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‘UPTET के अभ्यर्थियों को सड़क पर गुजारनी पड़ी जाड़े की रात, परीक्षा हो गई रद्द’: जानिए सोशल मीडिया पर चल रहे प्रोपेगंडा का सच

सोशल मीडिया पर एक तस्वीर जम कर वायरल हो रही है, जिसके आधार पर दावा किया जा रहा है कि ये उत्तर प्रदेश में UPTET की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की तस्वीर है। कई लोगों ने ये तस्वीर शेयर कर के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार पर निशानया साधा। कहा गया कि जाड़े की रात अभ्यर्थियों को इस तरह से रात गुजारनी पड़ी और बाद में पता चले कि परीक्षा रद्द हो गई, तो आपको कैसे लगेगा? दरअसल, UPTET की परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद इस तरह कि बातें की जा रही हैं।

नीचे आप देख सकते हैं कि किस तरह समाजवादी पार्टी से जुड़े और भाजपा विरोधी हैंडलों ने जम कर प्रॉपगंडा फैलाया।

अंत में यूपी पुलिस ने सच्चाई की जानकारी दी। ये तस्वीरें दरअसल राजस्थान के बेरोजगारों की है। राजस्थान सरकार इनकी नहीं सुन रही है, जिसके बाद ये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित कॉन्ग्रेस दफ्तर के बाहर धरना देने पहुँचे थे। प्रियंका गाँधी अक्सर रोजगार की बातें करती हैं और वो उत्तर प्रदेश में खासी सक्रिय हैं, ऐसे में ये मामला उनकी फजीहत करा सकता है। लेकिन, इसे उलटा भाजपा के खिलाफ ही उपयोग किया जा रहा है। ये युवा राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार से आक्रोशित हैं।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने जानकारी दी, “वायरल फ़ोटो UPTET के अभ्यर्थियों की नहीं है अपितु राजस्थान के युवकों की है। UPTET के परीक्षार्थियों को उनके एडमिट कार्ड के आधार पर सुविधापूर्वक यूपीएसआरटीसी की बसों से घर भेजा जा रहा है और यह परीक्षा राजकीय व्यय पर पुनः एक माह में आयोजित करायी जाएगी। कृपया भ्रामक खबर ना फैलाएँ।” उत्तर प्रदेश ने इस तस्वीर के सहारे अफवाह फैलाने की साजिशों को नाकाम करने के लिए ऐसा करने वालों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने तस्वीर शेयर कर जानकारी दी “UPTET परीक्षा के संबंध में फेसबुक अकाउंट ‘आपन देवरिया’ से भ्रामक फोटो/तथ्य पोस्ट किए जाने पर देवरिया पुलिस द्वारा अभियोग पंजीकृत करते हुए अभियुक्त प्रिंस यादव को गिरफ्तार कर नियमानुसार विधिक कार्यवाही की जा रही है। कृपया भ्रामक पोस्ट कर अफवाह न फैलाएँ।” राजस्थान में पिछले कुछ परीक्षाओं में भी गड़बड़ी की बातें सामने आई है। अशोक गहलोत सरकार मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर आपसी कलह सुलझाने में व्यस्त है।

हालाँकि, पेपर लीक किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल ही आरोपियों की संपत्ति जब्त करने के आदेश पारित किए थे, जिसके क्रम में अब कार्रवाई भी शुरू हो गई है। गाजीपुर में सामूहिक नकल कराने और पेपर लीक के आरोप में शिक्षा माफिया महेंद्र कुशवाहा की संपत्ति को मुनादी करने के बाद सीज कर लिया गया। इस संपत्ति की कुल कीमत 4 करोड़ 80 लाख रुपए आँकी गई है। सीएम योगी ने इस मामले में कडा रुख अपनाते हुए बयान भी दिया था।

बेचारा लोकतंत्र! विपक्ष के मन का हुआ तो मजबूत वर्ना सीधे हत्या: नारे, निलंबन के बीच हंगामेदार रहा वार्म अप सेशन

आज संसद के शीतकालीन सत्र का पहला दिन था। सरकार और विपक्ष का आचरण आशा के अनुरूप था। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया के साथ बात करते हुए बताया कि; यह सत्र महत्वपूर्ण है। बातचीत के दौरान उन्होंने इस समय चल रहे आजादी के अमृत महोत्सव की भी चर्चा की। साथ ही प्रधानमंत्री ने सबको विश्वास दिलाया कि सरकार हर विषय और हर प्रश्न पर चर्चा के लिए तैयार है। संसद का हर सत्र महत्वपूर्ण होता है पर सत्र को न चलने देने के पीछे का दर्शन शायद अधिक महत्वपूर्ण होता है।

ऐसे में सत्र के पहले दिन लोकसभा में कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले विपक्ष ने नारे वगैरह लगाए। कॉन्ग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने किसानों की हालत पर चर्चा करने की बात उठाई। अधीर रंजन नेता हैं इसलिए और लोगों ने उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए अपनी बातों को नारे प्रदान कर दिए। लिहाजा लोकसभा अध्यक्ष ने संसद की कार्रवाई 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

बाद में कार्रवाई आरंभ हुई तो सरकार ने अपनी पूर्व घोषणा के अनुरूप तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की संसदीय औपचारिकता पूरी की। विरोध के बीच संसद में कृषि कानूनों को रद्द करने का कानून दोनों सदनों में बिना किसी बहस या चर्चा के पास हो गया। संसद में बहस की जरूरत शायद इसलिए नहीं पड़ी क्योंकि सारी बहस सिंघु बॉर्डर और टीवी स्टूडियो में की जा चुकी थी। कॉन्ग्रेस के सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने चर्चा कराने की माँग की पर नारे रोकने के लिए तैयार नहीं दिखे। उन्होंने बताया कि सदन में लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। उधर लोकसभा अध्यक्ष का कहना था कि वे सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार हैं पर विपक्ष को सदन का माहौल सही करना पड़ेगा। विपक्ष गलत माहौल में चर्चा के लिए राजी था।

इसके अलावा पहले दिन की कार्रवाई में विभिन्न राजनीतिक दलों से राज्यसभा के बारह सांसदों को मानसून सत्र में संसदीय परंपरा के विरुद्ध व्यवहार करने के लिए शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया। इन सांसदों के निलंबन को भी लोकतंत्र की हत्या वगैरह बताया गया। इस संसदीय कार्रवाई पर आई प्रतिक्रियाओं में इस कार्रवाई को और कई तरह से पेश करने की कोशिश की गई। जैसे एक प्रतिक्रिया यह थी कि विपक्ष का काम है आवाज़ उठाना। ऐसे में यह निलंबन सही नहीं है। यह प्रयास है यह थ्योरी फैलाने का कि सांसदों का यह निलंबन आवाज़ उठाने के लिए किया गया जबकि निलंबन के कारण में साफ़-साफ़ कहा गया है कि इनका निलंबन संसदीय परंपराओं के अनुरूप आचरण न करने के लिए किया गया है।

संसद में परंपरा के अनुरूप आचरण न करने से लोकतंत्र मजबूत होता है और उस आचरण के लिए निलंबन पर लोकतंत्र की हत्या हो जाती है। वैसे एक बात है; वर्तमान भारतीय संसदीय लोकतंत्र की आये दिन हत्या की बात मजेदार लगती है। हमारे सांसद एक्सट्रीम पर रहने के आदी हैं। ऐसी संसदीय कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या बताने वालों के लिए मध्यमान का कोई विशेष महत्व नहीं है। उनके मन का हुआ तो लोकतंत्र मज़बूत हुआ है और उनके मन के विपरीत कुछ हुआ तो उसकी हत्या हो जाती है। ये बेचारे कभी नहीं कहते कि सरकार के फलां कदम से लोकतंत्र घायल हो गया, उसकी टाँग में फ्रैक्चर हो गया या फिर लोकतंत्र का सौ एम एल खून निकल गया। ये सीधा हत्या पर जाकर रुकते हैं।

शीतकालीन सत्र के पहले दिन चूँकि सदन की कार्रवाई में केवल नारे लगे और बहस वगैरह के लिए स्थान नहीं था लिहाजा डॉक्टर शशि थरूर को अंग्रेजी बोलने का मौका नहीं मिला। हाँ, महिला सांसदों के साथ एक सेल्फी ट्विटर पर पोस्ट करते हुए उन्होंने पूछा कि; कौन कहता है कि लोकसभा काम की जगह नहीं है? उनके ट्वीट पर हमेशा की तरह मज़ेदार प्रतिक्रियाएँ आईं। महिला सांसदों के बीच डॉक्टर थरूर हमेशा से लोकप्रिय रहे हैं। उनकी हमेशा से बड़ी इज़्ज़त रही है और वे भी सेल्फी वगैरह लेकर इस इज़्ज़त को स्वीकार करते रहे हैं।  

आज सत्र का पहला दिन वैसा ही था जैसे क्रिकेट मैच का पहला ओवर करने आया गेंदबाज शुरूआती तीन-चार गेंदों में वार्म अप करता नज़र आता है। देखना यह है कि वार्म अप सेशन आज ख़त्म हुआ है या आगे भी चलेगा।

राम जन्मभूमि का फैसला मेरा नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट का… पूर्व CJI रंजन गोगोई ने काशी में कही ये बात

दो साल पहले (9 नवंबर 2019) रामजन्म भूमि का फैसला सुनाने वाले भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई एक बार फिर से चर्चा में हैं। राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने रविवार (28 नवंबर 2021) को वाराणसी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ”राम जन्मभूमि का फैसला उनका अपना नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला था। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि कानून के आधार पर लिया गया था।”

गोगोई ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पाँच जजों ने तीन-चार महीने सुनवाई के बाद 900 पृष्ठों में राम मंदिर पर फैसला सुनाया था। उस फैसले पर सभी जज एकमत थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि एक न्यायमूर्ति का कोई धर्म नहीं होता है, ना ही उसकी कोई भाषा होती है और न जाति। न्यायमूर्ति का धर्म और भाषा, संविधान है।

जस्टिस गोगोई ने यह भी कहा कि जज हजारों केस में फैसले सुनाते हैं। वह फैसला किसी के पक्ष में होता है, किसी के खिलाफ, लेकिन जज का उस फैसले से कोई मतलब नहीं होता। वह तथ्यों और कानून के आधार पर फैसला लेता है। रामजन्मभूमि के संबंध में भी यही हुआ।

बता दें कि जस्टिस गोगाई ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से कहा कि हमें और देश को आशीर्वाद दें, ताकि विकास के रास्ते पर चल सकें। मुझे काशी आने की बहुत दिनों से इच्छा थी, लेकिन कोरोना के चलते यात्रा टलती गई।

‘जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते’: केजरीवाल के चुनावी वादों पर बरसे सिद्धू, दागे कई सवाल

पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इस फेहरिस्त में कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी सबसे आगे हैं। दोनों पार्टियाँ एक-दूसरे पर निशाना साध रही हैं। कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने अरविंद केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि दिल्ली में कितनी महिलाओं को एक हजार रुपए महीना दिया जा रहा है। सिद्धू ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को टैग करते हुए सिलसिलेवार कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने लिखा, ”जिनके घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते। अरविंद केजरीवाल जी आप महिला सशक्तिकरण, नौकरी और शिक्षकों की बात करते हैं। हालाँकि, आपके मंत्रिमंडल में एक भी महिला मंत्री नहीं है। शीला दीक्षित जी द्वारा छोड़े गए राजस्व अधिशेष के बावजूद दिल्ली में कितनी महिलाओं को ₹1000 मिलते हैं।”

सिद्धू ने आगे लिखा, ”महिला सशक्तिकरण का अर्थ है चुनावी प्रक्रिया के हर चरण में महिलाओं को अनिवार्य रूप से शामिल करना है, जिस तरह से कॉन्ग्रेस पंजाब में कर रही है। सच्चा नेतृत्व 1000 रुपए का लॉलीपॉप देने में नहीं है, बल्कि स्वरोजगार और महिला उद्यमियों को कौशल प्रदान करके उनके भविष्य को बेहतर बनाने में है। पंजाब मॉडल में ये सब शामिल है।”

शिक्षकों और नौकरियों को लेकर कॉन्ग्रेस नेता ने अरविंद केजरीवाल को आड़े ​हाथों लेते हुए कहा, ”2015 में दिल्ली में शिक्षकों की 12,515 रिक्तियाँ थीं और 2021 में दिल्ली में शिक्षकों की 19,907 रिक्तियाँ हैं और आप ज्यादातर रिक्त पदों को सिर्फ guest lecturers से भर रहे हैं।”

केजरीवाल पर बरसते हुए सिद्धू ने उनसे कई और सवाल पूछे। उन्होंने कहा, ”अपने 2015 के घोषणापत्र में ‘आप’ ने दिल्ली में 8 लाख नई नौकरियों और 20 नए कॉलेजों का वादा किया था। नौकरियाँ और कॉलेज कहाँ हैं? आपकी असफल गारंटियों के विपरीत, पिछले 5 वर्षों में दिल्ली की बेरोजगारी दर लगभग 5 गुना बढ़ गई है।

बता दें कि शनिवार (27 नवंबर) को अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मोहाली में कहा था कि एक तरफ पंजाब सरकार दावा करती है कि वह अध्यापकों को नौकरियाँ दे रहे हैं। 36 हजार कर्मचारियों को पक्का कर दिया है, लेकिन बेरोजगार अध्यापक छह महीने पानी की टंकियों पर चढ़े हुए हैं। उन्होंने कहा था कि पंजाब सरकार झूठ बोलने की आदी है। इसका प्रमाण खुद भुक्तभोगी लोग हैं। पंजाब में पढ़े-लिखे लोगों के साथ शोषण हो रहा है।

‘शरजील इमाम ने किसी को भी हथियार उठाने या हिंसा करने के लिए नहीं कहा, वो पहले ही 14 महीने से जेल में’: इलाहाबाद हाईकोर्ट

दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शाहीन बाग़ में भड़काऊ भाषण देने वाले शरजील इमाम को जमानत दे दी। इस दौरान उच्च न्यायालय ने अपनी टिप्पणी में कहा कि शरजील इमाम ने किसी को भी हथियार उठाने या हिंसा करने के लिए नहीं कहा। हाईकोर्ट ने कहा कि शरजील इमाम के बयान से कोई हिंसा नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि पुष्ट आरोप और बयान से होने वाले दुष्प्रभाव को लेकर जाँच की जा सकती है। हाईकोर्ट का कहना है कि इन आरोपों के लिए 3 साल की सज़ा हो सकती है, जिसमें से 1 साल दो महीने से वो जेल में बंद है।

बता दें कि ये मामला ‘अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में 16 जनवरी, 2020 को शरजील इमाम द्वारा ‘नागरिकता संशोधन कानून (CAA)’ के विरोध में आयोजित एक कार्यक्रम में दिए गए भड़काऊ बयान का है। इस मामले में उनके खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-124A (देशद्रोह), 153A (दो समूहों के बीच वैमनस्य पैदा करना), 153B (राष्ट्रीय अखंडता के खिलाफ दिया गया बयान), 505(2) (विभिन्न समुदायों दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

बता दें कि शरजील इमाम सितंबर 2020 से ही जेल में बंद है। शरजील इमाम के वकील ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा कि उनके मुवक्किल ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था, जिससे हिंसा हो और राष्ट्रीय अखंडता को खतरा हो। साथ ही उसने दावा किया कि केस डायरी में ऐसा कुछ भी नहीं लिखा है कि शरजील इमाम के भाषण का उसे सुनने वालों पर कोई असर हुआ हो। शरजील इमाम के पक्ष में दलील दी गई कि 16 जनवरी, 2020 को उसने ये बयान दिया था, जबकि FIR 9 दिन बाद दर्ज की गई।

शरजील इमाम ने वकील ने कहा कि नियम के तहत FIR नहीं दर्ज की गई और एक साथ कई मामले दर्ज कर दिए गए। जबकि सरकार की तरफ से पेश काउंसल ने कहा कि शरजील इमाम के बयान के सम्बन्ध में उन सभी चीजों के बारे में बताया गया है, जिसमें देश की अखंडता को खतरा और हिंसा की बात है। इसके लिए उन्होंने शरजील इमाम के आपराधिक इतिहास की बात करते हुए, जिसमें एक हत्या का मामला भी दर्ज है। उन्होंने कहा कि वो पहले से ही अवैध गतिविधियों में लिप्त था है।

दोनों तरफ की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद उच्च-न्यायालय ने कहा कि आरोपित 1 साल और 2 महीने जेल में रह चुका है, जबकि उस पर लगे आरोपों के मामले में अधिकतम 3 वर्ष की सज़ा हो सकती है। इसके बाद उसे 50,000 रुपए के मचलने पर जमानत दे दी गई। शर्त रखी गई कि आरोपित सबूत के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा। जाँच में सहयोग करने का निर्देश भी दिया गया। आरोपित किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होगा और किसी भी शर्त के उल्लंघन के मामले में उसकी जमानत को रद्द किया जा सकता है।

मैली-कुचैली बीवी, सड़ी-गली लड़की… जन्नत की हूर की शान में कसीदे पढ़ते केरल के एक और मौलाना का Video वायरल

केरल के एक मौलाना का पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक से बढ़ कर एक अजीबोगरीब चीजें बताता हुआ नजर आ रहा है। उक्त मौलवी ने कहा कि आपलोग ‘मैली-कुचैली बीवियों’ के चक्कर में अल्लाह को भूल जाते हो और ‘सड़ी-गली लड़कियों’ के पीछे इश्क में पागल हो जाते हो। उसने कहा कि जन्नत में अल्लाह ने उसके लिए क्या-क्या तैयार कर रखी है, मालिक ‘अल्लाह’ ने मुस्लिमों के लिए क्या-क्या रखा है, लेकिन तुम ‘तवायफों’ के चक्कर में पड़े हो।

जून 2011 के एक वीडियो में मौलाना कहता नजर आ रहा है, “तैयारी किसके लिए करो? उस जन्नत को हासिल करने के लिए लिए। कम दर्जे की जो हूर होंगी, उनकी आँखें खूबसूरत और गुलाबी होंगी। हर बीवी पर 70-70 कपड़े के जोड़े होंगे। वो पहने हुए जमाल के साथ तकिया लगा कर तुम्हारे इंतजार में बैठी होगी। अल्लाह के नबी बताते हैं कि कपड़ों में से उन हूरों का गुदा तक नजर आएगा। विज्ञान हमें यकीनी सतह पर ले आया है। एक्सरे मशीन के टेबल पर लेटने से आपके शरीर के अंदर का हिस्सा दिखता है या नहीं?”

मौलवी ने दावा किया कि जब एक मशीन ये सब कुछ बता देती है तो दुनिया बनाने वाले की शक्ति के बारे में क्या कहना। उसने दावा किया कि जन्नत में आइना तुम्हारे हूर का ‘जिगर (दिल)’ होगा, वैसे ही आपका दिल उनके लिए आइना होगा, जिसे देख कर वो सजेगी-सँवरेगी। उसने पूछा कि ये मुस्लिम कहाँ सो रहे हैं, हूर केवल चूमने के लिए नहीं मिलेगी बल्कि उनके साथ हमबिस्तरी भी करेगी। उन्होंने दावा किया कि एक-एक मर्द को 100-100 मर्दों की ताकत अल्लाह देंगे।

मौलाना इसमें कहता दिख रहा है, “सर्दी हो रही है, अजान हो रही है। ऐसे में जब तुम कंबल छोड़ कर जाते हो तो अल्लाह उस पर फख्र करता है। हूरों का दबा कर जैसे चाहो इस्तेमाल करो। एक नहीं, कई और। एक से पेट भरेगा तो दूसरी आ जाएगी और वो ज्यादा सुंदर होगी। वो बोलेगी कि आप पर जरा हक़ हमारा भी तो है। हमारे नबी ये सब देख कर आए हैं। इसकी तैयारी करो।” उक्त मौलाना ये कहता दिख रहा है कि जब भी आप हूर को देखेंगे, आप उसके भीतर 70 गुना ज्यादा हुस्न पाएँगे।

नैनीताल ‘लैंड जिहाद’: सरना में मुस्लिमों द्वारा SC लोगों को लालच देकर और दबाव बनाकर जमीन खरीद मामले में जाँच का आदेश

उत्तराखंड के नैनीताल जिले में धारी तहसील क्षेत्र के सरना गाँव में अनुसूचित जाति के लोगों को प्रलोभन देकर और दबाव बनाकर समुदाय विशेष के जमीन खरीदने के मामले की प्रदेश शासन ने जाँच करने के आदेश दिए हैं। शासन ने नैनीताल के जिलाधिकारी को मामले का परीक्षण कर तत्काल आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के अपर सचिव राजस्व डॉ. आनंद श्रीवास्तव ने इस सम्बन्ध में नैनीताल के जिलाधिकारी को पत्र लिखा था।

प्रेस विज्ञप्ति

पत्र में उन्होंने अवगत कराया था कि सितम्बर महीने में 21 व 22 तारीख को सरना गाँव में एक साथ 13 व्यक्तियों द्वारा भूमि की रजिस्ट्री कराई गई। यह भूमि अलीगढ़, संभल आदि स्थानों के एक समुदाय विशेष के लोग हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि यह भूमि बाजार भाव के उलट कौड़ियों के दाम में खरीदी गई है। खरीददारों ने लेन-देन नकद किया है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता अजयेन्द्र अजय ने पिछले महीने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिख कर सरना गाँव में समुदाय विशेष के व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जाति के निवासियों को लालच और डरा – धमका कर उनकी भूमि कौड़ियों के भाव खरीदने का आरोप लगाया था। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने इस मुद्दे को उठाया था। इस मामले में कई महिलाओं ने भी धारी के एसडीएम को शिकायती पत्र देकर जमीन की गलत तरीके से हो रही खरीद-फरोख्त पर रोक लगाने की माँग की थी।

अजयेंद्र ने बताया था कि इस जमीन के बिकने से उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उस जमीन पर इन्होंने लोन भी ले रखा था। लोगों का कहना था कि जमीन पर कई पार्टनरों का मालिकाना हक था, लेकिन खरीदे जाने से पहले सबकी सहमति नहीं ली गई। उन पार्टनर्स ने भी आपत्ति जताते हुए कलक्टर के दफ्तर में शिकायत दायर की थी। इसके अलावा अजयेन्द्र ने इस जमीन की खरीद के लिए दी गई रकम का भी मुद्दा उठाया था।

उन्होंने बताया कि इस जमीन करार में बाजार वैल्यू को वास्तविक मूल्य से 10% कम कर के दिखाया गया। इसके लिए पेमेंट भी कैश में किया गया था, इसीलिए संदेह पैदा होता है कि जमीन खरीदी किसने। इसके पीछे कुछ गुप्त लोग या संगठन हो सकते हैं। भाजपा नेता ने बताया कि स्थानीय लोग बाहर के लोगों के नाम रजिस्ट्री करने में सहज नहीं हैं और समुदाय विशेष के लोगों द्वारा बड़ी संख्या में जमीन खरीदे जाने से यहाँ की डेमोग्राफी पर असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि नैनीताल के विभिन्न क्षेत्रों में मुस्लिमों का दखल बढ़ता ही जा रहा है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता नितिन कार्की ने इस डेमोग्राफिक बदलाव के संबंध में आगाह करते हुए कुछ दिनों पहले ही जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा था। घोड़ा, टैक्सी, नौका संचालन, टूरिस्ट गाइडिंग, होटलों इत्यादि को लीज में लेने में मुस्लिम समुदाय का दखल बढ़ा है। इनमें से अधिकतर खासतौर पर रामपुर, दडिय़ाल, स्वार, मुरादाबाद, बिजनौर और सहारनपुर के रहने वाले हैं।

‘वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ का हो गया निधन, कोरोना से रिकवर होने के बाद से ही गिर रहा था स्वास्थ्य’: जानिए क्या है सच्चाई

सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि पत्रकार विनोद दुआ की मौत हो गई है। लेकिन, असल में सच्चाई कुछ और ही। ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार अशरफ वानी ने एक ट्वीट शेयर किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “ये दिल को तोड़ देने वाला और हैरान करने वाला है। मेरे अच्छे दोस्त और प्रतिष्ठित पत्रकार विनोद दुआ अब नहीं रहे। वप कोविड-19 से रिकवर हो रहे थे और पिछले कुछ महीनों से उनकी तबीयत में सुधार भी हो रहा था। लेकिन, ये सबके साथ होना है – कभी पहले, कभी बाद में। उनकी आत्मा को शांति मिले।”

इसी तरह संजुक्ता बासु ने भी दावा किया कि विनोद दुआ की अब मौत हो चुकी है। हालाँकि, विनोद दुआ की बेटी मल्लिका ने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी के माध्यम से इसकी पुष्टि की है कि विनोद दुआ का निधन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वो लोगों से निवेदन करती हैं कि वो उनके पिता के बारे में अफवाहें न फैलाएँ। उन्होंने कहा कि उनके पिता ICU में हैं और अभी भी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ भी परिणाम हों, कृपया उनकी प्रतिष्ठा बनाए रखिए।

उन्होंने लिखा, “कृपया अफवाहों में यकीन न करें और इन्हें न फैलाएँ। मैं उनके बारे में आधिकारिक अपडेट्स शेयर करूँगी। ट्विटर पर ये सब नहीं होगा।” मल्लिका दुआ ने एक अन्य स्टोरी में बताया था, “मेरे पिता ICU में हैं और उनकी स्थिति काफी गंभीर है। अप्रैल 2021 के बाद से ही उनका स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। अपने जीवन में प्रकाश को खोने के बाद वो विचलित थे। उन्होंने एक सुंदर जीवन व्यतीत किया है और हमें भी एक अच्छा जीवन दिया है।”

मल्लिका दुआ ने लिखा कि उनके पिता दर्द डिजर्व नहीं करते। साथ ही उन्होंने लोगों से ये निवेदन किया कि वो प्रार्थना करें कि उनके पिता को कम से कम दर्द हो।

‘कश्मीरियों ने राँची के मुस्लिमों के साथ मिलकर हिन्दुओं को पीटा..’ मामले में नया मोड़, शिकायत के बाद अब समझौता: जानें क्या है विवाद

झारखण्ड के राँची में स्थानीय लोगों और कश्मरियों के विवाद में आपसी समझौते से मामले को खत्म करने की खबर है। थाना प्रभारी डोरंडा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए जानकारी दी है कि कुछ लोग मामले को तूल देना चाह रहे थे जिसका शांतिपूर्ण ढंग से दोनों पक्षों ने आपस में समाधान निकाल लिया है। किसी पर FIR दर्ज नहीं की गई है। इस मामले में शिकायतकर्ता बिलाल ने ऑपइंडिया को फोन पर जानकारी दी है कि हमारे बीच समझौता हो चुका है। बिलाल ने कहा कि दोनों पक्षों के लोग थाने से निकल रहे हैं और अब हमारे बीच कोई गिला शिकवा नहीं है। हम आगे भी मिल जुल कर रहेंगे।

एक वायरल वीडियो के आधार पर कुछ स्थानीय युवकों पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने कश्मीरियों पर हमले किए। साथ ही उन्हें जय श्रीराम बोलने के लिए मजबूर किया गया। इस मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी झारखंड पुलिस को जाँच कर के आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। यह आदेश पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा की शिकायत पर जारी हुए थे।

इससे पहले मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि राँची में गर्म कपड़े बेचने वाले कश्मीरियों को निशाना बनाया गया था। आरोप था कि शनिवार (27 नवम्बर 2021) को सुबह 10:30 पर लगभग 2 दर्जन युवकों ने कश्मीरियों पर हमला कर दिया। इस हमले में लाठी डंडे का भी इस्तेमाल किया गया। लूटपाट भी किया गया। घायलों के नाम रियाज अहमद वानी, तनवीर अहमद साह, सरफराज अहमद वानी और गुलाम अहमद बताए गए थे। कुछ रिपोर्ट्स में 3 लोगों के हिरासत में होने की खबर दी गई। इनके नाम दीपक झा, तरुण कुमार और अरविंद कुमार बताए गए। इन पर जय श्रीराम के नारे लगवाने के साथ पाकिस्तान ज़िंदाबाद बुलवाने का भी आरोप लगाया गया। राँची पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की बात कही थी।

कश्मीरी बिलाल ने पुलिस को दिए अपने प्रार्थना पत्र में कहा था, “वो पहलगाम जिला अनंतनाग कश्मीर का निवासी है और रांची में किराए पर रहता है। उसके मकान मालिक का नाम सादिक अंसारी है। घटना के दिन मैं अपने साथी शब्बीर के साथ जा रहा था तब आरोपितों ने मुझे रोक कर जय श्रीराम और पाकिस्तान मुर्दाबाद बोलने के लिए कहा। हमारे साथ मारपीट की गई। इसी के साथ उन्होंने एक नाम राजकिशोर का बताया।

शिकायत बिलाल

पांचजन्य के अनुसार यह विवाद तरुण कुमार की बाईक और कश्मीरी व्यापारियों का ठेला टकराने के चलते हुआ था। तरुण कुमार को वहाँ खड़े बाकियों ने पीटना शुरू कर दिया तो तरुण के बचाव में भी दीपक झा और अरविन्द कुमार आ गए। इस बीच पुलिस ने पहुँच कर मामले में बीच बचाव कर दिया। रिपोर्ट में दावा है कि CCTV फुटेज लगाए जा रहे आरोपों से एकदम अलग था। ट्विटर पर संजीत कुमार द्वारा एक CCTV फुटेज को भी शेयर किया गया है।

इस पूरे मामले में तरुण कुमार ने भी पुलिस को प्रार्थना पत्र दे कर कश्मीरियों द्वारा खुद पर हमले का आरोप लगाया था। प्रार्थना पत्र में तरुण कुमार ने लिखा है कि ‘कश्मीरियों ने रिक्शा सड़क पर खड़ा किया हुआ था। मैंने उन्हें हटाने को कहा तब उन्होंने इकट्ठा हो कर मेरे साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। इसी के साथ उन सभी ने फोन करके बाक़ी कई लोगों को जमा कर लिया। थोड़ी देर में कई लोग जमा हो गए और उन्होंने मुझे मारना शुरू कर दिया था। मेरी तरफ से मुझे बचाने मेरे 2 दोस्त आए। अगर पुलिस मौके पर न आती तो मेरी जान को खतरा था। इसी के साथ तरुण ने रियाज़, बिलाल, तनवीर, सरताज और उनके अन्य सहयोगियों पर कार्रवाई की माँग की है। प्रार्थना पत्र थाना डोरंडा द्वारा 27 नवम्बर 2021 को रिसीव भी किया गया है।

तरुण द्वारा की गई शिकायत

एक स्थानीय न्यूज़ पोर्टल झारखंड न्यूज़ के मुताबिक महावीर मंडल नाम के संगठन ने इस पूरी घटना को साजिश बताया था। उनके मुताबिक जिस जिले में सैकड़ों कश्मीरी रहते हों वहाँ इन्ही चार से ही कोई मारपीट क्यों करेगा? इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ दिन पहले इन्हीं चार कश्मरियों के साथ कोई और घटना घटित हुई थी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस मामले की निष्पक्षतापूर्वक जाँच करने को कहा था।

बिटकॉइन को करेंसी के तौर पर मान्यता नहीं देगी मोदी सरकार, निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दूर किया संशय

संसद का शीतकालीन सत्र सोमवार से (29 नवंबर 2021) शुरू हो गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में कहा कि सरकार के पास देश में बिटकॉइन को करेंसी के रूप में मान्यता देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने सदन को यह भी बताया कि सरकार बिटकॉइन को लेकर किए जाने वाले ट्रांजैक्शन का कोई डाटा नहीं रखती है।

क्या सरकार के पास देश में बिटकॉइन को मुद्रा के रूप में मान्यता देने का कोई प्रस्ताव है इस प्रश्न पर वित्त मंत्री ने कहा ‘नहीं, सर’। वहीं, लोकसभा में वित्त मंत्री से एक और सवाल पूछा गया कि क्या सरकार के पास कोई जानकारी है कि देश में बिटकॉइन ट्रांजैक्शन में लगातार इजाफा हो रहा है? इसका उत्तर देते हुए सीतारमण ने कहा कि सरकार बिटकॉइन में किए गए ट्रांजैक्शन का कोई डाटा नहीं रखती है।

ध्यान दें कि बिटकॉइन एक डिजिटल मुद्रा है। यह लोगों को बैंकों, क्रेडिट कार्ड या अन्य तीसरे पक्षों को शामिल किए बिना सामान और सेवाओं को खरीदने और पैसे का आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है। आसान शब्दों में क​हें तो यह पीयर-टू-पीयर ट्रांजैक्शन होती है, जिसमें किसी तीसरे की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं होती है।

साल 2008 में इसे प्रोग्रामर के एक अज्ञात समूह द्वारा क्रिप्टोकरेंसी और इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली के रूप में पेश किया गया था। बिटकॉइन ने दुनिया भर में बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल की है। सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में क्रिप्टोकरेंसी पर नकेल कसने के साथ ही डिजिटल करेंसी को शुरू करने के लिए Cryptocurrency and Regulation of Official Digital Currency Bill 2021 पेश कराने जा रही है।

बताया जा रहा है कि इस बिल के माध्यम से सरकार कुछ निजी क्रिप्टोकरेंसी पर प्रतिबंध लगाएगी। बता दें कि मध्य अमेरिका के देश अल सल्वाडोर ने सितंबर में बिटकॉइन को कानूनी रूप से मान्यता दी थी और ऐसा करने वाला ये दुनिया का पहला देश भी बना था।