वाराणसी स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर शिवलिंग की खबर आने के बाद इस्लामवादी लगातार शिवलिंग को लेकर ऊल-जलूल की बातें कर हिन्दुओं की भावनाओं को आहत करने की कोशिशें कर रहें है। इसी क्रम में कथित पत्रकार सबा नकवी ने भी हिंदुओं की आस्थाओं का मजाक उड़ाने के चक्कर में दो इमेज शेयर कर शिवलिंग की तुलना एटॉमिक रिएक्टर से की।
हालाँकि, जब लोगों ने इस पर उन्होंने करारा जबाव दिया तो सबा ने इसे डिलीट कर दिया। दरअसल, नकवी ने जो पोस्ट शेयर की थी, उसमें एक तरफ शिवलिंग था और दूसरी और एटॉमिक रिएक्टर को दिखाया गया था। इसके साथ ही वो लिखती हैं, “भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के अंदर विशाल शिवलिंग की खोज।”
This hurts my religious sentiments. I will appreciate if SABA NAQVI is booked under section 153A IPC & other provisions of IPC and case be pursued against him. @CPDelhi@DelhiPolicehttps://t.co/CcAkG7MfUS
कड़ी आलोचना के बाद सबा नकवी ने अपने ट्वीट को डिलीट कर एक अन्य ट्वीट कर सफाई पेश की। उन्होंने लिखा, “मैंने एक व्हाट्सएप्प फॉरवर्ड शेयर किया था, जिसे मैंने डिलीट कर दिया है। इसे मुझे दिन में कई लोगों द्वारा भेजा गया था। अगर इससे कोई अपराध हुआ है तो क्षमा करें। ईमानदारी से। किसी भी आस्था या आस्था तरीके का मजाक उड़ाने का इरादा बिल्कुल नहीं है। एक गलती। शुक्रिया।”
I shared a WhatsApp forward that I have deleted that was sent to me by multiple people through the day. Apologies if it caused any offence. Sincerely. Not at all the intention to mock any belief or faith system. A mistake. Thank you
बहरहाल अब उनके इस पोस्ट पर लोगों ने उन्हें कड़ी नसीहत दी। मस्ताना नाम के ट्विटर यूजर ने सबा को सतर्क और जिम्मेदार बनने की नसीहत दी। उन्होंने लिखा, “एक पत्रकार होने के नाते आप एक जिम्मेदार भारतीय हैं, आपकी जानकारी व्हाट्सएप पर आधारित नहीं होनी चाहिए, यह प्रामाणिक होनी चाहिए। चुटकुले का स्वागत है लेकिन हिंदू दर्शन की सर्वोच्चता पर नहीं।”
Be careful,being a journalist you are a responsible Indian ,your information not to be based on whatsapp ,it should be authentic . Jokes are welcome but not on supreme being of Hindu philosophy.https://t.co/OXN6PiTV3G
लेकिन कुछ लोगों ने इसे हल्के में लेने की बजाय सबा नकवी को इसके लिए दिल्ली पुलिस से सबक सिखाने की माँग की। Rudra Speaks नाम के यूजर ने कहा, “आपको फॉरवर्ड करने वालों की भी जाँच होनी चाहिए। आप जानती थीं कि यह अपमानजनक था, फिर भी आपने इसे ट्वीट किया। माफी स्वीकार नहीं। न्याय के कटघरे लाया जाना चाहिए। @DelhiPolice।”
Those who forwarded to you should also be investigated. And you knew it was derogatory still you tweeted it. Apology not accepted. Should be brought to justice. @DelhiPolicehttps://t.co/aYoV9THHBH
@Lolflix_नाम के यूजर ने कमलेश तिवारी की बर्बर हत्या का जिक्र करते हुए इस्लामिक कट्टरपंथ की तरफ इशारा किया। यूजर ने सबा नकवी को इशारों में ये समझाया कि अगर इसी तरह का मजाक उन्होंने इस्लाम का उड़ाया होता तो ये माफी काम न आती।
इसी तरह से विजया ने गुजरात के हिन्दू युवक किशन भारवाड़ की हत्या को लेकर लिखी गई ऑपइंडिया की रिपोर्ट के स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए बताया कि किशन भारवाड़ ने भी माफी माँगी थी, लेकिन कट्टरपंथियों ने उसे नहीं छोड़ा।
उत्तर प्रदेश के वाराणसी (Varanasi, Uttar Pradesh) स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे (Gyanvapi Controversial Structure) में कोर्ट के आदेश पर कराए गए वीडियोग्राफी सर्वेक्षण में शिवलिंग हिंदू प्रतीकों के मिलने के बाद मुस्लिम समुदाय इसे झुठलाने के लिए तरह-तरह से प्रयास कर रहा है। इसी बीच आतंकियों से कथित संबंधों को लेकर कुख्यात पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) की राजनैतिक इकाई सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ने महाराष्ट्र के मालेगाँव (Malegaon, Maharashtra) में प्रर्दशन किया और PM मोदी के खिलाफ भड़काऊ नारे लगाए।
ज्ञानवापी ढाँचे के विरोध में SDPI से जुड़े मुस्लिम सड़क पर बैनर-पोस्टर लेकर निकले और भड़काऊ नारे लगाए। भीड़ में कम से कम 100 लोग शामिल थे। इस दौरान सड़कों को पूरी तरह से जाम रखा गया और नारे लगाए गए, ‘सबको एक साथ लाना है, ज्ञानवापी मस्जिद बचाना है।’ SDPI के लोगों के इस नारे का सीधा अर्थ का ज्ञानवापी ढाँचे को मस्जिद के रूप में बचाए रखने के लिए सभी मुस्लिमों को एकजुट होना होगा और सड़कों पर उतरना होगा। यह देश में अराजकता फैलाने के लिए एक प्रकार का उकसावा है।
मालेगाँव इलाके में निकाले गए इस विरोध प्रदर्शन में मंगलवार (17 मई 2022) को SDPI के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के विरोध में भी नारे लगाए। यह प्रदर्शन प्रशासन की अनुमति लिए बिना आयोजित किया गया था और इलाके के यातायात को बाधित किया गया था।
प्रदर्शन नहीं लेने को लेकर पुलिस ने SDPI के प्रदर्शनकारियों को नोटिस जारी किया है। हालाँकि, मालेगाँव के मुस्लिम बाहुल इलाका होने के कारण पुलिस भी फूँक-फूँकर कदम रख रही है और इसका फायदा SDPI उठा रहा है। इस मामले में कट्टरपंथी मुस्लिम संगठनों के रूख को देखते हुए पुलिस बल को सतर्क रहने का आदेश दिया गया है।
केरल हाईकोर्ट ने भी माना SDPI और PFI चरमपंथी संगठन
बता दें कि केरल के पल्लकड़ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक संजीत की हत्या को लेकर केरल हाईकोर्ट ने 5 मई को कहा था कि SDPI और PFI चरमपंथी संगठन हैं और ये हिंसा के गंभीर मामलों में शामिल हैं। हालाँकि हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि ये ‘प्रतिबंधित संगठन’ नहीं हैं। हाईकोर्ट का यह फैसला 13 मई को सामने आया था।
मृतक संजीत की पत्नी ने कोर्ट को बताया, “SDPI और PFI दूसरे समुदाय के लोगों को धमकी और लालच देकर इस्लाम कबूल करा रहे हैं।” संजीत की पत्नी ने इस मामले की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी CBI से कराने की माँग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस माँग को खारिज कर दिया था।
औरंगजेब के कब्र की सुरक्षा बढ़ी
मुगल आक्रांता औरंगजेब (Aurangzeb) के कब्र पर AIMIM के नेता और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के छोटे भाई अकबरुद्दीन ओवैसी (Akbaruddin Owaisi) द्वारा दुआ पढ़ने के बाद राजनीति में बवाल हो गया था। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे (Thackeray) ने इस कब्र को ढहा देने की अपील की थी। इसके बाद पुलिस ने औरंगजेब की कब्र की सुरक्षा बढ़ा दी है। इसके साथ ही पर्यटकों पर यहाँ जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले 182 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं तक पहुँचने के लिए 15 मई, 2022 को परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। हालाँकि, परिवर्तन यात्रा के दौरान रैलियाँ खाली-खाली दिखीं और सभा स्थल भी सुनसान रहे। रैलियों में नजर आए ज्यादातर वाहन और लोग पंजाब के थे। इसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर तरह-तरह के वीडियो शेयर करते हुए कहा कि यह परिवर्तन यात्रा फ्लॉप रही।
उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर आम आदमी पार्टी एक्शन मोड में आ गई है। राज्य की सभी 182 विधानसभाओं में मतदाताओं से संपर्क करने के लिए परिवर्तन यात्रा का आयोजन किया गया। इसी प्रयास में 15 मई को गोपाल इटालिया ने सोमनाथ मंदिर से परिवर्तन यात्रा की और द्वारका से इसुदान गढ़वी ने परिवर्तन यात्रा की शुरुआत की। साथ ही राज्य में 6 अलग-अलग जगहों पर भी यात्रा शुरूकी गई।
हालाँकि आम आदमी पार्टी की परिवर्तन यात्रा को गुजराती लोगों की ओर से कुछ खास प्रतिक्रिया नहीं मिली। ऐसा लगता है कि आम आदमी पार्टी के नेताओं को इसके बारे में पहले से ही पता था, इसलिए उन्होंने पहले ही बड़ी संख्या में कारों और पंजाब से लोगों को यात्रा के लिए बुलाया था। यात्रा के कुछ स्थानों पर बहुत कम लोग थे, जबकि कुछ अन्य स्थानों पर परिवर्तन यात्रा में एक सुनसान रैली स्थल देखा गया। AAP नेता और पूर्व पत्रकार इसुदान गढ़वी रैली में हाथ दिखाकर थक चुके थे लेकिन सामने कोई उनकी बात का जवाब नहीं दे रहा था। आम आदमी पार्टी और AAP नेताओं की परिवर्तन यात्रा असफल साबित हुई। इस पर नेटिजन्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं।
AAP की परिवर्तन यात्रा पर नेटिजन्स की प्रतिक्रिया
आम आदमी पार्टी की परिवर्तन यात्रा विफल साबित होने के बाद ट्विटर पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। गुजरात के जाने-माने पत्रकार विजय पटेल (@vijaygajera) ने पोरबंदर की अपनी यात्रा के वीडियो और तस्वीरों का एक सीरीज शेयर किया, जिसमें गुजरात के बाहर से यात्रा के लिए बुलाए गए वाहन और लोग दिखाई दे रहे थे और स्थल खाली थे। उनकी तस्वीरें और वीडियो ट्विटर पर वायरल हो गए।
AAP Gujarat is not getting support from Gujarati people so AAP has arranged people from Punjab in their rallies!
Even the main vehicle for the AAP CM candidate has been arranged from Punjab! pic.twitter.com/SqmOKOPGBh
परिवर्तन यात्रा की एक तस्वीर के साथ ट्वीट में उन्होंने लिखा, “AAP गुजरात को गुजराती लोगों का समर्थन नहीं मिल रहा है इसलिए AAP ने पंजाब के लोगों को अपनी रैलियों में व्यवस्थित किया है! यहां तक कि आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए मुख्य वाहन की व्यवस्था भी पंजाब से की गई है! यहाँ उन्होंने कथित तौर पर इसुदान गढ़वी को AAP का गुजरात मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार भी कहा। साथ ही ट्वीट से जुड़ी तस्वीरों में पंजाब से गुजरने वाली कई कारें भी देखी जा सकती हैं।
This was the AAP Rally in Gujarat where the candidate is on a truck waving away to the trees on the roadside, no crowds on the streets??? pic.twitter.com/oQNpkEFRBh
एक अन्य ट्विटर यूजर @SortedEagle ने इसुदान गढ़वी की परिवर्तन यात्रा का एक और वीडियो शेयर किया और उसका मजाक उड़ाते हुए लिखा, “यह गुजरात में AAP की रैली थी जहाँ उम्मीदवार सड़क के किनारे पेड़ों को हाथ लहराते दिख रहे हैं, सड़कों पर कोई भीड़ नहीं है।” वीडियो में इसुदान गढ़वी हाथ ऊपर की तरफ लहराते नजर आ रहे हैं, हालाँकि सड़क पर कोई लोग या भीड़ नहीं थी।
આના કરતા તો વધારે ભીડ અમારે ત્યાં સોસાયટીના ગણેશ વિસર્જનમાં હોય છે. ? https://t.co/YlPzCGE5sh
उसी वीडियो पर टिप्पणी करते हुए, एक अन्य ट्विटर यूजर @ Himani411 ने लिखा, “इससे ज्यादा भीड़ तो हमारी सोसाइटी के गणेश विसर्जन में होता है।”
પરિવર્તન યાત્રાની ફૂટેજ છે. સાચું કહેજો કે જનતાનો રિસ્પોન્સ કેટલો છે? આપ નેતા બિચારા હાથ હલાવી-હલાવી થાકી ગયા, પણ જનતાને AAP માં કોઈ રસ નથી. આપ નેતાની બોડીલેંગ્વેજ નોટિસ કરો કે અંદરખાને તે પણ નિરાશ છે,પણ કહે કોને. AAP મોટી-મોટી ફેંકવામાં નંબર વન છે,મરી જશે પણ સત્ય સ્વીકાર નહિ કરે pic.twitter.com/S4tRpq5L14
— Dixita Viral Joshi (@iamdixitajoshi) May 17, 2022
ट्विटर यूजर @iamdixitajoshi ने भी वीडियो शेयर किया और आम आदमी पार्टी पर तंज कसते हुए लिखा, “परिवर्तन यात्रा का फुटेज है। सच बताओ, जनता की क्या प्रतिक्रिया है? AAP के नेता बेचारे हाथ लहराते थक गए हैं लेकिन जनता को AAPP में कोई दिलचस्पी नहीं है। AAP नेता के हाव-भाव पर ध्यान दें जो बताता है कि वह भी अंदर से निराश है, लेकिन किससे कहें? बड़े-बड़े झूठ को फेंकने में AAP नंबर वन है, मरेगी लेकिन सच को स्वीकार नहीं करेगी।”
Massive crowd in support of AAP in Gujarat!
One of the CM candidate Isudan Gadhvi welcomed by a huge crowd. This could be a Guinness book world record! pic.twitter.com/YHFoRoQxOr
@vijaygajera ने एक और वीडियो शेयर किया जिसमें इसुदान गढ़वी रैली के बाद सभागार की ओर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं लेकिन कोई उनकी बात सुनने नहीं आया। आम आदमी पार्टी के गिने-चुने लोग ही वहाँ नजर आ रहे हैं। विजय पटेल ने ट्वीट कर लिखा, “गुजरात में AAP के समर्थन में भारी भीड़! CM उम्मीदवार इसुदान गढ़वी का भारी भीड़ ने स्वागत किया। यह गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड हो सकता है!”
ઇસુદાન નેય ખબર છે ગુજરાતમાં 24 કલાક વીજળી હોય છે!?
@vijaygajera ने एक और वीडियो साझा किया जिसमें इसुदान गढ़वी पहले से ही एहतियात के तौर पर नीचे बैठे हैं क्योंकि रैली मार्ग के बीच में बिजली का तार आता है। इस पर टिप्पणी करते हुए पटेल ने लिखा, “गुजरात के AAP नेता भी जानते हैं कि गुजरात में 24×7 बिजली रहती है!”
This is hilarious ? AAP Gujarat CM candidate(unofficially) Is claiming that the people of Punjab have the same power as CM now! They can directly suspend any officers!
बैठक में आम आदमी पार्टी के इसुदान गढ़वी के भाषण का एक वीडियो साझा करते हुए, पटेल ने लिखा, “यह हास्यास्पद है। AAP गुजरात के सीएम उम्मीदवार (अनौपचारिक रूप से) दावा कर रहे हैं कि पंजाब के लोगों के पास अब सीएम के बराबर पावर है! वे सीधे किसी भी अधिकारी को निलंबित कर सकते हैं! भगवंत मान को दे रहे हैं कड़ी टक्कर! जाहिर है जोक्स मारने में। ”
इस तरह से यह पूरी परिवर्तन यात्रा आम आदमी पार्टी के लिए एक सबक साबित हो रही है कि गुजरातियों ने अभी तक उन्हें इतना स्वीकार नहीं किया है और यह बात आम आदमी पार्टी और उसके नेता अंदर ही अंदर बखूबी जानते हैं, इसलिए उन्होंने पंजाब के लोगों को बुलाना ही मुनासिब समझा।
बॉलीवुड की ‘वक्वीन’ कही जाने वाली कंगना रनौत ने आमिर खान और सलमान खान को लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने बताया कि आमिर खान अक्सर उन्हें फिल्म ट्रायल्स और स्क्रीनिंग्स के लिए बुलाया करते थे और उनकी अभिनय की तारीफ़ भी करते थे। लेकिन, कंगना का ये भी कहना है कि आमिर खान ने कभी उनकी फिल्मों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से प्रोमोट करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। बकौल कंगना, उन्होंने आमिर को फोन कॉल कर के भी कहा था, “आप मुझे पीके और दंगल में ट्रायल्स के लिए बुलाते थे, आप भी मेरी फिल्मों के बारे में बात कीजिए। हालाँकि, अब मैं उस स्टेज से बाहर हूँ।”
कंगना रनौत ने बताया था कि ‘मणिकर्णिका’ फिल्म के समय उन्होंने आमिर खान से ये बात की थी। कंगना रनौत एक्टर सलमान खान की बहन अर्पिता खान की ईद की पार्टी को लेकर भी चर्चा में हैं। इस बीच उन्होंने कहा है कि सलमान खान अच्छे इंसान है और वो दोनों अच्छे दोस्त हैं, इसी कारण से जब उन्हें इसके लिए निमंत्रण मिला तो वो उस पार्टी में शामिल हुईं।
एक्ट्रेस ने आरजे सिद्धार्थ कानन को दिए एक इंटरव्यू में इसको लेकर पूछे गए सवाल के जबाव में कहा, “ऐसा नहीं है कि मैं बॉलीवुड पार्टियों में नहीं जाती, मैं जहाँ चाहती हूँ वहाँ जाती हूँ। सलमान मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, उन्होंने पार्टी में बुलाया, तो मैं चली गई। सीधी सी बात है।” इस बीच सलमान ने भी कंगना को उनकी आने वाली फिल्म धाकड़ के लिए चीयर किया। सलमान ने फिल्म का ट्रेलर शेयर करते हुए लिखा, “विशिंग टीम #धाकड़ द वेरी बेस्ट! @kanganaranaut @rampal72 @smaklai।”
सलमान खान की पोस्ट पर रिएक्ट करते हुए कंगना ने लिखा, “थैंक्यू माय दबंग हीरो हार्ट ऑफ गोल्ड… मैं फिर कभी नहीं कहूँगी कि मैं इस इंडस्ट्री में अकेली हूँ… पूरी धाकड़ टीम की तरफ से धन्यवाद।
बॉलीवुड स्टार्स की आलोचक रही हैं कंगना
कंगना रनौत उनकी फिल्मों को प्रमोट नहीं करने को लेकर लंबे वक्त से बॉलीवुड स्टार्स की कड़ी आलोचना करती रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने ने भी एक्टर्स से अपनी फिल्मों को प्रमोट करने के लिए कहा था, लेकिन जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्होंने कहा कि वो इससे आगे निकल गई हैं। गौरतलब है कि फिलहाल कंगना रनौत की आने वाली फिल्म धाकड़ है। इस जासूसी थ्रिलर में वो एजेंट अग्नि की भूमिका निभा रही हैं। फिल्म में अर्जुन रामपाल भी हैं।
वाराणसी के विवादित ज्ञानवापी ढाँचे में शिवलिंग मिलने के बाद हिंदू संगठनों ने अब दिल्ली स्थित जामा मस्जिद की खुदाई की माँग की है। हिंदू महासभा और यूनाइटेड हिंदू फ्रंट समेत कुछ अन्य हिंदू संगठन ज्ञानवापी ढाँचे की तरह ही जामा मस्जिद का भी सर्वे कराने को लेकर कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। इस संबंध में चक्रपाणि महाराज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भी लिखा है।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के दूसरे धड़े के अध्यक्ष चक्रपाणि महाराज ने पत्र में कहा है, “दिल्ली की जामा मस्जिद हजारों देवी-देवताओं की मूर्तियों को दबाकर बनाई गई है।” उन्होंने जामा मस्जिद के चबूतरे और सीढ़ियों की खुदाई करा इन मूर्तियों को निकलवाने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि जोधपुर व अन्य जगहों से लूटकर लाए गए इन मूर्तियों को मस्जिद की सीढ़ियों में दफन करने का आदेश मुगल बादशाह ने दिया था।
दिल्ली कर जामा मस्जिद को लेकर चक्रपाणि महाराज ने नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र,,,जामा मस्जिद के नीचे हिन्दू देवी देवताओं की प्रतिमाओं की खुदाई करने के लिए सम्बंधित विभाग को आदेश देने की अपील ताकि ,देवी देवताओं की पूजा हो सके pic.twitter.com/o27V7xTWRY
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है, “यह सर्वविदित है कि मुगल विदेशी आक्रांताओं ने न सिर्फ देश के समस्त मंदिरों में लूटपाट की, बल्कि हिंदुओं को अपमानित करने के लिए हमारे मंदिरों पर मस्जिद के गुंबद बनवा दिए। इसके उदाहरण आपके समक्ष हैं- श्रीराम जन्मभूमि, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ज्ञानवापी और अन्य हिंदू मंदिर। आपसे निवेदन है कि जामा मस्जिद के नीचे दबे हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को निकालने के संबंध में संबंधित विभाग को आदेश दें। ताकि उन मूर्तियों की भी पूजा हो सके।”
ज्ञानवापी मामले के बीच उठी जामा मस्जिद की खुदाई की मांग
सुदर्शन संवाददाता @KumaarSaagar से बात करते हुए बोले अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि जी महाराज- जामा मस्जिद के नीचे हिंदू आराध्यों की मूर्तियां, खुदाई की अनुमति दें शाही इमाम 1/2 pic.twitter.com/krRtrSsv6A
इसी तरह यूनाइटेड हिंदू फ्रंट अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जय भगवान गोयल ने दावा किया है कि मस्जिद के नीचे पहले मंदिर थे। मस्जिद निर्माण के दौरान देवताओं की मूर्तियों को दबाया गया है। इसका सर्वेक्षण किया जाना चाहिए।
बता दें कि जामा मस्जिद को औरंगज़ेब के पिता शाहजहाँ द्वारा सन 1644-1656 में बनवाया गया था। औरंगज़ेब ने लाहौर में बादशाही मस्जिद का निर्माण करवाया था, जिसकी रूप-रेखा जामा मस्जिद से मिलती है। जामा मस्जिद के निर्माण में 5000 से भी अधिक मजदूरों को खटवाया गया था और मध्य सत्रहवीं सदी में इसके निर्माण में 10 लाख रुपए से भी ज्यादा ख़र्च आया था। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब अंग्रेजों ने दिल्ली जीती तो उन्होंने जामा मस्जिद को भी अपने कब्जे में ले लिया था। अंग्रेजों ने मस्जिद में अपनी आर्मी रखी हुई थी और वो दिल्ली को सज़ा देने के लिए इस मस्जिद को ध्वस्त करना चाहते थे। अंग्रेजों ने दिल्ली के अकबराबादी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।
औरंगज़ेब पर साक़ी मुस्तक़ ख़ान द्वारा लिखित पुस्तक ‘मसीर-ई-आलमगीरी’ में एक घटना का जिक्र है। ये घटना रविवार (मई 24-25, 1689) की है। उस दिन ख़ान जहाँ बहादुर जोधपुर से मंदिरों को तबाह कर के लौटा। औरंगज़ेब की जीवनी में लिखा हुआ है कि ख़ान जहाँ बहादुर द्वारा मंदिरों को ध्वस्त किए जाने, उन्हें लूटने और प्रतिमाओं को विखंडित किए जाने पर बादशाह बहुत ख़ुश हुआ।
‘मसीर-ई-आलमगीरी’ के अनुसार, खान जहाँ बहादुर जोधपुर से कई गाड़ियों में भर कर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ लाया था। ये प्रतिमाएँ उन मंदिरों की थीं, जिन्हें मुगलों ने उसके नेतृत्व में लूटा और तबाह किया। इन लूटी गई प्रतिमाओं को बादशाह औरंगज़ेब के सामने पेश किया गया, जिस देख कर वह अत्यंत प्रसन्न हुआ। इनमें एक से बढ़ कर एक प्रतिमाएँ थीं। कुछ सोने-चाँदी के थे, कुछ पीतल की थीं तो कुछ ताँबे से गढ़े गए थे। इनमें कई ऐसी मूर्तियाँ भी थीं, जो पत्थरों की थीं और उन पर उत्तम नक्काशियाँ की गई थीं।
औरंगज़ेब ने आदेश दिया कि इन प्रतिमाओं को उसके दरबार के जिलाऊखाना में डाल दिया जाए। दीवारों से घिरे आँगन जैसी जगह को जिलाऊखना कहते हैं। इसके बाद औरंगज़ेब ने जो आदेश दिया, वो जानने लायक है। बादशाह ने कहा कि जोधपुर से लूट कर हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ जामा मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे गाड़ दिए जाएँ। और इस तरह से जामा मस्जिद के नीचे हिन्दू देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को दफ़न कर दिया गया।
ज्ञानवापी के वजूखाने में हिंदू पक्ष ने जब से शिवलिंग मिलने का दावा किया है उसी के बाद से कट्टरपंथी सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप बातें लिख रहे हैं। इसी क्रम में News1India की एंकर नगमा शेख के सोशल मीडिया पर भी जहर उगला गया। नगमा ने सोशल मीडिया पर हिंदुओं से कहा कि अगर वजूखाने में उन्हें ‘बाबा (शिवलिंग)’ मिल गए हैं तो फिर वो लोग उन्हें पैखाने में भी खोजें। इस पोस्ट के बाद अब सोशल मीडिया पर बवाल है। मामला तूल पकड़ने के बाद चैनल से उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है। पुलिस से उनके विरुद्ध कार्रवाई की माँग की जा रही है।
बता दें कि न्यूज1इंडिया की एंकर नगमा शेख ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया, जिसमें ज्ञानवापी मुद्दे पर हिंदुओं का मखौल उड़ाते हुए लिखा गया, “वजूखाने में बाबा मिले, पैखाने में भी चेक कर लो।” नगमा के इस पोस्ट के बाद दीपक शर्मा ने इस मुद्दे को ट्विटर पर उठाया और लखनऊ पुलिस, यूपी पुलिस और यूपी डीजीपी को टैग करके अनुरोध किया कि इस महिला के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में केस दर्ज हो।”
नाम – नगमा शेख पेशा – एंकर At #News1India अगर तुम्हें बेरोजगार न बनाया – तो मेरा नाम #दीपक नहीं ?️@lkopolice@Uppolice@dgpup ये औरत दंगे करवा देगी, सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही करें, क्योंकि अगले एक घंटे में इसका सस्पेंसन लेटर इसके पास होगा !! धन्यवाद pic.twitter.com/E3m6O84YVX
सोशल मीडिया पर नगमा का पोस्ट वायरल होने के बाद न्यूज1इंडिया ने उनके ऊपर कार्रवाई की है। नगमा के स्क्रीनशॉट देखने के बाद उनको चैनल से निकाल दिया गया है। न्यूज1 इंडिया ने अपने ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी है। ट्वीट में लिखा गया, “नगमा शेख का न्यूज1इंडिया से कोई संबंध नहीं है। यह उनका व्यक्तिगत विचार है, संस्थान इसकी घोर निंदा करता है। चैनल प्रबंधन ने नगमा शेख के निंदनीय पोस्ट का तुरंत संज्ञान लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की और उनको तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।”
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चैनल प्रबंधन ने जब नगमा शेख से पूछा कि आखिर उन्होंने पत्रकार होने के बावजूद इतना घटिया पोस्ट क्यों किया तो नगमा ने फौरन पैखाने वाले पोस्ट का इल्जाम अपने छोटे भाई पर मढ़ दिया और कहा कि वो पोस्ट को डिलीट कर चुकी हैं। हालाँकि चैनल ने वायरल होते सोशल मीडिया पोस्ट और नगमा के विरुद्ध मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई की और उन्हें चैनल से निकाल दिया गया। नगमा के सोशल मीडिया से पता चलता है कि वो लखनऊ से आगे बहराइच की रहने वाली हैं और करामात हुसैन मुस्लिम गर्ल्स डिग्री कॉलेज से पढ़ीं। नगमा की प्रोफाइल बताती है कि उन्होंने न्यूज1इंडिया से पहले एपीएन न्यूज, हिंदी खबर और के न्यूज में काम किया है।
बता दें कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित पावंटा साहिब में दो कट्टरपंथी मुस्लिमों ने सोशल मीडिया पर शिवलिंग को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इनमें एक पावंटा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष नसीम राज हैं और दूसरे सैलून की दुकान चलाने वाले अरमान मलिक।
पंजाब (Punjab) के विभिन्न किसान संघों (Farmer Unions) ने आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेतृत्व वाली पंजाब की भगवंत मान सरकार (Bhagwant Mann Government) के खिलाफ चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर विरोध प्रदर्शन के लिए डेरा डाल दिया है। उन्होंने अपनी माँगों को पूरा करने के लिए सरकार पर दबाव बनाने के लिए राशन, बिस्तर, पंखे, बर्तन और रसोई गैस के सिलेंडर लेकर सीमा पहुँचे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभिन्न किसान संघों से जुड़े किसान गेहूँ पर बढ़े हुए बोनस और 10 जून से होने वाली धान की बुआई के परमिट की माँग कर रहे हैं। किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने चेतावनी दी कि अगर किसानों की सभी शिकायतों का निवारण नहीं किया जाता है तो किसान बैरिकेड्स तोड़ेंगे और चंडीगढ़ कूच करेंगे।
जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा, “यह पंजाब में हमारे संघर्ष की शुरुआत है और यह तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जातीं। अब तक सिर्फ 25 प्रतिशत किसान हैं। बाकी किसान बुधवार (18 मई 2022) को यहाँ पहुचेंगे। यह हमारे लिए करो या मरो की लड़ाई है।”
Punjab | Morning visuals from Chandigarh-Mohali border where farmers are sitting on a protest against the state government over various demands. They were stopped by the state police from entering Chandigarh, yesterday, May 17 pic.twitter.com/fUnr0bwz4Z
दल्लेवाल ने आगे कहा कि प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़ से DGP का फोन आया था कि बुधवार को सुबह 11 बजे सीएम भगवंत मान के साथ बैठक तय की गई है। हालाँकि, उन्होंने फिर फोन करके बताया कि सीएम मान दिल्ली गए हैं और मुख्य सचिव बैठक करेंगे। प्रदर्शनकारी किसानों को एक सरकारी अधिकारी से मुलाकात कर अपने मुद्दों के समाधान की उम्मीद नहीं थी। इसके चलते वे चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर विरोध प्रदर्शन करने पहुँचे।
प्रदर्शनकारी 17 मई को एकत्र होकर गुरुद्वारा अंब साहिब से सीमा की ओर मार्च किया। उन्होंने YPS चौक पर स्थापित पहली बैरिकेड्स को तोड़ दिया और चंडीगढ़-मोहाली सीमा के पास मोहाली पुलिस द्वारा लगाए गए अन्य अवरोधों की ओर बढ़ गए। उन्हें पुलिस ने 17 मई को गीता भवन के पास रोक दिया। इसके बाद दल्लेवाल ने प्रदर्शनकारियों से बैरिकेड्स तोड़ने के बजाय शांतिपूर्वक विरोध करने का आग्रह किया।
Punjab | Farmers sit on a protest at the Chandigarh-Mohali border against the state government after police stopped them from entering Chandigarh
“Our protest will continue until our 11 demands are fulfilled,” says a farmer pic.twitter.com/AIWGrrKvGJ
वहाँ किसान अपनी माँगों को लेकर मुख्यमंत्री मान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। गेहूँ पर बोनस और धान की बुआई के अलावा किसानों की माँगों की सूची में मक्का और हरे चना सहित 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी, निर्बाध बिजली आपूर्ति और गेहूँ के निर्यात पर से प्रतिबंध हटाना शामिल है।
जैसा कि पहले बता हम चुके हैं कि किसान संघों ने अपनी माँगों को लेकर सीएम मान के साथ बैठक की थी, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। वार्ता विफल होने के बाद किसानों ने विरोध मार्च निकालने का फैसला किया। सीएम मान पर आरोप है कि किसानों को छोड़कर सीएम मान AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल से मिलने के लिए दिल्ली चले गए।
कॉन्ग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने ट्विटर कर कहा, “जिस तरह से भगवंत मान ने अरविंद केजरीवाल से मिलने के लिए दिल्ली रवाना होकर किसानों को लावारिस छोड़ दिया, इससे पता चलता है कि उन्हें पंजाब के किसानों की कितनी चिंता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में किसानों के आंदोलन को आम आदमी पार्टी का समर्थन राजनीति से प्रेरित और केवल राजनीतिक लाभ के लिए था।
The way @BhagwantMann left the farmers in lurch and unattended by leaving for Delhi to meet @ArvindKejriwal it shows how much concern he has for the farmers of Punjab! It means all the Aap support to farmers agitation in Delhi was politically motivated and for political gains!
— Sukhpal Singh Khaira (@SukhpalKhaira) May 17, 2022
हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब पंजाब के किसान अपनी माँगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले किसानों ने सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों के खिलाफ केंद्र सरकार का विरोध किया था। उस वक्त आम आदमी पार्टी की सरकार ने इन किसानों को समर्थन दिया था और केंद्र सरकार से इनसे बातचीत दोबारा शुरू करने की अपील की थी।
उस वक्त पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने ट्वीट किया था, “आम आदमी पार्टी संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा 26 मई को उनके आंदोलन के 6 महीने पूरे होने पर देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने के लिए किए गए आह्वान का समर्थन करती है। हम केंद्र से किसानों के साथ तुरंत बातचीत फिर से शुरू करने और उनकी माँगों को मानने का आग्रह करते हैं। AAP किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है।”
फिलहाल सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात है। हालाँकि राशन, बिस्तर, पंखे, बर्तन और रसोई गैस सिलेंडर लेकर जाने वाले आक्रामक किसानों ने लंबे समय तक विरोध करने का फैसला किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कांग ने कहा है कि सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और वह किसानों की वास्तविक माँगों को मानेगी।
प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर के सम्बन्ध में कई किताबें प्रमाण के तौर पर उपलब्ध हैं जो ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में जहाँ अब शिवलिंग प्राप्त हुआ है वहीं पर बाबा विश्वनाथ के अविमुक्त रूप में स्थापित होने को प्रमाणित करती हैं। वहीं मंदिर के तोड़े जाने का एक महत्वपूर्ण प्रमाण ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ नाम की पुस्तक भी है। यह पुस्तक औरंगज़ेब के दरबारी लेखक सकी मुस्तईद ख़ान ने 1710 में लिखी थी। इसी किताब में उस शाही फरमान का उल्लेख है, जिसमें औरंगज़ेब ने विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने के लिए जारी किया था।
फारसी में जारी शाही फरमान-1 (‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ से) बाकी के दो पन्ने नीचे दिए गए हैं।
ज्ञानवापी वह जगह है जहाँ काशी में शिव का आदिस्थान माना गया है। जहाँ शिव स्वयं अविमुक्तेश्वर लिंग रूप में इस तरह से विराजमान हैं कि आक्रांताओं द्वारा कई बार की कोशिशों के बावजूद भी उसे हिलाया तक नहीं जा सका जबकि कोशिशें मुहम्मद गोरी, सुल्तान महमूद शाह, शाहजहाँ सहित कई मुग़ल आक्रांताओं ने की। बाद में 1669 में औरंगजेब के समय जब मूल मंदिर को तोड़कर मंडपम के ऊपर गुम्बद-मेहराब बनाकर उसे मस्जिद के रूप में तामीर करा दिया गया तो भी शिवलिंग को अपनी जगह से हिला पाने की कोशिशें नाकाम ही रहीं। यहीं पर वजूखाना बनवा दिया गया था जहाँ नमाजी हाथ-पैर धोते हैं जो उसी तरफ सिर किए बैठे नंदी से करीब 40 फिट की दूरी पर है। इसलिए भी इसके मुख्य मंदिर होने के प्रमाण सामने आए हैं।
ग्राफिक्स से समझें वर्तमान स्थिति (साभार-अवधेश कुमार)
शिवलिंग को क्षति न पहुँचाए जाने का जिक्र प्रायः मुगलकालीन सभी इतिहासकारों ने करते हुए लिखा है कि काशी के प्रधान शिवालय का ध्वंस करने के बाद जब शिवलिंग को अपने साथ ले जाने की कोशिश हुई तो तमाम कोशिशों के बाद भी शिवलिंग अपने मूल स्थान से हिला भी नहीं। अंतत: शिवलिंग छोड़ दिया गया और अंत में सारा खजाना लूटकर चले गए।
बार-बार लूटा और नष्ट किया गया मुख्य मंदिर परिसर
बता दें कि पुराणों में शिव और पार्वती के आदि स्थान काशी विश्वनाथ को प्रथम लिंग माना गया है। इसका उल्लेख महाभारत में भी किया गया है। वहीं औरंगजेब से पहले जाएँ तो 11वीं सदी तक यह मंदिर अपने मूल रूप में बना रहा, सबसे पहले इस मंदिर के टूटने का उल्लेख 1034 में मिलता है। इसके बाद 1194 में मोहम्मद गोरी ने इसे लूटने के बाद तोड़ा। काशी वासियों ने इसे उस समय अपने हिसाब से बनाया लेकिन वर्ष 1447 में एक बार फिर इसे जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने तुड़वा दिया। फिर वर्ष 1585 में राजा टोडरमल की सहायता से पंडित नारायण भट्ट ने इसे बनवाया था लेकिन वर्ष 1632 में शाहजहाँ ने एक बार फिर काशी विश्वनाथ मंदिर को तुड़वाने के लिए मुग़ल सेना की एक टुकड़ी भेज दी। लेकिन हिन्दुओं के प्रतिरोध के कारण मुग़लों की सेना अपने मकसद में कामयाब न हो पाई। हालाँकि, इस संघर्ष में काशी के 63 जीवंत मंदिर नष्ट हो गए।
इसके बाद सबसे बड़ा विध्वंश औरंगजेब ने करवाया जो काशी के माथे पर सबसे बड़े कलंक के रूप में आज भी विद्यमान है। साक़ी मुस्तइद खाँ की किताब ‘मासिर -ए-आलमगीरी’ के मुताबिक़ 16 जिलकदा हिजरी- 1079 यानी 18 अप्रैल 1669 को एक फ़रमान जारी कर औरंगजेब ने मंदिर तोड़ने का आदेश दिया था। साथ ही यहाँ के ब्राह्मणों-पुरोहितों, विद्वानों को मुसलमान बनाने का आदेश भी पारित किया गया था।
मंदिर से औरंगजेब के ग़ुस्से की एक वजह यह थी यह परिसर संस्कृत शिक्षा बड़ा केन्द्र था और दाराशिकोह यहाँ संस्कृत पढ़ता था। और इस बार विश्वनाथ मंदिर की महज एक दीवार को छोड़कर जो आज भी मौजूद है और बिना किसी सर्वे के भी साफ दिखाई देती है, समूचा मंदिर संकुल ध्वस्त कर दिया गया। मुग़ल इतिहासकारों के अनुसार ही 15 रब- उल-आख़िर यानी 2 सितम्बर 1669 को बादशाह औरंगजेब को खबर दी गई कि मंदिर न सिर्फ़ गिरा दिया है, बल्कि उसकी जगह मस्जिद की तामीर भी करा दी गई है।
इसे औरंगजेब के समय अंजुमन इंतजामिया जामा मस्जिद नाम दिया गया था लेकिन बाद में ज्ञानवापी कूप के कारण इसका नाम भी ज्ञानवापी मस्जिद ही रहा। वहीं मंदिर के खंडहरों पर ही बना वह मस्जिद बाहर से ही स्पष्ट दीखता है जिसके लिए न किसी पुरातात्विक सर्वे की जरुरत है न किसी खुदाई की। लेकिन अभी सर्वे के बाद मिले शिवलिंग और दूसरे प्रमाणों की वजह से हिन्दुओं की स्थिति और भी मजबूत हुई है।
शिवलिंग को तहस-नहस करने की कोशिश
मुगलों द्वारा कई बार के हमलों में मूल शिवलिंग को नष्ट करने और अपने साथ ले जाने की कई कोशिशें हुईं लेकिन हर बार आक्रांताओं की तमाम कोशिशें क्यों नाकाम हुईं। इसका एक उत्तर शिवमहापुराण के 22वें अध्याय के 21वें श्लोक में मिलता है। यह इन दिनों चर्चा का विषय है। काशी विद्वत परिषद ने भी इस बात का जिक्र करते हुए बताया कि मुग़ल आक्रांताओं की नजर हमेशा से काशी के देवालयों पर रही और कई बार के हमलों में उन्होंने कई सदियों तक समय-समय पर नुकसान भी पहुँचाया। सभी ने अपने-अपने काल में काशी विश्वनाथ मंदिर पर भी आक्रमण किए। मंदिर का खजाना लूटा लेकिन लाख कोशिश के बाद भी विश्वेश्वर शिवलिंग को अपने साथ नहीं ले जा सके।
यहाँ तक कि शिवलिंग अपने स्थान से टस से मस भी नहीं हुआ। लेकिन, इसके प्रमाण के तौर पर जो एक बात कही जा रही है वो पौराणिक भले हो लेकिन उसका प्रमाण जमीन पर आज भी दिखता है। शिवमहापुराण में एक श्लोक की चर्चा हो रही है-
‘अविमुक्तं स्वयं लिंग स्थापितं परमात्मना। न कदाचित्वया त्याज्यामिंद क्षेत्रं ममांशकम्।’
जिसकी व्याख्या कई विद्वानों ने करते हुए बताया है कि मूल शिवलिंग को काशी से बाहर अन्यत्र नहीं ले जा सकते क्योंकि स्वयं महादेव शिव यहाँ अविमुक्त रूप में स्थापित हैं। श्लोक के आधार पर ही कहा जा रहा है कि शिव ने स्वयं आदेश दिया कि मेरे अंश वाले ज्योतिर्लिंग तुम इस क्षेत्र को कभी मत छोड़ना। ऐसा कहते हुए देवाधिदेव महादेव ने इस ज्योतिर्लिंग को अपने त्रिशूल के माध्यम से काशी में स्थापित कर दिया।
अंग्रेजों के समय भी हो चुकी है समझौते की कोशिश
बाद के दूसरे प्रमाणों की बात करें तो काशी विश्वनाथ का इतिहास मुगलों के आक्रमण के बाद से कई बार बनने-बिगड़ने का रहा। वहीं आज की कानूनी प्रक्रिया भी नई नहीं है। जहाँ 18वीं सदी में मराठा सरदार ने मंदिर मुक्ति के प्रयास किए और 1770 ई में बादशाह शाह से मंदिर के क्षतिपूर्ति की वसूल करने का आदेश भी पारित करा लिया। लेकिन उस वक्त तक देश में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन हो गया था। वहीं सन् 1809 में काशी के हिंदुओं ने मंदिर के स्थान पर बनाए गए मस्जिद पर कब्जा कर लिया जिसे आज के समय में ज्ञानवापी मस्जिद कहा जाता है। तब 1810 में काशी के तत्कालीन डीएम मि. वाटसन ने एक पत्र लिखकर ज्ञानवापी परिसर को हिंदुओं को सौंपने के लिए कहा।
अंग्रेज दंडाधिकारी वॉटसन ने 30 दिसम्बर 1810 को ‘वाईस प्रेसिडेंट ऑफ कॉउन्सिल’ में कहा था, “ज्ञानवापी परिसर हमेशा के लिए हिन्दुओं को सौप दिया जाए। उस परिसर में हर तरफ हिंदुओं के देवी-देवताओं के मंदिर हैं। मंदिरों के बीच में मस्जिद का होना इस बात का प्रमाण है कि वह स्थान भी हिंदुओं का ही है।” तब अंग्रेजी शासन ने अपने अधिकारी की बात नहीं मानी थी। परिणाम स्वरुप यह कभी वास्तविक रूप से लागू नहीं हो पाया।
1936 का ज्ञानवापी मुकदमा
अभी प्रमाणों पर बात चल ही रही है तो थोड़ा सा जिक्र 1936 में चले मुकदमें की भी कर लेते हैं। जिसमें मंदिर के पक्ष में जो अकाट्य प्रमाण दिए गए थे यदि उन्हीं के आलोक में अभी भी सुनवाई हो तो नए सर्वेक्षण और पुराने ऐतिहासिक और पुरातात्विक प्रमाणों के आगे मुस्लिमों के दावे कहीं नहीं ठहरेंगे।
इन्हीं मामलों पर प्रमाण के साथ अपना पक्ष रखते हुए काशी विद्वत परिषद के संगठन मन्त्री पंडित गोविन्द शर्मा बताते हैं कि विश्वनाथ मंदिर के सम्बन्ध में कई पुस्तकें प्रमाण के तौर पर उपलब्ध हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रमाण ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ नाम की पुस्तक है। यह पुस्तक औरंगज़ेब के दरबारी लेखक सकी मुस्तईद ख़ान ने 1710 में लिखी थी। इसी पुस्तक में उस फरमान का उल्लेख है, जिसमें औरंगज़ेब ने विश्वनाथ मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया था।
लेकिन, जहाँ तक 1936 के मुक़दमे की बात है। तब अदालत में दोनों पक्षों के द्वारा सबूत पेश किए जा रहे थे। ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ और औरंगज़ेब के फ़रमान की भी चर्चा हुई। तब मुस्लिमों ने उर्दू में लिखी ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ पेश की जिसमें विश्वनाथ मंदिर को तोड़े जाने और औरंगज़ेब के ऐसे किसी फ़रमान का ज़िक्र नहीं था। कहते हैं कि जब इस छल से हिन्दू पक्ष निराश होने लगा और हिन्दू पक्षकारों के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी तब कुछ ही दिनों के अन्दर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के इतिहासकार डॉ. परमात्मा शरण ने फ़ारसी में लिखी और 1871 में बंगाल एशियाटिक सोसाइटी के द्वारा प्रकाशित असली ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दी।
फारसी में जारी शाही फरमान-2 (‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ से)
जिसकी पृष्ठ संख्या-88 पर औरंगज़ेब के आदेश पर काशी विश्वनाथ मन्दिर को तोड़े जाने का ज़िक्र है। कहते हैं तब जाकर उस साज़िश का पर्दाफ़ाश हुआ जो उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद में रची गई थी। इसी यूनिवर्सिटी ने ‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ का 1932 में उर्दू अनुवाद प्रकाशित किया था। जिसमें से षडयंत्रपूर्वक श्री काशी विश्वनाथ के इतिहास वाले पन्नों को निकाल दिया गया था।
फारसी में जारी शाही फरमान-3 (‘मा-असीर-ए-आलमगीरी’ से)
खैर, ये सब इसलिए कि वामपंथी इतिहासकारों और इस्लामिक विद्वानों ने कई बार ऐसे छलपूर्वक अधूरे साक्ष्य के आधार पर प्रपंच रचाने की कोशिश की। वही काम वो इस बार भी ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में मिले शिवलिंग को ख़ारिज करने के लिए कई उल-जलूल बातें प्रमाण के नाम पर पेश करते नजर आ रहे हैं। ऐसे में बस इतना जान लीजिए कि सबूतों को गायब कर देना, सबूतों के साथ छेड़-छाड़ करना, फ़र्ज़ी सबूत बनाने का प्रयास करना, फ़र्ज़ी कहानियाँ गढ़ना ये सब इनकी पुरानी चालें हैं। बाद में जब सच उजागर हो जाता है तो ये बकवास और बेसिर-पैर की बातें करने लगते हैं।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो बेंगलुरु के प्रतिष्ठित बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल के सामने का बताया जा रहा है। इस वीडियो में स्कूल के सामने छात्राओं को एक-दूसरे के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।
The People Of Bangalore Want To Know Just 2 Things Today..
— Harsha H Hanumegowda ™ (@Harsha_Reports) May 18, 2022
वायरल वीडियो में लड़कियाँ स्कूल यूनिफॉर्म में दिखाई दे रही हैं। छात्राओं को मंगलवार (17 मई 2022) को विट्ठल माल्या रोड के पास अपने सहपाठियों के साथ लड़ाई करते हुए देखा गया। इस विवाद का कारण फिलहाल पता नहीं चल पाया है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर वायरल स्क्रीनशॉट में इसका कारण बॉयफ्रेंड और फेक डेट बताया जा रहा।
— don’t speak if u can’t respect (@ohplslifesucks) May 18, 2022
वीडियो में लड़कियों को एक-दूसरे को थप्पड़ मारते और एक-दूसरे के बाल खींचते हुए देखा जा सकता है। एक लड़की को बेसबॉल स्टिक से भी दूसरी छात्राओं को मारते देखा जा सकता है। जहाँ कई लड़के और कुछ महिलाएँ उन्हें अलग करने की कोशिश करते हैं, वहीं दो लड़कियाँ एक-दूसरे को सीढ़ियों से नीचे खींचती है। कुछ लोग असहाय होकर लात, घूँसे और झोंटा झोटी देखते रहे। स्कूली छात्राओं की यह लड़ाई किसी गैंगवार की तरह लग रही थी।
— Knotty Commander (@KnottyCommander) May 18, 2022
कुछ समय तक लड़ाई जारी रही। बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल की लड़कियों को चीखते और चिल्लाते हुए सुना जा सकता था। कुछ स्कूली बच्चों सहित आसपास मौजूद लोगों ने लड़कियों को लड़ने से रोकने की कोशिश की। हालाँकि, लड़कियाँ एक-दूसरे को पीटती रहीं। एक अन्य वीडियो में एक लड़की को बैरिकेड्स की ओर धकेले जाने के बाद उसकी नाक से खून बहता हुआ दिखाई दे रहा है।
— Harsha H Hanumegowda ™ (@Harsha_Reports) May 18, 2022
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सड़क पर होने वाली लड़ाई को रोकने के लिए स्कूल के अधिकारियों ने कोई दखल नहीं दिया। बिशप कॉटन गर्ल्स स्कूल ने भी अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है। वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और इस पर खूब मीम्स भी बन रहे हैं।
पंजाब से हनुमान चालीसा की बेअदबी का मामला सामने आया है। बठिंडा जिले में हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) के जले हुए पन्ने मिलने के बाद से हिन्दू संगठनों में काफी आक्रोश है। सूचना मिलने पर पुलिस और फिंगर एक्सपर्ट की टीम मौके पर पहुँची। फिंगर एक्सपर्ट की टीम ने हनुमान चालीसा के जले हुए पन्नों को अपने कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (16 मई, 2022) देर रात कुछ शरारती तत्वों ने हनुमान चालीसा में आग लगाकर उसकी प्रतियाँ किला साहिब के पास फेंक दी थी। इसकी जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठनों में विरोध की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि शहर का माहौल खराब करने के लिए शरारती तत्वों ने यह हरकत की है। हिंदू संगठनों के नेता सुखपाल सरन और संदीप अग्रवाल ने कहा कि उन्हें देर शाम सूचना मिली थी कि किले के पास किसी ने हनुमान चालीसा में आग लगा दी है। वहीं एसएसपी बठिंडा जे एलेनचेजियन ने हिंदू संगठनों को भरोसा दिलाते हुए कहा है कि पुलिस इस मामले की तह तक जाने के लिए जाँच में जुट गई है। सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। जल्द ही हनुमान चालीसा का अपमान करने वालों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं, सोशल मीडिया पर हनुमान चालीसा का अपमान करने की खबर वायरल होने के बाद से यूजर्स में व्याप्त रोष है। पंजाब प्रधान अंतरराष्ट्रीय हिंदू महासभा के ट्विटर हैंडल से मोदी सरकार से इस मामले में शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की माँग की गई है। ट्वीट में लिखा गया है, “मोदी सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए। पंजाब में ना तो हिंदू सुरक्षित हैं और ना हिंदू धर्म सुरक्षित है। आज बठिंडा में हनुमान चालीसा का अपमान किया गया। हम कब तक हिंदू देवी-देवताओं का अपमान सहन करते रहेंगे। शरारती खालिस्तानी की गतिविधियाँ तेज होती जा रही हैं मोदी सरकार पंजाब की तरफ ध्यान दें।”
मोदी सरकार को सख्त कदम उठाने चाहिए पंजाब में ना तो हिंदू सुरक्षित हैं ना हिंदू धर्म सुरक्षित है आज बठिंडा में हनुमान चालीसा का अपमान किया गया कब तक सहन करेंगे हिंदू देवी देवताओं का अपमान शरारती खालिस्तानी की गतिविधियां तेज होती जा रही हैं मोदी सरकार पंजाब की तरफ ध्यान दें pic.twitter.com/e2xJqaXEAA
— पंजाब प्रधानअंतरराष्ट्रीय हिंदू महा सभा (@chhota_thakur4) May 17, 2022
हिन्दू विरोधी ताकतों को एक जुटता से कुचलना चाहिए। सरकार तमाशा देखती है। जात पात से उपर उठकर सवसे पहले हमे हिन्दू वनना चाहिए। एक वनों नेक वनों जय देव जी जय राजपुताना जी जय भवानी जी। ववलु सिंह जसरोटीया प्रदेश उपाध्यक्ष श्री राष्ट्रीय राजपूत करनी सेना जम्मू कश्मीर जय देव जी । pic.twitter.com/aa2hbb1wLm
— Julm Se Jang National News Paper (@se_julm) May 17, 2022
एक अन्य यूजर ने लिखा, “हिन्दू विरोधी ताकतों को एकजुटता से कुचलना चाहिए। सरकार तमाशा देखती है। जात-पात से ऊपर उठकर सबसे पहले हमें हिन्दू बनना चाहिए।”