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शिवलिंग को मांस-हड्डी से जोड़ा था सपा के MLC लाल बिहारी यादव ने… यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR

पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की टिप्पणी को लेकर पूरे देश में बवाल जारी है। इसी बीच सपा के एमएलसी लाल बिहारी यादव (SP MLC Lal Bihari Yadav) के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह FIR कानपुर के रायपुरवा थाने में दर्ज कराई गई है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले सपा एमएलसी द्वारा भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने का मामला सामने आया था। सपा एमएलसी पर एक इंटरव्यू में भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी (Controversial comment on Lord Shiva) करने का आरोप है। 

अब कानपुर पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की रिपोर्ट दर्ज की है। सपा नेता के खिलाफ मुकदमा बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी अंकित बाजपेई ने दर्ज कराया है।

पुलिस के मुताबिक सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव के खिलाफ कानपुर के रायपुरवा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। बीजेपी नेता ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता के बयान से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि सपा नेता का बयान सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला है।

गौरतलब है कि लाल बिहारी यादव ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के वारणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को लेकर विवादित बयान दिया था। जब विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को लेकर उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई थी, तो उन्होंने कहा था, “भगवान शंकर आदमी थे या पत्थर? मस्जिद के अंदर मिला पत्थर भगवान शिव की मूर्ति के रूप में होती तो मैं भी मानता कि वह भगवान शिव की मूर्ति है, लेकिन ऐसा नहीं है।” लाल बिहारी के इस बयान पर बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनको पार्टी से बाहर निकालने की माँग की थी।

बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव पर भी हमला किया है। उन्होंने कहा कि सपा के MLC लाल बिहारी यादव की ‘भगवान शिव’ पर चौंकाने वाली घृणित टिप्पणी को लेकर अखिलेश क्या कहेंगे। उन्होंने अखिलेश से सवाल किया कि क्या वो ऐसे गंदे व्यक्ति को पार्टी से निकालेंगे? बता दें कि लाल बिहारी यादव समाजवादी पार्टी में जौनपुर के जिलाध्यक्ष भी हैं। उन्हें अखिलेश यादव का काफी करीबी माना जाता है।

बंगाल में नूपुर शर्मा को समर्थन देने वाली लड़की और उसके पड़ोसियों के घर आगजनी, हावड़ा-मुर्शिदाबाद में फिर दंगा… MLA की गाड़ी पर भी हमला

भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के बयान को लेकर 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद देश के कई हिस्सों में आतंक फैलाया गया। इनमें पश्चिम बंगाल का हावड़ा (Hawada) भी शामिल था। वहीं, अगले दिन शनिवार को भी राज्य के मुर्शिदाबाद (Murshidabad) में कट्टरपंथी दंगाइयों ने उत्पात जारी रखा।

स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल (West Bengal) शासन ने हावड़ा और मुर्शिदाबाद में इंटरनेट सेवाओं को 14 जून तक के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही इलाके में CrPC की धारा 144 लागू कर दी गई है।

वहीं, हावड़ा में भी शनिवार को हिंसा की फिर घटनाएँ हुईं। पंचला बाजार इलाके में  इस्लामी प्रदर्शनकारी ने भाजपा के कार्यालय में तोड़फोड़ की और कई घरों में आग लगा दी। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों पर भी पथराव किया। पथराव के कारण लगभग 12 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने दंगाइयों पर लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागे। इस घटना के दौरान दंगाइयों ने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं, मुस्लिम बहुल दोमजुर इलाके में भी तनाव व्याप्त है।

दंगों में बच्चों को शामिल करने को लेकर विवादित फुरफुरा शरीफ के मौलाना पीरजादा मोहम्मद सनाउल्लाह सिद्दीकी को पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग (WBCPCR) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूछा कि बच्चों की जान को जोखिम में क्यों डाला गया।

इसके साथ ही प्रदर्शन के नाम पर आतंक फैलाने वाले 60 दंगाइयों को हत्या, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और दंगा करने के प्रयास के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, लड़की को कथित तौर पर अपनी सोशल नेटवर्किंग साइट पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसको बहाना बनाकर कट्टरपंथियों ने मुर्शिदाबाद में पथराव और कई घरों में आगजनी की।

लड़की की गिरफ्तारी की माँग के नाम पर दंगाइयों ने ना सिर्फ पुलिस पर पत्थरबाजी की, बल्कि लड़की के घर के साथ-साथ इलाके में रहने वाले अन्य लोगों के घरों पर भी हमला किया और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

इसके अलावा दक्षिण 24 परगना जिले के कुल्पी में भी दंगाइयों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अम्ताला के पास विधायक जोगरंजन हलदर के वाहन पर हमला किया गया।

हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राज्य सरकार ने शनिवार को कई पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रवीण त्रिपाठी, कोलकाता पुलिस की DCP (दक्षिण पश्चिम) स्वाति भंगालिया, हावड़ा सिटी पुलिस आयुक्त सी सुधाकर और हावड़ा (ग्रामीण) की SP सौम्या रॉय शामिल हैं।

भगवान राम ने जिस कोटेश्वर मंदिर की स्थापना की, वहाँ शिवलिंग पर अंडा रखा: वीडियो वायरल होने पर पहुँची UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक मंदिर में शिवलिंग पर अंडा रख कर फोटो वायरल कर दी गई। इसके बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लोगों को शाँत करवाया। मामले में FIR दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी गई है। घटना शुक्रवार (10 जून 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाँ ये घटना घटी, उस स्थान का नाम कोटेश्वर मंदिर है। इस जगह हिन्दू समाज की काफी आस्था है। यह प्रयागराज के शिवकुटी इलाके में पड़ता है। शिवलिंग मंदिर में 5 फिट लोहे की जाली के अंदर स्थापित है। घटना के दिन किसी ने उस पर अंडा रख कर फोटो खींच लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक स्थानीय लोगों ने अंडा बाहर फेंक दिया था। मंदिर प्रबंधन की तरफ से अज्ञात आरोपित के खिलाफ तहरीर दी गई। पुलिस ने CCTV फुटेज के साथ अन्य साक्ष्य तलाशने शुरू कर दिए हैं। SHO शिवकुटी मनीष तिवारी के मुताबिक जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया और असामाजिक तत्वों को उनके कारनामों में सफल न होने देने का एलान किया। क्षेत्र के पार्षद कमलेश ने बताया, “इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान राम ने की थी।” वहीं विरोध स्वरूप जमा हुए अन्य लोगों ने भी मंदिर परिसर में CCTV लगवाने के साथ सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किए जाने की माँग की।

गौरतलब है कि प्रयागराज में 10 जून 2022 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज़ के बाद हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में DM और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर पथराव हुआ। SSP अजय कुमार पांडेय के मुताबिक अब तक घटना में शामिल आरोपितों पर 29 गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

SSP ने 11 जून 2022 को ऑपइंडिया को बताया, “FIR में 70 आरोपित नामजद किए गए हैं। 24 घंटे में 68 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है। इन 68 में से 4 आरोपित नाबालिग हैं। 64 आरोपितों को जेल भेज दिया गया है जबकि 4 नाबालिगों को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। CCTV व अन्य साक्ष्यों से आरोपितों की पहचान के प्रयास जारी हैं। किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।”

राँची में दंगा कराने UP से गई थी टीम: सोरेन सरकार की तुष्टिकरण से कट्टरपंथी हावी, जिला पंचायत चुनाव में BJP ने मारी बाजी

जब सरकार कमजोर और लाचार हो तो कट्टरपंथी शैतान हावी हो जाते हैं। यह बात झारखंड (Jharkhand) के मामले में शत-प्रतिशत लागू होता होती। विधानसभा में नमाज के लिए कमरा आवंटित करने, स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के नाम पर सभी जिलों में उर्दू थोपने से लेकर सरकारी स्कूलों को ‘हरे रंग’ में रंगने के सरकारी आदेश के वहाँ कट्टरपंथियों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। इसको देखते हुए राज्य की जनता फिर से भाजपा (BJP) की ओर देखने लगी है।

इसके संकेत राज्य के जिला पंचायत चुनावों में स्पष्ट देखने को मिला। झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो चुके हैं और इसमें भाजपा को जबरदस्त सफलता मिली है। अब जिला परिषद अध्यक्षों का चुनाव 15-20 जून के बीच होना है, जिसमें भाजपा को 11 सीटों के साथ जबरदस्त जीत की मिलने की संभावना है।

दरअसल, भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान को इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान बताकर राज्य में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद जो आतंक फैलाया गया, वह कट्टरपंथियों को बुलंद हौसलों की ओर इशारा करते हैं। इस मामले में यह बात सामने आई थी कि यूपी और देश के अन्य जगहों के कट्टरपंथी मुस्लिम झारखंड गए थे और युवाओं को प्रदर्शन के लिए भड़काया था।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में चार जून से ही दंगा की तैयारी शुरू कर दी गई थी और इसके लिए यूपी के सहारनपुर से 12 लोगों का एक दल चार और सात जून को राँची पहुँचा था। दल के कट्टरपंथियों ने राँची के मुस्लिम बहुल खूँटी, इलाही नगर, हिंदपीड़ी और गुदड़ी में बैठक कर जुलूस निकालने और हिंसा करने के लिए उकसाया था।

कट्टरपंथियों की टीम ने 16 से 24 साल के युवाओं को मुख्य रूप से फोकस किया। उन्हें कौम को परेशान करने का हवाला देकर भड़काया गया। कहा गया कि यूपी में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है, इसलिए अपनी ताकत दिखानी होगी। इन लोगों ने गुरुवार को बाजार बंद का आह्वान किया था। इस मैसेज को ह्वाट्सएप ग्रुप पर खूब शेयर कर लोगों का समर्थन लिया गया। हिंसा के पीछे एक JMM कार्यकर्ता और पानी व्यवसायी का भी नाम आ रहा है। इससे पुलिस ने पूछताछ भी की है।

10 जून 2022 को देश के कई शहरों के साथ-साथ राँची में भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। यहाँ तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। पुलिस और आम लोगों पर पथराव किए गए। हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुँचाए गए। हिंसा के वीभत्स रूप को देखते हुए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो दंगाइयों की मौत हो गई।

लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की अगुवाई वाली सरकार में सहयोगी कॉन्ग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने इन दंगाइयों की मौत पर सरकार से क्षतिपूर्ति की माँग कर डाली। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की माँग की।

जब उपद्रवी लोगों को सरकार के सहयोगी दल के नेताओं का समर्थन हो तो सरकार की शक्ति लाचार नजर आने लगती है। सरकार ही जनता को कट्टरता और अराजकता के खतरे से बचा सकती है। जब सरकार की शक्ति अराजकता को रोकने में विफल हो जाती है तो कट्टरता बढ़ जाती है। मानव पर भ्रष्टता हावी हो जाती है और मनुष्य शैतान बन जाते हैं।

‘ऐसी कार्रवाई हो कि उदाहरण बन जाए, माफियाओं पर चलता रहेगा बुलडोजर’: जुमा के दंगों पर CM योगी सख्त, कहा – एक भी दोषी को नहीं छोड़ेंगे

उत्तर प्रदेश में लगातार दो शुक्रवारों से जुमे की नमाज के बाद होने वाली हिंसा मामले पर योगी आदित्यनाथ का आज (11 जून 2022) कुछ ट्वीट आए हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने साफ किया है कि शांति बहाल करने के लिए सभी पक्षों से बात होगी, लेकिन सड़कों पर उतर दंगा करने वाले उपद्रवियों के विरुद्ध कार्रवाई होना बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा है कि वह उपद्रवियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करेंगे कि सभी असामाजिक सोच वालों के लिए वो एक मिसाल होगी ताकि भविष्य में ऐसे उपद्रव की कोई सोच भी न सके। इसके अलावा जिन्होंने उपद्रवियों का साथ दिया उनसे भी निपटा जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगातार ट्वीट करते हुए बताया, “हम एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं। ऐसे में हमें सभी पक्षों से संवाद बनाए रखना होगा। धर्मगुरुओं/सिविल सोसाइटी से सतत संवाद-संपर्क बनाए रखने के साथ-साथ उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रखी जाएगी।”

उन्होंने निर्देश दिए, “उपद्रवियों पर कार्रवाई ऐसी हो, जो असामाजिक सोच रखने वाले सभी तत्वों के लिए एक उदाहरण बने और माहौल बिगाड़ने के बारे में कोई सोच भी न सके।”

सीएम योगी ने कहा, “माफिया को संरक्षण देने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा तथा माहौल बिगाड़ने की एक भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। साजिशकर्ताओं/अभियुक्तों की पहचान कर यथाशीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी। ऐसे लोगों के विरुद्ध NSA अथवा गैंगस्टर एक्ट के तहत नियम-संगत कार्रवाई की जाएगी।”

उपद्रवियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर सीएम ने साफ किया, “अपराधियों/माफियाओं के विरुद्ध बुलडोजर की कार्रवाई सतत जारी रहेगी। किसी गरीब के घर पर गलती से भी कोई कार्रवाई नहीं होगी। यदि किसी गरीब/असहाय व्यक्ति ने कतिपय कारणों से अनुपयुक्त स्थान पर आवास निर्माण करवा लिया है, तो पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा उसका समुचित व्यवस्थापन किया जाएगा।”

योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया कि माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले अराजक तत्वों के साथ पूरी कठोरता की जाएगी। सीएम ने कहा कि ऐसे लोगों की जगह सभ्य समाज में नहीं होनी चाहिए। वह बोले कि प्रशासन कार्रवाई के दौरान न किसी निर्दोष को छेड़ा जाएगा और न ही किसी दोषी को छोड़ा जाएगा।

यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ा कानपुर दंगे का दूसरा मास्टरमाइंड निजाम कुरैशी, रहा है सपा का महानगर सचिव: हिन्दू दुकानदारों के खिलाफ फैला रहा था घृणा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में 3 जून को कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा (Kanpur Violence) के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने जिले में हुई हिंसा के दूसरे सबसे बड़े मास्टरमाइंड सपा के पूर्व नेता निजाम कुरैशी (Nizam Qureshi) को गिरफ्तार कर लिया है। वो बीते 8 दिनों से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। हालाँकि, शनिवार (11 जून, 2022) को बेकनगंज से एसआईटी ने उसे धर दबोचा।

निजाम कुरैशी पर आरोप है कि 3 जून को उसने बेकगंज में बाजार बंदी के नाम पर मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया और हिंसा शुरू होते है वहाँ से फरार हो गया ताकि पुलिस उस पर शक न करे। हालाँकि, इन सब के बावजूद उसकी इस साजिश का खुलासा हो गया।

हाल ही में निजाम कुरैशी के नाम से चल रहे वॉट्सएप ग्रुप में हिंदुओं के प्रति घृणा देखने को मिली है। साझा स्क्रीनशॉट में हिंदू दुकानदारों से सामान लेने से मुस्लिमों को मना किया जा रहा है। मैसेज में दुकानों के नाम अलग से लिखे गए हैं जिनसे किसी भी सामान की खरीददारी करने से मना किया जा रहा है। मैसेज के ऊपर ‘मुसलमानों के नाम संदेश’ साफ-साफ़ ऐसा लिखा है। इसमें हिंदू दुकानदारों के नाम के साथ बताया गया है- “जैसे इनको अपने सिर पर बैठाया है उसी तरह एकजुट होकर इन्हें सिरों से नीचे उतार भी सकते हैं।” जिस ग्रुप में ये सारी बातें हुई हैं उस ग्रुप का नाम ‘टीम निजाम कुरैशी’ है।

इतना ही नहीं 4 जून को कानपुर में दंगा करने वाले 36 दंगाइयों की लिस्ट यूपी पुलिस ने जारी की थी। उसमें भी सपा के पूर्व नेता निजाम कुरैशी का नाम था। पुलिस की एफआईआर में निजाम टॉप-5 का दंगाई है।

कौन है निजाम कुरैशी

कानपुर में हुई हिंसा के मामले में जौहर फैंस एसोसिएशन के अलावा ऑल इंडिया जमीअतुल कुरैशी एक्शन कमेटी का नाम भी सामने आया था। निजाम कुरैशी इसी संस्था का जिलाध्यक्ष है। इसके अलावा वो सपा का महानगर सचिव भी रह चुका है। इस संस्था का नाम CAA और NRC के समय हुए दंगे में भी सामने आया था

पुलिस वालों को जान से मारने के लिए चलाए बम-पत्थर, बाइक में लगाई गई आग: प्रयागराज में कट्टरपंथियों ने ऐसे मचाया आतंक

जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज में भड़की हिंसा मामले में करेली थाना में 11 जून को दर्ज एफआईआर से घटना संबंधी कई खुलासे हुए हैं। 11 लोगों के विरुद्ध एक प्राथमिकी उप निरीक्षक अरविंद कुमार ने दर्ज करवाई है। उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन उनकी ड्यूटी शौकत अली तिराहा व आसपास के क्षेत्रों में लगाई गई थी। लेकिन जुमे की नमाज खत्म होते ही अचानक 3 बजे असगरी तिराहे से भीड़ नारेबाजी करते हुए शौकत अली तिराहे पर आ गई और उपद्रव मचना शुरू हुआ।

एफआईआर में कहा गया कि भी़ड़ जब तिराहे पर पहुँची तो पुलिस ने उन्हें रोका, मगर उनके हाथों में पुलिस को मारने के लिए बम-पत्थर थे। प्राथमिकी के अनुसार, उपद्रवियों ने गाली-गलौच के बाद क्षेत्र में हिंसा को भड़काया था और पुलिस की काफी कोशिशों के बावजूद उपद्रवी हिंसा कर रहे थे। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई, पत्थर चलाए गए, नाबालिग बच्चों को उकसाकर हिंसा में लाया गया और उनसे भी पत्थरबाजी करवाई गई। घटना में शौकत अली तिराहे पर खड़ी मोटरबाइक को भी आग में झोंका गया व पुलिस वालों को मारने का भी प्रयास हुआ।

अरविंद कुमार ने बताया कि उन्हें इस हिंसा की सूचना फोन के जरिए मिली। जिसके बाद पहले पुलिस ने उन उपद्रवी को समझाने का प्रयास किया, शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन जब उपद्रवियों की ओर से कोई सुनवाई नहीं हुई तो आँसू गैस के गोले छोड़े गए व पुलिस की ओर से भी बल का प्रयोग किया गया।

प्राथमिकी में फरहान, शमशाद, अयूब, अली रिजवी, सुफियान, फैजान, इमरान, नाजिम, बदरुद्दीन, फैज खान, इफ्तखार को नामजद किया गया है व 250 से ज्यादा अज्ञात लोगों पर आईपीसी की धारा 143, 144, 145, 147, 148, 149, 153-ए, 153 बी, 295-ए, 307, 332, 353, 435, 427, 504, 505 (2), 506, 120 बी के तहत केस दर्ज हुआ है। इसके अलावा आरोपितों के ऊपर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 908 की धारा 4, 5; आपराधिक कानून (संशोधन अधिनियम 1932) की धारा 7; किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 83; सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम 1984 की धारा 3,4 लगाई गई है।

5000 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार (10 जून, 2022) को जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा के मामले में यूपी पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। आज प्रयागराज के SSP अजय कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया था कि जावेद अहमद नाम का एक मास्टरमाइंड गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई और मास्टरमाइंड हो सकते हैं, उनके बारे में पूछताछ की जा रही है और आरोपितों के ऊपर 29 अहम धाराओं के तहत केस दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट और एनएसए के तहत कार्रवाई होगी। 70 नामजद और 5000 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

‘भारत में भी नहीं काम कर रहा राइट साइड’: जस्टिन बीबर की बीमारी पर मुनव्वर फारूकी की ‘कॉमेडी’, जुमे के दंगों पर चुप्पी

स्टैण्डअप कॉमेडिन मुनव्वर फारुकी (Munawar Faruqui) हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और दक्षिणपंथियों से नफरत के लिए कुख्यात रहा है। इसी क्रम में इस बार उसने हॉलीवुड के फेमस पॉप सिंगर जस्टिन बीबर (Justin Bieber) के चेहरे के पैरालाइज होने का मजाक उड़ाया है। इसके साथ ही उसने इस ट्वीट के बहाने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। फारुकी ने अप्रत्यक्ष तरीके से सरकार पर सही ढंग से काम नहीं करने का आरोप लगाया।

पॉप गायक जस्टिन बीबर को पैरालिसिस वाली खतरनाक बीमारी होने की खबर को लेकर फारुकी ने ट्वीट किया। इस्लामी कट्टरपंथ की मानसिकता से सने फारुकी ने लिखा, “प्रिय जस्टिन बीबर मैं समझ सकता हूँ, यद्यपि भारत में भी राइट साइड अच्छे से काम नहीं कर रहा है।” जानने वाली बात ये भी है कि जुमे के दिन हुए देश भर के कई शहरों के दंगों पर मुनव्वर फारूकी ने एकदम चुप्पी साध रखी है।

मुनव्वर फारूकी ने जस्टिन बीबर की बीमारी पर किया संवेदनहीन ट्वीट

मुनव्वर फारुकी के इस ट्वीट से उसकी मानसिकता का पता चलता है। जस्टिन बीबर के प्रति अपनी संवेदना जताने के बहाने न केवल उनका मजाक उड़ा रहा है, बल्कि वो सरकार पर भी निशाना साधने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि फेमस पॉप सिंगर जस्टिन बीबर (Justin Bieber) को रामसे हंट सिंड्रोम ( Ramsay Hunt Syndrome) नाम की एक दुर्लभ बीमारी हो गई है। इसके चलते उनका आधा चेहरा पैरालाइज हो गया है। इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बीबर ने बताया कि वे एक तरफ की आँख झपका नहीं सकते हैं। एक साइड से स्माइल भी नहीं कर पा रहे हैं और उनकी नाक भी नहीं हिल रही है।

वीडियो में वह कहते हैं, “इस समय मैं स्टेज पर परफॉर्म नहीं कर सकता, क्योंकि मेरा शरीर काम नहीं कर रहा है। यह वायरस बेहद गंभीर है, जैसा कि आप मेरे शरीर को देख सकते हैं। डॉक्टर्स ने भी मुझे पूरी तरह से आराम करने के लिए कहा है। मैं उम्मीद कर रहा हूँ कि आप लोग समझेंगे और मैं यह समय आराम करने और रिलैक्स करने में लगाने वाला हूँ, ताकि मैं 100 प्रतिशत ठीक होकर वापस लौटूँ और वो करूँ, जो करने के लिए मैं पैदा हुआ हूँ।”

रामसे हंट सिंड्रोम ऐसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जो कि वैरिकाला-जोस्टर वायरस के कारण होती है। इस बीमारी में कान के चारों ओर त्वचा पर चकत्ते के साथ ही चेहरे पर लकवा मार जाता है। ये वायरस बच्चों में चिकनपॉक्स और वयस्कों में दाद के कारण बनता है।

आगजनी को फूल बरसाना कह देंगे, नैरेटिव उनके हाथों में है: महादेव का अपमान चर्चा से गायब, एक बयान पर देश भर में दंगे

नैरेटिव, आज के अर्थ में कह लीजिए कि चर्चा का एंगल तय करना। दुनिया भर में भले ही आग लग जाए, लेकिन अगर 4 लोगों के पास नैरेटिव सेट करने की ताकत है तो वो ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई इस आग की चर्चा ही न करे। या फिर वो ये भी फैला सकते हैं कि ये आग नहीं, पानी है। नैरेटिव की ताकत ये होती है कि अपवाद सामान्य लगने लगता है और जो रोज होता है, उसे अपवाद की श्रेणी में डाल दिया जाता है। हमने ‘पीके (2014)’ जैसी फिल्मों में महादेव के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया होता तो आज ऐसी नौबत ही नहीं आती।

ताज़ा मामला देख लीजिए। नूपुर शर्मा वाला मामला देख लीजिए। चर्चा इस बात पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा ने जो कहा वो सही है या गलत, वो इस्लाम की पवित्र पुस्तकों में लिखा है या नहीं। चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि जाकिर नाइक ने अगर यही बात कही तो उसकी बात पर हंगामा क्यों नहीं हुआ। चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा ने शिवलिंग का मजाक बनाए जाने वाले बयानों के जवाब में ऐसा कहा। चर्चा का विषय ये होना चाहिए था कि उनके ऐसा कहने के पहले महादेव को लोगों ने क्या-क्या कहा

लेकिन, चर्चा इस पर होने लगी कि नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद का अपमान कर दिया। उन्हें पहले ही दोषी ठहरा दिया गया, चैनल को वीडियो हटाने पर मजबूर करते हुए उससे स्पष्टीकरण जारी करने करवाया गया, मुस्लिम मुल्कों के सरकारों पर दबाव डाल कर आपत्तियाँ जारी करवाई गईं, क़तर जैसे मुल्कों ने भारतीय राजदूत को तलब किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब करने वालों के दबाव में भाजपा ने ‘गुडविल’ दिखाते हुए अपने दो प्रवक्ताओं को निलंबित भी कर दिया।

मामला यहाँ थम जाना चाहिए था। यद्यपि इससे मुस्लिम कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा कि वो इस्लामी मुल्कों और इस्लामी मुल्कों के संगठनों से दबाव डलवा कर भारत में कुछ भी करा सकते हैं, लेकिन फिर भी मामला यहाँ रुक जाना चाहिए था। नूपुर शर्मा के कथन में कितने प्रतिशत की सच्चाई है, डर से इसकी चर्चा नहीं हुई – लेकिन, फिर भी इस कार्रवाई के बाद सब ख़त्म हो जाना चाहिए था। शिवलिंग का मजाक बनाने वालों पर कहीं कोई ,लेकिन हिन्दुओं के ही ज़हर का घूँट पीने के बाद नूपुर शर्मा मामले को थम जाना चाहिए था।

लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। प्रयागराज में नाबालिगों को आगे कर के दंगे हुए। राँची में पुलिस पर हमला किया गया। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में जुमे की नमाज के बाद हिंसा हुई। नवीं मुंबई में बुर्कानशीं महिलाएँ सड़क पर उतरीं। आम लोग निशाना बने। पुलिसकर्मी घायल हुए। जम्मू कश्मीर में युट्यूबर ने VFX के माध्यम से नूपुर शर्मा का सिर कलम करने का वीडियो भी दिखा दिया। AIMIM सांसद ने उन्हें फाँसी दिए जाने की बात कह डाली

नैरेटिव का खेल देखिए। शिवलिंग के अपमान वाले और भगवान महादेव पर अश्लील टिप्पणी वाले सैकड़ों बयान और मीम्स शेयर करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और ये चर्चा का विषय तक नहीं बना, लेकिन मुहम्मद जुबैर के एक वीडियो शेयर करने से पूरे भारत में दंगे हुए और इस्लामी मुल्कों ने हमारी सरकार पर दबाव बनाया। नैरेटिव सेट करने वालों ने नूपुर शर्मा के कथन की सत्यता पर चर्चे को गौण कर दिया। दंगों को विरोध प्रदर्शन कह दिया, हिंसा को शांतिपूर्ण मार्च कह दिया और पत्थरबाजी करने वालों पर चुप्पी साध ली।

जबकि, होना क्या चाहिए था? दुनिया भर में ये चर्चा होनी चाहिए थी कि राँची में थाना प्रभारी का सिर फोड़ने वाले कौन लोग थे? चर्चा ये होनी चाहिए थी कि अपनी महिलाओं-बच्चों को हिंसा में कौन आगे कर रहा है? चर्चा ये होनी चाहिए थी कि मंदिर में पूजा के बाद लोग प्रसाद लेकर निकलते हैं, लेकिन मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद लोग हाथों में पत्थर लिए बाहर क्यों आते हैं? बहस का बिंदु ये होना चाहिए था कि नूपुर शर्मा के पुतले को दरगाह के पास फाँसी के फंदे पर लटका कर तालिबानी मानसिकता का खुलेआम प्रदर्शन भारत जैसे लोकतंत्र में क्या स्थान रखता है।

चर्चा इस पर होनी चाहिए थी कि नूपुर शर्मा की तस्वीर पर पेशाब करने वाले बच्चों के परिवार वाले कौन हैं। बहस का विषय ये होना चाहिए था कि एक डच सांसद को नूपुर शर्मा का समर्थन करने पर हत्या की धमकियाँ मिलने लगती हैं। मीडिया में ख़बरें ये होनी चाहिए थीं कि नवीन जिंदल को सिर कलम करने की धमकियों के कारण परिवार सहित दिल्ली से पलायन को मजबूर होना पड़ा। बातचीत इस पर होनी चाहिए थी कि नवीन जिंदल को उनके पूरे परिवार का सिर कलम करने की धमकी देने वाले कौन लोग हैं।

उदाहरण के लिए नैरेटिव की ताकत देखिए। सबा नकवी शिवलिंग के खिलाफ बयान देती हैं। उन पर FIR दर्ज होती है तो महिला पत्रकारों का संगठन एक लंबा-चौड़ा बयान जारी कर के इसे ‘महिला’ और ‘मीडिया’ पर हमले का रूप देता है। ये अलग बात है कि इस संस्था की ही कई पत्रकार इसके विरोध में उतर आती हैं। लेकिन, कहीं भी बयान में शिवलिंग के अपमान की चर्चा नहीं की जाती। इसे गौण कर दिया जाता है। ये नैरेटिव में फिट नहीं बैठता।

लेकिन, नूपुर शर्मा के मामले में यही महिला होने वाली बात की चर्चा तक नहीं की जाती। कुछ मुस्लिम बच्चे हँसी-ठहाके लगाते हुए अपने प्राइवेट पार्ट्स बाहर निकाल कर एक महिला की तस्वीर पर पेशाब करते हैं, लेकिन नैरेटिव में फिट न बैठने के कारण इस पर चर्चा नहीं होती। ऐसा दर्जनों बार हुआ है। अर्णब गोस्वामी को महाराष्ट्र पुलिस केवल आलोचना के लिए गिरफ्तार कर ले तो एडिटर्स गिल्ड चूँ तक नहीं करता, बंगाल में पत्रकार मारे जाते हैं तो आह नहीं निकलती, लेकिन प्रोपेगंडा गिरोह के पत्रकार झूठ फैलाएँ और एक FIR भी दर्ज हो जाए तो लंबा-चौड़ा बयान आ जाता है।

जैसे आज किसी के पुतले को फाँसी पर लटकाना आम हुआ है, कल को अफगानिस्तान की तरह हिन्दुओं को लटकाना आम हो जाएगा। भारत के इतिहास में ऐसा हो चुका है। हिन्दुओं के कटे हुए सिरों से पहाड़ बनाए जा चुके हैं, 2000 भालों पर सिखों के कटे हुए सिर लेकर मुग़ल बादशाह को पेश किया जा चुका है, हिन्दू महिलाओं को थोक में सेक्स स्लेव बनाया जा चुका है और ये सब कुछ इस्लामी शासनकाल में ही हुआ है। फिर इस्लामी भीड़ हावी हो रही है, इसकी कोई गारंटी तो है नहीं कि ऐसा नहीं होगा।

हिन्दुओं को नैरेटिव सेट करने की ताकत रखनी होगी। एक घटना को अपने एंगल से पेश करने के लिए 10 विदेशी भाषाओं में अनुवाद कर के ट्विटर ट्रेंड चलाना होगा। हर देश के राजनेताओं को टैग कर के सही स्थिति बतानी होगी। प्रोपेगेंडा फैला रहे विदेशी संगठनों को तस्वीरों-वीडियोज के जरिए चुप कराना होगा। जब झूठ 100 बार बोलने से सच प्रतीत हो सकता है तो सच 10 बार बोलने से ताकतवर सच क्यों नहीं बनेगा? नैरेटिव सेट कीजिए।

दंगों की बात नहीं हो रही अब भी, जहाँ दंगाइयों पर पुलिस ने कार्रवाई की है उसकी बात हो रही, क्योंकि नैरेटिव को यही चाहिए। उनका नैरेटिव कहता है कि 100 पत्थर अगर कोई इस्लामी कट्टरपंथी मारता है तो उसकी बात मत करो, लेकिन उसे शांत करने के लिए पुलिस एक लाठी उसे लगा दे तो इसको पूरी दुनिया में फैला दो। सीजे वर्लमैन जैसे लोग यही कर रहे। ऐसे ही झूठ फैलता है। ये किसे नहीं पता कि दंगाइयों को शांत करने के लिए पुलिस बल प्रयोग करने को मजबूर होती है, लेकिन ये ऐसा दबाव बनाने की क्षमता रखते हैं कि अगली बार से पुलिस उनका फूल-मालाओं से स्वागत करने लगे।

तिरुपति बालाजी मंदिर में चप्पल में घूमती दिखीं ‘लेडी सुपरस्टार’, शादी के बाद कराया फोटोशूट: विवाद के बाद पति ने माँगी माफ़ी

साउथ इंडियन फिल्मों की ‘लेडी सुपरस्टार’ नयनतारा (Nayantara) ने हाल ही में अपने ब्वॉयफ्रेंड विग्नेश शिवन से शादी की। शादी के बाद शुक्रवार (10 जून 2022) को वो पति के साथ आंध्र प्रदेश में तिरुपति मंदिर (Tirupati Temple) में भगवान बालाजी का आशीर्वाद लेने पहुँची। हालाँकि, इस दौरान माडा में उन्हें चप्पल पहनकर पति के साथ टहलते देखा गया। इससे अब विवाद खड़ा हो गया है।

सोशल मीडिया पर नयनतारा की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वो पति शिवन के साथ घूम रहीं थीं और उन्होंने चप्पल पहनी हुई थी। वीडियो वायरल होने के बाद उनकी जमकर आलोचना की जा रही है। आरोप है कि ऐसा करके उन्होंने भक्तों की भावनाओं को आहत किया है।

इस मामले में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड के मुख्य सतर्कता सुरक्षा अधिकारी नरसिम्हा किशोर ने कहा कि एक्ट्रेस नयनतारा माडा स्ट्रीट पर पति के साथ चप्पलों में घूमती देखी गईं हैं। उन्होंने कहा कि नव विवाहित जोड़े ने माडा स्ट्रीट में जूते पहनकर फोटो खिंचवाए, जो कि मंदिर के नियमों के खिलाफ है। नरसिम्हा ने आगे कहा, “वह माडा स्ट्रीट्स में फुटवियर के साथ घूमती नजर आ रही हैं। हमारी सिक्योरिटी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। हमने सीसीटीवी में भी देखा है कि उन्होंने वहाँ एक फोटोशूट किया था।”

फोटो साभार: बॉलीवुड शादी.कॉम

मंदिर के अधिकारी ने कहा, “हम नयनतारा को नोटिस दे रहे हैं। हमने उनसे बात भी की है और वह एक वीडियो जारी कर भगवान बालाजी, टीटीडी और तीर्थयात्रियों से माफी माँगना चाहती हैं। हालाँकि, हम उन्हें नोटिस देने जा रहे हैं।”

गौरतलब है कि नयनतारा ने अपने प्यार निर्देशक विग्नेश शिवन से 9 जून, 2022 को दक्षिण भारतीय हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार महाबलीपुरम में शादी की थी। यह जोड़ा अपने-अपने परिधानों में बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। नयनतारा ने एक सिंदूरी रंग की साड़ी पहनी थी और विग्नेश ने एक सिग्नेचर वेशती, कुर्ता और शॉल पहना था। उनके पति ने इस विवाद के बाद माफीनामा जारी किया है।

वहीं अगर हम नयनतारा के वर्क फ्रंट की बात करें तो वे अपनी अगली फिल्म ‘जवान’ में शाहरुख खान के साथ दिखाई देंगी।