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झारखंड में उग्र हुआ भोजपुरी और मगही भाषाओं का विरोध: BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पर हमला, थाने में घुस कर बचाई जान

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में भोजपुरी और मगही को शामिल करने को लेकर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया है। भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और कोडरमा के पूर्व सांसद रवींद्र राय पर आंदोलनकारियों ने रविवार (30 जनवरी) को हमला कर दिया। उनके चालक के साथ मारा-पीटा गया और वाहन में तोड़फोड़ की गई।

झारखंड के कई जिलों में इसके विरोध में प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन इसका सबसे अधिक असर धनबाद और बोकारो जिले में दिखाई दे रहा है। बोकारो में हेमंत सरकार के विरुद्ध मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया गया। यह मानव श्रृंखला बोकारो नागेन मोड़ से शुरू होकर धनबाद जिले के अंतिम सीमा तक बनाई गई। आजसू ने इस विरोध प्रदर्शन को समर्थन दिया था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन झारखंड सरकार द्वारा जिलास्तरीय नियुक्तियों में भोजपुरी और मगही भाषा को शामिल करने के फैसले के बाद हो रहा है। रवींद्र राय इसी प्रदर्शन के बीच राँची से धनबाद आ रहे थे। इसी दौरान चास थाना क्षेत्र में उन पर हमला किया गया। इस दौरान उनके बॉडीगार्ड के साथ अभद्रता की गई, ड्राइवर को पीटा गया और गाड़ी का शीशा तोड़ दिया गया। रवींद्र राय ने किसी तरह भागकर चास मुफस्सिल थाने में शरण ली।

प्रदर्शनकारी हेमंत सरकार से अपने फैसले को वापस लेने की माँग कर रहे थे। इस प्रदर्शन का आयोजन झारखंड भाषा संघर्ष समिति व आजसू ने संयुक्त रूप से किया था। इस विरोध प्रदर्शन को लेकर पूर्व सांसद रवींद्र ने झारखंड सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है, “जब पूर्व सांसद ही नहीं सुरक्षित है तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी। सरकार इस पर ध्यान दें।”

झारखंड में एकता विकास मंच काफी समय पहले से ही भोजपुरी और मगही को परीक्षाओं में शामिल करने की माँग करता आ रहा है। अगस्त 2021 में उसने इस माँग को ले कर हाईकोर्ट में PIL दाखिल करने का एलान किया था। तब एकता विकास मंच ने इसे मगही और भोजपुरी के अस्तित्व को बचाने के संघर्ष का नाम दिया था।

‘सड़क हादसे में हो सकती है मेरी हत्या’ : आजम खान के बेटे अब्दुल्ला का आरोप, UP पुलिस के बाद लगा BJP से डर

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को उत्तर प्रदेश पुलिस के बाद अब भारतीय जनता पार्टी का डर सताने लगा है। उन्हें शक है कि बीजेपी नेता उन्हें चुनावों से हटाने के लिए उनकी हत्या करवा सकते हैं। अपने आरोप लगाते हुए उन्होंने दावा किया कि उनकी रेकी हो रही है। उन्हें फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की दोबारा तैयारी चल रही है और उन्हें किसी सड़क हादसे में मारने के लिए साजिश रची जा रही है।

मीडिया से बात करते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “कल तक ये साजिश थी कि किसी तरह मेरा नामांकन रद्द करवा दिया जाए, लेकिन साजिश करके भी जब ऐसा नहीं हुआ, अब एक नई साजिश है। मेरी रेकी की जा रही है। मेरा पीछा किया जा रहा है। इस बात का पक्का मालूम है कि मुझे किसी फर्जी मुकदमे में दोबारा जेल भेजने की तैयारी हो रही है या फिर मुझे किसी सड़क हादसे में कुछ भी हो सकता है। फिर चाहे वो स्वार के उम्मीदवार हों या रामपुर शहर के उम्मीदवार हों। इन सबने मिलकर तय किया है कि मुझे रोड एक्सीडेंट में या किसी भी तरह से माहौल खराब करके या मेरे ऊपर हमला कराकर मेरी हत्या करवा दी जाए।”

भाजपा से पहले यूपी पुलिस का डर

गौरतलब है कि इससे पहले अब्दुल्ला आजम खान ने यूपी पुलिस को लेकर अपना बयान जारी किया था। इस बयान में उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें अपनी सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारियों पर भी भरोसा नहीं है। उन्हें डर लगता है कि कहीं पुलिस अधिकारी ही उन्हें गोली न मार दें। अब्दुल्ला ने एएनआई से बातचीत में कहा था, “आपके (बीजेपी नेताओं) पास आपके साथ अधिकारी हैं, आपके साथ पुलिस है, आपके साथ दो सरकारें हैं। मैं अकेला हूँ, मेरे साथ कोई नहीं है। मुझे उन पुलिसकर्मियों पर भी भरोसा नहीं है जो मेरे साथ हैं, वे मुझे गोली मार सकते हैं।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा,  “मेरी सुरक्षा मेरा मालिक करता है या मेरे साथ जो लोग रहते हैं वह करते हैं। मेरे साथ जो सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं वो मेरी रेकी के लिए लगाए गए हैं कि मैं कहा हूँ और किससे मिल रहा हूँ… इन सुरक्षाकर्मियों पर मैं बिल्कुल भरोसा नहीं कर पा रहा हूँ, मुझे नहीं पता कि ये कब मुझे गोली मार दें। मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए।”

मुंबई से गिरफ्तार किया गया यूट्यूबर इकबाल परवेज, CM चौहान के बयान को एडिट कर फैला रहा था झूठ: पूछताछ में कबूली करतूत

मध्य प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मुंबई के एक यूट्यूबर और पत्रकार को यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नई आबकारी नीति को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संपादित वीडियो को अपलोड करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश सरकार द्वारा नई शराब नीति की घोषणा के बाद आरोपित इकबाल परवेज ने फर्जी वीडियो अपलोड किया था।

क्राइम ब्रांच भोपाल के पुलिस उपायुक्त (DCP) अमित कुमार ने बताया कि हमें गुरुवार को उसके बारे शिकायत मिली थी, जिसके बाद 45 वर्षीय स्वतंत्र पत्रकार इकबाल परवेज को महाराष्ट्र के पास ठाणे जिले में स्थित मीरा रोड से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे शनिवार को भोपाल लाया गया है। उस पर सीएम शिवराज सिंह के बयानों को एडिट कर फर्जी वीडियो बनाने का आरोप है। आरोपित ने इस वीडियो को यूट्यूब समेत अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल कर दिया था। परवेज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परवेज अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का पूर्व छात्र है, वह मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और कई राष्ट्रीय चैनलों में बतौर पत्रकार काम कर चुका है। वह पिछले 15 साल से मुंबई में काम कर रहा है। पुलिस उपायुक्त ने कहा कि वर्तमान में परवेज स्वतंत्र पत्रकार है और अपनी खबरों को यूट्यूब पर अपलोड करता है।

पुलिस आयुक्त (एसीपी) के असिस्टेंट शिवपाल कुशवाहा ने कहा कि इकबाल परवेज ने ‘सच सबसे तेज’ नाम के YouTube चैनल पर ‘ये क्या बोल रहे हैं भाजपा के मुख्यमंत्री’ नाम से वीडियो साझा किया था। वीडियो में सीएम के एक पुराने वीडियो को एडिट कर नई आबकारी नीति के लिए दिए गए उनके बयान से जोड़ा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि शराब पीने के बाद लोग ‘जय श्री राम’ के नारे लगाएँगे।

बता दें कि पूछताछ के दौरान उसने मुख्यमंत्री के बयान के वीडियो को एडिट कर उसे अपलोड करने की बात स्वीकार ली है। इस मामले में कितने लोग और शामिल हैं, इस तरह की हरकत करने का उनका मकसद क्या था, इस बारे में इकबाल से पूछताछ की जा रही है।

मौलाना तौकीर रजा पर प्रताड़ना का आरोप लगाने वाली बहू निदा खान भाजपा में शामिल: सपा-बसपा-कॉन्ग्रेस के 21 नेताओं ने भी थामा पार्टी का हाथ

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election) के मद्देनजर नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है। अब कॉन्ग्रेस को अपना समर्थन देने की घोषणा करने वाले विवादित मौलाना तौकीर रजा की बहू निदा खान (Nida Khan) भाजपा में शामिल हो गई हैं। इसके साथ ही समाजवादी (Samajwadi Party), बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samja Party) और कॉन्ग्रेस (Congress) के कुल 21 नेता भाजपा (BJP) में शामिल हो गए हैं।

भाजपा में शामिल होने को लेकर निदा खान ने कहा कि यही एक ऐसी पार्टी है, जिसके शासनकाल में मुस्लिम महिलाएँ सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि तीन तलाक मुद्दा ही वो टर्निंग प्वॉइंट था, जिससे वह प्रभावित हुई थीं। इस कानून के कारण मुस्लिम महिलाएँ सुरक्षित हुई हैं और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने कई सराहनीय काम किए हैं। बीजेपी से मुस्लिमों को कोई परेशानी नहीं है।

आजतक से बातचीत में निदा खान ने कहा कि ‘कॉन्ग्रेस ने लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ का नारा दिया है, लेकिन वहाँ महिलाओं का सम्मान नहीं है। तौकरी रजा को लेकर उन्होंने कहा कि उनके ससुर कुछ समय पहले ही कॉन्ग्रेस में शामिल हुए हैं, लेकिन वह शुरू से ही बीजेपी की सपोर्टर रही हैं।

निदा खान (Nida khan) ने तौकीर रजा पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जिसने अपने ही खानदान की बहू का सम्मान नहीं किया, वो कॉन्ग्रेस के ‘लड़की हूँ लड़ सकती हूँ’ कैम्पेन का समर्थन करने का दिखावा कर रहे हैं। निदा ने कहा था कि पढ़ने के कारण उन्हें एग्जाम सेंटर से उठवा लिया गया, उनके साथ मारपीट की गई और तीन तलाक की धमकी दी गई। उनसे तौकीर रजा ने कहा कि बोलोगी तो फतवा निकलवा दिया जाएगा। निदा कहा था कि तौकीर मियाँ सात साल बाद भी अपनी बहू के साथ इंसाफ नहीं कर पाए तो वो दूसरों के साथ क्या करेंगे।

बता दें कि आला हजरत खानदान के मौलाना उस्मान रजा खाँ उर्फ अंजुम मियाँ के पुत्र शीरान रजा खाँ के साथ 2015 में निदा खान का निकाह हुआ था, लेकिन साल भर पहले ही दोनों का तलाक हो गया। मौलाना उस्मान IMC मुखिया मौलाना तौकीर रजा खाँ के बड़े भाई हैं। तीन तलाक को लेकर निदा खान ने लंबी लड़ाई लड़ी और उनका मामला अभी भी अदालत में चल रहा है।

बता देें कि तौकीर रजा खाँ का विवादों से गहरा नाता है। उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर में मारे गए आतंकियों को शहीद बताया था। इतना ही नहीं, एक टीवी न्यूज एंकर को मुँह तोड़ने की भी धमकी दी थी। बहू निदा खान के खिलाफ फतवा निकलवाने की भी उन्होंने धमकी दी थी।

‘शराब पीने के बाद लोग जय श्रीराम के नारे लगाएँगे’: यूट्यूबर इकबाल परवेज ने CM शिवराज के बयानों का बनाया फर्जी वीडियो, MP पुलिस ने किया अरेस्ट

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) की एक फर्जी वीडियो को लेकर राज्य पुलिस की अपराध शाखा (Madhya Pradesh Police Crime Branch) ने मुंबई से इकबाल परवेज नाम के कथित पत्रकार और यूट्यूबर को गिरफ्तार किया है। परवेज ने सरकार की शराब नीति से संबंधित मुख्यमंत्री चौहान के बयानों को एडिट कर एक आपत्तिजनक वीडियो बनाया था। इस वीडियो को परवेज ने यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया पर वायरल किया था।

बिहार का रहने वाला इकबाल परवेज पहले पत्रकार रह चुका है और अब ‘सच सबसे तेज’ नाम का एक यूट्यूब चैनल चलाता है। वह पिछले 15 सालों से मुंबई रह रहा है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस उसे भोपाल लेकर आई है और दो दिन के रिमांड पर लेने के बाद पूछताछ कर रही है।

दरअसल, सरकार की शराब नीति की घोषणा के बयान, जिसमें उत्पाद शुल्क को कम कर दिया गया है और ₹1 करोड़ से अधिक की वार्षिक आय वाले लोगों के लिए नए होम बार लाइसेंस देने से संबंधित है। इस फर्जी वीडियो को लेकर उस पर आईपीसी की धारा 500, 501, 505 (2), 465, 469 और 294 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के फर्जी वीडियो के मामले पर क्राइम ब्रांच के डीसीपी अमित कुमार ने बताया कि पुलिस को इसके बारे में गुरुवार (27 जनवरी 2022) को शिकायत मिली थी। मुंबई से इकबाल परवेज नाम के लड़के को गिरफ्तार किया गया है और उसे भोपाल लाया गया है। इकबाल परवेज ने ‘Sach Sabse Tez’ नाम के यूट्यूब चैनल पर ‘ये क्या बोल रहे हैं बीजेपी के मुख्यमंत्री’ नाम से एक वीडियो शेयर किया था।

उन्होंने आगे बताया कि उसमें मध्य प्रदेश सरकार की नई शराब नीति को लेकर सीएम के पुराने बयानों को जोड़कर शराब नीति से संबंधित एक वीडियो को आपत्तिजनक रूप देकर शेयर किया था। वीडियो में यह भी कहा गया कि ‘शराब पीने के बाद लोग जय श्रीराम के नारे लगाएँगे’। वीडियो में जिक्र कर रहे लोगों की भी पुलिस जाँच कर रही है। अगर वे लोग भी दोषी पाए जाते हैं तो इस मामले में उन्हें भी आरोपी बनाया जाएगा।

डीसीपी के मुताबिक, प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इकबाल किसी दूसरे व्यक्ति के यू-ट्यूब चैनल के लिए काम करता है। पूछताछ के दौरान उसने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयानों को फर्जी तरीके से एडिट कर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर अपलोड करने की बात स्वीकार की है।

सेक्स स्कैंडल में पकड़ा गया बांग्लादेश उच्चायोग का प्रथम सचिव मुहम्मद सानियुल, भारतीय महिला को भेजे थे गंदे मैसेज

बांग्लादेश उच्चायोग के अधिकारी को सेक्स स्कैंडल में शामिल पाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने उसे ढाका भेज दिया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जाँच की शुरुआत भी हो गई है। इस बात की पुष्टि बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त तौफीक हसन ने भी की।

भारत में बांग्लादेश के डिप्टी हाई कमिश्नर तौफीक हसन ने आज तक के साथ बातचीत में कहा कि भारत में बांग्लादेश के पहले सचिव (राजनीतिक) मोहम्मद सानियुल कादर को कथित तौर पर एक सेक्स चैट में शामिल पाए जाने के बाद उन्हें ढाका वापस भेज दिया गया।

हसन ने दावा किया कि उन्हें इस घटना के बारे में सोशल मीडिया से 25 जनवरी 2022 को जानकारी मिली थी। उप उच्चायुक्त ने कहा कि वे इस तरह के मुद्दों पर जीरो टॉलरेंस रखते हैं। उन्होंने बताया कि मुहम्मद सानियुल कादर सेक्स चैट और सेक्स वीडियो में शामिल थे इसलिए घटना के संज्ञान में आते ही उन्हें ढाका में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया। 26 जनवरी को उनकी ढाका वापसी हुई। इस मामले की सूचना होने के बाद बांग्लादेश विदेश मंत्रालय ने उनके विरुद्ध विभागीय जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, 25 जनवरी को अलीशा नाम की एक कथित युवती ने कोलकाता में बांग्लादेश उप-उच्चायोग के आधिकारिक फेसबुक पेज पर कुछ अश्लील चैट और न्यूड वीडियो पोस्ट किए। मगर, पेज एडमिन ने इन पोस्ट को मंजूरी नहीं दी और वह पेंडिंग में ही रहे। इसके बाद युवती ने चैट और न्यूड वीडियो उप-उच्चायोग के फेसबुक पेज के फेसबुक मैसेंजर पर भेज दिए। अब कहा जा रहा है कि ये अश्लील वीडियो और सारी चैट अधिकारी ने पहले महिला को भेजे थे और इसके बाद महिला ने शिकायत करने के लिहाज से उन्हें मैसेंजर पर भेजा। 26 जनवरी को जब यह चैट की बातें बांग्लादेश दूतावास पहुँची तो कोलकाता उप उच्चायोग के अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी बताने से मना कर दिया। प्रतिक्रिया के तौर पर सिर्फ ये जवाब आया कि अगर मामला सच साबित हुआ तो आरोपित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी।

पहले ‘वन चाइल्ड’ पॉलिसी, अब ज्यादा बच्चे पैदा करने पर जोर दे रहा चीन: दे रहा रिवॉर्ड पर रिवॉर्ड, बढ़ गई है बुजुर्गों की जनसंख्या

दुनिया की सबसे अधिक आबादी वाला देश चीन तेजी से बढ़ती उम्र के कारण परेशान है। चीन की ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ का असर ये हुआ है कि वहाँ पर जन्म दर पर बहुत ही कम हो गई। इस कारण अब चीन अब अपनी जनसंख्या को बढ़ाने की कोशिश में लगा है। चीन अपने देश में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म हो गई है, लेकिन अब चीन लोगों को बच्चे पैदा करने का ऑफर दे रहा है।

ताकि, देश में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को कम किया जा सके। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने बताया कि पिछले साल केवल 10.62 मिलियन बच्चे पैदा हुए थे, जो 2020 में 12.02 मिलियन से कम था और रिकॉर्ड किए गए इतिहास में सबसे कम संख्या है। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंटर फॉर पॉलिटिकल एंड फॉरेन अफेयर्स (CPFA) के अध्यक्ष फैबियन बौसार्ट ने कहा कि चीन ने प्रोत्साहन के रूप में बेबी बोनस, अधिक भुगतान वाली छुट्टी, टैक्स में कटौती और बच्चे के पालन-पोषण के लिए सब्सिडी की पेशकश की है।

बीजिंग डॉबिनॉन्ग टेक्नोलॉजी ग्रुप अपने कर्मचारियों को 90,000 युआन तक नकद, 12 महीने की मैटर्नल लीव और 9 दिनों की पैटर्नल लीव है। इसके अलावा चीनी कंपनियाँ और मैनेजरों को अपने एग सुरक्षित रखने के लिए सब्सिडी दी जा रही है।

चीन में लगातार घट रही जन्मदर

चीन में लगातार बुजुर्गों की आबादी बढ़ती जा रही है। कम्युनिस्ट चीन की जनसंख्या पिछले साल 2021 में 1.4126 बिलियन थी। उस दौरान पाँच लाख से भी कम की वृद्धि दर्ज हुई थी. चीन के जन्म दर में लगातार पाँचवें साल गिरावट दर्ज की गई थी। उल्लेखनीय है कि चीन में बच्चों की जन्म दर बढ़ाने के लिए वन चाइल्ड पॉलिसी को खत्म करके पहले टू चाइल्ड किया गया था। इसके बाद पिछले साल अगस्त 2021 में ही चीन ने तीन बच्चों की नीति लागू की थी। बावजूद इसके जनसंख्या में वृद्धि नहीं हो पा रही है।

हिंदुओं के कातिल टीपू सुल्तान पर रखा गया महाराष्ट्र के अकोला नगर निगम के सभागार का नाम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के नाम हुआ था बवाल

महाराष्ट्र के अकोला में नगर निगम के स्थायी समिति की हॉल का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रख दिया गया है। इस बात की जानकारी अकोला में नगर निगम के नेता विपक्ष साजिद खान पठान ने दी है। साजिद खान पठान कॉन्ग्रेस पार्टी के पदाधिकारी हैं। टीपू सुल्तान के नाम का प्रस्ताव 9 वर्ष पहले (20 जून 2012) किया गया था। तब अकोला के नगर निगम पर कॉन्ग्रेस और प्रकाश अंबेडकर की भारिप बहुजन पार्टी काबिज थी।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर शिवसेना की राय कॉन्ग्रेस और NCP से अलग है। राज्य के महा विकास अघाड़ी में कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना मिलकर सरकार चला रही हैं। शिवसेना टीपू सुल्तान के नाम पर अपने पुराने रुख पर कायम है और वह इसका विरोध कर रही है। बता दें कि अकोला के नगर निगम में की सत्ता में भाजपा भी सहयोगी है।

भाजपा के वर्तमान महानगर अध्यक्ष विजय अग्रवाल ही 9 साल पहले इस नाम के सूचक थे। तब विजय अग्रवाल कॉन्ग्रेस पार्टी में थे। अब विजय अग्रवाल इस पूरे मामले से पल्ला झाड़ रहे हैं। उनका कहना है, “कोई भी उस समय इस मामले में अनुमोदक या सूचक हो सकता है। टीपू सुल्तान के नाम पर मेरा हमेशा विरोध रहा है। मैं आज भी विरोध में ही हूँ।”

वहीं, कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर सवाल खड़े किए हैं। कॉन्ग्रेस नेता और महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस महासचिव सचिन सावंत ने लिखा, “टीपू सुल्तान का विरोध करने वाली भाजपा का दोहरा चरित्र दिख रहा है। अकोला नगर निगम के स्थाई समिति हॉल का नाम ‘शहीद-ए-वतन शेर-ए-मैसूर टीपू सुल्तान’ के नाम पर साल 2012 में रखा गया है। इसके प्रस्तावक पूर्व महापौर और वर्तमान भाजपा अकोला महानगर अध्यक्ष विजय अग्रवाल थे।”

गौरतलब है कि इससे पहले मुंबई में कॉन्ग्रेस विधायक और सरकार में टेक्सटाइल मंत्री असलम शेख द्वारा मलाड स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखे जाने पर बवाल हो गया था। उद्घाटन की तारीख भी 26 जनवरी घोषित कर दी गई थी। मुंबई पुलिस ने इसका विरोध करने वाले कई हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया था।

विवाद बढ़ने पर बुधवार (26 जनवरी 2022) को महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने जगह का नाम अभी फाइनल न होने की बात कही थी। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ने कहा था, “परियोजनाओं के आधिकारिक नामों को अंतिम रूप देना बीएमसी के दायरे में आता है। महापौर ने कहा है कि उस पार्क के आधिकारिक नाम को लेकर अभी तक अंतिम फैसला नहीं हुआ है।”

कनाडा में ट्रक ड्राइवरों का 70 km लंबा काफिला, घर छोड़ कर भागे PM जस्टिन ट्रूडो: भारत में ‘किसान आंदोलन’ का किया था समर्थन

कनाडा (Canada) के लोगों ने कोरोना गाइडलाइन को सख्त किए जाने के विरोध में वहाँ की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। हजारों ट्रक ड्राइवर और अन्य प्रदर्शनकारी राजधानी ओटावा में इकट्ठा हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने कनाडा (Canada Trucker Protest) के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) के आवास को घेर लिया है। वहीं, भारी प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री ट्रूडो परिवार के साथ कहीं गुप्त स्थान पर चले गए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रक ड्राइवर देश में कोविड-19 वैक्सीन का विरोध कर रहे हैं और लॉकडॉउन लगाने के खिलाफ हैं। उन्होंने अपने करीब 70 किमी लंबे काफिले को ‘फ्रीडम कान्वॉइ’ का नाम दिया है। उन्होंने ओटावा शहर में कई जगह जाम लगा​ दिया है।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन करने वालों में बच्चे, महिलाएँ और कुछ दिव्यांग भी शामिल हैं। ये भी कनाडा में नई गाइडलाइन का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सीधे तौर पर प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को निशाना बना रहे हैं और उनके खिलाफ आक्रामक और आपत्तिजनक बयान भी दे रहे हैं। वहीं, कुछ यूजर ऐसे भी हैं, जो जस्टिन ट्रूडो का सोशल मीडिया पर समर्थन भी कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर एक यूजर ने भारत सरकार का विरोध करने वाले किसान प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने वाले कनाडा के पीएम को आड़े हाथों लिया है। यूजर ने ​अमेरिकी सिंगर रिहाना, ​पोर्न स्टार मिया खलीफा और मीना हैरिस को टैग करते हुए लिखा, “हम इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? कनाडा के पीएम अपने घर से भाग गए हैं, क्योंकि ट्रक वालों ने उनके घर को घेर लिया है।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अब इसे कहते हैं अपने किए कर्म यही भुगतने पड़ते हैं, पिछले साल जस्टिन ट्रुडो ने भारत में ट्रैक्टर मार्च रैली को सपोर्ट किया था, आज खुद कहीं छुपकर बैठा है ट्रक मार्च रैली से घबराकर!”

एक यूजर ने लिखा कि जस्टिन ट्रूडो को भारत का किसान आंदोलन बहुत भा रहा था। कनाडा में ट्रक ड्राइवरों का जत्था वैंकूवर, ओंटारियो समेत कई क्षेत्रों से राजधानी ओटावा की तरफ बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री की ऐसी फटी है कि परिवार समेत आवास छोड़ कर भाग चुके हैं। के. राजेश नाम के यूजर ने लॉफिंग इमोजी के साथ लिखा, “अब बात करें जस्टिन ट्रूडो। अब क्यों छुप रहे हो? ट्रूडो: हम शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार में विश्वास करते हैं।”

मालूम हो कि कनाडा में हो रहे प्रदर्शन में करीब 10 हजार लोग शामिल हैं, जो संसदीय परिसर में घुस चुके हैं। स्थानीय पुलिस ने सुरक्षा के भारी बंदोबस्त किए हैं और हिंसा की आशंका को देखते हुए पुलिस हाई अलर्ट पर है।

बता दें कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने वर्ष 2020 में भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के समर्थन में अपना बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि स्थिति चिंताजनक है और कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन का समर्थन करता है।

‘नाथूराम गोडसे सदा अखंड भारत के लिए लड़े, उन्हें हिंदुत्व पर गर्व था’: तब बोली थी शिवसेना, बाल ठाकरे ने फिल्म बनाने की वकालत की थी

महात्मा गाँधी की हत्या आज ही के दिन 30 जनवरी 1948 में नाथूराम गोडसे ने कर दी थी, तभी से उन्हें एक खलनायक के तौर पर पेश किया जाता रहा है। शिवसेना कभी नाथूराम गोडसे का सम्मान करती थी, आज स्थिति इसके उलट है। नाथूराम गोडसे पर कीचड़ उछाले जा रहे हैं, लेकिन कभी बाल ठाकरे ने नाथूराम गोडसे पर फिल्म की वकालत किए थे।

वर्ष 2019 की बात है, जब 84वें मराठी साहित्य सम्मेलन की स्मारिका में नाथूराम गोडसे के उल्लेख पर NCP नेता जितेंद्र अवहड ने गोडसे का उल्लेख करने पर आपत्ति जताई थी। इसको लेकर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ ने जितेंद्र पर हमला बोलते हुए कहा था कि नाथूराम का नाम नहीं छपेगा तो क्या वहाँ इस्लामिक आतंकी इशरत जहाँ का नाम छपेगा।

उस साहित्य सम्मेलन के दौरान नाथूराम गोडसे का विरोध करते हुए एनसीपी ने आयोजन स्थल के पास स्मारिका के उस पेज को भी जला कर प्रदर्शन किया था। इसके बाद आयोजकों ने बाद में माफी माँगी थी। बता दें कि इशरत जहाँ के एनकाउंटर के बाद जितेंद्र ने उनके परिवार का समर्थन किया था और इशरत जहाँ को निर्दोष बताया था।

उस घटना के बाद उस वक्त की हिंदूवादी पार्टी शिवसेना ने राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (राकांपा) के विधायक जितेंद्र अवहड से ये पूछा था कि क्या वो ये चाहते हैं कि 2004 में अहमदाबाद में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारी गई 19 साल की आतंकी इशरत जहाँ की तस्वीर को प्रकाशित करें। दरअसल, इशरत जहाँ को लेकर पुलिस का कहना था कि वह एक इस्लामी आतंकवादी थी।

28 नवंबर 2019 को सामना में लिखे संपादकीय में लिखा गया था, “नाथूराम से नफरत करने वाले इशरत से प्यार करते हैं। क्या वे चाहते हैं कि नाथूराम की जगह इशरत की तस्वीर को स्मारिका में प्रकाशित किया जाए?” सामना ने नाथूराम गोडसे का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें हिंदुत्व पर बहुत गर्व है। सामना ने गोडसे के लिए लिखा था, “वह हमेशा अखंड भारत के लिए खड़े रहे। क्या ऐसी भावनाओं को पनाह देना राष्ट्र विरोधी है? वह एक असली देशभक्त थे।”

इसके बाद एनसीपी नेता जीतेंद्र ने भी पलटवार करते हुए शिवसेना पर हिंदूवादी राजनीति करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, “ये (शिवसेना) चाहते हैं कि उनका रुख भाजपा से ज्यादा उग्र हो। आरएसएस का मतदाता राज ठाकरे की ओर झुक रहा है और शिवसेना उन्हें अपने पास रखना चाहती है। यही कारण है कि वे इस तरह के भड़काऊ लेख लिख रहे हैं।”

कभी बाल ठाकरे ने भी किया था नाथूराम गोडसे का समर्थन

शिवसेना के संस्थापक रहे बाल ठाकरे ने दिसंबर 1998 में एक इंटरव्यू के दौरान हिंदू राष्ट्रवादी नाथूराम गोडसे का समर्थन किया था। बाल ठाकरे ने फिल्म ‘फायर’ में परोसी गई अश्लीलता पर बात करते हुए सेंसर बोर्ड को लेकर कहा था कि अगर आप ‘फायर’ को अनुमति देते हैं तो आपको नाथूराम गोडसे को भी अनुमति देनी चाहिए, क्योंकि यही लोकतंत्र है।

Nathuram Godse always fought for Akhand Bharat Bal Thackeray also supported