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‘The Wire’ की आरफा खानुम शेरवानी ने भगवान कृष्ण को बताया दलित विरोधी, कार्टून के जरिए उड़ाया मजाक: लोग बोले- गिरफ्तार करे यूपी पुलिस

वामपंथी प्रोपगेंडा पोर्टल The Wire की कथित पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी (Arfa Khanum Sherwani) ने एक बार फिर अपनी नीच मानसिकता को दर्शाते हुए हिंदुओं के आराध्य भगवान कृष्ण को दलित विरोधी दिखाने का प्रयास किया है। आरफा ने ट्विटर पर भगवान की एक विवादित कार्टून शेयर किया है, जिसमें वह दलित लड़के को उल्टा पेड़ पर लटकाए हुए हैं।

आरफा ने जिस विवादित कार्टून को ट्विटर पर शेयर किया है उसमें भगवान कृष्ण एक तलवार लेकर खड़े हैं और उनके सामने किताब पढ़ते एक लड़के के पैर को बाँधकर पेड़ से उलटा लटकाया हुआ है। कार्टून पर लिखा हुआ है, “तुम वही दलित हो, जो Ph.D की पढ़ाई करके ABVP के बच्चों का जीवन खतरे में डाल रहा है?”

यह कार्टून हैदराबाद विश्वविद्यालय को संदर्भित करके बनाया गया है। कार्टून के ऊपर लिखा हुआ है, ‘हैदराबाद विश्वविद्यालय VIP शिकायत पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।’ आरफा को इस विवादित ट्वीट देखकर सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा फैल गया है। सोशल मीडिया यूजर्स ने यूपी पुलिस से आरफा को गिरफ्तार करने की माँग की है।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

आरफा का मन हिंदुओं के प्रति घृणा से भरा हुआ है और समय-समय पर वह इसका प्रदर्शन भी करती रहती हैं। तनिष्क ज्वैलरी वाले विवाद में आरफा इसका प्रदर्शन कर चुकी हैं। तब उन्होंने कहा था, “लड़की को माँ की कोख में मार देने वाले, दहेज के नाम पर ज़िंदा जला देने वाले, लड़की की ‘सही’ जगह रसोई व बिस्तर के परे न देख पाने वाले कैसे बर्दाश्त करेंगे, एक मुस्लिम घर में हिंदू बहू को प्यार-सम्मान मिले और उसकी पहचान भी सुरक्षित रह पाए। ये लड़कियों के, उनकी आज़ादी के दुश्मन हैं।”

इतना ही नहीं, मुंबई ड्रग केस में पकड़ाए शाहरुख खान के बेटे को लेकर हिंदू-मुस्लिम का रोना रोया था। उन्होंने कहा था, “आर्यन खान केस का ड्रग लेने से कोई लेना-देना नहीं है। ये विशु्द्ध रूप से शाहरुख खान को निशाना बनाने की साजिश है। आर्यन के जमानत पाने के मूल अधिकार को स्वतंत्रत देश में खारिज कर दिया गया…शाहरुख खान हमारे समय के सबसे बड़े मुस्लिम सुपरस्टार हैं।”

कर्नल अजय कोठियाल ने AAP से दिया इस्तीफा, पार्टी ने बनाया था CM चेहरा: कहा – पूर्व सैनिकों, बुजुर्गों, युवाओं के हित में छोड़ रहा पार्टी

उत्तराखंड (Uttarakhand) में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और चुनावों के दौरान पार्टी की मुख्यमंत्री का चेहरा रहे कर्नल अजय कोठियाल (Colonel Ajay kothiyal) ने बुधवार (18 मई 2022) को चौंकाने वाला कदम उठाते हुए पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने ट्विटर पर सार्वजनिक रूप से अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि वह पूर्व सैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा कर रहे हैं।

कर्नल कोठियाल ने आप से अपना इस्तीफा ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पूर्व सैनिकों, पूर्व अर्धसैनिकों, बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं और बुद्धिजीवियों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मैं आम आदमी पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूँ।” उल्लेखनीय है कि कर्नल कोठियाल पिछले साल अप्रैल में ही इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे।

देवभूमि उत्तराखंड वो राज्य हैं, जहाँ पूर्व सैनिकों की एक बड़ी आबादी निवास करती है। इसी को देखते हुए अपनी सियासी जमीन मजबूत करने के इरादे से अरविंद केजरीवाल ने कोठियाल को मुख्यमंत्री चेहरा बनाया था। पार्टी ने सत्ता में आने पर 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के वादे के अलावा कोठियाल की सैन्य सेवा की साख पर भरोसा किया था। दरअसल, सेना में रहते हुए कोठियाल का एक शानदार करियर था, जिसमें उनके नाम कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा पदक और पराक्रम पदक शामिल थे।

AAP का चुनावी दाँव हो गया था फेल

हालाँकि, जिस उम्मीद से आम आदमी पार्टी (AAP) ने ये दाँव खेला था, वो फेल हुआ और AAP चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाई। पार्टी की करारी हार के बाद शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला। सागर भंडारी सहित पार्टी के विद्रोही नेताओं के एक दल ने राज्य में AAP की हार के लिए कोठियाल को दोषी ठहराया। राज्य में कर्नल कोठियाल के नाम पर चुनाव लड़े गए। हर बैनर में उनकी फोटो थी। इसलिए उन्हें भी हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लेकिन अब तक उन्होंने न तो मीडिया के सामने और न ही किसी पार्टी कार्यकर्ता के साथ ऐसा किया है।

बहरहाल अजय कोठियाल ने पार्टी के अंदर मुखर होते विरोध के स्वर और चुनावी प्रदर्शन का सामना करने के बाद कर्नल अजय कोठियाल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देते हुए AAP से अलग होने का फैसला किया है।

दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठ डीजे के साथ जाते देख भड़के मुस्लिम: मस्जिद के सामने बारातियों पर हमला, कई घायल, 5 साल की बच्ची की हालत गंभीर

मध्य प्रदेश के राजगढ़ (Rajgarh, Madhya Pradesh) जिले में दलित दूल्हे को घोड़ी पर बैठने और मस्जिद के सामने डीजे बजाने के लेकर उपद्रवियों ने बरातियों पर हमला बोल दिया। इस हमले में कई लोग घायल हो गए हैं। वहीं, एक पाँच साल की बच्ची को गंभीर हालत में उज्जैन रेफर किया या है। पुलिस ने फरहान, जुनैद, सोहैल, साबिर, अनस कसाई सहित सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

घटना मंगलवार (17 मई 2022) की देर रात की है। जिले के जीरापुर में एक दलित के घर बारात आई थी। इस बारात में डीजे बज रहा था और दूल्हा घोड़ी पर बैठकर आ रहा है। बारात जैसे ही माता जी मोहल्ले में मस्जिद के सामने से निकली, कुछ मुस्लिम युवकों ने बारातियों पर पथराव कर दिया। इस दौरान बैंड और ढोल बजाने पर के साथ-साथ बारातियों से जमकर मारपीट की गई।

पीड़ित के पक्ष के अंकित मालवीय ने बताया कि उसकी चचेरी बहन अंजू की बारात सुसनेर के सुरेश चौहान के यहाँ से आई थी। वे सब बारात का स्वागत करने के लिए गेट पर खड़े थे। बारात जैसे ही मस्जिद के पास पहुँची, मुस्लिमों ने बैंड और ढोल बंद करवा दिए और कहा कि इस गाँव में मस्जिद के सामने बैंड बाजे बजाने की मनाही है।

इसके बाद बारात आगे बढ़ी और शीतला माता मंदिर के पास पहुँची और फिर बैंड और ढोल बजने लगे और बाराती में शामिल महिला-पुरुष नाचने लगे। तभी मुस्लिम समुदाय के 20-25 लोगों ने हंगामा करते हुए ढोल वाले की जमकर पिटाई कर दी। इस दौरान उन लोगों ने बरातियों पर पथराव करने लगे।

इस हमले में की बाराती घायल हो गए। वहीं, बारात में शामिल होने आए लोग बिना खाए-पिए ही वापस लौट लगे। अंकित का कहना है कि शादी माता-पिता समेत सिर्फ 10-15 लोगों की मौजूदगी में संपन्न हुई। हमले की पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई है।

वहीं फुटेज के आधार पर पुलिस ने समर लाला, फरहान खान, जुनैद खान, सोहैल खान, साबिर खान, अनस कसाई, डग्गा खान एवं अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान कर रही है।

आज़म खान की 250 बीघा जमीन की गई जब्त, 4 किलोमीटर की सिर्फ बाउंड्री! ट्रैक्टर से पिलर और कँटीले तार लेकर पहुँची टीम

समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के नेता आजम खान (Azam Khan) सीतापुर जेल में बंद हैं और सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हो चुकी है। इस बीच बुधवार (18 मई, 2022) को राजस्व विभाग की टीम ने उनकी जौहर यूनिवर्सिटी पहुँची, जहाँ हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार 250 बीघे की ‘एनिमी प्रॉपर्टी’ को जब्त करने की कार्रवाई की।

रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्व की टीम ने जौहर विश्वविद्यालय की शत्रु संपत्ति की 4000 मीटर (यानी 4 किलोमीटर) की बाउंड्री की दीवार को नापा है। विभाग अपने साथ ट्रैक्टर में पिलर और कँटीले तारों को साथ लेकर आई थी। इसी के साथ विभाग ने ‘शत्रु संपत्ति’ के अंतर्गत आने वाली जमीन पर पिलर और गड्ढे खोदने का काम शुरू कर दिया है। इससे कँटीले तारों से बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी और उसे अपने नियंत्रण में लिया जाएगा। इस टीम के सर्वेयर प्रशांत सिंह सैनी अभिरक्षक कार्यालय लखनऊ से आए थे।

बताया जा रहा है कि अब राजस्व विभाग की ये कार्रवाई कई दिनों तक चलने वाली है। इसको लेकर एसडीएम मनीष मीणा का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद ये कार्रवाई की जा रही है।

गौरतलब है कि आजम खान एमपी-एमएलए कोर्ट ने मजिस्ट्रेट ट्रायल मुकदमें में आजम खान के खिलाफ आरोप तय किए जाएँगे। इसको लेकर 24 मई को सपा नेता रामपुर कोर्ट में तय होंगे। इसमें डूँगरपुर मामले में दो मामलों चार्ज तय किए जाएँगे। इस मामले को लेकर जिला शासकीय एडवोकेट रामपुर अरुण सक्सेना के मुताबिक, सपा के शासनकाल में डूँगरपुर में आसरा कॉलोनी बनाई गई थी।

उस दौरान वहाँ कुछ लोग पहले से रह रहे थे, जिनके घरों पर बुलडोजर चलवा दिया गया था। इतना ही वहाँ पर लोगों के साथ लूट, मारपीट और छेड़छाड़ भी की गई थी। इसी मामले को लेकर पिछले साल 2021 गंज थाने में करीब 12 अलग-अलग केस दर्ज किए गए थे।

शिवलिंग पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले DU प्रोफेसर पर दर्ज हुई FIR: गलती मानने से किया इनकार, माँगी AK-56 राइफल भी

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ रतन लाल के खिलाफ धार्मिक संवेदनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में दिल्ली पुलिस में मामला दर्ज कराया है। बता दें कि हिन्दू कॉलेज में इतिहास के प्रोफ़ेसर रतन लाल ने ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर सर्वेक्षण के दौरान पाए गए शिवलिंग को लेकर बहुत ही अपमानजनक पोस्ट किया था। जिस पर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। वहीं प्रोफेसर अपनी उल-जलूल दलीलों के जरिए सफाई पेश करते नजर आए।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक रतन लाल के खिलाफ कल रात शिकायत दर्ज की गई थी। साइबर पुलिस की नार्थ डिस्ट्रिक्ट थाने ने आईपीसी की धारा 153ए/295ए के तहत मामला दर्ज किया है। नीचे आप प्रोफेसर रतन लाल द्वारा की गई आपत्तिजनक पोस्ट भी देख सकते हैं।

रतन लाल की पोस्ट और प्रोफाइल

बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफेसर रतन लाल को आपत्तिजनक टिप्पणी पोस्ट किए जाने पर लोगों ने खूब खरी-खोटी सुनाई। लेख पर गुस्से में प्रतिक्रिया देने वाले कई लोगों ने कार्रवाई की माँग करते हुए दिल्ली पुलिस के ट्विटर हैंडल को टैग भी किया।

वहीं बीजेपी के प्रवक्ता आरपी सिंह ने लिखा, “इससे ​​मेरी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। अगर डॉ रतन लाल पर आईपीसी की धारा 153ए और आईपीसी के अन्य प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया जाता है और उनके खिलाफ मामला चलाया जाता है तो मैं इसकी सराहना करूँगा। उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग भी किया। @CPDelhi @DelhiPolice”

बता दें कि हाल ही में रतन लाल ने केंद्र सरकार और भारत के राष्ट्रपति को दो AK56 राइफल से लैस अंगरक्षकों या एक हथियार लाइसेंस का अनुरोध करते हुए एक पत्र भी लिखा ताकि वह एक AK56 बंदूक प्राप्त कर सकें। उन्होंने प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भारत के राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते हुए यह भी कहा कि उन्हें कमांडो ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।

गौरतलब है कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर से सटे विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में न्यायालय के आदेश के बाद सर्वे के दौरान वजूखाना में स्थित एक शिवलिंग का पता चला था। पता चलने के बाद सिविल जज वाराणसी (सीनियर डिवीजन) रवि कुमार दिवाकर ने 16 मई,2022 को ही विवादित ज्ञानवापी स्ट्रक्चर को सील करने का आदेश दे दिया था।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को फव्वारा बताने पर बोले IIT-BHU के प्रोफेसर- पुराने जमाने में बिजली नहीं थी, 150 फुट से पानी गिराना होता था

एक तरह जहाँ वाराणसी (Varanasi) के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में मिले शिवलिंग को मुस्लिम पक्ष फव्वारा बताकर इतिहास को झूठा साबित करने की कोशिश कर रहा है, वहीं IIT, BHU के प्रोफेसर ने इसे नकार दिया है। IIT, BHU में मैटेरियल और केमिकल साइंस के प्रोफेसर आरएस सिंह (RS Singh) कहा कि यह शिवलिंग ही है, क्योंकि पुराने जमाने में बिजली नहीं होती थी।

प्रोफेसर सिंह ने कहा पुराने जमाने में फव्वारे को चलाने के लिए पानी को काफी ऊपर से गिराया जाता था और वह दबाव में फव्वारे का आकार लेता था। उन्होंने कहा कि विवादित ज्ञानवापी परिसर में ऐसा कोई सिस्टम नहीं दिखा। शिवलिंग के ऊपर फव्वारेनुमा जो आकृति दिख रही है, वह सीमेंट रखा हुआ हो सकता है।

शिवलिंग के पन्ना होने की बात को लेकर उन्होंने कहा कि उसका को केमिकल एनालिसिस नहीं हुआ है, इसलिए यह कहना है कि वह पन्ना का है, थोड़ा मुश्किल है। इसको देखकर लगता है कि यह काफी पुराना है और लंबे समय से पानी में है। उन्होंने कहा कि अंतिम बार इसे राजा टोडरमल ने 400-500 साल पहले बनवाया था और उस समय बिजली नहीं थी।

प्रोफेसर आरएस सिंह ने कहा कि पुराने जमाने में भी फौव्वारे का निर्माण होता था, लेकिन जब तक पानी 100-150 फुट ऊपर से नहीं गिराया जाता, तब तक फव्वारे में पानी नहीं आता था। उन्होंने कहा कि इतने रेडियस का फव्वारा नहीं होता। अगर यह फव्वारा है तो इसके नीचे कोई मैकेनिज्म होगा और बेसमेंट में इसका सिस्टम बना होगा।

आजतक के अनुसार, उन्होंने कहा कि जो लोग इसे फव्वारा बता रहे हैं, वे लोग इसे चलाकर दिखा दें। अगर यह जाता है तो मान लिया जाएगा कि यह फव्वारा है, नहीं तो यह शिवलिंग है। वहीं, केमिकल डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर चंदन उपाध्याय ने कहा कि अगर यह फव्वारा है तो इसमें नोजल होना चाहिए, जो इसमें दिख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें पानी होनी चाहिए, वह भी नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग पन्ना का हो सकता है, लेकिन इसको प्रमाणित करने के लिए जाँच जरूरी है।

शिवलिंग क्या है – ये नहीं जानेंगे, तो कट्टर इस्लामी दुष्प्रचार को कैसे काटेंगे? अश्लीलता फैलाने वालों से निपटने के लिए समझें लिंगम् का इतिहास और महत्व

शिवलिंग क्या होता है? इसकी पूजा क्यों की जाती है? भगवान शिव से इसका क्या सम्बन्ध है? क्या वेदों में कहीं शिवलिंग का उल्लेख है? आज इन सब सवालों पर चर्चा आवश्यक हो गई है, क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी शिवलिंग को लेकर तरह-तरह की भ्रांतियाँ फैला कर हिन्दू धर्म को बदनाम कर रहे हैं। ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में प्राचीन शिवलिंग के सामने आने के बाद से वो बौखलाए हुए हैं। लेकिन, अफ़सोस ये कि शिवलिंग को लेकर अधिकतर हिन्दुओं को ही कुछ खास पता नहीं है।

जब हमें अपने प्रतीकों, देवी-देवताओं और पवित्र स्थलों के बारे में अच्छे से पता होगा, फिर कोई हमें भ्रम में नहीं डाल सकता। उससे भी ज्यादा ज़रूरी है कि आज की युवा पीढ़ी का, आज के बच्चों का ये जानना, ये बताया जाना कि हम हिन्दू हैं और हिन्दुओं के प्रतीक चिह्नों व साहित्य का क्या महत्व है, इनमें क्या है। शिवलिंग को लेकर भी अश्लील बातें की जा रही हैं, मजाक बनाया जा रहा है। ऐसे में हमें इस जंजाल को काटने की ज़रूरत है।

शिवलिंग को लेकर ऐसे हिन्दू धर्म को बदनाम कर रहे हैं इस्लामी कट्टरपंथी

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज में इतिहास के एसोसिएट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत रतन लाल ने फेसबुक पर एक लिंक साझा करते हुए लिखा, “यदि यह शिव लिंग है तो लगता है शायद शिव जी का भी खतना कर दिया गया था। साथ ही पोस्ट में चिढ़ाने वाला इमोजी भी लगाया – ? .वहीं तस्वीर का क्रेडिट ‘लल्लनटॉप’ को दिया गया। विरोध के बावजूद ये प्रोफेसर अपने बयान पर कायम हैं और कह रहे हैं कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सपा नेता मोहसिन अंसारी ने लीची के फल को काटकर उसके बीज की तुलना शिवलिंग से की। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एक अन्य घटना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पावंटा साहिब से सामने आई, जहाँ शिवलिंग की तुलना टॉयलेट सीट से करने के मामले में दो लोग गिरफ्तार किए गए। सपा नेता दानिश कुरैशी ने शिवलिंग को लेकर अश्लील बातें की, जिसके बाद गुजरात पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

इसी तरह पत्रकार सबा नकवी ने ‘भाभा अटॉमिक रिसर्च सेंटर’ की तुलना शिवलिंग से कर डाली और इसे व्हाट्सएप्प फॉरवर्ड बताया। बाद में उन्होंने ट्वीट डिलीट कर के माफ़ी माँग ली। AIIMS में रहे डॉक्टर श्रीनिवास राजकुमार ने एक घटिया अश्लील फेसबुक पोस्ट शिवलिंग को लेकर शेयर किया। ‘न्यूज़ 1 इंडिया’ को नगमा शेख नाम की अपनी एक एंकर को बरखास्त करना पड़ा, क्योंकि उसने भी कुछ इसी तरह की बातें की थीं।

अब रही बात जवाब देने की, तो इस्लाम मजहब, पैगंबर महम्मद या काबा को लेकर टिप्पणी करने वालों का हाल किसी से छिपा नहीं है। कभी ‘शार्ली हेब्दो’ मैगजीन के दफ्तर में घुस कर लोगों को मार डाला जाता है, कभी लखनऊ में कमलेश तिवारी की बेरहमी से हत्या हो जाती है। हिन्दू धर्म में किसी भी अन्य संप्रदाय पर ओछी टिप्पणी करने के लिए नहीं सिखाया जाता, लेकिन इस्लाम को लेकर टिप्पणी ही काफी है, अच्छी हो या बुरी। गला रेत दिए जाते हैं।

अथर्व वेद में भी मिलता है शिवलिंग की मूल कथा का जिक्र

लिंग का एक अर्थ स्तम्भ भी होता है, जिसे वेदों में ‘स्कम्भ’ भी कहा गया है। इसमें कोई शक नहीं है कि भारतीय और सनातन संस्कृति वेदों से ही निकली है और इसीलिए ऋषि-मुनियों ने किसी भी चीज को सही-गलत ठहराने के लिए सबसे पहले वेदों में झाँकना उचित समझा। आज भी हम अपनी संस्कृति की जड़ और सभ्यता का मूल वेदों में ही पाते हैं। इसी तरह अथर्व वेद में ‘स्कम्भ’ का वर्णन है, जहाँ से शिवलिंग की पूजा शुरू होने के संकेत हैं।

अथर्व वेद के दसवें काण्ड के सातवें मंत्र में इस ‘स्कम्भ’ का जिक्र है, जिसे समस्त संसार का मूल भी माना गया है। अतः, लिंग का शाब्दिक अर्थ हम ‘स्कम्भ’ या स्तम्भ भी ले सकते हैं। इसमें ब्रह्म को ‘स्कम्भ’ के रूप में ही वर्णित किया गया है। इसके बाद इस जिज्ञासा को शांत किया गया है कि इस ‘सर्वाधार स्कम्भ’ के किस हिस्से का क्या महत्व है। ध्यान दीजिए, इसमें वर्णित इस ‘स्कम्भ’ का न आदि है और न ही अंत। ईश्वर की ही परिकल्पना इस रूप में की गई है।

आगे ब्रह्म की जिज्ञासा करते हुए पूछा गया है कि ‘स्कम्भ’ रूप वाले ईश्वर के किस अंग में अग्नि दीप्त होती है, कौन से अंग से वायु चलती है और चन्द्रमा किस अंग से प्रकाश फैला रहा है? भूमि और अंतरिक्ष से लेकर बाकी के संसार इसमें कहाँ हैं? जिसमें सूर्य, वायु और जल निरंतर गतिमय हैं, उन्हें ही ‘स्कम्भ’ के रूप में चित्रित किया गया है यहाँ। फिर कहा गया है कि जिस आधार में ऋतुएँ, संवत्सर, मास और अर्धमास चल रहे हैं, वही ‘स्कम्भ’ हैं।

संपूर्ण सृष्टि की कल्पना इसी ‘स्कम्भ’ के अंदर की गई है। उन्हें काल से परे बताया गया है। 33 प्रकार (8 वसु, 12 रूद्र, 11 आदित्य, इंद्र और प्रजापति) के देव भी यहीं निवास करते हैं – ऐसा बताया गया है। अमृत, मृत्यु और समुद्र भी इसी ‘स्कम्भ’ अर्थात, ईश्वर में समाहित है। यज्ञ कार्य का मूल उन्हें ही बताया गया है। पूरे ब्रह्माण्ड को उनके अंगों के रूप में परिकल्पना की गई है। ‘स्कम्भ’ रूपी ईश्वर के स्तुति की सलाह दी गई है।

शिवलिंग को कैसे परिभाषित करते हैं आज के साधु-संत और आध्यात्मिक गुरु

सद्गुरु जग्गी वासुदेव बताते हैं कि लिंग का अर्थ होता है ‘The Form’, अर्थात रूप या आकार। उनका कहना है कि निराकार जब आकार लेता है, या जब सृष्टि की रचना शुरू हुई तो उसने सबसे पहले ‘Ellipsoid’ (दीर्घवृत्ताकार/अंडाकार) आकृति ली। इसीलिए, लिंग को ही प्रथम और अंतिम रूप माना गया। वो इसे ऊर्जा को समाहित रखने वाले वाला एक रूप भी बताते हैं, जिसके पास ये शक्ति है। दक्षिण भारत में पंचभूतों (पृथ्वी, जल, वायु, आकाश और अग्नि) की आराधना के लिए पाँच अलग-अलग लिंग स्थापित हुए।

सद्गुरु कहते हैं कि ज्योतिर्लिंगों की स्थापना भी इसी क्रम में एक निश्चित प्राकृतिक प्रक्रियाओं के जरिए हुई, जो मानवीय सोच से परे है। महाकाल को वो ‘Ultimate Time Machine’ बताते हैं। अमरनाथ जैसे शिवलिंगों को ‘स्वयंभू’ कहते हैं, अर्थात ऐसे शिवलिंग जो स्वयं प्रकट हुआ और किसी ने बनाया नहीं। सद्गुरु ये भी बताते हैं कि कैसे दिव्य ‘स्तम्भ’ से ॐ की ध्वनि निकल रही थी और किसी देवी-देवता को इसका आदि-अंत का पता नहीं था। ये भी एक पौराणिक कथा है।

शैव संत रमेशभाई ओझा, जिन्हें ‘भाईश्री’ भी कहा जाता है, उनसे एक बार सवाल पूछा गया था कि शिव को जब निर्गुण और निराकार वर्णित किया गया है शिव महापुराण में, फिर उनका ये आकार कैसे? वो लिंग को पुरुष और प्रकृति के मिलन का प्रतीक बताते हुए जवाब देते हैं कि मनुष्य को हमेशा कोई न कोई प्रतीक चाहिए होता है। उन्होंने भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण के हवाले से बताया कि निराकार की आराधना कठिन है, इसीलिए शिवलिंग के माध्यम से उस तत्व की पूजा हम करते हैं, जो निराकार है।

श्री श्री रविशंकर कहते हैं कि लिंग का अर्थ हुआ, ‘पहचान’। एक ऐसा प्रतीक चिह्न, जिसके माध्यम से आप सत्य और वास्तविकता को पहचान सकते हैं। वो बताते हैं कि लिंग वो चीज है, जिसके माध्यम से अदृश्य को भी पहचाना जा सकता है। वो कहते हैं, “किसी बच्चे के जन्म के समय वो स्त्री है या पुरुष, ये उसके शरीर के एक खास अंग से पहचाना जाता है। इसीलिए, उसे भी लिंग कह दिया गया।” प्रकृति और इसके निर्माता, दोनों का प्रतीक शिवलिंग है जो अति-प्राचीन है, निराकार का आकार है।

शिवलिंग का इतिहास: दुनिया के कई हिस्सों में मिले, हजारों वर्षों से होती रही है पूजा

शिवलिंग का इतिहास काफी पुराना है और वाराणसी के पास एक गाँव में मिले एक शिवलिंग को 4000 साल पुराना बताया गया। सिंधु घाटी सभ्यता में भी भगवान शिव और शिवलिंग की पूजा के प्रमाण मिले हैं। इस आकर के कई पत्थर मिले हैं सिंधु घाटी सभ्यता के और ‘पशुपति सील’ भी मिली। भगवान शिव का एक नाम पशुपति भी है। इससे ये भी पता चलता है कि उस समय योग की भी प्रधानता थी। भगवान शिव की पूजा उससे पहले से होती आई है।

भारत ही नहीं, दुनिया के कई अन्य हिस्सों में भी खुदाई के दौरान शिवलिंग मिले हैं। रोम में कई ऐसे शिवलिंग मिले हैं, जो हजारों साल पुराने हैं। वियतनाम में एक शिवलिंग मिला, जिसे नौवीं सदी का बताया गया। इसी तरह यहूदियों द्वारा भी शिवलिंग की पूजा के प्रमाण मिले हैं। कज़ाख़स्तान में भी इतिहास में भगवान शिव की पूजा के प्रमाण मिले हैं। मेसोपोटामिया में भी शिवलिंग की पूजा का दावा किया जाता है। सनातन संस्कृति में ‘लिंग पुराण’ में शिवलिंग की महत्ता की चर्चा की गई है।

किरीट सोमैया की पत्नी ने संजय राउत के खिलाफ दायर की मानहानि की याचिका, ₹100 करोड़ घोटाले के आरोप से जुड़ा है मामला

महाराष्ट्र बीजेपी के नेता किरीट सोमैया और संजय राउत के बीच तकरार नई नहीं है। हाल में संजय राउत ने किरीट सोमैया पर 100 करोड़ रुपए के टॉयलेट घोटाले का आरोप लगाया था, जिसके बाद अब सोमैया की पत्नी मेधा किरीट सोमैया ने बुधवार (18 मई, 2022) को राउत के खिलाफ शिवड़ी सेशन कोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की है। इस कोर्ट 26 मई को सुनवाई करेगा।

कोर्ट में दायर याचिका में मेधा किरीट सोमैया ने आरोप लगाए हैं कि जिस तरह के आरोप राउत ने लगाए हैं, वो निराधार और अपमानजनक हैं। इसको लेकर सोमैया का कहना है कि संजय राउत ने करीब 4 माह पहले उन पर और उनकी पत्नी पर युवक प्रतिष्ठान के नाम पर 100 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप लगाया था। इसको लेकर राउत मुंबई पुलिस की ईओडब्ल्यू विभाग में शिकायत भी की थी। हालाँकि, जब इसकी जाँच की गई तो कोई सबूत नहीं मिला।

अब बीजेपी नेता का कहना है कि तथ्यहीन आरोप लगाए जाने के कारण उनकी और उनके परिवार को सामाजिक तौर पर काफी प्रताड़ना झेलनी पड़ी है, जिसके लिए अब वो राउत के खिलाफ कार्रवाई करेंगें। बुधवार को एडवोकेट विवेकानंद गुप्त की मदद से कोर्ट में मानहानि की याचिका दायर की गई। इस मामले में इंडियन पीनल कोड की धारा 499, 500 के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं राउत ने इस मामले पर अब चुप्पी साध ली है।

पहले ही संजय राउत के खिलाफ दर्ज करा चुके हैं केस

गौरतलब है कि इससे पहले 16 मई को ही किरीट सौमैया ने एक वीडियो के जरिए राउत के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराने की बात कही थी। इस मामले में 9 मई को ही बीजेपी नेता ने राउत के खिलाफ मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें मेधा सोमैया ने कहा था कि संजय राउत द्वारा दिया गया बयान न केवल दुर्भावनापूर्ण है और ये चरित्र हनन की कोशिश है।

डॉक्टर ने शिवलिंग को लेकर शेयर किया बेहद ही अश्लील और भद्दा चित्र, घटिया कमेंट भी किया

वाराणसी के ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शिवलिंग मिलने का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की अशोभनीय, अभद्र और धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले पोस्ट शेयर किए जा रहे हैं। इस बीच डॉ. श्रीनिवास राजकुमार ने भी शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर शिवलिंग को बेहद ही अश्लील तरीके से दिखाया है। 

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स जमकर खड़ी-खोटी सुना रहे हैं। कोई उन्हें जेल भेजने की बात कह रहा है तो कोई योगी आदित्यनाथ सरकार से कार्रवाई की माँग कर रहा है। 

विकास सिंह नाम के यूजर ने लिखा, यही वाला है क्या? शारीरिक हमला भी है इसके नाम।

दीप्ति भट्ट ने लिखा, “यह व्यक्ति डॉ श्रीनिवास सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला बेहद आपत्तिजनक ट्वीट किया है। यह उनकी मानसिक स्थिति और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की उनकी क्षमता पर सवाल उठाता है। आपको तत्काल मूल्यांकन की आवश्यकता है।”

राहल कनौजिया ने लिखा, “इस भद्दे और घटिया कृत्य पर, कोई भी पुलिस प्रशासन एक्शन क्यों नही लेता???”

एक ने लिखा, “बात साफ है कि अगर कोई अल्लाह पर टिप्पणी करता है तो से मार दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ अपने देवताओं का अपमान होने पर हिंदू हँसते हैं।”

एक यूजर ने लिखा, “ऐसा ट्वीट अगर इस्लाम को लेकर किया गया होता तो इसके खिलाफ फतवा क्या इसकी जान जा चुकी होती। पुलिस भी नहीं बचा पाती। पर आप भारत में बस हिंदू देवी-देवता का मजाक उड़ा सकते हैं।”

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि वजूखाने में शिवलिंग है। इसके बाद कोर्ट ने उस इलाकों को सील करने का आदेश दिया था। हालांकि यहां लोगों को नमाज पढ़ने से नहीं रोका गया है। कमिशन ने सर्वे की रिपोर्ट फाइल करने के लिए समय माँगा था, कोर्ट ने दो दिन का समय दिया है।

मुस्लिम पक्ष शिवलिंग मिलने के दावे को नकार रह रहा है। उसका कहना है कि वजूखाने में पाया गया स्ट्रक्चर शिवलिंग नहीं बल्कि फव्वारा है जो कि हर मस्जिद में लगा रहता है। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर लोग काफी कमेंट्स लिख रहे हैं। इसमें कुछ लोग शिवलिंग को लेकर भी आपत्तिजनक पोस्ट लिख रहे हैं।

’30 साल से ज्यादा गँवा दिए, अब आजादी की हवा में साँस लेंगे’: राजीव गाँधी के हत्यारे की रिहाई पर CM स्टालिन ने जाहिर की खुशी

सुप्रीम कोर्ट से एजी पेरारिवलन को मिली रिहाई के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने न सिर्फ उनका गर्मजोशी से स्वागत किया बल्कि अपनी ख़ुशी भी जाहिर की है। उन्होंने पेरारिवलन को रिहा होने पर भी दी हैं। एजी पेरारीवलन पूर्व पीएम राजीव गाँधी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों में से एक हैं।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने एजी पेरारिवलन की रिहाई पर उनकी माँ अर्पुथम्मल को फोन कर अपनी खुशी जाहिर किया। वहीं अर्पुथम्मल का कहना है कि उनका परिवार और वह सीएम से मिलने आ रही है। इस अवसर पर सीएम स्टालिन ने कहा, “एजी पेरारिवलन की रिहाई स्वागत योग्य है। उन्होंने जेल में 30 साल से ज्यादा गँवा दिए और अब वह आजादी की हवा में साँस लेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए पेरारिवलन को रिहा करने का आदेश देते हुए पीठ ने कहा, ”राज्य मंत्रिमंडल ने प्रासंगिक विचार-विमर्श के आधार पर अपना फैसला किया था। अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए, दोषी को रिहा किया जाना उचित होगा।”

गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के हत्यारे ए. जी. पेरारिवलन को न्यायालय ने यह देखते हुए 9 मार्च, 2022 को जमानत दे दी थी कि सजा काटने और पैरोल के दौरान उसके आचरण को लेकर किसी तरह की शिकायत नहीं मिली।

बता दें कि तमिलनाडु के श्रीपेरुम्बदुर में 21 मई, 1991 को एक चुनावी रैली के दौरान एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को विस्फोट से उड़ा लिया था, जिसमें राजीव गाँधी की मृत्यु हो गई थी। हमलावर महिला की पहचान धनु के तौर पर हुई थी।

इस मामले में न्यायालय ने मई 1999 के अपने आदेश में चारों दोषियों पेरारिवलन, मुरुगन, संथन और नलिनी को मौत की सजा बरकरार रखी थी। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 18 फरवरी 2014 को पेरारिवलन, संथन और मुरुगन की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।