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RSS के जिस स्वयंसेवक के वामपंथी गुंडों ने काट दिए पैर, राष्ट्रपति ने उनको राज्यसभा भेजा: जानिए कौन हैं केरल के सदानंदन मास्टर

देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 4 हस्तियों को राज्यसभा के लिए नामित किया है। राज्यसभा के लिए नामित किए जाने वालों में पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला, अजमल कसाब के खिलाफ केस लड़ने वाले वकील उज्जवल निकम, इतिहासकार मीनाक्षी जैन और सामाजिक कार्यकर्ता C सदानंदन मास्टर हैं।

इन चारों नामों को राज्यसभा में नामित करने का फैसला राष्ट्रपति ने रविवार (13 जुलाई, 2025) को लिया है। राज्यसभा में 12 ऐसे सदस्य राष्ट्रपति नामित करते हैं। लेकिन इस बार नामित होने वाली हस्तियों में एक नाम सबसे अलग है। यह नाम केरल से आने वाले स्वयंसेवक C सदानंदन मास्टर का है जिनके पैर कम्युनिस्टों ने 1994 में काट दिए थे।

सदानंदन मास्टर को राज्यसभा में नामित किए जाने को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बधाई दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा. “श्री C सदानंदन मास्टर का जीवन साहस और अन्याय के आगे न झुकने की प्रतिमूर्ति है। हिंसा और धमकी भी राष्ट्र विकास के प्रति उनके जज्बे को डिगा नहीं सकी।”

उन्होंने आगे लिखा, “एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी उनके प्रयास सराहनीय हैं। युवा सशक्तिकरण के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता है। राष्ट्रपति जी द्वारा राज्यसभा के लिए मनोनीत होने पर उन्हें बधाई। सांसद के रूप में उनकी भूमिका के लिए शुभकामनाएँ।”

कौन हैं सदानंदन मास्टर?

61 साल के केरल के C सदानंदन मास्टर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए नामित किया है। सदानंदन मास्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं। वह बीते लगभग 5 दशक से RSS के स्वयंसेवक हैं। केरल के कन्नूर के रहने वाले सदानंदन मास्टर पेशे से शिक्षक रहे हैं।

सदानंदन मास्टर का पूरा परिवार ही कम्युनिस्टों का था। उनके पिता और भाई सक्रिय वामपंथी कार्यकर्ता थे। सदानंदन मास्टर के भाई वामपंथी छात्र संगठन SFI के पुराने काडर थे। घर में सभी के कम्युनिस्ट होने के बावजूद सदानंदन मास्टर का झुकाव RSS की तरफ था।

2016 में द न्यूज मिनट को दिए एक इंटरव्यू में सदानंदन मास्टर ने बताया था कि वह 12वीं तक लगातार संघ के कामों में लगे हुए थे। उन्होंने बताया था कि इसके बाद वह जब आगे की पढ़ाई के लिए कॉलेज पहुँचे तो वह वामपंथ के प्रभाव में आ गए और कुछ दिनों तक खुद भी कम्युनिस्ट बन गए।

उन्होंने बताया कि कम्युनिस्ट बनने के बावजूद उनका झुकाव संघ की तरफ होता रहा और उनको यह प्रतीत हुआ मार्क्सवाद नहीं बल्कि राष्ट्रवाद की विचारधारा ही सही है। उन्होंने बताया था कि इसके बाद वह मलयालम कवि की ‘भारत दर्शानांगल’ कविता पढ़ने के बाद पूरी तरह वापस स्वयंसेवक हो गए।

सदानंदन मास्टर की लगातार समाजसेवा और उनके संघर्ष को देखते हुए 2016 में उन्हें भाजपा ने कूथूपरम्बू विधानसभा से टिकट भी दिया था। हालाँकि, वह कम्युनिस्ट उम्मीदवार KK शैलजा से हार गए थे। KK शैलजा बाद में केरल की स्वास्थ्य मंत्री बनी थीं।

सदानंदन मास्टर की कहानी इन सबसे अलग एक और है। यह कहानी उनके विचारधारा के प्रति समर्पण और कम्युनिस्टों की हिंसा से जुड़ी हुई है। सदानंदन मास्टर की यह कहानी 1994 में पैर काटे जाने से जुड़ी है। यह कीमत उन्हें वामपंथी विचारधारा छोड़ने के लिए चुकानी पड़ी थी।

1994 का वो हादसा और मास्टर सदानंदन

सदानंदनन 30 साल की थी जब यह भयावह घटना हुई थी। वह पेरिनचरी, मट्टनूर नगर पालिका में सरकार-एडेड कुजिक्कल लोअर प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षक थे। 25 जनवरी, 1994 को सदानंदन मास्टर अपनी बहन की शादी की व्यवस्था पर बात करने के बाद शाम को अपने चाचा के घर से लौट रहे थे।

जैसे ही वह बस से नीचे उतरे और अपने घर की ओर चलना शुरू कर दिया, कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने उनकी पिटाई चालू कर दी। यह CPI(M) के गुंडे थे। जिन्होंने न केवल मास्टर को बेरहमी से पीटा, बल्कि उनके दोनों पैरों को बीच सड़क पर काट दिया।

खून के प्यासे वामपंथियों ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि सदानंदन मास्टर अब उनकी विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखते थे औ RSS का हिस्सा बन चुके थे। कम्युनिस्ट इसे एक धमकी के तौर पर दिखाना चाहते थे कि जो भी वामपंथ छोड़ेगा, उसका यही हश्र होगा।

कन्नूर की भीड़ में मौजूद कोई व्यक्ति उन्हें बचाने ना आए, इसके लिए वामपंथियो ने वहाँ पर एक बम धमाका भी किया। इसके बाद उन्हें वहीं ऐसे छोड़ दिया। उनको बाद में अस्पताल में भर्ती करवाया गया और उनके पैर भी अस्पताल ले जाए गए।

लड़े और जीते RSS के मास्टर

पैर काटे जाने के चलते मास्टर सदानंदन चलने-फिरने में सक्षम नहीं रहे थे। उनका कई दिनों तक अस्पताल में इलाज चला। सदानंदन मास्टर को इसके बाद प्रोस्थेटिक लेग्स यानी नकली पैर लगाए गए। उन्होंने इनसे चलना 6 महीने में सीख लिया और वापस संघ के काम में लग गए।

कम्युनिस्टों का जानलेवा हमला भी उन्हें रोक नहीं पाया। निरंतर वह समाजसेवा में जुटे रहे। सदानंदन मास्टर ने इसके बाद केरल में भाजपा को खड़ा करने में सहयोग दिया। उनके चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी हिस्सा लिया था और उनके साहस की प्रशंसा की थी।

वर्ष 2007 में उन्हें न्याय मिला था और उन पर हमला करने वाले कम्युनिस्टों को सजा और जुर्माना दोनों दिया गया था। बाद में हाई कोर्ट ने भी कम्युनिस्टों की यह सजा बरकरार रखी थी। 2025 में भी केरल हाई कोर्ट ने इस सजा बरकरार रखा था।

अमीरी का लालच, सनातन की बुराई, मुस्लिम लड़कों को टारगेट… छांगुर पीर 3 तरीके से करवाता था धर्मांतरण: पीड़िता ने बताया- शागिर्द मेराज ने पूरे परिवार के लिए फँसाई हिन्दू लड़कियाँ

छांगुर पीर धर्मांतरण कराने के लिए कई तरीके अपनाता था। इनमें सबसे पहला तरीका था मुस्लिम युवकों से हिंदू लड़कियों को दोस्ती कर निकाह कराना। दूसरे में वह नीतू और नवीन का उदाहरण देता था कि कैसे दोनों ने इस्लाम अपनाया और अब अमीर हो गए। लोग उसकी बातों से प्रभावित होकर इस्लाम अपना लेते थे।

ऐसे कई मामलों में छांगुर पीर की धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ। कई पीड़ितों ने सामने आकर छांगुर के जाल में फँसने की आपबीती सुनाई है।

औरैया की छांगुर ने हिंदू परिवार बर्बाद किया

एक मामला औरैया जिले का है, जहाँ हिंदू लड़की ने सामने आकर छांगुर की सच्चाई बताई है। कैसे छांगुर ने लड़की का परिवार बर्बाद कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 22 साल की हिंदू युवती ने 3 जुलाई 2025 को घर वापसी की। युवती औरैया जिले के बाबरपुर गाँव की रहने वाली है। एक दिन माँ ज्योति शर्मा और पिता अरविंद शर्मा कानपुर गए हुए थे। वहाँ एक लड़के से मुलाकात हुई, उसने अपना नाम रुद्र शर्मा बताया था।

युवती बताती हैं कि तभी माँ ने उससे पिता के शराब की लत के बारे में जिक्र किया। तो रुद्र ने छांगुर पीर के पास इलाज बताया। फिर पूरा परिवार रुद्र शर्मा के साथ छांगुर के पास पहुँचा। छांगुर ने परिवार को ताबीज दिया। इसके बाद से रुद्र शर्मा ने युवती को प्रेमजाल में फँसाया और फतेहपुर की एक मस्जिद में निकाह कर लिया।

युवती को निकाह के बाद रुद्र शर्मा का असली नाम मेराज अंसारी होने की जानकारी लगी। युवती ने बताया कि वह उसका घर छोड़कर आ गई। उसके भाई भी हिंदू लड़कियों को फँसाने का काम करते थे। एक बार उसके अब्बा रियाज और भाई उमर ने भी युवती का शारीरिक शोषण किया।

युवती ने बताया कि एक दिन मेराज उसके घर आया और युवती की छोटी बहन से निकाह करने के लिए कहा। ऐसा न करने पर युवती की आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो वायरल करने की धमकी दी।

इस धमकी के बाद युवती के पिता ने उसके सिर पर लोहे की रॉड से हमला किया, जिसके बाद मेराज की मौके पर ही मौत हो गई। युवती बताती हैं कि मेराज अंसारी की हत्या में उसकी माँ और पापा दोनों जेल में बंद हैं।

हिंदू परिवार को लालच देकर धर्मांतरण कराया

छांगुर पीर का धर्मांतरण का दूसरा तरीका लालच देना था। वह हिंदुओं को पैसे और जिंदगी बदलने लालच देकर इस्लाम कबूल करवाता था।

ऐसा ही एक मामला उजागर हुआ है। एक बार छांगुर के घऱ मजदूर नरेंद्र, जग प्रसाद कश्यप, हरजीत, मालती देवी पहुँची। यहाँ छांगुर ने चारों लोगों को शांति पाठ पढ़ाया। फिर इस्लाम अपनाने के लिए ब्रेनवॉश करने लगा। कहता कि इस्लाम अपनाओगे तो फायदे में रहोगे। छांगुर ने नवीन और नीतू रोहरा का उदाहरण दिया। कहा कि इनके पास बंगला और गाड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नरेंद्र, जग प्रसाद कश्यप और हरजीत ने छांगुर के जाल में फँसकर धर्म परिवर्तन करा लिया। लेकिन मालती देवी ने इनकार कर दिया। इसके बाद छांगुर ने मालती देवी पर चोरी का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई है। मालती देवी छांगुर की ही साइट में मजदूरी करती थी। अब इस एफआईआर पर ATS जाँच कर रही है।

वहीं, हरजीत ने 03 जुलाई 2025 को घर वापसी कर ली है। हरजीत ने बताया कि छांगुर ने नागपुर में सुपरवाइजर की नौकरी दिलाने का झाँसा देकर धर्मांतरण कराया था। हरजीत बताते हैं कि उन्होंने विरोध किया था, लेकिन छांगुर ने उनके खिलाफ 2 मुकदमे दर्ज कर दिए।

तीसरे तरीके में हिंदू धर्म को बुराई कर धर्मांतरण कराता

छांगुर का धर्मांतरण कराने का तीसरा तरीका था हिंदू धर्म की बुराई करना। वह गरीब और बेसहारा लोगों को निशाना बनाता था। उनसे हिंदू धर्म की बुराई करता और इस्लाम की अच्छा बताता।

छांगुर का दूसरा ठिकाना आजमगढ़ था। जिले में देवगाँव थाना क्षेत्र के चिरकिहिट गाँव में पुलिस ने छापेमारी की थी। यहाँ पुलिस को एक मजार में त्रिशुल मिला था, जिस पर फूलों की माला लटकी थी। इस मजार में कव्वाली गई जाती थी। इसके जरिए हिंदू धर्म की मान्यताओं को गलत और खराब बताया जाता था।

छांगुर के जिगरी दोस्त ने उसे पकड़वाया

छांगुर को बड़े अधिकारियों संग उठना बैठना था। उसकी प्रशासन में गहरी पकड़ थी। वह अधिकारियों को ‘नग’ देकर अपनी छवि मजबूत करता था। इसी वजह से उस पर कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन हालात तब बदल गए, जब उसके ही जिगरी दोस्त ने उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करने शुरू किए।

छांगुर के साथ काम करने वाला बब्बू चौधरी ने ही छांगुर की अवैध गतिविधियों से जुड़े दस्तावेज जुटाए। फिर उन दस्तावेजों को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुँचा दिया। इसके बाद ही ATS और STF ने मामले में संज्ञान लिया और छांगुर पीर का अवैध धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा हुआ।

दरअसल, साल 2021 में निर्माण कार्य के दौरान छांगुर और बब्बू चौधरी के बीच पैसों के लेन-देन में बात बिगड़ी। नीतू को शक हुआ कि बब्बू ने निर्माण कार्य में ₹2.5 करोड़ की बेईमानी की है। इसके बाद छांगुर ने बब्बू पर पुलिस केस दर्ज कराया। तभी से बात बिगड़ी और बब्बू ने बदला लेने के लिए छांगुर के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू कर दिए।

छांगुर ने नीतू की बेटी का निकाह अपने नाती से करा दिया

छांगुर के साथ धर्मांतरण नेटवर्क में काम करने वाली नीतू उर्फ नसरीन और उसके परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया। इसके बाद नसरीन की बेटी का निकाह छांगुर के नाती अरबाज से करा दिया गया। अरबाज की उम्र करीब 25 वर्ष है। वहीं, नसरीन की बेटी की उम्र पासपोर्ट के मुताबिक केवल 15 वर्ष है।

बलरामपुर में ग्रामीण बताते हैं कि नसरीन की बेटी को स्कूल जाने से रोका गया था। छांगुर उसे घर से बाहर नहीं जाने देते था, इस डर से की कहीं वो उसके राज न खोल दे। इसीलिए अक्सर परिवार के साथ ही रखता था।

क्या है पूरा मामला ?

बलरामपुर में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क को चलाने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर (जिसे हाजी पीर जलालुद्दीन, पीर बाबा या हजरत बाबा भी कहा जाता है) पुलिस की गिरफ्त में हैं। छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

छांगुर पीर का नेटवर्क खाड़ी देशों से ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त करता था। इस फंडिंग से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजमा देता था। गैंग के पास 40 से अधिक बैंक खाते थे, जिनमें बड़े पैमाने पर लेनदेन होता था।

छांगुर पीर इन पैसों से लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और अन्य संपत्तियाँ खरीदता था। गैंग जाति के आधार पर धर्मांतरण के लिए पैसा देता था। गैंग में शामिल मुस्लिम युवक हिंदू पहचान बताकर युवतियों को प्रेमजाल में फँसाते और उनका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करवाते।

छांगुर पीर के साथ नीतू रोहरा उर्फ नसरीन भी पुलिस की गिरफ्त में है। ATS ने बताया कि पूरा नेटवर्क भारत में फैला है। इस गैंग के 14 अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।

फिलहाल छांगुर पीर की अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है और उसके खिलाफ ATS, पुलिस और ED समेत कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।

छांगुर पीर का मामला केवल धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आपराधिक गैंग का है। विदेशी फंडिंग और ‘शिजर-ए-तैयबा’ जैसी सामग्री का उपयोग करते हुए, यह रैकेट ‘लव जिहाद’ और लालच के माध्यम से कमजोर वर्गों (खासकर हिंदुओं) को निशाना बना रहा था। एटीएस और ईडी की लगातार कार्रवाई इस गहरी साजिश की परतों को खोल रही है।

‘पायलट की गलती’ या फ्यूल कंट्रोल स्विच में तकनीकी खराबी: 2018 की FAA एडवायजरी ने उठाए नए सवाल, बताया था- गड़बड़ हो सकती है ईंधन की सप्लाई

अहमदाबाद से लन्दन जा रहे एअर इंडिया के 787-8 ड्रीमलाइनर विमान हादसे की शुरूआती जाँच रिपोर्ट सामने आ चुकी है। इसमें हादसे का कारण इंजन को ईंधन की सप्लाई बंद होना बताया गया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि यह सप्लाई किसने बंद की।

रिपोर्ट में पायलटों के फ्यूल स्विच बंद होने को लेकर बातचीत सामने आई है। लेकिन इसी के साथ अमेरिकी विमानन नियामक FAA (फेडरल एयर एडमिनिस्ट्रेशन) की एक 2018 की एडवायजरी भी प्रकाश में आई है, जिसमें बोइंग निर्मित विमानों के फ्यूल स्विच में गड़बड़ी की बात कही गई थी।

FAA ने क्या कहा था?

FAA ने दिसम्बर, 2018 में यह बुलेटिन सभी एयरलाइन्स को भेजा था। FAA ने बताया था कि बोइंग कम्पनी को 737 विमान ऑपरेट करने वाली एयरलाइन्स से फ्यूल स्विच के बारे में कुछ रिपोर्ट्स मिली हैं। FAA के अनुसार, एयरलाइन्स ने बताया था कि कुछ विमानों में फ्यूल कंट्रोल स्विच बिना लॉकिंग फीचर के इंगेज हुए इंस्टाल हो गए थे।

FAA ने बताया था कि फ्यूल कंट्रोल स्विच में लॉकिंग फीचर इसलिए होता है ताकि इसको धोखे से बंद या चालू नहीं किया जा सके। FAA के अनुसार, अगर लॉकिंग स्विच काम ना करे तो ईंधन सप्लाई और उसकी कटौती अनजाने में हो सकती है और यह गड़बड़ कर सकती है।

FAA की फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर एडवायजरी

एडवायजरी में FAA ने यह बताया था कि लॉकिंग फीचर चालू रहने की सूरत में फ्यूल कंट्रोल स्विच को ऑन/ऑफ करने के लिए पायलट को उसे ऊपर उठाना पड़ता है और अगर लॉकिंग फीचर नहीं होता तो स्विच को बिना उठाए ही उसकी स्थिति बदली जा सकती है।

FAA ने कहा था कि स्विच को लॉकिंग फीचर के बिना चलाने पर इंजन बंद होने जैसे अनपेक्षित घटनाएँ भी हो सकती हैं। 2018 की इस एडवायजरी के अनुसार, जिन फ्यूल कंट्रोल स्विच में यह गड़बड़ी सामने आई थी, वह बोइंग की वेंडर कम्पनी हनीवेल ने बनाए थे।

इस एडवायजरी में FAA ने बताया था कि यह घटनाएँ भले ही 737 विमान मॉडल के साथ सामने आई हों लेकिन फ्यूल कंट्रोल स्विच का डिजाइन और भी विमानों में इसके जैसा ही था। इन विमानों की फेहरिस्त में 787-8 ड्रीमलाइनर भी था। यही विमान 12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुआ।

FAA ने सभी एयरलाइन्स को बोला था कि वह इस सूचना के बाद जल्द से जल्द अपने विमानों की जाँच कर लें। इसे एअर इंडिया समेत बाकि एयरलाइन्स को भी भेजा गया था क्योंकि यह भी उस फेहरिस्त में शामिल कई विमानों का संचालन करती है। हालाँकि, इस जाँच को बाध्यकारी नहीं बनाया गया था।

अब क्यों चर्चा में है FAA की रिपोर्ट?

12 जून, 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे की शुरूआती जाँच रिपोर्ट भारतीय एजेंसी AAIB ने 12 जुलाई को जारी की है। इस जाँच रिपोर्ट में बताया गया है कि विमान के उड़ान भरने के कुछ सेकंड के भीतर ही विमान को ईंधन मिलना बंद हो गया था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि एअर इंडिया की फ्लाइट AI-171 में ईंधन सप्लाई बंद होने के बाद एक पायलट ने दूसरे पायलट से पूछा था कि उसने फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद क्यों किया। इसके जवाब में दूसरे पायलट ने ऐसा करने से इनकार किया था।

AAIB रिपोर्ट का वह हिस्सा, जहाँ पर फ्यूल कंट्रोल स्विच के विषय में बात हुई है

रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि फ्यूल कंट्रोल स्विच क्यों बंद हो गए थे। चूंकि पायलटों ने इससे मना किया था और बाकी बातचीत के लिए समय नहीं बचा था इसलिए इस पर और भी कोई जानकारी सामने नहीं आई। ऐसे में फ्यूल कंट्रोल स्विच की संभावित गड़बड़ी को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

विमान में क्यों लगाए जाते हैं फ्यूल कंट्रोल स्विच?

आधुनिक विमान बड़ी मात्रा में तेल खपत करते हैं और उनके इंजनों को चलने के लिए नियमित ईंधन की सप्लाई चाहिए होती है। विमानों में फ्यूल सप्लाई को नियमित करने के लिए यह स्विच लगाए जाते हैं। इनको बंद करने की आवश्यकता ईंधन भरते समय पड़ती है।

फ्यूल कंट्रोल स्विच

इसके अलावा अगर किसी विमान के इंजन उड़ान के दौरान गड़बड़ करते हैं या बंद हो जाते हैं तो उन्हें दोबारा चालू करने के लिए भी फ्यूल कंट्रोल स्विच काम में लाए जाते हैं। कई ऐसे भी मौके हो सकते हैं जब दो विमान वाले इंजन का एक इंजन खराब हो जाए, ऐसे में उसे बंद करने के लिए भी फ्यूल कंट्रोल स्विच का इस्तेमाल किया जाता है।

धोखे से यह बंद या चालू ना हो जाएँ, इसके लिए इन स्विच के आसपास लोहे की एक रेलिंग जैसी लगाई जाती है। फ्यूल कंट्रोल स्विच क कॉकपिट में लगाने की शुरुआत जेट विमानों के आने के साथ ही 1950 के दशक में चालू हो गई थी। बोइंग 707 और डगलस DC-8 जैसे विमानों में पहली बार आधुनिक फ्यूल कंट्रोल स्विच लगाए गए थे।

एअर इंडिया का इस मामले पर क्या रुख?

एअर इंडिया ने भी 2018 की FAA एडवायजरी को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एअर इंडिया ने हादसे की जाँच कर रही एजेंसी AAIB को बताया है कि उसे भी FAA की यह एडवायजरी मिली थी लेकिन इसमें कही गई इंस्पेक्शन की बात अनिवार्य नहीं थी। एअर इंडिया ने बताया है कि उसने यह इंस्पेक्शन अपने विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच को लेकर नहीं किए थे। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि विमान के बाकी मानकों को वह लगातार पूरा कर रही थी।

‘पायलटों की गलती’ वाले दावे का खंडन

इंडियन एयरलाइन्स पायलट एसोसिएशन (ALPA) ने AAIB की शुरूआती जाँच रिपोर्ट का खंडन किया है। यूनियन ने कहा है कि शुरूआती तौर पर पायलटों को गलत दिखाने का प्रयास किया गया है। उसने यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट में पायलटों को लेकर पक्षपात किया गया है। यूनियन ने इस बात पर भी नाराजगी जताई है कि रिपोर्ट जारी होने से पहले ही मीडिया के पास पायलटों को लेकर जानकारी पहुँच गई थी, जो ठीक नहीं है।

पायलट की गलती या गड़बड़ी, इसका नहीं कोई जवाब

एअर इंडिया हादसे की रिपोर्ट ने जहाँ कई जवाब दिए हैं, वहीं कई प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद होने का असल कारण क्या था, जो बाद में हादसे कारण बना। रिपोर्ट में यह भी जवाब स्पष्ट नहीं हुआ कि आखिर फ्यूल कंट्रोल स्विच चालू किए जाने के बाद एक ही इंजन वापस क्यों ऑन हो पाया।

इस बीच कई विदेशी मीडिया पोर्टल ने एअर इंडिया के पायलटों कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर को ही हादसे का जिम्मेदार बताने का प्रयास किया है। जबकि AAIB जाँच रिपोर्ट से कहीं पर भी यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्होंने ही फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद किया था।

इस बीच 2018 की उस एडवायजरी ने यह भी प्रश्न उठा दिए हैं कि कहीं इन स्विच में कोई तकनीकी समस्या तो नहीं थी।

छांगुर पीर ने सरकारी तालाब को पाट कर की 30000 स्क्वायर फीट जमीन पर अवैध प्लॉटिंग, खड़ी की महँगी प्रॉपर्टी: धर्मांतरण के सरगना के नेटवर्क की हो रही पड़ताल, खुल रहीं परतें

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में बड़े स्तर पर धर्मांतरण की साजिश करने वाले सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करने के साथ-साथ छांगुर अपने काम को अंजाम देने के लिए भी कई तरकीबें खोजता था।

इसके साथ ही वह सरकारी जमीनों पर कब्जा कर कागजों में हेर फेर भी करता था। जाँच में सामने आया है कि विदेशी फंडिंग के जरिए छांगुर ने करोड़ों की संपत्ति बनाई। इसके साथ ही उतरौला में कई महँगी प्रॉपर्टी का भी निर्माण करवाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छांगुर ने उतरौला में कई लोगों के नाम पर पहले जमीन खरीदी और फिर सरकारी जमीनों पर कब्जा जमा लिया। इसके लिए उन जमीनों पर गरीबों का नाम दिखा कर कागजों में हेर-फेर भी की।

उतरौला के पटेल नगर में एक सरकारी तालाब कुंडवा को भी छांगुर ने पटवा कर वहाँ पर लगभग 30,000 वर्ग फीट में अवैध प्लॉटिंग भी करवाई। इसके लिए गरीबों के नाम पर की गई जमीन को छांगुर ने नीतू उर्फ नसरीन के नाम पर 93 लाख में खरीद ली।

लाताब पाटने के लेकर उस समय के ADM बलरामपुर ने उतरौला की नगर पालिका को लिखित शिकायत भी की थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

आजतक की रिपोर्ट्स के अनुसार, उस जगह पर रहने वाले स्थानीय लोगों ने छांगुर को लेकर कई खुलासे किए। छांगुर ने सांसद निधि से बनी पुलिया को भी अपने कब्जे में कर बंद कर दिया। इसकी वजह से बारिश के समय पर वहाँ के लोगों को काफी परेशानी होती है।

लड़कियाँ प्रोजेक्ट, धर्मांतरण की शर्तें

छांगुर के शब्दकोष में लड़कियों के लिए ‘प्रोजेक्ट’, धर्मांतरण के लिए ‘मिट्टी पलटना’, छांगुर से मिलने के लिए ‘दीदार’ और ब्रेन वॉश के लिए ‘काजल करना’ जैसे शब्द शामिल थे। इन कोडवर्ड्स का उपयोग करके वह अपने ज्यादातर मिशन को अंजाम देता था।

छांगुर लड़कियों को निकाह का वादा करके धर्मांतरित करता था और नए जीवन को लेकर कई शर्तें बताईं जाती थीं। इसके बाद युवाओं और लड़कियों को विदेश भेजने और पैसों का लालच दिखाया जाता था।

सभाओं में आते थे विदेशी

छांगुर पीर का एक बड़ा नेटवर्क फैला हुआ था। ये नेटवर्क बलरामपुर के चाँद औलिया दरगाह से चलाता था। यहाँ पर ही छांगुर नियमित तौर पर सभा आयोजित करता था। इसमें भारत के अंदर के लोगों के अलावा विदेशी नागरिक भी शामिल होते थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच में यूपी ATS को छांगुर पीर के ठिकाने से ‘शिजर-ए-तैयबा’ नाम की किताब मिली है। यह किताब खुद छांगुर पीर ने छपवाई थी। इस किताब का मकसद लोगों का ब्रेनवॉश करना था।

किताब में ऐसे लोगों का जिक्र किया गया है, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे युवाओं को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जाए। यह किताब विदेशी पैसों से छपी थी।

इसके अलावा एजेंसियों के अनुसार, छांगुर पीर ‘मिशन आबाद’ का हिस्सा था। धर्मांतरण के बदले छांगुर पीर को विदेश से पैसा मिलता था। साथ ही छांगुर पीर के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से कनेक्शन थे। छांगुर पीर हाल ही में काठमांडू में हुए एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था।

जाँच में आ सकती है कई नई बातें

जानकारी के अनुसार, छांगुर पीर का संबंध कई अन्य संगठनों से भी रहा है। जाँच में पता चला है कि उसका जुड़ाव सऊदी अरब इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक, मुस्लिम वर्ल्ड लीग, दावत-ए-इस्लाम और इस्लामिक संघ ऑफ नेपाल जैसे संगठनों से था।

छांगुर को लेकर लगातार जाँच चल रही है। ATS इस मामले पर कई बिंदुओं पर पड़ताल कर रही हैं। इस्लामिक एंगल के साथ फंडिंग, क्षेत्रीय और अन्य पहलुओं पर भी सुरक्षा एंजेंसियाँ लगातार पड़ताल में जुटी हुई हैं। वहीं ED भी छांगुर के चल अचल संपत्तियों की पड़ताल के लिए छांगुर के परिवार-जानने वालों और बैंकों से संपर्क साध रही है।

पश्चिम बंगाल में मधु मुल्ला ने भगवान शिव पर आपत्तिजनक पोस्ट की शेयर, भड़के आम हिंदू: BJP नेता सुवेंदु अधिकारी ने की गिरफ्तारी की माँग, FIR दर्ज

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के मंदिरबाज़ार इलाके में शुक्रवार (11 जुलाई 2025) को धार्मिक भावना भड़काने वाली एक फेसबुक पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया। आरोपित युवक मधु मुल्ला ने एक ऐसी तस्वीर शेयर की जिसमें भगवान शिव का अपमान किया गया था।

तस्वीर वायरल होते ही सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया और पुलिस को मामले में कार्रवाई करनी पड़ी। ‘पागलिर पागल’ नाम से फेसबुक पेज चलाने वाले मधु मुल्ला ने एक तस्वीर शेयर की, जिसमें एक बच्चा भगवान शिव पर पेशाब करता दिखाई दे रहा था।

साथ ही तस्वीर में बेहद आपत्तिजनक कैप्शन लिखा गया था। यह पोस्ट मंदिरबाजार निवासी और मशरूफ मुल्ला के बेटे मधु मुल्ला द्वारा की गई है। घटना के सामने आने के बाद भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक्स पर इस मामले को उठाते हुए ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह हिंदू विरोधी गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं करती।

शुभेंदु अधिकारी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

उन्होंने पश्चिम बंगाल के DGP को पत्र लिखकर आरोपित की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की और चेतावनी दी कि कार्रवाई न होने पर वह खुद मंदिरबाजार जाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। सोशल मीडिया पर भारी विरोध के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित की प्रोफाइल लॉक कर दी और पोस्ट हटवा दिया।

पुलिस का कहना है कि मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और जाँच जारी है। हालाँकि अभी तक आरोपित की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी आपत्तिजनक तस्वीरों को शेयर न करें और कानून-व्यवस्था बनाए रखें। इससे पहले भी राज्य में मंदिरों में तोड़फोड़ या धार्मिक भावनाएँ भड़काने के मामलों को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।

मोहम्मद नाजिल ने नाबालिग हिंदू लड़की से किया रेप, फिर ब्लैकमेलिंग से धर्मांतरित कर किया निकाह: अब भाई से कराना चाहता है हलाला, लखनऊ में दर्ज हुई FIR

लखनऊ में एक महिला ने हसनगंज थाने में तहरीर देकर मोहम्मद नाजिल पर कई आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि नाजिल ने उसे हलाला के लिए मजबूर किया और उसकी तीन साल की बच्ची पर नशे की आदत डालने की कोशिश की।

पीड़िता के अनुसार, उसकी मुलाकात नाजिल से साल 2016 में हुई थी, जो धीरे-धीरे दोस्ती में बदल गई। एक दिन नाजिल ने उसे नशीला पदार्थ पिला कर फिर उसका रेप किया, उस वक्त वो नाबालिग थी।

इस दौरान आरोपित नाजिल ने पीड़िता का अश्लील वीडियो भी बना लिया और उसको ब्लैकमेल कर बार-बार उसका रेप करता और अलग से कमरा ले कर उसके साथ रहने लगा। इस दौरान जब पीड़िता ने उससे शादी के बारे में पूछा तो उसने इस्लाम कबूल करने को कहा।

ब्लैकमेलिंग से तंग आकर पीड़िता ने वर्ष 2020 में नाजिल से निकाह कर लिया और धर्म परिवर्तन कर अपना नाम बदल लिया। पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद उसकी जिंदगी नर्क बन गई। नाजिल उसे जबरन काम पर भेजता, नशे के लिए पैसे माँगता और इनकार करने पर बुरी तरह मारता-पीटता था।

आरोपित अपनी तीन साल की बच्ची को शराब और कोरेक्स पिला कर उसे नशे के सामान की आदत डाल रहा था। पीड़िता ने बताया कि उसने इस हरकत की वीडियो भी उसके पास मौजूद है। साथ ही बच्ची के साथ भी अश्लील हरकतें करता था।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में नाजिल ने उसके चरित्र पर सवाल उठाए और कहा कि अगर वह फिर से उसके साथ रहना चाहती है, तो पहले उसके भाई से हलाला करना होगा। यह माँग पीड़िता के लिए पूरी तरह असहनीय थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए हसनगंज थाने की पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। ACP महानगर नेहा ने बताया कि महिला की तहरीर के आधार पर FIR दर्ज की जा रही है।

‘हिंदू लड़की के साथ क्यों बैठे हो’- सवाल पर फैजान को आया गुस्सा, 3 हिंदू युवकों को मार दिया चाकू: श्याम मोरे की हुई मौत, भोपाल की घटना

मध्य प्रदेश के भोपाल में 3 हिंदू लड़कों को फैजान बेग से सवाल पूछना इतना भारी पड़ कि एक की जान चली गई और 2 की जान पर बन आई है। पार्क में फैजान अपनी हिंदू प्रेमिका के साथ गले में हाथ डालकर बैठा था। इस दौरान श्याम मोरे समेत 3 हिंदू लड़कों ने उन्हें देखा तो पूछा कि वह हिंदू लड़की के साथ क्यों है।

इस पर फौजान ने तीनों पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में श्याम की मौत हो गई। अन्य 2 लड़कों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल के बरखेड़ा पठानी इलाके के अंबेडकर पार्क में 10 जुलाई 2025 को श्याम अपने दो दोस्तों के साथ गया था। यहाँ पर फैजान पहले से ही लड़की के साथ बैठा था। तीनों लड़के भी पास ही की बेंच पर बैठकर हँसी-ठिठोली कर रहे थे। इस बीच उनकी एक-दो बार फैजान और उसकी प्रेमिका पर भी नजर पड़ गई।

फैजान को लगा कि तीनों उसके बारे में ही बात कर रहे हैं। इसके बाद उसने श्याम को अपने पास बुलाया और सवाल जवाब करने लगा। इस बीच बहस बढ़ गई। श्याम ने फैजान से पूछा कि वह हिंदू लड़की के साथ क्यों है। उसने फैजान पर हिंदू लड़कियों को फँसाने और लव जिहाद का आरोप भी लगाया।

आरोपों को सुनने के बाद फैजान की प्रेमिका ने पहले श्याम को थप्पड़ मारा। उसी के तुरंत बाद फैजान ने चाकू निकाल कर श्याम पर हमला कर दिया। बीच-बचाव करने आए अन्य दोनों दोस्तों को भी घायल कर दिया। तीनों को अस्पताल लेकर जाया गया। गुरुवार (10 जुलाई 2025) की रात श्याम की मौत हो गई। अन्य दो गंभीर हालत में हैं।

एक घायल लड़के ने बताया कि वे तीनों जब पार्क में टहल रहे थे तो उन्होंने फैजान को लड़की के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। फैजान को लगा कि तीनों उसकी प्रेमिका पर हँस रहे हैं। इसके बाद वह बहस करने लगा। श्याम ने उस पर लव जिहाद ला आरोप लगाया तो वह भड़क गया। लड़की ने भी श्याम को मारा।

पूरे मामला पर फैजान ने अलग कहानी बताई है। उसका दावा है कि श्याम चाकू लेकर आया था और उस पर हमला किया। इसके बाद फैजान ने उससे चाकू छीनकर अपने बचाव में उस पर हमला कर दिया।

पुलिस ने फैजान को गिरफ्तार कर लिया है और इस पूरे मामले की जाँच कर रही है। जाँच में लड़की की भूमिका को भी शामिल किया गया है कियोंकि उसी ने पहले श्याम को थप्पड़ मारा था। हालाँकि पूरे मामले पर पुलिस लव जिहाद से मना कर रही है क्योंकि फैजान और हिंदू लड़की दोनों बालिग हैं।

कॉन्ग्रेसी नेता जलालुद्दीन ने दिव्यांग हिंदू की पत्नी को पार्टी ऑफिस में ले जाकर किया रेप, धर्मांतरण का डाला दबाव – घर भी कब्जाया: पहले से दर्ज हैं 1 दर्जन मामले, FIR के बाद गिरफ्तार

आगरा में कॉन्ग्रेस पार्टी के महानगर उपाध्यक्ष जलालुद्दीन को पुलिस ने गुरुवार (10 जुलाई 2025) को गिरफ्तार किया है। उस पर एक हिंदू महिला के साथ 3 साल तक रेप करने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा है।

पीड़ित महिला ने जलालुद्दीन के खिलाफ रेप, धर्मांतरण और जानलेवा हमला करना के लिए शिकायत दर्ज करवाई है। आरोपित सगीर फातिमा गर्ल्स इंटर कॉलेज परिसर का रहने वाला है। इस समय वह ताजगंज के बगीची बिंदा भगत में रहता है।

पीड़िता ने 4 जुलाई 2025 को आगरा के शाहगंज थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उसने अपने ऊपर हुए चाकू के हमले का वीडियो फुटेज भी दिखलाया है। शिकायत में महिला ने बताया कि पेशे से वकील जलालुद्दीन से उसकी मुलाकात 2019 में दीवानी कोर्ट में हुई थी। जान-पहचान बढ़ाकर मदद के बहाने वह महिला के घर आने लगा। महिला का पति दिव्यांग है।

2019 में ही सितंबर में जलालुद्दीन महिला को दवा दिलाने के लिए लेकर गया। इस दौरान वह उसे एमजी रोड स्थित कॉन्ग्रेस कार्यालय लेकर गया। वहाँ उसने महिला के साथ रेप किया। इसके बाद शिकायत करने पर बदनाम करने की धमकी दी और बार-बार उत्पीड़न किया।

यही नहीं, जलालुद्दीन ने महिला पर धर्म बदलने और निकाह करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता ने बताया कि उसकी माँ की मौत के बाद जलालुद्दीन ने उस घर पर कब्जा कर लिया। घर में रखे पूजा के सामान और देवी-देवताओं के सामान फेंक दिए। उसे नमाज अदा करने और रोजे रखने का दबाव बनाया।

नेता के डर से महिला मार्च में पति के साथ गुजरात के राजकोट चली गई। कॉन्ग्रेस नेता ने इसके बाद उस पर ताजगंज थाने में चोरी का मुकदमा लिखवा दिया। मुकदमे की जानकारी मिलने पर महिला वापस आगरा आई।

इसके बाद महिला ने पुलिस आयुक्त दीपक कुमार से अपनी कहानी बताई और शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने जलालुद्दीन के खिलाप जाँच शुरू की। उसे पुलिस ने गुरुवार को जीआईसी ग्राउंड के पास से गिरफ्तार किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया कि जलालुद्दीन पर 1 दर्जन से भी अधिक मुकदमे पहले से ही दर्ज हैं। इनमें 2016 में बंधक बनाकर रेप करने के साथ 1989 में भी चोरी, बलवा, जानलेवा हमला, छेड़छाड़ और डकैती तक के मामले शामिल हैं।

जलालुद्दीन ने पीड़ित महिला के साथ का अपने निकाहनामा से जुड़े कागज भी वायरल किए हैं। पीड़िता ने इसे फर्जी बताया है। इस मामले में पुलिस ने अपनी जाँच तेज कर दी है। पीड़िता और उसके पति के का बयान कोर्ट में दर्ज करवाया जाएगा।

‘छांगुर’ रहे ना रहे चलना चाहिए धर्मांतरण का काम…क्या ‘शिजर-ए-तैयबा’ छपवाने का ये था मकसद: ATS रिपोर्ट में खुलासा- जलालुद्दीन कव्वाली सुनाकर करता था ब्रेनवॉश, खतने के लिए डॉक्टर भी तैयार थे

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में धर्मांतरण की बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ, जिसमें जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर मुख्य आरोपित है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह एक बड़ा धर्मांतरण गैंग है। इसका मकसद हिंदुओं का ब्रेनवॉश करके उनका धर्म परिवर्तन करना और उनके नाम पर अवैध जमीन करना था।

ATS और ED छांगुर पीर के बताए ठिकानों पर लगातार छानबीन कर रही है। इसी कड़ी में ATS को ‘शिजर-ए-तैयबा’ नाम की किताब मिली है, जिसमें छांगुर पीर के सभी काले-चिट्ठे शामिल है। इस किताब में धर्मांतरण की पूरी थ्योरी बयान कर रही है।

‘शिजर-ए-तैयबा’ किताब मिली

न्यूज़18 की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी ATS को छांगुर पीर के ठिकाने से एक अहम किताब मिली है। इस किताब का नाम ‘शिजर-ए-तैयबा’ है। ATS का मानना है कि यह किताब लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल की जा रही थी।

यह किताब खुद छांगुर पीर ने छपवाई थी। इस किताब का मकसद लोगों का ब्रेनवॉश करना था। किताब में ऐसे लोगों का जिक्र किया गया है, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते हैं। किताब में यह भी बताया गया है कि कैसे युवाओं को इस्लाम की तरफ आकर्षित किया जाए। यह किताब विदेशी पैसों से छपी थी।

रिपोर्ट बताती है कि किताब सोशल नेटवर्किंग और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए युवाओं तक पहुँचाई जाती थी, जिससे वे धीरे-धीरे कट्टरपंथी विचारधारा की ओर आकर्षित होते जाए। इस किताब को छपवाने का मकसद ये भी था, कि छांगुर पीर ने ना होने पर उसका गैंग इसके माध्यम से धर्मांतरण का काम जारी रखें।

‘किताब’ नहीं ‘हथियार’ है

पुलिस और ATS ‘शिजर-ए-तैयबा‘ नाम की किताब की गहराई से जाँच कर रही है। उनका मानना है कि यह कोई सामान्य धार्मिक किताब नहीं है। बल्कि, यह एक खतरनाक हथियार है।

इस किताब का इस्तेमाल लव जिहाद और जबरन धर्मांतरण के लिए किया गया। ATS अब यह पता लगा रही है कि इस किताब की कितनी कॉपियाँ बनाई गईं। यह किताबें किन-किन लोगों तक पहुँचीं और कहाँ-कहाँ भेजी गईं।

जाँच एजेंसियों का मानना है कि यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा है। इसका मकसद सुनियोजित तरीके से लोगों का धर्मांतरण कराना और कट्टरपंथी सोच फैलाना था।

त्रिशुल और कव्वाली से किया जाता था धर्मांतरण

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस और ED छांगुर पीर के साथियों के बैंक खातों की जाँच कर रही हैं। छांगुर पीर के 4 करीबी दोस्त पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के जिलों में अवैध तरीके से लोगों का धर्म बदलवाते थे।

यह लोग मजार (दरगाह) जैसी जगहों पर त्रिशूल लगाते थे और कव्वाली गाते थे। ऐसा करने से ये लोगों को इस्लाम की तरफ आकर्षित करते थे और हिंदू धर्म की मान्यताओं को गलत बताते थे। उनका मकसद लोगों को लालच देकर धर्म बदलवाना था।

लड़कियों को ‘प्रोजेक्ट’ कहने का कोडवर्ड

जानकारी के अनुसार, जाँच में खुलासा हुआ कि जमालुद्दीन उर्फ छांगुर अपने साथियों से बात करने के लिए कोडवर्ड का इस्तेमाल करता था। वह गरीब, विधवा और प्रेमजाल में फँसी हिंदू लड़कियों को बहला-फुसलाकर निशाना बनाता था। इन लड़कियों को कोडवर्ड में ‘प्रोजेक्ट‘ कहा जाता था।

धर्मांतरण को ‘मिट्टी पलटना‘ और मानसिक रूप से प्रभावित करने या ब्रेनवॉश करने को ‘काजल करना‘ कहा जाता था। छांगुर पीर से मिलवाने के लिए ‘दर्शन‘ शब्द का इस्तेमाल होता था।

डॉक्टर्स करते खतना

आजतक की रिपोर्ट में एक पीड़िता ने खुलासा किया है कि छांगुर पीर के गैंग के 30-40 लोग अभी भी बाहर हैं। वे बरेली और आजमगढ़ में धर्मांतरण का नेटवर्क चला रहे हैं।

इस गैंग में कई प्रभावशाली लोग और डॉक्टर भी शामिल हैं। कुछ डॉक्टर हिंदुओं का धर्म बदलकर उनका खतना भी करते थे। पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस उनकी मदद नहीं कर रही है।

पीड़िता का खुलासा

बलरामपुर में छांगुर पीर नाम का एक व्यक्ति था। वह एक बड़ी दरगाह चलाता था। छांगुर पीर ने दावा किया था, “मैं इतना ताकतवर हूँ कि मुझे कोई छू नहीं सकता।”

जनजातीय महिला ने बयान दिया कि वह एक दिन महबूब की दुकान से कपड़े लेकर आई थी। कपड़े फटे थे और वह उन्हें बदलवाने के लिए दुकान गई। महिला को वहाँ से महबूब के घर जाने के लिए कहा गया।

महिला जब घर पहुँची तो उसे वहाँ छांगुर पीर, नीतू और महबूब था। महिला ने कपड़े वापस करवाने के लिए महबूब को बुलाने को कहा। नीतू उर्फ नसरीन ने महबूब को बुलाया और खुद छांगुर पीर के साथ नीचे चली गई।

महिला ने बताया कि महबूब और नदीम मुझे पकड़कर कमरे में ले गए और मेरे साथ रेप किया। इसकी शिकायत जब मैंने छांगुर पीर से कही तो उसने कहा ‘इसमें गलत क्या है?’

फिर छांगुर पीर ने कहा कि इस्लाम कबूल कर लो, यहाँ तुम्हें पैसा, आराम शोहरत सब कुछ मिलेगा। महिला ने छांगुर पीर की बात नहीं मानी। फिर छांगुर पीर ने कहा कि जाओ, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, ‘मैं इतना ताकतवर हूँ कि मुझे कोई छू नहीं सकता।’

पीड़ित महिला की पुकार जब स्थानीय पुलिस ने नहीं सुनी तो वे कुछ समय बाद लखनऊ गई, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। पीड़िता का कहना है कि इन्हें फाँसी हो जाए।

मामले में, यूपी ATS का कहना है कि छांगुर पीर धर्मांतरण का एक बड़ा रैकेट चला रहा था। यह रैकेट ₹100 करोड़ से ज़्यादा का है। इसे खाड़ी देशों से पैसा मिलता था।

यह रैकेट गरीब, दलित और विधवा हिंदू महिलाओं को निशाना बनाता था। वह लालच और धमकी देकर उनका धर्म बदलवाता था।

छांगुर पीर का धर्मांतरण मामला

बलरामपुर में एक बड़े अवैध धर्मांतरण नेटवर्क को चलाने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर (जिसे हाजी पीर जलालुद्दीन, पीर बाबा या हजरत बाबा भी कहा जाता है) पुलिस की गिरफ्त में हैं। छांगुर पीर पर हिंदू लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप है।

छांगुर पीर का नेटवर्क खाड़ी देशों से ₹100 करोड़ से अधिक की विदेशी फंडिंग प्राप्त करता था। इस फंडिंग से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजमा देता था। गैंग के पास 40 से अधिक बैंक खाते थे, जिनमें बड़े पैमाने पर लेनदेन होता था।

छांगुर पीर इन पैसों से लग्जरी गाड़ियाँ, बंगले और अन्य संपत्तियाँ खरीदता था। गैंग जाति के आधार पर धर्मांतरण के लिए पैसा देता था। गैंग में शामिल मुस्लिम युवक हिंदू पहचान बताकर युवतियों को प्रेमजाल में फँसाते और उनका ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण करवाते।

छांगुर पीर के साथ नीतू रोहरा उर्फ नसरीन भी पुलिस की गिरफ्त में है। ATS ने बताया कि पूरा नेटवर्क भारत में फैला है। इस गैंग के 14 अन्य सदस्य फरार हैं, जिनकी तलाश में टीमें जुटी हुई हैं।

फिलहाल छांगुर पीर की अवैध ठिकानों पर बुलडोजर चलाया जा रहा है और उसके खिलाफ ATS, पुलिस और ED समेत कई एजेंसियाँ जाँच कर रही हैं।

छांगुर पीर का मामला केवल धर्मांतरण का नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आपराधिक गैंग का है। विदेशी फंडिंग और ‘शिजर-ए-तैयबा’ जैसी सामग्री का उपयोग करते हुए, यह रैकेट ‘लव जिहाद’ और लालच के माध्यम से कमजोर वर्गों (खासकर हिंदुओं) को निशाना बना रहा था। एटीएस और ईडी की लगातार कार्रवाई इस गहरी साजिश की परतों को खोल रही है।

नेपाल के रास्ते भारत में आतंकी भेजने में जुटा पाकिस्तान, हाफिज सईद और मसूद अजहर कर रहे तैयारी: नेपाली राष्ट्रपति के सलाहकार ने बताया-7 मुस्लिम बहुल इलाकों को बना सकते हैं लॉन्चिंग पैड

पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे आतंकी अब नेपाल के रास्ते भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। हाफिज सईद का संगठन लश्कर ए तैयबा और मसूद अजहर का जैश के मोहम्मद पाकिस्तान-भारत की सीमा को पार करने के बजाए अब नेपाल के रास्ते भारत में आने की कोशिश कर सकता है। इस खतरे की जानकारी खुद नेपाल के राष्ट्रपति के सलाहकार ने दी है।

नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के सलाहकार सुनील बहादुर थापा ने आतंकवाद को क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। उन्होंने 9 जुलाई को काठमांडू में नेपाल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल को ऑपरेशन एंड एंगेजमेंट की ओर से आयोजित सेमिनार में कही। सेमिनार ‘दक्षिण में आतंकवाद: क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए चुनौतियाँ’ विषय पर आयोजित की गई थी।

नेपाल से खुली सीमा का उठा सकता है फायदा

भारत और नेपाल के बीच 1751 किलोमीटर लंबी खुली सीमा रेखा है। यहाँ चौकसी काफी कम होती है। आतंकवादियों के लिए अपनी पहचान छिपा कर इससे आना दूसरी जगहों की तुलना में आसान है। जम्मू कश्मीर में आतंकियों की एंट्री पर कड़ा पहरा होने के बाद आतंकी दूसरे दरवाजे की तलाश कर रहे हैं इसलिए हाल के वर्षों में नेपाल में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। नेपाल से भारत के बीच आने-जाने के लिए सड़क मार्ग आसान है। यहाँ वीजा नहीं लगता और हर दिन हजारों लोग सीमा पार करते हैं। नेपाली दस्तावेज बनाना यहाँ आसान है।

नेपाल में हिन्दू बहुसंख्यक हैं। इसके बाद बौद्ध का नंबर आता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यहाँ मुस्लिमों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है खास कर भारत-नेपाल से सटे तराई क्षेत्रों में। साल 2021 की जनगणना के मुताबिक मुस्लिम की जनसंख्या 4.27 फीसदी है। ये लोग सबसे ज्यादा 7 जिले में रहते हैं जो यूपी-बिहार से सटे हैं। इन जगहों में आईएसआई के स्लीपर सेल की मौजूदगी भी बताई जाती है। इनसे भारत-नेपाल सीमा की जानकारी लेने और आतंकियों के घुसपैठ के लिए किया जा सकता है।

आतंकवाद को खत्म करने के लिए सहयोग जरूरी

सुनील कुमार थापा ने भारत-नेपाल के मजबूत सहयोग की चर्चा की और खुफिया जानकारी शेयर करने, मनी लॉन्ड्रिंग पर एक्शन और सीमा की चौकसी बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खात्मे के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाना होगा। सेमिनार में पाकिस्तान में आतंक को मिल रही पनाह को क्षेत्रीय देशों और सार्क के लिए बड़ी चुनौती बताया है।

ऑपरेशन सिंदूर की तारीफ की नेपाल ने

उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवाद पर एक मजबूत चोट था। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। थापा ने याद दिलाया कि पहलगाम हमले में एक नेपाली भी आतंकवाद की भेंट चढ़ गया था। इससे पता चलता है कि आतंकवाद की जद में सिर्फ एक देश नहीं बल्कि कई देश हैं।

पहले भी नेपाल की जमीन का इस्तेमाल किया था आतंकियों ने

1999 में इंडियन एयरलाइंस का विमान आईसी-814 का अगवा किया गया था। ये विमान काठमांडू से दिल्ली आ रहा था। आतंकवादी काठमांडू एयरपोर्ट की सुरक्षा चूक का फायदा उठाते हुए फ्लाइट में चढ़ गए। आतंकियों के पास आधुनिक हथियार थे। इनलोगों ने विमान का अपहरण कर लिया था।