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भारत-मध्य एशिया शिखर सम्मेलन में बोले PM मोदी- अफगानिस्तान के घटनाक्रम से हम सभी चिंतित, गिनाए 3 उद्देश्य

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को भारत-मध्य एशिया समिट की अध्यक्षता की। वर्चुअल माध्यम से आयोजित किए गए इस समिट में पाँच देशों के राष्ट्रपति ने हिस्सा लिया। इनमें कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम जोमार्ट टोटाएव, ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमली रहमान, उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव, तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति गुरबांगुली बर्डिमोहम्मद और किर्गिज गणराज्य के राष्ट्रपति सादिर जापारोव शामिल हुए।

बैठक में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंताओं पर जोर दिया। पीएम मोदी ने कहा, “क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए हम सभी की चिंताएँ और उद्देश्य एक समान हैं। अफगानिस्तान के घटनाक्रम से हम सभी चिंतित हैं। इस संदर्भ में हमारा आपसी सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए और महत्वपूर्ण हो गया है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “भारत और मध्य एशिया देशों के कूटनीतिक संबंधों ने 30 सार्थक वर्ष पूरे कर लिए हैं, पिछले 3 दशकों में हमारे सहयोगियों ने कई सफलताएँ हासिल की हैं। अब इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर हमें आने वाले सालों के लिए एक महत्वाकांक्षी विजन प​रिभाषित करना चाहिए।” 

पीएम ने कहा कि आज के समिट के 3 प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला यह स्पष्ट करना कि भारत और मध्य एशिया का आपसी सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा और समृद्धि के लिए अनिवार्य है। भारत की तरफ से वो स्पष्ट करना चाहेंगे कि मध्य एशिया एक एकीकृत और स्थिर विस्तारित पड़ोस के भारत के दृष्टिकोण का केंद्र है।

अपने संबोधन में अन्य दो लक्ष्यों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, “बैठक का दूसरा उद्देश्य हमारे सहयोग को एक प्रभावी ढाँचा देना है। इससे विभिन्न स्तरों पर और विभिन्न हितधारकों के बीच नियमित बातचीत का एक ढाँचा स्थापित होगा और तीसरा उद्देश्य हमारे सहयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप बनाना है। तीसरा लक्ष्य हमारे सहयोग के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार करना है, जो हमें क्षेत्रीय संपर्क और सहयोग के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने में सक्षम बनाएगा।”

धर्मांतरण के दबाव से मर गई लावण्या, अब पर्दा डाल रही मीडिया: न्यूज मिनट ने पूछा- केवल एक वीडियो में ही कन्वर्जन की बात क्यों

तमिलनाडु (Tamil Nadu) में जबरन धर्म परिवर्तन (Forced Conversion) की कोशिशों से आहत होकर आत्महत्या (Suicide) करने वाली 12वीं की छात्रा लावण्या के मामले ने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन कुछ मीडिया हाउस इस मामले का व्हाइटवॉश करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी क्रम में हाल ही में ‘द न्यूज मिनट (TNM)’ ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें उसने ये दावा किया कि लावण्या के चार वीडियो हैं। इसमें से केवल एक में ही धर्मान्तरण का उल्लेख किया गया है।

TNM का दावा- एक्स्ट्रा काम के कारण की आत्महत्या

TNM का दावा है कि लावण्या को हॉस्टल के वार्डन ने एक्स्ट्रा काम दे दिया था, जिससे वो अपनी पढ़ाई में कमजोर होती जा रही थी। इसी के कारण उसने आत्महत्या कर ली। बता दे कि तंजावुर माइकलपट्टी में सेक्रेड हार्ट्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बोर्डिंग हाउस में लावण्या रहती थी। उसकी अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। खुदकुशी करने से पहले लावण्या ने अपने बयान में आरोप लगाया था कि स्कूल प्रशासन ने उसे ईसाई धर्मान्तरण के लिए मजबूर किया, लेकिन जब उसने इससे इनकार किया तो उसे बहुत ज्यादा काम कराने लगे।

VHP सचिव ने वीडियो में धर्मान्तरण की बात की

मीडिया रिपोर्ट में इस बात का दावा किया गया है कि धर्मान्तरण वाला वीडियो विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अरियालुर जिला सचिव मुथुवेल ने रिकॉर्ड किया था। यह भी दावा किया गया है कि मुथुवेल के फोन में इस तरह के चार वीडियो थे, जिसे उन्होंने 17 जनवरी 2022 को रिकॉर्ड किया था। TNM के मुताबिक, पुलिस का मानना है कि इनमें से एक वीडियो को डिलीट कर दिया गया था, जिसे बाद में री-स्टोर किया गया।

TNM की रिपोर्ट में कहा गया है, “हालाँकि, जाँच एजेंसियों ने उनके (मुथुवेल) फोन से वीडियो को फिर से हासिल कर लिया है। ये वीडियो उन्हें किसी और ने फॉरवर्ड किया था। अब पुलिस इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मुथुवेल ने ये वीडियो डिलीट करने से पहले किसी को भेजा था और फिर उनके फोन में फॉरवर्ड होकर आ गया था।”

रिपोर्ट में इस बात की आशंका व्यक्त की गई है कि सिर्फ एक वीडियो में धर्मान्तरण की बात की गई है तो हो सकता है कि लावण्या से ऐसा जबरदस्ती कहलाया गया हो। TNM ने लिखा, “चूँकि, नए लीक हुए वीडियो में लावण्या इस बात से इनकार करती है कि उसे बिंदी लगाने से रोका गया था। पुलिस इस एंगल की भी जाँच कर रही है।” उल्लेखनीय है कि अगर केवल एक ही वीडियो में उसने धर्मान्तरण की बात की और बाकी में नहीं की तो इसका ये अर्थ तो नहीं हो सकता कि इसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया गया था।

ऐसी घटनाओं को पहले भी मीडिया कम आँका

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है, जब मीडिया ने मृतक के वीडियो का प्रयोग कर घटना को कमजोर करने की कोशिश की हो। इससे पहले जून 2021 में टिकरी बॉर्डर पर किसानों को विरोध प्रदर्शन स्थल पर मुकेश नाम के एक व्यक्ति को जिंदा जला दिया गया था, लेकिन मीडिया ने रिपोर्ट किया कि कृषि कानून के विरोध में उसने आत्महत्या कर ली थी।

बाद में घटना के दूसरे वीडियो आए, जिसमें मुकेश ने अपना बयान दिया था। उसने बयान में कहा था कि किसानों, खासकर सफेद कुर्ता पहने एक व्यक्ति ने उसे आग लगा दी थी। पुलिस अधिकारी को उसने बताया था कि उसने खुद को आग नहीं लगाई थी, बल्कि किसानों से उसे जलाया था। हालाँकि, मीडिया ने किसान यूनियनों द्वारा पोस्ट किए गए अस्पष्ट वीडियो का इस्तेमाल करते हुए कहा कि मुकेश ने खुद को जला लिया था।

आजम खान एंड फैमिली पर टोटल 165 क्रिमिनल केस: सपा ने शेयर की पूरी लिस्ट, सबको ‘झूठे आरोप’ बता क्लीनचिट भी दे दी

उत्तर प्रदेश रामपुर से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के उम्‍मीदवार मो. आजम खान का नामांकन गुरुवार (27 जनवरी 2022) को दाखिल हो गया। कोर्ट के आदेश पर बुधवार (26 जनवरी 2022) को सीतापुर जेल में आजम खान से नामांकन पत्र भरवाने के साथ ही अन्‍य सभी औपचारिकताएँ पूरी कराई गई थीं। गुरुवार को आजम खान के चीफ इलेक्‍शन एजेंट असीम रजा ने बताया कि उनका नामांकन आज दाखिल कर दिया गया है। 

इस बीच समाजवादी पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए आजम खान, उनकी पत्नी तज़ीन फातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान का आपराधिक रिकॉर्ड शेयर किया है। समाजवादी पार्टी ने हाल ही में घोषणा की थी कि समाजवादी पार्टी के टिकट पर जेल में बंद सांसद आजम खान आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने गृहनगर रामपुर से चुनाव लड़ेंगे। खान रामपुर से वर्तमान लोकसभा सांसद हैं। वह फरवरी 2020 से सीतापुर जेल में बंद है। समाजवादी पार्टी के रामपुर उम्मीदवार पर 87 आपराधिक शिकायतें दर्ज हैं।

आज़म खान के खिलाफ अधिकांश मामले भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (ए) (धार्मिक आधार पर विभिन्न समूहों के बीच घृणा को बढ़ावा देना), 159 (शब्द, हावभाव, या किसी महिला की शील भंग करने के इरादे से की गई गतिविधियों), 509 (धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति की डिलीवरी के लिए प्रेरित करना), 448 (हाउस ट्रेस पास), और 500. (मानहानि) से संबंधित हैं। आजम खान पर चुनावी धाँधली का भी आरोप लगा है। उन पर कई मामलों (चुनाव के सिलसिले में झूठा बयान) में धारा 171 G के तहत आरोप लगाए गए हैं। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि आजम खान और उनके परिवार के सदस्यों पर बकरियाँ चोरी करने से लेकर बिजली चोरी और इस्लामी संस्थान से पुरानी पांडुलिपियाँ चुराने के भी कई आरोप हैं।

आजम खान 9 बार विधानसभा के सदस्य रहे हैं और समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी द्वारा जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि उनके खिलाफ सभी मामले झूठे आरोपों पर आधारित हैं और इसके पीछे राजनीतिक मंशा है।

समाजवादी पार्टी ने आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम को भी उम्मीदवार घोषित किया है। अब्दुल्ला आजम दो साल से जेल में बंद थे, वह इसी महीने जमानत पर रिहा हुए हैं। उन्हें पास के सुअर निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवार के रूप में घोषित किया गया था। अब्दुल्ला के खिलाफ 43 मामले दर्ज हैं। वह 2017 के विधानसभा चुनाव में सुअर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लड़े और जीते। हालाँकि, दिसंबर 2019 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उनकी जीत को यह कहते हुए पलट दिया कि उनकी उम्र 25 वर्ष से कम थी। उन्होंने जाली दस्तावेजों के साथ अपनी उम्मीदवारी हासिल की थी।

समाजवादी पार्टी आजम खान की पत्नी डॉ. तज़ीन फातिमा को भी नामांकित करना चाहती है। वह फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। उन पर 35 मामले दर्ज हैं।

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में आदेश दिया था कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी अखबार और टीवी चैनल में प्रसारित की जाए। 2018 में दिए फैसले का पालन न होने की जानकारी मिलने पर सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2020 को भी आदेश दिया था कि राजनीतिक दल किसी उम्मीदवार को टिकट देने के 48 घंटे के भीतर एक क्षेत्रीय अखबार और एक राष्ट्रीय अखबार में उसके ऊपर दर्ज और चल रहे मुकदमों की जानकारी प्रकाशित करें। पार्टियाँ टीवी चैनल पर भी यह जानकारी प्रसारित करें। राजनीतिक दल अपने आधिकारिक वेबसाइट और फेसबुक और ट्विटर अकाउंट पर भी इस जानकारी को डालें।
उम्मीदवार को टिकट देने के 72 घंटे के भीतर पूरी जानकारी चुनाव आयोग को दें। राजनीतिक दल को यह भी बताना पड़ेगा कि जिस उम्मीदवार पर अपराधिक मुकदमे लंबित हैं, उसने उसी को टिकट क्यों दिया? क्या वहाँ पर कोई बेदाग उम्मीदवार नहीं था?

69 साल बाद लौटकर टाटा के घर आई एयर इंडिया: नेहरू ने नहीं सुनी थी JRD की बात, ₹70000 करोड़ का हुआ नुकसान

गुरुवार (27 जनवरी 2022) से एयर इंडिया पूरी तरह टाटा के हाथों में आ गई है। आधिकारिक रूप से सरकारी विमानन कंपनी का अधिग्रहण करने से पहले टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। विनिवेश विभाग के सचिव ने बताया है कि एअर इंडिया (Air India) को टेकओवर करने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। वहीं चंद्रशेखरन ने कहा है कि इस डील के बाद हम अब एक वर्ल्ड क्लास एयरलाइंस बनाने के लिए काम करेंगे।

उल्लेखनीय है कि 69 साल बाद एयर इंडिया की घर वापसी के साथ ही टाटा देश की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन बन गई है। एयर इंडिया की शुरुआत 1932 में जेआरडी टाटा ने की थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसकी सेवाएँ बंद की गई थी। दोबारा 1946 में जब इसकी सेवा बहाल हुई तो नाम टाटा एयरलाइंस से बदलकर एयर इंडिया लिमिटेड हो गया। देश स्वतंत्र होने के बाद एयर इंडिया की 49 फीसदी भागीदारी सरकार ने ले ली थी। इसके बाद 1953 में इसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था।

नेहरू ने किया था राष्ट्रीयकरण

JRD टाटा के न चाहने के बावजूद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। नवंबर 1952 में देश के सबसे बड़े उद्योगपतियों में से एक JRD टाटा की जवाहरलाल नेहरू से मुलाकात हुई थी। देश नया-नया स्वतंत्र हुआ था और गणतंत्र बना ही था। इसके बाद नेहरू ने टाटा को पत्र लिख कर ‘एयर इंडिया’ (टाटा एयरलाइंस, जो उस समय विश्व की शीर्ष विमान सेवाओं में से एक थी) और ‘इंडियन एयरलाइंस’ (जो घरेलू रूट पर चलती थी) के प्रति अपने रवैये को लेकर सफाई पेश की थी।

टाटा को लगता था कि सरकार ने जान-बूझकर एक नीति तैयार की, ताकि वो ‘एयर इंडिया’ को सस्ते में खरीद कर उन्हें नुकसान पहुँचा सके और इसके लिए कई महीनों से काम चल रहा था। नेहरू ने इन आरोपों को नकारते हुए पत्र में लिखा था कि कॉन्ग्रेस 20 वर्ष पहले से अपनी नीति रखे हुए हैं कि हर प्रकार की ट्रांसपोर्ट सेवाएँ सरकार के हाथ में रहनी चाहिए। नेहरू का कहना था कि ये सरकार की कोई बहुत बड़ी प्राथमिकता नहीं थी, लेकिन इस पर कई बार धीमी चर्चा हुई। उनका कहना था कि वित्तीय दिक्कतों के कारण सरकार इस दिशा में आगे नहीं बढ़ रही थी। 1952 में जगजीवन राम के संचार मंत्री बनने के बाद एयरलाइंस का मुद्दा कैबिनेट के सामने आया और उन्हें सरकारी छत के नीचे एक करने पर सहमति बनी।

आगे बढ़ने से पहले बता दें कि JRD टाटा को ही भारत में विमानन क्रांति लाने के लिए जाना जाता है और वो देश के पहले लाइसेंसी पायलट भी थे। उन्होंने 1932 में ‘टाटा एयरलाइंस’ की स्थापना की थी। उनका मानना था कि भारत के सिविल एविएशन को दबाने के लिए एक साजिश चल रही है, खासकर उनकी विमानन कंपनी को। नेहरू सरकार ने एक कमिटी भी बनाई, जिसने ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ समेत इन विमानन कंपनियों को एक करने का सुझाव दिया।

नेहरू का कहना था कि JRD टाटा के मन में उनके सरकार के प्रति भ्रम है, जबकि वो भारत में विमान सेवाओं को आगे बढ़ाने व इन्हें विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। नेहरू ने सफाई दी थी कि इन कंपनियों का भाव कम होने के बाद इन्हें खरीदना किसी साजिश का हिस्सा नहीं था। उन्होंने इसे स्थिति के अनुसार कार्यवाही करार दिया था। लेकिन, JRD टाटा मानते थे कि विमान सेवा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण एक अच्छा फैसला नहीं है और इससे एक सटीक एयर ट्रांसपोर्ट सिस्टम का निर्माण नहीं होगा।

उन्होंने दुःखी मन से कहा भी था कि सरकार अपना मन पहले ही बना चुकी थी, लेकिन इससे पहले उसे विचार-विमर्श करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि उन्हें जगजीवन राम ने फोन कर के सिर्फ सरकार के निर्णय की सूचना दी। JRD टाटा ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया था और वो चाहते थे कि सरकार उन्हें सुने, ताकि सरकार के लक्ष्य को ही प्राप्त करने में वो मदद कर सकें।

जगजीवन राम ने सिर्फ मुआवजे के बारे में उनसे राय पूछी। उन्होंने कहा था कि उन्हें मुख्य चिंता कर्मचारियों और निवेशकों की है, जिन्होंने वर्षों किए गए मेहनत से एक बड़ा एयर ट्रांसपोर्ट सिस्टम तैयार किया था। हालाँकि, नेहरू सरकार ने उनकी बात नही मानी और 1953 में सारी विमानन कंपनियों का विलय कर के ‘एयर इंडिया’ और ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ में तब्दील कर दिया गया, जिसे बात में ‘एयर इंडिया’ के नाम से पुकारा गया।

इतिहास की बात करें तो देश की पहली कमर्शियल फ्लाइट 1932 में एक एयर मेल को लेकर कराची के दृघ रोड एरोड्रम (अब जिन्ना इंटरनेशनल एयरपोर्ट) से बॉम्बे के जुहू एरोड्रम (मुंबई-जुहू एयरपोर्ट) तक उड़ी थी। JRD टाटा ने खुद ये कारनामा किया था। विश्व युद्ध II के ख़त्म होने के बाद ये ‘एयर इंडिया’ बन गई। 2006 के बाद इसका विलय ‘इंडिया एयरलाइंस’ में कर दिया गया, जिसके बाद इसका घाटा बढ़ता ही चला गया।

अधिग्रहण से पहले ‘एयर इंडिया’ 70,000 करोड़ से भी अधिक के घाटे में थी और JRD टाटा की बातें अब सच साबित हुईं। नेहरू की अदूरदर्शी नीति का खामियाजा यहाँ भी देश को भुगतना पड़ रहा है। JRD टाटा का मानना था कि भारत की सरकार नई है और इसे विमान उड़ाने या विमान सेवा कंपनी चलाने का कोई अनुभव नहीं है, ऐसे में एयर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के राष्ट्रीयकरण का अर्थ होगा कि ये ब्यूरोक्रेसी की अकर्मण्यता में फँस जाएगा। इससे यात्रियों व कर्मचारियों को परेशानी होगी। जबकि कॉन्ग्रेस कहती रही कि इससे व्यवस्था सुधरेगी। बाद में सरकार ने उन्हें खुश करने और उनके अनुभव का फायदा लेने के लिए उन्हें ‘एयर इंडिया’ व ‘इंडियन एयरलाइंस’ का चेयरमैन बना दिया।

उन्होंने स्पष्ट कहा था कि विमान के क्रू के प्रशिक्षण व अनुशासन पर जब तक जोर दिया जाता रहेगा, तभी तक भारत विमानन सेवा में अपना नाम बचा पाएगा। अगले 25 वर्षों तक चीजें उनकी देखरेख में हुईं, इसीलिए सरकार से नाराज़गी के बावजूद उन्होंने चीजों को संभाला और देश-दुनिया में भारतीय एयर ट्रांसपोर्ट सेवा का नाम काबिज किया। इस दौरान वो खुद विमान से यात्रा करते और छोटे-छोटे विवरण नोट करते।

वाइन की ग्लास और कंपनी से लेकर एयर होस्टेस की हेयरस्टाइल तक, उनकी नजर सब पर रहती। टॉयलेट या काउंटर गंदा हो तो वो खुद ही उसे साफ़ करने बैठ जाते थे। होर्डिंग से लेकर एयर होस्टेस की साड़ी तक, टॉयलेट से लेकर विज्ञापक तक, सब पर उनकी नजर रहती थी। तभी 70 के दशक में सिंगापुर की एयरलाइंस ने भी ‘एयर इंडिया’ के साथ करार किया। ये पहला एयरलाइंस बना, जिसने जेट (गौरी शंकर) को अपनी फ्लीट में शामिल किया।

जनवरी 1978 में ‘एयर इंडिया’ का एक विमान बड़े हादसे का शिकार हुआ और सभी 213 यात्रियों की मौत हो गई। इसके बाद सरकार ने उन्हें पद से हटा दिया। 25 वर्षों तक उन्होंने बिना एक पाई लिए देश की सेवा की थी। उन्हें हटाए जाने का कर्मचारियों पर काफी बुरा असर पड़ा। कई ने इस्तीफे दे दिए तो कइयों ने विरोध-प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई की इसके लिए खूब आलोचना हुई।

रेडियो पर ये खबर आई थी। JRD टाटा ने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे किसी से उसके प्यारे बच्चे को छीन लिया गया हो। ‘टाटा एयरलाइंस’ 1946 में ही एक सार्वजनिक कंपनी बन कर ‘एयर इंडिया’ में परिवर्तित हो गई थी। लेकिन, नेहरू ने जिस तरह इंडस्ट्री से बात किए बिना राष्ट्रीयकरण का फैसला लिया, उसका दंश आज देश झेल रहा है। उन्होंने एक अधिकारी से तब कहा था कि हम एक राजनीतिक और अफशरशाही के राज में रहते हैं, जहाँ उनकी सुनने वाला कोई नहीं।

1987 के एक इंटरव्यू में JRD टाटा ने कहा था कि मैं इतना मूर्ख था कि कभी-कभी ऐसा सोचता था कि कारोबार छोड़ कर कॉन्ग्रेस पार्टी का हिस्सा बन जाऊँ। उन्होंने कहा था, “जवाहर लाल नेहरू ने कई बड़ी राजनीतिक त्रुटियाँ की। नेहरू के समाजवाद को जितना मैं समझ पाया वह समाजवाद का सही स्वरूप नहीं था, बल्कि वह नौकरशाहीवाद था। अगर नियति ने उनकी जगह सरदार वल्लभ भाई पटेल को चुना होता तो आज भारत अलग मुकाम पर होता। भारत की आर्थिक स्थिति बहुत मज़बूत होती।”

काशी विश्वनाथ के बाद उज्जैन का महाकाल मंदिर भी होगा भव्य: महाशिवरात्रि तक पहले चरण का काम पूरा, हर घंटे 1 लाख लोग करेंगे दर्शन

काशी विश्वनाथ के बाद अब उसी रूप में उज्जैन के महाकाल मंदिर को भी भव्यता देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए 705 करोड़ रुपए के महाकाल विस्तार प्रोजेक्ट के पहले चरण का काम लगभग पूरा हो रहा है। आने वाली महाशिवरात्रि से पहले इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जहाँ महाकाल के दर्शन आसानी से हो सकेंगे, वहीं धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद महाकाल परिसर का विस्तार होगा। अभी लगभग 2.82 हेक्टेयर में फैला यह परिसर 4 गुना बढ़ कर 20 हेक्टेयर हो जाएगा। इसमें महाकाल पथ, महाकाल वाटिका, रूद्रसागर तट का विकास शामिल है। इस परिसर में रहने और घूमने के साथ अन्य कई सुविधाएँ होंगी। इस प्रोजेक्ट में महाकाल पथ, महाकाल वाटिका, रूद्रसागर तट का विकास कार्य सम्मिलित है। त्रिवेणी संग्रहालय के सामने वाहनों का पार्किंग स्थल भी बनाया जा रहा है। दिसम्बर 2021 में ही यह तय हो गया था कि फरवरी 2022 से रूद्र सागर में सीवरेज के पानी की एक बूँद भी नहीं मिलने दी जाएगी।

उज्जैन के जिलाधिकारी IAS आशीष सिंह ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया, “महाकाल विस्तार प्रोजेक्ट 2 चरणों में पूरा होगा। पहले चरण का काम महाशिवरात्रि से पहले पूरा होगा। दूसरा चरण जून 2023 तक पूरा करने का प्रयास है। यह प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद हर घंटे लगभग 1 लाख श्रद्धालु बिना रुकावट के महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 18 करोड़ रुपए की लागत से UDA के माध्यम से श्रद्धालु सुविधा केंद्र बनाया जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस प्रोजेक्ट की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।”

मोदी सरकार की कोशिश सफल, चीन ने अरुणाचल से अगवा किए गए मिराम तरोन को भारतीय सेना को सौंपा

अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के सियांग जिले से हाल ही में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने 17 साल के मिराम तरोन (Miram Taron) का अपहरण कर लिया था। अब उस युवक को चीनी सेना ने भारत को वापस सौंप दिया है। इसकी पुष्टि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने की है। उन्होंने बताया कि चीन ने युवक को इंडियन आर्मी को सौंप दिया है।

केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने ट्वीट किया, “चीन की पीएलए ने अरुणाचल प्रदेश के युवा मिराम तरोन को इंडियन आर्मी को सौंप दिया है। उसकी मेडिकल परीक्षण समेत तमाम प्रक्रियाओं को पूरा किया जा रहा है।”

समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मिराम तरोन को अरुणाचल प्रदेश के वाचा दमाई में भारतीय सेना के हवाले किया गया। इससे पहले 23 जनवरी 2022 को चीन ने स्वीकार किया था कि मिराम तरोन उसके पास है। सेना के 4 कोर मुख्यालय के डिफेंस पीआरओ कर्नल हर्षवर्धन पांडे ने बताया था कि दोनों सेनाओं के बीच बातचीत के बाद सहमति बनी है।

उल्लेखनीय है कि 20 जनवरी 2022 को चीन की सेना ने मिराम तरोन का अपहरण कर लिया था। इसके बाद भारत सरकार ने इस मामले को चीन के समक्ष उठाया और उसकी तुरंत रिहाई की माँग की थी, लेकिन बाद में चीनी विदेश मंत्रालय ने इससे साफ इनकार कर दिया था।

इससे पहले भी चीन की सेना PLA इस तरह की हरकत कर चुकी है। इससे पहले सितंबर 2020 में अरुणाचल प्रदेश के सुबनसिरी जिले से चीनी आर्मी ने पाँच लोगों का अपहरण कर लिया था। बाद में तत्कालीन गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने उनकी रिहाई सुनिश्चित करवाई थी। 

वहीं, मिरांग तरोन के मामले के सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने बदजुबानी करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की क्षमता पर सवाल खड़ा कर दिया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “गणतंत्र दिवस से कुछ दिन पहले भारत के एक भाग्य विधाता का चीन ने अपहरण किया है, हम मिराम तरोन (Mirang Taron) के परिवार के साथ हैं और उम्मीद नहीं छोड़ेंगे, हार नहीं मानेंगे। PM की बुजदिल चुप्पी ही उनका बयान है- उन्हें फर्क नहीं पड़ता!”

‘भारत में बढ़ रही असहिष्णुता, लोगों को उकसाया जा रहा’: ISI से जुड़ी संस्था के कार्यक्रम में हामिद अंसारी ने कहा- लोकतन्त्र खतरे में, BJP ने घेरा

देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने हिंदू राष्ट्रवाद पर विवादित बयान दिया है। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू राष्ट्रवाद चिंता का विषय है। देश में धार्मिक आधार पर लोगों को बाँटा जा रहा है। लोगों में राष्ट्रीयता को लेकर विवाद पैदा किया जा रहा है। खासकर एक धर्म विशेष के लोगों को उकसाया जा रहा है। देश में असहिष्णुता को हवा दी जा रही है और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है। पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार किया है। 

भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का पलटवार

पूर्व उपराष्ट्रपति के इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने गुरुवार (27 जनवरी 2022) को कहा कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति विरोध करते-करते देश विरोध करने में भी संकोच नहीं करते हैं। उन्होंने राजनीति से प्रेरित होकर बयान दिया है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि अंसारी जैसे लोगों को देश में हिंदुओं पर होने वाले हमले नहीं दिखाई देते।

विदेशी मंच पर भारत की छवि धूमिल करते हैं लोग- बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली

वहीं बीजेपी के प्रवक्ता नलिन कोहली ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारत के सभी लोगों के हित में काम कर रही है। बिना किसी भेदभाव के सभी को फायदा पहुँचाने का काम हो रहा है। इस सरकार का ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं है, जिसमें देखा जाता है कि कौन हिंदू है और कौन मुसलमान है, बौद्ध है, ईसाई है। चाहे वो फिर महिला हो, किसान हो या फिर युवा हों। लेकिन कुछ ऐसे लोग विदेशी मंच पर जाकर हिंदुस्तान को बदनाम करने की कोशिश करते हैं। प्रधानमंत्री विदेश जाकर देश की छवि सुधारते हैं और कुछ लोग भारत की छवि धूमिल करने विदेश जाते हैं।

हामिद अंसारी ने क्या कहा था?

बता दें कि हामिद अंसारी ने 26 जनवरी के मौके पर एक अमेरिकी संस्था के वर्चुअल कार्यक्रम में विवादित बातें कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है। उन्होंने भारत के लोकतंत्र की आलोचना की और चेतावनी दी कि देश अपने संवैधानिक मूल्‍यों से दूर जा रहा है।

हामिद अंसारी के इस बयान पर बीजेपी नेता और अल्‍पसंख्‍यक मामलों के मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने पलटवार किया है। नकवी ने कहा कि मोदी की आलोचना करने का पागलपन अब भारत की आलोचना करने की साजिश में बदल गया है। उन्‍होंने कहा, “जो लोग अल्‍पसंख्‍यकों के वोट का शोषण करते थे, वे अब देश के सकारात्‍मक माहौल से चिंतित हैं।”

भारत से डिजिटल तरीके से इस चर्चा में भाग लेते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति अंसारी ने हिंदू राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवृत्ति पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए आरोप लगाया, ‘‘हाल के वर्षों में हमने उन प्रवृत्तियों और प्रथाओं के उद्भव का अनुभव किया है, जो नागरिक राष्ट्रवाद के सुस्थापित सिद्धांत को लेकर विवाद खड़ा करती हैं और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की एक नई एवं काल्पनिक प्रवृति को बढ़ावा देती हैं। वह नागरिकों को उनके धर्म के आधार पर अलग करना चाहती हैं, असहिष्णुता को हवा देती हैं और अशांति और असुरक्षा को बढ़ावा देती हैं।’’

भारत के ‘बहुलतावादी संविधान का संरक्षण’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हामिद अंसारी एवं अन्य लोगों ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हेट स्पीच, गैर कानूनी गतिविधि निवारक कानून के दुरुपयोग और कश्मीरी कार्यकर्ता खुर्रम परवेज की गिरफ्तारी को लेकर चर्चा की। हालाँकि ऐसे तमाम दावों को भारत सरकार खारिज करती रही है। सरकार की ओर से अपने लोकतांत्रिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि उसकी संसदीय प्रणाली और कानून पूरी तरह से पारदर्शी हैं। देश में नियमित और पारदर्शी चुनावों को भी भारत सरकार दुनिया के आगे लोकतंत्र की सफलता के तौर पर पेश करती रही है। 

हामिद अंसारी के बयान पर VHP ने भी जताई नाराजगी

वीएचपी के प्रवक्ता बिनोद बंसल ने कहा, “हामिद अंसारी जैसे लोग संवैधानिक पदों से उतरते ही सीधे नीचे क्यों गिर जाते हैं? PFI और IAMC जैसे कट्टरपंथी संगठनों में पहुँचते ही इनके अंदर का जिहादी इस्लाम इन पर क्यों हावी हो जाता है? राष्ट्र व राष्ट्रवाद पर छुप-छुप कर वार करने से अच्छा हो ये खुलकर मैदान में आएँ।”

कार्यक्रम की आयोजक संस्था ‘इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल’ (IAMC) है। यह संस्था पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई व भारत में दंगे कराने की साजिश से जुड़ी बताई जाती है। अंसारी ने इस संस्था के मंच से केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा।

संस्था पर त्रिपुरा दंगे में लिप्त होने का आरोप

वॉशिंगटन में हुए इस वर्चुअल कार्यक्रम की आयोजक संस्था पर पाक खुफिया एजेंसी से जुड़े होने का आरोप है। यह कार्यक्रम 17 अमेरिकी संगठनों के एक समूह ने रखा था।आयोजक संस्थाओं में से एक इंडियन-अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल भी है। इसे त्रिपुरा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में हाल ही में राज्य में हुए दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इन 17 संस्थाओं में एमनेस्टी इंटरनेशनल यूएसए, जीनोसाइड वॉच, हिंदूज फॉर ह्यमन राइट्स, इंडियन अमेरिकी मुस्लिम काउंसिल शामिल हैं।

‘फरमान-जहाँगीर ने पत्रकार सुधीर सैनी को मार गड्ढे में फेंका’: सहारनपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार, तीसरे आरोपित मन्नान की तलाश तेज

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सहारनपुर (Saharanpur) जिले में 26 जनवरी (बुधवार) को पत्रकार सुधीर सैनी की हत्या कर दी गई है। सुधीर ‘शाह टाइम्स’ में संवाददाता थे। हत्या का आरोप जहाँगीर, फरमान और मन्नान पर है। पुलिस ने जहाँगीर और फरमान को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि मन्नान फरार है। घटना में प्रयोग की गई ऑल्टो कार भी बरामद कर ली गई है।

तीनों आरोपितों पर धारा 302 के तहत केस दर्ज किया गया है। इस घटना की जानकारी देते हुए सहारनपुर के SSP आकाश तोमर ने बताया, “थाना कोतवाली देहात के चिलकाना रोड पर चिकालना के रहने वाले सुधीर नामक व्यक्ति अपनी मोटरसाइकिल से सहारनपुर की तरफ आ रहे थे। उनके साथ आ रही एक ऑल्टो कार में 3 व्यक्ति सवार थे। ओवरटेक को लेकर इनका आपस में झगड़ा हुआ। कार सवार व्यक्तियों ने सुधीर के साथ मारपीट की। मारपीट के दौरान सुधीर को आई चोटों से उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद कार सवार फरार हो गए। चश्मदीदों ने कार का नंबर बताया, जिसके आधार पर उसकी पहचान करते हुए कार सहित 2 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

घटना की शिकायत मृतक सुधीर के पिता तेलूराम ने दर्ज करवाई है। सहारनपुर के एसएसपी IPS आकाश तोमर ने इसे रोड रेज की घटना बताया है। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि फरार तीसरे आरोपित मन्नान को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने पकड़े गए आरोपितों की लॉकअप की वीडियो शेयर करते हुए ट्वीट किया, “बीच राह पत्रकार सुधीर सैनी को पीट कर मार डालने वाले ज़हाँगीर व फ़रमान को गिरफ्तार कर लिया गया। मन्नान की तलाश जारी है। महज ओवरटेकिंग के विवाद पर इन जल्लादों ने सहारनपुर में पत्रकार सुधीर सैनी को मार दिया। लाश को गड्डे में फेंक भाग गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई कर इन्हें धर दबोचा।”

दिल्ली से शुरू होगी ‘दिव्य काशी यात्रा, रेलवे ने ‘देखो अपना देश’ में जोड़ा एक और रूट: जानिए IRCTC के इस ट्रेन के बारे में सब कुछ

13 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीकाशी विश्वनाथ कॉरिडोर (Shri Kashi Vishwanath Corridor) देश को समर्पित किया था। अब भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) ने ‘दिव्य काशी यात्रा’ की पहल की है, जो यात्रियों को वहाँ के उत्सवी वातावरण, दिव्यता, भव्यता और जीवंत आध्यात्मिकता से परिचित कराएगी। इसकी शुरुआत 22 मार्च 2022 को होगी।

रेल मंत्रालय के अधीन आने वाली आईआरसीटीसी ‘देखो अपना देश’ के तहत यह वातानुकूलित पर्यटक ट्रेन शुरू करने जा रही है। दिव्य काशी यात्रा 4 रात और 5 दिन की होगी। सफदरजंग रेलवे स्टेशन से इसकी शुरुआत होगी। इस ट्रेन की क्षमता 156 यात्रियों की है। फर्स्ट एसी का किराया ₹29950 प्रति व्यक्ति, जबकि सेकंड एसी का किराया 24500 रुपए प्रति व्यक्ति निर्धारित किया गया है।

आईआरसीटीसी के जनसंपर्क अधिकारी आनंद कुमार झा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस सेवा को शुरू करने का मकसद लोगों को भारत के गौरव से परिचित कराना है। हमारे ऐतिहासिक स्थलों, उनकी ऐतिहासिकता, धरोहर के प्रति जागरूक करना है। उल्लेखनीय है कि उद्घाटन के बाद से ही काशी कॉरिडोर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “विश्वनाथ धाम का ये पूरा नया परिसर एक भव्य भवन भर नहीं है, ये प्रतीक है, हमारे भारत की सनातन संस्कृति का। ये प्रतीक है, हमारी आध्यात्मिक आत्मा का। ये प्रतीक है, भारत की प्राचीनता का, परम्पराओं का। भारत की ऊर्जा का, गतिशीलता का।”

झा ने बताया कि आईआरसीटीसी की योजना साल में कम से कम 10 ‘दिव्य काशी यात्रा’ ट्रेन चलाने की है। सफदरजंग से रवाना होने के अगले दिन ट्रेन बनारस पहुँचेगी। वहाँ से यात्रियों को सारनाथ ले जाया जाएगा। सारनाथ भ्रमण के बाद यात्री काशी विश्वनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर, वाराणसी के घाट, गंगा आरती, संकट मोचन मंदिर, तुलसी मानस मंदिर, दुर्गा मंदिर, भारत माता मंदिर सहित अन्य जगहों पर दर्शन कर सकेंगे। किराए में ही भोजन, एसी होटल में रुकने, दर्शन, गाइड सहित अन्य चीजों के खर्चे भी शामिल हैं। 26 मार्च की सुबह यात्रियों को लेकर ट्रेन दिल्ली पहुँचेगी।

देश की राजनीतिक राजधानी को देश की आध्यात्मिक और सांस्कृति राजधानी से जोड़ने वाली इस डीलक्स ट्रेन में शानदार रेस्तरां भी है। इसमें यात्रियों को शुद्ध और सात्विक भोजन परोसा जाएगा। मिनी लाइब्रेरी जैसी कई अन्य सुविधाओं का भी इंतजाम किया गया है। गौरतलब है कि ‘देखो अपना देश योजना’ के तहत ही आईआरसीटीसी ने ‘रामायण सर्किट यात्रा’ शुरू की थी। इस यात्रा के दौरान अयोध्या से लेकर रामेश्वरम तक भगवान श्रीराम से जुड़ी जगहों के दर्शन यात्रियों को कराया जाता है। इसकी शुरुआत बेहद सफल रही है। झा ने बताया कि साल में कम से कम आठ ‘रामायण सर्किट यात्रा’ चलाने की योजना है।

मेरी ब्रा का साइज भगवान ले रहे’: टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी के विवादित बयान पर बवाल, गिरफ्तारी की माँग के बीच नरोत्तम मिश्रा ने माँगी रिपोर्ट

टीवी एक्ट्रेस श्वेता तिवारी (TV Actress Sweta Tiwari) हिंदू भावनाओं को आहत करने के मामले में विवादों में घिर गई हैं। इस मामले में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार एक्शन मोड में आ गई है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने भोपाल के पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर को 24 घंटे में मामले की पूरी जाँच कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मिश्रा ने कहा कि हिंदू भावनाओं को आहत करने वाला श्वेता तिवारी का हालिया बयान उन्होंने देखा और सुना है और वे इसकी कड़ी निंदा करते हैं। दरअसल, मनीष हरिशंकर की वेब सीरीज ‘शो-स्टॉपर्स’ के प्रमोशन के लिए सीरीज प्रोडक्शन की पूरी यूनिट भोपाल आई हुई थी। इसको लेकर प्रोडक्शन टीम द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया था।

बुधवार (26 जनवरी 2022) को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बेव सीरीज और स्टार कास्ट को लेकर पत्रकारों को जानकारी दी जा रही थी। इसी दौरान श्वेता तिवारी ने कहा, “मेरी ब्रा का साइज भगवान ले रहे हैं।” इतना कहने के बाद वो अपने बगल में बैठी दूसरी एक्ट्रेस के साथ हँसने लगती हैं। उल्लेखनीय है कि इस वेब सीरीज में श्वेता तिवारी के साथ रोहित रॉय नजर आने वाले हैं।

बहरहाल एक्ट्रेस के इस बयान को लेकर हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताते हुए भोपाल में शूटिंग नहीं करने देने की चेतावनी दी है। वहीं, संस्कृति बचाओ मंच के चंद्रशेखर तिवारी ने अभिनेत्री से सार्वजनिक तौर पर माफी माँगने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने गृहमंत्री मिश्रा से श्वेता तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की भी माँग की। उनका कहना है कि फिल्म निर्देशक, अभिनेता और अभिनेत्रियों ने भगवान के अपमान का ठेका ले रखा है।

गौरतलब है कि श्वेता तिवारी इससे पहले भी विवादों में रही हैं। अपने पारिवारिक मसले को लेकर चर्चा में रहने वाली श्वेता तिवारी अपने पहले पति राजा चौधरी और दूसरे पति अभिनव कोहली से विवादों को लेकर सुर्खियों में रही थीं।