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मारा गया जैश आतंकी जाहिद वानी, पुलवामा CRPF हमले में था शामिल: 12 घंटे में कुल 5 आतंकी ढेर, एक पाकिस्तानी भी

जम्मू कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 2 अलग-अलग मुठभेड़ में 5 आतंकियों को ढेर कर दिया है। मारे गए आतंकी जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैय्यबा से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें जैश का कमांडर जाहिद वानी भी शामिल है। IGP कश्मीर के मुताबिक 1 पाकिस्तानी आतंकी भी ढेर हुआ है।

पहला मुठभेड़ बड़गाम जिले में हुआ। यहाँ चरार-ए-शरीफ इलाके में आतंकियों की मौजूदगी होने पर सेना ने सर्च अभियान चलाया। आतंकियों की तरफ से गोलीबारी होने के बाद सेना की जवाबी कार्रवाई में 1 आतंकी मारा गया। वहीं दूसरी मुठभेड़ पुलवामा जिले में हुई, जो दक्षिण कश्मीर में आता है। यहाँ नाइरा इलाके में 4 आतंकी मारे गए। इन चारों में एक जाहिद वानी और दूसरा पाकिस्तानी आतंकी था।

जाहिद वानी का पूरा नाम ज़ाहिद मंजूर वानी था। वह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की वांटेड लिस्ट में शामिल था। वह जैश ए मोहम्मद के टॉप कमांडरों में गिना जाता था। उसने सुरक्षा बलों पर कई हमले किए थे। वह 14 फरवरी 2019 में लेटपुरा की उस घटना में भी शामिल था, जिसमें CRPF के 40 से अधिक जवान बलिदान हुए थे। कश्मीर पुलिस ने इसे बड़ी सफलता बताया है।

गौरतलब है कि शनिवार (29 जनवरी) को आतंकियों ने कश्मीर के कुलगाम जिले में पुलिस हेड कॉन्स्टेबल अली मोहम्मद गनी की हत्या कर दी। उन्हें हसनपोरा में गोली मारी गई थी। उसके बाद दशहत फैलाने के मकसद से आतंकियों ने पुलवामा के नायरा इलाके में सुरक्षा बलों पर गोलियाँ चलाईं। इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया था।

चोरों ने काली माँ मंदिर से उड़ा लिए रुपए, 7 मासूम कुत्तों की ज़हर देकर हत्या: पूजा के बाद प्रसाद लेने आते थे डॉग्स

बिहार (Bihar) के कैमूर में सनसनीखेज वारदात को अंजाम दिया गया है। यहाँ एक मंदिर में चोरी करने के इरादे से आए डकैतों ने मानवता की सारी हदें पार कर दी। बदमाशों ने डकैती में किसी भी प्रकार के खलल से बचने के लिए सबसे पहले मंदिर के आसपास घूमने वाले 7 आवारा कुत्तों को जहर देकर उनकी हत्या (Dogs Killed) कर दी। इससे कुत्तों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद बदमाशों ने आराम से मंदिर का दरवाजा तोड़कर दानपेटी से करीब 15-20000 रुपए चुरा लिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब अगले दिन शनिवार (29 जनवरी, 2022) को मंदिर का पुजारी वहाँ पूजा-अर्चना करने के लिए गया तो वहाँ के हालात देख दंग रह गया। उसने इसकी सूचना तुरंत भभुआ के जीआरपी थाने को दी गई। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुँची रेलवे पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। यह मंदिर कैमूर के मोहनिया इलाके में रेलवे मॉल गोदाम रोड के जीआरपी थाना परिसर में ही स्थित था।

इस घटना को लेकर भभुआ जीआरपी थाने के प्रभारी जयप्रकाश ने बताया, “चोरी के मामले में जाँच की जा रही है। अधिक विवरण जल्द ही सामने आएँगे।”

वहीं इस मामले में मंदिर के सचिव धीरेंद्र प्रताप सिंह ने बदमाशों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा, “चोरों ने मंदिर का दरवाजा तोड़ दिया और दानपेट्टी से 15 से 20 हजार रुपए चुरा लिए। मंदिर के पास रहने वाले सात मासूम जीवों को भी जहर देकर मार दिया गया है। ये मासूम जीव आरती के बाद प्रसाद लेने के लिए मंदिर में रुकते हैं। चोरों ने भी उन्हें नहीं बख्शा। मैं प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा करने की माँग करता हूँ।”

उल्लेखनीय है कि मोहनिया में रेलवे माल गोदाम रोड के जीआरपी थाने में स्थित यह मंदिर माँ काली का मंदिर है, जहाँ ये घटना हुई।

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने पुलिस कॉन्स्टेबल की गोली मारकर हत्या की, पुलवामा में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के कुलगाम जिले में हसनपोरा के बिजबेहरा में शनिवार (29 जनवरी 2022) को संदिग्ध आतंकवादियों (Terrorist Attack) ने प्रदेश पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल अली मोहम्मद गनी की गोली मारकर हत्या (Murder) कर दी। वह कुलगाम थाने में तैनात थे। आतंकियों द्वारा हमला किए जाने के बाद गनी को अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में उनकी मौत हो गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। तीन हफ्ते पहले दक्षिण कश्मीर के इसी इलाके में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए थे। इस बीच, खबर ये भी आई है कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आतंकवादियों ने महाराज बाजार इलाके में सुरक्षाबलों पर हैंड ग्रेनेड से हमला किया। पुलिस के मुताबिक, इसमें किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि आज करीब 5.30 बजे अनंतनाग पुलिस को बिजबेहरा अनंतनाग के हसनपोरा तबला इलाके में एक आतंकी अपराध की घटना की सूचना मिली थी कि आतंकवादियों ने एक पुलिसकर्मी पर गोलीबारी की थी। पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच जारी है और अधिकारी इस आतंकी वारदात की पूरी परिस्थितियों का पता लगाने के लिए काम कर रहे हैं। यह हमला करीब शाम साढ़े चार बजे हुआ, जब सीआरपीएफ और पुलिसकर्मियों की एक टीम पर ग्रेनेड फेंका गया। अधिकारी ने कहा कि इलाके की घेराबंदी कर दी गई है और हमलावरों को पकड़ने के लिए तलाश शुरू कर दी गई है।

पुलवामा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ शुरू

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के नियारा इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच भिड़ंत शुरू हो गई है। आतंकियों के खिलाफ इस अभियान को सेना, पुलिस और सीआरपीएफ की संयुक्त टीम ने शुरू किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस टीम को नियारा इलाके में दो से तीन आतंकियों की मौजूदगी के खुफिया इनपुट्स मिले थे। इसी के आधार पर सिक्योरिटी फोर्सेज ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खुद को सुरक्षाबलों के चंगुल में फँसा देख आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जिसके जबाव में सुरक्षाबलों ने भी पलटवार किया है।

लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई और शादी से लेकर श्रमिकों को काम दिए जाने तक: योगी सरकार की 20 योजनाएँ, जिसने जनता में छोड़ी छाप

उत्तर प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सत्ता संभालने के साथ ही कई योजनाएँ शुरू की, जिनका लाभ गरीबों और पिछड़ों को खास कर के मिल रहा है। यहाँ हम आपको योगी सरकार की उन योजनाओं के बारे में बताएँगे, जिन्होंने असर डाला और जिनके कारण 2022 विधानसभा चुनाव में उनकी वापसी की उम्मीदें मजबूत होती जा रही हैं। हर ओपिनियन पोल और सर्वे यही कह रहे हैं कि उनकी वापसी लगभग तय है।

गोपालक योजना: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ‘गोपालक योजना’ लेकर आई, जिसके तहत बेरोजगार लोगों को भोजन के नए अवसर दिए जाते हैं। डेयरी फार्म का रोजगार आय का एक अच्छा साधन हो सकता है। इस योजना के तहत बैंकों द्वारा 5 वर्ष के लिए 40,000 रुपए प्रति वर्ष के हिसाब से लोन दिए जाते हैं। 10-20 गाय रखने वालों को इस योजना का लाभ मिलता है। कम से कम 5 पशु रखने पर ऋण मिलता है। 1 लाख से कम सलाना आय वालों को ये लोन मिलता है। पशु मेले से पशु खरीदे जाते हैं।

मुफ्त टेबलेट–स्मार्टफोन योजना: इस योजना के तहत छात्रों को मुफ्त में टेबलेट और स्मार्टफोन दिए जाते हैं। 49 जिलों में इसके लिए साढ़े 24 लाख छात्र-छात्राओं का पंजीकरण भी करा लिया गया है। 31 जिलों के 38,000 से अधिक युवाओं को इसका लाभ भी मिल चुका है। ये योजना कुछ ही समय पहले लागू की गई है। 1 करोड़ छात्रों को इसका लाभ दिया जाना है।

स्कॉलरशिप योजना: इस योजना के तहत 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप दी जाती है। आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को पढ़ाई के लिए पैसे की तंगी का सामना नहीं करना पड़े, इसीलिए इस योजना को लाया गया है। 2 लाख रुपए प्रतिवर्ष से कम की पारिवारिक आय वाले छात्रों को इसका लाभ दिया जा रहा है। सरकारी वेबसाइट से इसके आवेदन लिए जाते हैं।

शादी अनुदान योजना: गरीब परिवारों को कन्या की शादी के मौके पर 51,000 रुपए का अनुदान दिया जाता है। इस धनराशि को कन्या के विवाह में इस्तेमाल किया जाता है।

मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों को अब तक नज़रअंदाज़ किया जाता रहा था, लेकिन योगी सरकार ने उनकी भी चिंता की है। यूपीएससी, यूपीपीएससी, जेईई और नीट जैसी परीक्षाओं के लिए प्रशिक्षण संसाधन इसके तहत मुहैया कराए जाते हैं। इसके लिए एक पोर्टल भी लॉन्च किया गया है।

प्रवासी श्रमिक उद्यमिता विकास योजना: कोरोना काल में हमने देखा कि कैसे श्रमिकों को महाराष्ट्र और दिल्ली से भगा दिया गया। ऐसे में उत्तर प्रदेश वापस आने वाले मजदूरों को यही काम मिले, इसकी योजना शुरू की गई। इससे श्रमिकों को किसी दूसरे राज्य में जाकर मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।

आसान क़िस्त योजना: इसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को किस्तों में बिजली बिल के भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। शहरी उपभोक्ताओं को 12 और ग्रामीण उपभोक्ताओं को 34 किस्तों की मोहलत मिलती है। मासिक क़िस्त की न्यूनतम राशि 1500 रुपए रखी गई है।

बीसी सखी योजना: ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को इस योजना के माध्यम से बैंकिंग सेक्टर से जोड़ा जाता है। महिलाओं को रोजगार मिलता है और ग्रामीण क्षेत्र के लोग बैंकों से जुड़ते हैं। डिजिटल उपकरण के लिए महिलाओं को 50,000 रुपए और 4000 रुपए प्रति माह 6 महीने तक किए जाते हैं।

बाल सेवा योजना: कोरोना संक्रमण के कारण जो बच्चे अनाथ हुए, उनके भरण-पोषण की जिम्मेदारी इस योजना के माध्यम से योगी आदित्यनाथ सरकार ने उठाई है। उन बच्चों की पढ़ाई से लेकर विवाह तक के खर्च का प्रावधान किया गया। 4000 रुपए प्रति माह का इसके लिए प्रावधान किया गया है। 10 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को राजकीय गृह आवास मुहैया कराई जाती है। पात्र उम्र होने के बाद लड़कियों की शादी की व्यवस्था भी की जाती है।

फ्री बोरिंग योजना: लघु एवं सीमान्त किसानों को इसके तहत खेतो की सिंचाई के लिए बोरिंग की सुविधा दी जाती है। हर वर्ग के गरीब किसानों के लिए ये सुविधा उपलब्ध है। बोरिंग के लिए पम्पसेट खरीदना हो तो उसके लिए भी लोन मिलता है।

वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना:75 जिलों में वहाँ के विशेष प्रोडक्ट्स खोज कर उन्हें बढ़ावा देने के लिए इस योजना को लाया गया, जिससे रोजगार भी बढ़ता है। इस योजना के तहत 5 वर्षों में 25 लाख लोगों को रोजगार के प्रावधान हैं। उन प्रोडक्ट्स के लिए कच्चा माल़, डिजाइन, प्रशिक्षण, तकनीक एवं बाजार – सब योगी सरकार उपलब्ध कराई जाती है।

मिशन शक्ति अभियान: इसके तहत महिलाओं/लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। कई चरणों में इस योजना को चलाया जा रहा है।

पारिवारिक लाभ योजना: इसके तहत गरीब परिवारों के आय सृजन करने वाले व्यक्ति की अगर मृत्यु हो जाती है तो उस स्थिति में उस परिवार के प्रत्येक सदस्य को 30,000 रुपए की धनराशि दी जाती है। बिना किसी बिचौलिए के सीधे आधार से जुड़े बैंक खाते में ये रकम डाली जाती है।

भाग्य लक्ष्मी योजना: इस योजना को बेटियों के जन्म के शुभ अवसर के लिए लाया गया है। लड़की का जन्म होने पर उसकी 50,000 रुपए माता-पिता को मिलते हैं। माँ को अलग से 5100 रुपए दिए जाते हैं। छठी कक्षा में लड़की जाती है तो 3000 रुपए, 8वीं में 5000 रुपए, 10वीं में 7000 रुपए और 12वीं में 8000 रुपए दिए जाते हैं। 21 वर्ष की उम्र होने पर 2 लाख रुपए की सहायता दी जाती है।

श्रमिक भरण-पोषण योजना: इसके तहत 15 लाख दिहाड़ी मजदूरों और रिक्शा/खोमचे/रेहड़ी/फेरी वाले 20.37 लाख श्रमिकों को प्रति व्यक्ति 1000 रुपए दिए जाने की घोषणा की गई। कोरोना काल में उनकी आय का साधन बन था, इसीलिए ये योजना लाई गई।

युवा स्वरोजगार योजना: बेरोजगार युवाओं को रोजगार शुरू करने के लिए 25 लाख तक रुपए उपलब्ध कराए जाने के लिए योगी सरकार ये योजना लेकर आई है। कम ब्याज दर में लोन पर इन रुपयों की व्यवस्था की गई है। हर क्षेत्र के लिए अलग-अलग राशि का प्रावधान है।

कन्या सुमंगला योजना: बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई तक के पूरे खर्च को उठाने के लिए योगी सरकार ये योजना लेकर आई है। बालिकाओं को इसके तहत 15,000 रुपए की व्यवस्था की गई है। 3 लाख की आय से कम वार्षिक आमदनी वालों को इस योजना का लाभ मिलता है। किस्तों में ये रकम मिलती है।

जन सुनवाई: आप ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अब योगी सरकार से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना करने वालों को इसके तहत मदद मिलती है। दूसरे राज्यों में फँसे मजदूरों को भी इससे सहायता मिलता है।

बेरोजगारी भत्ता योजना: इस योजना के तहत शिक्षित बेरोजगार युवकों को भत्ता दिया जाता है। 1000 से 1500 रुपए इन्हें उपलब्ध कराए जाते हैं।

इन सबके अलावा राशन कार्ड बनवाने की योजना को योगी सरकार ने ऑनलाइन कर दिया है। संपत्ति एवं विवाह पंजीकरण योजना को भी डिजिटल किया गया है। श्रमिकों का अब पंजीकरण किया जा रहा है, ताकि उन्हें उनके स्किल्स के हिसाब से काम मिले। वृद्धजनों, विकलांगों और विधवाओं को पेंशन दिए जाने की योजना शुरू की गई। वृद्धों को मिलने वाला पेंशन बढ़ाया गया। भूमि का ब्यौरा अब ऑनलाइन देखा जा सकता है। गन्ना किसानों के लिए अलग पोर्टल बना।

‘रेलवे में हो रही हिंदुत्व एजेंटों की भर्ती’ : वंदे मातरम गाने से मना करने वाले AIMIM नेता अख्तरुल इमान, छात्र आंदोलन को दिया हिंदू मुस्लिम रंग

बिहार में RRB-NTPC को लेकर चल रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच पूर्णिया की अमौर विधानसभा सीट से आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक अख्तरुल इमान (Akhtarul iman) ने इस मामले को हिंदू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की है। इमान ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि रेलवे भर्ती के नाम पर हिंदुत्व के एजेंटों की बहाली की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, AIMIM नेता का कहना है कि ये सब योजनाबद्ध साजिश के तहत किया जा रहा है और खास विचारधारा वाले लोगों को ही केंद्र सरकार नौकरी दे रही है। पूरे देश को फासीवादी लोगों के हाथों में देने की कोशिशें की जा रही हैं। छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देते हुए अख्तरुल इमान ने कहा कि उनका ये आंदोलन केंद्र की इसी साजिश के खिलाफ था।

AIMIM नेता का आरोप है कि केंद्र ने करोड़ों और बिहार ने लाखों लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन नौकरी नही दी गई। जीएसटी और नोटबंदी के नाम पर देश के तमाम उद्योग धंधों को बंद करा दिया गया। अख्तरुल इमान ने इन्हीं आरोपों के साथ आंदोलन का समर्थन करने का ऐलान किया है।

हालाँकि, अख्तरुल इमान के सियासी बयान पर पलटवार करते हुए पूर्णिया के सदर से BJP विधायक विजय कुमार खेमका ने कहा कि अख्तरुल इमान जैसे लोग अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। रेलवे में धार्मिक भेदभाव नहीं किया जा रहा है। ऐसे धार्मिक उन्माद फैलाने वाले बयान नहीं देने चाहिए।

वंदे मातरम गाने से इनकार कर चुके हैं अख्तरुल इमान

कट्टरपंथी मानसिकता वाले अख्तरुल इमान का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले पिछले महीने दिसंबर 2021 में बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के समापन वाले दिन असदुद्दीन ओवैसी के पार्टी नेताओं ने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाने से मना कर दिया था। AIMIM के विधायक अख्तरुल इमान ने राष्ट्रगीत गाने का विरोध करते हुए कहा था कि आखिर सदन में राष्ट्रगीत (National Song) क्यों गाया जा रहा है। उनके मुताबिक इस परंपरा को बिहार विधानसभा पर थोपा जा रहा है। अख्तरुल ईमान ने कहा था, “राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाने की परंपरा बिहार विधानसभा में थोपी जा रही है। किसी की मजाल नहीं कि मुझे गाने को मजबूर करे। ‘वंदे मातरम’ गाने में मुझे समस्या है… मैं वंदे मातरम न गाता हूँ और न ही गाऊँगा।”

‘पहले धर्म परिवर्तन कराओ’: अधिकारी साजिद हुसैन ने मुस्लिम महिला से शादी रजिस्टर करवाने पहुँचे हिंदू युवक को किया प्रताड़ित

लखीमपुर के एडीएम कार्यालय के अधिकारी साजिद हुसैन की एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। इस वीडियो में वो एक हिंदू युवक पर धर्मांतरण का दबाव बना रहे हैं। तरुण गुप्ता नाम के युवक ने इस वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि घटना तब की है जब वो मुस्लिम महिला से स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत शादी रजिस्टर करने के लिए गए थे और साजिद ने उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए कहा था।

22 जनवरी 2022 को अपना मैरिज सर्टिफिकेट हासिल होने के बाद तरुण गुप्ता ने ये वीडियो ट्विटर पर शेयर की। इस वीडियो में सुन सकते हैं कि साजिद तरुण को बोल रहे हैं कि उन्हें मुस्लिम महिला से अगर शादी करनी है तो सबसे पहले उन्हें धर्म परिवर्तन करना होगा।

वीडियो में सुनाई दे रही आवाज के अनुसार बातचीत के अंश इस प्रकार हैं:

साजिद:  “नंबर-1 तो इनका धर्म परिवर्तन कराइए।” 
तरुण: “नहीं करवाएँगे सर।”
साजिद: “फिर शादी कैसे करेंगे?”
तरुण: “स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 से।”
साजिद:  “…आप जाकर के मंदिर में शादी कर लीजिए। रजिस्ट्रार के यहाँ जाकर रजिस्ट्रेशन कराइए।”

तरुण आगे कहते हैं कि वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करना चाहते हैं। उन्हें इसका अधिकार है। इस पर साजिद कहते हैं कि वो देख रहे हैं कि उन्हें स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत करनी है। लेकिन क्या उन्हें लॉ एंड ऑर्डर के बारे में कुछ पता है। इसी बात पर तरुण आवाज तेज करके कहते हैं कि उन्हें लॉ एंड ऑर्डर के अनुसार ही ये अधिकार है कि वो किसी से भी स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करें।

इसके बाद साजिद लड़की के माता-पिता की रजामंदी पर सवाल खड़े करने लगते हैं जिसके बाद युवक ये भी बताता है कि दोनों के परिजन शादी के लिए राजी है और लड़की का भाई बाहर खड़ा है। सब लोग जल्दी आ जाएँगे। इसके बाद भी अधिकारी की ओर से ना नुकुर देख तरुण सवाल करते हैं कि जब वो रहते यहाँ हैं, उनका पता यहाँ का है, तो उनकी शादी यहाँ नहीं होगी तो फिर देश में कहाँ जाकर उनकी शादी होगी। उन्होंने कहा कि न वो चाहते हैं कि अपना धर्म बदलें और न ही अपनी होने वाली बीवी का वो धर्म बदलवाना चाहते हैं।

तरुण गुप्ता की ‘धर्मांतरण दबाव और साजिद हुसैन पर’ ऑपइंडिया से बातचीत

बता दें कि तरुण के साथ घटित घटना के बाद ऑपइंडिया ने उन्हें संपर्क किया और सारा मामला जानने का प्रयास किया। तरुण ने बताया कि उनके ऊपर ये दबाव अक्टूबर 2021 से ही था। तारीख उन्हें सही से याद नहीं है, लेकिन सबसे पहले 7-8 अक्टूबर को गुप्ता ने अधिकारी को नोटिस दिया था जो कि स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के लिए जरूरी होता है।

23 वर्षीय तरुण का कहना है कि वो लंबे समय से अपनी शादी को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर कराना चाहते थे। लेकिन साजिद उन्हें प्रताड़ित करता था और नोटिस पीरियड भी जारी नहीं करता था। तरुण बताते हैं कि साजिद के अनुसार, एक गैर मुसलमान से शादी करने पर उसे इस्लाम में परिवर्तित करना जरूरी है इसलिए वह उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाते थे। मगर, जब साजिद को पक्का हो गया कि तरुण अपने धर्म को नहीं छोड़ने वाले तो उन्होंने कहा कि तरुण की बीवी हिंदू धर्म अपना लें।

लंबे समय तक अधिकारी द्वारा प्रताड़ित होने के बाद 19 दिसंबर 2021 को तरुण ने एक वीडियो बनाई। इस वीडियो में उन्होंने उन सभी सवालों को रिकॉर्ड किया जो उनसे लंबे समय से पूछे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि यूपी में कानून है कि कोई जबरन धर्मांतरण नहीं कर सकता। अगर उन्होंने इस्लाम कबूला तो यूपी पुलिस उन्हें जेल में डाल देगी। इस वीडियो को उच्चाधिकारियों को दिखाने के बाद शादी को मंजूरी मिली और मैरिज सर्टिफिकेट उन्हें मिल पाया।

हालाँकि तरुण की शिकायत है कि इस संबंध में साजिद हुसैन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। युवक के अनुसार, उच्च अधिकारियों ने वीडियो देखने के बाद साजिद को धमकाया था कि अगर साजिद मैरिज सर्टिफिकेट नहीं देते हैं तो उन्हें सस्पेंड किया जाएगा। तरुण ने जानकारी दी कि अक्टूबर से दिसंबर तक के बीच में कई घटनाएँ घटीं जिन्हें वे रिकॉर्ड नहीं कर सके। वे कहते हैं कि जबसे उन्होंने ये वीडियो रिकॉर्ड की उसके बाद उन्हें ऑफिस में मोबाइल लेकर घुसने से मना कर दिया गया। ये उनकी किस्मत थी कि उनके पास एक सबूत था वरना वो अपनी प्रताड़ना का सबूत नहीं दे पाते।

तरुण ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा किया क्योंकि उन्हें लगा कि जो उनके साथ किया गया वो अन्य लोगों के साथ भी उनके मजहब के हिसाब से होता होगा। वह कहते हैं कि साजिश हुसैन के ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि वह कानूनी रूप से किसी को भी अपने धर्म को इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए नहीं कह सकते। विशेष विवाह अधिनियम अंतरधार्मिक जोड़ों को अपने विश्वास को बनाए रखने का अधिकार देता है। मालूम हो कि तरुण और उनकी बीवी के विवाह प्रमाण पत्र से ये पता चलता है कि हकीकत में उनकी शादी के लिए दोनों के परिजन ही गवाह के तौर पर पेश हुए थे और शादी दोनों पक्षों की सहमति से हुई थी।

फिरोज ने दलित हिन्दू युवक का गला रेता, सामने आया खून से लथपथ वीडियो: मामूली विवाद पर चला डाला तेज़ धार वाला हथियार, बागपत की घटना

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बागपत जिले की फैजपुर निनाना ग्राम पंचायत में मुस्लिम फिरोज द्वारा दलित हिंदू व्यक्ति संदीप दूधिया का गला काटने का मामला सामने आया है। आरोपित ने उसके गले पर तेज धार वाले चाकू से वार किया था। कहा जा रहा है कि दोनों दोस्त हैं और दोनों के बीच आपस में ही विवाद हुआ था, जिसके बाद इस घटना को अंजाम दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। फिलहाल पीड़ित को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ से उसे हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, घटना शनिवार (29 जनवरी 2022) की है। फैजपुर निनाना गाँव के रहने वाले ओमबीर दूधिया का बेटा संदीप दोपहर में घास लाने के लिए खेत पर गया था, लेकिन कुछ देर बार वह खून से लथपथ होकर भागते हुए गाँव की ओर आया, जिसके बाद उसे घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस वारदात को गाँव के ही मुस्लिम युवक फिरोज पर अंजाम देने का आरोप है। फिलहाल आरोपित फरार है।

वारयल वीडियो में देखा जा सकता है कि संदीप पूरी तरह से खून से सना हुआ दिख रहा है और उसके गले में खून को रोकने के लिए कपड़ा बाँधा गया है।

इस घटना को लेकर ‘न्यूज 18’ के पत्रकार यतेंद्र शर्मा के मुताबिक, आपसी विवाद के बाद मुस्लिम दोस्त ने दलित हिंदू दोस्त का गला काट दिया।

वहीं इस घटना को लेकर बागपत पुलिस ने ट्वीट किया, “संदीप के पिता ने थाने पर तहरीर दी कि संदीप को गाँव के ही फिरोज ने चाकू मार दिया है। संदीप को तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया जहाँ उनका उपचार चल रहा है। डॉक्टर ने उनको खतरे से बाहर बताया है। अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है। विवेचनात्मक कार्यवाही प्रचलित है।”

वहीं इस घटना का जानकारी मिलते ही हिंदू जागरण मंच भी मौके पर पहुँच गया। उन्होंने घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त करते हुए सीओ से मामले में कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इस घटना को लेकर बागपत के सीओ अनुज मिश्रा ने कहा है कि दोनों के बीच लेनदेन का मामला बताया जा रहा है। जल्द ही हमलावर को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

1600 वीरांगनाओं समेत रानी मणिमाला का जौहर: बाबर ने मृत राजपूत सैनिकों के शीश काट-काट बनाया था टीला, लगा दिया अपना झंडा

मेवाड़ के महाराणा सांगा ने मुग़ल आक्रांता बाबर को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन इस्लाम के प्रसार के नाम पर आए आक्रांताओं ने बर्बरता की सारी सीमाएँ लाँघते हुए दिल्ली पर कब्ज़ा कर लिया। सिसोदिया कुल के महाराणा सांगा का जिन लोगों ने उस समय साथ दिया, उनमें मालवा के मेदिनी राय (या राव) परिहार भी थे। चंदेरी उनकी राजधानी थी। राणा सांगा की मदद से उन्होंने मालवा के सुल्तान को हरा कर अपना राज़ स्थापित किया था। उनकी ही महारानी थी मणिमाला, जिनके जौहर की गाथा आज भी गाई जाती है।

मेदिनी राय परिहार राजपूतों के उस संयुक्त गठबंधन में शामिल थे, जिसने खानवा के युद्ध में बाबर की फौज को टक्कर दी थी। उन्होंने बाईं तरफ से सेना का नेतृत्व किया था और बाबर की दाईं तरफ की फौज को टक्कर दी थी। मालवा के युद्ध में राजपूतों की विजय से दिल्ली में बैठे इस्लामी आक्रांता खुश नहीं थे क्योंकि उन्हें इसका अंदाज़ा नहीं था। इस कारण तत्कालीन लोदी सल्तनत और मेवाड़ के बीच खासा बढ़ गया था। मेदिनी राय ने मेवाड़ की तरफ से कई युद्ध लड़े और लोदी सल्तनत के खिलाफ कई बार जीत दिलाई।

इन्हीं युद्धों का परिणाम था कि आगरा के पास स्थित ‘पिलिआ खार’ तक राणा सांगा का प्रभाव पहुँच गया था। दिल्ली में सल्तनत बदली और बाबर ने सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया। मेदिनी राय के बारे में बता दें कि अंत समय में जब बाबर ने उनकी राजधानी चंदेरी को घेर रखा था और उन्हें आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने युद्ध में बलिदान देने का मार्ग चुना। अंत समय तक वो मातृभूमि और राणा के लिए वफादार रहे। बाबर का कहना था कि मेदिनी राय चंदेरी उसे सौंप दें और खुद शमसाबाद में रहें।

परिहार/प्रतिहार राजपूतों के बारे में बता दें कि सातवीं सदी में जब मध्य-पूर्व और मध्य एशिया में अरबों का प्रभाव बढ़ रहा था, तब इन्हीं के कारण भारत में सिंध से आगे आक्रांता नहीं घुस पाए। मेदिनी राय से पहले कन्नौज के प्रतिहार लोकप्रिय और शक्तिशाली हुआ करते थे। उसके बाद ग्वालियर-नरवर, चंदेरी और नागौर-ऊँचाहार के प्रतिहार प्रभाव में आए। वो 27 जनवरी, 1528 की रात थी जब चंदेरी में वो जौहर हुआ था। कहा जाता है कि 1600 क्षत्राणियों के साथ-साथ रानी मणिमाला ने जौहर किया था।

महल के भीतर ही एक कुंड बना हुआ था, जहाँ धधकती आग में ये वीरांगनाएँ कूदी थीं। आज भले ही इसके 494 वर्ष हो गए, लेकिन आज भी ये जगह उस घटना की याद दिलाती है। बाबर की चौथी बीवी दिलावर बेगम इस जौहर को देख कर बेहोश ही हो गई थीं। वहाँ इस जौहर को सम्मान देने के लिए एक स्मारक का निर्माण भी करवाया गया है, जहाँ हर साल उस बलिदान को याद करने के लिए 29 जनवरी को कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, ताकि नई और अगली पीढ़ियाँ अपने इतिहास के गौरव को महसूस कर सके।

27 जनवरी, 1528 को रात जब ख़त्म हो रही थी तभी बाबर की फ़ौज ने चंदेरी पर हमला बोल दिया था। तोपों के साथ बाबर वहाँ पहुँचा था। उसने मेदिनी राय को पत्र भिजवाया और समझौते की पेशकश की, लेकिन मेदिनी राय ने शत्रु के सामना समर्पण से इनकार कर दिया। अगले दिन वो वीरगति को प्राप्त हो गए और इसकी सूचना मिलते ही रानी ने अन्य स्त्रियों के साथ जौहर किया। किले के दरवाजे पर युद्ध से इतना खून पसरा हुआ था कि उसे ‘खूनी दरवाजा’ कहा जाने लगा था।

बाबर भी जौहर की सूचना के बाद अपनी खून से सनी तलवार लेकर महल में दाखिल हुआ था, लेकिन वहाँ का जौहर देख कर वो भी घबरा गया। कहते हैं कि 15 कोस तक धधकती ज्वालाएँ नजर आ रही थीं। प्रजा उस माहौल में भागी-भागी किले की तरफ आई। आज उस कुंड के पास कुछ नागफनी के पौधे लगे हुए हैं। चंदेरी मध्य प्रदेश के अशोकनगर में पड़ता है। बाबर ने मृत राजपूत सैनिकों के सिर काट-काट कर एक टीला खड़ा किया और लोगों में खौफ पैदा करने के लिए उस पर अपना झंडा गाड़ दिया था।

फल विक्रेता मोहम्मद जावेद ने 4 साल तक किया महिला डेंटिस्ट का रेप: सस्ते में फल देकर फँसाया, लिव-इन में भी रखा हुआ था

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में शादी का झाँसा देकर फल बेचने (Fruit Seller) वाले मोहम्मद जावेद ने महिला डेंटिस्ट से चार साल तक रेप (Rape) किया। लेकिन जब महिला ने शादी करने के लिए कहा तो वो इससे मुकर गया। इस मामले में पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपित फल व्यापारी को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, घटना भोपाल के जहाँगीराबाद इलाके की है। ये इलाका मुस्लिम बहुल इलाका है। तलैया की रहने वाली पेशे से डेंटिस्ट 37 वर्षीय महिला का जहाँगीराबाद में फल व्यापारी मोहम्मद जावेद ने रेप किया। महिला पहले से शादीशुदा है और उसकी शादी 2014 में हुई थी, लेकिन पति के साथ बात नहीं बनी और अब दोनों का कोर्ट में तलाक का केस चल रहा है। वो अपनी शादी के एक साल के अंदर ही पति से अलग रहने लगी थी।

पुलिस को दी शिकायत में महिला ने बताया है कि वो जहाँगीराबाद में फल बेचने वाले मोहम्मद जावेद से फल खरीदती थी, उसी दौरान उन दोनों की जान-पहचान और फिर दोस्ती हो गई थी। महिला को अपने जाल में फँसाने के चक्कर में वो उसे काफी सस्ते में फल देता था। वक्त बीता और दोनों की दोस्ती प्यार में बदल गई। इस बीच जावेद ने महिला को शादी का लालच दिया।

वर्ष 2018 की बात है जब जावेद ने पीड़िता को धोखे से अपने गोडाउन पर बुलाया और वहीं पर पहली बार उसके साथ रेप किया। तब से वो लगातार महिला का बलात्कार करता आ रहा है। हाल ही में महिला ने जावेद से शादी करने को कहा, इस पर वो शादी की बात से मुकर गया। महिला का आरोप है कि चार साल तक जावेद ने उसे पत्नी की तरह से लिव इन रिलेशन में रखा और जब भी उससे शादी करने की बात कहती तो घरवालों को मनाने की बात कहकर इससे पीछा छुड़ा लेता था। लेकिन अब तो उसने सीधे तौर पर शादी से इनकार कर दिया है। बहरहाल पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

‘हिंदूफोबिक’ अभिनेता नसीरुद्दीन ने PM मोदी की तुलना फिल्मी खलनायक ‘जनरल डॉन्ग’ से की, केदारनाथ मंदिर में चढ़ने वाले ब्रह्मपुष्प का भी किया अपमान

हिंदू विरोधी बयानों के लिए कुख्यात बॉलीवुड अभिनेता नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) ने एक बार फिर अपनी नफरत को जाहिर किया है। इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर सांकेतिक रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी है। ये वही नसीरुद्दीन शाह हैं जिन्हें पाकिस्तान के लाहौर में घर जैसा महसूस होता है, लेकिन भारत में डर लगता है और कहते हैं भारत में बोलने की आजादी नहीं है।

नसीरुद्दीन शाह ने प्रधानमंत्री की तुलना ‘तहलका’ फिल्म में दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता अमरीश पुरी के खलनायक किरदार ‘जनरल डॉन्ग’ की है। नसीरुद्दीन शाह ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें उन्होंने पीएम मोदी की टोपी पहनी हुई तस्वीर के साथ ‘जनरल डॉन्ग’ की तस्वीर का कोलाज बना हुआ था। जाहिर तौर पर उन्होंने पीएम की तुलना उसी किरदार से की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जनवरी के दौरान उत्तराखंड की प्रसिद्ध ‘ब्रह्मकमल पहाड़ी टोपी‘ पहनी थी। देवपुष्प के भी नाम से जाना जाने वाला ब्रह्मकमल उत्तराखंड का राज्य पुष्प है। 11 हजार फीट से अधिक ऊँचाई पर रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में बहुतायत में पाए जाने वाले इसी ब्रह्मकमल से केदारनाथ मंदिर में पूजा संपन्न की जाती है। इसी पुष्प के नाम पर टोपी का नामकरण भी किया गया है।

इस तरह नसीरुद्दीन शाह ने ना सिर्फ पीएम मोदी का अपमान किया, बल्कि देवपुष्प पर बनी बह्मकमल टोपी की तुलना एक खलनायक के टोपी के करके उन्होंने हिंदुओं की संस्कृति का भी अपमान किया। ये पहली बार नहीं है, जब नसीरुद्दीन ने इस तरह का कृत्य किया हो। इसके पहले भी वह अपनी घृणा प्रदर्शित करते रहे हैं। पिछले साल नवंबर में उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के ‘अब्बाजान’ वाले बयान पर उन्होंने इसे अवमानना बताया था। उन्होंने कहा था कि हिंदुओं को भारत में बढ़ती कट्टरता पर बोलना चाहिए।

इसी दौरान उन्होंने मोदी सरकार की तुलना नाजी जर्मनी से की थी। उन्होंने कहा था कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री इस्लामोफोबिया से ग्रसित है और सबसे बड़ी बात ये है कि इस दिशा में फिल्म बनाने वाले फिल्ममेकर्स को भारत सरकार प्रोत्साहित कर रही है। 

इससे ठीक पहले नसीरुद्दीन शाह ने तालिबान समर्थकों पर अपना बयान दिया था। अपनी वीडियो में उन्होंने कहा था, “हालाँकि, अफगानिस्तान में तालिबान का फिर से हुकूमत पा लेना दुनिया भर के लिए फिक्र का बायस (चिंता का विषय) है, इससे कम खतरनाक नहीं है हिन्दुस्तानी मुसलमानों के कुछ तबकों का उन बहशियों की वापसी पर जश्न मनाना।”

इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश में बने धर्मांतरण कानून को लेकर भी उन्होंने विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ‘लव जिहाद’ को लेकर तमाशा चल रहा है, उससे वे खासे आक्रोशित हैं। उन्होंने इसे समाज को विभाजित करने वाला बताते हुए कहा कि लोगों को ‘जिहाद’ का सही अर्थ ही नहीं पता है।

पिछले साल दिसंबर में करण थापर से बात करते हुए उन्होंने कहा था वे भारत में अपने बच्चों को लेकर डरे हुए हैं। उन्होंने कहा था कि देश में एक पुलिस इंस्पेक्टर की मौत से ज्यादा एक गाय के मरने को मुद्दा बनाया जाता है, जो त्रासद है।