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नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की धमकी देने वाला इस्लामी प्रचारक आदिल गफूर गिरफ्तार, कहा था – गोमूत्र पीने वाले हिन्दुओं की हैसियत क्या?

जम्मू के डोडा जिले के भद्रवाह में नूपुर शर्मा का सिर कलम करने की धमकी देने वाले इस्लामी प्रचारक आदिल गफूर गनी को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह एलान गनी ने एक मस्जिद से किया था। इस बयान के बाद इलाके में तनाव फ़ैल गया था। गिरफ्तारी रविवार (12 जून, 2022) को हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भद्रवाह में कर्फ्यू लगा दिया गया है। एक हिन्दू युवक पर भी मुस्लिमों के पैगंबर के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगा है। इसी के चलते दोनों पक्षों में तनाव है। खुद पर FIR दर्ज होने के बाद आदिल गफूर गनी ने अपने बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया था।

गफूर ने माफ़ी माँगते हुए कहा था, “हमारे नबी का मामला था और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा था। हम कानून में विश्वास रखते हैं। मेरा भाषण आधा-अधूरा दिखाया गया है। हालाँकि हमें बोलना नहीं था लेकिन मैं जज्बाती हो गया था। मैंने किसी खास समुदाय को टारगेट नहीं किया लेकिन अगर किसी की भावनाएँ आहत हुई हों तो मैं उनसे माफ़ी माँगता हूँ।”

आदिल गफूर का भड़काऊ भाषण सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। इस दौरान एक भीड़ ‘सिर तन से जुदा’ के नारे लगा रही थी। इस दौरान हिन्दुओं को गौ मूत्र पीने वाला कहा गया था।

इसी वीडियो में आदिल ने कहा था, “गाय का पेशाब पीने वालों का, गोबर के अंदर नहाने वालों की हैसियत ही क्या है दुनिया में ? इनको जो रिज़्क़ मिलता है हमारी दहशत से मिलता है। इनको जो हवा मिलती है हमारी बरकत से मिलती है। इनको जो दरिया से पानी मिलता है, हमारी बरकत से मिलता है। वरना इनका वजूद क्या है ? भाइयों, वक्त हमें सर कलम करना भी सिखाती है। इसलिए बातों को जेहन में बिठा दो कि हम खामोश तब तक हैं, जब तक कि हमारा बर्दाश्त कायम है। बर्दाश्त के बाहर निकल गए तो फिर नूपुर शर्मा क्या, वो आशीष कोहली कुत्ता क्या, वो नूपुर शर्मा ‘गंदी’ क्या, उनके सर कहीं और धड़ कहीं और मिलेंगे।”

इस वीडियो के वायरल होने के बाद भद्रवाह में हालत काबू करने के लिए सेना उतारनी पड़ी थी। घटना की जाँच के लिए SIT गठित की गई थी और कई इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई थी।

JNU वाली आफरीन का अब्बू प्रयागराज हिंसा का मास्टरमाइंड: बीवी-बेटी सहित हिरासत में, घर पर अब चलेगा बुलडोजर

भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा के बयान को लेकर प्रयागराज में फैलाई गई हिंसा के मास्टरमाइंड में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की छात्रा रही और शाहीन बाग घटना के मास्टरमाइंड शारजील इमाम (Sharjeel Imam) की सहयोगी जेएनयू (JNU) छात्रा आफरीन फातिमा (Afreen Fatima) के अब्बू भी शामिल हैं। प्रयागराज हिंसा का वह मुख्य आरोपित है।

प्रयाग पुलिस ने आफरीन फातिमा सहित उसके अब्बू जावेद मोहम्मद उर्फ पम्प (Javed Mohammad Alias Pump), उसकी बीवी और छोटी बेटी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। आरोपी के मोबाइल में हिंसा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुबूत मिले हैं। इसके बाद आरोपित के घर को गिरा रही है। जावेद वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया का प्रदेश महासचिव है और CAA-NRC के विरोध प्रदर्शनों के दौरान शाहीन बाग में शामिल रहा था।

वहीं, जावेद के मकान को तोड़ने की नोटिस जारी करते हुए प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) ने कहा, आपका मकान उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के प्रावधानों के विरुद्ध अनधिकृत रूप से निर्मित किया गया है। इस संबंध में 10 मई 2022 को आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और 24 मई को सुनवाई के दौरान ना ही आप और ना ही आपका अधिवक्ता उपस्थित हुआ और ना ही कोई दस्तावेज प्रस्तुत किए गए।”

नोटिस में आगे कहा गया है, “इसको ध्यान में रखते हुए 25 मई 2022 को भवन ध्वस्तीकरण के लिए आदेश पारित किया गया। इस संबंध में नोटिस लगा दी गई है। आप भवन को ध्वस्त कर 9 जून 2022 तक सूचित करें, अन्यथा 12 जून 2022 को प्रात: 11 बजे भवन को खाली करें, ताकि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सके।”

इस घटना के बाद AMU के पूर्व छात्रों की एक संस्था AMU को-ऑर्डिनेशन कमिटी और कट्टरपंथी समर्थक आफरीन फातिमा और उसके अब्बू के पक्ष में खुलकर खड़े हो गए हैं। इसको लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने एक पत्र जारी किया है। जारी पत्र में कहा गया है कि यूपी पुलिस जानबूझकर फातिमा के परिवार को परेशान कर रही है। बता दें कि AMU प्रशासन इसे यूनिवर्सिटी से किसी तरह जुड़े होने की बात पहले ही खारिज कर चुका है।

पत्र में कहा गया है, “AMU के वीमेन कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन की पूर्व अध्यक्ष आफरीन फातिमा और उनके परिवार को यूपी पुलिस ने टारगेट करते हुए आधी रात को हिरासत में ले लिया। हमें पता चला है कि उनके अब्बू, अम्मी और छोटी बहन को अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है और अन्य लोगों को घर खाली करने के लिए बाध्य किया गया है।”

AMU ने इसे मानवाधिकार का हनन बताते आगे लिखा, आफरीन फातिमा एक सक्रिय छात्र नेता हैं, जो मुस्लिमों के मुद्दे को उठाती रही हैं। हमारा मानना है कि हिंदू राष्ट्रवादी सरकार के विरोधी रूख के कारण उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। हम AMU के लोग आफरीन और उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

अशरफ हुसैन नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा, “छात्र नेता आफरीन फ़ातिमा के घर पर प्रयागराज प्रशासन बुलडोजर चलाने जा रहा है, 11 बजे तक घर खाली करने का वक़्त दिया गया है, आफरीन के माता पिता और बहन घंटों पहले डिटेन किये जा चुके हैं, सोचिए एक अकेली लड़की इस वक़्त किस मानसिक तनाव से गुज़र रही होगी…”

कौन है आफरीन फातिमा

आफरीन फातिमा AMU वीमेन कॉलेज स्टूडेंट यूनियन की पूर्व अध्यक्ष और JNU की छात्रसंघ की काउंसलर है। वह शाहीन बाग साजिश के मास्टरमाइंड शरजील इमामल की करीबी है। आफरीन फातिमा ने आतंकवादी अफजल गुरु (Afzal Guru) को ‘निर्दोष’ बताते हुए एक ट्वीट किया था। अफजल 2001 के संसद हमले के दोषी का और उसे फाँसी की सजा दी गई थी।

कश्मीर और नक्सलियों में जिहाद के समर्थन के लिए बदनाम वामपंथी प्रचारक पत्रकार अरुंधति रॉय द्वारा लिखे गए 15 जनवरी 2020 के कारवां पत्रिका में प्रकाशित एक लेख को साझा करते हुए आफरीन फातिमा ने ट्विटर पर अफजल गुरु के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की था। उसने ट्विटर पर लिखा था, “फिर से आना, बार-बार। फैसला को बार-बार पढ़ें। कभी नहीं भूलेंगे।”

आफरीन फातिमा JNU की वही छात्र नेता है, जिसने सरकार के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ जहर उगला था। उसने राम मंदिर और आतंकवादी अफजल गुरु की फाँसी जैसे महत्वपूर्ण फैसलों पर संदेह जताकर देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था की अखंडता को चुनौती दी थी। फातिमा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था।

25 जनवरी 2020 को यूजर @knewschannel द्वारा ट्विटर पर पोस्ट किए गए 45 सेकेंड के एक वीडियो में फातिमा ने भीड़ को भड़काने की कोशिश की थी। CAA और NRC का विरोध करते हुए उसने कहा था कि उसने महसूस किया है कि न तो सरकार और न ही सुप्रीम कोर्ट उनके (मुस्लिमों के) भरोसा के लायक है। फातिमा ने कहा कि था आतंकवादी अफजल गुरु ‘निर्दोष’ था और संसद पर हमले में उसका हाथ नहीं था।

JNUSU की काउंसलर फातिमा ने शरजील इमाम के पक्ष में मुखरता बोला था। यह वही शरजील है, जिसने उत्तर-पूर्व भारत को देश के बाकी हिस्सों से काटने का आह्वान किया था। छात्र संघ ने शरजील की गिरफ्तारी की निंदा की थी और इसे ‘इस्लामोफोबिया’ का मामला करार दिया था। फातिमा ने दावा किया कि बीजेपी मुस्लिमों को ‘अपराधी’ बनाना चाहती है।

‘जो शिव और राम का नहीं, वो किसी काम का नहीं’: नेपाल के कई शहरों में नूपुर शर्मा के समर्थन में विशाल रैली, लोगों ने पूछा – भारत के हिन्दू कहाँ?

भाजपा नेता नूपुर शर्मा और हिंदू धर्म के समर्थन में पड़ोसी देश नेपाल में बड़ी रैली आयोजित की गई। नेपाल में रह रहे हजारों हिंदुओं ने नूपुर शर्मा के समर्थन में सड़कों पर रैली निकाली। यह रैली राजधानी काठमांडू के अलावा बीरगंज, पीरगंज और अन्य शहरों में भी निकाली गई। 

इस दौरान ‘जय हिंदू’, ‘जय हिंदुत्व’ और ‘जय श्री राम’ जैसे नारे लगाए गए। रैली में “जो हिंदू शिव और राम का नही वो किसी काम का नही” जैसे पोस्टर भी दिखाई दिए। बीरगंज में रैली के दौरान एक हिंदू संत को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि हिंदू आस्था के खिलवाड़ होने पर वह भी चुप्पी साध कर नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि पहले भी हिंदू धर्म को गाली दया गया। हाल ही में पाकिस्तान में शिव मंदिर को तोड़ दिया गया। फिर भारत की घटना को लेकर मुस्लिमों ने गुंडागर्दी किया। अब वह शांतिपूर्ण जुलूस निकालकर अपनी धर्म की रक्षा कर रहे हैं। इसमें भी कुछ जिहादी अडंगा डाल रहे हैं। हिंदू समर्थकों ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के भी नारे लगाए।

रैली का वीडियो सामने आने के बाद नेटिजन्स भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “यह है हमारा पड़ोसी देश नेपाल है तो छोटे भाई की तरह पर फर्ज निभाता है। बड़े भाई की तरह देखिए हमारे भारत में नूपुर शर्मा जी के पक्ष में किसी ने रैली नहीं निकाली पर नेपाल के हमारे भाइयों ने नूपुर शर्मा जी के पक्ष में रैलियाँ निकालने शुरू कर दी। जय श्री राम नेपाल के सभी भाई बहनों को प्रणाम।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “नूपुर शर्मा के समर्थन में नेपाल के काठमांडू में ज़बरदस्त प्रदर्शन। नेपाल के हिन्दू जाग गए लेकिन भारत का हिन्दू सोया हुआ है।”

शिवचरण सुदर्शन यादव लिखते हैं, “पड़ोसी देश नेपाल में हिन्दू भाइयों ने नूपुर शर्मा के समर्थन में रैली निकाली। भले हमारे बीच बार्डर है पर हम सभी भाई भाई हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “नेपाल के बीरगंज शहर में हिंदू समाज ने ‘सत्यवादी’ नुपूर शर्मा के समर्थन में विशाल जुलूस निकाला। अफसोस कि अपने देश के ही हिंदू इस धर्म और अधर्म की लडाई में कहीं सडकों पर नहीं दिखे।”

गौरतलब है कि भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा द्वारा इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के कथित अपमान के नाम पर भारत में जगह-जगह किए जा रहे दंगे को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की पुलिस को सतर्क रहने को कहा है। मंत्रालय ने कहा कि हिंसा के दौरान उन्हें निशाना बनाया जा सकता है।

बता दें कि शुक्रवार (10 जून 2022) को विरोध प्रदर्शन के नाम पर देश के कई शहरों में दंगे किए गए। इस दौरान दंगाइयों ने पुलिस पर हमला किया। इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी और पथराव की कई गंभीर एवं चिंताजनक घटनाएँ सामने आईं।

रोटी के बाद अब पॉपकॉर्न में थूक: नयाज पाशा को पुलिस ने धरा, फ्राई करने वाले तेल में थूक रहा था, रोकने पर उलझा – वीडियो वायरल

कर्नाटक के बंगलौर में लोगों के खाने के सामान पर थूक रहे एक व्यक्ति को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपित का नाम नयाज़ पाशा है। आरोप है कि नयाज पाशा पॉपकॉर्न की दुकान लगाता है। एक व्यक्ति ने उस पर पॉपकॉर्न बनाने वाले तेल में थूकने का आरोप लगाया है। घटना शनिवार (11 जून 2022) की है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

TV9 के वायरल हो रहे वीडियो में आरोपित नयाज को कुछ पुलिसकर्मी पकड़ कर ले जा रहे हैं। इसी के साथ पुलिस की मौजूदगी में कुछ लोग पीछे से चिल्ला कर नाराजगी जता रहे हैं। नयाज पुलिस की गाड़ी में बैठते हुए भी अपनी गलती नहीं स्वीकार करता दिखाई दे रहा। मौके पर पहुँची पुलिस ने एक बोतल में वो तेल भी अपने कब्ज़े में लिया, जिसमें नयाज द्वारा थूक कर पॉपकॉर्न बनाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित नयाज की उम्र 21 साल है। वह बंगलौर के सोमेश्वर नगर का निवासी है। उसकी पॉपकॉर्न की दुकान लाल बाग़ में है। शनिवार की सुबह लगभग 9:30 पर उसकी दुकान के पास घूम रहे एक व्यक्ति ने नयाज को पॉपकॉर्न बनाने वाले तेल में थूकते देखा। इस दौरान वो पॉपकॉर्न को फ्राई कर रहा था। इस दौरान दोनों में विवाद होने लगा। मामले की जानकारी होने पर पुलिस मौके पर पहुँची थी।

आरोपित नयाज पाशा की दुकान को बंद करा दिया गया है। घटना की शिकायत करने वाले व्यक्ति ने पुलिस शिकायत से मना कर दिया। आखिरकार पुलिस ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए नयाज पर IPC की धारा 269 के तहत केस दर्ज किया है। यह कार्रवाई सिद्दपुरा पुलिस स्टेशन में हुई है।

शिवलिंग को मांस-हड्डी से जोड़ा था सपा के MLC लाल बिहारी यादव ने… यूपी पुलिस ने दर्ज की FIR

पैगंबर मोहम्मद पर नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) की टिप्पणी को लेकर पूरे देश में बवाल जारी है। इसी बीच सपा के एमएलसी लाल बिहारी यादव (SP MLC Lal Bihari Yadav) के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। यह FIR कानपुर के रायपुरवा थाने में दर्ज कराई गई है।

बता दें कि कुछ दिनों पहले सपा एमएलसी द्वारा भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी करने का मामला सामने आया था। सपा एमएलसी पर एक इंटरव्यू में भगवान शिव पर अभद्र टिप्पणी (Controversial comment on Lord Shiva) करने का आरोप है। 

अब कानपुर पुलिस ने समाजवादी पार्टी के नेता के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की रिपोर्ट दर्ज की है। सपा नेता के खिलाफ मुकदमा बीजेपी के सह मीडिया प्रभारी अंकित बाजपेई ने दर्ज कराया है।

पुलिस के मुताबिक सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव के खिलाफ कानपुर के रायपुरवा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। बीजेपी नेता ने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता के बयान से करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। उन्होंने कहा कि सपा नेता का बयान सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला है।

गौरतलब है कि लाल बिहारी यादव ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के वारणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को लेकर विवादित बयान दिया था। जब विवादित ढाँचे के अंदर मिले शिवलिंग को लेकर उनकी प्रतिक्रिया पूछी गई थी, तो उन्होंने कहा था, “भगवान शंकर आदमी थे या पत्थर? मस्जिद के अंदर मिला पत्थर भगवान शिव की मूर्ति के रूप में होती तो मैं भी मानता कि वह भगवान शिव की मूर्ति है, लेकिन ऐसा नहीं है।” लाल बिहारी के इस बयान पर बीजेपी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से उनको पार्टी से बाहर निकालने की माँग की थी।

बीजेपी नेता ने अखिलेश यादव पर भी हमला किया है। उन्होंने कहा कि सपा के MLC लाल बिहारी यादव की ‘भगवान शिव’ पर चौंकाने वाली घृणित टिप्पणी को लेकर अखिलेश क्या कहेंगे। उन्होंने अखिलेश से सवाल किया कि क्या वो ऐसे गंदे व्यक्ति को पार्टी से निकालेंगे? बता दें कि लाल बिहारी यादव समाजवादी पार्टी में जौनपुर के जिलाध्यक्ष भी हैं। उन्हें अखिलेश यादव का काफी करीबी माना जाता है।

बंगाल में नूपुर शर्मा को समर्थन देने वाली लड़की और उसके पड़ोसियों के घर आगजनी, हावड़ा-मुर्शिदाबाद में फिर दंगा… MLA की गाड़ी पर भी हमला

भाजपा की पूर्व नेता नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के बयान को लेकर 10 जून 2022 को जुमे की नमाज के बाद देश के कई हिस्सों में आतंक फैलाया गया। इनमें पश्चिम बंगाल का हावड़ा (Hawada) भी शामिल था। वहीं, अगले दिन शनिवार को भी राज्य के मुर्शिदाबाद (Murshidabad) में कट्टरपंथी दंगाइयों ने उत्पात जारी रखा।

स्थिति को देखते हुए पश्चिम बंगाल (West Bengal) शासन ने हावड़ा और मुर्शिदाबाद में इंटरनेट सेवाओं को 14 जून तक के लिए बंद कर दिया है। इसके साथ ही इलाके में CrPC की धारा 144 लागू कर दी गई है।

वहीं, हावड़ा में भी शनिवार को हिंसा की फिर घटनाएँ हुईं। पंचला बाजार इलाके में  इस्लामी प्रदर्शनकारी ने भाजपा के कार्यालय में तोड़फोड़ की और कई घरों में आग लगा दी। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों पर भी पथराव किया। पथराव के कारण लगभग 12 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं।

भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने दंगाइयों पर लाठीचार्ज और आँसू गैस के गोले दागे। इस घटना के दौरान दंगाइयों ने पुलिस वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। वहीं, मुस्लिम बहुल दोमजुर इलाके में भी तनाव व्याप्त है।

दंगों में बच्चों को शामिल करने को लेकर विवादित फुरफुरा शरीफ के मौलाना पीरजादा मोहम्मद सनाउल्लाह सिद्दीकी को पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग (WBCPCR) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। आयोग ने पूछा कि बच्चों की जान को जोखिम में क्यों डाला गया।

इसके साथ ही प्रदर्शन के नाम पर आतंक फैलाने वाले 60 दंगाइयों को हत्या, हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने और दंगा करने के प्रयास के तहत गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, कॉलेज में पढ़ने वाली एक लड़की को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

पुलिस के अनुसार, लड़की को कथित तौर पर अपनी सोशल नेटवर्किंग साइट पर नूपुर शर्मा के समर्थन में एक पोस्ट डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसको बहाना बनाकर कट्टरपंथियों ने मुर्शिदाबाद में पथराव और कई घरों में आगजनी की।

लड़की की गिरफ्तारी की माँग के नाम पर दंगाइयों ने ना सिर्फ पुलिस पर पत्थरबाजी की, बल्कि लड़की के घर के साथ-साथ इलाके में रहने वाले अन्य लोगों के घरों पर भी हमला किया और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया।

इसके अलावा दक्षिण 24 परगना जिले के कुल्पी में भी दंगाइयों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने अम्ताला के पास विधायक जोगरंजन हलदर के वाहन पर हमला किया गया।

हिंसक विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राज्य सरकार ने शनिवार को कई पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया। इनमें कोलकाता पुलिस के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त प्रवीण त्रिपाठी, कोलकाता पुलिस की DCP (दक्षिण पश्चिम) स्वाति भंगालिया, हावड़ा सिटी पुलिस आयुक्त सी सुधाकर और हावड़ा (ग्रामीण) की SP सौम्या रॉय शामिल हैं।

भगवान राम ने जिस कोटेश्वर मंदिर की स्थापना की, वहाँ शिवलिंग पर अंडा रखा: वीडियो वायरल होने पर पहुँची UP पुलिस

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक मंदिर में शिवलिंग पर अंडा रख कर फोटो वायरल कर दी गई। इसके बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर लोगों को शाँत करवाया। मामले में FIR दर्ज कर के आरोपित की तलाश शुरू कर दी गई है। घटना शुक्रवार (10 जून 2022) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाँ ये घटना घटी, उस स्थान का नाम कोटेश्वर मंदिर है। इस जगह हिन्दू समाज की काफी आस्था है। यह प्रयागराज के शिवकुटी इलाके में पड़ता है। शिवलिंग मंदिर में 5 फिट लोहे की जाली के अंदर स्थापित है। घटना के दिन किसी ने उस पर अंडा रख कर फोटो खींच लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

आनन-फानन में पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक स्थानीय लोगों ने अंडा बाहर फेंक दिया था। मंदिर प्रबंधन की तरफ से अज्ञात आरोपित के खिलाफ तहरीर दी गई। पुलिस ने CCTV फुटेज के साथ अन्य साक्ष्य तलाशने शुरू कर दिए हैं। SHO शिवकुटी मनीष तिवारी के मुताबिक जल्द ही आरोपित को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया और असामाजिक तत्वों को उनके कारनामों में सफल न होने देने का एलान किया। क्षेत्र के पार्षद कमलेश ने बताया, “इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान राम ने की थी।” वहीं विरोध स्वरूप जमा हुए अन्य लोगों ने भी मंदिर परिसर में CCTV लगवाने के साथ सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किए जाने की माँग की।

गौरतलब है कि प्रयागराज में 10 जून 2022 (शुक्रवार) को जुमे की नमाज़ के बाद हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में DM और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर पथराव हुआ। SSP अजय कुमार पांडेय के मुताबिक अब तक घटना में शामिल आरोपितों पर 29 गंभीर धाराओं में केस दर्ज हुआ है।

SSP ने 11 जून 2022 को ऑपइंडिया को बताया, “FIR में 70 आरोपित नामजद किए गए हैं। 24 घंटे में 68 उपद्रवियों को हिरासत में लिया गया है। इन 68 में से 4 आरोपित नाबालिग हैं। 64 आरोपितों को जेल भेज दिया गया है जबकि 4 नाबालिगों को बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया है। CCTV व अन्य साक्ष्यों से आरोपितों की पहचान के प्रयास जारी हैं। किसी भी उपद्रवी को बख्शा नहीं जाएगा।”

राँची में दंगा कराने UP से गई थी टीम: सोरेन सरकार की तुष्टिकरण से कट्टरपंथी हावी, जिला पंचायत चुनाव में BJP ने मारी बाजी

जब सरकार कमजोर और लाचार हो तो कट्टरपंथी शैतान हावी हो जाते हैं। यह बात झारखंड (Jharkhand) के मामले में शत-प्रतिशत लागू होता होती। विधानसभा में नमाज के लिए कमरा आवंटित करने, स्थानीय भाषा को बढ़ावा देने के नाम पर सभी जिलों में उर्दू थोपने से लेकर सरकारी स्कूलों को ‘हरे रंग’ में रंगने के सरकारी आदेश के वहाँ कट्टरपंथियों का मनोबल काफी बढ़ा हुआ है। इसको देखते हुए राज्य की जनता फिर से भाजपा (BJP) की ओर देखने लगी है।

इसके संकेत राज्य के जिला पंचायत चुनावों में स्पष्ट देखने को मिला। झारखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव हो चुके हैं और इसमें भाजपा को जबरदस्त सफलता मिली है। अब जिला परिषद अध्यक्षों का चुनाव 15-20 जून के बीच होना है, जिसमें भाजपा को 11 सीटों के साथ जबरदस्त जीत की मिलने की संभावना है।

दरअसल, भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के बयान को इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान बताकर राज्य में 10 जून को जुमे की नमाज के बाद जो आतंक फैलाया गया, वह कट्टरपंथियों को बुलंद हौसलों की ओर इशारा करते हैं। इस मामले में यह बात सामने आई थी कि यूपी और देश के अन्य जगहों के कट्टरपंथी मुस्लिम झारखंड गए थे और युवाओं को प्रदर्शन के लिए भड़काया था।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में चार जून से ही दंगा की तैयारी शुरू कर दी गई थी और इसके लिए यूपी के सहारनपुर से 12 लोगों का एक दल चार और सात जून को राँची पहुँचा था। दल के कट्टरपंथियों ने राँची के मुस्लिम बहुल खूँटी, इलाही नगर, हिंदपीड़ी और गुदड़ी में बैठक कर जुलूस निकालने और हिंसा करने के लिए उकसाया था।

कट्टरपंथियों की टीम ने 16 से 24 साल के युवाओं को मुख्य रूप से फोकस किया। उन्हें कौम को परेशान करने का हवाला देकर भड़काया गया। कहा गया कि यूपी में मुस्लिमों को परेशान किया जा रहा है, इसलिए अपनी ताकत दिखानी होगी। इन लोगों ने गुरुवार को बाजार बंद का आह्वान किया था। इस मैसेज को ह्वाट्सएप ग्रुप पर खूब शेयर कर लोगों का समर्थन लिया गया। हिंसा के पीछे एक JMM कार्यकर्ता और पानी व्यवसायी का भी नाम आ रहा है। इससे पुलिस ने पूछताछ भी की है।

10 जून 2022 को देश के कई शहरों के साथ-साथ राँची में भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। यहाँ तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को अंजाम दिया गया। पुलिस और आम लोगों पर पथराव किए गए। हिंदू मंदिरों को नुकसान पहुँचाए गए। हिंसा के वीभत्स रूप को देखते हुए पुलिस को गोली चलानी पड़ी, जिसमें दो दंगाइयों की मौत हो गई।

लेकिन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) की अगुवाई वाली सरकार में सहयोगी कॉन्ग्रेस के विधायक इरफान अंसारी ने इन दंगाइयों की मौत पर सरकार से क्षतिपूर्ति की माँग कर डाली। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 50 लाख रुपए और परिवार के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की माँग की।

जब उपद्रवी लोगों को सरकार के सहयोगी दल के नेताओं का समर्थन हो तो सरकार की शक्ति लाचार नजर आने लगती है। सरकार ही जनता को कट्टरता और अराजकता के खतरे से बचा सकती है। जब सरकार की शक्ति अराजकता को रोकने में विफल हो जाती है तो कट्टरता बढ़ जाती है। मानव पर भ्रष्टता हावी हो जाती है और मनुष्य शैतान बन जाते हैं।

‘ऐसी कार्रवाई हो कि उदाहरण बन जाए, माफियाओं पर चलता रहेगा बुलडोजर’: जुमा के दंगों पर CM योगी सख्त, कहा – एक भी दोषी को नहीं छोड़ेंगे

उत्तर प्रदेश में लगातार दो शुक्रवारों से जुमे की नमाज के बाद होने वाली हिंसा मामले पर योगी आदित्यनाथ का आज (11 जून 2022) कुछ ट्वीट आए हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने साफ किया है कि शांति बहाल करने के लिए सभी पक्षों से बात होगी, लेकिन सड़कों पर उतर दंगा करने वाले उपद्रवियों के विरुद्ध कार्रवाई होना बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा है कि वह उपद्रवियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करेंगे कि सभी असामाजिक सोच वालों के लिए वो एक मिसाल होगी ताकि भविष्य में ऐसे उपद्रव की कोई सोच भी न सके। इसके अलावा जिन्होंने उपद्रवियों का साथ दिया उनसे भी निपटा जाएगा।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगातार ट्वीट करते हुए बताया, “हम एक लोकतांत्रिक देश के नागरिक हैं। ऐसे में हमें सभी पक्षों से संवाद बनाए रखना होगा। धर्मगुरुओं/सिविल सोसाइटी से सतत संवाद-संपर्क बनाए रखने के साथ-साथ उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई भी जारी रखी जाएगी।”

उन्होंने निर्देश दिए, “उपद्रवियों पर कार्रवाई ऐसी हो, जो असामाजिक सोच रखने वाले सभी तत्वों के लिए एक उदाहरण बने और माहौल बिगाड़ने के बारे में कोई सोच भी न सके।”

सीएम योगी ने कहा, “माफिया को संरक्षण देने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा तथा माहौल बिगाड़ने की एक भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। साजिशकर्ताओं/अभियुक्तों की पहचान कर यथाशीघ्र गिरफ्तारी की जाएगी। ऐसे लोगों के विरुद्ध NSA अथवा गैंगस्टर एक्ट के तहत नियम-संगत कार्रवाई की जाएगी।”

उपद्रवियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर सीएम ने साफ किया, “अपराधियों/माफियाओं के विरुद्ध बुलडोजर की कार्रवाई सतत जारी रहेगी। किसी गरीब के घर पर गलती से भी कोई कार्रवाई नहीं होगी। यदि किसी गरीब/असहाय व्यक्ति ने कतिपय कारणों से अनुपयुक्त स्थान पर आवास निर्माण करवा लिया है, तो पहले स्थानीय प्रशासन द्वारा उसका समुचित व्यवस्थापन किया जाएगा।”

योगी आदित्यनाथ ने आश्वासन दिया कि माहौल खराब करने की कोशिश करने वाले अराजक तत्वों के साथ पूरी कठोरता की जाएगी। सीएम ने कहा कि ऐसे लोगों की जगह सभ्य समाज में नहीं होनी चाहिए। वह बोले कि प्रशासन कार्रवाई के दौरान न किसी निर्दोष को छेड़ा जाएगा और न ही किसी दोषी को छोड़ा जाएगा।

यूपी पुलिस के हत्थे चढ़ा कानपुर दंगे का दूसरा मास्टरमाइंड निजाम कुरैशी, रहा है सपा का महानगर सचिव: हिन्दू दुकानदारों के खिलाफ फैला रहा था घृणा

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कानपुर में 3 जून को कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा की गई हिंसा (Kanpur Violence) के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने जिले में हुई हिंसा के दूसरे सबसे बड़े मास्टरमाइंड सपा के पूर्व नेता निजाम कुरैशी (Nizam Qureshi) को गिरफ्तार कर लिया है। वो बीते 8 दिनों से पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। हालाँकि, शनिवार (11 जून, 2022) को बेकनगंज से एसआईटी ने उसे धर दबोचा।

निजाम कुरैशी पर आरोप है कि 3 जून को उसने बेकगंज में बाजार बंदी के नाम पर मुस्लिमों को हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया और हिंसा शुरू होते है वहाँ से फरार हो गया ताकि पुलिस उस पर शक न करे। हालाँकि, इन सब के बावजूद उसकी इस साजिश का खुलासा हो गया।

हाल ही में निजाम कुरैशी के नाम से चल रहे वॉट्सएप ग्रुप में हिंदुओं के प्रति घृणा देखने को मिली है। साझा स्क्रीनशॉट में हिंदू दुकानदारों से सामान लेने से मुस्लिमों को मना किया जा रहा है। मैसेज में दुकानों के नाम अलग से लिखे गए हैं जिनसे किसी भी सामान की खरीददारी करने से मना किया जा रहा है। मैसेज के ऊपर ‘मुसलमानों के नाम संदेश’ साफ-साफ़ ऐसा लिखा है। इसमें हिंदू दुकानदारों के नाम के साथ बताया गया है- “जैसे इनको अपने सिर पर बैठाया है उसी तरह एकजुट होकर इन्हें सिरों से नीचे उतार भी सकते हैं।” जिस ग्रुप में ये सारी बातें हुई हैं उस ग्रुप का नाम ‘टीम निजाम कुरैशी’ है।

इतना ही नहीं 4 जून को कानपुर में दंगा करने वाले 36 दंगाइयों की लिस्ट यूपी पुलिस ने जारी की थी। उसमें भी सपा के पूर्व नेता निजाम कुरैशी का नाम था। पुलिस की एफआईआर में निजाम टॉप-5 का दंगाई है।

कौन है निजाम कुरैशी

कानपुर में हुई हिंसा के मामले में जौहर फैंस एसोसिएशन के अलावा ऑल इंडिया जमीअतुल कुरैशी एक्शन कमेटी का नाम भी सामने आया था। निजाम कुरैशी इसी संस्था का जिलाध्यक्ष है। इसके अलावा वो सपा का महानगर सचिव भी रह चुका है। इस संस्था का नाम CAA और NRC के समय हुए दंगे में भी सामने आया था