वारा नूपुर शर्मा को दी गई धमकी का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए लिखा, “यही है, जिसके कारण मैं बहादुर नूपुर शर्मा का समर्थन कर रहा हूँ। जान से मारने की सैकड़ों धमकियाँ। यह मुझे उनका समर्थन करने के लिए और भी अधिक दृढ़ बनाता है। क्योंकि, बुराई कभी नहीं जीत सकती। कभी नहीं।”

इसके पहले डच सांसद गीर्ट वाइल्डर्स (Geert Wilders) ने कहा था कि इस्लाम असहिष्णु है और इसकी विचारधारा दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि भारत से माफी माँगने वाले मुल्क देश बेहद क्रूर शरिया शासन से संचालित होतेे हैं और उनका मानवाधिकार का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब है।

वाइल्डर्स ने कहा कि जो मुल्क अपने यहाँ के अल्पसंख्यकों की हत्या कर देते हैं और उन्हें जेल में डाल देते हैं, वे कानून द्वारा शासित एक लोकतांत्रिक देश से माफी की माँग करते हैं तो यह सबसे बड़ा पाखंड है। उन्होंने कहा कि दुनिया जानती है कि ईरान, कतर, सऊदी अरब जैसे इस्लामिक अपने अल्पसंख्यकों को कितना प्रताड़ित करते हैं। उन्होंने इस्लामिक देशों को सबसे बड़ा पाखंडी बताया।

वाइल्डर्स ने कहा कि नूपुर शर्मा ने जो पैगंबर मुहम्मद को लेकर जो कहा, वह सच है। सभी जानते हैं कि हदीसों में कहा गया है कि पैगंबर मुहम्मद ने जब आयशा से शादी की तब वह सिर्फ 9 साल की थी। उन्होंने कहा कि सच बोलने के लिए धमकियाँ मिलना हास्यास्पद है। भारत को सच बोलने वाली इस महिला पर गर्व करना चाहिए। 

इतना ही नहीं, उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था, “इस्लाम कोई धर्म नहीं है, यह एक विचारधारा है, एक मंद संस्कृति की विचारधारा है।” जून 2018 में वाइल्डर्स ने अपनी पार्टी के संसदीय कार्यालयों में ‘पैगंबर मुहम्मद कार्टून प्रतियोगिता’ की आयोजित कराने की भी घोषणा की थी।