भाजपा से निलंबित चल रहीं नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी के खिलाफ देशभर में शुक्रवार (10 जून, 2022) को हिंसक प्रदर्शन किए गए। इसी क्रम में तेलंगाना में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने देश की आन के प्रतीक भारतीय तिरंगे के साथ छेड़छाड़ कर दी। राज्य में दंगाइयों ने तिरंगे के बीच में अशोक चक्र को हटाकर इस्लामिक कलमा लिख दिया।
‘टाइम्स नाउ’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उक्त घटना महबूबनगर में मस्जिद-ए-रहमत मस्जिद के बाहर हुई, जहाँ सैकड़ों इस्लामवादी पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्पणियों के विरोध में एकत्र हुए थे। भीड़ ने कथित तौर पर नूपुर शर्मा और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और पूर्व भाजपा प्रवक्ता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
हालाँकि, इस दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने भारतीय तिरंगे से छेड़छाड़ कर अशोक चक्र को हटाकर उसकी जगह इस्लामिक कलमा को पेंट कर तिरंगे का अनादर किया।
गौरतलब है कि जब इस्लाम को कबूला जाता है तो कलमा पढ़वाया जाता है। ये एक घोषणा, या विश्वास का बयान है, जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘शब्द’। शाहदाह या कलमा पढ़ना ‘शपथ / गवाही’ मुस्लिमों के लिए इस्लाम के पाँच स्तंभों में सबसे महत्वपूर्ण है।
देशभर में विरोध प्रदर्शन
शुक्रवार (10 जून) को पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के खिलाफ देश भर के कई शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इस्लामिक कट्टरपंथी पैगंबर मुहम्मद पर इस्लामिक हदीसों को उजागर करने से नाराज हैं। जुमे की नमाज के बाद दिल्ली की जामा मस्जिद के बाहर नूपुर शर्मा के विरोध में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। सामने आए विजुअल्स में मुस्लिमों को नूपुर शर्मा और नवीन कुमार जिंदल के खिलाफ नारे लगाते और उनकी गिरफ्तारी की माँग करते देखा गया।
इस बीच कर्नाटक के बेलगावी में तो नुपुर शर्मा के पुतले को फोर्ट रोड पर फाँसी से लटका दिया गया। ये हंगामे की गंभीरता को दिखाने के लिए पर्याप्त है। इस मामले की शुरुआत फैक्ट चेक के नाम पर प्रोपेगेंडा फैलाने वाले ऑल्ट न्यूज के सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा इस्लामिक कट्टरपंथियों को उकसाने के बद हुई।
इसी तरह का विरोध प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी जुमे की नमाज के बाद किया गया। इस दौरान कट्टरपंथियों ने पत्थरबाजी भी की। झारखंड का राँची भी इससे अछूता नहीं रहा। राँची में भी आज (10 जून) नूपुर शर्मा के खिलाफ इस्लामवादियों ने हिंसक प्रदर्शन किया।
क्या आपने कर्नाटक के बेलगावी (Belagavi, Karnataka) में ऊँची तार से साड़ी में लटके हुए एक पुतले की तस्वीरें देखी? अगर आपने देखी होगी तो इसे देखकर आप जरूर परेशान हुए होंगे, क्योंकि यह तस्वीर खौफ पैदा करने वाली ही है। जिन्होंने ऐसा किया है, उन्होंने उस पुतले पर भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की तस्वीर भी लगाई है। इस धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में उनके ऊपर इनाम की घोषणा कर कहा गया है कि उनका सिर काट दिया जाना चाहिए।
तार से लटकाया हुआ नूपुर शर्मा का पुतला
यह असली लग रहा है, है ना? अगर आप इसके बारे में सोचते हैं तो यह बेहद डरावना है। बहुत सारे लोग एक महिला के साथ ऐसा करना चाहते हैं। एक अकेली महिला, जिसकी बातें उन्हें पसंद नहीं आई। जिस तरह से हमें सोचने और व्यवहार करने के लिए ढाला गया है उसके तहत हम कुछ सेकंड के लिए तस्वीर को देखते हैं और फिर हम खुद से ही कहते हैं, “नहीं, यह भारत है अफगानिस्तान या सीरिया नहीं। ऐसी चीजें यहाँ नहीं हो सकतीं”।
इसमें कुछ सच्चाई है। हाँ, अफगानिस्तान में ऐसी चीजें आम हैं। साल 2021 में सत्ता हथियाने के कुछ ही समय बाद तालिबान ने शवों को क्रेन से लटकाना शुरू कर दिया। वे तस्वीरें भी इसी तरह डरावनी थीं। एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें तालिबान ने एक शव को हेलीकॉप्टर से लटका दिया था। वे पुतले नहीं थे, वाकई हत्या करने के बाद लोगों में एक संदेश भेजने के लिए उनके शव को फाँसी लगाकर तमाशा बनाया गया था।
सितंबर 2021 में तालिबान ने हेरात में क्रेन से 4 शव लटकाए थे (फोटो साभार: द पायनियर)
अफगानिस्तान के हेरात प्रांत में लटकाए गए शव पुतले नहीं थे। वे वास्तविक लोग थे। ‘अपहरण’ के आरोपित 4 लोगों को पहले मार दिया गया और फिर जनता के सामने उनके शव को फाँसी पर लटका दिया गया। दूर के युद्धग्रस्त देशों में डरावनी चीजें हो रही हैं, यही सोच रहे हैं न आप?
दरअसल, बात यह है कि यह लेख लिखे जाने तक पूरे भारत में लाखों लोग उपद्रव कर रहे थे और नूपुर शर्मा को फाँसी पर लटकाने, बिना सिर के उनके धड़ देखने के की माँग कर रहे थे। उनमें से कई चाहते हैं कि पहले नूपुर शर्मा का बलात्कार हो, फिर सिर कलम किया जाए। वह डरावना पुतला इसी इरादे की खुलेआम घोषणा है।
अभी कल (9 जून 2022) को ही जम्मू की एक मस्जिद में मौलवी ने लाउडस्पीकर से आवाज लगाई गई कि नूपुर शर्मा का सिर कलम कर देना चाहिए। उसने यह भी घोषणा की कि हिंदू, चूँकि वे ‘गोमूत्र पीते हैं’, इसलिए वे मुस्लिमों के बराबर समझे जाने के योग्य नहीं हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल में भी मुस्लिमों की भीड़ ने नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की माँग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।
दिल्ली की जामा मस्जिद, यूपी के सहारनपुर, प्रयागराज, झारखंड के राँची और कई अन्य जगहों पर भीड़ घोषणा कर रही है कि वे असली नूपुर शर्मा को फाँसी देना या सिर कलम करना चाहती है। मौलाना, उलेमा और नेताओं ने एक हफ्ते से भी अधिक समय से खुले तौर पर घोषणा की है कि नूपुर शर्मा जीने के लायक नहीं हैं।
शासन-प्रशासन चुप है। कानून-व्यवस्था तोड़ने के आरोप में यहाँ-वहाँ कुछ गिरफ्तारियाँ हुई हैं और धार्मिक नफरत फैलाने के आरोप में कुछ एफआईआर भी दर्ज हुई हैं, लेकिन क्या ये काफी हैं? क्या हम पालघर के साधुओं का चेहरा भूल गए हैं?
महाराष्ट्र के पालघर में कल्पवृक्ष गिरि को पुलिस के सामने बेरहमी से पीट-पीट कर मार डाला गया था
कल्पवृक्ष गिरि महाराज 70 वर्ष के थे। अपने कमजोर हाथों से को जोड़ते हुए एक पुलिस अधिकारी से बचाने की गुहार लगाई थी और अपने झुर्रीदार चेहरे के साथ इस उम्मीद में वे मुस्कुराए थे कि राज्य की शक्ति के रूप में कई वर्दीधारी पुलिस अधिकारी उनके सामने मौजूद हैं, जो खून की प्यासी भीड़ से उनकी रक्षा कर लेगी। लेकिन, वह कुछ कुछ ही सेकंड में गलत साबित हो गया। जब भीड़ उन्हें और उनके सहयोगी को पीट-पीट कर मार डाला और उनके शवों को भी नहीं छोड़ा तब भी पुलिस देख रही थी।
पालघर की घटना के 2 साल हो चुके हैं। इस घटना में सरकार असफल साबित हुई थी। सत्ताधारी दल के नेताओं ने कभी भी इस मामले में कुछ नहीं कहा। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को छोड़कर किसी भी प्रमुख नेता ने कभी उनका जिक्र नहीं किया और ना ही उन साधुओं के लिए शोक व दुख व्यक्त किया। कल्पवृक्ष गिरि महाराज यह विश्वास लिए हुए भीड़ के हाथों मारे गए कि सरकार उन्हें बचा लेगी।
लखबीर सिंह शायद इतना साक्षर या जागरूक नहीं था कि उसे विश्वास हो जाए कि उसे बचा लिया जाएगा। जबकि उसका खंडित शरीर उसके ही खून के कुंड में पड़ा था। उसकी आँखें सदमे से फैल गई थीं। वह इशारे से बोलने की कोशिश करता रहा। संभवत: वह बचाए जाने, मदद करने या कुछ पानी दिए जाने की याचना कर रहा था।
लखबीर के हमलावरों ने उसकी हत्या का तमाशा भी बना लिया था। उन्होंने निष्प्राण पड़े उसके शरीर के चारों ओर अपनी तलवारें लहराते हुए क्रूरता का नृत्य किया। उन्हें सरकार का कोई डर नहीं था। हेरात की अनाम लाशों की तरह ही लखबीर को पुलिस के बैरिकेड्स के मचान से बाँध दिया गया और सभी लोगों के देखने के लिए छोड़ दिया गया था।
आधुनिक तकनीक, देश चलाने के लिए जबरदस्त जनादेश, ताकतवर सुरक्षाबल और सूचनाएँ उपलब्ध होने के बावजूद सरकार पालघर में साधुओं की हत्या और किसान आंदोलन के दौरान सिंघु-कोंडली बॉर्डर पर लखबीर सिंह की निर्मम हत्या के मामले में राज्य की सत्ता विफल साबित हुई।
मार कर लटकाया हुआ लखबीर सिंह का शव
महीनों तक लोगों ने पीएम को मारने और काटने की धमकी दी, बलात्कार की घटनाएँ सामने आईं, यातायात रोक दिया गया और किसानों के विरोध के नाम पर पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया और सरकार देखती रही। जब लाल किले में तिरंगा फहराया गया और पीला झंडा लगा दिया गया, तब भी सरकार देखती रही।
चूँकि सरकार का अपमान और दुर्बलता सभी को दिखाई दी थी और जब लाल किले की ऊँची दीवारों से दर्जनों पुलिस अधिकारियों को नीचे गिराया गया तब पूरी दुनिया इसे देख रही थी। सरकार ने अराजकतावादियों के सामने हार मान ली थी। जिस दिन गणतंत्र अपना संविधान मनाता है, उसी दिन लोकतंत्र के प्रतीकों को अशुद्ध कर दिया गया था।
तस्वीरें शक्तिशाली होती हैं। ये मन-मस्तिष्क में बैठ जाती हैं। तस्वीरें कहानियाँ बताती हैं। दुर्भाग्य से हमारे लिए ऐसी बहुत सी तस्वीरें हैं, जो किसी सरकार के कमजोर होने और भीड़ के सामने बेबस एवं लाचार होने की कहानी बयाँ कर सकती हैं। जब सरकार कमजोर होती है तो उस स्थान पर अराजकतावादी, कट्टरपंथी और शैतान कब्जा कर लेते हैं। अराजकता महामारी की तरह फैलती है। निराशा टिड्डियों की तरह पैदा होती है।
कट्टरता एक फिसलन भरी ढलान है। अराजकता एक अंधकारमय स्थान है। यहाँ कानून और व्यवस्था का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कट्टरपंथी किस किताब से आदेश लेते हैं या अराजकतावादी किस टूलकिट का पालन करते हैं।
राज्य की शक्ति ही जनता को कट्टरता और अराजकता के खतरे से बचा सकती है। जब उस राज्य की शक्ति अराजकता को रोकने में विफल हो जाती है तो कट्टरता बढ़ जाती है। मानव पर भ्रष्टता हावी हो जाती है और मनुष्य शैतान बन जाते हैं। उसके बाद पुतलों को वास्तविक शरीर बनने में केवल कुछ ही समय लगता है।
पैगंबर मुहम्मद पर नूपुर शर्मा के कथित बयान को लेकर NDTV (नई दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड) पर एक डिबेट के दौरान चैनल के पत्रकार विष्णु सोम ने विवाद खड़ा कर दिया है। सोम ने दावा किया कि इस्लामी आतंकवाद पर बात करने से आम मुस्लिमों की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है।
दरअसल, वामपंथी चैनल पर डिबेट के दौरान वकील और पैनलिस्ट के तौर पर उपस्थित देश रतन निगम ने संयुक्त राष्ट्र के डाटा का हवाला देते हुए तथ्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “घोषित आतंकवादियों में से 95% इस्लाम से हैं। और 95% आतंकवादी संगठन इस्लामिक हैं।” इस पर इस्लामिक आतंकवाद का बचाव करते हुए विष्णु सोम ने कहा, “तो क्या हम हर उस व्यक्ति को टाइपकास्ट करते हैं जो मुस्लिम हैं (उनमें से अरबों दुनिया भर में मौजूद हैं)?” इसका जबाव देते हुए निगम तंज कसते हुए कहा, “बीजेपी ये तथ्य पैदा नहीं कर रही है।”
देश रतन निगम ने नूपुर शर्मा मामले का जिक्र करते हुए जोर देकर कहा, ”मामला कोर्ट में जा चुका है। एफआईआर दर्ज कर ली गई है।” अब अदालतें तथ्यों के साथ न्याय करेंगी और ये तय करेंगी कि उनका बयान उकसावे के जवाब में था या नहीं।
नूपुर शर्मा के बयान की अलग से जाँच की जा सकती है
निगम के तीखे जबाव से असहज विष्णु सोम डिफेंसिव मोड में आते हुए कहा, “आप मुझे उकसा सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं जो चाहूँ कह सकता हूँ।” न्यूज एंकर ने कहा कि लोगों को अपने भाषण में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने ये भी माना कि दूसरों को भी उकसाना नहीं चाहिए। खास बात ये है कि इन लोगों को इस्लामिक पैनलिस्ट द्वारा नूपुर शर्मा और हिन्दुओं को उकसाना स्वीकार्य है, लेकिन जब शर्मा ने इस पर रिएक्ट कर दिया तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिमिट का उल्लंघन माना जाता है।
डिबेट के दौरान एनडीटीवी के पत्रकार ने उन परिस्थितियों को अनदेखा कर दिया, जिस कारण से टाइम्स नऊ पर डिबेट के दौरान नूपुर शर्मा को इस्लामिक धर्म की पेचीदगियों पर चर्चा करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इस मामले में ऑपइंडिया ने इसके लेकर रिपोर्टिंग की थी कि किस तरह से वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को इस्लामवादी फव्वारा बता रहे हैं। वो शिवलिंग वाली जगह को वर्षों से ‘वुजुखाना’ के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। डिबेट के दौरान हिन्दू प्रतीकों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियाँ की गईं। इसी कारण से मजबूरन नूपुर शर्मा ने पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी की।
विष्णु सोम आतंकवाद से ज्यादा ‘टाइपकास्टिंग’ की चिंता
डिबेट के दौरान अधिकतर समय विष्णु सोम मुस्लिमों का बचाव करते रहे। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के कार्यों के कारण पूरे समुदाय को बदनाम नहीं करना चाहिए। हालाँकि, देश रतन निगम ने जोर देकर कहा कि 95% आतंकी संगठन इस्लामिक हैं।
इस पर सोम ने माफी माँगने के अंदाज में कहा, “जिस वक्त आप कहते हैं कि दुनिया भर के 95% आतंकवादी मुस्लिम हैं या इस्लामी आस्था से हैं – मैं आँकड़े नहीं जानता, लेकिन भले ही वे सही हों। लेकिन, क्या वो नहीं कर रहे हैं, जिसके लिए हम आपको मना कर रहे हैं?” न्यूज एंकर ने आगे कहा, “आप पूरे इस्लाम को टाइपकास्ट कर रहे हैं। दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं। वे लगभग सभी शांतिपूर्ण लोग हैं … अगर आपका इरादा पूरे आस्था को टाइपकास्ट करने का नहीं है, तो ऐसा बयान क्यों दें? यह इतना गलत नंबर है सर।” हालाँकि, निगम ने संयुक्त राष्ट्र का हावाला देते हुए बार-बार ये दावा किया कि उनका तथ्य सही है।
एनडीटीवी पत्रकार ने मजबूरन स्पष्ट करते हुए कहा, “मुझे यकीन है कि आँकड़े सही हैं, ऐसा क्यों कहते हैं? क्योंकि जिस वक्त हम ये कहते हैं ये ट्विटर पर वायरल हो जाता है”। विष्णु सोम के कुतर्कों पर फटकार लगाते हुए निगम ने कहा, “तो आप तथ्यों से भाग रहे हैं।”
बचाव की मुद्रा में एनडीटीवी पत्रकार ने कहा, “मैं डिबेट के संदर्भ में केवल इतना कह रहा हूँ कि इंटरनेट पर बहुत नफरत फैली हुई है। एक सम्मानित व्यक्ति के तौर पर जैसे ही आप ये बातें कहते हैं तो यह एक पूरे समुदाय को टाइपकास्ट करता है। क्या ऐसा नहीं है, जिससे हम भारतीय बचना चाहते हैं?”
निगम ने कहा, “तथ्यों को सामने रखना हमारा कर्तव्य है और वकील हर रोज अदालतों में ईशनिंदा करते हैं।”
इतना सुनने के बाद निगम को अनसुना कर सोम दूसरे पैनलिस्ट की तरफ सरक लिए। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि 95% आतंकवादी (या कम से कम अधिकांश आतंकवादी) इस्लामी आस्था से संबंधित हैं। लेकिन वो उदारवादी छवि दिखाने के चक्कर में सच को स्वीकार करने से बच रहे थे।
नोट: ऑपइंडिया ‘आतंकवाद पर संयुक्त राष्ट्र डेटा’ को सत्यापित नहीं कर सका, जिसका उल्लेख देश रतन निगम ने NDTV पर बहस के दौरान किया था।
मध्य प्रदेश के रतलाम में 18 मुस्लिमों द्वारा घर वापसी करते हुए हिन्दू धर्म अपनाने की खबर है। इन सभी के द्वारा गोमूत्र से स्नान करते हुए जनेऊ धारण किए जाने का दावा किया जा रहा है। घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया मोहम्मद शाह हैं जो जड़ी-बूटी बेचने का कमा करते हैं। सभी ने अपने धर्म परिवर्तन का न्यायालय में शपथ पत्र भी दिया है। यह मामला गुरुवार (9 जून, 2022) का है।
Madhya Pradesh News
18 Muslims from one family adopted Hinduism in Ratlam.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घर वापसी करने वाले परिवार के मुखिया का नाम मोहम्मद शाह है जिन्हें अब राम सिंह नाम से जाना जाएगा। इन सभी ने आम्बा के भीमनाथ मंदिर में शिवपुराण सुना और वहीं पर पूर्णाहुति के बाद हिन्दू धर्म में वापसी का फैसला किया। स्वामी आनंदगिरी महराज ने विधि-विधान से इनकी हिन्दू धर्म में वापसी की औपचारिकताएँ पूरी करवाई। इसी क्रम में सभी ने गाय के गोबर और गोमूत्र में स्नान किया।
परिवार के मुखिया राम सिंह (पूर्व मोहम्मद शाह) के परिवार में उनका बेटा मौसम शाह भी है जो अब अरुण सिंह नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा उसी परिवार के शाहरुख़ अब संजय, नजर अली अब राजेश, नवाब अब मुकेश और हीरो शाह अब सावन सिंह नाम से जाने जाएँगे। इसी परिवार की महिलाओं में मीनू बी अब मीना, रुखसाना अब रुक्मिणी और मुमताज अब माया नाम से जानी जाएँगी।
घर वापसी के बाद पूरे परिवार ने एक साथ जय श्रीराम और हर हर महादेव के नारे लगाए। परिवार के मुखिया ने बताया, “2-3 पीढ़ी पहले हमारे पुरखे हिन्दुओ में बेदी समुदाय से थे। इस दौरान वो ताबीज और जड़ी बूटी आदि बेचने का काम करने लगे। इसी बीच उन सभी ने इस्लाम धर्म कबूल कर लिया था। पिछले कुछ सालों से हमारी आस्था हिन्दू धर्म की तरफ होने लगी। हम गाँव में जा कर शिव महापुराण कथा सुनने लगे। इसी बीच हमने स्वामी जी से हिन्दू धर्म में वापसी का निवेदन किया था। स्वामी जी मान गए और हमने अपने परिवार और कुछ रिश्तेदारों के साथ हिन्दू धर्म अपना लिया।”
हालाँकि उसी परिवार की एक महिला आशा ने कहा, “हमारी आस्था हिन्दू धर्म में ही थी। हम बस नाम के मुसलमान थे और मन से हिन्दू थे। हम कभी नमाज़ भी नहीं पढ़ते थे। न ही मस्जिद जाते थे। अब अब हिन्दू हैं।”
देश में कोरोना वायरस का खतरा अभी कम नहीं हुआ है। महाराष्ट्र, केरल के अलावा कई राज्यों में हालात फिर से चिंताजनक दिख रहे हैं। पिछले कुछ समय से इंसानों के साथ-साथ जानवरों में भी तेजी से कोरोना संक्रमण फैलने की खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारत में जानवरों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ‘एनोकोवैक्स (Anocovax)’ टीका लॉन्च किया गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने देश में पहली बार जानवरों के लिए विकसित की गई कोरोना वैक्सीन ‘एनोकोवैक्स’ को गुरुवार (9 जून 2022) को जारी किया। इस वैक्सीन को हरियाणा स्थित आईसीएआर-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विन्स (एनआरसी) द्वारा विकसित किया गया है।
कई रिसर्च से खुलासा हुआ है कि इंसानों ने पालतू जानवरों को कोविड-19 वायरस से संक्रमित किया है। कई कुत्ते और बिल्लियाँ पीसीआर टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं। पालतू जानवरों के लिए वैक्सीन आने से कुत्ते और बिल्लियाँ पालने वाले मालिक बेहद खुश हैं। खासकर ऐसे समय में जब कोविड-19 के मामले एक बार फिर बढ़ रहे हैं। पहले वह चाहकर भी उन्हें बचा नहीं पाते थे, लेकिन अब वह अपने पालतू जानवरों को यह वैक्सीन लगवाकर खतरनाक वायरस से बचा सकेंगे।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने एक बयान में कहा है कि एनोकोवैक्स जानवरों के लिए निष्क्रिय सार्स-कोव-2 डेल्टा (कोविड-19) टीका है। एनोकोवैक्स से मिलने वाली प्रतिरक्षा सार्स-कोव-2 डेल्टा और ओमिक्रोन दोनों वैरिएंट को बेअसर करती है। आईसीएसआर के मुताबिक, वैक्सीन में निष्क्रिय सार्स-कोव-2 (डेल्टा) एंटीजन हैं। इसमें अलहाइड्रोजेल एक सहायक के रूप में है। ऐसे में ये वैक्सीन जिन जानवरों को लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है उनमें कुत्ते, शेर, तेंदुआ, चूहे और खरगोश प्रमुख रूप से शामिल हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा (University Of Florida) के वैज्ञानिकों को ताजा अध्ययन में इस बात के सबूत मिले हैं कि कुछ कोरोना वायरस, जो पहले केवल जानवरों को संक्रमित कर रहे थे, वे अब और खतरनाक हो गए हैं। अब यह सूअरों और कुत्तों से इंसानों में फैल सकता है।
वैज्ञानिकों ने SARS-CoV-2 को 29 अलग-अलग जानवरों में पाया है, जिनमें सफेद पूँछ वाले हिरण, बिल्ली, कुत्ते, फेरेट्स (ferrets), चूहे, ऊदबिलाव (Otters) और बाघ शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर मामलों में जानवरों से लोगों को वायरस फैला है। नवंबर 2020 में, वैज्ञानिकों ने पाया कि मिंक ने लोगों में वायरस फैलाया है। उत्तरी अमेरिका में बड़ी संख्या में सफेद पूँछ वाले हिरण लोगों के करीब रहते हैं। जनवरी से मार्च 2021 के बीच मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, इलिनोइस और न्यूयॉर्क राज्यों में जिन हिरणों का परीक्षण किया गया, उनमें से 40% में एंटीबॉडी पाए गए। वहीं 2020 में मिंक से कम से कम 4 अमेरिकी लोगों में कोरोना वायरस फैला था।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के पार्क सर्कस इलाके में शुक्रवार (10 जून 2022) को फायरिंग की घटना हुई। कोलकाता आर्म्ड फोर्स के एक कॉन्स्टेबल ने इस घटना को अंजाम दिया। एक महिला की हत्या करने के बाद उसने खुद को भी गोली मार ली।
इस कॉन्स्टेबल की पहचान चाडुप लेप्चा के तौर पर हुई है। पुलिस ने बताया है कि शुरुआती पड़ताल से पता चला है कि इस मामले का नुपूर शर्मा के बयान के खिलाफ पार्क सर्कस इलाके में हुए प्रदर्शन से कोई ताल्लुक नहीं है। उल्लेखनीय है कि जुमे की नमाज के बाद देश के विभिन्न शहरों की तरह ही इस इलाके में भी प्रदर्शन हुआ है।
लेप्चा बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमीशन में ही तैनात था। रिपोर्ट के मुताबिक, वह कोलकाता आर्म्ड पुलिस फोर्स की पाँचवी बटालियन से था। शुक्रवार को ही वह छुट्टी से वापस ड्यूटी पर लौटा था। बताया जाता है कि लेप्चा डिप्रेशन में था। पुलिस का कहना है, “हम इलाके के सीसीटीवी से फुटेज को जुटा रहे हैं। हमारे कॉन्स्टेबल की मौत हो गई है। दो अन्य घायल हैं।”
इस घटना में जिस महिला की मौत हुई है वो एक राहगीर थी, जो वहाँ से गुजरते वक्त इस गोलीबारी का शिकार हो गई। हालाँकि, पुलिसकर्मी ने ऐसा क्यों किया, ये स्पष्ट नहीं हो सका है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मिशन के पास पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी ने कम से कम 10 राउंड फायरिंग की। गैरेज चलाने वाले एक स्थानीय भी इसमें घायल हुआ है और उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।
“Primarily what info we have is that it has no connection with Park Circus agitation (against Nupur Sharma). Probably the Constable was suffering from some sort of depression, we are not sure. After proper confirmation, we can say something. The Constable has died,” Police say pic.twitter.com/AMGCXbeVTN
घटना के बाद वहाँ अफरा-तफरी मच गई और लोग भागने लगे। दुकानदारों ने भी अपनी दुकानों के शटर गिरा दिए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस महकमे के आला अधिकारी भी मौके पर पहुँचे। बाबू शेख नाम के चश्मदीद ने बताया कि सारा घटनाक्रम करीब पाँच मिनट तक चला। एक अन्य स्थानीय निवासी अराफात मुल्ला ने कहा कि उसने मिशन के पास पुलिसकर्मी को अंधाधुंध फायरिंग करते देखा। मुल्ला ने कहा, “मेरे भाई को चोटें आईं और उसे अस्पताल ले जाना पड़ा। मैं जान बचाने के लिए गैरेज में भागा।”
मेन स्ट्रीम मीडिया संस्थान लंबे समय से इस्लामवादियों और चरमपंथियों के लिए नरम रुख अख्तियार करते रहे हैं। तथ्यों को छिपाने और पाठकों को अंधेरे में रखने की इनकी पुरानी आदत है, जिसके चलते पिछले कुछ सालों से इस्लामवादियों के हौसले बुलंद हुए हैं।
हाल ही में द टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) और हिंदुस्तान टाइम्स (HT) जैसे मुख्य धारा के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने जम्मू की एक मस्जिद में एक मौलाना द्वारा दी गई धमकियों को अपने पाठकों तक नहीं पहुँचाने का फैसला किया।
इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के मामले में बीते दिनों जम्मू-कश्मीर से एक बेहद खतरनाक मंसूबों वाला वीडियो सामने आया था, जिसमें भीड़ के सामने एक मुल्ला हिंदुओं के लिए अपशब्द कह रहा था और उनका गला काटने की बात कह रहा था। यह वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया था।
गला काटकर हत्या करने की धमकी देते हुए मौलाना वीडियो में कहता है, “भाइयों, वक्त हमें सर कलम करना भी सिखाता है। इसलिए बातों को जेहन में बिठा दो कि हम खामोश तब तक हैं, जब तक कि हमारा बर्दाश्त कायम है। बर्दाश्त के बाहर निकल गए तो फिर नूपुर शर्मा क्या, वो आशीष कोहली कुत्ता क्या, वो नूपुर शर्मा ‘गंदी’ क्या, उनके सर कहीं और धड़ कहीं और मिलेंगे।”
मौलाना ने हिंदुओं का मजाक उड़ाते हुए यह भी कहा था, “गाय का पेशाब पीने वालों का, गोबर के अंदर नहाने वालों की हैसियत ही क्या है दुनिया में? इनको जो रिस्क मिलता है हमारी दहशत से मिलता है। इनको जो हवा मिलती है हमारी बरकत से मिलती है। इनको जो दरिया से पानी मिलता है, हमारी बरकत से मिलता है। वरना इनका वजूद क्या है?”
मौलवी ने अपनी तकरीर में आशीष कोहली के सिर को धड़ से अलग करने की बात इसलिए कही, क्योंकि कोहली ने नूपुर शर्मा को अपना समर्थन था। उसके जहरीले भाषण के बाद भड़के सांप्रदायिक तनाव के बीच कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया गया।
हिंदुस्तान टाइम्स और टाइम्स ऑफ इंडिया ने तथ्यों को छिपाया
इसी बीच टाइम्स ऑफ इंडिया और हिंदुस्तान टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों को अपने पाठकों को अधूरी और भ्रामक जानकारी एक और मौका मिल गया। इस मौके को भुनाते हुए हिंदुस्तान टाइम्स (HT) ने अपना लेख, ‘कर्फ्यू लगाया, सेना को फ्लैग मार्च के लिए बुलाया गया’ इस शीर्षक के साथ प्रकाशित किया।
इस लेख में संस्थान ने मौलवी द्वारा हिंदुओं का मजाक उड़ाया गया, उन्हें अपशब्द कहे गए, जहरीला भाषण दिया गया आदि बातों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। हालाँकि, भड़काऊ भाषण का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया है। इसके बावजूद संस्थान या कह लें संपादक ने अपने पाठकों तक इस सच को पहुँचना जरूरी नहीं समझा।
साभार: हिंदुस्तान टाइम्स
वीडियो में साफ दिख रहा है कि मुल्ले के चारों तरफ सैकड़ों लोग मौजूद हैं। वीडियो में सामने मस्जिद दिख रही है और अगल-बगल के मकानों की छतों पर भी लोग खड़े नजर आ रहे हैं। उसकी भड़काऊ तकरीर के बीच में भीड़ अल्लाह-हू-अकबर और या रसूल के नारे लगा रही है। इस दौरान नूपुर शर्मा और उनका समर्थन करने वाले आशीष कोहली लिए ‘सर तन से जुदा’ के नारे भी लगाए गए।
इसी तरह, टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) ने भी तथ्यों और सच्चाई से परे एक लेख प्रकाशित किया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने ‘सांप्रदायिक तनाव के बाद जम्मू-कश्मीर में कर्फ्यू’ शीर्षक वाले अपने लेख में लिखा, “जम्मू की एक मस्जिद में एक मौलवी ने हिंदुओं का अपमान किया, उन्हें गाय का पेशाब पीने वाला बताया। बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और पत्रकार आशीष कोहली को मौत की धमकी जारी कर सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा दिया।”
साभार: टाइम्स ऑफ इंडिया
टाइम्स ऑफ इंडिया के लेख ने एक कदम आगे बढ़कर नूपुर शर्मा और आशीष कोहली के खून के प्यासे इस्लामवादियों का बचाव करते हुए कहा कि विवादित टिप्पणी के बाद समुदाय को उकसाया गया। हालाँकि, जम्मू में मस्जिद के बाहर क्या हुआ, इस पर विस्तार से नहीं बताया गया कि कहीं ऐसा न हो कि लोगों का ध्यान विवादित टिप्पणी से हटकर इस्लामवादियों के ‘सर तन से जुदा’ की धमकी देने और गौमूत्र के साथ हिंदुओं का अपमान करने पर चला जाए।
बता दें कि वीडियो में मौलाना ने यह भी कहा था, “नबी का कलमे पढ़ने वाला मुसलमान खुद मैदान में आए। ये भगवे भी हमारे दुश्मन, RSS भी हमारी दुश्मन तो मैं इसलिए अंजुमन इस्लामिया की तरफ से तमाम आवाम का शुक्रिया करता हूँ। मैं इनको (हिंदुओं) बताना चाहता हूँ कि सबसे कम दर्जे का मुसलमान इतना ईमान रखता है कि दुनिया के किसी भी ताकत गुस्ताख-ए-नबी का सर कलम कर सकता है।”
खुद को शांतिप्रिय बताते हुए मौलाना ने यह भी कहा था, “हम इंसाफ पसंद हैं। हमारा मजहब अमनपसंद मजहब है। प्रशासन को चाहिए कि जो अजान के खिलाफ बोले, उसका गला पकड़े। जो पर्दे के खिलाफ बोले उनका गला पकड़े। ये गला नहीं पकड़ सकते तो हम गला काटने के लिए तैयार हैं।”
महाराष्ट्र के नवीं मुंबई में मुस्लिम महिलाओं ने सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन किया। बुर्के में महिलाओं को सड़क पर मार्च करते हुए देखा गया। पैगंबर मुहम्मद पर भाजपा के निलंबित प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा टिप्पणी किए जाने के आरोप में जुमे की नमाज के बाद शुक्रवार (10 जून, 2022) को देश भर में हिंसा हुई। आगजनी और पत्थरबाजी कर के दंगे किए गए। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हालात सबसे ज्यादा बिगड़ गए।
#WATCH | Maharashtra: Women carry out a protest march in Navi Mumbai against the controversial remarks by suspended BJP leader Nupur Sharma. pic.twitter.com/hiFVeSHZRE
झारखंड में पुलिस को मुस्लिम भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग करनी पड़ी। राँची के हनुमान मंदिर के पास भी भीड़ पहुँच गई थी। वो सभी नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी की माँग कर रहे थे। सुबह से ही नारेबाजी शुरू हो गई थी। कई दुकानें बंद रखी गई थीं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों ने भी आगजनी कर के विरोध प्रदर्शन किया। मुंबई में मुस्लिमों ने नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल की गिरफ़्तारी के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया।
Anish Gupta, DIG Ranchi says, “The situation is a little tense but under control. We are making all efforts from our end. Heavy security deployment done. Senior officials are also present at the spot. We are making all efforts to see that the crowd is dispersed from here.” pic.twitter.com/awTUSlK0sh
प्रयागराज के अलावा सहारनपुर, मोरादाबाद, लखनऊ और रामपुर में भी मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर निकल कर नारेबाजी की। लखनऊ की टीले वाली मस्जिद से हजारों की भीड़ निकली, जिसे रोकने के लिए पुलिस को बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाने पड़े। स्थिति नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल लगाए गए हैं। राँची के मुस्लिम दुकानदारों ने पहले से दुकानें बंद रखी थीं। मार्च कर रही भीड़ वापस जाने को कहने पर भड़क गई। डेली मार्किट के थाना प्रभारी अवधेश कुमार का सिर फोड़ दिया गया।
— यतेन्द्र शर्मा @YatendraMedia (@YatendraMedia) June 10, 2022
वो लहूलुहान हो गए। राँची में पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा। प्रयागराज में जख्मी पुलिसकर्मियों में RAF के मनीष कुमार नाम का एक जवान चोटिल हो गया। दिल्ली के जामा मस्जिद के बाहर भी बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। कश्मीर में भी शटडाउन का माहौल है। राँची में कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया और पत्थरबाजी में सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुँचाया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक और संस्कार भारती (Sanskar Bharti) के संरक्षक पद्मश्री से सम्मानित बाबा योगेंद्र का शुक्रवार (10 जून 2022) को लगभग 98 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे और लखनऊ के राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सहित भाजपा (BJP) और संघ ने नेताओं ने गहरा दुख व्यक्ति किया है।
पीएम मोदी ने कहा, “देश सेवा में समर्पित पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी के देहावसान से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे। ओम शांति!”
देश सेवा में समर्पित पद्मश्री बाबा योगेंद्र जी के देहावसान से अत्यंत दुख हुआ है। उनका जाना संपूर्ण कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दे। ओम शांति!
संघ की ओर से सरसंघचालक मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कहा, “संस्कार भारती के संरक्षक श्री योगेंद्र जी एक तपस्वी थे। उनके निधन से एक ज्येष्ठ प्रचारक के साधक जीवन का अंत हुआ। संगीत और कला क्षेत्र के राष्ट्रनिष्ठ साधकों को एक मंच पर लाना उनके जीवन की साधना थी। उनका जीवन सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।”
संघ के वरिष्ठ प्रचारक व संस्कार भारती के संरक्षक श्री योगेन्द्र जी के निधन पर पू. सरसंघचालक डॉ. मोहनजी भागवत और मा. सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी की विनम्र श्रद्धांजलि : pic.twitter.com/ygc4NN2vE3
इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने ट्वीट कर कहा, “बाबा योगेंद्र भारतीय संस्कृति की विरासत को सहेजने के जीवंत प्रतीक थे। वे ऐसे प्रवासी थे, जिनका हर पग देश की सांस्कृतिक चेतना को नया जीवन प्रदान करता था। वे कहते थे कि ‘कला मिट्टी में प्राण फूँकती है, कला से संस्कारों का सृजन होता है व कला ही समाज को प्रेरित करने का कार्य करती है’।”
#बाबायोगेन्द्र भारतीय संस्कृति की विरासत को सहेजने के जीवंत प्रतीक थे। वे ऐसे प्रवासी थे जिनका हर पग देश की #सांस्कृतिकचेतना को नया जीवन प्रदान करता था। वे कहते थे कि "कला मिट्टी में प्राण फूंकती है, कला से संस्कारों का सृजन होता है व कला ही समाज को प्रेरित करने का कार्य करती है pic.twitter.com/J1dzuTk6ee
— Indira Gandhi National Centre for the Arts (@ignca_delhi) June 10, 2022
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (JP Nadda) ने कहा, “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं संस्कार भारती के संस्थापक ‘पद्मश्री’ बाबा योगेन्द्र जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में उनके अद्वितीय योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान प्रदान करे।”
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं संस्कार भारती के संस्थापक ‘पद्मश्री’ बाबा योगेन्द्र जी को भावभीनी श्रद्धांजलि। भारतीय संस्कृति की जड़ों को मजबूत करने की दिशा में उनके अद्वितीय योगदान को सदैव याद किया जाएगा।
ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को श्रीचरणों में स्थान प्रदान करे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “संस्कार भारती के संस्थापक, असंख्य कला साधकों के प्रेरणास्रोत, कला ऋषि, ‘पद्मश्री’ बाबा योगेंद्र जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्रीराम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें। ॐ शांति!”
'संस्कार भारती' के संस्थापक, असंख्य कला साधकों के प्रेरणास्रोत, कला ऋषि, 'पद्म श्री' बाबा योगेंद्र जी का निधन अत्यंत दुःखद है।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व उनके असंख्य प्रशंसकों को यह दुःख सहने की शक्ति दें।
बाबा योगेंद्र का जन्म 7 जनवरी 1924 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में वकील विजय बहादुर श्रीवास्तव के घर हुआ था। जानकारों के अनुसार, बाबा योगेंद्र घर छह बहनों के इकलौते भाई थे। इससे पहले उनके जितने भाई पैदा हुए, सभी चल बसे। इसलिए उनके पिता ने इनके जीवन को बचाने के लिए रीति निभाते हुए पड़ोसी को बेच दिया था। इसलिए वे अपने पड़ोसी के यहाँ शुरुआत के पाँच-छह साल तक रहे।
बाबा योगेंद्र बचपन से ही संघ की शाखाओं में जाते थे। पढ़ाई के लिए जब वह गोरखपुर आए तो उनका संपर्क संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख से हुआ। इसके बाद नानाजी देशमुख के आह्वान पर वह 1960 में संघ के प्रचारक बने। उनका जीवन बहुत ही साधारण और सरल था।
संस्कार भारती के अखिल भारतीय साहित्य संयोजक रहे राज बहादुर सिंह के अनुसार, एक बार बाबा योगेंद्र बीमार पड़े तो अस्पताल तक ले जाने के लिए साधन की कमी को देखते हुए नानाजी देशमुख उन्हें अपनी पीठ पर लादकर ले गए। नानाजी के इस निस्वार्थ भाव को देखकर वह प्रभावित हो गए प्रचारक बनने का निर्णय लिया।
प्रचारक के रूप में उनकी प्रतिभा को देखकर संघ ने 57 वर्षीय बाबा योगेंद्र को 1981 में ‘संस्कार भारती’ के निर्माण कार्य का कार्यभार सौंपा। उन्होंने अथक परिश्रम करते हुए 41 वर्षों में संस्कार भारती को कला क्षेत्र का अग्रणी संस्थान बना दिया। उनके इस कलाप्रेम को देखते हुए पद्मश्री से पुरस्कृत किया गया था।
बाबा योगेंद्र ने कई कलाकारों, लोक कला के जानकारों को संस्कार भारती से जोड़ा। देश भर में कहीं की भी लोक कला हो, बाबा योगेंद्र ने उसको संस्कार भारती का हिस्सा बनाया। बड़े कलाकारों की जगह वे छोटे-छोटे कलाकारों को संगठन से जोड़ते थे। उन्होंने कला और संस्कृति से जुड़े सैकड़ों आयोजन किए। इस तरह संस्कार भारती के आजीवन संरक्षक रहते हुए उन्होंने इसे कला के क्षेत्र का उत्कृष्ठ संस्थान बना दिया।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शुक्रवार (10 जून, 2022) को जुमे के दिन दंगे भड़क गए। नमाज के बाद मस्जिदों से निकली भीड़ ने जम कर पत्थरबाजी और आगजनी की। ऐसा तब हो रहा है, जब प्रदेश भर में अलर्ट जारी था और मस्जिदों के आसपास सुरक्षा कड़ी थी। आगजनी और पत्थरबाजी के अलावा गोलीबारी भी हुई है। ये घटनाएँ अटाला से शुरू हुईं। पुलिस ने रोका तो उन पर पत्थर चलाए गए। जब लाठीचार्ज से भी बात नहीं बनी तो पुलिस को आँसू गैस के गोले छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। खुद आईजी राकेश सिंह घायल हो गए। कई अन्य पुलिसकर्मी भी जख्मी हुए हैं। एक ट्रॉली को आग के हवाले कर दिया गया। DM और SSP के अलावा कई पत्रकारों को भी पत्थरबाजी में चोट पहुँची है। RPF के कई जवान भी जख्मी हुए हैं। कई घंटे तक ये पत्थरबाजी चलती रही। प्रशासन सख्त चेतावनी दिए जा रहा है। इंटरनेट से लेकर सड़क तक पर सख्ती के बावजूद प्रयागराज में कानपुर जैसे हालात बन गए।
#WATCH Prayagraj ADG's vehicle damaged after a protest erupted in Atala area over controversial remarks of suspended BJP leader Nupur Sharma & expelled BJP leader Naveen Kumar Jindal, earlier today
The ADG was on ground to control the law&order situation as a protest erupted pic.twitter.com/lCCYrTyBOq
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दंगाइयों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। प्रदेश के DGP डीएस चौहान, ADG (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार और अपर मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय के कंट्रोल रूम में मौजूद हैं। पुलिस दंगे के दौरान लगातार कहती रही कि ‘अब बहुत हो गया’, लेकिन दंगाई नहीं रुके। लाउडस्पीकर से दंगाइयों को समझाने की कोशिश की गई। भगदड़ के बाद सड़कों पर चप्पल बिखरे हुए मिले।
"प्रयागराज में जुमे की नमाज के बाद नमाजियों का बवाल"
प्रयागराज में ADG की गाड़ी को भी तोड़फोड़ में क्षतिग्रस्त कर दिया गया। भाजपा के निलंबित प्रवक्ताओं नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल द्वारा पैगंबर मुहम्मद पर टिप्पणी के विरोध में ये सब किया जा रहा है। स्थिति नियंत्रित करने पहुँचे ADG की गाड़ी को ही नुकसान पहुँचाया गया। इन सबके अलावा हैदराबाद के मक्का मस्जिद के बाद भी जुमे की नमाज के बाद विरोध प्रदर्शन हुआ। लुधियाना में भी शाही इमाम के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुआ। आगजनी भी की गई। महाराष्ट्र के सोलापुर में भी मुस्लिमों ने बड़ी संख्या में जुटान कर के एक रैली निकाली।