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मारे गए दंगाइयों को जमीयत ने बताया ‘शहीद’, कानूनी सहायता का ऐलान: कहा – पैगंबर मुहम्मद का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं

नूपुर शर्माल (Nupur Sharma) के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के विरोध में 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के दिन इस्लामिक कट्टरपंथियों ने झारखंड में राँची में (Ranchi Violence) जमकर हिंसा की। हिसा के दौरान पत्थरबाजी और गोलियाँ भी चलाई गई। हनुमान मंदिर में पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की गई और पुलिस पर भी हमले किए गए गए। जवाबी कार्रवाई में कुछ दंगाइयों की मौत हो गई। रविवार (12 जून, 2022) को इस्लामिक संगठन जमीयत उलेमा ए हिन्द (Jamiat Ulema-e-Hind) ने मारे गए दंगाइयों को ‘शहीद’ करार दिया है।

इसके साथ ही इस्लामिक संगठन ने राँची के दंगाइयो को मुआवजा देने की माँग की है। जमीयत के महासचिव एम हकीमुद्दीन कासमी ने पुलिस पर मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को सार्वजनिक रूप से मारने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को घायलों के इलाज में मदद करनी चाहिए और मृतक के परिजनों को वित्तीय मुआवजा देना चाहिए। इससे पहले कॉन्ग्रेस के एमएलए इरफान अंसारी ने 50 लाख रुपए के मुआवजे की माँग की थी।

इसके साथ ही कासमी ने इस्लामिक प्रदर्शनकारियों को हर तरह की कानूनी सहायता देने का ऐलान किया है। कासमी ने कहा कि पैगंबर मुहम्मद का अपमान किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हमने शांति की अपील करने के लिए डीआईजी से मुलाकात की है और डीसीपी से मुलाकात करेंगे। हम डीजीपी, राज्यपाल और सीएम से भी मिलने की कोशिश कर रहे हैं। घटना की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया गया है और डीआईजी के अनुसार एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट आ जाएगी।”

इस बीच अब मारे गए दंगाइयों के परिजनों ने दावा किया है कि वो प्रदर्शन में शामिल ही नहीं थे। मारे गए दोनों दंगाइयों की पहचान मोहम्मद मुदस्सिर कैफ़ी (22) और मोहम्मद साहिल (24) के रूप में हुई। उल्लेखनीय है कि राँची में हुई झड़पों में दो दर्जन से अधिक लोग मारे गए और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए थे। घायल हुए 13 लोगों का इलाज रिम्स में किया जा रहा है।

आतंकियों के साथ खड़ा रहा है जमीयत

गौरतलब है कि इससे पहले हाल ही में जब वाराणसी ब्लास्ट के दोषी आतंकी वलीउल्लाह खान को कोर्ट ने फाँसी की सजा सुनाई थी तो जमीयत उसके समर्थन में खड़ा हो गया था। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी आतंकी वलीउल्लाह की फाँसी की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट जाने की बात कही थी।

संस्कृत वाली मुहरें, जाति/परिवारवाद खत्म… किसानों के लिए सब्सिडी: छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली आज भी प्रासंगिक

मुगलों की तलवार को कुंद करने वाले हिंदुस्तान के महानायक और हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक होना… यह केवल शिवाजी महाराज के विजयारोहण होने की बात नहीं है। इस देश के धर्म, संस्कृति व समाज का संरक्षण कर हिंदूराष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करने के जो प्रयास चले थे, इन सारे प्रयासों की अंतिम सफल परिणति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक है।

हिन्दू हृदय सम्राट व मराठा गौरव की उपाधि से अंलकृत महानायक छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को पुणे के जुनार स्थित शिवनेरी दुर्ग में शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ था।

माता जीजाबाई धार्मिक स्वभाव की वीरांगना नारी थीं। उनकी पहली गुरु थीं जो रामायण, महाभारत के साथ शिवाजी को भारतीय वीरों और महापुरुषों की कहानियाँ सुनाती थीं। दादा कोणदेव के संरक्षण में शिवाजी ने युद्ध कौशल की सारी कलाएँ सीखीं। शिवाजी को गुरिल्ला युद्ध या छापामार युद्ध का आविष्कारक माना जाता है। शिवाजी के गुरु समर्थ रामदास थे। छत्रपति शिवाजी तुलजा भवानी के उपासक थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली

शिवा जी का राज्य वास्तविक और कानूनी दोनों तरह से एक संप्रभु राज्य था। तथ्य यह है कि उनके पत्र… मुहरें, उपाधियाँ और उनके प्रशासन की प्रकृति… ये सभी रामराज्य या धर्मराज्य की भावना पर आधारित थी। महादेव गोविंद रानाडे के अनुसार:

“नेपोलियन प्रथम की तरह शिवाजी अपने समय में एक महान संगठनकर्ता और नागरिक संस्थानों के निर्माता थे।”

अदन्यापात्र या अजनापात्र

अदन्यापात्र या अजनापात्र भी कहा जाता है। मराठी में रामचंद्र पंत अमात्य द्वारा लिखी गई मराठा नीति के सिद्धांतों पर एक शाही आदेश है, जिन्होंने मराठा राजा शिवाजी को वित्त मंत्री यानी अमात्य के रूप में अष्ट प्रधान परिषद में सेवाएँ दी थीं। अष्टप्रधान की हम आगे चर्चा करेंगे… लेकिन पहले हम आपको अदन्यापात्र के बारे में बता रहे हैं। शिवा जी के राज्य की महिमा और गरिमा भौतिक विस्तार से ज्यादा उनके आदर्शों, सिंद्धातों के चलते इतिहासकारों ने की है।

रामचंद्र पंत अमात्य, जो अपनी अदन्यापत्र और राजनीति में छत्रपति शिवाजी महाराज के राजनीतिक दिमाग को सटीक रूप से दर्शाते हैं… उनके स्वराज्य की भव्य राजनीति की आवश्यक विशेषताओं को एक स्पष्ट रूप से विचार प्रदान करते हैं।

शिवाजी के स्वराज्य प्रशासन के प्रमुख सिद्धांत थे

  1. अपने लोगों की भलाई और राज्य के सामान्य कल्याण को बढ़ावा देना
  2. स्वराज्य की रक्षा के लिए एक कुशल सैन्य बल बनाए रखना
  3. कृषि और उद्योग को बढ़ावा देकर लोगों की आर्थिक जरूरतों को पर्याप्त रूप से उपलब्ध कराना

मराठी और संस्कृत

छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली और आधिकारिक भाषाओं को लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज की शासन प्रणाली पर काम करने वाले डॉ. केदार फाल्के बताते हैं।

जहाँ तक आधिकारिक भाषा का प्रश्न है… शिवाजी ने फारसी और अरबी के स्थान पर मराठी की शुरुआत की, जिसे मुस्लिम शासकों ने अपने शासन के पहचान के रूप में लागू किया था। शिवाजी ने आधिकारिक उद्देश्यों के लिए संस्कृत में राज्यव्यवहारकोश नाम से एक विशेष शब्दकोश तैयार करवाया।

यह दुरूह और बड़ा कार्य रघुनाथपंत हनुमंते के कुशल निर्देशन में अनेक विद्वान पंडितों द्वारा किया गया, जिनमें एक धुंडीराज लक्ष्मण व्यास का विशेष रूप से उल्लेख है। इसी तरह प्रशासनिक कार्यों के संचालन के लिए नियम बनाए गए। संस्कृत और मराठी को काम-काज की भाषा बनाकर फारसी के प्रभाव को खत्म किया गया।

उन दिनों अधिकांश शाही मुहरें फारसी में खुदी हुई थीं। शिवाजी ने उन्हें संस्कृत से बदल दिया। अपनी भाषा और अपने धर्म के साथ स्वराज्य प्राप्त करने के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन था। शिवाजी ने जिस शाही मुहर को अपनाया, उसमें उनके आदर्शों और उनकी उपलब्धियों का बखूबी वर्णन किया गया है।

अष्ट प्रधान मंडल
आज के समय में दुनियाभर में शासन और पावर के डिसेंट्रालाइजेशन की बात होती है। सत्ता के विकेंद्रीकरण पर बड़े-बड़े सेमिनार और व्याख्यान होते हैं। लेकिन साढ़े तीन सौ साल पहले शिवा जी महाराज ने अपने शासन की बागडोर सुचारु रुप से चलाने के लिए जिस तरह से सत्ता का विकेंद्रीकरण किया… उससे समाज आज भी प्रेरणा ले सकता है।

शिवा जी ने अपने शासन के तहत जनहित के कार्यों एवं चहुँमुखी विकास के लिए एक अष्ट प्रधान मंडल की व्यवस्था की थी। ये अष्ट प्रधान मंडल के रूप में जाना जाता था। इसमें आठ मंत्रियों की सीटें थीं, इसे आप नीचे समझ सकते हैं:

  1. मोरो पंत, पेशवा या मुखिया प्रधान – पेशवा को प्रशासन के सभी प्रमुख कार्यों की जिम्मेदारी दी जाती थी।
  2. नारो नीलकंठ और रामचंद्र नीलकंठ, अमात्य – पूरे राज्य की आय और व्यय का लेखा-जोखा देखने की जिम्मेदारी दी गई थी।
  3. रघुनाथ राव के पुत्र, पंडित राव : सभी धार्मिक कार्यों पर अधिकार क्षेत्र दिया गया। सही क्या है और क्या गलत है, इसका फैसला करने के बाद उन्हें दंडित करने का भी अधिकार प्राप्त था।
  4. हम्बीर राव मोहिते, सेनापति (सेना को मजबूत बनाए रखने, युद्ध और अभियान का दायित्व)
  5. दत्ताजी त्र्यंबक, मंत्री (राज्य के राजनीतिक और राजनयिक मामलों का सावधानीपूर्वक संचालन करने की जिम्मेदारी)
  6. रामचंद्र पंत सुमंतव (विदेश मामलों का प्रभार)
  7. अन्नाजी पंत, सचिव (शाही पत्र-व्यवहार को ध्यान से देखने और जब भी कोई पत्र छूट जाए तो उसमें आवश्यक सुधार करने की जिम्मेदारी)
  8. नीराजी राउजी, न्यायाधीश (राज्य में सभी मुकदमों निस्तारित करने और न्याय देने का अधिकार)

छत्रपति शिवा जी की शासन में कृषि व्यवस्था

शिवाजी की कृषि को प्रोत्साहित करने की नीति के बारे में सभासद लिखते हैं:

“जो नए किसान आएँगे, हमारे राज्य में बसने के लिए, उन्हें मवेशी दिए जाने चाहिए। उन्हें बीज देने के लिए अनाज और पैसा दिया जाना चाहिए।”

कृषि और किसानों के हित में शिवाजी ने अनेकों उल्लेखनीय कार्य किए।

शिवा जी की राजमुद्रा

शिवाजी की राजमुद्रा संस्कृत में लिखी हुई एक अष्टकोणीय मुहर (Seal) थी, जिसका उपयोग वे अपने पत्रों एवं सैन्य सामग्री पर करते थे। उनके हजारों पत्र प्राप्त हैं, जिन पर राजमुद्रा लगी हुई है। मुद्रा पर लिखा वाक्य इस तरह है-

प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते।
(अर्थात : जिस प्रकार बाल चन्द्रमा प्रतिपद (धीरे-धीरे) बढ़ता जाता है और सारे विश्व द्वारा वन्दनीय होता है, उसी प्रकार शाहजी के पुत्र शिव की यह मुद्रा भी बढ़ती जाएगी।)

छत्रपति शिवाजी महाराज का शासन भोंसले घराने का शासन नहीं था। उन्होंने परिवारवाद को राजनीति में स्थान नहीं दिया। उनका शासन सही अर्थ में प्रजा का शासन था। शासन में सभी की सहभागिता रहती थी। सामान्य मछुआरों से लेकर वेदशास्त्र पंडित सभी उनके राज्यशासन में सहभागी थे। छुआछूत का कोई स्थान नहीं था। पन्हाल गढ़ की घेराबंदी में नकली शिवाजी जो बने थे, उनका नाम था, शिवा काशिद। वे जाति से नाई थे।

अफजलखान के समर प्रसंग में शिवाजी के प्राणों की रक्षा करनेवाला जीवा महाला था। आगरा के किले में कैद के दौरान उनकी सेवा करने वाला मदारी मेहतर था। उनके किलेदार सभी जाति के थे।

1645 के आसपास शिवाजी ने अपनी रणनीति से बीजापुर सल्तनत के तहत पुणे के आसपास इनायत खां से तोरण, फिरंगोजी नरसाला से चाकन और आदिलशाह के गवर्नर से कोंडाना किले जीते। इसके साथ ही सिहंगढ़ और पुरंदर के किले भी उनके अधिपत्य में शामिल थे। प्रतापगढ़ के युद्ध में शिवाजी के नेतृत्व में मराठा सेना ने बीजापुर सल्तनत के 3000 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। बीजापुर सल्तनत के साथ संघर्ष के चलते शिवाजी, औरंगजेब के निशाने पर आ गए। शिवाजी हिन्दू धर्म व परंपरा के प्रबल पक्षधर थे, इसलिए उनके प्रत्येक अच्छे कार्य व अभियान का श्रीगणेश दशहरे के अवसर पर होता था।

तलवार के बल पर इस्लामीकरण हो रहा था। शिवाजी महाराज की दृष्टि क्या थी? विदेशी मुसलमानों को चुन-चुन कर उन्होंने बाहर कर दिया। अपने ही समाज से मुस्लिम बने समाज के वर्ग को आत्मसात करने हेतु अपनाने की प्रक्रिया उन्होंने चलाई। कुतुबशाह को अभय दिया। लेकिन अभय देते समय यह बताया कि तुम्हारे दरबार में जो तुम्हारे पहले दो वजीर होंगे, वे हिंदू होंगे। उसके अनुसार व्यंकण्णा और मादण्णा नाम के दो वजीर नियुक्त हुए और दूसरी शर्त ये थी कि हिंदू प्रजा पर कोई अत्याचार नहीं होगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज ने करीब साढ़े तीन सौ साल पहले स्वराज्य, स्वधर्म, स्वभाषा और स्वदेश के पुनरुत्थान के लिए जो कार्य किया है… उसकी तुलना नहीं हो सकती। उनका राज्याभिषेक एक व्यक्ति को राजसिंहासन पर बिठाना, इतने तक सीमित नहीं था। शिवाजी महाराज मात्र एक व्यक्ति नहीं, वे एक महान विचार… एक महान प्रेरणापुंज और एक युगप्रवर्तन के शिल्पकार हैं।

भारत एक सनातन देश है, यह हिंदुस्थान है, और यहाँ पर अपना राज होना चाहिए… अपने धर्म का विकास होना चाहिए, अपने जीवनमूल्यों को चरितार्थ करना चाहिए… शिवाजी महाराज का जीवनसंघर्ष इसी सोच को प्रस्थापित करने के लिए था। वे बार-बार कहा करते थे, “यह राज्य हो, यह परमेश्वर की इच्छा है। मतलब स्वराज्य संस्थापना यह ईश्वरीय कार्य है। मैं ईश्वरीय कार्य का केवल एक सिपाही हूँ।”

मंदिर के बगल की जमीन को बताने लगे अपना, अब गुजरात में पत्थरबाजी: कॉन्स्टेबल को घोंपा चाकू, पुलिस ने चलाई रबड़ की 30 गोलियाँ

गुजरात के आणंद जिले में साम्प्रदायिक हिंसा की खबर है। बताया जा रहा है कि झड़प में 4 लोग घायल हुए हैं जिसमें एक पुलिस का सिपाही भी शामिल है। घटना की शुरुआत एक मंदिर के पास जमीन के लिए तनातनी से हुई बताई जा रही है। हालात काबू करने के लिए पुलिस को ऑंसू गैस के गोले छोड़े पड़े। अब तक कुल 14 की गिरफ्तारी का दावा किया जा रहा है। घटना शनिवार (11 जून) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद बोरसद कस्बे में हुआ है। यहाँ पर ब्राह्मणवाडा मोहल्ले में कुछ लोग मंदिर के बगल की एक जमीन पर ईंटे बिछा रहे थे। वह जमीन विवादित बताई जा रही है। दूसरे पक्ष ने इसका विरोध किया तो मामला तू-तू मैं-मैं से हाथापाई तक जा पहुँचा। देखते ही देखते एक पक्ष पथराव करने लगा। घटना की जानकारी पुलिस को हुई तो उन्होंने मौके पर पहुँच कर मोर्चा संभाला। हालत काबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के 50 गोले और रबर की 30 गोलियाँ चलानी पड़ी।

पथराव की चपेट में आने से 3 लोगों को चोटें आईं। एक पुलिस कॉन्स्टेबल को चाकू मार दी गई है। हालत गंभीर होने के चलते सिपाही को वडोदरा के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। फ़िलहाल हालत काबू में हैं। इलाके में भारी फ़ोर्स की तैनाती की गई है।

DSP डी आर पटेल ने बताया, “दोनों समुदायों से शाँति स्थापित करने की अपील की गई है। शहर के 15 संवेदनशील जगहों को चिह्नित कर के वहाँ फ़ोर्स की तैनाती की गई है।” इस घटना में चाकूबाजी भी होने का दावा किया गया है। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। बाकी आरोपितों की धर-पकड़ और पहचान के लिए पुलिस टीमें काम कर रही हैं। पुलिस ने लोगों से अफवाहों से दूर रहने और उस पर ध्यान न देने की अपील की है।

शराब के बॉन्ड बेच कर आंध्र की जगन रेड्डी सरकार ने कमाए ₹8000 करोड़, दारू से एक साल में ₹18000 करोड़ की हुई थी कमाई

आंध्र प्रदेश सरकार को शराब बॉन्ड से 8000 करोड़ रुपए मिले हैं। सरकार ने पिछले दिनों ‘एपी बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड’ के माध्यम से बॉन्ड जारी किया था। इस पर सरकार को काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। शुक्रवार (10 जून, 2022) को इसमें बड़ा उछाल देखने को मिला। इससे सरकार को 8000 करोड़ रुपए मिले हैं।

जानकारी के मुताबिक, सरकार ने गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCD) की पेशकश करके कम से कम 2000 करोड़ रुपए जुटाने का प्रस्ताव रखा था। हालाँकि मार्केट में इसको लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डेक्कन क्रॉनिकल को बताया, “फिलहाल हम केवल 8000 करोड़ रुपए का इस्तेमाल करना चाहते हैं।”

इससे पहले, तेलुगु देशम सरकार ने ‘अमरावती विकास निगम’ के माध्यम से बड़ी धूमधाम से बिक्री के लिए बॉन्ड जारी किया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ समारोह में हिस्सा लिया था।

उस समय 10.52 फीसदी ब्याज दर वाले अमरावती बॉन्ड की बिक्री से 2000 करोड़ रुपए मिले थे। इस बार मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 7.5 प्रतिशत की आधार ब्याज दर तय की थी, लेकिन यह 9.5 प्रतिशत पर जाकर फिक्स हुई। पिछले वित्त वर्ष में शराब की बिक्री से राजस्व दोगुना होकर 18,000 करोड़ रुपए हो गया था, जो इससे पिछले साल 9,000 करोड़ रुपए था। 

रेटिंग एजेंसियों – क्रिसिल और इंडिया रेटिंग – ने पेश किए जा रहे बॉन्ड को स्थिर श्रेणी में रखा गया। इंडिया रेटिंग ने कई कारकों के आधार पर “प्रोविजनल एए (CE) स्टेबल” दिया, जिसमें थोक और खुदरा शराब व्यापार दोनों के मालिक होने की मौजूदा नीति में बदलाव नहीं करने की सरकार की प्रतिबद्धता शामिल है।

दिलचस्प बात यह है कि इंडिया रेटिंग की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने यह भी वचन दिया कि वह मादक पेय पर पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध नहीं लगाएगी। नोट में कहा गया है, “अगर सरकार शराब की बिक्री और खपत पर प्रतिबंध लगाती है, तो वह इस तरह के अधिरोपण की तारीख से तीन महीने के भीतर सभी बकाया बॉन्डों का समय से पहले आरोपण सुनिश्चित करेगी।”

नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी पर लटकाया, निंदा करने पर वेंकटेश प्रसाद को कट्टरपंथियों ने बनाया निशाना: स्वरा भास्कर भी बिफरीं

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के पैगंबर मुहम्मद पर कथित बयान के विरोध में कर्नाटक के बेलगावी में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने एक मस्जिद के सामने उनके पुतले को फाँसी पर लटका दिया था। रविवार (12 जून, 2022) को पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद ( Venkatesh Prasad) ने इस मुद्दे पर एक ट्वीट कर नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी दिए जाने की निंदा की। फिर क्या था, इस्लामी विचारधारा वाले लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।

इस मुद्दे पर प्रसाद ने एक ट्वीट के जरिए नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी पर लटकाए जाने को बेहद डरावना करार दिया। उन्होंने कहा कि यकीन ही नहीं हो रहा है कि ये 21वीं सदी का भारत है। पूर्व क्रिकेटर ने लोगों से राजनीति को एक तरफ कर अपने विवेक से काम लेने की सलाह दी। प्रसाद ने कहा कि ये बहुत ज्यादा हो गया है। ये केवल एक पुतला नहीं था, बल्कि कइयों को ये धमकी थी। हालाँकि, उनकी विवेक वाली अपील के बाद कुछ कथित लिबरल और इस्लामवादियों ने उन्हें ही घेरना शुरू कर दिया।

इसी क्रम में कई इस्लामवादियों ने अयोध्या में विवादित ढाँचे के विध्वंस की तस्वीरों को शेयर किया, जिसके बाद हिंसक दंगे भड़क गए थे। इस घटना के 10 साल बाद 2002 में एक इस्लामिक भीड़ ने अयोध्या से आने वाले तीर्थयात्रियों से भरी ट्रेन में आग लगा दी थी।

ये बड़ी ही हैरानी वाली बात है कि कुछ लोग इन तस्वीरों का इस्तेमाल नूपुर शर्मा को दी जा रही हत्या की धमकियों को जस्टिफाई करने में कर रहे हैं। ये अपनी इस्लामिक किताब का हवाला देते हैं।

कई कट्टरपंथी मानसिकता वाले इस्लामवादियों ने तो नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी दिए जाने को सही ठहराने के लिए राँची पुलिस द्वारा दंगाइयों पर की गई कार्रवाई की तस्वीरों को शेयर कर रहे हैं।

यहीं नहीं, कई लोगों ने तो नूपुर शर्मा के पुतले को फाँसी पर लटकाए जाने को जस्टिफाई करने के लिए कुतर्क दिया कि क्रिकेट फैंस और राजनीतिक कार्यकर्ता तो अक्सर पुतले जलाते हैं। हालाँकि, पुतले को फाँसी देकर कट्टरपंथियों ने ये संदेश दिया है कि अगर उनकी ‘धार्मिक भावनाओं को आहत’ किया गया तो ऐसा करने वालों के साथ इसी तरह का सुलूक होगा।

वामपंथी और इस्लामवादी बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर भी नूपुर शर्मा के पुतले के साथ किए गए सुलूक को सही ठहराने में लग गईं। अभी तक उन्होंने इस्लामिक दंगाइयों के कृत्य की निंदा नहीं की है। एक्ट्रेस ने कहा कि इसी तरह का डर बीफ लिंचिंग और लव जिहाद में कथित रूप से जिंदा जलाने वालों के लिए भी होना चाहिए।

गौरतलब है कि जिस तरह से नूपुर शर्मा के पुतले को लटकाया गया है, ठीक उसी तरह से अफगानिस्तान में कब्जा करने के तालिबान ने प्रदर्शन कर रहे लोगों के शवों को क्रेन से लटका दिया था।

‘ये 1992 का भारत नहीं है… हम मस्जिद का नल भी नहीं देंगे’ : SDPI नेताओं ने हिंदुओं को दी देश छोड़ने की धमकी, कॉन्ग्रेस-सपा को कहा- ‘हरामखोर’

नुपूर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद पर किए गए सवाल के बाद कट्टरपंथी जगह-जगह आतंक मचाने पर जुटे हुए हैं। यूपी से लेकर बंगाल तक में जुमा नमाज के बाद भीषण हिंसा देखी गई। अब इसी क्रम में कुछ वीडियोज इंटरनेट पर सामने आई हैं और ऐसे दावे हुए हैं कि ये हिंसा पूर्व नियोजित थी जिसके पीछे पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया की पॉलिटिकल ईकाई SDPI का हाथ था।

ट्विटर यूजर विजय पटेल ने इस संबंध में लगातार कई ट्वीट शेयर किए। उन्होंने दावा किया है कि SDPI द्वारा जारी प्रदर्शन का पोस्टर हर रैली में देखा गया। इन रैलियों में SDPI के लोग खुलेआम सड़कों पर सिर तन से जुदा के नारे लगाते सुनाए पड़े।

वीडियो में भारतीय सरकार को ललकारते हुए SDPI नेता कहता है- “तुमने बहुत बड़ी भूल कर दी है पैगंबर मोहम्मद की गुस्ताखी करके। ये मुसलमान जीता, उठता, सांस लेता ही अपने नबी के लिए है। अगर तुमने हमारे नबी की शान में गुस्ताखी की, तो मैं ये कहना चाहता हूँ… गुस्ताख-ए-रसूल की एक ही सजा, सिर तन से जुदा सिर तन से जुदा।” वीडियो में देख सकते हैं कि कैसे सैंकड़ों की भीड़ भी इस प्रदर्शन का हिस्सा है और जोर जोर से सिर तन से जुदा के नारे लगाती है।

आगे SDPI का ये व्यक्ति भीड़ को भड़काते हुए कहता है कि ये 1992 का भारत नहीं है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “हमारी एक मस्जिद थी वो चली गई लेकिन अभी हमारे दिलों से नहीं गई है। आप भूल जाओ मस्जिद क्या, फव्वारा क्या… अब मस्जिद के लाइट, नल के लिए अपनी जानों को कुर्बान कर देंगे। तुमने क्या समझा है कि ये 1992 का भारत है। ये अब का भारत है… जब तक हमें इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक हम अपनी आवाज को इसी तरह उठाएँगे। अगर रहना हो तो इज्जत से इस मुल्क में रहो। हम हर एक की कदर करना जानते हैं। अगर तुम नहीं जानते तो तुम्हारे बाप जहाँ से आए थे वहाँ चले जाओ।”

इसके बाद अगली वीडियो में एक और कट्टरपंथी नेता रैली के बीच खड़ा होता है और कहता है, “हमने अमन का भाईचारे का पैगाम दिया। अब मैं कहना चाहता हूँ यहाँ की हुकूमत को, यहाँ की इंटेलीजेंस को, यहाँ की पुलिस को… अगर नुपूर शर्मा को सजा नहीं दे सकते, अगर नवीन जिंदल को आप सजा नहीं दे सकते, इस मुल्क के कानून के तहत आप सजा नहीं दे सकते या आपको किसी का हुकूम आना जरूरी है, अगर आपमें इतना दम नहीं कि आप नुपूर शर्मा और नवीन जिंदल को फाँसी पर लटका सको, तो उन लोगों को हमारे हवाले कर दो। ” इसके बाद मजहबी नेता भरी रैली में हिंदुओं के प्रति घृणा व्यक्त करता है और कहता है कि जब तक SDPI का एक भी कार्यकर्ता जिंदा है तब तक देश को हिंदू राष्ट्र ब्राह्मण राष्ट्र बनाने का सपना कभी पूरा नहीं होगा।

अगली वीडियो में अन्य जगह एक अन्य SDPI नेता कहता सुनाई पड़ता है, “आरएसएस के गंदे कीड़ों, तुम हमारे नबी का नाम ले रहे हो, मैं आपको बताता हूँ, आज हमको ये महसूस हो गया कि ये आरएसएस और बीजेपी के गंदे कीड़े, ये बुजदिल और बेफकूफ हैं ये लोग। हमने इस मुल्क के अंदर SDPI को बनाया है। इस पार्टी को बनाने से लेकर अब तक हम चैंलेज कर रहे हैं कि इस पार्टी का वजूद तुमसे टकराने के लिए हुआ है।”

अगली वीडियो में चलती भीड़ से गुस्ताख ए रसूल की एक ही सजा-सिर तन से जुदा,सिर तन से जुदा के नारे लगवाए जा रहे हैं। रैली में शामिल लोगों के हाथ में नुपूर शर्मा के पोस्टर हैं और मुँह पर नरेंद्र मोदी हाय-हाय का नारा।

बता दें कि ऐसी तमाम वीडियोज कट्टरपंथियों की सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। कट्टरपंथी नुपूर शर्मा को या तो फाँसी देने की माँग कर रहे हैं या फिर माँग कर रहे हैं नुपूर शर्मा को उनके हवाले कर दिया जाए। भाजपा के साथ इन कट्टरपंथियों को अब कॉन्ग्रेस और सपा से भी नाराजगी है। इन पार्टियों को उन्होंने ‘हरामखोर’ कहा है। बंगाल मुख्यमंत्री को तो कहा गया कि वो जो आज मुख्यमंत्री बनी बैठी हैं वो इन्हीं मुसलमानों की देन हैं।

जावेद पंप और उसकी बेटी आफरीन फातिमा के घर चला योगी सरकार का बुलडोजर, प्रयागराज हिंसा इसी का षड्यंत्र: देखें वीडियो

बीजेपी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के पैगंबर मुहम्मद पर कथित टिप्पणी के विरोध में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद प्रयागराज में इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा की गई हिंसा के बाद यूपी पुलिस एक्शन में है। इसी क्रम में इस हिंसा के मास्टरमाइंड जावेद उर्फ पंप की घर पर योगी सरकार ने बुलडोजर चला दिया है। उसके घर को प्रशासन ने ढहाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

हालात को देखते हुए जावेद के घर के आसपास भारी संख्या में पुलिस फोर्स को डिप्लॉय किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित जावेद के घर को अवैध करार देते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने पहले उसके आवास पर एक नोटिस लगाया था, जिसमें उसे आज सुबह 11 बजे तक घर खाली करने के लिए कहा था।

बताया जा रहा है कि जावेद अहमद उर्फ पंप प्रयागराज में हिंसा के दौरान बच्चों को आगे करके पुलिस पर पत्थरबाजी करवाई थी। उसे शनिवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। इसकी पुष्टि प्रयागराज के एसएसपी अजय कुमार ने की थी। मामले में जावेद अहमद की बेटी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। SSP अजय कुमार ने बताया, “जावेद की बेटी भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल है। वह दिल्ली में छात्रा है। जरूरत पड़ी तो हम दिल्ली पुलिस से संपर्क कर अपनी टीमें भेजेंगे।” रिपोर्ट के अनुसार जावेद अहमद की बेटी नाम सारा अहमद है। वह जेएनयू में पढ़ती है।

यहीं नहीं इस घटना में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से जुड़े लोगों के भी शामिल होने की बातें सामने आ रही है। इस पर SSP का कहना था कि फिलहाल ऐसे किसी कनेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि प्रयागराज में इस्लामिक कट्टरपंथियों की हिंसा के मामले में कड़ा एक्शन लिया है। एसएसपी अजय कुमार के मुताबिक, आरोपितों के ऊपर 29 अहम धाराओं के तहत केस दर्ज कर गैंगस्टर एक्ट और एनएसए के तहत कार्रवाई होगी। 70 नामजद और 5000 अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

संदिग्ध हालत में मिला टॉप फैशन डिजाइनर का शव, बेडरूम से कार्बन मोनो ऑक्साइड सिलिंडर बरामद: माधुरी-रवीना के लिए भी किया था काम

टॉलीवुड (Tollywood) की टॉप और बॉलीवुड (Bollywood) में भी लोकप्रिय फैशन डिजाइनर प्रत्यूषा गरिमेला (Prathyusha Garimella) का शव उनके अपार्टमेंट से बरामद हुआ है। माना जा रहा है कि उन्होंने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या की है। पुलिस ने इसे संदिग्ध मौत मानते हुए मामला दर्ज कर लिया है।

प्रत्यूषा तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद (Hyderabad, Telangana) के बंजारा हिल्स थाना क्षेत्र के अंतर्गत फिल्म नगर स्थित एक मकान में रहती थी। इसी फ्लैट में उनका शव बरामद हुआ है। पुलिस को 35 साल की प्रत्यूषा गरिमेला के बेडरूम से कार्बन मोनो ऑक्साइड (Carbon Mono Oxide) का सिलेंडर बरामद हुआ है। इसी आधार पर इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है।

कहा जा रहा है कि प्रत्यूषा ने कार्बन मोनोऑक्साइड को सूंघकर मौत को गले लगाया है। इसका कारण डिप्रेशन (अवसाद) बताया जा रहा है। प्रत्यूषा के बेडरूम से एक नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें लिखा है- “मैं डिप्रेशन में हूँ और बहुत अकेला महसूस कर रही हूँ।” नोट में उन्होंने इसको जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

इस घटना की सबसे पहला जानकारी सिक्योरिटी गार्ड को मिली। शनिवार (11 जून 2022) को दोपहर सिक्योरिटी चेक के दौरान उसने प्रत्यूषा के दरवाजे को खुलवाने की कोशिश की तो उसे काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद सशंकित गार्ड ने पुलिस को सूचना दी।

गार्ड की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुँची और घर का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। वहाँ बाथरूम में प्रत्यूषा का शव पड़ा हुआ मिला। इसके बाद पुलिस ने इसकी सूचना प्रत्यूषा के के घरवालों और दोस्तों को दी। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया अस्पताल भेज दिया है।

पिछले साल प्रत्यूषा ने फेमिना को बताया था कि फैशन डिजाइनिंग में अपना करियर शुरू करने से पहले मास्टर की पढ़ाई के लिए यूके गई थीं। इसके बाद उन्होंने अपने पिता की एलईडी (LED) बनाने वाली कंपनी ज्वॉइन किया। हालाँकि, बहुत जल्दी ही इससे उनका मन भर गया। उन्होंने बताया था कि उन्हें पता चल गया था कि वह नौकरी के लिए नहीं बनी हैं और उसकी रुचि कहीं और है।

प्रत्यूषा ने फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई अमेरिका से की थी और अपने करियर की शुरुआत हैदराबाद में की। साल 2013 में उन्होंने अपने नाम से एक लेबल भी शुरू किया था। प्रत्यूषा ने टॉलीवुड के अलावा बॉलीवुड की माधुरी दीक्षित, रवीना टंडन, काजोल, परिणति चोपड़ा, हुमा कुरैशी, श्रिया सरन, काजल अग्रवाल, जूही चावला, गौहर खान, नेहा धूपिया, भूमि पेडनेकर जैसे कई सेलिब्रेटी के लिए काम किया था।

कैसे होती से कार्बन मोनो ऑक्साइड से मौत

कार्बन मोनो ऑक्साइड शरीर को ऑक्सीजन पहुँचाने वाले रेड ब्लड सेल्स पर असर डालते हुए हीमोग्लोबिन मॉलिक्यूल को ब्लॉक देती है। इससे शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिलता और पूरा प्रभावित होने लगता है। इसके बाद मितली होने लगती है। फिर चक्कर व बेहोशी छाने लगती है और फिर मौत हो जाती है।

जब कोई जीव, खासकर मनुष्य, साँस लेता है तो उसके शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह होता है। यह ऑक्सीजन रक्त में जाता है और उसमें मौजूद हीमोग्लोबिन में घुल जाता है और फेफड़ों के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुँचता है।

वहीं, हीमोग्लोबिन जब कार्बन मोनो ऑक्साइड के संपर्क में आता है तो वह घुलता नहीं है। इससे हीमोग्लोबिन मॉलिक्यूल ब्लॉक हो जाते हैं। फिर ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण शरीर के सेल्स मरने लगते हैं और मौत हो जाती है।

3 रस्सी की ब्रा और पैंटी पहन हजारों को दिखाया स्तन, पुलिस के सामने हिलाया पिछवाड़ा: बच्चों के साथ ‘मर्द’ की अश्लील हरकत

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो अमेरिका का बताया जा रहा है। ये वायरल वीडियो उस प्रदर्शन का है, जिसे LGBTQ के अधिकारों के लिए यूरोपीय संघ की तरफ से आयोजित किया गया था। इसमें परेड में बच्चे भी शामिल थे। 

वायरल हो रहे इस क्लिप में मर्द जैसे दिखने वाले एक प्रदर्शनकारी शख्स को बच्चों के सामने अश्लील हरकत करते हुए देखा जा सकता है। शख्स ने ब्रा और पैंटी पहन रखा है। यह ब्रा महज 3 रस्सियों का है। इसमें से उसका स्तन साफ तौर पर दिख रहा है, क्योंकि उसे ढका ही नहीं गया है। हजारों की भीड़ में वह स्तन दिखाते हुए आता है। पहले वह प्रदर्शनकारियों की भीड़ के सामने अपना पिछवाड़ा हिलाता है और फिर आगे बढ़ता है। इस दौरान काफी तेज म्यूजिक बज रहा होता है, जिस पर वह इठलाता हुआ आगे बढ़ता है।

इसके बाद वह पुलिस की तरफ बढ़ता है। पुलिस उसे अपनी ओर बढ़ता देख पीछे हटने लगता है। इसके बाद शख्स पुलिस की तरफ देखकर अपना पिछवाड़ा हिलाने लगता है, जिससे पुलिस अधिकारी भी असहज हो जाते हैं। वह पहले नजर नीचे करते हैं और फिर दूसरी तरफ मुड़ जाते हैं। हालाँकि वह प्रदर्शनकारी शख्स को रोकने की कोशिश करते नहीं दिखाई देते हैं।

इस मार्च के दौरान वहाँ काफी बच्चे थे। इस शख्स के पीछे बच्चों का एक पूरा समूह था जो प्राइड के झंडे लहरा रहा था। इस कार्यक्रम में संभवतः सैकड़ों बच्चे भाग ले रहे थे और इसका हिस्सा थे। इस मार्च का वीडियो वायरल होने के बाद तमाम लोग आपत्ति जता रहे हैं।

बार-बार बलात्कार के बाद लिक्विड अटैक: राजस्थान के कॉन्ग्रेसी मंत्री के बेटे से 8 घंटे पूछताछ, अब केस वापसी के लिए हमला-धमकी

राजस्थान की गहलोत सरकार में मंत्री महेश जोशी के बेटे रोहित पर रेप का आरोप लगा है। आरोप लगाने वाली लड़की ने अब खुद पर जानलेवा हमले की शिकायत दर्ज करवाई है। पीड़िता के मुताबिक दिल्ली में उस पर कोई लिक्विड फेंका गया है।

लिक्विड फेंकने वाले हमलावरों की संख्या दो बताई जा रही है। इन पर केस वापसी के लिए धमकाने का भी आरोप लगा है। दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (11 जून 2022) की बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 23 वर्षीया पीड़िता एक न्यूज़ चैनल में एंकर के तौर पर काम कर चुकी हैं। उन्होंने मंत्री महेश जोशी और उनके बेटे रोहित से अपनी जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की माँग की थी। पुलिस को पीड़िता द्वारा दी गई शिकायत में कहा गया:

“2 हमलावरों ने मुझ पर कोई तरल पदार्थ फेंका। वह मेरे चेहरे और हाथों पर लगा। उन्होंने मुझे धमकाते हुए कहा कि तू नहीं मानेगी क्या? केस वापस ले ले।”

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक पीड़िता पर हमला ओखला इलाके में रात में लगभग 9:30 पर हुआ। पीड़िता के मुताबिक फेंके गए लिक्विड से उसके चेहरे पर जलन हो रही है। साथ ही आरोप है कि हमलावरों ने पीड़िता से इस घटना को बस एक ‘ट्रेलर’ भर बताया।

इस रिपोर्ट को शेयर करते हुए भाजपा नेता अमित मालवीय ने लिखा, “अशोक गहलोत सरकार के मंत्री महेश जोशी के बेटे पर जिस लड़की ने दुष्कर्म का केस दर्ज करवाया था, उस पर कल रात दिल्ली में हमला हुआ। चेहरे पर केमिकल फेंका गया। केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। मंत्री का बेटा फ़रार है और लड़की AIIMS के ट्रॉमा सेंटर में। कहाँ हैं राहुल और प्रियंका?

गौरतलब है कि जयपुर की रहने वाली पीड़िता ने महेश जोशी के बेटे रोहित पर खुद को नशीला पदार्थ खिला कर कई बार रेप का आरोप लगाया है। इस शिकायत पर दिल्ली पुलिस में रोहित के खिलाफ रेप और ब्लैकमेलिंग का केस भी दर्ज हुआ है। जाँच के दौरान दिल्ली पुलिस ने आरोपित रोहित से 8 घंटे लम्बी पूछताछ भी की है।