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मृतक अल्ताफ पर नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण का दर्ज केस, मोबाइल में मिले थे अश्लील वीडियो, पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट परिजन अब बदल रहे बयान

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में पुलिस कस्टडी में एक युवक की कथित मौत पर राजनैतिक हंगामा हो गया है। मृतक का नाम अल्ताफ है, जिसकी उम्र लगभग 21 वर्ष थी। अल्ताफ को पुलिस ने एक नाबालिग लड़की के अपहरण के मुकदमे की जाँच के लिए थाने में बुलाया था। यह घटना 9 नवम्बर 2021 (मंगलवार) की है। अल्ताफ पर एक नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण करने का आरोप है। वहीं, अपहृत लड़की का अभी तक पता नहीं चला है।

उधर इस घटना को लेकर कासगंज के पुलिस अधीक्षक ने बयान जारी करते हुए बताया है कि यह घटना कैसे घटित हुई। उन्होंने बताया कि अल्ताफ ने हवालात के शौचालय में गया था और वहाँ नल की टोंटी से अपनी जैकेट में लगे नाड़े से आत्महत्या का प्रयास किया। पुलिस ने अल्ताफ को अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उसने दम तोड़ दिया। अल्ताफ की मौत में लापरवाही बरतने के चलते इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह इंदौलिया, सब इंस्पेक्टर चंद्रेश गौतम, सब इंस्पेक्टर विकास कुमार, हेड कांस्टेबल घनेंद्र सिंह और सिपाही सौरभ सोलंकी को सस्पेंड कर दिया गया है।

अल्ताफ कासगंज के अहरौली गाँव का रहने वाला था। उसकी मौत के बाद एक पत्र सामने आया, जिसमें उसके अब्बा का अंगूठा लगा होने का दावा किया जा रहा। इस पत्र में लिखा गया है कि अल्ताफ ने डिप्रेशन में आकर आत्महत्या की है। वहीं, इस पत्र में मृतक के कथित पिता ने दावा किया है कि उन्हें पुलिस से कोई शिकायत नहीं है और इस मामले वह कोई कार्रवाई नहीं चाहते। इस पत्र के लेखक के रूप में सगीर का नाम दर्ज है, जबकि इस पर लगे अंगूठा के निशान मृतक के पिता चाँद मियाँ के बताए जा रहे हैं।

अल्ताफ के अब्बा चाँद मियाँ का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। उस वीडियो में उन्होंने स्वयं को पुलिस की कार्रवाई से पूरी तरह से संतुष्ट बताया है। वीडियो में उनका कहना है कि पुलिस का उनके प्रति व्यवहार ठीक रहा। चाँद मियाँ का ये भी कहना है कि उन्होंने आवेश में आकर पुलिस वालों के खिलाफ मीडिया बयान दिया था। उनका कहना है कि पुलिस ने उनके बेटे का इलाज करवाया पर वो नहीं बचा।

हालाँकि, मृतक अल्ताफ के अब्बा अपने बयान से पलट गए। उन्होंने अपने पिछले बयान को खराब मानसिक स्थिति के चलते दिया बताया। इसके के साथ उन्होंने खुद को अनपढ़ बताया और कहा कि उन लोगों ने पत्र पर अंगूठा लगाने के लिए कहा तो वे लगा दिए। इस नए वीडियो में उन्होंने खुद को पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट बताते हुए न्याय माँगा।

इस घटना पर ADG मेरठ ने भी बयान दिया है। ADG के अनुसार भी मृतक अल्ताफ ने थाने के अंदर फाँसी लगाने का प्रयास किया। इसी के साथ इस घटना की न्यायिक जाँच की भी संस्तुति करने की बात कही। पुलिस के अनुसार अल्ताफ स्थानीय अस्पताल में लगभग 15 मिनट जीवित रहा था। अल्ताफ का इस्लामी रीति रिवाज़ से अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है।

मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अल्ताफ के शरीर पर मारपीट के निशान नहीं पाए गए हैं।

साभार – स्वराज्य सवेरा

दरअसल, अल्ताफ पर एक नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण का आरोप लगा था। ऑपइंडिया के पास उस केस की FIR मौजूद है। यह FIR कोतवाली नगर कासगंज में दर्ज हुई थी। FIR के अनुसार दिनाँक 8 नवम्बर 2021 (सोमवार) को अल्ताफ़ ने अपने दोस्त के साथ मिलकर 16 साल की एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर दिल्ली भेज दिया था। आरोप में यह भी कहा गया है कि लड़की अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र भी साथ ले गई। बताया जा रहा है कि अल्ताफ घरों में रंगाई-पुताई और टाइल्स लगाने का काम करता था। जिस घर की लड़की गायब हुई थी, वहाँ भी वह टाइल्स लगाने का काम कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, अल्ताफ के मोबाईल में कुछ अश्लील वीडियो भी मिले थे। इसी वीडियो के आधार पर उस पर शक पुख्ता हुआ था।

फेक व्यूज मामले में एक साल बाद 446 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, मुंबई पुलिस ने रैपर बादशाह और अभिनेत्री कोएना मित्रा को बनाया गवाह

सोशल मीडिया पर फेक फॉलोवर्स जुटाने के मामले में आरोपित सिंगर बादशाह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। इस मामले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सिंगर के खिलाफ एक साल से भी अधिक समय के बाद अब चार्जशीट फाइल कर दिया है। क्राइम ब्रांच द्वारा दायर 446 पन्नों की चार्जशीट में बताया गया है कि गायक आदित्य प्रतीक सिंह उर्फ ​​​​बादशाह ने यू्ट्यूब पर 72 लाख व्यूज पाने के लिए 74 लाख रुपए का भुगतान किया था।

मिड डे की रिपोर्ट के मुताबिक, चार्जशीट में 11 पंच, 25 गवाह और पाँच आरोपितों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें से चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। जाँच एजेंसी ने बादशाह और कोएना मित्रा के अलावा Chtrbox, Qyuki Digital Media Pvt Ltd और Sony Music India के अधिकारियों को गवाह बनाया है। उल्लेखनीय है कि फेक व्यूज का यह केस पिछले साल जुलाई 2020 में उस दौरान सामने आया था, जब गायिका भूमि त्रिवेदी ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने इंस्टाग्राम पर उनके नाम से एक फर्जी आईडी बनाई है। इस मामले की जाँच का जिम्मा फिलहाल बर्खास्त किए गए इंस्पेक्टर सचिन वाजे को सौंपी गई थी। सचिन वाजे उस दौरान क्राइम इंटेलीजेंस यूनिट में थे।

वाजे के सामने बादशाह ने ये कबूल किया था कि वह एक समझौते के तहत सोनी म्यूजिक इंडिया कंपनी से जुड़े थे। उन्होंने ‘पागल है’ गाना रिकॉर्ड किया था और इसे सोनी म्यूजिक इंडिया को दे दिया, जिसे सोनी अपने यूट्यूब चैनल पर प्रसारित करने वाला था। बादशाह ने सोनी से कहा कि अगर इस गाने को 24 घंटे में 72 लाख व्यूज मिले तो यह वर्ल्ड रिकॉर्ड होगा। बादशाह ने क्राइम ब्रांच को दिए एक बयान में कहा, “मैंने क्यूकी डिजिटल मीडिया प्राइवेट को 74,26,370 रुपए (18% जीएसटी सहित) का भुगतान किया था।”

इस मामले में ‘क्यूकी डिजिटल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड’ के सीएफओ महेंद्र पटेल ने क्राइम ब्रांच के सामने बताया था कि उनकी कंपनी तैयार विज्ञापनों की वीडियो कंटेंट को प्रमोट करती है। उन्होंने कहा, “बादशाह के गाने ‘पागल है’ के प्रचार के लिए सोनी म्यूजिक के जय मेहता ने हमारी कंपनी से संपर्क किया। हमारी कंपनी ने बादशाह के गाने ‘पागल है’ को यूट्यूब पर प्रमोट किया और बदले में बादशाह से जीएसटी के साथ 74,26,370 रुपए लिए गए थे।”

सोनी म्यूजिक इंडिया के सीनियर मार्केटिंग डायरेक्टर सनुजीत भुजबल ने भी क्यूकी डिजिटल मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से डील को स्वीकार किया है। इस मामले के एक आरोपित और एथिकल हैकर प्रेमेंद्र शर्मा ने मिड-डे को बताया कि उसके जरिए 7-8 लोगों के फॉलोअर्स बढ़ाए गए थे। शर्मा के अलावा अन्य आरोपी अभिषेक दावड़े, कासिफ मंसूर, विजय बंथिया और तबीश अली मीर फिलहाल हैं।

‘इतनी हॉट हो… कमर पर रोटी सेंक दूँ’: मल्लिका शेरावत से प्रोड्यूसर ने कही थी ये बात

बॉलीवुड की कई फिल्मों में हॉट सीन देने के कारण पहचानी जाने वाली मल्लिका शेरावत ने द लव लॉफ लाइव शो के दौरान एक अजीबोगरीब खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि एक प्रोड्यूसर एक गाने में उनके कमर पर रोटियाँ सेंकने के इच्छुक था।

शो में मल्लिका ने कहा कि उन्होंने ऐसे सीन को करने से मना कर दिया, लेकिन उन्हें ये कॉन्सेप्ट अंदर से बेहद मजेदार और ओरिजनल लगा था। उन्होंने शो में बताया कि एक बार एक प्रोड्यूसर उनके पास गाने का आइडिया लेकर आया और उसने कहा, “बड़ा हॉट गाना है। दर्शकों को कैसा पता चलेगा की आप हॉट हैं? आप इतनी हॉट है कि आपकी कमर पर मैं चपाती सेंक सकता हूँ (यह एक बहुत ही हॉट गाना है।)”

मल्लिका ने इस तरह के सीन के मना कर दिया। उन्होंने कहा, “हम ऐसा कुछ नहीं करने वाले।” वह आगे कहती हैं, “लेकिन ये मुझे बहुत हास्यास्पद और असली आइडिया लगा।”

अभिनेत्री कहती हैं कि उनको नहीं पता कि आखिर भारत में हॉट का क्या अर्थ समझा जाता है। उन्हें तो ये बहुत अजीब लगा। वह कहती हैं, “ मुझे लगता है कि लोगों में भारतीय महिला की हॉटनेस के लिए अजीब धारणा है। मैं ये समझ नहीं पाती हूँ। बेशक ये सब बेहतर है, लेकिन जब मैंने अपना करियर शुरू किया था तो ये सारी चीजें बहुत अजीब थीं।”

बता दें कि मल्लिका शेहरावत ने ख्वाहिश और मर्डर जैसी फिल्मों में काम किया था। उन्हें बॉलीवुड में लोग एक सेक्स सिंबल की तरह जानते हैं। अपने पहले के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि लोग उन्हें ऑनस्क्रीन छवि से जज करते हैं और पुरूष को-स्टार उनके साथ उसी तरह व्यवहार करते हैं।

उन्होंने बताया था कि लोग उनसे कहते थे, “जब तुम स्क्रीन पर किसिंग कर सकती हो तो फिर प्राइवेट लाइफ में इंटिमेट क्यों नहीं होतीं।” वह कहती हैं, “लोग समझते थे कि अगर मैं शॉर्ट स्कर्ट पहनती हूँ और स्क्रीन पर किस करती हूँ तो मैं बिन मर्यादा, लाज-शर्म वाली महिला हूँ।” 

गोरखपुर के अस्पताल में बच्चों मौत का मामला: योगी सरकार ने डॉक्टर कफील खान को किया बर्खास्त, कहा- कोर्ट जाऊँगा

गोरखपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के मामले में यूपी सरकार ने डॉक्टर कफील खान को बर्खास्त कर दिया है। डॉक्टर कफील खान को पहले ही निलंबित किया जा चुका था। बता दें कि गोरखपुर के ‘बाबा राघव दास (BRD) हॉस्पिटल’ में अगस्त 2017 में ऑक्सीजन की कमी से 60 से अधिक बच्चों की मौत का मामला सामने आया था। इस मामले में डॉक्टर कफील खान पर लगे आरोपों की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया गया था।

अब राज्य की चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त किए जाने का आदेश दिया है। अपने निलंबन के विरुद्ध डॉक्टर कफील खान ने ‘इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA)’ का दरवाजा खटखटाया था। उन्हें मिला कर इस मामले में कुल 9 लोगों पर आरोप हैं। 24 फरवरी, 2020 को राज्य सरकार ने दोबारा विभागीय जाँच के आदेश जारी किए थे, लेकिन उसे अगस्त 2021 में वापस ले लिया गया था। 15 अप्रैल, 2019 को जाँच अधिकारी की रिपोर्ट दायर हुई थी।

डॉक्टर कफील खान पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगे थे। डॉक्टर कफील खान इस मामले में जेल भी जा चुके हैं। वो CAA और NRC के विरुद्ध हुए विरोध प्रदर्शनों में भी खासे सक्रिय रहे थे और शाहीन बाग़ जैसे उपद्रवों में हिस्सा लिया था। जब गोरखपुर के BRD अस्पताल में ये घटना हुई थी, तब योगी सरकार को सत्ता में आए 5 महीने ही हुए थे। सस्पेंशन के बाद डॉ. कफील को डीजीएमई के दफ्तर से अटैच कर दिया गया था। डॉक्टर कफील खान फिर हाईकोर्ट पहुँचे।

बता दें कि विभागीय जाँच की रिपोर्ट लोक सेवा आयोग को भेजी गई, जिसके आधार पर आयोग ने डॉक्टर कफील को बरख़ास्त कर दिया। अब डॉक्टर कफील खान ने इसके खिलाफ अदालत में अपील करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि मामला उच्च-न्यायालय में चल रहा है और 17 दिसंबर, 2021 को सुनवाई की अगली तारीख़ है। बता दें कि योगी सरकार के प्रयासों के कारण राज्य में इंसेफ्लाइटिस पर काबू पाने में बड़ी सफलता मिली है। डॉक्टर कफील खान पहले इन्सेफेलाइटिस वार्ड के नोडल ऑफिसर थे।

साथ ही उन पर सरकारी नौकरी से इतर प्राइवेट प्रैक्टिस करने के भी आरोप लगे थे। उन्हें निलंबित हुए 4 वर्ष हो गए हैं। शाहीन बाग़ जैसे अन्य आंदोलन खड़ा करने के आरोप में यूपी एसटीएफ ने भी उन्हें गिरफ्तार किया था। साथ ही उन पर ‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)’ में घृणास्पद भाषण देने के आरोप भी हैं। डॉक्टर कफील खान अक्सर वामपंथी मीडिया के जरिए मोदी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार करते रहते हैं। सोशल मीडिया पर भी वो खासे सक्रिय हैं।

‘अल्लामा इक़बाल पाकिस्तानी नहीं, कहाँ-कहाँ से निकालोगे?’: बोले BHU उर्दू विभाग के HOD आफताब अहमद, अब ऑडियो क्लिप से भड़के छात्र

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का उर्दू विभाग पोस्टर के बाद एक ऑडियो क्लिप बाहर आने से अभी भी विवादों में बना हुआ है। दरअसल, उर्दू दिवस पर आयोजित वेबिनार के पोस्टर में महामना मदन मोहन मालवीय की तस्वीर की जगह अल्लामा इकबाल की तस्वीर लगाई गई थी जिसपर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया।

हालाँकि, मामले को तूल पकड़ता देख आर्ट्स विभाग के डीन विजय बहादुर सिंह इस पर माफी माँगते हुए और उर्दू विभाग के अध्यक्ष आफताब अहमद से जवाब माँगा है। साथ ही छात्रों की माँग पर जाँच समिति का गठन कर दिया गया है। जिसे छात्र लीपापोती कमेटी कह रहे हैं।

वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया, “उर्दू दिवस के अवसर पर उर्दू विभाग द्वारा आयोजित वेबिनार के ई-पोस्टर को लेकर उत्पन्न हुए विवाद के संबंध में तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, को नोटिस जारी किया गया है। इस बारे में तथ्यों की जाँच के लिए प्रो.के.एम.पांडे,विभागाध्यक्ष, अंग्रेज़ी विभाग, की अध्यक्षता में जाँच समिति गठित की गई है। प्रो. बिमलेन्द्र कुमार, विभागाध्यक्ष, पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग, समिति के सदस्य एवं सहायक कुलसचिव, कला संकाय, सदस्य सचिव होंगे। समिति 3 दिन में रिपोर्ट सौंपेगी।”

वहीं, उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी ने बुधवार (10 नवंबर, 2021) को कहा, “अल्लामा इकबाल को कहाँ-कहाँ से निकालेंगे। इकबाल पर विवाद नहीं होना चाहिए। वह पैदा भारत में हुए और भारत विभाजन से करीब दस साल पहले उनकी मृत्यु हो गई। 1938 में लाहौर में उन्होंने अंतिम साँस ली थी। उन्हें पाकिस्तानी की संज्ञा देना मेरी समझ से परे है। उन्हीं के जन्मदिन को उर्दू दिवस के रूप में मनाया जाता है।” हालाँकि, प्रोफेसर आफताब अहमद ने इस पूरे विवाद पर माफी माँगते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था।

विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए पोस्टर

बता दें कि बुधवार को ही कार्यक्रम का एक ऑडियो क्लिप बाहर आया जिससे मामले ने फिर तूल पकड़ लिया और विश्वविद्यालय परिसर में कई जगह सावरकर विचार मंच द्वारा पोस्टर लगाए गए हैं। तो वहीं उर्दू विभाग द्वारा आयोजित वेबिनार में आपत्तिजनक क्रियकलापो के संदर्भ में ABVP BHU द्वारा कुलपति को ज्ञापन सौंप कर उच्च स्तरीय जाँच की माँग की गई।

ABVP द्वारा कुलपति को सौंपा गया ज्ञापन

कला संकाय के डीन ने जो जाँच कमेटी बनाई है छात्र उसका विरोध करते हुए उसे लीपापोती कमेटी कह रहे हैं। ABVP BHU ने कुलपति से मिल कर यह माँग रखी है कि विश्वविद्यालय अपने स्तर से उच्चस्तरीय जाँच कराए। जिसमें संकाय का कोई भी शिक्षक न रहे। साथ ही छात्रों का कहना है कि इस वेबिनार में आपत्तिजनक विचार भी रखे गए है इसलिए इसकी रिकार्डिंग भी सार्वजनिक की जाए।

कुलपति को ज्ञापन सौंपते छात्र

इस सम्बन्ध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति से भेंट कर तीन सूत्रीय माँग पत्र सौंपा। जिसमें तीन सूत्रीय माँग रखी गई है।

  1. कला संकाय स्थित उर्दू विभाग द्वार आयोजित वेबिनार की समयबद्ध उच्च स्तरीय जाँच हो। विश्वविद्यालय प्रशासन अपने स्तर पर एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करे एवं वेबिनार के माध्यम से किए गए आपत्तिजनक क्रियाकलापों की ज़िम्मेदारी तय करते हुए दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
  2. उक्त वेबिनार की सम्पूर्ण रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक किया जाए जिससे वेबिनार में हुई गैर शैक्षणिक एवं आपत्तिजनक चर्चाओं का खुलासा हो सके।
  3. विश्वविद्यालय प्रशासन यह सुनिश्चित करे कि इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो एवं यह सुनिश्चित किया जाए कि विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाले सभी सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वेबिनार की सम्पूर्ण जानकारी कम से कम एक सप्ताह पूर्व विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध रहे।

इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, BHU के विभाग संयोजक अधोक्षज पांडेय ने कहा, “काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की परंपरा रही है कि विश्वविद्यालय के हर आधिकारिक कार्यक्रम के पोस्टर में पंडित मदन मोहन मालवीय जी की तस्वीर होती है परन्तु उर्दू विभाग द्वारा आयोजित इस वेबिनार में ऐसा नहीं किया गया बल्कि भारत के विभाजन एवं घोर साम्प्रदायिक विचारों वाले शायर इकबाल की तस्वीर उंस पोस्टर में प्रदर्शित की गई जिससे छात्रो की भावना को ठेस पहुँची। उक्त वेबिनार के दौरान JNU समेत अन्य स्थानों के वक्ताओं ने घोर आपत्तिजनक एवं साम्प्रदायिक वक्तव्य दिया जिससे समाज में वैमनस्यता पैदा हो सकती है। यह विश्वविद्यालय की गरिमा के खिलाफ है एवं विद्यार्थी परिषद इसका सख्त विरोध करता है।“

ABVP के विभाग सह संयोजक अभय प्रताप सिंह ने भी अपनी बात रखते हुए कहा, “उर्दू दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम को शैक्षणिक न रखते हुए सांप्रदायिक बना दिया गया। इस कार्यक्रम में ऐसे व्यक्ति के महिमामंडन का प्रयास किया गया जो कि भारत देश के विभाजन में अग्रणी भूमिका निभाने वाले था एवं घोर सांप्रदायिक एवं हिन्दू घृणा से ग्रस्त था। कार्यक्रम के आयोजन में जो बातें सामने आ रही हैं उससे विश्वविद्यालय की छवि को ठेस पहुँची है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यह माँग करता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जाँच करा कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे।”

कोच ने ही की पहलवान निशा और उनके भाई की हत्या, छेड़खानी के विरोध पर हुई घटना: ‘सुशील कुमार एकेडमी’ में ले रही थीं ट्रेनिंग

हरियाणा को सोनीपत में अंडर-23 विश्व कुश्ती चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली राष्ट्रीय स्तर की पहलवान निशा दहिया और उनके भाई की हत्या की न्यूज फर्जी है। वो जिंदा हैं और गोंडा में सीनियर नेशनल खेल रही हैं। लेकिन जिस कुश्ती खिलाड़ी की हत्या हुई उसका नाम भी निशा ही है और वह भी विश्वविद्यालय स्तर की खिलाड़ी थीं।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक कुश्ती खिलाड़ी निशा (22) जूनियर रेसलर थीं। वो सोनीपत के हलालपुर गाँव के बाहर स्थित सुशील कुमार कुश्ती एकेडमी में ट्रेनिंग ले रही थीं। निशा की हत्या के पीछे कारण बताया जा रहा है कि उसका कोच पवन उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा था, जिसका पीड़िता ने विरोध किया। विरोध से नाराज कोच ने पीड़िता की गोली मारकर हत्या कर दी और उसके घर फोन कर शव को वहाँ से ले जाने को कहा।

मौके पर जब पीड़िता की माँ और उसका भाई पहुँचे तो उनपर भी जानलेवा हमला किया गया। आरोपितों ने पीड़िता के छोटे भाई सूरज (18) और उसकी माँ को भी गोली मार दी। इस वारदात में पीड़िता के अलावा उसके छोटे भाई की भी मौत हो गई है, जबकि माँ गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हैं और उनका पीजीआई रोहतक में इलाज चल रहा है।

साभार: दैनिक जागरण

घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने एकेडमी पर धावा बोल दिया। उन्होंने वहाँ जमकर तोड़फोड़ की। इसके अलावा ट्रैक्टर से टक्कर मारकर एकेडमी की इमारत को ढहा दिया और वहाँ आग लगा दी गई। पुलिस ने पीड़िता की माँ की शिकायत पर पुलिस ने चार नामजद आरोपितों समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। फिलहाल घटना के बाद से आरोपित कोच पवन, पत्नी और बच्चों समेत फरार हो गया है।

साभार: दैनिक भास्कर

फिलहाल, शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। सुरक्षा के नाजुक हालात को देखते हए गाँव में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है।

गौरतलब है कि इससे पहले निशा दहिया की हत्या की खबर सामने आने के बाद अधिकतर न्यूज चैनलों ने ये समझा की नेशनल लेवल की पहलवान निशा दहिया की हत्या हुई। इस खबर को भी चलाया गया, लेकिन बाद में निशा ने सामने आकर खुद के जिंदा होने का सबूत दिया।

हिंदुत्व की आतंकवाद से तुलना कर फँसे सलमान खुर्शीद: दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज, कश्मीरी पंडितों पर कहा – बाहर हो गए तो हो गए

हिंदुत्व की आतंकवाद से तुलना करने पर कॉंग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस में शिकायत की गई है। यह आरोप उनकी किताब सनराइज ओवर अयोध्या में की गई एक टिप्पणी के आधार पर लगा है। इस किताब का विमोचन 10 नवम्बर 2021 (बुधवार) को किया गया था। सलमान खुर्शीद के ख़िलाफ़ दिल्ली के पुलिस कमिश्नर से शिकायत करने वाले वकील का नाम विवेक गर्ग है।

इसी के साथ एक अन्य वकील विनीत जिंदल ने भी सलमान खुर्शीद के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत की है। शिकायतकर्ता विनीत जिंदल की माँग है कि सलमान खुर्शीद पर 153, 153 A, 298 और 505 (2) के तहत मुकदमा चलाया जाए। शिकायतकर्ता के अनुसार पूर्व में केंद्रीय मंत्री रह चुके सलमान खुर्शीद के इन शब्दों से हिन्दुओं की भावनाएँ व्यापक रूप से आहत हुई हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता विवेक गर्ग का आरोप है कि सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब में हिंदुत्व की तुलना ISIS और बोको हराम जैसे जिहादी संगठनों से की है। सलमान खुर्शीद ने हिन्दू धर्म की सबसे बड़े प्रेरणा गाँधी द्वारा बताए गए सिद्धांतों को माना है। उनके अनुसार उस पर कोई और लेवल लगा दिया जाए तो उसे वो नहीं मानने वाले। हिंदुत्व की राजनीति पर सलमान खुर्शीद का कहना है कि उनकी पार्टी में कुछ नेताओं को अल्पसंख्यक समर्थक छवि होने का पछतावा है। उनके अनुसार पार्टी का एक धड़ा पार्टी की पहचान जनेऊधारी के रूप में स्थापित करना चाहता है।

हालांकि जनेऊधारी शब्द पर सवाल करने के बाद भी सलमान खुर्शीद ने ये नहीं बताया कि उनका इशारा किस की तरफ है। अयोध्या फैसले के बाद ख़ुशी को सलमान खुर्शीद ने कहा कि ऐसा लग रहा कि ख़ुशी पर एक ही पार्टी की है। उनका इशारा भारतीय जनता पार्टी की तरफ था।

सलमान खुर्शीद की इस किताब के विमोचन के बाद विरोध का सिलसिला शुरू हो गया है। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने वीडियो जारी करते हुए सलमान खुर्शीद के विरोध में बयान दिया है। कपिल मिश्रा ने सलमान खुर्शीद की किताब को हिंदुत्व के विरुद्ध “बेशर्म कोशिश” करार दिया है। कपिल मिश्रा ने कहा है कि सलमान खुर्शीद ऐसा क्यों साबित करना चाहते हैं कि उनमें भी हामिद अंसारी वाली ही सोच है। कपिल मिश्रा ने सवाल किया कि’ ‘पूरी दुनिया में मानव बम कौन है, ?कपिल मिश्रा के अनुसार जिस देश ने सलमान खुर्शीद को इतना सम्मान दिया उसके विरुद्ध उनके मन में जहर भरा हुआ है। इसी के साथ उन्होंने इस्लामी आतंकवाद को छिपाने की साजिश के रूप में सलमान खुर्शीद जैसे तमाम लोगों को सक्रिय बताया।

इसी के साथ हिंदुत्व के उदारता वाले मुद्दे पर अमीश देवगन के साथ एक बहस में सलमान खुर्शीद ने कश्मीरी पंडितों पर आपत्तिजनक बात कही। अमीश देवगन ने सवाल किया कि, “क्या उदारता का मतलब ये है कि कश्मीरी पंडित कश्मीर से बाहर हो जाएँ?” इस पर उत्तर देते हुए सलमान खुर्शीद ने बेहद बेरुखी से कहा कि, “अरे हो गए तो हो गए…”

इस बहस के अंश को अशोक पंडित ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर भी किया है। अशोक पंडित ने लिखा है कि दिव्यांगों का अनुदान खा लेने वाले व्यक्ति से और क्या उम्मीद की जा सकती है?

इस बीच कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा सलमान खुर्शीद को कासगंज में कथित रूप से पुलिस कस्टडी में मरे अल्ताफ़ की मौत का जायजा लेने वाले प्रतिनिधि मंडल का सदस्य नियुक्त किया गया है। कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा वायरल किए जा रहे एक आधिकारिक पत्र में सलमान खुर्शीद के साथ राशिद अल्वी, तौकीर आलम, डॉली शर्मा और पंखुड़ी पाठक के कासगंज पहुँचने की बात कही जा रही है। चर्चाओं के अनुसार ये प्रतिनिधि मंडल प्रियंका गाँधी के निर्देश पर बनाया गया है। मृत अल्ताफ को एक नाबालिग लड़की के अपरहरण केस में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

congress leader salman khursheed compare hindutva as terrorist group isis and boko haram in his new launch book

महिला कर्मी का यौन शोषण, नौकरी से निकालने की धमकी भी: यूपी पुलिस कर रही अधिकारी इच्छाराम यादव का ‘माकूल इलाज’

उत्तर प्रदेश के लखनऊ से अल्पसंख्यक विभाग में तैनात एक अंडर सेक्रेटरी द्वारा एड हॉक महिला कर्मचारी का यौन शोषण करने का मामला सामने आया है। आरोपित इच्छाराम यादव महिला को नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर महिला के साथ जबरदस्ती कर रहा था। उसकी इस घिनौनी हरकत का वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपित व्यक्ति 30 साल की शादीशुदा पीड़िता को जबरन चूमने की कोशिश करता है। इसके अलावा वह उसके स्तन को दबाने की कोशिश करता है। वहीं महिला खुद को उससे बचाने की भरपूर कोशिश कर रही है। एक अन्य वीडियो में आरोपित महिला का हाथ पकड़कर अश्लील हरकतें भी कर रहा होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने आरोप लगाया है कि आरोपित इच्छाराम यादव उसे नौकरी से निकलवाने की धमकी देकर लंबे समय से उसका शारीरिक शोषण कर रहा है। पीड़िता ने 29 अक्टूबर को आरोपित के खिलाफ लखनऊ के हुसैनगंज थाने में केस दर्ज करवाया था। हालाँकि, जब आरोपित के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई तो पीड़िता ने वीडियो को वायरल कर दिया। फिलहाल आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

आरोपित के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 506 और 294 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बहरहाल इस मामले में हुसैनगंज थाने के इस्पेक्टर अजय कुमार सिंह के मुताबिक, पीड़िता की शिकायत पर अल्पसंख्यक विभाग में तैनात अंडर सेक्रेटरी इच्छाराम यादव के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि आरोपित का ‘माकूल इलाज’ किया जा रहा है ।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़िता को मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वो पहुँची ही नहीं। इसके अलावा पीड़िता ने एफआईआर में अपना एड्रेस नहीं लिखा है, जिससे अब उसके ऑफिस में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया है। फिलहाल आगे की कार्रवाई की जा रही है।

‘मैं बर्बाद हो गया’: ED की पूछताछ में फफक-फफक कर रोया जेल में बंद अतीक अहमद, अब बेटे की संपत्तियों पर भी होगी कार्रवाई

अपने आपराधिक साम्राज्य के खिलाफ लगातार चल रही कानूनी कार्रवाई के बाद आख़िरकार माफिया अतीक अहमद का सब्र फूट पड़ा है। गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक पूछताछ करने गए ED के अधिकारियों के आगे फफक कर रो पड़ा है। अतीक अहमद ने ED अधिकारियों को बताया कि वो बर्बाद हो गया है। ED ने अतीक अहमद से 27 और 28 अक्टूबर को लंबी पूछताछ की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार माफिया अतीक अहमद व उसके गुर्गों को मिला कर अब तक 355 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा माफिया व अपराधियों के विरुद्ध छेड़े गए सघन अभियान के तहत हुई है। इस अभियान में अतीक अहमद का दफ्तर, प्रयागराज विकास प्राधिकरण से नक्शा पास करवाए बिना बने घर को भी गिरा दिया गया है। अतीक की कंपनियों एफ एंड ए एसोसिएट्स, इंफ्रास्टेट प्राइवेट लिमिटेड और इंफ्रा ग्रीन प्राइवेट लिमिटेड पर ED की विशेष नजर है।

अतीक अहमद की अन्य काली कमाई की जानकारी जुटा रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ED की प्रयागराज शाखा ने 3 जून, 2019 से साबरमती की जेल में बंद अतीक के विरुद्ध कई माह पहले मनीलांड्रिंग का केस दर्ज किया था। साबरमती जेल में अतीक अहमद से पूछताछ के लिए ED की 3 सदस्यीय टीम ने सेशन कोर्ट से अनुमति ली है। इस टीम का नेतृत्व ईडी के डिप्टी डायरेक्टर कर रहे हैं। अतीक अहमद द्वारा कई प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर न दिए जाने की भी बात कही गई है।

Z न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार माफिया अतीक के 2 लाख के इनामी बेटे उमर पर भी ED कार्रवाई करने जा रही है। जानकारी के अनुसार अतीक अहमद ने अपनी कई सम्पत्तियाँ अपने बेटे के नाम कर रखी हैं। ED ने अपनी जाँच में उमर के नाम दर्ज सम्पत्तियों का ब्यौरा निकालना शुरू कर दिया है। उमर के नाम रियल स्टेट कंपनियों की भी जानकारी ED को मिली है। यह सम्पत्तियाँ नोएडा, लखनऊ और कई अन्य शहरों में बताई जा रही हैं। इसमें से कई सम्पत्तियाँ दूसरों के भी नाम खरीदी गई हैं। ED उन सभी को अटैच करने की तैयारी कर रही है।

अतीक के बेटे उमर की तलाश सीबीआई को भी है। सीबीआई ने उमर पर 2 लाख रुपये का इनाम भी रखा है। यह इनाम लखनऊ के एक कारोबारी का अपहरण करने और उन्हें देवरिया जेल में ले जा कर पीटने के आरोप पर रखा गया है। CBI कोर्ट उमर की सम्पत्तियों को कुर्क करने के आदेश पहले ही जारी कर चुकी है। कुछ ही समय पूर्व अतीक अहमद की पत्नी ने AIMIM की सदस्यता ली थी। उन्हें ओवैसी ने सदस्यता दिलाई थी। गुजरात में साबरमती जेल जा कर ओवैसी ने अतीक से मुलाक़ात की भी कोशिश की थी लेकिन उनको मिलने नहीं दिया गया था।

बांग्लादेश से आए 63 हिन्दू परिवारों की पुनर्वास योजना: योगी सरकार देगी खेती के लिए जमीन और घर, मनरेगा से नौकरी भी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा फैसला लेते हुए 1970 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से आए 63 विस्थापित हिंदू परिवारों की पुनर्वास योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत इन सभी को पुनर्वास योजना के अंतर्गत कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के भैंसाया गाँव में जमीन और घर दिए जाएँगे। ये अपना जीवन यापन अच्छे से कर सकें, इसीलिए राज्य सरकार ने ये फैसला लिया।

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार (10 नवंबर, 2021) को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, जिसमें से एक ये भी था। रिपोर्ट के मुताबिक, पुनर्वास योजना के अंतर्गत राज्य सरकार ने 121.41 हेक्टेयर जमीन के इस्तेमाल को मंजूरी दी है। इसके तहत सरकार ने हर परिवार को कृषि कार्य के लिए 2 एकड़ जमीन और घर के लिए 200 वर्ग मीटर भूमि दिए जाने का निर्णय लिया। इसके अलावा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत प्रति परिवार 1.20 लाख रुपए की धनराशि आवंटित की जाएगी। मनरेगा के तहत यहाँ विकास के कार्य भी शुरू किए जाएँगे, ताकि इन्हें गाँव में ही सम्मानजनक कार्य मिल सके।

दरअसल, 1970 के दशक में बांग्लादेश से 63 हिंदू परिवार यहाँ आए थे, जो बाद में यहीं के होकर रह गए। इन लोगों को मदन कपास मिल में रोजगार दिया गया था। लेकिन बाद में मिल बंद हो गई, जिससे ये लोग फिर से बेरोजगार हो गए। अब बीते 30 सालों से ये इसी तरह से बेरोजगार हैं। जल्द ही राजस्व विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह कानपुर देहात का दौरा कर पुनर्वास योजना के लिए जमीनों को देखेंगे।

योगी कैबिनेट द्वारा लिए गए अन्य फैसले

विस्थापित हिंदू परिवारों के पुनर्वास के अलावा भी योगी कैबिनेट ने अन्य महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसी क्रम में ‘उत्तर प्रदेश मातृभूमि योजना’ योजना को मंजूरी दी गई है। इस योजना के अंतर्गत बाहरी लोग अपने गाँव के विकास में योगदान दे सकेंगे। वकीलों के कल्याण के लिए योगी सरकार ने यूपी अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम-1974 के संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिससे रजिस्ट्रेशन से 30 साल पूरा करने पर 5,848 वकीलों को 1.5-5 लाख तक की एकमुश्त रकम दी जाएगी। इसके अलावा इटावा में 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए मंजूरी समेत अन्य फैसले लिए गए।