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अहमदाबाद के मौलवी ने दिए हथियार, मुंबई के मौलवी ने ऑर्डर: रिपोर्ट्स में दावा, गुजरात में हिंदू युवक की गोली मारकर कर दी गई थी हत्या

किशन भरवाड की हत्या के मामले में दो मौलवी की भूमिका सामने आई है। अहमदाबाद पुलिस इस मामले में अब तक दो गिरफ्तारी कर चुकी है। 27 वर्षीय बोलिया की 25 जनवरी 2022 को अहमदाबाद के धंधुका शहर के मोढवाडा-सुंदकुवा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

जी न्यूज गुजराती की रिपोर्ट के अनुसार इस हत्या में जिन दो मौलवियों की संलिप्तता सामने आई है, उनमें से एक अहमदाबाद का और दूसरा मुंबई का है। अहमदाबाद के जमालपुर इलाके के मौलवी ने कथित तौर पर हत्यारों को हथियार मुहैया कराए। वहीं मुंबई के मौलवी ने हत्या के निर्देश दिए थे।

न्यूज 18 गुजराती की रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने घटना की पड़ताल के लिए सात अलग-अलग टीमों का गठन किया है। गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने जॉंच की समीक्षा की है। पुलिस ने अब तक जुटाए गई सारी जानकारियों से उन्हें अवगत कराया है।

किशन भरवाड की हत्या के बाद से स्थिति तनावपूर्ण है। शहर में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। उल्लेखनीय है कि मंगलवार को दो बाइक सवारों ने दो राउंड फायरिंग कर किशन भरवाड को मौत के घाट उतार दिया था। घटना के बाद हिंदू संगठन सड़कों पर उतर आए। बुधवार को निकाली गई किशन की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग उमड़े। गुरुवार को धंधुका बंद का ऐलान किया गया।

बताया जा रहा है कि किशन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट अपलोड किया था, जिसके बाद से वह इस्लामी कट्टरपंथी के निशाने पर था। बताया गया कि किशन ने जो वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया था वो पैगंबर मुहम्मद से संबंधित था। किशन की पोस्ट पर कई लोगों ने आपत्ति जताई थी। पुलिस ने भी किशन के खिलाफ एक्शन लिया था। पोस्ट के बाद से ही किशन को जान से मारने की धमकियाँ मिल रही थीं। इस घटना के बाद से किशन अपने घर से नहीं निकल रहा था। मंगलवार को अचानक ही वो अपनी बाइक से निकला था, लेकिन कुछ ही दूरी पर उसकी हत्या कर दी गई।

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि किशन पर गोली चलाने वाले बाइक सवार उसके पीछे चल रहे थे, जैसे ही वो मोढवाड़ा मोड़ के पास पहुँचे तो किशन पर पहली गोली चलाई गई, लेकिन वह बच गया। इसके बाद उस पर दोबारा हमला किया गया और घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।

‘दिल्ली दंगों और किसानों के प्रदर्शन से बिगड़ी कानून-व्यवस्था’: केंद्र ने हाई कोर्ट को बताया LG ने क्यों नियुक्त किए SPP

पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगो और किसानों के आंदोलन से जुड़े मामलों पर बहस करने के लिए दिल्ली के उपराज्यपाल (LG) की ओर से नियुक्त विशेष लोक अभियोजकों (SPP) का केंद्र सरकार ने बचाव किया है। केंद्र सरकार ने गुरुवार (27 जनवरी, 2022) को दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि अत्यधिक संवेदनशील प्रकृति के होने के कारण यह मामले राष्ट्रीय महत्व के हैं। ऐसे में यह केवल इसलिए कि दिल्ली में घटनाएँ हुईं, इस आधार पर सीधे दिल्ली सरकार के नियंत्रण में आने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और दिल्ली के एलजी की ओर से प्रस्तुत कॉमन काउंटर हलफनामे में कहा गया है, “दिल्ली दंगों और किसान आंदोलन, दोनों मामलों ने सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा की, जिससे देश की कानून और व्यवस्था में भरोसे को दोबारा बहाल करने के लिए दर्ज हुई सभी एफआईआर के कुशल, निष्पक्ष और न्यायसंगत अभियोजन की जरूरत है।”

हलफनामे में संयुक्त रूप से कहा गया है, “अनुच्छेद 239 AA के माध्यम से संविधान ने दिल्ली को एक ऐसा अनोखा दर्जा प्रदान करने का प्रयास किया है। बालकृष्ण समिति ने केंद्र शासित प्रदेश दिल्‍ली के लिए विधानसभा की सिफारिश करते हुए कहा था कि दिल्ली देश की राजधानी के रूप में समग्र राष्ट्र के लिए अद्वितीय स्थान रखती है और इसलिए यह राष्ट्रीय हित में है कि केंद्र सरकार उच्च स्तर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राजधानी के मामलों पर व्यापक नियंत्रण रखे।”

बता दें कि किसानों के विरोध और दिल्ली दंगों से संबंधित मामलों पर बहस के लिए अपनी पसंद के अभियोजकों का एक पैनल नियुक्त करने के केजरीवाल सरकार कैबिनेट के फैसले को पलटने के उपराज्यपाल के एक आदेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की ओर से दायर एक याचिका में केंद्र और उपराज्यपाल की तरफ से मौजूदा जवाबी हलफनामा दायर किया गया है। दिल्ली सरकार की याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि जाँच एजेंसी यानी दिल्ली पुलिस द्वारा एसपीपी की नियुक्ति एसपीपी की स्वतंत्रता पर आक्षेप करती है और निष्पक्ष सुनवाई की संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करती है।

जिसे देखते हुए दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस की सिफारिशों को खारिज कर दिया था और अपनी पसंद का पैनल नियुक्त किया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बाद में, एलजी ने संविधान के अनुच्छेद 239-एए(4) के प्रावधान के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल किया और दिल्ली पुलिस की ओर से चुने गए अधिवक्ताओं को उन मामलों के बहस के लिए एसपीपी के रूप में नियुक्त किया गया।

हलफनामें में इस बात का भी जिक्र है कि दिल्ली दंगों और किसानों के विरोध के मामलों ने संवेदनशील होने के साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में हलफनामे में कहा गया, “उपराज्यपाल केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं। इसलिए, ऐसे मामलों में, जहाँ संसद के बनाए कानूनों से कुछ मुद्दे सामने आएँ हैं, ऐसे में लेफ्टिनेंट गवर्नर पर उन मामलों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी है।”

पंखे से लटकी मिली कर्नाटक के पूर्व CM येदियुरप्पा की नातिन, बेंगलुरु के अस्पताल में डॉक्टर थीं 30 साल की सौंदर्या

कर्नाटक (karnataka) के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa) की नातिन सौंदर्या (Soundarya) की लाश बेंगलुरु के एक निजी अपार्टमेंट में मिली है। सौंदर्या की लाश पंखे से लगे फंदे पर झूलते हुए मिली। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल में शव का पोस्टमॉर्टम किया जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि सौंदर्या ने आत्महत्या की है। हालाँकि, अभी कारणों का पता नहीं चला है।

30 साल की सौंदर्या येदियुरप्पा की बेटी पद्मा की पुत्री थीं और वह बेंगलुरु के एमएस रमैया अस्पताल में डॉक्टर थीं। साल 2019 में डॉक्टर नीरज के साथ उनका विवाह हुआ था। वह अपने पति और लगभग छह महीने के बच्चे के साथ सेंट्रल बेंगलुरु के माउंट कार्मेल कॉलेज के पास स्थित एक अपार्टमेंट में रह रही थीं। जानकारी के मुताबिक, गर्भावस्था के बाद सौंदर्या में डिप्रेशन के लक्षण दिख रहे थे।

घटना शुक्रवार (28 जनवरी 2022) के सुबह करीब 10 बजे की है। बताया जा रहा है कि जब घर के नौकर ने उनके कमरे का दरवाजा खटखटाया, तो अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद उसने उनके पति डॉ नीरज को फोन किया। नीरज ने दरवाजा खोला तो देखा कि सौंदर्या बेडरूम में पंखे से लटकी हुई हैं। पुलिस ने बताया कि मिले सबूतों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का है।

घटना की जानकारी मिलते ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई अपने कैबिनेट के सहयोगियों और भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ अस्पताल पहुँचे। भाजपा नेताओं ने येदियुरप्पा और उनके परिवार को सांत्वना दी।

इस वायरस से हर 3 में से 1 मरीज को होगी मौत: चीन के जिस वुहान से पूरी दुनिया में फैला कोरोना, वहीं से आया NeoCoV को लेकर अलर्ट

वैश्विक कोरोना महामारी (Coronavirus disease) का खतरा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ओमिक्रोन (Omicron) वैरिएंट का सामना कर रही दुनिया के सामने जल्द ही एक और संकट आने वाला है। चीन के वुहान (Wuhan) के वैज्ञानिकों ने अब कोरोना के नए वैरिएंट ‘नियोकोव’ (NeoCoV) को लेकर चेतावनी जारी है। 2019 में समूची दुनिया में वुहान से ही कोरोना संक्रमण फैला था। अब वहाँ के वैज्ञानिकों ने कहा है कि दक्षिण अफ्रीका में नए प्रकार का वैरिएंट ‘नियोकोव’ मिला है। इसकी संक्रमण और मृत्यु दर दोनों ही बहुत ज्यादा है। इससे संक्रमित हर तीन व्यक्तियों में से एक की जान जा सकती है। 

वुहान के वैज्ञानिकों के इस दावे को रूसी समाचार एजेंसी स्पूतनिक ने पब्लिश किया है। पूरी दुनिया पहले ही कोरोना के खौफ से भयभीत है। इसके ओमिक्रॉन व डेल्टा वैरिएंट कहर बरपा रहे हैं। ऐसे में ‘नियोकोव’ से चिंता और बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नियोकोव वायरस नया नहीं है। यह मर्स कोव वायरस (MERS-CoV virus) से जुड़ा है। यह वायरस साल 2012 और 2015 के बीच मध्य-पूर्वी देशों में मिल चुुका है। यह SARS-CoV-2 के ही समान है, जो इंसानों में कोरोना वायरस का कारण बनता है।

दक्षिण अफ्रीका के चमगादड़ों में मिला

नियोकोव वायरस दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में मिला है। अभी यह पक्षियों में ही फैला है। लेकिन ‘बायोरेक्सिव’ वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह और इसके करीबी रूप पीडीएफ-2180-कोव (PDF-2180-CoV) इंसानों को भी संक्रमित कर सकते हैं। वुहान यूनिवर्सिटी और चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेस, इंस्टीट्यूट ऑफ बायो फिजिक्स के वैज्ञानिकों का कहना है कि नियोकोव के मात्र एक म्यूटेशन यानी रूप बदलने से यह इंसान की कोशिकाओं में फैलने लगेगा। चीन के शोधकर्ताओं के अनुसार नियोकोव की उच्च संक्रमण दर हासिल करने की क्षमता है और इसके हर तीन संक्रमित में से एक की मौत हो सकती है। 

रूस के वायरोलॉजी व बॉयोटेक्नालॉजी विभाग ने नियोकोव को लेकर गुरुवार (27 जनवरी 2022) को बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि फिलहाल नियोकोव इंसानों में सक्रिय रूप से फैलने में सक्षम नहीं है। अभी सवाल यह नहीं है कि नया कोरोना वायरस इंसान में फैलता है या नहीं, बल्कि इसकी जोखिम व क्षमताओं को लेकर और अधिक स्टडी करने की जरूरत है।

बता दें कि पूरी दुनिया अभी कोरोना की तीसरी लहर ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट BA.2 का सामना कर रही है। भारत समेत कई देशों में BA.2 के कई मामले सामने आ रहे हैं। दुनिया के करीब 40 देशों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। ऐसे में अब  ‘NeoCov’ ने लोगों की चिंता को काफी ज्यादा बढ़ा दिया है।

‘सिद्धू ने पिता की मौत के बाद माँ को लावारिस छोड़ा, रेलवे स्टेशन पर मर गईं’: बहन ने रो-रो कर बताई करनी, नए विवाद में पंजाब कॉन्ग्रेस अध्यक्ष

पंजाब का CM बनने की होड़ में लगे पंजाब कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू फिर मुश्किल में फँस गए हैं। इस बार सिद्धू की NRI बहन डा. सुमन तूर ने उनपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सिद्धू ने पिता भगवंत सिद्धू की मौत के बाद माँ निर्मल भगवंत और बड़ी बहन को घर से निकाल दिया। पंजाब विधानसभा चुनावों के बीच उनकी बहन सुमन ने शुक्रवार (28 जनवरी, 2022) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि जो परिवार का नहीं हुआ हुआ वो किसी और का क्या होगा।

अमेरिका से चंडीगढ़ आई नवजोत सिंह सिद्धू की बहन सुमन तूर ने कहा सिद्धू ने प्रॉपर्टी पर कब्जा करने के लिए माँ को बेघर किया और झूठ बोला है। उन्होंने अपनी बात की सच्चाई का दावा करते हुए कहा, “मैं सिद्धू नहीं हूँ कि झूठ बोलूँगी।” उन्होंने यह भी दावा कि इस मुद्दे पर नवजोत सिद्धू से मिलने के लिए उनके अमृतसर स्थित घर पर गई थी लेकिन सिद्धू गेट नहीं खोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धू ने उन्हें वॉट्सऐप पर भी ब्लॉक कर रखा है। हालाँकि, इस मामले में अभी तक सिद्धू की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

सिद्धू की अमेरिका में रहने वाली बहन डा. सुमन तूर ने मीडिया को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “सिद्धू ने इंडिया टुडे के साथ बातचीत में झूठ बोला कि मेरे माता-पिता कानूनी तौर पर अलग हुए। सिद्धू उस वक्त अपनी उम्र 2 साल बता रहे हैं लेकिन वह सब भी झूठ है।” सुमन तूर ने एक पुरानी तस्वीर दिखाते हुए पत्रकारों से ही पूछा, क्या इसमें सिद्धू दो साल का लग रहा है।” उन्होने कहा कि उनकी माँ ने लावारिस हालत में दिल्ली रेलवे स्टेशन पर दम तोड़ा था और वह (सिद्धू) उनके पैसे पर ऐश कर रहा है। सुमन तूर का आरोप है कि सिद्धू 1986 में उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी बूढ़ी माँ को छोड़ दिया और बाद में 1989 में दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक बेसहारा महिला के रूप में उनकी मृत्यु हो गई।

सिद्धू का परिवार

सुमन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “मेरी माँ और बहन चली गईं लेकिन मैं आज भी मेहनत करके गुजारा कर रही हूँ। नवजोत सिद्धू की सास जसवीर कौर ने हमारा घर बर्बाद कर दिया है। मैं कभी भी अपने पैतृक घर में नहीं जा सकी।”

अमेरिका के न्यूयार्क में रहने वाली नवजोत सिद्धू की बहन सुमन तूर से जब यह पूछा गया कि वह इतने सालों बाद आज पंजाब में चुनाव के समय आरोप क्यों लगा रही हैं तो उन्होंने कहा, “मैं वह आर्टिकल जुटाना चाहती थी, जिसमें सिद्धू ने मेरे माता-पिता के अलग होने संबंधी बयान दिया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मैं चुनाव के कारण ऐसा नहीं कर रही हूँ, बल्कि मुझे एक आर्टिकल के जरिए यह जानकारी मिली है कि नवजोत सिद्धू ने मेरी माँ के बारे में यह बयान दिया था कि वह और उसके पिता तब अलग हो चुके थे, जब वह 2 साल के थे। उनका अपनी माँ और बहनों के साथ कोई रिश्ता नहीं है।

सुमन ने कहा, “जो सिद्धू अपने परिवार का नहीं हुआ वो किसी और का क्या होगा। नवजोत सिद्धू ने पैसे के पीछे माँ को लावारिस कर दिया। भले ही सिद्धू ने करोड़ों कमाए हों, पर वह परिवार का न हो सका।”

बहन सुमन ने बताया, “उन्होंने सिद्धू को कई मैसेज भेजे कि उससे बात कर ले, लेकिन भाई (सिद्धू) ने उसे ब्लाक कर दिया। मेरी एक बहन भी थी। उसकी मौत हो चुकी है। जब बहन की मौत हुई तो भांजी अकेली थी। वह स्पेशल चाइल्ड थी, मैं उसे अमेरिका ले गई।” सुमन तूर सिद्धू पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, “भाई सिद्धू हर चीज को प्रूफ के साथ बताता है। अब मैं चाहती हूँ कि माँ का प्रूफ भी जरूर दें।”

‘यूपी में बाबा हैं, यूपी में बाबा’: कवयित्री अनामिका जैन अंबर ने नेहा सिंह राठौर के ‘का बा’ का दिया जवाब, CM योगी की उपलब्धियाँ भी गिनाईं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) में आराप-प्रत्यारोप के साथ-साथ गीतों के माध्यम से भी जंग छिड़ी हुई है। अभिषेक सिंह के ‘सीएम बनेंगे फिर से योगी जी, भगवा रंग लहराएगा’ से लेकर कन्हैया मित्तल के ‘जो राम को राम लाए हैं, हम उनको लाना है’ गाने लोग खूब पसंद कर रहे हैं। इसी बीच बिहार की लोकगायिका नेहा सिंह राठौर का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने गाया कि ‘यूपी में का बा’? नेहा सिंह को जवाब देते हुए जानी-मानी कवियित्री अनामिक जैन अंबर ने गाया कि ‘यूपी में बाबा हैं’।

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की रहने वाली अनामिका जैन ने अपने गाने में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की उपलब्धियों को गाने का रूप दिया है। ‘यूपी में बाबा हैं..’ नाम का उनकी यह गीत लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसे शेयर कर यूजर उनकी तारीफ कर रहे हैं।

खुद को बंदेलखंड की बेटी बताते हुए बंदेलखंडी भाषा में अनामिका गाती हैं- “जौन जे का बा, का बा लग्यैन चल्यावे, उन्हेंन ते हम आये बतावे… एतै नहीं है कछु दिखावा। काहे के, यूपी में बाबा हैं… यूपी में बाबा। गोरखपुर को जो संन्‍यासी, मन में ले के मथुरा-काशी, जबसे लखनऊ में जा बैठे, यूपी भर की मिटी उदासी। राजमहल को मंदिर कर दो, जब जनता को मिले बुलावा। काय कैं यूपी में बाबा हैं, यूपी में बाबा…।”

वह आगे कहती हैं, “तुष्टिकरण को नाव मिटा दो, अपराधन को गाँव मिटा दो, फैजाबाद अयोध्या कर दी, राम लला को धाम बना दो। वे भी काशी-काशी कर रहे जौन करत ते काबा काबा। काहे के… यूपी में बाबा हैं… यूपी में बाबा। यूपी दंगामुक्त करा देई, घरन-घरन में गैस भरा देई, गुरबन तक को मान मिले हैं, गइन तक को थान मिले हैं। कीच-कीच जिते होत ती, थम गयो सगरो शोर-शराबा। काहे के…. यूपी में बाबा हैं, यूपी में बाबा “

कवियित्री अनामिका बुंदेलखंड के ललितपुर की रहने वाली हैं और कविता के माध्यम से देश-विदेश में राष्ट्रवाद की बात करती हैं। वह अपने गीत खुद लिखती और गाती हैं। मेरठ के रहने वाले उनके पति सौरभ सुमन भी कवि हैं और वह भी कवि सम्मेलनों में अक्सर शिरकत करते रहते हैं। 

वहीं, भोजपुरी लोकगायिका नेहा सिंह राठौर बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ की रहने वाली हैं। 25 वर्षीय नेहा ने अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई कानपुर विश्वविद्यालय से की है। वह सामाजिक मुद्दों पर अपने गीत खुद लिखती हैं और गाती हैं। बिहार विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने ‘बिहार में का बा’ गाया था, जो खूब वायरल हुआ था।

बता दें कि नेहा सिंह राठौर ने भोजपुरी में गाए ‘यूपी में का बा…’ जरिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। इसको लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें काफी ट्रोल किया गया था। हालाँकि नेहा सिंह का कहना है कि एक लोककवि होने के कारण ऐसे मुद्दे उठाना उनका काम है। नेहा सिंह के इस गाने के बाद भाजपा के सांसद रवि किशन ने ‘यूपी में सब बा’ गाकर उन्हें करारा जवाब दिया था। अब अनामिक जैन अंबर ने बता दिया कि यूपी में बाबा (योगी आदित्यनाथ) हैं, यही काफी है।

आपको याद हैं नीरज प्रजापति? मुस्लिम मोहल्ले में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ करती भीड़ के हमले में हुई थी मौत, 2 साल बाद परिवार बदहाल

नीरज प्रजापति आपको याद हैं? वही नीरज प्रजापति जो मूर्तियाँ बनाते थे। जिनकी मौत झारखंड के लोहरदगा में सीएए समर्थक रैली पर हुए हमले के दौरान आई चोटों से हुई थी। जिनके परिवार की मदद के लिए ऑपइंडिया ने पैसे जुटाए थे। हमारे कई पाठकों ने आगे आकर इस परिवार की मदद की थी। नीरज की मौत के दो साल बाद स्थानीय थाने के प्रभारी इस केस को भूल चुके हैं। झारखंड की सरकार से लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक हर जगह नीरज की विधवा को निराशा हाथ लगी है। परिवार की स्थिति ठीक नहीं है। उनका कहना है कि उस समय लोगों ने बड़े-बड़े वादे किए थे, समय बीतने के साथ सबने उसे भूला दिया।

नीरज प्रजापति के साथ क्या हुआ था?

झारखंड के लोहरदगा में 23 जनवरी 2020 को CAA के समर्थन में विशाल रैली निकली थी। मुस्लिम मोहल्ले में पहुँचते ही इस रैली पर पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। भीड़ में शामिल हर किसी को निशाना बनाया गया। दुकानों में तोड़फोड़ और वाहनों में आगजनी की गई। हमलावर भीड़ ‘नारा ए तकबीर, पाकिस्तान जिंदाबाद’ जैसे नारे लगा रही थी। इसी हिंसा की चपेट में आए थे नीरज प्रजापति। पीछे से रॉड से हुए हमले से उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। 27 जनवरी 2020 को राँची के रिम्स में उनकी मृत्यु हो गई थी।

नीरज पर ही थी पूरे परिवार की जिम्मेदारी

नीरज मूर्ति बनाने का काम करते थे। उनके ऊपर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। नीरज की पत्नी और दो बच्चे हैं। बेटी 11 साल की तो बेटा 5 साल का है। नीरज की पत्नी ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिख कर अपने पति की मौत में न्याय करने और परिवार के भरण-पोषण के लिए मुआवजा देने की माँग की थी।

टॉर्च की रोशनी में हुआ था अंतिम संस्कार

नीरज राम प्रजापति की अंतिम यात्रा में अधिकतम 35 लोगों के शामिल लोगों की संख्या प्रशासन ने तय की थी। बाहरी लोगों को भी शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई थी। रास्ते में मस्जिद पड़ने के चलते नीरज प्रजापति का अंतिम संस्कार गाँव के श्मशान में नहीं होने दिया गया था। जल्दी-जल्दी अंतिम संस्कार कराने के चक्कर में धार्मिक रीति-रिवाज भी पूरा नहीं करने दिया गया था। वीडियो रिकॉर्ड करने वाले एक स्थानीय पत्रकार के कैमरे को तोड़ने की धमकी मिली थी। साथ ही किसी को छत से भी नीरज की अंतिम यात्रा देखने की अनुमति नहीं थी। टॉर्च की रोशनी में रात में ही अंतिम संस्कार करवाया गया था।

ऑपइंडिया ने चलाया था आर्थिक मदद का अभियान

जनवरी 2020 में ऑपइंडिया ने नीरज के परिवार की आर्थिक मदद करने का बीड़ा उठाया था। इस दौरान जनता ने करीब 32.5 लाख रुपए का सहयोग किया था। इसमें से 11.4 लाख रुपए क्राउडकैश के जरिए जुटाए गए, जबकि बाकी धनराशि लोगों ने दिवंगत नीरज की पत्नी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किया था।

नीरज के भाँजे ने बताए वर्तमान हालात

ऑपइंडिया ने नीरज प्रजापति के भाँजे अभिषेक प्रजापति से बात की। अभिषेक ने बताया, “मामा (नीरज) की मृत्यु के लगभग 20 दिन बाद उनके पिता की भी मृत्यु हो गई थी। मौत की वजह बेटे का ग़म था। साथ ही नीरज की बीमार भाभी भी पिछले साल लम्बी बीमारी (ब्रेस्ट कैंसर) के चलते चल बसीं। पिता की मौत के बाद आने वाली पेंशन आधी हो गई। अब घर में सिर्फ नीरज की माता जी, उनका भाई, उनकी पत्नी और 2 बच्चे रह गए हैं। बेटी क्लास 3 में पढ़ती है, जबकि बेटे का अभी एडमिशन नहीं हुआ है। नीरज के भाई ही मूर्ति अदि बनाकर घर का खर्च उठा रहे हैं। यह सीजनल काम है, जिसमें पैसे बराबर नहीं मिल पाते। घर की आर्थिक स्थिति बस आप लोगों द्वारा करवाई गई मदद से जैसे-तैसे चल रही है। हेमंत सरकार से बस एक बार 20 हजार रुपए विधवा अनुदान के तौर पर मिले थे। यह मदद सबको होती है। हमारे लिए कोई अलग से नहीं की गई थी।”

नीरज की हत्या के केस में नहीं हुई है कोई अलग से गिरफ्तारी

अभिषेक प्रजापति ने आगे बताया, “मृत्यु के समय नीरज लगभग 32 साल के थे। उन पर हमला अंजुमन मोहल्ले में हुआ था। वह मुस्लिम बहुल मोहल्ला है जो नीरज के घर से लगभग आधे किलोमीटर दूर है। मामा की मौत के बाद से प्रशासनिक दबाव बनाया जा रहा था इसे बाथरूम में हुई मौत बताने का। उनकी हत्या के मामले में कोई अलग से गिरफ्तारी नहीं हुई। दंगो में जो लोग पकड़े गए थे, कार्रवाई के नाम पर बस वही भर है। उसमें भी हिन्दू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लोगों को पकड़ा गया था। मुस्लिमों को उनकी जली दुकानों और वाहनों का मुआवजा भी दे दिया गया है। हिन्दू पक्ष में हम जैसों को कुछ भी नहीं मिल पाया। आज तक सरकार के किसी बड़े या सक्षम अधिकारी ने हमें सम्पर्क नहीं किया। हमले के बाद नीरज बुरी तरह से चोट खाए थे इसलिए वो किसी का नाम नहीं बता सके थे। 1 माह पहले पुलिस ने नीरज के जीजा जी से 2 साल पहले हुए बयान की कॉपी माँगी थी। हमने उसे दे दी थी। इसके अलावा कहीं से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है।”

नीरज की पत्नी ने बताया- आश्वासन मिला, पर किया कुछ नहीं

ऑपइंडिया ने दिवंगत नीरज की पत्नी दिव्या से बात की। दिव्या ने बताया, “मेरे पति घर की रीढ़ थे। वो टूट गई है। उनके ही दुःख में उनके पिता जी चल बसे। बाद में सितम्बर 2021 में बीमार भाभी भी चल बसीं। अब मेरे 2 और नीरज के बड़े भाई के 3 बच्चे मिला कर कुल 5 बच्चे हैं। कई लोगों उस समय बच्चो को पढ़ाने आदि जैसे बड़े-बड़े वादे किए थे। लेकिन अब कोई नहीं आता। वो वादा किया ही न जाए जो पूरा न हो। मैंने दिल्ली में इस पूरे मामले की शिकायत की थी, लेकिन वहाँ भी यह केस बंद कर दिया गया।”

नीरज की पत्नी द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत

नीरज की पत्नी द्वारा 2 मार्च 2020 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से लगाई गई गुहार को NHRC ने 1 दिसम्बर 2020 को ख़ारिज कर दिया था। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का जवाब था, “हिंसा किसी राज्य या पब्लिक अथॉरिटी द्वारा नहीं की गई है। इसलिए पीड़िता की याचिका विचार के योग्य नहीं है। सहानभूति के तौर पर आदेश की कॉपी लोहरदगा के डिप्टी कमिश्नर को भेजी जा रही है। वह ही इस पर नियमानुसार निर्णय लें।”

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का आदेश

स्थानीय SHO को नहीं है केस की जानकारी

ऑपइंडिया ने इस केस की जानकारी के लिए लोहरदगा थाने के SHO से सम्पर्क किया। SHO ने बताया, “उस समय कोई और अधिकारी था। मैं तब यहाँ नहीं था। मुझे इस केस की जानकारी नहीं है।”

केरल के स्टूडेंट पुलिस कैडेट में हिजाब पहनने की मिले इजाजत: HC गई मुस्लिम छात्रा, धर्मनिरपेक्षता का हवाला दे सरकार ने ठुकराई माँग

केरल में एक मुस्लिम लड़की ने पिनराई विजयन सरकार से अनुमति माँगी थी कि उसे स्टूडेंट पुलिस कैडेट (SPC) प्रोजेक्ट के लिए उसे हिजाब और पूरी बाँह की पोशाक पहनने की इजाजत दी जाए। वहीं गुरुवार (27 जनवरी, 2022) को केरल की पिनराई विजयन सरकार ने इस लड़की की माँग ठुकराते हुए स्पष्ट कर दिया है कि स्टूडेंट पुलिस कैडेट्स (एसपीसी) अपनी वर्दी के ऊपर हिजाब, स्कार्फ या पूरी बाजू की पोशाक नहीं पहन सकते हैं। सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस कदम से राज्य की धर्मनिरपेक्षता प्रभावित होगी।

बता दें कि एसपीसी प्रोजेक्ट केरल पुलिस द्वारा सरकार के सहयोग से बच्चों को कानूनों, अनुशासन और नागरिक भावना के बारे में जागरूकता के लिए एक पहल है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जीएचएसएस कुट्टियाडी (GHSS Kuttiady) की एक 8वीं कक्षा की छात्रा रिजा नाहन ने केरल उच्च न्यायालय का रुख किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसे हिजाब के साथ पूरी बाँह की वर्दी पहनकर परेड में भाग लेने की अनुमति नहीं दी गई थी। अपनी याचिका में, उसने दावा किया कि हिजाब और पूरी बाजू पहनना उसका ‘मौलिक अधिकार’ है। रिजा ने दावा किया था कि वर्दी में बदलाव के कारण उन्हें परेड में भाग लेने से रोक दिया गया था।

वहीं इस मामले में केरल उच्च न्यायालय ने मामले पर राज्य सरकार से जवाब माँगा था। केरल गृह विभाग के संयुक्त सचिव ने बताया कि एसपीसी की वर्दी में धार्मिक प्रतीकों को जोड़ना सही नहीं होगा। अधिकारी ने कहा कि एक मामले में धार्मिक छूट एक गलत संदेश जाएगा और अन्य समूहों द्वारा इसी तरह की माँगों को भी बढ़ावा देगी। बताया जा रहा है कि इस लड़की की याचिका केरल हाई कोर्ट की तरफ से खारिज कर दी गई थी। जिसके बाद इस लड़की ने केरल सरकार से माँग की थी कि स्टूडेंट पुलिस प्रोजेक्ट के तहत उसे हिजाब और पूरी बाँह की पोशाक पहनने की इजाजत दी जाए।

गौरतलब है कि केरल की इस मुस्लिम लड़की ने अदालत का दरवाजा तब खटखटाया था जब स्टूडेंट पुलिस कैडेट ने उन्हें बताया था कि इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक सिर पर हिजाब और पूरी बाँह की ड्रेस पहनने की इजाजत इस परेड में नहीं दी जाएगी।

केरल सरकार का कहना है, “मौजूदा स्थिति में धार्मिक मामलों को वर्दी के साथ जोड़ने से अन्य समान रूप से कार्यरत बलों में भी वही माँगे उठेंगी, जो बलों के अनुशासन और धर्मनिरपेक्ष अस्तित्व पर सवाल उठाएँगे… इसलिए, ऐसा कोई संकेत देना सही नहीं है कि स्टूडेंट पुलिस कैडेट परियोजना के तहत वर्दी में धार्मिक प्रतीकों को बढ़ावा दिया जाता है।” रिपोर्ट के अनुसार, सरकार की तरफ से बताया गया है कि पिछले 10 वर्षों में एसपीसी वर्दी में इस तरह के संशोधनों के बारे में ऐसी कोई माँग नहीं की गई थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गृह विभाग ने यह भी कहा कि छात्रों के लिए पुलिस कैडेटों में शामिल होना अनिवार्य नहीं था। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया कि वर्दी में छूट देने से संस्था की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति में हस्तक्षेप होगा। स्टूडेंट पुलिस कैडेट्स प्रोजेक्ट के निर्माण के पीछे एक उद्देश्य एक ऐसी पीढ़ी को तैयार करना है जो राष्ट्र को धार्मिक पृष्ठभूमि से आगे रखे।

12 साल की उम्र में बांग्लादेश से भारत में घुसी रोनी बेगम, 15 साल से ‘पायल घोष’ बनकर रह रही थी: हिंदू पहचान के साथ बनवा लिए सारे दस्तावेज

कर्नाटक पुलिस ने बांग्लादेश की एक ऐसी महिला को पकड़ा है जो भारत में 15 साल से हिंदू बनकर रह रही थी। 27 वर्षीय इस महिला को बेंगलुरु के बाहरी इलाके से फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफ इंडिया (FRRO) के इनपुट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वह बांग्लादेश के नारेल जिले की रहने वाली है। उसे 25 जनवरी को बेंगलुरु में उसके किराए के घर से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया है कि तीन महीने की तलाशी अभियान के बाद उसे गिरफ्तार किया गया है।

गिरफ्तार बांग्लादेशी महिला की पहचान रोनी बेगम के रूप में हुई है। उसने अपना नाम पायल घोष रख लिया और मंगलुरु के एक डिलीवरी एक्जीक्यूटिव नितिन कुमार से शादी कर ली। महिला की गिरफ्तारी के बाद से उसका पति फरार है। पुलिस अब नितिन की तलाश कर रही है। रोनी बेगम 12 साल की उम्र में भारत आ गई थी। उसने मुंबई के एक डांस बार में काम किया। इस दौरान उसने अपना नाम बदलकर पायल घोष रख लिया और दावा किया था कि वह एक बंगाली है।

इसी दौरान उसे नितिन से प्यार हो गया और फिर दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद वे 2019 में बेंगलुरु के अंजननगर इलाके में रहने लगे। रोनी ने दर्जी का काम शुरू किया। मुंबई में रहते उसने पैन कार्ड बनवाया। बाद में नितिन ने बेंगलुरु में अपने दोस्त की मदद से आधार कार्ड बनवाने में कामयाबी हासिल की।

रोनी पुलिस की नजर में तब आई जब उसने अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बांग्लादेश जाने का फैसला किया था। वह कोलकाता गई और वहाँ से उसने ढाका पहुँचने की योजना बनाई। इसी दौरान माइग्रेशन अधिकारियों को उसके पासपोर्ट पर संदेह हुआ और उन्होंने उसे जब्त कर लिया। उसे देश से नहीं जाने के लिए कहा गया। 2020 में इस घटना की जाँच के दौरान उसका बयान दर्ज किया गया था। लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया था। बाद में जाँच के दौरान उसके अवैध बांग्लादेशी अप्रवासी होने की बात सामने आई।

इसके बाद FRRO ने बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर को उसके बारे में सूचित किया। इस संबंध में ब्यादरहल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। डीसीपी वेस्ट संजीव पाटिल ने बताया कि फर्जी पैन कार्ड, आधार कार्ड और वोटर आईडी दिलाने में मदद करने वाले लोगों का पता लगाने के लिए जाँच की जा रही है। 

घर के पास खेल रही थी 6 साल की बच्ची, 48 साल के मोहम्मद मेजर ने किया रेप: बिहार के कोर्ट ने 4 दिन में सुनाई फाँसी

बिहार (Bihar) के अररिया में 6 साल की बच्ची से रेप (Rape) करने वाले 48 वर्षीय आरोपित मोहम्मद मेजर को अररिया के अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश सह POCSO कोर्ट जज शशिकांत राय ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को फाँसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आईपीसी की धारा 3(2) (V) एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन सश्रम करावास व 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। वहीं, अगर आरोपित जुर्माना नहीं देता है तो उसे 10 दिन की अतिरिक्त सजा होगी।

इसके साथ ही अदालत ने डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी को भी पीड़िता को 10 लाख रुपए का हर्जाना ‘पीड़ित क्षतिपूर्ति निधि’ से देने का आदेश दिया है। बड़ी बात यह है कि इस तरह के बर्बर अपराध के मामले में महज चार दिन के फास्ट ट्रायल के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। बच्ची से रेप के आरोपित के खिलाफ पुलिस ने 12 जनवरी को चार्जशीट फाइल की थी, जिसके बाद कोर्ट ने आरोपित के खिलाफ 20 जनवरी 2022 को आरोप तय कर दिया। कोर्ट ने यह फैसला केस दर्ज किए जाने के करीब 56 दिन बाद ही सुना दिया।

अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान बलात्कार के आरोपित की पैरवी कर रहे वकील मोहम्मद नौशाद ने कोर्ट से मुजरिम को कम सजा देने की माँग की। हालाँकि, पीड़िता के वकील श्याम लाल ने आरोपित को अधिकतम सजा सुनाने की गुहार लगाई। वहीं कोर्ट ने भी इस गुनाह को निकृष्टतम मानते हुए अपना फैसला सुनाया।

क्या है मामला

बच्ची से रेप का यह केस 1 दिसंबर 2021 को सामने आया था। पुलिस स्टेशन में पीड़िता की माँ ने अपनी शिकायत में बताया कि घटना वाले दिन वह खाना बना रही थी और उसकी बेटी घर के पास खेल रही थी। इसी दौरान वह अचानक से गायब हो गई। बाद में रात के करीब 10 बजे बच्ची रोते हुए घर आई। उसने अपनी माँ को बताया कि मोहम्मद मेजर ने उससे मैदान जाने के लिए एक डिब्बा पानी माँगा था, लेकिन जब उसे डिब्बे में पानी दिया तो उसने उसे वहीं पर फेंक दिया। इसके बाद आरोपित पीड़ित बच्ची को घसीटते हुए खेत में ले गया और उसके साथ रेप किया।

आरोपित मोहम्मद मेजर दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और उसका एक भाई मुखिया भी रह चुका है। घटना को अंजाम देने के बाद वह पीड़िता के परिवार को धमकी देता था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने दबिश देनी शुरू की थी तो वह नेपाल भागने की कोशिश में लग गया। पुलिस ने उससे पहले ही 13 जनवरी को दिल्ली के चाँदनी चौक से मोहम्मद मेजर को गिरफ्तार कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस शशिकांत राय दो अन्य मामलों में एक ही दिन में सुनवाई के बाद उम्रकैद की सजा सुनाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बना चुके हैं।