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कानपुर दंगों में भी PFI का हाथ: CAA विरोधी हिंसा में जो पकड़े गए वे फिर गिरफ्तार, सपा में रहे निजाम कुरैशी का हिंदूफोबिक चैट भी सामने आया

कानपुर हिंसा मामले के तार अब कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े पाए गए हैं। बताया जा रहा है कि हाल में हिंसा आरोपितों की धरपकड़ में पुलिस ने इस संगठन के तीन सदस्यों को पकड़ा जिनकी पहचान सैफुल्ला, नसीम और उमर के तौर पर हुई है। कथिततौर पर ये तीन सीएए हिंसा के दौरान भी पकड़े गए थे।

PFI सदस्यों समेत 54 गिरफ्तार

पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने गिरफ्तारियों पर बताया कि कानपुर हिंसा केस में पुलिस ने पीएफआई के 5 सदस्यों की पहचान की थी। इनमें से 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। एक फरार है और एक चलने की स्थिति में नहीं है। पुलिस को शक है कि पीएफआई के अन्य सदस्य भी शहर में मौजूद हो सकते हैं जिसके मद्देनजर जाँच चल रही है। हिंसा केस में अब तक 54 गिरफ्तारियाँ हुई हैं। बीजेपी के युवा विंग के नेता हर्षित श्रीवास्तव को भी पुलिस ने भड़काऊ सामग्री पोस्ट करने पर पकड़ा है।

पुलिस ने इकट्ठा किए सबूत

ताजा जानकारी बताती है कि जाँच टीमें लगातार घटनास्थल पर जाकर सबूत जुटाने में लगी हैं। आज भी पुलिस एसआईटी सदस्यों ने और कानपुर एसीपी त्रिपुरारी पांडे ने हिंसा वाली जगह जाकर सफाई कर्मचारियों से बात की। घटना संबंधी सारे सबूत जुटाने के प्रयास हो रहे हैं। मंगलवार को सुबह ताबड़तोड़ दबिश दी गई थी। अभियान में कुल 11 आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़े थे। बुधवार को एसीपी पांडे ने बताया कि उन्हें सबूतों में पत्थर ईंट मिली। इलाके में फोटो ग्राफी और वीडियोग्राफी करके लोगों से उनकी राय ली गई है।

पूर्व सपा नेता का हिंसा में नाम

टाइम्स नाऊ की रिपोर्ट के अनुसार, कानपुर हिंसा में निजाम कुरैशी का नाम भी आया है उसके तार पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े मिले हैं। और उसके नाम से चल रहे वॉट्सएप ग्रुप में हिंदुओं के प्रति घृणा देखने को मिली है। साझा स्क्रीनशॉट में हिंदू दुकानदारों से सामान लेने से मुस्लिमों को मना किया जा रहा है। मैसेज में दुकानों के नाम अलग से लिखे गए हैं जिनसे किसी भी सामान की खरीददारी करने से मना किया जा रहा है। मैसेज के ऊपर ‘मुसलमानों के नाम संदेश’ साफ लिखा है। इसमें हिंदू दुकानदारों के नाम के साथ बताया गया है- “जैसे इनको अपने सिर पर बैठाया है उसी तरह एकजुट होकर इन्हें सिरों से नीचे उतार भी सकते हैं।” जिस ग्रुप में ये सारी बातें हुई हैं उस ग्रुप का नाम ‘टीम निजाम कुरैशी’ है।

PUBG के लिए माँ की हत्या: 10 साल की बहन के सामने मारी गोली, 3 दिन तक शव के साथ रहा; बदबू रोकने के लिए रूम फ्रेशनर डालता रहा

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ऑनलाइन गेम PUBG के लिए एक नाबालिग ने अपनी माँ की हत्या कर दी। पुलिस ने बताया है कि लड़का पबजी मोबाइल गेम का आदी है। रोके जाने पर उसने माँ को गोली मार दी। वारदात को अंजाम देने के लिए उसने अपने पिता की पिस्तौल का इस्तेमाल किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना लखनऊ के पीजीआई इलाके की है। यहाँ एल्डिको कॉलोनी में 40 वर्षीय साधना अपने 16 साल के बेटे और 10 साल की बेटी के साथ रहती थीं। साधना के पति आर्मी ऑफिसर हैं, जो कोलकाता में रहते हैं। बताया जा रहा है कि साधना का बेटा पबजी गेम का आदी है। जब उसे गेम खेलने से रोका जाता तो वह अपनी माँ से झगड़ा करने लग जाता था। इसके बावजूद उसकी माँ उसे पबजी नहीं खेलने के लिए लगातार टोकती रहती थी।

माँ ने रविवार (5 जून 2022) को एक बार फिर बेटे को पबजी गेम खेलने से रोका। इस पर आगबबूला बेटे ने अपने पिता की लाइसेंसी पिस्टल माँ के सिर में मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। उसके बाद आरोपित ने अपनी छोटी बहन को धमकाया और उसे दूसरे कमरे में बंद कर दिया।

पूर्वी लखनऊ के एडीसीपी कासिम आबिदी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “एक नाबालिग लड़के ने पबजी खेलने से रोकने पर अपनी माँ की गोली मारकर हत्या कर दी है। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि वह इस खेल का आदी था और उसकी माँ उसे खेलने से रोकती थी, जिसके चलते उसने अपने पिता की पिस्तौल से उन्हें मार डाला।”

पुलिस का कहना है कि तीन दिन तक वह घर में माँ के शव के साथ ही रहा था। शव की गंध रोकने के लिए वह रूम फ्रेशनर का इस्तेमाल कर रहा था। मंगलवार (7 जून 2022) देर शाम जब दुर्गंध बढ़ गई तो बेटे ने पिता को फोन किया और माँ की हत्या होने की जानकारी दी। उसके बाद पिता ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। अधिकारी ने बताया कि लड़के ने पुलिस को गुमराह करने के लिए किसी बिजली मिस्त्री के बारे में फर्जी कहानी गढ़ी थी। लड़के ने कहा, “घर पर बिजली मिस्त्री आया था। उसी ने माँ की हत्या कर दी।” हालाँकि, ढाई घंटे की पूछताछ में पूरी वारदात का खुलासा हो गया। पुलिस ने आरोपित बेटे को हिरासत में ले लिया है।

बता दें कि इससे पहले मार्च में महाराष्ट्र के ठाणे में पबजी खेलने के बाद हुए विवाद के कारण तीन लड़कों ने अपने ही एक दोस्त की हत्या कर दी थी। इस मामले में पुलिस ने 20 वर्षीय आरोपित को गिरफ्तार किया था। यही नहीं जून 2019 में भी ठाणे में PUBG खेलने से मना करने पर 15 साल के किशोर ने कथित तौर पर अपने बड़े भाई मोहम्मद शेख (19 साल) की हत्या कर दी थी।

सरकारी गाड़ी में गैंगरेप, नाबालिग को किस करने का Video बना सोशल मीडिया पर डाला: AIMIM विधायक का बेटा भी गिरफ्तार, जानिए हैदराबाद केस की हर डिटेल

हैदराबाद गैंगरेप केस (Hyderabad Gangrape Case) में एक विधायक के बेटे और भतीजे की भी गिरफ्तारी हो गई है। यह विधायक असदुद्दीन औवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) से जुड़ा हुआ है। इस मामले में कुल 6 गिरफ्तारी हुई है। इनमें से 5 नाबालिग हैं। एकमात्र बालिग आरोपित की पहचान सदुद्दीन मलिक बताई गई।

यह बात भी सामने आई है कि नाबालिग से गैंगरेप मर्सिडीज में नहीं हुई थी। अपराध को अंजाम देने के लिए सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल हुआ था। आरोपितों की निशानदेही पर यह इनोवा जब्त कर ली गई है। पुलिस कमिश्नर सीवी आनंद ने बताया कि यह गाड़ी एक वरिष्ठ नेता को अलॉट की गई है। वह महत्वपूर्ण सरकारी विभाग के प्रभारी हैं। पुलिस कमिश्नर ने कहा, “जिस कार में अपराध हुआ वह एक आरोपित के पिता को अलॉट की गई सरकारी वाहन है। अपराध में दो वाहनों का इस्तेमाल किया गया था और उसे नाबालिग चला रहे थे।”

जानकारी के मुताबिक AIMIM विधायक के बेटे के खिलाफ गैंगरेप के बजाय छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि विधायक का बेटा उस इनोवा कार में सवार नहीं था, जिसमें पीड़िता के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया, लेकिन उसने मर्सिडीज में पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार किया था। पुलिस के अनुसार चार नाबालिगों ने अपने सोशल मीडिया पेज पर पीड़िता को किस करने का वीडियो भी पोस्ट किया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सीवी आनंद ने इस तरफ भी इशारा किया है कि पुलिस तथ्यों की पुष्टि करने के बाद आरोपित के माता-पिता के खिलाफ भी मामला दर्ज कर सकती है। बताया जा रहा है कि सभी आरोपित कथित तौर पर प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। पुलिस कमिश्नर ने कहा, “सामूहिक बलात्कार करने वाले आरोपित को कड़ी सजा दी जाएगी। यह या तो 20 साल (न्यूनतम) कारावास या आजीवन कारावास हो सकता है। दूसरी ओर, विधायक के नाबालिग बेटे को 5 से 7 साल की कैद हो सकती है।”

उल्लेखनीय है कि 4 जून को तेलंगाना के दुब्बक से भाजपा विधायक रघुनंदन राव ने भाजपा प्रदेश कार्यालय, कट्टेलमंडी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने घटना से संबंधित एक वीडियो क्लिप और तस्वीरें शेयर की थी और एआईएमआईएम विधायक के बेटे का नाम लेकर सवाल किया था कि आखिर पुलिस कोई एक्शन क्यों नहीं ले रही। इसके बाद 6 जून को एम रघुनंदन राव पर फोटो और वीडियो क्लिप जारी कर नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में आईपीसी की धारा 228-ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।

क्या है मामला?

17 साल की पीड़िता 28 मई को एक पार्टी के बाद घर लौट रही थी। उसी वक्त हैदरबाद जुबली हिल्स इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है एक वीडियो में पीड़िता एक पब के बाहर आरोपितों के साथ खड़ी दिखाई दे रही थी। रिपोर्ट की मानें तो आरोपितों ने पहले पीड़िता से उसे उसके घर छोड़ने की बात कही। बाद में एक पार्क की हुई कार के अंदर उसके साथ मारपीट की गई और फिर बारी-बारी से सभी ने उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान दूसरे आरोपित कार के बाहर पहरा दे रहे थे। 

दोस्तों के साथ आया जहीर-बरसाए पत्थर, दिल्ली पुलिस ने विशाल-वीरू को गिरफ्तार किया: जहाँगीरपुरी की घटना, देखें Video

दिल्ली के जहाँगीरपुरी से कल (7 जून 2022) रात पत्थरबाजी की घटना प्रकाश में आई है। सामने आई वीडियोज में दो तरफ से लोगों को भागते और एक दूसरे पर पत्थर फेंकते देखा जा सकता है। हालात काबू करने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात हुआ। फिलहाल स्थिति शांत है। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। जाँच के बाद बाकी पत्थरबाजों को भी पकड़ा जाएगा।

पुरानी बहस पर हुई पत्थरबाजी

जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना बीती रात जहाँगीरपुरी के जे ब्लॉक के महेंद्र पार्क थाना में घटित हुई, जहाँ जहीर नाम का लड़का 2 दिन पुरानी बहस के बदले अपने दोस्तों के साथ 2 लड़कों की तलाश में आया। कथिततौर पर उस दौरान जहीर और उसके सभी दोस्तों ने पी हुई थी। इन लोगों ने अचानक पत्थरबाजी शुरू कर दी और 3 गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद दूसरी ओर से भी पथराव हुआ।

सीसीटीवी फुटेज में देख सकते हैं कि सुनसान सड़क पर अचानक से एक ओर से आ रहे लड़कों ने पथराव किया और आगे बढ़ बढ़कर पत्थर फेंके गए। इसके बाद दूसरी तरफ से लड़के आगे आए और उन्होंने भी जमकर पत्थरबाजी की।

बता दें कि दिल्ली के जहाँगीरपुरी में पिछले दिनों हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर हुई हिंसा के बाद यहाँ की स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में हालिया मामला सुन पुलिस ने फौरन इलाके में अपनी कई टीमों को तैनात किया है। साथ ही कुछ लोग हिरासत में भी लिए गए हैं। हालात शांत रहें इसके लिए पुलिस लगातार इलाके में गश्त कर रही है।

डीसीपी नॉर्थ वेस्ट उषा रंगनानी ने घटना संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि पत्थरबाजी मामले में विशाल और वीरू नाम के दो लड़कों को पकड़ कर गिरफ्तार किया गया है। घटना में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं हैं। दोनों ही गुट एक ही समुदाय से संबंध रखते हैं। घटना में कोई घायल नहीं हुआ है।

जोधपुर में फिर चले पत्थर, 2 मई को भी हुई थी CM गहलोत के गृह जिले में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हिंसा: भारी पुलिस बल तैनात

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर (Jodhpur) में फिर से सांप्रदायिक हिंसा की घटना हुई है। तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। साथ ही दो मई से लागू धारा 144 को जारी रखने का फैसला किया गया है। हालाँकि पुलिस का कहना है कि यह सांप्रदायिक घटना नहीं।

रिपोर्ट के अनुसार झगड़ा झुड़ाने आए दो युवकों की पिटाई के बाद मंगलवार (7 जून 2022) शाम को तनाव पैदा हो गया है। इस दौरान जमकर पथराव हुआ। यह घटना अतिसंवेदनशील माने जाने वाली सूरसागर के रॉयल्टी के पास हुई। तनाव इतना बढ़ा गया कि पाँच थानों की पुलिस को मोर्चा सँभालना पड़ा। इस मामले में अभी तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दो युवकों के घायल होने की खबर है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर 300 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इलाके में धारा 144 लगा दी गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो युवकों के बीच विवाद बाइक पार्किंग को लेकर शुरू हुआ था। मामला धीरे-धीरे इतना बढ़ गया कि वहाँ पर ईंट-पत्थर चलने लगे। इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें मौके पर पहुँचे एक पुलिस वाले को आपस में झगड़ते युवकों को छुड़ाते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद दोनों ही समुदाय के लोग बाहर आए। पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों से शांति कायम करने की अपील की है।

गौरतलब है कि इससे पहले 2 मई को (ईद के मौके पर) भी जोधपुर में अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हिंसा हुई थी। स्वतंत्रता सेनानी बिस्सा जी की प्रतिमा पर कट्टरपंथी मुस्लिम इस्लामी झंडे लगा रहे थे। इसका विरोध किए जाने के बाद हिंसा भड़क उठी थी। जोधपुर के जिन पाँच इलाकों में दंगाइयों ने उत्पात मचाया था, जब वहाँ लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला गया तो पता चला कि ये सब पहले से योजनाबद्ध था। सोनारो का बास मोहल्ले में एक घर के बाहर लगे सीसीटीवी से पता चला था कि पहले दंगाइयों ने मोहल्ले में आकर वहाँ के हालात की रेकी की थी। उसके बाद दंगाइयों की भीड़ तलवार, सरिया, लाठी और तेजाब की बोतलें लेकर वहाँ आए और हमला किया। इस दौरान लोगों के घरों पर तेजाब भी फेंका गया था।

‘बच्चों में बाँधेंगे बम, भगवा आतंकियों को उड़ाएँगे’: आतंकी संगठन अलकायदा ने दी दिल्ली, मुंबई, गुजरात में हमले की धमकी

पैगंबर मुहम्मद पर की गई टिप्पणी के बाद चल रहे बवाल के बीच अब आतंकी संगठन अलकायदा ने भारत को आत्मघाती हमलों से दहलाने की धमकी दी है। अलकायदा ने अपने पत्र में पहले कहा कि इस पूरी दुनिया में अल्लाह से ऊपर कोई नहीं है जिन्होंने खुद पैगंबर मुहम्मद को भेजा। उसके बाद बताया कि कैसे ‘हिंदुत्व का झंडा’ उठाकर चलने वालों ने पैगंबर और उनकी बीवी का अपमान किया जिससे दुनिया के हर मुस्लिम को दुख पहुँचा और अब वह बदले की आग में जल रहे हैं।

अलकायदा द्वारा जारी की गई धमकी

इस पत्र में अलकायदा ने समुदाय के अन्य लोगों से पैगंबर की शान में जान देने की अपील की। पत्र में लिखा, “हम दूसरे लोगों से अपने नबियों के सम्मान के लिए लड़ने और मरने को कहते हैं। हम उन लोगों को मार देंगे जो हमारे पैगंबर का अपमान करते हैं। हम अपने शरीर और बच्चों के शरीर के साथ विस्फोटक बाँधेंगे ताकि उन लोगों को उड़ा सकें जो हमारे पैगंबर का अपमान करने की हिमाकत करते हैं। हम कहते हैं अल्लाह के करम से भगवा आतंकियों को अब दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और गुजरात में अपने अंत का इंतजार करना चाहिए। इन लोगों को न इनके घर में जगह मिलेगी न सेना की छावनियों में। “

बता दें कि पैगंबर मुहम्मद पर 26 मई 2022 को एक टीवी डिबेट शो में नुपूर शर्मा द्वारा कथिततौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद कट्टरपंथी लगातार हिंदुओं के विरुद्ध अपने समुदाय को भड़का रहे हैं। सबसे पहले ये काम ऑल्ट न्यूज के मोहम्मद जुबैर ने किया और उसके बाद नुपूर को रेप और हत्या की धमकी आने लगी। धीरे-धीरे इस टिप्पणी का असर इस्लामी देशों में रह रहे भारतीयों को देखना पड़ा। कानपुर हिंसा भी पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी करने वालों को सजा देने के नाम पर हुई। कई जगह हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करते हुए रैली की गई और अब इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए इस्लामी आतंकियों ने भगवाधारियों को आतंकी करार देकर भारत को विस्फोटों से दहलाने वाला धमकी भरा पत्र भेजा है।

वाराणसी में ब्लास्ट करने वाले वलीउल्लाह को कानूनी मदद देगा जमीयत, मिली है फाँसी की सज़ा: अखिलेश यादव वापस लेना चाहते थे मुकदमा

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी आतंकी वलीउल्लाह की फाँसी की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट जाएँगे। मदनी ने कहा कि उन्हें देश की उच्च अदालतों पर पूरा यकीन है। इसलिए वह निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जिनमें निचली अदालतों ने सजाएँ दीं, मगर जब वे मामले उच्च न्यायालय में गए तो पूरा इंसाफ हुआ।

उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा उदाहरण अक्षरधाम मंदिर हमले का है, जिसमें निचली अदालत ने मुफ्ती अब्दुल कय्यूम समेत तीन लोगों को फाँसी और चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी थी। लेकिन जमीयत की कानूनी सहायता से जब यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा तो ये सारे लोग न केवल सम्मानपूर्वक बरी हुए, बल्कि निर्दोषों को आतंकवाद के आरोप में फँसाने पर अदालत ने गुजरात पुलिस को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

मालूम हो कि गाजियाबाद की विशेष सेशन कोर्ट के जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने सोमवार (6 जून, 2022) को 2006 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हुए सीरियल बम विस्फोट के दोषी वलीउल्लाह को फाँसी की सजा सुनाई थी। वलीउल्लाह यूपी के फूलपुर का रहने वाला है। जमीयत उलमा-ए-हिंद पिछले 10 सालों से उसे कानूनी सहायता मुहैया करा रहा है।

अखिलेश ने वलीउल्लाह का मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया था

गौरतलब है कि वाराणसी में 7 मार्च, 2006 को बम ब्लास्ट हुआ था। 2012 में बनी समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस मामले के आरोपित ‘मुस्लिमों’ पर से केस हटाने के लिए कदम उठाए थे। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कई जिलों की अदालतों में आरोपितों के खिलाफ मामले चल रहे थे। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार के कदम से बम ब्लास्ट की साजिश रचने वालों को और प्रोत्साहन मिलेगा। इस मामले में बम स्टोर करके रखने वाले वहीदुल्लाह और शमीम को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रिहा करने की योजना बना रहे थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सपा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकार कैसे ये निर्णय ले सकती है कि कौन आतंकवादी है और कौन नहीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि ये निर्णय अदालत का है। उच्च-न्यायालय ने पूछा था कि क्या सरकार ऐसे कदम उठा कर आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहती है। आज मामले वापस लिए जा रहे और कल उन्हें पद्मा भूषण दे दिया जाएगा!

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के सर्वे का आदेश देने वाले जज रवि दिवाकर को मिली जान से मारने की धमकी, बढ़ाई गई सुरक्षा

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मामले में जारी सुनवाई के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे करने का आदेश देने वाले जज रवि दिवाकर को अब जान से मारने की धमकी मिली है।

दरअसल, जज रवि दिवाकर ने वाराणसी में ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में एडवोकेट कमिश्‍नर की कार्यवाही का आदेश दिया था। वहीं अपने फैसले के बाद उन्‍होंने खुद को इस प्रकरण को लेकर परिवार में चिंता की बात भी पहले ही कही थी। अब उनको जान से मारने की धमकी मिलने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर शासन स्‍तर से जाँच करने के साथ ही‍ कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

मामले में कमिश्नर ए सतीश गणेश ने कहा कि मंगलवार (7 जून, 2022) को दिन में जज रवि दिवाकर को धमकी भरा एक पत्र रजिस्टर्ड पोस्ट से मिला है, जिसमें कुछ और भी कागज संलग्न हैं। हालाँकि इसकी जानकारी उन्होंने बाद में पुलिस को दी।

धमकी भरे पत्र में लिखा गया है, “अब न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनसे जुड़े संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं। आपको सरकारी मशीनरी मिली है, फिर आपकी पत्नी व माँ को डर कैसा है? आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रूख देखकर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो मूर्तिपूजक हैं। आप मस्जिद को मंदिर घोषित कर देंगे। कोई भी काफिर मूर्तिपूजक हिंदू न्यायाधीश से मुसलमान सही फैसले की उम्मीद नहीं कर सकता।”

जैसे ही जज को धमकी की खबर सामने आई प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। वहीं बताया जा रहा है कि ये धमकी किसी इस्लामिक आजाद मूवमेंट नामक संस्‍था की ओर से दी गई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, धमकी भरे उस पत्र के बारे में न्यायाधीश रवि दिवाकर ने प्रमुख गृह सचिव को जानकारी दी है। जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

गौरतलब है कि न्यायाधीश रवि दिवाकर सिविल सीनियर डिवीजन वाराणसी कोर्ट में कार्यरत हैं। वहीं अब धमकी वाले मामले को डीसीपी वरुणा खुद देख रहे हैं। फ़िलहाल जज की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

बंगाल पुलिस ने गोवा पहुँच कर YouTuber को किया गिरफ्तार, फेसबुक लाइव में CM ममता बनर्जी पर टिप्पणी का मामला: रिमांड पर लेने की तैयारी

YouTuber रोडुर रॉय को कोलकाता पुलिस ने ममता बनर्जी के खिलाफ एक वीडियो अपलोड करने के आरोप में गोवा से गिरफ्तार कर लिया है। कहा जा रहा कि वीडियो में उन्होंने 5 जून को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के खिलाफ विवादित बयान दिया था।

वहीं एक दूसरी रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि कोलकाता पुलिस की एक टीम ने मंगलवार की दोपहर में फेसबुक लाइव सेशन के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल के आरोप में गोवा से एक व्लॉगर रोडुर रॉय को गिरफ्तार किया है।

कोलकाता पुलिस के अधिकारी ने मीडिया को बताया, “आरोपित यू ट्यूबर रोडुर रॉय को आज दोपहर गोवा में हमारे अधिकारियों ने गिरफ्तार किया। उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर कोलकाता लाया जाएगा। इसके लिए हमारे अधिकारी उसे उसके रिमांड के लिए वहाँ की एक स्थानीय अदालत में पेश करेंगे।”

बता दें कि टीएमसी के प्रवक्ता रिजू दत्ता ने रविवार को चितपुर पुलिस स्टेशन में यू ट्यूबर व्लॉगर के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कराई थी। कहा जा रहा है कि ब्लॉगर ने ममता बनर्जी और डायमंड हार्बर के सांसद के अलावा फरहाद हकीम और मदन मित्रा जैसे कई अन्य टीएमसी नेताओं के खिलाफ भी विवादित टिप्पणी की है।

टीएमसी प्रवक्ता रिजू दत्ता ने कहा, “टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने पहले पुलिस आयुक्त के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि मैंने रॉय के खिलाफ चितपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम और विधायक मदन मित्रा सहित अन्य टीएमसी नेताओं को गाली दी थी।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब पश्चिम बंगाल सरकार में किसी यू ट्यूबर ब्लॉगर के खिलाफ कार्रवाई हुई हो। वहीं मीडिया रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि यू ट्यूबर ने सिंगर केके के अंतिम संगीत कार्यक्रम में कथित कुप्रंधन के लिए सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी को दोषी ठहराया था। बता दें कि बॉलीवुड सिंगर केके सभागार में अपनी परफॉर्मेंस के दौरान तुरंत गिर गए थे और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

महादेव के इन भक्तों के सामने फेल हुए ईसाई मिशनरी, धर्मांतरण के जाल में नहीं फँस रही आदिवासी गोंड जनजाति: संघर्ष कर बचा रहे संस्कृति

झारखंड में आदिवासी समाज हमेशा से ईसाई मशीनरी के निशाने पर रहा है। उनकी अशिक्षा और गरीबी का फायदा उठाकर उन्हें तरह-तरह के प्रलोभन देकर उनका धर्मांतरण किया जाता रहा है। वहीं, आदिवासी समाज में कई जनजातीय समूह ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपनी परंपरा, संस्कृति और संस्कारों से कभी भी समझौता नहीं किया है। गोंड जनजाति भी इन्हीं में एक है।

दैनिक जागरण के मुताबिक, झारखंड के ईसाई बहुल आबादी वाले सिमडेगा जिले में बड़े पैमाने पर आदिवासियों का धर्मांतरण हुआ है, लेकिन यहाँ ईसाई मिशनरियों के लिए गोंड जनजाति के लोगों का धर्म परिवर्तन करना बहुत ही मुश्किल रहा है। तमाम विपरीत परिस्थितियों और संघर्षों के बावजूद इस जनजाति के लोग अपने पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखने में कामयाब रहे हैं।

सिमडेगा में पिछले करीब 40 वर्ष में गोंड जनजाति में धर्मांतरण के गिने-चुने मामले ही सामने आए हैं। अगर कोई धर्मांतरण हुआ भी है, तो बाद में समाज के लोगों ने उस शख्स की घर-वापसी करवा ली है। जिले भर में 54 हजार गोंड जनजाति के परिवार निवास करते हैं। ये जनजाति समूह में रहती है और सामूहिक रूप से निर्णय लेती है। इनकी पूजा पद्धति, रीति-रिवाज और संस्कृति में सनातन परंपरा का साफ नजर आती है।

शुरू से ही इस समाज के लोग भगवान शंकर को अपना आराध्य मानते हैं। यही नहीं सिमडेगा में तीन दशकों से गोंड समाज से भाजपा के विधायक भी रहे हैं। गजाधर गोंड, निर्मल कुमार बेसरा और विमला प्रधान 30 वर्षों से अधिक समय तक विधायक के रूप में निर्वाचित होते रहे हैं। ये तीनों जनप्रतिनिधि भी समाज को धर्मांतरण से बचाने के प्रयास करते रहे हैं।

गोंड महासभा की सलाहकार व भाजपा सरकार में मंत्री रहीं विमला प्रधान ने कहा, “गोंड समाज की भाषा-संस्कृति प्राचीन व समृद्ध है। हम सभी अपनी संस्कृति को लेकर बेहद गंभीर हैं। यही कारण है कि हमारे समाज के लोग धर्म परिवर्तन से बचे हुए हैं और अन्य जनजातियों की अपेक्षा गोंड समाज में धर्मांतरण बेहद कम हुआ है।”