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मेडिकल फैसिलिटी, कैंटीन, अलाउंस, बीमा, मेडल, छुट्टियाँ… वायुसेना ने बताया ‘अग्निवीरों’ को क्या-क्या मिलेगा, बलिदानियों को ₹1 करोड़

केंद्र की महत्वाकांक्षी अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) को लेकर जारी हिंसा के बीच भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने रविवार (19 जून 2022) को अग्निवीरों (Agniveer) की भर्ती से संबंधित नोटिफिकेशन जारी किया।

पहली भर्ती गाइडलाइन में वायुसेना ने कहा है कि अग्निवीरों को अपनी चार साल की नौकरी पूरी करनी होगी। इससे पहले वे फोर्स नहीं छोड़ सकेंगे। ऐसा करने के लिए उन्हें अधिकारी की सहमति लेनी होगी। इसके साथ ही 18 साल से कम उम्र के अग्निवीरों को अपने माता-पिता या अभिभावक की सहमति आवश्यक होगी।

गाइडलाइन में अग्निवीरों की छुट्टी और मेडिकल फैसिलिटी से संबंधित संशयों का निराकरण किया गया है। गाइडलाइन में कहा गया है कि अग्निवीर सभी सैन्य सम्मान और पुरस्कार के हकदार होंगे। इन्हें साल में तीस दिन की छुट्‌टी दी जाएगी। इसके अलावा, बीमार होने पर डॉक्टर की सलाह पर सिक लीव भी मिलेगी।

अग्निवीरों की भर्ती 17.5 से 21 साल के बीच के आयु वालों की और फिजिकल फिटनेस एवं शैक्षणिक योग्यता के आधार पर की जाएगी। 18 साल से कम आयु के अभ्यर्थियों को अपने माता-पिता या अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। चुने जाने के बाद उन्हें मिलिट्री की ट्रेनिंग दी जाएगी।

अग्निवीरों की ड्रेस तय होगी और उन्हें अपनी वर्दी में ही ड्यूटी करनी होगी। किसी भी ड्यूटी के लिए कहीं भी भेजा जा सकता है। इस दौरान उन्हें मेडिकल फैसिलिटी और कैंटीन की सुविधा दी जाएगी। इसके अलावा, वेतन के साथ-साथ रिस्क, हार्डशिप, ड्रेस एवं ट्रैवल अलाउंस भी दिया जाएगा। अग्निवीरों को 48 लाख रुपए का बीमा कवर दिया जाएगा।

अगर कोई अग्निवीर अपनी सेवाकाल के दौरान वीरगति को प्राप्त होता है तो उसके परिवार को बीमा समेत करीब एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि दी जाएगी। विकलांगता पर एक्स-ग्रेशिया और बची हुई नौकरी की वेतन और सेवा निधि की 10.04 लाख सहित राशि दी जाएगी।

अगर सेवाकाल के दौरान किसी अग्निवीर की मौत हो जाती है तो उसे 48 रुपए की बीमा राशि, सेवा निधि और बाकी बचे सेवा काल का वेतन दिया जाएगा। चार साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद ऐसे लोगों को अग्निवीर का प्रमाण पत्र दिया जाएगा।

इसके अलावा, मेडिकल ट्रेडमैन को छोड़कर भारतीय वायुसेना के नियमित कैडर में उन्हीं अभ्यर्थियों को लिया जाएगा, जिन्होंने अग्निवीर के रूप में अपना कार्यकाल पूरा किया है। सेना या किसी अन्य फोर्स में इनकी नियुक्ति सरकारी नियमों के अनुसार ही होगी।

जो अग्निवीर आगे भी वायुसेना में सेवा करने के इच्छुक रहेंगे, उन्हें फिर से आवेदन करना होगा। वायुसेना का एक केंद्रीकृत बोर्ड इन आवेदनों की समीक्षा के बाद उन पर फैसला लेगा और 25 प्रतिशत अग्निवीरों को उनकी फिटनेस और 4 साल के कार्यकाल की समीक्षा के आधार पर नियमित करेगा। 

जिशान ने फैशन डिजाइनर युवती से ढाई साल में कई बार किया रेप, किसी और लड़की से कर ली शादी: फिर दी हत्या की धमकी

राजस्थान की राजधानी जयपुर से बलात्कार का मामला सामने आया है। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध में अव्वल राजस्थान में आए दिन इस तरह की घटनाएँ सामने आ रही हैं, जिससे विपक्ष मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है। ताज़ा मामले में 23 साल की फैशन डिजाइनर युवती के साथ कपड़ा शोरूम मालिक जिशान ने ढाई साल में कई बार रेप किया। आरोपित ने शादी का झाँसा देकर ऐसा किया।

लेकिन, उसने पीड़िता को धोखा देते हुए किसी और लड़की से शादी कर ली। इसका पता चलने पर पीड़िता ने उसका विरोध किया, जिसके बाद उसने हत्या की धमकी दे डाली। शनिवार (18 जून, 2022) की देर रात युवती ने करणी विहार थाना क्षेत्र में FIR दर्ज करवाई है। पुलिस ने इस मामले में जाँच-पड़ताल शुरू कर दी है। वैशाली नगर के एसीपी आलोक सैनी खुद इस मामले को देख रहे हैं। पीड़िता उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली है।

पेशे से फैशन डिजाइनर युवती 2019 से ही वैशाली नगर में स्थित गाँधी पंथ में फ़्लैट किराया पर लेकर रहती है। सीतापुरा के एक कंपनी में वो बतौर फैशन डिजाइनर कार्यरत थीं। रामगंज का रहने वाला जिशान यहाँ अक्सर आता-जाता था। वो कपड़ों का शोरूम चलाता है। दोनों मिले और उनमें बातें भी होने लगीं। जिशान उससे मिलने उसके फ़्लैट पर भी गया था। उसी दौरान उसने युवती को शादी करने के लिए कहा। युवती भी मान गई।

आरोप है कि शादी के झाँसे में रख कर उसने युवती का बलात्कार करना शुरू कर दिया। मई 2020 में उसने पीड़िता को मालवीय नगर स्थित एक होटल में बुला कर उसके साथ रेप किया। उसने कहा कि वो जल्द ही परिवार वालों से शादी के सम्बन्ध में बात करेगा, लेकिन फिर उसके मुंबई जाकर किसी अन्य लड़की से शादी की सूचना आई। धोखे के बारे में कहने पर उसने दोबारा कॉल न करने और जान से मार डालने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता पुलिस के पास पहुँची।

जिस कोर्ट में मुंशी था मोहम्मद वलीम, उसी को उड़ाने की दी धमकी: अयोध्या पुलिस ने दबोचा, ‘राशिद अली’ बन कर लिखी थी चिट्ठी

UP के अयोध्या जिले में कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी देने के आरोपित मोहम्मद वलीम को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। यह धमकी एक चिट्ठी भेज कर दी गई थी जिसमें धमकाने वाले व्यक्ति का नाम राशिद लिखा था। चिट्ठी की जाँच करते हुए पुलिस आरोपित वलीम तक पहुँच गई। आरोपित वलीम उसी कोर्ट में मुंशी का काम करता है। इस कार्रवाई की जानकारी अयोध्या पुलिस ने 17 जून, 2022 (शुक्रवार) को दी।

अयोध्या के SSP शैलेश कुमार ने बताया, “पत्र मिलने के बाद पुलिस ने राशिद की पहचान कर के पूछताछ की। उसकी बातों से लगा कि उसे कोई फँसाना चाह रहा है। जब हम मामले की तह तक गए तो इस पूरे मामले में मोहम्मद वलीम शामिल पाया गया। उसको हिरासत में ले कर पूछताछ की गई तो उसने चिट्ठी भेजना स्वीकार किया। उसको जेल भेजा जा रहा।”

अयोध्या पुलिस के मुताबिक, आरोपित वलीम की गिरफ्तारी 16 जून को कोर्ट कैम्पस से ही शाम 6 बजे की गई। पुलिस के अनुसार, “राशिद के नाम से कोर्ट परिसर को उड़ाने की चिट्ठी मिलते ही FIR दर्ज कर ली गई थी। चिट्ठी पर राशिद अली का नाम लिखा था जो सोहावल तहसील के गाँव दोस्तपुर का रहने वाला है। राशिद और वलीम में पैसे के लेन-देन का विवाद था। इसी के चलते वलीम ने राशिद के नाम से चिट्ठी पोस्ट कर दी। चिट्ठी कचहरी के ही पोस्ट ऑफिस से भेजी गई थी।”

पुलिस ने आगे बताया, “आरोपित मोहम्मद वलीम कोर्ट में मुंशी है। उसकी उम्र लगभग 38 साल है। मूल रूप से गाँव जगनपुर थाना रौनाही का रहने वाला वलीम कचेहरी के शेड नंबर 6 के पास काम करता था। धमकी की चिट्ठी उसने अपने ही हाथ से लिखी। वलीम पर धारा 506 IPC के साथ 7 क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट के तहत कार्रवाई की गई है।”

फर्जी मतदान पर रोक के लिए मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम: आधार से वोटर कार्ड को अब कराना होगा लिंक, कई कार्ड रखने वालों पर नकेल

वोटर आईडी को आधार नंबर से लिंक करने के लिए कानून मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नोटिफिकेशन के बाद अब वोटर आईडी को आधार से लिंक करना जरूरी हो गया है। आधार से लिंक होने के बाद फर्जी वोटर आईडी रद्द कर दिए जाएँगे। चुनाव सुधार की दिशा में सरकार का यह महत्वपूर्ण कदम है। इस संबंध में कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने एक ट्वीट कर जानकारी दी।

रिजिजू ने शुक्रवार (17 जून 2022) को ट्वीट कर कहा, “हर मतदाता को सशक्त बनाने की दिशा में कदम! माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार द्वारा चुनावी प्रक्रिया में सुधार के लिए ऐतिहासिक कदम। भारत निर्वाचन आयोग से परामर्श के बाद भारत सरकार चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 के तहत चार अधिसूचनाएँ जारी की हैं।”

कानून मंत्रालय ने चुनाव आयोग से परामर्श के बाद निर्वाचक पंजीकरण नियम- 1960 और चुनाव संचालन नियम- 1961 में संशोधन किया गया है। इस संबंध में सरकार की ओर से शुक्रवार (17 जून 2022) को चार नोटिफिकेशन जारी किया।

ये अधिसूचनाएँ पिछले साल के अंत में संसद में पारित चुनाव कानून (संशोधन) अधिनियम, 2021 का हिस्सा हैं। सरकार के इस फैसले के बाद अब कोई व्यक्ति दो वोटर कार्ड नहीं रख पाएगा। इसके साथ ही सरकार ने वोटर आईडी कार्ड से जुड़े 3 और अहम फैसले लिए हैं।

सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय

नए फैसले के मुताबिक, 18 साल की आयु पूरी करने वाले युवा मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करवाने के लिए साल में 4 बार आवेदन कर सकते हैं। पहले यह व्यवस्था साल में सिर्फ एक बार थी। इस कारण मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए एक साल का इंतजार करना पड़ता था।

तीसरे निर्णय में सरकार ने वोटर आईडी कार्ड में पत्नी की जगह जीवनसाथी शब्द करने का निर्णय लिया है। इससे सर्विस वोटर के पत्नी या पति को वोट डालने के लिए सुविधा होगी। उन्हें वोट डालने के लिए आम आदमी से अलग हट कर विशेष सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। सर्विस वोटर वो होते हैं जो जो दूर-दराज के इलाके या विदेश में तैनात होते हैं।

इस फैसले के तहत चुनाव आयोग चुनाव में लगे कर्मचारियों और सुरक्षाबलों को ठहराने के लिए या चुनाव संबंधित सामग्री रखने के लिए किसी भी परिसर की माँग कर सकता है। इससे चुनाव में ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों को भी सुविधा होगी। 

चुनाव आयोग को दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश

चुनाव सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 जून 2019 को चुनाव आयोग को वोटर आई कार्ड को आधार कार्ड से जोड़ने के निर्देश दिया था। भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी।

अपनी याचिका में उपाध्याय ने कहा था कि वोटर आईडी को आधार कार्ड से जोड़ने पर देश में चुनावों के दौरान फर्जी मतदान पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और इससे अधिकतम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

अधिवक्ता उपाध्याय ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में दलील दी थी कि आधार नंबर को वोटर आईडी कार्ड के साथ जोड़ने से संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का किसी प्रकार से उल्लंघन नहीं होगा, बल्कि यह सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

अश्विनी उपाध्याय ने दायर की थी याचिका और दिया था सुझाव

अधिवक्ता उपाध्याय ने अपनी याचिका में ई-वोटिंग सिस्टम को लेकर बताया था कि इस प्रणाली में चुनाव से पहले हर बार डेटाबेस अपडेट किया जाएगा। सत्यापन के बाद सिस्टम आधार संख्या, नाम, पता और जन्म तिथि जैसी मतदाता की जानकारी दिखाएगा, जो पहले से ही आधार के डेटाबेस में संग्रहित रहेगा। इसके बाद सिस्टम मतदाता के फिंगरप्रिंट के लिए पूछेगा।

उन्होंने आगे कहा था कि यदि फ़िंगरप्रिंट आधार के डेटाबेस में से मेल खाता है तो अगला पेज पार्टी चिह्न के साथ उम्मीदवार की सूची दिखाने के लिए खुल जाएगा। जब मतदाता किसी उम्मीदवार का चयन करेगा और अपनी पसंद की पुष्टि करेगा तो सिस्टम ‘वोट सफल’ दिखाएगा।

‘नूपुर शर्मा का बदला लेने के लिए गुरुद्वारा पर किया हमला’: ISIS के टेलीग्राम चैनल पर दावा, इससे पहले भी सिख धर्मस्थल बनते रहे हैं निशाना

आतंकी समूह ISIS ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले का दोष भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा के मत्थे मढ़ने का प्रयास किया है। इस्लामिक स्टेट के मुताबिक गुरुद्वारे पर हमला नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर दिए गए बयान के विरोध में किया गया है। 18 जून 2022 (शनिवार) को हुए इस आतंकी हमले में 2 लोगों की मौत और 7 लोगों के घायल होने की सूचना है।

‘ट्रिब्यून’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय ISIS आतंकियों से जुड़े टेलीग्राम चैनल पर यह दावा किया गया है। दावे के मुताबिक, तालिबान शासित देश में यह हमला नूपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर दिए गए बयान का बदला था। लेकिन यह सिखों के धर्मस्थलों पर पहला हमला नहीं है। इस से पहले मार्च 2020 में भी अफगानिस्तान के शोर बाजार इलाके में आतंकियों ने एक गुरुद्वारे को निशाना बनाया था। इस हमले में 29 लोगों की मौत हो गई थी।

उस हमले की भी जिम्मेदारी ISIS ने ही ली थी। इस आतंकी हमले में हमलावर का नामा खालिद अल हिंदी था जो मूल रूप से भारत का ही रहने वाला बताया गया था। तब उसने हमले को कश्मीर में मुस्लिमों के साथ हो रहे अन्याय का बदला बताया था।

अक्टूबर 2021 में तालिबानियों ने एक गुरुद्वारे में जबरन घुस कर वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं को धमकाया था। ये वही काबुल का कर्ते परवान गुरुद्वारा था जहाँ अब ISIS का हमला हुआ है। तब दुनिया भर के सिख समुदाय ने भारत ने इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आवाज उठाने की माँग की थी। तब तो नूपुर शर्मा द्वारा कोई भड़काऊ बात नहीं कही गई थी।

15 अगस्त 2021 को तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। तब से वहाँ डर और भय का माहौल है। अक्टूबर 2021 में अफगानिस्तान के सिखों को 2 विकल्प मिले थे। या तो वो देश छोड़ कर चले जाएँ वरना इस्लाम कबूल कर लें। हालाँकि तालिबान के आने से पहले ही अफगानिस्तान में सिखों के हालात दयनीय थे। वहाँ की कोई भी सरकार उन्हें सुरक्षा नहीं दिला पाई। साल 1990 में अधिकतर सिखों के घरों को जबरन कब्ज़ा कर लिया गया। तालिबान के वापस आने के बाद अधिकांश सिख अफगानिस्तान से पलायन कर के भारत आ गए हैं।

पिता को हुआ ब्रेन हैमरेज तो चंदा इकट्ठा करने सड़क पर निकली थी बेटियाँ, वायरल तस्वीर देख CM धामी ने उठाया गोपाल शर्मा के इलाज का बीड़ा

जैसे जीवन के अगले पल का कोई भरोसा नहीं होता कि इंसान के साथ उस पल में क्या हो जाए, वैसे हल्दवानी के गोपाल शर्मा भी नहीं जानते थे कि उन्हें ब्रेन हैमरेज हो जाएगा और उनके परिवार को सारी जमा पूँजी उनके इलाज में लगानी पड़ेगी। कुल जमा दो लाख था परिवार के पास वो सारा गोपाल शर्मा के अस्पताल में भर्ती होने के बाद खत्म हो गया।

अब उधर गोपाल दिल्ली के सफरदरजंग अस्पताल में बीमारी से जूझ रहे थे और उधर उनकी दो बेटियाँ हल्दवानी की सड़कों पर आ खड़ी हुई थीं ताकि पापा के इलाज के लिए चंदा इकट्ठा हो सके। देखते ही देखते दोनों बेटियों की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और बात पहुँची प्रदेश मुख्यमंत्री धामी तक।

सीएम धामी का दिल भी गोपाल शर्मा की बेटियों को देख पसीज गया और उन्होंने गोपाल के इलाज का सारा जिम्मा उठाने का ऐलान किया। अपने सोशल मीडिया पर बच्चियों की तस्वीर साझा करते हुए उन्होंने फौरन संबंधित अधिकारियों को गोपाल शर्मा के समुचित इलाज कराने का निर्देश दिया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “हल्द्वानी में पिता के इलाज के लिए दो मासूम बेटियों द्वारा चंदा माँगने की जानकारी सोशल मीडिया के ज़रिए प्राप्त हुई थी। इस संबंध में त्वरित कार्रवाई करते हुए मरीज़ श्री गोपाल शर्मा जी के इलाज हेतु उचित इंतज़ाम किए जा रहे हैं व उपचार में कोई दिक्कत ना आए, इसके लिए स्वास्थ्य सचिव को जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए हैं। दिल्ली में तैनात एडिशनल रेजिडेंट कमिश्नर को भी सफदरजंग अस्पताल में जाकर वहाँ तैनात चिकित्सकों से वार्ता कर, मरीज को बेहतर से बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित किया गया है।”

सीएन ने कहा, “मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि वो श्री गोपाल शर्मा जी को शीघ्र से शीघ्र स्वस्थ बनाएँ। पिता के ठीक होने तक परिजन चाहें तो बच्चों को SOS Children’s Village में रख सकते हैं, यहाँ बच्चों की उचित देखभाल की जाएगी व उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

बता दें कि पुष्कर धामी द्वारा इस तरह बच्चियों के लिए आगे आकर उनके पिता के इलाज का जिम्मा उठाना सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। यूजर्स उन्हें इस कदम के लिए सराह रहे हैं। उनकी तारीफ कर रहे हैं। उनका आभार व्यक्त कर रहे हैं। उनकी लंबी उम्र और कामयाब जीवन की प्रार्थना करते हुए कह रहे हैं कि वह आगे भी इस तरह प्रदेशवासियों की मदद करते रहें।

पटना से दिल्ली वाली Spicejet हवाई जहाज में लगी आग, 185 यात्री थे सवार: स्थानीय लोगों ने दी सूचना, वीडियो वायरल

बिहार की राजधानी पटना में स्पाइसजेट की फ्लाइट में आग लग जाने के कारण हड़कंप मच गया, लेकिन किसी तरह उस पर काबू पा लिया गया है। फ्लाइट में कुल 185 लोग सवार थे। एक बड़ा हादसा टल जाने के कारण लोगों ने राहत की साँस ली है। इस घटना का कारण विमान का चिड़िया से टकरा जाना (Bird Hitting) बताया जा रहा है। विमान के टेक ऑफ के दौरान ये हादसा हुआ। अब तक किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है।

फ़िलहाल सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। उक्त स्पाइसजेट फ्लाइट को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए जाना था, लेकिन इंजन में गड़बड़ी आ जाने के कारण उसे वापस लौटना पड़ा। उक्त फ्लाइट का नंबर SG723 है, जिसे अब सुरक्षित लैंड करा लिया गया है। पटना के डीएम चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि स्थानीय लोगों ने फ्लाइट में आग देखने के बाद जिला समाहरणालय और एयरपोर्ट को इस सम्बन्ध में सूचित किया।

आपात लैंडिंग के बाद सभी यात्री सुरक्षित हैं। चिड़िया से टकराने के बाद पायलट्स ने इंजन को बंद कर दिया और आपात लैंडिंग कराई। लोकल लोगों द्वारा बनाए गए वीडियोज में फ्लाइट से धुआँ निकलते देखा जा सकता है।

‘…सहारनपुर में तोड़फोड़, रेलवे स्टेशन नष्ट हो’ – WhatsApp पर प्लानिंग, UP पुलिस ने 5 को दबोचा: पहले धराए सपा और कॉन्ग्रेसी नेता

उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने अग्निपथ योजना के खिलाफ सेना के अभ्यर्थियों को भड़काने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से एक कॉन्ग्रेस की छात्र शाखा NSUI का जिलाध्यक्ष है और दूसरा आरोपित समाजवादी पार्टी का सदस्य।

अग्निपथ योजना के खिलाफ लोगों को भड़काने के लिए ये सभी खुद को भी कथित तौर पर अभ्यर्थी बता रहे थे। हास्यास्पद यह है कि इन सभी की उम्र सेना भर्ती के हिसाब से पार कर चुकी है। यह गिरफ्तारी 18 जून 2022 (शनिवार) को हुई है।

सहारनपुर पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए आरोपितों में से 26 वर्षीय अमित पंवार NSUI का जिलाध्यक्ष है। एक अन्य आरोपित 34 वर्षीय संदीप पूर्व जिला पंचायत सदस्य रह चुका है। वह समाजवादी पार्टी का सदस्य बताया जा रहा है।

अमित पंवार और संदीप के अलावा 26 वर्षीय मोहित चौधरी, 28 वर्षीय सौरभ कुमार और 26 वर्षीय उदय को भी पकड़ा गया है। पुलिस के मुताबिक इन सभी आरोपितों में से कोई भी सेना भर्ती की तैयारी नहीं कर रहा था। साथ ही ये सभी किसी न किसी राजनैतिक दल से जुड़े बताए जा रहे हैं।

इन सभी को शामली-सहारनपुर रोड पर पड़ने वाले रेलवे फाटक मोड़ से पकड़ा गया है। सहारनपुर के SSP आकाश तोमर के मुताबिक, “मामला थाना रामपुर मनिहारान का है। गिरफ्तार पाँच आरोपितों में से 2 राजनैतिक पार्टियों के पदाधिकारी हैं और बाकी 3 सदस्य। इन सभी को जेल भेजा जा रहा है। हम आगे भी इसका प्रयास करेंगे कि असली सेना भर्ती के अभ्यर्थियों को ऐसे कोई अन्य तत्व भड़का न पाएँ। ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

स्टेशन पर तोड़फोड़ की साजिश रचते 5 और गिरफ्तार

ऑपइंडिया से बात करते हुए सहारनपुर SSP आकाश तोमर ने बताया, “आज 19 मई 2022 (रविवार) को सहारनपुर पुलिस ने सहारनपुर स्टेशन पर तोड़फोड़ की साजिश रचते हुए 5 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया है। पुलिस को इनकी हरकतों की सूचना मिली थी। इस पर स्वाट टीम और कुतुबशेर थाना पुलिस ने साझा अभियान चला कर 5 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।”

बताया जा रहा है कि ये सभी व्हाट्सएप पर चैट कर रहे थे। इस दौरान किसी ने इनके स्क्रीनशॉट पुलिस को भेज दिए। इस चैटिंग में दीपक सहगल नाम से नंबर दिखाई दे रहा है। उसने लिखा, “अब सहारनपुर स्टेशन पर तोड़फोड़ होगी। अगर हमारी बात नहीं मानी तो सहारनपुर रेलवे स्टेशन नष्ट करो।” उसके जवाब में एक अन्य नंबर वाले ने लिखा, “भाई इसी को लेकर मीटिंग चल रही है। हमारी जीत जरूर होगी। पर ये ध्यान रखना कि किसी भी भाई का नाम केस में न आए वरना जिंदगी खराब हो जाएगी।”

रोज सुबह छात्रों को भड़काते हैं कोचिंग संस्थान, दिखाते हैं आत्महत्या के वीडियो: बिहार जलाने के लिए दिल्ली से कौन दे रहा आदेश?

बिहार में ‘अग्निपथ’ योजना के विरुद्ध चल रहे विरोध प्रदर्शन में कोचिंग संस्थानों की बड़ी भूमिका सामने आई है। बिहार में अब तक 15 ट्रेनों को आग के हवाले किया जा चुका है। आगजनी, मारपीट और लूटपाट आम बात हो गई है। दुःखद ये है कि इन घटनाओं में आम युवा ही शामिल हैं। इस साजिश में कई कोचिंग संस्थानों के नाम सामने आ रहे हैं, जिनके बारे में कहा रहा है कि मंगलवार (21 जून, 2022) तक राज्य को जलाने की साजिश है।

‘दैनिक भास्कर’ ने अपने एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद पाया है कि दिल्ली में बैठ कर बिहार में हिंसा की साजिश रची गई। दिल्ली में बैठे ये आका बिहार में कोचिंग संस्थानों को युवाओं को हिंसा के लिए तैयार करने को कहते हैं। इसके बाद वीडियो वगैरह का इस्तेमाल कर के युवाओं को भड़काया जाता है। खबर में बाजार समिति के एक स्कूल स्थित प्रशिक्षण केंद्र का जिक्र किया गया है, जहाँ एक कोचिंग संचालक के पहुँचते 25-30 लड़के और हाई जंप की प्रैक्टिस कर रही लड़कियाँ उसके पैर छूने लगीं।

उक्त शिक्षक से बात कर के और गाँधी मैदान में एक अन्य शिक्षक से बात कर के ‘दैनिक भास्कर’ ने इस नेटवर्क का खुलासा किया है। एक शिक्षक ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद छात्रों को विरोध प्रदर्शनों में ले जाया जाता है। नालंदा और जहानाबाद जैसे इलाकों से छात्रों को पटना लाया जाता है। उसने ये भी बताया कि दिल्ली से नेटवर्क बना कर 3-4 लाख छात्रों को जोड़ा गया है। छात्रों को ब्रेनवॉश किया जाता है कि वो अब अपने हक़ के लिए खड़े नहीं हुए थे केंद्र से लेकर राज्य पुलिस तक में ऐसी ही योजना आ जाएगी। रोज सुबह प्रशिक्षण के बहाने उन्हें भड़काया जाता है।

वीडियो बना-बना कर केंद्र सरकार की योजनाओं का विरोध किया जाता है। देश भर में आत्महत्या के आँकड़े गिना कर और वीडियो दिखा कर छात्रों की भावनाओं को भड़काया जाता है। बिहार पुलिस ने बताया है कि हर जिले के एसपी को वहाँ के कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जाँच के आदेश दिए गए हैं। छात्रों की आड़ में उपद्रवी हिंसा में शैल हो रहे हैं, जिसकी जाँच चल रही है। पटना के डीएम ने भी जाँच के आदेश दिए हैं।

बिहार के कई जिलों में 2 दिनों से इंटरनेट सेवाएँ बंद हैं। पटना के 5 कोचिंग सेंटर्स पर आगजनी की साजिश रचने के आरोप लगे हैं। उनके विरुद्ध FIR भी दर्ज की गई है। व्हाट्सएप्प चैट के माध्यम से छात्रों को उकसाने की बात भी सामने आई है। अकेले पटना में 8 कोचिंग सेंटरों की भूमिकाओं की जाँच चल रही है। राजस्थान के सीकर और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भी कोचिंग संस्थानों पर ही हिंसा की साजिश रचने के आरोप लगे हैं।

इस्लामोफोबिया है तो हिंदुफोबिया भी है, दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं: भारत ने UN में दी इस्लामी देशों को नसीहत, बामियान का दिया उदाहरण

धार्मिक घृणा को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) में भारत ने दुनिया के देशों द्वारा अपनाए जा रहे दोहरे मानदंड पर लताड़ लगाई है। भारत ने कहा कि ‘रिलीजियोफोबिया (Religiophobia)’ सिर्फ अब्राहमिक मजहबों (यहूदी, ईसाई और मुस्लिम) के लिए नहीं, बल्कि सभी धर्मों पर लागू होना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति (TS Tirumurti) ने कहा, “रिलिजियोफोबिया केवल 1 या 2 धर्मों को शामिल करने वाला एक चयनात्मक अभ्यास नहीं होना चाहिए, बल्कि गैर-अब्राहम धर्मों के खिलाफ भी यह समान रूप से लागू होना चाहिए। धार्मिक भय पर दोहरे मानदंड नहीं हो सकते।”

तिरुमूर्ति ने कहा, “हमने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि धार्मिक भय का मुकाबला करना केवल एक या दो धर्मों को शामिल करने वाला एक चुनिंदा अभ्यास नहीं होना चाहिए, बल्कि गैर-अब्राहम धर्मों के खिलाफ भी समान रूप से लागू होना चाहिए। जब ​​तक ऐसा नहीं किया जाता, हम अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में कभी सफल नहीं हो सकेंगे।”

उन्होंने कहा कि भारत ने अब्राहिमक धर्मों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि सिख धर्म, बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म सहित सभी धर्मों के खिलाफ नफरत और हिंसा का मुकाबला करने के लिए लगातार कोशिश की है। दरअसल, तिरुमूर्ति हेट स्पीच (Hate Speech), गैर-भेदभाव और शांति के मूल कारणों को लेकर शिक्षा की भूमिका नाम से आयोजित अंतर्राष्ट्रीय दिवस की पहली वर्षगाँठ पर बोल रहे थे।

तिरुमूर्ति ने आगे कहा, “हम सहनशीलता और समावेश को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश करते हैं। किसी भी विचार में भिन्नता को कानूनी ढाँचे के भीतर हल किया जाना चाहिए।” बीजेपी के दो नेताओं की टिप्पणी को लेकर कई मुस्लिम देशों द्वारा दी गई प्रतिक्रिया के मामले में सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “दूसरे देशों को विशेष बात को मसला बनाकर भारत को आक्रोश दिखाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है।”

हिंदू-सिखों पर बढ़ते हमलों को लेकर उन्होंने कहा कि धार्मिक भय के रूपों को गुरुद्वारों, मठों और मंदिरों जैसे धार्मिक स्थलों पर हमलों में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है। गैर-अब्राहमिक धर्मों के खिलाफ घृणा और दुष्प्रचार के प्रसार में वृद्धि इसका उदाहरण है।

अफगानिस्तान (Afghanistan) में इस्लामिक कट्टरपंथ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कट्टरपंथियों द्वारा बामियान स्थित प्रतिष्ठित बुद्ध की मूर्ति को तोड़ना, गुरुद्वारे पर आतंकवादी हमला करना, हिंदू और बौद्ध मंदिरों का विनाश जैसे धार्मिक घृणा वाले कृत्यों की भी निंदा की जानी चाहिए।

बता दें कि अफगानिस्तान के काबुल में शनिवार (19 जून 2022) को गुरुद्वारा करते परवान पर आतंकी हमला किया गया, जिसमें दो लोगों के मौत हो गई है। वहीं, मार्च 2020 में अफगानिस्तान के ही एक गुरुद्वारे पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया गया था, जिसमें 25 सिख मारे गए थे।

तिरुमूर्ति ने यह भी कहा कि भारतीय समाज की बहु-सांस्कृतिक ढाँचे ने सदियों से भारत को आश्रयदाता बनाया है। चाहे वह यहूदी समुदाय हो, पारसी समुदाय हो या पड़ोस का तिब्बती समुदाय, भारत ने सबको सुरक्षित शरण दिया है।

टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि भारत आतंकवाद, खासकर सीमा पार आतंकवाद का सबसे बड़ा शिकार रहा है। उन्होंने कहा कि सभी देशों को एक ऐसी शिक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए, जो लोकतंत्र के सिद्धांतों को बढ़ावा देकर आतंकवाद का मुकाबला करने में सही अर्थों में योगदान दे सके।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए 15 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित करने के लिए इस साल के शुरू में एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव को पाकिस्तान द्वारा पेश किया गया था।

भारत ने सिर्फ धर्म के खिलाफ फोबिया के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाए जाने पर चिंता व्यक्त की थी। भारत ने कहा था कि धार्मिक भय के कई रूप आजकल बढ़ रहे हैं, जिनमें हिंदू विरोधी, बौद्ध विरोधी और सिख विरोधी फोबिया विशेष रूप से शामिल है।

तिरुमूर्ति ने तब कहा था कि भारत को उम्मीद है कि इससे चुनिंदा धर्मों के आधार पर फोबिया पर कई प्रस्तावों को जन्म देगा और संयुक्त राष्ट्र को धार्मिक में विभाजित करेगा। उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि केवल एक धर्म के बजाय संपूर्ण धार्मिक भय के प्रसार के रोक को स्वीकार किया जाए।

गौरतलब है कि हिंदू धर्म के 1.2 अरब, बौद्ध धर्म के 53.5 करोड़ और सिख धर्म के 3 करोड़ से अधिक अनुयायी दुनिया भर में फैले हुए हैं। वहीं, दुनिया भर इस्लाम मानने लोगों की संख्या 1.8 अरब और ईसाइयों की संख्या 2.3 अरब है। यहूदियों की संख्या 1.52 करोड़ और पारसियों की संख्या लगभग 2 लाख है।