Home Blog Page 2896

ममता बनर्जी के MLA ने बिहार के लोगों को बताया ‘बीमारी’, कहा- बंगाल को मुक्त करिए: Video वायरल

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक विधायक मनोरंजन व्यापारी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में मनोरंजन मंच पर चढ़कर बिहारियों को गाली दे रहे हैं। उन्हें कहते सुना जा सकता है- एक बीमारी सौ बीमारी।

इस वीडियो को भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने शेयर किया है। उन्होंने वीडियो को साझा करते हुए और इसमें दिए बयान को हाईलाइट करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा से सवाल किया। उन्होंने लिखा, “बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा से मेरा सवाल है वे अपने नए राजनैतिक सहकर्मी के इन वाहियात बयानों पर क्या सफाई देंगे जब वह आसनसोल में चुनावी प्रचार के लिए जाएँगे?”

उन्होंने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए इस वीडियो के साथ लिखा, “पहले इनकी ममता बनर्जी बिहारी और यूपी वासियों को बाहरी दिखाती हैं और अब ये बंगाल को बिहारियों से मुक्त चाहते हैं।”

बता दें कि ट्विटर पर साझा की गई इस वीडियो में मनोरंजन को बिहारियों के लिए मंच से गुस्से में कहते सुना जा सकता है, “ये पूछा जाता है कि बंगाल में का बा, अबे, अगर बंगाल में कुछ ना बा तो जाओ बिहार। तुमलोगों से किसने कहा यहाँ बसने को। अगर बिहार में सब बा तो जा $@@%@ बिहार। अगर आपमें बंगाली खून बहता है तो आपको भी जोर जोर से नारा लगाना होगा कि एक बिहारी-सौ बीमारी। यहाँ बीमारी नहीं चाहिए।”

मंच से बिहारियों को निशाना बनाने वाले टीएमसी विधायक ने अपनी बात को जय बांग्ला और जय दीदी कहकर खत्म किया। अब उनकी इसी वीडियो को देख कई लोग गुस्सा उतार रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, मनोरंजन व्यापारी ने ये भड़काऊ बयानबाजी कोलकाता के बुक फेयर में की।

‘स्वामी प्रसाद मौर्य को सपा में भेजना BJP की साजिश, ओवर कॉन्फिडेंस से हरा दिया चुनाव’: समाजवादी गठबंधन में दरार

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ऐन पहने भाजपा छोड़ कर समाजवादी पार्टी में गए स्वामी प्रसाद मौर्य को अब उनके ही गठबंधन साथी निशाना बना रहे हैं। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाले गठबंधन ‘ महान दल’ के मुखिया केशव देव मौर्य ने चुनाव में हार के ठीकरा स्वामी प्रसाद मौर्य पर फोड़ा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से ऐन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट छोड़ कर स्वामी प्रसाद मौर्य का सपा में आना भाजपा की साजिश हो सकती है। चुनाव हार गए स्वामी प्रसाद मौर्य को अपना बँगला भी खाली करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य अति-आत्मविश्वास का शिकार थे और उन्होंने दूसरे नेताओं को भी अति-आत्मविश्वास में डाल दिया। केशव देव मौर्य ने अपनी पार्टी को समाजवादी पार्टी के गठबंधन में उचित सम्मान न दिए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि न सिर्फ उनके कैडर का कम इस्तेमाल किया गया, बल्कि उनकी पार्टी को चुनाव लड़ने के लिए महज 2 सीटें दी गईं। उन्होंने कहा कि उनके कैडर के वोट पर सपा का फोकस कम था।

उन्होंने कहा, “सपा के प्रत्याशी ओवर कॉन्फिडेंट हो गए थे और इसलिए उन्होंने ज्यादा मेहनत नहीं की। सपा के सभी प्रत्याशियों में ओवरकॉन्फिडेंस था। इसके लिए स्वामी प्रसाद मौर्य दोषी हैं। वो खुद भी ओवरकॉन्फिडेंस में थे और सभी को ओवरकॉन्फिडेंस में ला दिया। जब तक स्वामी नहीं आए थे ‘महान दल’ को तव्वजो दी जा रही, लेकिन जब स्वामी प्रसाद मौर्य आए तो सपा नेता ओवर कॉन्फिडेंट हो गए और महान दल को दरकिनार कर दिया गया।”

बता दें कि हाल ही में जब एक रिपोर्टर ने स्वामी प्रसाद मौर्य से ‘सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP)’ के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर का जिक्र कर पूछा कि वह पूर्वांचल में रहेंगे क्या आप भी वहाँ रहेंगे? स्वामी प्रसाद मौर्य ने इस सवाल पर भड़कते हुए रिपोर्टर के माइक पर धक्का दे दिया। स्वामी प्रसाद मौर्य ने माइक को झिड़कते हुए कहा कि मुझे बस इतना ही कहना था। अटकलें लग रही हैं कि करहल से स्वामी प्रसाद मौर्य के लिए अखिलेश यादव अपनी सीट खाली करेंगे, क्योंकि वो सांसद भी हैं।

‘जय श्रीराम’ पर मिशनरी स्कूल ने हिंदू छात्रों को दी सजा, धमकाया भी: हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद माँगी माफी

गुजरात के एक क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में दो हिंदू छात्रों को ‘जय श्रीराम’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करने पर सजा दी गई। यह घटना पिछले हफ्ते वापी जिले के सेंट मैरी स्कूल में हुई। हालाँकि हिंदूवादी संगठनों के प्रदर्शन के बाद स्कूल ने माफी माँग ली है।

देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 9 के दो छात्रों ने स्कूल के कॉरिडोर में जय श्रीराम के नारे लगाए। इसके बाद उन्हें स्कूल प्रबंधन ने दंडित किया गया। साथ ही लिखित माफी माँगने को मजबूर करते हुए निलंबित करने की धमकी दी। हालाँकि, दो दिन बाद स्कूल ने सजा वापस ले ली और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने पर माफी माँगी। स्कूल ने एक बयान में कहा है, “11-03-2022 को स्कूल के कॉरिडोर में ‘जय श्री राम’ के नारे लगाने की घटना के मामले में अनुशासन प्रभारी सर कल्पेश भगत ने लिखित में माफी पत्र लिया था।”

सेंट मैरी स्कूल प्रशासन द्वारा जारी बयान

सेंट मैरी स्कूल के प्रशासन से परेशान दोनों नाबालिग बच्चों के माता-पिता विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की वापी इकाई के उपाध्यक्ष नरेंद्र पायक के पास पहुँचे। विहिप व बजरंग दल के सदस्य कॉन्वेंट स्कूल पहुँचे और स्कूल के संचालन का विरोध किया। इसके बाद, सेंट मैरी के प्रिंसिपल सेवियो कैथिनो और अनुशासन प्रमुख कल्पेश भगत ने दोनों हिंदू बच्चों के माता-पिता से माफी माँगी।

स्कूल ने माफी माँगते हुए एक बयान में कहा है, “काफी सोच-विचार के बाद, हमने (प्रबंधन) महसूस किया है कि उपरोक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई किसी अन्य तरीके से भी की जा सकती थी। अगर हमने अपनी कार्रवाई से किसी की भी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाई है, तो हम खुले दिल से माफी माँगते हैं।” विहिप नेता सुशील यादव ने बताया कि ईसाई मिशनरी स्कूल हिंदू छात्रों को हाथ में कलावा बाँधने को लेकर भी अक्सर परेशान करते हैं।

बच्ची के रोने की आवाज सुन घर से बाहर निकले लालाजी, गोलियों से भून दिया: कश्मीर में इस्लामी आतंकियों ने ऐसे कुचली थी हिंदुओं की आवाज

साल 1990 मे कश्मीर घाटी में हिंदुओं की निर्मम हत्याओं की अंतहीन कहानियाँ आपको द कश्मीर फाइल्स के रिलीज के बाद से पढ़ने को मिल रही होंगी। इस बीच आपने शायद कश्मीरी पंडित टीका लाल टपलू का नाम भी सुना हो। पंडित टीका लाल टपलू की हत्या 1990 में नहीं हुई थी बल्कि वह तो वो पहले शख्स थे जिन्हें इस्लामी आतताइयों ने 1989 में अपना निशाना बनाकर पूरे नरसंहार की शुरुआत की थी।

पेशे से वकील व भाजपा उपाध्यक्ष टीका लाल टपलू की हत्या को 14 सितंबर 1989 को अंजाम दिया गया। वह कश्मीरी पंडितों में सबसे जाना माना चेहरा थे। लोग उन्हें लालाजी यानी बड़ा भाई कहते थे। आतंकी उन्हें मारने के लिए लंबे समय से साजिशें रच रहे थे जिसका टपलू को कहीं न कहीं एहसास था। इसीलिए कट्टरपंथियों से परिवार को बचाने के लिए उन्होंने अपने परिवार को अपने से दूर दिल्ली लाकर छोड़ दिया और वापस अपने लोगों के बीच लौट गए अपने कश्मीर।

8 सितंबर 1989 को वह जब दिल्ली से वापस अपने चिंकराल मोहल्ला स्थित घर पहुँचे तो आतंकियों को उनकी आवाज को दबाने का एक मौका मिल गया, जिसका फायदा उठाते हुए 12 सितंबर 1989 को उनके घर पर उन्हें डराने के लिए हमला किया गया और फिर 14 सिंतबर को उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया। घटना से पहले टीका लाल क्या कर रहे थे, कहाँ थे…ये सब बातें मीडिया में मौजूद हैं।

वह सुबह सामान्य सुबह थी। टीका लाल कट्टरपंथ के मंसूबों से वाकिफ थे और जानते थे कि आतंकी उन पर कभी भी हमला बोल सकते हैं। लेकिन बावजूद इसके वह उस दिन अपने घर से बाहर निकल गए। कारण था घर के बाहर एक बच्ची का तेज-तेज रोना। टपलू जब उसके पास गए तो उसकी माँ से पूछा कि वह क्यों रो रही है। माँ ने बताया कि बच्ची के स्कूल में कोई फंक्शन है और उसके पास पैसा नहीं है, इसलिए वह रो रही है।

टीका लाल टपलू ने बच्ची की माँ की सारी बातें सुनीं और अपनी जेब से 5 रुपए निकालकर जैसे ही उन्होंने बच्ची को पकड़ाए, तभी सामने से आतंकी बंदूक लेकर आए और उन्हें गोलियों से भून दिया। इस हत्या से आतंकियों के दो काम पूरे हुए थे। एक तो उनके रास्ते से टीका लाल हमेशा के लिए हट गए थे और दूसरा निजाम-ए-मुस्तफा का जो संदेश वो कश्मीरी पंडितों तक पहुँचाना चाहते थे वो हर पंडित के घर पहुँच गया था। इस एक हत्या से हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल भेजने से मना कर दिया था और कई दिन घरों में बंद रहे थे। आतंकियों ने नारा दिया था:

यहाँ क्या चलेगा, निजाम ए मुस्तफा
ला शरकिया ला गरबिया, इस्लामिया इस्लामिया;

जलजला आया है कुफ्र के मैदान में 
लो मुजाहिद आ गए हैं मैदान में

उद्धव ठाकरे के मंत्री नवाब मलिक को राहत देने से हाई कोर्ट का इनकार, ED ने दाऊद इब्राहिम से जुड़े मामले में किया था गिरफ्तार

महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार में मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक (Nawab Malik) को अंतरिम राहत देने से बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकार कर दिया है। मलिक की अंतरिम याचिका खारिज करते हुए जस्टिस पीबी वराले और एसएम मोदक की बेंच ने कहा कि कुछ विवादास्पद मुद्दे को उठाया गया है, जिनको लंबी सुनवाई में सुना जा सकता है। यह अंतरिम याचिका में नहीं हो सकता। लिहाजा याचिका खारिज की जाती है।

मलिक ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा अपने खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अपनी याचिका में कहा था कि उनकी गिरफ्तारी अवैध है और उन्हें तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया जाए।

23 फरवरी को ईडी ने किया था गिरफ्तार

23 फरवरी 2022 को एनसीपी नेता को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह आर्थर जेल में बंद हैं। उन पर दाऊद इब्राहिम के करीबी से संपत्ति खरीदने का आरोप हैं। इसके अलावा मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की भी ईडी जाँच कर रही है। ईडी की टीम ने 23 फरवरी की सुबह उनके घर पर छापेमारी की थी और फिर उन्हें अपने साथ ले आई थी। करीब छह घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

ईडी ने कोर्ट में बताया था कि नवाब मलिक ने कथित रूप से मुनिरा प्लंबर से 300 करोड़ रुपए का प्लॉट कुछ लाख रुपए में एक कंपनी के जरिए हड़पा था। इस कंपनी का नाम सॉलिड्स इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड है और कंपनी का मालिक मलिक परिवार है।

ईडी ने आरोप लगाया था कि मलिक यह कंपनी भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर और डी गैंग के अन्य सदस्यों के सहयोग से चलाते हैं। इस संबंध में मुनिरा प्लंबर ने ईडी को दिए बयान में बताया था कि कुर्ला में गोवाला कंपाउंड में उनका 3 एकड़ का प्लॉट था। इस जमीन पर अवैध कब्जे को खाली कराने और विवादों को निपटाने के लिए सलीम पटेल ने उससे 5 लाख रुपए लिए थे, लेकिन उसने यह जमीन थर्ड पार्टी को बेच दी। यही नहीं, 18 जुलाई 2003 को जमीन के मालिकाना हक ट्रांसफर करने से संबंधित कागज पर ही हस्ताक्षर नहीं किया था। उन्हें इस बात की भनक नहीं थी कि सलीम पटेल ने यह जमीन किसी दूसरे को बेच दी है।

वहीं, इस जमीन से जुड़े कागजातों को खँगालने के बाद ईडी को पता चला कि इसके पीछे सरदार शाहवली खान है जो 1993 के मुंबई बम धमाके का आरोपित है। वह टाडा और मकोका के तहत औरंगाबाद की जेल में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा है। शाहवली खान ने ईडी को बताया था कि सलीम पटेल भगोड़े डॉन दाउद इब्राहिम की बहन हसीना पारकर का करीबी था। हसीना के निर्देश पर ही सलीम ने मुनिरा की जमीन के बारे में सभी फैसले लिए थे।

‘मुस्लिम नहीं हो तो क्या हुआ, नमाज तो पढ़नी चाहिए’: पल्लवी जोशी ने बताया वो अनुभव जो कश्मीर में शिकारा पर हुआ था

विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ सिनेमाघरों में धमाल मचा रही है और कई भाजपा शासित राज्यों में इसे टैक्स फ्री भी घोषित किया गया है। इस फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री हैं और उनकी पत्नी पल्लवी जोशी ने इसमें राधिका मेनन नाम की एक वामपंथी प्रोफेसर का किरदार अदा किया है। सोमवार (14 मार्च, 2022) को नई दिल्ली में फिल्म को लेकर आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पल्लवी जोशी ने कश्मीर और नमाज को लेकर एक वाकया साझा किया।

दरअसल, ये 2018 की बात है। तब पल्लवी जोशी ‘भारत की बात’ नाम से एक शो बना रही थीं। इस शो को ‘I Am Buddha’ नाम के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित किया गया था। इसकी शूटिंग के दौरान पल्लवी जोशी कश्मीर भी गई थीं। उन्होंने उसी दौरान का एक वाकया साझा करते हुए बताया कि वहाँ वो लोग एक ‘शिकारा’ (एक प्रकार की लकड़ी की नाव, जिसे डल झील में आपने अक्सर देखी होगी) में शूटिंग कर रहे थे।

पल्लवी जोशी ने बताया, “मेरे साथ उस दौरान कुछ बच्चे भी थे। उन्हीं में एक छोटी सी बच्ची भी थी, जो काफी प्यारी लग रही थी। वो खूब बातें कर रही थीं। जब मैंने उससे बातें करनी शुरू की तो उसने मुझसे पूछा कि आप कहाँ रहती हो। फिर वो मुझसे पूछने लगी कि आप मुंबई में कहाँ नमाज पढ़ने जाती हो? मैंने कहा कि बेटा, मैं नमाज नहीं पढ़ती हूँ। उसने पूछा क्यों? तो मैंने कहा कि क्योंकि मैं मुस्लिम नहीं हूँ। फिर उसने कहा – तो क्या हुआ, नमाज तो पढ़ना चाहिए न आपको?”

बकौल पल्लवी जोशी, उस समय 4-5 साल की रही उस छोटी सी प्यारी सी बच्ची को भी नहीं पता था कि देश में अन्य समुदायों के लोग भी हो सकते हैं और उनके प्रार्थना करने का ढंग अलग हो सकता है। फिल्म ‘वो छोकरी (1992)’ और ‘द ताशकंद फाइल्स (2019)’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं अभिनेत्री ने बताया कि विविधता भारत की सबसे खूबसूरत चीज है, लेकिन हमने उसे ही निकाल दिया है। उन्होंने कहा कि यही बच्ची जब बड़ी होगी और 18 वर्ष की उम्र में मतदान करेगी तो इसके सामने क्या मुद्दे होंगे और किस आधार पर ये अपने राज्य में सरकार चुनेगी?

पल्लवी जोशी ने कहा, “हमने कभी पिछले 32 वर्षों में कश्मीरी पंडितों के दर्द को नहीं समझा। हमने कभी इनकी सच्चाई को स्वीकारा नहीं। और आज देखिए, हमने उस राज्य को भी क्या बना कर रखा है। मुझे लगता है कि अनुच्छेद-370 हटने के बाद हम सब वहाँ जाकर घर बना सकते हैं। रह सकते हैं। कश्मीरी पंडितों को हम कश्मीरी इसीलिए कहते हैं, क्योंकि वहाँ कोई और जा नहीं सकता था। वो सबसे पहले भारतीय हैं। उस बच्ची के बारे में सोच कर मुझे दुःख हुआ। उस प्यारी सी बच्ची को पता चलना चाहिए कि इस देश की क्या खूबियाँ हैं।”

2 साल मंत्री की चाकरी, पेंशन जीवन भर की: केरल की विजयन सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ा, कहा- आपके राज्य मे बहुत पैसा है

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (14 मार्च, 2022) को केरल की पिनराई विजयन सरकार को फटकार लगाई। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने बताया कि कैसे राज्य 2 साल की सेवा वाले मंत्रियों द्वारा नियुक्त निजी कर्मचारियों के लिए आजीवन पेंशन का भुगतान कर रहा है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) द्वारा थोक खरीदारों से राज्य के स्वामित्व वाली तेल विपणन कंपनियों द्वारा डीजल के लिए लगाए गए मूल्य को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। केरल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील वी गिरि से अदालत ने कहा, “आज हमने इंडियन एक्सप्रेस में पढ़ा है। आप एकमात्र राज्य हैं जहाँ लोगों को 2 साल के लिए नियुक्त किया जाता है और उन्हें आजीवन पेंशन दी जाती है। राज्य के पास बहुत पैसा है, यह अधिकारियों को बताएँ।”

इंडियन एक्सपप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केएसआरटीसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि ने जवाब दिया कि वह शीर्ष अदालत की चिंताओं से सरकार को अवगत कराएँगे। वहीं न्यायमूर्ति नज़ीर और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी सहित दो न्यायाधीशों की पीठ ने याचिकाकर्ता को फ्यूल की कीमत के मुद्दे पर केरल उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता दी।

गौरतलब है कि सोमवार को, द इंडियन एक्सप्रेस ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के साथ 5 मार्च, 2022 को ऑनलाइन आयोजित आइडिया एक्सचेंज इवेंट में हुई बातचीत पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। बातचीत के दौरान, खान से पूछा गया था: “आपने हाल ही में पेंशन पर सवाल उठाया था, जिसके केरल में मंत्रियों के निजी कर्मचारी हकदार हैं। वहीं विपक्ष भी एकजुट होता नजर आ रहा है। यह क्या मामला है?”

इस सवाल के जवाब में राज्यपाल आरिफ मुहम्मद खान ने कहा, “वे बिल्कुल सही हैं कि मेरे पास इसे समाप्त करने की शक्ति नहीं है। यह केवल चुनी हुई सरकार ही निर्णय ले सकती है। जब आप कहते हैं कि सरकार और विपक्ष दोनों ने हाथ मिला लिया है – सरकार की ओर से, मैंने जो कुछ भी कहा है, उसके खिलाफ कोई भी बयान नहीं दे रहा है, और इस मुद्दे पर मेरे खिलाफ बोलने वाले नेता प्रतिपक्ष से कहा गया है यूडीएफ इस मामले में नाक में दम नहीं करेगा।”

“यहाँ, प्रत्येक मंत्री 20 से अधिक लोगों को ‘क्वो टर्मिनस’ के आधार पर नियुक्त करता है, और वे दो साल के बाद पेंशन के हकदार हो जाते हैं। इसलिए लोगों का एक समूह अपने पदों से इस्तीफा दे देता है, दूसरा समूह आता है। एक कार्यकाल में, प्रत्येक मंत्री लगभग 45-50 लोगों को नियुक्त करता है, जो बाद में पार्टी के लिए पूर्णकालिक काम करते हैं। उन्हें सरकार से पेंशन के रूप में वेतन मिलता है। ऐसा देश में कहीं नहीं हो रहा है। इस योजना से हर पार्टी लाभान्वित हो रही है। और मुझे यह बहुत अनुचित लगता है।”

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार , केरल में मंत्रियों के निजी कर्मचारियों के लिए पेंशन 1994 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार द्वारा पूर्वव्यापी प्रभाव से पेश की गई थी। इस प्रथा को बाद में सीपीएम के नेतृत्व वाली एलडीएफ सहित लगातार सरकारों द्वारा अपनाया गया है, जो वर्तमान में भी सत्ता में है।

‘पूरा इकोसिस्टम फिल्म को बदनाम करने में लगा है’: ‘द कश्मीर फाइल्स’ पर बोले PM मोदी, यूपी में टैक्स फ्री, जानिए अब तक की कमाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ की तारीफ़ की है। पीएम मोदी ने भाजपा संसदीय दल की बैठक में कहा कि इन दिनों आपने देखा होगा, ‘The Kashmir Files’ फिल्म की चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग हमेशा ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ के झंडे लेकर घूमते थे, वो पूरी तरह बौखला बौखला गए हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म का तथ्यों के आधार पर, कला के आधार पर, उसकी विवेचन करने की बजाए उसकी बदनामी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पूरा का पूरा इकोसिस्टम कोई सत्य उजागर करने का साहस करे तो उसके साथ ऐसा ही करता है। उन्होंने कहा कि इस सत्य को वो लोग न तो समझने के लिए ही तैयार हैं और न ही वो चाहते हैं कि दुनिया इसे देखे। पीएम मोदी ने कहा कि जिस प्रकार का षड्यंत्र पिछले कुछ दिनों से चल रहा है, ऐसे में विषय है कि सच्चाई को सही स्वरूप में देश के सामने लाना। उन्होंने कहा कि हर विषय के कई पहलू होते हैं और जिसे लगता है कि इसमें सच नहीं दिखाया गया, वो दूसरी फिल्म बनाए।

साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी ने जब मेहनत कर के फिल्म बनाई है और सच्चाई को सामने ला रहा है तो उसे बदनाम करने में पूरी इकोसिस्टम लग गई है। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित इस फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री करने की घोषणा की है। इससे पहले हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और त्रिपुरा में फिल्म को टैक्स फ्री घोषित किया जा चुका है। अन्य राज्यों में भी इसके लिए माँग जारी है।

बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस की बात करें तो ‘द कश्मीर फाइल्स’ ने 4 दिनों में दुनिया भर में 47.85 करोड़ रुपए का कारोबार कर लिया है। भारत में फिल्म की नेट कमाई 42.20 करोड़ रुपए रही है। इसने सोमवार (14 मार्च, 2022) को 15.05 करोड़ रुपए की नेट कमाई की, जो इसके रविवार के कलेक्शन के लगभग बराबर ही है। पिछली बड़ी फिल्मों ‘सूर्यवंशी’, ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ और ’83’ के सोमवार के बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस इससे कम रहे थे।

गावस्कर, सचिन सब रिटायर हुए…: गाँधी-वाड्रा फैमिली से कपिल सिब्बल ने पूछे मुश्किल सवाल, कहा- घर की नहीं, सबकी कॉन्ग्रेस चाहिए

कॉन्ग्रेस पार्टी को पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भी जिम्मेदारी और मंथन के नाम पर पार्टी के अंदर कोई खास परिवर्तन नहीं देखने को मिला। कॉन्ग्रेस से टूटकर अलग हुआ छोटा ग्रुप जी-23 के सदस्य जरूर गुपचुप तरीके से दिल्ली में पार्टी नेता गुलाम नबी आज़ाद के घर मीटिंग करते नजर आए। उन्हीं में से एक कपिल सिब्बल ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बहुत से मुद्दों पर अपने विचार रखें हैं। उनका साफ कहना है कि शीर्ष नेतृत्व सपनों की दुनिया में है। हमें घर की कॉन्ग्रेस नहीं बल्कि सबकी कॉन्ग्रेस चाहिए।

इंडियन एक्सप्रेस से हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “परिणामों ने मुझे कभी आश्चर्यचकित नहीं किया। हम 2014 से नीचे की ओर जा रहे हैं। हमने राज्य दर राज्य खोया है। जहाँ हम सफल हुए वहाँ भी सबको साथ नहीं रख पाए। इस बीच कुछ प्रमुख लोगों का पलायन हुआ है…जिनमें नेतृत्व की क्षमता थी… वे कॉन्ग्रेस से दूर जा रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी नेतृत्व के करीबी लोगों ने पार्टी का साथ छोड़ दिया। मैं आँकड़े देख रहा था कि 2014 से अब तक लगभग 177 सांसद और विधायक और 222 उम्मीदवार कॉन्ग्रेस छोड़ चुके हैं। किसी अन्य राजनीतिक दल में इस तरह का पलायन नहीं दिखा है।”

हार के कारणों पर बात करते हुए कपिल सिब्बल ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “हमें समय-समय पर अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा है। जिन राज्यों में हम प्रासंगिक होने की उम्मीद करते हैं, वहाँ वोटों का प्रतिशत लगभग नगण्य है। उत्तर प्रदेश में हमारे पास 2.33% वोट शेयर है। यह मुझे आश्चर्य नहीं करता। हम मतदाताओं से जुड़ने में असमर्थ हैं। हम सामने से नेतृत्व करने में असमर्थ हैं, लोगों तक पहुँचने में असमर्थ हैं। जैसा कि गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि एक नेता में पहुँच, जवाबदेही और स्वीकार्यता के गुण होने चाहिए। 2014 के बाद से, जवाबदेही का अभाव, घटती स्वीकार्यता और पहुँच बढ़ाने के लिए बहुत कम प्रयास हुए हैं। यही असली समस्या है।”

उन्होंने आगे कहा, “यहाँ तक कि सीडब्ल्यूसी (कॉन्ग्रेस वर्किंग कमेटी) में जो हुआ उसने भी मुझे चौंकाया नहीं। एक पार्टी के लिए आठ साल बाद, 2014 से, यह कहने के लिए कि इस पराजय के कारणों का पता लगाने के लिए हम एक चिंतन शिविर करेंगे, अगर आठ साल तक एक राजनीतिक दल और नेतृत्व को इसके पतन के कारणों के बारे में पता नहीं है; यह जानने के लिए वह चिंतन शिविर का इंतजार कर रहा है, तो सपनों की दुनिया में रह रहा है। अपनी आँखे उस वास्तविकता से बंद कर रहा है जो हमारे सामने है।”

सिब्बल ने अपनी पीड़ा बयान करते हुए कहा, “सीडब्ल्यूसी में हमारी पार्टी के प्रमुख नेता, कुछ अपवादों को छोड़कर, शायद वास्तव में महसूस करते हैं कि गांधी परिवार के बिना, कॉन्ग्रेस का जीवित रहना संभव नहीं है। लेकिन हममें से कुछ लोगों ने नेतृत्व को यह बताने की बहुत कोशिश की कि अब समय आ गया है कि हम अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करें और कॉन्ग्रेस को पुनर्जीवित करें और इसे उसके मूल गौरव तक ले जाएँ। मैं आज इसलिए नहीं बोल रहा हूँ क्योंकि मुझे किसी व्यक्ति से कोई नाराजगी है। इसलिए नहीं कि मैं ए, बी या सी का विरोधी हूँ। मैं इसलिए बोलता हूँ क्योंकि मैं कॉन्ग्रेस समर्थक हूँ। मैं कभी भी किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होऊँगा। मेरा मृत शरीर भी भाजपा में शामिल नहीं होगा। मैं सच्चा कॉन्ग्रेसी बना रहूँगा लेकिन मैं कॉन्ग्रेस का ऐसा पतन नहीं देख सकता।”

कॉन्ग्रेस को CWC से बाहर देखने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा, “सीडब्ल्यूसी कॉन्ग्रेस के अंदर है? सीडब्ल्यूसी के सदस्य शीर्ष नेतृत्व के नामांकित व्यक्ति होते हैं। सीडब्ल्यूसी के बाहर भी एक कॉन्ग्रेस है… यदि आप चाहें तो कृपया उनके विचारों को सुनें। मुझे उम्मीद है कि मैं भी उन्हीं में शामिल हूँ। मैं कॉन्ग्रेस से बाहर नहीं हूँ। मैं कॉन्ग्रेस में हूँ। लेकिन मैं सीडब्ल्यूसी में नहीं हूँ। हमारे जैसे बहुत से नेता जो सीडब्ल्यूसी में नहीं हैं, लेकिन कॉन्ग्रेस में हैं, उनका दृष्टिकोण बिल्कुल अलग है। क्या इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि हम सीडब्ल्यूसी में नहीं हैं? इसलिए भले उनके अनुसार सीडब्ल्यूसी भारत में कॉन्ग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करती है। पर मुझे नहीं लगता कि यह सही है। देश भर में बहुत सारे कॉन्ग्रेसी हैं, केरल से, असम से, जम्मू-कश्मीर से, महाराष्ट्र से, उत्तर प्रदेश से, गुजरात के लोग हैं, जो उस दृष्टिकोण को नहीं मानते हैं।”

शीर्ष नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा, “शीर्ष नेता आज एक बात कहते हैं और कल इसके विपरीत कहते हैं। हमें जो लड़ाई लड़नी है वह मोदी शासन के खिलाफ है। यह कोई लड़ाई नहीं है कि हमें कॉन्ग्रेस के भीतर लड़ना चाहिए। मोदी सरकार से लड़ने के लिए कॉन्ग्रेस को एक होना चाहिए। लेकिन अगर आप अपना घर भी ठीक से नहीं रख सकते हैं, तो आप मोदी शासन से कैसे लड़ेंगे?”

वहीं उन्होंने क्रिकेट खिलाड़ियों का उदाहरण लेते हुए सोनिया, राहुल, प्रियंका गाँधी-वाड्रा परिवार को पीछे हटने की तरफ भी साफ संकेत दिए। उन्होंने कहा, “नेतृत्व को अब तक आत्ममंथन करना चाहिए था। वह ‘चिंतन’ सब उनके मन में हो जाना चाहिए था। और उन्हें किसी और को नेतृत्व करने देना चाहिए। किसी और को मौका दो। उदाहरण के लिए, सुनील गावस्कर को एक दिन सेवानिवृत्त होना पड़ा। यहाँ हम गावस्कर के साथ काम नहीं कर रहे हैं। सचिन तेंदुलकर को एक दिन संन्यास लेना पड़ा। कल तक विराट कोहली टीम के कप्तान थे। तीनों के नाम दुनिया के क्रिकेट इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएँगे। उन्हें भी संन्यास लेना पड़ा। उन्हें भी हटना पड़ा। तो अगर महान उत्कृष्टता के लोग भी, किसी स्तर पर सोचते हैं कि यह जाने का समय है, तो निश्चित रूप से, हमने जो हार देखी है, उसके बाद नेतृत्व को यह स्थान किसी और के लिए छोड़ देना चाहिए जो निर्वाचित होगा और नामांकित नहीं होगा। उस व्यक्ति को प्रदर्शन करने दें।”

ऐसे में देखा जाए तो कपिल सिब्बल की चिंता जायज है लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसका संज्ञान लेगा इसकी उम्मीद कम ही दिख रही है। क्योंकि ऐसा करने से एक परिवार के हाथ से पार्टी निकल जाएगी।

चीनी कंपनियों के पास जा रहा था Paytm से डाटा: RBI की कार्रवाई के बाद मीडिया रिपोर्ट में दावा, कंपनी ने नकारा

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा पेटीएम (Paytm) पेमेंट बैंक के ख़िलाफ़ की गई सख्त कार्रवाई के बाद खबर है कि ये पेटीएम पेमेंट बैंक अपना सारा डाटा चीन के साथ शेयर कर रहा था। ब्लूमबर्ग में प्रकाशित हुई ये चौंकाने वाली जानकारी रिजर्व बैंक द्वारा करवाई गई वार्षिक जाँच के आधार पर सामने आई है, जिसमें रिजर्व बैंक ने पाया कि ये पेटीएम पेमेंट बैंक के सर्वर से सूचनाएँ उन चीन आधारित कंपनियों के पास जा रही थीं जिनकी अप्रत्यक्ष रूप से इसमें हिस्सेदारी है।

RBI का कहना कि सभी पेमेंट कंपनियाँ जो देश में ऑपरेट होती हैं उन सभी का ट्रांजैक्शन डाटा लोकल सर्वर पर स्टोर होना चाहिए लेकिन पेटीएम पेमेंट बैंक के केस में ऐसा नहीं हो रहा था। हालाँकि, इस बीच ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट को पेटीएम पेमेंट बैंक द्वारा खारिज किया गया है। उनका कहना है कि रिपोर्ट में चीन को डाटा शेयर करने वाला दावा पूर्णत: गलत है।

वह कहते हैं कि पेटीएम पेमेंट बैंक देश में फैला बैंक हैं। ये भी अन्य बैंकों की तरह आरबीआई के डाटा लोकेलाइजेशन रूल्स को फॉलो करता है। जो भी इसका डाटा है वो सब देश में हैं। उनका विश्वास डिजिटल इंडिया प्रोग्राम में है और वे इसे बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

पेटीएम पेमेंट बैंक

बता दें कि पेटीएम पेमेंट बैंक, एक पेटीएम और विजय शेखर शर्मा का ज्वाइंट वेंचर हैं। चीन की अलीबाबा ग्रुप होल्डिंग लिमिटेड और उससे जुड़ी जैक मा की आंट ग्रुप कंपनी ने पेटीएम के शेयर लिए हुए हैं। पेटीएम की वेबसाइट के अनुसार, उनके पास 30 करोड़ से अधिक वॉलेट और 6 करोड़ बैंक खाते हैं। बैंक ने ये भी बताया है कि उनके पास 1 करोड़ से अधिक केवाईसी वाले ग्राहक हैं और हर महीने 0.4 मिलियन उपयोगकर्ता उनसे जुड़ रहे हैं।

RBI की कार्रवाई

गौरतलब है कि पिछले ही हफ्ते ऑनलाइन पेमेंट बैंक पेटीएम के खिलाफ भारतीय रिजर्व बैंक ने बड़ी कार्रवाई की थी। आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को तत्काल प्रभाव से नए कस्टमर्स नहीं बनाने के आदेश दिए थे। साथ ही पेटीएम को अपने आईटी सिस्टम का ऑडिट करने के लिए ऑडिट फर्म नियुक्त करने का निर्देश भी दिया था।

रिजर्व बैंक के नोटिस में कहा गया था, “भारतीय रिजर्व बैंक ने आज अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए अन्य बातों के साथ बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35A के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को तत्काल प्रभाव से नए ग्राहकों को शामिल करने को रोकने का निर्देश दिया है। बैंक को अपने आईटी सिस्टम का व्यापक सिस्टम ऑडिट करने के लिए एक आईटी ऑडिट फर्म नियुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है।”

इसमें आगे कहा गया था, “पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड आईटी ऑडिट परीक्षण के बाद आरबीआई की इजाजत के बाद ही नए कस्टमर्स को शामिल किया जा सकेगा। रिजर्व बैंक ने यह कार्रवाई पेटीएम में देखी गई कुछ चिंताओं के आधारित है।”