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अंग्रेजों ने कैसे भारतीय महिलाओं को बनाया ‘सेक्स स्लेव’: 12-15 महिलाएँ 1000 ब्रिटिश सैनिकों की पूरी रेजिमेंट को देती थीं सेवाएँ

एलिजाबेथ डब्ल्यू एंड्रयू और कैथरीन सी बुशनेल ने 1898 में एक किताब लिखी। उसका नाम था ‘द क्वीन्स डॉटर्स इन इंडिया‘। ये किताब भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान की दु:खद, लेकिन कड़वी सच्चाई को बयाँ करती है। इसमें इस बात का खुलासा किया गया है कि अंग्रेजों के जमाने में ब्रिटिश सेना के सैनिकों के लिए भारतीय महिलाओं का इस्तेमाल ‘सेक्स स्लेव’ (यौन आनंद के लिए किसी को गुलाम बनाना) के तौर पर किया जाता था।

किताब में बताया गया है कि भारत पर नियंत्रण स्थापित करने के बाद अंग्रेजों ने यहाँ पर छावनियाँ बनाईं। ये “छावनी” अंग्रेजों के रहने वाले वो विशेष निवास स्थान थे, जहाँ पर भारत पर शासन करने वाले नागरिक कानून मान्य नहीं थे। लेकिन अंग्रेजों के कुछ मनमाने कानून जरूर चलते थे। ऐसी करीब 100 छावनी स्थापित की गई थीं। इन छावनियों को बनाने का एकमात्र उद्देश्य किसी भी विद्रोहियों से ब्रिटिश सैनिकों की रक्षा करना था।

1864 के छावनी अधिनियमों ने इन छावनियों में वेश्यावृत्ति विनियमित किया गया था। यहाँ गरीब भारतीय महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता देने के नाम पर वेश्यावृति में ढकेल दिया गया और उसे लीगलाइज करने के बाद चकला नाम दिया। भारतीय महिलाओं के अधिकारों का खुलेआम हनन किया गया। जाहिर है, केवल 12-15 भारतीय महिलाओं ने 1000 ब्रिटिश सैनिकों की पूरी रेजिमेंट को अपनी सेवाएँ दीं। ब्रिटिश सेना को समलैंगिकता में फंसने से बचाने के लिए एहतियातन अंग्रेजों ने वेश्यावृत्ति को सही ठहराया।

किताब में बताया गया है, “राज को यह पता था कि अगर ब्रिटिश आर्मी महिलाओं से सेक्स नहीं करेगी तो उसकी हालत ‘सदोम और अमोरा’ बन जाएगी।” 1860 में धारा 377 को लागू किया गया था। इस कानून के तहत समलैंगिकता, अप्राकृतिक यौन संबंध व वहशीपना को दंडनीय अपराध घोषित किया गया। हालाँकि यह पर्याप्त नहीं था। रिपोर्टों के मुताबिक, ब्रिटिश सेना के पुरुष चाहते थे कि युवा लड़कों के लिए इस तरह का एक अलग बाजार होना चाहिए, शायद महिलाएँ आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाती थीं। 1894 में वायसराय ने इस बात को लेकर घोषणा की थी कि वेश्याओं की कमी के कारण यह और अधिक निंदनीय ‘प्राच्य’ और अप्राकृतिक बुराइयों को जन्म देगा। समलैंगिकता का खतरा न केवल दोष के रूप में हैं, बल्कि साम्राज्य की प्रतिष्ठा को संभावित नुकसान भी पहुँचाता है। इसी कारण सशस्त्र बलों को वेश्याओं को उपलब्ध कराने को सही ठहराया गया है।

साभार: द क्वीन्स डॉटर्स इन इंडिया (स्क्रीनशॉट सावित्री मुमुक्षु/ट्विटर)

भारतीय महिलाओं के हर अंग की होती थी जाँच

इतना ही नहीं उसी दौरान अंग्रेजों ने एसटीडी (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) को लेकर एक ज्ञापन जारी किया था, जिसमें ब्रिटिश सैनिकों को भारतीय महिलाओं में यौन रोगों के प्रति आगाह किया गया था। इसके तहत वेश्याओं के साथ सेक्स करने वाले अंग्रेज सैनिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय महिलाओं का प्रतिदिन टेस्ट किया जाता था। जेल के अस्पतालों में होने वाले इन टेस्ट को सर्जिकल रेप माना जाता था, जहाँ संक्रमण की दृष्टि से संभावित शरीर के हर हिस्से की जाँच की जाती थी।

वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश सैनिकों को इस तरह की जाँच से छूट दी गई थी। वह भी तब जब इन सैनिकों के द्वारा इंग्लैंड में बीमारी फैलने का वास्तविक जोखिम था। बावजूद इसके ब्रिटिश अधिकारियों ने पुरुषों के लिए इस तरह के परीक्षणों को ‘क्रूर और अपमानजनक’ बताया था।

पुस्तक में लिखा था, “यौन रोगों को लेकर अंग्रेजों ने एक आदेश जारी किया, जिसमें सैनिकों को स्थानीय महिलाओं के भीतर छिपी ‘गंदगी’ को लेकर चेतावनी दी गई। साथ ही ये भी दावा किया गया कि उष्ण कटिबंधों (कर्क व मकर रेखा के बीच का क्षेत्र) में होने वाले रोग उन रोगों से ज्यादा भयानक हैं, जो उत्तरी यूरोप के ‘अच्छे’ वातावरण में आते हैं। उन्होंने उष्ण कटिबंधों में होने वाले संक्रामक रोगों को ज्यादा से ज्यादा विनाशकारी बताते हुए पेश किया, जो उन पर ज्यादा दुष्प्रभाव डाल रहा था।”

सामाजिक तौर पर गढ़े हुए मिथकों सती प्रथा और बाल विवाह को दूर करने का दिखावा करने वाले ब्रिटिश साम्राज्य को लेकर ‘द क्वीन्स डॉटर्स इन इंडिया’ किताब ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि अंग्रेजों ने भारतीय महिलाओं को जबरन प्रताड़ित किया और उन्हें वेश्यावृत्ति में ढकेलने के साथ ही, यौन गुलाम बनाया था।

‘हमें भी भारत से धमकियाँ मिल रही थीं, फिर भी हम वहाँ गए’: न्यूजीलैंड के बाद इंग्लैंड का पाकिस्तान दौरा रद्द होने से बौखलाए अफरीदी

भारत के खिलाफ अक्सर आग उगलने वाले और नफरत फैलाने वाले बयान देने वाले पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने एक बार फिर से भारत को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। दरअसल पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बीते कुछ दिन अच्छे नहीं बीते हैं। पहले न्यूजीलैंड और फिर इंग्लैंड ने यहाँ का दौरा करने से इनकार कर दिया। ईसीबी और न्यूजीलैंड बोर्ड के इस फैसले को पाकिस्तान पचा नहीं पा रहा है और पूर्व पाकिस्तानी कप्तान शाहिद अफरीदी ने भारत पर दौरे को रद कराने की साजिश का आरोप लगाया है।

अफरीदी ने कहा, “हम सभी इस बात को जानते हैं कि जब कभी भी किसी दौरे का इंतजाम किया जाता है तो सुरक्षा को लेकर काफी पुख्ता इंतजाम होते हैं। जो देश दौरा कर रही होती है उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा बेहद ही अच्छी तरह से जाँच कराया जाता है। इसको लेकर रास्ते तय किए जाते हैं और एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है तभी टीम के दौरे को हरी झंडी दिखाई जाती है।”

उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड के क्रिकेटरों को पाकिस्तान में बहुत प्यार किया जाता है और उनके द्वारा ऐसा कुछ किया जाना माफी के योग्य नहीं है। अगर जो किसी तरह का डर या धमकी वाकई होती तो उनको यह चीज पीसीबी के साथ साझा करनी चाहिए थी। उनको पाकिस्तान की सिक्योरिटी फ़ोर्स को इस स्थिति को भाँपने दिया जाता।

दरअसल पिछले दिनों पाकिस्तान के सूचना मंत्री ने इस बात का दावा किया था कि न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम को भारत की तरफ से धमकी भरा मेल आया था। फवाद चौधरी ने कहा था कि यह जो मेल है वो भारत की तरफ से जेनरेट किया गया था जिसकी वीपीएन लोकेशन सिंगापुर बता रहा है।

अफरीदी ने सूचना मंत्री के दावे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अन्य ‘शिक्षित राष्ट्रों’ को भारत के नक्शेकदम पर नहीं चलना चाहिए और अपनी समझ के अनुसार फैसला लेना चाहिए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हमें एक ऐसा निर्णय लेने की ज़रूरत है, जो दुनिया को दिखाए कि हम भी एक देश हैं और हमारा अपना गौरव है। एक देश हमारे पीछे है तो ठीक है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि दूसरे देशों को भी वही गलती करनी चाहिए। यह सभी शिक्षित राष्ट्र हैं और उन्हें भारत का अनुसरण नहीं करना चाहिए। 

अफरीदी ने आगे कहा, “इसके बजाय, क्रिकेट को संबंधों में सुधार करना चाहिए। भारत में भी स्थिति खराब थीं। हमें धमकियाँ मिल रही थीं। हमारे बोर्ड ने हमें जाने के लिए कहा और हम वहाँ गए। इसी तरह कोविड-19 के दौरान इंग्लैंड में जो हालात थे, क्रिकेट चलता रहा। अगर आप फर्जी ई-मेल पर भरोसा करते हैं और टूर कैंसिल करते हैं तो मेरा मानना है कि आप उन्हें उकसावा दे रहे हैं। यह सही तरीका नहीं है।”

‘मैं सोनिया गाँधी का सिपाही, मेरा क्या कसूर’: प्रेस कॉन्फ्रेंस में रो पड़े पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह, पंजाब के नई कैबिनेट से पुराने मंत्रियों की छुट्टी

पंजाब में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने अपनी कैबिनेट के नए चेहरों का ऐलान कर दिया है। साथ ही उन्होंने मंत्रिमंडल से कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी कर ​दी है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस नेताओं ने नाराजगी व्यक्त की है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहे बलबीर सिंह सिद्धू मंत्री पद से हटाए जाने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही रो पड़े। इसके अलावा राणा गुरजीत सिंह को मंत्री बनाए जाने के खिलाफ सुखपाल सिंह खैहरा व कुछ अन्य विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है।

बलबीर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आँखों में आँसू लिए हुए कहा, ”कोरोना म​हामारी में मैंने दिन रात काम किया, मैं आज एक ही बात पूछना चाहता हूँ हाईकमान से कि मेरा कसूर क्या था जिस वजह से मुझे मंत्रिमंडल से बाहर किया गया।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह यही नहीं रुके उन्होंने कहा कि हाईकमान की तरफ से जो फैसले लिए गए हैं, उनको हम स्वीकार करते हैं। जिस दिन वोट डालने को कहा था, मैंने कहा था कि मेरा वोट सोनिया गाँधी को जाएगा। मैं सोनिया गाँधी का सिपाही हूँ, मुझे बस पार्टी हाईकमान जवाब दे कि मुझे बाहर क्यों किया गया।

उन्होंने कहा कि फाँसी देते समय एक बार जज भी अंतिम इच्छा पूछ लेते हैं। पार्टी उन्हें एक बार कह देती कि उन्हें मंत्री नहीं बनाया जा रहा है तो उन्हें दुख न होता, लेकिन उन्हें जलील किया गया। दूसरी तरफ खैहरा की अगुवाई में नवतेज सिंह चीमा, जूनियर अवतार हेनरी व कुछ अन्य विधायक कॉन्ग्रेस चीफ नवजोत सिंह सिद्धू से मिलने के लिए पहुँचे। सुखपाल खैहरा का कहना है कि दोआबा से किसी अनुसूचित जाति के विधायक को कैबिनेट में लेना चाहिए, क्योंकि तीनों ही सरदार है।

गौरतलब है कि चरणजीत सिंह चन्नी के मंत्रिमंडल के विस्तार से कुछ घंटे पहले रविवार (26 सितंबर, 2021) को कॉन्ग्रेस नेताओं के एक समूह ने ‘दागी’ पूर्व मंत्री राणा गुरजीत सिंह का नाम कैबिनेट में शामिल किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की थी। जबकि पंजाब कैबिनेट विस्तार से ठीक पहले मंत्री पद के बड़े दावेदार कुलजीत नागरा ने फेसबुक पर लाइव होकर अपनी दावेदारी छोड़ दी थी। छह बार विधायक रहे ब्रह्म मोहिंद्रा ने सबसे पहले मंत्री पद की शपथ ली। ब्रह्म मोहिंद्रा कैप्टन सरकार में भी मंत्री रहे।

यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार, गन्ना किसानों को CM योगी का बड़ा तोहफा: जानिए कौन हैं योगी सरकार के 7 नए चेहरे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल में विस्तार किया है। साथ ही गन्ना किसानों के लिए भी खुशखबरी आई है। 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव भी होने हैं, ऐसे में इस मंत्रिमंडल विस्तार के बड़े मायने हैं। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल गुजरात गई हुई थीं। उनके लखनऊ लौटने के बाद इसकी घोषणा की गई। कुल 7 मंत्रियों ने शपथ ली है, जिसमें 6 राज्यमंत्री और एक कैबिनेट मंत्री शामिल हैं।

शपथग्रहण के दौरान दोनों उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा उपस्थित रहे। यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में जिन मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें ये नाम शामिल हैं – जितिन प्रसाद (शहाजजहाँपुर), संगीता बलवंत बिंद (ग़ाज़ीपुर), धर्मवीर प्रजापति (आगरा), पलटूराम (बलरामपुर), छत्रपाल गंगवार (बरेली), दिनेश खटिक (मेरठ) और संजय गौड़ (सोनभद्र)। राजभवन में इन्हें शपथ दिलाई गई।

iiधर किसानों के लिए भी यूपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। गन्ने का समर्थन मूल्य ₹325 से अब ₹350 कर दिया गया है। सीएम योगी ने इस दौरान कहा, “मुजफ्फरनगर दंगे में मरने वाला अगर कोई था तो किसान था। किसानों के बेटे थे। हमारी सरकार में कोई दंगा नहीं हुआ। अगर किसी ने दंगा करने की कोशिश की तो उसकी 7 पीढ़ियाँ भरते-भरते खप जाएँगी। बिजली बिल के बकाए राशि पर कोई ब्याज़ नहीं लगेगा।”

उन्होंने लखनऊ में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए आगे कहा, “इसके लिए (बिजली बिल पर ब्याज माफी) कमेटी गठित कर ली गई है। आज प्रदेश में अवैध स्लॉटर हाउस बंद कर दिए गए हैं। 2017 के पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोगों के गाय-भैंस गायब हो जाते थे। चोरी कर लिए जाते हैं आज स्थिति बदल चुकी है। 2007 से 2017 तक गन्ना मूल्य मूल्य का भुगतान नहीं हुआ। पिछले 4 वर्षों में हमने सबसे ज्यादा भुगतान किया।

प्रशांत किशोर ममता बनर्जी के भवानीपुर सीट से बने मतदाता, राज्य सभा की अटकलों के बीच वोटर लिस्ट जारी कर भाजपा ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में आगामी गुरुवार (30 सितंबर 2021) को भवानीपुर में वोटिंग होने जा रही है। उपचुनाव से ठीक पहले रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर सीट से अपना मतदाता के रूप में नामांकन करा लिया है।

चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार प्रशांत किशोर 159 विधानसभा सीट भवानीपुर के मतदाता हैं। भाजपा ने सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) पर आगामी चुनाव जीतने के लिए प्रशांत किशोर जैसे ‘बोहिरागातो’ यानी ‘बाहरी लोगों’ पर भरोसा करने के लिए तंज कसा है।

भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के मीडिया प्रभारी सप्तर्षि चौधरी ने किशोर का मतदाता पंजीकरण ट्विटर पर साझा किया है। चौधरी ने लिखा, ”आखिरकार, प्रशांत किशोर भवानीपुर में एक पंजीकृत मतदाता हैं। क्या बंगाल की बेटी बाहरी लोगों का वोट चाहती है? राज्य के लोग जानना चाहते हैं।”

साभार: ट्विटर

कथित तौर पर किशोर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बनर्जी के एड्रेस को अपना ‘केयर ऑफ’ पता दिया है। दरअसल, उन्हें कोरोना म​हामारी के कारण लगे लॉकडाउन के दौरान अभिषेक बनर्जी ने अपने यहाँ स्थान दिया था। वह पहले बिहार के सासाराम जिले से मतदाता के रूप में पंजीकृत थे, जो उनका पैतृक गाँव है।

ममता बनर्जी की ‘बाहरी बनाम बंगाली’ बयानबाजी

किशोर भवानीपुर से मतदाता के रूप में नामांकन करा कर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं, क्योंकि ममता बनर्जी ने राज्य के चुनावों के लिए ‘बाहरी लोगों’ के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया था। बीजेपी उम्मीदवारों और नेताओं को ‘दूसरे राज्य के गुंडे’ बताते हुए बनर्जी ने अपनी चुनावी रैली में कहा था, “यदि आप बीजेपी को वोट देते हैं, तो वे आपको राज्य से बाहर निकाल देंगे।” बनर्जी ने आरोप लगाया था, “अन्य राज्य के गुंडे यहाँ आएँगे और बंगाल पर कब्जा कर लेंगे। वो लोग यहाँ की संस्कृति और पहचान को भी नष्ट कर देंगे।”

राज्यसभा भेजे जाएँगे प्रशांत किशोर?

मीडिया में कई रिपोर्टें सामने आई थीं, जिसमें दावा किया गया था कि टीएमसी की योजना चुनावी रणनीतिकार को राज्यसभा भेजने की है। हालाँकि, इसको लेकर टीएमसी नेता सौगत रॉय के हवाले से कहा गया है कि अगर कोई राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहता है तो उसका राज्य का मतदाता बनना जरूरी है।

उन्होंने कहा, “मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं दिख रहा है। वह एक भारतीय नागरिक है और किसी भी राज्य का मतदाता बन सकते हैं। दूसरा, अगर कोई राज्यसभा चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे उस राज्य का मतदाता होना चाहिए। मैं उसकी योजनाओं को नहीं जानता। वह एक घर में रह रहे हैं और इसलिए वे मतदाता बने हैं।”

‘अंग्रेजी-अरबी आती हो, गैर-मुस्लिमों में कर सके इस्लाम का प्रचार’ – जाकिर नाइक खोज रहे लड़की, बेटे के लिए चाहिए बीवी

इस्लामी मुबल्लिग़ ज़ाकिर और भगोड़ा नाइक को अपने बेटे फरीक के लिए बीवी की तलाश है। उसने फ़ेसबुक के जरिए बताया है कि कौन लड़कियाँ इसके लिए आवेदन कर सकती हैं। लड़की की योग्यताएँ क्या होनी चाहिए और उसे किन-किन चीजों का ज्ञान होना चाहिए, ये सब जाकिर नाईक के इस फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है। उसका बेटा फरीक भी अक्सर यूट्यूब के जरिए अपने अब्बा की तरह ही इस्लामी तालीम देता है।

उसने गुरुवार (23 सितंबर, 2021) को शेयर किए गए एक फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा, “मैं अपने बेटे फरीक के लिए एक बीवी की तलाश कर रहा हूँ। वो अच्छे चरित्र वाली एक मजहबी मुस्लिम लड़की होनी चाहिए, ताकि मेरा बेटा और उसकी बीवी – दोनों एक दूसरे की मजबूती और पथ-प्रदर्शन का स्रोत बनें। अगर आप उस लड़की (जो आपको लगता है कि इसकी योग्य है) के पिता या रिश्तेदार हैं, तब आप इन सूचनाओं के साथ हमें प्रतिक्रिया दें।”

जाकिर नाईक के अनुसार, लड़की में निम्नलिखित ‘गुण’ होने चाहिए:

  • वो कुरान की शिक्षा के अनुसार इस्लाम का अनुसरण कर रही हों। साथ ही ‘सहीह हदीथ’ की शिक्षा के अनुसार चलती हो और ‘फारिद’ को पूरा करती हो।
  • हराम गतिविधियों से दूर रहती हो।
  • वो सुन्नाह के हिसाब से मुसतहब (पुण्यकारी कार्य) करती हो।
  • उसका अखलाक (चरित्र) सही हो। विनम्र, दयालु, नेक और मजहबी हो।
  • ‘दावा’ और इस्लामी तालीम के प्रचार-प्रसार को लेकर सक्रिय हो।
  • अपने शौहर की ‘दावा’ गतिविधियों को बढ़ावा दे और उसका समर्थन करे।
  • बिना भोग-विलास के जीवन जी सकती हो। इनशाल्लाह, मेरा बेटा और बहू, दोनों ही एक सुविधाजनक जीवन व्यतीत करेंगे, लेकिन जब परिस्थिति की माँग हो तो वो अल्लाह के लिए सब त्याग देने के लिए तैयार हो।
  • अंग्रेजी भाषा में निपुण हो।
  • मलेशिया में बसने के लिए तैयार हो।

इसके अलावा जाकिर नाईक ने ये भी बताया है कि उस लड़की में क्या-क्या योग्यताएँ होनी चाहिए, जिससे उसके बेटे का निकाह होगा:

  • क्लासिक अरबी (कुरान वाली) में निपुण हो।
  • नॉन-मुस्लिम और मुस्लिमों के बीच इस्लाम के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हो।
  • इस्लामी अध्ययन के किसी भी क्षेत्र में स्नातक की डिग्री हासिल हो।
  • कुरान की अध्येता हो।
  • किसी इस्लामी संगठन के साथ सक्रिय रूप से जुड़ी हो।
  • इस्लाम के अंग्रेजी बोलने वाले फकीरों को देखती-सुनती हो।

जाकिर नाईक ने कहा है कि जो परिवार इच्छुक है, वो लड़की की सीवी भेज सकता है। साथ ही उसमें लिखन है कि इन ‘गुणों’ में से कौन-कौन से उस लड़की में विद्यमान हैं। एक अन्य तस्वीर शेयर कर के उसने अपने बेटे का विवरण भी दिया है। उसकी हाइट और उम्र से लेकर उसकी शिक्षा-दीक्षा के बारे में भी सब कुछ बताया है। इसमें उसके अम्मी-अब्बू के बारे में भी सारे विवरण हैं। उसकी दोनों बहनों के बारे में भी डिटेल्स दिए गए हैं।

ज़ाकिर नाइक ने फेसबुक पर ये तस्वीर डाल कर बताया कि उसकी बहू में कौन-कौन से ‘गुण’ होने चाहिए

जाकिर नाईक का बेटा फरीक भी अपने अब्बा की तरह अजीबोगरीब इस्लामी शिक्षाएँ देता रहता है। उसने यहाँ तक दावा कर दिया था कि महिलाओं को काम करने की जरूरत ही नहीं है। उसने कहा था कि महिलाओं को इस्लाम का कोई भी नियम तोड़े बिना ही जॉब करना चाहिए और हिजाब हमेशा पहनना चाहिए। उसने कहा था कि महिलाओं की पूरी बॉडी कवर में होनी चाहिए और हाथों व आँखों के अलावा कुछ नहीं दिखना चाहिए, साथ ही टाइट कपड़े नहीं होने चाहिए और ऐसे भी नहीं होने चाहिए जिससे पुरुषों में आकर्षण की फीलिंग आए।

ज़ाकिर नाइक ने अपने बेटे के सारे डिटेल्स भी शेयर किए

साथ ही उसने कहा था कि महिलाओं को ‘हराम’ जॉब्स नहीं करने चाहिए, जैसे शराब सर्व करना, या फिर डांसिंग, सिंगिंग या अभिनय करना, क्योंकि इन जॉब्स में वो हिजाब नहीं पहन पाएँगी। उसने कहा था कि महिलाओं का मेन फोकस ये रहना चाहिए कि एक अच्छी पत्नी के रूप में वो क्या कर सकती हैं, या बच्चों को लेकर। उसने महिलाओं के लिए शिक्षक, काउंसलिंग व इस्लामी शिक्षा देने को अच्छा जॉब बताया था।

अफगानिस्तान से भाग US पहुँचा… रिफ्यूजी कैंप में ही 3 नाबालिगों से जबरन यौन संबंध, बीवी का गला घोंट मारने की कोशिश

अमेरिका में फोर्ट मैक्कॉय में रहने वाले दो अफगान शरणार्थियों पर बीवी के साथ मारपीट और बाल यौन अपराधों सहित कई चौंकाने वाले अपराधों का आरोप लगाया गया है। बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद हजारों लोग देश छोड़ कर भाग चुके हैं और अन्य देशों में रिफ्यूजी की तरह रह रहे हैं।

इसी क्रम में अमेरिका लाए गए अफगानी रिफ्यूजी को विस्कॉन्सिन में फोर्ट मैक्कॉय में सैन्य बेस पर रखा गया है। जानकारी के मुताबिक इन दोनों आरोपित अफगानी रिफ्यूजी ने यहीं पर इस अपराध को अंजाम दिया है। यह अफगानी रिफ्यूजी जो बायडेन प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान से निकाल कर लाए गए लगभग 13000 शरणार्थियों में शामिल हैं।

न्याय विभाग ने जारी एक बयान में कहा कि 20 वर्षीय बहरुल्लाह नूरी तीन नाबालिग के साथ यौन संबंध में शामिल था। इसमें से एक के साथ उसने बल का भी प्रयोग किया। बयान में कहा गया कि पीड़ितों की उम्र 16 वर्ष से भी कम है और आरोपित से वह कम से कम 4 साल छोटा है। नूरी ने तीन अलग-अलग मौकों पर पीड़ितों में से एक के गुप्तांग (genitalia) को छुआ। आरोपित ने इन यौन हमलों में से एक को बैरक में अंजाम दिया जबकि अन्य दो बाथरूम में किए।

बयान में आगे कहा गया कि एक अन्य अफगान शरणार्थी पर बीवी के साथ मारपीट करने का आरोप है। इसकी पहचान 32 वर्षीय मोहम्मद हारून इमाद के रूप में की गई है। इस पर आरोप है कि इसने अपनी बीवी का गला घोंटकर मारने की कोशिश की।

पीड़िता ने जाँचकर्ताओं को बताया कि इमाद ने उसे वापस अफगानिस्तान भेजने की धमकी दी। आरोपित ने पीड़िता को यह भी कहा कि तालिबान उससे अच्छी तरह से निपटेगा और उसे बताया कि फोर्ट मैक्कॉय में आने के बाद से नौ महिलाओं को मार दिया गया है और वह दसवीं होगी।

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार इमाद की बीवी ने दावा किया कि उसके शैहर ने कई मौकों पर उसके बच्चों को भी मारा था। इसके अलावा उसने आरोप लगाते हुए कहा, “उसने (इमाद) अफगानिस्तान में मुझे कई बार इस हद तक पीटा कि मेरी दोनों आँखों की रोशनी चली गई।” एक दूसरे इंटरव्यू में, इमाद की बीवी ने आरोप लगाया कि उसके शौहर ने उसे मौखिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के अलावा उसके साथ बलात्कार भी किया था।

रिपोर्ट के मुताबिक बल प्रयोग के आरोपों में दोषी पाए जाने पर नूरी को कम से कम 30 साल की जेल और अधिकतम उम्रकैद की सजा हो सकती है। वहीं इमाद को आरोप का दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है।

देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने वाले मुनव्वर फारुकी का सूरत में होने वाला शो रद्द: बजरंग दल की चेतावनी पर आयोजकों ने पीछे खींचे कदम

अपनी कॉमेडी के जरिए हिंदू भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मुनव्वर फारुकी के गुजरात की सूरत में होने वाले शो को कैंसिल कर दिया गया है। कार्यक्रम की आयोजक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी 2जोकर्स ने इससे अपना हाथ पीछे खींच लिया है। दरअसल, हिंदू संगठनों बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने मुनव्वर फारूकी के इस शो का कड़ा विरोध किया था।

बजरंग दल के राहुल शर्मा ने पुष्टि की है कि सूरत में शो रद्द कर दिया गया है, क्योंकि पार्थ ब्रह्मभट्ट द्वारा संचालित इवेंट मैनेजमेंट कंपनी शो से बाहर हो गई है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मभट्ट शो को डीलिस्ट कराने के लिए टिकटिंग प्लेटफॉर्म Bookmyshow के साथ बातचीत कर रहे हैं, क्योंकि ‘कॉमेडी’ शो अब आयोजित नहीं किया जाएगा।

इससे पहले पार्थ ब्रह्मभट्ट ने शो को रद्द करने से इनकार कर दिया था और बजरंग दल से कहा था कि अगर वो इस शो को रद्द करवाना चाहते हैं तो कानूनी तरीके से आएँ ब्रह्मभट्ट ने यह भी कहा था कि फारूकी को एक कॉमेडी शो के दौरान हिंदू विरोधी चुटकुले बनाने के आरोपों पर उसे ‘क्लीन चिट’ मिली थी और इसलिए वह (ब्रह्मभट्ट) शो के आयोजन से पीछे नहीं हटेंगे। हालाँकि, ऐसा लगता है कि जब हिंदू संगठनों ने जोर देकर कहा कि वे खुद इस शो का टिकट लेंगे और दर्शकों के सामने बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करके अपना ‘शो’ करेंगे, तो उसके बाद ब्रह्मभट्ट ने इसे कैंसिल करने का फैसला किया।

हालाँकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वडोदरा और अहमदाबाद में शो हमेशा की तरह चलेंगे या उन्हें भी रद्द कर दिया जाएगा। ऑपइंडिया ने पार्थ ब्रह्मभट्ट से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। बहरहाल, रिपोर्ट के लिखे जाने तक तो Bookmyshow ने अभी तक आगामी शो को बंद नहीं किया है।

पिछले हफ्ते सूरत में बजरंग दल के सदस्यों ने शहर में कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी का शो आयोजित करने वाले आयोजकों को चेतावनी जारी की थी। उसमें ये कहा गया था कि फारूकी की कुछ ‘कॉमेडी क्लिप’ 2002 के गोधरा दंगों के हिंदू पीड़ितों का कथित रूप से अपमान कर रही हैं। उसने गुजरात नरसंहार में RSS की भागीदारी और कॉमेडी के नाम पर हिंदू देवताओं का मजाक उड़ाने की साजिश के सिद्धांतों को भी हवा दी थी।

2002 गोधरा कांड पर मुनव्वर फारूकी और अमित शाह

मार्च 2020 में YouTube पर अपलोड किए गए एक वीडियो में मुनव्वर फारूकी ने 2002 के गोधरा नरसंहार का मज़ाक उड़ाया, जहाँ अयोध्या से लौट रहे 58 हिंदुओं को मुस्लिम भीड़ ने जिंदा जला दिया था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई क्लिप में उसे विवादित बयान देते सुना जा सकता है। उसपर अपने ‘कॉमेडी’ शो के जरिए हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का भी आरोप लगाया गया है।

बांदीपोरा में पिछले साल भाजपा नेता और उनके परिवार की हत्या करने वाले आतंकियों का सुरक्षाबलों ने किया खात्मा, 2 आतंकी ढेर

जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 2 आतंकियों को मार गिराया है। कश्मीर पुलिस ने रविवार (26 सितंबर, 2021) को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों ने उस आतंकवादी को भी मार गिराया है, जिसने पिछले साल जुलाई में भाजपा नेता के परिवार के तीन सदस्यों को गोली मार दी थी। इस ऑपरेशन में सेना की 14 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान शामिल हुए हैं। ऑपरेशन के बाद इलाके में बड़ी संख्या में जवानों को तैनात किया गया है।

बांदीपोरा पिछले कई वर्षों से अपेक्षाकृत शांत रहा है। ऐसे में परिवार के तीनों लोगों की हत्या से सभी को बड़ा झटका लगा ​था। इससे पहले बारामूला में 17 अगस्त, 2020 को शुरू हुए मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकवादियों को ढेर किया था। इसमें लश्कर-ए-तैयबा के दो टॉप कमांडर्स सज्जाद उर्फ हैदर और उस्मान भी शामिल थे।

आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने 18 अगस्त, 2020 को बताया था कि सज्जाद हैदर बीजेपी नेताओं की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता था, जबकि विदेशी आतंकी उस्मान ने वसीम बारी, उनके पिता और भाई की हत्या की थी। इन दो आतंकियों का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। सज्जाद युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करता था और पुलिस, नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं पर हमलों में शामिल था।

गौरतलब है कि 8 जुलाई 2020 को 27 वर्षीय शेख वसीम बारी के अलावा, उनके पिता शेख बशीर अहमद और भाई शेख उमर की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हमला बांदीपोरा पुलिस स्टेशन के ठीक बाहर हुआ, जब तीनों अपनी दुकान पर थे। वसीम बारी बांदीपोरा जिले के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष भी थे। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

वसीम बारी की हत्या के बाद आतंकियों की तरफ से फरमान जारी किया गया था। जिसमें आतंकियों ने बीजेपी नेताओं को इस्तीफा देने के लिए कहा था। यह आतंकियों का खौफ ही था कि तब से अब तक करीब एक दर्जन बीजेपी नेता पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं बीजेपी से जुड़े कई लोगों की हत्या कर दी गई है।

‘चर्च में बिना अंडरवियर के आएँ महिलाएँ… वरना ईसा मसीह शरीर में नहीं कर पाएँगे प्रवेश’- पादरी का फरमान: Fact Check

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि केन्या के पादरी ने चर्च में आने वाली महिलाओं को आदेश दिया है कि वो किसी भी प्रकार का अंडरगारमेंट पहनकर न आएँ। अगर वह यह आदेश नहीं मानेंगी तो जीजस नाराज हो जाएँगे जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

इस वायरल वीडियो को देखने के बाद हमने भी इस खबर को कवर करने की सोची। इस खबर के बारे में अधिक जानकारी के लिए हमने गूगल का सहारा लिया। मगर यहाँ पर हमें जो सोर्स मिला, उसे देख कर हमने खबर नहीं, फैक्ट चेक करने का फैसला किया।

जानिए ऑपइंडिया की पड़ताल में क्या आया सामने 

दरअसल, पड़ताल करने पर पता चला कि यह खबर तो सही है लेकिन ऐसा अभी नहीं हुआ बल्कि यह 7 साल पुरानी घटना है। 2-4 सिंपल कीवर्ड से 2014 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई, लेकिन सोशल मीडिया पर बिना खबर की सच्चाई जाने इस खबर को खूब शेयर किया जा रहा है।

सिंपल कीवर्ड से 2014 की खबर गूगल सर्च के पहले पन्ने पर ही मिल गई 

आखिर खबर है क्या?

ये पूरा मामला केन्या के नैरोबी स्थित Lord’s Propeller Redemption नामक चर्च का है। जहाँ के पादरी रेवरेंड नजोही ने चर्च आने वाली महिलाओं के लिए एक आदेश जारी किया जिसके अनुसार, चर्च में महिलाएँ किसी भी प्रकार का अंडरगारमेंट पहनकर ना प्रवेश करें।

रिपोर्ट के अनुसार, चर्च के फादर नजोही ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि चर्च में जब महिलाएँ अंडरगारमेंट पहनकर आती हैं तो इससे गॉड जीसस उनके शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते जिससे उनका चर्च में आना अधूरा रह जाता है। फादर रेवरेंड नजोही के अनुसार, महिलाएँ तभी चर्च में आने का पूरा लाभ उठा पाएँगी जब वह अंडरवियर पहनकर आना बंद कर देंगी। क्योंकि यह गॉड जीजस से मिलने में बाधा उत्पन्न करता है। मगर पादरी ने पुरुषों के अंडरगारमेंट्स पर कुछ नहीं कहा।

पादरी ने तर्क दिया कि चर्च जाते समय लोगों को मन और शरीर से पूरी तरह फ्री होना चाहिए। उनके मुताबिक इस काम में अंडरगारमेंट्स बाधा पहुँचाते हैं। सिर्फ यही नहीं बल्कि, फादर नजोही ने चर्च आने वाली महिलाओं को यह कहकर डराया भी कि अगर वह यह आदेश नहीं मानेंगी तो गॉड नाराज हो जाएँगे जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा।

इतना ही नहीं, पादरी ने महिलाओं से कहा कि चर्च में आने से पहले उन्हें अपनी बेटियों को चेक करना होगा, ताकि वह अंदरूनी कपड़े पहनकर न आ सकें। आपको जानकर हैरानी होगी कि कई सारी महिलाएँ जो चर्च नियमित रूप से जाया करती थी, वह पाखंडी पादरी के बहकावे में आ गईं और उन्होंने पादरी के आदेश का पालन करते हुए चर्च बिना अंडरगारमेंट पहने ही जाना शुरू कर दिया।  

इससे साबित होता है कि यह खबर सही है लेकिन अभी ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया है। अभी 7 साल पुरानी खबर फिर से वायरल की जा रही है।