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पेड प्रमोशन का टैग लगाए बिना जैकलीन-रणवीर कर रहे थे विज्ञापन, ASCI ने गाइडलाइन्स न मानने पर जारी किए 28 नाम

सोशल मीडिया पर विज्ञापन संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन करने पर एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) ने इंस्टाग्राम के 28 इन्फ्लुएंसरों की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में जैकलीन फर्नांडिस और रणवीर सिंह जैसे बॉलीवुड हीरो-हिरोइनों का नाम है। ASCI की साइट के अनुसार, सोशल मीडिया पर मशहूर इन सभी लोगों को उनकी ओर से निर्देश दिए गए थे कि वो पेड कंटेंट प्रमोट करते हुए उसके साथ ‘डिस्क्लोजर लेबल’ लगाएँ। लेकिन ये सभी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर दिशा-निर्देश मानने में असफल रहे। एएससीआई की ओर से नियमित रूप से जाँच के दौरान यह बात सामने आई कि इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वालों में कई ब्रांड और संस्थान भी शामिल हैं।

अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस को भी इसी क्रम में गाइडलाइंस का पालन करने में विफल पाया गया। वह अपने इंस्टा अकॉउंट से कलरबार कॉस्मेटिक्स का प्रचार कर रही थीं। विज्ञापन में देख सकते हैं कि जैकलीन ने कहीं भी अपने पोस्ट में पेड कंटेंट का टैग नहीं लगाया है और न ही बताया कि वो ब्रांड विज्ञापन कर रही थीं।

वहीं रणवीर सिंह को उनके इंस्टा अकॉउंट पर मान्यवर का प्रमोशन करते देखा जा सकता है। लेकिन उसके पोस्ट में कहीं भीं उन्होंने डिस्कलोजर टैग का इस्तमाल नहीं किया। इसी तरह मास्टरशेफ इंडिया 4 की फाइनलिस्ट करिश्मा सखरानी और टेक ब्लॉगर श्लोक श्रीवास्तव भी इस तरह दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते पाए गए।

ASCI की जनरल सेक्रेट्री मनीषा कपूर ने इस संबंध में बताया कि दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले मामले लगातार बढ़ रहे हैं। वह बोलीं, “हमें उम्मीद है कि हम इंडस्ट्री के लोगों को संकेत दे पाएँ कि हम उपभोक्ता संरक्षण के विषय में गंभीर हैं और भ्रामक विज्ञापनों से एजेंडे को हटा रहे हैं। हम लगातार विज्ञापन में पारदर्शिता का संदेश आगे तक बढ़ाने के लिए ज्यादा से शिक्षित करना, प्रभावशाली लोगों तक पहुँचना जारी रखेंगे।”

बता दें कि पिछले साल जून में एएससीआई ने हर इन्फ्लुएंसर के लिए प्रमोशन वाले पोस्ट में पारदर्शिता के लिए कुछ टैग्स के इस्तेमाल को अनिवार्य किया था। एएससीआई के दिशानिर्देशों में इस बात का उल्लेख है कि कोई भी पेड प्रमोशन के दौरान- Advertisement,ADSponsored, Collaboration, Partnership, Employee, Free gift ऐसे टैग हैं जिन्हें लगाना जरूरी है। ताकि उपभोक्ता किसी भी प्रकार से भ्रमित न हो।

दिशानिर्देशों में कहा गया है- विज्ञापन के कंटेंट से जुड़े डिस्क्लोजर की जिम्मेदारी विज्ञापनदाता की है जिसके उत्पाद या सेवा संबंधी विज्ञापन हैं। इसके अलावा इन्फ्लुएंसर पर भी ‘डिस्कलोजर’ की जिम्मेदारी है। स्पष्ट करने के लिए बताया गया है कि जहाँ एडवर्टाइजर का इन्फ्लुएंसर के साथ मटेरियल कनेक्शन हो, वहाँ विज्ञापनदाता की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगा कि पोस्ट किया गया इन्फ्लुएंसर का विज्ञापन एएससीआई कोड और उसके दिशानिर्देशों के अनुरूप है।

‘गुरुग्राम में खुले में नमाज रोकने वालों पर नहीं हुई कार्रवाई’: सुप्रीम कोर्ट में पूर्व MP अदीब की याचिका, अधिकारियों पर गिर सकती है गाज

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर में जुमे की नमाज के दौरान हिंसक घटनाओं को रोकने में कथित विफलता के लिए हरियाणा के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना ​याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए तत्काल सूचीबद्ध करने पर सोमवार (31 जनवरी, 2022) को सहमति दे दी। बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका देकर राज्य के मुख्य सचिव संजीव कौशल और डीजीपी पीके अग्रवाल के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का आरोप लगाया है।

चीफ जस्टिस एन.वी. रमना, जस्टिस ए.एस. बोपन्ना और जस्टिस हेमा कोहली की तीन जजों बेंच ने पूर्व राज्यसभा सांसद मोहम्मद अदीब द्वारा दायर याचिका के सम्बन्ध में वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह के ‘विशेष उल्लेख’ के तहत सुनवाई पर गौर किया। उन्होंने विभिन्न दलीलें देते हुए इस याचिका पर शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता बताई थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारी 2018 के शीर्ष अदालत के फैसले का पालन नहीं कर रहे हैं, जिसमें हेट क्राइम (हिंसा) को रोकने के लिए कई निर्देश दिए गए थे।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि यह केवल समाचारपत्र की खबरों पर आधारित नहीं है, हमने खुद शिकायत की है। हम एफआईआर दर्ज करने के लिए नहीं कह रहे। इस अदालत ने ही कई उपाय सुझाए हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि मैं इस पर गौर करूँगा और इसे तुरंत उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करूँगा।

याचिका में कहा गया है कि अधिकारियों ने मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोकने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई न कर ‘तहसीन एस पूनावाला बनाम भारत संघ एवं अन्य’ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया है।

याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए कहा था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने नमाज पढ़ने वालों का विरोध करने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। प्रशासन नमाज को बार-बार रोककर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी विफल रहा। याचिका में कहा गया कि हाल के कुछ महीनों में कुछ उपद्रवियों के इशारे पर जुमे की नमाज होने वाले स्थानों के इर्द-गिर्द प्रदर्शन करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। ये लोग धर्म के नाम पर एक समुदाय के खिलाफ नफरत और पूर्वाग्रह का माहौल बनाना चाहते हैं।

पूर्व बसपा सांसद अदीब ने तहसीन पूनावाला की याचिका पर पारित पूर्व फैसले का पालन नहीं करने के लिए हरियाणा के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। जिसमें कहा गया है कि गुरुग्राम में खुले में निर्दिष्ट स्थानों पर नमाज अदा करने में व्यवधान की कथित घटनाएँ हुई हैं।

गौरतलब है कि दिसम्बर में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में पूर्व बसपा सांसद मुहम्मद अदीब ने बताया था कि पिछले कुछ महीनों से नमाज के दौरान लाउडस्पीकर पर नारे लगाकर, मंत्रोच्चारण कर बाधा डाली जा रही है। बार-बार पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन उचित कार्रवाई न होने के चलते उपद्रवियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। लगातार मुस्लिमों के खिलाफ द्वेष फैलाने का अभियान चलाया जा रहा है।

बता दें कि गुरुग्राम में सार्वजनिक जगहों पर खुले में नमाज पढ़ने को लेकर स्थानीय लोग लगातार विरोध कर रहे हैं। हिंदू संगठनों और स्थानीय निवासियों ने एक आवासीय परिसर के पास खुले मैदान में नमाज अदा करने पर आपत्ति जताई थी। उसके बाद गुरुग्राम सहित कई स्थानों पर विरोध की खबरें लगातार आती रहती हैं।

‘या तो हम रहेंगे या गुस्ताख़’: गुजरात के किशन भरवाड की हत्या का आरोपित मौलाना रखता था ‘गुस्ताखों’ की लिस्ट, इस्लामी संगठन ने की तारीफ़

गुजरात के अहमदाबाद में मारे गए हिंदू युवक किशन भरवाड की हत्या के मामले में गुजरात ATS ने मौलाना कमर गनी उस्मानी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उसके पहले के कई वीडियो सामने आ रहे है जिसमें वह कट्टरपंथी तत्वों को उकसाने वाले बयान देता दिखाई दे रहा। अब सामने आ रहे एक अन्य वीडियो में उस्मानी ‘या हम नहीं या गुस्ताख़’ जैसे बयान देता दिखाई दे रहा है। यह वीडियो अप्रैल 2019 का बताया जा रहा है।

इस वीडियो में उस्मानी ‘तहरीक फरोग ए इस्लामी’ दिल्ली के मंच पर बैठा दिखाई दे रहा है। वीडियो में वो बोल रहा, “हमने एक स्लोगन दिया है। हमने पूरी उम्मत ए मुस्लिमां को, पूरे हिंदुस्तान के मुस्लिमों को ये पैगाम दिया है कि, “अब या हम रहेंगे या गुस्ताख़।” क्योंकि गुस्ताख़ बाहर घूमता रहे और हम आराम चैन सुकून से बैठे रहें ये हमारा इश्क गवारा नहीं करता।” वीडियो में पीछे से बेशक – बेशक की आवाजें आती हैं।

‘सुदर्शन न्यूज़’ के मुताबिक यह शब्द उस्मानी ने महामंडलेश्वर यति नरसिंहानन्द के विरुद्ध बोले थे। इसी कार्यक्रम में मौलाना एक लिस्ट दिखा रहा है। वो उस लिस्ट में कई लोगों का नाम भी बता रहा। वो उन सभी को गुस्ताख़ बताते हुए उन्हें सलाखों के पीछे करने की माँग कर रहा।

तहरीक फरोग ए इस्लाम ने आरोपित मौलाना उस्मानी को ‘मर्द ए कलंदर, कहा

‘तहरीक फरोग ए इस्लाम’ ने किशन भरवाड की हत्या में आरोपित मौलाना उस्मानी को “मर्द ए कलंदर’ की उपाधि दी है। तहरीक ने मौलाना की गिरफ्तारी को गैर कानूनी बताया है। साथ ही आरोपित मौलाना की शान में कसीदे गढ़े हैं।

संगठन द्वारा पोस्ट किए गए लेख के मुताबिक मौलाना पुलिस की ज्यादती के खिलाफ मज़लूमों की आवाज उठाने वाले व्यक्ति थे। इस पोस्ट में भी तमाम लोगों पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही पुलिस को 100 बार सोचने की नसीहत दी गई है। अंत में लिखा गया, “जुल्मी के खिलाफ जितनी देर से उठोगे, क़ुरबानी उतनी ज्यादा देनी पड़ेगी।”

गौरतलब है कि किशन भरवाड की हत्या में साजिशकर्ता मौलाना उस्मानी की दिल्ली पुलिस से झगड़े हुए भी वीडियो वायरल हुई है। इसी के साथ वह कथित तौर पर पिछले साल त्रिपुरा में हुए दंगों में भी पकड़ा गया था।

मालदीव में भारत विरोधी अभियान को अवैध घोषित करेगी वहाँ की सरकार: पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चला रहे, चीन के हैं समर्थक

मालदीव में चीन के समर्थक पूर्व राष्ट्रपति अब्‍दुल्‍ला यामीन (Abdulla Yameen) द्वारा भारत के खिलाफ चलाए जा रहे जहरीले ‘इंडिया आउट’ कैंपेन के खिलाफ सत्तारूढ़ मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (Maldivian Democratic Party) ने कड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मालदीव सरकार यामीन के भारत विरोधी अभियान को गैरकानूनी घोषित करने के लिए नया विधेयक ला रही है। ऐसा करके मालदीव एक संतुलित विदेशी नीति को अपना रहा है, जो अन्य देशों के साथ उसके संबंधों को मजबूत बनाने में कारगर सिद्ध होगा।

नए विधेयक में भारत विरोधी नारे लगाने पर 20,000 मालदीवियन रुफिया का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा 6 महीने की जेल या फिर 1 साल के लिए नजरबंद किया जा सकता है। मालदीव में पत्रकार अहमद अजान ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “मालदीव सरकार ने India Out नारे के इस्तेमाल को अपराध घोषित करने का फैसला किया है। सत्तारूढ़ दल द्वारा तैयार किए गए विधेयक के अनुसार, इस अभियान में भाग लेने वालों को 6 महीने तक की जेल हो सकती है।”

दरअसल, जेल से छूटने के बाद अब्दुल्ला यामीन के ‘इंडिया आउट’ अभियान में और ज्‍यादा तेजी आई है। पूर्व राष्ट्रपति ने भारत पर देश की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करने और मालदीव की मौजूदा सरकार पर भारत के साथ ‘मिलीभगत’ करने का आरोप लगाया है।

ऐसे में मौजूदा राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह Ibrahim Mohamed Solih और उनकी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी एमडीपी ‘इंडिया आउट’ अभियान को रोकने के लिए संसद में एक नया विधेयक पेश करेंगे। सोलिह ‘इंडिया फर्स्ट’ विदेश नीति के प्रबल समर्थक रहे हैं। उनकी सरकार ने हाल के दिनों में पाया कि विपक्ष द्वारा भारत विरोधी जहरीला अभियान मालदीव और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नुकसान पहुँचा सकता है।

वहीं, विपक्ष ने नए विधेयक का विरोध जताते हुए इसे मालदीव के लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला करार दिया है। Progressive Congress Coalition की प्रवक्ता हीना वालीद ने आरोप लगाया, “यह लोगों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है। विदेशी हितों के लिए लोगों के इकट्ठा होने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।” बीते दिनों मालदीव की सरकार में विदेश मंत्री अब्‍दुल्‍ला शाहिद ने भी यामीन को कड़े शब्‍दों में नसीहत दी थी। शाहिद ने कहा था कि मालदीव को मदद देने वाले पड़ोसी देश पर हमला करना मूर्खता है।

बता दें कि भारत और मालदीव हमेशा से अच्छे पड़ोसी देश रहे हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में चीन की बढ़ती गतिविधियों के कारण मालदीव रणनीतिक रूप से भारत से दूर होता जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के नेतृत्व में मालदीव में भारत विरोधी अभियान चलाया जा रहा है। लोग ‘इंडिया आउट’ की टी-शर्ट पहने भारत सरकार के खिलाफ विरोध जताते नजर आ रहे हैं। उनकी माँग है कि मालदीव से भारत की मौजूदगी खत्म होनी चाहिए।

वाइन कंपनी में डायरेक्टर हैं संजय राउत की पत्नी और बेटियाँ, हर साल ₹100 करोड़ का मुनाफा: BJP नेता ने किया खुलासा

भारतीय जनता पार्टी के नेता किरीट सोमैया ने संजय राउत (Sanjay Raut) को उनकी ‘वाइन शराब नहीं’ टिप्पणी के लिए फटकार लगाई है। सोमैया ने शिवसेना नेता पर आरोप लगाया कि संजय राउत ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनकी दो बेटियाँ एक वाइन कंपनी की पार्टनर हैं और उनका कारोबार में बड़ा निवेश है जिससे राउत के परिवार को सालाना 100 करोड़ रुपए का मुनाफा होगा।

किरीट सोमैया (Kirit Somaiya) ने रविवार, 30 जनवरी, 2022 को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर संजय राउत पर कई गंभीर आरोप लगाए। पत्रकारों से बात करते हुए किरीट सोमैया ने कहा, “महाराष्ट्र सरकार ने यह फैसला संजय राउत के परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए लिया है, जो एक वाइन कंपनी के साथ पार्टनरशिप में है। महाराष्ट्र के बड़े उद्योगपति अशोक गर्ग की मैगपाई ग्लोबल लिमिटेड नाम की वाइन कंपनी में संजय राउत की पार्टनरशिप है। उनका इस वाइन व्यवसाय में बड़ा इन्वेस्टमेंट है। संजय राउत की दोनों बेटियाँ और पत्नी कंपनी में डायरेक्टर के पद पर हैं। इस कंपनी का पब, क्लब्स, होटल और वाइन डिस्ट्रिब्यूशन का व्यवसाय है। वाइन व्यवसाय में बड़ा इन्वेस्टमेंट होने की वजह से ही संजय राउत मॉल्स और किराने की दुकानों में वाइन बिक्री के फैसले का समर्थन कर रहे हैं और महाराष्ट्र को ‘मद्यराष्ट्र’ बनाने में लगे हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमैया ने आगे आरोप लगाया कि कंपनी शराब वितरण में शामिल है और कंपनी में संजय राउत का निवेश है। यही कारण है कि वह सुपरमार्केट और वॉक-इन स्टोर में शराब की बिक्री की अनुमति देने के राज्य सरकार के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “इस कंपनी का शराब वितरण का कारोबार है। शराब कारोबार में भारी निवेश को देखते हुए संजय राउत सुपरमार्केट में शराब बेचने के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। इसलिए संजय राउत ‘वाइन मतलब शराब नहीं’ कह रहे हैं और कह रहे हैं कि इस फैसले से किसान को फायदा होगा।”

किरीट सोमैया ने कहा, “16 अप्रैल 2021 को संजय राउत के परिवार ने इस कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। संजय राउत की दोनों बेटियाँ- विधिता और पूर्वशी इस कंपनी में डायरेक्टर हैं।” सोमैया ने कहा कि अगर उनके आरोप गलत हैं तो संजय राउत इसे गलत साबित करके दिखाएँ।

वहीं संजय राउत ने किरीट सोमैया के आरोपों का जवाब देते हुए अपने बयान में वाइन व्यवसाय से जुड़े उद्योपति से अपने संबंध जाहिर करते हुए कहा, “हाँ, उद्योगपति अशोक गर्ग हमारे मित्र हैं। तो? अगर कोई शख्स, कोई परिवार किसी तरह का बिजनेस करता है, कोई काम करता है तो गुनाह करता है क्या? मैंने उनसे दोस्ती करके गुनाह किया है? बीजेपी के कितने नेताओं की वाइनरी और शुगर मिलें हैं, यह भी पता करिए। आप हमारे घरों के अंदर तक घुस रहे हैं। बच्चों तक बात आ रही है। महाराष्ट्र की राजनीति का यह संस्कार नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति में यह सब चलेगा नहीं।”

गौरतलब है कि महाराष्ट्र की महाविकास आघाडी सरकार ने राज्य के मॉल्स, सुपर मार्केट और किराने की दुकानों में वाइन बिक्री की इजाजत दे दी है। इसका बीजेपी विरोध कर रही है। संजय राउत ने अपनी सरकार के इस फैसले का समर्थन करते हुए इसके बचाव में अजीबोगरीब तर्क दिया है। और कहा था कि वाइन मतलब शराब नहीं है। इसकी बिक्री बढ़ने से किसानों को फायदा होगा। हमने किसानों की आय को दोगुना करने के लिए ऐसा किया है।

8 पत्नियों के साथ एक ही घर में रहता है यह शख्स: न कभी झगड़ा, न कभी तकरार… आठों से मुलाकात की दिलचस्प है कहानी

अक्सर आपने लोगों को ये कहते सुना होगा कि आप दूसरी शादी क्यों नहीं कर लेते, जिसका जवाब कई दफा होता है कि एक ही नहीं सँभल रही तो दूसरी कैसे सँभालेंगे। वैसे तो कई लोग 2-3 शादियाँ भी कर लेते हैं, लेकिन शायद ही सभी एक साथ खुशी-खुशी रह पाते हैं, लेकिन थाईलैंड (Thailand) में एक ऐसा आदमी है जिसकी 1-2 नहीं बल्कि 8 पत्नियाँ (Eight Wives) हैं और सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि वे सभी एक ही घर में खुशी-खुशी साथ रहते हैं। 

इस शख्स का नाम ओंग डैम सोरोट (Ong Dam Sorot) है। उन्होंने इतनी शादियाँ की हैं कि अक्सर सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा होती रहती है। ओंग डैम पेशे से टैटू आर्टिस्ट हैं। वे अपनी 8 पत्नियों के साथ एक ही घर में रहते हैं। खास बात ये है कि सभी पत्नियाँ उनसे बहुत प्यार करती हैं और सभी आपस में बहुत मिलनसार हैं। उनके बीच कभी किसी बात को लेकर लड़ाई नहीं होती। 

बड़ी मजेदार हैं इनकी मुलाकात की कहानी 

ओंग अपनी पत्नियों से पहली बार कब और कैसे मिले, कैसे प्यार हुआ और फिर शादी कैसे हुई, ये कहानी भी बड़ी मजेदार है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी पहली पत्नी का नाम नोंग स्प्राइट है। ओंग उससे एक दोस्त की शादी में मिला था और दोनों को पहली नजर में एक-दूसरे से प्यार हो गया और फिर बाद में उन्होंने शादी कर ली। 

उसी समय, ओंग पहली बार अपनी दूसरी पत्नी नोंग एल से एक बाजार में मिले, जबकि वह अपनी तीसरी पत्नी नोंग नान से एक अस्पताल में मिले। फिर वह चौथी पत्नी से इंस्टाग्राम पर, पाँचवीं फेसबुक पर और छठी टिकटॉक पर मिली। यह मिलन बाद में प्यार और फिर शादी में बदल गया।

सभी मिलकर चलाते हैं घर खर्च 

ओंग की सातवीं पत्नी नोंग की बात करें तो वह एक बार अपनी माँ के साथ मंदिर गए थे, फिर उनसे मिले और फिर बात शादी तक पहुँच गई। इसके बाद जब वे अपनी अन्य पत्नियों के साथ छुट्टियाँ बिताने के लिए कहीं गए थे, उसी समय उनकी आठवीं पत्नी नोंग माई से मुलाकात हुई। इस बारे में ओंग बताते हैं, “मैं अपनी चार पत्नियों को साथ लेकर पट्टाया में छुट्टियों का मजा ले रहा था। वहाँ नोंग मिल गई और उसने भी हमसफर बनने का फैसला कर लिया। बाकी पत्नियों को भी कोई ऐतराज नहीं था।”

इस तरह उन्होंने अब तक कुल 8 शादियाँ की हैं। ऐसा नहीं है कि ओंग बहुत अमीर हैं, इसलिए उनकी सभी पत्नियाँ उनके साथ रहती हैं। वे सभी छोटे व्यवसाय करते हैं और एक साथ रहते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह पूछे जाने पर कि महिलाओं ने ऐसे पुरुष से शादी करने का फैसला क्यों किया, जो पहले से ही शादीशुदा था, तो सभी महिलाओं ने सहमति व्यक्त की और कहा, “उसके प्यार में पागल थीं।”

पति के साथ रोमांस के लिए अपनी बारी आने का इंतजार करती हैं पत्नियाँ

उनके इस सफल और खुशहाल जीवन का राज उनका देखभाल करने वाला स्वभाव है। उनकी सभी पत्नियाँ इस बात को स्वीकार करती हैं कि सोरोट एक देखभाल करने वाले व्यक्ति हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सोरोट की पहली पत्नी से उन्हें एक बेटा है। उन्होंने बताया कि उनकी दो पत्नियाँ फिलहाल प्रेगनेंट है। ओंग की पत्नियाँ चार अलग-अलग बेडरूम में सोती हैं और अपने पति के साथ रोमांस के लिए अपनी बारी आने का इंतजार करती हैं।

थाईलैंड के राजा भी हैं रंगीन मिजाज के

उल्लेखनीय है कि थाईलैंड के राजा महा वजीरालोंगकोरन भी रसिक मिजाज के हैं। उन्हें रामा ‘दशम’ के नाम से भी जाना जाता है। कोरोना वायरस महामारी के दौरान भी राजा का शाही अंदाज नहीं गया। उन्होंने इस वायरस के संक्रमण से बचने के लिए दक्षिणी जर्मनी के शानदार और भव्य होटल में 20 सहवासनियों (ऐसी स्त्रियाँ जिनका आपके साथ शारीरिक संबध तो होता है लेकिन वैवाहिक नहीं) के साथ आइसोलेशन में चले गए थे। 67 साल के थाई राजा ने स्थानीय जिला प्रशासन की आज्ञा लेने के बाद इस पूरे होटल को बुक कर लिया था।

फोन पर गंदी-गंदी बातें करता था शिवसेना नेता, महिला ने बीच बाजार चप्पलों से पीटा: ‘आइटम’ भेजने के लिए भी कहता था

मुंबई के एक शिवसेना नेता को महिला द्वारा चप्पलों से पिटाई का वीडियो वायरल हो रहा है। पिटाई एक ऑटो रिक्शे के अंदर हो रही है। घटना पूरी विरार इलाके की बताई जा रही है। पिटाई के बाद महिला ने आरोपित के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई है। पुलिस आरोपित की तलाश कर रही है। घटना शनिवार (29 जनवरी, 2022) की है।

आरोपित का नाम जितेंद्र अनंत खाड़े उर्फ़ जीतू बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जीतू शिवसेना के संभाग प्रमुख हैं। घटना के दिन एक ऑटो में बैठे जीतू को एक महिला के साथ एक अन्य युवक ने पीटना शुरू कर दिया। पिटाई करने वाली महिला ने बताया, “ये मुझसे फोन पर गंदी-गंदी बातें करता था। मुझ से आइटम भेजने के लिए बोलता था। मैंने शुरू में इसकी हरकतों को इग्नोर किया। इसका नंबर भी ब्लॉक कर दिया। फिर इसने मुझे नए नम्बरों से फोन कर के परेशान करना शुरू कर दिया। आए इन की दिक्कतों के बाद मैंने इसको सबक सिखाने की ठान ली थी। इसे मैंने विवर में खोज निकाला।”

पीड़िता ने आगे बताया, “मैं विरार में रहती हूँ। 10 – 12 साल से ऑटो चला कर अपना परिवार चला रही हूँ। जीतू ने मुझे 5 बार फोन किया। मुझ से अश्लील बातें। की। ये ऐसा किसी और के साथ न करे इसलिए मैंने इसको सबके आगे पीटा है। मुझे मेरे किए पर कोई पछतावा नहीं।” एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक शिवसेना के पालघर उप जिलाप्रमुख दिलीप पिंपले ने कहा, “जीतू की इस हरकत का हम समर्थन नहीं करते। उन पर कार्रवाई के लिए हम वरिष्ठ अधिकारियों से बात की जाएगी।”

घर पर ग्रेनेड अटैक, माँ जख्मी; फिर भी 8 साल की हिमप्रिया ने नहीं मानी हार: मिलिए उससे जिसने 3 घंटे तक आतंकी को रोके रखा

हाल ही में 73वें गणतंत्र दिवस के मौके पर देश के 29 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) से सम्मानित किया गया। इनमें से किसी ने अपनी चालाकी और बहादुरी से आतंकी हमले में अपने परिवार को बचाया तो किसी ने मगरमच्छ से लड़कर अपने भाई की जान बचाई। कोई सिंगिंग चैंपियन है तो कोई खेल में अपना जलवा बिखेर रहा है। हर एक बच्चे की कहानी जानदार है, जिसे जानकर आपको भी इन कर्णधारों पर नाज होगा।

इन्हीं बच्चों में से एक है आंध्र प्रदेश की 12 साल की गुरुगु हिमप्रिया (Gurugu Himapriya)। उसने 2018 में जम्मू-कश्मीर में एक आतंकवादी हमले के दौरान अपनी माँ और दो छोटी बहनों को बचाया था। उस समय हिमप्रिया की उम्र 8 साल थी। उन्हें इस बहादुरी के लिए पुरस्कार दिया गया है।

हिमप्रिया अपने पिता हवलदार गुरुगु सत्यनारायण, माता पद्मावती और बहनों ऋषिता और अवंतिका के साथ जम्मू-कश्मीर के सुंजवान में सेना के आवासीय क्वार्टर में रह रही थीं। इस बीच 10 फरवरी 2018 को जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने आर्मी कैंप पर हमला कर दिया। जब हमला हुआ था सत्यनारायण उधमपुर में ड्यूटी पर तैनात थे।

हिमप्रिया ने ही सेना को किया था अलर्ट

एक आतंकवादी को क्वार्टर में घुसते देख पद्मावती ने खुद को अपनी तीन बेटियों के साथ बेडरूम में बंद कर लिया। आतंकी ने दरवाजे को तोड़ने की हर कोशिश की। लेकिन हिमप्रिया ने माँ के साथ मिलकर किसी तरह दरवाजे को टूटने से बचाए रखा। आखिर में आतंकी ने ग्रेनेड से हमला कर दिया जिससे पद्मावती बुरी तरह घायल हो गईं। हिमप्रिया को भी चोटें लगी। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। माँ को होश में लाने का प्रयास करती रही। ग्रेनेड धमाके के बाद आतंकी घर के भीतर घुस चुका था। उसने सबको बंधक बना लिया। हिमप्रिया ने आतंकवादी को तीन-चार घंटे तक अपनी बातों में उलझाए रखा

आतंकी से हिमप्रिया अपनी माँ को अस्पताल ले जाने की जिद करती रही। इसने सेना को कार्यवाही करने के लिए समय दिया और आतंकी मार गिराया गया। आतंकियों की कोशिश थी कि वे सैन्य परिवारों को निशाना बनाएँ। लेकिन इस चाल को हिमप्रिया की वीरता ने नाकाम कर दिया था।

29 बच्चे हुए सम्मानित

इस साल, बाल शक्ति पुरस्कार की तमाम श्रेणियों के तहत देश भर से 29 बच्चों को पीएमआरबीपी-2022 के लिए चुना गया है। इन PMRBP पुरस्कार विजेताओं को ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी के जरिए साल 2022 और 2021 के डिजिटल प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएँगे। इन बच्चों में कुमारी गौरी माहेश्वरी, सईद फतीन अहमद, रिमोना ईवेट परेरा, दौलस लेम्बा मायूम, देवी प्रसाद, धृतिश्मान चक्रवर्ती, गुरुगु हिमप्रिया, शिवांगी काले, धीरज कुमार, विशालिनी, जुई अभिजीत केसकर, शिवम रावत, बनिता दास, पुहाबी चक्रवर्ती, अश्वथा बीजू, तनिश सेठी, अवि शर्मा, आकर्ष कौशल, मेधांश कुमार गुप्ता, अभिनव कुमार चौधरी, पल साक्षी,जिया राय, तेलुकुंटा विराट चंद्र, श्रिया लोहिया, अन्वी विजय झांझरुकिया, चंद्रय सिंह चौधरी, स्वयं पाटिल, तरुणी गौड़ और आरुषी कोतवाल का नाम शामिल है।

छात्रों के प्रदर्शन के बहाने राजनीति, सोशल मीडिया पर प्रोपेगंडा: कॉन्ग्रेस के हैंडल और NCP नेताओं द्वारा वायरल की गई तस्वीरों का फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 25 जनवरी, 2022 (मंगलवार) को हजारों छात्रों ने रेलवे भर्ती परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगा कर प्रदर्शन किया था। कुछ समय बाद यह प्रदर्शन हिंसक हो गया था। रेलवे लाइनों की पटरियों भर भीड़ का जमावड़ा हो गया। साथ ही ट्रेनों के साथ आम जनता के आने-जाने का मार्ग अवरुद्ध कर दिया गया था। इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए।

इस घटना पर प्रयागराज के एसएसपी IPS अजय कुमार ने बयान देते हुए कहा, “25 जनवरी को प्रयाग स्टेशन के पास लगभग 1 हजार उपद्रवी तत्वों के जमा होने की सूचना पुलिस को मिली थी। सूचना में रेलवे ट्रैक को जाम करना और संभावित रूप से रेल इंजन में आग लगाना भी शामिल था। इस पर पुलिस बल पूरी तैयारी के साथ सीनियर अधिकारियों के साथ मौके पर पहुँचा था। छात्रों को समझा-बुझा कर वापस किया जा रहा था। इसी दौरान छात्रों के ही बीच में छिपे कुछ उपद्रवी तत्व पुलिस पर पथराव करने लगे। पथराव करने के बाद वो जा कर के लॉज में छिप गए थे। उन्हीं को चिह्नित करने और खोजने के लिए पुलिस टीमें वहाँ गई थीं। कई लोगों को पकड़ कर भी लाया गया था। इसमें से 2 मुख्य अभियुक्त मुकेश यादव और प्रदीप यादव सामने आए थे। इन्हें गिरफ्तार किया गया था।”

SSP प्रयागराज ने आगे बताया, “एक छोटे से वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी अनावश्यक बल प्रयोग करते दिखाई दिए। उनको चिह्नित कर के निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उनके खिलाफ कठोरतम विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है। छात्रों की आड़ में छिपे उपद्रवी तत्वों के खिलाफ 13 गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 3 नामजद के साथ लगभग 1 हजार अज्ञात उपद्रवी तत्वों पर केस दर्ज हुआ है। तीसरे नामजद आरोपित का नाम राजेश सचान है। इसी ने छात्रों को सोशल मीडिया पर भड़काया। उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। राजेश सचान नाम का आरोपित एक विशेष मंच से जुड़ा हुआ है। साथ ही उसका साथ कुछ विशेष पार्टियों से है। इसी ने रात में अचानक सोशल मीडिया पर कुछ गतिविधियाँ की। इन ट्वीट्स को छात्रों के बीच फैलाया गया। छात्रों को प्रदर्शन में जमा करने के बदले बेहतर भविष्य दिखाया गया जो कि गलत था। इसी से छात्र उकसावे में आए और ये कार्रवाई हुई। हमने 11 लोगो की टीम लगाई है उस विशेष पार्टी का नाम और उनके फंडिग स्रोत को पता करने के लिए। मुकदमे छात्रों पर नहीं बल्कि उपद्रवी तत्वों पर लिखे गए हैं।”

‘दैनिक जागरण’ की गलत फोटो हुई वायरल

प्रयागराज में पुलिस द्वारा बल प्रयोग के मामले में ‘दैनिक जागरण’ में खबर प्रकाशित हुई। खबर के लिए प्रयोग हुआ फोटो प्रयागराज की घटना का न हो कर कहीं और का निकला। साथ ही फोटो कम से कम 3 साल पुराना था। फोटो में एक युवक के पीठ पर लाठियों के निशान थे। यह फोटो कुछ ही देर में सोशल मीडिया के लगभग सभी प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो गया। बाद में ‘दैनिक जागरण’ ने अपने द्वारा गलती से प्रकाशित फोटो पर माफ़ी माँगी।

‘दैनिक जागरण’ की खबर और खंडन

‘कॉन्ग्रेस सेवा दल’ केरल ने ट्वीट की गलत फोटो

जिस फोटो पर ‘दैनिक जागरण’ ने माफ़ी माँगी उसी फोटो को ‘केरल कॉन्ग्रेस सेवा दल’ ने 28 जनवरी, 2022 को आधिकारिक रूप से ट्वीट किया है। साथ ही उसमें #BJPCheatsStudents का टैग लगाया है

सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे अलग-अलग समय के अलग-अलग फोटोज

सोशल मीडिया पर कई हैंडल दिल्ली और लखनऊ की अलग-अलग समय की घटनाओं को प्रयागराज की 25 जनवरी 2021 की घटना से जोड़ कर वायरल करते दिखे। इसमें से कई हैंडलों को प्रयागराज पुलिस अफवाह उड़ाने से मना करती दिखी।

JNU में हुए लाठीचार्ज को बताया गया प्रयागराज की घटना

काका किसान (@rskkishan) नाम के हैंडल ने अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर को टैग करते हुए JNU में लगभग 2 साल पहले हुए लाठीचार्ज को प्रयागराज की तस्वीर बता कर ट्वीट किया है। इस पर प्रयागराज पुलिस ने उन्हें ऐसा न करने का जवाब दिया है।

प्रयागराज पुलिस का कहना है, “यह चित्र प्रयागराज के किसी भी मामले से संबंधित नहीं है। कृपया अपुष्ट तथ्यों के आधार पर भ्रम ना फैलाएँ, अन्यथा कठोर वैधानिक कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।”

मुंबई के NCP नेता ने शेयर की 2 साल पुरानी तस्वीर

एक अन्य ट्वीट में जिन तस्वीरों को दक्षिण मुंबई के NCP नेता अहमद ने 27 जनवरी को प्रयागराज का बता कर शेयर किया है। उसी तस्वीर को कॉन्ग्रेस के ही राहुल गाँधी नवम्बर 2018 में सहायक शिक्षक भर्ती का बता कर ट्वीट कर चुके हैं।

मुंबई के यूथ कॉन्ग्रेस नेता अहमद ने भी उड़ाई अफवाह

खास बात ये है कि अहमद के ट्वीट को 100 से अधिक लोग बिना सोचे समझे RT कर चुके हैं।

बंगाल से अहमद वायरल कर रहे CAA विरोधी दंगो की तस्वीर

पश्चिम बंगाल के कलीमपांग (Kalimpong) के रहने वाले आर्यन अहमद ने भी प्रयागराज की फर्जी तस्वीर शेयर की है। उन्होंने साल 2019 में CAA विरोधी प्रदर्शन की फोटो को प्रयागराज की घटना से जोड़ा।

CAA विरोधी प्रदर्शन को प्रयागराज की घटना बताता आर्यन अहमद

आगरा के जावेद शेयर कर रहे बिहार की वीडियो

जावेद अहमद ने बिहार पुलिस की पटना में हुई कार्रवाई को प्रयागराज की वीडियो बता कर शेयर किया। जावेद के अनुसार, “प्रयागराज में इस छात्र की बेबसी और आँसू बेकार नहीं जाएँगे। इसका जवाब वोट की चोट से दिया जाएगा। हमने जामिया में पुलिस की बर्बरता का भी विरोध किया था। प्रयागराज में भी पुलिस की बर्बरता का विरोध करते हैं। “सब याद रखा जाएगा”

योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर हर दोषी को दंड की बात कही

इस पूरे घटनाक्रम पर UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने TV9 पर एक इंटरव्यू में अपना पक्ष रखा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “कानून सबके लिए समान रूप से है। अगर पुलिस ने गलत किया है तो वहाँ पर गृह विभाग ने कार्रवाई भी किया है। लेकिन जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाला व्यक्ति छात्रों के कंधों पर बंदूक रख के, कॉन्ग्रेस और सपा के बहकावे में आ कर जिन लोगों ने कानून हाथ में लिया वो कानून के दायरे में जरूर आएँगे। जो गलत हुआ है उसके लिए जवाबदेही भी तय की गई है। जहाँ कार्रवाई होनी थी वहाँ कार्रवाई हुई है। लेकिन जिस भी पक्ष से गलत हुआ है, दोनों बराबर कार्रवाई के हकदार होंगे।”

पुलिस के आगे लग रहे थे “जय अखिलेश’ और “अखिलेश यादव जिंदाबाद” के नारे

समाजवादी पार्टी के नेता आई पी सिंह ने अपने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है। उस वीडियो में उन्होंने खुद ही माना है कि छात्र ‘अखिलेश यादव जिंदाबाद’ के नारे लगा रहे थे। समाजवादी नेता के मुताबिक लाठीचार्ज की वजह यही नारे थे।

सपा नेता द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो में पुलिस के वाहन दिखाई दे रहे हैं। साथ ही छतों और खिड़कियों से जय अखिलेश के नारे लगाए जा रहे हैं।

पुलिस की अपील पर ताली बजाते दिखे छात्र

घटना के बाद प्रयागराज के SSP छात्रों के बीच गए थे। उनका छात्रों से अपील का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वो कहते दिख रहे हैं, “कार्रवाई उपद्रवियों पर की गई है। आप यहाँ से सफल हो कर जाएँ। आपका नाम और आपके माता-पिता का नाम हो। मैंने खुद भी यहीं प्रयागराज से तैयारी की है। आप सब पढ़ाई पर ध्यान लगाएँ। आप शरारती तत्वों के बहकावे में न आएँ। चुनाव के समय ऐसे तमाम नेता उभर रहे हैं। कार्रवाई निष्पक्ष होगी। कोई भी निर्दोष परेशान नहीं किया जाएगा।”

एसएसपी प्रयागराज की अपील पर वहाँ मौजूद तमाम छात्रों ने तालियाँ बजाईं।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दिया था दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई का भरोसा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ट्वीट कर के कहा था, “प्रयागराज में छात्रों के साथ घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी। छात्रों से संयम की अपील है। विपक्ष छात्रों के मामले में राजनीति न करे। जिन लोगों ने छात्रों की आड़ लेकर उपद्रव किया है जाँच कर उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक छात्र हमारा परिवार है।”

अब तक 6 पुलिसकर्मी हुए हैं सस्पेंड

वीडियो में हॉस्टल में घुस कर तोड़फोड़ करने वाले पुलिस बल के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस मामले में अब तक 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड किए गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन पुलिसकर्मियों के नाम इंस्पेक्टर राकेश भारती, सब इंस्पेक्टर शैलेंद्र यादव, सब इंस्पेक्टर कपिल कुमार चहल और कांस्टेबल मोहम्मद आरिफ, कांस्टेबल अच्छे लाल और कॉन्स्टेबल दुर्वेश कुमार हैं।

ऑपइंडिया ने SSP प्रयागराज से की बात

ऑपइंडिया ने इस पूरी घटना पर SSP प्रयागराज IPS अजय कुमार से बात की। उन्होंने बताया, “इस उपद्रव में अफवाह उड़ाने का मुख्य आरोपित राजेश सचान भी गिरफ्तार कर लिया गया है। अब तक मामले में 3 आरोपितों को जेल भेजा जा चुका है। केस की गहनता से जाँच करवाई जा रही है। मामले में कुल 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए हैं। सस्पेंड पुलिसकर्मियों में 1 इंस्पेक्टर, 2 सब इंस्पेक्टर और 3 कांस्टेबल हैं। सभी की भूमिका जाँची जा रही है। जाँच उपरान्त निष्कर्ष पर नियमनुसार कार्रवाई की जाएगी।”

किशन भरवाड के हत्यारे को उकसाने वाला मौलाना उस्मानी, कई महीने से था कट्टरपंथियों को भड़काने के लिए बेताब: Video

हिंदू युवक किशन भरवाड की हत्या के मामले में गुजरात पुलिस और गुजरात ATS ने हाल में मौलाना कमर गनी उस्मानी को दिल्ली से पकड़ा है। उसकी गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में दिल्ली पुलिस से सिर्फ इसलिए झगड़ रहा है क्योंकि पुलिस उसे कट्टरपंथियों को भड़काने वाले प्रदर्शन में जाने से रोक रही है।

स्वराज्य पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा द्वारा शेयर की गई जानकारी के अनुसार, ये वीडियो अगस्त माह की है जब उस्मानी एक ऐसे प्रदर्शन के लिए आतुर था, जहाँ उसके समर्थक ईशनिंदा करने वालों के लिए मौत की माँग कर रहे थे।

इस वीडियो में उस्मानी को कहते देख सकते हैं, “हम इस प्रदर्शन में जाकर ही रहेंगे। हमें किसी बात को नहीं समझना है। हमारे नबी की शान में गुस्ताखी हुई है। हम क्या समझेंगे। हम क्यों समझेंगे। आप लोगों ने समझा है कि आप मुकदमों से हमें डरा लेंगे। 8 अगस्त को वहाँ अल्लाह की शान में गुस्ताखी की गई। आप लोग हमें यहाँ कानून बताते हैं। उस समय आप लोगों का कानून कहाँ चला जाता है।”

पुलिस, मौलाना से कहती है कि वो इन सब चीजों को पॉलिटिकल मंच न बनाएँ। इस पर मौलाना कहता है कि वो कोई राजनैतिक मंच नहीं बना रहा लेकिन वो प्रदर्शन में जाकर रहेगा चाहे जो हो। इसके आगे कोई बात नहीं होगी। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “सारा कानून हमारे लिए होता है। चाहे कोई बद्तमीजी करे या कुछ भी करे।”

बता दें कि अगस्त में जो मौलाना कट्टरपंथियों को भड़काने के लिए पुलिस की एक बात सुनने को तैयार नहीं था, उसे हाल में किशन भारवाड़ की हत्या के बाद हत्यारे को उकसाने के आरोप में पकड़ा गया है। कथिततौर पर पिछले साल त्रिपुरा में हुए दंगों में भी कमर को पकड़ा गया था