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‘कोठारी बंधुओं समेत राम मंदिर के बलिदानियों की याद में अयोध्या में बनेगा स्मारक’: CM योगी का ऐलान, कहा – सपा सरकार ने की थी हत्या

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर के बलिदानियों की याद में स्मारक बनवाने की घोषणा की है। दूरदर्शन के कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, “कोठारी बंधु (राम कोठारी और शरद कोठारी) की 1990 में उस समय की समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। अयोध्या में रामभक्त राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए बलिदान हुए थे। ये सभी दिव्य आत्माएँ जहाँ भी होंगी, भव्य राम मंदिर का निर्माण देख रही होंगी और इससे उन्हें शांति मिल रही होगी।”

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन दिव्य आत्माओं को इसकी तसल्ली होती होगी कि भगवान राम उनके संकल्प को पूरा कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि राम जन्मभूमि के लिए बलिदान हुए रामभक्तों की याद में एक स्मारक भी बनवाया जाएगा, जहाँ उनके नाम अंकित किए जाएँगे। कार्यक्रम में सीएम योगी ने सपा द्वारा मुफ्त चीजें किए जाने की घोषणाओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके पास एजेंडा नहीं है, वो ‘घोषणावीर’ हैं, जिनके पास कहने-करने के लिए कुछ नहीं।

सीएम योगी ने कहा कि आज वो फ्री-फ्री की बात कर रहे हैं, लेकिन जहाँ आवश्यकता थी – वहाँ हमने भी फ्री किया है। लेकिन, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि जनता पर बोझ बढ़ाने की बजाए हमने आमदनी बढ़ाई, संसाधन बढ़ाए और सरप्लस आए रुपयों को विकास कार्यों में लगाया गया, किसानों की कर्जमाफी की गई, छात्रों को टेबलेट्स-स्मार्टफोन्स दिए गए और 15 करोड़ गरीबों को मुफ्त अन्न योजना से जोड़ा गया। सीएम योगी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की पहचान अंधेरा है। इन्हें अंधेरा अच्छा लगता है।

अन्य नेताओं द्वारा भी राम और कृष्ण का नाम चुनाव के समय लिए जाने पर उन्होंने कहा कि राम का नाम तो हनुमान भी लेते थे और कालनेमि भी लेता था। उन्होंने कहा कि जनता रामभक्तों और छद्म लोगों के फर्क को पहचानती है। उन्होंने कहा कि जनता ने जब 4 बार सत्ता दी, तब वो दंगे कराते थे। इतिहास को याद करते हुए उन्होंने कहा कि 70 के दशक में पहला दंगा और जवाहर बाग़ में अंतिम दंगा भी मथुरा में ही हुआ था। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण उन्हें कोसते होंगे कि जब सत्ता दी थी, तब वहाँ दंगा कराते थे।

मुस्कुराती हुई जैकलीन को गाल और नाक पर चुम्मा लेता दाढ़ी वाला तिहाड़ी, अभिनेत्री की गर्दन पर लाल रंग की ‘लव बाइट’ भी दिखी

बॉलीवुड एक्ट्रेस जैकलीन फर्नांडिस (Jacqueline Fernandez) 200 करोड़ की उगाही करने वाले आरोपित ठग सुकेश चंद्रशेखर (Sukesh Chandrashekhar) के साथ अपने रिलेशनशिप को लेकर बीते कई महीनों से सुर्खियों में हैं। जैकलीन और सुकेश के कई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुके हैं। इसी बीच दोनों की एक नई फोटो सामने आई है, जो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल गई है। इस फोटो को मूवी टॉकीज ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर किया है। इसमें सुकेश, जैकलीन के गालों, चेहरे पर किस कर रहा है और वह मुस्कुराती हुई दिख रही हैं। इसके साथ ही एक्ट्रेस की गर्दन पर लव बाइट का निशान भी नजर आ रहा है।

हाल ही में मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering) मामले के आरोपित सुकेश ने अपने ऊपर पर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया था। सुकेश ने जेल के अंदर से अपने वकील अनंत मलिक और रोहन यादव के माध्यम से जारी पत्र में कहा था कि वह ठग नहीं है। आरोपित को ‘धोखेबाज’ या ‘ठग’ कहना गलत है, क्योंकि उसे अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है। पत्र में उसने यह भी दावा किया था कि वह जैकलीन फर्नांडिस के साथ रिलेशनशिप में था। उसने एक्ट्रेस को करोड़ों के गिफ्ट दिए थे और उसके व्यक्तिगत संंबंधों का आपराधिक मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

बात करें वर्क फ्रंट की तो जैकलीन की इस साल कई फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इसमें सर्कस, अटैक, राम सेतु और बच्चन पांडे में वह मुख्य भूमिका में नजर आएँगी। इसके अलावा उनकी सलमान खान के साथ ‘किक 2’ भी इसी साल रिलीज होगी।

गौरतलब है कि रेनबैक्सी के मालिक की पत्नी से 200 करोड़ की उगाही करने वाला सुकेश कभी खुद को PMO तो कभी गृह मंत्रालय का अधिकारी बता कर लोगों से बात किया करता था। उसका नाम बॉलीवुड के कुछ अन्य लोगों से भी जुड़ा है, जिसमें नोरा फतेही, शिल्पा शेट्टी, श्रद्धा कपूर आदि हैं।

माथे पर टीका, ॐ नमः शिवाय का जाप… ये हैं केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन में की आरती

केरल (Kerala) के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad khan) ने शनिवार (8 जनवरी 2022) को मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते हुए ज्योतिर्लिंग की आरती में भी हिस्सा लिया और भगवान की आरती भी की। उन्होंने माथे पर टीका आदि लगवा कर पूरे विधि विधान से महादेव की पूजा की।

इस दौरान उनके गले में माला दिखी। वो भगवान शिव की चौखट के आगे काफी देर तक हाथ जोड़ कर बैठे रहे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान सुबह 7.30 बजे मंदिर पहुँचे। पूजा-पाठ के बाद उन्होंने कहा, “देश संकटकाल से गुजर रहा है। मैंने देश की प्रगति और कल्याण की प्रार्थना की। भगवान करे दुनिया फिर से विकास के पथ पर तेजी से बढ़े। विश्व कोरोना के संकट से मुक्त हो।”

राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान एक दिन पहले ही उज्जैन पहुँच गए थे। शुक्रवार को वो देवास रोड स्थित सर्किट हाउस में रुके थे। मंदिर में आरती के बाद SDM गोविन्द दुबे ने अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के साथ शॉल, श्रीफल और महाकाल मंदिर का प्रसाद देकर उन्हें सम्मानित किया।

महिला जज ने जेल जाकर उस कैदी को चुम्मा लिया, जिसने मार डाला था पुलिस वाले को: वीडियो वायरल, जाँच शुरू

अर्जेंटीना (Argentina) में पुलिसकर्मी की हत्या (Murder) के मामले में जेल में बंद एक कैदी को चुम्मा लेते हुए एक महिला जज का वीडियो वायरल हो रहा है। CCTV वीडियो के सामने आने के बाद आरोपित जज पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं, इस मामले में हायर कोर्ट ने जाँच के आदेश दे दिए हैं। इस मामले को लेकर महिला न्यायधीश से पूछताछ की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपित महिला जज का वीडियो वायरल होने के बाद उसके और कैदी के साथ संबंधों की समीक्षा शुरू कर दी गई है। यह जानने की कोशिश की जा रही है कि क्या जज और कैदी दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे? हत्या के मामले में जिस वक्त शख्स को सजा सुनाई जा रही थी, उस दौरान आरोपित महिला जज ने ही उसे आजीवन कारावास की सजा देने का विरोध किया था।

इस वीडियो को लेकर चुबुत प्रांत के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने कहा कि उन्होंने कोमोडोरो रिवादाविया की जज मारियल सुआरेज की जाँच शुरू कर दी है। उक्त CCTV वीडियो महिला जज और कैदी क्रिस्टियन ‘माई’ बस्टोस के साथ ट्रेलेव में पेनिटेंटरी इंस्टीट्यूट (IPP) में एक साथ समय बिताने के बाद ऑनलाइन वायरल कर दिया गया था।

अदालत के अधिकारियों के मुताबिक, 29 दिसंबर 2021 को महिला जज के आपत्तिजनक व्यवहार का वीडियो सार्वजनिक हुआ था। वहीं, इस घटना को लेकर आरोपित महिला जज ने अर्जेटीना की न्यूज वेबसाइट्स टोडो नोटिसियास को दिए इंटरव्यू में इस तरह की चुबंन वाली घटना से इनकार किया है।

हत्या के आरोप में जेल में बंद है कैदी

जस्टिस मारियल सुआरेज का जिस कैदी क्रिस्टियन ‘माई’ बस्टोस को किस करने का वीडियो वायरल हो रहा है, वह साल 2009 में एक पुलिसकर्मी को गोली मारने के मामले में जेल की सजा काट रहा है। बस्टोस कोरकोवाडो में पुलिस अधिकारी लिएंड्रो रॉबर्ट्स की हत्या का दोषी पाया गया है।

दरअसल, पुलिस अधिकारी लिएंड्रो रॉबर्ट्स उसे जेल ब्रेक के मामले में गिरफ्तार करने गए थे, लेकिन मौका देखते ही उसने पुलिस अधिकारी को गोली मार दी थी। इस घटना में उनकी मौत हो गई थी। कोर्ट में जब कैदी को सजा सुनाई जा रही थी, तब जस्टिस मारियल सुआरेज दोषी को मिली आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ वोट दिया था। सुआरेज अकेली न्यायाधीश थीं, जिन्होंने इसका विरोध किया था।

PM मोदी का काफिले रोकने के पीछे स्थानीय गुरुद्वारा! पंजाब के अख़बार का खुलासा – गुरुद्वारा से अनाउंसमेंट के बाद जुटी भीड़

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में बड़ी चूक के बाद उन्हें 5 जनवरी को अपनी फिरोजपुर रैली रद्द करनी पड़ी थी। वहीं, प्रदर्शनकारियों द्वारा जाम लगाने के कारण उनका काफिला 15-20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फँसा रहा। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, अब इस मामले में नया खुलासा हुआ है कि एक स्थानीय गुरुद्वारे ने पीएम मोदी की सुरक्षा में सेंध लगाने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

‘द ट्रिब्यून’ ने बताया कि कैसे गुरुद्वारे से किसान प्रदर्शनकारियों को हाइवे को जाम करने की घोषणा की गई थी। इसमें कहा गया है, “पास के एक गुरुद्वारे से घोषणा की गई, जिससे बड़ी संख्या में किसान मौके पर पहुँच गए और वहाँ स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद एसपीजी के अधिकारियों ने पीएम मोदी को वापस बठिंडा ले जाने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें डर था कि अगर प्रदर्शनकारियों ने फ्लाईओवर के दूसरी तरफ भी जाम लगा दिया तो वह फँस सकते हैं।”

न्यूज ट्रैक ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया है कि स्थानीय गुरुद्वारे से यह जानने के बाद कि प्रधानमंत्री फँस गए हैं, और भी किसान हाइवे को जाम करने के लिए पहुँच गए। उनके द्वारा लगाए गए ट्रैफिक जाम के कारण पीएम मोदी का काफिला 15 से 20 मिनट तक फ्लाईओवर पर फँसा रहा। दरअसल, पास के गुरुद्वारे से पीएम के संबंध में घोषणा की गई थी। इतना सुनते ही और किसान वहाँ जमा हो गए थे। पीएम मोदी की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए एसपीजी टीम को उन्हें वहाँ से हटाने का फैसला करना पड़ा।

News Track की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

यह जानने के बाद कि कैसे एक गुरुद्वारे ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जान को खतरे में डाल दिया, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषक दिव्य कुमार सोती ने धार्मिक संस्थान (दुरुपयोग निवारण) अधिनियम, 1988 को लागू करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि इस अधिनियम में धार्मिक संस्थानों का दुरुपयोग करने पर 5 वर्ष के कारावास का प्रावधान है। इसे वर्ष 1988 में, खालिस्तानी आतंकवादियों द्वारा गुरुद्वारों पर कब्जा करने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए उनका दुरुपयोग करने के मद्देनजर लाया गया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान सुरक्षा में सेंध का मामला सामने आया था। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इसको लेकर बयान जारी किया था। MHA ने अपने बयान में कहा था कि बुधवार (5 जनवरी, 2022) को पीएम मोदी का विमान भठिंडा में लैंड हुआ था, जहाँ से उन्हें हैलीकॉप्टर से हुसैनीवाला स्थित ‘नेशनल मार्टियर्स मेमोरियल’ जाना था। वहाँ उन्हें ‘राष्ट्रीय शहीदी स्मारक’ में बलिदानी क्रांतिकारियों भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करनी थी।

‘जन्नत में मर्दों को 72 हूर… महिलाओं को ‘सरदार’ के साथ शौहर’: मौलाना ने महिला पत्रकार को दिया जवाब, राम मंदिर तोड़ने की भी बात

हिन्दुओं और राम मंदिर के खिलाफ भड़काऊ बयान देने के लिए कुख्यात ‘ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन’ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने एक बार फिर से अजीबोगरीब बयान दिया है। उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को यहूदी करार दिया। पत्रकार आरज़ू काज़मी ने जब 72 हूर वाले सवाल पर जब उनसे जवाब माँगा तो वो फँस गए। आरज़ू काज़मी ने पूछा कि जन्नत में औरतों के लिए क्या है? उन्होंने पूछा कि वो इस्लाम के सरे नियम-कानून का अनुसरण करती हैं, ऐसे में उन्हें जन्नत में क्या मिलेगा?

इस पर मौलाना साजिद रशीदी ने जवाब दिया कि आप जन्नत में 72 हूरों की सरदार होंगी और आपकी ज़िन्दगी में जो शौहर हैं, जन्नत में भी वही रहेंगे। उन्होंने कहा कि आपके शौहर अच्छे कार्य करते होंगे तो वो भी जन्नत में जाएँगे। उन्होंने कहा कि ये सब अय्याशी नहीं है, बल्कि वहाँ कोई नापाक नहीं होता है और आदमी का मन भी इस तरफ नहीं जाता है। उन्होंने कहा कि जन्नत के लोग यही सोचते हैं कि अल्लाह उन्हें कब दीदार देगा। इस पर पत्रकार ने पूछा कि औरतों के लिए वही शौहर और पुरुषों के लिए 72 हूरें, ये तो नाइंसाफी है?

इस पर मौलाना ने कहा कि जन्नत में मुस्लिमों के लिए चीजें रखने वाले अल्लाह से ये सवाल किया जाना चाहिए। वहीं उन्होंने सऊदी अरब द्वारा हाल में लिए गई कुछ लिबरल फैसलों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि MBS ने जो कारनामे अंजाम दिए हैं, वो दीन और कुरान से हट कर है, नबी की ज़िन्दगी से हट कर है। उन्होंने कहा कि वो ये कहने से डरते नहीं हैं कि मोहम्मद बिन सलमान को अपने वालिद और पूर्व बादशाहों की ज़िंदगी पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी में न तो कभी बुर्के पर पाबंदी हटी और न ही शराबखाने और थिएटर खुले थे।

उन्होंने कहा कि यहूदी दीन-ए-इस्लाम को खत्म करने का ख्वाब यहूदी ही रखते हैं, इसीलिए MBS भी ‘यहूदी की औलाद’ हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तवायफों को नाचने और मदीना में सिनेमाघर खुलवाने जैसे निर्णय क़यामत की निशानी है और बदनसीब फैसला है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद बिन सलमान अय्याशी के लिए एक शहर खुलवा रहे हैं जहाँ इस्लामी कानून नहीं चलेगा और वहाँ कोई भी जा सकता है। उन्होंने अमेरिका के 9/11 हमलों को भी ‘यहूदियों की देन’ बताते हुए कहा कि ईसाईयों और यहूदियों ने इतिहास में काफी पहले से कुरान के नुस्खों को जलाने की कोशिश की, ताकि इस्लाम खत्म हो जाए।

उन्होंने इस दौरान माना कि भारत-पाकिस्तान में अधिकतर मुस्लिम धर्मांतरित हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि वो पक्के मुस्लिम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ये नहीं कहा जा सकता कि माँ-बाप गैर-मुस्लिम हैं तो औलाद मुस्लिम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इस्लाम अगर तलवार के जोर से फैलता तो आज हिंदुस्तान-पाकिस्तान में 800 साल के इस्लामी शासन के दौरान एक भी हिन्दू नहीं बचता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम बादशाहों ने मंदिर बनवाए और मंदिरों को दान दिए।

उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को लेकर दिए गए फैसले में कहा है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाई गई। दूसरी बात ये कही कि 1949 में गैर-कानूनी ढंग से चोरी से मस्जिद में मूर्ति रखी गई। तीसरी बात ये कही कि 1992 में बाबरी मस्जिद को ‘शहीद’ करना अवैध था। चौथी बात ये कहा कि इसके दोषियों को सज़ा मिले। सुप्रीम कोर्ट के पास शक्ति है कि सबूतों-गवाहों के खिलाफ वो फैसला दे सकते हैं। इसीलिए, उन्होंने राम मंदिर के पक्ष में फैसला दिया। बावजूद इसके मुस्लिम खामोश रहे, क्योंकि ये सुप्रीम कोर्ट का फैसला है और उनका संविधान में यकीन है।”

इस दौरान उन्होंने अपने एक बयान की भी याद दिलाई, जिसमें उन्होंने कहा था कि आज तो ये बात साबित हो गई कि मस्जिद तोड़ कर मंदिर नहीं बनाई गई, लेकिन अब जब मस्जिद तोड़ कर मंदिर बनाई जा रही है तो हमारी आने वाली नस्लें इसे पढ़ कर मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाए। उन्होंने अपने बयान पर कायम रहने का दावा करते हुए कहा कि आगे फिर से कोई मोहम्मद बिन कासिम पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये इतिहास पढ़ कर मुस्लिमों का खूब जोश में आ सकता है, ये हो सकता है।

‘मुस्लिमों को ना जमीन देंगे, ना उनसे सामान खरीदेंगे’: हमले से गुस्साए छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों की शपथ, BDC इलियास को बताया मुख्य आरोपी

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में एक समूह का मुस्लिम समाज के आर्थिक बहिष्कार की शपथ का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में गाँव के लोग शपथ ले रहे हैं कि वे किसी भी मुस्लिम की दुकान से ना सामान खरीदेंगे ना बेचेंगे, उन्हें ना ही किराए पर जमीन देने और ना ही उन्हें बेचेंगे। इसके साथ वह कसम खा रहे हैं कि गाँव के लोग मुस्लिम के यहाँ काम भी नहीं करेंगे। मामला लुंड्रा थाना क्षेत्र के आरा और कुंदीकला गाँव का बताया जा रहा है। वीडियो 6 जनवरी (गुरुवार) को वायरल हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला मारपीट से संबंधित है। नए साल (1 जनवरी) को आरा गाँव और कुंदी कला के निवासियों में आपसी विवाद हुआ था। इसके बाद इस मामले ने साम्प्रदायिक रंग ले लिया। आरा गाँव के कुछ मुस्लिम युवक वाहनों में भर के कुंदीकला में घुसकर यहाँ के लोगों से मारपीट और महिलाओं से अभद्रता की थी। इस मामले में पुलिस ने धारा 147, 294, 323, 506, 452 IPC के तहत केस दर्ज किया था। पीड़ित और हमलावर अलग-अलग समुदाय से हैं।

बताया जा रहा है कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों को जमानत मिल जाने के बाद कुंदीकला गाँव वाले आक्रोशित हो गए। उन्होंने पुलिस पर हल्की धाराएँ लगाने और आरोपितों को बचाने का आरोप लगाया। इसी के विरोध में पीड़ित परिवारों ने गाँव वालों के साथ 5 जनवरी (बुधवार) को लुंड्रा थाने का घेराव किया था।

इस घटना के बाद पुलिस ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच जारी है। इस केस में दर्ज FIR में इंजमाम, मोज़िद, सेराज, फ़ज़ल और सुहैल का नाम है।

FIR

इस घटना को कवर करने पीड़ितों के गाँव में गए एक पत्रकार से स्थानीय थाना प्रभारी दिलबाग सिंह ने बदतमीजी की। उन्होंने पत्रकार को कैमरा बंद करने वरना जेल भेजने की धमकी दी। पत्रकार को पकड़ कर ले जाने के दौरान पूरे गाँव ने एक स्वर में विरोध किया, तब जाकर पुलिस पीछे हटी। थाना प्रभारी की इस हरकत का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में एक लड़की के सिर पर पट्टी बंधी दिखाई दे रही है। वीडियो में नाबालिग लग रही लड़की बता रही है कि उसे घर से खींच कर बाहर निकाला गया, मारपीट की गई और फिर गाड़ी में बैठाने की कोशिश की गई।

पीड़ित परिवार एक महिला ने बताया, “मैं घर के अंदर थी। अचानक बच्चे चिल्लाने लगे। वो मेरे घर में घुसे और मारपीट शुरू कर दिए। जो भी बीच-बचाव में आया उसे मारा गया। मेरी बेटी के साथ छेड़छाड़ की भी कोशिश हुई। हमलावरों की संख्या लगभग 50 के आसपास थी। उनके हाथों में बड़े-बड़े डंडे थे। कुछ ही देर में पुलिस आ गई। पुलिस से हमने अपनी पीड़ा बताने की कोशिश की तो हमें चुप रहने को कहा गया। फिर हम माँ-बेटी को ही थाने ले गए। उस दिन हम डर गए थे। इसलिए पूरी बात पुलिस को नहीं बता पाए।”

पीड़ित बच्ची के चाचा ने घटना के बारे में बताया, “वो लोग अचानक हमला किए। वो दरवाजे को लात मारकर अंदर घुस गए। हमारा पहले का कोई झगड़ा नहीं था। मैं दिन भर घर में ही था। मेरी भतीजी का हाथ पकड़ खींचतान करने लगे। मुझे भी गालियाँ दे कर मारा गया। इस मामले में मुख्य आरोपी इलियास BDC सदस्य है। इलियास ने हथियार निकाल कर सबको मारने के लिए कहा। साथ ही गंदी-गंदी गालियाँ दीं। थाने वालों ने खुद पर विश्वास रखने को कहा। आरोपितों ने जमानत पाने के बाद गाँव में पटाखे फोड़े। उन्होंने पूरे गाँव को जलाने और सभी हिन्दुओं को मारने की धमकी दी है। वो सभी मुस्लिम हैं। उन्हें हमसे ऐसी दुश्मनी क्यों है, हम समझ नहीं पा रहे हैं।”

गाँव के पंचायत सचिव पूरल राम ने बताया, “जब मैं शाम 6 बजे घर आया तो भीड़भाड़ थी। पहले कुछ झगड़ा हुआ था, जिसे आपस में समझा-बुझा कर खत्म कर दिया गया था। बाद में वो भीड़ की शक्ल में आए। मेरे घर में हमलावर घुस गए। वो गंदी-गंदी गालियाँ दे रहे थे। इलियास को मैं पहले से जानता था। मैं उसे समझाने लगा, तभी उसके बगल वाले ने मुझे गालियाँ दी। इतने में इलियास ने मुझे ही मारना शुरू कर दिया। मेरी नातिन को भी मारा गया। मेरे पूरे परिवार को मारा गया।”

उसी गाँव में एक अन्य बुजुर्ग ने कहा, “हमें न्याय चाहिए। वो छूटकर आ गए और जश्न मना रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ है।” इसी वीडियो गाँव में मौजूद लोगों ने आरोपितों पर छेड़छाड़ और हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की माँग की है। वहीं, पुलिस आक्रोशित गाँव वालों को समझने में जुटी रही।

ऑपइंडिया की पड़ताल में एक बार और निकल कर आई कि जिस स्थानीय थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिलबाग सिंह पर आरोपितों को बचाने के आरोप लग रहे हैं, उनका कार्यकाल पहले से ही विवादित रहा है। साल 2020 में उनके विरुद्ध शंकरगढ़ जिला बलरामपुर में तैनाती के दौरान गाँव वालों पर फर्जी केस और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा था।

इंस्पेक्टर दिलबाग के विरुद्ध जाँच पत्र

ऑपइंडिया ने उनका पक्ष जानने के लिए लुंड्रा थाना प्रभारी दिलबाग सिंह को सम्पर्क किया। उन्होंने बताया “वर्तमान में लॉ एन्ड ऑर्डर पूरी तरह से सामान्य है। कार्रवाई पूरी तरह से न्याय सम्मत की गई है। बीच में कुछ साम्प्रदायिक सोच वालों ने मामले को गलत रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। यहाँ सामाजिक रूप से सौहार्द्र है और कुछ समय बाद सभी को फिर से एक साथ ही रहना है। शपथ लेने वाली वीडियो की जाँच करवाई जा रही है। जाँच पूरी होने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।”

दिलबाग सिंह टिकटॉक पर वीडियो आदि बनाने के लिए भी चर्चित रहे हैं। टिकटॉक के सवाल पर उन्होंने बताया, “मैं ट्रैफिक विभाग में काफी दिन रहा हूँ। लोगों को जागरूक करने के लिए कई वीडियो बनाई है। मेरे किसी भी वीडियो में समाज को कोई गलत संदेश नहीं दिया गया है। आज कल सोशल मीडिया का जमाना है। लोगों से जुड़े रहने के लिए मैं भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहा हूँ। मैंने छत्तीसगढ़ की एक फिल्म में भी काम किया है, जो लॉकडाउन के चलते अभी रिलीज नहीं हो पाई है। मेरे व्यक्तिगत जीवन को मेरी नौकरी से न जोड़ा जाए।”

5 राज्यों में चुनाव तारीखों का ऐलान: बुजुर्गों, दिव्यांगों और कोरोना मरीजों के लिए पोस्टल बैलेट्स, पोलिंग कर्मचारियों को तीसरी डोज, रैलियों पर रोक

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। बता दें कि 2022 में इन पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। उत्तर प्रदेश में 403, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70, मणिपुर में 60 और गोवा में 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि ये चुनाव कोविड-19 से सुरक्षा को देखते हुए बड़ी तैयारी के साथ कराए जाएँगे। बूथों की संख्या बढ़ेगी। वहाँ मास्क और सैनिटाइजर उपलब्ध रहेंगे।

पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में 14 फरवरी को एक ही चरण में सभी विधानसभा सीटों का मतदान निपटा लिया जाएगा। 10 मार्च को चुनाव परिणाम जारी किए जाएँगे। उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में चुनाव होंगे – फरवरी में 10, 14, 20, 23 और 27 को, जबकि मार्च में 3 और 7 को। मणिपुर में 27 फरवरी और 3 मार्च को चुनाव कराए जाएँगे। रात 8 बजे से सुबह 8 बजे तक कोई चुनाव प्रचार नहीं होगा। इस तरह 10 फरवरी, 2022 से चुनाव शुरू हो जाएगा।

सभी विधानसभाओं में एक ऐसा पोलिंग बूथ होगा, जो केवल महिलाओं के लिए होगा। ECI ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ सभी राज्यों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ भी बैठकें की हैं। जमीनी परिस्थिति को जानने-समझने के बाद चुनाव के तारीखों का ऐलान किया गया। इन 5 राज्यों में 24.9 लाख युवा ऐसे हैं, जो पहली बार वोट देंगे। कुल 18.34 करोड़ लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 8.55 करोड़ महिलाएँ हैं। 80 की उम्र से ऊपर के बुजुर्गों, दिव्यांगों और कोरोना मरीजों के लिए पोस्टल बैलेट्स की सुविधा होगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा वोटर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों को ऑनलाइन नामांकन भरने की सुविधा भी दी जाएगी। चुनाव में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायत के लिए ‘cVIGIL’ एप के जरिए लोग शिकायत कर सकते हैं। घोषणा की गई है कि शिकायत के 100 मिनट के भीतर ECI अधिकारी वहाँ पहुँच जाएँगे। तारीखों के ऐलान के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो जाएगी। सभी पोलिंग बूथों पर EVM एवं VVPAT का इस्तेमाल होगा। सभी चुनाव अधिकारियों/कर्मचारियों को ‘फ्रंटलाइन वर्कर’ के रूप में गिना जाएगा और उन्हें कोरोना की तीसरी (Precautionary) डोज दी जाएगी।

CEC सुशील चंद्रा ने इस दौरान “यकीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट लेकर भी चिराग जलता है” पंक्ति का भी इस्तेमाल किया। साथ ही 15 जनवरी, 2021 तक किसी भी राजनीतिक पार्टी को फिजिकल रैली की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बाद स्थिति की समीक्षा कर आगे के नियम बताए जाएँगे। कोई भी रोडशो, साइकिल-बाईक यात्रा या पदयात्रा और जुलूस भी अगले आदेश तक नहीं निकाले जा सकेंगे। 7 चरणों में सभी 5 राज्यों के चुनाव निपटा लिए जाएँगे।

पंजाब के DGP सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय हटाए गए, वीके भावरा नए चीफ: चुनाव आयोग के तारीखों के ऐलान से पहले फैसला

पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा से खिलवाड़ किए जाने के मामले में मचे सियासी बवाल के बीच प्रदेश के डीजीपी रहे सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को हटा दिया गया है। उनकी जगह ये जिम्मेदारी वीके भावरा को दी गई है। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी वीके भावरा मौजूदा समय में होमगार्ड के डीजी हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार (8 जनवरी 2021) को चुनाव आयोग चुनाव पंजाब सहित 5 राज्यों में होने वाले चुनाव की तारीखों का ऐलान करने वाला था, उससे पहले पंजाब के डीजीपी को बदल दिया गया है। वीके भंवरा की बात की जाए तो वो विजिलेंस चीफ के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्हें पिछले पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग ने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया था।

डीजीपी के पद से हटाए गए सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय नवजोत सिंह सिद्धू के चहेते माने जाते हैं। दरअसल, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी डीजीपी रहे दिनकर गुप्ता के छुट्टी पर जाने के बाद आईपीएस सहोता को ये पदभार दिया गया था। नवजोत सिंह सिद्धू, कॉन्ग्रेस, मुख्यमंत्री चन्नी इन सब के बीच चले राजनीतिक सर्कस के कारण अंततः सिद्धू के ही करीबी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय को यह जिम्मा दिया गया।

आप लोगों को जान कर यह आश्चर्य होगा कि डीजीपी पद के लिए जिन 10 आईपीएस अधिकारियों का नाम संघ लोक सेवा आयोग को भेजा गया था, उसमें भी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय का नाम ही नहीं था। संयोग देखिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 जनवरी 2022 को पंजाब के दौरे पर गए थे। लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा था। और यह सब डीजीपी सिद्धार्थ चट्टोपाध्याय के पुलिस प्रमुख रहते हुए हुआ।

भटिंडा एयरपोर्ट से वापस लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहाँ के अधिकारियों से कहा था, “अपने मुख्यमंत्री को धन्यवाद कहना, कि मैं भटिंडा एयरपोर्ट तक ज़िंदा पहुँच गया।” वहीं, पंजाब के उप-मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने माना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक हुई है। जबकि मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सुरक्षा में किसी भी प्रकार की चूक की बात से इनकार किया था।

मंदिर से मूर्तियाँ चोरी, अदालत ने भगवान को ही पेश होने का जारी कर दिया आदेश: मद्रास HC ने फैसले को रद्द किया, जताई नाराज़गी

तमिलनाडु के (Tamil nadu) तिरुपुर जिले से हैरान करने वाला अदालती फरमान सामने आया है। भगवान की मूर्ति चोरी के एक मामले में जिले के कुंबकोणम स्थित जिला अदालत (District Court) ने भगवान को ही अदालत में पेश किए जाने का आदेश दे दिया। बाद में जब भक्तों ने इसके खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो मद्रास हाई कोर्ट (Madras High Court) ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस आर सुरेश ने निचली अदालत के बेतुके फरमान पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने जिला अदालत के फैसले को खारिज करते हुए कहा, “अदालत में भगवान को केवल निरीक्षण या सत्यापन के लिए नहीं बुलाया जा सकता है। जैसे कि यह एक आपराधिक मामले का भौतिक उद्देश्य है।” इसके साथ ही हाई कोर्ट ने निचली अदालत को सुझाव दिया कि अगर वो मूर्ति का सत्यापन इतना ही आवश्यक है तो एक वकील को आयुक्त के तौर पर नियुक्त करके उससे रिपोर्ट तलब की जा सकती है।

क्या है मामला

दरअसल, तिरुपुर जिले में प्राचीन मंदिर रुलमिघु परमासिवन स्वामी थिरुक्कोइल से ‘मूलावार’ देवता की मूर्ति चोरी हो गई थी। इस मामले में स्थानीय भक्तों ने पुलिस में इसकी शिकायत की। कुछ दिन में ही पुलिस ने चोरी हुई मूर्ति को बरामद कर मूर्ति चोरी के मामले से निपटने वाली स्पेशल कोर्ट में पेश किया और उसके बाद इसे मंदिर को वापस दे दिया गया। भगवान की मूर्ति मिलने के बाद मंदिर प्रशासन ने कुंभाभिषेक धार्मिक अनुष्ठान करके इस फिर से मंदिर में स्थापित कर दिया।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, मूर्ति की स्थापना के बाद इसे हटाया नहीं जा सकता। लेकिन कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने अदालत में पेश करने के उद्देश्य से इसे वहाँ से हटाने की कोशिश की, जिसका भक्तों और स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया। बाद में हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि मूर्ति को भक्त भगवान मानते हैं और केवल निरीक्षण के लिए भगवान को अदालत में नहीं बुलाया जा सकता है।