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‘दलित-मुस्लिम साथ चलेगा, बाबर जैसा राज चलेगा’: अलीगढ़ में AIMIM नेता का विवादित बोल, कहा- इंशाल्लाह वो दिन जरूर आएगा

उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे विधानसभा (Uttar Pradesh Assembly Election 2022) का समय नजदीक आता जा रहा है, वैसे-वैसे भारत एवं हिंदू विरोधी बयानों की बौछार होती जा रही है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए उनकी पार्टी के नेता भड़काऊ बयानबाजी को मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने का प्रयास कर रहे हैं।

अलीगढ़ के जमालपुर इलाके में AIMIM की एक नुक्कड़ सभा में मुस्लिम आक्रांता बाबर की राज लाने का संदेश दिया जा रहा है। पार्टी के जिलाध्यक्ष गुफरान नूर ने सभा के दौरान नारा दिया ‘दलित-मुस्लिम साथ चलेगा, बाबर जैसा राज चलेगा’। सभा में मौजूद लोगों ने भी इस नारे को दोहराया। इस दौरान सभा में 5-6 साल के छोटे-छोटे बच्चे भी नजर आए। छोटे-छोटे बच्चों के मन में इस तरह का विष भरने का काम लगातार जारी है। इस दौरान नूर ने हिंदुओं को मारने सहित कई भड़काऊ और आपत्तिजनक बातें कहीं।

नूर ने आगे कहा, “अभी हरिद्वार के अंदर धर्म संसद हुई थी। आपने देखा होगा कि वहाँ एक धर्म विशेष को काटने की बात होती है, एक समुदाय को काटने की बात होती है। कौन था वो समुदाय जिसे काटने की बात हो रही थी? वो था मुस्लिम समुदाय। कुछ हिंदुत्व का चोला पहने आतंकवादी उस धर्म संसद में एक समुदाय को काटने की बात कर रहे थे।”

मुस्लिमों को हत्या के लिए उकसाते हुए गुफरान नूर ने कहा, “हमारे इस्लाम में ना खुद मरने की इजाजत है और ना किसी को मारने की इजाजत है, लेकिन जालिम जब जुल्म हद पार कर जाए तो उसे….(मारने का इशारा करते हुए)। उसे अपने बीच से हटाने (यानी मारने) की इजाजत है।”

गुफरान ने कहा, “अगर दलित और मुस्लिम एक हुए तो इंशाअल्लाह हम पूरे हिंदुस्तान के अंदर हम लोग राज कर सकते हैं, चाहे वो किसी भी हद तक हो। बाबर कोई गलत नहीं था। जैसे हालात चल रहे हैं, बाबर जैसा शासन होना चाहिए। इंशाल्लाह वो दिन जरूर आएगा कि एक दिन बाबर जैसा राज होगा।” उन्होंने कहा कि इस्लाम ये नहीं कहता कि एक बच्चा बनाएँ या दो बच्चा बनाएँ। खिलाने वाले अल्लाह-ताला हैं, परवरिश करने वाला अल्लाह-ताला है।

बता दें कि AIMIM चीफ ओवैसी ने मुरादाबाद में लोगों को भड़काते हुए कहा था कि म्यामांर के मुस्लिमों की तरह भारत के मुस्लिमों का भी रोहिंग्या जैसा हाल हो जाएगा। ओवैसी ने कहा था कि मुस्लिम अब दूसरे को राज करने के लिए नहीं चुनेंगे, बल्कि खुद राज करेंगे। उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि एक मुसलमान दरी बिछाता रहे… दरी बिछाता रहे… उसे बेशरम किया जाए, लेकिन उसके मुकद्दर में दरी बिछाना नहीं है। मैं तुमसे कहता हूँ… अब तुम दर्री नहीं बिछाओगे, अब तुम कुर्सी पर बैठोगे और राज भी करोगे… इंशाल्लाह।”

‘सनातन धर्म वालों का खून पानी नहीं है’: जितेंद्र नारायण ने तौकीर रज़ा की धमकी का दिया जवाब – ‘तुम 20 करोड़ मुस्लिमों को जमा कर लो…’

उत्तर प्रदेश के बरेली के मौलाना तौकीर रज़ा की धमकी का जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी (पूर्व में वसीम रिजवी) ने जवाब दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर के अपनी बात रखी है। बता दें कि शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष ने गाजियाबाद के डासना स्थित शिव शक्ति धाम में महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती की मौजूदगी में हिन्दू धर्म में घर-वापसी की प्रक्रिया पूरी की थी। इसके बाद वो हरिद्वार धर्म संसद का भी हिस्सा बने। वो अक्सर इस्लामी कट्टरपंथियों को जवाब देते रहते हैं।

ताज़ा बयान में उन्होंने कहा, “तौकीर रज़ा, असदुद्दीन ओवैसी, नसीरुद्दीन शाह और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड! तुम 20 करोड़ मुस्लिमों को जमा कर लो, फिर भी गृह युद्ध नहीं कर सकते। तुम हिन्दुओं को भयभीत कर रहे हो मजमे इकट्ठा कर के। पाकिस्तान के इशारे पर गृह युद्ध जैसे माहौल बना रहे हो। सनातन धर्म के मानने वालों का खून पानी नहीं है, जो तुम आसानी से बहा लोगे। देश में औरंगजेब और बाबर की हुकूमत भी नहीं है, जो तुम सिर पर सिर रख कर काट दोगे।”

साथ ही जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी ने ऐलान किया कि हम धर्म संसद बार-बार करेंगे, हर जगह करेंगे और हर महीने करेंगे। उन्होंने कहा कि हम लड़ने के लिए नहीं लेकिन अपनी हिफाजत के लिए ऐसा करेंगे। उन्होंने कट्टर इस्लामियों से पूछा कि आज हम हिन्दू जागरूक हो रहे हैं तो वो लोग परेशान क्यों हैं? साथ ही ये सवाल भी दागा कि पाकिस्तान परेशान क्यों है? बता दें कि उत्तराखंड में धर्म संसद में भड़काऊ बयान को लेकर उन पर FIR भी दर्ज हो चुकी है।

बरेली के मौलाना तौकीर रज़ा का भड़काने वाला बयान

बरेली में ‘धर्म संसद’ आयोजित कर मुस्लिम धर्म गुरु और आईएमसी के प्रमुख मौलाना तौकीर राज ने हिंदुओं को धमकी दी है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित इस्लामिया ग्राउंड में यह संसद बुलाई गई थी, जिसमें तकरीबन 20 हजार मुस्लिम पहुँचे थे। इस दौरान हिंदुओं के खिलाफ जहर ही नहीं उगला गया, बल्कि कोरोना गाइडलाइन की भी जमकर धज्जियाँ उड़ाई गईं। इस दौरान न किसी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और ना ही किसी के चेहरे पर मास्क दिखा।

इस दौरान भड़काऊ भाषण देते हुए रजा ने कहा कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा। रजा ने कहा, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

तौकीर रजा ने हिंदुओं को चुनौती देते हुए कहा, “लड़ने का तुम्हें बहुत शौक है, लेकिन तुम लड़ने की बात कर सकते हो, लड़ नहीं सकते हो। लड़ाई तो हमारे खून में है, हम पैदाइशी लड़ाकू हैं।” मौलाना ने कहा कि उनकी बहू-बेटियों को बरगलाने और जाल में फँसाने की बात कही जाती है, और मुस्लिम खून का घूँट पीकर रह जाते हैं।

मौलाना ने कहा कि क्या वह देशप्रेमी हो सकता है, जो अपने ही देश के लोगों (मुस्लिमों) को मारने की बात करे? उन्होंने कहा, “लेकिन हम तुमसे नहीं लड़ना चाहते, क्योंकि तुम हमारे हिंदुस्तानी भाई हो।अगर लड़ना है तो चलो चीन बॉर्डर पर। देखते हैं तुम्हारी बहादुरी। यहाँ बीस हजार नौजवान आए हैं और सिर पर कफन बाँध कर आए हैं अपनी जान देने के लिए। मेरे नौजवानों को थोड़ी सी ट्रेनिंग और थोड़े से हथियार दे दो, हम कैलाश मानसरोवर चीन से ले लेंगे और पाकिस्तान को हिंदुस्तान में मिला लेंगे।”

विदेशी कोरोना वैक्सीनों से महिलाओं के मासिक चक्र में दिक्कत… कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और मीडिया ने इन्हीं के लिए मचाया था हल्ला

दुनिया भर में सबसे पहले कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत करने वाले देशों में शामिल ब्रिटेन की महिलाओं में इसका साइड इफेक्ट सामने आया है। हाल ही में की गई ए​क रिसर्च में खुलासा किया गया है कि जिन महिलाओं ने कोरोनो वैक्सीन की डोज ली हैं, उनका मासिक चक्र (late menstrual cycle after covid vaccine) प्रभावित हुआ है।

ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनकोलॉजी जर्नल (Journal Obstetrics & Genecology) में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, हजारों महिलाओं का दावा है कि कोरोना वैक्सीन की डोज मिलने के बाद उनका मासिक धर्म लगभग एक दिन आगे बढ़ गया है। इतना ही नहीं, कई महिलाओं का यह भी कहना है कि वैक्सीनेशन से उन्हें अनियमित और दर्दनाक पीरियड्स (late and painful periods after covid vaccine) का सामना भी करना पड़ा है।

डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा मामले फाइजर (Pfizer – 55 फीसदी), मॉडर्ना (Moderna – 35 फीसदी) और जॉनसन एंड जॉनसन (Johnson & Johnson – सात फीसदी) वैक्सीन से जुड़े हुए हैं।

ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी (Oregon Health and Science University) के साथ मिलकर वैज्ञानिकों की एक टीम ने फर्टिलिटी ट्रैकिंग ऐप के माध्यम से लगभग 4000 महिलाओं के मासिक चक्र पर रिसर्च किया। इनमें कुछ वैक्सीन लगा चुकी और अभी तक एक भी डोज ना लेने वाली महिलाओं को शामिल किया गया था। रिसर्च में खुलासा किया गया, “पहली डोज के बाद महिलाओं के मासिक चक्र औसतन 0.64 दिन (लगभग 15.36 घंटे) और दूसरी डोज के बाद 0.79 दिन (लगभग 18.96 घंटे) बढ़ गए हैं।”

मालूम हो कि रिसर्च में महिलाओं को जिन तीन विदेशी वैक्सीनों से साइड इफ्केट हुआ है, कभी कॉन्ग्रेस, लेफ्ट और मीडिया ने भारत में इसे मंजूरी दिलाने के लिए हल्ला मचाया था। वामपंथियों की पूरी लॉबी ने विदेशी वैक्सीन को बिकवाने के लिए भारत बायोटेक की बेहतर वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी विदेशी फार्मा कंपनियों द्वारा तैयार की गई कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दिलाने के लिए पिछले साल केंद्र सरकार पर जमकर हमला करते नजर आए थे। उन्होंने मोदी सरकार से कहा था कि विदेश में निर्मित फाइजर, मॉडर्ना और जॉनसन एंड जॉनसन के टीकों को भारत में उपयोग करने की अनुमति दी जाए। इसमें वामपंथी मीडिया ग्रुप्स ने भी राहुल गाँधी का भरपूर साथ दिया था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने उन पर विदेशी कंपनियों के लिए लॉबिंग करने का आरोप लगाया था।

राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा था, “बतौर पार्ट टाइम राजनीतिज्ञ फेल होने के बाद अब राहुल गाँधी फुल टाइम लॉबिंग करने लगे हैं। महामारी से लड़ना कोई ट्रिक गेम नहीं है और इसके लिए वैक्सिनेशन के अलावा टेस्टिंग, ट्रेसिंग और उपचार की आवश्यकता होती है, लेकिन राहुल गाँधी की समस्या ये है कि वे यह सब कुछ नहीं जानते।”

बता दें कि अध्ययन में तीन विदेशी फाइजर, मॉडर्न और जॉनसन एंड जॉनसन कोरोना वैक्सीन ने महिलाओं के मासिक धर्म को सबसे अधिक प्रभावित किया है। इसका साइड इफेक्ट पहले दिन से शुरू होता है और आखिरी दिन तक रहता है।

यह अध्ययन साल भर चलने वाले शोध का एक छोटा सा हिस्सा बताया जा रहा है। यह तब सामने आया, जब अमेरिका और ब्रिटेन में हजारों महिलाओं ने डोज के बाद अपने अनियमित मासिक चक्र के बारे बताया। वहीं, 2 सितंबर 2021 को, 35000 ब्रिटिश महिलाओं ने भी इसका खुलासा किया था कोरोना वैक्सीन की पहली डोज मिलने के बाद उनके पीरियड्स बाधित हुए हैं। जबकि भारतीय वैक्सीन से अभी तक किसी को भी कोई साइड इफेक्ट नहीं हुआ है।

तालिबान के नक्शे-कदम पर वामपंथी चीन: तिब्बत में भगवान बुद्ध की 99 फीट ऊँची प्रतिमा को किया ध्वस्त, देखने के लिए भिक्षुओं को किया विवश

चीन की वामपंथी सरकार ने 99 फीट ऊँची बुद्ध की एक प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया है। इसी के साथ प्रार्थना के लिए 45 पहियों को भी जमींदोज कर दिया। यह घटना तिब्बत के ड्रैगो में खाम की बताई जा रही है। इस प्रतिमा को बने हुए अभी 6 वर्ष ही हुए थे। बौद्धों के पास इसके जरूरी कागज़ात भी थे। इस मूर्ति का ध्वस्तीकरण 12 दिसम्बर 2021 से शुरू हुआ। इसको तोड़ने में 9 दिन लगे।

इस घटना की पुष्टि रेडियो फ्री एशिया ने की है। उसने इसकी सैटेलाइट तस्वीरों को भी जारी किया है जिसमें पहले एक बड़े सफेद छाते के नीचे खड़ी सफेद मूर्ति अब मलबा बन चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक इस मूर्ति का निर्माण स्थानीय तिब्बती 5 अक्टूबर 2015 को करवाया था। इसमें लगभग $6.3 मिलियन का खर्च आया था। इसके ध्वस्तीकरण को देखने के लिए स्थानीय बौद्धों को मजबूर भी किया गया। चीनी अधिकारियों ने इसकी अधिक ऊँचाई होने का बहाना बनाया था। जबकि भारत में रह रहे एक बौद्ध के मुताबिक इसका निर्माण पूरे कानूनी दायरे में किया गया था।

रक्षा एवं रणनीति विश्लेषक ब्रह्म चेलानी ने इस घटना को तालिबानी हरकत बताया है। मूर्ति का चित्र अपने ट्विटर पर डालते हुए उन्होंने लिखा है, “चीन तालिबान के नक्श-ए-कदम पर चल रहा है। तालिबान द्वारा बामियान में बुद्ध की प्रतिमा को नष्ट करने के बाद चीनी अधिकारियों ने सिचुआन के एक तिब्बती क्षेत्र में भगवान बुद्ध की 99 फुट की प्रतिष्ठित मूर्ति को ध्वस्त कर दिया और तिब्बती भिक्षुओं को यह विनाश देखने के लिए मजबूर किया।”

तिब्बत के बौद्ध निवासियों पर चीनी अधिकारियों और पुलिस का अत्याचार लगातार जारी है। इस ध्वस्तीकरण अभियान के मुखिया का नाम वांग डांग शेंग है। बताया जा रहा है कि इससे पहले वो सिचुआन के लरंग बुद्धिस्ट एकेडमी (Larung Gar Buddhist Academy) को भी ध्वस्त कर चुके हैं। इस अभियान में हजारों बौद्ध भिक्षु बेघर हो गए थे। उनके घरों को भी तोड़ दिया गया था।

CM योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को जल संरक्षण के क्षेत्र में मिला प्रथम पुरस्कार, राजस्थान से भी पिछड़ा केरल

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने 7 जनवरी (शुक्रवार) को तीसरे ‘राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2020’ की घोषणा की। इसमें सबसे ज्यादा अवार्ड उत्तर प्रदेश को मिले हैं। UP को ‘सर्वश्रेष्ठ राज्य श्रेणी’ में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। राजस्थान दूसरे और तमिलनाडु तीसरे नंबर पर हैं। गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस उपलब्धि के लिए UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) को बधाई दी है।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा, “कृषि, उद्योग और अन्य घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए लगातार जल का दोहन हो रहा है। पानी की उपलब्धता लगातार घटी है, लेकिन उपयोग बढ़ता जा रहा है। बरसात के भी रूप बदल रहे हैं। वर्ष 2050 तक जल की माँग में बेहद बढ़ोतरी होने वाली है और ये वर्तमान के लगभग 1,100 बिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़कर 1,447 बिलियन क्यूबिक मीटर तक हो सकती है। अतः मिलकर प्रयास करना बेहद जरूरी है।”

उत्तरी जोन का सबसे बेहतर जिला उत्तर प्रदेश का मुज़फ्फरनगर रहा। पंजाब का शहीद भगत सिंह नगर दूसरे स्थान पर रहा। दक्षिण ज़ोन में केरल का तिरुवनंतपुरम पहले और आंध्र प्रदेश का कडप्पा दूसरे नंबर पर रहा। पूर्व ज़ोन में बिहार का पूर्वी चंपारण प्रथम और झारखंड का गोड्डा द्वितीय स्थान पर रहे। मध्य प्रदेश का इंदौर पश्चिम ज़ोन में पहले और गुजरात का वड़ोदरा राजस्थान के बाँसवाड़ा के साथ दूसरे नंबर पर रहा। असम के गोलपरा और अरुणाचल प्रदेश के सियांग को उत्तर-पूर्व ज़ोन में सम्मानित किया गया। सबसे बेहतर गाँवों की श्रेणी में उत्तराखंड के धंसपल गाँव को शामिल किया गया। बिहार के तिलारी, गुजरात के तख़्तगढ़, मिजोरम के सिल्चर सरचिप और वाराणसी के बलुआ गाँव को भी नामित किया गया। माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को जल संरक्षण लिए इस बार भी पुरस्कृत किया गया।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले पुरस्कारों में जल संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में सक्रियता से कार्यरत व्यक्तियों, समूहों और संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है। पुरस्कारों की कुल 11 श्रेणियाँ हैं। हर श्रेणी को मिलाकर कुल 57 पुरस्कार दिए जाते हैं। पहला जल अवॉर्ड साल 2018 में दिया गया था।

वो बैट्समैन जिसकी हड्डी नहीं तोड़ पाए भारतीय गेंदबाज… और टीम इंडिया हार गई टेस्ट

साउथ अफ्रीका ने जोहांसबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में दूसरे टेस्ट मैच के चौथे दिन कप्तान डीन एल्गर (Dean Elgar) की नाबाद 96 रनों की पारी के दम पर भारतीय टीम को 7 विकेट से हरा दिया। घरेलू मैदान में अपनी दमदार बल्लेबाजी के बाद डीन एग्लर खासा चर्चा में आ गए हैं। उन्होंने चौथे दिन के खेल से पहले रात को अपने पिता रिचर्ड एग्लर को कह दिया था कि टीम इंडिया को उन्‍हें पवेलियन भेजने के लिए उनकी हड्डियाँ तोड़नी होंगी, नहीं तो वह आउट होने वाले नहीं हैं।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, रिचर्ड एग्लर (Richard Elgar) ने बताया, “बुधवार की रात डीन ने मुझसे कहा – “पिताजी! मैं कल (गुरुवार) खेल खत्म होने तक क्रीज पर बना रहूँगा। अगर वे मुझे पवेलियन भेजना चाहते हैं, तो भारतीय गेंदबाजों को मेरी शरीर की हड्डी तोड़नी होगी, मुझे घसीट कर मैदान से बाहर ले जाना होगा, वरना मैं आउट होने वाला नहीं हूँ।”

रिचर्ड एल्‍गर के अनुसार, डीन बचपन से ही बहुत जिद्दी हैं। उन्‍होंने बताया कि जब डीन 5 साल के थे, तो वह अपने से छह साल बड़े दोस्‍त के भाई के साथ क्रिकेट खेल रहे थे। दो सीनियर लड़के डीन को तेज गेंदबाजी कर रहे थे। तब 5 साल के डीन ने मेरी तरफ देखा और कहा कि चिंता मत करो डैड। वे मुझे आउट नहीं करेंगे। डीन एल्‍गर के पिता ने बताया कि अगर वह आउट हो जाते, तो एक बार और बल्‍लेबाजी करना चाहते, क्‍योंकि वह उनसे बहुत छोटे थे।

डीन एल्गर के पिताजी ने बताया कि अगर वो कोई फैसला कर लेते हैं कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखते हैं। उन्‍होंने उसके बचपन से जुड़ा एक किस्सा भी बताया, “डीन का बचपन से ही सपना था कि वह एक महान क्रिकेटर बने। एक दिन स्‍कूल की प्रिंसिपल ने उसे क्‍लासवर्क और पढ़ाई पर मेहनत करने के लिए कहा। इतना सुनते ही वह उन पर भड़क गया और उन्हें जवाब देते हुए कहा कि मैं यहाँ क्रिकेट खेलने के लिए हूँ। उस समय प्रिंसिपल को भी भरोसा नहीं हुआ कि उन्‍होंने क्‍या सुना। उन्‍होंने मुझसे इसके बारे में सालों बाद बताया था।”

पहला टेस्ट मैच जीत चुके भारत से साउथ अफ्रीका ने दूसरा मैच जीत लिया है। इस जीत के लिए 188 गेंदों में 10 चौके जड़ने वाले कप्तान डीन ने भारतीय गेंदबाजों की बहुत सारी गेंदें अपने शरीर पर झेली हैं। उन्होंने बताया कि इंडिया के बॉलर लगातार उनको शॉर्ट बॉल फेंक रहे थे, जिससे उन्हें खासा दिक्कतें हो रही थीं।

‘फिरोजपुर के SSP ने PM मोदी के रूट पर किसानों को जाने दिया’: पंजाब सरकार की रिपोर्ट में SSP बठिंडा का आरोप – मीडिया रिपोर्ट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के पंजाब दौरे के समय उनकी सुरक्षा में हुई चूक (PM Security Breach) पर पंजाब सरकार (Punjab Government) ने शुक्रवार (7 जनवरी 2022) को गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) को रिपोर्ट भेज दी। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि यहाँ पर किसानों का प्रदर्शन पूर्वनियोजित नहीं, बल्कि अचनाक हुआ था। इस दौरान पुलिस के बीच आपसी तालमेल की भी कमी रही।

‘आज तक’ ने सूत्रों के हवाले से पंजाब सरकार की रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण बात सामने लाया है। पंजाब सरकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बठिंडा के एसएसपी ने फिरोजपुर के एसएसपी पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। फिरोजपुर के एसएसपी ने अपने क्षेत्र के पीएम मोदी के जाने वाले रूट पर प्रदर्शनकारी किसानों को जाने दिया।

रिपोर्ट में पंजाब सरकार ने यह भी कहा है कि किसानों का विरोध पूर्व निर्धारित नहीं था, यह अचानक हुआ था। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जाँच के लिए सरकार ने एक कमिटी गठित की है। यह रिपोर्ट पीएम की सुरक्षा रूट में लगे सीनियर अधिकारियों से बातचीत के बाद तैयार की गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीएम मोदी के दौरे का पूरे पंजाब में विरोध हो रहा था और इसको देखते हुए पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात किए गए थे।

प्रधानमंत्री की सुरक्षा उल्लंघन की घटनाओं का क्रमवार विवरण वाला रिपोर्ट पंजाब के मुख्य सचिव अनिरुद्ध तिवारी ने सौंपा। रिपोर्ट राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के साथ परामर्श के बाद बनाई गई थी, जो प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रभारी थे। पीएम की सुरक्षा उल्लंघन को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने पंजाब सरकार से इस मसले पर एक रिपोर्ट माँगी थी।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले में पंजाब पुलिस ने 150 अज्ञाल लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। ये एफआईआर आईपीसी की धारा 283 के तहत की गई। इस धारा में प्रावधान है कि अगर कोई भी शख्स सार्वजनिक सड़क (लोक-मार्ग) या जलमार्ग में रुकावट खड़ी करेगा, जिससे वाहन को निकलने में परेशानी उत्पन्न हो; किसी भी सार्वजनिक रास्ते में जाम लगाएगा जिससे व्यक्ति को परेशानी उत्पन्न हो रही हो; किसी भी प्रकार के वाहन या जलयानों के द्वारा सार्वजनिक सड़क या नदियाँ या जल में जाम लगाएगा, जिससे जनसाधारण को दिक्कत उत्पन्न हो, तो उसके ऊपर 200 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 

इससे पहले पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी की सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगी है। CM चन्नी का कहना है कि शुरुआत में पीएम मोदी को हवाई यात्रा करनी थी, लेकिन अंतिम क्षण में यात्रा की योजना बदल दी गई। उन्होंने योजना में बदलाव को ही सुरक्षा में चूक के लिए दोषी ठहरा दिया।

‘मुस्लिमों ने कानून हाथ में ले लिया तो हिंदुओं को भागने की जगह नहीं मिलेगी’: बरेली में तौकीर रजा ने उगला जहर, कहा- हम पैदाइशी लड़ाकू

बरेली में ‘धर्म संसद’ आयोजित कर मुस्लिम धर्म गुरु और आईएमसी के प्रमुख मौलाना तौकीर राज ने हिंदुओं को धमकी दी है। उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित इस्लामिया ग्राउंड में यह संसद बुलाई गई थी, जिसमें तकरीबन 20 हजार मुस्लिम पहुँचे थे। इस दौरान हिंदुओं के खिलाफ जहर ही नहीं उगला गया, बल्कि कोरोना गाइडलाइन की भी जमकर धज्जियाँ उड़ाई गईं। इस दौरान न किसी ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और ना ही किसी के चेहरे पर मास्क दिखा।

इस दौरान भड़काऊ भाषण देते हुए रजा ने कहा कि जिस दिन मुस्लिम कानून हाथ में ले लेंगे, उस दिन हिंदुओं को पूरे देश में कहीं पनाह नहीं मिलेगा। रजा ने कहा, “अगर ये गुस्सा फुट पड़ा, जिस दिन मेरा नौजवान मेरे कंट्रोल से बाहर आ गया उस दिन….. । लोग मुझे कहते हैं कि तुम तो बुजदिल हो गए हो, तो मैं कहता हूँ कि पहले मैं मरूँगा, उसके बाद तुम्हारा नंबर आएगा। मैं अपने हिंदू भाइयों से खासतौर पर कहता हूँ कि मुझे उस वक्त से डर लगता है, जिस दिन मेरा ये नौजवान कानून अपने हाथ में ले लेगा उस दिन हिंदुस्तान में तुम्हें रहने की कहीं जगह नहीं मिलेगी।”

तौकीर रजा ने हिंदुओं को चुनौती देते हुए कहा, “लड़ने का तुम्हें बहुत शौक है, लेकिन तुम लड़ने की बात कर सकते हो, लड़ नहीं सकते हो। लड़ाई तो हमारे खून में है, हम पैदाइशी लड़ाकू हैं।” मौलाना ने कहा कि उनकी बहू-बेटियों को बरगलाने और जाल में फँसाने की बात कही जाती है, और मुस्लिम खून का घूँट पीकर रह जाते हैं।

मौलाना ने कहा कि क्या वह देशप्रेमी हो सकता है, जो अपने ही देश के लोगों (मुस्लिमों) को मारने की बात करे? उन्होंने कहा, “लेकिन हम तुमसे नहीं लड़ना चाहते, क्योंकि तुम हमारे हिंदुस्तानी भाई हो।अगर लड़ना है तो चलो चीन बॉर्डर पर। देखते हैं तुम्हारी बहादुरी। यहाँ बीस हजार नौजवान आए हैं और सिर पर कफन बाँध कर आए हैं अपनी जान देने के लिए। मेरे नौजवानों को थोड़ी सी ट्रेनिंग और थोड़े से हथियार दे दो, हम कैलाश मानसरोवर चीन से ले लेंगे और पाकिस्तान को हिंदुस्तान में मिला लेंगे।”

सिद्धू की पसंद हैं डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, CM चन्नी को किनारे कर उन्हें सौंपी गई थी पंजाब पुलिस की कमान: PM की सुरक्षा चूक के बीच उठे कॉन्ग्रेस पर सवाल

बुधवार (5 जनवरी) को पंजाब पुलिस ने एक बड़ी चूक करते हुए राजनीतिक प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री मोदी के काफिले को रोकने की अनुमति दे दी थी। हुसैनीवाला से करीब 30 किलोमीटर दूर एक फ्लाईओवर पर प्रदर्शनकारियों ने इसे 20 मिनट तक जाम रखा। गृह मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि पीएम का काफिला पंजाब में डीजीपी से आवश्यक पुष्टि के बाद ही रवाना हुआ था और यह घटना पंजाब पुलिस की एक बड़ी चूक थी।

इसे पीएम की सुरक्षा में बड़ी चूक बताते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि पीएम की यात्रा योजना के बारे में राज्य की चन्नी सरकार को काफी पहले ही बता दिया गया था। राज्य सरकार को सुरक्षा, लॉजिस्टिक के लिए आवश्यक व्यवस्था करने और अप्रत्याशित मुद्दों के मामले में एक आकस्मिक योजना तैयार करने को कहा गया था।

वर्तमान में, पंजाब में पुलिस महानिदेशक सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय हैं, जो 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं, जिनकी नियुक्ति को वर्तमान पंजाब कॉन्ग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने आगे बढ़ाया था।

आईपीएस अधिकारी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय की नियुक्ति

पिछले साल 17 दिसंबर को, इकबाल प्रीत सिंह सहोता की जगह चट्टोपाध्याय को कार्यवाहक डीजीपी (पंजाब) बनाया गया था। सिद्धू ने उनकी नियुक्ति का समर्थन किया था। हालाँकि, राज्य के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और गृह मंत्री सुखजिंदर रंधावा ने सहोता का समर्थन किया, लेकिन सिद्धू ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पंजाब में कॉन्ग्रेस मशीनरी को बंधक बना लिया। बाद में उन्होंने इस शर्त के तहत इस्तीफा वापस ले लिया कि कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति के लिए एक पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से आया था।

चट्टोपाध्याय, जो मार्च 2022 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, यूपीएससी द्वारा शॉर्ट-लिस्ट किए गए 3 आईपीएस अधिकारियों के पैनल से एक नियमित डीजीपी की नियुक्ति तक कार्यवाहक डीजीपी का पद संभालेंगे। कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद से सिद्धू चट्टोपाध्याय के नाम पर जोर दे रहे थे। सिद्धू की दबाव की रणनीति के आगे कॉन्ग्रेस सरकार झुक गई।

एक अधिसूचना में, पंजाब सरकार ने घोषणा की, “इकबाल प्रीत सिंह सहोता (पीबी:1988) आईपीएस विशेष डीजीपी सशस्त्र बटालियन, जालंधर,के स्थान पर सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय, आईपीएस (पीबी:1986) डीजीपी, पीएसपीसीएल, पटियाला अपने वर्तमान कर्तव्यों के अलावा पुलिस महानिदेशक, पंजाब (एचओपीएफ) के काम को तब तक देखेंगे जब तक कि पुलिस महानिदेशक के पद पर नई नियुक्ति नहीं हो जाती। पंजाब (HOPF) निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।”

4 जनवरी को आयोजित एक बैठक के दौरान, यूपीएससी ने पंजाब सरकार को 3 आईपीएस अधिकारियों, दिनकर गुप्ता, प्रबोध कुमार और वीरेश कुमार भावरा के एक पैनल की सिफारिश की। यह उल्लेख किया जाना चाहिए कि दिनकर गुप्ता ने 5 अक्टूबर को डीजीपी का पद छोड़ दिया था और इसलिए तिथि को कट ऑफ तिथि माना गया था। मानदंडों के अनुसार, पद के लिए विचार करने के लिए एक अधिकारी के पास 6 महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। यह देखते हुए कि चट्टोपाध्याय इस साल 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उनके नाम पर नियमित डीजीपी पद के लिए विचार नहीं किया गया था।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि चट्टोपाध्याय सेवानिवृत्ति तक अपने पद पर बने रहें, पंजाब कॉन्ग्रेस सरकार ने पहले यूपीएससी को पैनल तय करने के लिए 30 सितंबर को कट-ऑफ तारीख के रूप में विचार करने के लिए कहा था। हालाँकि, UPSC ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और 5 अक्टूबर की कट-ऑफ तारीख का पालन करने का फैसला किया।

पंजाब में नए डीजीपी की नियुक्ति पर कॉन्ग्रेस गुटों की गंदी राजनीति देखने को मिली है। इससे पहले सितंबर में, यह बताया गया था कि चन्नी ने सहोता को डीजीपी के रूप में समर्थन दिया था, लेकिन अंतिम मंजूरी दिल्ली में कॉन्ग्रेस आलाकमान से आनी थी। सिद्धू सहोता के खिलाफ रहे हैं और उन्होंने चट्टोपाध्याय को अपना उम्मीदवार बनाया था।

कॉन्ग्रेस के इरादों पर उठे सवाल

जैसा कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने विभिन्न विरोधाभासी बयानों में खुद को उलझा लिया और पीएम मोदी की सुरक्षा में चूक की इस घटना के बाद उनपर कई सवाल खड़े हो गए, कॉन्ग्रेस पार्टी की मंशा पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं जो वर्तमान में राज्य पर शासन कर रही है।

वहीं कॉन्ग्रेसी भी सुरक्षा उल्लंघन का जश्न मनाते हुए देखे गए, जबकि इसके नेताओं को “हाउ इज द जोश, मोदी जी?” जैसी टिप्पणियाँ पोस्ट करते हुए देखा गया। सोशल मीडिया पर। कॉन्ग्रेस नेताओं को यह शेखी बघारते हुए भी देखा गया कि वे राज्य में पीएम के सार्वजनिक संबोधन को रोकने के लिए नियोजित विरोध और इरादों को पहले से जानते थे। जो कहीं न कहीं एक सुनियोजित साजिश की तरफ इशारा है।

PM मोदी की सुरक्षा चूक मामले में 150 अज्ञात लोगों पर FIR: पंजाब पुलिस ने ‘₹200 जुर्माना’ वाली IPC की धारा में दर्ज किया केस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा चूक मामले में पंजाब पुलिस ने 150 अज्ञाल लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। ये एफआईआर आईपीसी की धारा 283 के तहत की गई। इस धारा में प्रावधान है कि अगर कोई भी शख्स सार्वजनिक सड़क (लोक-मार्ग) या जलमार्ग में रुकावट खड़ी करेगा, जिससे वाहन को निकलने में परेशानी उत्पन्न हो; किसी भी सार्वजनिक रास्ते में जाम लगाएगा जिससे व्यक्ति को परेशानी उत्पन्न हो रही हो; किसी भी प्रकार के वाहन या जलयानों के द्वारा सार्वजनिक सड़क या नदियाँ या जल में जाम लगाएगा, जिससे जनसाधारण को दिक्कत उत्पन्न हो, तो उसके ऊपर 200 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। 

अजीब बात ये है कि एक ओर जहाँ पंजाब पुलिस इस केस को सिर्फ सड़क में पैदा किया गया अवरोध मान रही है, वहीं सेंट्रल एजेंसियाँ इस मामले को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक का गंभीर मामला मानकर अपनी जाँच कर रही हैं। गृह मंत्रालय ने इस संबंध में पंजाब प्रशासन से उस दिन पीएम की सुरक्षा में की गई सभी तैयारियों का विवरण माँगा है।

इस बीच चन्नी सरकार द्वारा की गई एफआईआर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है जिसमें पंजाब पुलिस ने कहीं से कहीं तक सुरक्षा चूक का जिक्र नहीं किया। प्राथमिकी में राजनीतिक दल के कार्यकर्ताओं, प्रदर्शनकारियों या संगठनों की उपस्थिति के कारण पीएम मोदी के काफिले को रोके जाने की बात का भी कोई जिक्र नहीं है।

एफआईआर में पंजाब पुलिस के ही डीएसपी महेंद्र का बयान है। इसमें लिखा है, “फिरोजपुर-मोगा स्थित कृषि भवन मार्ग पर पहुँचने पर मुझे बताया गया कि कुछ अज्ञात लोगों ने उस मार्ग को अवरुद्ध कर दिया है जहाँ वीआईपी की आवाजाही थी। यह लोग रैली में शामिल होना चाहते थे। ये सब करीब 2:30-3:00 बजे हुआ। जब मैं थाने गया तो वहाँ प्रदर्शन हो रहा था।” इस पूरी एफआईआर में कहीं भी किसी किसान यूनियन या संगठन का नाम नहीं है जिन्हें इस घटना के पीछे उत्तरदायी माना जा रहा है और जिनसे संबंधी जानकारी 5 जनवरी से पहले ही साझा की जा चुकी थी।

बता दें कि 5 जनवरी 2022 को पीएम का काफिला फ्लाईओवर पर 15-20 मिनट रुकने का पूरा मामला तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं पंजाब की राज्य सरकार इस पूरे मुद्दे पर घिरती दिख रही है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लगातार बयानों में पलटियाँ मारने के कारण खुद पर सवाल खड़ा करवा लिया है। पहले तो उन्होंने पीएम की सुरक्षा में चूक को कुदरती बताया और फिर ये कह दिया कि कोई लापरवाही हुई ही नहीं। वह ये भी मानने को तैयार नहीं है कि उस दिन पीएम की जान को खतरा था।