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देश छोड़ भाग सकते हैं अनिल देशमुख, ED का लुकआउट नोटिस: महाराष्ट्र के थे गृहमंत्री, वसूली का टारगेट देने का है आरोप

कुछ महीने पहले तक राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के नेता अनिल देशमुख महाराष्ट्र के गृहमंत्री हुआ करते थे। पुलिसकर्मियों को वसूली का टारगेट देने का आरोप लगने के बाद उन्हें उद्धव ठाकरे की सरकार से इस्तीफा देना पड़ा था। अब मीडिया रिपोर्टों में उनके देश छोड़ भागने की आशंका जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कई समन की अनदेखी कर चुके देशमुख के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लुकआउट नोटिस जारी किया है।

ईडी को आशंका है कि देशमुख देश छोड़कर भाग सकते हैं। दरअसल, इस तरह के नोटिस एक साल के लिए या जारी करने वाली एजेंसी द्वारा उन्हें वापस लेने तक वैध होते हैं। ईडी की तरफ से देशमुख को अब तक पाँच समन भेजा गया है, लेकिन उन्होंने इन सभी को नजरअंदाज कर दिया। ईडी का कहना है कि देशमुख को मुंबई में विभिन्न ऑर्केस्ट्रा और बार मालिकों से 4 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध रिश्वत मिली थी और इसे उन्होंने श्री साईं शिक्षण संस्था नामक एक संगठन के माध्यम से कानूनी धन के रूप में दिखाने की कोशिश की थी।

इससे पहले केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने पूर्व मंत्री के खिलाफ जाँच को प्रभावित करने की कोशिश करने के आरोप में देशमुख के वकील आनंद डागा को गिरफ्तार किया था। कहा जाता है कि सीबीआई के एक अधिकारी ने रिश्वत में आईफोन 12 प्रो लेकर देशमुख को क्लीनचिट देने वाली एक गोपनीय रिपोर्ट को उनके वकील से साझा कर दिया था।

इसी सिलसिले में दिल्ली की एक अदालत ने 2 सितंबर को डागा और आरोपी सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी को दो दिन की सीबीआई हिरासत में भेजा था। सीबीआई द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा गया है, “यह विश्वसनीय रूप से पता चला है कि जाँच और जाँच से संबंधित गोपनीय दस्तावेजों का अनधिकृत व्यक्तियों के सामने खुलासा किया। सब-इंस्पेक्टर अभिषेक तिवारी पड़ताल के दौरान नागपुर के एक वकील आनंद दिलीप डागा के संपर्क में आए और तब से लगातार उनके संपर्क में हैं।”

जाँच के दौरान सीबीआई ने पाया कि तिवारी 28 जून को जाँच के सिलसिले में पुणे गए थे। प्राथमिकी में कहा गया है, “पता चला है कि वकील आनंद डागा ने अभिषेक तिवारी से मुलाकात की और जांँच से संबंधित विवरण उपलपब्ध कराने के बदले में उन्हें एक आईफोन 12 प्रो दिया। यह भी पता चला है कि उन्होंने नियमित अंतराल पर डागा से अवैध परितोषण लिया था।”

सीबीआई ने आरोप लगाया कि तिवारी ने व्हाट्सएप के जरिए मामले से संबंधित दस्तावेजों को डागा को भेजा। लीक हुए दस्तावेजों को विभिन्न समाचार संगठनों को भेजा गया था। हालाँकि दस्तावेजों में देशमुख को क्लीनचिट का सुझाव दिया गया था, लेकिन पूर्व मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जब दस्तावेज़ प्रेस में लीक हुए थे तो इसकी प्रामाणिकता पर कई सवाल उठाए गए थे। सीबीआई ने देशमुख को क्लीनचिट देने से भी इनकार किया।

इससे पहले देशमुख ने दावा किया था कि वह कानूनी उपाय खत्म होने के बाद ही ईडी के सामने पेश होंगे। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले की सुनवाई जल्द की जाएगी। हालाँकि, बाद में बताया गया कि शीर्ष अदालत ने पूर्व मंत्री को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है, इसके बाद वह प्राथमिकी रद्द करने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट चले गए।

ईडी को दिए जवाब में देशमुख ने दावा किया कि उनके खिलाफ प्राथमिकी अनुचित थी। पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा पूर्व मंत्री पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाने के बाद वह सीबीआई और ईडी की जाँच के दायरे में आए। हालाँकि देशमुख ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया था।

‘RSS की तालिबान से तुलना स्वीकार्य नहीं, यह हिंदू संस्कृति का अपमान’: जावेद अख्तर को शिवसेना ने दिया करारा जवाब

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की तुलना तालिबान से करने पर शिवसेना ने उन पर हमला बोला है। शिवसेना ने सोमवार (6 सितंबर) को जावेद अख्तर की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की तुलना ‘हिंदू संस्कृति के लिए अपमानजनक’ है। अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने इस तरह की तुलना करने वालों से ‘अपने विचारों पर पुन: विचार करने’ को कहा।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में जावेद अख्तर पर बसरते हुए कहा, ”इन दिनों कुछ लोग किसी की तुलना तालिबान से कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे समाज और मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पाकिस्तान और चीन, जो लोकतांत्रिक देश नहीं हैं, वो भी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इन दोनों देशों में मानवाधिकारों का कोई स्थान नहीं है। हालाँकि, हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं जहाँ एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है। इसलिए, तालिबान से आरएसएस की तुलना करना गलत है। भारत हर तरह से बेहद सहिष्णु है।”

संपादकीय में आगे कहा गया है कि आरएसएस और विहिप जैसे संगठनों के लिए हिंदुत्व एक ‘संस्कृति’ है। इसमें कहा गया है, ”आरएसएस और विहिप चाहते हैं कि हिंदुओं के अधिकारों का दमन न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी महिलाओं के अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। वहीं, अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति बेहद भयावह है। लोग दहशत में हैं। तालिबानियों से डर कर अपने ही देश से भाग गए और वहाँ महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है।”

सामना ने अपने संपादकीय में अख्तर को ऐसे व्यक्ति के रूप में चिन्हित किया है, जो अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज के चरमपंथी विचारों पर भी हमला किया है। इसमें आगे लिखा गया है, ”संघ की तुलना तालिबान से स्वीकार्य नहीं है। हमारे देश में ज्यादातर लोग धर्मनिरपेक्ष हैं और तालिबान की विचारधारा को स्वीकार नहीं करेंगे। भारत में हिंदू बहुसंख्यक है, इसके बावजूद यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है।”

बता दें कि 3 सितंबर को एनडीटीवी के एक शो में अख्तर ने कहा था, “आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करने वालों की मानसिकता भी तालिबान जैसी ही है।” उन्होंने कहा, ”जिस तरह तालिबान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा है। उसी तरह कुछ लोग हमारे सामने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पेश करते हैं।” जावेद अख्तर ने आगे कहा, “इन लोगों की मानसिकता एक जैसी है। तालिबान हिंसक हैं। जंगली हैं। उसी तरह आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन करने वाले लोगों की मानसिकता एक जैसी है।”

तिहाड़ से सुकेश देता था इशारे, बाहर नाचती थी ‘मद्रास कैफे’ की हिरोइन: फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर की बीवी से ₹200 करोड़ की डिमांड

दिल्ली के तिहाड़ जेल में रहकर वसूली रैकेट चलाने वाले सुकेश चंद्रशेखर को लेकर रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं। इसी कड़ी में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक्ट्रेस लीना मारिया पॉल को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्टों में लीना को सुकेश का गर्लफ्रेंड बताया गया है। वसूली रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद से ही वह पुलिस की रडार पर थीं।

लीना पर इस रैकेट को चलाने में सुकेश की मदद करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, मामले में पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद उन्होंने कार्रवाई की है। इस मामले में लीना से घंटों पूछताछ भी हुई। 

बता दें कि लीना के बॉयफ्रेंड सुकेश पर तिहाड़ में रहते हुए कई लोगों से करोड़ों रुपए की ठगी करने का आरोप है जबकि जाँच एजेंसियों ने जबरन वसूली मामले में एक्ट्रेस की सक्रिय संलिप्तता पाई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की पत्नी अदिति सिंह को ठगने में कथित तौर पर सुकेश की मदद की थी।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हैं कि अदिति सिंह को फर्जी नंबर से कॉल करके सुकेश ने अपने आपको कानून मंत्रालय में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी बताया था और उस वक्त लीना ने ही कॉल को ट्रांस्फर किया था। पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से पहले कई बार अभिनेत्री से पूछताछ हुई। 

जानकारी के मुताबिक, शिविंदर 2019 से पैसों की हेर-फेर मामले में जेल में बंद हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर सुकेश ने उनसे संपर्क किया और पति को छुड़ाने के बदले 200 करोड़ रुपए की माँग करते हुए बताया कि पैसे किस तरह भिजवाने हैं। अदिति पति को जेल से छुड़ाने के लिए मान गईं और बताई जगह पर रकम पहुँचा दी। कुछ दिन बाद जब शिविंदर बाहर नहीं आए तो इस मामले में एफआईआर हुई और रैकेट का खुलासा हुआ।

उल्लेखनीय है कि ये पहली बार नहीं है जब लीना को पुलिस ने गिरफ्तार किया। इससे पहले लीना ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर साल 2013 में बैंक में फ्रॉड किया था। जिसके बाद दोनों को साल 2015 में गिरफ्तार किया गया था। मालूम हो कि 200 करोड़ वसूली रैकेट का खुलासा होने के बाद ईडी ने सुकेश के चेन्नई स्थिति बंगले में छापेमारी की थी। जहाँ से उन्होंने 16 बड़ी गाड़ियाँ सीज की थीं। इसके अलावा घर में इंटरनेशनल ब्रांड्स के महंगे कपड़े भी घर में मिले थे। सबकी कीमत करोड़ों में है।

पंजशीर में जंग अभी जारी है: गवर्नर हाउस में तालिबानी-झंडा भी लहराया, पर NRF ने घाटी फतह के दावों को नकारा

पंजशीर घाटी में तालिबान और नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट (NRF) के बीच जारी जंग को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आ रहे हैं। तालिबान का दावा है कि उसने घाटी पर पूरी तरह अधिकार कर लिया है। वहीं एनआरएफ ने उसकी जीत के दावों को नकारते हुए कहा है कि जंग अभी चल रही है।

NRF ने तालिबान की जीत का दावा खारिज करते हुए कहा है कि पंजशीर घाटी के महत्वपूर्ण रणनीतिक मोर्चों पर उसके लड़ाके मौजूद हैं। इस बीच पंजशीर के गर्वनर हाउस में तोड़फोड़ किए जाने की खबरें भी हैं। इससे पहले भी तालिबान ने पंजशीर घाटी को फतह कर लेने का दावा किया था, जिसे पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह और नॉर्दन एलायंस के नायक अहमद मसूद ने खारिज कर दिया था।

पंजशीर गवर्नर के कार्यालय पर तालिबानी झंडा फहराने की तस्वीर सामने आई है। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि अफगानिस्तान के पंजशीर प्रांत को भी पूरी तरह जीत लिया गया है।

असवाका न्यूज एजेंसी की ओर से एक तस्वीर जारी हुई है। इस तस्वीर में पंजशीर गवर्नर कार्यालय के सामने तालिबान के सदस्यों खड़े दिखाई दिए हैं। तालिबान का दावा है कि उसने पंजशीर पर पूरी तरह से नियंत्रण कर लिया है। तालिबान ने कहा है, “अल्लाह की मदद से और हमारे राष्ट्र के व्यापक समर्थन के साथ, देश की पूर्ण सुरक्षा के लिए हमारे अंतिम प्रयासों का परिणाम निकल आया है और पंजशीर पूरी तरह से जीत लिया गया है। अब पंजशीर घाटी इस्लामी अमीरात के नियंत्रण में आ गया है।”

वहीं रेजिस्टेंस फोर्स ने तालिबान के दावे को खारिज करते हुए कहा कि हर रणनीतिक जगह पर उनकी मौजूदगी है। जब तक न्याय और आजादी नहीं मिल जाती है, तब तक जंग जारी रहेगी। बताया जा रहा है कि खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्‍ला सालेह गुप्त स्थान से एनआरएफ का नेतृत्व कर रहे हैं। इससे पहले उनके और अहमद मसूद के पहाड़ों में छिपने की खबर आई थी। यह बात भी सामने आई थी कि मसूद के बातचीत के प्रस्ताव को खारिज करते हुए तालिबान ने हथियार डालने या मरने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी थी।

बताया जा रहा है कि तालिबानी आतंकियों कई दिनों से चल रही घेरेबंदी के बाद रविवार रात को जोरदार हमला किया और पंजशीर के विद्रोहियों के किले को ध्‍वस्‍त कर दिया। इस तालिबानी-पाकिस्‍तानी हमले में ताजिक मूल के विद्रोही नेता अहमद मसूद को बड़ा झटका लगा है और उनके प्रवक्‍ता फहीम दश्‍ती और शीर्ष कमांडर जनरल साहिब अब्‍दुल वदूद झोर की मौत हो गई।

बताया जा रहा है कि पंजशीर की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना भी तालिबान की मदद कर रही है। खबर है कि यहाँ पाकिस्तानी से ने ड्रोन की मदद से बमबारी की है। मसूद ने ट्विटर कर इस संबंध में पाकिस्‍तान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “हमसे तालिबान नहीं लड़ रहा है, बल्कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई उसका नेतृत्व कर रहे हैं। तालिबान इतना मजबूत नहीं है कि वो हमारे साथ मुकाबला कर सके। पाकिस्तानी सेना उसका सहयोग कर रही है।” इससे पहले पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भी पंजशीर में पाकिस्तान समर्थित हमले की बात कही थी।

6 विमानों को एयरपोर्ट से उड़ने नहीं दे रहा तालिबान, अमेरिकी भी हैं सवार, बंधक बनाए जाने की आशंका: रिपोर्ट्स

बताया जा रहा है कि तालिबान ने अफगानिस्तान से उड़ान भरने को तैयार 6 विमानों को रोक रखा है। इन विमानों पर अमेरिकी समेत अन्य लोग सवार हैं। रिपोर्ट्स में आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका से अपनी बात मनवाने के लिए तालिबान इन यात्रियों को बंधक बना सकता है।

यह खबर भी आई है कि अफगानिस्तान में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद अब भी वहाँ 100 से 200 अमेरिकी फँसे हुए हैं और तालिबान की नजरों से छिपे-छिपे घूम रहे हैं। इनमें से एक कैलिफोर्निया की रहने वाली नसरिया (Nasria) भी हैं। 25 वर्षीय नसरिया किसी भी तरह बस अफगानिस्तान से निकलना चाहती हैं। उनके मुताबिक, वह जून में परिवार से मिलने आई थीं और इसके बाद उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में रहने वाले प्रेमी से शादी कर ली। अभी वह गर्भवती हैं और तालिबान से बचती घूम रही हैं।

वॉयस ऑफ अमेरिका से बात करते हुए उन्होंने कहा, “ऐसे दिन आ गए हैं कि जब मैं सोचती हूँ कि क्या मैं यही (अफगानिस्तान में) घर बनाने जा रही हूँ? या क्या मैं यहाँ रहने वाली हूँ? क्या मैं यहाँ मर जाऊँगी?” हालातों को बयान करते हुए वह कहती हैं कि अब जब अमेरिकी फौजी देश से जा चुके हैं तो तालिबानी घर-घर अमेरिकियों की तलाश कर रहे हैं और ब्लू पासपोर्ट देखने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि नसरिया की आपबीती उस वक्त सामने आई है जब टेक्सास के प्रतिनिधि माइक मैककॉल ने रविवार (सितंबर 5, 2021) को बताया कि उनका मानना ​​​​है कि तालिबान अमेरिकियों को देश छोड़ने से रोक रहा है और यूएस से डिमांड करते हुए मजार-ए-शरीफ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छह विमानों पर सवार यात्रियों को रोक दिया है। इनमें अमेरिकी भी शामिल हैं। माइक ने इन हालातों को होस्टेज सिचुएशन जैसा बताया, जहाँ तालिबान अपनी बात मनवाने के लिए लोगों को बंदी बना रहा है।

जानकारी के मुताबिक कैलिफोर्निया निवासी नसरिया भी उन सैंकड़ों लोगों में से थीं जो 31 अगस्त को अफगानिस्तान छोड़ना चाहते थी। हालाँकि तालिबान ने ऐसा नहीं होने दिया। इस बीच नसरिया के पाँव में गोली भी मारी गई। नसरिया जैसे अमेरिकियों को अफगानिस्तान से निकालने में प्रयासरत कैलिफ़ोर्निया प्रतिनिधि डैरिल इस्सा ने बताया कि कैसे एयरपोर्ट पर नसरिया के पेट पर लात मारी गई। नसरिया बताती हैं कि तालिबानियों ने एयरपोर्ट एंट्रेंस को ही बंद कर दिया था ताकि कोई अंदर न जा सके। उनके मुताबिक फ्लाइट तक जाना ही बहुत मुश्किल था। लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़-चढ़ कर जा रहे थे।

वह बताती हैं कि जब फ्लाइट कैंसिल हुई तो नसरिया ने राज्य विभाग से संपर्क किया और उनको जवाब मिला कि वो एयरपोर्ट से बाहर आएँ और इंतजार करें। हालाँकि कोई नहीं आया। 12-13 घंटे वह बिन खाने-पीने के रही। वह याद करती हैं कि कैसे अमेरिकी फौजी उनके इंतजार में थे, लेकिन तालिबानियों ने उनका रास्ता ब्लॉक कर दिया। जब उन्होंने खुद आगे जाने की कोशिश की तो उनके पाँव में गोली मारी गई। ये सब पहली बार हो रहा था। इससे पहले उन्होंने ऐसे दृश्य फिल्मों में देखे थे। नसरिया के पति ने भी तालिबानियों से बोला कि उनकी पत्नी को जानें दें, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

वह कहती हैं कि वो अपने पति और उनका बच्चा अपने पिता के बिन नहीं रहेगा। सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वो जल्द उन्हें निकालेंगे। लेकिन हालात देख कर उनकी उम्मीद टूटती जा रही है। वह कहती हैं, “एयरपोर्ट से जब 15 कदम की दूरी पर मुझे कहा गया कि लोग आकर ले जाएँगे और कोई नहीं आया तो मैं अब क्या उम्मीद करूँ।”

72 साल का शख्स नशे में धुत हो आधी रात गाय से कर रहा था रेप, डेयरी मालिक ने देखा तो भागा: पंजाब की घटना

पंजाब से एक घिनौना वाकया सामने आया है। नशे में धुत 72 साल का एक शख्स गाय से रेप कर रहा था। पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार घटना शनिवार (सितंबर 4, 2021) रात लुधियाना के ताजपुर रोड डेयरी कॉम्प्लेक्स में पुलिस डिवीजन नंबर 7 के पास हुई। जैसे ही गाय का मालिक मौके पर पहुँचा, आरोपित फरार हो गया।

घटना की जानकारी मिलने पर रविवार (सितंबर 5, 2021) की सुबह डेयरी परिसर में हिंदू नेता जुटे और अपराधी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे तुरंत गिरफ्तार करने की माँग की। साथ ही हिंदू नेताओं ने पुलिस को चेतावनी भी दी कि अगर आरोपित को जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे हाईवे जाम कर देंगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेयरी मालिक मुन्ना लाल ने बताया कि शनिवार की रात तकरीबन 12 बजे उनकी नींद खुली तो उन्होंने देखा कि नशे में धुत एक व्यक्ति गाय के साथ बलात्कार कर रहा था। मुन्ना लाल के पहुँचते ही वह व्यक्ति मौके से भाग गया।

रविवार की सुबह घटना की जानकारी मिलते ही शिवसेना नेता अमित अरोड़ा और ताजपुर रोड के पास स्थित शनि मंदिर के मुखिया मुकेश खुराना डेयरी परिसर पहुँचे और गाय के बलात्कारी को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग की। सूत्रों के अनुसार, अपराधी पास के इलाके में एक ट्रॉली चलाता है और उस व्यक्ति के घर पर पुलिस की छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुआ। मामले में पुलिस आगे की जाँँच कर रही है।

गौरतलब है कि गाय के साथ दुष्कर्म का ये पहला मामला नहीं है। हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में गाय के साथ घिनौनी हरकत करने का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। ई-रिक्शा चालक शोएब को एक गाय के साथ गंदा काम करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। पुलिस ने उसे 26 अगस्त 2021) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

भारत और PM मोदी का विरोध बर्दाश्त नहीं करेगा नेपाल: सरकार की दो टूक, अपने नेताओं पर भी कार्रवाई करेगी कम्युनिस्ट पार्टी

पिछले दिनों भारत में अवैध ढंग से घुस रहे एक नेपाली युवक की मौत के कारण नेपाल में कुछ कम्युनिस्ट नेता भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाने और उनके विरोध में नारेबाजी करने की घटनाओं में शामिल पाए गए। अब इसी क्रम में नेपाल के गृह मंत्रालय ने अपना बयान जारी करके ऐसे नेताओं व नागरिकों को चेतावनी दी है। वहाँ की सरकार ने ऐसी हरकतों को अपमानजनक बताते हुए कहा कि नेपाल, भारत के साथ दोस्ती रखना चाहता है और वह वहाँ ऐसी घटना नहीं बर्दाश्त करेगा।

बता दें कि ये पूरा मामला नेपाली युवक जय सिंह धामी की मौत से जुड़ा है, जो कुछ दिन पहले (जुलाई में) धारचूला के गस्कू में अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। लेकिन, उत्तराखंड के बॉर्डर जिले पिथौरागढ़ से लगती काली नदी में गिरने से उसकी मौत हो गई। अब नेपाल में विरोध करने वालों का आरोप है कि युवक की मौत के लिए एसएसबी जिम्मेदार है।

वह आरोप लगा रहे हैं कि जब जय सिंह धामी तार के सहारे नदी पार कर रहा था तो एसएसबी ने तार काट दिया था। हालाँकि एसएसबी ने इस आरोप को एक सिरे से खारिज किया है। विरोध करने वालों में सत्ता में शामिल कम्युनिस्ट पार्टी के यूथ विंग और स्टूडेंट विंग के लोग हैं।

इसी घटना के बाबत नेपाल के गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि पिछले कुछ दिनों में पड़ोसी मित्र राष्ट्र के प्रधानमंत्री की छवि खराब करने के लिए नारे लगाने, धरना प्रदर्शन और पुतले जलाने की गतिविधियाँ सामने आई हैं। मंत्रालय के बयान में किसी नेता के बयान की पहचान नहीं उजागर की गई है। लेकिन ऐसी घटनाओं को निंदनीय और शर्मनाक करार दिया गया है।

बयान में कहा गया है कि नेपाल सरकार अपने सभी मित्र देशों के साथ दोस्ती का संबंध रखना चाहती है। नेपाल सरकार किसी भी हालत में ऐसी घटनाएँ नहीं होने देगी जिससे राष्ट्रीय हित को नुकसान हो। नेपाल गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया है,

“हमारी परंपरा रही है कि हम पड़ोसी देश के साथ विवाद को आपसी बातचीत और डिप्लोमेटिक तरीके से सुलझाते रहे हैं। भविष्य में भी किसी भी विवाद के निपटारे के लिए बातचीत का ही सहारा लिया जाएगा।”

नेपाल गृह मंत्रालय ने कहा कि पड़ोसी मित्र देश के खिलाफ किसी भी एक्टिविटी को कंट्रोल करने को लिए गृह मंत्रालय कदम उठाएगा और ऐसे लोगों को सजा दी जाएगी जो इस तरह की अवैध गतिविधि करते हैं।

‘हथियार डालो या मरो’: पाकिस्तानी सेना की मदद से तालिबान ने ढाह दिया पंजशीर का किला, पहाड़ों में छिप गए हैं सालेह-मसूद?

अफगानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के काबिज होने के बाद से ही पाकिस्तान से उसे मदद मिलने की खबरें लगातार सामने आती रही है। अब तालिबान ने दावा किया है कि उसने विद्रोहियों के आखिरी किले पंजशीर पर भी अपना पूर्ण नियंत्रण कर लिया है। यह भी खबर आ रही है कि खुद को देश का कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित करने वाले अमरुल्‍ला सालेह और नेशनल रेजिस्‍टेंस फ्रंट के नायक अहमद मसूद पहाड़ों में छिप गए हैं। साथ ही बताया जा रहा है कि मसूद के बातचीत के प्रस्ताव को खारिज करते हुए तालिबान ने हथियार डालने या मरने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दी है।

कुल मिलाकर पंजशीर से आने वाली खबरें पल-पल बदल रही हैं। लेकिन इन सबसे पहले एक बड़ी बात जो निकलकर सामने आई थी वह यह है कि पंजशीर की लड़ाई में पाकिस्तानी सेना भी तालिबान की मदद कर रही है। खबर है कि यहाँ पाकिस्तानी से ने ड्रोन की मदद से बमबारी की है।

आमजन न्यूज ने पूर्व समांगन सांसद जिया अरियनजद के हवाले से कहा कि पाकिस्तानी ड्रोन ने स्मार्ट बमों का इस्तेमाल कर पंजशीर पर बमबारी की है। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ने भी ट्वीट कर हुए इसकी जानकारी दी। इस बमबारी में एनआरएफ के कुछ शीर्ष नेताओं के मारे जाने की भी खबर है।  

नॉर्दन एलायंस के नेता अहमद मसूद ने ट्वीट करते हुए लिखा है, “हमसे तालिबान नहीं लड़ रहा है, बल्कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआई उसका नेतृत्व कर रहे हैं। तालिबान हमारे साथ मुकाबला करने के लिए मजबूत नहीं हैं। पाकिस्तानी सेना उसका सहयोग कर रही है।” इससे पहले पूर्व उप-राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने भी पंजशीर में पाकिस्तान समर्थित हमले की बात कही थी।

बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रमुख ने तालिबान नेताओं से मिलने, सुरक्षा और सीमा मुद्दों पर चर्चा करने के लिए अफगानिस्तान का दौरा किया था। उनके दौरे के बाद ही पाकिस्तानी वायु सेना ने पंजशीर में बम बरसाए हैं। 

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान का शासन आने के बाद से ही पाकिस्तान के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पिछले दिनों तालिबान ने पाकिस्तान को अपना ‘दूसरा घर’ कहा। वहीं इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री शेख राशिद ने कबूला कि पाकिस्तान तालिबान का संरक्षक है।

वहीं रविवार (सितंबर 5, 2021) देर रात नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ने युद्ध विराम का प्रस्ताव दिया है। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ने प्रस्ताव देते हुए कहा कि तालिबान पंजशीर में अपने सैन्य अभियानों को रोक दे। बदले में, वह भी अपनी ओर से सैन्य कार्रवाई रोक देगा।

यह प्रस्ताव तालिबान के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे अहमद मसूद के प्रवक्ता फहीम दश्ती की मौत के बाद सामने आया था। बता दें कि फहीम के अलावा अहमद शाह मसूद के भतीजे और पूर्व प्रमुख मुजाहिदीन कमांडर जनरल साहिब अब्दुल वदूद झोर भी मारे गए हैं। नेशनल रेसिस्टेंस फ्रंट ऑफ अफगानिस्तान ने अपने फेसबुक पेज पर इन दोनों की मौत की जानकारी दी है। अफगान पत्रकार फ्रूड बेजान ने भी ट्वीट कर जानकारी दी कि पंजशीर में फहीम दश्ती मारा गया है।

पंजशीर में प्रतिरोध बलों के नेता अहमद मसूद ने रविवार को कहा कि अगर तालिबान क्षेत्र से अपनी सेना वापस लेता है तो वह शांति वार्ता के लिए तैयार हैं। अहमद मसूद ने एक बयान में कहा, “अगर तालिबान समूह पंजशीर और अंदराब में अपने सैन्य हमलों को बंद कर देता है, तो शांति बनाए रखने के लिए NRF युद्ध को तुरंत रोकने के लिए तैयार है।” रिपोर्टों के अनुसार तालिबान ने उनके इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए पंजशीर पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया है।

थाने में घुस पादरी की जूतों से पिटाई, छत्तीसगढ़ में जबरन धर्म परिवर्तन पर फिर लोगों का फूटा गुस्सा: रिपोर्ट्स

छत्तीसगढ़ में जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर एक बार फिर लोगों का गुस्सा सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ऐसे ही एक मामले में रविवार (सितंबर 5, 2021) को नाराज लोगों ने राजधानी रायपुर के एक थाने में घुसकर आरोपित पादरी की पिटाई कर दी।

घटना रायपुर के पुरानी बस्ती थाने की है। पुलिस ने पादरी हरीश साहू को भटगाँव इलाके में जबरन धर्म परिवर्तन कराने की शिकायत मिलने के बाद हिरासत में लिया था। मामले सामने आने के बाद कुछ दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े लोग भी थाने पहुँच गए। इसके बाद थाने में हंगामा हुआ और जो देखते ही देखते मारपीट में तब्दील हो गई। कथित तौर पर नाराज लोगों ने पादरी की जूतों से पिटाई कर दी।

सोशल मीडिया में इस घटना से जुड़े वीडियो भी वायरल हो रहे हैं। इसमें पादरी के साथ आए लोग और गुस्साई भीड़ के बीच नोंक-झोंक होती भी दिख रही है। पादरी पर कार्रवाई को लेकर लोगों ने थाने का घेराव कर हंगामा किया।

पुलिस के अनुसार हिन्दू कार्यकर्ताओं के समूह ने पादरी हरीश साहू पर धर्म परिवर्तन में शामिल होने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद साहू को थाने बुलाया गया था। पादरी हरीश साहू छत्तीसगढ़ क्रिश्चियन फोरम के महासचिव अंकुश बरियाकर और प्रकाश मसीह के साथ पुलिस स्टेशन पहुँचे। दक्षिणपंथी संगठन का समूह वहाँ पहले से ही मौजूद था। कार्यकर्ताओं ने स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के चेंबर के अंदर तीनों के साथ कथित तौर पर हाथापाई और गाली-गलौज की।

घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय यादव ने पुरानी बस्ती थाना प्रभारी (SHO) यदुमणि सिदर को पुलिस लाइन में अटैच कर दिया और उनकी जगह इंस्पेक्टर नितेश ठाकुर को चार्ज दिया गया है। पुलिस ने कहा कि बरियाकर ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सात लोगों के खिलाफ नामजद मामला दर्ज कर लिया है। संभव शाह, विकास मित्तल, मनीष साहू, शुभंगर द्विवेदी, संजय सिंह, अनुरोध शर्मा, शुभम अग्रवाल एवं अन्य के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। इन लोगों पर आईपीसी की धारा 147, 294, 323 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक विरोध प्रदर्शन लगभग तीन घंटे तक चला और इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने धर्मांतरण करने वालों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इतना ही नहीं, थाना परिसर में एक समुदाय के लोग जहाँ इकट्ठा होकर प्रार्थना करने लगे तो वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे।

गौरतलब है कि इससे पहले राज्य के कबीरधाम जिले के पोल्मी गाँव में जबरन धर्म परिवर्तन से आक्रोशित लोगों ने 25 वर्षीय पादरी कवलसिंह परास्ते के घर पर हमला कर दिया था। इस घटना के बाद छत्तीसगढ़ के क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने पुलिस और राज्य सरकार पर ईसाई प्रार्थना स्थलों पर हमले के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया था। पन्नालाल ने कहा था, “यह एक बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति है, जो राज्य में प्रचलित हो गई है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है। हम इस सरकार के सुस्त रवैये से बेहद आहत हैं।”

‘डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ का ख्वाब पाले वामपंथी कविता कृष्णन ने की ‘हिंदुत्व’ की तालिबान से तुलना: देखें वीडियो

वामपंथी नेता और कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने शुक्रवार (3 सितंबर 2021) को तालिबान, अमेरिका के कू क्लैक्स क्लान और हिंदुत्व की गलत और बेबुनियाद तुलना की। इसके बाद से उनकी तीखी आलोचना की जा रही है। वामपंथ समर्थक ने दावा किया कि हिंदू ही हिंदुत्व के खिलाफ लड़ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया न्यूज पर ‘जनता का मुकदमा’ शो के दौरान शो के होस्ट प्रदीप भंडारी ने इस हिंदू धर्म को बदनाम करने की साजिश का दावा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि किस तरह से मौजूदा वक्त में हिंदूफोबिया आज की गंभीर वास्तविकता बन गई है। इस संबंध में उन्होंने एक ‘एक्सक्लूसिव’ वीडियो क्लिप साझा किया था, जिसमें कविता कृष्णन ने हिंदू वर्चस्व के इर्द-गिर्द झूठे आख्यानों को फैलाकर हिंदूफोबिया को मुख्यधारा में लाने के पीछे अपने मकसद का खुलासा किया था।

वीडियो क्लिप में कविता कृष्णन यह कहते हुए सुनी जा सकती हैं, “भारत में हिंदू हिंदुत्व के खिलाफ लड़ रहे हैं, ठीक उसी तरह जैसे अफगानिस्तान में मुस्लिम तालिबान के खिलाफ लड़ रहे हैं। तालिबान से भागने वाले मुस्लिम हैं। इसी तरह हम हिंदू यहाँ हिंदुओं से लड़ रहे हैं।” हालाँकि, बाद में उन्होंने ‘हिंदुओं’ को ‘हिंदुत्व’ से बदलने के लिए अपने बयान में बदलाव किया।

कविता कृष्णन ने अमेरिका में होने वाले एक सम्मेलन के बारे में कहा, “सम्मेलन वैश्विक हिंदुत्व को खत्म करने के बारे में है। मुझे वहाँ एक वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। दुनिया तालिबान, संयुक्त राज्य अमेरिका के कू क्लक्स क्लान (श्वेत वर्चस्व) के बारे में जानती है, लेकिन हिंदू वर्चस्व की राजनीति के बारे में ज्यादा नहीं जानती। मैं स्पष्ट करना चाहती हूँ कि सम्मेलन का आयोजन करने वाले भारतीय हैं और उनमें से ज्यादातर हिंदू हैं।”

अमेरिका के ही विश्वविद्यालयों के कुछ विभागों द्वारा सह-प्रायोजित हिंदुओं और हिंदुत्व पर तीन दिवसीय सम्मेलन 11 सितंबर 2021 से आयोजित हो रहा है। इसकी वेबसाइट पर कार्यक्रम के आयोजकों “डिस्मेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व” ने 40 से अधिक शीर्ष अमेरिकी विश्वविद्यालयों के नामों को उनके प्रायोजकों और सहप्रायोजकों के रूप में सूचीबद्ध किया है।

इस विवादास्पद दुष्प्रचार कार्यक्रम से वैश्विक स्तर पर हिंदुओं के बीच आक्रोश को उत्पन्न किया है, जिसके तहत कई भारतीयों ने लेफ्ट-लिबरल्स पर हिंदुओं के नरसंहार को सही ठहराने के लिए नाजी शैली के आयोजन का आरोप लगाया है। ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ कार्यक्रम में ऑड्रे ट्रुश्के, नक्सल समर्थक आनंद पटवर्धन और नंदिनी सुंदर, स्व-घोषित वामपंथी पत्रकार नेहा दीक्षित समेत कई हिंदूफोबिक तत्वों की भागीदारी देखने को मिलेगी।

कविता ने बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश करने का किया दावा

कविता कृष्णन ने रविवार (5 सितंबर) को ट्विटर पर दावा किया कि उन्हें ‘हिंदू वर्चस्व’ के खिलाफ आवाज उठाने के लिए निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जन की बात’ एक छोटे से वीडियो क्लिप के आधार पर उन्हें ‘हिंदू विरोधी’ बताने के लिए एक शो चला रहा है।

कविता ने ट्वीट किया, “मैंने इस चैनल से कभी बात नहीं की। यह क्लिप एक फेसबुक पेज के 2 बच्चों के लंबे इंटरव्यू (साथ) की है। मैं प्रदीप भंडारी को इसे पूरा प्रसारित करने की चुनौती देती हूँ। साक्षात्कार में मैंने इस बात पर बात की कि मैं अफगानिस्तान में तालिबान का विरोध उसी प्रकार करती हूँ, जैसे मैं हिंदू वर्चस्ववादी संगठनों का विरोध करती हूँ जो भारत में महिलाओं और मानवाधिकारों पर हमला करते हैं।”

कविता कृष्णन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा वामपंथी नेता ने अपनी विचित्र कहानी को ब्रायन टायलर कोहेन का उदाहरण देते हुए सही ठहराया, जिसने ‘तालिबान के साथ टेक्सास में गर्भपात के अधिकारों पर ईसाईयों के कट्टर हमलों’ की तुलना की थी। जबकि, तथ्य यह है कि कोहेन ने ऐसी कोई उपमा दी ही नहीं थी। कविता कृष्णन ने ‘जन की बात’ के संस्थापक पर उन्हें ‘हिंदू विरोधी’ और ‘भारत विरोधी’ करार देने का भी आरोप लगाया।

वामपंथी कविता कृष्णन ने प्रदीप भंडारी को चुनौती देते हुए कहा, “मैं चाहती हूँ कि प्रदीप यह बताएँ कि उन्हें क्लिप कहाँ से मिली। उनका दावा है कि यह एक ‘एक्सक्लूसिव टेप’ है। क्या उसने दो युवाओं को झूठी पहचान के तहत मेरे घर इंटरव्यू लेने के लिए भेजा था? क्योंकि, क्लिप एक साक्षात्कार की है, जो उन लड़कों के साथ की है जन की बात के साथ नहीं।”

कविता कृष्णन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीआई-एमएल) की एक पोलित ब्यूरो सदस्य कविता कृष्णन एक अतिवादी-कार्यकर्ता हैं और भारत विरोधियों समर्थन करने के लिए एक समय में वह एक स्वतंत्र प्रदर्शनकारी बन जाती हैं। 2016 में जेएनयू के राष्ट्र विरोधी नारे लगाने की घटना के दौरान सुर्खियों में आईं कृष्णन देश में वामपंथी ‘विरोधों’ का चेहरा बन गई हैं। पिछले कुछ वर्षों में कविता कृष्णन को कई बार फेक न्यूज फैलाने के आरोप में पकड़ा गया है, हालांकि, वह बिना किसी दंड के कारण इस तरह की हरकतें लगातार कर रही हैं।

राष्ट्र-विरोधी तत्वों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के अलावा कविता कृष्णन का कट्टरपंथी इस्लामवादियों, फेक न्यूज फैलाने वालों और पाकिस्तान समर्थकों का समर्थन करने का इतिहास रहा है। पिछले साल, वह कुख्यात फेक न्यूज पेडलर मोहम्मद आसिफ खान के समर्थन में खड़े होने के लिए सामने आई थीं, जिसका साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील फेक न्यूज प्रचारित करने का इतिहास है।