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ज्ञानवापी, शिवलिंग, मुस्लिम, मंदिर आंदोलन… RSS प्रमुख मोहन भागवत ने ‘भारत’ से जो कहा, जैसा कहा, सब कुछ एक साथ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने कहा है कि ज्ञानवापी जैसे देवस्थल जिनसे हिंदुओं की श्रद्धा जुड़ी हुई है उनका समाधान आपसी सह​मति से होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर अदालत का फैसला सबको मानना चाहिए। वे गुरुवार (2 जून 2022) को नागपुर में संघ के तृतीय वर्ष प्रशिक्षण समारोह के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मंदिर के लिए आंदोलन

भागवत ने कहा, “अभी ये प्रकरण निकल रहे हैं। ज्ञानवापी का मुद्दा चल रहा है। अब ऐसे मुद्दे हैं, एक इतिहास तो है, उसको हम बदल नहीं सकते। वो इतिहास हमने नहीं बनाया। न आज के अपने आपको हिन्दू कहलाने वालों ने बनाया, न आज के मुसलमानों ने बनाया। उस समय घटा। इस्लाम बाहर से आया, आक्रामकों के हाथ आया। उस आक्रमण में भारत की स्वतंत्रता चाहने वालों का मनोबल गिराने के लिए देवस्थान तोड़े गए। हजारों हैं। हिन्दू समाज का विशेष ध्यान जिन पर है, विशेष श्रद्धा जिनके बारे में है। ऐसे कुछ हैं, उसके बारे में मामले उठते हैं। अब इसका विचार क्या करना, ये मुसलमानों के विरूद्ध नहीं सोचता हिन्दू। आज के मुसलमानों के उस समय पूर्वज भी हिन्दू थे। उन सब को स्वतंत्रता से चिरकाल तक वंचित रखने के लिए उनका मनो-धैर्य दबाने के लिए किया गया, इसलिए हिन्दू को लगता है कि इसका पुनरुद्धार होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “हम तो इस मामले में कुछ नहीं कह रहे हैं। हमने नौ नवंबर को कह दिया था कि एक राम मंदिर का आंदोलन था, जिसमें हमने अपनी प्रकृति के विरुद्ध किसी ऐतिहासिक कारण से उस समय की परिस्थिति में सम्मिलित हुए। हमने उस काम को पूरा किया। अब हमको कोई आंदोलन नहीं करना है, लेकिन यदि कुछ मुद्दे मन में हैं तो उठते हैं। यह किसी के विरुद्ध नहीं है। इसे किसी के खिलाफ नहीं मानना चाहिए। मुसलमानों को तो नहीं ही मानना चाहिए और हिन्दुओं को भी ये नहीं करना चाहिए।”

अदालत का फैसला मानना चाहिए

संघ प्रमुख ने कहा कि यह अच्‍छी बात होगी कि ऐसे मसलों पर मिल बैठकर सहमति से कोई रास्‍ता निकालना चाहिए। लेकिन, हर बार ऐसा रास्‍ता नहीं निकल सकता है। इसी वजह से लोग अदालत में जाते हैं। ऐसे में अदालत जो फैसला दे उसको मानना चाहिए। अपनी संविधान सम्‍मत न्‍याय व्‍यवस्‍था को पवित्र और सर्वश्रेष्‍ठ मानकर, उसके निर्णय का हमको पालन करना चाहिए। अदालतों के फैसलों पर प्रश्‍नचिन्‍ह नहीं लगाना चाहिए।

ज्ञानवापी में हमारी श्रद्धा

भागवत ने आगे कहा कि ठीक है प्रतीकात्मक कुछ स्थानों के बारे में हमारी विशेष श्रद्धा है। लेकिन रोज एक नया मामला निकालना, ये भी नहीं करना चाहिए। हमको झगड़ा क्यों बढ़ाना है? ज्ञानवापी के बारे में हमारी कुछ श्रद्धाएँ हैं, परंपरा से चलती आई हैं, ठीक है। परन्तु हर मस्जिद में शिवलिंग क्यों देखना? अरे वो भी एक पूजा है, ठीक है बाहर से आई है। लेकिन, जिन्होंने अपनाई है वो मुसलमान बाहर से संबंध नहीं रखते। ये उनको भी समझना चाहिए। यद्यपि पूजा उनकी उधर की है, उसमें वो रहना चाहते हैं वो अच्छी बात है। हमारे यहाँ किसी पूजा का विरोध नहीं। सबकी मान्यता और सबके प्रतीक के प्रति पवित्रता की भावना है। परंतु पूजा वहाँ की होने के बाद भी वो हमारे प्राचीन सनातन काल से चलते आ रहे ऋषि-मुनि, राजा क्षत्रियों के वंशज हैं। समान पूर्वजों के वंशज हैं। परंपरा हमको समान मिली है।

शक्तिशाली बनने की ओर अग्रसर भारत

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में यूक्रेन युद्ध की चर्चा करते हुए कहा कि भारत सत्य बोल रहा है और संतुलित नीति अपना रहा है। यदि भारत शक्तिशाली होता तो युद्ध रोक सकता था। हम शक्तिशाली बनने की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि चीन क्यों नहीं इस युद्ध को रोक रहा है। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस युद्ध ने सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियाँ बढ़ा दी है।

टाइल्स मिस्त्री है वसीम अंसारी, ब्राह्मण (रवि शर्मा) बन हिंदू लड़की को फँसाया: 5 साल तक करता रहा शारीरिक शोषण, राज खुला तो घर में घुस धमकाया

उत्तर प्रदेश के बरेली से लव जिहाद का मामला सामने आया है। पीड़िता के मुताबिक वसीम अंसारी ने खुद को ब्राह्मण बताते हुए उससे मेलजोल बढ़ाया। अपना नाम रवि शर्मा बताया। उसका शारीरिक शोषण किया। पाँच साल बाद जब पीड़िता को उसकी असल पहचान का पता चला तो आरोपित ने वीडियो वायरल करने की धमकी दी। पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वसीम के संपर्क में पीड़िता साल 2017 में आई। तब उसकी उम्र 16 साल थी। वसीम ने फोन पर लड़की से जान-पहचान की। अपना नाम रवि शर्मा बताया। धीरे-धीरे लड़की वसीम के झाँसे में फँसती चली गई। इस दौरान दोनों की मुलाकात होने लगी। बाद में वसीम उसका यौन शोषण करने लगा।

पीड़िता के मुताबिक, “मैं ब्राह्मण हूँ। जब भी मैं अपने साथ यौन शोषण का विरोध करती थी तब रवि शर्मा बना वसीम मुझ से शादी का वादा करता था। इस तरह उसने 5 सालों तक मेरा रेप किया। एक दिन मैंने उसकी फेसबुक प्रोफ़ाइल चेक की तब मुझे पता चला कि वो रवि नहीं, बल्कि वसीम है। साथ ही मुझे उसके इज्जतनगर बरेली के निवासी होने की जानकारी हुई। वो घरों में टाइल्स लगाने का काम करता था।”

पीड़िता ने आगे बताया, “मैंने वसीम से उसकी फेसबुक प्रोफ़ाइल के बारे में सवाल किया तब उसने कहा कि माफ़ करो मैं रवि नहीं, बल्कि वसीम हूँ। इसके बाद मैंने उससे रिश्ता खत्म कर लिया और उसको भी खुद से दूर रहने के लिए कहा। लेकिन इसके बाद भी वसीम नहीं माना और एक दिन शराब पीकर मेरे घर में घुस गया। उसने मुझे गाली देते हुए मेरे फोटो वायरल कर मुझे बदनाम करने और कहीं मुँह दिखाने लायक भी न छोड़ने की धमकी देने लगा।”

एक रिपोर्ट के मुताबिक फरवरी 2022 में आरोपित नशे में पीड़िता के घर पहुँचा। वहाँ उसने गाली-गलौज की। जब इसकी शिकायत पुलिस में की गई तो वसीम ने माफ़ी माँग ली। इसके बाद भी वह पीड़िता के फोटो वायरल करने की धमकी देता रहा। 24 अप्रैल को वो एक बार फिर से पीड़िता के घर गया। इस दौरान वो लड़की को खींच कर अपने साथ ले जाने लगा। आस-पास के लोग जमा हुए और उन्होंने इसका विरोध किया। इस दौरान वसीम वहाँ से निकल गया।

​कश्मीर में अब बिहार के मजदूर की गोली मारकर हत्या: टारगेट किलिंग के बीच शाह-डोभाल में हुई बात, हाई लेवल मीटिंग आज

जम्मू-कश्मीर में टारगेट किलिंग की बढ़ती घटनाओं के बीच अमित शाह शुक्रवार (3 जून 2022) को हाई लेवल मीटिंग करने जा रहे हैं। इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी बात की थी। आज की मीटिंग में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के अलावा केंद्र सरकार और केंद्र शासित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी भी शिरकत करेंगे। 15 दिनों के भीतर इस तरह की यह दूसरी बैठक होगी।

इससे पहले गुरुवार (2 जून 2022) को आतंकियों ने कुलगाम में एक बैंक मैनेजर और बड़गाम में बिहार के एक मजूदर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। बड़गाम जिले में 2 मजदूरों को निशाना बनाया गया था। इसमें दिलकुश कुमार की मौत हो गई। वे बिहार के अररिया के रहने वाले थे। वहीं इसी हमले में पंजाब का मजदूर राजन घायल हो गया। दोनों मागरपोरा चंडूरा इलाके में एक ईंट भट्ठे पर काम करते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिलकुश कुमार की उम्र महज 17 साल थी। घटना रात के करीब 9.20 पर हुई। आतंकी हमले की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने दोनों मजदूरों को अस्पताल में भर्ती करवाया। इलाज के दौरान दिलकुश कुमार की मौत हो गई। वहीं राजन की हालत स्थिर बताई जा रही है।

पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर आतंकियों की तलाश शुरू कर दी है। इलाके की घेराबंदी की गई है। सुरक्षा बल सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। गौरतलब है कि बड़गाम में आतंकी हमला कुलगाम में राजस्थान निवासी बैंक मैनेजर विनय कुमार की हत्या के कुछ ही घंटों बाद हुआ। विनय कुमार को उनके ऑफिस में ही मार डाला गया था। विनय की हत्या की जिम्मेदारी आतंकी समूह लश्कर-ए-तैय्यबा ने ली है।

इससे एक हिन्दू महिला टीचर रजनी बाला की आतंकियों ने गोपालपुरा के सरकारी स्कूल में गोली मारकर हत्या कर दी थी। घाटी में चल रही टारगेट किलिंग के चलते कश्मीरी हिन्दुओं ने पलायन भी शुरू कर दिया है।

‘भगवान विश्वेश्वर प्रकट हुए हैं, उनका स्नान, शृंगार, पूजा हमारा कर्तव्य’: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 4 जून को ज्ञानवापी में शिवलिंग पूजन का किया ऐलान

वाराणसी (Varanasi) में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) के अंदर शिवलिंग मिलने के बाद अब संत समाज ने काशी (Kashi) में ज्ञानवापी के शिवलिंग (Gyanvapi Shivling) की पूजा करने का ऐलान किया है। ये ऐलान गुरुवार (2 जून 2022) को केदार घाट स्थित विद्या मठ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Swami Avimukteshwaranand) द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती (Swami Swaroopanand Saraswati)) के शिष्य हैं। उन्होंने कहा है कि उन्हें उनके गुरू ने ज्ञानवापी में आकर शिवलिंग की पूजा करने का आदेश दिया है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुताबिक, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती फिलहाल मध्य प्रदेश में हैं और उनके आदेश पर वो खुद वाराणसी आए हैं। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग पर जारी विवाद को लेकर कहा, “कुछ लोग कह रहे हैं कि परिसर में मिले स्वरूप को शिवलिंग होने का अभी निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन हमारा मानना है कि इस बात का भी तो निर्णय नहीं हुआ है कि ये शिवलिंग नहीं है।”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि एक पक्ष इसे शिवलिंग कह रहा है और एक पक्ष फव्वारा कह रहा है। इसका अर्थ ये है कि दोनों पक्ष एक ही बात कह रहा है। शिव ही एक मात्र देवता है, जिन्होंने अपने माथे पर गंगा को धारण किया है। जो शिव और उनकी कथाओं या उनके महत्व को नहीं जानता, वो शिवलिंग को फव्वारा ही कहेगा।

हिन्दू संत का कहना है कि ज्ञानवापी में स्वयं विश्वेश्वर भगवान प्रकट हुए हैं और अब उनका स्नान, श्रृंगार, पूजा और राग-भोग बहुत की आवश्यक है। जो भगवान की प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति है वो तीन साल के बच्चे की तरह होती है। जिस प्रकार 3 वर्ष के बालक को बिना स्नान-भोजन आदि के अकेले नहीं छोड़ा जा सकता, उसी प्रकार ये भी हैं।

उन्होंने कहा, “अब जब भगवान प्रकट हुए हैं तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सेवा करें, अन्यथा हम पाप के भागी होंगे।” वहीं, 4 जून को पूजा को लेकर संत ने कहा कि हमारे शास्त्रों में ‘स्थाप्यं समाप्यं शनि-भौमवारे’ कहकर शनिवार को सबसे अधिक शुभ दिन माना गया है।

वामपंथी पोर्टल ‘द वायर’ ने असम के सीएम की पत्नी पर लगाए पीपीई किट घोटाले के आरोप, रिंकी भुयान सरमा ने खोली पोल, कहा- ‘ये दान था, एक पैसा नहीं लिया’

वामपंथी एजेंडा चलाने वाला ऑनलाइन पोर्टल ‘द वायर’ ने असम के मुक्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) और उनकी पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा (Riniki Bhuyan Sarma) पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। बुधवार (1 जून 2022) को विवादित पोर्टल ने एक रिपोर्ट पब्लिश की, जिसमें उसने आरोप लगाया कि कथित तौर पर रिंकी भुइयाँ के मालिकाना हक वाली वाली एक कपंनी को कोरोना से निपटने के लिए पीपीई किट और दूसरे कोविड से जुड़े सामानों की आपूर्ति का ऑर्डर मिला था। रिपोर्ट के मुताबिक, असम में जब सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री थे और हिमंता बिस्वा सरमा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री थे, तो उनकी पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा की कंपनी को बिना किसी अनुभव के ही 5,000 पीपीई किट, मेडिकल उपकरण और अन्य सुरक्षा के सामानों की आपूर्ति करने का ऑर्डर दिया गया था।

हालाँकि, वामपंथी पोर्टल का एजेंडा ज्यादा देर टिक नहीं सका। सीएम सरमा की पत्नी ने ‘द वायर’ के आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने पीपीई किट की आपूर्ति के लिए एक पैसा भी नहीं लिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सीएसआर के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पीपीई किट दान की थी।

‘द वायर’ ने गुवाहाटी स्थित समाचार पोर्टल ‘द क्रॉस करंट’ के साथ मिलकर सूचना के अधिकार (आरटीआई) से मिले जबावों के जरिए ये दावा किया था कि राज्य में कोरोना संकट के दौरान टेंडर ऑर्डर के नियमों का पालन किए बिना ही इमरजेंसी मेडिकल सप्लाई के लिए चार फर्मों को ऑर्डर दिए गए थे। द वायर का आरोप है कि जिन चार फर्मों को ये ऑर्डर दिए गए थे, उनमें से तीन सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयाँ सरमा और उनके व्यापारिक साझेदारों से जुड़ी हैं।

वामपंथी मीडिया ने दावा किया है कि जिस जेसीबी इंडस्ट्रीज को 5,000 पीपीई किट की तत्काल आपूर्ति का ऑर्डर मिला था, उसकी मालकिन रिंकी भुइयाँ सरमा हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुवाहाटी स्थित ये कंपनी सैनिटरी नैपकिन बनाने के लिए प्रसिद्ध है और इसका किसी भी तरह के मेडिकल इक्विपमेंट के प्रोडक्शन का कोई इतिहास नहीं है। बावजूद इसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) असम ने सरमा की कंपनी को ये ऑर्डर दिया। इसमें दावा किया गया है कि रिंकी भुइयाँ की कंपनी को ये ऑर्डर 18 मार्च 2020 में दिया गया था। ये वो दौर था, जब भारत में कोरोना संक्रमण में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी।

जेसीबी के अलावा जिन दो फर्मों को लेकर द वायर ने दावा किया है वो फर्म जीआरडी फार्मास्युटिकल्स और मेडिटाइम हेल्थकेयर हैं। आरोप है कि ये दोनों कंपनियों का मालिकाना हक सरमा के ही व्यापारिक सहयोगी घनश्याम धानुका के पास है। रिपोर्ट के अनुसार, बाद की फर्मों ने असम में कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने के बाद से राज्य सरकार को चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की है।

ये आरटीआई द क्रॉस करंट ने फाइल की थी, जिसके जरिए मिले जबावों का इस्तेमाल द वायर ने अपनी रिपोर्ट में किया। शुरुआती आरोप ये लगाए गए हैं कि जेसीबी इंडस्ट्रीज और मेडिटाइम हेल्थकेयर तय समय पर ऑर्डर की डिलिवरी ही नहीं कर पाए। दूसरा आरोप द वायर ने ये लगाया है कि पीपीई किटों को ऊँचे दामों (990 रुपये प्रति पीस) पर कंपनियों से खरीदे गए। जबकि उसी दिन उसने असम की एक अन्य फर्म एनई सर्जिकल इंडस्ट्रीज से 600 रुपए प्रति पीस की दर से पीपीई किट खरीदी।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने द वायर के प्रोपेंगेंडा का किया खंडन

द वायर की प्रोपेगेंडा रिपोर्ट का खंडन करते हुए सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयाँ इसे दुष्प्रचार का हिस्सा करार दिया। उन्होंने कहा कि ये दुर्भावनापूर्ण प्रचार प्रचार का हिस्सा है और द वायर एक बार फिर से निराधार आरोप लेकर सामने आ गया है।

पीपीई किट मामले को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि जब असम में कोविड -19 महामारी फैली थी, उस दौरान राज्य में एक भी पीपीई किट नहीं थी। जबकि ये कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सबसे बड़ा सेफ्टी यूनिट था। हालात को देखते हुए उन्होंने (रिंकी भुइयाँ सरमा) अपने एक व्यवसायिक परिचित के जरिए कुछ पीपीई किटों की व्यवस्था करके उसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को दान दे दिया। हालाँकि, बाद में एनएचएम ने इसके लिए एक वर्क ऑर्डर जारी किया, ताकि वो आपूर्ति के लिए एक चालान जमा कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि ये एक दान था और इसके लिए वो कोई पैसे नहीं लेंगी।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने कहा, “महामारी के पहले सप्ताह में असम में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं थी। उसी का संज्ञान लेते हुए मैं एक व्यावसायिक परिचित के पास गई और काफी कोशिशों के बाद करीब 1500 पीपीई किट को अरेंज कर एनएचएम को दिया। बाद में मैंने इसे अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में मानने के लिए एनएचएम को लिखा। ये उसकी रसीद संलग्न है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस आपूर्ति में एक पैसा भी नहीं लिया। मैं समाज को वापस देने में अपने विश्वास के बारे में हमेशा पारदर्शी रही हूँ। फिर चाहे मेरे पति की राजनीतिक स्थिति कुछ भी हो। मेरे संगठन ने भी आरोग्य निधि में दान देकर COVID के खिलाफ लड़ाई में NHM का समर्थन किया है।” उल्लेखनीय है कि आरोग्य निधि राज्य सरकार की वित्तीय सहायता योजना है।

इसके साथ ही रिंकी भुइयाँ सरमा ने असम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एक प्रशंसा पत्र को भी साथ में अटैच किया, जिससे ये पता चलता है कि उन्होंने पीपीई किट का दान किया था। इसके लिए उन्होंने कोई पैसा नहीं लिया था। एनएचएम असम मिशन के निदेशक द्वारा जेसीबी इंडस्ट्रीज को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि वह 1485 पीपीई किट के साथ सरकार की मदद करने के लिए उनके संगठन के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं। लेटर के सब्जेक्ट में सीएसआर का जिक्र है।

NHM डायरेक्टर के द्वारा लिखा गया पत्र

एनएचएम के पत्र से यह स्पष्ट है कि रिंकी भुइयाँ सरमा की कंपनी ने असम सरकार को 1485 पीपीई किट दान किए थे। इससे ये स्पष्ट होता है कि सरमा की कंपनी को किसी भी तरह का कोई अवैध ऑर्डर नहीं दिया गया।

अचंभे की बात ये है कि जब द वायर आरटीआई से इतने सारे दस्तावेजों को इकट्ठा कर पाया तो वो एनएचएम के दान वाले पत्र को क्यों नहीं ढूँढ पाया। इसके अलावा प्रोपेगेंडा पोर्टल ने दावा किया कि जेसीबी इंडस्ट्रीज को 5000 पीपीई किट की आपूर्ति का आदेश जारी किया गया था, इसे रद्द कर दिया गया था क्योंकि केवल 1485 किट की आपूर्ति की गई थी। ऐसे में अब द वायर को जवाब देना होगा कि अगर ऑर्डर कैंसिल कर दिया गया था तो किस बात का घोटाला, क्योंकि नो ऑर्डर का मतलब कोई भुगतान नहीं है।

रिंकी भुइयाँ सरमा ने द वायर पर तंज कसते हुए कहा, “अगर इस तरह की प्रोपेगेंडा वेबसाइटें संकट के वक्त में केवल बकवास करने की जगह कुछ और करतीं तो भारत एक बेहतर जगह पर होगा। सुनियोजित तरीके से टार्गेट किए जाने बाद भी मैं हमेशा देश की सेवा करने के अपने विश्वास पर कायम रहूँगी।”

‘फिरकापरस्तों को औरंगजेब से नफरत, उनसे बेहतर किरदार दूसरा नहीं’: मौलाना तौकीर रजा खान ने मुगल आक्रान्ता का किया महिमामंडन

बॉलीवुड के सुपरस्टार अक्षय कुमार (Bollywood Superstar Akshay Kumar) की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’ (Samrat Prithviraj Chouhan) को लेकर उत्तर प्रदेश (UP) में सियासत शुरू हो गई है। इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के मौलाना तौकीर रजा खान (Tauqeer Raza Khan) ने मुगल आक्रान्ता औरंगजेब (Aurangzeb) का महिमामंडन किया है।

मौलाना तौकीर रजा खान ने दावा किया कि पूरी दुनिया में औरंगजेब से बेहतर कोई दूसरा किरदार नहीं हो सकता है। मौलाना के मुताबिक, अक्षय कुमार केवल पब्लिसिटी के लिए ये सब कर रहे हैं। बता दें कि अक्षय कुमार ने काशी में कहा था कि इतिहास की किताबों में हमारे राजाओं के बारे में नहीं बताया जाता, जबकि वो भी महान थे। देश के बच्चों को महाराणा प्रताप और पृथ्वीराज चौहान के बारे में जानना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक तौकीर रजा खान ने कहा, “फिरकापरस्तों को नफरत औरंगजेब से है। मैं तो कहता हूँ कि उनसे नफरत की जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने हिन्दुओं को नवाजा, उन्होंने मंदिरों को जायदादें दीं। इस वजह से हिन्दू उनसे नाराज है। मैं कहता हूँ जिस तरह से सम्राट पृथ्वीराज फिल्म बनाई है, इसी तरह से ईमानदारी से औरंगजेब के बारे में पढ़कर देखो। हिन्दुस्तान में उनसे बेहतर दूसरा किरदार नहीं मिलेगा। बाकी हिन्दुस्तान में जो कुछ भी है, आपने आज तक क्या बनाया है और क्या किया है, वो हमें बताइए। हमारे दौर-ए-हुकूमत में या अंग्रेजों के दौर-ए-हुकूमत में जो कुछ भी बना है……।”

मौलाना ने ये भी कहा कि हिन्दुस्तान में अंग्रेजों का बनाया हुआ पुलिस मैनुअल आज तक काम कर रहा है। तौकीर रजा खान ने कहा, “आज तक आप अपनी पुलिस मैनुअल तक नहीं बना सके तो और क्या बना सकोगे? आपको बनाने में नहीं, बाँटने में विश्वास है।”

अक्षय कुमार ने मुगलों को कहा था ‘आक्रमणकारी’

गौरतलब है कि हाल ही में वाराणसी का दौरा करने के बाद समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में एक्टर अक्षय कुमार ने इतिहास की किताबों पर सवाल उठाया था। एएनआई की एडिटर स्मिता प्रकाश से बात करते हुए अक्षय कुमार ने अफसोस जताते हुए कहा था कि देश के राजाओं को बारे में लोगों को नहीं पढ़ाया जाता।

उन्होंने कहा था, “मैं सम्राट पृथ्वीराज चौहान के बारे में और जानना चाहता था। मैंने उनसे (निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी) बहुत सारी कहानियाँ सुनीं, लेकिन दुर्भाग्य से हमारी इतिहास की किताबों में उनके बारे में केवल 2 या 3 लाइन ही लिखा है। किताबों में बाकी सब कुछ है। आक्रमणकारियों के बारे में बहुत सारे विवरण हैं, लेकिन हमारी संस्कृति और हमारे महाराजाओं का शायद ही कोई उल्लेख है।”

उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री हुई ‘सम्राट पृथ्वीराज चौहान’

शुक्रवार (3 जून 2022) को देश भर की सिनेमा में रिलीज होने जा रही अक्षय कुमार स्टारर फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को सीएम योगी ने राज्य में ट्रैक्स फ्री करने का ऐलान कर दिया। गुरुवार (2 जून 2022) को लखनऊ (Lucknow) स्थित लोक भवन में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कैबिनेट के सभी मंत्रियों के साथ सम्राट पृथ्वीराज (Samrat Prithviraj) फिल्म देखी।

Maulana Tauqir Raza Khan glorifies mughal invader Aurangzeb samrat Prithviraj Akshay Kumar

₹100 करोड़ की वसूली मामले में NCP नेता अनिल देशमुख के खिलाफ CBI ने दाखिल की 59 पन्नों की चार्जशीट, सचिन वाजे को बनाया सरकारी गवाह

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और NCP के नेता अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) की 100 करोड़ रुपए की वसूली के मामले में मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। गुरुवार (2 जून 2022) को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सेशन कोर्ट में 59 पन्नों की चार्जशीट फाइल की है। इसमें जाँच एजेंसी ने बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को माफी दे दी है और उसे सरकारी गवाह बना लिया है।

वाजे को मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एँटीलिया के बाहर विस्फोटकों से भरी कार खड़ी करने के मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने गिरफ्तार किया था। पिछले सप्ताह सचिन वाजे ने स्पेशल कोर्ट में एक अपील दायर कर खुद को अनिल देशमुख के खिलाफ सरकारी गवाह बनाने की माँग की थी। इसके बाद सीबीआई ने अभियोजन पक्ष का गवाह बनने के वाजे की माँग को मान लिया था। ताकि इस मामले में शामिल सभी आरोपितों के चेहरे से झूठ और फरेब के नकाब को उतारा जा सके।

एक दिन पहले अदालत में सुनवाई के दौरान मामले में दलीलें सुनीं और जेल अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सचिन वाजे को पेश करने को कहा। स्पेशल जस्टिस डीपी शिंगडे ने वाजे से कहा, “मैंने आपके आवेदन की अनुमति दी है, लेकिन मैंने कुछ शर्तें लगाई हैं। मुझे बताएँ कि क्या यह आपको स्वीकार्य है।”

जस्टिस शिंगडे ने शर्तों को पढ़ा। उन्होंने कहा कि वाजे को भ्रष्टाचार के पूरे मामले का खुलासा करना है। उन्हें आईपीसी की धारा धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए सभी तथ्यों का खुलासा करना होगा। उन्हें उन सवालों का सच्चाई से जवाब देना चाहिए जो लोक अभियोजक द्वारा मुकदमे के दौरान पूरे मामले को सुलझाने के लिए कहा जाएगा। कोर्ट की शर्तों को मानने के बाद ही वाजे को सरकारी गवाह बनाया गया।

क्या है पूरा मामला

गौरतलब है कि 20 मार्च 2021 को मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया था कि पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाजे को हर महीने 100 करोड़ रुपए इकट्ठा कर उन्हें देने के आदेश दिए थे। परमबीर सिंह ने चिट्ठी में ये भी कहा कि सचिन वाजे ने उन्हें बताया था कि अनिल देशमुख ने उससे हर महीने जेल से, रेस्ट्रां, होटल, बार आदि जगहों से 100 करोड़ रुपए इकट्ठा करने को कहा था। इन्हीं आरोपों के बाद सीबीआई ने 24 अप्रैल 2022 को अनिल देशमुख के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

‘नौसेना का एक साथी रेप कर रहा था और दूसरा देख रहा था’: कनाडा की सेना में यौन हिंसा की शिकार महिला कर्मी, रिपोर्ट में खुलासा

कनाडा की सेना (Canadian Army) में होने वाले यौन शोषण पर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस खुलासे के मुताबिक, कुछ महिला सदस्यों को दुश्मनों के मुकाबले अपने ही साथियों से ज्यादा यौन हिंसा झेलनी पड़ी है। यह रिपोर्ट कुल 404 पन्नो की है, जिसे कनाडाई सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस लुईस आर्बॉर ने कई सालों से पीड़िताओं के बयान के आधार पर तैयार की है। इस रिपोर्ट के बाद CAF (कनाडियन आर्म्ड फोर्सेस) में इस चलन की आलोचना हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “यौन हिंसा के मामलों की जाँच और उसके समाधान की दिशा में विचार करते हुए CAF के सीनियर अधिकारी ये नहीं जान पाते हैं कि असल में समस्या की जड़ कहाँ है। सिस्टम के नियमों के अनुसार CAF कर्मी अपने काम को जारी रखती हैं, लेकिन इससे कई बार उन्हें अपने साथियों से वो सब झेलना पड़ता है जो दुश्मनों के मुकाबले कहीं अधिक बुरा और हानिकारक होता है।”

लुईस अर्बोर द्वारा तैयार की गई ये रिपोर्ट कनाडा की सेना में होने वाली यौन हिंसा की घटनाओं की जाँच के लिए अब तक की तीसरा सबसे बड़ा सर्वे है। साल 1992 में नौसेना की दिग्गज डॉन मैकइलमॉयल का एक साथी नाविक उन्हें रेप कर रहा था और दूसरा साथी देख रहा था। तब मैकइलमॉयल महज 19 साल की थीं। मैकइलमॉयल ने गार्जियन को बताया, “जब मैंने आगे आकर इसका विरोध करना चाहा तब मुझ पर पुरुषों के फ्लोर पर जाने का आरोप लगाकर राष्ट्रीय रक्षा कानून के तहत कार्रवाई कर दी गई थी। जबकि, मैं उस फ्लोर पर खुद नहीं गई थी बल्कि ले जाई गई थी।”

अर्बोर ने अपनी रिपोर्ट में सेना के अंदर होने वाले यौन उत्पीड़न के मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए नागरिक अधिकारियों को ट्रांसफर करने की सिफारिश की है। इसी के साथ उन्होंने सेना में भर्ती और ट्रेनिंग प्रक्रिया में भी सुधार की सिफारिश की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा सरकार की रक्षा मंत्री अनीता आनंद ने यौन हिंसा के ऐसे मामलों में बदलाव लाने और उस पर सरकारी द्वारा नजर रखने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन उसका सही से पालन होगा या नहीं इस पर संदेह बना हुआ है।

गुजरात कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भरत सोलंकी की पत्नी और ‘प्रेमिका’ की मारपीट का नया वीडियो आया सामने, पार्टी ने साधी चुप्पी

पूर्व कैबिनेट मंत्री और गुजरात कॉन्ग्रेस (Gujarat Congress) के वरिष्ठ नेता भरत सोलंकी (Bharat Solanki) और उनकी अलग हो चुकी पत्नी रेशमा पटेल (Reshma Patel) का वैवाहिक विवाद आजकल वायरल वीडियो को लेकर सुर्खियों में है।

यह वीडियो 1 जून को सामने आया, जिसमें रेशमा पटेल अपने पति को आणंद स्थित बंगले में एक लड़की के साथ रंगे हाथों पकड़ने के बाद हंगामा करती दिख रही हैं। वायरल हुए वीडियो में रेशमा पटेल उस लड़की के साथ हाथापाई करती नजर आ रही हैं, जिसके साथ कॉन्ग्रेस नेता का कथित तौर पर विवाहेतर संबंध है।

अब एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें रेशमा पटेल गुस्से में निर्दयता के साथ अपने पति की कथित प्रेमिका के बाल खींच रही हैं और उसे कमरे के एक कोने से दूसरे कोने में ले जाती दिख रही हैं। यह वीडियो उसी वीडियो का हिस्सा लगता है, जो कल वायरल हुआ था।

@jimmyvyas हैंडल नाम के एक ट्विटर यूजर ने कल वायरल हुए वीडियो के चार स्निपेट साझा किए। रेशमा पटेल को लड़की के बालों को खींचते हुए और उसके द्वारा दिए गए आखिरी स्निपेट में गुस्से में चिल्लाते हुए देखा गया था, जो कल दिखाई नहीं दिया।

बाद वाला स्निपेट में लड़की अपना चेहरा छिपाने है और रेशमा पटेल की मारपीट से खुद को बचाने की कोशिश करती दिख रही है। सफेद शर्ट और नीली जींस पहने एक आदमी लड़की का हाथ उसके चेहरे से हटाने की कोशिश करता है ताकि उसे फिल्माया जा सके, लेकिन लड़की अपना चेहरा छिपाती रहती है।

खुद को महिलाओं की मसीहा के रूप में पेश करने की कोशिश करने वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने न तो रेशमा के अधिकारों के लिए बात की है और न ही उस लड़की के लिए, जिस पर बेरहमी से हमला किया जा रहा है। पार्टी ने घटना पर चुप्पी साध रखी है।

कॉन्ग्रेस नेता भरत सोलंकी की पत्नी और उनकी कथित प्रेमिका की हाथापाई का वीडियो वायरल

कॉन्ग्रेस नेता का हाल ही में एक वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इसमें भरत सिंह सोलंकी के होने का दावा किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जब कॉन्ग्रेस नेता आणंद स्थित बंगले पर थे तब रेशमा पटेल उनके घर पहुँचीं, और रेशमा पटेल की उनसे हाथापाई हो गई और वे उन पर चिल्लाने लगीं।

पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई। वायरल वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि इसे रेशमा पटेल के साथ आए लोगों में से एक ने मोबाइल में रिकॉर्ड किया था। हालाँकि, अभी इस बात की पुष्टि नहीं हो पाई है कि वायरल वीडियो में दिख रहा शख्स भरत सिंह है या नहीं।

जैसा कि वीडियो में देखा जा सकता है कि जब रेशमा पटेल घर का दरवाजा खोलती हैं तो भरत सिंह दौड़ते हुए आते हैं और रेशमा पटेल को अंदर आने से रोकते हैं और पुलिस को बुलाने के लिए कहते हैं। हालाँकि, रेशमा पटेल और उनके साथ आए लोग घर में घुस जाते हैं और रेशमा पटेल तेजी से लड़की को पकड़ लेती है और उसे पीटना शुरू कर देती है। यहाँ तक कि उसके बाल भी खींच लेती है। इस बीच वीडियो में भरत सिंह उन्हें रोकते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में “तुम मेरे पति के साथ बैठी हो, मैं तुम्हे नहीं छोडूँगी… डाउनलोड करो इस वीडियो को.. अपना मुँह दिखाओ” जैसी कई आवाजें आ रही हैं। जबकि इस दौरान लड़की कैमरे से अपना चेहरा छिपाने की कोशिश करती नजर आ रही है। इस मामले पर अभी तक भरत सिंह सोलंकी या गुजरात कॉन्ग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। साथ ही, ऑपइंडिया भी इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।

गौरतलब है कि भरत सिंह सोलंकी और उनकी पत्नी रेशमा पटेल के बीच काफी समय से अनबन चल रही है। इससे पहले रेशमा पटेल और भरत सिंह ने भी एक-दूसरे को पब्लिक नोटिस भेजा था। जिसमें रेशमा पटेल ने आरोप लगाया था कि उन्हें परेशान किया जा रहा है और घर से निकाला जा रहा है। साथ ही भरत सिंह पर उनके साथ छेड़खानी करने और राजनीति में अपने पद का दुरुपयोग करके उन्हें तलाक देने के लिए मजबूर करने का भी आरोप लगाया गया था।

बता दें कि रेशमा पटेल की नोटिस के जवाब में भरत सिंह सोलंकी ने भी नोटिस भेजकर कहा कि वह पिछले चार साल से रेशमा पटेल के साथ नहीं रह रहे हैं। उन्होंने आगाह किया था कि उनकी पत्नी के साथ वित्तीय लेन-देन करने के लिए किसी को भी उनके नाम और पहचान का उपयोग नहीं करना चाहिए और अगर कोई करता है तो इसके लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

इसके बाद इस साल रेशमा पटेल ने भी इस मामले की शिकायत कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी से की थी, जिसके बाद इस मामले पर फिर चर्चा हुई। उन्होंने पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए शिकायत किया था कि उन्हें अपने घर से बाहर निकाला जा रहा है।

पंजाब में फिर से बहाल होगी 423 VVIP की सिक्योरिटी, HC ने लगाई भगवंत मान सरकार को फटकार, सुरक्षा हटा कर सोशल मीडिया पर फैला दी खबर

पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को उन सभी VVIP की सुरक्षा बहाली का आदेश दिया है जिनकी सुरक्षा भगवंत मान सरकार ने हटा ली थी। गुरुवार (2 जून 2022) को जारी इस आदेश के बाद अब पंजाब सरकार उन सभी 423 VVIP की सुरक्षा फिर से बहाल करेगी। सरकार के मुताबिक सभी VVIP लोगों की सुरक्षा 7 जून 2022 से बहाल कर दी जाएगी। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट से मान सरकार को फटकार भी लगी है।

हालाँकि, इस बहाली का आदेश 423 लोगों पर ही लागू होगा क्योकि 1 व्यक्ति सिद्धू मुसेवाला अब जीवित नहीं हैं। इस से पहले 29 मई 2022 को भगवंत मान ने 424 VVIP लोगों की सुरक्षा हटा ली थी। इन 424 लोगों में कई पुलिसकर्मी, राजनेता और गायक शामिल थे। यह याचिका पिछली पंजाब सरकार में उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी ने दाखिल की थी। हाईकोर्ट में सोनी ने कहा था कि किसी की भी सुरक्षा हटाने से पहले कोई कमेटी आदि नहीं बनाई गई। इसलिए हड़बड़ी में किए गए फैसले से उनके जैसे तमाम लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।

पूर्व उपमुख्यमंत्री की याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुरक्षा हटाए जाने का आधार पूछा था। इसके जवाब में भगवंत मान सरकार ने हाईकोर्ट से VVIP लोगों की सुरक्षा कुछ समय के लिए ही हटाना बताया था। हाईकोर्ट ने पूछा कि सुरक्षा हटाए जाने की खबर लीक कैसे हुई तब पंजाब सरकार ने आगे से पुख्ता इंतजाम करने और दोबारा रिपोर्ट लीक न होने का भरोसा दिया।

यहाँ गौर करने लायक बात ये है कि पंजाब सरकार द्वारा हटाई गई सुरक्षा में कहीं भी ये नहीं लिखा था कि ये कदम सिर्फ कुछ समय के लिए है। आदेश में स्थाई तौर पर सुरक्षा हटाना बताया गया था। इस रिपोर्ट के लीक होने में भी आम आदमी पार्टी के नेताओं को जिम्मेदार बताया जा रहा है। आरोप है कि आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर इसका खूब प्रचार किया था कि उनकी सरकार ने VVIP कल्चर खत्म करने के लिए कई लोगों की सुरक्षा हटा दी है। आम आदमी द्वारा प्रकाशित पोस्टरों में भगवंत मान के इस कदम को फिजूलखर्ची से रोकने वाला बताया गया था।

चित्र साभार- ट्विटर

याचिकाकर्ता कॉन्ग्रेस नेता सोनी की Z श्रेणी की सुरक्षा श्रेणी को पंजाब सरकार ने घटाने का निर्णय लिया था। सिद्दू मूसेवाला के अलावा अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, गुरदर्शन बराड़, आईपीएस गुरदर्शन सिंह और उदयबीर सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ उनके परिवार की VIP सुरक्षा में कटौती की गई थी।