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राम मंदिर देख राकेश टिकैत को आया गुस्सा, शो में चिल्लाने पर एंकर ने फटकारा: Video

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर किसान नेता राकेश टिकैत जगह-जगह सक्रिय हैं। किसान आंदोलन भले ही खत्म हो गया हो लेकिन उनके राजनीति संबंधी बयान आने बंद नहीं हो रहे। हाल में उन्हें इंडिया टीवी ने अपने शो ‘चुनाव मंच’ में अतिथि के तौर पर बुलाया और वहाँ जानना चाहा कि आखिर ‘किसानों का मुख्यमंत्री कौन है’ लेकिन यहाँ भी टिकैत का रवैया राजनीतिक ही देखने को मिला।

बीच शो में राकेश टिकैत इस बात पर चिल्ला पड़े कि आखिर उनके पीछे लगे बैकग्राउंड में राम मंदिर की तस्वीर क्यों दिखाई जा रही है। उन्होंने कहा कैमरा और कलम पर अब बंदूक का पहरा है इसीलिए शो में राम मंदिर को दिखाया जा रहा है। इसके बाद उनकी आवाज तेज होती गई और वह चैनल पर प्रचार करने का आरोप लगाते रहे। उनके समर्थकों ने पीछे से हल्ला करना शुरू कर दिया। इसी बीच एंकर ने किसान नेता का ये रवैया भांपते हुए उन्हें फटकार लगाई और समझाया कि अगर वो मेहमान हैं चैनल के तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो कुछ भी अनाप-शनाप बोलेंगे।

एंकर ने टिकैत को दिखाया कि कैसे वो मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहे हैं और उसे हिंदू-मुस्लिम रंग दे रहे हैं। एंकर सौरव शर्मा ने टिकैत को चेतावनी दी कि वो मंच का दुरुपयोग न करें, उन्हें बुलाया गया है ताकि ये बात हो सके कि किसानों का मुख्यमंत्री कौन है। सौरव ने बताया कि जहाँ बैकग्राउंड में मंदिर दिखाया जा रहा है वहाँ पर मस्जिद भी नजर आ रहा है।

राकेश टिकैत ने इस बीच मुद्दा पलटते हुए बोलना शुरू किया कि चैनल वालों को यहाँ पर अस्पताल दिखाना चाहिए न कि मंदिर-मस्जिद। इस पर सौरव ने टिकैत को फटकारा और कहा कि अगर उन्हें राजनैतिक बातें करनी हैं तो वो कोई पार्टी ज्वाइन करे इस तरह किसानों के नाम पर आकर वह राजनेताओं की तरह बात न करें। मंदिर-मस्जिद को मुद्दा राजनीतिक पार्टियाँ बनाती हैं। एंकर को गुस्से में देख राकेश टिकैत ने अपनी आवाज धीमी कर ली। एंकर ने टिकैत को झाड़ते हुए कहा कि आखिर ये कौन सा तरीका है बात करने का। सौरव ने कहा कि टिकैत उनके मेहमान हैं लेकिन वह उनकी मनमानी नहीं चलने देंगे।

किसान आंदोलन को ट्रेनिंग बता चुके हैं टिकैत

उल्लेखनीय है कि ऐसा पहली बार नहीं है कि चुनावों से पहले टिकैत के बयानों ने या उनके रवैये ने चर्चा बटोरी हो, उन्होंने दिल्ली की सीमाओं पर 13 महीने चले किसान आंदोलन को एक ट्रेनिंग बताया। उन्होंने कहा कि अगर इसके बाद भी उन्हें ही बताना पड़े कि किसे वोट देना है या किसे नहीं, तो ट्रेनिंग का क्या फायदा। उन्होंने कहा था कि अभी प्रदेश में हिंदू मुस्लिम और जिन्ना का भूत ढाई महीने और रहेगा। इसलिए वे लोग हिंदू-मुस्लिम वाली बातों में न आएँ।

‘मन की बात’ में PM मोदी ने युवाओं को दिया Push-Ups का चैलेन्ज, कर्नाटक के ‘टनल मैन’ का भी जिक्र किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (30 जनवरी 2022) को 85वें और इस वर्ष के पहले ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम को संबोधित किया। हालाँकि, इस बार पहली बार कार्यक्रम का प्रसारण सुबह 11 बजे की बजाए साढ़े ग्‍यारह बजे किया गया। पीएम मोदी (PM Modi) ने इस मौके पर महात्मा गाँधी (Mahatma Gandhi) को उनको पुण्यतिथि पर नमन किया और देशवासियों से उनकी बताई गई राह पर चलने की अपील की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हाल ही में घोषित किए गए पद्म सम्मानों को कई ऐसे लोगों को दिए गए, जो देश के अनसंग हीरो (Unsung Hero) हैं और साधारण परिस्थितियों में असाधारण कार्य किए हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड की बसंती देवी को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन संघर्षों के बीच जीया। मणिपुर की 77 साल की लौरेम्बम बीनो देवी दशकों से मणिपुर की Liba textile art का संरक्षण कर रही हैं। उन्हें भी पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने पद्म सम्मान पाने वाले एक और व्यक्ति का जिक्र किया, जिनका नाम श्रीमान अमाई महालिंगा नाइक है। उन्होंने कहा कि ये एक किसान हैं और कर्नाटक के रहने वाले हैं। उन्हें कुछ लोग Tunnel Man भी कहते हैं। इन्होंने खेती में ऐसे-ऐसे Innovation किए हैं, जिन्हें देखकर कोई भी हैरान रह जाए।

करोड़ों बच्चों ने लिखा पत्र: पीएम मोदी

पीएम ने आगे ​कहा, “अमृत महोत्सव पर आप सब साथी मुझे ढेरों पत्र और संदेश भेजते हैं और कई सुझाव भी देते हैं। इसी श्रृंखला में कुछ ऐसा हुआ है, जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। मुझे एक करोड़ से ज्यादा बच्चों ने अपने मन की बात पोस्ट कार्ड के जरिए लिखकर भेजी। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव का उत्साह केवल हमारे देश में ही नहीं है। मुझे भारत के मित्र देश क्रोएशिया से भी 75 पोस्टकार्ड मिले हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े बहुत सारे लोग हैं, जो दूसरों की मदद कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह कर रहे हैं। मुझे बेहद खुशी है कि इस तरह के प्रयास उच्च शिक्षा के क्षेत्र में खासकर हमारी अलग-अलग IITs में निरंतर देखने को मिल रहे हैं।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति से प्रेम और हर जीव के लिए करुणा भारत की संस्कृति एवं यहाँ के लोगों का सहज स्वभाव है। इन्हीं संस्कारों की झलक अभी हाल ही में तब दिखी, जब मध्य प्रदेश के Pench Tiger Reserve में एक बाघिन ने दुनिया को अलविदा कह दिया। विराट घोड़े का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय हर चेतन जीव से प्रेम का संबंध बना लेते हैं। ऐसा ही एक दृश्य इस बार के गणतंत्र दिवस परेड में देखने को मिला। इस परेड में President’s Bodyguards के चार्जर घोड़े विराट ने अपनी आख़िरी परेड में हिस्सा लिया।

अब तक करीब-करीब साढ़े चार करोड़ बच्चों ने वैक्सीन की डोज ले ली है: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं से कहा, “मैं आप सभी से एक प्रश्न करना चाहता हूँ। अब सोचिए आप एक बार में कितने Push-ups कर सकते हैं। मैं जो बताने वाला हूँ, वो निश्चित रूप से आपको आश्चर्य से भर देगा। मणिपुर में 24 साल के युवा थौनाओजम निरंजॉय सिंह ने एक मिनट में 109 Push-ups का रिकॉर्ड बनाया है।” पीएम ने यह भी कहा कि कोरोना की नई लहर से भारत बहुत सफलता के साथ लड़ रहा है। हमारे लिए गर्व की बात है कि अब तक करीब साढ़े चार करोड़ बच्चों ने कोरोना वैक्सीन की डोज ले ली है।

पीएम ने कहा कि पिछले 22 सितम्बर को World Rhino Day के मौके पर तस्करों से जब्त किए गए 2,400 से ज्यादा सींगो को जला दिया गया था। यह तस्करों के लिए एक एक सख्त संदेश था। भारतीय संस्कृति के विविध रंगों और आध्यात्मिक शक्ति ने हमेशा से दुनिया भर के लोगों को अपनी ओर खींचा है।

‘हमारे दो धर्म योद्धाओं को रिहा किया जाए, वरना भयानक होंगे परिणाम’: संत सम्मेलन में चेतावनी, ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित करने की माँग

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ‘संत सम्मेलन’ का आयोजन किया गया है। इस सम्मेलन में भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया गया। साथ ही मुस्लिमों का अल्पंसख्यक दर्ज खत्म करने की भी माँग की गई है। इसमें देश के कई हिस्सों से आए तमाम संत शामिल हुए। संत सम्मेलन 29 जनवरी, 2022 (शनिवार) को आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

सम्मेलन में एक संत को कहते सुना गया, “चाहे देश का प्रधानमंत्री हो या उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री हो, हिन्दू राष्ट्र को कोई रोक नहीं सकता। यह मेरी भविष्यवाणी है कि आने वाले 2023 तक भारत हिन्दू राष्ट्र होगा। और जो इस पर राजनीति करेगा वही अखंड भारत का अगला प्रधानमंत्री होगा।” इसी के साथ जय श्रीराम और जय हिन्दू राष्ट्र के नारे लगते हैं।

इस सम्मेलन के आयोजक आनंद स्वरूप ने कहा, “जेल में बंद जो हमारे 2 धर्म योद्धा हैं – उनको 1 सप्ताह के अंदर अगर रिहा नहीं किया गया तो यह आंदोलन बहुत उग्र होगा। उग्र ही नहीं, यह परिणाम बहुत भयानक होगा। हो सकता है कि जैसा भगत सिंह का एसेम्ब्ली कांड हुआ वैसा ही न हो जाए। यहाँ आज 3 प्रस्ताव पारित किए गए हैं। इनसे सरकार को भी अवगत कराया जाएगा। मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से भी संदेश जा रहा है। अभी गाँव – गाँव धर्मसंसद होगी।”

आयोजक आनंद स्वरूप ने आगे कहा, “प्रशासन ने हमें धर्म संसद का नाम बदलने को नहीं कहा। नीचे आयोजक में धर्म संसद संचालक समिति लिखा हुआ है। इस देश को धर्माचार्य दिशा देते रहे हैं और वही चलाएँगे। धर्म संसद के माध्यम से हमने नई दिशा देने का काम किया है। निश्चित रूप से जिनके लिए खतरे की घंटी है कि कहीं हमारी दुकान न बंद हो जाए वो लोग धर्म संसद को फेल करने के षड्यंत्र में शामिल हैं। फिर भी यह अब तक का सबसे बड़ा संत सम्मेलन है। मंच पर तमाम वरिष्ठ संत मौजूद थे। उनके ही नेतृत्व में यह सभा की गई है। कल रात से ही प्रशासन के लोग संतों को प्रताड़ित किए हैं।

इसी सम्मेलन में शामिल एक अन्य संत ने कहा, “भारत का संविधान और भारत की शासन व्यवस्था इस देश की सनातन संस्कृति के अनुरूप होनी चाहिए। यहाँ हिन्दू के हितों का रक्षण होना चाहिए। हिन्दू हितों का रक्षण सर्वोपरि होना चाहिए। इस देश में जो अल्पसंख्यक के नाम पर राजनीति हो रही है। अल्पसंख्यक यहाँ से समाप्त होना चाहिए। इस देश में कोई अल्पसंख्यक नहीं है। यहाँ समान नागरिक, समान अधिकार, समान कानून और समान कर्तव्य होने चाहिए। यही मुद्दे आज यहाँ पर उठाए गए।”

वर्तमान समय में प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है। वहाँ देश विदेश से साधु – संत और श्रद्धालु आए हुए हैं। सम्मेलन ब्रह्मर्षि आश्रम ट्रस्ट शिविर परिसर में आयोजित हुआ था। यह दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ था। इस सम्मेलन में संतों ने देश की सवा सौ करोड़ जनता से स्वयं ही देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की अपील की। सम्मेलन का उद्देश्य भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना और इस्लामी जिहाद का विरोध करना बताया गया।

महात्मा गाँधी की अंतिम इच्छा: सरदार पटेल ने बहुत चाहा, नेहरू के कारण पूरी नहीं कर पाए

30 जनवरी 1948 की शाम को महात्मा गाँधी के पास सरदार पटेल मिलने के लिए आए। आपसी बातचीत में गाँधी ने पटेल से कहा कि तुम दोनों (पटेल और जवाहरलाल नेहरू) में से किसी एक को मंत्रिमंडल से हट जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “मैं इस दृढ़ निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि मंत्रिमंडल में दोनों की उपस्थिति अपरिहार्य है। इस अवस्था में दोनों में से किसी एक का भी अपने पद से अलग होना खतरनाक साबित होगा।”

उन्होंने अपनी बात रखते हुए पटेल से कहा, “आज मैं इसी को प्रार्थना-सभा के भाषण का विषय बनाऊँगा। पंडित नेहरु प्रार्थना के बाद मुझसे मिलेंगे, मैं उनसे भी इसके बारे में चर्चा करूँगा। अगर जरूरी हुआ तो मैं सेवाग्राम जाना स्थगित कर दूँगा और तब तक दिल्ली नहीं छोडूँगा, जब तक दोनों के बीच फूट की आशंका को पूरी तरह समाप्त न कर दूँ।”

इस बातचीत के बाद गाँधी को प्रार्थना सभा में जाना था और उसके बाद उनसे नेहरू और आजाद भी पटेल के साथ आपसी मतभेदों के सिलसिले में मुलाकात करने वाले थे। दुर्भाग्यवश, ऐसा नहीं हो पाया और उसी दौरान गाँधी की हत्या हो गई। अब उनकी ‘अंतिम इच्छा’ के अनुसार, आपसी समन्वय स्थापित कर देश को सँभालने की जिम्मेदारी पटेल और नेहरू दोनों को स्वयं निभानी थी।

इस ‘अंतिम इच्छा’ के इतर एक अन्य पत्र पर गौर करना होगा, जो कि पटेल ने सी राजगोपालाचारी को अपने निधन से मात्र दो महीने पहले यानी 13 अक्टूबर 1950 को लिखा था। वे लिखते हैं, “मानसिक प्रताड़ना की इस प्रक्रिया को लंबा खींचना दर्दनाक है और हमें इसे अभी समाप्त करना होगा, क्योंकि मुझे कोई उम्मीद नहीं दिखती… उनका (नेहरू) रास्ता सुचारू बनाने के लिए मैं अपनी सीमा तक जा चुका हूँ, लेकिन मैंने पाया कि वह सब बेकार है और हम इसे सिर्फ ईश्वर पर ही छोड़ सकते हैं।”

वी. शंकर अपनी पुस्तक ‘My reminiscences of Sardar Patel’ में सरदार की व्यवहार-कुशलता का स्मरण करते हुए लिखते हैं, “(श्यामा प्रसाद) मुखर्जी की कलकत्ता की विजय वापसी, समझौता (नेहरु-लियाकत) और नेहरू के विरोध में समाचार-पत्रों की प्रतिक्रियाओं और जनता के कड़े विरोध से दिल्ली में सरकार घबरा गई थी। आशंका व्यक्त की गई कि अगर पंडित नेहरू पश्चिम बंगाल को समझौता बेचना चाहते हैं, जैसा कि अनुमान लगाया जा रहा था, तो उनका कड़ा विरोध होगा और उनके खिलाफ हिंसा तक हो सकती है। हालात ये हो गए थे कि गोपालस्वामी आयंगर ने प्रधानमंत्री से कहा था कि कलकत्ता जाने के लिए सरदार को तैयार करें। इसके अनुसार, एक दिन सुबह नेहरू, सरदार से मिलने पहुँचे… उनकी (सरदार) नब्ज 90 से कुछ अधिक थी और वे कमजोरी महसूस कर रहे थे। नेहरू ने हिचकते हुए अपना प्रस्ताव रखा। सरदार ने उन्हें अपनी सेहत के बारे में बताया और सुझाव दिया कि वे खुद ही चले जाएँ। इस पर नेहरू ने उन्हें कहा कि सामान्य धारणा है कि मेरे जाने से मुझ पर पथराव होगा। फिर उन्होंने (पटेल) कहा कि बेहतर स्वास्थ्य ना होने की स्थिति में इस बात के लिए दवाब डालते हुए बड़ा दुख हो रहा है, लेकिन उन्हें कोई विकल्प नहीं दिखाई दे रहा है, क्योंकि श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने समझौते के खिलाफ जनमत बना लिया है और सरदार ही उनका प्रभावशाली जवाब दे सकते हैं। वह (सरदार) जानते थे कि उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा और अप्रैल के मध्य में कलकत्ता के ख़राब मौसम की उन्हें जानकारी थी, लेकिन इसके बावजूद सरदार ने कलकत्ता जाने और समझौते के विरोध में बने माहौल को बदलने का भयंकर दायित्व स्वीकार करने पर अपनी सहमति दे दी।”

अतः इसमें कोई दो राय नहीं है कि पटेल ने आपसी मनमुटावों को समाप्त करने और गाँधी की ‘अंतिम इच्छा’ को पूरा करने का हर संभव प्रयास किया, लेकिन वे असफल रहे। हालाँकि, जब उन्होंने राजगोपालाचारी को बताया कि वे इस दौरान बहुत लम्बी मानसिक प्रताड़ना से भी गुजरे हैं। वास्तव में, यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि किसी भी भारतीय के मन में कम-से-कम दो सवाल तो पैदा करती है – पहला, आखिर ‘महात्मा गाँधी की अंतिम इच्छा’ का सम्मान क्यों नहीं किया गया? और दूसरा क्या पटेल मानसिक रूप से इतने व्यथित हो गए थे कि वे बीमार रहने लगे और एक दिन इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए?

गाँधी के विश्वसनीय सहयोगी, प्यारेलाल अपनी पुस्तक ‘महात्मा गाँधी- द लास्ट फेज’ में लिखते हैं, “गाँधी की मृत्यु के बाद भी सरदार और पंडित नेहरू के बीच वैचारिक संघर्ष जारी रहा।” एन . वी. गाडगीळ अपनी पुस्तक में ‘गवर्नमेंट फ्रॉम इनसाइड’ में यह पुष्टि करते हैं कि मंत्रिमंडल दो गुटों में विभाजित था, जिसमें एक का नेतृत्व पटेल और दूसरे का नेहरू करते थे। उन्होंने अपनी इस आत्मकथा के पृष्ठ 177 पर पुनः लिखा है कि “दोनों के बीच मतभेद बढ़ते जा रहे थे।”

पटेल के साथ काम कर चुके वीपी मेनन, ‘This was Sardar the Commemorative volume I’ (सहसंपादक – मणिबेन पटेल, पटेल की पुत्री) में प्रकाशित अपने भाषण, ‘If Sardar were Alive Today!’ में कहते हैं, “एक बार मैं दिल्ली स्थित उनके घर गया। मैंने उन्हें एक ऑक्सीजन टेंट के नीचे लेटे देखा। अतः मैं दरवाजे पर खड़ा होकर सिगरेट पीने लगा। जब सरदार को मेरे आने का पता चल तो उन्होंने डॉक्टर से टेंट हटाने को कहा और मुझसे पूछा कि इस तरह गलियारे में क्यों खड़ा हूँ? मैंने उन्हें बताया कि मैं धुएँ से हवा को दूषित नहीं करना चाहता था। उन्होंने अपनी विशिष्ट शैली में जवाब दिया, “मेनन, आप चिंता क्यों करते हैं? पूरी दिल्ली की हवा दूषित है। उनकी इस टिप्पणी में कुछ कडवाहट थी। उन्होंने अपने और प्रधानमंत्री के बीच मतभिन्नता को दिल पर ले लिया था।”

एक दिन नेहरू ने सार्वजनिक रूप से अधिकारियों के सामने पटेल को बेइज्जत कर दिया। यह घटना कब और कहाँ की है, इसकी जानकारी कहीं उपलब्ध नहीं है, लेकिन पटेल अपनी बेइज्जती से इतना दुखी हुए कि उन्होंने इस घटना को 17 अक्टूबर 1950 को राजगोपालाचारी के साथ साझा किया था।

इसी दौरान पटेल को नेहरू का एक पत्र मिला, जिसमें उन्होंने कहा था कि अब सरदार को अपने विभागीय काम नहीं देखने होंगे, बल्कि रियासती मंत्रालय गोपालस्वामी आयंगर और गृह मंत्रालय को वे स्वयं देखेंगे। वी शंकर इस सन्दर्भ में लिखते हैं, “मैं अच्छी तरह से जानता था कि इस व्यवस्था से सरदार की वर्तमान स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ेगा, उनका हृदय कमजोर हो जाएगा और गुर्दों पर भी असर होगा, इसलिए मैंने मणिबेन की सलाह से उन्हें यह पत्र न दिखाने का निश्चय किया। मुझे विश्वास था कि ऐसा करके मैंने सरदार को पंडित नेहरू के व्यवहार से होने वाली भावनात्मक पीड़ा और दुःख से बचा लिया, वरना उनकी हालत और बिगड़ जाती।”

अंततः गाँधी की हत्या से लेकर पटेल के ‘निधन’ तक दोनों के बीच संबंध तनावपूर्ण बने रहे। वी शंकर लिखते हैं, “सरदार अपने गिरते स्वास्थ्य के कारण अधिक से अधिक समय अपने घर पर ही बिताते थे। उस दौरान दवाएँ असर नहीं कर रही थीं, जिसके कारण उनकी नब्ज बढ़ रही थी और वे कमजोरी महसूस कर रहे थे। इसमें कोई संदेह नहीं था कि मानसिक पीड़ा के कारण भी उनके स्वास्थ्य पर तेजी से असर पड़ रहा था।”

आखिरकार, जब बम्बई में पटेल का निधन हुआ तो नेहरू द्वारा एक ‘अशोभनीय’ आदेश जारी किया गया। दरअसल, उन्होंने मंत्रियों और सचिवों से उनके अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने से लिए न जाने का निर्देश जारी किया। के. एम. मुंशी अपनी पुस्तक ‘Pilgrimage to Freedom’ में लिखते हैं, उस समय मैं माथेरान (रायगढ़ जिला) के नजदीक था। श्री एनवी गाडगीळ, श्री सत्यनारायण सिन्हा और श्री वीपी मेनन ने निर्देश को नहीं माना और अन्त्येष्टि में शामिल हुए। जवाहरलाल ने राजेंद्र प्रसाद से भी बम्बई न जाने का आग्रह किया, जो कि एक अजीब अनुरोध था, जिसे राजेंद्र प्रसाद ने भी नहीं माना। अन्त्येष्टि में अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों में डॉ राजेंद्र प्रसाद, राजाजी और पंतजी (गोविन्द वल्लभ) और निसंदेह मैं भी शामिल था।”

वी शंकर लिखते हैं, “हमें बार-बार दिल्ली से सन्देश आ रहे थे और हम यह जानकर बहुत दुखी थे कि सरदार पटेल की अन्त्येष्टि में पहुँचने से रोकने के लिए बम्बई न जाने देने के लिए प्रयास किए जा रहे थे। हमें बताया गया कि मंत्रियों और राज्यपालों को भी रोका गया है। स्वयं नेहरू ने भी प्रोविजनल पार्लियामेंट में 15 दिसंबर 1950 को पटेल के निधन का समाचार देते हुए कहा, “मैंने अपने सहयोगियों से कहा कि वे यही (दिल्ली में) रुके, सिवाय श्री राजगोपालचारी के, जो यहाँ हम सभी लोगों में शायद सरदार पटेल के सबसे पुराने सहयोगी और मित्र रहे हैं।

ब्यूटी पार्लर में काम के बहाने नाबालिगों को ले जाती थी चलेमा खातून… अलाउद्दीन और मोईनदीन करते थे रेप… फिर देह व्यापार

चेन्नई पुलिस ने बुधवार (26 जनवरी) को देह व्यापार में झोंकी गईं त्रिपुरा की 4 नाबालिग लड़कियों को बचा लिया है, जबकि चलेमा खातून सहित सभी चार आरोपित फरार बताए जा रहे हैं। इन सभी लड़कियों की उम्र 14 से 17 साल के बीच बताई जा रही है। इन लड़कियों को पार्लर का काम बता कर लाया गया था, इन लड़कियों के साथ रेप और शारीरिक प्रताड़ना जैसे अपराध भी किए गए थे। इस मामले में मुख्य आरोपिता चलेमा खातून के साथ-साथ मोईनदीन, अनवर हुसैन और अलाउद्दीन आरोपित किए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सभी 4 पीड़िताओं को 17 जनवरी को त्रिपुरा से चेन्नई लाया गया था। लाने से पहले उनके परिजनों को 13,000 रुपए दिए गए थे। चेन्नई में इन सभी को केलमबक्कम (Kelambakkam) के 2 किराए के कमरों में रखकर देह व्यापार कराया जाता था। इन लड़कियों को हर रोज कम-से-कम 6 ग्राहकों के पास भेजा जाता था और शोषण का यह सिलसिला शाम 7 बजे से शुरू होकर सुबह तक जारी रहता था। इतना ही नहीं, हर लड़की पर प्रतिदिन 50,000 रूपये कमाने का दबाव भी बनाया जाता था। लड़कियों पर दबाव बनाने के लिए उनके अश्लील वीडियो बनाए गए थे। इसी की धमकी दे कर उन्हें ग्राहकों से सही से पेश आने का दबाव बनाया जाता था।

इन सभी लड़कियों को कर्फ्यू के बाद भी कई अलग-अलग जगहों पर भेजा गया। 26 जनवरी को केलबक्कम पुलिस को देह व्यापर रैकेट की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि यह सूचना पीड़िताओं में से एक लड़की ने ही दी थी। सूचना पर एक हेड कॉन्स्टेबल और 4 अन्य सिपाही आरोपिता खातून के अड्डे पर पहुँच गए, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कार्रवाई करने के बजाय पैसे लेकर सभी को छोड़ दिया। Tambaram पुलिस कमिश्नर एम रवि के मुताबिक, इन सभी पुलिस वालों के खिलाफ विभागीय जाँच करवाई जा रही है। यदि आरोप सत्य पाए गए तो चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

38 वर्षीया अरोपिता चलेमा खातून सहित सभी आरोपियों पर फ्लावर बाजार पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, मानव तस्करी के साथ अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। पीड़िताओं की काउंसलिंग और मेडिकल परीक्षण प्रक्रिया चल रही है। उत्तरी चेन्नई चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) की सदस्या एम ललिता ने बताया, “चलेमा खातून ने सबसे पहले 17 साल की लड़की को बेंगलुरु में देह व्यापार के धंधे में धकेला था। पीड़िता पहले से 2 बच्चों की माँ है और वह अपने पति से अलग रहती थी। यह गैंग पीड़िताओं के परिवारों से ब्यूटी पॉर्लर आदि की ट्रेनिंग दिलाने के बहाने उनके घर की लड़कियों को अपने साथ ले जाता था। इसके बाद वो 3 अन्य लड़कियों को भी अपने जाल में फँसाने में सफ़ल रहे।”

ATM लुटेरा तस्लीम को पकड़ने गई गुरुग्राम पुलिस पर मेवात में हमला, महिला पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ी

हरियाणा के मेवात जिले के तावडू में पुलिस पर हमला किया गया है। पुलिस टीम यहाँ ATM लूट के आरोपित तस्लीम को पकड़ने गई थी। इस दौरान महिला असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर की वर्दी को फाड़ दिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपित को भी छुड़ा लिया गया। पुलिस टीम गुरुग्राम की थी। घटना 26 जनवरी (बुधवार) की है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक आरोपित तस्लीम 18 सितम्बर 2021 को 4 लोगों के साथ ATM लूट की घटना में शामिल था। ATM एक्सिस बैंक का था, जो गुरुग्राम के धनकोट इलाके में था। बीच में पुलिस आ जाने के बाद सभी आरोपित पुलिस पर फायरिंग करते हुए भाग गए थे। घटना के दिन तस्लीम के घर पर होने की सूचना मिलते ही पुलिस ने उसकी घेराबंदी की थी।

पुलिस ने तस्लीम को जैसे ही पकड़ा, वैसे ही उसके घर की महिलाओं ने हंगामा शुरू कर दिया। इन सभी को रोकने गई महिला ASI रीना के साथ मारपीट की गई। उनका पहचान पत्र भी छीन लिया गया। हमलावरों में तस्लीम के अम्मी, अब्बू, बीवी और बहन भी शामिल बताए जा रहे हैं। अब इन सभी के खिलाफ सदर थाने में केस दर्ज किया गया है। साथ ही आरोपितों की तलाश शुरू कर दी गई है।

इस आपाधापी के बीच तस्लीम पुलिस की गिरफ्त से बच निकला। पुलिस टीम का नेतृत्व कर रहे सब इंस्पेक्टर राजकुमार ने इस हमले की पुष्टि की है। उनके मुताबिक हमलावरों में परिवार वालों के अलावा कुछ अन्य लोग भी शामिल थे। इस नए केस के विवेचक राजेंद्र सिंह के मुताबिक आरोपित तस्लीम, उसके अम्मी-अब्बू, बीवी और बहन सहित 10-15 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। इन सभी की तलाश जारी है।

मेवात में पुलिस बल पर यह हमला पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी मार्च 2018 में ATM चोर रफीक की तलाश में गई गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की टीम पर हमला हुआ था। उस हमले में भी रफीक को पुलिस की गिरफ्त से हमलावरों ने छुड़ा लिया था। साथ ही तावडू के ही गाँव बावला के अलावा जिले के पुलिस अधीक्षक तक की गाड़ी पर डंपर चढ़ाने की कोशिश की जा चुकी है।

दरगाह के पीछे मिली किशन भरवाड की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल और बाइक, मौलाना उस्मानी दिल्ली में धराया

किशन भरवाड की हत्या के मामले में गुजरात पुलिस और गुजरात ATS को अहम कामयाबी मिली है। गुजरात ATS ने मौलाना कमर गनी उस्मानी को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उस्मानी पर किशन के हत्यारे शब्बीर को उकसाने का आरोप है। वहीं, गुजरात पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल हथियार को बरामद कर लिया है।

देश गुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने धंधुका में सर मुबारक बुखारी दादा दरगाह के पीछे एक जगह से किशन भरवाड की हत्या में इस्तेमाल की गई एक पिस्तौल और बाइक बरामद की है। इस मामले की जाँच कर रही पुलिस टीम आरोपित शब्बीर और इम्तियाज को लेकर सर मुबारक के पीछे पहुँची थीं, जहाँ से हत्या में इस्तेमाल की गई बाइक और पिस्तौल बरामद की गई है। दोनों आरोपितों ने 25 जनवरी 2022 को किशन भरवाड को मारने के लिए पहले उसका बाइक से पीछा किया था और फिर धंधुका शहर के मोढवाडा-सुंदकुवा इलाके में शब्बीर ने उस (किशन) पर राउंड फायरिंग करके उसकी हत्या कर दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने एक अन्य आरोपित अजीम बचा समा के भाई वसीम समा को भी पूछताछ के लिए मोरबी से गिरफ्तार किया है। अजीम ने अहमदाबाद के मौलवी को हथियार दिए थे और इस मौलवी ने आरोपितों को हथियार मुहैया कराए थे। पुलिस मुख्य आरोपितों के खिलाफ GUCTOC और UAPA के कड़े कानून के तहत मामला दर्ज की है।

किशन भरवाड की हत्या (Kishan Bharwad Murder) के मामले में दो मौलवियों की भूमिका भी सामने आई है, जबकि कई संदेह के दायरे में हैं। इनमें से एक अहमदाबाद का है और दूसरा मुंबई का है। अहमदाबाद के जमालपुर इलाके का मौलवी अय्यूब इन हत्यारों को हथियार मुहैया कराता था। वहीं, मुंबई के मौलवी ने उन्हें किशन की हत्या करने का आदेश दिया था।

मालूम हो कि गुजरात सरकार ने शनिवार (29 जनवरी 2022) को किशन भरवाड की हत्या की जाँच आतंकवाद विरोधी (ATS) दस्ते को सौंप दी है। गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने ट्वीट कर बताया, “धंधुका की हिंसक घटना का मामला एटीएस को सौंप दिया गया है। गुजरात पुलिस पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।”

बता दें कि किशन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट अपलोड किया था, जिसके बाद से वह इस्लामी कट्टरपंथी के निशाने पर था। बताया गया था कि किशन ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था, वो मुस्लिमों के पैगंबर मुहम्मद से संबंधित था। किशन की पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्ति भी जताई थी। पुलिस ने भी किशन के खिलाफ एक्शन लिया था। पोस्ट के बाद से ही किशन को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं। इस घटना के बाद से किशन अपने घर से नहीं निकल रहा था। मंगलवार को अचानक ही वो अपनी बाइक से निकला था, लेकिन कुछ ही दूरी पर उसकी हत्या कर दी गई।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया था कि किशन पर गोली चलाने वाले बाइक सवार उसके पीछे चल रहे थे, जैसे ही वो मोढवाड़ा मोड़ के पास पहुँचे तो किशन पर पहली गोली चलाई गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद उस पर दोबारा हमला किया गया और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद से हिन्दू संगठन बेहद आक्रोशित हैं। उन्होंने बीते दिनों धंधुका में बंद का ऐलान किया था। विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के इस आह्वान को स्थानीय लोगों और अन्य हिन्दू संगठनों का पूरा समर्थन मिला।

राजकोट में सोशल मीडिया पर ‘ईशनिंदा’ पोस्ट: बातचीत के बहाने बुलाया, 5 हिंदू युवकों पर मुस्लिम भीड़ का हमला, 12 गिरफ्तार

गुजरात (Gujrat) के राजकोट स्थित भक्तिनगर में सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट को ईशनिंदा का मामला बताते हुए उग्र मुस्लिमों की भीड़ ने 5 हिंदुओं पर हमला कर दिया। ने को लेकर दो समुदायों में बवाल हो गया है। इस मामले में गुजरात की पुलिस ने शनिवार (29 जनवरी 2022) को 2 नाबालिग सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया।

मामला तब शुरू हुआ तब सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर एक पक्ष ने आपत्ति जताई। इसको हटाने को लेकर दूसरे पक्ष से बातचीत करने के लिए बुलाया गया। दूसरे पक्ष से बातचीत के दौरान उस पर हमला कर दिया गया। इस घटना में कई लोग घायल हुए हैं। वहीं कुछ गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचाया गया है।

बताया जा रहा है कि बातचीत के लिए बुलाने के बाद मुस्लिमों की एक भीड़ ने हमला कर दिया, जिसमें पाँच हिंदू घायल हो गए हैं।

दरअसल विनय डोडिया नाम के एक युवक ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी डाली थी, जो कि 24 घंटे में खुद ही हट जाती। इस पोस्ट को इरशाद संधी नाम के एक मुस्लिम युवक ने आपत्ति जताई और इसे हटाने के लिए कहा। इस दौरान इरशाद ने डोडिया के साथ गाली-गलौज करते हुए पोस्ट को तुरंत हटाने की धमकी दी।

बाद में डोडिया को मामले को सुलझाने के लिए बुलाया। डोडिया निश्चित किए गए जगह जिला गार्डेन के पास अपने कुछ सथियों के साथ पहुँचे। बातचीत के दौरान ही वहाँ लगभग 25 मुस्लिम इकट्ठा हो गए और उन लोगों ने डोडिया और उसके साथियों पर हमला कर दिया। इस्लामवादियों की भीड़ ने इस दौरान एक बाइक को आग भी लगा दी।

राजकोट के डीसीपी जोन-1 प्रवीण मीणा ने बताया कि इस दौरान पुलिस की गश्ती वाहन ने भीड़ देखा और कोरोना गाइडलाइन तथा रात्रि कर्फ्यू को लेकर मद्देनजर उन्हें हटाने की कोशिश की। बाद में भक्तिनगर पुलिस थाने से पहुँचे पुलिसकर्मियों ने मामले को शांत कराया।

राजकोट के डीसीपी जोन-1 प्रवीण मीणा का कहना है कि इस संबंध में भक्तिनगर पुलिस स्टेशन में एक मामला दर्ज किया गया है और IPC की धारा 437, 504 और 114 के तहत 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने आगे बताया कि तकरीबन 1.5 महीना पहले उसी ग्रुप में डाला गया एक और सोशल मीडिया पोस्ट आज कल वायरल हो रहा है। एक महीने से अधिक पुरानी पोस्ट के सामने आने के बाद आईपीसी की धारा 160 (भड़काना) के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की गई थी। उन्होंने इसे एहतियाती कार्रवाई बताया है।

बता दें कि हाल ही में राज्य के अहमदाबाद शहर के धंधुका तालुका में इस्लामवादियों द्वारा किशन भरवाड नाम के एक हिंदू युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। दरअसल, किशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया था, जो मुस्लिमों को आपत्तिजनक लगा। किशन द्वारा शेयर किए गए वीडियो में पैगंबर मुहम्मद की तस्वीर थी।

इस मामले में दो आरोपितों को गिरफ्तार कर 9 दिन के रिमांड पर लिया गया है। अहमदाबाद में एक और मुस्लिम मौलवी को गिरफ्तार किया गया। आरोपित ने जामनगर के एक अन्य युवक की हत्या की योजना बनाई थी। पुलिस इस मामले में 6 मौलवियों की भूमिका पर संदेह कर रही है। गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों पर गुजरात कंट्रोल ऑफ टेररिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट और यूएपीए एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। वहीं, इस मामले की जाँच गुजरात ATS करेगी।

जहाँ पैदा हुए ‘महावीर’ कर्नल संतोष बाबू, वहाँ हर दिन सुबह 52 सेकेंड के लिए सभी लोग हो जाते हैं सावधान में खड़े

तेलंगाना का नलगोंडा शहर देश और दुनिया के लिए देशभक्ति की मिसाल बना हुआ है। नलगोंडा शहर के 12 प्रमुख जगहों पर हर रोज ​सुबह 8:30 बजे राष्ट्रगान बजाया जाता है। इस दौरान पूरे शहर में जो शख्स जहाँ और जिस भी स्थिति में होता है, वो 52 सेकंड के लिए वहीं सावधान अवस्था में खड़ा होकर राष्ट्रगान को सम्मान देता है। हर सुबह राष्ट्रगान के लिए 52 सेकंड के लिए खड़े होने की नई पहल को सभी धर्मों और जातियों के लोगों ने सराहा है।

इस नई पहल ने पूरी दुनिया में देश का सम्मान बढ़ाया है। 23 जनवरी को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नेताजी की जयंती पर ही पिछले साल इस पहल को नलगोंडा में शुरू किया गया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वर्ष 2021 में ये पहल जन गण मन उत्सव समिति ने शुरू की थी। समिति के अध्यक्ष कर्णती विजय कुमार और उनके दोस्तों ने मिलकर इस पहल की शुरुआत की। समिति का मानना ​​​​है कि राष्ट्रगान गाने से लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत होती है और हर धर्म और मजहब के लोगों को ये पता चलता है कि देशभक्ति सर्वोपरि है। धीरे-धीरे ये चलन अब नलगोंडा के आसपास के कई छोटे शहरों में भी देखने को मिल रहा है।

बता दें कि लद्दाख की गलवान घाटी में वर्ष 2020 में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सीमा के अतिक्रमण के बाद भारतीय जवानों ने मुँहतोड़ जवाब दिया था। इसमें हालाँकि भारतीय सेना के कर्नल संतोष बाबू बलिदान हुए थे। इन्हीं संतोष बाबू का जन्म और पालन-पोषण तेलंगाना के नलगोंडा इलाके में हुआ था।

गलवान घाटी युद्ध में बलिदान हुए कर्नल संतोष बाबू को मरणोपरांत ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। उनकी पत्नी और माँ ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से ये सम्मान प्राप्त किया था। कर्नल बिकुमाला संतोष बाबू को ‘शत्रु से मुकाबला करते हुए असाधारण वीरता के प्रदर्शन’ के लिए ये सम्मान मिला था। वो ‘बिहार रेजिमेंट’ की 16वीं बटालियन का हिस्सा थे। ‘ऑपरेशन स्नो लेपर्ड’ के दौरान पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में वह बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर के रूप में तैनात थे।

अकेली हिंदू महिला देख यासीन घर में घुसा, शादी से मना करने पर किया हमला: गुजरात के राधनपुर में सांप्रदायिक तनाव

उत्तरी गुजरात के पाटन जिले के राधनपुर कस्बे में एक मुस्लिम युवक द्वारा एक हिंदू महिला पर कथित हमले को लेकर सांप्रदायिक तनाव फैल गया है। बताया जा रहा है कि जब हिंदू महिला अपने घर पर अकेली थी, उसी दौरान यासीन मजीखान बलूच नाम के एक मुस्लिम युवक ने शादी से इनकार करने पर उस पर हमला कर दिया। वेब पोर्टल देशगुजरात की रिपोर्ट के अनुसार, महिला को अकेला देख यासीन उसके घर पहुँचा उससे शादी करने की जिद करने लगा। जब महिला ने मना कर दिया तो वह भड़क गया और जान से मारने की धमकी दी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों एक-दूसरे को पिछले लगभग दो सालों से जानते हैं। वहीं, दिव्य भास्कर की रिपोर्ट में कहा गया है कि एसपी अक्षयराज मकवाणा ने कहा है कि आदमी द्वारा हमला एकतरफा प्यार में या पैसों के लेनदेन को लेकर हो सकता है।

इसके पहले यासीन ने कथित तौर पर महिला के पिता को भी जान से मारने की धमकी दी थी। पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि यासीन ने उसे उसके बालों को पकड़कर घसीटा और उसे मारने के इरादे से उसके सिर को दीवार और काँच के शोकेस पर दे मारा। इससे उसका सिर में चोट लगी और उससे खून बहने लगा। जब वह मदद के लिए चिल्लाई तो उसके परिजन आए और यासीन को घर में बंद कर दिया।

इसके बाद यासीन बलूच को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इधर, शनिवार (29 जनवरी 2022) को ठाकोर, भरवाड़ और चौधरी समुदायों के हजारों लोगों ने विभिन्न हिंदू संगठनों के बैनर तले विरोध प्रदर्शन करते हुए न्याय की माँग की। वहीं, घटना को लेकर समुदाय के नेता राधनपुर आदर्श विद्यालय में जमा हुए और पुलिस को ज्ञापन सौंपा।

राज्य के गृहमंत्री हर्ष सांघवी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य प्रशासन जाँच कर रहा है और दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरों को लेकर लोगों को आगाह करते हुए पुलिस के आधिकारिक बयान का इंतजार करने के लिए कहा।