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अयोध्या की तरह अबू धाबी में भी बन रहा एक भव्य मंदिर, 1000 साल होगी उम्र: PM मोदी ने रखी थी आधारशिला, देखिए Video

अयोध्या के भव्य राम मंदिर की तरह संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में भी पहले हिंदू मंदिर का निर्माण कार्य जारी है। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसमें स्टील, लोहे या उससे बनी सामग्री का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। इसका निर्माण भारत की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के तहत हो रहा है। इस मंदिर का निर्माण बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था कर रही है। यह मंदिर 2023 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है।

मंदिर के एक प्रतिनिधि ने खलीज टाइम्स को बताया कि मंदिर के आधार का काम पूरा हो गया है। भारत से कारीगर आने पर गुलाबी बलुआ पत्थर लगाने का काम भी पूरा हो जाएगा। बीएपीएस मंदिर के प्रवक्ता ब्रह्मविहारी स्वामी ने बताया कि अबू मुरीखाह स्थित मंदिर की भूमि पर बलुआ पत्थर की मोटी परत बिछाई गई है। 

मंदिर निर्माण के लिए भारत में 3,000 कारीगर दिन रात काम में लगे हुए हैं, जो मार्बल से नक्काशीदार चिह्न और मूर्तियाँ बना रहे हैं। इसके अलावा 10 देशों के 30 पेशेवर कारीगरों ने कई सॉफ्टवेयर का उपयोग कर मंदिर का 3D मॉडल बनाने के लिए 5,000 घंटे दिए। मंदिर के लिए अधिकतर पत्थर तराशने का काम भारत में राजस्थान और गुजरात के संगतराशों ने किया है। हाथों से तराशे गए इन पत्थरों में भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास की झलक दिखने के साथ अरब प्रतीक भी होंगे। इसमें रामायण, महाभारत समेत हिंदू पुराणों के प्रसंगों से जुड़े चित्र होंगे। मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू शिल्प शास्त्र के मुताबिक किया जा रहा है।

बीएपीएस मंदिर के अनुसार, इतिहास में यह पहली बार है कि एक पारंपरिक हिंदू मंदिर को पूरी तरह से डिजिटल रूप से तैयार किया गया है और साथ ही दबाव, तापमान और भूकंपीय घटनाओं का लाइव डेटा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर 300 से अधिक सेंसर लगाए गए हैं।

प्रोजेक्ट मैनेजर टीनू साइमन ने कहा, “जब हमने इस प्रोजेक्ट को शुरू किया, तो मैं वाकई में हैरान था क्योंकि खुदाई के स्तर तक पहुँचने से पहले ही हम ऊँचे चट्टान पर पहुँच गए थे। मैं 15 साल से अधिक समय से GCC में काम कर रहा हूँ और पहली बार मुझे इतनी अच्छी नींव इस लिमिट के भीतर मिली है।” बताया जा रहा है कि इस मंदिर की उम्र करीब 1000 साल है यानी एक हजार साल तक मंदिर मजबूती से खड़ा रहेगा।

1,000 साल की नींव के डिजाइन के बारे में बात करते हुए, बीएपीएस के प्लानिंग सेल संजय पारिख ने बताया, “यह पूरी तरह से सुदृढ़ संरचना होगी और इसमें हमारे प्राचीन शिल्प शास्त्र के अनुसार किसी भी लौह धातु का उपयोग नहीं किया जाएगा।”

बता दें कि मास्टर प्लान के डिजाइन को 2020 की शुरुआत में पूरा किया गया था। मंदिर के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पत्थर की नक्काशी के माध्यम से प्रामाणिक प्राचीन कला और वास्तुकला को पुनर्जीवित किया जाएगा। दुबई-अबू धाबी हाइवे पर बनने वाला यह अबू धाबी का पहला पत्थर से निर्मित मंदिर होगा। ये अबू धाबी से 30 मिनट की दूरी पर है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 11 फरवरी 2018 को अबू धाबी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पहले हिंदू मंदिर की आधारशिला रखी थी। पीएम मोदी ने अबू धाबी में बनने वाले भव्य हिंदू मंदिर के लिए 125 करोड़ भारतीयों की ओर से क्रॉउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को धन्यवाद दिया था। उन्होंने इसे भारत की पहचान का जरिया बताया था।

असम में मंदिर, मठ, जंगल… हर जगह घुसे बैठे हैं बांग्लादेशी: 49 लाख बीघा जमीन पर कब्जा, बस सकता है 2 गोवा

हाल ही में असम के सिपाझार में हुई हिंसा में पुलिस के 11 जवान घायल हो गए। 10,000 अतिक्रमणकारियों ने पुलिस को चारों तरफ से घेर लिया और ताबड़तोड़ लाठी-डंडे व ईंट-पत्थर बरसाने लगे। इस संघर्ष में दो अतिक्रमणकारी भी मारे गए। इस घटना के पीछे PFI का हाथ होने की आशंका है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी पूछ चुके हैं कि 60 परिवारों को खाली कराना था तो 10,000 कहाँ से आ गए?

अब पता चला है कि भारत के सबसे छोटे राज्य गोवा के क्षेत्रफल का दोगुना इलाका तो असम में सिर्फ अतिक्रमण की जद में है। कुल मिला कर 49 लाख बीघा, अर्थात 6652 स्क्वायर किलोमीटर की भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। असम के जूनियर राजस्व मंत्री पल्लव लोचन दास ने इस संबंध में 2017 में जानकारी दी थी। ये क्षेत्र सिक्किम के क्षेत्रफल से कुछ ही कम है। 3172 स्कववायर किलोमीटर के जंगल की भूमि पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है

इसमें सबसे ज्यादा अतिक्रमण वैष्णव मठों का हुआ है, जिसे असम में ‘सत्र’ भी कहा जाता है। प्राचीन मंदिरों की भूमि का भी खुल कर अतिक्रमण किया गया है। दरंग जिले में जहाँ अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर हमला बोल था, वहाँ भी सरकारी टीम 7000 बीघा (9 स्क्वायर किलोमीटर) जमीन पर अतिक्रमण खाली कराने के लिए गई थी। हालाँकि, इसके बाद 4000 बीघा जमीन खाली कराने में पुलिस को सफलता मिली है, वो भी बिना किसी हिंसा के।

2017 में आए इन्हीं आँकड़ों के आधार पर भाजपा ने असम विधानसभा चुनाव का घोषणापत्र तैयार किया था। पिछली भाजपा सरकार ने भी काजीरंगा नैशनल पार्क की जमीन पर कब्जा जमा बैठे अतिक्रमणकारियों को निकाल बाहर करने के लिए अभियान चलाया था। 15-16वीं शताब्दी के विद्वान श्रीमंत शंकरदेव से जुड़ी कई जमीनें भी अतिक्रमण की जद में थीं, जो ‘बतदराबा थान’ के हिस्से में आती हैं।

इन अतिक्रमणकारियों में अधिकतर बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठिए हैं, जो बंगाली में बात करते हैं। असम के आदिवासियों के लिए उन्हें खतरे के रूप में देखा जाता है। 2017 में एक सरकारी पैनल की रिपोर्ट में भी आया था कि दिन-रात जमीन कब्जाने में कुछ लोग लगे हुए हैं। आदिवासी विरोध करते हैं तो उन्हें हथियारों का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही कई गाँव बसा लिए गए हैं। नदी से बने द्वीपों पर भी इनका कब्ज़ा है।

बता दें कि असम में 26 सत्रों (वैष्णव मठों) की 5548 बीघा जमीन को घुसपैठियों ने कब्ज़ा रखा है। एक RTI से तो यहाँ तक पता चला था कि असम का 4 लाख हेक्टेयर जंगल क्षेत्र अतिक्रमण की जद में है। ये राज्य के कुल जंगल क्षेत्रों का 22% एरिया है। एक सरकारी समिति ने पाया था कि असम के 33 जिलों में से 15 में बांग्लादेशी घुसपैठिए हावी हैं। इन अतिक्रमणकारियों ने अवैध गाँव के गाँव बसा लिए हैं।

असम की सरकार ने सिपाझार हिंसा के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण दस्तावेज केंद्र सरकार को भेजे हैं और माँग की है कि PFI पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए। राज्य सरकार को ये भी जानकारी मिली है कि PFI के 6 लोगों ने पिछले 3 महीनों में अतिक्रमणकारियों से 28 लाख रुपयों की वसूली की है, जिसके बदले वादा किया गया कि वो अवैध कब्जे को खाली नहीं होने देंगे। जब वो ऐसा करने में नाकामयाब रहे तो उन्होंने भीड़ को उकसाया।

UP की 8432 मस्जिद, जुमे की नमाज, 25 लाख मुस्लिम: कॉन्ग्रेस बाँटेगी संकल्प-पत्र, CAA दंगों व गोहत्या के केस वापस लेने का वादा

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कॉन्ग्रेस पार्टी ने मुस्लिमों को रिझाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। तीन दशक से राज्य में सत्ता से दूर कॉन्ग्रेस अब मुस्लिमों के सहारे लखनऊ में वापसी करना चाहती है। सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर नजर गाड़े कॉन्ग्रेस अब मुल्ले-मौलवियों को अपने पाले में करने में जुटी है। अपने 16 सूत्री संकल्प-पत्र को कॉन्ग्रेस ने मुस्लिमों के घर-घर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है।

कॉन्ग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद वो हर मस्जिद के बाहर अपना संकल्प-पत्र बाँटेगी। अपने संकल्प-पत्र में भी कॉन्ग्रेस ने ऐसे मुद्दों को शामिल किया है, जिससे वो खुद को मुस्लिम हितैषी दिखाते हुए योगी सरकार पर निशाना साध सके। NRC विरोधी दंगों में दर्ज मुकदमे वापस लेने और मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून से लेकर हर जिले में अल्पसंख्यक छात्रावास खोले जाने जैसे वादे इसमें शामिल हैं।

कॉन्ग्रेस ने वादा किया है कि वो मुस्लिम छात्रों को छात्रवृत्ति देगी, मदरसों का आधुनिकीकरण कर के शिक्षकों को बकाया वेतन दिया जाएगा, 30 वर्षों में वक़्फ़ संपत्तियों में हुई कथित धाँधली की जाँच कर दोषियों को सज़ा दी जाएगी, पसमांदा आयोग का गठन किया जाएगा, दंगों की फिर से जाँच होगी, हर मंडल में यूनानी मेडिकल कॉलेज खुलेगा, गोहत्या वाले मुकदमे वापस लिए जाएँगे और मुस्लिमों को खास तौर पर पुलिस में भर्ती किया जाएगा।

कॉन्ग्रेस की योजना है कि इस संकल्प-पत्र को 15 अक्टूबर, 2021 तक हर राज्य के एक मुस्लिम तक फैला दिया जाए। 8432 मस्जिदों के बाहर जुमे की नमाज के बाद इसकी प्रतियाँ बाँटने के लिए अल्पसंख्यक मोर्चा के कार्यकर्ताओं को लगाया जाएगा। 25 लाख मुस्लिमों तक पहुँचने की योजना है। उत्तर प्रदेश में लगभग 20% वोटर मुस्लिम हैं। 143 सीटों पर उनका असर है। इनमें से आधी सीटों पर मुस्लिम जनसंख्या 20-30% के बीच है।

बाक़ी की आधी सीटों पर मुस्लिमों की जनसंख्या 30% से भी अधिक है। 36 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों का दबदबा है और 107 सीटों पर वो चुनाव के नतीजे को प्रभावित करते हैं। इनमें से अधिकतर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी इलाके और तराई में हैं। अब तक ये सपा का ही वोट बैंक माना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस के मैदान में उतरने के बाद अब ऐसा लग रहा है कि दोनों दलों में मुस्लिमों के वोटों के लिए जंग होगी।

इसी साल जून में पार्टी ने कुछ बड़े बदलाव करते हुए CAA आंदोलन में सक्रिय रहे शायर इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद को भी आगे बढ़ाया। पाँच राज्यों में नतीजे अपने खिलाफ जाने से परेशान पार्टी ने इमरान प्रतापगढ़ी को उत्तर प्रदेश में पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का अध्यक्ष नियुक्त किया। इमरान मसूद को ‘अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस कमिटी’ में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया। कॉन्ग्रेस मुस्लिम नेताओं को जम कर आगे बढ़ा रही है।

भाजपा ने भी कॉन्ग्रेस की मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर निशाना साधते हुए कहा, “राम मंदिर के विरोध से लेकर आतंकियों के लिए आँसू बहाने तक कॉन्ग्रेस हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति करती रही। अब यूपी कॉन्ग्रेस में अपना संकल्प पत्र मस्जिदों के बाहर बाँटने के मिशन पर निकली है। कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी को यह बताना चाहिए कि उनके चुनावी संकल्प पत्र के वादों पर ‘पहला हक़’ किसका है?”

इसी साल कॉन्ग्रेस ने मौलानाओं-उलेमाओं के साथ वर्चुअल बैठकों का दौर भी शुरू किया है। जून 2021 में बस्ती और संत कबीरनगर से इसकी शुरुआत की गई थी। उन्हीं मौलानाओं-उलेमाओं के सुझावों के आधार पर कॉन्ग्रेस ने अपना संकल्प-पत्र तैयार किया है। देवबंद, सहारनपुर, मुरादाबाद और बेरली पर पार्टी ने ध्यान केंद्रित कर रखा है, जहाँ मुस्लिम शिक्षण संस्थान ज्यादा हैं। घोषणापत्र बनाने के लिए भी पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को जिम्मेदारी दी गई।

2017 के विधानसभा चुनावों में मुस्लिमों के दबदबे वाली कई सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया था। मुजफ्फरनगर ही भगवामय हो गया था। सपा और बसपा द्वारा कई सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाने के कारण उनके वोट बँटे भी थे। जहाँ 2012 मुस्लिम विधायक बने थे, 2017 में ये संख्या मात्र 25 रह गई। बसपा ने 100 के करीब मुस्लिम कैंडिडेट उतार कर सपा को झटका दिया था। कई मौलानाओं ने भी मायावती के पक्ष में अपील की थी।

सूरत में रेहान प्रोजेक्ट पर रोक: हिंदू पार्टनर बना अशांत क्षेत्र में निर्माण की ली थी अनुमति, मँजूरी मिलते ही किया बाहर

गुजरात के सूरत के अदजान इलाके में रेहान हाइट्स प्रोजेक्ट के निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी गई है। सूरत नगर निगम ने 21 सितंबर 2021 को जारी पत्र में इसकी जानकारी दी है। दरअसल कंपनी पर अशांत क्षेत्र अधिनियम का उल्लंघन कर भवन निर्माण के लिए अनुमति लेने का आरोप है। यह बात सामने आते ही नगर निगम ने निर्माण के लिए दी गई अनुमति को स्थगित कर दी है।

सूरत नगर निगम से जारी पत्र

निगम ने पत्र में कहा है कि टीपी योजना 11 (अदजान) के अंतर्गत फ्लैट नंबर 82 के निर्माण की दी गई अनुमति को स्थगित कर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि यह क्षेत्र अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आता है और सूरत के डिप्टी कलेक्टर ने प्रॉपर्टी हस्तांतरण को रद्द कर दिया था, जिसके बाद यहाँ पर निर्माण गतिविधि की अनुमति को स्थगित कर दिया गया है। लिहाजा अगले आदेश तक भूमि पर कोई निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता है। नोटिस में कहा गया है कि यदि कोई आदेश का उल्लंघन कर निर्माण करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 

हिंदू पार्टनर के नाम पर ली गई थी अनुमति

ऑपइंडिया ने इससे पहले अपनी खबर में बताया था किअशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आने वाले इलाके में किस तरह गुमराह कर निर्माण के लिए अनुमति ली गई थी। सूरत के अदजान इलाके में एक मंदिर के बगल में रेहान हाइट्स प्रोजेक्ट निर्माण के लिए एक मुस्लिम स्वामित्व वाली एंटरप्राइजेज ने हिंदू साथी को सामने पेश कर निर्माण की अनुमति ली, जो कि कानून को धोखा देने जैसा था। अनुमति मिलने के बाद हिंदू पार्टनर को डील से बाहर कर दिया गया।

उल्लेखनीय है कि सूरत का अदजान गुजरात अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आता है, जहाँ अचल संपत्ति का हस्तांतरण केवल कलेक्टर द्वारा संपत्ति को खरीदने वाले और बेचने वाले द्वारा किए गए आवेदन पर हस्ताक्षर करने के बाद ही हो सकता है। संपत्ति बेचने वाले को आवेदन में यह उल्लेख करना होता है कि वह अपनी मर्जी से संपत्ति बेच रहा है।

इस तरह के किसी भी आवेदन के बाद कलेक्टर को औपचारिक जाँच करनी होती है। पुलिस और जिला मजिस्ट्रेट को जाँच करनी होती है। सूरत के कार्यकर्ता असित गाँधी ने बताया थाई ऐसे मामलों में अधिकारियों को मौके पर खुद जाकर सार्वजनिक तौर पर जानकारियाँ इकट्ठी करनी होती है। इसके अलावा प्रभावित लोगों से लिखित में भी स्वीकृति भी लेनी होती है। इस अधिनियम के तहत वे लोग भी शामिल हैं जो उस संपत्ति के आस-पास रहते हैं। सभी प्रक्रियाओं का पालन होने और उससे संतुष्ट होने के बाद ही कलेक्टर संपत्ति के हस्तांतरण की मँजूरी दे सकते हैं।

बता दें कि यह अधिनियम उन क्षेत्रों के धार्मिक और सामुदायिक मूल्य और पहचान को बचाने के लिए है जो जनसंख्या की दृष्टि से अतिसंवेदनशील हैं। यह कलेक्टर की जिम्मेदारी होती है कि सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखा जाए और सांप्रदायिक दंगा न हों। इस अधिनियम के जरिए सरकार राज्य के संवेदनशील हिस्सों में समुदायों के ध्रुवीकरण पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है।

65 घंटे में 24 बैठकें, लंबी यात्रा से लौट नए संसद भवन का निर्माण कार्य देखने पहुँचे PM मोदी: आज डिजिटल आयुष्मान लॉन्च

व्यस्त अमेरिकी दौरे से लौटते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली में फिर से सक्रिय हो गए। उन्होंने रविवार (26 सितंबर, 2021) को अमेरिका से लौटने के बाद भाजपा के एक स्वागत समारोह में हिस्सा लिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई नेताओं ने उनका स्वागत किया। फिर वो आम लोगों से भी मिले, जो उनकी एक झलक देखने आए थे। रात को वो नए संसद भवन के निर्माण कार्य की समीक्षा करने पहुँचे।

रात को 8:45 बजे वो नए संसद भवन के निर्माण कार्यों की समीक्षा के लिए पहुँचे। हालाँकि, उनका ये दौरा अचानक हुआ, जो पूर्व-नियोजित नहीं था। ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ की उस साइट पर पीएम मोदी लगभग एक घंटे तक रहे और इस दौरान वहाँ काम में लगे लोगों से इसकी प्रगति के बारे में पूछा। उनके इस दौरे को लेकर पहले से न कोई सुरक्षा व्यवस्था थी और न ही कोई पूर्व सूचना। सब कुछ अचानक हुआ।

10 दिसंबर, 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन की आधारशिला रखी थी। कई दलों के नेताओं, कई देशों के राजदूतों और उद्योगपति रतन टाटा भी इस समारोह में मौजूद थे। 64,500 स्क्वायर मीटर क्षेत्र में बन रहा नया संसद भवन 2022 तक निर्मित हो जाएगा। योजना है कि 2022 में संसद का शीतकालीन सत्र यहीं हो। इसमें 971 करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। इसमें निर्माण कार्य से लेकर सुरक्षा व अन्य चीजें शामिल हैं।

सोशल मीडिया के माध्यम से कई बड़ी हस्तियों ने प्रधानमंत्री के व्यस्त शेड्यूल और उनकी मेहनत व लगन की प्रशंसा की। लोगों ने कहा कि विमान में इतना समय बिताने के बावजूद पीएम मोदी आते ही काम पर लग गए हैं। लोगों ने कहा कि किसी को यकीन नहीं होगा कि वो अमेरिका में 65 घंटे में 24 बैठकें करने के बाद लौटे हैं। लोगों ने इसकी तुलना कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से की, जो आए दिन शिमला और थाईलैंड में छुट्टियाँ मनाते हैं।

वहीं आज पीएम मोदी सुबह 11 बजे ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ योजना का शुभारंभ करेंगे। इसे ‘प्रधानमंत्री डिजिटल हेल्थ मिशन’ और ‘नेशनल हेल्थ मिशन’ के नाम से भी जाना जाएगा, जिसकी घोषणा लाल किले की प्राचीर से की गई थी। उन्होंने इस दिन को भारत के स्वास्थ्य सेक्टर के लिए एक बड़ा दिन बताया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि तकनीक की सहायता से स्वास्थ्य सुविधाएँ बढ़ाई जाएँगी और इससे इस क्षेत्र में नए प्रयोगों के लिए दरवाजे खुलेंगे।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने अमेरिका दौरे में 65 घंटों के भीतर 24 बड़ी बैठकों में हिस्सा लिया है। इनमें से 4 लंबी बैठकें तो फ्लाइट में ही हुईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक ये अमेरिका दौरा 4 दिनों का था, ऐसे में उनके पास जो भी समय उपलब्ध थे उन्होंने उसका भरपूर उपयोग किया है। अमेरिका दौरे में फ्लाइट में ही उन्होंने कई आधिकारिक फाइलों को भी निपटाया। कई बैठकें होटलों व फ्लाइट में ही हुई।

अवैध धर्मान्तरण मामले में यूपी ATS ने इदरीस, सलीम और आतिफ को किया गिरफ्तार, हवाला के जरिए हुई करोड़ों की विदेशी फंडिंग

उत्तर प्रदेश समेत देशभर में कट्टरपंथी इस्लामिक धर्मान्तरण के मामले में आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। रविवार को हुई इस गिरफ्तारी को लेकर जाँच एजेंसी ने कहा है कि आरोपित धर्मान्तरण कराने के साथ ही विदेशों से हवाला के जरिए वित्त पोषण कर रहे थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, एटीएस ने इसको लेकर एक बयान में कहा है कि ये लोग अवैध धर्मान्तरण कराने के साथ हवाला के जरिए फंडिंग हासिल की थी। जाँच एजेंसी ने दो आऱोपित मोहम्मद इदरीस औऱ मोहम्मद सलीम को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से और महाराष्ट्र के नासिक के रहने वाले कुणाल अशोक चौधरी उर्फ आतिफ को गिरफ्तार किया है।

इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना सलाहकार शलभमणि त्रिपाठी ने कहा, “योगीजी के राज में निरंतर चालू है एटीएस, वही सदैव आपकी सेवा में तत्पर है।”

इससे पहले बीते रविवार को एटीएस ने बुधवार (22 सितंबर, 2021) को अवैध धर्मान्तरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। भारत के सबसे बड़े धर्मान्तरण गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए एटीएस ने यह गिरफ्तारी मेरठ से की थी। पुलिस ने बताया कि मौलाना जामिया इमाम वलीउल्लाह ट्रस्ट चलाता है, जो कई मदरसों को फंड देता है। इसके लिए उसे विदेशों से भारी फंडिंग मिलती है। मौलाना को पूछताछ के लिए मेरठ से लखनऊ लाया गया है। यूपी एटीएस ने कलीम के साथ ही उसके तीन सहयोगी मौलानाओं और ड्राइवर को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।

इसी सिलसिले में जून में एटीएस ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में ए़टीएस की टीम ने धर्मान्तरण कराने वाले दो मौलानाओं को गिरफ्तार किया था। इसमें से एक उमर गौतम पहले हिंदू ही था। वह करीब 30 साल पहले धर्मान्तरण कर मुस्लिम बन गया था। इसके बाद से ही वो दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इस्लामिक दावा सेंटर चला रहा था। यहीं से धर्मान्तरण का सारा खेल खेला जाता है।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए CBI ने डेमो शव के साथ रीक्रिएट किया सीन: बलबीर गिरि समेत कई संतों से पूछताछ

प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसी (CBI) कर रही है। इसी क्रम में जाँच एजेंसी की टीम प्रयागराज पहुँची। यहाँ पर बाघमबरी मठ में सीबीआई की टीम ने सीन को रीक्रिएट किया। इस दौरान महंत के वजन के बराबर एक बोरे को पंखे से लटकाया।

इसके बाद सीबीआई ने सबसे पहले दरवाजा खोलने और शव को फाँसी के फंदे से नीचे उतारने के सीन को दोहराया। इस दौरान जाँच एजेंसी ने सर्वेश, सुमित औऱ धनंजय से सीन को रीक्रिएट करवाया, जैसे दरवाजा खोलने, सबसे पहले क्या देखने और कैंची के संबंध में पूछताछ की। हालाँकि, पंखा चलने को लेकर कोई भी जवाब नहीं दे सका। मठ के पूर्व महंत नरेंद्र गिरि के उत्तराधिकारी बलबीर गिरि समेत कई संतों से पूछताछ की। आश्रम की वीडियोग्राफी भी की। रविवार को ही जाँच एजेंसी नैनी जेल में बंद आनंद गिरि और आद्या से भी पूछताछ करेगी।

कहा ये भी जा रहा है कि जिस वक्त महंत नरेंद्र गिरि की मौत हुई थी, उस दिन आश्रम का कैमरा बंद था। इसके लिए तर्क यह दिया जा रहा है कि पॉवर कट होने के कारण ऐसा हुआ था। दूसरे तर्क में फाँसी लगाकर आत्महत्या किए जाने की बात कही जा रही है, लेकिन उनके बिस्तर पर किसी भी तरह की सिलवटें नहीं थीं।

दीवारों में दफन हैं कई राज

महंत नरेंद्र गिरि की मौत के राज बाघम्बरी मठ की दीवारों में दफन हैं, जिन्हें बाहर निकालने की जरूरत है। आखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को वाई ग्रेड की सिक्योरिटी मिली हुई थी। उनकी सुरक्षा में 11 जवान तैनात थे, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उस दिन वहाँ कोई भी नहीं था।

गौरतलब है कि प्रयागराज में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महंत का शव बाघमबरी मठ में सोमवार (20 सितंबर 2021) को फाँसी के फंदे से लटकता मिला था। महंत की मौत की जाँच के लिए सीबीआई ने 6 सदस्यीय टीमों का गठन किया था।

राकेश टिकैत ने कृषि कानून वापस नहीं लेने पर चुनावी राज्यों में मोर्चा खोलने की केंद्र को दी धमकी, 27 सितंबर को भारत बंद का ऐलान

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ गतिरोध अब भी बरकरार है। किसान आंदोलन को लगभग 10 महीने बीतने के बावजूद अभी इसका हल निकलता नहीं दिख रहा है। इसे लेकर भारतीय किसान यूनियन (BKU) की अगुवाई में रविवार (सितंबर 26, 2021) को हरियाणा के पानीपत में किसान महापंचायत का आयोजन किया गया।

किसान महापंचायत में पहुँचे बीकेयू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि भारत सरकार नए कृषि कानूनों को जितनी जल्दी वापस लेगी उतना सरकार को फायदा होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो संयुक्त किसान मोर्चा के लोग पूरे देश में जाएँगे और केंद्र सरकार के खिलाफ बैठकें और विरोध प्रदर्शन करेंगे। आपके जहाँ-जहाँ चुनाव होंगे आपके चुनाव पर वोट की चोट करने का काम करेंगे। 

आंदोलनकारी किसानों ने 27 सितंबर के भारत बंद की पूरी तैयारी कर ली है। सुबह 6 बजे से शाम 4 बजे तक दिल्ली बॉर्डर के सभी रास्तों पर किसान धरने पर बैठेंगे। आंदोलन स्थल पर गाँव से किसानों को नहीं बुलाया जाएगा। गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान ही एनएच-24 और एनएच-9 को ट्रैफिक के लिए बंद कर देंगे। भारतीय किसान यूनियन के यूपी प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह यादव ने बताया कि आंदोलन स्थल पर काफी बड़ी संख्या में किसान पहले से ही मौजूद हैं। वे किसान ही यहाँ भारत बंद की योजना के तहत कार्य करेंगे। यूपी के जनपदों से किसान उस दिन यहाँ नहीं आएँगे। वे अपने-अपने क्षेत्र में बंद का आयोजन करेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि बंद का आयोजन सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक के लिए किया गया है। इस दौरान सभी सरकारी और निजी दफ्तर, शिक्षण और अन्य संस्थान, दुकानें, उद्योग और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहेंगे। बंद से सभी आपात प्रतिष्ठानों, सेवाओं, अस्पतालों, दवा की दुकानों, राहत एवं बचाव कार्य और निजी इमरजेंसी वाले लोगों को बाहर रखा गया है।

बताया जा रहा है कि बंद के दौरान एंबुलेंस और इमरजेंसी सर्विसेज को नहीं रोका जाएगा। आंदोलनकारी किसानों को साफ हिदायत दी गई है कि एंबुलेंस के सायरन की आवाज को सुनते ही उसके लिए तुरंत रास्ता दिया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा के समर्थन में कई प्राइवेट ट्रांसपोर्ट असोसिएशन फिर से जुड़ गए हैं। यूपी अध्यक्ष जादौन ने बताया कि अगर पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों को हटाने की कार्रवाई की तो किसान जेल जाने को तैयार हैं। वे सड़कों से नहीं हटेंगे।

कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी और आंध्र प्रदेश सरकार ने 27 सितंबर को बुलाए गए ‘भारत बंद’ का पूर्ण समर्थन किया है। वाम दलों और तेलुगू देशम पार्टी ने पहले ही भारत बंद को अपना समर्थन देने की घोषणा की है।

वहीं दिल्ली पुलिस ने कहा कि ‘भारत बंद’ के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त किया गया है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बंद के मद्देनजर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अधिकारी ने कहा कि शहर की सीमाओं पर तीन जगह प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों में से किसी को दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के अगुआ राकेश टिकैत के बारे में किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने राकेश टिकैत को सबसे बड़ा ठग बताया और कहा कि राकेश टिकैत प्रदर्शन कॉन्ग्रेस की फंडिंग के जरिए करवा रहे हैं। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि लोगों को बिना ठगे तो राकेश टिकैत कोई भी काम नहीं करते हैं।

कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो का हवाला दे CJI रमना ने की महिलाओं की 50% आरक्षण की वकालत, कहा- ‘दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ’

न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी पर भारत के मुख्य न्यायधीश एनवी रमना चिंतित हो गए हैं। उन्होंने महिलाओं को न्यायपालिका में उनके लिए 50 फीसदी आरक्षण की माँग करने के लिए प्रोत्साहित किया। सीजेआई ने कहा कि महिला आरक्षण की माँग करना उनका अधिकार है और फिलहाल महिलाओं के पास खोने के लिए कुछ नहीं है।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश ने कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स के कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो के एक प्रसिद्ध उद्धरण का हवाला दिया। जिसमें कहा गया है, ‘दुनिया के मजदूरों, एक हो जाओ!’

CJI ने टिप्पणी की कि उच्च न्यायालय में केवल 11 प्रतिशत महिला न्यायाधीश हैं। निचली न्यायपालिका में यह संख्या 30 के दशक में है और सर्वोच्च न्यायालय में 33 में से केवल 4 न्यायाधीश महिलाएँ हैं।

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा, “इसमें तत्काल सुधार की आवश्यकता है। लोग उन कठिनाइयों का हवाला देंगे, जिनका सामना महिलाओं को पूरी तरह से प्रतिनिधित्व करने के लिए करना पड़ता है। यह सही नहीं है। मैं सहमत हूँ कि क्लाइंट की पसंद है, लेकिन असहज माहौल और बुनियादी ढाँचे की कमी कानूनी पेशे में महिलाओं के लिए सबसे बड़े मुद्दे हैं। 60,000 न्यायालयों में, 22 फीसदी में शौचालय तक नहीं है, जिसके कारण महिला अधिकारी भी पीड़ित हैं।”

मुख्य न्यायधीश ने बताया कि कोरोना की वजह से बंद किए गए कोर्ट फिर से खुल रहे हैं। दशहरे से वहाँ पर सुनवाई शुरू हो जाएगी। उन्होंने और अधिक महिलाओं के न्यायपालिका में शामिल होने की आशा व्यक्त की ताकि 50% प्रतिनिधित्व जल्द ही मिल सके।

महीने में दूसरी बार चीफ जस्टिस ने उठाया मुद्दा

रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने में ऐसा दूसरी बार है जब मुख्य न्यायधीश सीवी रमना ने महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा उठाया है। इससे पहले बार काउंसिल ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा था कि आजादी के 75 साल पूरे होने के बाद भी महिलाओं की भागीदारी केवल 11 फीसदी पर सिमटी हुई है, जबकि इसे 50 फीसदी होना चाहिए था।

केरल में तेजी से बढ़ रहे तालिबान ‘समर्थक’, पढ़ी-लिखी महिलाएँ निशाने पर: CPM के दस्तावेजों से हुआ खुलासा

तालिबान का केरल में समर्थन बढ़ता जा रहा है। केरल की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के एक आंतरिक दस्तावेज से इस बात का खुलासा हुआ है। इन दस्तावेजों को CPM ने अपने पार्टी कैडरों के बीच बाँटा था। इस दस्तावेज के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी हिंद सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का कार्य कर रहा है। दावा है कि जमात केरल में अपने एजेंडे को बढ़ाने के लिए अपने सोशल मीडिया तथा प्रकाशनों का उपयोग कर रहा है। जमात की मंशा इस्लामिक राज की स्थापना है। 

वहीं CPM के दस्तावेजों में दावा किया गया है कि अपने विचारों को मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ दूसरे धर्मों में भी फैला रहा है। इतना ही नहीं, ये भी दावा है कि ईसाइयों को मुसलमानों के विरुद्ध भड़काने का प्रयास भी हो रहा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, केरल की 26 फीसदी आबादी मुसलमान है। CPM के दस्तावेज में बताया गया है, “ये गंभीर चिंता का विषय है कि केरल में तालिबान के सपोर्ट की बातचीत हो रही है। जबकि, मुस्लिम समुदाय सहित विश्वभर में इसकी निंदा हो रही है।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार इसमें दावा किया गया है कि पढ़ी-लिखी औरतों को इस विचारधारा की तरफ लुभाने का प्रयास हो रहा है। CPM ने इसके लिए जमात को अपराधी ठहराया है। साथ-साथ अपने संगठनों एवं कार्यकर्ताओं को सांप्रदायिकता के विरुद्ध एकजुट होने की बात बोली है। दस्तावेजों में ये भी बताया गया है कि संघ परिवार की गतिविधियों की वजह से अल्पसंख्यकों में सांप्रदायिक भावनाएँ बढ़ रही हैं। 

सीपीएम पोलितब्यूरो के सदस्य एमए बेबी ने इंडिया टुडे से कहा, “ये सही है कि हमने अपने पार्टी दस्तावेज में सांप्रदायिक और कट्टरपंथी ताकतों को लेकर आगाह किया है।” हालाँकि, उन्होंने दावा करते हुए ये भी कहा कि युवाओं और छात्रों का ‘कट्टरपंथी और आतंकवादी गतिविधियों’ की ओर जाने को संघ परिवार की गतिविधियों से भी जोड़कर देखना चाहिए। 

सीपीएम ने दावा कि ये गतिविधियाँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की गतिविधियों के जवाब में हो रही हैं। उन्होंने कहा, “RSS की गतिविधियों के जवाब में अल्पसंख्यक समुदाय का एक वर्ग भी उसी तरह के प्रतिशोध की ओर आकर्षित होगा और संघ परिवार की नकल करेगा। हमें इस बात की ओर भी ध्यान देना चाहिए कि कई कथित मुस्लिम देशों की तुलना में भारत में मुसलमान आबादी कहीं ज्यादा है।” हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि केरल में जमात-ए-इस्लामी चरमपंथी ताकतों के पनपने का माहौल बना रही है।

वहीं, जमात-ए-इस्लामी हिंद ने इन आरोपों और दावों को खारिज कर दिया है। जमात के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने कहा कि जमात-ए-इस्लामी हिंद के बारे में गलत धारणा बनाने की कोशिश राजनीतिक मजबूरी या राजनीतिक फायदे के लिए की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जमात का एजेंडा सांप्रदायिक और विभाजनकारी प्रकृति के खिलाफ रहता है। उन्होंने राजनीतिक पार्टियों को सुझाव दिया कि वो झूठा प्रोपेगैंडा फैलाना बंद करें।