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महाराष्ट्र के 12 BJP विधायकों का निलंबन सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया, विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को बताया- असंवैधानिक और मनमाना

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने महाराष्ट्र भाजपा (Maharashtra BJP) को शुक्रवार (28 जनवरी 2022) को बड़ी राहत दी। कोर्ट ने राज्य विधानसभा के पीठासीन अधिकारी द्वारा भाजपा के 12 विधायकों को एक साल के लिए निलंबित करने का आदेश खारिज कर दिया। इन विधायकों को पिछले साल 5 जुुलाई को पीठासीन अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में निलंबित किया गया था। इन विधायकों ने अपने निलंबन को शीर्ष कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और सीटी रविकुमार की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि विधायकों को एक साल तक निलंबित करने का पीठासीन अधिकारी का फैसला असंवैधानिक व मनमाना है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि निलंबन सिर्फ जुलाई 2021 में हुए विधानसभा के मानसून सत्र के लिए किया जा सकता था। कोर्ट ने माना कि सत्र के बाद भाजपा के 12 विधायकों को निलंबित करने का प्रस्ताव असंवैधानिक, अवैध और विधानसभा की शक्तियों से परे है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान जस्टिस एएम खानविलकर (Justice AM Khanwilkar) ने कहा था कि विधायकों को एक साल तक निलंबित करना निष्कासन से भी बदतर है और ये पूरे निर्वाचन क्षेत्र को सजा देने जैसा होगा। उन्‍होंने कहा, “कोई भी इन निर्वाचन क्षेत्रों का सदन में प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता, क्योंकि क्षेत्र के विधायक सदन में मौजूद नहीं होंगे। यह सदस्य को नहीं, बल्कि पूरे निर्वाचन क्षेत्र को सजा देने के बराबर है।” 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने ट्वीट किया, “सत्यमेव जयते! मानसून सत्र के दौरान OBC के लिए आवाज उठा रहे हमारे 12 विधायकों के निलंबन को रद्द करने के ऐतिहासिक निर्णय के लिए हम माननीय सुप्रीम कोर्ट का स्वागत और धन्यवाद करते हैं।”

उन्होंने अगले ट्वीट में कहा, “हम शुरू से कह रहे थे कि कृत्रिम बहुमत बनाने के लिए हमारे विधायकों को इतनी लंबी अवधि के लिए निलंबित करना पूरी तरह से असंवैधानिक और सत्ता का घोर दुरुपयोग था और वह भी बिना किसी वैध कारण के। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने हमारे रुख को बरकरार रखा है। सवाल सिर्फ 12 विधायकों का नहीं, बल्कि इन 12 निर्वाचन क्षेत्रों के 50 लाख से अधिक नागरिकों का था।”

इन विधायकों को मिली राहत

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से भाजपा के इन 12 विधायकों- संजय कुटे, आशीष शेलार, अभिमन्यु पवार, गिरीश महाजन, अतुल भटखालकर, पराग अलवानी, हरीश पिंपले, राम सातपुते, जयकुमार रावल, योगेश सागर, नारायण कुचे व कीर्ति कुमार बागडिया को राहत मिली। 

उल्लेखनीय है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान भी तल्ख टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रवि कुमार की बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के वकील ए सुंदरम के सत्र की अवधि से आगे निलंबन की तार्किकता पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि ये फैसला तर्कहीन ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र के लिए खतरनाक भी है। 

पीठ ने कहा था कि कार्रवाई तर्कसंगत होनी चाहिए और निलंबन का कुछ उद्देश्य होना चाहिए। यह उस सत्र से आगे के लिए नहीं होना चाहिए। निलंबन के पीछे कोई वाजिब और ठोस कारण होना चाहिए। पीठ ने कहा था कि एक वर्ष के लिए निलंबन का निर्णय तर्कहीन है, क्योंकि संबंधित निर्वाचन क्षेत्र को छह महीने से अधिक समय के लिए प्रतिनिधित्व से वंचित नहीं किया जा सकता।

टीवी के ‘चाणक्य’ ने देश को समर्पित किया पद्मश्री, कहा- राष्ट्रवाद नहीं होगा तो क्या अमेरिका-इंग्लैंड का एजेंडा चलेगा

इस साल जिन लोगों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा गया है, उनमें एक नाम चंद्रप्रकाश द्विवेदी (Chandraprakash Dwivedi) का भी है। इस फिल्म निर्देशक और पटकथा लेखक को पद्मश्री (Padam Shri) से सम्मानित किया गया है। 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुए धारावाहिक चाणक्य (Chanakya) के वे निर्देशक हैं। चाणक्य की भूमिका भी उन्होंने ही निभाई थी। उनके किरदार ने देश के घर-घर में चाणक्य को पहुँचाने का काम किया।

उन्होंने ‘मृत्युंजय’, ‘एक और महाभारत’, ‘उपनिषद गंगा’ जैसे शो भी बनाए हैं। फिल्मों की बात करें तो वह ‘पिंजर’, ‘जेड प्लस’, ‘मोहल्ला अस्सी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके हैं। आने वाली फिल्मों में ‘पृथ्वीराज’ शामिल है। महाराजा पृथ्वीराज चौहान की इस कहानी में अक्षय कुमार शीर्ष भूमिका रहे हैं। वे अक्षय कुमार की फिल्म ‘राम सेतु’ को प्रोड्यूस भी कर रहे हैं।

पद्मश्री से सम्मानित होने को लेकर निर्देशक चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने खुशी जताई और कहा, “मुझे हमेशा लगता है कि इस तरह की पहचान आपको अधिक जोखिम भरे प्रोजेक्ट लेने के लिए ताकत और साहस देती हैं। मैं ऐतिहासिक काम करता रहा हूँ, मैंने कभी किसी अन्य चीज को आगे बढ़ाने के बारे में नहीं सोचा था। लेकिन जब आपको आपकी सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है, तो आपको लगता है कि आपको इसे और अधिक करना है। इस क्षेत्र में और लोगों को तैयार करना है।” उन्होंने कहा, “मैं हमेशा ऐसा व्यक्ति रहा हूँ जिसने हमारे देश के इतिहास और संस्कृति में डूबी एक कहानी बताने की कोशिश की है और मैं इस पुरस्कार को अपने देश को समर्पित करता हूँ।”

‘आज तक’ से द्विवेदी ने कई मुद्दों पर बात की है। इस दौरान हिंदुत्व और राष्ट्रवाद से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिल्मों में राष्ट्रवाद क्यों नहीं होना चाहिए? अगर यह नहीं होगा तो क्या लोग अमेरिका या इंग्लैंड का एजेंडा लेंगे? उन्होंने क्रिटिक को लेकर भी बात की। कहा कि पहले समीक्षक फिल्म मेकर्स को डराया करते थे। लेकिन अब सोशल मीडिया पर लोग खुल कर बात करने लगे हैं। इसलिए क्रिट्क्स द्वारा एक या दो स्टार देने वाले फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा देती है।

उन्होंने कहा, “जब से ये फेसबुक व सोशल मीडिया आया है, उन्होंने औकात दिखा दी है क्रिटिक्स को। जिसे एक या दो स्टार मिलते हैं, वैसी फिल्म बॉक्स ऑफिस के रेकॉर्ड्स तोड़ रही हैं। आपके रिव्यू का सम्मान है, लेकिन आप कोई ब्रह्म वाक्य नहीं लिख रहे हैं। जब मैंने चाणक्य बनाई थी, तो मुझ पर भी नेशनलिस्ट का आरोप लगा। आज चाणक्य कल्ट माना जाता है।” 

इस दौरान उन्होंने सरकार द्वारा अपने फेवरेट लोगों को अवॉर्ड देने के आरोप को भी नकारा। उन्होंने कहा कि जब आपकी जमीन मजबूत होती है और आप सच बोलते हैं तो कोई सरकार आपको बाध्य नहीं कर सकती। चाणक्य का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उस समय कॉन्ग्रेस की सरकार थी और उन्हें विरोध झेलना पड़ा था। लेकिन जब पिंजर के लिए अवॉर्ड मिला तब भी कॉन्ग्रेस की ही सरकार थी। इसी तरह जब मोहल्ला को लेकर विवाद हुआ उस समय भाजपा की सरकार थी।

गौरतलब चंद्रप्रकाश द्विवेदी का जन्म साल 1960 में राजस्थान के सिरोही जिले में हुआ था। द्विवेदी पेशे से एक डॉक्टर हैं। लेकिन साहित्य और इतिहास में गहरी रूचि के चलते उन्होंने डॉक्टरी का पेशा छोड़ थिएटर से अपना करियर शुरू किया था।

FIR के बाद खान सर ‘लापता’, कोचिंग पर ताला: वीडियो जारी कर छात्रों से कहा- हाथ जोड़ते हैं कोई लड़का प्रोटेस्ट में हिस्सा न ले…

प्रतियोगी परीक्षाओं में धाँधली का आरोप लगाते हुए बिहार में छात्रों ने 26 जनवरी 2022 (बुधवार) को हिंसक प्रदर्शन किया था। छात्रों को उकसाने के आरोप में पटना के छह कोचिंग संस्थानों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से एक खान सर भी हैं। उनका एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे छात्रों से 28 जनवरी 2022 को किसी भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल नहीं होने की अपील कर रहे हैं। इसमें वे छात्रों को बता रहे हैं उनकी माँगों का समाधान हो चुका हैं। अब उनके नाम पर दूसरे भी उपद्रव कर सकते हैं, जिसके परिणाम छात्रों को ही भुगतने पड़ेंगे। उल्लेखनीय है कि आज विपक्षी दलों ने बंद का आह्वान कर रखा है।

बवाल के बाद 6 कोचिंग संस्थानों पर FIR दर्ज की गई थी। यह केस पटना के पत्रकार नगर थाने में दर्ज किया गया है। इन सभी कोचिंग संस्थानों पर छात्रों को उकसाने और भड़काने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक FIR दर्ज होने के बड़ा से खान सर गायब हैं। उनके नंबर भी बंद आ रहे हैं। उनके पटना स्थित कोचिंग संस्थान ‘Khan GS Research Centre’ पर भी ताला लगा हुआ है। पुलिस का दावा है कि पटना में राजेंद्र टर्मिनल पर हंगामा करने वाले 4 छात्रों ने खान सर का नाम उकसाने वालों में लिया है। दर्ज FIR में खान सर, एसके झा सर, नवीन सर, अमरनाथ सर, गगन प्रताप सर, गोपाल वर्मा सर नामजद किए गए हैं। यह हिंसा RRB-NTPC के हुए एग्जाम के रिजल्ट पर उठे सवालों के बाद भड़की थी।

खान सर व अन्य के खिलाफ पुलिस कस्टडी में छात्रों के बयान

ऑपइंडिया से बातचीत में पत्रकार नगर थाने के SHO ने कहा, “इस केस में पुलिस कोई जल्दबाजी नहीं कर रही। जो भी नाम प्रकाश में आए हैं वो छात्रों से पूछताछ के बाद आए हैं। खान सर कहाँ हैं, ये अभी नहीं पता। हमारा मुख्य मकसद लॉ एन्ड आर्डर सामान्य बनाए रखना है।”

27 जनवरी जारी वीडियो में खान सर ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा है, “सारे स्टूडेंट्स के लिए आवश्यक सूचना है। आपकी सारी माँगों को रखा गया है। हम आपकी सारी दुविधाओं को अब क्लियर करते हैं। 28 जनवरी को किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लीजिए, ये आपके लिए गलत साबित हो जाएगा। अभी वीडियो आया है बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी का। उन्होंने कहा- मैंने रेलमंत्री से बात की, वो स्टूडेंट्स की माँग पर सहमत हैं।”

वे आगे कहते हैं, “रेल मंत्री भी इस बात से सहमत हैं कि 20 गुना ज्यादा रिजल्ट देंगे। नंबर रिपीट नहीं होंगे। 3.5 लाख बच्चों को और जोड़ा जाएगा। एनटीपीसी वालों की समस्या खत्म हो गई। ग्रुप डी वालों के सीबीडीटी 2 को अचानक जोड़ा गया था, उसे हटा दिया जाएगा। पीएम मोदी का भी इसमें दखल था, इसलिए आसानी से सहमति बन गई।”

वीडियो में खान सर कह रहे हैं, “गलती रेलमंत्री या पीएम की तरफ से नहीं थी। गलती आरआरबी की थी। आरआरबी भी कुछ चीजों से जूझ रही थी। उसे इतने बड़ा एग्जाम कराने के लिए कोई कंपनी जल्दी नहीं मिल रही थी। कुछ लोग कह रहे हैं कि कुछ राज्यों में चुनाव है, इसलिए ऐसा हो रहा है। ये सब गलत है। ये किसी छात्र या टीचर का बयान नहीं है। ये राजनीतिक बयान है। रेलवे को इसलिए छात्रों की बात माननी होगी, क्योंकि यह संशोधन हुआ है और जो कमेटी बनाई गई है। यह आरआरबी का फैसला नहीं है। इसमें रेल मंत्रालय और पीएमओ शामिल है। ऐसे में कोई छात्र 28 जनवरी को प्रदर्शन में शामिल नहीं हो। जब छात्र प्रोटेस्ट करेगा, तो उसकी आड़ में अन्य लोग हिंसा और आगजनी करेंगे।”

‘मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए’: प्रियंका गाँधी की कैंडिडेट ने कॉन्ग्रेस में महिलाओं को असुरक्षित बता छोड़ी पार्टी, नहीं लड़ेंगी चुनाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) में ‘महिला शक्ति’ का नारा लेकर उतरी कॉन्ग्रेस की एक महिला प्रत्याशी ने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया कि संगठन में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं। बदायूँ जिले के शेखूपुर विधानसभा सीट से कॉन्ग्रेस ने फराह नईम (Farah Naeem) को उम्मीदवार बनाया था। नईम ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा करते हुए पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया। 

मीडिया से बात करते हुए फराह नईम ने कहा, “पार्टी जिलाध्यक्ष ओंकार सिंह ने कहा कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं मिलना चाहिए और मैं एक चरित्रहीन महिला हूँ। जिला इकाई में महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “महिलाएँ बदायूँ कॉन्ग्रेस संगठन में सुरक्षित नहीं हैं। मैंने टिकट के लिए दावेदारी की, लड़ाई लड़ी। ओंकार सिंह (कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष) ने मुझे रोकने के लिए मेरे चरित्र पर कीचड़ उछाले, महिलाओं के चरित्र पर कीचड़ उछाले। उनका कहना है कि मुसलमानी महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाए, जबकि कॉन्ग्रेस को हर बिरादरी और जाति का वोट चाहिए। ओमकार सिंह ने मेरे लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। हर कोशिश की धमकाने की। उन्होंने टिकट रोकने की हर कोशिश की।” 

जिलाध्यक्ष ने लगाया चरित्रहीन का आरोप

नईम ने कहा, “ओंकार सिंह जैसे लोग इस संगठन में मौजूद हैं तो मैं चुनाव नहीं लड़ूँगी। मैं कॉन्ग्रेस पार्टी की सदस्यता से भी इस्तीफा देती हूँ। मेरे बारे में बताया गया है कि मेरे पास अपने खाने के लिए भी एक रुपया नहीं है। दूसरा आरोप है कि मैं चरित्रहीन हूँ। ऐसे बहुत सारे आरोप लगाए गए हैं, जिन्हें गिनते-गिनते मैं थक जाऊँगी। इन आरोपों ने मुझे बहुत आघात पहुँचाया है।”

वह आगे कहती हैं, “मैंने भी तय किया है कि मैं लड़ूँगी, मैं टूटूँगी नहीं। आगे भी सेवा करूँगी और हर उस किनारे पर आकर खड़ी होऊँगी, जहाँ महिलाओं को सुरक्षित नहीं बताया जाएगा और उसे अकेला समझा जाएगा। जब प्रभारी लोगों ने फोन पर मुझसे सवाल पूछे तो मैंने कानों पर हाथ रख लिया और कहा कि मुझे अफसोस है कि मैंने कॉन्ग्रेस पार्टी की सेवा की और ओंकार सिंह ने मेरे लिए इतने गंदे शब्द इस्तेमाल किए।” यह बोलते-बोलते फराह नईम पूरी तरह से टूट जाती हैं और रो पड़ती हैं।

फराह नईम के इस्तीफा देने के बाद कॉन्ग्रेस ने उनकी जगह पर बदायूँ के शेखूपुर विधानसभा क्षेत्र से ममता देवी प्रजापति को मैदान में उतारा है। बता दें कि शेखुपुर विधानसभा क्षेत्र बदायूँ जिले का हिस्सा है और आँवला (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) के पाँच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। 2008 में इस विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था। विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 2012 में हुआ था। उत्तर प्रदेश में सात चरणों में चुनाव होने हैं। पहले चरण की वोटिंग 10 फरवरी और अंतिम चरण का मतदान 7 मार्च को होगा।

किशन भरवाड मर्डर केस: 2 संदिग्ध गिरफ्तार-हिंदू संगठनों ने किया बंद का आह्वान, फेसबुक पोस्ट से नाराज थे कट्टरपंथी-सरेराह मारी थी गोली

गुजरात के अहमदाबाद में 25 जनवरी 2022 (मंगलवार) को हुए किशन भरवाड नाम के युवक की हत्या (Murder) केस में पुलिस ने 2 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी गुजरात के गृहमंत्री हर्ष सांघवी ने दी है। उन्होंने किशन के परिवार को जल्द ही न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। ये गिरफ्तारी 27 जनवरी (गुरुवार) को की गई। बताया जाता है कि किशन ने सोशल मीडिया (Social Media) पर एक वीडियो पोस्ट अपलोड की थी। इसके बाद से इस्लामी कट्टरपंथी (Radical Islam) उसके खिलाफ थे। इस मामले में 5 पर केस दर्ज हुआ है। बाकियों की तलाश की जा रही है।

गृहमंत्री ने यह भी कहा कि पुलिस इस मामले के खुलासे के लिए लगातार काम कर रही है। वहीं दूसरी तरफ इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने धंधुका बंद का ऐलान किया है। धंधुका तहसील क्षेत्र में हुए इस हत्याकांड की प्रतिक्रिया अन्य शहरों में भी देखने को मिल रही है। बोटाद जिले के रणपुर में भी बंद का आह्वान कर प्रदर्शन किया गया है। विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) के इस आह्वान को स्थानीय लोगों और अन्य हिन्दू संगठनों का पूरा समर्थन भी मिल रहा है। दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। जिलाधिकारी के कार्यालय में इस केस की फास्ट ट्रैक जाँच करने का ज्ञापन भी दिया गया।

अहमदाबाद देहात के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह यादव ने कहा, “पुलिस की कई टीमें आरोपितों को पकड़ने के लिए कार्य कर रहीं हैं। अब तक 2 आरोपितों को पकड़ा जा चुका है। दोनों से पूछताछ चल रही है। इस मामले में सभी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

गौरतलब है कि किशन की पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। पुलिस ने भी किशन के खिलाफ एक्शन लिया था। इसके बाद से किशन ने अपनी प्रोफाइल में सेटिंग को प्राइवेट कर दिया था। साथ ही घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था। घटना के दिन किशन अपनी बाइक से निकला था।

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक मोढवाड़ा मोड़ पर किशन पर पहली गोली चलाई गई जिसमें वो बच गया। इसके बाद उस पर दोबारा हमला किया गया। इसके फलस्वरूप किशन की मौत मौके पर ही हो गई थी। बताया गया कि आरोपित किशन का पीछा कर रहे थे। पुलिस ने शक जताया था कि शायद विवादित पोस्ट के चलते ही किशन की हत्या हुई हो।

‘दुबई एक्सपो 2020’: पीएम मोदी से घृणा में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने इंडिया पवेलियन को लेकर फैलाया झूठ, लोगों ने पोल खोली

दुबई के अल फोरसन जिले में 1 अक्टूबर 2021 से चल रहे एक्सपो 2020 में इंडिया के पवेलियन में भारत के 73वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की प्रतिभा, व्यापार, परंपरा, पर्यटन और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहल को बहुत ही शानदार तरीके से प्रदर्शित किया गया, लेकिन कॉन्ग्रेस की नेता शमा मोहम्मद ने इसको लेकर भी झूठ फैलाना शुरू कर दिया।

केरल कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता डॉ शमा मोहम्मद ने एक्सपो 2020 दुबई में पीएम नरेंद्र मोदी और भारत के अत्याधुनिक पवेलियन को लेकर झूठा प्रचार करते हुए 27 जनवरी 2022 को ट्वीट किया, “मैंने अपने पति से दुबई एक्सपो के बारे में पूछा, खासकर भारतीय पवेलियन के बारे में। उनका जवाब- शमा दुबई एक्सपो बहुत अच्छा है, लगभग सभी पवेलियन अच्छे से बने हैं। भारतीय मंडप बहुत बड़ा है, लेकिन यह एकमात्र ऐसा पवेलियन है, जिसमें चारों ओर प्रधानमंत्री का चेहरा दिख रहा है! भारत को दिखाया जा रहा है या सिर्फ पीएम मोदी को!”

हालाँकि, शमा मोहम्मद का यह झूठ अधिक देर नहीं टिक सका। उनके झूठ को बेनकाब करते हुए एक ट्विटर यूजर ने दुबई एक्सपो 2020 में 8,750 वर्ग मीटर में फैले भारत के अत्याधुनिक पवेलियन का वीडियो साझा किया। 7.20 मिनट के वीडियो में चार मंजिलों में फैले पूरे पवेलियन को दिखाया गया है। खास बात यह है कि कॉन्ग्रेस प्रवक्ता के दावों के विपरीत पूरे वीडियो में पीएम मोदी के पोस्टर या चेहरे का कोई निशान नहीं है।

ऐसे कई वीडियो हैं जिन्हें लोगों ने पवेलियन में जाने के बाद अपलोड किया है और उनमें से किसी में भी मोदी का पोस्टर नहीं दिखा।

भारतीय पवेलियन को लेकर कॉन्ग्रेस ने बोला झूठ

दुबई में चल रहे एक्सपो 2020 में भारत का पवेलियन सबसे प्रभावशाली पवेलियनों में से एक है। इसका उद्घाटन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने किया था और उन क्षेत्रों पर प्रकाश डाला था, जिनमें भारत वैश्विक लीडर है या बनने की कगार पर है। चार मंजिल में फैले इस पवेलियन के शीर्ष मंजिल को छोड़कर प्रत्येक मंजिल में दो विंग हैं। लोग ए-विंग से अंदर जाते हैं और बी विंग के से बाहर निकलते हैं।

दर्शकों को इस पैवेलियन में एक सुरंग के माध्यम से ले जाया जाता है, जहाँ सबसे पहले भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को दिखाया जाता है। वहाँ पर देश के स्वास्थ्य विकास के साथ-साथ योग, आयुर्वेद और वैकल्पिक चिकित्सा सभी का उल्लेख किया गया है। ऊपर के तीन मंजिल भारतीय संस्कृति, संयुक्त अरब अमीरात के साथ देश के द्विपक्षीय संबंध और कॉर्पोरेट भारत के लक्ष्यों को समर्पित हैं।

TMC सांसद जवाहर सरकार ने ‘पद्म विभूषण’ अवॉर्ड के लिए इस अभिनेता के नाम पर फैलाया झूठ: यूजर्स बोले- 2015 में ही दे चुकी है मोदी सरकार

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद और प्रसार भारती के पूर्व सीईओ जवाहर सरकार (Jawahar Sircar) द्वारा 26 जनवरी (बुधवार) को भ्रामक ट्वीट करने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी क्लास लगा दी। अपने ट्वीट में सरकार ने लिखा था, “बस सोच रहा था: क्या दिलीप कुमार भारत रत्न या पद्म विभूषण के लायक नहीं थे?”। इस ट्वीट के माध्यम से सरकार ने बताने की कोशिश की कि दिलीप कुमार को भारत रत्न या पद्म विभूषण से सम्मानित नहीं किया गया। इससे एक दिन पहले भारत सरकार ने इस वर्ष के लिए पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की थी।

सरकार का ट्वीट

साल 2012 से 2016 तक भारत के सरकारी ब्रॉडकास्टर प्रसार भारती के सीईओ रहे जवाहर सरकार को यह नहीं पता था कि दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार को 2015 में एनडीए सरकार ने पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। दिलचस्प बात यह है कि प्रसार भारती के अंतर्गत ही डीडी न्यूज संचालित होता है और दिलीप कुमार को पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने पर डीडी ने दो रिपोर्टें चलाई थी।

26 जनवरी 2015 को उनके नाम की घोषणा के बाद 13 दिसंबर 2015 को केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह दिवंगत दिलीप कुमार को पद्म विभूषण प्रदान करने उनके घर गए थे। डीडी न्यूज ने इस समारोह का प्रसारण किया था। दोनों क्लिप डीडी न्यूज के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध हैं। यह खबर अखबारों में भी खूब छपा था। ऐसा लगता है कि सरकार द्वारा संचालित चैनल के सीईओ रहने के दौरान उन्हें पता ही नहीं था कि चैनलों पर क्या चल रहा है।

जवाहर सरकार द्वारा भ्रामक खबर ट्वीट करने के बाद सोशल मीडिया ने जमकर उनकी आलोचना की। ट्विटर यूजर सेफ_जॉनी ने जवाहर सरकार को अनपढ़ बताया और कहा, “अनपढ़ आदमी, दिलीप कुमार को मोदी सरकार द्वारा 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह खुद उनके आवास पर गए और उन्हें सम्मानित किया।”

एक अन्य ट्विटर यूजर वरदा मराठे ने कहा, “मैं दूसरी चीजों के बारे में नहीं जानता, लेकिन इतना जरूर जानता हूँ कि आपके लिए तथ्य मायने नहीं रखते।”

दिग्गज अभिनेता को पद्म विभूषण से सम्मानित किए जाने की खबर लगभग सारे मीडिया हाउसों ने दिखाई और प्रकाशित की थी। इस समारोह के क्लिप उनके आधिकारिक चैनलों पर उपलब्ध हैं। कोई यह मान सकता है कि प्रसार भारती के तहत आने वाले चैनलों पर क्या सामग्री दिखाई जा रही है, इसके बारे में जवाहर सरकार को नहीं पता था, लेकिन यह विश्वास करना कठिन है कि उन्होंने उस दौरान कोई अखबार नहीं पढ़ा या टीवी पर कोई समाचार नहीं देखा।

हेट स्पीच केस में सुदर्शन टीवी के संपादक सुरेश चव्हाणके के खिलाफ कोर्ट ने पुलिस से माँगा एक्शन रिपोर्ट, उमर खालिद के अब्बू ने दायर की है याचिका

सुदर्शन टीवी के एडिटर इन चीफ सुरेश चव्हाणके कथित हेट स्पीच के मामले में मुश्किलों में घिर गए हैं। गुरुवार (27 जनवरी 2022) दिल्ली की साकेत कोर्ट ने दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में एक कार्यक्रम में साम्प्रदायिक रूप से विभाजनकारी भाषण देने के मामले में सुरेश चव्हाणके के खिलाफ दायर एक याचिका पर पुलिस से कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) माँगी।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस मसले पर सुनवाई के लिए साकेत कोर्ट के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट जितेंद्र प्रताप सिंह ने सुनवाई के लिए 15 मार्च 2022 की तारीख तय कर रखी है। उल्लेखनीय है कि चव्हाणके के खिलाफ यह याचिका वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ सैयद कासिम रसूल इलियास ने एडवोकेट तारा नरूला, तमन्ना पंकज और प्रिया वत्स के जरिए दायर की है। इसमें उन्होंने सुदर्शन टीवी के प्रधान संपादक के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत केस दर्ज करने की माँग की है।

खास बात ये है कि जिस रसूल इलियास ने ये याचिका दायर की है, उसका बेटा जेएनयू का पूर्व छात्र उमर खालिद दिल्ली दंगों के मामले में UAPA एक्ट के तहत आरोपित है और न्यायिक हिरासत में हैं। एक सत्र अदालत उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही है।

क्या हैं चव्हाणके पर आरोप

इलियास द्वारा दायर याचिका में सुरेश चव्हाणके पर ये आरोप लगाया गया है कि आवेदन में 19 दिसंबर 2021 को गोविंदपुरी मेट्रो स्टेशन पर हिंदू युवा वाहिनी द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने के लिए लोगों के एक समूह को ‘मरने और मारने’ के लिए ‘शपथ’ दिलाते हुए देखा गया था।

याचिका में चव्हाणके के खिलाफ भाषण देने और साम्प्रदायिक, विभाजनकारी, आग लगाने वाले और घृणास्पद भाषण देने वाले बयान देने के लिए प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई। इसमें यह कहा गया है कि इस तरह के भाषणों से कुछ समुदायों में तनाव की स्थिति उत्पन्न होगी, जिससे हिंसा भड़केगी। याचिका में इस ओर अदालत का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई है कि चव्हाणके का बयान भारत को एक हिंदू राष्ट्र (हिंदू राष्ट्र) बनाने के लिए अल्पसंख्यकों के खिलाफ बल प्रयोग से हिंसा का खतरा पैदा हो गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि 19 दिसंबर की घटना के बाद चव्हाणके ने ‘एक ही सपना हिंदू राष्ट्र’ ट्वीट किया था, जो देश के संविधान के मूल मूल्यों, धर्मनिरपेक्षता, समानता और बंधुत्व पर सीधा हमला है और धर्म के नाम पर दुश्मनी पैदा करने के इरादे से किए गए हैं। इलियास ने माँग की है कि मौजूदा मामले में किसी भी तरह की प्रारंभिक जाँच के चव्हाणके के खिलाफ कार्रवाई की जाए, क्योंकि उनके भाषण और ट्वीट पहले से ही पब्लिक डोमेन में हैं।

‘योगी जैसा मुख्यमंत्री मुलायम सिंह और अखिलेश भी नहीं रहे’: सपा के खिलाफ प्रचार पर बोलीं अपर्णा यादव- ‘पार्टी जो कहेगी करूँगी’

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) विधानसभा चुनावों के बीच मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) की छोटी बहू अपर्णा यादव (Aparna Yadav) ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में योगी आदित्यनाथ (Yogi Aaditynath) जैसा मुख्यमंत्री अभी तक नहीं हुआ। सीएम योगी ना अपने संस्कार छोड़ें हैं और ना भविष्य को बेहतर बनाने की चिंता छोड़ी है। अपर्णा ने कहा, “मैं हिंदू राष्ट्र में हिंदी बोलने वाली व्यक्ति हूँ। ये बहुत ही जरूरी था कि राम मंदिर बने। ये सभी ने देखा था कि मैंने इसके लिए चंदा भी दिया था।”

टीवी 9 के कार्यक्रम ‘सत्ता का सम्मेलन’ के दौरान गुरुवार (27 जनवरी 2022) को अपर्णा यादव ने सीएम योगी की जमकर तारीफ करते हुए कहा, “आदरणीय महाराज जी से मुझे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इन्होंने अपने अतीत को नहीं छोड़ा, यानी महाराज अवैद्यनाथ जी के डायरेक्शन में जो राम मंदिर का आंदोलन शुरू हुआ था, वो आज (योगी सरकार में) पूरा हो रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “ये आज ‘कल के लिए’ कॉलेज, मेडिकल कॉलेज बनवा रहे हैं। तात्पर्य की इन्होंने (योगी आदित्यनाथ ने) न अपने अतीत को छोड़ा है और ना आने वाले कल को छोड़ा है। ये अमेल्मेशन जो हमें देखने को मिलता है, वो हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी में ही देखने को मिलता है। आज तक मैंने नहीं देखा कि ऐसा कोई मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश में बना हो, जिसने आज तक ना अपने संस्कार छोड़ें हों और ना कल की चिंता छोड़ी हो। ये बहुत बड़ी बात है।”

मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के भी मुख्यमंत्री रहने के सवाल पर अपर्णा ने कहा, “मैं तो कह रही हूँ कि बाबा जी जितना अच्छा मुख्यमंत्री कोई नहीं हुआ।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने (योगी आदित्यनाथ) प्रदेश में 27 मेडिकल कॉलेज दिए। 29 पॉलिटेक्निक कॉलेज दिए। कोविड के इस दौर में जब पूरा विश्व चरमरा गया है, वहीं उत्तर प्रदेश में बाबा जी ने पॉलिटेक्निक कॉलेज का निर्माण करवाया, जो ये दिखाता है कि वो शिक्षा पर फोकस कर रहे हैं।”

अपर्णा यादव ने यह भी कहा कि जब वो भाजपा में शामिल हुईं तो मुलायम सिंह यादव ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भाजपा में शामिल होकर लौटने के बाद सबसे पहले वह मुलायम सिंह यादव से मिली थीं और उनके साथ अपनी तस्वीरें साझा की थीं। अपर्णा ने बताया कि मुलायम सिंह यादव ने उनसे कहा कि जिस चीज में खुशी है, वो करिए।

अपर्णा यादव ने आगे कहा, ”मैंने बहुत काम किया और मुझे इस बात का दुख है कि भैया (अखिलेश यादव) को मेरा काम नहीं दिखा। लेकिन, मुझे खुशी इस बात की है कि महाराज जी (योगी आदित्यनाथ) को मेरा सामाजिक काम दिखा और उन्होंने इसकी प्रशंसा की।” अखिलेश यादव और सपा के खिलाफ प्रचार के सवाल पर अपर्णा यादव ने कहा कि पार्टी जो कहेगी, जहाँ कहेगी वहाँ वह प्रचार करने के लिए जाएँगी। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए वह राजनीति में नहीं आई हैं। राजनीति में उनका आने का मकसद लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।

इंटरव्यू के दौरान अपर्णा ने भाजपा के लिए एक गाना भी गाया। जिसके बोल हैं, ‘केशरी बाना सजा है वीर का श्रृंगार कर। ले चले हम राष्ट्र नौका को भंवर से पार कर’। बता दें कि अपर्णा यादव एक बेहतरीन गायिका भी हैं।

DU के हंसराज कॉलेज में खुला ‘गौशाला’: छात्रों को मिलेगा शुद्ध दूध-दही, वामपंथी छात्र संगठन SFI उतरा विरोध में

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हंसराज कॉलेज (Hansraj College) में स्वामी दयानंद सरस्वती गौ संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित किया गया है। यहाँ पर न केवल गायों पर अनुसंधान किया जाएगा बल्कि छात्रों को शुद्ध दूध और दही उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा कैंपस में हर महीने होने वाले हवन के लिए शुद्ध घी भी मिल जाएगा।

स्वामी दयानंद सरस्वती गौ-संवर्धन एवं अनुसंधान केंद्र नाम से स्थापित इस केंद्र को एक गाय के साथ शुरू किया गया है और प्रिंसिपल डॉ रमा के अनुसार, यदि किया गया शोध उपयोगी और फायदेमंद साबित होता है तो इसे बढ़ाया जाएगा।  

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “हमारा कॉलेज एक डीएवी ट्रस्ट कॉलेज है और इसका आधार आर्य समाज है। उस परंपरा के अनुरूप, हम हर महीने के पहले दिन हवन करते हैं, जिसमें सभी शिक्षण, गैर-शिक्षण कर्मचारी और छात्र शामिल हो सकते हैं। उस (हवन) दौरान, हम उन सभी लोगों का अभिनंदन करते हैं जिनका भी उस महीने जन्मदिन होता है। इसके लिए हमें हर महीने बाजार में जाकर पूजा में चढ़ाने के लिए जरूरी चीजें जैसे कि शुद्ध घी खरीदना पड़ता है। लेकिन हम अब इसमें आत्मनिर्भर हो सकते हैं।”

वर्तमान में, ये गौ केंद्र पुरुषों के छात्रावास से लेकर कॉलेज के गेट के पास स्थित है। लेकिन ऐसे और केंद्र बनाए जाने बाकी हैं। प्राचार्य डॉ. रमा का कहना है कि कॉलेज एक गोबर गैस प्लांट पर भी काम कर रहा है, जिसे केंद्र का सहयोग मिल सकता है। इसके अलावा वह गाय के विभिन्न पहलुओं पर शोध कर सकते हैं। एक और विचार यह है कि जब हॉस्टल खुलेगा तो छात्रों के लिए शुद्ध दूध और दही मिल सकेगा।

दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिकारियों को फिलहाल जानकारी नहीं है कि डीयू के अन्य कॉलेजों में भी ऐसी कोई पहल की गई है या नहीं। रजिस्टार विकास गुप्ता ने कहा, “मुझे इस विशेष परियोजना के बारे में पता भी नहीं था। यह कॉलेज के स्तर पर एक अच्छी पहल साबित होनी चाहिए।”

वहीं कॉलेज के छात्र कॉलेज परिसर में स्थापित गौरक्षा एवं शोध केंद्र का विरोध कर रहे हैं। सीपीआई (एम) के स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) की हंसराज कॉलेज इकाई ने आरोप लगाया है कि इस केंद्र की स्थापना महिला छात्रावास के लिए निर्धारित जगह पर की गई है।

SFI ने इस संबंध में बयान भी जारी किया, जिसमें कहा गया, “एसएफआई हंसराज बिना शर्त एक गौशाला के निर्माण की निंदा और विरोध करते हैं। उसी स्थान पर जो एक महिला हॉस्टल के लिए आरक्षित था, जिसका निर्माण कई वर्षों से रुका हुआ है.. हमें यह घृणित लगता है कि हमारा कॉलेज प्रशासन संघर्षरत छात्राओं के बजाय गायों की ‘संरक्षण और पदोन्नति’ को प्राथमिकता देता है। उनके हितों को इस तरह के बेतुके फैसले के लिए दरकिनार किया जा रहा है।”

प्रिंसिपल डॉ. रमा ने SFI के आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि सबसे पहली बात तो यह है कि यह जगह उनकी योजना के हिसाब से हॉस्टल के लिए बहुत छोटा है। यह हॉस्टल कम से कम 100 छात्राओं के लिए बनेगा। उन्होंने कहा कि वह स्थान हॉस्टल के लिए रिजर्व नहीं है। प्रिंसिपल ने कहा कि वह हॉस्टल के निर्माण के लिए कई औपचारिकताओं से गुजर रहे हैं और कॉलेज के मास्टरप्लान पर फिर से काम कर रहे हैं, जिसे नगर निगम द्वारा अनुमोदित करने की आवश्यकता होगी। वहीं छात्र संघ ने कहा कि ‘गौशाला’ को हटाने और लंबे समय से प्रस्तावित महिला हॉस्टल का निर्माण शुरू करने के लिए जल्द एक आक्रामक अभियान शुरू किया जाएगा।