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‘हकीकत में हिंदू सबसे अधिक नहीं’: हाई कोर्ट ने ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन’ का जिक्र किया, कहा- आरक्षण के लिए ईसाई भी खुद को बताते हैं हिंदू

देश में लंबे समय से ‘क्रिप्टो क्रिश्चियन (Crypto Christian)’ पर बहस चल रही है। अनुसूचित जाति से आने वाले ये ऐसे लोग होते हैं जो धर्मांतरण कर ईसाई बन जाते हैं, लेकिन आरक्षण का फायदा लेने के लिए खुद को दस्तावेजों में हिंदू बताते रहते हैं। अब मद्रास हाई कोर्ट ने भी इस ओर ध्यान खींचा है। कैथोलिक पादरी जॉर्ज पोन्नैया से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने यह बात कही।

असल में पादरी ने भारत माता और भूमा देवी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसको लेकर उस पर एफआईआर दर्ज की गई। इसे रद्द करने को लेकर उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने उसे राहत देने से इनकार करते हुए अपने फैसले में कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव का भी जिक्र किया। पादरी पोन्नैया ने यहीं हिंदू भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी की थी। 

जस्टिस स्वामीनाथन ने अपने फैसले में इशारा किया कि हकीकत में कन्याकुमारी जिला ईसाई बहुल आबादी में तब्दील हो चुका है। उन्होंने कहा, “धार्मिक तौर पर कन्याकुमारी की जनसांख्यिकी में बदलाव देखा गया है। 1980 के बाद से जिले में हिंदू बहुसंख्यक नहीं रहे। हालाँकि 2011 की जनगणना बताती है कि 48.5 फीसदी आबादी के साथ हिंदू सबसे बड़े धार्मिक समूह हैं। पर यह जमीनी हकीकत से अलग हो सकती है। इस पर गौर किया जाना चाहिए कि बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति के लोग धर्मांतरण कर ईसाई बन चुके हैं, लेकिन आरक्षण का लाभ पाने के लिए खुद को हिंदू बताते रहते हैं।”

हाई कोर्ट ने कहा कि पादरी के टिप्पणियों पर गौर करने के बाद उसकी मंशा स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। इसका मकसद हिंदुओं को निशाना है। एक पाले में हिंदुओं और दूसरे में ईसाई तथा मुस्लिमों को खड़ाकर उसने एक समूह को दूसरे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिश की। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा, “याचिकाकर्ता ने भाषण में बार-बार हिंदू समुदाय को नीचा दिखाया है। उसके शब्द पर्याप्त रूप से उत्तेजक हैं।”

पादरी जॉर्ज पोन्नैया के खिलाफ कार्रवाई का कारण

गौरतलब है कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी में रोमन कैथोलिक पादरी जॉर्ज धार्मिक समूहों के बीच नफरत और दुश्मनी फैलाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, डीएमके नेता एवं अन्य के खिलाफ विवादित टिप्पणी करने के आरोप में पिछले साल चर्चा में आया थे। उसने कहा था कि विधानसभा चुनाव में द्रमुक की जीत ‘ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा दी गई भीख’ थी। उसने हिंदू धर्म, PM मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के बारे में भी अपमानजनक टिप्पणी की थी। पीएम के लिए उसने कहा था, “नरेंद्र मोदी का आखिरी दिन सबसे दयनीय होगा। मैं लिखकर दे सकता हूँ। अगर जिन भगवान को हम पूजते हैं वो सच में जिंदा हैं तो इतिहास देखेगा कि मोदी और अमित शाह के सड़े शरीर को कुत्ते और कीड़े खाएँगे।”

इसी दौरान पादरी ने नागरकोली के भाजपा विधायक एम आर गाँधी पर तंज कसते हुए कहा था, “वो इसलिए चप्पल नहीं पहनते क्योंकि वो भारत माता को दर्द नहीं देना चाहते और हम लोग इसलिए चप्पल पहनते हैं ताकि हमारे पैर गंदे न हों और भारत माता के कारण हमें कोई बीमारी न हो।” पादरी का बयान वायरल होने के बाद मामले में भाजपा सहित कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, अरुमनई पुलिस ने उस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए, 295 ए, 505 (ii) और 506 (i) के तहत मामला दर्ज किया। इसके अलावा पादरी पर आईपीसी की धारा 269 और 143 व महामारी रोग अधिनियम की धारा 3 के तहत बैठक आयोजित करने, प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के लिए भी मामला दर्ज किया गया था।

बँटवारे पर रिटायर्ड IPS की पोस्ट, एसोसिएशन ने किया वाट्सऐप ग्रुप से बाहर, अधिकारी ने कहा- ‘क्या हम इतिहास में हुई गलतियों पर मंथन भी नहीं कर सकते?’

मध्य प्रदेश कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी मैथलीशरण गुप्त को आईपीएस एसोसिशएशन ने व्हाट्सएप ग्रुप से रिमूव कर दिया है। ऐसा उनके द्वारा भारत-पाकिस्तान बँटवारे को ले कर एक पोस्ट करने पर किया गया है। यह मामला 7 जनवरी (शुक्रवार) का है। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें जब पोस्ट डिलीट करने को कहा गया तो उन्होंने इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित बताते हुए हटाने से मना कर दिया। ऑपइंडिया ने IPS मैथलीशरण से सम्पर्क किया और उनसे इस मामले की विस्तार से जानकारी ली।

व्हाट्सएप ग्रुपों में रहना या निकलना किसी और के लिए बड़ी बात होगी, मेरे लिए नहीं

ऑपइंडिया ने IPS मैथलीशरण से इस मामले में बातचीत की। उन्होंने बताया, “मैं सत्य बोलने से नहीं हिचकिचाता। मुझे किसी ग्रुप में रहने की कोई शौक नहीं है। मुझे हटाने या जोड़ने वालों को मेरा संदेश है कि मेरे लिए इन बातों का कोई महत्व नहीं है। मैं अपने समय को इन छोटी बातों में गँवाना नहीं चाहता। हो सकता है कि कुछ लोगों के लिए व्हाट्सएप ग्रुपों में जुड़ना या निकलना बड़ी बात होगी। मैंने उस पोस्ट को आज ही शेयर किया था। उसके बाद मैंने उसका फॉलोअप नहीं लिया। मेरे रिमूव होने के बाद किस ने क्या बोला इस तरफ मैंने ध्यान ही नहीं दिया। वो पोस्ट मेरी नहीं बल्कि प्रखर श्रीवास्तव की रिपोर्ट थी जिसको मेरा बताया जा रहा है।”

ऑपइंडिया से आगे बातचीत में 1984 बैच के रिटायर्ड IPS अधिकारी गुप्त ने बताया, “इस देश की समस्याओं पर चिंतन करना कब से गलत हो गया। क्या हम इतिहास में हुई गलतियों पर मंथन भी नहीं कर सकते? जब देश में आपराधिक छवि के कानून निर्माताओं को संसद भेजा जा सकता है तो सरकारी अधिकारी पर इतने नियम कानून क्यों? मैं पुलिस रिफॉर्म विभाग को देख चुका हूँ। मैं जो कुछ भी कहता हूँ वो जमीनी हकीकत होती है। मैं कश्मीर में लगभग 2 वर्ष तक CRPF का IG ऑपरेशन पद सँभाल चुका हूँ। कई आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा रह चुका हूँ। मैंने देश की समस्याओं को हर हिस्से से समझने और जानने का प्रयास किया है।”

वो पोस्ट जिसके बाद IPS मैथलीशरण को ग्रुप से रिमूव किया गया

“मुस्लिम लीग उन स्थानों से जीती थी जो आज हिंदुस्तान का हिस्सा है और यह सब लोग (मुस्लिम) पाकिस्तान जाने की बजाय यहीं रह गए यदि इन्हें हिन्दुस्तान प्रिय था तो पाकिस्तान बनाने में क्यों वोट डाले। हमारे दुष्ट काले अंग्रेजों ने उन्हें यहीं रह जाने दिया और उन्हें हमारे सिर पर बिठाया। उन्हें कानून में हमसे ज्यादा अधिकार दिए, यही राजनैतिक दुष्टता हमारी समस्याओं की जड़ है। उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया। उन्होंने तुम्हारा इतिहास ही बदल दिया, हम कितने नादान है समझो व जागो।”

“…काले अंग्रेजों की सोच बदलकर उन्हें जनहित के निर्णयों के लिए विवश करें। संविधान एवं नियम कानूनों को जनतांत्रिक भावनाओं के अनुरूप बनाएँ, ब्यूरोक्रेसी को संवेदनशील उत्तरदायी, व सही अर्थों में जनसेवक बनाया जाए। इसी तरह की कुछ बातों के साथ उन्होंने ग्रुप में एक वीडियो लिंक भी शेयर किया था

फरवरी 2020 के दौरान कमलनाथ सरकार में भी IPS गुप्त की सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट वायरल हुई थी। तब उन्होंने लिखा था, “मैं इतनी क्षमता रखता हूँ कि इस व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव ला सकता हूँ। मैं अपने आप को पीड़ित नहीं दिखाना चाहता, सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि मैं राज्य में पुलिसिंग का नेतृत्व करने की क्षमता रखता हूँ।” यह पोस्ट DGP पद के लिए चल रहे अधिकारियों के खींचतान के संदर्भ में लिखी गई थी।

पंजाब में सतलुज नदी से पाकिस्तानी नाव मिलने से गहराया PM मोदी का सुरक्षा मामला, मनीष तिवारी ने कहा- पाकिस्तानी रेंज में थे PM, भठिंडा SSP को नोटिस

पंजाब (Punjab) के फिरोजपुर जिले (Firozepur District) में पाकिस्तानी नाव (Pakistani boat) की बरामदगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की सुरक्षा में हुई चूक के मामले को और गंभीर बना दिया है। सीमा सुरक्षा बल (Border Security Force) ने सतलुज नदी (Sutlej River) से इस नाव को बरामद किया है। यह नदी पंजाब में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर बहती है। कई स्थानों पर सतलुज दोनों देशों की सीमा में प्रवेश करती है।

सतलुज नदी में किनारे मिली यह नाव पूरी तरह से खाली थी। इसमें से कुछ बरामद भी नहीं हुआ। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस नाव पर कौन लोग सवार थे और वे कहाँ गए। फिरोजपुर जिले के जिस इलाके में इस नाव को बरामद किया गया है, उसी के पास बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला फँसा था। यह जगह पाकिस्तान सीमा से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर है। इस क्षेत्र में कई बार टिफिन बम और विस्फोटक बरामद किए जा चुके हैं।

इधर, शुक्रवार (7 जनवरी 2022) को केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से गठित तीन सदस्यीय जाँच टीम मौके पर पहुँची है। केंद्र की इस टीम ने फिरोजपुर पहुँचकर अपनी जाँच शुरू कर दी है। ये टीम सबसे पहले फिरोजपुर-मोगा हाईवे पर बने उस फ्लाईओवर पर पहुँची, जहाँ पर पीएम मोदी के काफिले को रोका गया था। कमेटी ने पंजाब पुलिस प्रमुख (डीजीपी) सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय सहित 13 अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया है।

पैनल का नेतृत्व कैबिनेट सचिवालय में सचिव (सुरक्षा) सुधीर कुमार सक्सेना कर रहे हैं। इसके अन्य सदस्य इंटेलिजेंस ब्यूरो के संयुक्त निदेशक बलबीर सिंह और विशेष सुरक्षा समूह आईजी एस सुरेश हैं। वहीं, केंद्र ने भठिंडा के SSP को नोटिस जारी कर एक दिन के भीतर जवाब माँगा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने आठ जनवरी की शाम 5 बजे तक जवाब देने के लिए कहा है कि पीएम की सुरक्षा में हुई चूक को लेकर उन पर क्यों नहीं कार्रवाई की जाए।

इसके अलावा, यह बात भी सामने आई है कि जिस जगह पर पीएम का काफिला फँसा था, वह पाकिस्तानी सेना की फायरिंग रेंज में था। यह बात कॉन्ग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कही है। उन्होंने कहा कि जहाँ पर उनका काफिला रुका था, वो भारत की सरहद से महज 10 किमी दूर है। वहाँ पर भारत और पाकिस्तानी के तोपखाने तैनात रहते हैं। ऐसे मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की तुलना किसी आम नागरिक से करना सही नहीं है। यह स्वीकार करना चाहिए कि पीएम मोदी की जान को खतरा था।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जनवरी को रैली करने के लिए फिरोजपुर दौरे पर थे, लेकिन आंदोलनकारी किसानों ने उनके काफिले को बीच रास्ते में रोक दिया था। इसके बाद यह बात भी आरोप लग रहे हैं कि पंजाब सरकार ने द्वारा ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूट की जानकारी लीक की गई थी।

‘हिंदुओं के लिए इससे अधिक अपमानजनक कुछ नहीं’: जिस पादरी ने ‘भारत माता’ पर किए आपत्तिजनक कमेंट उसे राहत से हाई कोर्ट का इनकार

‘भारत माता’ और ‘भूमा देवी’ के विरुद्ध बोले गए अपमानजनक शब्दों के मामले में ईसाई पादरी जॉर्ज पोन्नैया के खिलाफ़ हुई एफआईआर रद्द करने से मद्रास हाई कोर्ट ने साफ मना कर दिया है। पादरी पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने के आरोप में आईपीसी धारा 295-ए के तहत मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद उसे 18 जुलाई 2021 को हिरासत में लिया गया। कुछ दिन पहले उसने सीपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर रद्द करने की माँग की। अब इसी मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये राहत देने से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन ने याचिका के संबंध में कहा, “याचिकाकर्ता ने धरती माँ के सम्मान में नंगे पैर चलने वालों का मजाक उड़ाया। उन्होंने कहा कि ईसाई जूते पहनते हैं ताकि उन्हें खुजली न हो। उन्होंने भूमा देवी और भारत माँ को संक्रमण और गंदगी के स्रोत के रूप में दिखाया। हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने के लिए इससे अधिक अपमानजनक कुछ नहीं हो सकता।”

जस्टिस स्वामीनाथन ने भी माना, “धारा 295-ए लगती है जब भी नागरिकों की किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाई जाती है। अगर अपमानजनक शब्दों ने कुछ हिंदुओं की भी भावना को आहत किया है तो भी ये दंडात्मक प्रावधान लागू होगा।” जज ने माना कि भूमा देवी हिंदू मान्यताओं के अनुसार देवी मानी गई हैं और उन पर ऐसी टिप्पणी, हिंदुओं के लिए अपमानजनक है।

फैसला सुनाते हुए कहा गया, “भारत माता से बहुत बड़ी संख्या में हिंदुओं की भावना जुड़ी हुई है। उन्हें अक्सर राष्ट्रीय ध्वज के साथ शेर की सवारी करते दर्शाया जाता है। वो कई हिंदुओं के लिए देवी हैं। भारत माता और भूमा देवी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करके याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धारा 295 एक तहत अपराध किया है।”

आनंद मठ में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित कविता वंदे मातरम से पंक्ति लेकर फैसला सुनाने की शुरूआत हुई, क्योंकि इसमें राष्ट्र को देवी माँ के बराबर रखा गया है। इसके बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता की हर दलील को नकारा। एक जगह तो उसने खुद को सही दिखाने के लिए डॉ अंबेडकर का भी उदाहरण दिया था जहाँ वह हिंदू धर्म की आलोचना करते थे। कोर्ट ने कहा कि ये सब कुछ ज्यादा ही हो गया।

कोर्ट ने माना कि किसी को इस तरह किसी की भावनाओं का ठेस पहुँचाने का अधिकार नहीं हैं। इसके अलावा पादरी के भाषण को आईपीसी की धारा 153 एक तहत सांप्रदायिकता फैलाने वाला पाया। जस्टिस ने कहा कि पादरी के निशाने पर हिंदू ही थे। वह हिंदुओं को अलग और मुस्लिम व ईसाइयों को अलग रख रहा था। स्पष्ट तौर पर ये एक समुदाय को दूसरे के विरुद्ध भड़काना था। और ये सब धर्म के आधार पर हो रहा था। याचिकाकर्ता ने लगातार हिंदू धर्म को नीचा दिखाया और इस्तेमाल किए गए शब्द भड़काऊ थे। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस ने धर्मांतरण का मुद्दा उठाया और पादरी के विरुद्ध मामले को आईपीसी की धारा 295ए, 153 ए, 505ए के तहत जस का तस रखा, लेकिन धारा 143, 269, 506 (1) और महामारी अधिनियम, 1897 की धारा 3 को केस से हटा दिया गया।

गौरतलब है कि कन्याकुमारी के अरुमनई में 18 जुलाई 2021 को आयोजित एक सभा में ‘जनन्याग क्रिस्थुवा पेरवई अमाईपु’ नामक NGO के सलाहकार व ईसाई पादरी जॉर्ज पोन्नैया (George Ponniah) की हिंदू विरोधी टिप्पणी ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी थी। उनके भाषण की वीडियो वायरल होने के बाद से पूरे तमिलनाडु में उन पर 30 शिकायतें दर्ज हुई थीं। उन पर आरोप था कि उन्होंने भारत माता को अपशब्द कहे और देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए भी आपत्तिजनक बातें कहीं।

पूजा गुप्ता ने हेयर ड्रेसर जावेद हबीब की माफी को बताया ड्रामा, कहा- फिल्मी स्टाइल माफी मंजूर नहीं

थूक लगाकर बाल काटने को लेकर विवादों में घिरे मशहूर ब्यूटीशियन और हेयर डिजाइनर जावेद हबीब की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद अब पीड़िता पूजा गुप्ता ने कहा कि उन्हें जावेद हबीब की माफी कबूल नहीं है। उन्होंने हबीब के माफी माँगने के अंदाज को फिल्मी ड्रामा बताया और कहा कि वे हबीब को सजा दिलाकर रहेंगी।

पूजा ने कहा कि वह जावेद हबीब को बताएँगी कि मंच पर एक महिला का अपमान करने की क्या सजा होती है, ताकि भविष्य में वह किसी भी महिला का इस तरह अपमान न कर सकें। बता दें कि महिला ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी की है। उन्होंने मुख्यमंत्री पोर्टल पर इसकी शिकायत दर्ज करवाई है, जिसके बाद मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने जावेद को 11 जनवरी को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा है। इससे पहले राष्ट्रीय महिला आयोग ने जावेद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उत्तर प्रदेश के डीजीपी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

गौरतलब है कि हबीब का बालों में थूकने वाला वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी बॉयकॉट की अपील की जा रही है। वीडियो में हबीब कुर्सी पर बैठी एक महिला के बालों को सेट कर रहे हैं। इस दौरान वो महिला के बालों को गंदा बताते हुए शैम्पू करने के लिए कहा। इसी क्रम में वो पानी कम होने की बात करते हुए महिला के बालों पर थूक देते हैं। साथ ही कहते हैं, “इस थूक में जान है।” इस दौरान वहाँ मौजूद तमाम लोग तालियाँ बजाते हुए हँस रहे हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद पूजा गुप्ता ने बताया, “मैं बड़ौत की रहने वाली हूँ। मैं एक पॉर्लर चलाती हूँ। मैं जावेद हबीब के सेमिनार में गई थी। उन्होंने ही मुझे मंच पर बाल काटने के लिए बुलाया था। इस दौरान उन्होंने मेरे साथ बदतमीजी की। यह दिखाने की कोशिश की कि अगर आपके पास पानी न हो तो थूक से भी हेयर कट करवा सकते हो। मैं अपने गली के नाई से बाल कटवा लूँगी पर जावेद हबीब से कभी नहीं।”

वीडियो वायरल होने पर हबीब ने सफाई देते हुए इस घटना को लेकर माफी माँगी। हालाँकि, माफी माँगने का यह अंदाज बहुत लोगों को पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा, “मेरे सेमिनार में हुए कुछ वर्ड को लेकर, कुछ लोगों को कुछ ठेस पहुँची है। एक ही बात बोलना चाहूँगा- हमारी जो सेमिनार होते हैं ना, ये प्रोफेशनल सेमिनार हैं। मतलब जो लोग हमारे प्रोफेशनल के अंदर काम करते हैं। हमारे लंबे शो होते हैं। लंबे शो जब होते हैं तो हमें थोड़ा ह्यूमरस बनाना होता है। पर क्या बोलूँ… एक ही बार बोलता हूँ और दिल से बोलता हूँ- अगर सच्ची में आपको ठेस पहुँची है, हर्ट हुए हैं तो माफ करो ना… सॉरी… दिल से… माफी माँगता हूँ।”

उस BJP नेता पर केस जिसने अजित पवार को ‘पेशाब’ वाला बयान याद दिलाया, CM उद्धव की पत्नी को ‘राबड़ी देवी’ बताया

महाराष्ट्र बीजेपी के सोशल मीडिया सेल के नेता जितेन गजरिया (Jiten Gajaria) के खिलाफ पुणे पुलिस ने केस दर्ज किया है। यह केस महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे (Rashmi Thackeray) और NCP प्रमुख शरद पवार (Sharad Pawar) के भतीजे अजित पवार ((Ajit Pawar) के खिलाफ कथित आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर दर्ज किया गया है। एक दिन पहले मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने बिना किसी कानूनी नोटिस या वॉरंट के गजरिया को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला पुणे के साइबर सेल द्वारा दर्ज किया गया है। ANI की रिपोर्ट में कहा गया है कि पुणे पुलिस गजरिया को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई जा रही है। वहीं, पुणे के एक पत्रकार ने ट्वीट किया है कि स्थानीय पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए मुंबई में गजरिया के आवास पर पहुँची थी, लेकिन वह वहाँ पर नहीं मिले।

बीजेपी मुंबई के सोशल मीडिया प्रभारी और सचिव प्रतीक करपे ने ट्विटर पर बताया कि पुणे पुलिस की टीम ने सुबह 1 बजे जितेन गजरिया के घर पर छापा मारा था।

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि गजरिया दलबदलू हैं, जो अब महाराष्ट्र की महिलाओं पर अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं। पेडनेकर ने ANI से कहा, “कौन हैं जितेन गजरिया? वह कँगारू की तरह राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में कूद गए हैं और आज वह महाराष्ट्र की महिलाओं के बारे में, रश्मि भाभी के बारे में इस तरह की अपमानजनक टिप्पणी कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “रश्मि भाभी, जिन्हें हम बालासाहेब ठाकरे की बहू, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की पत्नी और आदित्य ठाकरे की माँ के रूप में जानते हैं, को घसीटने का क्या कारण हो सकता है। बालासाहेब ठाकरे ने खुद भाजपा का हाथ पकड़कर पार्टी को खड़ा किया और राजनीति में बड़ा किया और आज वे उनकी बहू के खिलाफ ही अपशब्द कह रहे हैं। इतना अभिमान कहाँ से आया? मैं चुनौती देती हूँ कि अगर यह गजरिया हमारे सामने आता है तो शिवसेना की महिला आघाड़ी उसे देख लेगी।”

जितेन गजरिया के खिलाफ उनके द्वारा किए गए दो ट्वीट को लेकर कार्रवाई की गई है। पहला ट्वीट 4 जनवरी 2022 का है, जिसमें गजरिया ने सीएम उद्धव ठाकरे की पत्नी रश्मि ठाकरे को ‘महाराष्ट्र की राबड़ी देवी‘ करार दिया था।

वहीं, अपने दूसरे ट्वीट में गजरिया ने रश्मि ठाकरे और अजित पवार पर तंज कसा है। उन्होंने इसके लिए 2013 में महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों द्वारा की जा रही भूख हड़ताल का मजाक उड़ाने वाले अजित पवार का हवाला दिया। उस दौरान सूखे पर बात करते हुए अजित पवार ने कहा था, “हम उनके लिए कहाँ से पानी लाएँ? हम बाँधों में पेशाब कर दें?”

गजरिया ने अजित पवार के इसी असंवेदनशील बयान का मराठी में मजाक किया था। उनके ट्वीट का हिंदी में अनुवाद कुछ इस प्रकार है, “अगर रश्मि सरकार चला रही होतीं तो क्या मैं सिर्फ पेशाब करने के लिए डिप्टी सीएम बन जाता? – @AjitPawarSpeaks to @OfficeofUT”।

रॉ अफसर की बेटी ने ‘कश्मीर’ पर लिखी किताब, लिबरलों को नहीं आई रास: अमेरिकी यूनिवर्सिटी ने भी साइबा वर्मा से पल्ला झाड़ा

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के क्रिटिकल जेंडर स्टडीज प्रोग्राम ने डॉ. साईबा वर्मा से यह कहते हुए खुद को अलग कर लिया है कि उन्होंने अपने शोध में एक गंभीर नैतिक और राजनीतिक उल्लंघन किया था। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर और एक पूर्व सीजीएस कार्यकारी समिति के सदस्य और फैकल्टी एफिलिएट साइबा वर्मा की किताब का नाम द ऑक्युपाइड क्लिनिक: मिलिटेरिज्म एंड केयर इन कश्मीर है।

कश्मीर पर डॉ साइबा वर्मा की किताब एक बड़े विवाद के केंद्र में है, यह सब तब सामने आया जब यह पता चला कि उनके पिता भारत की खुफिया एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक अधिकारी थे, जो 90 के दशक में घाटी में तैनात थे। यह बात जब से सामने आई है सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रिया आ रही है। जहाँ एक तरफ डॉ साइबा वर्मा के लिए कहा जा रहा है कि उन्होंने अमेरिका में खुद को लिबरल के रूप में स्थापित करने की तमाम कोशिश की लेकिन जैसे ही उनके पहचान जाहिर होती है कि उनके पिता रॉ से जुड़े थे वैसे ही लिबरल उनकी तमाम योग्यताओं को ख़ारिज करते हुए उन्हें अपने गैंग से बाहर कर देते हैं।

डॉ साइबा वर्मा पर पब्लिश एक रिपोर्ट साझा करते हुए फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने टिप्पणी की कि यह एक बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति की तरफ इशारा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “कश्मीर के एक रॉ अधिकारी की बेटी, एक लिबरल अमेरिकी विश्वविद्यालय में जेहादियों को खुश करके पश्चिमी सिपाही बनने की कोशिश करती है। अपने ही लोगों को धोखा देती है और भारत के दुश्मनों और जेहादियों के प्रति सहानुभूति रखती है। फिर भी जेहादी शिक्षाविदों द्वारा उन्हें ख़ारिज कर दिया जाता है।”

मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया जा रहा है कि डॉ साईबा वर्मा की पिछले साल सितंबर में उनकी पुस्तक द ऑक्युपाइड क्लिनिक: मिलिटेरिज्म एंड केयर इन कश्मीर के सामने आने के बाद से ही उनकी कड़ी आलोचना हुई थी। जब एक गुमनाम ट्वीट ने उनकी पहचान जाहिर कर दी थी। तब उन पर कश्मीरी लोगों को धोखा देकर उनसे जानकारी हासिल करने का भी आरोप लगा था। साथ ही इसे शोध की दृष्टि से अनैतिक करार देते हुए कई तरह की बातें सामने आई थी।

पुस्तक के परिचय में ही लेखिका डॉ साइबा लिखती हैं कि ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से तकनीकों को उधार लेकर उन्हें विस्तार देते हुए, भारतीय राज्य ने आपातकालीन नियम और कानून की दुनिया की सबसे स्थापित, परिष्कृत और व्यापक प्रणाली को लागू किया और बार-बार स्वतंत्रता-समर्थक माँगों को ‘साजिश’ और ‘राष्ट्र-विरोधी’ के रूप में अपराध की तरह प्रचारित किया। उनका कहना है कि ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र’ के रूप में भारतीय राज्य की वैश्विक छवि ने कश्मीर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी सैन्य ज्यादतियों को छिपाने में मदद की है। इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी।

डॉ साइबा वर्मा ने एक ट्वीट में कहा, “मैंने जो शोध किया है, उस पर मेरे पिता का कोई सीधा असर नहीं था। इस संबंध को स्वीकार करने की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए, हालांकि, अपने फील्डवर्क के दौरान मैंने इसे कश्मीरी विद्वानों और पत्रकारों के सामने प्रकट किया, जिनके मैं करीब थी। मेरे नैतिक आचरण और विद्वानों के तर्क उनके प्रति जवाबदेह हैं।”

“अपनी पुस्तक में, मैंने लिखा है: “जैसा कि स्टुअर्ट हॉल ने एक बार कहा था, कोई भी डिस्कोर्स तटस्थ नहीं है … मेरे सहित भारतीय मूल के किसी भी विद्वान के लिए, कश्मीर के साथ जुड़ने का कोई तटस्थ तरीका नहीं है।”

शोध के नाम पर ऐसी ही कई बातों से उनकी किताब भरी पड़ी है। उन्होंने अमेरिका में खुद को लिबरल जमात के बीच एक लिबरल के रूप में स्थापित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने अपनी सफाई में ऐसी कई दलीलें दी कि वह जीवनभर मुस्लिम विरोधी जातिवादी मानसिकता के खिलाफ लड़ती रही हैं लेकिन जैसे ही उनकी पहचान जाहिर होती है उनके लिए मामला उल्टा पद जाता है और उनके शोध पर ही सवालिया निशान लग जाता है। उन पर कश्मीर में शोध करते हुए अपने पारिवारिक संबंधों को छिपाने का आरोप लगाया गया था। लेखिका के पिता रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के अधिकारी थे, जो 90 के दशक में घाटी में तैनात थे, ने उनके किताब और शोध को लेकर एक ट्विटर तूफान खड़ा कर दिया।

लिबरलों की इसी बदले की कार्रवाई की तरफ ध्यान दिलाते हुए प्रत्याशा रथ ने भी अपने ट्वीट में कहा, “ओह! यहाँ थोड़े में सभी चिंताओं और शब्दजाल को बनाए रखना मुश्किल है। भारतीय विद्वान जो पहले से ही कश्मीर पर अपने काम के लिए अलगाववादी वैश्विक दृष्टिकोण का प्रयोग करते हुए अपनी किताब लिखती हैं, फिर भी अन्य विद्वानों द्वारा सिर्फ इसलिए उन्हें रद्द कर दिया जाता है क्योंकि उनके पिता एक रॉ अधिकारी थे।”

अपने बचाव में लेखिका साईबा वर्मा ने कहा था, “एक गुमनाम ट्विटर अकाउंट भारत में मेरे पिता की पूर्व स्थिति के आधार पर मेरे शोध पर हमला कर रहा है। मेरे पिता ने सुरक्षा एजेंसी रॉ के लिए काम किया। जब मैं 10 साल की थी तब वह कश्मीर में थे। मेरा काम कश्मीर में अतीत और वर्तमान के सभी ‘आतंकवाद विरोधी’ को अस्वीकार करता है।

‘इस्लामी आतंकी संगठनों-खालिस्तानियों से PM मोदी को खतरा, सड़क किया जा सकता है ब्लॉक’: 3 दिन पहले ही पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार को बताया, पर नहीं दिया ध्यान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में हुई चूक के बाद लगातार पंजाब सरकार का गैर-जिम्मेदाराना रवैया सामने आ रहा है। घटना के दो दिन बाद ही ये बात भी पता चल गई है कि खुफिया एजेंसियों ने पंजाब सरकार को ऐसे खतरे या सड़क ब्लॉक के बारे में 3 दिन पहले ही बता दिया था। 

एजेंसी की रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा गया था कि पीएम को लश्कर-ए-तैयबा, इंडियन मुजाहिद्दीन, सिमी, जैश-ए-मोहम्मद जैसे तमाम इस्लामी आतंकी संगठनों से गंभीर खतरा है। इसके अलावा यह भी दावा किया गया था कि पाकिस्तान में रहने वाले खालिस्तानी आतंकी वाधवा सिंह बब्बर, परमजीत सिंह पंजावर, रणजीत सिंह नीता, लखबीर सिंह रोढ़े पंजाब में दोबारा से आतंकवाद को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके निशाने पर चुनाव के समय वीआईपी लोग होंगे।

रिपोर्ट में ‘सिख फॉर जस्टिस’ के संस्थापक गुरपतवंत सिंह के भड़काऊ बयानों का भी जिक्र था जिसमें वह सिखों को बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ भड़का रहा था। इतना ही नहीं, खुफिया एजेंसियों ने इस बात को भी गौर करवाया था कि पीएम की फिरोजपुर रैली जहाँ होगी वो जगह सीमा से 14 से 15 किमी की हवाई दूरी पर हैं।

नोट में कृषि कानूनों पर भड़काए गए किसानों के बिंदु को भी उजागर किया गया। इसमें बताया गया कि भले ही कृषि कानून वापस हो गए, लेकिन एमएसपी जैसे मुद्दों पर अंतोष अभ भी बना हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा ने भी ऐलान किया था कि वो 5 जनवरी को घेराव करने का ऐलान किया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुरक्षा दस्ते के साथ बुधवार (5 जनवरी 2022) को फिरोजपुर में रैली के लिए सड़क मार्ग से जाते वक्त फ्लाईओवर पर कुछ कथित प्रदर्शनकारियों के कारण 15-20 मिनट रुकना पड़ा था। इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक का बड़ा मामला माना गया। बाद में पीएम फिरोजपुर पहुँचे बिना ही बठिंडा एयरपोर्ट वापस लौट गए और एयरपोर्ट के अधिकारियों को कहा कि वो अपने सीएम को धन्यवाद बोलें कि वो एयरपोर्ट जिंदा लौट पाए।

अब इस मामले में गृह मंत्रालय की एक टीम पंजाब पुलिस द्वारा की गई तैनाती, पहरे पर तैनात पुलिसकर्मी, छत पर तैनाती, बैरिकेड्स और अन्य सुरक्षा उपायों का विवरण माँग रही है। गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के बारे में खुफिया जानकारी होने के बाद भी पंजाब पुलिस ने ‘ब्लू बुक’ का पालन नहीं किया।

उन्होंने कहा कि पीएम की यात्रा के दौरान पंजाब में तैयार हुई जैसी किसी विपरीत स्थिति के लिए ब्लू बुक के हिसाब से राज्य की पुलिस को सुरक्षा हासिल व्यक्ति के लिए आकस्मिक रास्ता तैयार करना पड़ता है। लेकिन पंजाब पुलिस ने पीएम की यात्रा के दौरान आकस्मिक मार्ग तैयार नहीं किया था।

बता दें कि पीएम की सुरक्षा में हुई चूक मामले में चल रही जाँच के बीच एक एनिमेटेड वीडियो भी सोशल मीडिया पर देखने को मिला है। जिसमें पंजाब में 5 जनवरी को जो हुआ वैसा ही सब देखने को मिल रहा रहा है। खालिस्तानियों द्वारा बनाया गया यह एनिमेटेड वीडियो करीब साल भर पुराना है। इसमें किसानों को फ्लाईओवर पर प्रधानमंत्री को घेरते और नीचे फेंकते दिखाया गया है।

निचली अदालत ने ‘मूर्ति’ को वेरीफिकेशन के लिए अदालत में बुलाया, नाराज मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- भगवान हैं, दिव्यता प्रभावित ना हो

तमिलनाडु की एक निचली अदालत द्वारा निरीक्षण के लिए भगवान को अदालत में पेश होने के निर्देश पर मद्रास हाईकोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त किया है। निचली अदालत के आदेश पर उसकी खिंचाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि क्या भगवान की मूर्ति को निरीक्षण के लिए पेश करने का आदेश दे सकती है। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आर सुरेश कुमार ने कहा कि इस प्रतिमा को सत्यापित करने के लिए न्यायाधीश अधिवक्ता-आयुक्त नियुक्त कर सकते थे और निष्कर्ष तय कर सकते थे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि मूर्ति (भगवान) को अदालत में पेश करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि लोगों की मान्यताओं के अनुसार ये भगवान हैं और भगवान को न्यायालय में केवल निरीक्षण या सत्यापन के लिए अदालत में पेश होने के लिए नहीं बुलाया जा सकता। न्यायमूर्ति ने कहा कि न्यायिक अधिकारी मूर्ति की दिव्यता को प्रभावित और भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुँचाए बिना ये काम कर सकते थे।

मामला तिरुपुर जिले के कुंभकोणम का है। यहाँ की अदालत ने मूर्ति को सत्यापित करने के लिए सिविरिपलयम के परमशिवन स्वामी मंदिर के अधिकारियों को ‘मूलवर’ (अधिष्ठातृ देवता) की मूर्ति को अदालत में पेश करने का आदेश दिया था। मूलवर की यह मूर्ति चोरी हो गई थी और बाद में पता लगाकर उसे अनुष्ठानों और ‘अगम’ के नियमों के तहत उसे पुन: प्राण-प्रतिष्ठित किया गया था।  

निचली अदालत के इस आदेश पर मंदिर के अधिकारियों ने कहा था कि स्थापित किए गए मूलवर को अदालत में पेश करने के लिए उन्हें फिर से हटाना पड़ेगा। इसको लेकर मंदिर के अधिकारियों ने निचली अदालत के आदेश को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने यह बात की।

याचिका में कहा गया है कि परमशिवम स्वामी की इस प्राचीन मंदिर से विग्रह (मूर्ति) चोरी हो गई थी। बाद में इसे पुलिस ने बरामद कर लिया और बाद में कुंभकोणम की संबंधित अदालत में इसे पेश किया। बाद में इसे मंदिर के अधिकारियों को सौंप दिया गया। मंदिर के अधिकारियों ने पूरे विधि-विधान से इस प्रतिमा को स्थापित किया और बाद में कुंभाभिषेक भी किया गया। अब बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं अन्य श्रद्धालु इसकी पूजा करते हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, मूर्ति चोरी से संबंधित मामले को देख रहे न्यायिक अधिकारी ने 6 जनवरी 2022 को जाँच पूरी करने के लिए ‘मूलवर’ को निरीक्षण के लिए अदालत में पेश करने का निर्देश दिया। मंदिर के अधिकारी जब प्रतिमा को हटाने लगे तो लोगों ने इसका विरोध किया और एक याचिका मद्रास हाईकोर्ट में दायर की गई।

दिल्ली में 2 आलू के बदले सफरदजंग अस्पताल में काम करने वाले अनिल की हत्या: महताब ने पहले बाट से मारा, फिर साथियों संग पेट में घोंपा चाकू

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में काम करने वाले अनिल की 6 जनवरी 2022 (गुरुवार) की शाम हत्या कर दी गई। शिकायत के मुताबिक उसने महताब की रेहड़ी से आलू उठा लिए थे, जिसकी वजह से उसकी चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। घटना जहांगीरपुरी थाना क्षेत्र के पार्क रोड की है। महताब के अलावा शादाब, अरशद उर्फ़ मक्खी, तौहीद और विक्की को भी शिकायत में नामजद किया गया है।

मृतक अनिल के भाई सुनील ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें कहा गया है, “मैं जहाँगीरपुरी के CD स्थित झुग्गी में रहता हूँ। आरोपित महताब आलू की रेहड़ी लगाता है। घटना के दिन अनिल ने मजाक में महताब की रेहड़ी से 2 आलू उठा लिए थे। इससे नाराज होकर महताब अनिल को गालियाँ देने लगा। अनिल ने विरोध किया तो महताब ने उसके सिर पर बाट से वार किया। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की। तभी वहीं पर लहसुन बेचने वाले विक्की ने और लड़के बुलाकर अनिल को मारने के लिए ललकारा।”

FIR

शिकायतकर्ता सुनील ने आगे बताया है, “विवाद बढ़ता देख कर मैं अनिल को अपने साथ घर के बगल गली में ले आया। शाम के करीब 6.20 बजे महताब का बेटा तौहीद हाथ में मुर्गा काटने वाला चापड़ लेकर आया। उसके साथ अरशद उर्फ मक्खी भी था। मौके पर बहस चल ही रही थी कि वहाँ पर महताब भी हाथ में छुरा लेकर पहुँच गया। उसके साथ शादाब भी था। सबने अनिल को पकड़ लिया और महताब ने अनिल के पेट में ताबड़तोड़ छुरा मारना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद सभी हमलावर भाग गए। घायल अनिल को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में मृतक अनिल के ममेरे भाई रोहित से बात की। उसने बताया की मृतक का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गोंडा का रहने वाला है। अनिल शादीशुदा था और उसका एक बच्चा भी है। ऑपइंडिया को जहाँगीरपुरी के SHO ने बताया कि जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा।