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‘बंगाल होगा अगला कश्मीर…’ : द कश्मीर फाइल्स देखने के बाद केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह हुए भावुक, बोले- ममता बनर्जी भी वही सब कर रहीं हैं

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने द कश्मीर फाइल्स देखने के बाद भावुक मन से कहा कि इस फिल्म को गाँवों की चौपाल तक दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने इस फिल्म को लेकर कहा कि अगर ये फिल्म नहीं बनती तो कोई सच नहीं जान पाता। देश के हालात कश्मीर से कम नहीं है। बंगाल में इस समय ममता बनर्जी का रोल वही है जो उस समय कश्मीर के राजनेताओं का था।

थिएटर से बाहर निकलते समय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह काफी भावुक थे। उन्होंने भारी आवाज में मीडिया से बात की और कहा, “यह फिल्म नहीं होती तो देश सच को नहीं जान पाता। अखबारों में पढ़ा था। ऐसा भी नहीं कि हम 90 के दशक में बच्चे थे। कश्मीर में जो हुआ है। जिन्होंने यह फ़िल्म बनाई है, उसे गाँव-गाँव में दिखाया जाना चाहिए।”

इसके बाद आज भी उनका उन लोगों के लिए बयान आया जो इस फिल्म के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “जो लोग आज ‘द कश्मीर फाइल्स’ को बैन करने की बात कर रहे हैं वे देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। इसे गाँव की चौपाल तक दिखाना चाहिए। मैं आज कह रहा हूँ कि आज ममता बनर्जी का वही रोल है जो कभी कश्मीर में राजनेताओं का था।”

उन्होंने कहा, “बंगाल अगला कश्मीर होगा, अगर बंगाल के हिन्दू अपने वजूद की लड़ाई नहीं लड़े तो एक ज़िला नहीं दर्जनों ज़िले हैं। देश के अंदर कट्टरवादिता से ख़तरा है। हमें मुसलमानों से खतरा कम है मुस्लिम कट्टरपंथियों से ज्यादा खतरा है”

गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये फिल्म देखने के बाद उस इकोसिस्टम को लताड़ा जो इसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि जो लोग हमेशा ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के झंडे लेकर घूमते थे, वो पूरी तरह बौखला बौखला गए हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म का तथ्यों के आधार पर, कला के आधार पर, उसकी विवेचन करने की बजाए उसकी बदनामी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि ये पूरा का पूरा इकोसिस्टम कोई सत्य उजागर करने का साहस करे तो उसके साथ ऐसा ही करता है।

गैंगरेप आरोपित बीकी अली की एनकाउंटर में मौत, भागने की कर रहा था कोशिश: अब असम पुलिस को 4 अन्य की तलाश

असम के गरीगाँव में नाबालिग से गैंगरेप के मुख्य आरोपित बीकी अली को गुवाहाटी पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। पुलिस ने मंगलवार (15 मार्च, 2022) को कामरूप ग्रामीण जिले के हाजो के पास दमपुर पहाड़ी इलाके से बीकी अली को गिरफ्तार किया था।

इसकी जानकारी देते हुए गुवाहाटी सिटी पुलिस ने बताया कि पुलिस की गोलीबारी में एक बलात्कार आरोपित की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मंगलवार (15 मार्च, 2022) रात में गुवाहाटी में पुलिस कर्मियों पर हमला कर उसने पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश की थी। तभी पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। बीकी अली को उसी दिन गिरफ्तार किया गया था। इस हमले में दो महिला पुलिस कर्मी भी घायल बताई जा रही हैं।

बता दें कि गुवाहाटी में हुए गैंगरेप का मुख्य आरोपित बीकी अली ही था। बीकी ने अपने चार दोस्तों फैजुर अली, पुना अली, पिंकू अली और राजा अली के साथ गुवाहाटी के अदाबारी में एक होटल के कमरे में एक किशोरी के साथ बलात्कार किया था। उन्होंने एक वीडियो रिकॉर्ड किया और इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। उसके बाद पीड़ित लड़की के माता-पिता ने पानबाजार महिला थाने में मामला दर्ज कराया था। इस मामले में पॉक्सो एक्ट और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

वहीं पुलिस को नाबालिग लड़की से गैंगरेप के मामले में बीकी अली के चार चार अन्य दोस्तों की भी तलाश है, जो अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। वहीं पुलिस ने सोमवार (14 मार्च, 2022) को पाँचों आरोपितों के परिवार के 7 सदस्यों को भी गिरफ्तार किया था।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दसवीं क्लास की नाबालिग लड़की का बिकी अली के साथ कथित अफेयर चल रहा था। 16 फरवरी, 2022 को वह उसे एक दोस्त के साथ अपने घर ले गया और दोनों ने मिलकर उसके साथ दुष्कर्म किया। उन्होंने वारदात को रिकॉर्ड भी कर लिया था। उन्होंने धमकी दी कि अगर उसने घटना के बारे में किसी को बताया तो वे तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देंगे।

जहाँ 16 साल की लड़की इस धमकी के चलते डर गई, वहीं उसने फिर से अपराध करने के लिए बिकी अली को मौका दे दिया। 19 फरवरी को, उसने उसे अपने साथ ओयो होटल में चलने के लिए ब्लैकमेल किया, धमकी दी कि अगर वह नहीं मानती है, तो वीडियो वायरल कर दिए जाएँगे।

होटल के कमरे में, बिकी अली के साथ फैजुर अली, पुना अली, पिंकू अली और राजा अली नाम के उसके चार अन्य दोस्तों ने एक साथ लड़की के साथ गैंगरेप किया और फिर से उसका वीडियो बनाया। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो भी अपलोड कर दिया।

कुछ दिनों तक चुप रहने के बाद लड़की ने अपने परिवार को घटना की जानकारी दी और तुरंत उसके माता-पिता ने शहर के पानबाजार महिला थाने में शिकायत दर्ज कराई।

‘भारत का रूस से सस्ता तेल खरीदना हमारे प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं’: अमेरिका ने साफ़ किया, जल्द हो सकती है बड़ी डील

यूक्रेन के साथ युद्ध के कारण वैश्विक प्रतिबंध झेल रहे रूस (Russia-Ukraine War) ने भारत को कम कीमत पर क्रूड ऑयल (Crude Oil) खरीदने का प्रस्ताव दिया था। भारत सरकार इस प्रस्ताव को लेकर गंभीरता से विचार कर रही थी। अब अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि भारत रूस से क्रूड ऑयल खरीदता है तो यह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 800 मिलियन अमेरिकी डॉलर (6,101 करोड़ रुपए) की सहायता देने का ऐलान किया है।

रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव जेन साकी (Jen Psaki) ने मंगलवार (15 मार्च) को कहा कि रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इन प्रतिबंधों का पालन करने के लिए सभी देशों से आग्रह करेगा। जेन ने कहा कि प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होने के बावजूद जब मौजूदा समय का इतिहास लिखा जाएगा तो इसे रूसी हमले का समर्थन माना जाएगा।

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर रूस से सैन्य आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर है। वहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद डॉ एमी बेरा ने रूस से भारत द्वारा कम दाम तेल खरीदे जाने की खबरों पर निराशा जताते हुए कहा कि इतिहास के इस नाजुक मोड़ पर जब दुनिया भर के लोग रूसी हमले के खिलाफ यूक्रेन के साथ खड़े हो रहे हैं, तब भारत पुतिन के पक्ष में खड़ा दिखाई देगा।

बता दें कि भारत में प्रतिदिन लगभग 45 लाख बैरल तेल खपत होती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात करता है और अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक कुल 17.6 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात किया था। इसमें से लगभग 2 प्रतिशत खरीद ही रूस से होती रही है। यूक्रेन संकट के बाद दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। ऐसे में रूस द्वारा रूस द्वारा दिया गया सस्ते कच्चा तेल को खरीदना भारत की एक तरह मजबूरी है।

सूत्रों की मानें तो भारत इस डील के काफी करीब है और रूस से लगभग 35 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदेगा। इस डील में भारत को कच्चा तेल देने में शिपिंग और इंश्योरेंस की जिम्मेदारी रूस की होगी। बता दें कि रूस से कच्चा तेल खरीदने में भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए यह एक बड़ी अड़चन रही है।

दरअसल, अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बीच रूस ने मित्र देशों से अपील की है कि वे उसके साथ निवेश और कारोबार जारी रखें। हालाँकि, भारत यूक्रेन पर रूसी हमले का समर्थन नहीं करता है, लेकिन अपने पुराने संबंधों के कारण वह यूएन में रूस के खिलाफ वोटिंग में गैर-हाजिर रहा।

‘नरसंहार को छिपाया गया’: बोले के के मेनन, ₹350 करोड़ बजट वाली फिल्म से ज्यादा कमा रही है The Kashmir Files, अमित शाह से मिली टीम

बॉक्स ऑफिस पर ‘द कश्मीर फाइल्स’ शानदार कमाई कर रही है। सामान्यतः वीकेंड्स के बाद बड़ी से बड़ी फ़िल्में भी बॉक्स ऑफिस पर कमजोर पड़ जाती हैं, लेकिन ‘The Kashmir Files’ ने पाँचवें दिन मंगलवार (14 मार्च, 2022) को भी भारत में 18 करोड़ रुपए की नेट कमाई की। इस तरह फिल्म का डोमेस्टिक नेट कलेक्शंस 60 करोड़ रुपए के पार हो गया है। वहीं अभिनेता के के मेनन ने भी फिल्म की तारीफ़ की है।

‘शौर्य (2008)’ में ‘ब्रिगेडियर रूद्र प्रताप सिंह’ का किरदार निभा कर शोहरत बटोरने वाले के के मेनन ने कहा, “मैंने अभी-अभी ‘द कश्मीर फाइल्स’ देखी। ये (घटनाएँ) दिल दहला देने वाला, मार्मिक और असुविधाजनक है! एक नरसंहार, जिसे अब तक छिपा कर रखा गया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री को शुभकामनाएँ। हार्ड-हिटिंग किरदारों के लिए अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार और चिन्मय मंडलेकर को बधाई।”

साथ ही उन्होंने ‘Right To Justice (न्याय का अधिकार)’ का हैसटैग भी लगाया। निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने उन्हें धन्यवाद देते हुए सर्वश्रेष्ठ अभिनेताओं में से एक करार दिया। उन्होंने याद किया कि ‘चॉकलेट (1999)’ नाम की एक टेलीफिल्म से मैंने और विवेक अग्निहोत्री ने साथ ही अपना करियर शुरू किया था। दुनिया भर में 5 दिनों में ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने 67 करोड़ रुपए कमाए हैं। 350 करोड़ रुपए में बनी प्रभास की हाई बजट फिल्म ‘राधे श्याम’ भी अब इससे कम कमा रही है।

फिल्म ‘राधे श्याम’ ने पाँचवें दिन महज 10 करोड़ रुपए के आसपास की कमाई की, जिससे आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ‘द कश्मीर फाइल्स’ को कैसी सफलता मिली है। फिल्म की टीम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की है। ‘तानाजी (2020)’ ने अपने पाँचवें दिन 15.28 करोड़ रुपए तो ‘उरी; द सर्जिकल स्ट्राइक (2019)’ ने 9.57 करोड़ रुपए कमाए थे। हालिया फ़िल्में अक्षय कुमार की ‘सूर्यवंशी’, आलिया भट्ट की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और रणवीर सिंह की ’83’ का कलेक्शन भी इस दिन कम ही रहा था।

अमित शाह से मुलाकात के बाद विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “उत्साहवर्धन के लिए केंद्रीय गृह मंत्री जी का धन्यवाद। कश्मीरी नागरिकों और सुरक्षा बलों के मानवाधिकार के लिए आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास सराहना योग्य हैं। एक शांतिपूर्ण और समृद्ध कश्मीर के लिए आपकी दूरदृष्टि मानवता और भाईचारा को मजबूत करेगी। अनुच्छेद-370 को निरस्त करने जैसे मजबूत निर्णय के बाद अब उन्होंने दिलों को जोड़ना शुरू किया है। मुझे कोई शक नहीं कि कश्मीर मानवता और एकत्व का एक उदाहरण बन कर उभरेगा, जिसका दुनिया अनुसरण करेगी।”

मनमोहन सिंह थे PM तो टॉप पर थी नक्सलियों की हिंसा, मोदी राज में 77% की कमी: संसद में बताया प्रभावित इलाकों में विकास को कैसे दी रफ्तार

वर्ष 2021 में देश में नक्सली हिंसा की 509 घटना सामने आई। इन हिंसाओं में 147 नागरिकों और सुरक्षा बलों के जवानों की मृत्यु हुई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में मंगलवार (15 मार्च 2022) को एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2009 में नक्सलियों की हिंसा अपने शीर्ष स्तर पर थी। उस साल ऐसी 2,258 घटनाएँ हुई थीं। इसके मुकाबले 2021 में इन घटनाओं में 77 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।

उल्लेखनीय है कि जिस समय नक्सली हिंसा अपने शीर्ष पर थी उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार चल रही थी। 2010 के 1005 नागरिकों और जवानों की मौत ऐसी घटनाओं में हुई थी। मंत्री ने बताया इन आँकडों में कमी राष्ट्रीय नीतियों और राज्यों के प्रयासों से आया है। नीतियों के सफल कार्यान्वयन के कारण इस तरह की हिंसा में लगातार गिरावट आई है।

गृह राज्य मंत्री ने बताया कि जिन जिलों को वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित माना जाता है वहाँ सुरक्षा संबंधी व्यय जिले की पिछले चार वर्षों में दो बार समीक्षा की गई है। राय ने लिखित जवाब में बताया है, “एलडब्ल्यूई हिंसा की रिपोर्ट करने वाले जिले भी 96 (2010) से घटकर 46 (2021) हो गए हैं।”

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नक्सल हिंसा से प्रभावित राज्यों में विकास को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि ऐसे इलाकों के लिए केंद्र सरकार की तरफ से कई फ्लैगशिप स्कीम चलाई जा रही हैं। इन क्षेत्रों सड़कों के विस्तार, कम्युनिकेशन में सुधर, कौशल विकास और वित्तीय समावेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। केंद्र की विशेष सहायता योजना के तहत बीते 3 साल में राज्यों को 2423.24 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। इसी दौरान 7815 कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में 480 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं। पुनर्वास पैकेज में अन्य बातों के साथ-साथ हाई रैंक वाले उग्रवादी कैडरों के सरेंडर करने पर 5 लाख रुपए और अन्य के लिए 2.5 लाख रुपए का तत्काल अनुदान शामिल है।

12-14 साल के बच्चों के लिए कोरोना का टीकाकरण शुरू: PM मोदी ने कहा- यह विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान, जताई खुशी

कोरोना महामारी (Corona) के खिलाफ जंग के अगले चरण की शुरुआत बुधवार (16 मार्च 2022) से हो गई। आज से 12 से 14 साल के बच्चों को भी टीका लगना शुरू हो गया है। इस पर खुशी जाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज का दिन काफी अहम है। अब 12 से 14 साल के बच्चों को वैक्सीन लगाई जा रही है। 60 साल से ज्यादा उम्र के सभी लोगों को भी तीसरी डोज लगाई जाएगी। मैं इन आयु वर्ग के लोगों से वैक्सीन लेने की अपील करता हूँ।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का वैक्सीनेशन ड्राइव दुनिया में सबसे बड़ा है। देश के लोगों को सुरक्षित करने और महामारी से लड़ने के लिए 2020 की शुरुआत में वैक्सीन बनाने का काम शुरू कर दिया गया था। पीएम मोदी ने आगे कहा, “जनवरी 2021 में हमने डॉक्टरों, हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए वैक्सीनेशन अभियान की शुरुआत की। इसका मकसद था कि फ्रंटलाइन वर्कर्स को जल्द से जल्द कोरोना से सुरक्षित किया जाए।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कई ट्वीट कर वैक्सीनेशन को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मार्च 2021 में 60 साल की उम्र से अधिक के लोगों के लिए वैक्सीनेशन अभियान शुरू हुआ। इसमें वो लोग भी शामिल थे, जिनकी उम्र 45 साल से अधिक थी और वो अन्य बीमारियों से पीड़ित थे। इसके बाद 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को वैक्सीन दी गई। यह गर्व की बात है कि लोगों के लिए वैक्सीन मुफ्त दी गई। आज भारत ने 180 करोड़ डोज का आँकड़ा पार कर लिया है, जिसमें 9 करोड़ डोज 15 से 17 साल की उम्र के लोगों को लगाई गई। वहीं, 2 करोड़ से ज्यादा तीसरी डोज लगाई गई है।

पीएम ने राज्यों की भी सराहना की

पीएम मोदी ने आगे कहा कि कई देशों में जहाँ वैक्सीन को लेकर झिझक देखी गई, वहीं भारत में लोगों ने खुद वैक्सीन तो लगवाई ही दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने राज्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा, “वैक्सीनेशन ड्राइव में राज्यों के सहयोग के लिए उनकी सराहना करता हूँ। खासकर पहाड़ी राज्यों में जहाँ पर्यटन सबसे महत्वपूर्ण है, उन्होंने अपना वैक्सीनेशन लगभग पूरा कर लिया है।”

पीएम ने बताया कि भारत ने वैक्सीन मैत्री प्रोग्राम के तहत दुनिया के कई देशों को भी वैक्सीन देने का काम किया है। उन्होंने कहा, “आज भारत के पास कई ‘मेड इन इंडिया’ (Made in India) वैक्सीन मौजूद हैं। साथ ही हमने कई और वैक्सीन को भी मंजूरी दी है। इस महामारी से लड़ने के लिए हम काफी बेहतर स्थिति में हैं, लेकिन इसके साथ ही हमें कोरोना संबंधी सभी नियमों का पालन करना होगा।”

कैसे करें रजिस्ट्रेशन?

बच्चों के वैक्सिनेशन के लिए कोविन ऐप या फिर www.cowin.gov.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसकी दूसरी डोज 28 दिन बाद दी जाएगी। एक मोबाइल नंबर पर चार बच्चों को टीका लगवाया जा सकता है। इसके अलावा ऑन स्पॉट रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा है। केंद्र सरकार ने 12 से 14 साल के बच्चों के कोरोना टीकाकरण को लेकर गाइडलाइन जारी की है। केंद्र ने कहा है कि इस ग्रुप के बच्चों के केवल कोरबेवैक्स ही दी जाएगी। 15 से 18 साल के किशोरों को टीका दिया जा चुका है। 

‘बाबरी के लिए मणिशंकर अय्यर ने फेंक दी थी जनेऊ’: कश्मीरी पंडित महिला ने बताया ‘कॉलेज’ में इकोसिस्टम कैसे करता था ब्रेनवॉश

द कश्मीर फाइल्स में हिंदुओं के साथ हुई बर्बरता की जो तस्वीर दिखाई गई उसे प्रोपेगेंडा साबित करने में जुटे वामपंथी इकोसिस्टम को पीएम मोदी द्वारा लताड़े जाने के बाद अब कश्मीरी पंडित व भारतीय स्तंभकार सुनंदा वशिष्ठ ने भी इस इकोसिस्टम को लेकर अपना गुस्सा उतारा है। उन्होंने कहा कि 1990 में जो कुछ भी कश्मीर में हुआ वो खुद उस दर्दनाक मंजर की चश्मदीद हैं। वह बताती हैं कि 1990 तक वह वहाँ अपने परिजनों के साथ रहती थीं। उन्होंने उस दौरान अपनी स्कूल बस को किडनैप होते भी देखा, 19 जनवरी 1990, 1 मार्च 1990 को जो हुआ वो भी देखा और ये भी देखा कि पूरा इकोसिस्टम कैसे सबके गुनाह को धो-पोंछने के लिए काम करता है।

उन्होंने बताया कि वे लोग अगस्त 1990 में कश्मीर से दिल्ली आए क्योंकि उनके पास कश्मीर से बाहर कोई और कमाई का जरिया ही नहीं था। वह बताती हैं, “दिल्ली आकर कुछ साल बाद मैंने सेंट स्टीफन कॉलेज में दाखिला लिया। वहाँ मैंने देखा कि हर कोई 1992 में हुए बाबरी मस्जिद विवाद पर बातें कर रहा था। वहाँ सब राजनीति से भरा माहौल था। उस माहौल में जब मैंने हमारे बारे में बात करनी चाही तो मुझे नीचे कर दिया गया और कभी मुझे ये अवसर नहीं मिला कि मैं अपनी बात रख सकूँ। ये पहली दफा है कि मैं टाइम्स नाऊ पर ये बातें बता रही हूँ। ये सब घाव हैं।”

मणिशंकर अय्यर ने उतार फेंकी जनेऊ

वह बोलीं, “कॉलेज में मणिशंकर अय्यर, सईद नकवी जैसे लोगों को बुलाया जाता था और ये लोग बातें क्या करते थे…मेरे पूर्वज भट्ट मजार पर उनके जनेऊ के लिए मार दिए गए। लेकिन मणिशंकर अय्यर मेरे कॉलेज आए। मैं पहली पंक्ति में बैठी थी। अय्यर ने कहा कि चूँकि 6 दिसंबर 1992 हुआ इसलिए मैंने अपना जनेऊ निकाल कर फेंक दिया। मैं इसे स्वीकारना नहीं चाहता। मैं हिंदू नहीं हूँ..।” सुनंदा इस घटना का जिक्र करते हुए कहती हैं, “मैं पहली पंक्ति में बैठी थी और कह रही थी सर इस देश में वो लोग भी हैं जो इसके लिए मर रहे हैं, इसकी वजह से मारे जा रहे हैं…क्या आपको ये नहीं दिखता। इसके बाद मुझे बाहर कर दिया गया।”

सईद नकवी ने हिंदू नरसंहार मानने से किया इनकार

वशिष्ठ ने सईद नकवी को लेकर कहा, “नकवी कॉलेज आए और बोले कि भारत 6 दिसंबर को भारत खत्म हो गया। मैंने पूछा कि 19 जनवरी 1990 में क्या हुआ था। तब मुझे कहा गया कि नहीं वो सच नहीं है, ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था।”

सुनंदा वशिष्ठ का दर्द

कश्मीरी मूल की सुनंदा हैरानी जताते हुए कहती हैं कि इकोसिस्टम के लोग उनके सामने ही ये सारी बातें करते थे। वह कहती हैं, “मैं उस समय 18 साल की लड़की थी। मेरे पास कोई प्लेटफॉर्म नहीं था। मेरे पास एजेंसियाँ नहीं थीं। लेकिन मैंने इस इकोसिस्टम को काम करते हुए अपनी आखों के आगे देखा है। मैंने ये भी देखा है कि कैसे सेकुलरिज्म की आग में हमें जलाया गया।” वह एंकर से सवाल करती हैं, “आपको क्या लगता है कि क्यों कोई जाँच नहीं हुई? क्यों कोई निलंबन नहीं हुआ?… ये सिर्फ इसलिए नहीं था क्योंकि किसी पुलिसवाले ने जाँच से मना कर दिया हो या वो आतंकियों से डर गया….हालाँकि सच ये भी है कहीं न कहीं, लेकिन ये केस न होना, कार्रवाई न होना, जाँच न होना… ये सब जो किया गया वो उच्च कार्यालयों द्वारा किया गया था।”

‘हिंदू से ही करो शादी, वरना मेरे जैसा हाल होगा’: एजाज ने अपूर्वा के मुँह पर 23 बार मारी कुल्हाड़ी, जान बची तो बताया- यह लव जिहाद था

कर्नाटक के गडग जिले से पिछले दिनों आए लव जिहाद के मामले में पीड़िता अपूर्वा पुराणिक की जान बच गई है। एजाज द्वारा 10 मार्च को कुल्हाड़ी से उन पर 23 बार हमला हुए थे। लेकिन GIMS जिला अस्पताल में सही समय पर सही उपचार मिलने के बाद वह अब ठीक हो रही हैं। उनकी सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आई है। वीडियो में वह अपना पक्ष बता रही हैं। पहले जहाँ कहा जा रहा था कि ये शादी लव मैरिज थी वहीं अपूर्वा ने होश में आने के बाद बताया कि उनका पहले रेप हुआ था और बाद में उन्हें ब्लैकमेल करके उनसे शादी की गई। इस वीडियो को पत्रकार चीरू भट ने अपने ट्विटर हैंडल से साझा किया है।

रेप करके बनाई वीडियो फिर निकाह के लिए अपूर्वा से बनाया आरफा बानो

सामने आई जानकारी बताती है कि 26 साल की एमबीए ग्रेजुएट अपूर्वा ब्राह्मण घराने से ताल्लुक रखती हैं। वहीं एजाज 30 साल का मुस्लिम ऑटो चालक है। कॉलेज आते-जाते समय में दोनों की मुलाकात हुई और एजाज ने उन्हें कहा कि वो पढ़ाई करता है और पार्ट टाइम ऑटो चलाता है। इस तरह एजाज ने उन्हें अपने जाल में फँसाया। फिर एक दिन उनका पहले रेप किया, घटना की वीडियो रिकॉर्ड की और बाद में ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी। 

अपूर्वा के अनुसार, एजाज उन्हें और उनकी माँ को धमकाता था। लेकिन साल 2018 में जब वह शादी के लिए मान गईं तो उन्हें धर्म परिवर्तन करने को कहा गया और आरफा बानो बना दिया गया। वह कहती हैं, “मुझसे मेरी मर्जी के बगैर हर दस्तावेज पर हस्ताक्षर लिए गए। मैं कहना चाहती हूँ कि ये और कुछ नहीं बस लव जिहाद था। उसने निकाह करके भी मेरा ख्याल नहीं रखा। मेरा ब्रेनवॉश ऐसे किया गया कि मैं अपने माता-पिता की भी नहीं सुनती थी।”

पीड़िता कहती है, “शादी के बाद उसने मुझसे न केवल मांसाहारी खाना बनाने को कहा बल्कि खाने को भी कहा। बच्चा होने के बाद कुत्तों की तरह उससे बर्ताव किया। बच्चे को जबरन मांसाहारी खिलाया। अपने निकाह के बाद ही मुझे ये भी पता चला कि ये आदमी तो 14 साल से शादीशुदा है। इसके बाद मैं अपने घर लौट आईं। लेकिन एजाज अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, उसने उर्दू में गंदे अश्लील संदेश भेजने शुरू किए। मैंने इग्नोर किया क्योंकि हमारा तलाक कोर्ट में था। लेकिन कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले उसने मुझपर ऐसा हमला किया कि मेरा 2 साल का बच्चा भी मुझे नहीं पहचान रहा।”

‘हिंदू धर्म में ही करो शादी’

अपूर्वा हर हिंदू लड़की से अपील करती हैं कि वो हिंदू लड़के से ही शादी करें। वह कहती हैं, “कृपया हिंदू धर्म में शादी करें न कि किसी बाहरी से। क्योंकि उनके संस्कार और हमारे संस्कार अलग हैं। ये बिलकुल नहीं मिलते। वहाँ एडजस्ट करना मुश्किल हो जाता है। अगर हम अपने संस्कृति और सभ्यता को सुरक्षित रखना चाहते हैं तो अपने समुदाय में ही शादी करनी चाहिए।”

वह बोलती हैं, “मैं अपूर्वा हूँ और उम्मीद करती हूँ कि जिन चीजों से मैं गुजरी उनसे कोई और लड़की न गुजरे। अगर आप कोई बदलाव देखती हैं तो अपने माता-पिता को बताएँ। उनसे बात करें। ऐसा मत सोचें कि वो तुमसे कॉलेज छुड़वा देंगे या कुछ और…। वरना तुम्हें मेरे जैसी चीजें झेलनी पड़ेंगी। अपने माँ-बाप के सिवा किसी पर यकीन मत पर करो। जान की सुरक्षा पहली प्राथमिकता है”

23 बार एजाज ने अपूर्वा को मारी कुल्हाड़ी

गौरतलब है कि एजाज ने अपूर्वा पर हमला 10 मार्च 2022 को तब किया था जब वह अपने पड़ोसी के साथ स्कूटी चलाना सीख रही थीं। एजाज ने उन्हें 23 बार कुल्हाड़ी मारी। वह कुछ टाइम वहीं जमीन पर खून से लथपथ पड़ी रहीं फिर उनको अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालात बेहद गंभीर थी। सारे कपड़े खून में सन गए थे। वहीं हमला करके एजाज फरार था लेकिन पुलिस ने उसे 11 मार्च को गिरफ्तार कर लिया था।

जिस उडुपी से निकला था हिजाब का जिन्न, वहाँ स्कूल-कॉलेज खुले: हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी Video में दिख रहीं बुर्के वाली छात्राएँ

कर्नाटक के उडुपी में बुधवार (16 मार्च 2022) को फिर से स्कूल-कॉलेज खुल गए हैं। उडुपी के ही सरकारी पीयू कॉलेज से सबसे पहले हिजाब का विवाद उठा था। मंगलवार को कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा था कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों में ड्रेस कोड का पालन करने को कहा था। इस फैसले को हिजाब समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात की है।

इस बीच समाचार एजेंसी एएनआई ने उडुपी के स्कूल-कॉलेज जाती छात्राओं की तस्वीरें और वीडियो जारी किए हैं। पीयू कॉलेज के दृश्य भी इनमें शामिल हैं। वीडियो में आप स्पष्ट तौर पर कुछ छात्राओं को बुर्के में संस्थान में प्रवेश करते देख सकते हैं। उडुपी के उपायुक्त एमके राव ने भी स्कूलों और कॉलेज का दौरा किया है। उन्होंने बताया है कि कक्षाएँ सामान्य रूप से चल रही हैं। छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और अन्य लोगों से जिले में शांति और सौहार्द्र बनाए रखने में मदद का आग्रह किया है। हाई कोर्ट का फैसला आने से पहले राज्य में कई जगहों 21 मार्च तक के लिए धारा 144 लागू की गई थी। उडुपी जिले में भी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि हिजाब पहनना इस्लामी प्रथा या आस्था का जरूरी हिस्सा नहीं है। चीफ जस्टिस ऋतु राज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित और जस्टिस जेएम खाजी की बेंच ने कहा था, “स्कूल यूनिफॉर्म अधिकारों का उल्लंघन नहीं है। यह संवैधानिक रूप से स्वीकार्य है जिस पर छात्र आपत्ति नहीं कर सकते हैं।” साथ ही कहा था कि इस संबंध में सरकार ने 5 फरवरी 2022 को जो आदेश जारी किया था उसका उसे अधिकार है और इसे अवैध ठहराने का कोई मामला नहीं बनता है। इस आदेश में राज्य सरकार ने उन कपड़ों को पहनने पर रोक लगा दी थी, जिससे स्कूल और कॉलेज में समानता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होती है।

क्या था पूरा मामला

याद दिला दें कि पीयू कॉलेज का यह मामला सबसे पहले 2 जनवरी 2022 को सामने आया था, जब 6 मुस्लिम छात्राएँ क्लासरूम के भीतर हिजाब पहनने पर अड़ गई थीं। कॉलेज के प्रिंसिपल रूद्र गौड़ा ने कहा था कि छात्राएँ कॉलेज परिसर में हिजाब पहन सकती हैं, लेकिन क्लासरूम में इसकी इजाजत नहीं है। प्रिंसिपल के मुताबिक, कक्षा में एकरूपता बनाए रखने के लिए ऐसा जरूरी है। इसके बाद कर्नाटक सरकार ने भी इस संबंध में 5 फरवरी को आदेश दिए थे। सरकार के आदेश में छात्र-छात्राओं से ड्रेस कोड का पालन करने को कहा गया था।

‘मुझे गोली मत मारो’: योगी की वापसी के साथ ही अपराधियों में भी लौटा खौफ, तख्ती ले सरेंडर करने पुलिस स्टेशन पहुँचा बदमाश

हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान उत्तर प्रदेश के हर इलाके में लोग योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर हुए सुधार की तारीफ करते नजर आए थे। अब सत्ता में योगी सरकार की वापसी के साथ ही अपराधियों के बीच फिर से वही खौफ दिख रहा है। अपराधी खुद थाने पहुँच सरेंडर कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गोंडा में मंगलवार (15 मार्च 2022) को देखने को मिला।

गोंडा के थाना छपिया में 25 हजार का एक इनामी बदमाश सरेंडर करने पहुँचा। उसके हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा था- मैं आत्मसमर्पण कर रहा हूँ, मुझे गोली मत मारो। इस अपराधी की पहचान गौतम सिंह के रूप में हुई है। वह गल्ला व्यवसायी अपहरण कांड का आरोपित है। पुलिस ने बताया कि उसने अब कोई अपराध करने से भी तौबा किया है।

अपने भाई के साथ सरेंडर करने पहुँचे गौतम सिंह ने कहा, “सर मुझे माफ कर दीजिए, मैं बहुत डर गया हूँ। कप्तान साहब का सुनकर कि गोली मार देंगे, मैं बहुत डर गया हूँ। सर मुझे माफ कर दीजिए। आत्म समर्पण कर रहा हूँ मैं। मुझे गोली मत मारिए सर। मैं तांबेपुर का रहने वाला हूँ। मेरा नाम गौतम सिंह है और पिता का नाम राजेश्वरी सिंह है। मैंने गल्ला व्यापारी को उठाया था। बभनान से उसके दुकान से मेरे साथ राजकुमार, शिवम, जुबेर थे। कप्तान साहब गोली मार देते हैं इस बात को सुनकर मैं डर गया।”

जानकारी के मुताबिक छपिया थानाक्षेत्र के करनूपुर गाँव से शील प्रसाद नाम के गल्ला व्यवसायी को 6 मार्च को कार सवार चार बदमाशों ने अगवा कर लिया था। शिकायत पर पुलिस ने  मुकदमा दायर किया था। चार बदमाशों में से सबसे पहले आठ मार्च को ही आरोपित रवि प्रकाश उर्फ रिंकू को गिरफ्तार कर लिया गया था। 

इसके बाद छपिया पुलिस व एसओजी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 13 मार्च को जुबेर व राजकुमार यादव गिरफ्तार हुए थे। मुठभेड़ के दौरान एक आरोपित के पैरों पर गोली भी लगी थी। एसपी संतोष कुमार मिश्रा के अनुसार आरोपित मुठभेड़ के डर से मंगलवार को आत्मसमर्पण करने के लिए खुद ही थाने पहुँच गया और उसकी गिरफ्तार कर लिया गया।

गौरतलब है कि मंगलवार को ही मेरठ पुलिस ने पुलिस कस्टडी से फरार ढाई लाख के इनामी बदन सिंह बद्दो और उसके सहयोगी के अवैध मार्केट और फैक्ट्री पर कार्रवाई करते हुए जमीन को कब्जा मुक्त कराया। वहीं कानपुर में सपा नेता के अवैध कब्जे पर भी बुलडोजर चला था।