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करीमनगर में नाबालिग ने फुटपाथ पर बैठे लोगों पर चढ़ाई कार, चार औरतों को कुचला: कानपुर में बस हादसे में 6 की मौत

तेलंगाना के करीमनगर जिले में रविवार (30 जनवरी 2022) को एक नाबालिग ने तेज रफ्तार कार फुटपाथ पर बैठे लोगों पर चढ़ा दी। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई। करीमनगर के पुलिस कमिश्नर वी सत्यनारायण ने घटना की जानकारी देते हुए बताया, “एक नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार कार की चपेट में आने से चार महिलाओं की मौत हो गई। कार फुटपाथ पर बैठे लोगों के ऊपर चढ़ गई। कार में सवार नाबालिगों पर आईपीसी की धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

वहीं उत्तर प्रदेश के कानुपर में भी रविवार देर रात दर्दनाक हादसा हो गया। शहर के व्यस्तम चौराहे टाटमिल पर एक अनियंत्रित इलेक्ट्रॉनिक बस कई लोगों को रौंदते हुए ट्रैफिक बूथ व कंटेनर में जा घुसी। हादसे में 6 लोगों की मौत व 9 लोगों के घायल होने की खबर आ रही है।

बताया जा रहा है कि ड्राइवर का बस पर से नियंत्रण हट जाने के बाद यह हादसा हुआ है। बस ने सामने से आ रही है कि एक ट्रक को भी टक्कर मारी है। जिस समय ये हादसा हुआ उस समय चौराहे पर भीड़ थी। जिसकी वजह से कई राहगीर इसके चपेट में आ गए हैं। इनमें से छह की मौत भी हो गई है। मौत की संख्या अभी बढ़ भी सकती है। घायलों को नजदीकी अस्पताल भी भेजा गया है। 

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए ट्वीट किया। जिसमें उन्होंने लिखा, “कानपुर में हुई बस दुर्घटना में कई लोगों के हताहत होने की खबर से अत्यंत दुःख हुआ है। इस घटना में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति मेरी गहन शोक-संवेदनाएँ। मैं घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।”

ओमप्रकाश राजभर के बेटे ने पत्रकार अशोक श्रीवास्तव को पिटाई की दी धमकी, बाद में डिलीट किया ट्वीट: सपा के साथ है गठबंधन

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता के अंत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के करीब आकर उनसे सवाल करने पर उनके सुरक्षाकर्मी ने जिस तरह पत्रकार को धक्का दिया, उस घटना की वीडियो जगह-जगह वायरल है। इसी संबंध में दूरदर्शन के वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने भी ट्विटर पर अपना मत रखते हुए घटना का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें सुहेलदेव भारतीय समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने उन्हें खुलेआम पिटाई की धमकी दी।

बता दें कि अखिलेश यादव के सामने पत्रकार के साथ हुई बदसलूकी मामले में अशोक श्रीवास्तव ने लिखा था, “जब सपा सरकार थी तब पत्रकार जगेंद्र को एक मंत्री के खिलाफ लिखने पर ज़िंदा जला दिया था। आज गाजियाबाद में अखिलेश यादव के सामने उनके बॉडीगार्ड्स ने पत्रकार खालिद चौधरी की पिटाई की। नई सपा या वही सपा ?”

इस ट्वीट के बाद अरुण राजभर ने वरिष्ठ पत्रकार को लिखा, “आपकी पिटाई भी होनी चाहिए। दलाली करने का अवार्ड आप जैसे पत्तलकारों को मिलना चाहिए।”

बता दें कि अरुण राजभर के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर हंगामा हो गया। कई यूजर्स ने एक वरिष्ठ पत्रकार के लिए ऐसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने पर अरुण राजभर की निंदा की। साथ ही इसे एक धमकी बताया। अपने ट्वीट पर बवाल होता देख अरुण राजभर ने इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है। लेकिन इसके स्क्रीनशॉट अब भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं। अशोक श्रीवास्तव ने भी इस ट्वीट पर यूपी पुलिस को टैग किया है। कुछ लोग इस विषय पर चुनाव आयोग से अपील कर रहे हैं कि वो इस पर संज्ञान लें।

उल्लेखनीय है कि समाजवादी पार्टी की प्रेसवार्ता में पत्रकार से हुई बदसलूकी पर अरुण राजभर क्यों भड़के, इसके लिए जानना जरूरी है कि इस बार प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी के साथ उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का गठबंधन है। पार्टी के महासचिव अरुण राजभर ने पिछले साल अक्टूबर में इसकी जानकारी खुद दी थी।

‘टीका लगवाया तो हमारे बच्चे नहीं होंगे…’: मुस्लिम बहुल नूंह कोरोना वैक्सीनेशन में फिसड्डी, कैंपेन में दिख रही सरकार की साजिश

दुनिया का सबसे बड़ा कोरोना वैक्सीनेशन (Covid Vaccination) अभियान कुछ लोगों को सरकार की साजिश लगती है। उन्हें लगता है कि टीका लेने के बाद वे बच्चे नहीं पैदा कर पाएँगे। यह हाल हरियाणा के मुस्लिम बहुल जिले नूंह (Nuh) का है। हरियाणा (Haryana) के 22 जिलों में से एक नूंह, देश के उन 48 जिलों में से एक हैं जो कोरोना टीकाकरण (Corona Vaccination) में फिसड्डी है।

सरकारी आँकड़े बताते हैं कि नूंह में अब तक केवल 72 फीसदी लोगों ने ही वैक्सीन की पहली डोज ली है। दोनों डोज लेने वाले केवल 35 फीसदी हैं। यह हाल तब है जब वैक्सीनेशन अभियान शुरू हुए साल भर के करीब हो चुके हैं। अब 60 साल से ज्यादा की उम्र वाले और फ्रंट लाइन वर्कर को बूस्टर डोज भी लगनी शुरू हो चुकी है। बुस्टर डोज (Booster Dose) के मामले में भी नूंह का हाल बुरा है। अब तक केवल 821 लोगों ने ही यह डोज ली है।

बच्चों के वैक्सीनेशन का भी जिले में ऐसा ही हाल है। 15 से 17 साल की उम्र के करीब 90,000 बच्चे जिले में होने का अनुमान है। इनमें से अब तक 29,206 बच्चों को ही टीके की पहली खुराक मिली है।

इन आँकड़ों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा रखी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नवंबर 2021 में उन्होंने नूंह में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जिले में कम टीकाकरण को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चिंतित हैं। बताया जाता है जब से स्थानीय प्रशासन ने राशन, पेट्रोल, पेंशन, बैंकिंग आदि सेवा के लिए वैक्सीनेशन को अनिवार्य किया है, स्थिति में मामूली सुधार आया है।

कम टीकाकरण (Lowest Corona Vaccination in Nuh) की वजह जानने को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने जिले में तैनात डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों से बात की है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नूंह में तैनात डॉक्टर हर्षित गोयल ने बताया, “लोग अजीब तरह की दलीलें देते हैं। इनमें एक बहुत आम है कि टीका लगवाया तो हमारे बच्चे नहीं होंगे। हम लोगों को इस संबंध में जागरूक करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन नूंह में साक्षरता दर बहुत कम होने के कारण हमारी कोशिशों को उस तरह की सफलता नहीं मिल रही।” इसी सामुदायिक केंद्र में तैनात एक अनाम स्वास्थ्यकर्मी के हवाले से बताया गया है, “यहाँ इंटरनेट वगैरह भी चलाना कम लोग जानते हैं। इससे उन्हें कोविन (COWIN) एप या पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराने में भी परेशानी होती है। वे इससे बचने की कोशिश करते हैं। हालाँकि हम उनकी पूरी मदद कर रहे हैं।”

इसी तरह घसेरा के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात सुनीता ने बताया, “कुछ लोगों को कोरोना टीकाकरण में सरकार की साजिश नजर आती है। इस तरह की और भी कई अफवाहें हैं। इन्हें दूर करने के लिए हम पंचायतों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्हें टीकाकरण के फायदों के बारे में बता रहे हैं।” लेकिन जिले के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर सुरेंद्र कुमार ने अफवाहों की वजह से कम टीकाकरण की बात का खंडन किया है। बीते सप्ताह एसडीएम ने स्थानीय मौलवियों के साथ भी एक बैठक की थी ताकि हालात में सुधार आए और लोग अफवाहों पर यकीन न करें।

ट्विटर-गूगल के बाद अब WHO ने की भारत के नक्शे से छेड़छाड़: जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को दिखाया पाक-चीन का हिस्सा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) विश्व के नक्शे में जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को पाकिस्तान और चीन का हिस्सा दिखा रहा है। इस बात का खुलासा तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शांतनु सेन ने वर्ल्ड मैप के स्क्रीनशॉट डालकर किया है। उन्होंने इस मुद्दे पर पीएम मोदी को पत्र लिखकर जल्द से जल्द हस्तक्षेप करने को कहा है।

शांतनु सेन ने अपने पत्र में पीएम मोदी को बताया, “जब मैंने WHO की कोविड 19 साइट खोली तो मुझे भारत का नक्शा दिखा जिसमें जम्मू-कश्मीर का अलग रंग था और उसके भीतर भी एक छोटा हिस्सा अलग रंग से था। जब मैंने उसे जूम करके उन पर क्लिक किया तो पाकिस्तान और चीन के कोविड आँकड़े नजर आए।” 

सेन ने जानकारी दी कि ब्लू हिस्से में क्लिक करने पर मैप में भारत का डेटा आया पर अलग भाग पर क्लिक करने पर वो पाकिस्तान का कोविड डेटा शो कर रहा था। तृणमूल सांसद का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश के एक हिस्से को भी भारत से अलग चीन का भाग दिखाया गया है। सेन ने इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए भारतीय सरकार से इस संबंध में हस्तक्षेप करने को कहा।

ट्विटर और गूगल भी कर चुके हैं भारत के नक्शे से जम्मू-कश्मीर गायब करने का काम

बता दें कि साल 2021 में ट्विटर ने भारत के नक्शे से जम्मू-कश्मीर को हटाने का प्रयास किया था। इसके अलावा साल 2020 में लेह को ट्विटर द्वारा लेह को चीन का भाग दिखाया गया था। ट्विटर के अलावा गूगल ने अपने ‘ट्रेंड्स’ सेक्शन में भारत का गलत नक्शा दिखाया था, जिसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख के हिस्सों को गायब कर दिया गया था।

इसके बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने गूगल (Google) को भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने पर आपत्ति जताई थी और उसे नक्शा जल्द से जल्द सुधारने की सलाह दी थी। लोगों ने इस दौरान भारत सरकार द्वारा डाले गए नक़्शे को भी शेयर किया था। भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किए जाने के बाद दोनों का स्पष्ट नक्शा जारी कर दिया था, बावजूद इसके Google और ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म इन्हें भारत का हिस्सा नहीं दिखा रहे हैं।

‘डायरेक्टर के साथ रहना होगा वरना…’ : कास्टिंग काउच पर दिव्यांका त्रिपाठी ने तोड़ी चुप्पी, याद किए संघर्ष वाले दिन

टेलीविजन दुनिया की मशहूर एक्ट्रेस दिव्यांका त्रिपाठी ने कास्टिंग काउच पर खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब वो इंडस्ट्री में नई थीं तब वो एक ब्रेक की तलाश में थीं। इसी दौरान उन्हें एक डायरेक्टर के साथ समय बिताने का ऑफर आया था। दिव्यांका ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनसे कहा गया था कि या तो वो डायरेक्टर के साथ समय बिताएँ वरना उनका करियर बर्बाद कर दिया जाएगा।

दिव्यांका ने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि ऐसे लोग इस तरह के प्रस्ताव देते हैं और आपको यकीन दिलाते हैं कि इंडस्ट्री में कास्टिंग काउच सामान्य चीज है। हर कोई इसे कर रहा है। बॉलीवुड बबल से बातचीत में वह बताती हैं, “एक शो खत्म करने के बाद दोबारा से संघर्ष शुरू हो जाता है। एक समय था जब मुझपर पैसे नहीं थे। मुझे अपने बिल देने होते थे। ईएमआई भरनी होती थी। बहुत प्रेशर होता था और उस समय आपको ऑफर आए कि आपको इस डायरेक्टर के साथ रहना होगा तो आपको ब्रेक मिल जाएगा। वो जिस तरह इस चीज को बेचते थे। ऐसा लगे कि यही रास्ता है अपनी जिंदगी बनाने का।”

भावी एक्टर्स को सलाह देते हुए दिव्यांका ने कहा, “जो लोग इस तरह के ऑफर देते हैं। वो लालच देते हैं कि ये काम तो सभी कर रहे हैं। ये सब मी टू मूवमेंट से पहले का है। कई बार ये लोग आपको करियर को खत्म करने की भी धमकी देते।” दिव्यांका बातचीत में बताती हैं कि उनके पास भले ही ऐसे ऑफर आए लेकिन उन्होंने जीवन में जो हासिल किया वो अकेले दम पर किया।

उल्लेखनीय है कि दिव्यांका त्रिपाठी टीवी इंडस्ट्री का एक बहुत जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘बनूँ मैं तेरी दुल्हन से’ की थी और इसके बाद वो स्टार प्लस के फेमस शो ये हैं मोहब्बतें की भी लीड एक्ट्रेस थीं। उन्हें हास में खतरों के ख़िलाड़ी शो में देखा गया था। मालूम हो कि दिव्यांका के अलावा कई एक्ट्रेस पिछले दिनों मनोरंजन की दुनिया में चल रहे कास्टिंग काउच के घिनौने खेल को उजागर कर चुकी हैं।

‘किसानों पर दर्ज सारे मुकदमे हों वापस’ : राकेश टिकैत 31 जनवरी को फिर करेंगे ‘विरोध’, किया ऐलान

राम मंदिर को देखकर भड़कने वाले राकेश टिकैत ने सोमवार (31 जनवरी 2022) को ‘विश्वासघात दिवस’ मनाने का ऐलान किया है। किसान नेता टिकैत ने रविवार (30 जनवरी 2022) को कहा कि 9 दिसंबर 2021 को सरकार द्वारा किए गए वादों के एक पत्र के आधार पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया था, लेकिन जो वादे उनसे किए गए थे वो अब तक पूरे नहीं हुए।

राकेश टिकैत ने ऐलान किया कि सरकार द्वारा किसानों से वादाखिलाफी के खिलाफ 31 जनवरी को देशव्यापी ‘विश्वासघात दिवस’ मनाया जाएगा। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “31 जनवरी को पूरे देश में ‘विरोध दिवस’ होगा। हमारी माँग है कि केंद्र उनके द्वारा दिल्ली में एमएसपी पर किए गए वादे को पूरा करे। और साल भर के विरोध के दौरान किसानों पर दर्ज मामले भी रद्द करें।”

बता दें कि इससे पहले राकेश टिकैत ने कई मीडिया चैनलों से बातचीत के दौरान 31 जनवरी को वादाखिलाफी दिवस मनाने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा था कि वो 31 जनवरी को पूरे देश में बड़े अधिकारियों को ज्ञापन देंगे और वादा खिलाफी दिवस मनाया जाएगा।

राम मंदिर देख भड़के राकेश टिकैत

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किसान नेता राकेश टिकैत के राजनीति संबंधी बयान आने बंद नहीं हो रहे। हाल में उन्हें इंडिया टीवी ने अपने शो ‘चुनाव मंच’ में अतिथि के तौर पर बुलाया था, जहाँ इस मुद्दे पर बात हो रही थी कि आखिर ‘किसानों का मुख्यमंत्री कौन है’ लेकिन यहाँ भी टिकैत का रवैया राजनीतिक ही देखने को मिला।

बीच शो में राकेश टिकैत इस बात पर चिल्ला पड़े कि आखिर उनके पीछे लगे बैकग्राउंड में राम मंदिर की तस्वीर क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कैमरा और कलम पर अब बंदूक का पहरा है इसीलिए शो में राम मंदिर को दिखाया जा रहा है। इसके बाद उनकी आवाज तेज होती गई और वह चैनल पर प्रचार करने का आरोप लगाते रहे। उनके समर्थकों ने पीछे से हल्ला करना शुरू कर दिया। इसी बीच एंकर ने किसान नेता का ये रवैया भांपते हुए उन्हें फटकार लगाई और समझाया कि अगर वो मेहमान हैं चैनल के तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो कुछ भी अनाप-शनाप बोलेंगे।

राजस्थान में निजामुद्दीन उर्फ़ राज खान ने किया नाबालिग का रेप: हीरोइन बनाने का झाँसा, YouTube पर कॉमेडी वीडियो बनाती थी पीड़िता

राजस्थान के पाली से एक मामला सामने आया है, जहाँ निजामुद्दीन उर्फ़ राज खान ने यूट्यूबर बनाने का झाँसा देकर एक नाबालिग के साथ रेप किया। पीड़िता 12वीं की छात्रा है। पुलिस ने इस मामले में आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि निजामुद्दीन उर्फ़ राज खान ने जोधपुर के एक होटल में ले जाकर छात्रा के साथ बलात्कार किया। साथ ही उसे हत्या की धमकी भी दी। आरोपित को रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पीड़िता की उम्र मात्र 16 वर्ष है।

आरोपित ने पीड़िता को झाँसा दिया था कि वो उसे YouTube पर एक टॉप एक्ट्रेस बना देगा। औद्योगिक थाना क्षेत्र में रहने वाली पीड़िता यूट्यूब पर कॉमेडी वीडियो बनाती है। तीन-चार वर्षों से वीडियो प्लेटफॉर्म पर सक्रिय है। हाल ही में उसकी मुलाकात बाबरा हाल निवासी आरोपित से हुई। निजामुद्दीन उर्फ़ राज खान ने झाँसा दिया कि वो न सिर्फ उसे यूट्यूब पर शीर्ष की हीरोइन बना देगा, बल्कि इससे उसकी अच्छी कमाई भी होगी। पीड़िता उसके झाँसे में आ गई।

8 जनवरी, 2022 को वो पीड़िता को लेकर जोधपुर गया। वहाँ से एक फ्लैट में रखा। उसने पीड़िता के साथ एक कॉमेडी वीडियो भी शूट किया। उसी रात को उसने पीड़िता के साथ बलात्कार किया। उससे जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाए। जब पीड़िता ने कहा कि वो परिजनों को इस बारे में बता देगी, तब उसके साथ मारपीट भी की गई। साथ ही हत्या की धमकी दी। नाबालिग डर और लोकलाज के मारे कुछ दिनों तक खामोश रही। फिर किसी तरह वहाँ से पाली पहुँची।

‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, जब पीड़िता ने परिजनों को पूरी घटना के बारे में बताया तो परिवार वालों ने औद्योगिक क्षेत्र थाने में जाकर मामला दर्ज कराया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर के अदालत में पेश किया, जहाँ से उसे जेल में भेजा गया। नाबालिग पीड़िता कई अन्य जाने-माने कॉमेडियंस के साथ भी काम कर चुकी है। 29 जनवरी को उसे पाली लाया गया था। रविवार (30 जनवरी, 2022) को रिमांड की अवधि पूरी होने पर आरोपित को जेल भेजा गया।

चलती हैं तालाब से नरकंकाल निकलने और मगरमच्छ पालने की कहानियाँ: 47 मुकदमों वाले ‘राजा भैया’, लगातार 6 बार जीता चुनाव

उत्तरप्रदेश के बाहुबली नेताओं में एक सबसे चर्चित नाम राजा भैया का है। राजा भैया वर्तमान में प्रतापगढ़ जिले की कुंडा विधानसभा सीट से विधायक हैं और इनकी पार्टी का नाम जनसत्ता लोकतांत्रिक दल है। इनका पूरा नाम रघुराज प्रताप सिंह हैं जबकि अधिकांश लोग इन्हें राजा भैया और कुछ लोग इन्हें तूफान सिंह कहकर भी बुलाते हैं। आपने यदि यूपी के अंदर या बाहर इस नेता की बातें सुनीं हैं तो एक किस्सा आपको जरूर बताया गया होगा कि ये बाहुबली नेता अपने तालाब में मगरमच्छों को पालता था और जो इनका विरोध करता था उन्हें उस तालाब में फेंक दिया जाता था।

राजा भैया से जुड़े ऐसे तमाम किस्सों में कितनी सच्चाई है इस बात को राजा भैया से जब-जब पूछा गया उन्होंने हमेशा इसे हँसी में टाला। लेकिन ये कहानियाँ कभी बंद नहीं हुई और जब-जब चुनावी बयार चली तो ये हर बार प्रासंगिक होती गईं। बात चाहे उनके पहले चुनाव के समय कम उम्र की हो या फिर घुड़सवारी करते शूट की… राजा भैया समय के साथ युवा नेता के तौर पर जितना मशहूर हुए उससे ज्यादा उनसे जुड़े कहानियों को हवा मिली। दिलचस्प बात ये है कि तमाम भयभीत करने वाली कहानियों के बावजूद राजा भैया प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा क्षेत्र से लगातार 6 बार निर्दलीय चुनाव जीते हैं। कुछ साल पहले उन्होंने अपनी पार्टी जनसत्ता दल का गठन किया था।

निर्दलीय हासिल की 6 बार जीत

लखनऊ में पढ़ाई के बाद 1993 से राजनीति में उतरने वाले बाहुबली नेता के ख़िलाफ़ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, अपहरण, समेत तमाम संगीन धाराओं में 47 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे। साल 2002 में मायावती के शासन काल में इन्हें जेल जाना पड़ा था। इतना ही नहीं बातें ये भी सामने आई थीं कि राजाभैया की बेंटी कोठी पर हुई छापेमारी में, जहाँ उनका तालाब है, वहाँ से नरकंकाल बरामद हुए थे।

इसी तरह साल 2010 में भी मायवती की सरकार आने पर उनके ऊपर बीडीसी सदस्य के अपहरण का मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद वह दोबारा जेल गए थे। फिर 3 मार्च 2013 को क्षेत्राधिकारी जिया उल हक की हत्या मामले में राजा भैया का नाम उछला था। मगर सीबीआई जाँच में उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। इसके बाद राजा भैया खाद्य व रसद मंत्री जब बने तो उन पर रुपए गबन का आरोप लगा। 

इस तरह तमाम मामलों, मीडिया में प्रचलित हुईं कहानियों के चलते उनका नाम यूपी के बाहुबली नेताओं में शुमार हो गया। मगर, मालूम हो कि राजा भैया के समर्थक उन्हें अब भी बेदाग छवि वाला नेता मानते हैं। उनकी लोकप्रियता इतनी है कि उनके स्वागत में आतिशबाजियाँ तक होती हैं। बताया जाता है कि राजा भैया अपने समर्थकों को बिजली-पानी-सड़क के अलावा आश्वस्त करते हैं कि वो उनके घरों की समस्याओं का भी समाधान करेंगे। घर का झगड़ा हो या सास बहू का झगड़ा…हर तरह की समस्या का समाधान करने का वादा वो अपने क्षेत्र के लोगों से करते रहे हैं।

गौरतलब है कि राजा भैया का नाम कई नेताओं के साथ जोड़ा जाता रहा है। लेकिन पिछले सालों में उन्होंने चुनावों में जब-जब जीत हासिल की, तब-तब सपा को अपना समर्थन दिया। मगर, जिया उल हक की हत्या के बाद अखिलेश यादव और उनके रिश्ते में खटास आ गई और इस बार समाजवादी पार्टी ने उनके ख़िलाफ़ उनके दोस्त गुलशन यादव को ही चुनावी मैदान में उतार दिया।

कई तस्वीरों में राजा भैया के पीछे खड़े नजर आने वाले गुलशन यादव इस बार अखिलेश यादव की पार्टी से कुंडा के प्रत्याशी हैं। जब जिया उल हक की हत्या मामले में राजा भैया पर आरोप लगे थे तो उनके साथ -साथ गुलशन यादव को भी इस केस में आरोपित बनाया गया था। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली थी।

गौरतलब है कि नकारात्मक कारणों से हमेशा चर्चा में रहे राजा भैया इस समय चुनाव से पहले खुलकर मीडिया में बयान दे रहे हैं। वह जगह-जगह अपने ऊपर लगे आरोपों को लेकर खुलकर बातें कर रहे हैं। हाल में उन्होंने द लल्लनटॉप को एक इंटरव्यू दिया। जहाँ उन्होंने अपने तालाब से लेकर जिया उल हक की मृत्यु तक के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें खुद नहीं पता उनसे जुड़ी अफवाहें कैसे-कैसे फैलीं। जिस तालाब को लेकर बात होती है वहाँ तो वो मछली पालते हैं। अगर कोई मछली पालेगा तो वो वहाँ मगरमच्छ क्यों पालने का काम करेगा। इसी तरह डीएसपी जिया उल हक की हत्या पर उन्होंने उन हालातों को बयां किया जब उन्हें गोली मारी गई थी।

बता दें कि योगी सरकार के आने के बाद कुछ लोगों ने दावा किया था कि राजा भैया पर लगे कई केस वापस लिए जा रहे हैं। हालाँकि बाहुबली और माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई करने वाली योगी सरकार ने ये स्पष्ट बताया था कि 2017 के बाद से योगी सरकार आने के बाद राजा भैया से जुड़े कोई केस वापस नहीं लिए गए। मामले वहीं हैं जो थे। उधर, कुंडा में लोकप्रिय और प्रचलित कहानियों के कारण बाहुबली बने राजा भैया को इस बार चुनाव से पहले कई इंटरव्यू में योगी सरकार की नीतियों की तारीफ करते देखा गया है। कुछ दिन पहले वह काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए गए थे। यहाँ उन्होंने मोदी सरकार के प्रयासों के बाद तैयार हुए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर को अलौकिक और अद्भुत बताया था।

‘ये जो गर्मी दिखाई दे रही है न, मैं मई-जून को भी शिमला बना देता हूँ’: हापुड़ में गरजे CM योगी, मुजफ्फरनगर-कैराना का किया जिक्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार (30 जनवरी, 2022) को हापुड़ में मतदाता संवाद कार्यक्रम को सम्बोधित किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने के लिए वहाँ उन्होंने मतदाताओं से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “ये गर्मी जो अभी कैराना में और मुजफ्फरनगर में कुछ जगह दिखाई दे रही है न… मैं मई और जून की गर्मी में भी ‘शिमला’ बना देता हूँ। हापुड़ के पिलखुआ में ये कार्यक्रम आयोजित था। उनके बयान के बाद प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज़ हो गई है।

उन्होंने कहा कि 10 मार्च, 2022 को चुनाव परिणाम आने के साथ ही ये गर्मी भी शांत हो जाएगी। इससे पहले उन्होंने कहा था, “चोला ‘समाजवादी’ + सोच ‘दंगावादी’ + सपने ‘परिवारवादी’ = ‘तमंचावादी”। एक अन्य ट्वीट में सीएम योगी ने लिखा था, “पेशेवर अपराधी और माफिया चुनाव के दौरान धौंस दिखाने का प्रयास करेंगे, लेकिन 10 मार्च के बाद इनके गले में तख्ती लटकती हुई दिखाई देगी। ये लोग किसी थाने की चौखट पर ‘बख्श दो’ की भीख मांगते हुए दिखाई देंगे।”

बता दें कि कैराना में हिन्दुओं के पलायन की खूब चर्चा हुई थी, लेकिन सीएम योगी के शासनकाल में कई हिन्दू वापस लौटे हैं और हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे मुलाकात भी की थी। कई विपक्षी नेता धमकी भरे बयान दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज का बयान उनलोगों के लिए ही था। उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से ही मतदान शुरू होना है, ऐसे में प्रचार-प्रसार जोरों पर है। कोरोना के कारण चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध है, लेकिन नेता जनसम्पर्क अभियान चला सकते हैं। भीड़ न जुटाने का निर्देश दिया गया है।

जिस सुलेमान पर CAA विरोधी दंगों में पुलिस पर गोली चलाने के लगे थे आरोप, उसकी माँ को कॉन्ग्रेस का टिकट: नामांकन ख़ारिज

साल 2019 में CAA विरोधी दंगों में पुलिसकर्मी को गोली मारने के आरोपित बिजनौर के सुलेमान की माँ अकबरी बेगम को कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा टिकट दिया गया था। आत्मरक्षा में पुलिस द्वारा चलाई गई गोली से सुलेमान की मौत हो गई थी। कागज़ातों की जाँच के बाद उनके पर्चे को ख़ारिज कर दिया गया है। पर्चा ख़ारिज होने के पीछे कागज़ातों पर प्रदेश अध्यक्ष के हस्ताक्षर न होना बताया जा रहा है। इस बात की जानकारी अकबरी बेगम के बेटे शुऐब ने दी है। अकबरी बेगम को बिजनौर सदर से प्रत्याशी बनाया गया था। अकबरी बेगम ने घर-घर जा कर चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था। सुलेमान पर बिजनौर पुलिस के कॉन्स्टेबल पर गोली चलाने का आरोप लगा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अकबरी बेगम बिजनौर के नहटौर क्षेत्र में रहती हैं। अकबरी बेगम के मुताबिक मौत के समय उनके बेटे सुलेमान की उम्र 21 साल थी। अकबरी बेगम के मुताबिक उनका बेटा दिल्ली में रह कर IAS की तैयारी करता था। दिल्ली से सुलेमान 15 दिसंबर, 2019 को नहटौर आया था। सुलेमान के भाई शुएब के मुताबिक घटना 20 दिसंबर 2019 की थी। इस दिन उनका भाई नहटौर में जुमे की नमाज पढ़ने गया था। उसके साथ अनस नाम का एक अन्य युवक भी था।

दंगे में इन दोनों की मौत हो गई थी। घटना के 4 दिन बाद 24 दिसम्बर 2019 को प्रियंका गाँधी वाड्रा सुलेमान के घर गईं थीं। उस समय उन्होंने योगी सरकार पर निशाना साधा था। साथ ही सुलेमान के घर वालों को हर सम्भव मदद की घोषणा की थी।

ऑपइंडिया ने अकबरी बेगम के बेटे शुऐब से की बात

ऑपइंडिया से बात करते हुए शुऐब ने बताया, “हमारे साथ खेल कर दिया गया। हमारा पर्चा अंतिम समय में ख़ारिज कर दिया गया। हमसे कागज़ पर प्रदेश अध्यक्ष के साइन न होने की बात कही गई। जब हमने इसे करवा कर दिया तब अधिकारियों ने समय खत्म हो जाने की बात कही। हमने CAA हिंसा के दौरान कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ अपने भाई की हत्या की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत में बिजनौर के तब के SP संजीव कुमार के आठ SHO राजेश सोलंकी और सिपाही मोहित भी शामिल हैं। उन सभी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमारी FIR दर्ज नहीं हुई है। हम केस दर्ज करवाने के लिए कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। हम अपने भाई के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए हमारे पर्चे को कैंसिल करवा दिया गया। हम केस दर्ज करवाने के लिए अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं।”

पुलिस ने मुताबिक सुलेमान ने पुलिस पर गोली चलाई थी

पुलिस के दावे मृतक मोहम्मद सुलेमान के परिवार वालों से एकदम उलट हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक घटना के दिन 20 दिसम्बर 2019 को जुमे की नमाज़ के बाद भीड़ ने तोड़फोड़ और हंगामा शुरू कर दिया था। CAA के विरोध में पुलिस पर पथराव हुआ। साथ ही आगजनी और तोड़फोड़ भी की गई। इस हमले में पुलिस सब इंस्पेक्टर आशीष तोमर, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के कांस्टेबल मोहित समेत कई अन्य पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक बिजनौर IPS संजीव त्यागी के हवाले से कहा गया, “पुलिस वालों की बंदूक भीड़ ने छीन ली थी। हमारा एक सिपाही उस छीनी बंदूक को वापस लेने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान भीड़ में से किसी ने जवान पर गोली चला दी। वह गोली मोहित कुमार के पेट में लगी। मोहित पर फायर सुलेमान ने किया था। फायर करने के लिए देशी बंदूक का प्रयोग किया गया था। कांस्टेबल मोहित ने आत्मरक्षा में अपनी सर्विस पिस्टल से जवाबी फायरिंग की। यह गोली सुलेमान को लगी थी।”