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गुजराती फिल्म ‘प्रेम प्रकरण’ ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ के लिए खुद खाली किए थिएटर, कहा- राष्ट्र पहले है, हम बाद में आएँगे

‘द कश्मीर फाइल्स’ को गुजरात में ज्यादा से ज्यादा देखा जाए इसके लिए गुजराती फिल्म ‘प्रेम प्रकरण’ के प्रोड्यूसरों ने अपनी फिल्म को सिनेमा घरों से हटवाने का निर्णय लिया है। ये फिल्म 15 मार्च को ही रिलीज हुई है फिर भी इसके प्रोड्यूसरों ने इसे पर्दे से हटवा दिया।

इस गुजराती फिल्म की डिस्ट्रिब्यूटर वंदना शाह ने अपने बयान में कहा कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ फिल्म अच्छा कर रही है। इसके (प्रेम प्रकरण के) प्रोड्यूसर चाहते हैं कि इसके (द कश्मीर फाइल्स) अधिक से अधिक शो हों। वह कहती हैं, “हम प्रेम प्रकरण फिल्म के साथ थोड़े दिनों बाद सिनेमा में आएँगे।”

फिल्म के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर चंद्रेश भट्ट ने अपने ट्वीट में कहा, “राष्ट्र पहले है। द कश्मीर फाइल्स के लिए रास्ता बनाइए ताकि आप सिनेमा के जादू का आनंद उठा पाएँ। हम आपको जल्द ही थिएटर में फिर मिलेंगे। अपार प्रेम के लिए हमारे दर्शकों का आभार। हम बहुत जल्द सिनेमाघरों में वापसी करेंगे। वंदे मातरम।”

ई-टाइम्स में आए फिल्म निर्माता के बयान के मुताबिक बतौर भारतीय वे द कश्मीर फाइल्स को फिल्म से ज्यादा मानते हैं। वह कहते हैं, “भले ही मेरी फिल्म गुजराती है लेकिन सिनेमाघरों से इसे वापस लेना एक तरीका है कि हम द कश्मीर फाइल्स के अधिक से अधिक शो के लिए रास्ता बना सकें। मेरी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कर रही है। लेकिन हम सिनेमा पर कुछ समय बाद आएँगे।”

गुजराती फिल्म निर्माता की ये दरियादिली देखने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने उनका आभार जताया और गुजराती में ट्वीट करके कहा कि वो प्रेम प्रकरण की पूरी टीम के आभारी हैं। उन्होंने कहा, “मैं आशा करता हूँ कि प्रेम प्रकरण को भी कामयाबी मिले। बहुत धन्यवाद।”

वहीं द कश्मीर फाइल्स के लीड एक्टर ने भी अपना बयान साझा किया। उन्होंने कहा, “मेरे पास तो शब्द ही नहीं है कि मैं चंद्रेश भट्ट का किस तरह से धन्यवाद दूँ। मैं हर समर्थन के लिए आभारी हूँ जो उन्होंने हमारी फिल्म को दिया। द कश्मीर फाइल्स अब लोगों की फिल्म है और इसे दिल के नजदीक रखने के लिए बहुत धन्यवाद। मेरी शुभकामाएँ हैं कि प्रेम प्रकरण को भी खूब सफलता मिले। शुक्रिया।”

द कश्मीर फाइल्स

बता दें कि द कश्मीर फाइल्स 90 के दशक में घाटी में जो कुछ भी कश्मीर पंडितों पर घटा, उस पर आधारित फिल्म है। फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री हैं जिनका धन्यवाद विदेशों तक में किया जा रहा है कि वो सच को पर्दे पर लाए। फिल्म 11 मार्च को रिलीज हुई थी। इस फिल्म में हिंदुओं के दुख को जस का तस दिखाने का प्रयास हुआ है। कुछ लोग इसे प्रोपेगेंडा फिल्म भी बता रहे हैं लेकिन उनसे ज्यादा लोग इस फिल्म की सराहना कर रहे हैं।

‘कहाँ गए वे करोड़ों लोग (हिंदू)… टुकड़े गैंग का कैंसर निकाल फेंकिए’: कंगना रनौत ने ‘द कश्मीर फाइल्स’ देख कहा- बॉलीवुड के सारे पाप धो दिए

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स (The Kashmir Files)’ ने नब्बे के दशक में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को चर्चा में ला दिया है। इस पर लगातार तमाम तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत (kangana ranautने भी इस फिल्म को देखने के बाद एक वीडियो के जरिए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा है कि विवेक अग्निहोत्री ने इस फिल्म के जरिए बॉलीवुड के सारे पाप धो दिए हैं। साथ ही उन करोड़ों हिंदुओं के बारे में भी पूछा है जो कभी पाकिस्तान और बांग्लादेश में रहते थे।

लोगों से यह फिल्म देखने की अपील करते हुए कंगना ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो के जरिए कहा है, “मैंने अपने के साथ द कश्मीर फाइल्स देखी। विवेक अग्निहोत्री जी आप और आपकी टीम धन्य है। आपने इस फिल्म के जरिए पूरे देश और फिल्म इंडस्ट्री को गौरवान्वित किया है। ये फिल्म इंडस्ट्री सदैव आपकी आभारी रहेगी। आपने दशकों से किए गए हमारे पापों को भी धो दिया है। मैं सबकी ओर से आपको मार्गदर्शन करने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूँ।”

कंगना ने आगे कहा, “कश्मीर के इस हादसे को केवल एक घटना से समझना कि एक रात ऐसा हुआ होगा, ये सबसे बड़ी गलती है। जब भारत का विभाजन हुआ था तो पाकिस्तान में उतने ही हिंदू थे, जितने कि यहाँ मुस्लिम। आज आप यहाँ मुस्लिमों की आबादी को देखिए और वहाँ पाकिस्तान में नाम मात्र भी हिंदू नहीं बचे। हर दिन उन्हें मारा जाता है, रेप होता है। हर दिन उन्हें काट के फेंका जाता है। कभी आपने ये सोचा कि कहाँ गए वो करोड़ों लोग? बांग्लादेश से करोड़ों लोग कहाँ गए? कभी सोचा है आपने?”

एक्ट्रेस ने कहा है, “ये सरकार की नहीं, बल्कि सभ्यता की लड़ाई और ये हर हिंदुस्तानी की लड़ाई है। जिन चीजों को आपको आपके टीचर्स ने नहीं बताया, आपको किताबें नहीं बताएँगी, मीडिया नहीं बताएगा। आपको आपकी इंसानियत को झकझोरना है। आप अपनी मानवता को खुद को गाइड करने दीजिए आपको सबकुछ पता चलेगा। काय़रता के पर्दे के पीछे मत छुपो। सभ्यता की इस लड़ाई में ये जो टुकड़े गैंग का कैंसर आपको आपके आसपास दिखे उसे इस देश से निकालकर फेंकिए। ‘द कश्मीर फाइल्स’ जरूर देखें। एक नए भारत की नींव रखें।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी कंगना ने कश्मीर फाइल्स को लेकर बॉलीवुड की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, “बुल्लीदाऊद और उनके चमचे सदमे में चले गए हैं। कोई कुछ कह नहीं रहा है, सारी दुनिया देख रही है इनको लेकिन फिर भी कुछ नहीं कह रहे हैं। उनका समय खत्म हो गया है।”

सपा ने डॉ कफील खान को बनाया MLC का उम्मीदवार, गोरखपुर के अस्पताल में 60 बच्चों की मौत मामले में आया था नाम

समाजवादी पार्टी ने डॉक्टर कफील खान को देवरिया-कुशीनगर सीट से MLC (विधान पार्षद) का उम्मीदवार बनाया है। हाल ही में उन्होंने पार्टी सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी मुलाकात की थी। उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2022 में सपा की तरफ से प्रत्याशी बनाए गए डॉक्टर कफील खान गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की हुई मौत के बाद चर्चा में आए थे।

मंगलवार (15 मार्च, 2022) को सपा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद उनके नाम का ऐलान किया गया। इस दौरान उन्होंने गोरखपुर ऑक्सीजन कांड पर लिखी अपनी पुस्तक भी अखिलेश यादव को भेंट की। बता दें कि बच्चों की मौत मामले में उनका नाम आने के बाद यूपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। बुधवार को वो अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में स्थानीय प्राधिकारी क्षेत्र की 36 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 15 मार्च से शुरू हो गई है।

19 मार्च तक 30 सीटों के लिए पर्चे भरे जाने हैं, जबकि 6 सीटों के लिए नामांकन की प्रक्रिया 22 मार्च तक चलेगी। 9 अप्रैल को सभी 36 सीटों के लिए मतदान की तारीख़ तय की गई है। 12 अप्रैल को मतगणना के बाद परिणाम जारी कर दिए जाएँगे। भाजपा और सपा की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर उनके प्रत्याशी जीतें। विधान परिषद में फ़िलहाल सपा की 48 सीटें हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 36 MLC हैं।

हालाँकि, सपा के 8 विधान पार्षद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। भाजपा का लक्ष्य है कि ज़्यादा सीटें प्राप्त कर के वो उत्तर प्रदेश के उच्च सदन में भी बहुमत प्राप्त करे। बता दें कि स्थानीय निकाय की सीटों के लिए सांसद, नगरीय निकायों, विधायक, कैंट बोर्ड के निर्वाचित सदस्य, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों के सदस्यों के अलावा ग्राम प्रधान भी वोट डालते हैं। अटकलें हैं कि डॉक्टर कफील खान के सहारे सपा मुस्लिमों को लुभाना चाहती है।

बता दें कि गोरखपुर के ‘बाबा राघव दास (BRD) हॉस्पिटल’ में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से 60 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले में डॉक्टर कफील खान पर लगे आरोपों की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। डॉक्टर कफील खान पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगे थे। डॉक्टर कफील खान इस मामले में जेल भी जा चुके हैं। वो CAA और NRC के विरुद्ध हुए विरोध प्रदर्शनों में भी खासे सक्रिय रहे थे और शाहीन बाग़ जैसे उपद्रवों में हिस्सा लिया था। उन पर सरकारी नौकरी के इतर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप भी थे।

सूटकेस में मिली पुतिन को ‘पागल’ बताने वाली रूसी मॉडल की लाश: जानिए कौन थी ग्रेटा वेडलर

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनोरोगी कहने वाली रूसी मॉडल की हत्या कर दी गई है। मॉडल ग्रेटा वेडलर के लापता होने के एक साल से भी अधिक समय बाद एक सूटकेस के अंदर उसका शव बरामद हुआ है। जनवरी 2021 में ही वेडलर ने पुतिन के बारे में पोस्ट किया था। जिसमें उसने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनोरोगी (Psychopath) कहा था और उसके एक महीने बाद वेडलर की हत्या कर दी गई।

पोस्ट में वेडलर ने यह भी कही थी कि ‘रूस की अखंडता बचाए रखने के चक्कर में एक दिन उनका ट्रैजिक अंत होगा।” वहीं इस मामले में मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चौकाने वाला खुलासा हुआ है। वेडलर की हत्या उसके पूर्व प्रेमी दिमित्री कोरोविन ने ही कर दी थी, जिसने मॉस्को में पैसे को लेकर बहस के बाद उसका गला घोंटने की बात कबूल की थी। जिसका पुतिन को लेकर उसके राजनीतिक विचारों से कोई संबंध नहीं है।

कहा जा रहा है कि कोरोविन उसी कमरे में सोया था जहाँ वेडलर की लाश रखी थी। कोरोविन ने हत्या करने की बात कबूल ली है और यह भी खुलासा किया कि वह तीन रातों के लिए एक होटल के कमरे में उसकी लाश के साथ सोया था जो कि उसने एक सूटकेस में रखी थी।

इतना ही नहीं तीन दिन के बाद वेडलर के शव को 300 मील की दूरी तय करके लिपेत्स्क (Lipetsk) क्षेत्र में ले जाकर एक साल से अधिक समय तक कार के बूट में छोड़ दिया। इसके बाद भी चालाकी दिखते हुए 23 वर्षीय ने मॉडल के सोशल मीडिया नेटवर्क पर तस्वीरें और संदेश भी पोस्ट करता रहा ताकि लोगों को विश्वास हो कि वह अभी भी जीवित है।

मामले का पता तब लगा जब यूक्रेन के खार्किव में एक ब्लॉगर एवगेनी फोस्टर को संदेह हुआ और उसने मॉस्को में अपने एक दोस्त से संपर्क किया, और तब जाकर एक गुमशुदगी का मामला दर्ज किया गया, जिसके कारण उसके शरीर की खोज कई दिनों तक हुई।

रूस की जाँच समिति द्वारा निर्मित एक वीडियो में, कोरोविन ने कथित तौर पर कबूल किया है कि कैसे उसने मॉडल को मार डाला और वह अपने अपराध स्वीकार करता है।

‘हिजाब अभिव्यक्ति की आज़ादी का हिस्सा, प्राइवेसी का अधिकार’: बुर्का पक्ष पहुँचा सुप्रीम कोर्ट, जमीयत भी कर्नाटक HC के खिलाफ

जहाँ एक तरफ कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा है कि हिजाब इस्लाम में अनिवार्य प्रथा नहीं है और शैक्षणिक संस्थानों में इस पर प्रतिबंध जारी रहेगा, वहीं दूसरी तरफ बुर्का पक्ष अब सुप्रीम कोर्ट में पहुँच गया है। सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता एक मुस्लिम छात्र है, जिसने कर्नाटक उच्च न्यायालय में भी याचिका डाली थी। इस्लामी संगठन फैसले का विरोध कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक हाईकोर्ट ये समझने में अक्षम रहा कि हिजाब पहनना ‘प्राइवेसी के अधिकार’ के अंतर्गत आता है, जो संविधान के अनुच्छेद-21 का हिस्सा है। साथ ही इसमें ‘अंतःकरण की आज़ादी’ को भी इसी का एक हिस्सा बताया गया है। साथ ही इस याचिका में हिजाब को ‘अभिव्यक्ति’ के अंतर्गत बताते हुए कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद-19(1)(a) के तहत इसकी सुरक्षा प्रदान की गई है।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि धर्मों और इसकी आस्थाओं से ऊपर हमारा संविधान है। वहीं कर्नाटक के उडुपी जिले में बुधवार (16 मार्च, 2022) से सभी शैक्षणिक संस्थान खुल जाएँगे। हालाँकि, इस दौरान किसी उपद्रव से बचने के लिए धारा-144 भी लगाई जाएगी। जुलूस, जश्न और प्रदर्शनों पर 21 मार्च तक प्रतिबंध जारी रहेगा।

इस्लामी संगठन जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा और मजहबी आज़ादी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस फैसले का स्वागत करने की वकालत करते हुए कहा कि छात्र-छात्राओं को स्कूल-कॉलेजों के ड्रेस कोड का पालन करना चाहिए। कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने कहा कि फैसले के बाद शिक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है, जिसे व्यवस्थित रखना राज्य की भाजपा सरकार की जिम्मेदारी है।

कॉन्ग्रेस ने हार का बकरा किया तय, सिद्धू सहित पाँचों राज्य के अध्यक्ष से सोनिया गाँधी ने माँगा इस्तीफा

उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में कॉन्ग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी एक्शन मोड़ में है। कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पाँचों राज्यों के कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा माँगा है।

कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर के प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्षों से पीसीसी के पुनर्गठन की सुविधा के लिए इस्तीफा देने को कहा है।

बता दें कि मौजूदा समय में पंजाब में अध्यक्ष पद की नवजोत सिंह सिद्धू सँभाल रहे हैं तो वहीं यूपी में अजय कुमार लल्लू पीसीसी प्रमुख हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में गणेश गोदियाल के पास प्रदेश कॉन्ग्रेस की कमान है तो वहीं गोवा में गिरीश चोडनकर पीसीसी अध्यक्ष थे, जिन्होंने गोवा में कॉन्ग्रेस की हार के बाद ही अपना पद छोड़ दिया था। अभी वर्तमान में पाँचवे राज्य मणिपुर नमेईरकपैम लोकेन सिंह प्रदेश अध्यक्ष पद पर हैं।

पार्टी हाईकमान के कहने पर कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने हार के बाद सभी प्रदेश अध्यक्षों से इस्तीफा देने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने रविवार (13 मार्च, 2022) को कॉन्ग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में कहा था, “हम पार्टी के हित में किसी भी त्याग के लिए तैयार हैं. इसके बाद सीडब्ल्यूसी में शामिल नेताओं ने उनके नेतृत्व में भरोसा जताते हुए उनसे आग्रह किया कि संगठनात्मक चुनाव संपन्न होने तक वह पद पर बनी रहें।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सीडब्ल्यूसी में शामिल नेताओं ने सोनिया गाँधी से यह भी कहा था कि वह कॉन्ग्रेस को मजबूत बनाने के लिए जरूरी बदलाव करते हुए सुधारात्मक कदम उठाएँ। CWC की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया था कि संसद का बजट सत्र संपन्न होने के तत्काल बाद एक ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया जाएगा जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

बता दें कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने प्रदेश में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन करने का प्रस्ताव भी दे दिया था। वहीं बताया जा रहा है कि ‘चिंतन शिविर’ से पहले सीडब्ल्यूसी की एक और बैठक होगी। सीडब्ल्यूसी की बैठक में ‘जी 23’ के तीन नेता गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा और मुकुल वासनिक भी शामिल हैं। वहीं बाकी नेताओं का इससे बाहर रखा गया है।

45 सालों से बंद है राजस्थान का देवनारायण मंदिर, मुस्लिमों ने ठोक रखा है दावा: खुलवाने के लिए हिन्दुओं का प्रदर्शन, गुर्जर समाज मैदान में

भीलवाड़ा के हिन्दुओं की माँग है कि 45 वर्षों से बंद देवनारायण मंदिर को खोला जाए और उसमें पूजा-अर्चना की जाए। गुर्जर समाज सहित हिन्दू समुदाय के विभिन्न लोगों ने मांडल कस्बे के इस मंदिर को खुलवाने के लिए 17 किलोमीटर लंबा मार्च निकाला। समाहरणालय के साथ-साथ जिला प्रशासन को भी ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जेल चौराहा छावनी में तब्दील रहा। सवाईभोज महंत सुरेशदास, नीलकंठ महादेव मंदिर के महंत दीपकपुरी, मालासेरी के पुजारी हेमराज पोसवाल और देवनारायण संघर्ष समिति के संयोजक उदयलाल भडाणा के नेतृत्व में ये सब हुआ

सोमवार (14 मार्च, 2022) को सुबह 10 बजे मांडल में मेजा रोड स्थित तेजाजी चौक से प्रदर्शनकारी पैदल निकले। जुलूस में रथ पर भगवान देवनारायण के चित्र को भी विराजमान किया गया था। कई कार और बाइक पर युवक झंडा लेकर सवार थे। जेल चौराहा पर बैरिकेडिंग थी, जहाँ धरना दिया गया। दरअसल, एक कार्यक्रम में मंच से पुलिस और प्रशासन काे चुनाैती देने के बाद गाेपालसिंह गुर्जर बस्सी नाम के युवक ने 11 मार्च, 2022 काे मांडल में 45 साल से बंद पड़े देवनारायण मंदिर के ताले ताेड़ दिए थे।

गोपाल के खिलाफ फिर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के साथ-साथ अदालत की अवमानना की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। गोपाल सिंह बस्सी ने धरने को भी सम्बोधित किया। बता दें कि 1977 से ही इस मंदिर की जमीन विचाराधीन है और कोर्ट ने इसमें ताला लगवा कर चाबी मांडल थाने में जमा करवा दी थी। पुलिस का कहना है कि इस भूखंड में एक ढाँचा है, जिस पर दूसरे मजहब का दावा है। युवक ने का कि वो ताला तोड़ कर खुद को सौभाग्यशाली मान रहे हैं।

शपथग्रहण से पहले ही काम पर लौटा बुलडोजर: कुख्यात बदन सिंह बद्दो का ठिकाना जमींदोज, सपा नेता का अवैध निर्माण भी ध्वस्त

उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार की वापसी के बाद बुलडोजर फिर से चलने लगा है। इस बार मेरठ में बुलडोजर चला। मेरठ पुलिस ने मंगलवार (15 मार्च 2022) पुलिस कस्टडी से फरार ढाई लाख के इनामी बदन सिंह बद्दो और उसके सहयोगी के अवैध मार्केट और फैक्ट्री पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जा मुक्त कराया

सुबह-सुबह पुलिस और मेरठ विकास प्राधिकरण के अधिकारी बुलडोजर लेकर मेरठ के थाना टीपी नगर इलाके के जगन्नाथपुरी में पहुँचे। वहाँ पर दो घंटे तक भारी पुलिस फोर्स के साथ चलाए अभियान में कुख्यात बदन सिंह बद्दो और उसके सहयोगी के द्वारा कब्ज़ा की गई पार्क की जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया। पुलिस का कहना है कि यह जो कार्रवाई हुई है, यह पार्क की जमीन थी और अभी भी पार्क की जमीन है। 

बताया जा रहा है कि बद्दो के कुछ करीबियों ने मेरठ के एक पार्क की जमीन हड़प ली और उसपर फैक्ट्री बनवा दी थी। इसको लेकर बद्दो पर आरोप लगे कि उसकी शह में रहकर ही आरोपितों ने जमीन पर कब्जा किया था जिसे लेकर अब योगी सरकार ने यह कार्रवाई की है।

मेरठ पुलिस ने कहा, “इस पर धीरे-धीरे भू-माफियाओं ने कब्जा करके बिल्डिंग बनाई है। सबसे बड़े भू माफिया बदन सिंह बद्दो और उनके सहयोगियों ने कब्जा किया हुआ था, उसमें एक रेनू गुप्ता के नाम से उन्होंने यहाँ पर एक बिल्डिंग बना रखी थी। इसमें मेरठ विकास प्राधिकरण ने पूरे कानूनी तरीके का पालन करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया।”

गौरतलब है कि इससे पहले मेरठ पुलिस और मेरठ विकास प्राधिकरण ने पुलिस कस्टडी से फरार ढाई लाख के इनामी माफिया बदन सिंह बद्दो की करोड़ों रुपए की कोठी का भी ध्वस्तीकरण किया था। उसकी कोठी भी इसी इलाके में मौजूद थी। पुलिस के मुताबिक बद्दो ने कई सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे किए हैं। उसकी फरारी के बाद पुलिस ने रिकॉर्ड खंगाला। करोड़ों रुपए की संपत्ति बद्दो ने अपने करीबियों के नाम की है। पुलिस और एमडीए ने 50 साल पुराना रिकॉर्ड खँगाला तो यह स्थिति सामने आई।

कानपुर में भी चला बुलडोजर

इससे पहले कानपुर में तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए बुलडोजर चलाया गया। कथित रूप से तालाब की जमीन पर अवैध कब्जा कर भू-माफिया की ओर से 1750 वर्ग मीटर भूमि पर कराए गए अवैध निर्माण को कानपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी (केडीए) की टीम ने ध्वस्त करा दिया। 

कहा जा रहा है कि जिस भू माफिया विष्णु कुमार यादव उर्फ पंगू यादव ने इस जमीन पर अवैध अतिक्रमण किया था, वह सपा से जुड़ा है। विष्णु की सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ तस्वीर भी सामने आई है। बताया जाता है कि बर्रा 6 आवासीय योजना के तहत प्राचीन शिव मंदिर के समीप तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण कराया गया था।

यूक्रेन से मुश्किल हालातों में 22,500 भारतीयों को वापस लाने में देश रहा सफल: संसद में विदेश मंत्री ने दी ‘ऑपरेशन गंगा’ की जानकारी

भारत सरकार ‘ऑपरेशन गंगा’ के तहत यूक्रेन से अभी तक 22 हजार से अधिक भारतीय नागरिकों को बाहर निकाल चुकी है। यह जानकारी विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार (15 मार्च 2022) को राज्यसभा में दी। उन्होंने बताया कि युद्ध प्रभावित यूक्रेन से 22,500 से अधिक भारतीय नागरिक अभी तक स्वदेश लौट चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के दौरान कड़ी चुनौतियों का सामना किया गया, लेकिन भारत ने यह सुनिश्चित किया कि अपने लोगों को संघर्ष वाले क्षेत्रों से निकालना ही है।

उन्होंने कहा, “इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर हमने ऑपरेशन गंगा की शुरुआत की, जो इस संघर्ष की स्थिति के दौरान चलाए गए सबसे कठिन अभियानों में से एक था। ऑपरेशन गंगा के तहत 90 फ्लाइट्स का संचालन किया गया है। जिनमें से 76 नागरिक उड़ानें थीं और 14 IAF उड़ानें थीं। निकासी उड़ानें (Evacuation Flights) रोमानिया, पोलैंड, हंगरी और स्लोवाकिया से थीं। भारतीय वायुसेना ने भी इस अभियान में मदद की। यही नहीं, कई प्राइवेट एयरलाइनों ने भी उत्साहपूर्वक इसमें हिस्सा लिया।”

जयशंकर ने कहा, “अभियान की समीक्षा के लिए प्रधानमंत्री खुद हर दिन बैठक कर रहे थे। विदेश मंत्रालय में हमने 24/7 आधार पर निकासी कार्यों की निगरानी की। हमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय, रक्षा, NDRF, IAF, प्राइवेट एयरलाइंस सहित सभी संबंधित मंत्रालयों और संगठनों से पूरा समर्थन मिला।” विदेश मंत्री ने कहा, “आधे से ज्यादा छात्र पूर्वी यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में थे जो क्षेत्र रूस की सीमा से लगा है और अब तक संघर्ष का केंद्र रहा है। यूक्रेन से 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के छात्रों को सुरक्षित निकाला गया है।”

उन्होंने सदन को बताया कि यूक्रेन में भारतीय दूतावास ने जनवरी से ही भारतीय नागरिकों के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया था। जिसमें 20 हजार भारतीयों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से ज्यादातर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र थे। दूतावास ने 15 फरवरी को एक एडवाइजरी जारी की थी जिसमें सलाह दी गई थी कि जिनका भी यूक्रेन में रुकना जरूरी न हो वो देश छोड़ दें। भारतीयों को यूक्रेन की यात्रा न करने या यूक्रेन के भीतर गैर-जरूरी आवाजाही न करने की सलाह भी दी गई।

एस जयशंकर ने कहा, “इसके बाद भारतीय दूतावास ने 20 और 22 फरवरी को एडवाइजरी जारी करके छात्रों और भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से निकलने के लिए कहा था। 23 फरवरी तक लगभग 4,000 भारतीय यूक्रेन से अलग-अलग उड़ानों के जरिए यूक्रेन छोड़ चुके थे। लगातार जारी हो रही एडवाइजरी और हमारे प्रयासों के बाद भी बड़ी संख्या में छात्र वहाँ से नहीं निकल रहे थे। उनको डर यह था कि उनकी पढ़ाई अधूरी ना रह जाए। कुछ विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की पेशकश करने में रुचि नहीं दिखाई।”

रूस के आक्रमण के बाद यूक्रेन में हजारों की संख्या में भारतीय छात्र फँसे हुए थे। जिन्हें निकालने के लिए ऑपरेशन गंगा अभियान चलाया गया था। ऑपरेशन गंगा के तहत न सिर्फ भारतीयों को बल्कि नेपाल, पाकिस्तान और बांग्लादेश के भी कुछ छात्रों को यूक्रेन से सुरक्षित निकाला गया है।

अभियान ऐसे समय में किया गया था जब सैन्य कार्रवाई, हवाई हमले और गोलीबारी चल रही थी। अभियान उस बड़े देश में चला जो युद्धग्रस्त था।

प्रधानमंत्री ने कई मौकों पर रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से बात की। उन्होंने विशेष रूप से खारकीव और सुमी से भारतीयों की सुरक्षित निकासी का मुद्दा उठाया। प्रधानमंत्री ने रोमानिया, स्लोवाक गणराज्य, हंगरी और पोलैंड के राष्ट्रपतियों से अपने देशों में भारतीयों के प्रवेश की सुविधा को लेकर बात की। प्रधानमंत्री ने ऑपरेशन गंगा की सुविधा के लिए रोमानिया, हंगरी, स्लोवाक गणराज्य और पोलैंड में 4 केंद्रीय मंत्रियों को विशेष दूत के रूप में भी भेजा।

उन्होंने बताया कि सूमी से भारतीयों को निकालना बेहद जटिल था क्योंकि छात्रों के गोलीबारी में फँसने की संभावना थी। शहर से उनकी निकासी के लिए एक विश्वसनीय युद्धविराम की जरूरत थी। यह आखिर यूक्रेन और रूस के राष्ट्रपतियों के साथ खुद प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण हुआ।

इसके बाद ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भारत के सिद्धांत के अनुरूप, विदेशी नागरिकों को भी संघर्ष क्षेत्रों से निकाला गया और देश लाया गया। इनमें 18 देशों के 147 नागरिक शामिल थे। कई यूक्रेनी नागरिक जो भारतीय नागरिकों के परिवार के सदस्य हैं, उन्हें भी निकाला गया है।

उन्होंने यूक्रेन में संघर्ष के दौरान मारे गए भारतीय छात्र नवीन शेखरप्पा की असमय मौत पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जब वह बाहर कुछ सामान लेने के लिए निकले थे, तब उनकी मौत हो गई थी। उनका पार्थिव शरीर भारत लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एक और नागरिक हरजोत सिंह को भी गोली लगी थीं, जिनके स्वास्थ्य पर सरकार पूरा ध्यान दे रही है, उन्हें भारतीय वायुसेना की मदद से भारत लाया गया है।

बिंदिया, आरती… जैसी कई लड़कियों को बनाया मुस्लिम, जबरन निकाह: पाकिस्तान के सिंध में जानवरों की तरह बेचे जा रहे हिंदू बच्चे

पाकिस्तान के सिंध प्रान्त से हिन्दू बच्चों के बेचे जाने की खबर सामने आ रही है। जहाँ जानवरों की तरह बच्चे-बच्चियों को बेचा जा रहा है। यह जानकारी वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान माइनॉरिटी के ट्विटर हैंडल ने दी है। इसमें पाकिस्तान पुलिस की मिलीभगत भी बताई जा रही है।

ट्वीट में लिखा गया है, “मीरपुरखास में एसएचओ मोमिन लगारी ने हिंदू समुदाय के 5 बच्चों को मोहम्मद बक्स लाघरी के हाथों 5 लाख रुपए में बेचा है। परिवार से वादा किया गया था कि उनके बच्चों को वापस कर दिया जाएगा लेकिन जब वे बताए गए लोकेशन पर पहुँचे तो उन्हें मना कर दिया गया।”

वहीं सिंध से सिंध से ही जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दो और नाबालिग हिंदू लड़कियों के अपहरण का मामला भी सामने आया है। सिंध के खैरपुर से आरती मेघवार (14वर्ष ) और घोटकी से राबिया भील (13) का जबरन इस्लामीकरण के लिए अपहरण कर लिया गया। वहीं बताया जा रहा है कि इससे पहले भी बिंदिया नामक किसी लड़की को उठा लिया गया था।

बिंदिया के मामले में बताया जा रहा है कि हाल ही में कुम्भ, जिला खैरपुर मीर, सिंध से 13 वर्षीय हिंदू लड़की बिंदिया मेघवार का जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के लिए अपहरण कर लिया गया था। वहाँ के अल्पसंख्यक हिन्दू लगातार इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन कोई भी उनकी सुध लेने को वहाँ तैयार नहीं है। सिंध नैरेटिव के ट्विटर हैंडल से यह जानकारी देते हुए बताया गया है कि खैरपुर पुलिस ने शिकायत के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।

यह कोई एक दो मामला नहीं है। वहाँ अक्सर हिन्दुओं लड़कियों को जबरन उठाने, इस्लाम कबूल कराकर निकाह के मामले आते रहते हैं। 2022 के पहले दिन, समरो सिंध की एक और हिंदू लड़की, नजमा कोहली का अपहरण करके इस्लाम कबूल करवाया गया और फिर फातिमा बनाकर एक 35 वर्षीय व्यक्ति अमानुल्लाह से निकाह करा दी गई। जिसके बाद पाकिस्तान में इसे अपहरण का मामला माना ही नहीं जाता।

वहीं15 साल की एक और हिंदू लड़की पायल कुमारी का भी सिंध के गोथ वाली मुहम्मद पटाफी से अपहरण कर लिया गया था और उसका भी मजहब बदलवाकर जबरन निकाह करा दिया गया।

ऐसे कई मामले है जिसे वॉइस ऑफ़ पाकिस्तान और सिंध नैरेटिव उठाते रहते हैं दुनिया के सामने कि कोई तो उनकी मदद करे। लेकिन न तो उनका संज्ञान अंतराष्ट्रीय मीडिया लेती है और कोई मानवाधिकार आयोग। पाकिस्तान की सरकार और पुलिस तो ऐसे मामलों को मजहबी मानकर पहले ही पल्ला झाड़ लेती है। या कभी कार्रवाई ही नहीं करती।