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गोरखपुर में छत पर पाकिस्तानी झंडा, पप्पू कुरैशी हिरासत में: तालीम, आशिक और आरिफ पर भी चलेगा राजद्रोह का केस

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक घर के ऊपर पाकिस्तान से मिलता जुलता झंडा लगाने की शिकायत पुलिस में की गई है। यह घटना चौरी चौरा इलाके के मुंडेरा बाज़ार वार्ड नंबर 10 की है। इस केस में पुलिस में FIR दर्ज कर के 4 लोगों को आरोपित किया है। यह घटना 10 नवम्बर 2021 (बुधवार) की है।

गोरखपुर पुलिस ने इस घटना में की गई कार्रवाई की जानकारी अपने आधिकारिक ट्विटर पर साझा की है। गोरखपुर पुलिस के अनुसार, कस्बा चौरी चौरा में घर पर पाकिस्तानी झंडा लगे होने की सूचना पर कुछ व्यक्ति इकट्ठा हुए। इस पर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुँच कर शांति व्यवस्था कायम की गई। युवक की तहरीर पर 4 व्यक्तियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत किया गया है। झंडे को कब्ज़े में ले लिया गया है। पुलिस की 3 टीमें गठित कर के आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार तहरीर ब्राह्मण जन कल्याण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्याण पांडेय द्वारा दी गई है। आरोपितों पर राजद्रोह के तहत कार्रवाई की गई है। लॉ एन्ड ऑर्डर सामान्य रखने के लिए एहतियातन फ़ोर्स लगा दी गई है। बताया जा रहा कि वायरल फोटो का संज्ञान ले कर जब पुलिस मकान तक पहुँची तब वहाँ कोई झंडा नहीं मिला था। पुलिस ने चेक किया तो मकान भी अंदर से बंद मिला। लगभग एक घंटे बाद मकान खुला।

मौके पर मिले एक व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई जिसने झंडा लगाने वाले पप्पू कुरैशी के घर के आगे खड़ी गाडी में तोड़फोड़ भी की। मौके पर विश्व हिन्दू परिषद के भी कार्यकर्ता पहुँच गए। इस घटना के फलस्वरूप मची गहमागहमी और भीड़ के आक्रोश का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मौके पर पहुँचे एस पी नार्थ ने बताया कि झंडा पाकिस्तानी है अथवा मज़हबी इसकी जाँच की जा रही है। इसी के साथ आरोपितों के पुराने रिकॉर्ड भी तलाशे जा रहे हैं। तहरीर में जिन्हे आरोपित बनाया गया है उनके नाम तालीम पुत्र मुल्ला, पप्पू पुत्र विस्मिल्लाह, आशिक पुत्र पप्पू और आरिफ पुत्र पप्पू हैं।

‘किसी का योगदान आप कैसे भुला देंगे?’: अखिलेश-राजभर के बाद अब यूपी के नेता प्रतिपक्ष ने सरदार पटेल से की जिन्ना की तुलना

समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जिस ‘जिन्ना के जिन्न’ को बोतल से निकाला है, वो फ़िलहाल वापस जाता नहीं दिख रहा है। अब उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी ने मोहम्मद अली जिन्ना को राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम में प्रथम पंक्ति का नेता बताया है। उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना देश की आज़ादी की लड़ाई में भागी थे और उन नेताओं में वो प्रथम पंक्ति में थे। इससे पहले अखिलेश यादव राजभर ने जिन्ना की तारीफ़ की थी।

बलिया के बाँसडीह से विधायक रामगोविंद चौधरी ने कहा कि महात्मा गाँधी के बाद जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और मौलाना अबुल कलम आजाद जैसे लोग आज़ादी की लड़ाई में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि जब भारत स्वतंत्रता की लड़ाई जीत गया, उसके बाद बँटवारे की बात आई। रामगोविंद चौधरी ने TV9 भारतवर्ष से बात करते हुए ये बातें कही। उन्होंने पूछा कि जब आज़ादी की लड़ाई के बाद बँटवारे की बात आई तो फिर किसी का योगदान आप कैसे भुला देंगे?

रामगोविंद चौधरी ने कहा कि इस बात से सहमति जताई कि 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ तो इसमें जितना योगदान नेहरू-पटेल का था, उतना ही जिन्ना का भी था। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है। हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि जिन्ना बँटवारे के दोषी हैं। बता दें कि रामगोविंद चौधरी ने बाँसडीह से 2002, 2012 और 2017 में विधानसभा चुनाव जीता है। इससे पहले वो दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पार्टी ‘समाजवादी पार्टी (राष्ट्रीय)’ का हिस्सा हुआ करते थे।

रामगोविंद चौधरी ने अपना पहला विधानसभा चुनाव बलिया के चिलकहर से जीता था। कुल मिला कर वो अब तक 8 बार विधायक रहे हैं। 1990 में मुलायम सिंह यादव की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया था। 2003 में बनी मुलायम सिंह यादव की सरकार और 2007 में अखिलेश यादव की सरकार में भी वो कैबिनेट मंत्री रहे हैं। यादव समुदाय से ताल्लुक रखने वाले रामगोविंद चौधरी ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से 1974 में BA और 1982 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से वकालत की LLB की डिग्री ली थी।

बता दें कि इससे पहले समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष (SBSP) ओमप्रकाश राजभर ने अपने नए ‘पार्टनर’ के नक्शे कदम पर चलते हुए जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़े थे। उन्होंने कहा था, ”अगर मोहम्मद अली जिन्ना को भारत का पहला प्रधानमंत्री बना दिया गया होता तो देश का बँटवारा नहीं होता।” बता दें कि पिछले दिनों यूपी के हरदोई में एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के साथ की थी।

बंगाल में बच्चों को समलैंगिक संबंधों पर फ़िल्में दिखाए जाने का मामला: एक्टिव हुआ NCPCR, सेंसर बोर्ड को पत्र लिख माँगा जवाब

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष प्रसून जोशी को बुधवार (10 नवंबर 2021) को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा, ”NCPCR को शिकायत मिली है, एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘समावेश (Inclusiveness)’ को लेकर जागरूक करने के लिए राज्य (पश्चिम बंगाल) में फिर से स्कूल खुलने के बाद समलैंगिक संबंधों पर 8 शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी।” उन्होंने कहा, ”CBFC कृपया 10 दिनों के भीतर अपनी प्रतिक्रिया दें कि क्या चयनित फिल्मों ने राज्य में स्क्रीनिंग के लिए प्रमाणन प्राप्त किया है या नहीं। अगर, हाँ तो चयनित फिल्मों को किस श्रेणी का प्रमाणन प्रदान किया गया है।”

जाने क्या है मामला

पश्चिम बंगाल के विद्यालयों में बच्चों को अब ‘समावेश (Inclusiveness)’ को लेकर जागरूक करने के लिए समलैंगिक संबंधों पर 8 शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। ये ऐसी फ़िल्में हैं, जिन्हें ‘Prayasam’s Bad’ और ‘ब्यूटीफुल वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल’ द्वारा चुना गया है। कोरोना आपदा के बाद अब जब राज्य के शैक्षिक संस्थान धीरे-धीरे खुल रहे हैं, छात्र-छात्राओं को ‘युवा फिल्म निर्देशकों’ द्वारा बनाई गई ये शॉर्ट फ़िल्में दिखाई जाएँगी। Prayasam के बारे में बता दें कि ये ‘संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF)’ से जुड़ी संस्था है।

ये संगठन एक ऐसा माहौल बनाने का दावा करता है, जिसमें युवाओं को खुद को सशक्त महसूस करने को मिले। इन फिल्मों को इन लोगों ने बनाया है, वो हैं – सलीम शेख, मनीष चौधरी, सप्तर्षि रॉय, और अविजित मार्जित। ये सभी नज़रुल पल्ली के महिषबाथान स्थित दाखिंडारी में रहते हैं। ये इलाका राजधानी कोलकाता में ही स्थित है। ये सभी ‘Prasyam विज़ुअल बेसिक्स एशिया’ की आधारभूत फिल्म स्टूडियो के छात्र हैं, जिसे एडोबी (Adobe) नामक कंपनी का समर्थन प्राप्त है।

इनका कहना है कि इन शॉर्ट फिल्मों को बच्चों को दिखा कर ‘समावेशी शिक्षा’ को बढ़ावा दिए जाने का उद्देश्य है। इन लोगों का कहना है कि LGBTQ युवा खुद को समाज से अलग या अवांछित महसूस न करें, इसके लिए ऐसा करना आवश्यक है। ‘Prayasam’s’ के निदेशक प्रशांत रॉय ने कहा कि स्कूलों के खुलते ही उनमें ये शॉर्ट फ़िल्में बच्चों को दिखाई जाएँगी। इन फिल्मों का टाइटल RESH (जिसकी ऊँची और गहरी आवाज़ की प्रकृति हो) रखा गया है। 8 short films on same sex relationship ncpcr writes to CBFC

प्रियंका गाँधी की रैली के बाद कॉन्ग्रेस कार्यालय पर लगा ताला: 2019 से नहीं दिया किराया, बुजुर्ग मालिक को सालों दे रहे ‘लॉलीपॉप’

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा की रैली के बाद गोरखपुर जिला कॉन्ग्रेस कमेटी के कार्यालय पर फिर से ताला जड़ दिया गया है। बताया जा रहा है कि तीन साल से किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने कॉन्ग्रेस कार्यालय पर ताला लगा दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मनी त्रिपाठी ने ‘गोरखपुर के बुजुर्ग राजमन राय जी का किराया मत मारिए, दे दीजिए, नैतिकता नाम की कोई चीज़ बची है?’ लिखते हुए ट्विटर अकाउंट पर इसका वीडियो पर भी शेयर किया है।

उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस पार्टी को टैग करते हुए लिखा, ”राहुल गाँधी जी गोरखपुर के राजमन राय जी की रातों की नींद उड़ी हुई है कॉन्ग्रेस की ‘प्रापर्टी हड़पो नीति’ के चलते। आपसे अनुरोध है कि इन बुजुर्ग को बख्श दीजिए, आदत के अनुसार इनकी संपत्ति पर कब्जा मत करिए, इनका किराया दे दीजिए।”

हालाँकि, यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी साल 2019 में लोकसभा चुनाव के पहले पुरदिलपुर स्थित कॉन्ग्रेस के कार्यालय पर ताला लगा दिया गया था, जिसके बाद कॉन्ग्रेसियों ने ट्रांसपोर्ट नगर में किराए पर कमरा लेकर कार्यालय खोला था। इस मामले में पीड़ित मकान मालिक का कहना है कि मैंने कॉन्ग्रेस कार्यालय पर ताला इसलिए मारा है, क्योंकि मुझे आज तक किराया नहीं मिला है। मैं बार-बार किराया माँगता हूँ, तो कहते हैं बस प्रियंका जी से बात हो गई है, अध्यक्ष जी से बात हो गई है, लेकिन ऐसा कहकर मुझे लॉलीपॉप देते रहे।

उन्होंने आगे कहा कि लोकसभा चुनाव 2019 से लेकर अब तक का किराया बाकी है। अभी तक एक भी पैसा नहीं मिला है। ताला मारने के बाद मेरी उनसे कोई बात नहीं हुूई है, क्योंकि उन्हें संपर्क करने में शर्म आ रही है। किराया नहीं मिला तो कानूनी कार्रवाई भी करूँगा। बता दें कि 31 अक्टूबर को प्रियंका गाँधी वाड्रा की चंपा देवी पार्क में हुई रैली के तत्काल बाद मकान मालिक ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित जिला कॉन्ग्रेस कमेटी के कार्यालय पर ताला लगा दिया था।

नाबालिग से गैंगरेप मामले में गायत्री प्रजापति दोषी करार, अखिलेश यादव की सरकार में रहे हैं मंत्री: 12 नवंबर को सुनाई जाएगी सज़ा

समाजवादी पार्टी की सरकार में परिवहन, खनन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री का दायित्व संभालने वाले गायत्री प्रसाद प्रजापति को लखनऊ की एक अदालत ने सामूहिक बलात्कार का दोषी करार दिया है। चित्राकूट की एक महिला से गैंगरेप के मामले में लखनऊ के एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट ने उन्हें दोषी पाया। उनके साथी अशोक तिवारी और आशीष शुक्ला को भी इस मामले में दोषी पाया गया। इस मामले में शुक्रवार (12 नवंबर, 2021) को अदालत सज़ा सुनाएगी।

हालाँकि, अदालत ने विकास वर्मा, रूपेश्वर, अमरेंद्र सिंह, पिंटू और चंद्रपाल नामक आरोपितों को बरी भी कर दिया है। सभी आरोपितों को मौखिक साक्ष्य उपलब्ध कराने का मौका दिया गया था, जिसकी समयसीमा 2 नवंबर, 2021 को ही ख़त्म हो गई थी। मंगलवार को कोर्ट में एक अर्जी लगा कर पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति ने इसकी अवधि बढ़ाए जाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मुक़दमे की तारीख़ आगे बढ़ाई जाए। उन्होंने इस मुक़दमे को किसी अन्य राज्य में ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में भी ‘विशेष अनुमति याचिका’ दायर कर रखी है।

साथ ही एमपी-एमएलए कोर्ट के उस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में चुनौती दी गई है जिसमें उसके बचाव के सबूत पेश करने की अर्जी को खारिज कर दिया गया था। 8 नवंबर, 2021 को अभियोजन की ओर से प्रार्थना पत्र देकर अदालत से निवेदन किया गया था कि गवाह अंशु गौड़ ने अपने बयान में स्पष्ट कहा है कि पीड़िता को कई जमीनों की रजिस्ट्री और भारी रकम का लालच देकर कोर्ट में सही गवाही न देने के लिए राजी किया गया था। पीड़िता को प्रभावित करने की कोशिश हुई थी।

इस मामले में सबूत भी पेश किए गए थे। लखनऊए के रजिस्ट्रार और पीड़िता की तरफ से दिल्ली की अदालत को दिए गए कलमबंद बयान को तलब करने की भी माँग की गई थी। पीड़िता एमपी-एमएलए कोर्ट में गायत्री प्रजापति पर लगाए गए गैंगरेप के आरोपों से मुकर चुकी है। वो फ़िलहाल जेल में बंद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2017 में उनके विरुद्ध FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके अगले ही महीने उनकी गिरफ़्तारी हुई थी। अब उन्हें दोषी करार दिया गया है।

17 गवाह और पुलिस की चार्जशीट के आधार पर गायत्री प्रजापति को दोषी पाया गया, लेकिन उन्होंने अपने वकीलों के जरिए मामले को उलझाने और लंबा खींचने की खूब कोशिश की। दरअसल, एक महिला ने आरोप लगाया था कि जब वो पूर्व मंत्री से उनके आपस पर मिलने पहुँची थीं तो नशा देकर उनकी नाबालिग बेटी के साथ गैंगरेप किया गया। साथ ही किसी को बताने पर जान से मरने की धमकी भी दी। पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ और 824 पन्नों की चार्जशीट दायर की गई थी।

‘जिन्ना बनते देश के पहले PM तो नहीं होता बँटवारा’: अखिलेश यादव के बाद अब उनके ‘पार्टनर’ का उमड़ा ‘जिन्ना प्रेम’

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही एक बार फिर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना का जिन्न बाहर आ गया है। अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात कहने वाले समाजवादी पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष (SBSP) ओमप्रकाश राजभर ने अब अपने नए ‘पार्टनर’ के नक्शे कदम पर चलते हुए जिन्ना की तारीफ में कसीदे पढ़े हैं।

अखिलेश यादव ने जिन्ना को स्वतंत्रता सेनानी बताया है। क्या आप इससे सहमत हैं? मीडियाकर्मी के इस सवाल पर राजभर ने बुधवार (10 नवंबर 2021) को कहा, ”अगर मोहम्मद अली जिन्ना को भारत का पहला प्रधानमंत्री बना दिया गया होता तो देश का बँटवारा नहीं होता।”

उन्होंने आडवाणी, अटल बिहारी का हवाला देते हुए कहा, “जिन्ना को लेकर आडवाणी जी, अटल जी और उनके शुभचिंतकों के विचार पढ़िए। वो क्यों उनकी तारीफ करते थे।” पत्रकार पर भड़कते हुए होते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ने कहा कि आप लोगों पर जिन्ना का भूत सवार है। महँगाई पर क्यों नहीं कुछ पूछते हो?

राजभर यही नहीं रुके उन्होंने भाजपा पर जमकर हमले भी किए। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी से अगर मुसलमान हटा दिया दिजिए, भारत-पाकिस्तान हटा दिया दिजिए, हिंदू-मुसलमान हटा दिजिए और मंदिर-मस्जिद हटा दिजिए तो उनकी जबान बंद हो जाती है। वही भाषा आप लोगों ने बोलना शुरू कर दी है।

इससे पहले ओमप्रकाश राजभर ‘मारने-दफनाने’ जैसे शब्दों के साथ मैदान में उतरे थे। उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में देश की सबसे बड़ी पार्टी यानी BJP को जमीन में दफन करने की धमकी दी थी। साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की बात भी कह डाली थी।

बता दें कि पिछले दिनों यूपी के हरदोई में एक जनसभा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जिन्ना की तुलना महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल के साथ की।

‘केजरीवाल का तरीका ऐसा ही, जैसे मिथुन फिल्मों में साइकिल के पीछे छिप कर गोली से बचते हैं’: नदी में पानी के छिड़काव पर बोले लोग

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आप सरकार यमुना नदी में जहरीले झाग को खत्म करने के लिए जिस तरीके को अपनाया है, उसके कारण बुधवार (10 नवंबर 2021) को नेटिजन्स ने ट्विटर पर #ScientistKejriwal को ट्रेंड कराया।

दरअसल, दिन में दिल्ली जल बोर्ड ने जहरीले झाग को खत्म करने के लिए यमुना नदी पर पानी का छिड़काव किया था। केजरीवाल सरकार ने ऐसा इसलिए किया ताकि जहरीला झाग पानी में ही मिल जाए।

आगे बढ़ने से पहले यहाँ हम ये स्पष्ट कर दें कि अरविंद केजरीवाल एक भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के पूर्व अधिकारी हैं और उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), कानपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया है।

ट्विटर यूजर ‘द स्किन डॉक्ट’र ने दिल्ली के मुख्यमंत्री की ‘गुप्त नोटबुक डायरियों’ में से एक व्यंग्यपूर्ण पन्ना को ट्वीट किया। यह नोटबुक उस दौरान की थी जब वह एक छात्र थे। इसमें सवाल से अधिक महत्वपूर्ण उसका जवाब है जो कि व्यंग्यात्मक था। दरअसल, मौजूदा परिवेश में जब भी दिल्ली से जुड़ी कोई समस्या सामने आती है तो केजरीवाल सरकार उससे अपना मुँह मोड़ लेती है। ऐसे में अगर वह इस तरह का उत्तर देते हैं तो किसी को कोई भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

केजरीवाल सरकार यमुना नदी में लकड़ी के बने बैरिकेड लगाकर उसके झाग को रोकने की कोशिश कर रही है ताकि श्रद्धालुओं स्नान कर सकें। अब कई ट्विटर यूजर इस मामले में चर्चा कर रहे हैं। हालाँकि, जो बैरिकेड्स लगाए गए हैं, उनमें से पानी और झाग आसानी से गुजर सकता है। ऐसे में पूरी कवायद तर्कहीन प्रतीत होती है।

लोगों का कहना है कि केजरीवाल सरकार का यह तरीका ठीक वैसा ही है जैसे कि हिंदू फिल्मों में मिथुन चक्रवर्ती साइकिल का इस्तेमाल गोलियों से बचने के लिए ढाल के तौर पर करते हैं।

ऐसा ही एक और दृश्य था जहां अभिनेता धर्मेंद्र ने नंगे हाथों से उस पर चलाई गई एक गोली को इकट्ठा किया और बस थोड़ा खूनी चोट के साथ समाप्त हुआ। फोम की बैरिकेडिंग ठीक इसी तरह से काम कर सकती है।

कई नेटिज़न्स ने यह भी बताया कि कैसे ‘वैज्ञानिक’ केजरीवाल ने एक मीम को जीवित कर दिया।

एक ट्विटर यूजर ने आगे बताया कि कैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री फरवरी 2015 से यमुना को साफ करने का वादा कर रहे हैं।

यहाँ केजरीवाल की एक एडिडेट इमेज है जो इसे साफ करने के लिए यमुना में कूद रही है। ट्विटर यूजर पीस_फुल ने उन्हें ‘लवणासुर‘ करार दिया। लोकप्रिय ट्विटर यूजर @being_humor द्वारा उन्हें ये उपनाम दिया गया है। उल्लेखनीय है कि रामायण में लवणासुर नाम का राक्षस था, जिसका वध भगवान राम के भाई शत्रुघ्न ने किया था। मान्यता है कि लवणासुर निर्दोषों का तड़पाकर उनकी हत्या कर देता था। बचपन में वह अपने खेलने के साथियों को मार कर खा जाता था। वह ऋषियों के तप को भंग कर पूरे देश में आतंक फैलाता था।

ट्विटर यूजर ‘Being_Humor’ के मुताबिक, लवणासुर की तरह अपनी हरकतों से लोगों को सताते हैं और लोगों को मुश्किल में डाल देते हैं। तथ्य यह है कि नाम अजीब लगता है और सामान्य रूप से एक कठबोली की तरह लगता है, उन्होंने आप सुप्रीमो को उपनाम का उपहार दिया है।

यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली सरकार के शीर्ष नेताओं में से किसी एक को आम जनता ने ‘वैज्ञानिक’ की उपाधि से नवाजा है। जनवरी 2020 में दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को ‘साइंटिस्ट सिसोदिया‘ भी कहा जाता था और उनके वैज्ञानिक ज्ञान के कारण हैशटैग ट्रेंड कर रहा था, जहाँ उन्होंने दावा किया था कि दिल्ली की जल आपूर्ति पाइपों में स्वच्छ पानी प्राप्त करना ‘वैज्ञानिक रूप से असंभव’ था। इससे दिल्ली के डिप्टी सीएम पर मीम्स की भी बाढ़ आ गई थी।

‘राष्ट्रीय स्तर की पहलवान निशा दहिया और उनके भाई की गोली मार कर हत्या’: मीडिया ने चलाई खबर, जानिए क्या है सच्चाई

कई बड़े मीडिया संस्थानों ने बुधवार (10 नवंबर, 2021) की शाम को खबर चलाया कि राष्ट्रीय स्तर की भारतीय पहलवान निशा दहिया की गोली मार कर हत्या कर दी गई है। बताया गया कि अज्ञात लोगों द्वारा अंजाम दी गई इस घटना में निशा दहिया के भाई की भी मौत हो गई। ये भी ध्यान देने लायक बात है कि इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में चल रहे ‘रेसलिंग चैंपियनशिप’ में प्रदर्शन के लिए निशा सहित चारों मेडल विजेता भारतीय महिलाओं को बधाई दी थी।

हालाँकि, इसके कुछ ही देर बाद निशा दहिया ने अपने इंस्टाग्राम पेज से वीडियो जारी कर के बताया कि वो ठीक हैं और मीडिया में चल रही खबर फेक है। उन्होंने बताया कि वो गोंडा में एक टूर्नामेंट में हिस्सा लेने आई हैं और बिलकुल ठीक हैं। सबसे पहले देखते हैं कि मीडिया ने कैसे निशा दहिया की हत्या की खबर चलाई:

मीडिया ने चलाई निशा दहिया की हत्या की खबर

इसके अलावा कई अन्य मीडिया संस्थानों ने भी इस खबर को चलाया:

NDTV ने भी इस खबर को चलाया

हालाँकि, अब भारतीय टीम के के साथ ट्रेवल करने वाले कोच ने बताया है कि जिस निशा की हत्या हुई है, वो अंडर-23 वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली निशा दहिया नहीं हैं, बल्कि एक न्यूकमर खिलाड़ी हैं। देखिए राष्ट्रीय स्तर की रेसलर निशा दहिया का वीडियो, जो उन्होंने इस खबर के वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश स्थित गोंडा में नेशनल चैंपियनशिप के कैंप से जारी किया:

बता दें राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निशा दहिया ने कि शुक्रवार (5 नवंबर, 2021) को बेलग्रेड में अंडर-23 चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। 65 किलोग्राम वजन कैटेगरी में उनकी जीत के लिए ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी थी। सोनीपत के एसपी राहुल शर्मा ने जानकारी दी है कि सोनीपत में एक महिला पहलवान और उसके भाई की हत्या कर दी गई है, जबकि माँ का अस्पताल में इलाज चल रहा है। एसपी ने स्पष्ट किया है कि मृतका निशा और राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निशा दहिया – दोनों अलग-अलग हैं।

राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निशा दहिया जिन्हें पीएम मोदी ने बधाई दी थी और जो फ़िलहाल राष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही हैं, वो पानीपत की रहने वाली हैं। जबकि जिस निशा की हत्या हुई है, वो घटना सोनीपत की है।

विराट कोहली की बेटी को रेप की धमकी देने वाला IIT इंजीनियर अकुबाथिनी हैदराबाद से गिरफ्तार, मुंबई लाकर होगी पूछताछ

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा की बेटी को रेप की धमकी देने वाला शख्स हैदराबाद से गिरफ्तार कर लिया गया है। मुंबई पुलिस साइबर सेल ने बुधवार (10 नवंबर) को जिस आरोपित को गिरफ्तार किया, उसकी पहचान रामनागेश श्रीनिवास अकुबाथिनी के रूप में हुई है। 23 वर्षीय रामनागेश हैदराबाद में ही रहता है। उसने आईआईटी हैदराबाद से बीटेक किया है और एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। इससे पहले वह एक फूड डिलीवरी ऐप के लिए काम करता था।

टीम इंडिया के गेंदबाज मोहम्मद शमी को पाकिस्तान से हारने के बाद ऑनलाइन आलोचनाओं का शिकार होना पड़ा था। इसको लेकर टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने शमी का समर्थन किया था। कप्तान के समर्थन से नाराज ट्विटर अकाउंट @Criccrazyygirl ने विराट और अनुष्का शर्मा की नौ महीने की बेटी को बलात्कार की धमकी दी थी। हालाँकि, अब यह अकाउंट डिलीट कर दिया गया है। आरोपित अकुबाथिनी को मुंबई लाकर पूछताछ की जाएगी। इस मामले में आगे की जाँच जारी है।

कोहली की बेटी को ट्विटर पर रेप की धमकी मिलने के मामले में दिल्ली महिला आयोग ने भी संज्ञान लिया था। उनकी ओर से पुलिस को नोटिस भेजा गया था। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए आरोपित की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग की थी।

बता दें कि भारत के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ हार का सामना करने के बाद ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा था। इसके बाद शमी के समर्थन में सचिन तेंदुलकर, वीवीएस लक्ष्मण, वीरेंद्र सहवाग समेत कई बड़े खिलाड़ी आगे आए थे। 

सीएम योगी के दौरे से पहले मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी, पश्चिमी यूपी के सभी जिले अलर्ट पर

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरुवार (11 नवंबर 2021) को मेरठ के दौरे पर जा रहे हैं। लेकिन उससे पहले एक अनजान पत्र ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस पत्र में मेरठ सिटी रेलवे स्टेशन को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। इस बीच सुरक्षा के हालात को मद्देनजर रखते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मेरठ रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर को डॉक के जरिए एक पत्र मिला है, जिसमें रेलवे स्टेशन में बम ब्लास्ट करने की धमकी दी गई थी। इस बीच रेलवे के अधिकारियों ने जाँच अभियान चलाया। रेलवे के अधिकारियों ने धमकी भरा पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए इसकी जाँच शुरू कर दी है। फिलहाल, इस तरह के पत्र के बाद न केवल मेरठ, बल्कि गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और मुरादाबाद समेत कई स्टेशनों को अलर्ट कर दिया गया है। इसके अलावा कई मंदिरों को भी उड़ाने की धमकी दी गई है।

इस घटना को लेकर रेलवे के पुलिस उपाधीक्षक बुधवार को कहा कि जीआरपी थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 502/2 के अंतर्गत केस दर्ज किया गया है। शुरुआती तौर पर पुलिस अधिकारी ने इसे किसी की शरारत भरी हरकत माना है। बहरहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं और पुलिस अतिरिक्त एहतियात बरत रही है।

गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में रेलवे स्टेशनों को उड़ाने की धमकी दी गई हो। इस दिवाली से पहले भी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के एरिया कमांडर के नाम से एक पत्र जारी कर कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज समेत राज्य के 46 रेलवे स्टेशनों को बम से उड़ाने की धमकी दी थी। उस धमकी के बाद से सुरक्षा एजेंसियाँ सतर्क हैं।